Monday, November 11, 2013

‘विदेह' १३९ म अंक ०१ अक्टूबर २०१३ (वर्ष ६ मास ७० अंक १३९) PART I

ISSN 2229-547X VIDEHA
विदेह' १३९ म अंक ०१ अक्टूबर २०१३ (वर्ष ६ मास ७० अंक १३९)  

 

अंकमे अछि:-
बड़की बहीन
(उपन्‍यास)


जगदीश प्रसाद मण्डल

भाषापाक रचना-लेखन -[मानक मैथिली]


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 बड़की बहीन

(उपन्‍यास)


जगदीश प्रसाद मण्डल

चारि भाए-बहि‍नक बीच सुलोचना पहिल रहने बड़की बहिनक नाओंसँ गाम भरिमे जानल जाइ छथि। दू-अढ़ाइ बीघा जमीनबला परि‍वार।
छियासी बर्खक अवस्‍थामे जिनगीक ढलानक आखिरी सीढ़ीमे पहुँचल सुलोचना भातीजक संग बिलासपुर-मध्‍य प्रदेश-सँ अपने गाड़ीसँ गाम पहुँचली। गाम पहुँचिते हलचल भऽ गेल, सुलोचना बहि‍न एली। ओना पछि‍ला पीढ़ीक अनुकरण करैत अगि‍लो पीढ़ी दीदीक जगह बहि‍ने कहै छन्‍हि‍। एक्के-दुइए टोलक धियो-पुतो आ जनि-जातिओ पहुँचए लगली। डेढ़ि‍यापर गाड़ी रोकि‍ रघुनाथ -छोट भाइक जेठ बेटा- उतरि‍ एका-एकी सभकेँ उतारए लगल। दू बर्खक पोताकेँ सुलोचना कोरामे नेने गाड़ीसँ उतरली।
रिष्‍ट-पुष्‍ट शरीर, चानीक बल्‍ला दुनू हाथमे, महीन-सादा साड़ी पहि‍रने। थुल-थुल देह। उतरि‍ते चारूदिस आँखि‍ उठा तकली तँ बूझि‍ पड़लनि जे जेबा कालसँ वि‍परीत सभ कि‍छु बूझि‍ पड़ैए। जि‍नगीक आशा तोड़ि‍ घरो-दुआर आ गामोकेँ गोड़ लागि‍ कहने रहि‍यनि‍ जे अंति‍म दर्शन केने जाइ छी। कहाँ आशा छल जे गामक मुँह फेर देखब। तैबीच जेठ भौजाइपर नजरि‍ पड़लनि। नजरि‍सँ नजरि‍ मि‍लि‍ते दुनूकेँ बघजर लागि‍ गेलनि‍। मुँहक बोल बन्ने रहलनि‍ तैबीच झुनकुट चेहरा, ठेंगा हाथे बसमति‍या दीदी सेहो पहुँचली। जहि‍ना सुलोचना गामक बेटी तहि‍ना बसमति‍या दीदी सेहो। एक उमेरि‍ए दुनू गोटे, मुदा सुलोचना बहि‍न तीन मास जेठ छथि‍। बसमति‍या दीदीकेँ देखि‍ते सुलोचना पुछलखि‍न-
साले भरि‍मे एते लटकि गेलैं?”
दुनूक जि‍नगी बच्‍चेसँ एकठाम बितने बजैमे कोनो कमी रहबे ने करए। नि‍धोक भऽ बसमति‍या दीदी बजली-
तूँ ने भाए-भाति‍जक कमेलहा खा कऽ गेंड़ा बनि‍ गेलँए, हमरा के देत?”
नि‍आरले जकाँ सुलोचना बजली-
किए, भगवान तोरा थोड़े बेपाट छथुन जे नै देनि‍हार छौ?”
बसमति‍या-
हँ से तँ अछिए, मुदा जएह कमाएत तेहीमे ने देत। अच्‍छा, कह जे टुटलाहा लग कज्‍जी ने तँ रहलौं। नीक जकाँ हाड़ जूटि‍ गेलौं कि‍ने?”
हँ। आब तँ बाल्‍टीनो उठबै छी, पोतोकेँ कोरा-काँखमे लऽ कऽ खेलबै छि‍ऐ। अपने गाड़ीओ छी, आब गामेमे रहब।
ऐ उमेरमे असगरे रहि‍ हेतौ?”
छोट भाए- मुनेसरो रहत कि‍ने? काल्हि‍ ऊहो औत। ताबे कहुना अही टुटलाहा घरमे रहि‍ पजेबाक घर बनाैत। हम सभ केते जीबे करब। मुदा जाबे आँखि‍ तकै छी, ताबे तकक ओरि‍यान तँ करए पड़त कि‍ने?”

चौदह बर्खक अवस्‍थामे सुलोचनाक बि‍आह भेलनि‍। जहि‍ना पि‍ताक साधारण कि‍सान परि‍वार तेहने परि‍वारमे बि‍आहो भेलनि‍। समाजमे अखनि धरि‍ धन नै कुले-मूलक महत अधि‍क रहल मुदा लेनो-देन तँ चलि‍ते छल। नीक-मूलक कन्‍याक मांगो बेसी। ओना अपन-पि‍ताक कुल-मूलसँ दब परि‍वारमे बि‍आह भेलनि‍, मुदा कोनो हि‍नके टा नै, समाजमे केतेको गोटेकेँ भेल छन्‍हि‍ आ होइतो अछि‍। तँए कोनो प्रश्ने नै उठल।
मि‍थि‍लांचलक ओइ गाममे सुलोचनाक जनम भेल छेलनि‍ जइ गाम होइत एकटा धारो अछि‍ आ पूबसँ कोसीक पानि‍ आ पछि‍मसँ कमलाक पानि‍ सेहो बरसातक मौसममे बाढ़ि‍ बनि‍ अबि‍ते अछि‍। ओना कोसी-कमलाक बान्‍ह नै रहने अबैत-अबैत बाढ़ि‍ पतरा जाइत मुदा बरखो-बुन्नीक तँ कोनो नि‍श्चि‍त ठेकान नहियेँ छै। जइ साल बरखा बेसी भेल तइ साल बाढ़िओ नम्‍हर-नम्‍हर आएल आ जइ साल कम बरखा भेल बाढ़िओ छोट अबैत। खेती लेल बरखा छोड़ि‍ दोसर कोनो साधन नै छल। लकड़ीक करीनसँ कि‍छु खेती होइ छल मुदा ओ तँ पोखरि‍सँ होइ छल जे बैशाख-जेठमे अपने सुखि‍ जाइत। जे पोखरि‍ गहींर रहैत ओइ पोखरि‍क पानि‍ ऊपर अनैमे तीन-चारि‍ गाड़ करीन लगि‍ जाइत। गहुमक खेती नहि‍येँक बरबरि होइ छल, कि‍यो-कि‍यो दू-चारि‍ कट्ठा कऽ लइ छला। सेहो बिनु पटौलहा।
छह गोटेक परि‍वार चलबैमे सुलोचनाक पि‍ता-हरि‍हरकेँ कठि‍नाइ तँ रहबे करनि मुदा गाममे मात्र हरि‍हरे एहेन नै बहुतो एहेन छला जे हुनकोसँ भारी जि‍नगी जीबै छला। एक तँ महि‍ला शि‍क्षाक चलनि‍‍ नै दोसर, गाममे साधनोक अभाव। ओना बाहरसँ कम सम्‍पर्क रहने गाममे शि‍क्षाक ओते जरूरतो नहि‍येँ छल। बेवहारि‍क ज्ञानक जरूरति‍ छल जे सभमे छेलै, अखनो छै। स्‍कूलक मुँह सुलोचना नै देखली।
बि‍आहक तीन साल पछाति‍ सुलोचनाक दुरागमन भेल, सासुर गेली। बरख-पाँचे-छबेक पछाति‍ सासुरसँ सुलाचनाकेँ भगा देलकनि‍‍। भगबैक कारण रहै जे सन्‍तान नै भेलनि‍। ओना ने कहि‍यो डाक्‍टरी जाँच कराैल गेलनि‍ आ ने सन्‍तान नै हेबाक दोष कि‍नकामे छन्‍हि‍, से फड़ि‍छाैल गेल।
समाजमे एहेन धड़ल्लेसँ होइत जे कोनो महि‍लाकेँ कुरुप कहि‍ सासुरसँ ठोंठि‍या कऽ भगाैल जाइत तँ कोनोकेँ सौतीन तर बसा भगाैल जाइत। इत्‍यादि‍-इत्‍यादि‍। वैदि‍क पद्धति‍ एक-पुरुष एक नारीक सम्‍बन्‍धकेँ पहि‍ल श्रेणीक वि‍चार समाज मानने अछि‍, तैठाम रंग-रंगक बाधा बना नारीकेँ अगुआइसँ रोकल गेल। रंग-रंगक सगुन-अपसगुन कहि‍ तँ उढ़री-ढढ़री बना दबाैल गेल। एहेन स्‍थि‍ति‍केँ जँ रोगक जड़ि‍ बि‍ना तकने आ ओइठामसँ वैचारि‍क बाट बनौने बि‍ना आइ एक्कैसम शताब्‍दीमे पहुँचल छी। ई बि‍लकुल सत् छै जे कि‍यो शेर होइ आकि‍ सि‍यार सभकेँ अपन कालखण्‍डक लेखा-जोखा होइ छै। तँए ओ अगि‍ला-पछि‍ला दोखक भागी भेला, ई बूझब ननमति‍ भेल। हँ, जँ कि‍यो अपना हाथे कि‍छु केलनि‍ तेकर जबावदेह तँ भेबे कएल।
सुलोचनाक पि‍ता हरि‍हर समाजक ओहन बेकती जे आँखि‍क सोझहामे कि‍यो गाछक आम तोड़ि‍ लैत वा खेतक धान नोचि‍ लैत तँ एतबे चेतावनी दैत बजै छला जे जाइ िछयौ बापकेँ कहए जे ई छौड़ा धान नोचलक आकि आम तोड़लक। बुझियहनि जे जखनि तोरा कनैठी पड़तौ। समाजमे सहयोगक वि‍चार छल। अपन गार्जन अपने बच्‍चाकेँ सि‍खबै छल। मुदा एकटा जबरदस गुण परि‍वारमे छेलनि‍ जे महिनाक चारि‍-पाँच रवि‍, चारि‍-पाँच सोमक सोमवारी संग केतेको पावनि‍क उपाससँ सालो छोट कऽ नेने छला। सरस्‍वतीक आगमन परि‍वारमे भऽ गेल छेलनि‍। सि‍रि‍फ अपने हरिहरेटा नै पढ़ने। कारणो छल समंगर परि‍वारमे एक समांग गि‍रहस्‍तीओ करै छला। तँए शुरुहेसँ पढ़ाइ दि‍स नै लगाैल गेलनि‍। काल-क्रमे ओहन-ओहन भैयारी पछुआएल। ई दीगर भेल। ओना कि‍छु समाज एहनो छल जे एहेन-एहेन अवस्‍था (सुलोचनाक संग जेहेन भेल तेहेन) केँ बाहुबलसँ रोकलक मुदा समाजोक कटनि‍याँ तँ बड़का मूस कटि‍ते छै। जाति‍-जाति‍केँ बाँटि‍ सभ रोगसँ रोगाएल छी। कि‍यो कम कि‍यो बेसी। मुदा एहेन-एहेन अपराध समाजक मुद्दा नै बनि‍ बनि,‍ जातिय मुद्दा बनि‍ कमजोर पड़ैत गेल। काल-क्रमे जातिओसँ परि‍वारमे पहुँच गेल। एक जाति‍केँ नीच देखाएब वा जाति‍क भीतरो अगुआएलक निच्‍चाँ मनोरंजनक साधन बनि‍ गेल अछि।
सरस्‍वतीक आगमनसँ हरि‍हरक परि‍वारक वि‍चारमे कि‍छु नवीनता तँ आबिए गेल अछि‍। सासुरसँ भगाैल सुलोचनाकेँ परि‍वार सहर्ष अपना लेलनि‍। अपनबैक कारण भेल जे परि‍वारक सभ अपने गल्‍ती मानि‍ लेलनि‍ जे ओहन कुल-मूलमे डेगे नै उठबैक चाही। ओहनसँ मुहोँ लगाएब नीक नै हएत। बापक दुलरूआ बेटा दोसर बि‍आह कऽ लेलनि‍। मुदा सुलोचना अपनाकेँ वैधव्‍य नै बुझलनि‍। हाथक चुड़ी रखनहि‍ रहली। समए आगू बढ़ल। लक्ष्‍मी जहि‍ना दरबज्‍जापर हँसी-खुशीसँ आबि‍ जाइ छथि‍न तखनि केतबो ताड़ी-दारूक खर्चा हराएले रहैए तहि‍ना ने सरस्‍वतीओ रगड़ी-झगड़ी छथि‍। सुलोचना जकाँ नै ने छथि‍ जे मने-मन संकल्‍पक संग जीबैक बाट पकड़ैत, ओ तँ तेहेन रगड़ी छथि‍ जे एकटा सौि‍तनक कोन गप जे हजारो सौती‍नकेँ झोंटि‍या अपन हि‍स्‍सा लाइए कऽ छोड़ैत। पुरुखक कहने भऽ जेतै जे जेठकीक जेठुआ जोश कमा देतै।
सरस्‍वतीक रूप परि‍वारमे बदलल। संस्‍कृत पद्धति‍क जगह नव-नव पद्धति‍ शुरू भेल। संस्‍कृतोक पद्धति‍ रहबे कएल। मुदा शि‍क्षाकेँ बुनि‍यादी पद्धति‍सँ उछालि‍ देलक। सुलोचनाक पीठ परहक जेठ भाय जुगेसर मैट्रि‍क पास तमुरि‍या स्‍कूलसँ केलनि‍। गरीबी-बेकारीसँ त्रस्‍त परि‍वार। नोकरीक तलासमे कलकत्ता गेला। दू साल रहला। भाषाक दूरी, शहर-गामक दूरी तँ स्‍पष्‍टे रहै। दू साल पछाति‍ जुगेसर टीचर्स ट्रेनिंग केलनि‍। लोअर प्राइमरीक शि‍क्षक बनला।
जुगेसरसँ छोट मुनेसर सेहो मैट्रि‍क पास तमुरि‍या स्‍कूलसँ केलनि। साइंस पढ़ैत। जनता कौलेजमे साइंसक पढ़ाइ नै होइत। गर लगबैत खगड़ि‍याक गर लगौलनि‍। ओइ ठामक संस्‍कृत वि‍द्यालय‍मे वि‍द्यार्थीकेँ भोजन-डेराक बेवस्‍था सेहो करैए। कोसी कौलेज सेहो छइहे। साइंसक वि‍द्यार्थी, नीक जकाँ बीएस-सी केलनि‍ तैबीच बि‍आहो अफसरक परि‍वारमे भऽ गेलनि‍। चारि‍ भाँइक भैयारी हरि‍हरक छेलनि‍, तइमे बँटबारा भऽ गेलनि‍। दुनू परानी हरि‍हरो मरि‍ गेलखि‍न जइसँ दुनू भाँइक परि‍वार...
साल भरि‍ पछाति‍ मुनेसरक दुरागमन भेल। दुरागमन भेला पछाति‍ साधना सासुर एली। सासुरक रहन-सहन, घर-दुआर देखि‍ मनमे जबरदस धक्का लगलनि‍। जे स्‍वाभावि‍को छेलै। केतए अफसरक परि‍वार आ केतए एकटा छोट-छीन गामक कि‍सान परि‍वार। मुदा एहेन खाली साधनेकेँ भेलनि‍ से नै, धनेरोकेँ भेलो छन्‍हि‍ आ होइतो अछि‍। ओना साधनाक अपनो (नैहर) परि‍वार गामेक छेलनि। मुदा नोकरी भेने परि‍वारकेँ संगे राँचीमे रखै छला। राँचीएमे जमीन कीनि मकानो बना नेने छथि‍। अफसर-एसडीओ रहने दोसो-महि‍म आ सरो-सम्‍बन्‍धी अगुआएल तँ छन्‍हि‍हेँ। ओना परि‍वारमे तीन भाए-बहि‍नक बीच साधना सभसँ जेठ (पहि‍ल संतान) रहने दोसर-तेसर लेल अभि‍भावके सदृश रहथि‍न। मुदा बेटी तँ बेटी होइत, बि‍आह-दुरागमनसँ पहि‍ले धरि‍ माए-बापक घरकेँ अपन घर बुझैत। अपना गामसँ श्‍यामानन्‍द (साधनाक पि‍ता) सम्‍बन्‍ध तोड़ि‍ए जकाँ लेलनि‍। कहैले तँ घर-घराड़ी छन्‍हि‍हेँ मुदा रहैक घर नै। साधारण घर छेलनि‍ जे कि‍छु दि‍न पछाति‍ गि‍र पड़लनि‍, दोहरा कऽ बनबैक खगता नहि‍येँ बुझलनि‍।
दुरागमनसँ पूर्व धरि‍ मुनेसर परि‍वारक भारक बीच नै पड़ल छला, मुदा पछाति‍ पत्नी एने कि‍छु जबावदेही तँ भइए गेलनि‍। अपना ओते खेत-पथार नै जे गि‍रहस्‍तीसँ जीवि‍कोपार्जन कऽ सकै छला, तैसंग समाजमे पढ़ल-लि‍खल संग हँसैक जबरदस समस्‍या तँ जनम लइए नेने छल जे जँ पढ़ल-लि‍खलकेँ नोकरी नै भेलनि‍ तँ समाजमे पीहकारीक पात्र बनि‍येँ जाइ छथि‍। गाम-घरमे प्रचलि‍त अछि‍ पढ़ए फारसी बेचए तेल देखू भाइ करमक खेलबि‍नु खेतबला जँ गि‍रहस्‍त बनि‍ गि‍रहस्‍ती अपनाए लेत सेहो बात नहि‍येँ छै। जीवि‍कोपार्जन लेल केहेन गि‍रहस्‍ती  चाही ओ तँ सबहक लेल संभव नै। खेतक खरीद-बिक्री होइ छै; सम्‍पति‍ छि‍ऐ। ओना जेठ भाय जुगेसर नोकरी करै छेलखि‍न। लोअर प्राइमरीक शि‍क्षक छला, मुदा अखुनका जकाँ ने सरकारी छल आ ने तेहेन वेतन। दुनू भाँइ मि‍ला परि‍वार नम्‍हर छेलन्‍हिहेँ। जहि‍ना सभ पढ़ल-लि‍खल वेरोजगारकेँ होइ छै तहि‍ना मुनेसरकेँ सेहो होइ छेलनि‍ जे एतए नोकरीक आवेदन करू, ओतए नोकरीक इन्‍टरभ्‍यू  दि‍औकक स्‍थि‍ति‍ तँ रहबे करनि। ओना समाजमे (ग्रामीण इलाका) गनल-गूथल पढ़ल-लि‍खलक संख्‍या मुदा जेतबो छल ओकरो नोकरीक अाशा तँ नहि‍येँ छेलै। आ ने अखुनका जकाँ सरकारी कार्यालय छेलै। ओना अखनो कम अछि‍। नम्‍हर-नम्‍हर पंचायत छल, चालीस-चालीस, पचास-पचास पंचायतक बीच ब्‍लौक थाना छेलै। तैसंग सरकारी कामो-काज कम छल जइसँ सरकारी काजमे प्रवेश करब कठि‍न तँ छेलैहे। ब्‍लौकमे अफसरक नाओंपर एकटा बीडीओ रहै छला। काजो कम, अन्नक अभाव रहने खैरातक बँटबारा आ कोटाक माध्‍यमसँ अमेरि‍कन गहुमक बिक्री। चीनीक कोटा नै बनल छल। एक तँ चीनीक उत्पादन नीक, दोसर खेनि‍हार कम। तहि‍ना स्‍कूलो-कौलेजक संस्‍था सएह, ‘गनल कुटि‍या नापल झोरसदृश छल। जे शि‍क्षक काज करै छला ओ सेवा-नि‍वृत्त हेता तेकर पछातिए नव चेहराक प्रवेश हेतनि‍। लोक बैंकक नाओंएँ टा सुनै छल जे ओइमे रूपैआक लेन-देन होइ छै।
दुरागमनक कि‍छुए-दि‍न पछाति‍ साधना नैहर गेली। अखनि धरि‍ पि‍ता-श्‍यामानन्‍द बेटी-जमाएक घर-दुआर नै देखने। बीएस-सी लड़का, शरीरसँ स्‍वस्‍थ सुनि‍ बेटीक बि‍आह केलनि‍। तइ समए बेटीओ (साधना) मैट्रीक पास केनहि‍ रहनि‍। बि‍आहो समैसँ भेल छेलनि। नैहर आपसीक पछाति‍ साधना जखनि सासुरक सभ हाल माए-पि‍ताकेँ कहलनि‍ तखनि पि‍ताक मनमे जमाएक नोकरीक प्रश्न उठलनि‍। मुनेसरकेँ राँचीए बजा लेलनि‍। जमाएक नोकरीक चर्च संगीओ-साथी आ सरो-सम्‍बन्‍धीक बीच गप-सपक क्रममे करए लगला। राँची वि‍श्ववि‍द्यालयक केमेस्‍ट्रीक हेडक सोझहा सेहो चर्च केलनि‍। दुनूक बीच घनिष्‍ठ दोस्‍ती। डेरो अगले-बगलमे रहनि‍। हुनकर (हेडक) ससुर हाइ स्‍कूल पलामूमे बनौने छथि‍। ओना जंगल-झाड़क इलाका पलामू, मुदा छोट-मोट कसबा जकाँ तँ छेलैहे। हुनका बूझल छेलनि‍ जे स्‍कूलमे जे साइंस-टीचर छला, ओ छोड़ि‍ कऽ दोसर नोकरी करए चलि‍ गेला जइसँ साइंस टीचरक अभाव छै। ओ फोन कऽ ससुरकेँ पुछलखि‍न। वि‍द्यालयमे शि‍क्षकक अभाव रहबे करै, मुनेसरकेँ नोकरी भऽ गेलनि‍। दि‍नांक १-१०-१९६७ ई।केँ ि‍नयुक्‍ति‍ भेलनि‍। वि‍द्यालयो सरकारी नहि‍येँ भेल छल, मुदा कोठारी कमीशनक मंजूरी तँ भइए गेल छेलै। एक सए पाँच रूपैआ महिनाक नोकरी मुनेसरकेँ भऽ गेलनि‍। नोकरीक समए पत्नी कौलेजमे पढ़ैत रहथिन, तँए पि‍ते ऐठाम रहि‍तो छेलखि‍न। अपने असगरे पलामूमे रहै छला आ छुट्टीमे राँची अबै-जाइ छला। ओना साइंस शि‍क्षककेँ सभठाम ट्यूशन चलि‍ते अछि‍ जे मौका मुनेसरोकेँ भेटलनि‍। एक तँ ग्रामीण जि‍नगीक जीवन स्‍तर, तइपर अवि‍कसि‍त इलाकाक नोकरी, बचत नीक होइ छेलनि‍। कि‍छुएँ दि‍न पछाति‍ राँचीएमे जमीन कीनि अपन घर सेहो बना लेलनि‍। मकानसँ कि‍छु कि‍रायो आबए लगलनि‍। अपन पैतृक गाम मुनेसर छोड़ि‍ए जकाँ देलनि‍। कहि‍यो काल बहि‍न-सुलोचनाकेँ कपड़ो आ रूपैओ पठा दइ छेलखि‍न मुदा आबा-जाही नहि‍येँ जकाँ छेलनि‍।
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ओना ओइ समए झारखंड लगा बि‍हार छल। राज्‍योक स्‍थि‍ति‍ दू भागमे वि‍भाजि‍त। उत्तर-बि‍हार आ दछि‍न बि‍हारक स्‍पष्‍ट अन्‍तर अछि‍। दछि‍न-बि‍हार (झारखंड) मे खेती-पथारी कम होइ छै। खेती जोकर माटिओ कम छै। कम क्षेत्र उपजाऊ अछि‍। पहाड़ी-जंगलक इलाका। ओना खनि‍ज सम्‍पदा प्रचूर मात्रामे अछि‍। कोयलासँ लऽ कऽ अबरख धरिक खान अछि‍। जखनि कि‍ उत्तर बि‍हार गंगा-ब्रह्मपुत्रक तलहटी मैदान छी। पहाड़-जंगल नहि‍येँ जकाँ छै। ओना गाछी-बि‍रछी पर्याप्‍त अछि‍ मुदा पहाड़ी लकड़ीक नै।
खनि‍ज सम्‍पदा रहने दछि‍न बि‍हारमे देशी वि‍देशी पूजीपति‍ आ सरकारीओ कारोबार पर्याप्‍त मात्रामे छै। रंग-रंगक खनि‍ज-सम्‍पदा, तँए वि‍स्‍तृत रूपमे कारोबार चलैए‍। देशी-वि‍देशी पूजीपति‍ आ सार्वजनि‍क (सरकारी) कारोबार रहने रोजगारो बहुतायत अछि‍। मुदा जंगली-पहाड़ी इलाका रहने स्‍थानीय मूलवासीक बीच शि‍क्षाक प्रचार-प्रसार कम भेल अछि‍। साधारण-सँ-कुशल श्रमि‍कक सृजन नहि‍येँ जकाँ अछि‍। साधारण मजदूरक रूपमे रहल अछि‍। मुदा उत्तर बि‍हार पढ़ै-लि‍खैमे अगुआएल। जइसँ कुशल श्रमि‍कोक संख्‍या बेसी। तँए उत्तर-बि‍हारक पढ़ल-लि‍खल लोक दछि‍न बि‍हार जा नोकरी करए लगला आ घरो-दुआर बना बसि‍ गेल छथि‍। अगि‍लो पीढ़ी लेल जीवि‍कोपार्जनक उपाए बनि‍येँ गेल छन्‍हि‍।
उत्तर बि‍हारक अर्थात् मि‍थि‍लांचलक ईहो दुर्भाग्‍य रहल जे कृषि‍ प्रधान क्षेत्र होइतो पहाड़ी नदी तेतेक अछि‍ जे क्षेत्रकेँ नष्‍ट कऽ देने अछि‍। ओना तीन रूपमे धार प्रवाहि‍त होइए‍। कि‍छु धार एहेन अछि जे मात्र बरसातक मौसममे प्रवाहि‍त होइए‍ आ पछाति‍ सूखि‍ जाइए‍। प्रवाहि‍त होइत कि‍छु धार एहेन अछि‍ जे असथि‍रसँ बहैए‍, काट-छाँट नहि‍येँ जकाँ करैए‍। हजारो बर्खसँ एके स्‍थानपर बहैए‍। कि‍छु धार एहनो अछि‍ जे काटो-छाँट बेसी करैए आ उपजाऊ माटि‍केँ बालुसँ भरि‍ नष्‍टो करैए‍। जइसँ गाम-गामक खेतीओ नष्‍ट होइ छै आ घरो-दुआर नष्‍ट होइ छै। जीवन-यापनक मूल आवश्‍यकता उत्‍पादि‍त पूजी नष्‍ट भेने पड़ाइन तँ लगले छल आ लगले रहत।
ओना मि‍थि‍लांचलक माटि‍-पानि-हवाकेँ अनुकूल रहने उर्वर शक्‍ति‍ तँ छइहे। जइसँ केतबो लोक गामसँ पड़ा देश-वि‍देशक कोण-कोणमे बसला मुदा अखनो गाम-घरक आवादी सघन तँ अछिए।
गामसँ तीन कोस हटि‍ जुगेसरो नोकरी करै छला आ डेराे बाहरे रखने छला। कारणो छल जे ने अखुनका जकाँ गाड़ी-सवारी छेलै आ ने बान्‍ह-सड़कक दशा नीक रहै। शहर-बजार छोड़ि‍ ने पीच (पक्की सड़क) गाम दि‍स बढ़ल छल आ ने बि‍जली। मुदा तैयो १९४७ इस्‍वीक अंग्रेज भगा अपन स्‍वतंत्र देश बनेबाक वि‍चार तँ जन-जनक मनमे छेलन्‍हिहेँ। गुलामीक शोषणसँ देशक स्‍थि‍ति‍ बि‍गड़ि‍ गेल अछि‍, जइसँ देशक वि‍कास अवरूद्ध भऽ गेल अछि‍। स्‍वतंत्र भेला पछाति‍ वि‍कासक रास्‍ता देश जरूर पकड़लक। मुदा तेते असथि‍रसँ जे आजादीक साठि‍-पैंसठि‍ बरख पछातिओ, जनकेक हरसँ खेतीओ होइए‍ आ करीने-ढोसि‍सँ पटौनी। कृषि‍-प्रधान देश (जइ देशमे अस्‍सी प्रति‍शतसँ ऊपर आवादी कृषि‍ आधारि‍त अछि‍) रहि‍तो पाछू पड़ि‍ गेल। कि‍छु पूजीपति‍ सत्ता हथि‍या शहरे-बजारक वि‍कास धरि‍ देशक अर्थ-बेवस्‍थाकेँ समेटि‍ लेलक। तैसंग ईहो नै नकारल जा सकैए‍ जे जे मि‍थि‍लांचलवासी आन-आन देशक उन्नति‍मे अपन शक्‍ति‍ बेचि‍ सेवा करै छथि‍ ओ मि‍थि‍लांचलसँ, अपन मातृभूमि‍सँ आँखि‍ सेहो मूनि‍ लेलनि‍। देशक सत्ता कि‍सानक समस्‍यासँ हटि‍ जाति‍-धर्मक एहेन वातावरण बना देने अछि‍ जे वास्‍तवि‍क वि‍कासकेँ अवरूद्ध कऽ देने अछि‍। मि‍थि‍लांचलक पानि‍-माटि‍ आ मौसममे एहेन अनुकूलता अछि‍ जे साएओ रंगक अन्न, फल, तरकारीक संग साएओ रंगक चि‍ड़ै, पशु लेल अनुकूल अछि‍। मुदा सभ कि‍छु रहि‍तो कि‍ अछि‍ से सबहक सोझहेमे अछि!
ओना अठबारे (शनि‍-रवि‍) जुगेसर गाम अबि‍ते छला तैसंग पावनि‍क छुट्टी आ अनदि‍नोक छुट्टीमे सेहो अबि‍ते छला। स्‍थि‍तिओ एहेन नै छेलनि‍ जे साइकि‍लो कीनि सकि‍तथि‍। ओना परि‍वारो तेहेन नम्‍हर नहि‍येँ छेलनि‍। तहूमे अपने अन्‍तै रहै छला। जैठाम डेरा रखने छला ओइ परि‍वारक बच्‍चा सभकेँ पढ़बै छला। बदलामे भोजन आ रहैक बेवस्‍था छेलनि‍। ने बाइली ट्यूशन छेलनि आ ने दरमाहा छोड़ि‍ दोसर आमदनी। शनि‍चरा प्रथा समाप्‍त भऽ गेल छल।
जुगेसरक सासुर मुंगेर जि‍ला। गंगा दि‍याराक गाम। तीन भाँइक भैयारीमे ससुर जेठ रहथिन। संयोग एहेन भेलनि‍‍ जे छोट दुनू भाएकेँ बेटो भेलनि‍, हि‍नका (जुगेसरक ससुरकेँ) दूटा बेटीएटा। बहुत बेसी जमीनबला परि‍वार तँ नहि‍येँ छेलनि‍ मुदा पच्‍चीस-तीस बीघा तँ छेलन्‍हिहेँ। भैयारीक सम्‍पति‍क प्रश्न भैयारीमे टकराएल। दुनू छोट भाएक कहब छेलनि‍ सभ दि‍न अबैत-जाइत रहती। मुदा से जेठ भाय रमानन्‍दकेँ मान्‍य नै रहनि‍। रमानन्‍दक वि‍चार छेलनि‍ जे हम अपन हि‍स्‍सा  बेटीएकेँ देबै। भैयारीमे जमीन लऽ कऽ वि‍वाद ठाढ़ भेल। छोट दुनू भाँइ वि‍चार केलनि‍ जे कि‍छु होउ, जमीन तँ गामेमे रहत। ओ तँ ससरि‍ कऽ नै जाएत। तखनि गामक लोक कीनि लेत आ रूपैया उठा कऽ दऽ औथि‍न। गामे-गाम तँ तीनतसिओ चालि‍क लोक अपन चाि‍ल चलैबिते छै। मुदा कि‍छु होशि‍यारी भेल। दुनू भाँइ साैंसे गामक लोककेँ, खास कऽ तीन तसि‍याबलाक बैसार केलनि‍। बैसारमे अपन प्रस्‍ताव देलखि‍न जे जखनि भैयाकेँ बेटा नै छन्‍हि तखनि बुढ़ाड़ीक सेवा भेलनि‍ से भातीजे सभ करतनि, जइसँ कुलो-खनदानक इज्‍जत‍ बँचल रहत आ सेवो हेतनि‍‍। किए अनेरे बुढ़ाड़ीमे ऐ गाम-सँ-ओइ गाम बौएता। समाजोकेँ जँचल। मुदा रमानन्‍द सेहो अपने मनक लोक। परि‍वारसँ समाज धरि‍क कि‍नको बात सुनैले तैयारे नै। अकछि‍ कऽ समाजक सभ दुनू भाँइकेँ कहि‍ देलकनि जे भैयारीक झंझटि अछि‍ समाज ऐमे नै पड़त। मौका पाबि‍ दुनू भाँइ पूछि‍ देलखि‍न-
जँ कि‍यो चोरनुकबा जमीन लि‍खा लथि‍, तखनि?”
जेते गोटे बैसल रहथि‍ पंच-परमेश्वरक रूपमे रहथि‍, अनुकूल वि‍चार देखि‍ अनुकूलतामे भँसि‍ हरे-हरे एक्के शब्‍दमे बाजि‍ उठला-
जे समाजसँ बाहर हएत, ओ बेटीचोद हएत।
बजैकाल तँ सभ बाजि‍ गेला मुदा पछाति‍ अपनेपर तामस उठए लगलनि‍ जे सस्‍त चीज हाथसँ नि‍कलि‍ गेल।
जहि‍ना आगि‍क ताउपर लोहि‍याक जि‍लेबी-कचड़ी पेनीसँ उठि ऊपर अलगि‍ जाइत तहि‍ना रमानन्‍दकेँ भेलनि‍। गंगाकातक गाम जकाँ गामक लोक सोझहे-सोझही रमानन्‍दकेँ दुतकारए लगलनि‍। अखनि धरि‍ समाजमे अहाँकेँ लोक कोन नजरि‍ए देखैत रहल आ अहाँ कि‍ करैपर उताहुल छी। मुदा तेकर कोनो असरि‍ रमानन्‍दकेँ नै भेलनि‍।
१९४० ई।क लगाति‍मे रमानन्‍द मैट्रि‍क पास केने छला। जइ समए हजारो वि‍द्यार्थी स्‍कूल-कौलेज छोड़ि‍ आजादीक आन्‍दोलनमे कूदि‍ अपन सर्वस्‍व तियाग केलनि‍। ओही समैक उत्‍पादि‍त मनुख रमानन्‍द सेहो छथि‍, अंग्रेजी धुर-झार बजै छला। रेल-तार इत्‍यादि‍ सरकारी सेवाक केतेको गोटे नोकरी छोड़ि‍ अपन आहुत देलनि‍। मध्‍यम कि‍सान परि‍वारक रमानन्‍द। पि‍ताक देख-रेखमे परि‍वार चलैत, तँए घरक छुट्टा आदमी। एतए-ओतए घुमनाइ आ गुलछर्ड़ा छोड़नाइ जि‍नगीक काज छेलनि‍। मुदा जहि‍ना शरीरमे रोगक आगमसँ धीरे-धीरे शरीरक शक्ति‍ ग्रसि‍त हुअ लगैत तहि‍ना रमानन्‍दकेँ परि‍वारसँ समाज धरि‍मे हुअ लगलनि‍। जे भातीज बड़का बाबू कहै छेलनि‍ ओ मुँहपर गारि‍ पढ़ए लगलनि‍। मनुखोक तँ अजीव स्‍वभाव होइ छै। घनि‍ष्‍ठ-सँ-घनि‍ष्‍ठ मि‍त्र जँ कोनो अधला वृत्ति‍मे फँसि जाइए‍ तखनि जे स्‍थि‍ति‍ पैदा लैत सएह रमानन्‍दोकेँ भेलनि‍। समाजक लोक ने कि‍यो दरबज्जापर बैसए कहनि आ ने गप-सप करैले तैयार। जहि‍ना खुला जहल होइत तहि‍ना रमानन्‍दकेँ भेलनि‍।
भैयारीमे वि‍वाद उठने मुकदमाबाजी सेहो उठल। समांगसँ पातर रहने रमानन्‍द कमजोर पड़ए लगला। सोझहेमे भाए सभ खेतक जजाति‍, गाछ-बाँस उजाड़ए-काटए लगलनि‍। दुनू भाँइ अबधारि‍ लेलनि‍ जे जेते मुकदमा करता करथु। थानो आमदनी बुझलक, तँए हि‍साब मि‍ला कऽ चलैत। दुनू बेटी-जमाएकेँ बजा अपन सभ दुखरा सुनबैत रमानन्‍द कहलखि‍न-
जहि‍ना, हम अपन सभ सम्‍पति‍ अहाँ सभकेँ दि‍अ चाहै छी तहि‍ना तँ अहूँ सभकेँ चाही जे ओकरा बँचा कऽ लऽ जाइ।
दुनू बेटी-जमाएक बल जहि‍ना रमानन्‍दकेँ भेटलनि‍ तहि‍ना ओहू दुनू भाँइकेँ समाजक लोक मुकदमामे संग दि‍अ लगलनि‍।
धीरे-धीरे रमानन्‍दक मन टुटए लगलनि‍। एक तँ साठि‍ बर्खक उमेर टपि‍ गेेल तइपर कोट-कचहरीक दौड़सँ लऽ कऽ बेटी-जमाए ओइठामक दौड़-बरहा तेते बढ़ि‍ गेलनि‍ जे गामसँ बेसी अन्‍तै गुजरए लगलनि‍। असगरे पत्नी घरमे सकपंज भेल रहथि आ अपने बौआइत-बौआइत फि‍रि‍सान।
कि‍छु दि‍न पछाति‍ पत्नी अस्‍सक पड़लखि‍न। ने दि‍यादवाद आ ने गामक कि‍यो एको बेर पुछाड़ि‍ करए आबनि‍ दुनू बेटीओ-जमाए लगमे नै, मधुबनी जि‍लाक गाममे। ने उचि‍त समैपर डाक्‍टरी देख-भाल होन्‍हि‍ आ ने दवाइ-दारू। कि‍छु दि‍न पछाति‍ मरि‍ गेलखि‍न। पत्नीक मुइला पछाति‍ रमानन्‍दक जि‍नगी आरो जटि‍ल भऽ गेेलनि‍। गाममे जखनि रहथि‍ तखनि भानसो-भातक ओरि‍यान अपने करए पड़नि‍‍। आमदनी सेहो भाए सभ रोकि‍ देलखि‍न। अन्ना-गाँहि‍स देखि‍ दुनू जमाएओ हाथ-मुट्ठी सक्कत केलनि‍। फटो-फनमे रमानन्‍द पड़ि‍ गेला। जि‍नगीक कोनो सोझराएल बाट देखबे ने करथि‍।
जि‍नगीक अंति‍म पाँच बरख रमानन्‍दक एहेन बि‍तलनि‍ जेकरा लोक नरकक बास कहै छै। हारि‍-थाकि कऽ किछु दिन पछाति अपनो (रमानन्‍द) मरि‍ गेला। जमाएओ सभ आवाजाहीक संग केसो-मुकदमा देखब छोड़ि देलकनि। अंत-अंत एकतरफा केस भऽ गेल।
जुगेसरक गाममे दियादीक दोसर परि‍वारमे वेमात्रेय भैयारीक बीच वि‍वाद उठल। एक माएकेँ एक बेटा आ दोसरकेँ चारि‍टा। चारू भैयारी मि‍लि‍ पाँचम भाएकेँ (वेमात्रेय) उपद्रव कऽ गामसँ भगा देलकनि‍‍। कि‍छु दि‍न तँ ओ (पाँचम भाए) सर-सम्‍बन्‍धीसँ लऽ कऽ समाजक बीच चक्कर लगौलनि‍, मुदा कि‍छु हाथ नै लगलनि‍। अन्‍तमे खि‍सि‍या कऽ पि‍ताक सम्‍पति‍क (जमीनक) कागत-पत्तर कलक्‍ट्रीएटसँ नि‍कालि‍ कहि‍ देलखि‍न जे अपन हि‍स्‍सा घराड़ी तक बेचि‍ लेब। बीघाक लगभग हि‍स्‍सा पड़ैत रहनि‍‍। मुफ्तक माल खाइबला सभ समाजमे रहि‍ते अछि‍। तीन-चारि‍टा परि‍वार खेत लि‍खबैक वि‍चार कऽ लेलनि‍। मुदा वि‍वाद तँ बीचमे छेलैहे। लेबालक बीच प्रश्न उठैत जे जमीन-जयदादक वि‍वाद छी, मारिओ हेबे करत आ थाना-फौदारी सेहो हेबे करत। ने मारि‍क ठेकान अछि‍ आ ने केते दि‍न झंझटि रहत तेकर ठेकान। तँए दुनूकेँ नजरि‍मे रखि‍ लेन-देन करब। तहि‍ना जमीनबलाक (पाँचम भाय) बीच प्रश्न उठल जे जँ सस्‍तमे लि‍खि‍ देबै, तइसँ लाभ कि‍ हएत? तखनि तँ नीक अछि‍ जे अपने भैयारी सभ खाथि‍। कम-सँ-कम एक परि‍वारक तँ छथि‍। मुदा चालि‍ओ देनि‍हारक तँ कमी नहि‍येँ अछि‍। उनटा-सीधा मंत्रक तेते डाकनि‍ पड़ल जे बैहरा करकरेतक बीख जकाँ निच्‍चाँ मुहेँ ससरल।
अन्‍तमे फड़ियाएल जे अधि‍या दाममे खेत लिखबैले (खेत लि‍खौनि‍हार) तैयार भेला। बेचि‍नि‍हारकेँ (पाँचम भाएकेँ) तेते चारू भाँइ गंजन केने जे तामस कमबे ने करैत। होइत-हबाइत अधि‍या दाममे जमीनक लेन-देन भऽ गेल। ओही लेबालमे एकटा जुगेसरो। मुदा संयोग नीक रहलनि‍ जे जुगेसर अपने स्‍कूलक नौकरी दुआरे बाहरे रहथि तही बीचमे गाममे दाेसर लेबालक संग मारि‍ भऽ गेल। जबरदस मारि‍ भेल। दुनू दि‍स कपार फुटल‍, बाँहि‍ टुटल। सौंसे गाम सना-सनी पसरि‍ गेल। अनेको भागमे समाज वि‍भाजि‍त भऽ गेल। कि‍छु गोटे खुलि‍ कऽ दुनू गोटेक (दुनू पार्टीकेँ) केसमे गवाही दइले तैयार भऽ गेला। कि‍छु गोटे मारिओमे संग देलकनि‍‍। कि‍छु गोटे बेक्‍ति‍गत पूजी देखि‍ अपनाकेँ दुनूसँ अलग रखलनि‍। मुदा समाजोक लत्ती तँ एहेन सकबेधने अछि‍ जे नहि‍योँ वि‍चार भेने परि‍स्‍थि‍ति‍‍वश मजबूरीमे हँकहए पड़ै छै। सेहो भेल। तेतबे नै लत्तीक सोर एहेन अछि‍ जे गामेमे लोक सासुर-मातृक सेहो ठाढ़ कऽ लइए।
ओही झंझटिमे जुगेसर आठ कट्ठा जमीन कीनैक वि‍चार केलनि‍। ओना दुनू परानीक वि‍चार जे मुनेसरकेँ ऐ जमीनमे संग नै करब। मुदा परि‍वारक तँ वि‍धि‍वत् बँटबारा भेल नै अछि‍ तखनि जेठ भाय छि‍ऐ, छोट भाएक हि‍स्‍सा तँ भइए जाएत। तँए कहि‍ देब जरूरी अछि‍। जँ अदहा खर्च देत तँ ठीके छै नै तँ अपन दोख तँ मेटा लेब। वि‍चारक पाछू पेटमे रहनि‍ जे मुनेसरक आमदनी तेतबे छै जे कहुना कऽ परि‍वार चलै छै। तखनि रूपैया केतए सँ आनत? तैबीच मनमे ईहो जे गुप-चुप दाम भेल अछि‍ कि‍ने, बढ़ा देबै। कहुना (अधि‍या दाम भेने) चारि‍ कट्ठा तेफैसला (तीन फसि‍ला) खेतक भैलू कम नै भेल।
पोस्‍ट कार्डक माध्‍यमसँ जुगेसर मुनेसरकेँ जनतब देलखि‍न। स्‍कूलक दरमाहा तँ जुगेसरकेँ बूझल, मुदा ट्यूशनक आमदनी तँ नै बूझल। तैसंग पत्नीओ (मुनेसरक) वि‍चार देलखि‍न जे नैहरमे देल बरतन-बासन जे अछि‍ ओ अनेरे घरमे ढनमनाइत रहैए, ओकरा बेचि‍ कऽ जमीन कीनि लि‍अ। अखनि धरि‍ दुनू भाँइ -जुगेसर-मुनेसरक- बीच पहि‍लुके सम्‍बन्‍ध जीवि‍त छल। मुनेसर अदहा खर्च दइले तैयार भऽ गेला।
जमीनक रजि‍ष्‍ट्री जुगेसर दुनू भाँइक नाओंसँ करा लेता। अपन कमजोर पाशा देखि‍ जुगेसर दुनू परानी वि‍चार केलनि‍ जे नीक हएत बेटा नाओंसँ जमीन लि‍खौल जाए। मुनेसरकेँ कोनो पता नै। तइ समए रजिष्‍ट्रीओ आॅफि‍समे अखुनका जकाँ नै छल जे लि‍खौनि‍हारोकेँ उपस्‍थि‍त रहए पड़ैत। कि‍यो केकराे नाओंसँ जमीन लि‍खा सकैए। तैसंग पान-सात बरख पछाति‍ दस्‍ताबेज भेटै छै, ताबे बातो पुरनाए जाइत। तहूमे कागतक खोज जखनि हएत तखनि ने जँ नै हएत तँ के बूझत? ने भि‍नौज भेल अछि‍ आ ने खेती-पथारी बँटल अछि‍। तखनि तँ गाममे रहै छी जेना-तेना जनक हाथे खेती कऽ लइ छी। बात खुजबे ने करत, तँ मुहाँ-ठुट्ठी आकि‍ हल्‍ला-फसाद हएत किए। जहि‍या भीन हएब तहि‍या बूझल जेतै। अनुकूल वि‍चार बूझि‍ जुगेसर अपना बेटाक नाओंसँ आठो कट्ठा जमीन लि‍खा लेलनि‍। जे पछाति‍ दुनू भाँइक बीच वि‍स्‍फोटक भऽ गेल।
कि‍छु साल पछाति‍ रजि‍ष्‍ट्रीक भेद खूगल। भेद खूगि‍‍ते दुनू परि‍वारमे अनोन-वि‍सनोन शुरू भेल। दू तरहक अनोन-वि‍सनोन उठल। एक तरहक भेल जे मुनेसर दुनू बेकतीक बीच आ दोसर तरहक भेल जुगेसरक बीच। जुगेसरक पत्नी पि‍ताक सम्‍पति‍क खेल देखि‍ चुकल छेली जे अछैते हि‍स्‍से हि‍स्‍सा नै भेल। तँए पति‍पर दबाव बनौने जे जे भेल माने बेटा नामे रजिष्‍ट्री नीक भेल। मुदा जुगेसरकेँ सद्य: भाइक संग बेइमानी आ समाजक बीच दोखी हेबाक डर मनमे नचैत रहनि‍। मुदा बेटो जुआन भऽ गेल रहनि‍। अपन खास हि‍स्‍सा बूझि‍ ऊहो माइएक पीठपोहू बनल। तहि‍ना दोसर दि‍स मुनेसर अपन आमदनी देखि‍ सबुर करैत। आमदनीओ नीक बनि गेल रहनि‍। सरकारीकरण भेने नीक दरमाहा, तैसंग ट्यूशनो फीस बढ़ने अधि‍क आमदनी, राँचीक मकान भाड़ा सेहो जोर दैत। मुदा साधनाक भूख (सम्‍पति‍क भूख) आरो उग्र भऽ गेलनि‍। तहूमे अपन बाप-माइक देल बरतन-बासन बि‍काएल रहनि‍। दुनू परानीक बीच खुलि‍ कऽ मतभेद शुरू भऽ गेल। गप-सपक क्रम एना भेलनि‍। मुनेसर पत्नीकेँ बुझबैत कहलखि‍न-
देखि‍यौ, राँची सन शहरमे अपन मकान भऽ गेल, गाममे रहैक कोनो प्रश्ने ने अछि‍। तखनि तँ ओहए (भैया) खेतीओ करै छथि‍, खेबो करता।
मुनेसरक वि‍चारकेँ कटैत साधना अपन अर्थशास्त्रीय तर्क देलखि‍न-
जखनि गाममे नै रहब तखनि गामक पूजीकेँ मार पूजी किए बनौने रहब। ओकरा बेचि‍ कऽ बैंकमे जमा कऽ लेब तैयो सूदि‍ औत। नै जँ घरे आरो बना लेब तैयो भाड़ा एबे करत।
पाशा बदलैत मुनेसर तर्क देलखि‍न-
बाप-पुरखाक जँ घराड़ीए बेचि‍ लेब तखनि कोन मुँह लऽ कऽ जि‍नगी जीब। कोनो कि‍ पेट जरैए जे बेचब।
होइत-हबाइत ई भेल जे गामक खेत भरना लगा बैंकमे जमा कऽ लेब। मुदा वि‍वाद तँ बीचमे भैयारीक रहबे करनि।
कि‍छु दि‍न पछाति‍ दुनू बेकती (मुनेसर-साधना) गाम आबि‍ अपन डीह-डावरसँ लऽ कऽ बाध धरि‍क बँटबारा करैक वि‍चार जुगेसरक सोझहामे रखलनि‍। वि‍वादी जमीन (जे रजि‍ष्‍ट्री भेल रहए) छोड़ि‍ सभ कि‍छु बँटैले तैयार भऽ गेला। नै मामासँ कनहा मामा नीक। वि‍वादी जमीन छोड़ि‍ बाँकी‍ बाँटि‍ लेलनि‍।
हरि‍हरक भैयारीमे अढ़ाइ कट्ठा घराड़ी। जे बँटाइत सबा छह धूरपर आबि‍ गेल।
जइ समए सुलोचना सासुरसँ नैहर आएल छेली ओ समए देशक आन्‍दोलनक तूफानी दौड़ छल। सन् १९४२क दमनचक्र प्रारम्‍भ भऽ गेल छल। परोपट्टाक (झंझारपुर इलाकाक) लोक अंग्रेजी हुकुमतक खि‍लाफ सड़कपर उतरि‍ गेल छल। गोरा-पलटनक अड्डा झंझारपुर बनल छल। केतेको गाममे आगि‍ लगाैल गेल। केतेको गोटे भूमिगत काज करै छला। केतेको गोटे मारि‍ खा-खा जहलमे बन्न छला। मुदा लाजि‍मी बात ईहो रहल जे ऐठामक केतेको परि‍वार गोरा सरकारक संग देलक। रहै-खाइक बेवस्‍थाक संग-संग सम्‍पति‍क लूट सेहो केलक।
ओना गाममे सुलोचना बहि‍न सन केतेको गोटे छथि‍ जे सासुरसँ भगाैल छथि‍। अपन माए-बाप, भाए-भाैजाइक संग सेहो रहै छथि‍ आ असगरो बोनि‍-बुत्ता कऽ जीवन-यापन सेहो करै छथि‍। कि‍छु गोटेकेँ सन्‍तानो छन्‍हि‍ आ कि‍छु गोटेकेँ नहि‍योँ छन्‍हि‍।
अदौसँ एक पुरुष एक नारीक सम्‍बन्‍धक वि‍धानो आ बेवहारो तँ बनल रहल मुदा परि‍वारकेँ आगू बढ़ैले किछु कमी तँ छेलैहे। ओ कमी अछि‍ जे मनुखक शरीरक बनाबटि‍ समान नै होइए‍। बहुलांशमे सन्‍तानोत्‍पत्तिक शक्‍ति‍ समान रहैत आएल अछि‍ तँ तैसंग कमी-बेसी सेहो रहल अछि‍। केतौ कोनो पुरुखमे शक्‍ति‍क कमी तँ केतौ कोनो महि‍लामे। तहि‍ना केतौ कोनो पुरुखमे बेसी रहल अछि‍ तँ केतौ कोनो महि‍लामे। शक्‍ति‍हीन पुरुख रहने क्षेत्रज सन्‍तानक चलनि‍ सेहो रहल अछि‍। मुदा शक्‍ति‍हीन नारी भेने तँ परि‍वारकेँ आगू बढ़ैमे बाधा उपस्‍थि‍त भाइए जाइए‍। तैठाम दोसर नारीक सहारा जरूरी भऽ जाइ छै‍। जँ से नै हएत तँ परि‍वारक अन्‍त हएत। अन्‍ते नै हएत बुढ़ाड़ी आ बि‍मारीक अवस्‍था  सेहो कष्‍टकर हएत। मुदा आवश्‍यक-आवश्‍यकता तखनि आराम आ वि‍लास दि‍स बढ़ैए‍ जखनि भोग-वि‍लासक मनोवृत्ति‍ जोर मारैए‍। जइक चलैत समाज-परि‍वारमे ि‍वकृतताक रूप पकड़ैए‍। से भेल। समाजक अगुआएल (खास कऽ आर्थिक रूपे) आ मध्‍य वर्गीओ परि‍वारमे एक-सँ-अधि‍क बि‍आह करब नीके जकाँ चलनि‍मे छल। जइसँ एक पुरुख एक नारीक प्रथापर जबरदस चोट पड़ल। मुदा केतबो जबरदस चोट किए ने पड़ल, तैयो सोलहन्नी नष्‍ट नै भेल। ओना नि‍म्न वर्गमे सेहो बि‍मारी पैसल मुदा दोसर रूपमे। ओना राजशाही बेवस्‍थामे ऊपर-सँ-निच्‍चाँ धरिक किछु परिवार जोड़ाएल छल, तइ परिवारक बीच भोगी-विलासी मनोवृत्ति‍क परिणाम छल, जखैन कि‍ गरीबमे पेटक दर्द कारण भेल। एहेन पुरुखोक संख्‍या कम नै जे कामचोर, आलसी, नशाखोर इत्‍यादि‍क कारणे पत्नीकेँ नै रखि‍ पबै छल। नै रखैक माने ई जे पत्नीक भरण-पोषण नै कऽ पबै छल। मुदा सेहो सोलहनी नै भेल। एहेन बहुतो महि‍ला छेली जे पुरुखे जकाँ श्रम करै छेली। जि‍नका मनमे पति‍क प्रति‍ असीम श्रद्धा आ मजगूत संकल्‍प छेलनि‍। अपन जि‍नगीक सभ सुख पति‍मे अरोपि‍ नेने छेली।
एकसँ अधि‍क बि‍आह करैक रूप दि‍नानुदि‍न बदतर होइत गेल। अनेको रंगक कुत्‍सि‍त रोगक जनम होइत गेल। पुरुखोक वि‍चार एते घि‍नौना रूप पकड़ि‍ लेलक जे दर्जनक-दर्जन बि‍आह करए लगला। तैसंग ईहो भेल जे पुरुखक उमेरोक ठेकान नै रहल। जे उमेर बि‍आहक नहि‍योँ छल तहू उमेरमे बि‍आह करए लगला। जइसँ अपने कि‍छुए दि‍न पछाति‍ मरि‍ जाइ छला आ जुआनीएसँ महि‍ला वैधव्‍य रूपमे बदलि‍ जाइ छेली। वि‍धवा जि‍नगीक बीच एहेन परि‍स्‍थि‍ति‍ पैदा लऽ लइ छल जे समाजमे रोग बनि‍ गेल।
ओना नारीक प्रति‍ पुरुख सोलहो आना अन्‍याइए केलनि‍ सेहो नै। लड़का-लड़कीक (पुरुख-नारीक) बीच दुनू तरहेँ रोगक प्रवेश भेल। केतौ बलक प्रयोग भेल तँ केतौ पुरुख-नारीक बीचक आंगि‍क सम्‍बन्‍ध सेहो भेल।
प्रश्न उठैत जे अदौक परम्‍परा (वैदि‍क परम्‍परा) पर एते भारी चोट पड़ल आ सभ पुरुख-महि‍ला मुँह देखैत रहि‍ गेला। ऐठाम ईहो बात देखए पड़त जे ने सभ गामक एक रंग चालि‍-ढालि‍, खान-पान, बात-वि‍चार अछि‍ आ ने सामाजि‍क वि‍कासक प्रक्रि‍या एक रंग अछि‍।
एक रंग नै होइक अनेको कारण अछि‍। एक तँ समाज छोट-छोट राज्‍यमे वि‍भाजि‍त छल। जइ तरहक राज्‍य छल ओइ तरहक रजो छला। ओना मि‍थि‍लांचल सेहो केतेको जमीन्‍दारीक संग राज्‍योमे वि‍भाजि‍त छल। सभकेँ अपन-अपन शासनक संग सामाजि‍क बेवस्‍थाे संचालि‍त करैक अलग-अलग ढर्ड़ा छल। ओना क्षेत्रक हि‍साबसँ सेहो अंतर छेलैहे। खान-पानक संग उपारजन करैक सि‍स्‍टमोमे अंतर पहि‍नौं छल अखनो अछि। अखनो एहेन क्षेत्र अछि‍ जैठाम ने बाढ़ि‍क कोनो प्रभाव (धारक काट-छाँट) तेहेन पड़ल जइसँ ओइठामक खेत-पथार आ बास भूमि‍ प्रभावि‍त भेल। मुदा एहनो क्षेत्रक कमी नै जैठाम उपजाऊ भूमि‍ धारो बनि‍ गेल आ बालुओसँ भरि‍ गेल अछि‍। जे कहि‍यो सुन्‍दर गाम (बासक हि‍साबे) छल ओ उजड़ि‍ गेल। बि‍नु अन्न-पानि‍सँ मनुख जीब केना सकैए? ई तँ प्रश्न तहि‍यो छल आ अखनो अछिए।
एकटा आरो भेल। ओ ई जे जैठाम पुरुख-नारीक बीच परि‍वार ठाढ़ भेल ओइठाम पुरुख प्रधान बेवस्‍था रहने अनेको तरहक अबलट लगा नारीकेँ घरसँ भगाएब। केकरो सन्‍तानोत्‍पत्ति‍ शक्ति‍ नै रहने, तँ केकरो चरि‍त्रहीन कहि‍ इत्‍यादि‍-इत्‍यादि‍, अबलट जोड़ि‍ घरसँ अलग कऽ देल जाइ छल अखनो कऽ देल जाइए।
गामक समस्‍या (भाइक बेवहार) दुनू परानी मुनेसरक सम्‍बन्‍धमे खाधि‍ बनैत गेल। दुनू भाँइक भि‍नौजी सुलोचनाकेँ सेहो बाँटि‍ देलकनि। एते दि‍न सुलोचना दुनू भाँइक बीच छेली मुदा भीन भेने जुगेसरसँ हटि‍ मुनेसरक संग भेली। जुगेसर मुनेसरक खेती छोड़ि‍ देलकनि‍। भाइक खेती छोड़ने खेतीक समस्‍या मुनेसरकेँ उठलनि। कारणो स्‍पष्‍टे  अछि‍। अपने दुनू परानी बाहरे रहि‍तो छला आ गामक आवाजाही सेहो नहि‍येँ जकाँ छेलनि‍। गाममे नै रहने माले-जाल केना पोसि‍ सकै छला, जइसँ खेती करि‍तथि‍। ओना बाहरोमे दुनू बेकती मुनेसर एकठाम नहि‍येँ रहै छला। बाल-बच्‍चाक संग पत्नी-साधना राँचीमे रहि‍तो छेली आ हाइ-स्‍कूलमे नोकरीओ करै छेली जखनि कि‍ मुनेसर पलामूमे रहै छला। एक तँ दुनूक दूरी अधि‍क अछि‍ दोसर जँ स्‍कूलमे छुट्टीओ होइ छेलनि तैयो ट्यूशन रहिए जाइ छेलनि। तँए राँचीओक आबाजाही कमे-सम रहै छेलनि।
जि‍नगीक दूरी वि‍चारोक दूरी बनौने रहलनि‍। जैठाम साधनाकेँ अपन परि‍वारक चि‍न्‍ह-पहचि‍न्‍हमे कमी छेलनि‍ तैठाम मुनेसर भाएक आगू सम्‍पति-जमीनकेँ गौण बुझै छला। स्‍पष्‍ट रूपे दुनूक बीच मतभेद होइत गेलनि‍। अपन हक-हि‍स्‍सापर साधना अड़ली तँ मुनेसर आगू बढ़ैसँ हि‍चकि‍चाइ छला। होइत-हबाइत भेल ई जे दुनू गोटे एक दि‍न ि‍नर्णए लेल तैयार भेला। दुनूक बीच प्रश्न-उत्तर एना भेलनि‍।
साधना-
जखनि खेत कीनैमे अदहा खर्च भैयाकेँ देलि‍यनि‍ तखनि ओ किए अपना बेटा नामे जमीन लि‍खा बेइमानी केलनि‍?”
साधनाक मजगूत तर्कसँ मुनेसर सहमि‍ गेला। मुदा अपनाकेँ उदार बनबैत उत्तर देलखि‍न-
(भैया) जँ बेइमानीए केलनि‍ तइसँ हमर की बि‍गड़ल?

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जुगेसर-मुनेसरक बीच मरौसी जमीनक बँटबारा भऽ गेलनि‍। मुदा हालमे कीनलाहाक नै भेल। दुनू भाँइक बँटबारा सुलोचना बहि‍नकेँ सेहो बाँटि‍ देलकनि‍। सुलोचना बहि‍न मुनेसरक संग भेली। खेत बँटेलासँ खेतीक समस्या उठल। जुगेसर एकटा बरद रखि‍ भजैती हर बना अपन खेती करैत, मुनेसरकेँ खेत तँ भेलनि‍ मुदा खेतीक कोनो समचा नै। अपनो परि‍वार बाहरे रहैत।
खेतक बँटबारा एकटा नम्‍हर समस्‍या ठाढ़ कऽ देलकनि‍। समस्‍या ई जे मध्‍यम परि‍वारमे खेतक बँटबारा दू ढंगसँ होइ छै। पहि‍ल जे खेते-खेते आड़ि‍ नै दऽ खेते-खेत बाँटि‍ लेलौं। तइ बँटैमे गोटे-आधे खेतमे आड़ि‍ पड़ैत नै तँ खेते-खेत बँटा जाइत। दोसर ई जे छोट-खेत रहऽ आकि‍ नम्‍हर खेते-खेत बँटाएल। ओना दुनू बँटबारा रोगाएले अछि‍। एक रोगाएल अछि‍ जमीनक उर्वराशक्‍ति‍ आ जमीनक कि‍सि‍मसँ। एके गामक एक बाधमे नीच, मध्‍यम आ ऊँच खेत होइए। नीचरस खेतमे पानि‍ बसने माने अधि‍क दि‍न तक पानि‍ रहने एकेटा उपजा भेल। तेकरो कोनो नि‍श्चि‍त बि‍सवास नै। कि‍ए तँ जँ अगते नम्‍हर बरखा भऽ गेल तँ खेते ने अवाद हएत, दोसर अवाद भेलो पछाति‍ पानि‍क कोनो ठेकान नै होइ छै जँ अगते डुम्‍मा बरखा भेल तँ रोपलोहो डूमि‍ गेल। जइमे लगतो डूमि‍ गेल, उपजाक कोनो चरचे नै। मुदा मध्‍यम खेतमे उपजो (गि‍नती हि‍साबसँ) बेसी आ नीक फसि‍लो (जेना धानेमे हल्‍लुक धान, सतरि‍या-तुलसीफूल) होइत। एहेन ठाम समस्‍या उठबे करत। तैसंग ऊँच जमीनमे गाछीओ-कलम लगैत आ बरसाती वाड़ी (बरसाती तरकारी) सेहो होइत, जे मध्‍यम आ नीच खेत लेल संभ्‍ाव नै। तहि‍ना दोसर तरहक बँटबारामे समस्‍या उठैत जे एक बीघा खेतक टुकड़ा तीन पीढ़ी जाइत-जाइत बीघासँ कट्ठामे उतरैत धूरमे पहुँच जाइए। जेना पहि‍ल पीढ़ी जँ चारि‍ भाँइक भैयारी रहल तँ बीघा पाँच कट्ठामे बँटाएल, दोसर पीढ़ी जँ चाि‍र भैयारीक रहल तँ एक-कट्ठा पाँच धूरमे बँटाएल आ तेसर जँ दूओ भाँइक भैयारी रहल तँ साढ़े-बारह धूर भेल। खैर जे होउ, मुदा समाज दुनूक संग न्‍याय केने अछि‍। दुनू प्रथाक गाम-गाममे चलनि‍ओ अछि‍ आ सभ मानि‍तो अछि‍।
जुगेसर मुनेसर झगड़ि‍ कऽ बँटबारा केलनि‍ खेते-खेत आड़ि‍ देलनि‍। खेतक नक्‍शा तेहेन बनि‍ गेलनि‍ जे हरक जोत कोदारि‍पर चलि‍ आएल। जँ एक दि‍स नम्‍हर-नम्‍हर ट्रेक्‍टर खेत जोतए आबि‍ रहल अछि‍ तँ दोसर दि‍स खेत खँताइत-खँताइत तेते छोट भऽ गेल जे ट्रेक्‍टर अँटबे ने करत तँ जोतत कथी। बेल पकने कौआकेँ कोन लाभ। ओना समाजमे दू रंगक बँटेदारो अछि‍। एक ओ जे अपन हर-बरद रखि‍ अपने हरबाहि‍ कऽ बँटाइ खेत जोतैए, जेकरा थोड़-थाड़ अपनो रहल आ दोसरो भेल। कि‍ए तँ, आजुक ओहन खेती बनि‍ रहल अछि‍ जे एक-फसि‍ला नै बहु-फसि‍ला बनने खेतक जोतो बढ़ै छै। बरहमसीआ खेती सहो भऽ रहल अछि‍। बरहमसीए खेती कृषि‍क उन्नति‍क चोटीक सीढ़ी भेल। बारहो मास खेती भेने, पर्यावरणवि‍द् सभकेँ अनेरे ऑक्‍सीजनक साँस भेटतनि‍। दोसर तरहक बँटेदार ओ भेल जे अपने बोइन करैए आ कि‍छु खेतीओ करैए। मोटा-मोटी ओ सभ कोदारि‍सँ खेती करैए।
दुनू भाँइक बीच बँटबारा भेला पछाति‍ मुनेसरक मनमे रहनि‍ जे खेतक देखभाल बहि‍न करती आ भैये खेती करता, उपजाक हि‍स्‍सा बहि‍नकेँ देथि‍न। मनमे रहनि‍ जे बहि‍न तँ दुनू भाँइक छी जँ ओहू लाथे अपन सहयोग बूझि‍ सोलहो आना उपजा दऽ देथि‍न तँ हुनको गूजरमे सुवि‍धा हेतनि‍। मुदा झगड़ाक बीआ पहि‍ने सुलोचना बहि‍न रोपि‍ लेलनि‍। रोपि‍ ई लेलनि‍ जे खेत कीनला पछाति‍ मुनेसर दि‍ससँ बाइज गेली जे जखनि‍ दुनू भाँइ अदहा-अदहा खर्च दऽ खेत कीनलक तखनि‍ हि‍स्‍सा कि‍ए ने हेतै। अपना मुहेँ वेचारी एक भाँइसँ दूर आ दोसरसँ लग चलि‍ एली। जुगेसरोकेँ सरकारी मान्‍यता (सरकारी स्‍कूल बनने) भेटने दरमहो बढ़लनि‍ जइसँ घराड़ी कीनि‍ पजेबाक घरो नीक जकाँ बना लेलनि‍। सुलोचना बहि‍न सबूर केली जे जखनि‍ सीता महरानी जाबे जनकपुरमे रहली ताबे बेटीए रहली (बेटीक महत परि‍वारमे कम होइत) आ जखनि‍ राजगद्दी बेर एलनि‍ तखनि‍ बोने गेली आ बोनोमे पति‍-दि‍अरसँ बि‍छुड़ि‍ लंका गेली। तँए कि‍ ओ रावणक राजधानीमे रहली? नै! पुष्‍पवाटि‍कामे रहली। तहि‍ना हमहूँ रहब। खेत बँटाइ करैसँ जुगेसर पाछू हटि‍ गेला। तेहेन-तेहेन बँटेदार भेलनि‍ जे समैपर खेतीए ने कऽ पबै छल। जइसँ उपजा बेठेकान भऽ गेल। मुदा सुलोचना बहि‍न अपन बाप-दादाक डीह धेने रहली।
डि‍फि‍सि‍ट ग्राण्‍ट स्‍कूलकेँ भेटने मुनेसरोक दरमाहामे बढ़ोतरी भेलनि‍। तैसंग नीक शि‍क्षक भेने (पढ़बैमे नीक) ट्यूशन सेहो बेसीआ गेलनि‍। जइसँ आमदनीमे नीक बढ़ोतरी भऽ गेलनि‍। राँचीमे अपन घरो बना नेने रहथि‍। गाममे भैयारीक वि‍वाद ठमकल रहल। मुदा दुनू बेकतीक बीचक मुनेसरक दूरी बढ़ैत गेलनि‍। स्‍वभावसँ दुनू दू तरहक। एकक स्‍वभाव अपन कर्ममे एते वि‍श्वस्‍त भऽ गेल जे मनमे उठैत, कोन सम्‍पति‍ अछि‍ मास दि‍नक कमाइ भेल बूझब जे मास दि‍न नहि‍येँ कमेलौं। तइसँ ई तँ हएत जे समाजोक नजरि‍मे जीवि‍त रहब आ परि‍वारक बीच मलि‍नतो कमत। भैयारीक जे सम्‍बन्‍ध अछि‍ ओ बरकरारे रहत। घराड़ी छोड़ने की होइ छै। हमहूँ तँ गामक के कहए जे आने राजमे घर बनौने छी। मुदा भैयारीओ तँ भैयारीए छी।
दू भाँइक बीच दू माए-बापक बेटी सेहो छथि‍। दुनू भाँइ ऐ रोगसँ ग्रसि‍त। कारणो भेल। कारण भेल जे जुगेसरकेँ सासुरक सम्‍पति‍क लोभ पत्नीक मातहतीमे आ मुनेसर ऐ दुआरे जे एक साधारण कि‍सान परि‍वारक बेटाक बि‍आह प्रशासनि‍क अफसरक बेटीसँ भेल छेलनि। केतबो हाइ-तौबा कि‍एक ने हुअए मुदा एकरा केना नकारि‍ देब जे मि‍थि‍लांचलक अधि‍कांश परि‍वारमे महि‍लाक मुँहपुरखी नै अछि‍। ई दीगर जे की अछि‍, केते अछि‍, केहेन अछि‍, मुदा परि‍वारक जुइत महि‍ला हाथमे नै अछि‍ सेहो तँ नहि‍येँ कहल जा सकैए। ओना मुनेसर चरि‍त्रकेँ बहुत हद तक संयमि‍त रखला। बेटोकेँ नीक स्‍कूलमे पढौलनि‍। अपन कमाइसँ एहेन सबूर भेल मन मानि‍ गेलनि जे जि‍नगी बड़ भारी नै होइ छै। मुदा तैयो गामक सम्‍पति‍ लेल दुनू बेकतीक बीच मतभेद भुमहुरक आगि‍ जकाँ सुनगि‍ते रहल। जे से, मुदा सुलोचनो बहि‍नक देख-रेख तँ करबे करैत रहला। जमीनो तँ जाल छी। जुगेसरकेँ पहि‍ल चारि‍ कट्ठा हाथ लगले छन्‍हि‍ दोसर सासुरक हूसलनि‍। फेर तेसर दस कट्ठाक जालमे पड़ला। जाल ई जे पाहीपट्टीबला दू भाँइक घराड़ी-वाड़ी मि‍ला दस कट्ठा एकठाम। दुनू भाँइसँ कीनैक दाम जुगेसर केलनि‍। दामो तँइ भऽ गेल। एक भाँइ रूपैआ लऽ रजि‍ष्‍ट्री कऽ देलकनि‍। दोसर भाँइ टौहकी लगौलक। दोसर लेबाल पहुँचल। भैयारीक एके जमीनक दाम एक भाँइसँ डेढ़ि‍या दोसर भाँइकेँ भेल। दोसर रामकि‍सुन अदहाकेँ के कहए जे सोलहो आना खेत दफानि‍ लेलक। बल प्रयोगमे जुगेसर कमजोर पड़ला। पाछू हटि‍ कोर्ट पहुँचला। केसा-केसी शुरू भेल मुदा जमीन रहल दफानि‍हारेक हाथमे।
कि‍छु दि‍न पछाति‍ जुगेसरक बेटा (जे मैट्रि‍क पास) एकटा पोस्‍टकार्डमे बि‍खनि‍-बि‍खनि कऽ गारि‍ लि‍खि‍ रामकि‍सुनकेँ पठा देलक। पोस्‍ट आॅफि‍ससँ चि‍ट्ठी भेटि‍ते रामकि‍सुन लोक सभकेँ चि‍ट्ठी देखबए लगल। झाँपल बात तँए, के लि‍खलक नै लि‍खलक से प्रश्न उठल। जेकरा गारि‍क चि‍ट्ठी भेटल ओ शंका केलक जे दोसर कि‍ए लि‍खत। केकरोसँ झगड़ा नै। तखनि‍ तँ खेत लऽ कऽ झगड़ा जुगेसरसँ अछि‍ ओकरे बेटा लि‍खलक। जुगेसरक बेटा राधा सेहो गाममे। दुनू गोटेक घरो एकेठाम। तँए सदि‍काल एक-दोसरकेँ देखबे करैत। राधाकेँ पकड़ि‍ रामकि‍सुन खूब मारि‍ मारलक।
गाममे जमीन्‍दारक जमीनपर अगिलग्‍गी केस भऽ गेल। अट्ठाइस गोटे केसक मुद्दालह भेला। ओही जमीन्‍दारक जमीनपर जुगेसरकेँ वि‍वाद फँसलनि‍। थानाक लहकी गाममे रहबे करै। घटना भेबो कएल। जमीन्‍दारो अपन हाथ ससारलक। जुगेसरकेँ अगुआ गौआँ सभकेँ सेहो फँसौलक। खूब नम्‍हर मुकदमाबाजी भेल। हाइ कोर्ट तक वि‍वाद पहुँचल। मुदा जमीनपर कब्‍जा जुगेसरकेँ नहि‍येँ भेलनि‍।
मुनेसर दुनू परानीक बीच मतभेद कमलनि‍ नै बढ़ि‍ते गेलनि‍। एक दि‍न पत्नी डपटैत मुनेसरकेँ कहलखि‍न-
अहाँ बुते खेत कब्‍जा कएल नै हएत तँ हम जा कऽ करब।
साधनाक उग्र रूप देखि‍ मुनेसर चुप रहला। बजला कि‍छु ने मुदा वि‍वादकेँ आगूमे मर्ड़ाइत देखबे केलनि‍। तत्कालक गुमकी तँ कि‍छु दि‍न वि‍वादकेँ रोकलक मुदा रूकि‍ नै सकल।
फगुआक दि‍न। मुनेसर सेहो सभतूर पत्नी-बेटा सहि‍त एकठाम भेला। ओना बेटा आवासीय स्‍कूल, पत्नी राँची हाइ स्‍कूल, अपने मुनेसर पलामूमे रहैत तँए चि‍ट्ठीए-पतरीसँ भेँट-घाँट होइत। राँचीक होली, आदि‍वासी इलाका ढोल-ढालक गनगनी इलाकाकेँ गनगनबैए। मलपूआ खेलहा मुनेसर परि‍वारबैसारीक दि‍न रहबे करै, साधना-मुनेसरक बीच गप-सप्‍प उठल। दुनू बेटा लगमे। गप-सप्‍प उठल गामक चारि‍ कट्ठा जमीनक हि‍स्‍सा। साधना बजली-
जहि‍ना ओ हमरा नैहरक सम्‍पति‍क भोग नै हुअ देलनि‍, तहि‍ना हमहूँ नै भोग हुअ देबनि‍।
पत्नीक प्रहार सुनि‍ मुनेसर ति‍लमि‍ला गेला। सचमुच वेचारीक नैहरक गहनो आ वर्तनो-जात बोहा गेलै। युधि‍ष्‍ठि‍र जकाँ मुनेसर पत्नीक प्रहारो सुनथि‍ आ मने-मन वि‍चारबो करथि‍ जे भैयारीमे एहेन नै हेबा चाही। जेठ भाय पि‍ते तुल्‍य नै पि‍तृगुरु तुल्‍य होइ छथि‍। जँ सहोदर भाएमे एहेन होइ तँ राम-लक्ष्‍मणक सम्‍बन्‍ध केना बनत? सद्य: रावण-वि‍भीषणक भेल। एक तँ फगुआक रमकी तैपर मलपूआक सहयोग रमैक कऽ साधना दोहरबैत बजली-
जँ हमहूँ बापक बेटी हएब तँ सि‍खा देबनि‍।
दुनू बेटा चुपचाप। पि‍तोक दुर्दशा आ माएक रूप देखि‍ अनेरे बौआइत। बड़का बाबू (जुगेसर) हमरे सबहक गरदनि‍ कटलनि‍। बाबू कि‍छु कि‍ए ने बजै छथि‍। मुदा मुनेसरक मन जेठ भायक कि‍रदानीपर, पत्नी रणचण्‍डी भेल छथि‍, हमरा रोकने रूकती। परि‍वारक हि‍साबसँ दुनूक (पत्नीओ आ भैयो) दूरी अबस्‍स रहलनि‍। खान-पान आचार-वि‍चार समाजक रीति‍-रि‍वाज, मुदा हम तँ से नै छी। पि‍ता मन पड़लनि‍। एके बाप-माइक बेटा दुनू भाँइ छी। आइ जँ नै पढ़ल-लि‍खल रहि‍तथि‍ तँ बुझि‍तौं जे अज्ञान-सज्ञानक बीचक बात भेल, कोन रूपे नि‍राकरण हुअए ओ सज्ञानक काज भेल। मुदा जैठाम जहि‍ना शि‍क्षक अपने छी तहि‍ना ऊहो छथि‍। वृत्ति‍ए दुनू गोटे एके छी तखनि‍ एहेन वि‍चार कि‍ए मनमे एलनि‍। मुदा जेठ भायकेँ केना कहबनि‍ जे भैया अहाँ बेइमानी करै छी। हुनका बेइमान बनने तँ अपने अनेरे बेइमान कहबए लगब। ओ गाममे रहै छथि‍, समाजक बीच रहि‍ते छथि‍, दरमाहा बढ़ने सुदि‍ओ-सबाइक कारोबार करि‍ते छथि‍, मुदा हम तँ से नै छी। एहेन जगहपर की कएल जाए। कोट-कचहरीक आँखि‍ कहि‍यो देखलौं नै। तहूमे छुटनगर नै छी। नोकरी करै छी, गनल छुट्टी अछि‍। पावनि‍-ति‍हारक छुट्टीमे कोटो-कचहरीमे छुट्टीए रहै छै। लगमे नोकरी करैत रहि‍तौं तँ दुनू काज मेल-पाँच करि‍ कऽ सम्‍हारि‍ लैतौं सेहो नै अछि‍। चौबीस घंटाक दूरी अछि‍। एक दि‍नक काजमे तीन दि‍न लगत। तहूमे झड़े-झमेल छी, केते समए लगत तेकर कोनो ठीक छै। बेवस्‍थि‍त जि‍नगी टूटि‍ जाएत। मात्र चारि‍ कट्ठा ओहन खेत अछि‍ जेकरा अपने हाथे नै करब। सम्‍पति‍केँ प्रति‍ष्‍ठा बनाएब नेनमति‍ हएत। मुदा ईहो (पत्नी) थोड़े मानती। तैबीच फेर साधना टपकि गेलखि‍न-
समए बनाउ, दुनू गोटे चलू। मरि‍ जाएब संगे, जीवैत रहब संगे।
बेवस भऽ मुनेसर गाम अबैक समए बना लेलनि‍। स्‍कूलमे छुट्टीक दरखास दऽ दुनू बेकती गाम चलला। सकरीमे मुनेसर पत्नीकेँ कहलखि‍न-
हम मधुबनी (बहि‍न ऐठाम) होइत परसू आएब अहाँ आगू चलू।
सएह भेल। साधना गाम एली आ मुनेसर मधुबनी गेला।
गाम अबि‍ते साधना चौहद्दी बन्‍हलनि‍। तीन तसि‍या लोकक कमी नै। चढ़ा-उतरीक वि‍चार दऽ फील्‍डपर साधनाकेँ उतारि‍ देलकनि‍। दोसर दि‍न भोरे, करीब सात बजे साधना जुगेसरक दरबज्‍जापर पहुँच गेली। जुगेसरो दरबज्‍जेपर, पत्नी-धि‍या-पुता आँगनमे। साधनाकेँ देखि‍ जुगेसरकेँ भेलनि‍ जे गाम एली तँए भेँट-घाँट करए एली। आँगन जा सभकेँ भेँट करती। चौकीपर बैसल जुगेसर‍ आँखि‍ खसा लेलनि। साधना दरबज्‍जाक आगूमे अड़ि‍ कऽ ठाढ़ होइत बजली-
अहींसँ काज अछि‍?”
चौंकैत जुगेसर बजला-
की?”
हमर हि‍स्‍सा जे जमीन रखने छी, से बाँटि‍ दि‍अ।
सुनि‍ जुगेसर बजला-
कोन जमीन? जइ जमीनमे हि‍स्‍सा छेलए से तँ बाँटि‍ए देलौं। तखनि‍?”
जे जमीन कीनने छी, से।
ओ तँ राधाक नाओंसँ छै, अहाँक हि‍स्‍सा केना हएत?”
कीनैमे हमर रूपैआ नै लगल अछि‍?”
दुआर परहक हल्‍ला अँगनाेमे पहुँचल। अँगनासँ सभ दरबज्‍जापर पहुँचल। साधनाक प्रश्नक उत्तर सोमनी दि‍अ लगली-
अहाँक रूपैआ रहैत तँ अहीं नाओंसँ ने रहि‍तए।
साधना-
हम कि‍आँने गेलि‍ऐ जे एहेन गरदनि‍ कट भैया छथि‍ जे गरदनि‍ काटि‍ लेता। 
सोमनी-
अहूँ घरवलासँ बेसी गरदनि कट?”
की‍ गरदनि‍ कटने छन्‍हि‍।
बाताबातीमे गरमी आबि‍ गेल। चारू गोटे जुगेसर साधनाकेँ मार-मार करैत चारू भागसँ घेरि‍ लेलकनि‍। साधनाक मन मानि‍ गेलनि‍ जे मारि‍ खेबे करब। तइसँ नीक जे पाछू हटि‍ जाइ। पाछू हटैत बजली-
अखनि‍ हम जाइ छी, बारह बजे आबि‍ कऽ फड़िछेनहि‍ जाएब।
जहि‍ना साधना वि‍दा भेली तहि‍ना जुगेसरो सभतूर ठमकि‍ गेला। घुरती बरि‍याती जकाँ साधनो बजैत आ जुगेसरो सभ परि‍वार।
दि‍यादी परि‍वारक जे पुरुष पात्र रहथि‍ ओ तँ मुँह दाबि‍ लेलनि‍ मुदा स्‍त्रीगण सभकेँ अगहन आबि‍ गेलनि‍। गाम-गामक खिस्‍सापि‍हानी साधनोकेँ सुनबए लगली आ सोमनीओकेँ।
सभ परानी मि‍लि‍ जुगेसर वि‍चार केलनि‍ जे दरबज्‍जापर आबि‍ साधना बेइज्‍जत केलक। मुदा मनसँ हरा गेल जे जइ साधनाक नैहरक सभ कि‍छु (गहना-वर्तन) हरा रहलि‍ऐ ओ केना सुपते मने मानि‍ जाएत। अपनो दुनू परानी जुगेसरकेँ सासुरक अनुभव रहबे करनि‍ जे उचि‍त ससुरक हि‍स्‍सा चलि‍ गेल। कोट-कचहरीमे खर्चो भेल आ भेल कि‍छु नै। तहि‍ना हेतै। बेटो राधा बुफगर, पि‍ता जुगेसरकेँ वि‍चार देलक जे जानेसँ मारि‍ देबइ। जि‍नगी भरि‍क शि‍क्षक बेटाक वि‍चारसँ राजी भऽ गेला।
बारह बजे साधना उग्र रूपमे पहुँचली। पहि‍नेसँ दुनू बापूतक वि‍चार रहबे करनि‍, अबि‍ते साधनाकेँ पकड़ि‍ लेलनि‍। हत्‍याक नीक परि‍यास केलनि‍ मुदा भेल नै।
हल्‍ला करैत साधना थाना जा जुगेसरकेँ एरेष्‍ट करौलनि‍। मुदा वि‍वादक कि‍छु ने भेल। मुनेसरकेँ मधुबनीएमे जानकारी भेलनि‍ जे गाममे जबरदस घटना घटि‍ गेल। एहेन परि‍स्‍थि‍ति‍मे सोझहे गाम जाएब नीक नै हएत। मुदा नहि‍योँ जाएब तँ नीक नहि‍येँ हएत। असमनजसमे मुनेसर पड़ि‍ गेला। गाममे नव घटना भेल। ओना गामक लोक कोट-कचहरी आ जहलक अभ्‍यस्‍त जकाँ भऽ गेल छथि‍ तँए बेसी हल-चल नहि‍येँ जकाँ भेल। मुदा स्‍त्रीगणक संग एहेन घटना भेल तँ ई चर्चक वि‍षय बनबे केलै।
साधनाक अंगीत अंधरा ब्‍लौकमे अफसर। मुनेसर मधुबनीसँ गाम नै आबि‍ अंधरा पहुँचला। दुनू गोटे वि‍चार केलनि‍ जे गाम जाएब (मुनेसरकेँ) ओते नीक नै हएत जेते साधनाकेँ एतै बजबा ली। आ ऐठामसँ सोझहे राँची चलि‍ जाएब। सएह भेल। चारि‍म दि‍न मुनेसर दुनू परानी राँची रवाना भऽ जाइ गेला।
दुनू भाँइक बीच (जुगेसर-मुनेसर) चारि‍ कट्ठा जमीनक झंझटि‍ बढ़ि‍ कऽ झमटगर भऽ गेल। एक संग मुनेसरक मन चारूकातक ओझरीक बीच एते ओझरा गेलनि‍ जे मनपर भार पड़ि‍ गेलनि‍। देहमे एकाएकी रोग सबहक आगमन हुअ लगलनि‍। ब्‍लड-प्रेसर डायबीटीज एते जोर मारि‍ देलकनि‍ जे इलाजमे जाए पड़लनि‍। चारूकातक भार ई पड़लनि‍ जे एक दि‍न जेठका बेटा-रघुनाथकेँ बैंकमे नोकरी आ स्‍कूलकेँ सरकारी भेने जहि‍ना खुशी भेलनि‍ तहि‍ना पत्नीओ आ भाइओक मतभेद मनकेँ मरोड़ि‍ देलकनि‍। खुल्‍लम-खुल्‍ला पत्नीक वि‍राेध सोझहामे आबए लगलनि‍। चारि‍ गोटेक परि‍वार (मुनेसर-साधना आ दुनू बेटा) मे दू पार्टी (वि‍चारधाराक पार्टी) बनि‍ गेलनि‍। रघुनाथ मुनेसरक बेटे नै, पढ़ाएल वि‍द्याथीओ। तैपर बैंकक नोकरी भेने संस्‍कारोमे बदलाउ चलि‍ए एलै। संस्‍कारमे बदलाउ ई जे सामंती संस्‍कार जमीन-जयदादकेँ इज्‍जत-प्रति‍ष्‍ठा बूझि‍ लोक जान गमबैले तैयार भऽ जाइ छै मुदा पूजीवादी सोच बनने जमीन-जयदायकेँ पूजी बूझल जाइ छै। प्रति‍ष्‍ठा जि‍नगीक कर्तव्‍यसँ जुड़ल अछि‍ जइमे माने जेकरा पूर्ति करैमे धनक सहयोग होइ छै। तँए रघुनाथ चारि‍ कट्ठाकेँ चालीस हजारक पूजी बुझैत, जे दुनू बापूतक पनरहो दि‍नक कमाइ नै भेल। तइले भावो भऽ माए बड़काबाबूकेँ मुँहपर गरियौलक, ई नीक नै केलक। अपनो बाप-दादाकेँ नजरि‍मे रखैक चाहै छेलै। से नै रखलक। एहेन पढ़ल-लि‍खल परि‍वार तखनि‍ एहेन काज नीक नै केलक। तैसंग अपन पि‍ताक परि‍वार (अपन खनदानक) सेहो जनैत। दुनू भाँइ बाबू शि‍क्षक छथि‍, तइसँ पहि‍ने (पछि‍ला पीढ़ीमे) सेहो दू भाँइ शि‍क्षके छला। एक गोटे वेदक शि‍क्षक संस्‍कृत महावि‍द्यालयमे दोसर मि‍ड्ल स्‍कूलमे। खनदानी पढ़ल-लि‍खल दुनू परि‍वार (नैहर-सासुर) तैबीच औरत भऽ एहेन कदम नै उठेबाक चाही। मरदा-मरदी हम सभ बुझबै। ओहुना तँ मि‍थि‍लामे जेठ भायकेँ जेठौंस सम्‍पति‍ देबाक चलनि‍ओ तँ अछि‍ए। चारि‍ कट्ठा की भेल? हुनके भातीज भऽ कऽ जेते महीना कमाइ छी तेतबो हुनकर कमाइ नै छन्‍हि‍। बेटो सहजे नेते बनि‍ कोट-कचहरी टहलि‍-टहलि‍ फुकि‍ते छन्‍हि‍, ईहो तँ उचि‍त नै जे दुनू भाँइमे एक भाँइ तालेबर बनि‍ जाए आ दोसर भाँइ दरि‍द्र! तखनि‍ परि‍वारक गाड़ी कोन मुहेँ चलत। दरि‍द्रा मुहेँ आकि‍ तालेबरी मुहेँ? बाल मन रघुनाथक (ओहन मन जेहेन पोखरि‍क वा पहाड़ी धारक पानि‍ स्‍वच्‍छ होइत) बालु छानल पानि‍ जकाँ  रघुनाथक पि‍ता दि‍स बेसी झूकि‍ गेल। मुनेसरकेँ पारि‍वारि‍क बौधि‍क संस्‍कार रहने चारि‍ कट्ठा जमीन लेल भैयारीक बीच मलि‍नता आबए नै दइक वि‍चार। जइक चलैत पत्नीसँ मतभेद चलि‍ते रहनि‍। रघुनाथ मुनेसरक पीठपोहू भेल। दोसरो बेटाकेँ नोकरी बैंकेमे भेल।
तीनू बापूत एक वि‍चारक तँए मि‍लान बेसी। मुदा रहैक दूरि‍ओ तँ कि‍नकोसँ कि‍नको कम नै। सए कि‍लो मीटरपर दुनू बेटो आ पत्नीओ अपन-अपन डेरामे रहैत। पुश्‍तैनी घराड़ीक जे सुगंध होइत से दुनू भाँइमे केकरो नै। जेकरा दू-दूटा घराड़ीपर घर रहतै ओ भाड़ाक घरमे जि‍नगी वि‍तौत ओकरा लेल घराड़ीक कोन मोल। ओना मुनेसरो नोकरीसँ पहि‍ने धरि‍ गामेक घर-घराड़ीमे रहला तँए बेसी झुकाउ, राँचीमे जे घरो बनेलौं तँ सालमे रहबे केते दि‍न करै छी। तँए गामक झुकाउ राँचीसँ बेसी।
जहि‍ना नादि‍मे बान्‍हल गाए दोसर गाएकेँ थुथुनबैत-थुथुनबैत ठोकरबौ लगैए तहि‍ना परि‍वारमे साधनाकेँ भेल। कोनो परि‍वारक घटनाक बात परि‍वारक गार्जन बाले-बच्‍चा लग राखत, एक तँ छल-प्रपंच वि‍हि‍न बोध तैपर एके घटनाक दुनूक (माता-पि‍ताक) दू वि‍चार। साधनाक मन मानि‍ गेलनि‍ जे जहि‍ना पति‍ तहि‍ना बेटो वि‍चारसँ बाहर अछि‍। ओना अधि‍क दि‍न (बच्‍चेसँ) राँचीमे रहने साधनाक आकर्षण राँचीसँ बेसी। तहूमे पति‍क कमाइक गार्जनी हाथमे, हाथमे ई जे अपने साधना नव स्‍कूलक नोकरी, जइमे दरमाहा नै, अगि‍ला आशामे नोकरी करैत। जेहने दरमाहा तेहने ने काजो हएत, तँए काजक कोनो भारे नै। राँचीमे जमीन कीनैक जखनि‍ समए आएल तखनि‍ मुनेसरक खाली रूपैआक सहयोग, जमीनक दाम-दीगर, जगह पसि‍न इत्‍यादि‍ सभ काज साधनाक हाथमे। जमीन भाँजपर एला पछाति‍ नम्‍हर प्रश्न उठल। नम्‍हर ई जे एकबेर जे भऽ जाइ छै से भऽ जाइ छै। नै जँ आगू जमीन कीनौं चाहब तँ एक तँ महगो हएत, दोसर जमीनो हटि‍ कऽ हएत। तइसँ नीक जे घर कि‍छु दि‍न पछाति‍ओ बनाएब पहि‍ने जमीने नीक जकाँ लऽ ली। लभगर वि‍चार साधनाकेँ मानैमे देरी कि‍ए लगतनि‍। दस कट्ठा जमीन कीनि‍ लेलनि‍। कीनला पछाति‍ दस कट्ठामे घर बनाएब धि‍या-पुताक खेल नै। पत्नीक दबाबमे मुनेसर दि‍न-राति‍ मेहनति‍ करए लगला। ओना मुनेसरक चरि‍त्रक गुण रहलनि‍ जे ओहन खगल समैमे बोर्ड परीक्षा काँपी जाँचक चार्जमे रहला। पाइक मोटरीक लोभ देल जाइन‍ मुदा कुल-खनदानक टेक पकड़ि‍ अपनाकेँ थीर रखला। दि‍न-राति‍क मेहनति‍ मुनेसरकेँ रोगक घर बना देलकनि‍। ओना साधना सेहो नीके स्‍थि‍ति‍मे रहली। दुनू बेटाक बैंकक आमदनी तँ हाथ अबि‍ते छन्‍हि‍।
एक दि‍न एकाएक मुनेसरकेँ पेटमे दर्द उठलनि‍। डाक्‍टर ओइठाम पता चललनि‍ जे पेनक्रियासक ऑपरेशन करबए पड़त। तैसंग महि‍नो बेड-रेष्‍ट लि‍अ पड़त। मुदा दरदो तेहेन जे नै करौने जीब नै सकै छी। खैर हैदरावादमे ऑपरेशन भेलनि‍। खर्च नीक भेने प्रगति‍मे कि‍छु बाधा तँ पड़बे केलनि‍। अपनो उमेर बेसी भऽ गेलनि‍, रंग-रंगक रोग शरीर पकड़ि‍ए नेने छन्‍हि‍।
दुनू भाँइ-जुगेसर-मुनेसरक वि‍वाद समाजक मंचपर सेहो आएल। जुगेसर जे बेटा मारि‍मे केस केलनि‍ ओ घटना कर्ताक संग समाजोक लोककेँ भँसा देलनि‍। केसकेँ ओइ गति‍ए बढ़ौलनि‍ जे घटनाक परात भने चारि‍ थाना गाममे आबि‍ गेल। हरबि‍र्ड़ो गाममे भऽ गेल। दौड़ा-दौड़ी खेहारा-खेहारी जमि‍ कऽ भेल। दू गोटे जहलो गेल। लगले बाँकी मुद्दालहक जब्‍ती-कुर्की भऽ गेल। जेकर प्रति‍क्रि‍या समाजमे जमि‍ कऽ भेल। मुँहपर जुगेसरकेँ गारि‍ पड़ए लगलनि‍। मुँह गोड़ैत-गोड़ैत एते गोड़ा गेलनि‍ जे मन मानि‍ गेलनि‍ जे जहि‍ना लोक कहै छै अपना गामक गाछी डरौन, आन गामक पाेखरि‍ डरौन तहि‍ना तँ हमरोले गाम डरौन भऽ गेल। दि‍नक के कहए जे राति‍ओ-बि‍राति‍ नि‍धोख गाम अबै छेलौं, मुदा से आब हएत? जेना-जेना मनमे डर मर्ड़ाइत गेलनि‍ तेना-तेना परि‍वार प्रभावि‍त होइत गेलनि‍। तैसंग ईहो भेलनि‍ जे पहि‍ने जे वि‍वादि‍त जमीन चारि‍ गोटे मि‍लि‍ कीनने रहथि‍ ओइ जमीनकेँ दखल करैमे मारि‍ फँसि‍ गेल। बाँकी गोटे मारि‍ओ खेलनि‍, मारबो केलनि‍ आ केसोमे फँसला। तइमे जुगेसर बँचि‍ गेला। स्‍कूलेक समैमे मारि‍ भेल। तइमे सेहो फुट-फुटौबलि‍ भऽ गेलनि‍। ओना जमीन कब्‍जा भाइए गेलनि‍। फुट-फुटौबलि‍क कारण भेल जे जि‍नका सभपर केस भेल ओ केसक हि‍स्‍सा मंगलकनि‍। जे नै देने फुटौबलि‍ भेल।
मुनेसरक ऑपरेशन तँ सफल भेलनि‍, मुदा छह मास आराम करैले डाक्‍टर सलाह देलकनि‍। जीवन-मुत्‍युक बीच पड़ल मुनेसरक मन छँहोछि‍त भऽ गेलनि‍। एक दिस अपन अगि‍ला जि‍नगी हरि‍अर बूझि‍ पड़नि‍, अपन कमाइक संग दुनू बेटाक कमाइ देखि‍ तँ दोसर दिस अपन स्‍थि‍ति‍ देखथि‍ जे अपन सेवा केना हएत। पत्नीओ पत्नीए छथि‍। अकास उड़ैत चि‍ड़ै जकाँ। कमा कऽ हाथमे दि‍यनु, हुकुम पुरबि‍यनु तँ बड़बढ़ि‍याँ नै तँ अपनाकेँ कपरजरूआक पत्नी कहि‍ डाकनि‍ देती। एक मनुख होइक नाते लाजि‍मी वि‍चार भेल। अपन शक्‍ति‍केँ क्षीण बनाएब भेल। सावि‍त्री-सत्‍यवान सेझहेमे छथि‍। अपन शेष नोकरी आ पेन्‍शनक आशा पत्नीकेँ देखथि‍, तँ बेटाकेँ कमासुत बूझि‍ संतोष होन्‍हि‍, मुदा बड़की बहि‍नक की हएत? वेचारीकेँ अछैते भाइए ने भाए रहलनि‍, अछैते पति‍ए ने पति‍ रहलनि‍, घरपर ओते सम्‍पति‍ नै, तहूमे जँ बेचैओक अधि‍कार रहि‍तनि‍ तँ कि‍छु बेसीओ दि‍नक आशा होइतनि‍, सेहो नै। समए रौदि‍याहे अछि‍। अपने ओछाइन धेने छी, पाइक कोनो आमदनी नै। बेटासँ मांगि‍ केना सकै छी, ओकरो ई बात (बहि‍नक खर्च) बूझल नै छै तैपर जँ मंगबै आ ओ माएकेँ कहत तँ जेहो कि‍छु दि‍न जीवैक आशा अछि‍ सेहो चलि‍ जाएत। आइने-अवगरानि‍सँ लोक जहर-माहूर खाइए। अपन वि‍चारकेँ अपने मनमे दाबि‍ मुनेसर बहि‍नकेँ बि‍सरि‍ देलनि।
महि‍ना-दू महि‍ना तँ सुलोचना आशा धेने रहली मुदा पेटक आगि‍ तँ ओहन आगि‍ होइ छै जेकरा मि‍झबैले लोक आचार-वि‍चार कुल-खनदान सभ बि‍सरि‍ जाइए। सुलोचना ओहन परि‍वारमे जनम नेने छथि‍ जइ परि‍वारक औरतकेँ भूमि‍ छेदनसँ बर्जित कएल गेल छन्‍हि‍, ओ अपन श्रम बेचि‍ केना सकै छथि‍। अपन ओहन वाड़ी-झाड़ी खेत नै जे अपनो जोकर सागो उपजा सकै छी। बाधक खेत। बेवस सुलोचना गाममे टुटली मरैआमे बैसि‍ गाबए लगली-
हे भोलादानी कहि‍या हरब दुख मोर।
चारू दि‍सक अपन बन्न रस्‍ता देखि‍ सुलोचना बहिन चारूकात तकली तँ एकटा घर लगमे बूझि‍ पड़लनि‍। ओ घर अपन दीदी-पीसाक। पीसाक देहान्‍त भऽ गेल छेलनि मुदा दीदी ओछाइन पकड़ैपर छेलखि‍न। गामसँ सटले, करीब कोस भरि‍पर दीदीक घर। बेरू पहरमे सुलोचना बहि‍न दीदी ऐठामक रस्‍ता पकड़लनि‍। सुलोचना बहि‍नकेँ देखि‍ दीदीक परि‍वारे नै, टोल-पड़ोसक स्‍त्रीगण सभ सेहो एलखि‍न। चुपचाप कान लग कनीए जोरसँ सुलोचना दीदीकेँ कहलखि‍न-
दीदी, भूख लगल अछि‍।
सुलोचना बहि‍नक बात सुनि‍ दीदी बूझि‍ गेलखि‍न जे रस्‍तेक भूखल नै भुखले घरसँ आएल अछि‍। सुलोचनाक सुन्‍दर चेहरा टुटल फूल जकाँ मलि‍न भेल देखि दीदी पुतोहुकेँ कहलखि‍न-
कनि‍याँ, सुलोचना रस्‍ताक भूखल हएत, पहि‍ने कि‍छु पानि‍ पीबैले दि‍यौ।
ओहुना गाम-समाजक चलनि‍ अछि‍ जे कि‍यो दरबज्‍जापर आएल अभ्‍यागतकेँ पहि‍ने पानि‍ए आगू अबैत अछि‍। जहि‍ना अपन तहि‍ना मात्रि‍कक संग मौसी आ दीदीक घर लोक बुझि‍ते नै अछि‍ अछि‍ओ। जैठाम महि‍नो रहने कि‍यो चर्च नै करैत बहुत दि‍न भऽ गेल। तहूमे सुलोचना बहि‍नकेँ बूढ़ दीदी हाथ लगलनि‍, सुलोचनेटाकेँ कि‍ए दीदीओकेँ तँ टहलनीक जरूरति‍ भाइए गेल छन्‍हि‍। तैसंग परि‍वारोक भार कम भेने घरोक लोक खुशीए छथि‍। सुभ्‍यस्‍त परि‍वार छइहे खेबा-पीबाक समस्‍ये नै। दस गोटेक खोराकीसँ बेसी मूसे खाइए।
सुलोचनाक पि‍सि‍यौत भाए, हाइ स्‍कूलमे शि‍क्षक छथि। प्रति‍ष्‍ठि‍त शि‍क्षक। जि‍नगीमे डेरापर कहि‍यो कोनो वि‍द्यार्थीकेँ ट्यूशन फीस नै लनि। लगमे सुलोचना बहि‍नकेँ रहने नजरि‍ पड़लनि‍। नैहर परि‍वारक सभ बात सुलोचना मुहेँ सुनलनि‍। सासुरक बात कि‍छु बुझलो रहनि‍ आ सुलोचनो मुहेँ सुनलनि‍। मनमे छगुन्‍ता भेलनि‍ जे अछैते पति‍ए वेचारी वैधव्‍य जि‍नगी जीब रहली अछि‍। प्रश्नक जड़ि‍ पकड़ि‍ काज बढ़ौलनि‍। सुलोचनाक पति‍ दोसर बि‍आह कऽ नेने रहथि‍ जइमे चारि‍टा सन्‍तानो भऽ गेल रहनि‍। मुदा सभ कि‍छु होइतो समस्‍याक समाधान भऽ सकै छै। मास्‍सैब (पि‍सि‍यौत भाए) गामक दि‍याद-वादक भाँज सेहो लगौलनि‍। भाँज लगबैक कारण रहनि‍ जे जँ सासुरसँ समझौता नै हएत तखनि‍ तँ दोसर वि‍कल्‍पक जरूरति‍ अछि‍ए। ऐठाम (अपना ऐठाम) छह मास बरख दि‍न रहत सएह ने, जि‍नगी भरि‍ तँ नै रखल जा सकैए। रंग-बि‍रंगक गप, गप-सप्‍प क्रममे उठबे करत। दि‍यादवादक भाँज पौलनि‍ जे स्‍त्रीगण सभ तेहेन छथि‍ जे सुलोचना बहि‍नक गोड़ा नै बैसऽ देती। अपन जे छन्‍हि‍ तहीपर रहि‍ सकै छथि‍।
मास्‍सैबक परि‍याससँ सुलोचना बहि‍न सासुर गेली। दोहरा कऽ साठि‍ बर्खक उमेरक पछाति जहि‍ना जि‍नगी हारल-थाकल तहि‍ना अपन जि‍नगी पाँच कौर अन्न आ पाँच हाथ वस्‍त्रपर अँटका लेलनि‍। दू बरख सासुरमे रहली। जहि‍ना उमेर बढ़ने वि‍चारोमे बदलाउ अबै छै, से सुलोचनो बहि‍नकेँ एलनि‍। मुदा सासुरक जे सि‍नेह स्‍त्रीगणकेँ अपन बाल-बच्‍चाक संग, अपन लगौल वाड़ी-फुलवाड़ी, घर-दुआर बनौला पछाति‍ होइ छै, से नै भेटलनि‍। केतबो सतौत बेटा-बेटी किए ने रहनि‍ मुदा अपन जकाँ तँ नहियेँ माननि‍। तहूमे चेष्‍टगर सभ भऽ गेल, जे सत्-भाए बुझैत। तहि‍ना पति‍ओ संग रहनि, खैर जे रहनि‍, मुदा दस बीघाक कि‍सान परि‍वार भेटने सुलोचना बहि‍न खुश‍ी तँ भेबे केली। परि‍वारोक सभ बुझैत जे कि‍यो आन थोड़े एली।
सुलोचना बहि‍नक मन मानि‍ गेलनि‍ जे जि‍नगी असानीसँ कटि‍ सकैए। मरैकाल जे ति‍रोटो हएत तँ काटि‍ लेब। काटि‍ कि‍ लेब जे ओ तँ एहेन कष्‍टे होइ छै जे लोक मरि‍ए जाइए। मुदा से अखनि‍ बहुत दूर अछि‍। अखनि‍ तँ तेहेन थेहगरि‍ छी जे पचीस-तीस बरख जीबे करब। एक दि‍नक जि‍नगी तँ लोककेँ पहाड़ होइ छै।
सासुर एला पछाति‍ सुलोचना बहि‍नकेँ सभसँ खुशी ई भेलनि‍ जे अछैते पतिए जे जि‍नगी बनि‍ गेल छल ओइमे एकाएक बदलाउ एलनि‍। ओना वैधव्‍यक सीमा नै अछि‍। मुदा थोड़-दि‍न आकि‍ बेसी-दिन बारहसँ चौदह आना महि‍लाकेँ ऐ जि‍नगीसँ गुजरए पड़ै छन्‍हि‍। मुदा सबहक जि‍नगी की एक समान थोड़े होइ छन्‍हि‍। समाजो तँ समाजे छी, एक दि‍स वैधव्‍यक मुँह देखि‍ केतौ जाएबकेँ अशुभ बुझैए तँ केतौ शुभ बुझैए। वि‍धवाक जि‍नगीओ तँ तहि‍ना होइ छै।
पति‍ वि‍हि‍न पत्नीक (पुरुष बि‍नु नारीक) दू रूप समाजक बीच अछि‍। एक पति‍क मृत्‍यु भेला पछाति‍ दोसर जीवि‍तोमे छोड़ला पछाति‍। ओना उमेरो आ वि‍कासोक (परि‍वर्तनोक) हि‍साबसँ वैधव्‍य जीवन अनेको रंगक अछि‍, मुदा से नै, मोटा-मोटी जि‍क्र अछि‍।
आजुक नजरि‍ए बीस बरख वा ओइसँ ऊपरक हि‍साबमे बि‍आह हुअ लगल अछि‍। ओना ई वि‍षमता तँ अखनो अछि‍ए जे सभ परि‍वारक कन्‍यादानक एके उम्र नै अछि‍। पढ़ल-लि‍खल अगुआएल परि‍वारमे जैठाम डाक्‍टर, इंजीनि‍यर वा अन्‍य प्रकारक डि‍ग्री प्राप्‍त केला पछाति‍ बि‍आह होइए तँ ओतै नोकरीकेँ आधार बना नोकरीक पछाति‍ बि‍आह सेहो होइए। समायानुकूल सेहो अछि‍। बि‍आहक साल भरि‍क एहेन प्रक्रि‍या बनि‍ गेल अछि‍ जे बेर-बेर आवाजाही आ बेर-बेर काज (बि‍आहक प्रक्रि‍याक काज) होइते रहैए। मधुश्रावनी, कोजगरा इत्‍यादि‍ नजरि‍पर अछि‍ए। अध्‍ययनक बीच बेवधान उपस्‍थि‍ति‍ होइते अछि‍। जइसँ गनल कुटि‍या नापल झोड़ जकाँ कोर्सक (पढ़ाइक सि‍लेबस) तैयारीमे कमी अबि‍ते अछि‍। तेतबे नै, ई ओहन मोड़ (जि‍नगीक मोड़) छी जैठाम आबि‍ वैचारि‍क रूप वौद्धि‍क रूपमे बदलए लगैत। रंग-रंगक कि‍स्‍सा-पि‍हानीक संग जि‍नगीक ओहन मनोहर रूप दृष्‍टि‍गोचर होइत जइसँ कि‍छु-ने-कि‍छु धक्का लगि‍ते छै। एक दि‍स जि‍नगीक ओहन मोड़पर जैठाम पहि‍ल सीढ़ीक टपान अछि‍, जे अगि‍ला पिछड़ाह सीढ़ीमे ठाढ़े-ठाढ़ टपि‍ जाइत आकि‍ पि‍छड़ि‍-पि‍छड़ि‍ खसैत-पड़ैत टपत आकि‍ पि‍छड़ि‍ कऽ तेना खसत जे उठि‍ए ने हेतै।
दोसर तरहक परि‍वारमे (जइमे हायर एजुकेशन नै छै) बेटा-बेटीक बि‍आहकेँ पारि‍वारि‍क संस्‍कार मानि‍ नि‍माहब अनि‍वार्यक संग समैओपर आ समैसँ पहि‍नौं करए चाहैए। कारणो छै जे अबैत परम्‍परामे बि‍आह चाहे जइ उमेरमे होइ (बच्‍चासँ सि‍यान धरि‍) मुदा सन्‍तान समैएपर होइए। समैपर आकि‍ समैसँ पहि‍ने करब सकारात्‍मक वि‍चार भेल। एहेन परि‍वार आकि‍ ऐसँ पछुआएल परि‍वारमे बाल-बि‍आहसँ लऽ कऽ पनरह-सोलह बरख धरि‍क बेटीक बिआह अछि‍ए। बच्‍चामे बि‍आह नीक नहियेँ अछि‍। मुदा नीक कि‍ए ने अछि‍? ई बात सत् जे पानि‍मे कोनो चीजक (अन्न आकि‍ तरकारी) बीआ देब पानि‍मे फेकब भेल। मुदा की पानि‍मे उपजैबला (मखान, सिंगहार) केँ फेकब कहबै?
बेटा-बेटीक बि‍आह माता-पि‍ताक अनि‍वार्य काजक रूपमे समाजमे अखनो ठाढ़ अछि‍, जे उचि‍तो अछि‍। गरीबीक चलैत जइ परि‍वारक जि‍नगीक कोनो भरोस नै छै। राजरोग (भारी बि‍मारी) की गरीब घरमे नै होइ छै, जँ हेतै तँ इलाज करा पौत? तेतबे कि‍ए, कि‍सान प्रधान गाममे की गामेक कि‍सानक सभटा खेत गामक छन्‍हि‍ आकि‍ आनो गामक कि‍सानक (अधि‍क खेतबला कि‍सान)। खेतीक उचि‍त खर्च केलो पछाति‍ उपजौनि‍हारक (गौआँक) हि‍स्‍सा केते होइ छन्‍हि‍? जइमे चाहे माल-जाल पोसब हुअए आकि‍ अन्नक खेती हुअए, उपजाक अदहासँ बेसी लागत लगै छै तैठाम अदहा आकि‍ अदहोसँ कम उपजौनि‍हारकेँ भेटने कथी लाभ हेतनि? एहेन जइ समाजक स्‍थि‍ति‍ अछि‍ तइ समाजमे जि‍नगीक भरोस मात्र सीताराम करब नै तँ आरो की हएत? एहेन परि‍स्‍थति‍मे जँ माए-बाप अपन पान सालक बेटा-बेटीक भारकेँ उतारि‍ लइ छथि‍ तँ की अधला भेल?
ओना वि‍धवा वि‍धानकेँ सामाजि‍क वि‍धान नै मानल जा सकैए मुदा समाजक बीच बेवहारमे नै अछि‍, एकरो नकारल नै जा सकैए। कि‍छु खास परि‍वारक बीचक ओहन समस्‍या अछि‍ए जेकरा एक्कैसमी सदीमे अंगीकार करब नामर्दगीक अति‍रि‍क्‍त आरो कि‍छु ने छी, खैर जे छी से छी मुदा सामाजि‍क समस्‍या तँ छीहे। बारह-चौदह बर्खक कन्‍या जँ वैधव्‍य होइ छथि‍ तँ हुनक जि‍नगी केहेन होइ ई तँ प्रश्न अछि‍ए। ओ उमेर ओहन उमेर होइ छै जेकरा बसन्‍ती हवासँ भेँट भेल नै रहै छै। जे वि‍धवा भेला पछाति‍ अबै छै। ओ ओहन उमेर होइ छै, जेकरा दि‍शा देब असाध होइ छै। एक दि‍स परि‍वार-समाजसँ नि‍कालि‍ देल जाइ छै तँ दोसर दि‍स जि‍नगीक बसन्‍तक लहकी लहकै छै तेहना स्‍थि‍ति‍मे की हएत? जइ संगी-बहि‍नपा संग अखनि‍ धरि‍ हँसी-चौल होइ छल ऊहो या तँ वि‍धवाक सोझहामे बाजब बन्न कऽ दैत अछि‍ वा ओइठामसँ हटा देल जाइ छै। की पति‍ हरेने (वैवाहि‍क वंधनक पति‍) परि‍वारो हरा जाइ, समाजक संग जि‍नगीओ हरा जाइ। मुदा हराइ छै। ओइ दूधमुँह बच्‍चाक कोन दोख भेल जेकरा लोक मुँहपर कहतै जे फल्‍लींक मुँह देखि‍ जुआ खेलए गेलौं, घरो-घराड़ी हारि‍ गेलौं! जाधरि‍ समाज समायानुकूल सामाजि‍क वंधन बना नै चलत, ताधरि‍ समाजक कोनो अस्‍ति‍त्‍व नै रहतै। गाछसँ पाकल कटहर खसि‍ जहि‍ना धरतीपर छि‍ड़ि‍या जाइत, आँठी उड़ि‍ केतौ, कोआ उड़ि‍ केतौ, कमरी केतौ आ नेरहा केतौ चलि‍ जाइत, तहि‍ना समाजोक होइ छै। जखनि‍ एहेन स्‍थि‍ति‍ बनै छै तखने रंग-बि‍रंगक व्‍यभि‍चार समाजमे पनपै छै।
समाज तँ समाजे छी, एहनो वि‍धवा तँ छथि‍ए जे सासु-ससुरक पछाति‍ पति‍सँ बि‍छुड़ै छथि‍। दू-चारि‍ सन्‍तान भेला पछाति‍। की ओ अपनाकेँ आन परि‍वारक पुरुखसँ अपनाकेँ कम मानै छथि‍, कि‍ए मानती। अपन परि‍वारक खेती-वाड़ीसँ लऽ कऽ बाल-बच्‍चाकेँ पढ़ौनाइ-लि‍खौनाइ सभ करै छथि‍ तखनि‍ ओ पुरुखसँ कम केना भेली। जँ पुरुखसँ कम नै भेली तँ कि‍यो मुँहपर कहि‍ दनु जे फल्‍लींक मुँह देखि‍ यात्रा केलौं, यत्रे भंगठि‍ गेल। जि‍नगी जि‍नगी भरै छै।
तँए कि‍ सभ अधले तँ नहि‍येँ अछि‍, ओहनो वि‍धवा तँ छथि‍ए जे बेटाकेँ मनोनुकूल सेवा केलनि‍। नाति‍-नाति‍न, पोता-पोतीसँ घर-अँगना अवाद छन्‍हि‍। जँ कि‍यो घरसँ बहराएत आ दादीकेँ गोड़ लगि‍ असि‍रवाद नै लेत तँ की माए-बाप फज्‍झति‍ नै करतनि‍। जे घरक गोसाँइकेँ लोक पहि‍ने गोड़ लागि‍ नि‍कलैए।
जहि‍ना भि‍न्न-भि‍न्न रूपक बीच वि‍धवा जीब‍ रहली अछि तहि‍ना ओहनो तँ छथि‍ए जे पति‍केँ बौड़ गेने वा कोनो तेहेन रोगसँ ग्रसि‍त पति‍क बीच सेहो छथि‍। जि‍नकर पति‍ बौड़ गेल छन्‍हि‍ ओ वि‍धवा ताधरि‍ नै मानल जाइ छथि‍ जाधरि‍ नि‍श्चि‍त भाँज नै लागि‍ जाइत। जँ भाँज नै लगि‍ सकत तँ बारह बरख पछाति‍ मृत्‍यु मानल जाएत। मुदा प्रश्न अछि‍ पुरुख वि‍हि‍न नारीकेँ जीबैक उपए। एक मनुख होइक नाते समाज हुनका कोन नजरि‍ए देखि‍ रहला अछि‍। समाजो तँ समाजे छी, मुँह केम्‍हर छै‍ आ नांगरि‍ केम्‍हर‍ अछि‍ से भाँजेपर ने चढ़ैए। ताड़ी-दारू पीनि‍हार पीब कऽ मस्‍तीमे दोसराक माए-बहि‍नकेँ गारि‍ए-मारि‍टा नै, इज्‍जति‍-बाबरू सेहो लूटैए मुदा अपन माए-बहि‍नक बीच आदर्श बनि‍ परि‍वारमे रहैए। एहेन जे सोचक रूप बनि‍ गेल अछि‍ एकरा केना मेटौल जाएत, मूल बात भेल। मुदा एहेन समस्‍याक सोर देखि‍, बाजब वा मेटाएब धि‍या-पुताक खेल कहाँ छी। के रोगी, के भोगी के जोगी से चि‍न्‍हब कठि‍न अछि! कठि‍ने नै अछि‍ जएह रोगी सएह जोगी बनि‍ नि‍श्चि‍र बनि‍ भरमि‍ रहल अछि‍।
सुलोचना बहि‍न, अछैते पतिए (पुरुषे) वि‍धवा नै रहि‍तो वि‍धवाक जि‍नगी जीब रहली अछि‍। बारह-तेरह बर्खक अवस्‍थामे बिआह भेलनि‍ उन्नैस-बीस बर्खक अवस्‍थामे सासुरसँ भगा देल गेली। ओना समाजमे वि‍कल्‍प रहि‍तो सबहक लेल नै अछि‍। समाजक बहुलांशक बीच वि‍कल्‍प खुजल अछि‍ जे दोसर बि‍आह करैए। मुदा सुलोचना बहि‍न ओहन परि‍वारमे जनम नेने छथि‍ जइ परि‍वारमे पुरुख लेल तँ कोनो बान्‍ह नै छै मुदा नारीक (महि‍ला) लेल छै। सासुरसँ सन्‍तान नै हेबाक अबलट जोड़ि‍ भगा तँ देने छन्‍हि‍ मुदा जबाव (वैवाहक सम्‍बन्‍ध भंग करैक) तँ नै देने छन्‍हि‍। जबावो तँ ओतए ने देल जा सकैए जैठाम वि‍कल्‍प होइ। जैठाम वि‍कल्‍प नै छै तैठाम जबावो देनाइ असान नहि‍येँ अछि‍। लगभग बीस-बाइस बर्खसँ साठि‍-बासठि‍ बरख सुलोचना बहि‍न अछैते सासुरे नैहरमे रहली। मुदा नैहर-सासुरक बीच सम्‍बन्‍धोक तँ दोहरी रूप अछि‍। जैठाम सासुरमे दि‍अर-भैजाइ, सासु-ससुर वा आन-आन सम्‍बन्‍ध अछि‍ तैठाम नैहरमे भाए-बहि‍नक, माए-बापक सम्‍बन्‍ध अछि‍। जइक चलैत सुलोचना समाजक बहि‍ने बनल रहली।
आने मि‍थि‍लांगना जकाँ सुलोचनो बहि‍नक अपन मन मानि‍ गेल छेलनि‍ जे हमरा सन्‍तान नै हएत। ओना सन्‍तान हएब नै हएब जानब थोड़े कठि‍न अछि‍ए जे सुलोचना बहि‍न नै बूझि‍ पेली। तैसंग ईहो भेलनि‍ जे जखनि‍ स्‍वामी (पति‍) दोसर बि‍आह कऽ लेलनि‍ तँ सौतीन तरक बाससँ नीक नैहरेक बास। समाजमे ओहन दीक्षा बँटनि‍हारक कमी नहि‍येँ अछि‍ जे अबि‍सबासू जि‍नगीकेँ बि‍सबासू बना साठि‍ बर्खक उमेरमे पाँचम बि‍आहक दीक्षा दैत दैछना पाबि‍ एक रंगीन दुनि‍याँ ठाढ़ कऽ दैत अछि‍।
नैहरक बास तँ सुलोचना बहि‍न मनमे अरोपि‍ लेली मुदा जीबैक जोगार नै कऽ पौली। श्रमक सहारासँ जँ जि‍नगी ठाढ़ करि‍तथि‍ तँ दोसर जि‍नगी भेटि‍ जैतनि‍ से नै ताकि‍ पौली। नै तकैक कारण परि‍वारक बेवहार रहनि‍। परि‍वारक एहेन बेवहार जइमे घरक अति‍रि‍क्‍त उद्यम करैक अधि‍कार नै। ओ अधि‍कार सि‍रि‍फ पुरुखकेँ छन्‍हि‍। ओना परि‍वारोक दोख मानल जा सकैए। जे परि‍वार सज्ञानी रहल ओइ परि‍वारमे एहेन-एहेन समस्‍या लेल कोनो वि‍चार नै भेल, ओकरा तँ दोख कहले जाएत। अनेको मि‍थि‍लांगना मि‍थि‍लाक धरतीपर जनम नेने छथि‍ जे अवि‍वाहि‍त वा पति‍ विहि‍न रहि शि‍खर छूबि‍ बैसल छथि‍।
देखि‍ते-देखि‍ते सुलोचना बहि‍न साठि‍-पैंसठि‍ बरख पार कऽ गेली। नम्‍हर कद, गौर वर्ण, गोल मुँह सुलोचना बहि‍नक। मुदा नैहरमे रहि‍ परि‍वारेक नै, समाजक बहि‍न बनि‍ गेली। केकरो बेटा-बेटीक बि‍आह होइ, सुलोचना बहि‍न पाँच दि‍न पहि‍ने अदौरी खोंटबे करै छथि‍, भोज-भातक तरकारी बनेबे (कटबे) करै छथि‍। बर-बरी छनबे करै छथि‍। गामक देव स्‍थानमे मुड़नक गीत, बि‍आहक गीत इत्‍यादि‍-इत्‍यादि‍ गेबे करै छथि‍।
वि‍द्यालयसँ जुगेसर सेवा-नि‍वृति‍‍ भऽ गेला। ओना सरकारी वि‍द्यालय भेने जुगेसरक अंति‍म दस बरख नीक बनलनि‍। सरकारी वेतनक संग आरो-आरो सुवि‍धाक आशा तँ बनबे केलनि‍। ओना सेवा-नि‍वृति‍‍सँ पहि‍ने पुरना घराड़ी (पि‍ताक देल) छोड़ि‍ दोसर ठाम घराड़ी कीनि‍ पजेबाक नीक घर बना नेने छथि‍। पाँचटा सन्‍तान छन्‍हि‍, दू बेटा तीन बेटी। वि‍द्यालयमे नीक वेतन भेटने बेटीओक बि‍आह नीके घर केने छथि‍। मुदा शि‍क्षाक जे दुर्गुण छै ओइसँ परि‍वार प्रभावि‍त भाइए गेल छन्‍हि‍। दुर्गुण ई छैक जे बच्‍चेसँ लोक जि‍नगीले नै, नोकरीले पढ़ैए। जखने प्राइमरी शि‍क्षासँ आगू वि‍द्यार्थी बढ़ैत अछि‍ तखनेसँ ओकरा मनमे नीक-नोकरी नाचए लगै छै। नीक मेहनति‍ करब नीक रि‍जल्‍ट हएत। नीक रि‍जल्‍ट हएत नीक नोकरी भेटत। अभि‍भावकोक धारणा सएह बनि‍ गेल अछि‍। उर्वर भूमि‍ मि‍थि‍‍लाक अछि‍ए, जइसँ वौधि‍क रूपमे सेहो उर्वर अछि‍ए। नीक शि‍क्षा लेल नीक जगह चाही से तँ अछि‍ए ने। तखनि‍? तखनि‍ यएह ने राज्‍यसँ आन-राज्य आ नगरसँ महानगर होइत आन-आन देशक रस्‍ता धड़ू।
एहने परि‍वार जुगेसरोक बनि‍ गेलनि‍। हाइ स्‍कूल पार केला पछाति‍ दुनू बेटा गाम छोड़ि‍ परदेशक बाट पकड़ि‍ लेलकनि‍। परदेशोक आब पहुलका रूप नहि‍येँ रहल जे देहा-देही कि‍यो नोकरी करै छला, आ परि‍वार गाममे रखै छला। जइसँ सामाजि‍क सम्‍बन्‍धमे कोनो बेवधान नै छल। मुदा आजुक परि‍वेशमे घरसँ नि‍कलि‍ते, अपन पत्नी-बच्‍चा अगुआ चलि‍ जाइ छथि‍। भाड़ा-भुड़ीक घर (एक तँ ओहुना कम कमेनि‍हार लेल जहि‍ना भोजनक समस्‍या छै तहि‍ना रहैओक) एकटा कोठरीक जि‍नगी केहेन हएत? भानससँ लऽ कऽ सूतब धरि‍। दुनू बेटाकेँ परदेश गेने, जुगेसरो आने-आन जकाँ बुढ़ाड़ीमे दुनू बेकती गाम धेने छथि‍। जइ अवस्‍थामे दोसराक सेवाक जरूरति‍ होइ छै, तइमे सेवा केनि‍हारे नै। अनेको प्रश्न एक संग ठाढ़ होइए।
मुनेसर सेहो सेवा नि‍वृति‍ भऽ गेला। पलामूसँ राँची चल एला। मुदा जहि‍ना नोकरीक अदहा दरमाहा गमौलनि‍ तहि‍ना ट्यूशनक अगहन सेहो। ओना ट्यूशनक अभाव राँचीओमे नहियेँ, तहूमे मुनेसर एक तँ सांइसक शि‍क्षक छथि‍ दोसर पढ़बैमे इमानदारीए नै वि‍षय बुझबैक अद्भुत गुण सेहो छन्‍हिहेँ। मुदा सभ कि‍छु रहि‍तो शरीर तेहेन रोगा गेलनि‍ जे जलखै-कलौ दबाइए होइ छन्‍हि‍। अपन कीनल राँचीक जमीन, तैपर अपन कमाइक बनौल नीक घर छन्‍हि‍हेँ, तँए रहैक सुवि‍धा छन्‍हि‍हेँ। मुदा समए जहि‍ना नव-नव जि‍नगी ठाढ़ करैए तहि‍ना आने-आन जकाँ मुनेसरो तँ छथि‍ए। संतानक नाओंपर मात्र दूटा बेटा छन्‍हि‍। दुनू बेटा नीक शि‍क्षा पाबि‍, एकटा मध्‍य प्रदेश-वि‍लासपुर आ दोसर हरि‍याणामे नोकरी करै छन्‍हि‍। नोकरीए की करै छन्‍हि‍ जे अपन-अपन पत्नीक आ धि‍यो-पुता लऽ लऽ छन्‍हि‍। ऐठाम प्रश्न उठैत जे जइ परि‍वारक एक समांग हरि‍याणा समाजक बीच रहि‍, ओतुक्का वातावरणमे पालल-पोसल जाएत, दोसर मध्‍य प्रदेशक वातावरणमे पालल-पोसल जाएत, तेसर राँची आ चारि‍म गाममे। तैठाम केना समावेश हएत? तहूसँ वि‍कृत तँ ई होइत जे एके परि‍वारक दू भैयारीमे एकक कमाइ बेसी आ दोसरकेँ कम भेने परि‍वारक स्‍तरो (खान-पान, पढ़ाइ-लि‍खाइ) मे दूरी बनि‍ते अछि‍। तेतबे कि‍ए? गंभीर रोगसँ ग्रसि‍त एक भाँइ खर्चक (इलाजक खर्च) दुआरे मरि‍ जाइ छथि‍, जखनि‍ कि‍ दोसर भाँइ बैंकमे रूपैआ रखने रहै छथि‍। प्रश्न उठैत अछि‍, की यएह मि‍थि‍लांचलक भैयारी आकि‍ परि‍वार आकि‍ समाजक धरोहर छी जेकरा लऽ लऽ नाचब? मि‍थि‍लांचलकेँ ऊपरे-झापड़े देखब भेल। मि‍थि‍लांचलक योगदान दुनि‍याँक दर्शनमे ओ अछि‍ जे श्रेष्‍ठ मनुखक संग नीक समाजक निर्माणक बाट देखबैए।
दुनू बेटा तँ मुनेसरक हटले-हटल छन्‍हि‍, जे पत्नीओ डेढ़ सए कि‍लोमि‍टर हटि‍ नोकरी करै छथि‍न। ओना मुनेसरोकेँ कोनो तरहक अभाव नहियेँ छन्‍हि‍, कि‍एक तँ पेन्‍शन भेटि‍ते छन्‍हि‍, बैंकक सूदि‍ अबि‍ते छन्‍हि‍, तैसंग घरो-भाड़ा अबि‍ते छन्‍हि‍। मुदा सभ कि‍छु (पाइ-कौड़ी) रहि‍तो बूझि‍ पड़ै छन्‍हि‍ जे कि‍यो ने अछि‍। रोगी लेल परि‍चायि‍काक की जरूरति‍ होइ छै ओ आन बूझि‍ केना सकैए। जे अनुभव करैए ओ जि‍नगीक चुकल बेवस अछि‍। जेकरा एकटा पएर नै छै, पेटमे जखनि‍ भूख-पि‍यास जोर मारै छै तखनिओकरा छोड़ि‍ दोसर बूझि‍ के सकैए। ई ओहने भेल जे कि‍यो केकरो एक मुट्ठी खुआ सेवा करैत आ कि‍यो ओकरा जि‍नगी दऽ एक मुट्ठीक जरूरते नै रहए दैत अछि‍।
अस्‍सी बरख पार केला पछाति पुरना घराड़ीपर सात हाथ नमती घर बना सुलोचना बहि‍न रहै छथि‍। धानक नारसँ छाड़ल। बाँसक कोरो-बत्तीसँ ठाठल, बीचला तीनू खुटा लकड़ीक आ कतका छबो बाँसक ठाढ़ घर, जइमे कड़ची-खरहीक टाटक बीच तख्‍ताक केवाड़ी शीशोक चौकठि‍ लगल, घरमे बैसि‍ सुलोचना बहि‍न हि‍या कऽ तकै छथि‍ तँ सभसँ नीक अपनाकेँ बूझि‍ मने-मन गुनगुनाइ छथि-
साग खोंटि‍ खेबै, मि‍थि‍लेमे रहबै।

हि‍या कऽ अपन परि‍वार देखै छथि‍। पि‍ताक चारू भैयारीक भाए अपन-अपन पक्का मकान बना अँगना फुटा अपन-अपन अबै-जाइक रस्‍ता बना लेलनि‍, मुदा हम तँ ओहए पुरना रस्‍ता होइत अखनो जाइ-अबै छी जे पि‍ताक देल चारू भैयारीक सझि‍या रस्‍ता छेलनि‍। ने तहीए बँटबारा भेल आ ने अखने कि‍यो बँटलनि‍। सबहक सझि‍या रहि‍तो, (सभ भाँइ बुझै छथि‍) सोलहन्नी सुख तँ हमरे होइए। तेतबे कि‍ए, साले-साल घरक मरम्‍मति‍ करै छी, पुरनाकेँ नव करै छी। खुटा-खुटी सोझ करै छी। नवका नारसँ छाड़ै छी, टाट-फड़कक पुरना लेबा झाड़ि‍ नवका लेबा लेबै छी, घर-ओसराक मुँह-कान बनबै छी। सीढ़ीकेँ सेरि‍यबै छी। सभ दि‍न नवके घरमे रहै छी। नव घर खसै पुरान घर खसे से हम कि‍ए बुझबै। साल भरि‍क पछाति‍ ने घर पुरनाइ छै, जखनि‍ बर्खामे छाड़-बन्‍हन सड़ै छै तखनि‍ ने पुरान होइए। जहि‍ना तीनू भैयारी अपन-अपन अँगनामे कल गरौने अछि‍ तहि‍ना ने मुनेसर अपनो गराइए देने अछि‍। बाप-दादाक खुनौल इनार छेलनि‍, सभ कि‍यो पानि‍ पीनाइ छोड़ि‍ देलनि‍ तँ हमहीं कि‍ए सड़ल-पाकल पानि‍ पीब। तँए कि‍ हमरा कल जकाँ अनको छन्‍हि‍। देखै छी जे भरि‍ ठेहुन की-कहाँ कलपर लगौने रहैए, केना ओहेन कलक पानि‍ पीबैमे पड़पन होइ छै से नै जाइन। दतमनि‍ करि‍ कऽ कले लग फेक देलौं। वर्तन माँजि‍ फेकि‍ देलौं, एकरा की कहबै। अपचि‍ष्‍ट नै कहबै तँ की कहबै। जँ कमे जगह अछि‍ तँ ओहीमे खाधि‍ खुनि‍ देबै आ तइमे फेकब। जखनि‍ बेसी भऽ जेतै तखनि‍ रौदमे सुखा आगि‍ लगा जरा देबै। से करबे ने करब आ भरि‍ ठेहुना गन्‍दगी लगौने रहब। मन घुमलनि‍, तीनू भाँइ पक्का घर-अँगनाक तीनू दि‍स बनौने अछि‍ तइसँ की हमरा गरफेदा अछि‍, ने अँगनामे साले-साले टाट लगबए पड़ैए आ ने साँप-छुछुनरि‍क बील‍-बाल बनैए। तीनू भाँइक घरेक देवाल ने अँगनाक टाट बनल अछि‍। रातिओ-बि‍राति‍ तँ यएह बूझि‍ पड़ैए जे चारू दि‍ससँ जेरक-जेर ओगरबाह बैसल अछि‍ बीचमे चेनसँ भानसो करै छी, खेबो करै छी आ सुतबो करै छी। चारूकात लत्ती बीचमे भगवती जकाँ रहै छी। राति‍-बि‍राति‍ जे चोरो-चहार औत तँ कोठाबला ऐठाम जाएत आकि‍ खढ़क घरमे औत। जेना कि‍यो सुलोचना बहि‍नकेँ ठोंठ पकड़ि‍ आगू मुहेँ ठेलि‍ देलकनि‍ तहि‍ना घुसकि‍ पिताक भैयारीसँ अपन चारू भाए-बहि‍नपर एली। अपन बात केकरो कि‍ए कहबै, जेकरा कहबै तेकरे केलहा छी। हम जमाहि‍र लाल थोड़े छी जे मेननक वि‍चार एकेबेरमे बूझि‍ जेबै। अपनासँ घुसुकि‍ मन आगू बढ़ि माझि‍ल भाएपर गेलनि‍। कहू जे सात बेटा रामकेँ एको ने कामकेँ। जेकरा दू-दूटा धाकड़ि‍ सन-सन पुतोहु रहतै से अपनेसँ वर्तन माँजत, भानस करत, केहेन हेतै! आब कि‍ जुगेसरोक ओ उमेर रहलै जे साइकि‍लसँ झंझारपुर हाटसँ समान कीनि‍ कऽ लौत। जखनि‍ नोकरी (जुगेसरक नोकरीक पहि‍लुक समए) छेलै, तखनि‍ परि‍वार चलि‍ते छेलै, धि‍यो-पुतोकेँ पढ़ेबे-लि‍खेबे केलक, बेटीक बि‍आह अपनासँ बीसेमे केलक, घरो तेहेन बान्‍हि‍ लेलक जे तीस-चालीस बरख ताकौ पड़तै। तैपर पीलसीनो तेते भेटै छै जे केतेकेँ दरमहो ने ओते छै। तखनि‍ जे बौऐनी लगल छै से कोइ रोकि‍ देतै। जइ बेटाले बाप ओते करि‍ कऽ रखि‍ देने छै जे तेकरे बेटाकेँ नचने तँ पेट नै भरतै आ जि‍नगी नै चलतै। हमहीं की करबै? ओकरोसँ बेसी उमेर अछि‍। अपने मुइने जग मुअए। दुनि‍याँमे तँ सदति‍काल केतौ भुमकम होइ छै, केतौ झाँट-पानि‍ होइ छै, केतौ समुद्रमे जुआरि‍ अबै छै, केतौ ठनका खसै छै, केतौ हवा-जहाज खसै छै, केतौ रेलगाड़ी उनटै छै तँ केतौ धारक नाहे उनटि‍ जाइ छै, केकरो रोकने रोकेतै। तखनि‍ तँ भेल जे लोक अपन रच्‍छा करैत दोसरोक करए। भाएक जि‍नगीमे डुमल सुलोचनाकेँ जेना भक्क खुगलनि। अपनो जुगेसरक चालि‍-परकि‍त नीक नै छै। जि‍नगी भरि‍ रग्‍गरघस करैत रहि‍ गेल। कहू जे अनकर झगड़ा (दि‍यादक जमीनक) कि‍ए मोल लेलक जे हमरो आ मुनेसरोसँ मुँह फुल्‍लाफुली छै। सासुरमे बेटा नै रहने जमीनक लोभ कि‍ए केलक। एतबो कि‍ए ने बुझलक जे सासुर उपटि‍ जाएत। तहूमे मुंगेर-घाट लगक सासुर, साले-साल बाबा धाम लोक जाइते अछि‍। एकोरत्ती मनमे वि‍चार रहलै जे जँ कहीं गौआँ-घरुआ हराइत-भोंथियाइत ओइ गाम पहुँचत, राति‍-बीच रहए चाहत तँ ओ गौआँ गारि‍ पढ़ि‍ भगा देतै आकि‍ रहए देत। भाइए छी, ओकर काज फुट छै, हमर काज फुट अछि‍, तैठाम कहबे ने करबै आकि‍ कएलो हएत। ने एको कौड़ी हाथ लगलै आ ने अपेछा रहलै। हमहीं जेठ बहि‍न छिऐ, हमरा लि‍ए जेहने जुगेसर अछि‍ तेहने ने मुनेसरो अछि‍। मुदा ओ कहि‍यो बुझलक जे बहि‍न केहेन गरूमे जीबैए। बड़ लीलसा रहए जे समाज ने समाजसँ ठेलि‍ देलक मुदा भगवान थोड़े बेपाट भऽ गेला। भाइयक बेटीक कन्‍यादान नै कऽ सकै छेलौं। मुनेसरक आशा अछि‍ओ तँ भगवान ओकरा बेटीए ने देलखि‍न, जेकरा देलखि‍न से तेहेन अछि‍ जे बेटा-बेटीक बि‍आह केलक आ एक कौर खाइओले ने देलक। कहू जे एहेन कि‍ ओकरे बेटा छै जे रामकि‍सुनकेँ कि‍ए गारि‍ लि‍खि‍ चि‍ट्ठी पठौलकै। खेत-पथारक हक-हि‍स्‍साक बात छेलै तँ ओ समाजे आकि‍ कोटे-कचहरीसँ ने फड़ि‍छाइत। तइले एते भारी हंगामा कि‍ए भेल। अनेरे समाजक लोककेँ कि‍ए जहलो कटौलकै आ घरक चौकैठो-केबाड़ उखड़बौलकै। मुदा हमहीं की कहबै, भगवान अपन सासुर हैर लेलनि‍ तँए ने, नै तँ हमरा कोन मतलब ऐ गाम-समाजसँ रहि‍तए। अपन भरल-पूरल परि‍वार रहैत, बाल-बच्‍चा रहैत, मनुखक बोनमे हराएल रहि‍तौं। मुदा लगले सुलोचना बहि‍नक मन घुमलनि‍। आँगुरपर हि‍साब जोड़ए लगली जे माएसँ कम दि‍न जीलौं, आकि बेसी दि‍न। बाबू तँ कहबे करथि‍ जे नब्‍बे बरख टपि‍ गेलौं मुदा माए तँ से नै बाजल। ओ तँ एतबे कहलक जे रौदी साल दुरागमन भेल रहए। तइ हि‍साबसँ तँ भरि‍सक ऊहो नब्‍बेक धत्-पत् जीबे कएल। ओहुना बाबू कहला पछाति‍ दू-तीन बरख पाछू मुइला। तहू हि‍साबसँ नब्‍बे भाइए जाइए। मुदा अपन केते भेल, से केना बुझबै। कोनो कि‍ लि‍खल-पढ़ल छी जे कुण्‍डली देखब। तहूमे घरक चुबाटमे सभटा पछि‍ला कागज-पतर सड़ि‍ गेल। तखनि? मन दौगबए लगली। मन पड़लनि‍ जुगेसरक जनम। बि‍आहसँ तीन-चारि‍ बरख पहुलका छी। मुदा दुनू तँ अन्‍हे-गाहिंस अछि‍। एकटा उपए अछि‍, नअ-दस बरख नोकरी छुटना भेल हेतै, साठि‍ बर्खमे नोकरी छुटै छै, तइ हि‍साबसँ सत्तरि‍क धत्-पत् भेल हएत। ओकरा जन्‍मक समए ढेरबा रही। तखनि‍ तँ अस्‍सीसँ ऊपर भेल। अस्‍सी मनमे अबि‍ते हँसी फुटलनि‍। यएह छी जि‍नगी।

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