Sunday, March 02, 2014

‘विदेह'१४७ म अंक ०१ फरबरी २०१४ (वर्ष ७ मास ७४ अंक १४७) PART II

पाखलो (कोंकणी उपन्यास)-  तुकाराम रामा शेट-  मैथिली अनुवाद-  डॉ. शंभु कुमार सिंह 
PART II
सुलूक कहब सुनि हमरा कनी अजगुत-सन लागल। राति भऽ गेल रहै। पड़ोसक दू-तीन गोटे हमरा लग एला। पहिने तँ ओ लोकनि हमरासँ पुछताछ केलनि आ फेर रजनीक खबरि देलनि।
जइ दिनसँ रजनीक घरबला ओकरा बापक ओइठामसँ आनने छल, ओइ दिनसँ शराब पीबि-पीबि कऽ ओकरा मारए-पीटए लागल छल। तेकरा बाद तँ नित राति ओकर घरबला रजनीसँ झगड़ा करै आ मारै। दू दिन पहिने ओ ओकरा घरसँ निकालि देने रहै आ तइ दिनसँ ओ घरक बाहरे देहरीपर रहि रहल छेली।
सुलू हमरा कोरेमे सूति गेल छेली। बहुत राति भऽ गेल रहै आ रजनी अखनि धरि आपस नै आएल छेली।
·         
रजनी पोखरिमे कूदि अपन जान दऽ देने छथि, ई गप जँ हमरा रस्तासँ अबैत काल पता लागि जएतै तँ हम निश्चये हुनका बचा लैतिऐ। कि‍यो पोखरिमे पाथर फेकने हेतै ऐ लेल पानिमे बुलबुला आबि रहल छेलै, हम यएह बुझने छेलौं। ओइ समए ओइ पोखरिमे एहेन हृदैविदारक मृत्यु नुकाएल रहै, ई हमरा पता नै छल।
रजनीक घरबला ओकरा कांदोळे गामसँ आपस अनने रहै, मुदा किछुए दिन पछाति‍ ओ फेर ओकरापर वएह आरोप लगौने रहै। रजनीकेँ मारए-पीटए लागल छेलै आ एकदिन ओकरा दागि देने रहै। ओ ओकरा जीबैतै मारि देबए चाहैत रहै। ओइदिन,
पाखलो युवती सबहक पाछू लागल छै। हमरा संबन्‍धमे ओकरा ई खबरि भेटल रहै। ओइ दिनसँ ओ रजनीकेँ देहरीक बाहरे राखए लागल रहै।
रजनी तंग आबि गेल छेली आ ओइ समए ओ सोहावतीक श्रृंगार केलक आ आत्महत्या करए चलि गेली।
ओइ पोखरिसँ हम जे कुसरीक फूल निकालने छेलौं से वास्तवमे ओ कुसरीक फूलक कोढ़ी नै अपितु रजनीक खोपामे लगौल गेल घरक बगैचा में फूलल मोगराक कली रहै! यादिक लेल सफेद, सुगन्धित!



दस

रजनीक यादिमे हमरा आँखिमे नोर आबि गेल छल आ हम ओइ समए वएह पोछि रहल छेलौं, ऐ सभ यादिसँ हमरा मोनमे ओ सभ चित्र उभरि कऽ आबि रहल छल। हम पाखलो, ऐ माटिक संस्कारमे पलल-बढ़ल विठू छेलौं। ऐ माटिक सबूत छेलौं।
       बहुत कालसँ अकासमे कारी-कारी मेघ घुमड़ि रहल रहै। बिजलौकाक संग गरज भऽ रहल छेलै आ बरखा सेहो भेल रहै, जेकरा कारणेँ लाल माटिक सुगंध चारू दिस पसरि रहल रहै।
      मिरगिसरा शुरू होइमे अखनि पन्द्रह दिन बाँकी रहै। मिरगिसराक बरखा शुरू भेला पछाति‍ गाममे खेती-बारीक काज आरंभ भऽ जाइत रहै। ऐ साल सोनू मामाक खेत परती रहि जेतै, हमरा ऐ बातक डर रहए। दू मास पहिने सोनू मामाकेँ लकबा मारि देने रहै। ओकर दहिना हाथ बेकाम भऽ गेल रहै, जइसँ हाथ नै हिला सकै छला। अपन नातिनसँ मिलैले आ ओकरा देखैले ओ ओहू स्थितिमे गोविन्दक घर आएल छला। हुनक माथक केश उज्जर भऽ गेल रहनि आ देह बहुत कमजोर। एतए आबि ओ सुलूसँ भेँट केलनि। सुलूसँ गप केलनि, मुदा हमरासँ बिना गप केने ओ आपस चलि गेला। जँ ओ बरखामे भीजि के काज करता तँ निश्चिते हुनक रोग आर बढि जेतनि आ ओहुना आब हुनकासँ कोनो काज कहाँ होइत छेलनि। ओकरा एहेन बुझेलै। आ तखन ओ खेतमे हाथ बँटबैले रुक्मिणी मौंसीक माध्यमे खबरि भेजौलक। हमरा बुझाएल जे सोनू मामाक खेत परती रहि जेतै, मुदा जाधरि हमरा देहमे जान अछि ताधरि कोनो डर नै।
      भोरसँ दुपहर भऽ गेल रहै। हम घरमे जेतए बैसल रही ओतै एकक पछाति‍ एक यादि दोहरा रहल छेलौं। आब सभटा यादि खतम भऽ गेल, हमरा एहेन लागल आ ओइ सून देबाल जैपर चिक्कनि माटिसँ ढौरल गेल रहै ओकरा एकटक देखैत रही। हम घरक चारू दिस नजरि दौगेलौं, तखने हमरा रुक्मिणी मौंसीक ओइठाम गेल सुलूक यादि आबि गेल। आँखिक सोझहा ओकर निष्पाप, अनजान आ बहुत सुन्नर मूर्ति ठाढ भऽ गेल। ओकर लहसुनियाँ आँखिसँ सुखद भाव प्रकट भऽ रहल छेलै। तखन ओकर एतए नै होइक बाबजूदो हमरा ओकरा माथपर हाथ फेरैक आ ओकर चुम्मा लइक इच्छा भेल। एतबेमे केबाड़ खुजैक अबाज भेल। देखलौं तँ सुलू घर आबि गेल छेली। हमरा देखि ओकर खुशी दूगूणा भऽ गेलै। ओ दौग कऽ एली आ जाधरि हम ओकरा कोरा लैतिऐ ताधरि ओ मामा कहि कऽ हमरा शोर पारलक आ हमरा पएरसँ लिपटि गेली।
Illustration-08

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हर एक लोक आ माटिक कथा
पाखलो उपन्यासकेँ दुइए तीन बरखमे ख्याति भेट गेल रहै। राष्ट्रमतँ द्वारा एकरा औपन्यासिक प्रतिस्पर्धामे पुरस्कार भेटलै। कला अकादमीक पुरस्कार सेहो भेटलै। पाखलो उपन्यास पणजी अकासवाणीसँ मराठी भाषामे नवोनाट्य स्वरूपमे प्रसारित भेल। ऐ तरहेँ मराठी साहित्यमे सेहो पाखलो अपन उपस्थिति दर्ज करेलक।
      कोंकणी साहित्यमे पाखलो अपन विशिष्ट शैलीक कारणेँ ठाढ रहल। तुकाराम शेटक पाखलो क जड़ि आमक गाछ सदृश गोवाक माटिक गहराई धरि पहुँच गेल। ऐ माटिक सुगंध पाखलोक सौंसे जीवनमे सुरभित भऽ रहल अछि। मुदा पाखलोसँ शालीकेँ जनमल ऐ बच्चाकेँ अपनासँ दूर रखैए। ओ अपना-आपसँ सेहो साक्षात्कार नै कऽ सकैए। यएह तनाव, यएह बेथा पाखलोक हृदैमे घर बना रहल अछि आ ऐ बेथासँ पाखलो उपन्यासक जनम भेल।
      कोंकणी साहित्यमे पाखलोक कथा एकटा नव आ ज्वलन्त विषय लऽ के आएल अछि। ऐ उपन्यास विषय जेतेक नव अछि ततबे मौलिक। पाखलोक बीजसँ गोवाक एक सामान्य स्त्रीक गर्भसँ पलि कऽ गोवाक माटिक संस्कारकेँ अपनबैले तड़पि रहल अछि। पाखलोक रूप, गुलाबी केश, लहसुनियाँ आँखि, लाली गोराय अछि, मुदा ओकरापर जे संस्कार पड़ल छल ओ गोवाक माटिक, हिन्दूक, शालीक, विठूक छल।
      बाँकी गोवावासी जकाँ ईहो पाखलो माटिएक विठू छी, मुदा समाज एकरा पाखलोक नजरिसँ देखैए। ओ शालीक विठू छी। ओ विठूए छी, ओकरा एहेन बुझाइ छै। मुदा समाज ओकरा विठू नै बनए दइ छै। लेखक श्री तुकारामक नजरिमे ई विरोधाभास देखबामे आएल। पाखलोक जीवनकेँ एक विरोध बना कऽ एकपक्षीय आधारक रचना कएल अछि। पाखलोक कथा घुलि-मिलि रंगीन भऽ गेल अछि। पाखलो बनि कऽ, विठू बनि कऽ...
      ओहो ऐ माटिक सपूत बनि जाए, ऐ इच्छाकेँ पालि पाखलो पाठकक मोनमे एकटा विशिष्ट छाप छोड़ि दैत अछि। पाखलो उपन्यास पढ़ैत काल पाठक सेहो स्वयं पाखलो बनि जाइत अछि। यएह ऐ उपन्यासक विशेषता छी।
      उपन्यासक निवेदन दू प्रकारसँ कएल गेल अछि- अध्याय 1,3,5,7,9 10 मे पाखलो स्वयं निवेदन करैए आ 2,4.6,8मे लेखक स्वयं निवेदन करै छथि। निवेदनक ई शैली केश जकाँ गूथल अछि, यएह एकर सौंदर्य अछि। मात्र लेखकक निवेदनक कारणेँ ऐ उपन्यासक सौंदर्य नै बढि जाइत अछि। ऐ तरहक शैली आत्मनिवेदनात्मक उपन्यासक दोष, बन्हन मेटबैक कारण बनि गेल अछि। विषयकेँ नीक जकाँ रँगि देबाक निवेदन शैलीक बहुत नीक जकाँ चित्रण भेल अछि। ई दुनू निवेदन शैली एक दोसराक पूरक छी।
तुकाराम शेट उपन्यासक सभटा प्रसंगकेँ बड़ सावधानीक संग रंगने छथि। केतौ अतिरेकक कारणेँ उपन्यासमे बाधा नै आएल अछि। उदाहरण स्वरूप जखनि शीलीक बलात्कार होइ छै तखन यै प्रसंग लए ओ ऐ तरहेँ लिखै छथि।
ओइ अन्हार गुप्‍प जंगलमे ओ अजगर सरिपहुँ ओकरा अपना काबूमे कऽ लेलकै। झार-झंखार आ पात सभसँ अजीब तरहेँ अबाज आबए लगलै।
शालीक मृत्युक प्रसंग सेहो किछु अहिना अछि। पाखलो चिताकेँ आगि लगेबाक प्रयास करैए मुदा जखनि चिताकेँ आगि नै लगैए तँ दादी कहैए-
बाउ! अहाँक हाथे अहाँक माएक चिताकेँ आगि नै लागि रहल अछि? आब की उपाए?”
पाखलोक दुर्दैव किछु शब्दमे लेखक एतए देखौने छथि। एकबेर पाखलो पोखरिमे नहबैए, ई देखि बाबू भटपाखलो पोखरि भ्रष्ट केलक! पाखलो पोखरि भ्रष्ट केलक!” चिकरए लागैए। पाखलोकेँ घीचि कऽ ओकरा स्तंभसँ बान्हि ओकर हाल-बेहाल कऽ दैत अछि। जखनि शाली ओकरा छोड़बए जाइ छथि, ओ ओकरो बान्हि कऽ राखैए। ओकरा देखि पाखलोकेँ लगै छै-
हमरा देहक गरम खून दौगए लागल.... बादमे हमर खून ठंढा भऽ गेल आ ओ शनैः शनैः हमरा शरीरसँ निकलि रहल अछि, बुझाए लागल..., हमरा बुझाएल जेना हमरा पूरा शरीरक सभटा खून बहि गेल हो!”
पाखलोक असहायता संयमसँ खुजैए। ऐ सभटा प्रसंगकेँ जीवित रखबाक हेतु भाषाशैली सेहो ओतबे प्रभावी अछि। प्रसंगक लेल उपयुक्त अछि। जेना नालीसँ शांत पानि बहैए तखन बहुत कोमल अबाज अबैए, ओहिना एकर भाषा अछि। सुन्नरि युवतीक पएरक पैंजनीक अबाजमे हेरा जाएब-सन, जइ तरहेँ आँखि बन्न कऽ कऽ मात्र अबाज सुनि लैत छी ओहिना ओइ भाषाक मन्द अबाज ताकब, आ लय-तालकेँ ओ पाठकपर विजय प्राप्त करैए। हृदैमे घर बना लैत अछि।
ऐ तरहक वाक्यमे भाषाशैली बहुत सुन्दर भऽ गेल अछि। लेखकक ई भाषा शैली प्रसंगक अनुसारेँ मोड़ लेबाक कारणेँ प्रसंगक सौंदर्य बढ़ि गेल अछि।
      पाखलो ऐ उपन्यासक नायक अछि। ऐ बेक्तित्वक चारू दिस अन्य पात्र सभ अछि, सोनू, दादी, शाली, रजनी, आलेस, गोविन्द, सुलू ई सभटा द्वितीयक पात्र छथि। उपन्यासमे नायकक चरित्र-चित्रण बहुत नीक ढंगे कएल गेल अछि। अपन हृदैसँ निकलल बेथा, वेदनाक सहारे ओ जीब रहल अछि। ओकरा मेटएबाल लेल ओ संघर्ष करैए। यएह पाखलोक जीवन छी। जँ अपन बेथामे नायक जड़ैतो रहल अछि तथापि ओ ओइ परिधिमे नै रहैए। केगदी भाटमे नारिकेल तोड़ैले वएह आगू बढैए। हिन्दू आ ईसाईक बीच भेल झगड़ाकेँ वएह सुलझबैए, मुदा ओ अपन दर्द नै बिसरि सकल। ओकरा बुझाइ छै-
हम नै तँ ईसाई रही, आ ने हिन्दू, ऐ लेल हमरा छोड़ि देल गेल की? हमर संबन्‍ध दुनूसँ अछि, ऐ लेल हमरा ओ लोकनि नै मारलनि की?” अपन अस्तित्व ताकै बला ई पाखलो सोनू मामाक बेटीकेँ अपन बहिन बूझि सिनेह करैए, मुदा ओइ सिनेहकेँ रजनीक अलावा कि‍यो ने बूझि सकल अछि। जइसँ ओकर बेथा औरो तीव्र भऽ जाइत अछि। पाखलोक मनोदशा देखैले पाखलोक सही भावना बेक्त करैले एतए लेखककेँ खूब अवसर भेटल छन्‍हि‍।
      दादी एतए समाजक एकटा विशिष्ट बेकती छथि। पाखलोकेँ ई गाम नै अपनौलक, एकरा बाबजूद दादी ओकरा अपन बेटा गोविन्दक सदृश सिनेह देलक। ओकरा नोकरीपर लगौलक। रैयत लोकनिपर भेल अत्याचारकेँ मेटबैले ओ मास भरिक कैद काटलक।
      सोनू मामा सेहो पाखलोसँ सिनेह करै छथि मुदा अपन बेटीक खातिर ओ पाखलोकेँ भगा दइ छथि। आन लोक जकाँ आ रजनीक पति जकाँ ओहो पाखलोपर आरोप लगबैए। सोनू मामाक चित्रण उपन्यासमे एला पछाति‍ ओकर बेक्तित्व स्पष्ट नै भऽ सकलै। ओहिना शालीक बेक्तित्व चित्रण जइ ढंगे होइक चाही से नै भऽ सकल। ओकरा तुलनामे रजनीक बेक्तित्व नीक जकाँ उभरि कऽ आएल अछि। गोविन्द बुद्धिमान, होशियार, आ तत्वज्ञानी अछि, जे पाखलो स्वयं कहैए-
मनुख जनमक संगे मृत्यु सेहो अपना संगे आनने अछि... धरती हो, जल हुअए वा अकास, सभठाम मृत्यु निश्चित अछि। एहेन तत्वज्ञानक शब्द कहैबला गोविन्द पाठकेँ नै पचैए। हमरा ई तत्वज्ञान हमर आजी देने रहथि, एहेन स्पष्टीकरण जँ गोविन्दक मुहसँ भेलो अछि तथापि नेनपनमे गोविन्द एतेक तत्वज्ञानक गप कऽ सकैए से कनी अजगुत लगैए, आ गोविन्द एकटा बुजुर्ग सन बुझाइत अछि। ओ तत्वज्ञानी आ बुद्धिमान होइतो एकटा ईसाई युवतीसँ बिआह कऽ लैत अछि, आ अपन गाम छोड़ि दैत अछि। भारतमे रहि कऽ पाइ नै कमा सकैए ऐ लेल आलेस दुबई चलि जाइत अछि, मुदा पाखलो ऐ गामक संस्कृति, माटिसँ चिपकल रहैए। उपन्यासक एकटा गाम ऐ उपन्यासक बेक्तित्व भऽ गेल अछि। गोवाक माटिक विशेषता ऐ गाममे देखाइत अछि। प्रकृति सौंदर्यक चित्रण बहुत नीक जकाँ दर्शाओल गेल अछि।
      रजनीकेँ पाखलोसन लड़की होइ छै। गुलाबी केश, लहसुनियाँ आँखि, गोर चाम। वास्तवमे तँ ई लड़की रजनीकेँ ओकरा अपन पतिसँ होइ छै तथापि ओ लड़की देखैमे पाखलो-सन बुझाइत अछि ऐ लेल ई पाखलोक पैदाइश छै, ई आरोप ओकर पति ओकरापर लगबै छै। रजनीकेँ पाखलोसँ लड़की होइक कारण ओकरा मोनमे पाखलोक प्रति शाश्वत प्रेम भऽ सकैए। ऐ मनोदशाक कारणेँ रजनीकेँ पाखलो सन लड़की होइक संभावना देखैमे आबि रहल अछि।
      पाखलो गोवाक माटिक अछि। मुदा एकरा पढि मोनमे एहेन शंका होइत अछि जे पाखलोक संबन्‍ध केतौ मराठी साहित्यमे चि.त्र्यं. खानोलकरक चानी उपन्याससँ तँ नै अछि? मुदा पाखलोक विशिष्टता चानीमे नै अछि।
      भूतकाल आ वर्तमान कालक स्पर्श ऐ उपन्यासमे अछि। कथानकक परिधि पूरा करैमे दुनूक भूमिका अछि। एकटा रविक दिन सभटा पुरान स्मरण एकटा गरज आ चमकक संग खतम भऽ जाइत अछि। ओइमे पाखलो अपन पहिचान ताकऽ लगैए। फेर पाखलो अपन जनमसँ लए आइधरिक कथा अपना मोनमे स्मरण करैए। दुपहर भऽ जाइत अछि। सुलू पाखलोकेँ मामा कहि ओकर पएर पकड़ि लैत अछि। कथानकक परिधि पूरा भऽ जाइत अछि। वर्तमान कालसँ भूतकालमे जाए कऽ पाखलो फेर वर्तमानमे आबि जाइत अछि। उपन्यासक प्रारूप प्रशंशाक योग्य अछि।
      उपन्यासक हरेक अध्यायक अपन महत्व छै। हरेक अध्यायक शुरूआत आ विशेष रूपेँ अंत कलात्मक अछि। निच्चाँक उदाहरण देखू-
नै अहाँ पाखलो थिकौं! पाखलो शामाकेँ किछु कहैले मुँह खोलने छल आकि ओ ओतएसँ चलि देली। पाखलोक मोन तँ बुझु जे नागफनीसँ भरल रेगिस्तानक सदृश भऽ गेलै।
अध्याय चारि

ऐ गाममे हमर परिचय फकत एते अछि जे हमर नाओं पाखलो छी, हमर जाति पाखलो छी, आ हमर धर्म सेहो पाखलो छी।
            अध्याय पाँच

रजनीकेँ गोर रंग पसिन्न छै। ओकरा चन्द्रमाक ऐ ज्योत्सना-सन बेटी होमक चाही…. काजर लगएला पछाति‍ कारी आँखि वाली ओकरे सन सुन्नरि बेटी होमक चाही। पूर्णिमाक ज्योत्सना चारुदिस पसरल रहै आ जेना नहरक पानि बहै छै तहिना ओकरा रस्तामे चन्द्रमा अपन ज्योत्सना पसारने छेलै
अध्याय आठ

पाखलोक गालपर थापड़क निशान भऽ गेलै। ओ अपन गालकेँ हँसोतए लागल। तथापि ओकरा सौंसे देहमे भऽ रहल दर्द ओकरा ओतेक कष्ट नै दऽ रहल छेलै, मुदा भोरक घटनासँ जे ओकरा करेजमे घाव भेल रहै ओ अखनि धरि हरिअर रहै।
                 अध्याय आठ
ओइ पोखरिसँ हम जे कुसरीक फूल निकालने छेलौं से वास्तवमे ओ कुसरीक फूलक कोढ़ी नै अपितु रजनीक खोपामे लगौल गेल घरक बगैचा में फूलल मोगराक कली रहै! यादिक लेल सफेद, सुगन्धित!”
अध्याय नओ

 ओ दौग कऽ एली आ जाधरि हम ओकरा कोरा लैतिऐ ताधरि ओ मामा कहि कऽ हमरा शोर पारलक आ हमरा पएरसँ लिपटि गेली।
अध्याय दस

हरेक अध्यायक ऐ तरहक कलात्मक अंत छै। हरेक अध्यायक अंतमे उपन्यासक अंत भऽ सकैए। ई उपन्यास एतेक कलात्मक अछि। गोवाक संवतंत्रताक पार्श्वसँ ई कथा रंग आनैए। स्वतंत्रता भेटैसँ पूर्वहि शुरू भेल ई कथा स्वतंत्रता पछाइतो चलैत रहैए। मुदा उपन्यासमे स्वतंत्रताक विषय जेतेक एबाक चाही, से नै आबि सकल अछि। मुदा ऐ कारणेँ ऐ उपन्यासमे बाधा आबि गेल छै, से नै छै। ओइ समैक तीव्र स्वतंत्रता आन्दोलनक पदचिह्न जँ उपन्यासमे अबितै तँ एकर पृष्ठभूमि आँखिकेँ जँचतै।
कार्मो चीफ जंगलमे शालीक बलात्कार करैए, बादमे बहुत दिन पछाति‍, पाखलोक जनमक बादो ओ शालीसँ भेँट करैए। बिना बतौने ओकरो मोनमे शालीक प्रति सिनेह जागि जाइ छै आ बलात्कारक तीव्रता कम भऽ जाइ छै। कार्मो चीफक ई प्रकृति पाठककेँ उधेड़बुनमे डालि दइ छै।...कार्मो चीफकेँ बेर-बेर शालीक ओतए देखि लोकसभ, शालीक भड़ुआ। कहै छै आ शालीक संबन्‍धमे-
ओ पाखलोकेँ अपना घरमे राखि धंधा शुरू कऽ देने छै वा अपन नव दुनियाँ बसा नेने अछि?” कहै छै। बलात्कारक तीव्रता कम कऽ लेखक पाठककेँ की कहए चाहै छथि? ई बुझमे नै अबैए। पाखलोक विठू एकबेर कहै छै-
ओ एकटा पतिव्रता नारी छेलीमुदा एकरो कोनो माने नै निकलैए।
      ऐ तरहक किछु दोष ऐ उपन्यासमे अछि, मुदा ई सूक्ष्म दृष्टिएँ देखने बिना नजरिमे नै अबैए।
      पाखलो उपन्यास मात्र पाखलोक कथा नै छी। एकटा माटिक कथा छी। हरेक लोकक, हरेक माटिक कथा छी। एहेन कथा इतिहास बतबैए। हरेक लोककेँ इन्सानक रूपमे जीवन बितेबै काल ओकरा अपन घर, अपन लोक, अपन समाजक आवश्यकता होइ छै। अपन संस्कृतियोक आवश्यकता होइ छै। जँ इ सभ ओकरा नै भेटै छै आकि ओकरा ऐ सभसँ दूर राखि देल जाइ छै तखन पाखलोक उदय भऽ जाइ छै।
      मोनक ई भावना, वेदना आ बेथा मात्र गोवाक संस्कृतिमे उपजल एकटा पाखलो लोकक नै छी, अपितु सभ लोकक कथा छी। केवल वातावरण ओ संदर्भ बदलि जाइ छै। मूल भावना रहै छै विठू बनि कऽ जीबाक। स्थान, काल आ मर्यादा ऐ उपन्यासमे नै अछि। ऐमे बेक्त कएल गेल भावना, हरेक लोकक ज्वलंत कथा छी, वेदना छी। लोक सभमेसँ हरेक पाखलो विठू बनि कऽ जीबैले संघर्ष करैए।
      (कोंकण टाइम्स, दिवाली अंक, 1981 मे प्रकाशित आलेखक अंश, अशोक मनभुटकर)


 विदेह नूतन अंक भाषापाक रचना-लेखन  
इंग्लिश-मैथिली-कोष / मैथिली-इंग्लिश-कोष  प्रोजेक्टकेँ आगू बढ़ाऊ, अपन सुझाव आ योगदान ई-मेल द्वारा ggajendra@videha.com पर पठाऊ।

१.भारत आ नेपालक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली .मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम

.नेपाल भारतक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली

१.१. नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक
  उच्चारण आ लेखन शैली
(भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित)
मैथिलीमे उच्चारण तथा लेखन

१.पञ्चमाक्षर आ अनुस्वार: पञ्चमाक्षरान्तर्गत ङ, , , न एवं म अबैत अछि। संस्कृत भाषाक अनुसार शब्दक अन्तमे जाहि वर्गक अक्षर रहैत अछि ओही वर्गक पञ्चमाक्षर अबैत अछि। जेना-
अङ्क (क वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ङ् आएल अछि।)
पञ्च (च वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ञ् आएल अछि।)
खण्ड (ट वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ण् आएल अछि।)
सन्धि (त वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे न् आएल अछि।)
खम्भ (प वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे म् आएल अछि।)
उपर्युक्त बात मैथिलीमे कम देखल जाइत अछि। पञ्चमाक्षरक बदलामे अधिकांश जगहपर अनुस्वारक प्रयोग देखल जाइछ। जेना- अंक, पंच, खंड, संधि, खंभ आदि। व्याकरणविद पण्डित गोविन्द झाक कहब छनि जे कवर्ग, चवर्ग आ टवर्गसँ पूर्व अनुस्वार लिखल जाए तथा तवर्ग आ पवर्गसँ पूर्व पञ्चमाक्षरे लिखल जाए। जेना- अंक, चंचल, अंडा, अन्त तथा कम्पन। मुदा हिन्दीक निकट रहल आधुनिक लेखक एहि बातकेँ नहि मानैत छथि। ओ लोकनि अन्त आ कम्पनक जगहपर सेहो अंत आ कंपन लिखैत देखल जाइत छथि।
नवीन पद्धति किछु सुविधाजनक अवश्य छैक। किएक तँ एहिमे समय आ स्थानक बचत होइत छैक। मुदा कतोक बेर हस्तलेखन वा मुद्रणमे अनुस्वारक छोट सन बिन्दु स्पष्ट नहि भेलासँ अर्थक अनर्थ होइत सेहो देखल जाइत अछि। अनुस्वारक प्रयोगमे उच्चारण-दोषक सम्भावना सेहो ततबए देखल जाइत अछि। एतदर्थ कसँ लऽ कऽ पवर्ग धरि पञ्चमाक्षरेक प्रयोग करब उचित अछि। यसँ लऽ कऽ ज्ञ धरिक अक्षरक सङ्ग अनुस्वारक प्रयोग करबामे कतहु कोनो विवाद नहि देखल जाइछ।

२.ढ आ ढ : ढक उच्चारण र् हजकाँ होइत अछि। अतः जतऽ र् हक उच्चारण हो ओतऽ मात्र ढ लिखल जाए। आन ठाम खाली ढ लिखल जएबाक चाही। जेना-
ढ = ढाकी, ढेकी, ढीठ, ढेउआ, ढङ्ग, ढेरी, ढाकनि, ढाठ आदि।
ढ = पढ़ाइ, बढब, गढब, मढब, बुढबा, साँढ, गाढ, रीढ, चाँढ, सीढी, पीढी आदि।
उपर्युक्त शब्द सभकेँ देखलासँ ई स्पष्ट होइत अछि जे साधारणतया शब्दक शुरूमे ढ आ मध्य तथा अन्तमे ढ अबैत अछि। इएह नियम ड आ डक सन्दर्भ सेहो लागू होइत अछि।

३.व आ ब : मैथिलीमे क उच्चारण ब कएल जाइत अछि, मुदा ओकरा ब रूपमे नहि लिखल जएबाक चाही। जेना- उच्चारण : बैद्यनाथ, बिद्या, नब, देबता, बिष्णु, बंश, बन्दना आदि। एहि सभक स्थानपर क्रमशः वैद्यनाथ, विद्या, नव, देवता, विष्णु, वंश, वन्दना लिखबाक चाही। सामान्यतया व उच्चारणक लेल ओ प्रयोग कएल जाइत अछि। जेना- ओकील, ओजह आदि।

४.य आ ज : कतहु-कतहु क उच्चारण जकाँ करैत देखल जाइत अछि, मुदा ओकरा ज नहि लिखबाक चाही। उच्चारणमे यज्ञ, जदि, जमुना, जुग, जाबत, जोगी, जदु, जम आदि कहल जाएबला शब्द सभकेँ क्रमशः यज्ञ, यदि, यमुना, युग, यावत, योगी, यदु, यम लिखबाक चाही।

५.ए आ य : मैथिलीक वर्तनीमे ए आ य दुनू लिखल जाइत अछि।
प्राचीन वर्तनी- कएल, जाए, होएत, माए, भाए, गाए आदि।
नवीन वर्तनी- कयल, जाय, होयत, माय, भाय, गाय आदि।
सामान्यतया शब्दक शुरूमे ए मात्र अबैत अछि। जेना एहि, एना, एकर, एहन आदि। एहि शब्द सभक स्थानपर यहि, यना, यकर, यहन आदिक प्रयोग नहि करबाक चाही। यद्यपि मैथिलीभाषी थारू सहित किछु जातिमे शब्दक आरम्भोमे केँ य कहि उच्चारण कएल जाइत अछि।
ए आ क प्रयोगक सन्दर्भमे प्राचीने पद्धतिक अनुसरण करब उपयुक्त मानि एहि पुस्तकमे ओकरे प्रयोग कएल गेल अछि। किएक तँ दुनूक लेखनमे कोनो सहजता आ दुरूहताक बात नहि अछि। आ मैथिलीक सर्वसाधारणक उच्चारण-शैली यक अपेक्षा एसँ बेसी निकट छैक। खास कऽ कएल, हएब आदि कतिपय शब्दकेँ कैल, हैब आदि रूपमे कतहु-कतहु लिखल जाएब सेहो क प्रयोगकेँ बेसी समीचीन प्रमाणित करैत अछि।

६.हि, हु तथा एकार, ओकार : मैथिलीक प्राचीन लेखन-परम्परामे कोनो बातपर बल दैत काल शब्दक पाछाँ हि, हु लगाओल जाइत छैक। जेना- हुनकहि, अपनहु, ओकरहु, तत्कालहि, चोट्टहि, आनहु आदि। मुदा आधुनिक लेखनमे हिक स्थानपर एकार एवं हुक स्थानपर ओकारक प्रयोग करैत देखल जाइत अछि। जेना- हुनके, अपनो, तत्काले, चोट्टे, आनो आदि।

७.ष तथा ख : मैथिली भाषामे अधिकांशतः षक उच्चारण ख होइत अछि। जेना- षड्यन्त्र (खडयन्त्र), षोडशी (खोडशी), षट्कोण (खटकोण), वृषेश (वृखेश), सन्तोष (सन्तोख) आदि।

८.ध्वनि-लोप : निम्नलिखित अवस्थामे शब्दसँ ध्वनि-लोप भऽ जाइत अछि:
(क) क्रियान्वयी प्रत्यय अयमे य वा ए लुप्त भऽ जाइत अछि। ओहिमे सँ पहिने अक उच्चारण दीर्घ भऽ जाइत अछि। ओकर आगाँ लोप-सूचक चिह्न वा विकारी (’ / ऽ) लगाओल जाइछ। जेना-
पूर्ण रूप : पढए (पढय) गेलाह, कए (कय) लेल, उठए (उठय) पडतौक।
अपूर्ण रूप : पढगेलाह, लेल, उठपडतौक।
पढऽ गेलाह, कऽ लेल, उठऽ पडतौक।
(ख) पूर्वकालिक कृत आय (आए) प्रत्ययमे य (ए) लुप्त भऽ जाइछ, मुदा लोप-सूचक विकारी नहि लगाओल जाइछ। जेना-
पूर्ण रूप : खाए (य) गेल, पठाय (ए) देब, नहाए (य) अएलाह।
अपूर्ण रूप : खा गेल, पठा देब, नहा अएलाह।
(ग) स्त्री प्रत्यय इक उच्चारण क्रियापद, संज्ञा, ओ विशेषण तीनूमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना-
पूर्ण रूप : दोसरि मालिनि चलि गेलि।
अपूर्ण रूप : दोसर मालिन चलि गेल।
(घ) वर्तमान कृदन्तक अन्तिम त लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना-
पूर्ण रूप : पढैत अछि, बजैत अछि, गबैत अछि।
अपूर्ण रूप : पढै अछि, बजै अछि, गबै अछि।
(ङ) क्रियापदक अवसान इक, उक, ऐक तथा हीकमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना-
पूर्ण रूप: छियौक, छियैक, छहीक, छौक, छैक, अबितैक, होइक।
अपूर्ण रूप : छियौ, छियै, छही, छौ, छै, अबितै, होइ।
(च) क्रियापदीय प्रत्यय न्ह, हु तथा हकारक लोप भऽ जाइछ। जेना-
पूर्ण रूप : छन्हि, कहलन्हि, कहलहुँ, गेलह, नहि।
अपूर्ण रूप : छनि, कहलनि, कहलौँ, गेलऽ, नइ, नञि, नै।

९.ध्वनि स्थानान्तरण : कोनो-कोनो स्वर-ध्वनि अपना जगहसँ हटि कऽ दोसर ठाम चलि जाइत अछि। खास कऽ ह्रस्व इ आ उक सम्बन्धमे ई बात लागू होइत अछि। मैथिलीकरण भऽ गेल शब्दक मध्य वा अन्तमे जँ ह्रस्व इ वा उ आबए तँ ओकर ध्वनि स्थानान्तरित भऽ एक अक्षर आगाँ आबि जाइत अछि। जेना- शनि (शइन), पानि (पाइन), दालि ( दाइल), माटि (माइट), काछु (काउछ), मासु (माउस) आदि। मुदा तत्सम शब्द सभमे ई निअम लागू नहि होइत अछि। जेना- रश्मिकेँ रइश्म आ सुधांशुकेँ सुधाउंस नहि कहल जा सकैत अछि।

१०.हलन्त(्)क प्रयोग : मैथिली भाषामे सामान्यतया हलन्त (्)क आवश्यकता नहि होइत अछि। कारण जे शब्दक अन्तमे अ उच्चारण नहि होइत अछि। मुदा संस्कृत भाषासँ जहिनाक तहिना मैथिलीमे आएल (तत्सम) शब्द सभमे हलन्त प्रयोग कएल जाइत अछि। एहि पोथीमे सामान्यतया सम्पूर्ण शब्दकेँ मैथिली भाषा सम्बन्धी निअम अनुसार हलन्तविहीन राखल गेल अछि। मुदा व्याकरण सम्बन्धी प्रयोजनक लेल अत्यावश्यक स्थानपर कतहु-कतहु हलन्त देल गेल अछि। प्रस्तुत पोथीमे मथिली लेखनक प्राचीन आ नवीन दुनू शैलीक सरल आ समीचीन पक्ष सभकेँ समेटि कऽ वर्ण-विन्यास कएल गेल अछि। स्थान आ समयमे बचतक सङ्गहि हस्त-लेखन तथा तकनीकी दृष्टिसँ सेहो सरल होबऽबला हिसाबसँ वर्ण-विन्यास मिलाओल गेल अछि। वर्तमान समयमे मैथिली मातृभाषी पर्यन्तकेँ आन भाषाक माध्यमसँ मैथिलीक ज्ञान लेबऽ पडि रहल परिप्रेक्ष्यमे लेखनमे सहजता तथा एकरूपतापर ध्यान देल गेल अछि। तखन मैथिली भाषाक मूल विशेषता सभ कुण्ठित नहि होइक, ताहू दिस लेखक-मण्डल सचेत अछि। प्रसिद्ध भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक कहब छनि जे सरलताक अनुसन्धानमे एहन अवस्था किन्नहु ने आबऽ देबाक चाही जे भाषाक विशेषता छाँहमे पडि जाए।
-(भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित)

१.२. मैथिली अकादमी, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली

१. जे शब्द मैथिली-साहित्यक प्राचीन कालसँ आइ धरि जाहि वर्त्तनीमे प्रचलित अछि
, से सामान्यतः ताहि वर्त्तनीमे लिखल जाय- उदाहरणार्थ-

ग्राह्य

एखन
ठाम
जकर, तकर
तनिकर
अछि

अग्राह्य
अखन, अखनि, एखेन, अखनी
ठिमा, ठिना, ठमा
जेकर, तेकर
तिनकर। (वैकल्पिक रूपेँ ग्राह्य)
ऐछ, अहि, ए।

२. निम्नलिखित तीन प्रकारक रूप वैकल्पिकतया अपनाओल जाय: भऽ गेल, भय गेल वा भए गेल। जा रहल अछि, जाय रहल अछि, जाए रहल अछि। करगेलाह, वा करय गेलाह वा करए गेलाह।

३. प्राचीन मैथिलीक न्हध्वनिक स्थानमे लिखल जाय सकैत अछि यथा कहलनि वा कहलन्हि।

४. तथा ततय लिखल जाय जतस्पष्टतः अइतथा अउसदृश उच्चारण इष्ट हो। यथा- देखैत, छलैक, बौआ, छौक इत्यादि।

५. मैथिलीक निम्नलिखित शब्द एहि रूपे प्रयुक्त होयत: जैह, सैह, इएह, ओऐह, लैह तथा दैह।

६. ह्र्स्व इकारांत शब्दमे के लुप्त करब सामान्यतः अग्राह्य थिक। यथा- ग्राह्य देखि आबह, मालिनि गेलि (मनुष्य मात्रमे)।

७. स्वतंत्र ह्रस्व वा प्राचीन मैथिलीक उद्धरण आदिमे तँ यथावत राखल जाय, किंतु आधुनिक प्रयोगमे वैकल्पिक रूपेँ वा लिखल जाय। यथा:- कयल वा कएल, अयलाह वा अएलाह, जाय वा जाए इत्यादि।

८. उच्चारणमे दू स्वरक बीच जे ध्वनि स्वतः आबि जाइत अछि तकरा लेखमे स्थान वैकल्पिक रूपेँ देल जाय। यथा- धीआ, अढैआ, विआह, वा धीया, अढैया, बियाह।

९. सानुनासिक स्वतंत्र स्वरक स्थान यथासंभव लिखल जाय वा सानुनासिक स्वर। यथा:- मैञा, कनिञा, किरतनिञा वा मैआँ, कनिआँ, किरतनिआँ।

१०. कारकक विभक्त्तिक निम्नलिखित रूप ग्राह्य:- हाथकेँ, हाथसँ, हाथेँ, हाथक, हाथमे। मेमे अनुस्वार सर्वथा त्याज्य थिक। क वैकल्पिक रूप केरराखल जा सकैत अछि।

११. पूर्वकालिक क्रियापदक बाद कयवा कएअव्यय वैकल्पिक रूपेँ लगाओल जा सकैत अछि। यथा:- देखि कय वा देखि कए।

१२. माँग, भाँग आदिक स्थानमे माङ, भाङ इत्यादि लिखल जाय।

१३. अर्द्ध ओ अर्द्ध क बदला अनुसार नहि लिखल जाय, किंतु छापाक सुविधार्थ अर्द्ध ’ , ‘’, तथा क बदला अनुस्वारो लिखल जा सकैत अछि। यथा:- अङ्क, वा अंक, अञ्चल वा अंचल, कण्ठ वा कंठ।

१४. हलंत चिह्न निअमतः लगाओल जाय, किंतु विभक्तिक संग अकारांत प्रयोग कएल जाय। यथा:- श्रीमान्, किंतु श्रीमानक।

१५. सभ एकल कारक चिह्न शब्दमे सटा कलिखल जाय, हटा कनहि, संयुक्त विभक्तिक हेतु फराक लिखल जाय, यथा घर परक।

१६. अनुनासिककेँ चन्द्रबिन्दु द्वारा व्यक्त कयल जाय। परंतु मुद्रणक सुविधार्थ हि समान जटिल मात्रापर अनुस्वारक प्रयोग चन्द्रबिन्दुक बदला कयल जा सकैत अछि। यथा- हिँ केर बदला हिं।

१७. पूर्ण विराम पासीसँ ( । ) सूचित कयल जाय।

१८. समस्त पद सटा कलिखल जाय, वा हाइफेनसँ जोडि क’ ,  हटा कनहि।

१९. लिअ तथा दिअ शब्दमे बिकारी (ऽ) नहि लगाओल जाय।

२०. अंक देवनागरी रूपमे राखल जाय।

२१.किछु ध्वनिक लेल नवीन चिन्ह बनबाओल जाय। जा
' ई नहि बनल अछि ताबत एहि दुनू ध्वनिक बदला पूर्ववत् अय/ आय/ अए/ आए/ आओ/ अओ लिखल जाय। आकि ऎ वा ऒ सँ व्यक्त कएल जाय।

ह./- गोविन्द झा ११/८/७६ श्रीकान्त ठाकुर ११/८/७६ सुरेन्द्र झा "सुमन" ११/०८/७६

  २. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम
२.१. उच्चारण निर्देश: (बोल्ड कएल रूप ग्राह्य):-   
दन्त न क उच्चारणमे दाँतमे जीह सटत- जेना बाजू नाम , मुदा ण क उच्चारणमे जीह मूर्धामे सटत (नै सटैए तँ उच्चारण दोष अछि)- जेना बाजू गणेश। तालव्य मे जीह तालुसँ , मे मूर्धासँ आ दन्त मे दाँतसँ सटत। निशाँ, सभ आ शोषण बाजि कऽ देखू। मैथिलीमे केँ वैदिक संस्कृत जकाँ सेहो उच्चरित कएल जाइत अछि, जेना वर्षा, दोष। य अनेको स्थानपर ज जकाँ उच्चरित होइत अछि आ ण ड जकाँ (यथा संयोग आ गणेश संजोग
गड़ेस उच्चरित होइत अछि)। मैथिलीमे व क उच्चारण ब, श क उच्चारण स आ य क उच्चारण ज सेहो होइत अछि।
ओहिना ह्रस्व इ बेशीकाल मैथिलीमे पहिने बाजल जाइत अछि कारण देवनागरीमे आ मिथिलाक्षरमे ह्रस्व इ अक्षरक पहिने लिखलो जाइत आ बाजलो जएबाक चाही। कारण जे हिन्दीमे एकर दोषपूर्ण उच्चारण होइत अछि (लिखल तँ पहिने जाइत अछि मुदा बाजल बादमे जाइत अछि), से शिक्षा पद्धतिक दोषक कारण हम सभ ओकर उच्चारण दोषपूर्ण ढंगसँ कऽ रहल छी।
अछि- अ इ छ  ऐछ (उच्चारण)
छथि- छ इ थ  – छैथ (उच्चारण)
पहुँचि- प हुँ इ च (उच्चारण)
आब अ आ इ ई ए ऐ ओ औ अं अः ऋ ऐ सभ लेल मात्रा सेहो अछि, मुदा ऐमे ई ऐ ओ औ अं अः ऋ केँ संयुक्ताक्षर रूपमे गलत रूपमे प्रयुक्त आ उच्चरित कएल जाइत अछि। जेना ऋ केँ री  रूपमे उच्चरित करब। आ देखियौ- ऐ लेल देखिऔ क प्रयोग अनुचित। मुदा देखिऐ लेल देखियै अनुचित। क् सँ ह् धरि अ सम्मिलित भेलासँ क सँ ह बनैत अछि, मुदा उच्चारण काल हलन्त युक्त शब्दक अन्तक उच्चारणक प्रवृत्ति बढल अछि, मुदा हम जखन मनोजमे ज् अन्तमे बजैत छी, तखनो पुरनका लोककेँ बजैत सुनबन्हि- मनोजऽ, वास्तवमे ओ अ युक्त ज् = ज बजै छथि।
फेर ज्ञ अछि ज् आ ञ क संयुक्त मुदा गलत उच्चारण होइत अछि- ग्य। ओहिना क्ष अछि क् आ ष क संयुक्त मुदा उच्चारण होइत अछि छ। फेर श् आ र क संयुक्त अछि श्र ( जेना श्रमिक) आ स् आ र क संयुक्त अछि स्र (जेना मिस्र)। त्र भेल त+र ।
उच्चारणक ऑडियो फाइल विदेह आर्काइव  http://www.videha.co.in/ पर उपलब्ध अछि। फेर केँ / सँ / पर पूर्व अक्षरसँ सटा कऽ लिखू मुदा तँ / कऽ हटा कऽ। ऐमे सँ मे पहिल सटा कऽ लिखू आ बादबला हटा कऽ। अंकक बाद टा लिखू सटा कऽ मुदा अन्य ठाम टा लिखू हटा कऽ– जेना
छहटा मुदा सभ टा। फेर ६अ म सातम लिखू- छठम सातम नै। घरबलामे बला मुदा घरवालीमे वाली प्रयुक्त करू।
रहए-
रहै मुदा सकैए (उच्चारण सकै-ए)।
मुदा कखनो काल रहए आ रहै मे अर्थ भिन्नता सेहो, जेना से कम्मो जगहमे पार्किंग करबाक अभ्यास रहै ओकरा। पुछलापर पता लागल जे ढुनढुन नाम्ना ई ड्राइवर कनाट प्लेसक पार्किंगमे काज करैत रहए
छलै, छलए मे सेहो ऐ तरहक भेल। छलए क उच्चारण छल-ए सेहो।
संयोगने- (उच्चारण संजोगने)
केँ/  कऽ
केर- (
केर क प्रयोग गद्यमे नै करू , पद्यमे कऽ सकै छी। )
क (जेना रामक)
–रामक आ संगे (उच्चारण राम के /  राम कऽ सेहो)
सँ- सऽ (उच्चारण)
चन्द्रबिन्दु आ अनुस्वार- अनुस्वारमे कंठ धरिक प्रयोग होइत अछि मुदा चन्द्रबिन्दुमे नै। चन्द्रबिन्दुमे कनेक एकारक सेहो उच्चारण होइत अछि- जेना रामसँ- (उच्चारण राम सऽ)  रामकेँ- (उच्चारण राम कऽ/ राम के सेहो)।

केँ जेना रामकेँ भेल हिन्दीक को (राम को)- राम को= रामकेँ
क जेना रामक भेल हिन्दीक का ( राम का) राम का= रामक
कऽ जेना जा कऽ भेल हिन्दीक कर ( जा कर) जा कर= जा कऽ
सँ भेल हिन्दीक से (राम से) राम से= रामसँ
सऽ , तऽ , , केर (गद्यमे) एे चारू शब्द सबहक प्रयोग अवांछित।
के दोसर अर्थेँ प्रयुक्त भऽ सकैए- जेना, के कहलक? विभक्ति क बदला एकर प्रयोग अवांछित।
नञि, नहि, नै, नइ, नँइ, नइँ, नइं ऐ सभक उच्चारण आ लेखन - नै

त्त्व क बदलामे त्व जेना महत्वपूर्ण (महत्त्वपूर्ण नै) जतए अर्थ बदलि जाए ओतहि मात्र तीन अक्षरक संयुक्ताक्षरक प्रयोग उचित। सम्पति- उच्चारण स म्प इ त (सम्पत्ति नै- कारण सही उच्चारण आसानीसँ सम्भव नै)। मुदा सर्वोत्तम (सर्वोतम नै)।
राष्ट्रिय (राष्ट्रीय नै)
सकैए/ सकै (अर्थ परिवर्तन)
पोछैले/ पोछै लेल/ पोछए लेल
पोछैए/ पोछए/ (अर्थ परिवर्तन) पोछए/ पोछै
ओ लोकनि ( हटा कऽ, ओ मे बिकारी नै)
ओइ/ ओहि
ओहिले/
ओहि लेल/ ओही लऽ
जएबेँ/ बैसबेँ
पँचभइयाँ
देखियौक/ (देखिऔक नै- तहिना अ मे ह्रस्व आ दीर्घक मात्राक प्रयोग अनुचित)
जकाँ / जेकाँ
तँइ/ तैँ/
होएत / हएत
नञि/ नहि/ नँइ/ नइँ/ नै
सौँसे/ सौंसे
बड /
बडी (झोराओल)
गाए (गाइ नहि), मुदा गाइक दूध (गाएक दूध नै।)
रहलेँ/ पहिरतैँ
हमहीं/ अहीं
सब - सभ
सबहक - सभहक
धरि - तक
गप- बात
बूझब - समझब
बुझलौं/ समझलौं/ बुझलहुँ - समझलहुँ
हमरा आर - हम सभ
आकि- आ कि
सकैछ/ करैछ (गद्यमे प्रयोगक आवश्यकता नै)
होइन/ होनि
जाइन (जानि नै, जेना देल जाइन) मुदा जानि-बूझि (अर्थ परिव्र्तन)
पइठ/ जाइठ
आउ/ जाउ/ आऊ/ जाऊ
मे, केँ, सँ, पर (शब्दसँ सटा कऽ) तँ कऽ धऽ दऽ (शब्दसँ हटा कऽ) मुदा दूटा वा बेसी विभक्ति संग रहलापर पहिल विभक्ति टाकेँ सटाऊ। जेना ऐमे सँ ।
एकटा , दूटा (मुदा कए टा)
बिकारीक प्रयोग शब्दक अन्तमे, बीचमे अनावश्यक रूपेँ नै। आकारान्त आ अन्तमे अ क बाद बिकारीक प्रयोग नै (जेना दिअ
, आ/ दिय’ , ’, आ नै )
अपोस्ट्रोफीक प्रयोग बिकारीक बदलामे करब अनुचित आ मात्र फॉन्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक)- ओना बिकारीक संस्कृत रूप ऽ अवग्रह कहल जाइत अछि आ वर्तनी आ उच्चारण दुनू ठाम एकर लोप रहैत अछि/ रहि सकैत अछि (उच्चारणमे लोप रहिते अछि)। मुदा अपोस्ट्रोफी सेहो अंग्रेजीमे पसेसिव केसमे होइत अछि आ फ्रेंचमे शब्दमे जतए एकर प्रयोग होइत अछि जेना raison d’etre एतए सेहो एकर उच्चारण रैजौन डेटर होइत अछि, माने अपोस्ट्रॉफी अवकाश नै दैत अछि वरन जोडैत अछि, से एकर प्रयोग बिकारीक बदला देनाइ तकनीकी रूपेँ सेहो अनुचित)।
अइमे, एहिमे/ ऐमे
जइमे, जाहिमे
एखन/ अखन/ अइखन

केँ (के नहि) मे (अनुस्वार रहित)
भऽ
मे
दऽ
तँ (तऽ, नै)
सँ ( सऽ स नै)
गाछ तर
गाछ लग
साँझ खन
जो (जो go, करै जो do)
 तै/तइ जेना- तै दुआरे/ तइमे/ तइले
जै/जइ जेना- जै कारण/ जइसँ/ जइले
ऐ/अइ जेना- ऐ कारण/ ऐसँ/ अइले/ मुदा एकर एकटा खास प्रयोग- लालति‍ कतेक दि‍नसँ कहैत रहैत अइ
लै/लइ जेना लैसँ/ लइले/ लै दुआरे
लहँ/ लौं

गेलौं/ लेलौं/ लेलँह/ गेलहुँ/ लेलहुँ/ लेलँ
जइ/ जाहि‍/ जै
जहि‍ठाम/ जाहि‍ठाम/ जइठाम/ जैठाम
एहि‍/ अहि‍/
अइ (वाक्यक अंतमे ग्राह्य) /
अइछ/ अछि‍/ ऐछ
तइ/ तहि‍/ तै/ ताहि‍
ओहि‍/ ओइ
सीखि‍/ सीख
जीवि‍/ जीवी/ जीब 
भलेहीं/ भलहि‍ं 
तैं/ तँइ/ तँए
जाएब/ जएब
लइ/ लै
छइ/ छै
नहि‍/ नै/ नइ
गइ/ गै 
छनि‍/ छन्‍हि ...
समए शब्‍दक संग जखन कोनो वि‍भक्‍ति‍ जुटै छै तखन समै जना समैपर इत्‍यादि‍। असगरमे हृदए आ वि‍भक्‍ति‍ जुटने हृदे जना हृदेसँ, हृदेमे इत्‍यादि‍।  
जइ/ जाहि‍/
जै
जहि‍ठाम/ जाहि‍ठाम/ जइठाम/ जैठाम
एहि‍/ अहि‍/ अइ/
अइछ/ अछि‍/ ऐछ
तइ/ तहि‍/ तै/ ताहि‍
ओहि‍/ ओइ
सीखि‍/ सीख
जीवि‍/ जीवी/
जीब 
भले/ भलेहीं/
भलहि‍ं 
तैं/ तँइ/ तँए
जाएब/ जएब
लइ/ लै
छइ/ छै
नहि‍/ नै/ नइ
गइ/
गै 
छनि‍/ छन्‍हि‍
चुकल अछि/ गेल गछि
२.२. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम
नीचाँक सूचीमे देल विकल्पमेसँ लैंगुएज एडीटर द्वारा कोन रूप चुनल जेबाक चाही:
बोल्ड कएल रूप ग्राह्य:  
१.होयबला/ होबयबला/ होमयबला/ हेब’बला, हेम’बला/ होयबाक/होबएबला /होएबाक
२. आ’/आऽ
३. क’ लेने/कऽ लेने/कए लेने/कय लेने/ल’/लऽ/लय/लए
४. भ’ गेल/भऽ गेल/भय गेल/भए
गेल
५. कर’ गेलाह/करऽ
गेलह/करए गेलाह/करय गेलाह
६.
लिअ/दिअ लिय’,दिय’,लिअ’,दिय’/
७. कर’ बला/करऽ बला/ करय बला करैबला/क’र’ बला /
करैवाली
८. बला वला (पुरूष), वाली (स्‍त्री) ९
.
आङ्ल आंग्ल
१०. प्रायः प्रायह
११. दुःख दुख १
२. चलि गेल चल गेल/चैल गेल
१३. देलखिन्ह देलकिन्ह, देलखिन
१४.
देखलन्हि देखलनि/ देखलैन्ह
१५. छथिन्ह/ छलन्हि छथिन/ छलैन/ छलनि
१६. चलैत/दैत चलति/दैति
१७. एखनो
अखनो
१८.
बढ़नि‍ बढइन बढन्हि
१९. ओ’/ओऽ(सर्वनाम)
२०
. ओ (संयोजक) ओ’/ओऽ
२१. फाँगि/फाङ्गि फाइंग/फाइङ
२२.
जे जे’/जेऽ २३. ना-नुकुर ना-नुकर
२४. केलन्हि/केलनि‍/कयलन्हि
२५. तखनतँ/ तखन तँ
२६. जा
रहल/जाय रहल/जाए रहल
२७. निकलय/निकलए
लागल/ लगल बहराय/ बहराए लागल/ लगल निकल’/बहरै लागल
२८. ओतय/ जतय जत’/ ओत’/ जतए/ ओतए
२९.
की फूरल जे कि फूरल जे
३०. जे जे’/जेऽ
३१. कूदि / यादि(मोन पारब) कूइद/याइद/कूद/याद/
यादि (मोन)
३२. इहो/ ओहो
३३.
हँसए/ हँसय हँसऽ
३४. नौ आकि दस/नौ किंवा दस/ नौ वा दस
३५. सासु-ससुर सास-ससुर
३६. छह/ सात छ/छः/सात
३७.
की  की’/ कीऽ (दीर्घीकारान्तमे ऽ वर्जित)
३८. जबाब जवाब
३९. करएताह/ करेताह करयताह
४०. दलान दिशि दलान दिश/दलान दिस
४१
. गेलाह गएलाह/गयलाह
४२. किछु आर/ किछु और/ किछ आर
४३. जाइ छल/ जाइत छल जाति छल/जैत छल
४४. पहुँचि/ भेट जाइत छल/ भेट जाइ छलए पहुँच/ भेटि‍ जाइत छल
४५.
जबान (युवा)/ जवान(फौजी)
४६. लय/ लए ’/ कऽ/ लए कए / लऽ कऽ/ लऽ कए
४७. ल’/लऽ कय/
कए
४८. एखन / एखने / अखन / अखने
४९.
अहींकेँ अहीँकेँ
५०. गहींर गहीँर
५१.
धार पार केनाइ धार पार केनाय/केनाए
५२. जेकाँ जेँकाँ/
जकाँ
५३. तहिना तेहिना
५४. एकर अकर
५५. बहिनउ बहनोइ
५६. बहिन बहिनि
५७. बहिन-बहिनोइ
बहिन-बहनउ
५८. नहि/ नै
५९. करबा / करबाय/ करबाए
६०. तँ/ त ऽ तय/तए
६१. भैयारी मे छोट-भाए/भै/, जेठ-भाय/भाइ,
६२. गि‍नतीमे दू भाइ/भाए/भाँइ  
६३. ई पोथी दू भाइक/ भाँइ/ भाए/ लेल। यावत जावत
६४. माय मै / माए मुदा माइक ममता
६५. देन्हि/ दइन दनि‍/ दएन्हि/ दयन्हि दन्हि/ दैन्हि
६६. द’/ दऽ/ दए
६७. (संयोजक) ओऽ (सर्वनाम)
६८. तका कए तकाय तकाए
६९. पैरे (on foot) पएरे  कएक/ कैक
७०.
ताहुमे/ ताहूमे
 ७१.
पुत्रीक
७२.
बजा कय/ कए / कऽ
७३. बननाय/बननाइ
७४. कोला
७५.
दिनुका दिनका
७६.
ततहिसँ
७७. गरबओलन्हि/ गरबौलनि‍/
  गरबेलन्हि/ गरबेलनि‍
७८. बालु बालू
७९.
चेन्ह चिन्ह(अशुद्ध)
८०. जे जे’
८१
. से/ के से’/के’
८२. एखुनका अखनुका
८३. भुमिहार भूमिहार
८४. सुग्गर
/ सुगरक/ सूगर
८५. झठहाक झटहाक ८६.
छूबि
८७. करइयो/ओ करैयो ने देलक /करियौ-करइयौ
८८. पुबारि
पुबाइ
८९. झगड़ा-झाँटी
झगड़ा-झाँटि
९०. पएरे-पएरे पैरे-पैरे
९१. खेलएबाक
९२. खेलेबाक
९३. लगा
९४. होए- होहोअए
९५. बुझल बूझल
९६.
बूझल (संबोधन अर्थमे)
९७. यैह यएह / इएह/ सैह/ सएह
९८. तातिल
९९. अयनाय- अयनाइ/ अएनाइ/ एनाइ
१००. निन्न- निन्द
१०१.
बिनु बिन
१०२. जाए जाइ
१०३.
जाइ (in different sense)-last word of sentence
१०४. छत पर आबि जाइ
१०५.
ने
१०६. खेलाए (play) –खेलाइ
१०७. शिकाइत- शिकायत
१०८.
ढप- ढ़प
१०९
. पढ़- पढ
११०. कनिए/ कनिये कनिञे
१११. राकस- राकश
११२. होए/ होय होइ
११३. अउरदा-
औरदा
११४. बुझेलन्हि (different meaning- got understand)
११५. बुझएलन्हि/बुझेलनि‍/ बुझयलन्हि (understood himself)
११६. चलि- चल/ चलि‍ गेल
११७. खधाइ- खधाय
११८.
मोन पाड़लखिन्ह/ मोन पाड़लखि‍न/ मोन पारलखिन्ह
११९. कैक- कएक- कइएक
१२०.
लग ल’ग 
१२१. जरेनाइ
१२२. जरौनाइ जरओनाइ- जरएनाइ/
जरेनाइ
१२३. होइत
१२४.
गरबेलन्हि/ गरबेलनि‍ गरबौलन्हि/ गरबौलनि‍
१२५.
चिखैत- (to test)चिखइत
१२६. करइयो (willing to do) करैयो
१२७. जेकरा- जकरा
१२८. तकरा- तेकरा
१२९.
बिदेसर स्थानेमे/ बिदेसरे स्थानमे
१३०. करबयलहुँ/ करबएलहुँ/ करबेलहुँ करबेलौं
१३१.
हारिक (उच्चारण हाइरक)
१३२. ओजन वजन आफसोच/ अफसोस कागत/ कागच/ कागज
१३३. आधे भाग/ आध-भागे
१३४. पिचा / पिचाय/पिचाए
१३५. नञ/ ने
१३६. बच्चा नञ
(ने) पिचा जाय
१३७. तखन ने (नञ) कहैत अछि। कहै/ सुनै/ देखै छल मुदा कहैत-कहैत/ सुनैत-सुनैत/ देखैत-देखैत
१३८.
कतेक गोटे/ कताक गोटे
१३९. कमाइ-धमाइ/ कमाई- धमाई
१४०
. लग ल’ग
१४१. खेलाइ (for playing)
१४२.
छथिन्ह/ छथिन
१४३.
होइत होइ
१४४. क्यो कियो / केओ
१४५.
केश (hair)
१४६.
केस (court-case)
१४७
. बननाइ/ बननाय/ बननाए
१४८. जरेनाइ
१४९. कुरसी कुर्सी
१५०. चरचा चर्चा
१५१. कर्म करम
१५२. डुबाबए/ डुबाबै/ डुमाबै डुमाबय/ डुमाबए
१५३. एखुनका/
अखुनका
१५४. लए/ लिअए (वाक्यक अंतिम शब्द)- लऽ
१५५. कएलक/
केलक
५६. गरमी गर्मी
१५७
. वरदी वर्दी
१५८. सुना गेलाह सुना’/सुनाऽ
१५९. एनाइ-गेनाइ
१६०.
तेना ने घेरलन्हि/ तेना ने घेरलनि‍
१६१. नञि / नै
१६२.
डरो ड’रो
१६३. कतहु/ कतौ कहीं
१६४. उमरिगर-उमेरगर उमरगर
१६५. भरिगर
१६६. धोल/धोअल धोएल
१६७. गप/गप्प
१६८.
के के’
१६९. दरबज्जा/ दरबजा
१७०. ठाम
१७१.
धरि तक
१७२.
घूरि लौटि
१७३. थोरबेक
१७४. बड्ड
१७५. तोँ/ तू
१७६. तोँहि( पद्यमे ग्राह्य)
१७७. तोँही / तोँहि
१७८.
करबाइए करबाइये
१७९. एकेटा
१८०. करितथि /करतथि
 १८१.
पहुँचि/ पहुँच
१८२. राखलन्हि रखलन्हि/ रखलनि‍
१८३.
लगलन्हि/ लगलनि‍ लागलन्हि
१८४.
सुनि (उच्चारण सुइन)
१८५. अछि (उच्चारण अइछ)
१८६. एलथि गेलथि
१८७. बितओने/ बि‍तौने/
बितेने
१८८. करबओलन्हि/ करबौलनि‍/
करेलखिन्ह/ करेलखि‍न
१८९. करएलन्हि/ करेलनि‍
१९०.
आकि/ कि
१९१. पहुँचि/
पहुँच
१९२. बत्ती जराय/ जराए जरा (आगि लगा)
१९३.
से से’
१९४.
हाँ मे हाँ (हाँमे हाँ विभक्त्तिमे हटा कए)
१९५. फेल फैल
१९६. फइल(spacious) फैल
१९७. होयतन्हि/ होएतन्हि/ होएतनि‍/हेतनि‍/ हेतन्हि
१९८. हाथ मटिआएब/ हाथ मटियाबय/हाथ मटियाएब
१९९. फेका फेंका
२००. देखाए देखा
२०१. देखाबए
२०२. सत्तरि सत्तर
२०३.
साहेब साहब
२०४.गेलैन्ह/ गेलन्हि/ गेलनि‍
२०५. हेबाक/ होएबाक
२०६.केलो/ कएलहुँ/केलौं/ केलुँ
२०७. किछु न किछु/
किछु ने किछु
२०८.घुमेलहुँ/ घुमओलहुँ/ घुमेलौं
२०९. एलाक/ अएलाक
२१०. अः/ अह
२११.लय/
लए (अर्थ-परिवर्त्तन) २१२.कनीक/ कनेक
२१३.सबहक/ सभक
२१४.मिलाऽ/ मिला
२१५.कऽ/
२१६.जाऽ/
जा
२१७.आऽ/
२१८.भऽ /भ’ ( फॉन्टक कमीक द्योतक)
२१९.निअम/ नियम
२२०
.हेक्टेअर/ हेक्टेयर
२२१.पहिल अक्षर ढ/ बादक/ बीचक ढ़
२२२.तहिं/तहिँ/ तञि/ तैं
२२३.कहिं/ कहीं
२२४.तँइ/
तैं / तइँ
२२५.नँइ/ नइँ/  नञि/ नहि/नै
२२६.है/ हए / एलीहेँ/
२२७.छञि/ छै/ छैक /छइ
२२८.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ
२२९. (come)/ आऽ(conjunction)
२३०.
आ (conjunction)/ आऽ(come)
२३१.कुनो/ कोनो, कोना/केना
२३२.गेलैन्ह-गेलन्हि-गेलनि‍
२३३.हेबाक- होएबाक
२३४.केलौँ- कएलौँ-कएलहुँ/केलौं
२३५.किछु न किछ- किछु ने किछु
२३६.केहेन- केहन
२३७.आऽ (come)- (conjunction-and)/आ। आब'-आब' /आबह-आबह
२३८. हएत-हैत
२३९.घुमेलहुँ-घुमएलहुँ- घुमेलाें
२४०.एलाक- अएलाक
२४१.होनि- होइन/ होन्हि/
२४२.ओ-राम ओ श्यामक बीच(conjunction), ओऽ कहलक (he said)/
२४३.की हए/ कोसी अएली हए/ की है। की हइ
२४४.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ
२४५
.शामिल/ सामेल
२४६.तैँ / तँए/ तञि/ तहिं
२४७.जौं
/ ज्योँ/ जँ/
२४८.सभ/ सब
२४९.सभक/ सबहक
२५०.कहिं/ कहीं
२५१.कुनो/ कोनो/ कोनहुँ/
२५२.फारकती भऽ गेल/ भए गेल/ भय गेल
२५३.कोना/ केना/ कन्‍ना/कना
२५४.अः/ अह
२५५.जनै/ जनञ
२५६.गेलनि‍/
गेलाह (अर्थ परिवर्तन)
२५७.केलन्हि/ कएलन्हि/ केलनि‍/
२५८.लय/ लए/ लएह (अर्थ परिवर्तन)
२५९.कनीक/ कनेक/कनी-मनी
२६०.पठेलन्हि‍ पठेलनि‍/ पठेलइन/ पपठओलन्हि/ पठबौलनि‍/
२६१.निअम/ नियम
२६२.हेक्टेअर/ हेक्टेयर
२६३.पहिल अक्षर रहने ढ/ बीचमे रहने ढ
२६४.आकारान्तमे बिकारीक प्रयोग उचित नै/ अपोस्ट्रोफीक प्रयोग फान्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक ओकर बदला अवग्रह (बिकारी) क प्रयोग उचित
२६५.केर (पद्यमे ग्राह्य) / -/ कऽ/ के
२६६.छैन्हि- छन्हि
२६७.लगैए/ लगैये
२६८.होएत/ हएत
२६९.जाएत/ जएत/
२७०.आएत/ अएत/ आओत
२७१
.खाएत/ खएत/ खैत
२७२.पिअएबाक/ पिएबाक/पि‍येबाक
२७३.शुरु/ शुरुह
२७४.शुरुहे/ शुरुए
२७५.अएताह/अओताह/ एताह/ औताह
२७६.जाहि/ जाइ/ जइ/ जै/
२७७.जाइत/ जैतए/ जइतए
२७८.आएल/ अएल
२७९.कैक/ कएक
२८०.आयल/ अएल/ आएल
२८१. जाए/ जअए/ जए (लालति‍ जाए लगलीह।)
२८२. नुकएल/ नुकाएल
२८३. कठुआएल/ कठुअएल
२८४. ताहि/ तै/ तइ
२८५. गायब/ गाएब/ गएब
२८६. सकै/ सकए/ सकय
२८७.सेरा/सरा/ सराए (भात सरा गेल)
२८८.कहैत रही/देखैत रही/ कहैत छलौं/ कहै छलौं- अहिना चलैत/ पढैत
(पढै-पढैत अर्थ कखनो काल परिवर्तित) - आर बुझै/ बुझैत (बुझै/ बुझै छी, मुदा बुझैत-बुझैत)/ सकैत/ सकै। करैत/ करै। दै/ दैत। छैक/ छै। बचलै/ बचलैक। रखबा/ रखबाक । बिनु/ बिन। रातिक/ रातुक बुझै आ बुझैत केर अपन-अपन जगहपर प्रयोग समीचीन अछि‍। बुझैत-बुझैत आब बुझलि‍ऐ। हमहूँ बुझै छी।
२८९. दुआरे/ द्वारे
२९०.भेटि/ भेट/ भेँट
२९१.
खन/ खीन/  खुना (भोर खन/ भोर खीन)
२९२.तक/ धरि
२९३.गऽ/ गै (meaning different-जनबै गऽ)
२९४.सऽ/ सँ (मुदा दऽ, लऽ)
२९५.त्त्व,(तीन अक्षरक मेल बदला पुनरुक्तिक एक आ एकटा दोसरक उपयोग) आदिक बदला त्व आदि। महत्त्व/ महत्व/ कर्ता/ कर्त्ता आदिमे त्त संयुक्तक कोनो आवश्यकता मैथिलीमे नै अछि। वक्तव्य
२९६.बेसी/ बेशी
२९७.बाला/वाला बला/ वला (रहैबला)
२९८
.वाली/ (बदलैवाली)
२९९.वार्त्ता/ वार्ता
३००. अन्तर्राष्ट्रिय/ अन्तर्राष्ट्रीय
३०१. लेमए/ लेबए
३०२.लमछुरका, नमछुरका
३०२.लागै/ लगै (
भेटैत/ भेटै)
३०३.लागल/ लगल
३०४.हबा/ हवा
३०५.राखलक/ रखलक
३०६. (come)/ (and)
३०७. पश्चाताप/ पश्चात्ताप
३०८. ऽ केर व्यवहार शब्दक अन्तमे मात्र, यथासंभव बीचमे नै।
३०९.कहैत/ कहै
३१०.
रहए (छल)/ रहै (छलै) (meaning different)
३११.तागति/ ताकति
३१२.खराप/ खराब
३१३.बोइन/ बोनि/ बोइनि
३१४.जाठि/ जाइठ
३१५.कागज/ कागच/ कागत
३१६.गिरै (meaning different- swallow)/ गिरए (खसए)
३१७.राष्ट्रिय/ राष्ट्रीय
DATE-LIST (year- 2013-14)
(१४२१ फसली साल)
Marriage Days:
Nov.2013- 18, 20, 24, 25, 28, 29
Dec.2013- 1, 4, 6, 8, 12, 13
January 2014- 19, 20, 22, 23, 24, 26, 31.
Feb.2014- 3, 5, 6, 9, 10, 17, 19, 24, 26, 27.
March 2014- 2, 3, 5, 7, 9.
April 2014- 16, 17, 18, 20, 21, 23, 24.
May 2014- 1, 2, 8, 9, 11, 12, 18, 19, 21, 25, 26, 28, 29, 30.
June 2014- 4, 5, 8, 9, 13, 18, 22, 25.
July 2014- 2, 3, 4, 6, 7.
Upanayana Days:
February 2014- 2, 4, 9, 10.
March 2014- 3, 5, 11, 12.
April 2014- 4, 9, 10.
June 2014- 2, 8, 9.
Dviragaman Din:
November 2013- 18, 21, 22.
December 2013- 4, 6, 8, 9, 12, 13.
February 2014- 16, 17, 19, 20.
March 2014- 2, 3, 5, 9, 10, 12.
April 2014- 16, 17, 18, 20.
May 2014- 1, 2, 9, 11, 12.
Mundan Din:
November 2013- 20, 22.
December 2013- 9, 12, 13.
January 2014- 16, 17.
February 2014- 6, 10, 19, 20.
March 2014- 5, 12.
April 2014- 16.
May 2014- 12, 30.
June 2014- 2, 9, 30.

FESTIVALS OF MITHILA (2013-14)
Mauna Panchami-27 July
Madhushravani- 9 August
Nag Panchami- 11 August
Raksha Bandhan- 21 Aug
Krishnastami- 28 August
Kushi Amavasya / Somvari Vrat- 5 September
Hartalika Teej- 8 September
ChauthChandra-8 September
Vishwakarma Pooja- 17 September
Anant Caturdashi- 18 Sep
Pitri Paksha begins- 20 Sep
Jimootavahan Vrata/ Jitia-27 Sep
Matri Navami-28 Sep
Kalashsthapan- 5 October
Belnauti- 10 October
Patrika Pravesh- 11 October
Mahastami- 12 October
Maha Navami - 13 October
Vijaya Dashami- 14 October
Kojagara- 18 Oct
Dhanteras- 1 November
Diyabati, shyama pooja-3 November
Annakoota/ Govardhana Pooja-4 November
Bhratridwitiya/ Chitragupta Pooja- 5 November
Chhathi -8 November
Sama Poojaarambh- 9 November
Devotthan Ekadashi- 13 November
ravivratarambh- 17 November
Navanna parvan- 20 November
KartikPoornima- Sama Visarjan- 2 December
Vivaha Panchmi- 7 December
Makara/ Teela Sankranti-14 Jan
Naraknivaran chaturdashi- 29 January
Basant Panchami/ Saraswati Pooja- 4 February
Achla Saptmi- 6 February
Mahashivaratri-27 February
Holikadahan-Fagua-16 March
Holi- 17 March
Saptadora- 17 March
Varuni Trayodashi-28 March
Jurishital-15 April
Ram Navami- 8 April
Akshaya Tritiya-2 May
Janaki Navami- 8 May
Ravi Brat Ant- 11 May
Vat Savitri-barasait- 28 May
Ganga Dashhara-8 June
Harivasar Vrata- 9 July
Shree Guru Poornima-12 Jul
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१६. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका ऑडियो आर्काइव
१७. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका वीडियो आर्काइव
१८. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मिथिला चित्रकला, आधुनिक कला आ चित्रकला
१९. मैथिल आर मिथिला (मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय जालवृत्त)
२०.श्रुति प्रकाशन
२३.गजेन्द्र ठाकुर इ‍डेक्स
 २४. नेना भुटका
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'विदेह' २२५ म अंक ०१ मई २०१७ (वर्ष १० मास ११३ अंक २२५)

ऐ  अंकमे अछि :- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१. १. राजदेव मण्‍डल -  दूटा बीहैन क था २. रबीन्‍द्र नारायण मिश...