Sunday, November 10, 2013

‘विदेह' १३८ म अंक १५ सितम्बर २०१३ (वर्ष ६ मास ६९ अंक १३८) PART II


ऊँच-नीचबेचन ठाकुर
 चारि‍म दृश्‍य-
           
(चन्‍द्रेशक हवेली। समए सौझुका। चन्‍द्रेश आ मनीषा चन्‍द्रप्रभाक संबन्‍धमे आपसी गप-सप्‍प कऽ रहल अछि‍। ठुट्ठी सि‍करेट लगा कऽ पीबै छथि‍।)
चन्‍द्रेश-        चन्‍द्रप्रभा नामी-गामी छात्रावासमे रहि‍ रहली हेन। छात्रावासक मालि‍क एतेक टाइट छथि‍न जे जुनि‍ पुछू। एकोटा एम्‍हर-ओम्‍हर नै कऽ सकैए। सभकेँ दैनि‍क रुटि‍न बनल छै। ओहीक अनुसार सभकेँ चलैक छै। नै तँ गार्जनकेँ बजा हुनके संग लगा देल जाइए।
मनीषा-        बेवस्‍था तँ बड़ नीक छै। मुदा जुग-जमाना खराप छै।
चन्‍द्रेश-        अहाँकेँ जइ बातक डर होइए, ओ अपना सबहक अखि‍ति‍यारक नै छै। ओ बुच्‍चीएक अखि‍ति‍यारक छै। उ गप ओकरे चरि‍त्रपर ि‍नर्भर करै छै। एगो गप बुझै छि‍ऐ?
मनीषा-        की, कहि‍यौ ने?
चन्‍द्रेश-        ओकर मन जदी एम्‍हर-ओम्‍हर करैक हेतै तँ हम-अहाँ मुँह तकि‍ते रहि‍ जाएब आ से केतौ भऽ सकैए। ओना एहेन चरि‍त्रहीनताबला घटना कि‍नको संगे नै होन्‍हि‍ से प्रार्थना हम सदि‍खन भगवतीसँ करैत रहै छि‍यनि‍।
(हौंसली लऽ कऽ मरनीक प्रवेश।)
मरनी-        मालि‍क, हि‍नके लग एलि‍यनि‍ हेन।
चन्‍द्रेश-        की बात छि‍यौ जे एतेक मुनहरि‍ साँझमे एलेँ हेन?
चन्‍द्रेश-        हे, हम जाइ छी। बड़ साँझ भऽ गेलै। साँझो-बाती नै देलि‍ऐ हेन। गप-सप्‍पमे लगल रही। तहन जाइ छी तँ?
चन्‍द्रेश-        बेस जाउ।
            (मनीषाक प्रस्‍थान। मंचपर अन्‍हार अछि‍। डि‍बि‍या लऽ कऽ मनीषाक प्रवेश।)
नै नै। डि‍बि‍याक जरूरी नै अछि‍। गप-सप्‍प अन्‍हारोमे भऽ सकै छै। बेकारमे मटि‍या तेल कि‍अए जरतै? जाउ, डि‍बि‍या नेने जाउ।
(डि‍बि‍या लऽ कऽ मनीषाक प्रस्‍थान।)
            आब तों कह, केतए एलेँ हेन?
            (मरनी चन्‍द्रेशक लग जाए चाहैए।)
हाँ हाँ हाँ हाँ, ओम्‍हरे रह। ओतैसँ बाज।
मरनी-        (ठामहि‍ रूकि‍) एगो हौंसली लऽ कऽ एलि‍यनि‍ हेन। बौआकेँ नाओं लि‍खेबाक छै।
चन्‍द्रेश-        बेचबि‍ही आकि‍ बन्‍हँक रखबि‍ही?
मरनी-        बेच लेबै तँ आश खतम भऽ जेतै आ बन्‍हकी रखबै तँ फेर छोड़ा सकै छि‍ऐ।
चन्‍द्रेश-        बन्‍हँकमे बड़ कम पाइ हेतौ आ बेचनामे बेसी पाइ हेतौ। हमरा वि‍चारसँ बेचीए ले आ ओइ पाइसँ बेटाकेँ सुग्‍गर कीनि‍ दही। ओइमे बड़ नफ्फा छै। बढ़ि‍याँसँ परि‍वारो चलतौ।
मरनी-        बौआ, कहै छै हम पढ़ब। ओइ दुआरे उ रुसि‍ कऽ भागि‍ओ गेल छेलै। दुनू परानी कहुना-कहुना ओकरा घुमा कऽ गामपर अनलौं।
चुनद्रेश-       सुन, पढ़ाइ आब ओते सस्‍ता नै रहि‍ गेलै। बड़ खरचा लगै छै। तहूमे मैट्रि‍कसँ ऊपर तँ आरो बेसी। तूँ बेटाकेँ पढ़बैक चक्करमे नै पड़। गरीब आदमी छेँ। बीको जेबेँ तैयो पार नै लगतौ। नीक कहै छि‍यौ।
मरनी-        मालि‍क, अपने ठीके कहै छि‍ऐ। खाइपर तँ आफद अछि‍ आ बेटाकेँ पढ़ैले ओते पाइ केतएसँ आनब। कनी रुकौथु, घरपर सँ पुछने अबै छी।
चन्‍द्रेश-        जो, से कै कहतौ नै। कोनो काज वि‍चारि‍ कऽ करी तँ बढ़ि‍याँ बात।
            (मरनीक प्रस्‍थान।)
अपन-अपन जोगारमे सभ रहैए। सुतरि‍ गेलै तँ बड़ नीक आ नै तँ घाटा थोरहे लगए देबै। जालमे माँछ फँसल तँ छैहे। ओइबेर वएह दू सए टाका बेसी लऽ गेल रहए।
            (मनीषाक प्रवेष।)
मनीषा-        की बात छेलै जे एते साँझमे डोमीनि‍याँ आएल रहए?
चन्‍द्रेश-        (मुस्‍कुराइत) बेटाकेँ नाओं लि‍खबैले हौंसली बन्‍हँक राखए आएल छेली। कहलि‍ऐ तों ऐ फेरीमे नै पड़। बेचि‍ कऽ सुग्‍गर कीनि‍ दही। बड़ नफ्फा हेतौ। सएह बुझए गामपर गेली।
मनीषा-        बेचैक छै उमेद की?
चन्‍द्रेश-        उमेद तँ पूरा लगै छै। तहन तँ ओकर अप्‍पन वि‍चार। जबर्दस्‍ती करैबला जुग तँ आब नै छै। जहि‍या छल तहि‍या कम नै सुतारलौं। तँए ने आइ मालि‍क कहबै छी।
मनीषा-        हे भगवती, ई हौंसली भऽ जेतै तँ एगारह टाकाक मधुर चढ़ेबह।
चन्‍द्रेश-        कखनो-कखनो अहूँ हुसि‍ जाइ छी। भगवती लोभी नै होइ छथि‍न। एगारह टाकाक काज एकोमे भऽ सकैए। भगवती कोनो एस.डी.. थोरहे छथि‍न।
            (मरनीक प्रवेश।)
मरनी-        मालि‍क, बेचैक वि‍चार नै भेलै। बन्‍हँके रखबै। बौआ कहलकै, हम पढ़बेटा करबै।
मनीषा-        हम जाइ छी। भानस-भातक जोगार करबाक अछि‍।
चन्‍द्रेश-        बेस, जाउ।
            (मनीषाक प्रस्‍थान।)
तहन तूँ अपन समान देखा।
            (मरनी हौंसली नि‍कालिकऽ देखैले देली।)
बाज केते पाइ लेबही?
मरनी-        केते पाइ लेबै मालि‍क? कम्‍मे लेबै जइसँ बौआक नाओं लि‍खा जाइ।
चन्‍द्रेश-        से तँ तूँही ने बजबि‍ही आकि‍ हम बजबै?
मरनी-        से तँ हमहीं बजबै। कम्‍मे देथुन, दुइए हजार। कि‍ताबो सभ कीनैक छै।
चन्‍द्रेश-        पहि‍ने कहलेँ खाली नाओं लि‍खबैले लेबै आ आब कहै छेँ कि‍ताबो सभ कीनैक छै।
मरनी-        की करबै मालि‍क, जे जरूरी छै से तँ लि‍हे पड़तै। आखि‍र ओही दुआरे तँ बन्‍हकी रखै छि‍ऐ। पेट तँ कोनि‍याेँ-पथि‍यासँ कहुना चला लेब। दूइए जहार देथुन।
चन्‍देश-       दू हजार नै हेतौ पाँच सए हेतौ।
मरनी-        ओइसँ काज नै हेतै। डेढ़ो हजार देथुन।
चन्‍द्रेश-        डेढ़ हजार तँ नै देबौ। बड़ करमेँ तँ दू सए आरो देबौ। बेसी लेबही तँ सूदि‍ओ ने बेसी लगतौ।
मरनी-        की करबै मालि‍क, जे लगतै से लगतै। पहि‍ने तँ हम जरूरीकेँ देखबै।
चन्‍द्रेश-        देखही, सात सए धरि‍ लेबही तँ तीन टके सैकड़ लगतौ, एक हजार धरि‍ लेबही तँ चारि‍ टके सैकड़ डेढ़ हजार धरि‍ पाँच टके सैकड़ आ दू हजार धरि‍ छह टके सैकड़ लगतौ। ऊहो समानपर। नै तँ उलफीक रेट आरो बेसी छै।
मरनी-        हमरा डेरहे हजार दथु।
चन्‍द्रेश-        ठीक छै डेरहे हजार ले। मुदा तोरा कनी आरो सूदि‍ लगतौ।
मरनी-        कि‍अए मालि‍क? हम गरीब छी तँए?
 चन्‍द्रेश-       नै नै, से बात नै छै। तूँ हमरासँ कोनि‍याँ-पथि‍यामे दू सए टाका बेसी लऽ नेने छेँ, तँए।
मरनी-        नै मालि‍क बेसी नै लेलौं। पसारी जानि‍ उचि‍तोसँ कम लेलौं। फूसि‍ नै कहै छी मालि‍क। हि‍नके सप्‍पत कहै छि‍यनि‍।
चन्‍द्रेश-        हमर सप्‍पत खेमेँ तँ आरो सूदि‍ बढ़ा देबौ।
मरनी-        अपन बेटा सप्‍पत कहै छी, बेसी नै लेलि‍यनि‍। कम्‍मे लेलि‍यनि‍।
चन्‍द्रेश-        केताबो कि‍छु करमेँ तँ हमरा मुँहसँ जे नि‍कलि‍ गेलौ से लगबे करतौ। डेढ़ हजार लेबही तँ छह टके सैकड़ लगतौ।
मरनी-        मालि‍क, अखनि‍ते कहने छेलि‍ऐ पाँच टके आ तुरन्‍ते छह टके कऽ देलि‍ऐ?
चन्‍द्रेश-        बेसी बजबेँ तँ आरो बढ़ा देबौ। लेबाक छौ तँ ले नै तँ जो।
मरनी-        मालि‍क, अपना गामे बन्‍हकीबला काज कोइ नै करै छथि‍न। खाली इहएटा करै छथि‍न। तँए ने मनमाना करै छथि‍न?
चन्‍द्रेश-        (खि‍सि‍या कऽ) आबो मुँहमे ताला लगा नै तँ फेर बढ़ा देबौ। चुपचाप पाइले आ जो।
मरनी-        गलती भेलै मालि‍क। आब कि‍छु ने बाजब। देथुन पाइ
(चन्‍द्रेश अन्‍दर जा कऽ पाइ आ डायरी अनलनि‍। पहि‍ने डायरीपर पाइ लि‍खलनि‍। तेकर पछाति‍ मरनीकेँ डेढ़ हजार टाका हौंसली लऽ कऽ देलनि‍।)
जाइ छि‍यनि‍ मालि‍क। जदी हौंसली बेचैक वि‍चार हेतै तँ हि‍नके देबनि‍।
चन्‍द्रेश-        ठीक छै अभि‍हेँ। लगा देबौ बेसीए। गरीब आदमी छेँ। मजबूर छेँ। हमर डोमीन सेहो छेँ।
            (मरनीक प्रस्‍थान।)

पटाक्षेप।


पाँचि‍म दृश्‍य-

(स्‍थान- मंगलक घर। मंगल कोनि‍याँ बीनि‍ रहल अछि‍।)
मंगल-        साँझे गेल, से अखनि‍ धरि‍ नै आएल। पकड़ि‍ तँ नै लेलकै बभना? केते राति‍ भऽ गेल। फेर कखनि‍ भानस-भात हएत।
(दुखनक प्रवेश।)
दुखन-        बाउ, माए नै एलै की? काल्हि‍एटा अंति‍म डेट अछि‍। सेहो लेट फाइन लऽ कऽ। केते राति‍ भऽ गेलै। कनी देखि‍औ गऽ?
मंगल-        देखही(दुखनक प्रस्‍थान।)
            लगैए, उ बभना हि‍ज्‍जो करैत हेतै। एहेन कंजूश देखल नै। एगो सि‍करेट छह महि‍ना चलै छै आकि‍ नअ महि‍ना से नै कहि‍।
            (दुखन आ मरनीक प्रवेश।)
            (खि‍सि‍या कऽ)
तोरा एते देरी कि‍अए भेलौ? बभना पकड़ि‍ नेने छेलौ की?
मरनी-        बड़ सस्‍ता छै जे पकड़ि‍ लेत। खापड़ि‍सँ मुँह भसका देबै। बड़ पाइबला अछि‍ तँ अपना जगहपर।
मंगल-        एते देरी कि‍अए भेलौ से बाज ने?
मरनी-        मालि‍क बड़ हि‍ज्‍जो करै छेलै। एतबे देबौ, एतबे ले, एतेमे एते सूदि‍, ओते लेबही तँ ओते सूदि‍। इहए सभमे बसी टेम लगि‍ गेल।
मंगल-        खैर, छोड़ ई गप-सप। पाइ केते देलकौ?
मरनी-        डेढ़ हजार ऊहो छह टके सैंकरपर।
मंगल-        तोरा नाअों लि‍खाइ केते लगतौ?
दुखन-        बाउ, सभकेँ एक हजार लगै छै। मुदा हमरा सभकेँ कनी छूट छै। लेट फाइन लगा कऽ नअ सए।
मंगल-        दऽ दही नअ सए टाका। काल्‍हि‍ नाओं लि‍खा लेत। आैर पाइ तूँ अपने लग बढ़ि‍याँसँ राख।
            (मरनी नअ सए टाका दुखनकेँ देलक।)
दुखन-        बाउ, कि‍ताबो कीनबै। ओहूमे पाँच सए लगतै।
मरनी-        पाँच सए आरो लऽ ले। भेलौ ने? (पाँच सए आरो देलक)
दुखन-        कहाँ भेलै? कोंपी-कलम सेहो ने कीनबै। सभटा सदहल छै।
मंगल-        ऊहो दए दही। नै तँ रमा-खटोला फेर देखेतौ। बौआ हम तँ छि‍यौ करि‍या अच्‍छर भैंस बरबरि‍। अपन नीकसँ पढ़-लि‍खि‍। पाइ बेरबाद नै करि‍हेँ। केना पुरबै छि‍यौ से बुझि‍ते छि‍ही
मरनी-        ऐ ले नै कहए पड़त एकरा। ई अपने बुधि‍यार छै।
मंगल-        बेटा केतबो बुधि‍यार रहतै तँ बाप लग बेटे रहतै आ बाप ओकरा उचि‍त-अनुचि‍त कहबे करतै।
दुखन-        बाउ, ऐ ले तँू नि‍फि‍कीर रहह। ओना तूँ अपन करतब करि‍ते छहक आ करबाको चाही। माए, भूख लगि‍ गेलौ। कनी ओम्‍हरौ देखही
मरनी-        बेस, हम जाइ छी भनसा-भात करैले। ई एक सए टाका लऽ ले।
            (मरनी एक सए टाका आरो देलक दुखनकेँ। आ उ चलि‍ गेली।)
मंगल-        (मुस्‍कुराइत) बौआ, एगो बात पुछै छि‍यौ। आब ओते पाइ नै ने लगतै।
दुखन-        लाइगो सकै छै। ओना कनी-मनी तँ लगि‍ते रहत।
मंगल-        से केतएसँ अनबै?
दुखन-        औगताहक नै। रसे-रसे सभटा हेतै। हमहूँ परि‍यासमे लगल छी जे केतौ ट्यूशन पकड़ि‍ लेब अपना जेगारसँ नै हेतै तँ कोनो दोकानमे नोकरी कऽ लेब।
मंगल-        तूँ तँ अपने बुझनुक छेँ। जइसँ साँपो मरि‍ जाए आ लाठीओ ने टूटए। से काज करि‍हेँ।
            (मंगलक सार ओपीनदरक प्रवेश।)
ओपीनदर-      पहुना गोड़ लगै छी। (दारू पीब कऽ झुमैत)
मंगल-        बौआ, मामा एलौ। पानि‍ नेने आ। माएओकेँ कहि‍ दि‍हनि‍।
            (दुखन ओपीनदरकेँ गोड़ लागि‍ अन्‍दर जा कऽ पानि‍ अनलक।)
ओपीनदर-      भगि‍ना खूम दनदनाइत रह। बड़ीटा भऽ गेलही। आबो भोज खीया। नै तँ दारूए पीआ।
मंगल-        एते राति‍मे केतए सँ?
ओपीनदर-      चललौं पहुना दुपहरे। कहलि‍ऐ एक कोस पएरे जाइमे केते काल लगतै। रस्‍तामे कनी दारू पीअ लगलौं। तहीमे देरी लगि‍ गेल। चललो नै होइ छलए। कहुना-कहुना खसैत-पड़ैत एलौं। (झुमैत) पहुना, दारूक जोगार कनी आरो लगाउ।
मंगल-        अखनि‍ सार, ई सभ छोड़। बड़ राति‍ भऽ गेलै। खाइक टेम भऽ गेलै।
ओपीनदर-      सार पहुना, ईहो नै बुझै छि‍ही, दारू भऽ जेतै तँ खाइक कोन काज। सार अमरुख अछि‍। बेकारमे एकरासँ बहि‍नक बि‍आह केलौं। पि‍तीऔत बहि‍न अछि‍ तँए छोड़ि‍ दइ छि‍यौ। नै तँ कुटुमैती छोड़ा लैति‍यौ। सार पहुना, तूँ कहि‍यो नै सुधरमेँ।
मंगल-        सार, हूँहीं सुधर। हमरा नै सुधरबाक अछि‍। एलेँ केतएसँ से ने कह सार? एते राति‍मे कोन जरूरी भेलौ?
ओपीनदर-      कथा-कुटुमैती ले एलि‍यौ, सार पहुना। हम भगि‍नाक बि‍आह करबै अपन साइरसँ। केते दि‍नसँ तँग केने अछि‍ सार ससुर। आइ छुट्टी भेल तँ एलौं। दारूक खरचा ओकरे छै। सार ससुर बड़ धनीक अछि‍। जे कहबै से देतै। (झूमि‍ रहल अछि‍
(दुखनक प्रस्‍थान। परनीक प्रवेश।)
मरनी-        (मुस्‍कुराइत) भैया, गोर लगै छि‍अ।
ओपीनदर-      खूब नीके रह दाय। आैर हाल-चाल बढ़ि‍याँ छौ ने?
मरनी-        हँ भैया, बड़ बढ़ि‍याँ छै। राति‍ बड़ भऽ गेलै। पहि‍ने खा लइ जाइ जा। तब कोनो गप-सप्‍प करि‍हेँ।
ओपीनदर-      दाय, चल, अबै छी। (मरनीक प्रस्‍थान।)
            सार पहुना, खाइले जाही ने?
मंगल-        कि‍अए तूँ नै जेबही से?
ओपीनदर-      नै, हमरा खाइक मन नै छज्ञै। कनी भऽ जेतै तँ दारूए भऽ जइतै।
मंगल-        एते राति‍मे दारू केतएसँ औतै? अखनि‍ छोड़, काल्हि‍ देखल जेतै। जइ काजसँ एलेँ, से काज कर।
ओपीनदर-      तँ सएह बात कर। आ खाइले नै जेबही? नै तँ एतै मंगा ले। खेबो करहि‍हेँ आ गपो-सपो हेतै।
मंगल-        ठीके कहै छेँ। दुखन माए, दुखन माए।
मरनी-        (अन्‍दरसँ) की कहै छै?
मंगल-        खेनाइ एतै नेने आ।
मरनी-        कि‍अए घर-अँगना नै छै?
मंगल-        ओपीनदर कहै छै एतै खाइले आ गप-सप्‍प करैले।
मरनी-        अच्‍छा, नेन अबै छि‍ऐ।
मंगल-        जल्‍दी नेन आ।
            (खेनाइ लऽ कऽ मरनीक प्रवेश।)
            खो सार।
ओपीनदर-      नै खाइक मन छौ। तूँहीं खो।
मंगल-        बहि‍न दरबज्‍जापर जे कि‍छु कण-साग भेटै ओकरा अबस्‍स कनि‍योँ-ने-कनि‍याेँ गरहाज करक चाही।
ओपीनदर-      तूँ तेहेन गप कहै छेँ जे खाइए पड़त। एगो चीज देखए दे। जेबीमे रखने छेलि‍ऐ। छै की नै?
            (जेबीमे हाथ दऽ) हँ छौ। हमरा होइ छेलए केतौ खसि‍ पड़लै।
            (जेबीसँ पन्नी नि‍कालि‍) सार पहुना, एत्तेकाल कहै छेलि‍यौ तँ अगधाइ छेलेँ। आब भेलै न। देखलि‍ही, हमरा केते पामर छै?
मंगल-        खेनाइओ सराइ छौ। खेबो कर। गरम खेनाइ सुअदगर होइ छै।
ओपीनदर-      एगो गप बूझि‍ लही सार पहुना, दारू सड़लो खेनाइकेँ नीमन बना दइ छै।
मंगल-        छोड़ लबर-लबर केनाइ। जे करमेँ से कर।
(ओपीनदर दारू पीनाइ आ खेनाइ दुनू काज कऽ रहल अछि‍।)
ओपीनदर-      सार पहुना, तूँ अपन बेटाक बि‍आह हमरा साइरसँ करबि‍ही की नै?
मंगल-        अखनि‍ नै। कारण ओकर धि‍यान पढ़ैपर बड़ छै। बड़ संसगर छै।
ओपीनदर-      तइसँ की? चंसगर आदमीकेँ बि‍आह नै होइ छै आकि‍ नै करैए? तूँ सभ बूढ़ भेलेँ। बूढ़ सभ पाकल आम होइ छै। कखनि‍ खसत कखनि‍ नै। कोनो ठेकान नै। अपन जीता-जि‍नगीमे पुतोहुकेँ देख ले आ नेन जुड़ा ले।
मंगल-        हमरा मनो हेतौ तँ तोहर भगि‍ना नै मानतौ।
ओपीनदर-      कि‍अए, घरमे तोहर जूति नै चलै छौ की?
मंगल-        जूति‍ तँ हमरे चलै छै। मुदा बेटा नम्‍हर भेलै। ओकरो कहल करए पड़ै छै। नै करै छि‍ऐ तँ भागए लगैए। की करबै एगो बेटा अछि‍। माया घेर लइए। भगि‍नेकेँ पुछही
ओपीनदर-      भागीन, भागीन।
दुखन-        (अन्‍दरसँ) हइए अबै छी मामा। (दुखनक प्रवेश)
            की मामा, की कहलहक?
ओपीनदर-      सुनै छि‍अह, तूँ बड़ चंसगर छह। सभटा गप बुझि‍ते हेबहक। बच्‍चो नै छह। जुआन भऽ गेलह। माए-बाप बूढ़ भेलह। हमर वि‍चार छह जे तूँ बि‍आह कऽ लए। हमर साइर बड़ सुन्नरि‍ छै। हेमामालीन आ हमर साइरकेँ एकठाम ठाढ़ कऽ दइ तँ हेमामालीन फाइल भऽ जेतै।
            (मंगल आ ओपीनदर खा-पी कऽ हाथ-मुँह धोलनि‍।)
दुखन-        ई बात बाउएकेँ पुछहक। हम कि‍छु नै कहबह। गारजि‍यर वएह छथि‍न।
ओपीनदर-      की वैंह पहुना, छि‍रहारा खेलै जाइ छेँ। ओकरा पुछहक तँ ओकरा पुछहक। हँ की नै कह?
मंगल-        अखनि‍ नहियेँ बुझही। अखनि‍ पढ़ए दही भागि‍नकेँ। दू-चारि‍ बर्खमे देखल जेतै।
ओपीनदर-      जौं बात नै मानलेँ सार, तँ जाइ छी।
            (उठि‍ कऽ जाइले तैयार होइत।) मुदा एगो गप बूझि‍ ले जे तूकपर नै, से कथीदूनपर। अँए रौ सार, तोरा बेटाकेँ उमेरमे हमरा चारि‍ गो धि‍या-पुता रहए। अखनि‍ अठारह गो छौ। तूँ अपन बेटाकेँ बुढ़ाड़ीमे बिआह करि‍हेँ आ कटहर लीहेँ।
मंगल-        मामा भऽ कऽ तूँ एहेन बात नै कही, सार?
ओपीनदर-      आब हम ओहि‍ना कहबौ सार। नै हेतै न, तँ हमहीं कऽ लेबै। और की? साइरसँ हमरा लोभ अइछे। सार ससुर-सासु बुझि‍ते अछि‍। कोनो चाेरा कऽ लोभ भेल छै? नै। देखा कऽ। एगो बच्‍चो भेल छेलै। लाज दुआरे धारमे हम अपने फेंक एलौं। हमरा कम बुझे छि‍ही सार। हम बड़ पहुँचल फकीर छि‍ऐ।
मंगल-        वाह सार, धि‍नौना काज करैमे पहुँचल फकीर छेँ। ई आदत बड़ खराप छौ।
ओपीनदर-      हमरा एहि‍ना रहए दे।‍ हमर बात नै मानै जाइ गेलेँ तँ तूँहू घर आ हमहूँ घर। हमरा तोरा कोनो मतलब नै, कोनो संबन्‍ध नै। आइसँ कुटुमैती खतम। चललि‍यौ।
            (ओपीनदरक प्रस्‍थान।)
पटाक्षेप।



छअम दृश्‍य-

(स्‍थान- चन्‍द्रेशक हवेली। चन्‍द्रेश ठुट्ठी सि‍करेट पीऐ छथि‍। चन्‍द्रेश आ मनीषा चन्‍द्रप्रभाक बि‍आहक संबन्‍धमे गप-सप कऽ रहल छथि‍।)

मनीषा-        आब अपन चन्‍द्रप्रभाक उमेर अठाहर भेल अबैए। कन्‍यादानक संबन्‍धमे की सोचै छि‍ऐ?
चन्‍द्रेश-        की सोचबै अखनि‍? सोचलाहा गप कखनो भैयो जाइ छै आ कखनो नहि‍योँ होइ छै। भगवतीक जे इच्‍छा हेतै सएह हेतै। अइले अख्‍नेसँ हमरालोकनि‍ कि‍अए अफसि‍याँत होइ?
मनीषा-        से तँ ठीके। मुदा कन्‍यादान बड़ पैघ जग छी। बहुत पहि‍नेसँ एकर ओरि‍यान-बात करए पड़ै छै।
चन्‍द्रेश-        ईहो बात कि‍यो नै काटत।
            (चन्‍द्रेशक पड़ोसी आ शुभचि‍न्‍तक ब्रह्मानंदक प्रवेश।)
ब्रह्मानंद-       भैया, गोर लगै छी।
चन्‍्द्रेश-        जीबू, जागू आ दनदनाइत रहू। आइ केन्नए सुरूज उगलै हेन?
ब्रह्मानंद-       सुरूज तँ सभ दि‍न एक्के रंग उगै-डुमै छै करीब करीब। मुदा करबै की? फुरसति‍क बड़ अभाव रहै छै। ताशक खेलाड़ी जकाँ भरि‍ दि‍न ओहीमे लगल रहनाइ नीक नै लगैए। अपन दुख-धंधामे लागल रहलौं। ई हो जे आइ एलौं से पेपरमे एगो बड़ खराब बात पढ़लि‍ऐ।
चन्‍द्रेश-        की यौ? की पढ़लौं यौ?
ब्रह्मानंद-       की पढ़ब भैया? देखै आ सुनै छी तँ बड़ छगुन्‍ता लगैए। छौड़ा-छौड़ी सभ तेतेक उड़ाँत भऽ गेलैए पढ़ि‍ते-पढ़ि‍ते दुनू फराड़। दरि‍भंगेक एगो कोनदीन छात्रावाससँ एगो छौड़ाक संग फराड़ भऽ गेलैए। जि‍ज्ञासा भेल जे अहूँक पुत्री तँ दरि‍भंगेमे पढ़ि‍ रहली हेन।
चन्‍द्रेश-        ब्रह्मानंद, हमरा पूर्ण बि‍सवास अछि‍ जे हमर बेटी एना नै कऽ सकैए।
ब्रह्मानंद-       से तँ हमरो बि‍सवास अछि‍। मुदा छि‍ऐ मने। एकर कोनो ठेकान नै। कखनि‍ की करत की नै। जखनि‍ पेपरमे पढ़ै छी तँ छगुन्‍तामे पड़ि‍ जाइ छी जे दुनि‍याँ केते बेशर्म भऽ गेलै। कहू तँ पचास बर्खक बुढ़बा केतौ आठ बर्खक छौड़ी संग रहै। कहु तँ हाथी आ चुट्टीक मेल केहेन हेतै?
मनीषा-        अहाँ सभ खाली अनकर इन्ना-मीन्ना करै छी। अपना-अपनापर धि‍यान दि‍यौ। चन्‍द्रप्रभा पापा, कनी फोनसँ छात्रावासक मालि‍कसँ पुछि‍यनु जे अपन बुच्‍चीक की केना हाल-चाल छै। आ नै तँ एक लपकन चलि‍ए जाउ।
चन्‍द्रेश-        जाइमे तँ बेसी पाइ खरचा हेतै आ फोनसँ कम्‍मे। पहि‍ने फोनसँ बुझै छि‍ऐ। तहन देखल जेतै।
मनीषा-        तऽऽ सहए जल्‍दी करू।
            (चन्‍द्रेश मोबाइलसँ छात्रावासक मालि‍कसँ गप करै छथि‍।)
चन्‍द्रेश-        हेल्‍लो लक्ष्‍मण भाय?
लक्ष्‍मण-       (नेपथ्‍यसँ) हेल्‍लो चन्‍द्रेश भाय। कहल जाउ की बात?
चन्‍द्रेश-        भाय कहलौं जे हमर बेटी चन्‍द्रप्रभा रूप नं. 15 ठीक-ठाक अछि‍ कि‍ने?
लक्ष्‍मण-       एकदम ठीक अछि‍। जखने पाँच मि‍नट पहि‍ने छात्रावासँ घूमि‍-घामि‍ कऽ एलौं हेँ।
चन्‍द्रेश-        भाय, पेपरमे देखलि‍ऐ गड़बड़ सरबड़बला बात। ऊहो दरि‍भंगेक छात्रावाससँ। ठीके बात छि‍ऐ की?
लक्ष्‍मण-       बात तँ ठीके छि‍ऐ भाय। मुदा हमर छात्रज्ञवासक बात-बेवस्‍था कि‍छु आैर अछि‍। चि‍न्‍ताक कोनो बात नै।
चन्‍द्रेश-        हमरा तँ कोनो चि‍न्‍ता नै। मुदा चन्‍द्रप्रभाक मम्‍मीकेँ भऽ गेल छेलनि‍ हेन। ओना आब नै हतनि‍ हुनको।
लक्ष्‍मण-       अपने सभ नि‍श्चि‍न्‍त रहि‍यौ, नाफि‍कि‍र रहि‍यौ। भाय हम तँ ई बुझै छी जेहेन अपन बेटी तेहने अनकरो। तहि‍न ने हमर छात्रावासक नाओं चलैए। केते छात्रावास खूजल आ बन्न भेल। मुदा हमर छात्रावास दनदनाइत अछि‍। तहूमे अखनि‍ बारहमीक परीक्षा चलि‍ रहल अछि‍ से आरो कड़ाइ कऽ देने छी। हम कोनो मुर्ख नै छी। पुरान एम.. छी।
चन्‍द्रेश-        लक्ष्‍मण भाय, अहाँक बहुत-बहुत धन्‍यवाद।
लक्ष्‍मण-       अहूँकेँ बहुत धन्‍यवाद।
            (दुनू गोरे मोबाइलसँ गप बन्न केलनि‍।)
चन्‍द्रेश-        ब्रह्मानंद आ चन्‍द्रप्रभाक मम्‍मी, अहाँ सभ मोबाइलपर अवाज तेज सुनबे केलि‍ऐ सभ गप। अहीं सभ दुआरे अवाज तेज कऽ देने रही। छात्रावासक बेवस्‍थासँ अहाँ सभ संतुष्‍ट कछी कीने?
मनीषा-        हँ, संतुष्‍ट छी।
ब्रह्मानंद-       संतुष्‍ट तँ छी मुदा।
चन्‍द्रेश-        मुदा की?
ब्रह्मानंद-       मुदा इहए जे चन्‍द्रप्रभाक उमेरो बि‍आह गोज होइत हेतै।
चन्‍द्रेश-        हँ, अठारहसँ कमी बेसी। ई तँ बि‍आहक नि‍म्न सीमा अछि‍। मुदा पढ़ैबलाकेँ बि‍आह कऽ कंुठि‍त नै बना दी। जे जि‍नगीमे कि‍छु करए चौए, ओकरा प्रोत्‍साहि‍त करक चाही। हमर बेटीक पढ़ाइपर बड़ जोर छै आ हमरो प्रबल इच्‍छा अछि‍ जे ओकरा डाक्‍टर बनाबी तथा जाति‍मे राजा खनदानमे बि‍याही।
ब्रह्मानंद-       भैया, बेसी उमेरमे बि‍आह करैमे लड़ि‍का-लड़ि‍कीक काट-छाँट हुअए लगै छै से?
चन्‍द्रेश-        उ होइ छै, नि‍ठल्‍ला सभकेँ वा अमरुख सभकेँ। योग्‍यकेँ योग्‍य चाही। ई, सभ चाहै छै आ उोइमे समाए लगै छै। तहि‍न एकटा बातक धि‍यान अबस्‍स रखक चाही जे सभ कि‍छुक तूक होइत अछि‍।
ब्रह्मानंद-       सएह कहलौं भैया। ओना अपने तँ बुझनुक छीहे। आब भैया जेबाक आज्ञा दि‍अ। कोर्टक टाइम भऽ गेलै।
चन्‍द्रेश-        जाउ, अहाँकेँ अबेर भऽ जाएत।
            (ब्रह्मानंदक प्रस्‍थान।)
लक्ष्‍मण-       (नेपथ्‍यसँ) हेल्‍लो, भाय चन्‍द्रेश।
चन्‍द्रेश-        हेल्‍लो लक्ष्‍मण भाय। कहू, की हाल-चाल?
लक्ष्‍मण-       पहि‍ने अपने मि‍ठाइ लऽ कऽ दरि‍भंगा जल्‍दी आउ।
तहि‍न हाल-चाल बूझब फलि‍सँ।
चन्‍द्रेश-        कनि‍योँ इशारा करू ने?
लक्ष्‍मण-             गप एतेक सुन्नर छै जे एबै तहने कहब।
चन्‍द्रेश-        कम-सँ-कम गपक वि‍षय कहि‍ दि‍अ आ कहैए पड़त।
लक्ष्‍मण-             नै मानब तँ गपक वि‍षय बूझि‍ लि‍अ, परीक्षाक रि‍जल्‍ट।
चन्‍द्रेश-        बेस, हम दुनू परानी आबी आकि‍ असगरे आबी।
लक्ष्‍मण-       दुनू परानी आबि‍ तँ घीओसँ चि‍क्कन। नै असगरे आबी तँ ऊहो बढ़ि‍याँ।
चन्‍द्रेश-        दुनू परानी आबि‍ रहल छी। ऊहो बहुत दि‍नसँ कहै छेली जे दि‍रभंगा जाएब दरि‍भंगा जाएब।
लक्ष्‍मण-       आउ, दुनू परानीकेँ स्‍वागत अछि‍।
            (दुनू परानी दरि‍भंगा जाए रहल छथि‍।)
            चन्‍द्रेश आ मनीषा अन्‍दर जा कऽ बहरेलथि‍। मंचपर घूमि‍ रहल छथि‍। अन्‍दरमे लक्ष्‍मण बैसल छथि‍। पर्दा हटैए। लक्ष्‍मण ठाढ़ भऽ चलि‍ जाइए।)
लक्ष्‍मण-       नमस्‍कार चन्‍द्रेश भाय।
चन्‍द्रेश-        नमस्‍कार, नमस्‍कार लक्ष्‍मण भाय।
लक्ष्‍मण-       नमस्‍कार मैडम।
मनीषा-        नमस्‍कार नमस्‍कार। (तीनू बैस जाइ छथि‍।)
चन्‍द्रेश-        कहू भाय, कि‍अए बजेलौं?
लक्ष्‍मण-       पहि‍ने मि‍ठाइ लाउ तहि‍न कहब।
चन्‍द्रेश-        नै मानता भाय। दि‍यनु रखने छी से।
            (मनीषा झोरासँ मि‍ठाइक डि‍ब्‍बा नि‍कालि‍ लक्ष्‍मणकेँ देलनि‍।
लक्ष्‍मण-       आब भेल। आब सुनू। अहाँक चन्‍द्रप्रभा हमर छात्रावासक दू सए वि‍द्यार्थीमे पहि‍ल स्‍थानपर रहली बारहवींक परीक्षामे तथा कौलेजमे तेसर स्‍थानपर रहली।
चन्‍द्रेश-        आ डि‍वीजन कोन भेलनि‍?
लक्ष्‍मण-       डि‍वि‍जन फस्‍ट भेलनि‍।
            (चन्‍द्रेश आ मनीषा मुस्‍की दइ छथि‍।)
चन्‍द्रेश-        कनी बेटीकेँ बजबि‍यौ तँ?
लक्ष्‍मण-       चन्‍द्रप्रभा, चन्‍द्रप्रभा, चन्‍द्रप्रभा।
चन्‍द्रप्रभा-      (अन्‍दरसँ) जी सर, अबै छी।
लक्ष्‍मण-       मम्‍मी-पापा एला हेन। कनी जल्‍दी आउ।
            (चन्‍द्रप्रभाक प्रवेश।तीनूकेँ पएर छूबि‍ गोर लगली। चन्‍द्रप्रभा अति‍ प्रसन्न छथि‍।)
अपन मम्‍मी-पापाकेँ परीक्षाक रि‍जल्‍ट बतबि‍यनु।
चन्‍द्रप्रभा-      बारहमीक परीक्षामे हम फस्‍ट डि‍वि‍जन केलौं छात्रज्ञवासमे पहि‍ल स्‍थान आ कौलेजमे तेसर स्‍थानपर छी। मेडि‍कलक रि‍जल्‍ट अही बीचमे अबैबला अछि‍।
लक्ष्‍मण-       पहि‍ने रि‍जल्‍टक खुशीमे सभ कि‍यो मि‍ठाइ खाइ जाउ। तहन अगि‍ला कोनो गप करब।
चन्‍द्रेश-        भाय, अपनेक जे वि‍चार।
लक्ष्‍मण-       वि‍चारे वि‍चार।
            (ओही डि‍ब्‍बामे सँ सभ कि‍यो मि‍ठाइ खा रहल छथि‍। सभ एक-दोसरकेँ मि‍ठाइ खुआ रहल छथि‍।)
बेटी, कनी पानि‍ नेन आउ।
चन्‍द्रप्रभा-      जी सर, तुरंत अनलौं।
            (चन्‍द्रप्रभा अन्‍दरसँ पानि‍ अनली। सभ कि‍यो हाथ-मुँह धोलनि‍।)
लक्ष्‍मण-       भाय, हमरा पूर्ण आशा अछि‍ जे चन्‍द्रप्रभा मेडि‍कल सेहो नि‍कालि‍ लेती।
चन्‍द्रेश-        बेटी, परीक्षा नीक भेल छेलह?
चन्‍द्रप्रभा-      परीक्षा मेडि‍यम भेल छल पापा। ऐ बेरुका क्‍वैचन बड़ हार्ड छल। उम्‍मीद तँ छै। मुदा होइ जे।
            (पेपरबला लूटनक प्रवेश।)
लूटन-        पेपर पेपर, ऐ पेपर। आझुका ताजा समाचार। नवका समाचार। मेडि‍कलक रि‍जल्‍ट।
लक्ष्‍मण-       एगो पेपर देब बौआ।
लूटन-        जी सर। अबस्‍स लेल जाउ।
            (लूटन लक्ष्‍मणकेँ पेपर दऽ पाइ लऽ प्रस्‍थान।)
(लक्ष्‍मण आ चन्‍द्रप्रभा गौरसँ रि‍जल्‍ट देखि‍ रहल छथि‍।)
चन्‍द्रप्रभा-      सर, हमर रि‍जल्‍ट छै पाँच नम्मरमे।
लक्ष्‍मण-       इएह छी ने?
चन्‍द्रप्रभा-      जी सर।
            (खुशीसँ वि‍भोर छथि‍ चन्‍द्रप्रभा। फेर सभकेँ पएर छूबि‍ गोर लगै छथि‍।)
लक्ष्‍मण-       जाउ, चन्‍द्रेश भाय, अहाँ जीतलौं। पहि‍ल खेपमे मेडि‍कल-इंजीनि‍यरिंग नि‍कालनाइ लोहाक चना चि‍बेनाइ छी। अहाँ बहुत भाग्‍यशाली छी। जाउ, अहाँक बेटी आब डाक्‍टर भऽ गेली।
चन्‍द्रप्रभा-      अखनि‍ कोन आशा पापा? रस्‍ता बड़ नम्‍हर छै।
लक्ष्‍मण-       रस्‍ता केतबो नम्‍हर छै। मुदा हमरा बि‍सवास अछि‍ कि‍ने? हमर बि‍सवास जल्‍दी फेन नै करैए।
चन्‍द्रेश-        आगू की केना खर्च लगतै भाय?
लक्ष्‍मण-       आगू खर्च तँ छैहे बेसी। मुदा जि‍नगीओ बनि‍ जाइ छै कि‍ने। कहल जाइ छै, मनी बि‍गेट्स मनी। यानी धनसँ धन कमाएल जाइ छै। की अपने सक्षम नै छि‍ऐ की?
चन्‍द्रेश-        एकटा कि‍छु अंदाज अपने बता देतौं। तँ बढ़ि‍याँ रहि‍तै।
लक्ष्‍मण-       कम-सँ-कम दस लाख तँ मानबे करि‍यौ।
चन्‍द्रेश-        चलू, तहन देखल जेतै। बीसो धरि‍ खरचा हेतै तँ चि‍न्‍ता नै। ओइसं आगू सोचए पड़ि‍ताए। बीस तँ अखनि‍ हमरा एकाउन्‍टमे अछि‍।
            चन्‍द्रप्रभा मम्‍मी एक बेर दि‍ल खोलि‍ कऽ हँसू। गुमसुम कि‍अए बैसल छी। अहाँ डाक्‍टरक माए भेलीऐ। ई बड़ पैघ गर्वक बात छी। एक बेर हँसू।
            (मनीषा हँसली ठहक्का मारि‍ कऽ।)

पटाक्षेप।


सातम दृश्‍य-

(स्‍थान मंगलक घर। मंगल पथिया आ मरनी कोनियाँ बीि‍न रहल अछि‍।)
मरनी-        दुखन बाउ, काल्हि हम मणिकांत मालिकक अंगना गेल रही कोनियाँ-पथि‍या लऽ कऽ। मालिक अपन बेटापर खीसियाइ छेलखिन जे तीन बेरसँ मैट्रिक फएल करै छेँ। तूँ केहेन सड़ल वि‍द्यार्थी छेँ। केते पाइ तूँ खरच केलेँ हेन। देखही तँ डोमीनक बेटाकेँ। सौंसे इसकूलमे नाओं केलक।
            सएह देखहक। पाइबलाक धि‍या-पुता पढ़बे नै करै छै आ गरीबहाक धि‍या-पुता पढ़ैले डौं-डौं करै छै। हँ, पाइबलामे चन्‍द्रेश मालिकक बेटी कहाँदून बड़ नीक जकाँ पढ़ै छै।
मंगल-        कहै छै, बुड़बक मूइला अनका खातिर। अपन काज कर आ अपन चि‍न्‍ता कर।
मरनी-        से तँ ठीके कहै छहक।
            (मरनी आ मंगल अपन-अपन काजमे लगि जाइए।
दुखनक प्रवेश। माता-पि‍ताकेँ पएर छूबि कऽ गोर लगैए।)
मंगल-        बौआ, की बात छि‍ऐ? आइ बड़ खुशी छेँ।
दुखन-        बाउ, हम दूगो परीक्षामे पास भेलि‍अ।
मंगल-        कोन-कोन दूगो परीक्षा?
मरनी-        तूँ बुझबहक से?
मंगल-        नै बुझबै तँ नै बुझबै। कोइ पुछतै तँ कहबै कि‍ने?
मरनी-        तोरा मने नै रहतह।
मंगल-        नै मन रहतै तँ तोरे बजा कऽ लऽ जेबौ कहैले। बौआ कोन दूगो परीक्षा पास केलेँ?
दुखन-        बारहवीं आ इंजिनि‍यरिंगक।
मंगल-        की कहलिही? बारमी आ इंजिरिंग?
दुखन-        नै बारहवीं आ इंजिनियरिंग।
मंगल-        की होइ छै ई दुनू परीक्षा पास कए कऽ?
दुखन-        इंजीनियर बनै छै। हम इंजीनि‍यर बनबै।
मंगल-        कहि‍या बनबिही?
दुखन-        अखनि बड़ देरी छै। पहिने कौलेजमे नाओं लि‍खेबै। पास करबै। तेकर पछाति इंजीनि‍यर बनबै।
मंगल-        नाओं लि‍खबैमे फेर पाइ लगतै?
दुखन-        हँ, पहि‍ने हजारमे लगै छेलै। मुदा आब लाखमे लगतै।
            (माथपर हाथ रखि‍ मंगल गुम्म भऽ गेलथि।)
मरनी-        कि‍अए गुम्म भऽ गेलहक? कम-सँ-कम गपो तँ बूझि लहक। नै हेतह तँ छोड़ि दि‍हक। बौआ, केते पाइ लगतै सभटा मि‍ला क?
दुखन-        बड़ कम तँऽऽ छह लाख।
मंगल-        छ लाख छ लाख, छ लाख।
            (मंगलकेँ चौन्‍ह आबि‍ जाइ छन्‍हि। खसि पड़ै छथि। मरनी अँचरासँ मंगलक मुँहपर हवा दइए। दुखन अन्‍दरसँ पानि‍ आनि‍ मुँह पोछैए।) (कनीकाल पछाति मंगल होशमे अबैए।)
मरनी-        तोरा चि‍न्‍ता कि‍अए होइ छह?
मंगल-        चिन्‍ता कि‍अए नै हएत आ चौन्‍ह कि‍अए नै आएत? छ लाख टाका कम भेलै। बाप रे बाप, छह लाऽऽख।
मरनी-        नै हेतै ने तँ हौंसली बेचीए देबै। आ डीहो बेचि देबै।
मंगल-        नै पुरतै तँ देखल जेतै। जगक मालिक जगदीश होइ छै। तँू चि‍न्‍ता नै करह। बौआ, इंजीयर भऽ जेबही तँ पाइ केते कमेबही?
दुखन-        कम-सँ-कम पचास हजार महि‍ना। लाखो भऽ सकै छै।
मरनी-        तब तँ हि‍म्मत नै हारब। तूहूँ हिम्‍मत नै हारह दुखन बाउ।
मंगल-        खाली कहलासँ हेतौ आकि उपाए सोचबिही।
मरनी-        नै हेतै तँ हौसली बेचि लेब, दू-चारि‍ धूर डीह छोड़ि कऽ सभटा डही बेचि लेब आ तहूसँ नै हएत तँ बौआक बिआहक गप कऽ लेब धनिकहा कुटुमसँ। बिआह इंजीयर बनला बादे हएत। तइले ओपीनदर हमर छैहे।
दुखन-        माए, एकर माने नै बुझलि‍यौ।
मरनी-        एकर माने ई भेल जे ओपीनदरक साइरसँ बि‍आहक गप कऽ लेब आ ताबे ओकर ससुर तोहर पढ़ैक बाँकी खरच देथि‍न। इंजीयर बनला पछाति तोहर बि‍आह ओपीनदर साइरसँ हेतै।
दुखन-        आ जौं भविसमे बि‍आहमे कोनो तरहक बेवधान आबि‍ जाए तब की हेतै?
मरनी-        की हेतै। कि‍छु नै हेतै। ओपीनदरेकेँ समझा-बुझहा कऽ कहबै एना-एना बेवधान छै, से की केना करबहक। कोनो नै कोनो उपए हेब्‍बे करतै।
दुखन-        बाउ कि‍छु बजि‍ते नै छथि‍न आ तोहर वि‍चार हमरा नीक नै लगैए।
मरनी-        एकटा कर बौआ, दुनू माय-पूत मणि‍कान्‍त मालिक ऐठाम चल। हुनकेसँ वि‍चार पुछबनि‍। बड़ काबि‍ल आदमी छथिन।
दुखन-        चल माए, हुनके लग। अपन गाममे बुजुर्ग आदमी मानल जाइ छथि‍न।
मरनी-        दुखन बाउ, तूँ गामेपर रहह। हम दुनू माइ-पूत कनी मणिकान्‍त मालि‍क ऐठाँसँ अबै छी।
मंगल-        बेस, तूँ सभ जो, जल्‍दी अभि‍हेँ। हम जाइ छि‍यौ सुतैले। हमरा मन खराब लगै छौ।
            (मंगलक प्रस्‍थान। मरनी आदुखन मणि‍कांत ऐठाम जा रहल अछि‍। अन्‍दरमे मणि‍कांत बैसल छथि‍। पर्दा हटैए। गप सप शुरू होइए। फेर पर्दा खसैए।)
मरनी-        मालिक, गोर लगै छी। (दुखन सेहो पएर छूबि‍ प्रणाम केलक।)
मणि‍कांत-      कहू डोमीन, आइ की बात छै जे दुनू माइ-पूत ऐलौं हेन?
मरनी-        बौआ कोनदीन परीक्षा पास केलक। ओइमे नाओं लि‍बए चाहैए। सएह वि‍चार पूछए एलि‍यनि‍ हेन।
मणि‍कांत-      कथीमे नाओं लि‍खबए चाहै छीही बौआ?
दुखन-        इंजीनि‍यरिंगमे। पाँचम रैंक अछि‍।
मणि‍कांत-      (उठि‍ कऽ पीठ ठोकैत) वाह! वाह! वाह बेटा!! बहुत सुन्नर। ऐ समाजकेँ तूँ प्रति‍ष्‍ठा बढ़ाए देहलीन। तइले हमर हार्दिक असीरवाद आ हार्दिक शुभ कामना। आब बाज, तोरा समस्‍या की छौ?
दुखन-        मालिक, समस्‍या तँ बड़ पैघ छै। एडमि‍शन आ पढ़ाइक खर्च। गारजि‍यन कहै छथि‍न- हौंसली आ डीह बेचि‍ देबौ। तइसँ नै हेतै तऽऽ कोनो धनि‍कहा कुटुमसँ बि‍आहक गप कऽ हुनकासँ पाइ लऽ कऽ पुरेबौ। बि‍आह पढ़ाइक बाद हेतै।
मणि‍कांत-      (कि‍छु सोचि‍ कऽ) हारल नटुआ झुटका बि‍छए। मजबूरीमे कि‍छु भऽ सकै छै, कि‍छु करए पड़ै छै। मुदा कुटुमसँ पाइ लऽ कऽ पढ़ेनाइ नीक नै होइ छै। कारण एगो खिसा मन पड़ैए। एक आदमीकेँ अपन बेटाकेँ मेडि‍कलमे नामांकन करेबाक रहै। पाइक अभावमे उ कुटुमसँ बि‍आहक नाओंपर पाइ लऽ कऽ नामांकन करेलक। पढ़ाइ पुरो ने भेलै आकि‍ ओइ भावी डाक्‍टरकेँ बि‍आह करए पड़लै। पढ़ै दि‍सि‍सँ ओकर धि‍यान कमलै। परि‍णाम भेलै जे उ परीक्षामे फेल भऽ गेल। कुटुम खर्च देनाइ बन्न कऽ देलनि‍। उ डाक्‍टर नै घरक आ घाटक रहल। हारि-थाकि कऽ कुटुम कअए बेर खर्चा देलनि‍ आ कअए बेर बन्न केलनि‍। बारह लाख कुटुम खर्च केलनि‍। पंचैतीमे थुक्कम-फज्झम भेल। लड़ि‍की छोड़ा-छोड़ी भेल। केश-फौदारी भेल। अन्‍तमे लड़ि‍कीकेँ ओकरा राखए पड़लै।
दुखन-        फेर उ पढ़लकै की नै?  डाक्‍टर बनलै की नै?
मणि‍कांत-      हँ बनलै।
दुखन-        केना बनलै?
मणि‍कांत-      सरकारसँ लोन लऽ कऽ।
दुखन-        की हमरा लोन भेट सकैए छै?
मणि‍कांत-      हँ, अबस्‍स भेटतै। लोनक नि‍अम छै तँ कि‍अए ने भेटतै? मुदा शुरूमे नै भेटै छै। कि‍छु बादमे भेटै छै। हमर वि‍चार इहए जे पहि‍ने जेना-तेना एडमि‍शन लऽ ले। फंर लोन लऽ कऽ पढ़ाइ पूर्ण करि‍हेँ। मुदा बि‍आहक चक्करमे नै पड़ आ ने कुटुमसँ पाइ लऽ कऽ पढ़। ई जोगार बड़ लफराबला होइ छै। ऐसँ आगू अपन वि‍चार।
दुखन-        अहींक वि‍चार रहतै। मालिक, हम सभ जाइ छी।
            (दुखन मुँहसँ प्रणाम केलक। दुनू माइ-पूतक प्रस्‍थान।)
मणि‍कांत-      ई छौड़ा गुदरीक लाल छी। पढ़ैक एहेन सुन्नर जि‍ज्ञासा भगवान केकरो-केकरो दइ छथि‍न। आब ि‍उ इंजीनि‍यर हेब्‍बे करतै। हमरा सभ एतए पचास घर छी तइमे एक्कोटा हाकि‍म-हुकुम नै छथि‍। मुदा दू घर डोममे एगो इंजीनि‍यर राखू भाइए गेल। हमरा सबहक धि‍या-पुता रईसीमे चूर रहैए। तहन एहेन लक्ष्‍य  धरि‍ केना पहुँच सकत। खैर, भगवान सभकेँ भला करथुन।

पटाक्षेप।

आठम दृश्‍य-
(सथान- चन्‍द्रेशक हवेली। चन्‍द्रेश दुनू परानी बेटीक संबन्‍धमे गप-सप्‍प कऽ रहल छथि‍। सि‍करेट धरा कऽ पीबै छथि‍।)
चन्‍द्रेश-        चन्‍द्रप्रभा मम्‍मी, बुच्‍ची एत्ते दूर पढ़ए चलि‍ गेली जे मन होइए भेँट करी तँ मुश्कि‍ल। कनी दूर छै बेंगलूर। बाप रे बाप, जाइत-जाइत-जाइत पतन पड़ि‍ गेल। ट्रेनमे बैसल-बैसल सुलवाइ उखरि‍ गेल। तखनि‍ एगो अछि‍ जे मोबाइल दऽ देलि‍ऐ हेन। ओइसँ गप-सप्‍प होइत रहत।
मनीषा-        मोबाइल तँ भने दऽ दलि‍ऐ हेन। मुदाऽऽऽ।
चन्‍द्रेश-        मुदाकी?
मनीषा-        मुदा इहए जे मोबाइलक प्रयोग लोक अधलो-सँ-अधलो काजमे करैए जइसँ केतेठाम केते रंगक दुर्घटना भेलए।
चन्‍द्रेश-        सभ कि‍यो अपन-अपन बुधि‍-वि‍वेकक अनुसार मोबाइलक प्रयोग करैए। तइले केते समुद्र उपछब। हमरा अपन बेटीपर भरोस अछि‍ जे उ मोबाइलक गलत प्रयोग नै करती। की अहाँकेँ ओकरापर भरोस नै अछि‍ की?
मनीषा-        हमर बेटी डाक्‍टरी पढ़ाइ पढ़ैए। कोनो अमरुख अछि‍ जे उ अधला काज करत। हमरो ओकरापर पूरा भरोस अछि‍।
            (मरनीक प्रवेश।)
मरनी-        मालि‍क, गोर लगै छी। मलि‍काइन, गोर लगै छी।
चन्‍द्रेश-        बाज की बात छौ?
मरनी-        मालिक, हमर छौड़ा पढ़ै खातिर हमरा परेशान कऽ देलक। कोनो दशा बाँकी नै अछि‍। फेर कहै छै कोनदीन पढ़ाइ करब।
चन्‍द्रेश-        कोनदीन पढ़ाइ नै, इंजीनि‍यरिंगक पढ़ाइ।
मरनी-        हँ हँ, सएह।
चन्‍द्रेश-        सुनलौं तँ बड़ मन प्रसन्न भेल। मुदा सोचलौं तँ सोचि‍ते रहि‍ गेलौं जे ओते पाइ उ सभ केतएसँ आनत जे बेटाकेँ इंजीनि‍यरिंग पढ़ाएत।
मरनी-        तहीले  एलौं मालिक। की उपाए हेतै?
चन्‍द्रेश-        उपाए हम की बता देबौ। हम जे कहबौ से तूँ सभ थोड़हे करमेँ।
मरनी-        मालिक, वि‍चार लेबाक चाही दससँ। मुदा करक चाही सोचि‍-वि‍चारि‍ कऽ अपना मनसँ।
चन्‍द्रेश-        सुन, तँ सभ ऐ पढ़ाइक लपौड़ीमे नै पड़। बड़ खर्च छै बड़। हमर बेटी डाक्‍टरी पढ़ाइ पढ़ैए। से, हमरा सभकेँ ऊपर-नीचाँ सुझाइए। आ तोरा की हेतौ? तोहर बेटा तेज छौ। कोनो तरहेँ कोनो धंधा गामेमे करा दही। बढ़ि‍याँ पाइ कमा कऽ देतौ। नै तहूसँ होइ छौ तँ एगो कर ओकरा पैंजाब-दहोही पठा दही, बड़ पाइ कमा कऽ देतौ। दुइए-चारि‍ बर्खमे धनि‍क भऽ जाइ जेमेँ।
मनीषा-        ठके तँ कहै छथि‍। पहि‍ने पेट देखब की पढ़ाइ देखब? हम जाइ छी, बरतन-बासन ओहि‍ना अछि‍। (प्रस्‍थान।
मरनी-        मालि‍क, नै हेतै ने तँ हौंसली बेचि‍ लेतीऐ।
चन्‍द्रेश-        तइसँ केते हेतौ। नाओं लि‍खबै जोग नै हेतौ।
मरनी-        कहाँदनि‍ चानी बड़ महग छै, तैयो नै पुरतै?
चन्‍द्रेश-        नै पुरतौ। जदी डीहो बेचि‍ लेबही तँ कहुना पुरतौ।
मरनी-        मालिक, हम सभ अमरुख छी। नअ-छअ कि‍च्‍छो ने बुझै छि‍ऐ। नै हेतै तँ, कनी राखि‍ डीहो बेचि‍ देबै।
चन्‍द्रेश-        जदी से वि‍चार छौ तऽऽऽ घरवला आ बेटा दुनूकेँ बजा आन। ई सभ काज मुँहजवानी नै होइ छै।
मरनी-        बेस, बजेने अबै छथ्‍ऐ। (मरनीक प्रस्‍थान।)
चन्‍द्रेश-        जुलुम भऽ रहल अछि‍। डोम भऽ कऽ इंजीनि‍यर बनत। ऐ इलाकामे एक्कोटा इंजीनि‍यर नै छै। डाक्‍टरो हमरेटा बेटी हएत। साठि‍-सत्तरि‍ घर ब्राह्मण अछि‍। केकरो कोनो लाज नै जे धि‍या-पुताकेँ पढ़ाएत-ि‍लखाएत आ काबि‍ल बनाएत। कहै जाइ जाएत हम बड़का जाति‍ छी बड़का। ब्राह्मण छौड़ा सभकेँ देखै छि‍ऐ भाँग खाइत, दारू पीऐत, गाँजा पीऐत, ताश-ताश खेलैत। लाजसँ अपने मुड़ी घुमा लइ छी। कहबै तँ झगड़ा हएत। एहेन काज कि‍अए करब। खास कऽ ब्राह्मण टोलमे देखै छी जाति‍ ऊँच आ कर्म नीच।
            (मंगल, मरनी आ दुखनक प्रवेश।)
मंगल-        मालिक, गोर लगै छी।
दुखन-        मालिक प्रणाम।
चन्‍द्रेश-        की बौआ, तूँहीं इंजीनि‍यरिंगमे एडमि‍शन करबए चाहै छेँ?
दुखन-        जी मालिक।
चन्‍द्रेश-        मंगल, तोहर घरनी हमरा लग हौंसली बन्‍हक रखने छौ। उ बेचतै आ डीहो बेचतै एकरा एडमि‍शन लेल। ठीके बात छौ?
मंगल-        ठीके छि‍ऐ।
चन्‍द्रेश-        वि‍चार पक्का छौ कि‍ने?
मंगल-        हँ मालि‍क। खाली डीहमे सँ पाँच धूर रखबै।
चन्‍द्रेश-        पाइ केते लेबही?
मंगल-        जइसँ एकर पढ़ाइ पूरा भऽ जाइ।
चन्‍द्रेश-        ओइमे कम-सँ-कम सात-आठ लाख चाही। दुनू मि‍ला कऽ ओतेक चीज कहाँ छौ? हम बड़ बेसी तँ दू लाख देबौ।
मंगल-        ऐमे केना हेतै मालि‍क। अपने गामक मालि‍क छि‍ऐ। गरीबपर दयो करि‍यौ। कम-सँ-कम पाँचो दि‍यौ।
चन्‍द्रेश-        नै, ओइसँ बेसी नै हेतौ। बड़ करमेँ बड़ करमेँ तऽऽ अढ़ाइ दऽ देबौ। उ सुग्‍गर खोबहारबला जमीन के लेतौ गऽ?
मंगल-        मालि‍क, ओहीक बगलमे चारि‍ लाख टके कट्ठा बि‍कलै हेन।
चन्‍द्रेश-        जो, ओकरे दऽ दि‍हैन।
मंगल-        सभ दि‍न हम अहींसँ लेनी-देनी केलौं। हम अहाँ छोड़ि‍ केकरो नै देबै। कि‍छु आरो कि‍रपा करि‍यौ माि‍लक सोना कटोरा जमीन छै।
दुखन-        मालि‍क, उचि‍त आ उपकार दुनू हएत। चारि‍यो पूरा दि‍यौ।
चन्‍द्रेश-        तूँ कहै छेँ तऽऽ तीन कऽ दइ छि‍यौ।
दुखन-        माि‍लक, अपने पढ़ाइक महत बुझै छी। तँए ने बेटी चन्‍द्रप्रभाकेँ एते दूर एते पाइ खर्च कऽ डाक्‍टरी पढ़ाइ करबा रहल छी। उ हमरे क्‍लासमेल्‍लो रहए। हमहूँ बेंगलूरेमे एडमि‍शन करा रहल छी। मालि‍क, ऐ मजबूरपर दया करि‍यौ।
चन्‍द्रेश-        तूँ बात हेहेन बाजि‍ देलेँ जे हमरा कि‍छु सोचहे पड़त। खैर, हम चारि‍ पूरा देबौ मुदा अपन सौंसे डीह लि‍खए पड़तौ।
मंगल-        तब हम सभ रहबै केतए मालि‍क?
चन्‍द्रेश-        से तँ तूँ बुझबि‍ही। नै हेतौ तँ सरकारी गाछीमे रहि‍हेँ।
मंगल-        माि‍लक, अपनेक सएह वि‍चार?
चन्‍द्रेश-        हमहीं की करबै? हम तँ पाइ देबौ। तहूँ कम-सम नै। पुरे चारि‍ लाख। हमरा तँ समान चाही। ऐसँ आगू तँ तूँ सभ बुझही
मरनी-        दऽ देथुन। हम सभ ओही सरकारी गाछीमे कहुना रहब। की दुखन बाउ? की दुखन?
मंगल-        ठीक छै।
दुखन-        ठीक छै।
चन्‍द्रेश-        जौं सबहक वि‍चार छौ तऽऽऽ तँ सभ एगो कागतपर दसखत आ नि‍शान दऽ दही। तहन पाइ देबौ। जुग-जमाना नीक नै छै।
मंगल-        लाउ माि‍लक, कागत आ कजरौटी।
            (चन्‍द्रेश अंदर जा कऽ कागत, कजरौटी आ पाइ अनलथि‍। तीनूसँ दसखत-नि‍शान लेलनि‍ आ चारि‍ लाख टज्ञका मंगलकेँ देलनि‍।)
चन्‍द्रेश-        लि‍खबि‍ही कहि‍या?
मंगल-        अहाँ जहि‍या कहबै तहि‍या।
चन्‍द्रेश-        ठीक छै। एडमिशनबला काजसँ नि‍चेन हो। तेकर पछाति‍ देखल जेतै।
मंगल-        ओम्‍हरसँ आबए दि‍अ। अहाँ जखनि‍ कहबै हम तैयार छी। आब हम सभ जाइ मालि‍क?
चन्‍द्रेश-        जो।
            (तीनू गोटे चन्‍द्रेशकेँ प्रणाम कऽ प्रस्‍थान।)
चन्‍द्रप्रभा मम्‍मी, चन्‍द्रप्रभा मम्‍मी।
मनीषा-        (अन्‍दरसँ) अबै छी। तुरन्‍त एलौं।
            (मनीषाक प्रवेश।)
            की कहलौं?
चन्‍द्रेश-        मंगलाबला हौंसली आ डीह अपन भऽ गेल। कागत बनि‍ गेल छै। बड़ नफ्फामे रहलौं। अखनो भजाएब तँ दस लाख हेब्‍बे करतै। से चारि‍ लाखमे लेलौं। ओकरो बड़ जरूरी छेलै। बेटाक नाओं लि‍खेबाक छेलै। तँए बेचलाक। नै तँ कि‍अए बेचि‍तए?
पटाक्षेप।

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'विदेह' २३२ म अंक १५ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३२)

ऐ  अंकमे अछि :- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१. जगदीश प्रसाद मण्‍डलक  दूटा लघु कथा   कोढ़िया सरधुआ  आ  त्रिकालदर ्शी २.२. नन...