Sunday, November 10, 2013

‘विदेह' १३७ म अंक ०१ सितम्बर २०१३ (वर्ष ६ मास ६९ अंक १३७) PART III

  नन्द विलास राय (सखारी-पेटारी)

वाड़ीक पटुआ
डाक्‍टर प्रमोद कलकत्ता मेडि‍कल कौलेजसँ एम.डी.क डि‍ग्री लऽ गाम एला। गाममे पि‍ताजी आ मि‍त्र सभसँ क्‍लीनि‍क खोलैक वि‍चार करए लगला। मि‍त्र सभ लहेरि‍यासरायक वि‍चार देलकनि‍। मुदा पि‍ताजी कहलकनि‍-
लहेरि‍यासरायमे तँ एक-पर-एक डाक्‍टर सभ अछि‍ए जे रोगीक इलाज करैए। कि‍छु डाक्‍टर सेवा-भावनासँ इलाज करै छथि‍ तँ कि‍छु सोलहैनी पेशा बनेने अछि‍। रंग-रंगक ढाढ़स करैत कहत जे हम डाक्‍टर छी आकि‍ अहाँ। जे कहै छी से करू नै तँ...। सोवहावि‍को छै ओइ वि‍भागक तरी-घटी, नीक-बेजाएक ज्ञान आमकेँ छैइहो नै। तँए सोलहैनी सुतरबो करै छै। से नै तँ गामेमे क्‍लीनि‍क खोलह जे सामाजोकेँ लाभ हेतै आ तोरो जि‍नगीक महत रहतह।
     डाक्‍टर प्रोमदक पि‍ता अनंत प्रसाद समाज सेवी बेकती। सबहक दुख-सुखमे संग रहए बला। केतेको मरीज सभकेँ लहेरि‍यासराय लऽ जा इलाज करा अनने छथि‍न। तँए हि‍नका सभ गपक तजुरबा छन्‍हि‍। डाक्‍टरकेँ भगवान बुझै छथि‍न मुदा डाक्‍टरो तँ रंग-बि‍रंगक अछि‍। सेहो फर्क करैत रहै छथि‍न। प्रमोदकेँ डाक्‍टरी पढ़ेबाक उदेस छेलनि‍ जे गाम-देहातमे समैपर इलाजक अभावसँ केते लोक काल-कलवित भऽ जाइए। तँए देहातोमे डाक्‍टर जरूरी छै। ओ केतोको डाक्‍टरकेँ आग्रह सेहो केलखि‍न मुदा कि‍यो तैयार नै भेलनि‍। मुदा डाक्‍टर प्रमोद तँ अपन खून छि‍यनि‍। हुनकापर अनंत प्रसादकेँ तँ पूरा अधि‍कार छन्‍हि‍। ओना डाक्‍टर प्रमोदोमे पि‍ताक गुण-बेवहार छन्‍हि‍। जखनि‍ ओ मेडि‍कल कौलेजमे एम.डी.क पढ़ाइ कऽ रहल छला तहू समैमे केतेको मरीज सभकेँ मदति‍ केने रहथि‍न। अनंत प्रसादक कहब रहनि‍ जे बेरमेमे क्‍लीनि‍क खोलल जाए। मुदा बेरमामे तँ खून, लगही, पैखाना इत्‍यादि‍क जाँचक तँ सुवि‍धा नै अछि‍ तँए सबहक वि‍चार भेल जे प्रमोद ि‍नर्मलीमे क्‍लीनि‍क खोलता आ सप्‍ताहे-सप्‍ताह बेरमामे समए देथि‍न। अनंत प्रसाद प्रमोदकेँ कहलखि‍न-
बौआ, सेवाक भावनासँ मरीजक इलाज करि‍हअ। भगवान अहीमे बड़्क्कति‍ देथुन। एकर मतलब ईहो नै जे सोलहैनी फोकटेमे इलाज करब। अपन उचि‍त फीस लऽ रोगीक इलाज करि‍हअ। तहि‍ना उचि‍त दबाइओ आ जाँचो करबि‍हक।
डाक्‍टर प्रमोद कहलकनि‍-
सएह करब बाबूजी।
     ि‍नर्मलीमे क्‍लीनि‍क खोलला छह मास नै बि‍तल हएत। परोपट्टामे हुनकर नओंक डंका बाजए लगल। रोगी आ रोगीक संबन्‍धी सभ डाक्‍टर साहैबकेँ जश दि‍अए लगलनि‍। जगदगरसँ जगदगर ि‍बमारी डाक्‍टर साहैब ठीक केलखि‍न। सभसँ पैघ बात ई जे गरीब रोगीक इलाज बि‍नु फि‍सेक करै छथि‍न। दबाइओ फाजील नै लि‍खै छथि‍न तँए रोगी सबहक भीड़ लगल रहलैए। रवि‍ दि‍न छह बजि‍या ट्रेन पकड़ि‍ राेगी देखए बेरमा चलि‍ जाइ छथि‍न। ओतौ बहुत रोगी सभ रहैत अछि‍। सभ रोगीक इलाज कऽ रतुका ट्रेनसँ आपस ि‍नर्मली चलि‍ अबै छथि‍न। बेरमामे बेसी रोगी रहलापर कखनो काल अँटकैओ पड़ै छन्‍हि‍।
     डाक्‍टर साहैबक पि‍ताक मि‍त्र छथि‍न मंगनू प्रसाद। ओहो बेरमेक बासी छथि‍न। अनंत प्रसादक लंगोटि‍या संगी। डाक्‍टर साहैब मंगनू प्रसादकेँ बड़ इज्‍जति‍ करै छथि‍न। प्राय: सभ रवि‍ मंगनू प्रसाद डाक्‍टर साहैबसँ भेँट करए क्‍लीनि‍कपर आबि‍ जाइ छथि‍न। डाक्‍टर साहैब हुनका चाहो-पान करबै छथि‍न।
     आइ रवि‍ छी। आब बजे धरि‍ डाक्‍टर साहैब बेरमा क्‍लीनि‍कपर पहुँचता। ई गप सभकेँ बूझल छन्‍हि‍। हम चौकपर चाह पीऐत रही। देखै छी जे मंगनू प्रसाद आ हुनकर पुतोहु आ पोता रि‍क्‍शापर बैस तमुरि‍या दि‍स जा रहल छथि‍। हम लग जा पुछलि‍यनि‍-
मंगनू बाबू अपने लोकनि‍ केतए जा रहल छि‍ऐ?”
मंगनू प्रसाद कहलनि‍-
तमुरि‍या जा रहल छी। ट्रेन पकड़ि‍ लहेरि‍यासराय जाएब। गोपालकेँ मन खराब छै।
तैपर हम कहलि‍यनि‍-
आइ तँ रवि‍ छी। डाक्‍टर प्रमोदो एबे करता। हुनकासँ एक बेर देखा दैति‍ऐ। इलाज तँ ओहो नीक्के करै छथि‍ आ बच्‍चे वि‍भागक छथि‍ओ।
मंगनू प्रसाद कहलनि‍-
छोड़ू, हमरा लहेरि‍येसराय जाए दि‍अ। हम गाम-घरक फेरमे नै रहए चाहै छी।
ई कहि‍ ओ रि‍क्‍शाबलाकेँ इशारा दैत वि‍दा भऽ गेला।
आठ बजे डाक्‍टर प्रमोद क्‍लीनि‍कपर पहुँचला। हमरो ब्‍लड प्रेशर जँचेबाक रहए तँए हमहूँ ओतै रही। हमरा मुँहसँ अनासुरती नि‍कलि‍ गेल-
तमुरि‍या टीशनपर मंगनू भेटबो केला।
डाक्‍टर साहैब कहलनि‍-
नै तँ, से की? केतए गेला हेन मि‍त्ता काका?”
हम कहलि‍यनि‍-
पोताकेँ डाक्‍टरसँ देखबैले लहेरि‍यासराय गेला हेन। हम कहबो केलि‍यनि‍ अहाँ दऽ जे एबे करता। मुदा कहलनि‍ जे छोड़ू हमरा लहेरि‍येसराय जाए दि‍अ।
डाक्‍टर साहैब बजला-
जाए दि‍यनु।
     लहेरि‍यासरायमे मंगनू प्रसाद अपना पोताकेँ डाक्‍टरसँ देखौलखि‍न। डाक्‍टर साहैब तीन सए फीस लेलकनि‍। दू हजारक जाँच आ छह सएक अल्ट्रसाउण्‍ड लि‍खलकनि‍। जाँच-परतालक पछाति‍ दू हजारक दबाइ लि‍खलखि‍न। अदहा दबाइसँ बेसीए दबाइ चललोपर गोपालक पेटक दरद ठीक नै भेल। तखनि‍ हारि‍-थाकि‍ कऽ डाक्‍टर प्रमोद लग ि‍नर्मली लऽ जा कहलखि‍न-
हौ डाक्‍टर, लहेरि‍यासरायमे चारि‍ हजारसँ बेसीए खर्च भऽ गेल मुदा गोपलाक दरद कनि‍योँ उन्नैस नै भेल। से कनी देखहक।
डाक्‍टर साहैब गोपालक सभटा जाँचक पुर्जा देखलखि‍न। लहेरि‍यासरायक डाक्‍टर सभटा पटनि‍याँ दबाइ लि‍खने रहै। जाँचो अनाप-सनाप करबौने छेलै। से सभ सभ देखि‍ डाक्‍टर प्रमोद लहेरि‍यासरायक सभटा दबाइ बन्न कऽ मात्र दू सए टाकाक दबाइ लि‍खलखि‍न। तीने ि‍दन दबाइ खेला पछाति गोपालक दरद ठीक भऽ गेल।
     अगि‍ला रवि‍ मंगनू प्रसाद बेरमामे डाक्‍टर साहैबक क्‍लीनि‍कपर जा भेँट कऽ तारतम कहलकनि‍-
हौ, हम तँ लहेरि‍यासराय जा ठका गेलौं। तोहर लि‍खलाहा दबाइ तीनि‍ए दि‍न खेलापर गोपला पेटक दरद सोलहैनी ठीक भऽ गेल।
डाक्‍टर साहैब मंगनू प्रसादकेँ कहलखि‍न-
यौ काका, हम तँ वाड़ीक पटुआ छी। जे तीत सभ दि‍नसँ होइत रहलै हेन।
मंगनू बाबू कि‍छु नै बजला।


डाक्‍टर बेटा
रामकुमार चटिया सभकेँ पढ़ा अँगना एला तँ पत्नीकेँ कनैत देखलनि। देखिते ओ अकबका गेला। पुछलखि‍न-
की भेल?”
पत्नी कनिते कहलकनि-
छि‍टहीसँ बाबूजी फोन केने रहथि‍न, माएकेँ लकबा मारि देलक। बजबो-भुकबो ने करै छै।
रामकुमार पुछलकनि-
कहि‍या लकबा मारलक?”
पत्नी कहलकनि-
परसू रातिमे। बाबूजी बजै छेलखि‍न जे बँचत कि नै तेकर कोनो ठीक नै। अपना सभकेँ परसू रातिएसँ फोन लगबै छेलखि‍न मुदा फोने ने लगलनि।
रामकुमार बाजल-
तखनि तँ आइए छि‍टही जाए पड़त। माएक उमेरो तँ अस्‍सीसँ कम नै हेतनि‍। काेन ठीक कखनि‍ चलि‍ जेती। चलू दस बजि‍या बस पकड़ि‍ ली। ओना तँ गहुमक दौनी करब जरूरी अछि‍। रहि-रहि कऽ मेघ अबै छै। जँ बरखा भऽ जाएत तँ बुझू गहुमक खिजानैत भऽ जाएत। थ्रेसरबला शम्‍भु कल्हुका नाओं कहने रहथि‍। मुदा अपना नै रहने दौनी केना हएत। शंभुकेँ फोन लगा कहि दइ छि‍यनि‍ जे हम काल्हि‍ नै रहब अन्‍तए जा रहल छी। ओतएसँ एला पछाति‍ दौन कराएब। अच्‍छा जे हएत से हएत। माएक जि‍ज्ञासा करब तँ जरूरीए अछि‍। हुनका सभकेँ के छन्‍हि‍। एकटा बेटो छन्‍हि‍ जे पटनामे डाक्‍टरी करै छथि‍न, परि‍वार लऽ कऽ ओतइ रहै छथि‍न।
छि‍टहीवाली बजली-
एकटा काज करू, खेखनाकेँ बजा गहुमक बोझ करि‍या दि‍यौ आ ऊपरसँ ति‍रपाल ओझा झाँपि‍ दि‍औ। बरखो हएत तँ नोकसान नै हएत। छि‍टहीसँ कहि‍या आएब तेकर कोन ठीक।
रामकुमार कहलकनि‍-
ठीके कहै छि‍ऐ। ति‍रपाल तँ अछि‍ए कनी मेहनति‍ करए पड़त। दसबजि‍या बस नै पकड़ि‍ बरहबजि‍या पकड़ए पड़त। गहुम झाँपल रहने चि‍न्‍ता नै रहत।
सएह केलनि। गहुमकेँ सेरि‍आ झाँपि‍ देल गेल। गौरकेँ पड़ोसि‍याक जि‍म्‍मा लगा, घरमे ताला मारि‍ दुनू परानी बेटाकेँ लऽ छि‍टही वि‍दा भेला।
     रामकुमार एकटा छोट कि‍सान। मात्र दू बि‍घा खेतक मालिक। ओना तँ एम.. पास छथि‍। मुदा बेरोजगार। कतेको बेर सरकारी नौकरी लेल परि‍यासो केलनि‍ मुदा ऐ जुगमे भगवान भेटब असान अछि‍ मुदा सरकारी नौकरी कठि‍न। की करता, खेतीक अलाबा चटि‍या सभकेँ टि‍शन पढ़ा कोनो धरानी अपन गुजर करै छथि‍। परि‍वारमे मात्र तीनि‍ गोटे। दू परानी अपना आ एकटा दस बर्खक बेटा कन्‍हैया। मालो जालक नाआंेपर एकटा मात्र गौर। पत्नीओ मध्‍यमा परीक्षा पास केने मुदा ऊहो बेरोजगारे। नौकरी हेबो केना करितनि‍। जखनि‍ बी.., एम..बला सभ झख मारैए तखनि‍ मैट्रि‍क-मध्‍यमाक कोन गप।
     छि‍टहीवालीक पि‍ता रवि कान्‍त जमानाक मैट्रि‍क छथि‍। हुनका एकटा बेटा आ एकटा बेटी। बेटाक नाआें फूल कुमार आ बेटीक सुमि‍त्रा। रवि‍ कान्‍त रजि‍ष्‍ट्री आॅफि‍समे मुनसीक काज करै छला। पहि‍ने तँ हुनका पाँच बि‍घा खेत छेलनि‍ मुदा आब घराड़ीक अलाबे मात्र दस कट्ठा बँचल छन्‍हि‍। बेटा फूल कुमार पटना मेडि‍कल कौलेजमे डाक्‍टर। नौकरीक अलाबे खानगीओ क्‍लीनि‍क खोलने छथि‍। प्राय: पाँच हजारक आमदनी भरि‍ दि‍नक छन्‍हि‍। मुदा एक नम्‍मरक मक्‍खीचूस आ अबेवहारि‍क। बहि‍न-बहनोइसँ कोनो सरोकार नै। माए-बाबू फोन-पर-फोन करैत रहै छन्‍हि‍ मुदा हुनका लेल धैनसन। गाम एबो केना करता। कमतीमे चारि‍ दि‍न तँ लगतै जे बीस हजारक अामदनीपर पानि‍ फेड़त, कहबीओ छै बाप बड़े ने मैया सभसँ पैघ रूपैआ।
     झलअन्‍हारीमे राम कुमार परि‍वारक संग सासुर पहुँचला। गामक बीचमे सुमि‍त्राक पि‍ताक घर। अँगनामे पच्‍छि‍मसँ पूब मुहेँ एकटा ओ दोसर घर पूबसँ पच्‍छि‍म मुहेँ। इटाक देबाल आ ऊपरसँ खपड़ा। अँगनाक उत्तर आ दछि‍नसँ देबाल दऽ घेरल। उत्तरवरि‍ये कातसँ अँगना एबा-जेबाक रस्‍ता। दछि‍नवरि‍या देबालपर एकचारी जइमे भानस-भात होइए। पछवरि‍या ओसारपर चौकी जइपर सुमि‍त्राक माए सूतल छेली। रवि‍ कान्‍त बुढ़ीक पाँजरमे बैसल छला। ओसारि‍क कोरोमे लालटेन टाँगल छल।
     राम कुमार सुमि‍त्रा आ कन्‍हैया अँगना पहुँचला। सभ गोटे रवि‍ कान्‍तक पएर छूबि‍ गोर लगलकनि‍। सुमि‍त्रा बेटी जमाए आ नाति‍केँ देखि‍ रवि‍ कान्‍तक छाती सूप सनक भऽ गेल। ओ कुरसी आनि‍ जमाएकेँ बैसैले कहलकनि‍। सुमि‍त्रा माएक पाँजरमे जा बैसली। रवि‍ कान्‍त चाह बनबैले चुल्हि‍ पजारए लगला। राम कुमार कहलखि‍न-
बाबूजी, अखनि‍ चाह बनेनाइ छोड़ि‍ देथुन पहि‍ने एतए आबथु।
माएक पाँजरमे बैसल सुमि‍त्रा माएकेँ ि‍हलबैत बजली-
माए, माए। माए गै, माए।
मुदा बुरहीक शरीमे कोनो हरकति‍ नै भेलनि‍। सुमि‍त्राक आँखि‍सँ दहो-बहो नोर जाए लगल। हुनकर बाबूजी कहलखि‍न-
गै बताहि‍। आब माए थोड़े बजतौ। दू-चारि‍ दि‍नक मेहमान छि‍यौ। परसू राति‍मे जे खसलौ से खसलै छौ। कखनो-कखनो आँखि चारू दि‍स तकै छौ। ठोरो पटपटबै छौ मुदा मुँहसँ अवाज नै नि‍कनि‍ पबै छै।
पि‍ताक बात सुनि‍ सुमि‍त्रा बोम फाड़ि‍ कानए लगली। राम कुमार ससुरसँ पुछलखि‍न-
डाक्‍टर भैयाकेँ फोन नै केलखि‍न?”
रवि‍ कान्‍त जवाब देलकनि‍-
परसूए जखनि‍ अहाँ सासु गि‍रल तखने फूलबाबूकेँ फोन केलौं तँ ओ कहलक, अखनि‍ बड़ बि‍जी छी, घंटा भरिपछाति‍ फोन करब। अहाँ सभकेँ लगेलौं तँ सुइच‍ आॅफ कहलक।
रामकुमार कहलखि‍न-
हँ परसू मोबाइलक बैटरी चार्ज नै रहए। की कहबनि‍, हमरा गाममे ने बि‍जलीए छै आ ने जेनरेटरे। नरहि‍या नै तँ ि‍नर्मली जा मोबाइल चार्ज करबै छी। काल्हि‍ ि‍नर्मली गेल रहि‍ऐ तँ ओतइ चार्ज करौलि‍ऐ। अच्‍छा तँ, राति‍मे डाक्‍टर साहैबसँ बात भेलनि‍?”
रवि‍ कान्‍त कहलखि‍न-
राति‍मे फोन लगौलि‍ऐ तँ सुइच‍ ऑफ कहलक। भि‍नसर भेने जखनि‍ फोन लगेलौं तँ कनि‍याँ उठबैत कहली जे अखनि‍ एकटा रोगीमे लागल छथि‍। बारह बजे करीब फोन करए कहली। बारह बजे फोन केलौं तँ फूलबाबूसँ गप भेल। कहलक, कोनो डाक्‍टर बजा माएकेँ देखा दि‍यनु आ डाक्‍टर जे कहता से हमरा फोनपर बताएब। जौं पाइ-कौड़ीक अभाव हुअए तँ ताबए इंजाम कऽ काज करब पछाति‍ हम पठा देब। चौकपर सोम आ शुक्र दि‍न एकटा डाक्‍टर अबै छथि‍न। ओना तँ हुनकर क्‍लीनि‍क सि‍मराही बजारमे छन्‍हि‍ मुदा हाटे-हाट रमण जीक दबाइ दोकानपर रोगी सभकेँ देखै छथि‍न। काल्‍हि‍ सोम रहने डाक्‍टर साहैब लग गेलौं तँ देखलि‍ऐ मारि‍ भीड़। रोगी सभकेँ देखैत-देखैत साँझ पड़ि‍ गेलनि‍। सि‍मराहीओ जेबाक रहनि‍। मुदा रमणजीकेँ कहलि‍यनि‍ तँ डाक्‍टर साहैबकेँ कहलखि‍न जे हि‍नको बेटा डाक्‍टर छथि‍न तखनि‍ हमरा ऐठाम एला। आला लगा देखलखि‍न, ब्‍लडपेसर सेहो जँचलखि‍न आ कहला जे बढ़ल छन्‍हि‍ जइसँ लकबा मारि‍ देलकनि‍। दबाइ सभ लि‍खि‍ कहलखि‍न चलए दि‍यौ। काल्‍हिसँ आइ धरि‍ दस बोतल पानि‍ चढ़ि‍ गेलनि‍ मुदा कोनो सुधार नै भेलनि‍। खाली कखनो-कखनो आँखि‍ तकैत रहै छथि‍न जेना केकरो खोजैत हुअए।
ई कहैत कहैत रवि‍ कान्‍तकेँ बुकौर लगि‍ गेलनि‍। आँखि‍सँ टप-टप नोर झहरए लगलनि‍। पि‍ताकेँ कनैत देखि‍ सुमि‍त्रा सेहो कानए लगली। रामकुमार फोरो पुछलकनि‍-
डाक्‍टर भैयाकेँ फेर फोन केलि‍यनि‍ आकि‍ नै?”
रवि‍ कान्‍त कहलखि‍न-
राति‍एमे फोनपर सभ बात बतौलि‍ऐ। तैपर फूलबाबू कहलक, काल्हि‍ दू बजै सि‍मराही जा डाक्‍टर साहैबकेँ सभ बात कहि‍हक। मुदा अपनासँ फूलबाबू फोन कऽ माएक हालति‍ नै पुछलक। जेते बेर फोन केलौं हमहीं केलौं।
बि‍च्‍चेमे सुमि‍त्रा पि‍ताकेँ पुछलखि‍न-
भौजीओ ने फोन केलक?”
रवि‍ कान्‍त बजला-
गै बताहि‍, जौं अपन जनमल नै पुछलक तँ आनक कोन बात। तोरा तँ सभ गप बुझले छौ जे केते कठि‍नसँ ओकरा पढ़ैलौं।
सुमि‍त्रा बजली-
से कोनो हमरा नै देखल अछि‍। अहाँक कमाइसँ पूरा नै भेल तँ माएक सभटा गहना-जेबर बेचि‍ कऽ दऽ देलि‍यनि‍। तहूसँ नै भेल तँ जमीनो बेचि‍ दऽ देलि‍यनि‍। हँ तँ सि‍मराहीवला डाक्‍टर लग गेलि‍ऐ तँ ओ की कहलनि‍?”
रवि‍ कान्‍त बजला-
कहलनि‍ जे लकबा मारने छन्‍हि‍। उमेरो अस्‍सीसँ ऊपरे छन्‍हि‍ से आब उठब मोसकि‍ल छन्‍हि‍। अपना जानि‍ जे सेवा कऽ सकबनि‍ से करि‍यनु।
     राति‍मे खानपुरवाली सबहक खेनाइ बनौलक। खेनाइ खा रामकुमार आ रवि‍ कान्‍त सुतैले चलि‍ गेला। सुमित्रा माएक पाँजरमे बैसल छेली। राति‍म एगारह बजे बुढ़ीक शरीरमे हरकति‍ भेल। आँखि‍ ताकि‍ बजली-
बौआ नै आएल? डाकडर बौआ हौ डाकडर बौआ?”
सुमि‍त्रा टोकलकनि‍-
माए हम छि‍यौ, सुमि‍त्रा गोर लगै छि‍यौ।
के, बुच्‍ची? कखनि‍ एलँह? पाहुनो एलखुन हेन?”
हँ ऊहो आएल छथि‍न आ कन्‍हैयौ आएल अछि‍।
तखने रवि‍ कान्‍त एलखि‍न आ राम कुमार सेहो।
गोर लगै छि‍यनि‍ माए। रामकुमार बुढ़ीक पएर छुबैत कहलखि‍न।
नीक्के रहथु। जुग-जुग जीबथु। डाकडर बौआ नै आएल। आब ओकर मुँह नै देखबै। पोताक देखैक सि‍हन्‍ता नेनहि‍ मरि‍ जाएब।
रामकुमार कहलखि‍न-
हि‍नका कि‍छु नै हेतनि‍। हम भि‍नसरे डाक्‍टर भैयाकेँ फोन कऽ गाम बजाएब।
बुढ़ी कहलखि‍न-
अच्‍छा!
अच्‍छा कहि‍ते बुढ़ीकेँ हि‍चकी उठलनि‍ आ गरदनि‍ सि‍रमापरसँ गि‍र पड़ल। सुमि‍त्रा माए-माए कहैत कानए लगली। रामकुमार बुढ़ीक नारी देखैत बजलखि‍न-
माए चलि‍ गेली!


प्रोफेसर बेटा
गाम नाओं मौआहा। जि‍ला सप्‍तरी। नेपाल अधि‍राज्‍य। बेस झमटगर गाम। बारहो वर्णक लोकक बसोबास करैबला गाम। ओइ गाममे एक गोटेक नाआंे रौदी राउत। हुनकर उमेर लगधग अस्‍सी बरख। पाँच हाथक लम्‍गर मरद। श्‍याम वर्ण। मेहनती आ स्‍वाभि‍मानी बेकती।
     हम अपना मामा लेल भोँट मागए मौआहा गेल छेलौं। मामा नेपालक संवि‍धान सभाक सदस्‍यक लेल ठाढ़ भेल छला। ओही क्रममे हमरा राउतजीसँ भेँट भेल छल। जखनि‍ हम आ हमर दूगो संगी रामबाबू आ गि‍रि‍स सभ कोइ राउत जीक दरबज्‍जापर पहुँचलौं तँ ओ ओतै छला। हमरा सभकेँ बड़खाति‍र बात केलनि‍। अपना पोताकेँ बजा जाह पि‍औलनि‍। हम हुनका अपन मामक लेल भोँट मंगलि‍यनि‍ तँ ओ कहला-
जे नीक लोक हएत ति‍नका हम जरूर भोँ देब।
राति‍मे हमरा सभकेँ रूकबाक लेल आग्रह केलनि‍। हमहूँ सभ सोचलौं, एतएसँ बरि‍सानि‍ बारह कि‍लो मीटर अछि‍। ओतए जाइसँ नीक हएत राति‍मे एतै रूकि‍ आरो भोँटर सभसँ सम्‍पर्क करी। हम राउत जीकेँ कहलियनि‍-
हम सभ अहीं ऐठाम राति‍मे रूकब, भोजनो करब आ अरामो करब। ताबे हम सभ भोँटरसँ सम्‍पर्क करैले गाम घुमै छी।
राउतजी कहलनि‍-
सबेरे आबि‍ जाएब।
हम सभ आठ बजे राति‍मे हुनका ओइठाम पहुँचलौं। ओ हमरे सबहक बाट ताकि‍ रहल छला। हमरा सभकेँ पहुँि‍चते पोताकेँ हाक दऽ पानि‍ अनैले कहलखि‍न। हम सभ हाथ मुँह धोलौं। राउतजी अपना पोताकेँ कहलखि‍न-
हि‍नका सभकेँ जल्‍दी भोजन करा दहुन। भूख लगल हेतनि‍।
कि‍छुए काल पछाति‍ हमरा सभकेँ आँगन लऽ गेला।
     भीतक देबाल आ ऊपर खपड़ासँ छाड़ल घर छल। अँगना आ ओसारा बड़ चि‍क्कन-चुनमुन छल। पछवरि‍या ओसारि‍पर हमरा सबहक भोजन लेल कम्‍बलक आसन लगौल छल। हम सभ भोजन केलौं। जाबे धरि‍ हम सभ भोजन केलौं ताबे धरि‍ राउतजी अपने बैसल रहला आ पोताकेँ कहि‍ हमरा सभकेँ परसन-पर-परसन दि‍या खुअबैत रहला। हम एक बेर हुनकाेसँ भोजनक आग्रह केलि‍यनि‍ तँ कहला जे हम पछाति‍ करब। भोजन पछाति‍ हम सभ दरबज्‍जापर आबि‍ गेलौं। कि‍छुए काल पछाति‍ राउतोजी भोजन कऽ हमरा सभ लग आबि‍ कऽ बैसला। हम हुनकासँ परि‍वारक वि‍षयमे चर्चा कलि‍यनि‍। ओ जे अपना परि‍वारक वि‍षयमे कहलनि‍ ओइसँ हुनक वेदना बुझहलि‍यनि‍। ओ कहला-
बौआ, हमर बाबूजी हमरा मात्र दू बीघा खेत दऽ गेल छला। हम दूध बेचि‍ आ तरकारी खेती कऽ आइ दस बीघा जमीन बनेलौं। हमरा तीनटा बेटा आ एकटा बेटी अछि‍। बेटीक बि‍अाह भऽ गेल अछि‍। जमाए मास्‍टर छथि‍। एकटा बेटा गि‍रहस्‍त आ एकटा प्रोफेसर अछि‍। छोटका बेटा बी..पास कऽ गामे धनकुट्टा मील चलबैए। प्रोफेसर राजवि‍राजमे मकान बनेने अछि‍। लोको वेद ओतै रहै छै। एकटा प्रेस सेहो चलबैए। रूपैआक नीक आमदनी छै।
तैपर हम पुछलि‍यनि‍-
बाबा, प्रोफेसर साहैब तँ भैयारी सभकेँ मदति‍ करि‍ते हेथि‍न।
तैपर राउतजी कहला-
बौआ, से जुनि‍ पूछू। दुनि‍याँमे कोइ केकरो नै छि‍ऐ। लोक केते दुख काटि‍ बाल-बच्‍चाकेँ पढ़बैए। मुदा जखनि‍ बेटा कमाए लगै छै तँ सभटा बि‍सरि‍ जाइ छै। लोकवेदक अलाबे कि‍छु नजरि‍एपर ने चढ़ै छै।
पुछलि‍यनि‍-
से कि‍अए कहै छि‍ऐ, अहाँ?”
राउतजी कहला-
जखनि‍ हमर मझि‍ला बेटा दरभंगामे पढ़ैत रहए तखनि‍ जेठका भाय हर जोति‍ ओकरा देलक। जखनि‍ पाइ घटि‍ गेलै तँ एम..क फारम भरै काल जेठकी कनि‍याँ अपन हौंसली बन्‍हक लगा पाइ पठेलक। जखनि‍ राजवि‍राजमे प्रोफेसरी भेलै तँ ओ सभ सभटा बि‍सरि‍ गेल। पछाति‍ एकटा प्रेस खोललक तँ कहलि‍ऐ छोटका भाएकेँ रखि‍ लहक तँ हमर बात नै मानि‍ अपना सारकेँ रखलक। कि‍छु दि‍नक बाद हमरा जेठकी पुतोहुकेँ पेटमे दरद उठलै। राजवि‍राजमे डाक्‍टर लग लऽ गेलि‍ऐ। डाक्‍टर कहलक जे हि‍नका पेटमे पाथर भऽ गेलनि‍। जल्‍दीसँ ऑपरेशन करए पड़त। दरभंगा लऽ जा करा दि‍यौ। बीस हजारक खर्चक अनुमान डाक्‍टरो कहलनि‍। हम चाउर-गहुम बेचि‍ कऽ पनरह हजारक इंजाम केलौं आ पाँच हजार टाका प्रोफेसरसँ मंगलि‍ऐ तँ कहलक, हमरा लग एकोटा टाका नै अछि‍। परि‍वारमे बड़ खर्च होइए। तैपर हम कहलि‍ऐ, हौ, बड़की कनि‍याँ तोरा पढ़ाइमे बड़ मदति‍ केने छथुन। अखनि‍ ओ बेराम अछि‍ तँ तूँ कहै छह पाइए नै अछि‍। केते दुख हेतनि‍ बड़की कनि‍याँकेँ। मुदा ओ एको रूपैआ नै देलक। अंतमे हमर पत्नी अपन कौटबी बेचि‍ दरभंगा देलक। दरभंगा संगे जाइले प्रोफेसरकेँ कहलि‍ऐ तँ सेहो तैयार नै भेल कहलक, मारि‍ काज अछि‍। एको मि‍नटक छुट्टी नै अछि‍। तखनि‍ हम हमर जेठका बेटा आ पत्नी सभ कोइ दरभंगा जा बड़की कनि‍याँक ऑपरेशन करेलौं।
तैपर हम पुछलि‍यनि‍-
अँए यौ, प्रोफेसर साहैब कि‍छु ने मदति‍ केलथि‍?”
राउत जी कहलनि‍-
एकटा दोसर गप बतबै छी। हमर कि‍छु जमीन नहरि‍मे चलि‍ गेल रहए। सरकार जमीनक मुआबजा भुगतान केलक। राजवि‍राजेमे रूपैआ भेटल। राति‍मे हम रूपैआ प्रोफेसरकेँ रखैले देलि‍ऐ। भि‍नसर भने गाम अबै काल रूपैआ मंगलि‍ऐ तँ ओ कहलक, हमरा रूपैआ बेगरता अछि‍। अहाँ लग तँ रखले रहत दू मास पछाति‍ आपस करब। जखनि‍ तीन मास पछाति‍ छोटका बेटाले धनकुट्टा मील आ आटा चक्की बैसबैले रूपैआ मंगलौं तँ कहलक, सभ खेत-पथार तँ ओही भाय सभ लेल छोड़ि‍ देने छि‍ऐ। हम तँ मात्र खरचे जोकर चाउर-गहुम-दालि‍-लल्‍लू-पि‍आजु अनै छी बाँकी सभ कि‍छु तँ ओकरे सभ लेल रहि‍ जाइत अछि‍। पाँच हजार रूपैए रखि‍ लेलौं तँ कोन बड़का अन्‍हैर भऽ गेल। बेटीक जे बि‍आह केलाैं ओहूमे एकोटा छि‍द्दी नै देलक। ई प्रोफेसर तँ ओहू दुनू भाँइक सम्‍पति‍ हरपैले चाहैए। एतेक दि‍नसँ प्रोफेसर अछि‍। प्रेस से चलबैत अछि‍ जइसँ रूपैआक नीक आमदनी छै। मुदा आइ धरि‍ हमरा आकि‍ माएकेँ एक्को टाका नै देने हएत। बौआ, जे वि‍द्वान से बेइमान।
हमरा राउत जीक बात सुनैत-सुनैत नि‍न्न आबए लगल। कहलि‍यनि‍-
बाबा, हम सुतै छी। अहूँ सुति‍ रहू।


सोच

बाबूजी आइ.आइ.टी. प्रति‍योगि‍ता परीक्षाक तैयारी लेल कोचिंग करब। राजस्‍थानक कोटामे नाओं लि‍खाएब। ओतए नीक तैयारी करौल जाइ छै। तइले एक लाख टाका चाही। अजीत दरभंगासँ अबि‍त पि‍ताकेँ कहलकनि।
बेटाक बात सुनि‍ शीतल राय बि‍गरैत कहलखि‍न-
हरि‍दम टाका केतएसँ औत, पाँचमे दि‍न तँ तोरा पाँच हजार टाका देने रहि‍यौ। ऐतए कि‍ रूपैआक गाछ अछि‍। जखनि‍ मन भेल झखा लि‍अ। देखै नै छि‍ही दादाक इलाजमे केते खरच भऽ रहल छौ। ओ कि‍छुए दि‍नक मेहमान छथि‍न। अखनि‍ धरि‍ दबाइए बले जीबैत रहला अछि‍। मुदा आब बेसी दि‍न नै खेपता।
अजीत बाजल-
सुजीत भाय, कोटामे नाओं लि‍खौलनि‍। ओ हमरा कोटेसँ फोन केने छला। कहलनि‍ जे सत्तरि‍ हजार एडमि‍शनमे लगत आ रहै-खाइक अलगसँ। सुजीत तँ अपना सभसँ गरीबे छथि‍न। हुनकर पि‍ताकेँ तँ चारि‍ए बीघा खेत छन्‍हि‍। धि‍या-पुताकेँ ट्यूशन पढ़ा काज चलबै छथि‍न। अपना तँ दस बीघासँ बेसीए खेत हएत। रूपैआ नै अछि‍ तँ पाँच कट्ठा खेते बेचि‍ लि‍अ।
शीतल राय जोरसँ बजला-
देख, बेसी हमर दि‍माग नै चाट। हम खेत नै बेचब। लोक की कहत। कहत ने जे शीतलो खेत बेचि‍-बेचि‍ खाए लगल। परुकाँ साल गीताक बि‍आहमे बीघा भरि‍ खेत बि‍कले रहए। हरि‍दम जँ खेत बेचब तँ गाम-समाजमे कोन इज्‍जति‍ रहत।
बाबू जीकेँ अपन गप नै मानैत देखि‍ अजीत माए लग पैरवी लगौलक। माए सभ बात बूझि‍ पति‍ लग जा बड़ खुशामद केलखि‍न मुदा शीतल राय साफ तैयार नै भेला।
     शीतल रायकेँ दस बीघा खेत। एकटा बेटा आ एकटा बेटी जेकर बि‍आह-दुरागमन सभटा भऽ गेल छन्‍हि‍। ओ अपना दुल्‍हा संग राँचीमे रहै छथि‍न। शीतल रायक पि‍ता तँ जीवि‍ते छथि‍म मुदा माए मरि‍ गेल छथि‍न। पि‍ता दम्‍माक पुरान रोगी छथि‍न। बेटा अजीत पढ़ैमे होशगर छन्‍हि‍। मैट्रि‍को आ आइ.एस.सी.मे नीक नम्‍मर अनने अछि‍। मुदा शीतल राय पढ़ाइकेँ बेसी महत नै दइ छथि‍न। हुनकर सोच छन्‍हि‍ एकटा बेटा अछि‍, दस बीघा जमीन अछि‍। कोन जरूरी छै बेसी पढ़बाक। आब पढ़ाइ छोड़ि‍ खेती-गि‍रहस्‍तीक काज देखह। अजीतकेँ रूपैआ नै देलखि‍न तँए ओ खेनाइ-पीनाइ छोड़ि‍ देलक। तीनि‍ए दि‍न पछाति‍ शीतल रायक पि‍ता मरि‍ गेलनि‍। आब भोज-भातक चर्च हुअए लगल।
     शीतल रायक पि‍ता जोखन मरड़ गामेमे मात्र नै परोपट्टामे नामी बेकतीमे एक छला। जाति‍क मैनजन सेहो छला। शीतल राय सोचए, बाबूजी मैनजन छला। तँए हुनकर श्राधक भोज खुब नीक आ नम्‍हर हेबाक चाही। रसगुल्‍ला-लालमोहनक भोज करब। भोज आ क्रि‍या-कर्ममे दू लाख टाकासँ बेसी खर्च हएत। मुदा हाथपर तँ नै अछि‍। से नै तँ दस कट्ठा खेते बेचि‍ लेब। ई काज दोहरा कऽ फेर थोड़े हएत। अपनो नाआंे कऽ लेब। अजीत सभ गप सुनैत रहए मुदा बाजए कि‍छु नै। ओकरा दि‍मागमे कोटाक अलाबे कि‍छु एबे ने करैत।
     भोज-भातक इंजामक लेल शीतल राय अपन सार बेचनजी केँ बजौला। बेचनजी हाइ स्‍कूलमे शि‍क्षक छथि‍न। ओ अबि‍ते बहनोइसँ कहलखि‍न-
जेतबे सकर्ता हुअए तेतबे भोज करू। जमीन बेचि‍ भोज केलासँ कोन लाभ।
तैपर शीतल राय बजला-
यौ मास्‍टर साहैब, बाबूजी जाति‍क मैनजन छला। परोपट्टामे हुनकर नाम छन्‍हि‍। नीकसँ भोज नै भेने लोक की कहत?”
जखनि‍ ई गप-सप्‍प दुनू सार-बहनोइमे होइ छल तखनि‍ अजीतो ओतै रहए। पि‍ताक बात सुनि‍ अजीत बाजल-
मामा यौ, बाबूजी हमरा कोचिंग करैले एक लाख टाका नै देता मुदा दादाक भोज खेत बेचि‍ कऽ दू लाख टाका खर्च करथि‍न?”
तैपर शीतल राय टोकलखि‍न-
पहि‍ने हमरा भोज करए दे। तेकर पछाति‍ आर कि‍छु सोचब।
बहनोइक बात सुनि‍ बेचनजी बजला-
अँइ यौ पाहुन, अहाँ कोन मनुख छी। बेटाक इंजीनि‍यरिंगक प्रति‍योगि‍ता परीक्षा तैयारी लेल टाका नै देबै आ भोज-भात खुब ऐल-फइलसँ करब? धूर जी! केहेन अहाँक सोच अछि‍। छोड़ू भोज-भात। पहि‍ने अजीतकेँ रूपैआक इंजाम कऽ दि‍यौ। तेकर पछाति‍ भोज-भातक गप सोचब। बेटा जे इंजीनि‍यर भऽ जाएत तँ बड़ पैघ बात हएत।
शीतल राय सोचए लगला, बेचन बाबू नीके कहै छथि‍।


  
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विदेह नूतन अंक गद्य-पद्य भारती  

. मोहनदास (दीर्घकथा):लेखक: उदय प्रकाश (मूल हिन्दीसँ मैथिलीमे अनुवाद विनीत उत्पल)
.छिन्नमस्ता- प्रभा खेतानक हिन्दी उपन्यासक सुशीला झा द्वारा मैथिली अनुवाद
.कनकमणि दीक्षित (मूल नेपालीसँ मैथिली अनुवाद श्रीमती रूपा धीरू आ श्री धीरेन्द्र प्रेमर्षि)
 .तुकाराम रामा शेटक कोंकणी उपन्यासक मैथिली अनुवाद डॉ. शम्भु कुमार सिंह द्वारा
पाखलो

 

बालानां कृते

बच्चा लोकनि द्वारा स्मरणीय श्लोक
.प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त्त (सूर्योदयक एक घंटा पहिने) सर्वप्रथम अपन दुनू हाथ देखबाक चाही, ई श्लोक बजबाक चाही।
कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥
करक आगाँ लक्ष्मी बसैत छथि, करक मध्यमे सरस्वती, करक मूलमे ब्रह्मा स्थित छथि। भोरमे ताहि द्वारे करक दर्शन करबाक थीक।
.संध्या काल दीप लेसबाक काल-
दीपमूले स्थितो ब्रह्मा दीपमध्ये जनार्दनः।
दीपाग्रे शङ्करः प्रोक्त्तः सन्ध्याज्योतिर्नमोऽस्तुते॥
दीपक मूल भागमे ब्रह्मा, दीपक मध्यभागमे जनार्दन (विष्णु) आऽ दीपक अग्र भागमे शङ्कर स्थित छथि। हे संध्याज्योति! अहाँकेँ नमस्कार।
.सुतबाक काल-
रामं स्कन्दं हनूमन्तं वैनतेयं वृकोदरम्।
शयने यः स्मरेन्नित्यं दुःस्वप्नस्तस्य नश्यति॥
जे सभ दिन सुतबासँ पहिने राम, कुमारस्वामी, हनूमान्, गरुड आऽ भीमक स्मरण करैत छथि, हुनकर दुःस्वप्न नष्ट भऽ जाइत छन्हि।
. नहेबाक समय-
गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति।
नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरू॥
हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिन्धु आऽ कावेरी  धार। एहि जलमे अपन सान्निध्य दिअ।
.उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्।
वर्षं तत् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः॥
समुद्रक उत्तरमे आऽ हिमालयक दक्षिणमे भारत अछि आऽ ओतुका सन्तति भारती कहबैत छथि।
.अहल्या द्रौपदी सीता तारा मण्डोदरी तथा।
पञ्चकं ना स्मरेन्नित्यं महापातकनाशकम्॥
जे सभ दिन अहल्या, द्रौपदी, सीता, तारा आऽ मण्दोदरी, एहि पाँच साध्वी-स्त्रीक स्मरण करैत छथि, हुनकर सभ पाप नष्ट भऽ जाइत छन्हि।
.अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषणः।
कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरञ्जीविनः॥
अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनूमान्, विभीषण, कृपाचार्य आऽ परशुराम- ई सात टा चिरञ्जीवी कहबैत छथि।
.साते भवतु सुप्रीता देवी शिखर वासिनी
उग्रेन तपसा लब्धो यया पशुपतिः पतिः।
सिद्धिः साध्ये सतामस्तु प्रसादान्तस्य धूर्जटेः
जाह्नवीफेनलेखेव यन्यूधि शशिनः कला॥
. बालोऽहं जगदानन्द न मे बाला सरस्वती।
अपूर्णे पंचमे वर्षे वर्णयामि जगत्त्रयम् ॥
१०. दूर्वाक्षत मंत्र(शुक्ल यजुर्वेद अध्याय २२, मंत्र २२)
आ ब्रह्मन्नित्यस्य प्रजापतिर्ॠषिः। लिंभोक्त्ता देवताः। स्वराडुत्कृतिश्छन्दः। षड्जः स्वरः॥
आ ब्रह्म॑न् ब्राह्म॒णो ब्र॑ह्मवर्च॒सी जा॑यता॒मा रा॒ष्ट्रे रा॑ज॒न्यः शुरे॑ऽइषव्यो॒ऽतिव्या॒धी म॑हार॒थो जा॑यतां॒ दोग्ध्रीं धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः सप्तिः॒ पुर॑न्धि॒र्योवा॑ जि॒ष्णू र॑थे॒ष्ठाः स॒भेयो॒ युवास्य यज॑मानस्य वी॒रो जा॒यतां निका॒मे-नि॑कामे नः प॒र्जन्यों वर्षतु॒ फल॑वत्यो न॒ऽओष॑धयः पच्यन्तां योगेक्ष॒मो नः॑ कल्पताम्॥२२॥
मन्त्रार्थाः सिद्धयः सन्तु पूर्णाः सन्तु मनोरथाः। शत्रूणां बुद्धिनाशोऽस्तु मित्राणामुदयस्तव।
ॐ दीर्घायुर्भव। ॐ सौभाग्यवती भव।
हे भगवान्। अपन देशमे सुयोग्य आसर्वज्ञ विद्यार्थी उत्पन्न होथि, शुत्रुकेँ नाश कएनिहार सैनिक उत्पन्न होथि। अपन देशक गाय खूब दूध दय बाली, बरद भार वहन करएमे सक्षम होथि आघोड़ा त्वरित रूपेँ दौगय बला होए। स्त्रीगण नगरक नेतृत्व करबामे सक्षम होथि आयुवक सभामे ओजपूर्ण भाषण देबयबला आ नेतृत्व देबामे सक्षम होथि। अपन देशमे जखन आवश्यक होय वर्षा होए आ औषधिक-बूटी सर्वदा परिपक्व होइत रहए। एवं क्रमे सभ तरहेँ हमरा सभक कल्याण होए। शत्रुक बुद्धिक नाश होए आमित्रक उदय होए॥
मनुष्यकें कोन वस्तुक इच्छा करबाक चाही तकर वर्णन एहि मंत्रमे कएल गेल अछि।
एहिमे वाचकलुप्तोपमालड़्कार अछि।
अन्वय-
ब्रह्म॑न् - विद्या आदि गुणसँ परिपूर्ण ब्रह्म
रा॒ष्ट्रे - देशमे
ब्र॑ह्मवर्च॒सी-ब्रह्म विद्याक तेजसँ युक्त्त
आ जा॑यतां॒- उत्पन्न होए
रा॑ज॒न्यः-राजा
शुरे॑ऽबिना डर बला
इषव्यो॒- बाण चलेबामे निपुण
ऽतिव्या॒धी-शत्रुकेँ तारण दय बला
म॑हार॒थो-पैघ रथ बला वीर
दोग्ध्रीं-कामना(दूध पूर्ण करए बाली)
धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः धे॒नु-गौ वा वाणी र्वोढा॑न॒ड्वा- पैघ बरद ना॒शुः-आशुः-त्वरित
सप्तिः॒-घोड़ा
पुर॑न्धि॒र्योवा॑- पुर॑न्धि॒- व्यवहारकेँ धारण करए बाली र्योवा॑-स्त्री
जि॒ष्णू-शत्रुकेँ जीतए बला
र॑थे॒ष्ठाः-रथ पर स्थिर
स॒भेयो॒-उत्तम सभामे
युवास्य-युवा जेहन
यज॑मानस्य-राजाक राज्यमे
वी॒रो-शत्रुकेँ पराजित करएबला
निका॒मे-नि॑कामे-निश्चययुक्त्त कार्यमे
नः-हमर सभक
प॒र्जन्यों-मेघ
वर्षतु॒-वर्षा होए
फल॑वत्यो-उत्तम फल बला
ओष॑धयः-औषधिः
पच्यन्तां- पाकए
योगेक्ष॒मो-अलभ्य लभ्य करेबाक हेतु कएल गेल योगक रक्षा
नः॑-हमरा सभक हेतु
कल्पताम्-समर्थ होए
ग्रिफिथक अनुवाद- हे ब्रह्मण, हमर राज्यमे ब्राह्मण नीक धार्मिक विद्या बला, राजन्य-वीर,तीरंदाज, दूध दए बाली गाय, दौगय बला जन्तु, उद्यमी नारी होथि। पार्जन्य आवश्यकता पडला पर वर्षा देथि, फल देय बला गाछ पाकए, हम सभ संपत्ति अर्जित/संरक्षित करी।

 विदेह नूतन अंक भाषापाक रचना-लेखन  
इंग्लिश-मैथिली-कोष / मैथिली-इंग्लिश-कोष  प्रोजेक्टकेँ आगू बढ़ाऊ, अपन सुझाव आ योगदान ई-मेल द्वारा ggajendra@videha.com पर पठाऊ।

१.भारत आ नेपालक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली .मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम

.नेपाल भारतक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली

१.१. नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक
  उच्चारण आ लेखन शैली
(भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित)
मैथिलीमे उच्चारण तथा लेखन

१.पञ्चमाक्षर आ अनुस्वार: पञ्चमाक्षरान्तर्गत ङ, , , न एवं म अबैत अछि। संस्कृत भाषाक अनुसार शब्दक अन्तमे जाहि वर्गक अक्षर रहैत अछि ओही वर्गक पञ्चमाक्षर अबैत अछि। जेना-
अङ्क (क वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ङ् आएल अछि।)
पञ्च (च वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ञ् आएल अछि।)
खण्ड (ट वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ण् आएल अछि।)
सन्धि (त वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे न् आएल अछि।)
खम्भ (प वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे म् आएल अछि।)
उपर्युक्त बात मैथिलीमे कम देखल जाइत अछि। पञ्चमाक्षरक बदलामे अधिकांश जगहपर अनुस्वारक प्रयोग देखल जाइछ। जेना- अंक, पंच, खंड, संधि, खंभ आदि। व्याकरणविद पण्डित गोविन्द झाक कहब छनि जे कवर्ग, चवर्ग आ टवर्गसँ पूर्व अनुस्वार लिखल जाए तथा तवर्ग आ पवर्गसँ पूर्व पञ्चमाक्षरे लिखल जाए। जेना- अंक, चंचल, अंडा, अन्त तथा कम्पन। मुदा हिन्दीक निकट रहल आधुनिक लेखक एहि बातकेँ नहि मानैत छथि। ओ लोकनि अन्त आ कम्पनक जगहपर सेहो अंत आ कंपन लिखैत देखल जाइत छथि।
नवीन पद्धति किछु सुविधाजनक अवश्य छैक। किएक तँ एहिमे समय आ स्थानक बचत होइत छैक। मुदा कतोक बेर हस्तलेखन वा मुद्रणमे अनुस्वारक छोट सन बिन्दु स्पष्ट नहि भेलासँ अर्थक अनर्थ होइत सेहो देखल जाइत अछि। अनुस्वारक प्रयोगमे उच्चारण-दोषक सम्भावना सेहो ततबए देखल जाइत अछि। एतदर्थ कसँ लऽ कऽ पवर्ग धरि पञ्चमाक्षरेक प्रयोग करब उचित अछि। यसँ लऽ कऽ ज्ञ धरिक अक्षरक सङ्ग अनुस्वारक प्रयोग करबामे कतहु कोनो विवाद नहि देखल जाइछ।

२.ढ आ ढ : ढक उच्चारण र् हजकाँ होइत अछि। अतः जतऽ र् हक उच्चारण हो ओतऽ मात्र ढ लिखल जाए। आन ठाम खाली ढ लिखल जएबाक चाही। जेना-
ढ = ढाकी, ढेकी, ढीठ, ढेउआ, ढङ्ग, ढेरी, ढाकनि, ढाठ आदि।
ढ = पढ़ाइ, बढब, गढब, मढब, बुढबा, साँढ, गाढ, रीढ, चाँढ, सीढी, पीढी आदि।
उपर्युक्त शब्द सभकेँ देखलासँ ई स्पष्ट होइत अछि जे साधारणतया शब्दक शुरूमे ढ आ मध्य तथा अन्तमे ढ अबैत अछि। इएह नियम ड आ डक सन्दर्भ सेहो लागू होइत अछि।

३.व आ ब : मैथिलीमे क उच्चारण ब कएल जाइत अछि, मुदा ओकरा ब रूपमे नहि लिखल जएबाक चाही। जेना- उच्चारण : बैद्यनाथ, बिद्या, नब, देबता, बिष्णु, बंश, बन्दना आदि। एहि सभक स्थानपर क्रमशः वैद्यनाथ, विद्या, नव, देवता, विष्णु, वंश, वन्दना लिखबाक चाही। सामान्यतया व उच्चारणक लेल ओ प्रयोग कएल जाइत अछि। जेना- ओकील, ओजह आदि।

४.य आ ज : कतहु-कतहु क उच्चारण जकाँ करैत देखल जाइत अछि, मुदा ओकरा ज नहि लिखबाक चाही। उच्चारणमे यज्ञ, जदि, जमुना, जुग, जाबत, जोगी, जदु, जम आदि कहल जाएबला शब्द सभकेँ क्रमशः यज्ञ, यदि, यमुना, युग, यावत, योगी, यदु, यम लिखबाक चाही।

५.ए आ य : मैथिलीक वर्तनीमे ए आ य दुनू लिखल जाइत अछि।
प्राचीन वर्तनी- कएल, जाए, होएत, माए, भाए, गाए आदि।
नवीन वर्तनी- कयल, जाय, होयत, माय, भाय, गाय आदि।
सामान्यतया शब्दक शुरूमे ए मात्र अबैत अछि। जेना एहि, एना, एकर, एहन आदि। एहि शब्द सभक स्थानपर यहि, यना, यकर, यहन आदिक प्रयोग नहि करबाक चाही। यद्यपि मैथिलीभाषी थारू सहित किछु जातिमे शब्दक आरम्भोमे केँ य कहि उच्चारण कएल जाइत अछि।
ए आ क प्रयोगक सन्दर्भमे प्राचीने पद्धतिक अनुसरण करब उपयुक्त मानि एहि पुस्तकमे ओकरे प्रयोग कएल गेल अछि। किएक तँ दुनूक लेखनमे कोनो सहजता आ दुरूहताक बात नहि अछि। आ मैथिलीक सर्वसाधारणक उच्चारण-शैली यक अपेक्षा एसँ बेसी निकट छैक। खास कऽ कएल, हएब आदि कतिपय शब्दकेँ कैल, हैब आदि रूपमे कतहु-कतहु लिखल जाएब सेहो क प्रयोगकेँ बेसी समीचीन प्रमाणित करैत अछि।

६.हि, हु तथा एकार, ओकार : मैथिलीक प्राचीन लेखन-परम्परामे कोनो बातपर बल दैत काल शब्दक पाछाँ हि, हु लगाओल जाइत छैक। जेना- हुनकहि, अपनहु, ओकरहु, तत्कालहि, चोट्टहि, आनहु आदि। मुदा आधुनिक लेखनमे हिक स्थानपर एकार एवं हुक स्थानपर ओकारक प्रयोग करैत देखल जाइत अछि। जेना- हुनके, अपनो, तत्काले, चोट्टे, आनो आदि।

७.ष तथा ख : मैथिली भाषामे अधिकांशतः षक उच्चारण ख होइत अछि। जेना- षड्यन्त्र (खडयन्त्र), षोडशी (खोडशी), षट्कोण (खटकोण), वृषेश (वृखेश), सन्तोष (सन्तोख) आदि।

८.ध्वनि-लोप : निम्नलिखित अवस्थामे शब्दसँ ध्वनि-लोप भऽ जाइत अछि:
(क) क्रियान्वयी प्रत्यय अयमे य वा ए लुप्त भऽ जाइत अछि। ओहिमे सँ पहिने अक उच्चारण दीर्घ भऽ जाइत अछि। ओकर आगाँ लोप-सूचक चिह्न वा विकारी (’ / ऽ) लगाओल जाइछ। जेना-
पूर्ण रूप : पढए (पढय) गेलाह, कए (कय) लेल, उठए (उठय) पडतौक।
अपूर्ण रूप : पढगेलाह, लेल, उठपडतौक।
पढऽ गेलाह, कऽ लेल, उठऽ पडतौक।
(ख) पूर्वकालिक कृत आय (आए) प्रत्ययमे य (ए) लुप्त भऽ जाइछ, मुदा लोप-सूचक विकारी नहि लगाओल जाइछ। जेना-
पूर्ण रूप : खाए (य) गेल, पठाय (ए) देब, नहाए (य) अएलाह।
अपूर्ण रूप : खा गेल, पठा देब, नहा अएलाह।
(ग) स्त्री प्रत्यय इक उच्चारण क्रियापद, संज्ञा, ओ विशेषण तीनूमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना-
पूर्ण रूप : दोसरि मालिनि चलि गेलि।
अपूर्ण रूप : दोसर मालिन चलि गेल।
(घ) वर्तमान कृदन्तक अन्तिम त लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना-
पूर्ण रूप : पढैत अछि, बजैत अछि, गबैत अछि।
अपूर्ण रूप : पढै अछि, बजै अछि, गबै अछि।
(ङ) क्रियापदक अवसान इक, उक, ऐक तथा हीकमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना-
पूर्ण रूप: छियौक, छियैक, छहीक, छौक, छैक, अबितैक, होइक।
अपूर्ण रूप : छियौ, छियै, छही, छौ, छै, अबितै, होइ।
(च) क्रियापदीय प्रत्यय न्ह, हु तथा हकारक लोप भऽ जाइछ। जेना-
पूर्ण रूप : छन्हि, कहलन्हि, कहलहुँ, गेलह, नहि।
अपूर्ण रूप : छनि, कहलनि, कहलौँ, गेलऽ, नइ, नञि, नै।

९.ध्वनि स्थानान्तरण : कोनो-कोनो स्वर-ध्वनि अपना जगहसँ हटि कऽ दोसर ठाम चलि जाइत अछि। खास कऽ ह्रस्व इ आ उक सम्बन्धमे ई बात लागू होइत अछि। मैथिलीकरण भऽ गेल शब्दक मध्य वा अन्तमे जँ ह्रस्व इ वा उ आबए तँ ओकर ध्वनि स्थानान्तरित भऽ एक अक्षर आगाँ आबि जाइत अछि। जेना- शनि (शइन), पानि (पाइन), दालि ( दाइल), माटि (माइट), काछु (काउछ), मासु (माउस) आदि। मुदा तत्सम शब्द सभमे ई निअम लागू नहि होइत अछि। जेना- रश्मिकेँ रइश्म आ सुधांशुकेँ सुधाउंस नहि कहल जा सकैत अछि।

१०.हलन्त(्)क प्रयोग : मैथिली भाषामे सामान्यतया हलन्त (्)क आवश्यकता नहि होइत अछि। कारण जे शब्दक अन्तमे अ उच्चारण नहि होइत अछि। मुदा संस्कृत भाषासँ जहिनाक तहिना मैथिलीमे आएल (तत्सम) शब्द सभमे हलन्त प्रयोग कएल जाइत अछि। एहि पोथीमे सामान्यतया सम्पूर्ण शब्दकेँ मैथिली भाषा सम्बन्धी निअम अनुसार हलन्तविहीन राखल गेल अछि। मुदा व्याकरण सम्बन्धी प्रयोजनक लेल अत्यावश्यक स्थानपर कतहु-कतहु हलन्त देल गेल अछि। प्रस्तुत पोथीमे मथिली लेखनक प्राचीन आ नवीन दुनू शैलीक सरल आ समीचीन पक्ष सभकेँ समेटि कऽ वर्ण-विन्यास कएल गेल अछि। स्थान आ समयमे बचतक सङ्गहि हस्त-लेखन तथा तकनीकी दृष्टिसँ सेहो सरल होबऽबला हिसाबसँ वर्ण-विन्यास मिलाओल गेल अछि। वर्तमान समयमे मैथिली मातृभाषी पर्यन्तकेँ आन भाषाक माध्यमसँ मैथिलीक ज्ञान लेबऽ पडि रहल परिप्रेक्ष्यमे लेखनमे सहजता तथा एकरूपतापर ध्यान देल गेल अछि। तखन मैथिली भाषाक मूल विशेषता सभ कुण्ठित नहि होइक, ताहू दिस लेखक-मण्डल सचेत अछि। प्रसिद्ध भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक कहब छनि जे सरलताक अनुसन्धानमे एहन अवस्था किन्नहु ने आबऽ देबाक चाही जे भाषाक विशेषता छाँहमे पडि जाए।
-(भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित)

१.२. मैथिली अकादमी, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली

१. जे शब्द मैथिली-साहित्यक प्राचीन कालसँ आइ धरि जाहि वर्त्तनीमे प्रचलित अछि
, से सामान्यतः ताहि वर्त्तनीमे लिखल जाय- उदाहरणार्थ-

ग्राह्य

एखन
ठाम
जकर, तकर
तनिकर
अछि

अग्राह्य
अखन, अखनि, एखेन, अखनी
ठिमा, ठिना, ठमा
जेकर, तेकर
तिनकर। (वैकल्पिक रूपेँ ग्राह्य)
ऐछ, अहि, ए।

२. निम्नलिखित तीन प्रकारक रूप वैकल्पिकतया अपनाओल जाय: भऽ गेल, भय गेल वा भए गेल। जा रहल अछि, जाय रहल अछि, जाए रहल अछि। करगेलाह, वा करय गेलाह वा करए गेलाह।

३. प्राचीन मैथिलीक न्हध्वनिक स्थानमे लिखल जाय सकैत अछि यथा कहलनि वा कहलन्हि।

४. तथा ततय लिखल जाय जतस्पष्टतः अइतथा अउसदृश उच्चारण इष्ट हो। यथा- देखैत, छलैक, बौआ, छौक इत्यादि।

५. मैथिलीक निम्नलिखित शब्द एहि रूपे प्रयुक्त होयत: जैह, सैह, इएह, ओऐह, लैह तथा दैह।

६. ह्र्स्व इकारांत शब्दमे के लुप्त करब सामान्यतः अग्राह्य थिक। यथा- ग्राह्य देखि आबह, मालिनि गेलि (मनुष्य मात्रमे)।

७. स्वतंत्र ह्रस्व वा प्राचीन मैथिलीक उद्धरण आदिमे तँ यथावत राखल जाय, किंतु आधुनिक प्रयोगमे वैकल्पिक रूपेँ वा लिखल जाय। यथा:- कयल वा कएल, अयलाह वा अएलाह, जाय वा जाए इत्यादि।

८. उच्चारणमे दू स्वरक बीच जे ध्वनि स्वतः आबि जाइत अछि तकरा लेखमे स्थान वैकल्पिक रूपेँ देल जाय। यथा- धीआ, अढैआ, विआह, वा धीया, अढैया, बियाह।

९. सानुनासिक स्वतंत्र स्वरक स्थान यथासंभव लिखल जाय वा सानुनासिक स्वर। यथा:- मैञा, कनिञा, किरतनिञा वा मैआँ, कनिआँ, किरतनिआँ।

१०. कारकक विभक्त्तिक निम्नलिखित रूप ग्राह्य:- हाथकेँ, हाथसँ, हाथेँ, हाथक, हाथमे। मेमे अनुस्वार सर्वथा त्याज्य थिक। क वैकल्पिक रूप केरराखल जा सकैत अछि।

११. पूर्वकालिक क्रियापदक बाद कयवा कएअव्यय वैकल्पिक रूपेँ लगाओल जा सकैत अछि। यथा:- देखि कय वा देखि कए।

१२. माँग, भाँग आदिक स्थानमे माङ, भाङ इत्यादि लिखल जाय।

१३. अर्द्ध ओ अर्द्ध क बदला अनुसार नहि लिखल जाय, किंतु छापाक सुविधार्थ अर्द्ध ’ , ‘’, तथा क बदला अनुस्वारो लिखल जा सकैत अछि। यथा:- अङ्क, वा अंक, अञ्चल वा अंचल, कण्ठ वा कंठ।

१४. हलंत चिह्न निअमतः लगाओल जाय, किंतु विभक्तिक संग अकारांत प्रयोग कएल जाय। यथा:- श्रीमान्, किंतु श्रीमानक।

१५. सभ एकल कारक चिह्न शब्दमे सटा कलिखल जाय, हटा कनहि, संयुक्त विभक्तिक हेतु फराक लिखल जाय, यथा घर परक।

१६. अनुनासिककेँ चन्द्रबिन्दु द्वारा व्यक्त कयल जाय। परंतु मुद्रणक सुविधार्थ हि समान जटिल मात्रापर अनुस्वारक प्रयोग चन्द्रबिन्दुक बदला कयल जा सकैत अछि। यथा- हिँ केर बदला हिं।

१७. पूर्ण विराम पासीसँ ( । ) सूचित कयल जाय।

१८. समस्त पद सटा कलिखल जाय, वा हाइफेनसँ जोडि क’ ,  हटा कनहि।

१९. लिअ तथा दिअ शब्दमे बिकारी (ऽ) नहि लगाओल जाय।

२०. अंक देवनागरी रूपमे राखल जाय।

२१.किछु ध्वनिक लेल नवीन चिन्ह बनबाओल जाय। जा
' ई नहि बनल अछि ताबत एहि दुनू ध्वनिक बदला पूर्ववत् अय/ आय/ अए/ आए/ आओ/ अओ लिखल जाय। आकि ऎ वा ऒ सँ व्यक्त कएल जाय।

ह./- गोविन्द झा ११/८/७६ श्रीकान्त ठाकुर ११/८/७६ सुरेन्द्र झा "सुमन" ११/०८/७६

  २. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम
२.१. उच्चारण निर्देश: (बोल्ड कएल रूप ग्राह्य):-   
दन्त न क उच्चारणमे दाँतमे जीह सटत- जेना बाजू नाम , मुदा ण क उच्चारणमे जीह मूर्धामे सटत (नै सटैए तँ उच्चारण दोष अछि)- जेना बाजू गणेश। तालव्य मे जीह तालुसँ , मे मूर्धासँ आ दन्त मे दाँतसँ सटत। निशाँ, सभ आ शोषण बाजि कऽ देखू। मैथिलीमे केँ वैदिक संस्कृत जकाँ सेहो उच्चरित कएल जाइत अछि, जेना वर्षा, दोष। य अनेको स्थानपर ज जकाँ उच्चरित होइत अछि आ ण ड जकाँ (यथा संयोग आ गणेश संजोग
गड़ेस उच्चरित होइत अछि)। मैथिलीमे व क उच्चारण ब, श क उच्चारण स आ य क उच्चारण ज सेहो होइत अछि।
ओहिना ह्रस्व इ बेशीकाल मैथिलीमे पहिने बाजल जाइत अछि कारण देवनागरीमे आ मिथिलाक्षरमे ह्रस्व इ अक्षरक पहिने लिखलो जाइत आ बाजलो जएबाक चाही। कारण जे हिन्दीमे एकर दोषपूर्ण उच्चारण होइत अछि (लिखल तँ पहिने जाइत अछि मुदा बाजल बादमे जाइत अछि), से शिक्षा पद्धतिक दोषक कारण हम सभ ओकर उच्चारण दोषपूर्ण ढंगसँ कऽ रहल छी।
अछि- अ इ छ  ऐछ (उच्चारण)
छथि- छ इ थ  – छैथ (उच्चारण)
पहुँचि- प हुँ इ च (उच्चारण)
आब अ आ इ ई ए ऐ ओ औ अं अः ऋ ऐ सभ लेल मात्रा सेहो अछि, मुदा ऐमे ई ऐ ओ औ अं अः ऋ केँ संयुक्ताक्षर रूपमे गलत रूपमे प्रयुक्त आ उच्चरित कएल जाइत अछि। जेना ऋ केँ री  रूपमे उच्चरित करब। आ देखियौ- ऐ लेल देखिऔ क प्रयोग अनुचित। मुदा देखिऐ लेल देखियै अनुचित। क् सँ ह् धरि अ सम्मिलित भेलासँ क सँ ह बनैत अछि, मुदा उच्चारण काल हलन्त युक्त शब्दक अन्तक उच्चारणक प्रवृत्ति बढल अछि, मुदा हम जखन मनोजमे ज् अन्तमे बजैत छी, तखनो पुरनका लोककेँ बजैत सुनबन्हि- मनोजऽ, वास्तवमे ओ अ युक्त ज् = ज बजै छथि।
फेर ज्ञ अछि ज् आ ञ क संयुक्त मुदा गलत उच्चारण होइत अछि- ग्य। ओहिना क्ष अछि क् आ ष क संयुक्त मुदा उच्चारण होइत अछि छ। फेर श् आ र क संयुक्त अछि श्र ( जेना श्रमिक) आ स् आ र क संयुक्त अछि स्र (जेना मिस्र)। त्र भेल त+र ।
उच्चारणक ऑडियो फाइल विदेह आर्काइव  http://www.videha.co.in/ पर उपलब्ध अछि। फेर केँ / सँ / पर पूर्व अक्षरसँ सटा कऽ लिखू मुदा तँ / कऽ हटा कऽ। ऐमे सँ मे पहिल सटा कऽ लिखू आ बादबला हटा कऽ। अंकक बाद टा लिखू सटा कऽ मुदा अन्य ठाम टा लिखू हटा कऽ– जेना
छहटा मुदा सभ टा। फेर ६अ म सातम लिखू- छठम सातम नै। घरबलामे बला मुदा घरवालीमे वाली प्रयुक्त करू।
रहए-
रहै मुदा सकैए (उच्चारण सकै-ए)।
मुदा कखनो काल रहए आ रहै मे अर्थ भिन्नता सेहो, जेना से कम्मो जगहमे पार्किंग करबाक अभ्यास रहै ओकरा। पुछलापर पता लागल जे ढुनढुन नाम्ना ई ड्राइवर कनाट प्लेसक पार्किंगमे काज करैत रहए
छलै, छलए मे सेहो ऐ तरहक भेल। छलए क उच्चारण छल-ए सेहो।
संयोगने- (उच्चारण संजोगने)
केँ/  कऽ
केर- (
केर क प्रयोग गद्यमे नै करू , पद्यमे कऽ सकै छी। )
क (जेना रामक)
–रामक आ संगे (उच्चारण राम के /  राम कऽ सेहो)
सँ- सऽ (उच्चारण)
चन्द्रबिन्दु आ अनुस्वार- अनुस्वारमे कंठ धरिक प्रयोग होइत अछि मुदा चन्द्रबिन्दुमे नै। चन्द्रबिन्दुमे कनेक एकारक सेहो उच्चारण होइत अछि- जेना रामसँ- (उच्चारण राम सऽ)  रामकेँ- (उच्चारण राम कऽ/ राम के सेहो)।

केँ जेना रामकेँ भेल हिन्दीक को (राम को)- राम को= रामकेँ
क जेना रामक भेल हिन्दीक का ( राम का) राम का= रामक
कऽ जेना जा कऽ भेल हिन्दीक कर ( जा कर) जा कर= जा कऽ
सँ भेल हिन्दीक से (राम से) राम से= रामसँ
सऽ , तऽ , , केर (गद्यमे) एे चारू शब्द सबहक प्रयोग अवांछित।
के दोसर अर्थेँ प्रयुक्त भऽ सकैए- जेना, के कहलक? विभक्ति क बदला एकर प्रयोग अवांछित।
नञि, नहि, नै, नइ, नँइ, नइँ, नइं ऐ सभक उच्चारण आ लेखन - नै

त्त्व क बदलामे त्व जेना महत्वपूर्ण (महत्त्वपूर्ण नै) जतए अर्थ बदलि जाए ओतहि मात्र तीन अक्षरक संयुक्ताक्षरक प्रयोग उचित। सम्पति- उच्चारण स म्प इ त (सम्पत्ति नै- कारण सही उच्चारण आसानीसँ सम्भव नै)। मुदा सर्वोत्तम (सर्वोतम नै)।
राष्ट्रिय (राष्ट्रीय नै)
सकैए/ सकै (अर्थ परिवर्तन)
पोछैले/ पोछै लेल/ पोछए लेल
पोछैए/ पोछए/ (अर्थ परिवर्तन) पोछए/ पोछै
ओ लोकनि ( हटा कऽ, ओ मे बिकारी नै)
ओइ/ ओहि
ओहिले/
ओहि लेल/ ओही लऽ
जएबेँ/ बैसबेँ
पँचभइयाँ
देखियौक/ (देखिऔक नै- तहिना अ मे ह्रस्व आ दीर्घक मात्राक प्रयोग अनुचित)
जकाँ / जेकाँ
तँइ/ तैँ/
होएत / हएत
नञि/ नहि/ नँइ/ नइँ/ नै
सौँसे/ सौंसे
बड /
बडी (झोराओल)
गाए (गाइ नहि), मुदा गाइक दूध (गाएक दूध नै।)
रहलेँ/ पहिरतैँ
हमहीं/ अहीं
सब - सभ
सबहक - सभहक
धरि - तक
गप- बात
बूझब - समझब
बुझलौं/ समझलौं/ बुझलहुँ - समझलहुँ
हमरा आर - हम सभ
आकि- आ कि
सकैछ/ करैछ (गद्यमे प्रयोगक आवश्यकता नै)
होइन/ होनि
जाइन (जानि नै, जेना देल जाइन) मुदा जानि-बूझि (अर्थ परिव्र्तन)
पइठ/ जाइठ
आउ/ जाउ/ आऊ/ जाऊ
मे, केँ, सँ, पर (शब्दसँ सटा कऽ) तँ कऽ धऽ दऽ (शब्दसँ हटा कऽ) मुदा दूटा वा बेसी विभक्ति संग रहलापर पहिल विभक्ति टाकेँ सटाऊ। जेना ऐमे सँ ।
एकटा , दूटा (मुदा कए टा)
बिकारीक प्रयोग शब्दक अन्तमे, बीचमे अनावश्यक रूपेँ नै। आकारान्त आ अन्तमे अ क बाद बिकारीक प्रयोग नै (जेना दिअ
, आ/ दिय’ , ’, आ नै )
अपोस्ट्रोफीक प्रयोग बिकारीक बदलामे करब अनुचित आ मात्र फॉन्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक)- ओना बिकारीक संस्कृत रूप ऽ अवग्रह कहल जाइत अछि आ वर्तनी आ उच्चारण दुनू ठाम एकर लोप रहैत अछि/ रहि सकैत अछि (उच्चारणमे लोप रहिते अछि)। मुदा अपोस्ट्रोफी सेहो अंग्रेजीमे पसेसिव केसमे होइत अछि आ फ्रेंचमे शब्दमे जतए एकर प्रयोग होइत अछि जेना raison d’etre एतए सेहो एकर उच्चारण रैजौन डेटर होइत अछि, माने अपोस्ट्रॉफी अवकाश नै दैत अछि वरन जोडैत अछि, से एकर प्रयोग बिकारीक बदला देनाइ तकनीकी रूपेँ सेहो अनुचित)।
अइमे, एहिमे/ ऐमे
जइमे, जाहिमे
एखन/ अखन/ अइखन

केँ (के नहि) मे (अनुस्वार रहित)
भऽ
मे
दऽ
तँ (तऽ, नै)
सँ ( सऽ स नै)
गाछ तर
गाछ लग
साँझ खन
जो (जो go, करै जो do)
 तै/तइ जेना- तै दुआरे/ तइमे/ तइले
जै/जइ जेना- जै कारण/ जइसँ/ जइले
ऐ/अइ जेना- ऐ कारण/ ऐसँ/ अइले/ मुदा एकर एकटा खास प्रयोग- लालति‍ कतेक दि‍नसँ कहैत रहैत अइ
लै/लइ जेना लैसँ/ लइले/ लै दुआरे
लहँ/ लौं

गेलौं/ लेलौं/ लेलँह/ गेलहुँ/ लेलहुँ/ लेलँ
जइ/ जाहि‍/ जै
जहि‍ठाम/ जाहि‍ठाम/ जइठाम/ जैठाम
एहि‍/ अहि‍/
अइ (वाक्यक अंतमे ग्राह्य) /
अइछ/ अछि‍/ ऐछ
तइ/ तहि‍/ तै/ ताहि‍
ओहि‍/ ओइ
सीखि‍/ सीख
जीवि‍/ जीवी/ जीब 
भलेहीं/ भलहि‍ं 
तैं/ तँइ/ तँए
जाएब/ जएब
लइ/ लै
छइ/ छै
नहि‍/ नै/ नइ
गइ/ गै 
छनि‍/ छन्‍हि ...
समए शब्‍दक संग जखन कोनो वि‍भक्‍ति‍ जुटै छै तखन समै जना समैपर इत्‍यादि‍। असगरमे हृदए आ वि‍भक्‍ति‍ जुटने हृदे जना हृदेसँ, हृदेमे इत्‍यादि‍।  
जइ/ जाहि‍/
जै
जहि‍ठाम/ जाहि‍ठाम/ जइठाम/ जैठाम
एहि‍/ अहि‍/ अइ/
अइछ/ अछि‍/ ऐछ
तइ/ तहि‍/ तै/ ताहि‍
ओहि‍/ ओइ
सीखि‍/ सीख
जीवि‍/ जीवी/
जीब 
भले/ भलेहीं/
भलहि‍ं 
तैं/ तँइ/ तँए
जाएब/ जएब
लइ/ लै
छइ/ छै
नहि‍/ नै/ नइ
गइ/
गै 
छनि‍/ छन्‍हि‍
चुकल अछि/ गेल गछि
२.२. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम
नीचाँक सूचीमे देल विकल्पमेसँ लैंगुएज एडीटर द्वारा कोन रूप चुनल जेबाक चाही:
बोल्ड कएल रूप ग्राह्य:  
१.होयबला/ होबयबला/ होमयबला/ हेब’बला, हेम’बला/ होयबाक/होबएबला /होएबाक
२. आ’/आऽ
३. क’ लेने/कऽ लेने/कए लेने/कय लेने/ल’/लऽ/लय/लए
४. भ’ गेल/भऽ गेल/भय गेल/भए
गेल
५. कर’ गेलाह/करऽ
गेलह/करए गेलाह/करय गेलाह
६.
लिअ/दिअ लिय’,दिय’,लिअ’,दिय’/
७. कर’ बला/करऽ बला/ करय बला करैबला/क’र’ बला /
करैवाली
८. बला वला (पुरूष), वाली (स्‍त्री) ९
.
आङ्ल आंग्ल
१०. प्रायः प्रायह
११. दुःख दुख १
२. चलि गेल चल गेल/चैल गेल
१३. देलखिन्ह देलकिन्ह, देलखिन
१४.
देखलन्हि देखलनि/ देखलैन्ह
१५. छथिन्ह/ छलन्हि छथिन/ छलैन/ छलनि
१६. चलैत/दैत चलति/दैति
१७. एखनो
अखनो
१८.
बढ़नि‍ बढइन बढन्हि
१९. ओ’/ओऽ(सर्वनाम)
२०
. ओ (संयोजक) ओ’/ओऽ
२१. फाँगि/फाङ्गि फाइंग/फाइङ
२२.
जे जे’/जेऽ २३. ना-नुकुर ना-नुकर
२४. केलन्हि/केलनि‍/कयलन्हि
२५. तखनतँ/ तखन तँ
२६. जा
रहल/जाय रहल/जाए रहल
२७. निकलय/निकलए
लागल/ लगल बहराय/ बहराए लागल/ लगल निकल’/बहरै लागल
२८. ओतय/ जतय जत’/ ओत’/ जतए/ ओतए
२९.
की फूरल जे कि फूरल जे
३०. जे जे’/जेऽ
३१. कूदि / यादि(मोन पारब) कूइद/याइद/कूद/याद/
यादि (मोन)
३२. इहो/ ओहो
३३.
हँसए/ हँसय हँसऽ
३४. नौ आकि दस/नौ किंवा दस/ नौ वा दस
३५. सासु-ससुर सास-ससुर
३६. छह/ सात छ/छः/सात
३७.
की  की’/ कीऽ (दीर्घीकारान्तमे ऽ वर्जित)
३८. जबाब जवाब
३९. करएताह/ करेताह करयताह
४०. दलान दिशि दलान दिश/दलान दिस
४१
. गेलाह गएलाह/गयलाह
४२. किछु आर/ किछु और/ किछ आर
४३. जाइ छल/ जाइत छल जाति छल/जैत छल
४४. पहुँचि/ भेट जाइत छल/ भेट जाइ छलए पहुँच/ भेटि‍ जाइत छल
४५.
जबान (युवा)/ जवान(फौजी)
४६. लय/ लए ’/ कऽ/ लए कए / लऽ कऽ/ लऽ कए
४७. ल’/लऽ कय/
कए
४८. एखन / एखने / अखन / अखने
४९.
अहींकेँ अहीँकेँ
५०. गहींर गहीँर
५१.
धार पार केनाइ धार पार केनाय/केनाए
५२. जेकाँ जेँकाँ/
जकाँ
५३. तहिना तेहिना
५४. एकर अकर
५५. बहिनउ बहनोइ
५६. बहिन बहिनि
५७. बहिन-बहिनोइ
बहिन-बहनउ
५८. नहि/ नै
५९. करबा / करबाय/ करबाए
६०. तँ/ त ऽ तय/तए
६१. भैयारी मे छोट-भाए/भै/, जेठ-भाय/भाइ,
६२. गि‍नतीमे दू भाइ/भाए/भाँइ  
६३. ई पोथी दू भाइक/ भाँइ/ भाए/ लेल। यावत जावत
६४. माय मै / माए मुदा माइक ममता
६५. देन्हि/ दइन दनि‍/ दएन्हि/ दयन्हि दन्हि/ दैन्हि
६६. द’/ दऽ/ दए
६७. (संयोजक) ओऽ (सर्वनाम)
६८. तका कए तकाय तकाए
६९. पैरे (on foot) पएरे  कएक/ कैक
७०.
ताहुमे/ ताहूमे
 ७१.
पुत्रीक
७२.
बजा कय/ कए / कऽ
७३. बननाय/बननाइ
७४. कोला
७५.
दिनुका दिनका
७६.
ततहिसँ
७७. गरबओलन्हि/ गरबौलनि‍/
  गरबेलन्हि/ गरबेलनि‍
७८. बालु बालू
७९.
चेन्ह चिन्ह(अशुद्ध)
८०. जे जे’
८१
. से/ के से’/के’
८२. एखुनका अखनुका
८३. भुमिहार भूमिहार
८४. सुग्गर
/ सुगरक/ सूगर
८५. झठहाक झटहाक ८६.
छूबि
८७. करइयो/ओ करैयो ने देलक /करियौ-करइयौ
८८. पुबारि
पुबाइ
८९. झगड़ा-झाँटी
झगड़ा-झाँटि
९०. पएरे-पएरे पैरे-पैरे
९१. खेलएबाक
९२. खेलेबाक
९३. लगा
९४. होए- होहोअए
९५. बुझल बूझल
९६.
बूझल (संबोधन अर्थमे)
९७. यैह यएह / इएह/ सैह/ सएह
९८. तातिल
९९. अयनाय- अयनाइ/ अएनाइ/ एनाइ
१००. निन्न- निन्द
१०१.
बिनु बिन
१०२. जाए जाइ
१०३.
जाइ (in different sense)-last word of sentence
१०४. छत पर आबि जाइ
१०५.
ने
१०६. खेलाए (play) –खेलाइ
१०७. शिकाइत- शिकायत
१०८.
ढप- ढ़प
१०९
. पढ़- पढ
११०. कनिए/ कनिये कनिञे
१११. राकस- राकश
११२. होए/ होय होइ
११३. अउरदा-
औरदा
११४. बुझेलन्हि (different meaning- got understand)
११५. बुझएलन्हि/बुझेलनि‍/ बुझयलन्हि (understood himself)
११६. चलि- चल/ चलि‍ गेल
११७. खधाइ- खधाय
११८.
मोन पाड़लखिन्ह/ मोन पाड़लखि‍न/ मोन पारलखिन्ह
११९. कैक- कएक- कइएक
१२०.
लग ल’ग 
१२१. जरेनाइ
१२२. जरौनाइ जरओनाइ- जरएनाइ/
जरेनाइ
१२३. होइत
१२४.
गरबेलन्हि/ गरबेलनि‍ गरबौलन्हि/ गरबौलनि‍
१२५.
चिखैत- (to test)चिखइत
१२६. करइयो (willing to do) करैयो
१२७. जेकरा- जकरा
१२८. तकरा- तेकरा
१२९.
बिदेसर स्थानेमे/ बिदेसरे स्थानमे
१३०. करबयलहुँ/ करबएलहुँ/ करबेलहुँ करबेलौं
१३१.
हारिक (उच्चारण हाइरक)
१३२. ओजन वजन आफसोच/ अफसोस कागत/ कागच/ कागज
१३३. आधे भाग/ आध-भागे
१३४. पिचा / पिचाय/पिचाए
१३५. नञ/ ने
१३६. बच्चा नञ
(ने) पिचा जाय
१३७. तखन ने (नञ) कहैत अछि। कहै/ सुनै/ देखै छल मुदा कहैत-कहैत/ सुनैत-सुनैत/ देखैत-देखैत
१३८.
कतेक गोटे/ कताक गोटे
१३९. कमाइ-धमाइ/ कमाई- धमाई
१४०
. लग ल’ग
१४१. खेलाइ (for playing)
१४२.
छथिन्ह/ छथिन
१४३.
होइत होइ
१४४. क्यो कियो / केओ
१४५.
केश (hair)
१४६.
केस (court-case)
१४७
. बननाइ/ बननाय/ बननाए
१४८. जरेनाइ
१४९. कुरसी कुर्सी
१५०. चरचा चर्चा
१५१. कर्म करम
१५२. डुबाबए/ डुबाबै/ डुमाबै डुमाबय/ डुमाबए
१५३. एखुनका/
अखुनका
१५४. लए/ लिअए (वाक्यक अंतिम शब्द)- लऽ
१५५. कएलक/
केलक
५६. गरमी गर्मी
१५७
. वरदी वर्दी
१५८. सुना गेलाह सुना’/सुनाऽ
१५९. एनाइ-गेनाइ
१६०.
तेना ने घेरलन्हि/ तेना ने घेरलनि‍
१६१. नञि / नै
१६२.
डरो ड’रो
१६३. कतहु/ कतौ कहीं
१६४. उमरिगर-उमेरगर उमरगर
१६५. भरिगर
१६६. धोल/धोअल धोएल
१६७. गप/गप्प
१६८.
के के’
१६९. दरबज्जा/ दरबजा
१७०. ठाम
१७१.
धरि तक
१७२.
घूरि लौटि
१७३. थोरबेक
१७४. बड्ड
१७५. तोँ/ तू
१७६. तोँहि( पद्यमे ग्राह्य)
१७७. तोँही / तोँहि
१७८.
करबाइए करबाइये
१७९. एकेटा
१८०. करितथि /करतथि
 १८१.
पहुँचि/ पहुँच
१८२. राखलन्हि रखलन्हि/ रखलनि‍
१८३.
लगलन्हि/ लगलनि‍ लागलन्हि
१८४.
सुनि (उच्चारण सुइन)
१८५. अछि (उच्चारण अइछ)
१८६. एलथि गेलथि
१८७. बितओने/ बि‍तौने/
बितेने
१८८. करबओलन्हि/ करबौलनि‍/
करेलखिन्ह/ करेलखि‍न
१८९. करएलन्हि/ करेलनि‍
१९०.
आकि/ कि
१९१. पहुँचि/
पहुँच
१९२. बत्ती जराय/ जराए जरा (आगि लगा)
१९३.
से से’
१९४.
हाँ मे हाँ (हाँमे हाँ विभक्त्तिमे हटा कए)
१९५. फेल फैल
१९६. फइल(spacious) फैल
१९७. होयतन्हि/ होएतन्हि/ होएतनि‍/हेतनि‍/ हेतन्हि
१९८. हाथ मटिआएब/ हाथ मटियाबय/हाथ मटियाएब
१९९. फेका फेंका
२००. देखाए देखा
२०१. देखाबए
२०२. सत्तरि सत्तर
२०३.
साहेब साहब
२०४.गेलैन्ह/ गेलन्हि/ गेलनि‍
२०५. हेबाक/ होएबाक
२०६.केलो/ कएलहुँ/केलौं/ केलुँ
२०७. किछु न किछु/
किछु ने किछु
२०८.घुमेलहुँ/ घुमओलहुँ/ घुमेलौं
२०९. एलाक/ अएलाक
२१०. अः/ अह
२११.लय/
लए (अर्थ-परिवर्त्तन) २१२.कनीक/ कनेक
२१३.सबहक/ सभक
२१४.मिलाऽ/ मिला
२१५.कऽ/
२१६.जाऽ/
जा
२१७.आऽ/
२१८.भऽ /भ’ ( फॉन्टक कमीक द्योतक)
२१९.निअम/ नियम
२२०
.हेक्टेअर/ हेक्टेयर
२२१.पहिल अक्षर ढ/ बादक/ बीचक ढ़
२२२.तहिं/तहिँ/ तञि/ तैं
२२३.कहिं/ कहीं
२२४.तँइ/
तैं / तइँ
२२५.नँइ/ नइँ/  नञि/ नहि/नै
२२६.है/ हए / एलीहेँ/
२२७.छञि/ छै/ छैक /छइ
२२८.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ
२२९. (come)/ आऽ(conjunction)
२३०.
आ (conjunction)/ आऽ(come)
२३१.कुनो/ कोनो, कोना/केना
२३२.गेलैन्ह-गेलन्हि-गेलनि‍
२३३.हेबाक- होएबाक
२३४.केलौँ- कएलौँ-कएलहुँ/केलौं
२३५.किछु न किछ- किछु ने किछु
२३६.केहेन- केहन
२३७.आऽ (come)- (conjunction-and)/आ। आब'-आब' /आबह-आबह
२३८. हएत-हैत
२३९.घुमेलहुँ-घुमएलहुँ- घुमेलाें
२४०.एलाक- अएलाक
२४१.होनि- होइन/ होन्हि/
२४२.ओ-राम ओ श्यामक बीच(conjunction), ओऽ कहलक (he said)/
२४३.की हए/ कोसी अएली हए/ की है। की हइ
२४४.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ
२४५
.शामिल/ सामेल
२४६.तैँ / तँए/ तञि/ तहिं
२४७.जौं
/ ज्योँ/ जँ/
२४८.सभ/ सब
२४९.सभक/ सबहक
२५०.कहिं/ कहीं
२५१.कुनो/ कोनो/ कोनहुँ/
२५२.फारकती भऽ गेल/ भए गेल/ भय गेल
२५३.कोना/ केना/ कन्‍ना/कना
२५४.अः/ अह
२५५.जनै/ जनञ
२५६.गेलनि‍/
गेलाह (अर्थ परिवर्तन)
२५७.केलन्हि/ कएलन्हि/ केलनि‍/
२५८.लय/ लए/ लएह (अर्थ परिवर्तन)
२५९.कनीक/ कनेक/कनी-मनी
२६०.पठेलन्हि‍ पठेलनि‍/ पठेलइन/ पपठओलन्हि/ पठबौलनि‍/
२६१.निअम/ नियम
२६२.हेक्टेअर/ हेक्टेयर
२६३.पहिल अक्षर रहने ढ/ बीचमे रहने ढ
२६४.आकारान्तमे बिकारीक प्रयोग उचित नै/ अपोस्ट्रोफीक प्रयोग फान्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक ओकर बदला अवग्रह (बिकारी) क प्रयोग उचित
२६५.केर (पद्यमे ग्राह्य) / -/ कऽ/ के
२६६.छैन्हि- छन्हि
२६७.लगैए/ लगैये
२६८.होएत/ हएत
२६९.जाएत/ जएत/
२७०.आएत/ अएत/ आओत
२७१
.खाएत/ खएत/ खैत
२७२.पिअएबाक/ पिएबाक/पि‍येबाक
२७३.शुरु/ शुरुह
२७४.शुरुहे/ शुरुए
२७५.अएताह/अओताह/ एताह/ औताह
२७६.जाहि/ जाइ/ जइ/ जै/
२७७.जाइत/ जैतए/ जइतए
२७८.आएल/ अएल
२७९.कैक/ कएक
२८०.आयल/ अएल/ आएल
२८१. जाए/ जअए/ जए (लालति‍ जाए लगलीह।)
२८२. नुकएल/ नुकाएल
२८३. कठुआएल/ कठुअएल
२८४. ताहि/ तै/ तइ
२८५. गायब/ गाएब/ गएब
२८६. सकै/ सकए/ सकय
२८७.सेरा/सरा/ सराए (भात सरा गेल)
२८८.कहैत रही/देखैत रही/ कहैत छलौं/ कहै छलौं- अहिना चलैत/ पढैत
(पढै-पढैत अर्थ कखनो काल परिवर्तित) - आर बुझै/ बुझैत (बुझै/ बुझै छी, मुदा बुझैत-बुझैत)/ सकैत/ सकै। करैत/ करै। दै/ दैत। छैक/ छै। बचलै/ बचलैक। रखबा/ रखबाक । बिनु/ बिन। रातिक/ रातुक बुझै आ बुझैत केर अपन-अपन जगहपर प्रयोग समीचीन अछि‍। बुझैत-बुझैत आब बुझलि‍ऐ। हमहूँ बुझै छी।
२८९. दुआरे/ द्वारे
२९०.भेटि/ भेट/ भेँट
२९१.
खन/ खीन/  खुना (भोर खन/ भोर खीन)
२९२.तक/ धरि
२९३.गऽ/ गै (meaning different-जनबै गऽ)
२९४.सऽ/ सँ (मुदा दऽ, लऽ)
२९५.त्त्व,(तीन अक्षरक मेल बदला पुनरुक्तिक एक आ एकटा दोसरक उपयोग) आदिक बदला त्व आदि। महत्त्व/ महत्व/ कर्ता/ कर्त्ता आदिमे त्त संयुक्तक कोनो आवश्यकता मैथिलीमे नै अछि। वक्तव्य
२९६.बेसी/ बेशी
२९७.बाला/वाला बला/ वला (रहैबला)
२९८
.वाली/ (बदलैवाली)
२९९.वार्त्ता/ वार्ता
३००. अन्तर्राष्ट्रिय/ अन्तर्राष्ट्रीय
३०१. लेमए/ लेबए
३०२.लमछुरका, नमछुरका
३०२.लागै/ लगै (
भेटैत/ भेटै)
३०३.लागल/ लगल
३०४.हबा/ हवा
३०५.राखलक/ रखलक
३०६. (come)/ (and)
३०७. पश्चाताप/ पश्चात्ताप
३०८. ऽ केर व्यवहार शब्दक अन्तमे मात्र, यथासंभव बीचमे नै।
३०९.कहैत/ कहै
३१०.
रहए (छल)/ रहै (छलै) (meaning different)
३११.तागति/ ताकति
३१२.खराप/ खराब
३१३.बोइन/ बोनि/ बोइनि
३१४.जाठि/ जाइठ
३१५.कागज/ कागच/ कागत
३१६.गिरै (meaning different- swallow)/ गिरए (खसए)
३१७.राष्ट्रिय/ राष्ट्रीय
DATE-LIST (year- 2013-14)
(१४२१ फसली साल)
Marriage Days:
Nov.2013- 18, 20, 24, 25, 28, 29
Dec.2013- 1, 4, 6, 8, 12, 13
January 2014- 19, 20, 22, 23, 24, 26, 31.
Feb.2014- 3, 5, 6, 9, 10, 17, 19, 24, 26, 27.
March 2014- 2, 3, 5, 7, 9.
April 2014- 16, 17, 18, 20, 21, 23, 24.
May 2014- 1, 2, 8, 9, 11, 12, 18, 19, 21, 25, 26, 28, 29, 30.
June 2014- 4, 5, 8, 9, 13, 18, 22, 25.
July 2014- 2, 3, 4, 6, 7.
Upanayana Days:
February 2014- 2, 4, 9, 10.
March 2014- 3, 5, 11, 12.
April 2014- 4, 9, 10.
June 2014- 2, 8, 9.
Dviragaman Din:
November 2013- 18, 21, 22.
December 2013- 4, 6, 8, 9, 12, 13.
February 2014- 16, 17, 19, 20.
March 2014- 2, 3, 5, 9, 10, 12.
April 2014- 16, 17, 18, 20.
May 2014- 1, 2, 9, 11, 12.
Mundan Din:
November 2013- 20, 22.
December 2013- 9, 12, 13.
January 2014- 16, 17.
February 2014- 6, 10, 19, 20.
March 2014- 5, 12.
April 2014- 16.
May 2014- 12, 30.
June 2014- 2, 9, 30.

FESTIVALS OF MITHILA (2013-14)
Mauna Panchami-27 July
Madhushravani- 9 August
Nag Panchami- 11 August
Raksha Bandhan- 21 Aug
Krishnastami- 28 August
Kushi Amavasya / Somvari Vrat- 5 September
Hartalika Teej- 8 September
ChauthChandra-8 September
Vishwakarma Pooja- 17 September
Anant Caturdashi- 18 Sep
Pitri Paksha begins- 20 Sep
Jimootavahan Vrata/ Jitia-27 Sep
Matri Navami-28 Sep
Kalashsthapan- 5 October
Belnauti- 10 October
Patrika Pravesh- 11 October
Mahastami- 12 October
Maha Navami - 13 October
Vijaya Dashami- 14 October
Kojagara- 18 Oct
Dhanteras- 1 November
Diyabati, shyama pooja-3 November
Annakoota/ Govardhana Pooja-4 November
Bhratridwitiya/ Chitragupta Pooja- 5 November
Chhathi -8 November
Sama Poojaarambh- 9 November
Devotthan Ekadashi- 13 November
ravivratarambh- 17 November
Navanna parvan- 20 November
KartikPoornima- Sama Visarjan- 2 December
Vivaha Panchmi- 7 December
Makara/ Teela Sankranti-14 Jan
Naraknivaran chaturdashi- 29 January
Basant Panchami/ Saraswati Pooja- 4 February
Achla Saptmi- 6 February
Mahashivaratri-27 February
Holikadahan-Fagua-16 March
Holi- 17 March
Saptadora- 17 March
Varuni Trayodashi-28 March
Jurishital-15 April
Ram Navami- 8 April
Akshaya Tritiya-2 May
Janaki Navami- 8 May
Ravi Brat Ant- 11 May
Vat Savitri-barasait- 28 May
Ganga Dashhara-8 June
Harivasar Vrata- 9 July
Shree Guru Poornima-12 Jul

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"विदेह"क एहि सभ सहयोगी लिंकपर सेहो एक बेर जाउ। 

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१२. विदेह: सदेह : पहिल तिरहुता (मिथिला़क्षर) जालवृत्त (ब्लॉग)
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१३. विदेह:ब्रेल: मैथिली ब्रेलमे: पहिल बेर विदेह द्वारा
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१४.VIDEHA IST MAITHILI  FORTNIGHTLY EJOURNAL ARCHIVE
१५. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मैथिली पोथीक आर्काइव
 
१६. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका ऑडियो आर्काइव
१७. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका वीडियो आर्काइव
१८. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मिथिला चित्रकला, आधुनिक कला आ चित्रकला
१९. मैथिल आर मिथिला (मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय जालवृत्त)
२०.श्रुति प्रकाशन
२३.गजेन्द्र ठाकुर इ‍डेक्स
 २४. नेना भुटका
२५.विदेह रेडियो:मैथिली कथा-कविता आदिक पहिल पोडकास्ट साइट
२६. Videha Radio
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२८. विदेह मैथिली नाट्य उत्सव
२९.समदिया
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३५. मैथिली कविता
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३६. मैथिली कथा
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३७.मैथिली समालोचना
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 विदेह
मैथिली साहित्य आन्दोलन

(c)२००४-१३. सर्वाधिकार लेखकाधीन आ जतए लेखकक नाम नहि अछि ततए संपादकाधीन। विदेह- प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका ISSN 2229-547X VIDEHA सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर। सह-सम्पादक: उमेश मंडल। सहायक सम्पादक: शिव कुमार झा, राम वि‍लास साहु आ मुन्नाजी (मनोज कुमार कर्ण)। भाषा-सम्पादन: नागेन्द्र कुमार झा आ पञ्जीकार विद्यानन्द झा। कला-सम्पादन: ज्योति झा चौधरी आ रश्मि रेखा सिन्हा। सम्पादक-शोध-अन्वेषण: डा. जया वर्मा आ डा. राजीव कुमार वर्मा। सम्पादक- नाटक-रंगमंच-चलचित्र- बेचन ठाकुर। सम्पादक- सूचना-सम्पर्क-समाद- पूनम मंडल आ प्रियंका झा। सम्पादक- अनुवाद विभाग- विनीत उत्पल।

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'विदेह' २३० म अंक १५ जुलाइ २०१७ (वर्ष १० मास ११५ अंक २३०)

ऐ  अंकमे अछि :- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१. आशीष अनचिन्हार-  "कतेक रास बात" इंटरनेटपर मैथिलीक पहिल उपस्थिति नै अछि ...