Sunday, January 13, 2013

'विदेह' १२१ म अंक ०१ जनवरी २०१३ (वर्ष ६ मास ६१ अंक १२१)- PART III



http://www.videha.co.in/Gajendra.jpgगजेन्द्र ठाकुर

जगदीश प्रसाद मण्डल :एकटा बायोग्राफी
आगाँ
रामपट्टीक जहल बनि‍ गेल छल। मुदा उद्घाटन नै भेने ओहि‍ना पड़ल छल। नरकोमे कि‍ कम ठेलम-ठेल होइ छै। मधुबनी चक्की वार्डमे जे दसो-बीस दि‍न रहल हेताह, हुनका मोने हेतनि‍। तइठाम साल के कहए जे कतेको सालसँ कतेको गोटे छलाह। आजादीसँ पहि‍नौं आ पछोँ मधुबनी जेलक चलती रहबे कएल। तइमे मुदा एकटा जरूर भेल रहै जे जेलक भीतरो वि‍भाजि‍त रहए, वार्ड न. ०२ राजनीति‍ पार्टीबला सभकेँ रहै, बाँकी सहरगंजा।
सहरगंजा ऐ लेल जे ने अपराध एक रंगक छै आ ने अपराधी। मुदा जेल तँ जेल छी मठाधीशसँ लऽ कऽ फुलतोड़ा धरि‍ एकेठाम रहता। मुदा जहलोक कारोबारमे चोरी-चपाटी रहबे करै, कि‍यो जलखैक बदाम चोरा लै तँ कि‍यो गुड़। कि‍यो करू तेल हेर फेर कऽ दै, कि‍यो कि‍छु। आजादीक समए मधुबनी जि‍ला (तइ दि‍नक सवडि‍वीजन) जखन आजादीक सीमापर आबि‍ गेल तखन कने भाषा-प्रेमी-अंग्रेजक देखि‍ये ली।
एकटा एस.डी.ओ. भेला ग्रि‍यर्सन। जे गाम-गाम घूमि‍ भाषाक मर्मकेँ बुझैक कोशि‍श केलनि‍। कोशि‍शे नै केलनि‍ भोलूमक-भोलूम पोथि‍यो लि‍खने छथि‍। पैघ-पैघ पुस्‍तकालयक सि‍ंगारक वस्‍तु बनि‍ जेवर-जेवरात जकाँ आलमारी धेने अछि‍। भाषा-साहि‍त्‍यक लेल सरकारि‍यो-गैर-सरकारि‍यो संस्‍था सभ खूब काज केलक‍, मुदा ग्रि‍यर्सनक कएल मैथि‍ली सेवा आलमारीक दराजमे फँसि‍ गेल अछि‍! जहि‍ना साहि‍त्‍य सृजन अनुभावात्‍मक आ बौधात्‍मक होइत अछि‍ तहि‍ना भाषाक सेहो अछि‍। मैथि‍ली शब्‍दकेँ ि‍सर्फ संस्‍कृतसँ आएल शब्‍द बुझै छी तँ मैथि‍ली संग अन्‍याय होइ छै। न्‍याय तखन हेतै जखन मैथि‍ली शब्‍दकेँ वैदि‍क जीवन-पद्धति‍क शब्‍द रूपमे देखल जेतइ। एक-एक शब्‍द एक-एक जीवनक काजक नक्‍शा तैयार करैक शक्‍ति‍ रखैए। संस्‍कृतक प्रभाव ऐ लेल मानल जाएत जे वैदि‍क भाषा संस्‍कृत रहल। ओना भाषाक दौड़मे आगू नै बढ़ब मुदा एकटा बात आवश्‍यक बूझि‍ पड़ैए तँए वैदि‍क संस्‍कृतक शैली अनुभवात्‍मक अछि‍ जखन कि‍ लौकि‍क संस्‍कृतक भावात्‍मक बेसी। भावात्‍मक दि‍शा कल्‍पनाशील बनैत गेल। जेना-जेना भावात्‍मक दि‍शा मजबूत होइत गेल तेना-तेना साहि‍त्‍य जि‍नगीसँ (जीवन पद्धति‍) दूर हटैत गेल।
रामपट्टी जेलक उद्घाटन नै होइक कारण रहै जे प्रशासनसँ ठीकेदार धरि‍ कि‍यो फाइनल करैले तैयारे नै। कि‍छु काज पछुआएल तँ कि‍छु बि‍ल-भुगतान पछुआएल। मुदा नजरि‍ सबहक योजना खाइक पाछू।
राज्‍य वामपंथी (भाकपा-माकपा) पार्टी अपन ज्‍वलंत समस्‍या सभ लऽ कऽ जेलभरो आन्‍दोलन केलक। ओना सौंसे राज्‍यक ज्‍वलंत समस्‍या सभ मुद्दा रहए मुदा मि‍थि‍लांचलक लेल दूटा प्रमुख मुद्दा छल। पहि‍ल कोसी नहरि‍क संग नूनथर, शीशापानी आ बराहक्षेत्रमे डैम बना पनि‍बि‍जली उत्‍पादन कएल जाए जइसँ कृषिक संग उद्योगो धंधा बढ़तै। कि‍छु गोटेक एहेन धारणा अखनो छन्‍हि‍ जे कारखानाक जरूरति‍ खाने क्षेत्रटा मे होइ छै। मुदा से नै, ईहो होइ छै जे जते-रंगक कारखाना अछि‍ तइमे ५५ प्रति‍शत जँ खान क्षेत्रक मालसँ चलैत तँ ४५ प्रति‍शत कृषि उत्‍पादि‍त वस्‍तुसँ सेहो चलैत। दोसर मुद्दा छल मैथि‍ली भाषाकेँ सरकारी मान्‍यता भेटौ अर्थात् अष्‍टम अनुसूचीमे शामि‍ल हाेउ। जइसँ मि‍थि‍लाक वि‍कासमे एक कड़ी जुड़त।
मधुबनी जि‍ला बढ़ि‍-चढ़ि‍ कऽ ओइ आन्‍दोलनमे हि‍स्‍सेदारी दर्ज करौलक। दर्जनो वकील सेहो रहथि‍। हजारसँ ऊपर कार्यकर्त्ता जेलमे रहथि‍। जइ दि‍न मधेपुर-लखनौर ब्‍लौकक समए (प्रदर्शनक संग जेल) रहै तइ दि‍न वि‍स्‍फीक सेहो रहए। जगदीश प्रसाद मण्डल सभ जि‍ला-कार्यालय (डी.एम. ऑफि‍स)क गेटक बाहर रहथि। पूर्वेजी (स्‍व. राजकुमार पूर्वे) कार्यालयक पैछला गेट देने आबि‍, पाछूमे ठाढ़ भेल एस.पी.केँ कालर पकड़ि‍ लेलखि‍न। भीतर-बाहर हूड़-बड़ेरा भऽ गेल। लाठी चार्च भऽ गेलै। मुदा बहुत नै भेलइ।
जगदीश प्रसाद मण्डल रामपट्टी जेल पहुँचला। बेरमाक अट्ठारह गोटे रहथि। नागेन्‍द्रजी (डॉ. नागेन्‍द्र  कुमार झा, पैटघाट) आ जगदीश प्रसाद मण्डल सभ लेडी वार्डक ओसारा पकड़ने रहथि। जि‍लाक सभ वि‍धायको आ वि‍धान पार्षदो रहथि‍। वि‍धायक रहथि‍ पूर्वेजी (स्‍व. राज कुमार पुर्वे) तेजनारायण जी (श्री तेज नारायण झा) लाल बि‍हारीजी (श्री लाल बि‍हारी यादव) रमणजी (राम लखन रमणभाकपा.क वि‍धायक) पूर्व वि‍धायक बैजनाथजी (श्री वैद्यनाथ यादव) चौधरीजी (श्री कृष्‍ण चन्‍द्र चौधरी)।
जेलक भीतर दू बेर भाषण-भूषण चलै। मुख्‍य वक्‍ता रहथि‍ चौधरीजी। माँजल वि‍द्वान। भाषापर एते पकड़ रहनि‍ जे एकाे शब्‍द कम-बेसी नै होन्‍हि‍। कोनो वि‍षयकेँ यथास्‍थि‍त व्‍याख्‍या करैक अद्भुत क्षमता रहनि‍। ओइ समए पार्टीक जनशक्‍ति‍ दैनि‍क पत्रि‍का नि‍कलैत छल। सम्‍पादक रहथि‍ चौधरीजी। जगदीश प्रसाद मण्डल जनशक्‍ति‍ पत्रि‍काक संवाददाता रहथि।
स्‍व. कृष्‍णचन्‍द्र चौधरी नीक वक्‍ता छलाह। लि‍खबो नीक करैत छलाह। मैथि‍लीमे तँ भरि‍सक नै मुदा हि‍न्‍दी-अंग्रेजीमे कतेको पोथी लि‍खने छथि‍। जेहने वि‍द्वान तेहने सुभ्‍यस्‍त परि‍वारक सेहो छलाह। पानो खूब खाइ छलाह आ सि‍गरेटो पीबैत छलाह। जेल तँ छुच्‍छे देहे आबि‍ गेलाह मुदा भि‍नसरू पहर चाह पीला पछाति‍ पान खाइले मन छटपटाए लगलनि‍। जगदीश प्रसाद मण्डल सभ पानक ओरि‍यान कऽ कऽ रखने रहथि। जहलो कोनो जहल जकाँ नहि‍येँ रहै। ने सरकारी पर्याप्‍त स्‍टाफ रहै आ ने सरकारी बेवस्‍था। अपने सभ सभ कि‍छु। गेटो खुजले रहै। भीतर बाहर प्रदर्शनकारी लोक सौंसे टहलैत। बेरू पहर ढोलकपर अल्‍हा होइ। चौधरीजीकेँ चाहोक हि‍साब नहि‍येँ रहनि‍। आबथि‍ तँ जगदीश प्रसाद मण्डल चाह पिआ पान खुअबथिन‍। तेकर बाद गप-सप शुरू होइ।
ओना बि‍हारक कतेको जि‍लाक प्रदर्शनकारी दुइये दि‍नक पछाति‍सँ नि‍कलए लगलाह। मुदा मधुबनीक मारि‍-पीट केस भरि‍या देलकै। दू दि‍नक पछाति‍ भोगेन्‍द्रजी सेहो दरभंगा जेलसँ नि‍कलि‍ मधुबनी जेल चलि‍ एलाह। तेरह दि‍नक पछाति‍ नि‍कलैक आदेश आएल रहै। मुदा सभक नै। ३५ गोटेकेँ मुजफ्फरपुर जेल पठबैक आदेश सेहो आएल रहै। तेरहम दि‍न नि‍कलै बेर कि‍यो नि‍कलैले तैयारे नै भेलाह। कि‍छु वि‍दाइ भेने बि‍ना केना नि‍कलताह। गप उठल धोती-कुर्ता, गंजी-गमछा आ चद्दरि‍क मुदा से नै भेलै। होइत-हबाइत एकटा लूंगी आ एकटा गमछा सभकेँ भेटलनि‍। पार्टी आन्‍दोलनक अंति‍म जेल यात्रा छलै। तेकर बाद जे जगदीश प्रसाद मण्डल गेबो केला तँ एक-दि‍ना-दु-दि‍नामे। जे कएक बेर थानेसँ चलि आबथि।
ओना जगदीश प्रसाद मण्डल सभ दोहरी जेलक यात्री रहथि। अपनो गाममे तते मुकदमा भऽ गेल रहनि जे एक ने एकटा वारंट सभ दि‍न रहबे करनि। दू हजार ईस्‍वी अबैत-अबैत सभ केश समाप्‍त भऽ गेलनि, खाली दूटा शेष बँचल रहलनि। एकटा ३०७ (हत्‍याक प्रयास) जे हाई कोर्टमे छलनि, दोसर ४३६ (अगि‍लग्‍गी) जे डि‍स्‍टि‍क जजक कोर्टमे छलनि। जहि‍ना बाढ़ि‍क पानि‍ पोखरि‍मे प्रवेश करैकाल सौंसे पोखरि‍क पानि‍ गति‍शील भऽ जाइए आ घुमती बेर (बाढ़ि‍ सटकैक समए) धीरे-धीरे गति‍हीन हुअए लगैए तहि‍ना मुकदमाक दौड़मे भऽ गेलनि। मुदा अस्‍थि‍र नै भेल छलै। कारण दुनू केश शेसन छलै। असथि‍र ई भेलै जे जि‍लाक केश (अगि‍लग्‍गीक) क फाइले तरमे पड़ि‍ गेल आ हाईकोर्टमे दौड़-बरहा कम होइ छलै।
अखन धरि‍ माने २०००ई.सँ पूर्व जगदीश प्रसाद मण्डल देशक आधासँ बेसी भ्रमण कऽ नेने छलथि। एक दि‍स देशक आर्थिक राजधानी मुम्‍वई देख नेने छलथि तँ दोसर दि‍स नागालैंड-अरूणाचल सेहो देखने छलथि। रवि‍न्‍द्र बाबूक (महर्षि रवि‍न्‍द्र नाथ टैगौर) शान्‍ति‍ नि‍केतनक संग सुन्‍दर वन, गंगासागर, कबीर दासक गाड़ल खन्‍ती  समुद्रक कात, तँ सूर्य मंदि‍र सेहो देखने छला। रंग-रंगक द्वैत (द्वन्‍द्व) एक दि‍स जँ हजारी बाबूक (आचार्य हजारी प्रसाद द्वि‍वेदी) जे शान्‍ति‍ नि‍केतनमे १९३० ई.सँ १९५० ई. धरि‍ हि‍न्‍दीक अध्‍यापक रहलाह। सि‍रीसक फूलक महमहीसँ मुग्ध होइत रहथि तँ दोसर दि‍स मि‍थि‍लांचलमे ई सि‍रीस बर्जित अछि‍! ने घरक काजमे आऔत आ ने चौकी, कुरसीक काजमे! ततबे नै, फलक गति‍ सेहो सएह। गाछ तँ बड़का-बड़का होइ छै जहि‍ना कहबी छै मनुख तँ बलवीर मुदा मोछ ने तँ कि‍छु ने। तहि‍ना। मन मानि‍ गेलनि जे पुरबा-पछि‍याक लहड़ि‍ छी। फूलक लेल केहेन गाछ लगाओल जाए, फूलक संग फलक लेल केहेन गाछ लगाओल जाए आ बि‍नु फूल-फलक गाछ कतए लगाओल जाए, ई तँ प्रश्न भेलनि। मुदा पछि‍याकेँ पूर्वाक लपेट तर कऽ दइ छै। जँ से नै करै छै तँ मि‍थि‍लांचलक भूमि‍मे कतए कहाँसँ आबि‍ बोन-झाड़ लागि‍ गेल छै, जइठाम एक-सँ-एक फल, एक-सँ-एक फूल आ एक-सँ-एक सुकाठ लकड़ीक बास भूमि‍ छी। मि‍थि‍लांचलक वि‍कास तखन हएत जखन मि‍थि‍लांचलकेँ गहराइसँ अध्‍ययन कऽ अनुकूल परि‍स्‍थि‍ति‍ बना उपयोग हएत।
यात्राक दौड़मे राजस्‍थान सन दर्शनीय जगह सेहो छुटले छलनि। यात्रा तँ गरपर छलनि मुदा समैओ आ पाइओक तंगी छलनि। ममि‍यौत भाति‍ज राजस्‍थानक पाली जि‍ला अन्‍तर्गत डी.एल.एफ. सि‍मेंट कारखानामे सुपर-वाइजर छलखिन‍ जे बेर-बेर अबैक बात करैत रहथिन। ओना ओ (तेज नारायण मण्‍डल) पढ़ल-लि‍खल नै। कोसि‍कन्‍हा भेने गामक स्‍कूलो नष्‍ट भऽ गेलनि आ गामो। जमीन-जत्‍था गुजर करैबला जरूर छै मुदा कोसी-कमलाक बीच पड़ि‍ गेल छै। भागि‍ कऽ ओ राजस्‍थान चलि‍ गेला। डी.एल.एफ. सिमेंट कारखानामे उट्ठा मजदूरक रूपमे नोकरी भऽ गेलनि। एन.के. पारीख नाओंक एक गोटे जे चारि‍ कोठरी मकानो बनौने छलाह आ ओही सि‍मेंट कारखानामे नीक पदपर सेहो छलाह, हुनके मकानमे एकटा कोठरी भाड़ा लऽ तेज नारायण रहए लगला। धीरे-धीरे दुनू गोटेक बीच संबंध बढ़ैत गेलनि‍। हुनकर (एन.के. पारीखक) सासुर नेपालक काकरभि‍ट्टा तँए पत्नी मि‍थि‍लांचलसँ परि‍चि‍त, सम्‍बन्‍धक मजबूतीक कारण वएह भेल। भाए-बहि‍न जकाँ दुनूक सम्‍बन्‍ध बनि‍ गेलनि‍। एक-दोसरक पारि‍वारि‍क जि‍नगीक सम्‍बन्‍ध बढ़लनि। एन.के. पारीख तेजनारायणकेँ कहलखि‍न जे बैसारीमे पढ़ा देब। सचमुच पढ़ा कऽ कारखानाक सुपर-बाइजर बना देलखि‍न।
जगदीश प्रसाद मण्डल मनमे अँटकारि लेलनि जे मात्र जाइ धरि‍क समस्‍या छनि‍। जखन जेता तँ एतबो ओ नै करत? देखैबला जगहो देख लेता आ ओइठामक माटि‍-पानि‍-हवाक क्षेत्रो देख लेता। एक दि‍न एहि‍ना कि‍छु पारि‍वारि‍क आमदनी भेलनि, उठि‍ कऽ वि‍दा भेला। असगरे घुमैक स्‍वभावो छलन्हिये। दि‍ल्‍ली होइत राजस्‍थान पहुँचला। सुपर-वाइजर भेला पछाति‍ तेजनारायण अपना परि‍वारो (पत्नी) आ एकटा भाइयोकेँ गामसँ लऽ गेला। भाएकेँ ओइ कारखानामे नोकरी धड़ा देलखिन। एन.के. पारीखक मकानसँ हटि‍ तीन कोठरीक मकान भाड़ा लऽ रहए लगला। पैखाना कोठरीक ओतेक जरूरी नै, एक तँ क्षेत्रक हि‍साबसँ पातर जनसंख्‍या दोसर झाड़दार सांगरीक (बगूर जकाँ पातो आ काँटो होइ छै) छि‍टफुट गाछक परदा। बससँ उतरि‍ सोझे कारखाना गेला आ ऑफि‍समे भातीजक सम्‍बन्‍धमे पुछलखिन। तेजनारायण ड्यूटीमे नै रहथि। एक गोटे पटनाक संग भेलखिन आ तेजनारायणक डेरापर दोसरि‍ साँझ होइत पहुँचा देलखिन‍। बि‍जलीक इजोत। बगलमे तीस-चालीस दोकानक छोट-छीन बाजार। जइ बीच होइत बसक रास्‍ता। अन्‍हार रहने बेसी नै देखि‍ पेला।
चैत मास रहने गरमी खूब पड़ै, दस बजेक बाद घरसँ ि‍नकलैक मन नै होइ। मुदा बारह बजे राति‍क पछाति‍ (जेना-जेना राति‍ ढलै) मोटगर चदरि‍क जरूरति‍ भऽ‍ जाइ छलै। रहैले एकटा खाट, सि‍रकक संग भेटल छलनि। भि‍नसर होइत देखैक अवसर भेटलनि। डेराक आगूमे चारि‍-पाँचटा अशोकक गाछ लागल, मझोलके गाछ। मकान मालि‍कक घर अधा कि‍लोमीटर हटि‍ कऽ रहै। मुदा मालक घर बगलेमे बनौने रहए। मालो कि‍ बिनु बच्‍चा दूटा तौड़ि‍या महींस। तीन बापूत मकान मालि‍क। पि‍ता बुढ़े जे बेसीकाल महींसक ताक-हेरि‍ करैत छल। एक भाँइ ओही सि‍मंेट कारखानामे नोकरी करैत छलाह। आ दोसर खेती-गि‍रहस्‍तीसँ लऽ कऽ महींस दुहनाइ आ मोटर साइकि‍लपर दूध बेचनाइ धरि‍‍। तीन-कि‍लो मीटरपर एकटा दोकानदारकेँ प्रति‍दि‍न दूध दइत। साइठ बीघा जमीनो रहनि‍ आ एकटा बोरि‍ंग सेहो। शुद्ध दोखरा बालुक खेत। पहाड़-बालुक क्षेत्र। गाछक रूपमे मात्र सांगरी। पहाड़क अति‍रि‍क्‍त खेत सभमे पाथरक छोट-पैघ टुकड़ा ओंघराएल। पराते भने मकान मालि‍कसँ चि‍न्‍हा-परि‍चय भऽ गेलनि। पँइसठि‍-सत्तरि‍क उमेर, देहमे मात्र एकटा धोती। परात भने जखन बेटा महींस दुहए लगलनि‍ तँ जगदीश प्रसाद मण्डल देखलनि जे दूध तँ कमे भेलैमुदा ओइमे पानि‍ ढारि‍ देलकै। पुलखिनजे पानि‍ कि‍अए देलि‍ऐ? जबाव देलकनि‍ जे जँ दूधमे पानि‍ नै देबै तँ महींसक थन जरि‍‍ जाएत! जबाव सुनि‍ कि‍छु फुड़बे ने कएलनि। आेहो चलि‍ गेलाह।
तेसर दि‍न अजमेर दरगा देखैक कार्यक्रम बनलनि। बहुत सुन्‍दर स्‍थान। पहाड़ी इलाका तँए बेसी चि‍क्कनो-चुनमुन। स्‍थानक पूबारि‍ भाग ऊँचगर पहाड़। पहि‍ने तँ मनमे भेलनि जे हि‍न्‍दूकेँ रोक हेतै मुदा से नै। देखि‍नि‍हारमे बेसी हि‍न्‍दू। कबूलो-पाती बेसी। स्‍थानक भीतरे रहथि कि‍ गांजा-बाजाक संग एकटा जुलुस देख‍लनि। हाथी, ऊँटक संग मनुखकेँ चलबैत चरि‍पहि‍या गाड़ी (बि‍नु इंजि‍नक, आगू-पाछू आदमी ठेलैत) मर्द-औरतसँ सजल जुलुस। रंग-रंगक बबाजि‍योक समूह। नंगासँ लऽ कऽ रइस धरि‍।
दरगा देखलाक पछाति‍ पुष्‍कर गेला। अजमेरमे आम, जामुन, लताम इत्‍यादि‍क गाछ सेहो देखलनि। गुलाब फूलक खेती बहुत बेसी। पुष्‍कर एकटा नमहर पोखरि‍नुमा अछि‍। जइपर ब्रह्माक मंदि‍र अछि‍। अनेको धर्मशाला आ अनेको घाट बनल अछि‍। जहि‍ना दरगामे भीड़ तहि‍ना पुष्‍करोमे रहए।
ओना जेबाकाल जयपुरेमे बससँ उतरला। मुदा राति‍मे गेला। भोरे अन्‍हरगरे दोसर बस पकड़ि‍ लेलनि तँए देखैक अवसर ओइ दि‍न कि‍छु नै भेटलनि। अजमेरक तेसरा दि‍न पछाति‍ जयपुर पहुँचला। सचमुच कला-कृत्ति‍ श्रेष्‍ठ छैखास कऽ प्राचीनक। मीराक स्‍थान (मैरता) सेहो गेला। बसनुमा रेलक गाड़ी चलै छै‍।
एकटा मंदि‍र अछि‍ जइमे अनेको मूर्ति अछि‍। मंदि‍र बहुत नमहर नै मुदा छि‍पगरो नै। ढोलपेटा जकाँ अछि‍। अोना भीतर एबा-जेबा लेल लोहाक केबाड़ी लागल‍। मुदा सदि‍खन लगले रहै छै। छाती भरि‍ ऊपर चारू कात नमगर-चौड़गर खि‍ड़कीनुमा मोटगर लोहाक सरी लागल छै। जइ होइत चारू कात घूमि‍ कऽ देखल जाइत अछि‍। भीतरमे राजदरबारक दृश्‍य बनल छै। जहि‍ना राजदरबारमे सभ कि‍छु सजल रहै छै तहि‍ना सभ कि‍छु सोनाक बनल छै। ओना देशमे एक-पर-एक स्‍थानो अछि‍ आ मंदि‍रो अछि‍। जहि‍ना कलाक क्षेत्रमे अछि‍‍ तहि‍ना आर्थिक क्षेत्रमे। मुदा मूल वस्‍तु अधि‍कांश स्‍थानक गाइब अछि‍। ओ छी ओकर महात्‍म्‍य। उदाहरणक रूपमे कामरूप कामाख्‍या कामरूप कामाख्‍यामे सभ कथूक बलि‍ प्रदान होइत छै, मुदा दोसर-तेसरमे अंतर छै। कि‍छु स्‍थानमे खास चीजक बलि‍ पड़ै छै। तहि‍ना परसादो अछि‍। जगन्नाथक परसादक अलग रूप-गुण अछि‍।
ओना कोनो स्‍थानक महगाइक परि‍चय बारहो मास रहलापर होइ छै, से तँ राजस्‍थानमे नै रहला, मुदा जतबे दि‍न रहला तइमे देखलनि जे बीतभरि‍क सजमनि‍क दाम, जेकर दाम अपना ऐठाम आठो आना नै हेतइ ओ दस रूपैयामे बि‍‍काइत। १९९९ ई.मे गेल रहथि। तीन रूपैये चाह बि‍काइत छल। तहि‍या अपना ऐठाम एक रूपैये कप बि‍काइत छलै। तीन रूपैये पान बि‍काइत छल अपना ऐठाम बारह आना रहै। एक तँ अपना सभ जकाँति‍ सैकड़ो अन्न दोकानमे नै देखलनि मुदा अन्नक भाउमे अपना सभसँ कम अन्‍तर छलै। किछु सस्‍तो छलै। जना चीनि‍या बदाम। चीनि‍या बदामक खेती होइ छै। खएब-पीअब अपना सभ जकाँ नै, सीमि‍त जि‍नगी सीमि‍त भोजन। गरीबी सेहो छै। मुदा अपना ऐठामक कारण भि‍न्न अछि‍ ओइठामक कारण भि‍न्न छै। जहि‍ना नाओं मरूभूमि‍ तहि‍ना सचमुच मरलो अछि‍। ने अपना सभ सन मौसम सुहावना आ ने गाछ-बि‍रीछक आनन्‍द। मुदा राजाघराना आ औद्योगि‍क घरानाक बसने कलो-कारखाना आ आरामदेह गाड़ि‍यो-सवारी।
ओना ठीक-ठीक नै बूझल छलनि‍ मुदा चारू कात जे छहरदेवाली देने रहैओ दस कि‍लो मीटरसँ बेसि‍येमे बूझि‍ पड़लनि। बीचमे सि‍मेंटक कारखाना बनल। पानि‍, बि‍जलीक बेवस्‍थाक खास बेवस्‍था सेहो। कारखानासँ दछि‍न नमगर चौड़गर पहाड़ छै। जइमे सँ डायनामाटि‍सँ तोड़ि‍ पाथर अबै छै। ओना तीन हजारसँ ऊपर श्रमि‍क कार्यरत मुदा बि‍ना ठौर-ठेकानक। कि‍छु गोटे छथि‍ जि‍नका दरमहो नीक छन्‍हि आ आनो आन सुवि‍धा छन्‍हि‍ मुदा अधि‍कांश श्रमि‍कक जि‍नगीक कोनो ठौर-ठेकान नै छन्‍हि‍। ने कर्मचारीकेँ रहैले आवासक बेवस्‍था छै आ ने नीक मजूरीक।
कारखानाक जे मुख्‍य प्रबंधक छलाह ओ सेवा-ि‍नवृत्ति‍ आइ.ए.एस छलाह। कारखानाक भीतरे नीक आवासक बेवस्‍था छलनि‍। दरमहो नीक। मि‍थि‍लांचलक दुर्भाग्‍य ईहो अछि‍ जे सेवा-नि‍वृत्ति‍ नीक-नीक पदाधि‍कारि‍यो आ अध्‍यापको दोहरा-दोहरा नोकरी करए लगलाह अछि‍। आँइ यौ, अहाँले वानप्रस्थ आश्रम/ सन्‍यास अवस्‍था कहि‍या आओत आकि‍ अबै-ने देबइ! जइठाम मिथि‍-मालि‍नक एहेन स्‍थि‍ति‍ रहत तइठाम भगवान मालि‍क छोड़ि‍ के हेताह? काँच माटि‍क एकटा दि‍आरी बना लि‍अ। फाटल-पुरान साड़ी फाड़ि‍ टेमी बना लि‍अ। कड़ू तेलक मालीमे मखा दि‍औ आ साँझू पहर डि‍हवार स्‍थानमे लेसि‍ दि‍औ आ एकटंगा दऽ दुनू हाथ जोड़ि‍ मांगि‍ लि‍अ जे वि‍द्या दि‍अ, धन दि‍अ, समांग दि‍अ!!
मुख्‍य प्रबंधककेँ देखि‍ मनमे उठलनि जे कि‍ सेवा-ि‍नवृत्ति‍क पछाति‍ जे नोकरी केनि‍हार छथि‍ ओइसँ भ्रष्‍टाचारकेँ बल भेटै छै।
चौथाइयोसँ कम कर्मचारीकेँ स्‍थायी नोकरी भेटल छलनि‍। जि‍नका कि‍छु-कि‍छु सुवि‍धो छलनि‍। बाकी तीन-चौथाइ ठीकेदारक अन्‍तर्गत काज करैत। ओना दरमाहा कम जरूर छलनि‍ मुदा गामक बोनि‍यातसँ बेसी छलनि‍हेँ। काजक ढंगो बेवहारि‍क। जना दूटा सुपर-बाइजर छलाह। दुनूक बीच एकटा मोटर साइकि‍ल। चौबीसो घंटा कारखाना चलैत अछि‍। जइ सुपार-बाइजरक ड्यूटी समाप्‍त भेलनि‍ ओ मोटर साइकि‍लसँ डेरा जेता, ओही गाड़ीसँ जइ गाड़ीसँ ड्यूटी करैबला सुपर-बाइजर आएल छलाह। तँए ड्यूटीक हि‍साव लेनि‍हार संगी भऽ जाइ छलनि‍। तँए सभ अपन ड्यूटीक पक्का छलाह।
दोखरा बालु सभठाम एके रंग नै। कतौ-कतौ मेही बालु सेहो छै जेकरा खेतीक उपयोगमे आनल गेल छै। बहुत तरमे पानि‍ (लेअर) तँए बोरि‍ंगो महग। गहुम, बदाम, चीनि‍या बदाम, बाजरा, ताेरक खेती ठाम-ठीम रहै।
अपना सभ जकाँ ने रंग-रंगक पशु आ ने पक्षी। गोटि‍ पंगरा-मोर। अपना ऐठाम जेरक-जेर कौआ, मेना, बगरा-बुगरी अछि‍ से नै। वातावरणो अनुकूल नै। ने रहैले गाछ-बि‍रीछ आ खाइक रंग-रंगक वस्‍तु आ ने पीवैक पानि‍क बेवस्‍था। गोटि‍-पंगरा गाइयो मुदा खढ़-पानि‍क अभाव जेर बनौने‍। भि‍नसरू पहरकेँ ट्रैक्‍टरपर हरि‍अरो आ सुखलो ठठेर नेने अबै आ छीटि‍ दइ। गाए-सभ अपन-अपन खाए। परबा सेहो छै मुदा खाएब वर्जित‍। जँ खेबै आ पकड़ा जाएब तँ जुर्माना लागत।
राजस्‍थान जाइसँ डेढ़ बर्ख पूर्व पनचानबे बर्खक अवस्‍थामे जगदीश प्रसाद मण्डलक माए मरि‍ गेली। माइक अंति‍म दर्शन। दि‍नक बारह बजैत। जगदीश प्रसाद मण्डलक पत्नीकेँ ओ कहलखि‍न-
तूँ सभ खाइ-पीबै गेलह?”
पुतोहु- हँ।
बच्‍चा, गाममे अछि‍ कि‍ने?”
खाइ कालमे देखि‍ने‍हि‍ रहथि‍न, मुदा लगले वि‍सरि‍ गेली। मनमे शंका भेलनि।
हमरो कने बि‍छान कऽ दाए।
पुतोहु ओसारेपर बगलेमे बि‍छान कऽ देलकनि‍। बैसले-बैसल घुसुकि‍ कऽ बि‍छानपर पहुँचि‍ते पड़ि‍ रहली से पड़ले रहि‍ गेलीह! एकादशीक दि‍न।
अंति‍म समए धरि‍ माएकेँ आशा नै टुटलनि‍। जि‍नगीमे नमहर-नमहर दुर्दिन सेहो एलनि‍, तँ सेवो एते मजगूत रहलनि‍ जे आशाक बाट पकड़नहि‍ रहलनि‍।
सुभ्‍यस्‍त परि‍वारमे माइक जन्‍म भेल छलनि‍। दू भाए-बहीनि‍क बीच पि‍ताक परि‍वार छलनि‍। बहीनि‍क बेटा नर्सिग मण्‍डल दीप गामक छलखि‍न। जि‍नका १९४२ ई.मे झंझारपुर सर्कलक आन्‍दोलनमे गोली लागल छलनि‍। दुनू गोटेक (जगदीश प्रसाद मण्डल आ हुनको) मात्रि‍क मनसारा (दरभंगा जि‍ला, घनश्‍यामपुर ब्‍लौक) एके परि‍वार। बेरमामे माइक सासुर, दीपमे पीसक (दीदीक, जि‍नकर बेटा नरसि‍ंग मण्‍डल) सासुर, गोधनपुरमे जेठ बहि‍न जे सात भाए-बहि‍नमे सभसँ जेठ। मनसारा परि‍वार सम्‍पत्ति‍येमे अगुआएल नै समांगोमे अगुआएल। माइक मौसीक सासुर बेरमे। हुनके परि‍वारक पोखरि‍ अधि‍कारी पोखरि‍क नाओंसँ जानल जाइत अछि‍, जे जगदीश प्रसाद मण्डलक घरक बगलेमे अखनो कारगर अछि‍। घरे-घरे कल भेने नहाएब तँ कमि‍ गेल छै मुदा माछ-मखानक बखारी छै। तहि‍ना एक लकीरमे तीनटा इनार सेहो छलनि‍, जे भग्‍नावशेष मात्र रहि‍ गेल छै‍। तीन भाँइक भैयारीक बटबारामे चानीक रूपैया गनि‍ कऽ नै तराजूपर तौल कऽ बारह-बारह पसेरीक बटबारा भेलनि। आेइ परि‍वारक लागि‍मे जगदीश प्रसाद मण्डलक पि‍ताक बि‍आह हेबाक कारण छल पैछला इति‍हास। जइमे कूल-मूलसँ लऽ कऽ पारि‍वारि‍क बेवहार धरि‍ अबैत अछि‍। जगदीश प्रसाद मण्डल सँ ऊपर सीढ़ी धरि‍ परि‍वारमे हर जोतब आ गाए दूहब वर्जित छल। मुदा आब नै। मौसीक (माइक मौसी) अनुशंसासँ माइक बि‍आह एक साधारण परि‍वारमे भेलनि‍। घरदेखीमे पाँच गोटे जे एलखि‍न से पाँचो पाँच रंगक। अपन-अपन नजरि‍ये सभ परि‍वार देखलनि‍। एकटा नमगर-छड़गर खलीफा सेहो रहथिन‍। खेला पछाति‍ घरसँ जखन नि‍कलए लगलाह तँ चौकठि‍मे कसि‍ कऽ चोट लगलनि‍। ओइ तामसपर बाजि‍ गेलाह जे एहनो ठाम कुटुमैती करब। जेकरा घर ने दुआर छै। मुदा सभ चुपचाप सुनि‍ लेलनि‍। मौसीक (माइक मौसी) जि‍ज्ञासा रहनि‍ जे अपना सम्‍पति‍ नहि‍येँ छै तँ कि‍ हेतै। अपना खेत-पथार, पोखरि‍-इनार तखन दुख कथीक हेतइ। कारणो छलनि‍ जे सासुर कि‍छुए दि‍न बसला पछाति‍ वि‍धवा भऽ गेल रहथि‍।
दोसर सि‍फारि‍श (माएक बि‍आहक) मौसीक रहनि‍। माइक जेठ बहि‍न गोधनपुरमे। गोधनपुर बेरमा सटले अछि‍। सात भाए-बहि‍नमे मौसी सभसँ जेठ आ माए सभसँ छोट। करीब तीस बर्खक दूरी। ओना ओहो पुत्र वि‍ही‍न वि‍धवा भऽ गेल छलखि‍न। मुदा दूटा सन्‍तान तँ छलनि‍हेँ। हुनको सि‍फारि‍श भेलनि‍। तेसर सि‍फरि‍श दीपक (नरसिंह भाइक) दीदीक भेलनि‍। परि‍वारमे महि‍ला समूहक वि‍चार काटब कठि‍न भऽ गेलै। माएक बि‍आह भऽ गेलनि‍।
३५ बर्खक आयुसँ पहि‍ने वि‍धबा भऽ गेलीह। पि‍ता मृत्‍युक पछाति‍ करीब साठि‍ बर्ख जीवि‍त रहली। ऐ साठि‍ बर्खमे एकटा (नैहरक) सुभ्‍यस्‍त परि‍वारकेँ उजड़ल-उपटल देखलखि‍न। कोसी-कमलाक चपेटमे मनसारा गाम उजड़ि‍ गेल। बीच बस्‍ती (पुरना बस्‍ती) देने कमला बहि‍ रहल अछि‍। तीनू भातिज आ दुनू पोताकेँ एक-एक साल जहलमे बन्न देखलनि‍। वि‍धवा मौसी देखलनि, वि‍धवा दीदी आ बहि‍न देख अपनो वैधव्‍य स्‍वीकार केलनि‍। नरसिंह भायकेँ गोली लागल देखलनि‍। ततबे नै देखलनि‍, परि‍वारक भागि‍नक उजड़ल परि‍वार (हरि‍नाही) सेहो देखलनि‍। जि‍नगीक धक्के ने पंजा मजगूत करै छै!
मनसारा उजड़लासँ दीप, गोधनपुर आ बेरमाक एक परि‍वारसँ सम्‍बन्‍धि‍त रहने सम्‍बन्‍ध मजगूत भऽ गेल‍। परि‍वारक दू सूत्र अछि‍। एक वंशगत दोसर बेवहारगत। एकठाम रहने आ एकठाम नै रहने (हटि‍ कऽ रहने) सम्‍बन्‍ध प्रभावि‍त होइते अछि‍। नरसि‍ंह मण्‍डलक परि‍वार आ बेरमाक परि‍वारमे मात्रि‍कक सम्‍बन्‍ध बनि‍ गेल अछि‍। जखन नरसि‍ंह मण्‍डलकेँ गोली लगलनि‍, इलाजक दरमि‍यान बहुत दि‍न धरि‍ बेरमेमे रहलाह।
माएक मुइला पछाति‍ सराधक सवाल उठलनि। स्‍थि‍ति‍ नीक नै छलनि, मुदा समाजो तँ ऐ समस्‍याकेँ मेटा चुकल अछि‍ तँए तेहेन समस्‍या नहि‍येँ बूझि‍ पड़लनि। मुदा मनमे दूटा सवाल अपनो उठल रहनि, बाजथि नै। कारण स्‍पष्‍ट, बरि‍आतीक मरजादी भोजक ठहाका तँ नै, तीस-चालीस हजारक काज। प्रश्न रहै जे एक बेर खेलहो-बि‍नु-खेलहोकेँ खुआ सम्‍बन्‍ध तोड़ि‍ लेता। भेरि‍ पेट भोज खाइ दुआरे दि‍न-राति‍क समए लुटा देल जाए, ई नीक नै भेल। मुदा डर ईहो रहनि, एहनो लोकक तँ कमी नै जे अनका ऐठाम पल्‍था मारि‍ दइ छथि‍न आ अपना बेरमे...। दोसर कारण मनमे नचैत रहनि जे कर्मकांडकेँ तँ हटेलनि, मुदा भोज तँ लधले रहि‍ गेलनि। एक दि‍स दि‍स होइनि जे एक बेर भोज खुआ हरदा बजा दैथि‍, कम-सँ-कम एतबो तँ हएत जे पाँच गामक पंचो आ समाजो आँखि‍क सोझमे देख लेथि‍न। मुदा कि‍छु बाजथि नै। मुदा अखढ़ुआ मेघ तड़तड़ाएल। तेराति‍ (सारा बनौला पछाति‍) ि‍दन सराधक गप-सप उठल, पि‍सि‍औत भाय (गोनर मण्‍डल) आबि‍ कऽ (हरि‍नाहीसँ बेरमा) चालि‍ देलखि‍न जे मामी तँ बेटे जकाँ पोसलनि‍ तँए हम भोज करबै। आठ बर्ख पहि‍ने गाया सेहो लऽ गेल रहथि‍न। अपन स्‍थि‍ति (गोनर मण्‍डलक) ओते नीक नै, मुदा छोट भाएक बेटा सभ (पाँचो भाँइ) कमासुत तेकर हूबा रहबे करनि‍। भातिजकेँ पि‍ताक बिमारीक खि‍स्‍सा बेर-बेर सुना तैयार (भोज करैले) कऽ नेने रहथि‍। ओ सभ (भातिज) गछि‍ लेलकनि‍। जहि‍ना पोखरि‍मे माछ चाल दैत तहि‍ना भैयाक चाल देखि (जेठ भाय, जे पहि‍नहि‍ मरि‍ गेल छलाह) भौजी परि‍वारसँ चाल देलखि‍न जे जते ओ (पि‍सि‍औत भाय गोनर मण्‍डल) करथि‍न तते हमहूँ करबै। कारण छलनि‍ जे दूटा बेटा दि‍ल्‍लीमे नौकरी करए लागल रहनि‍।
जगदीश प्रसाद मण्डल हि‍साब जोड़थि तँ देखथि जे दूटा भोज पचगामामे भेल जइमे तीस-पइतीस हजार खाइ-पीबैमे आ तीस-पइतीस हजार क्रि‍या-कर्ममे होइ छै। अपन हि‍साब आधामे जोड़थि। एकटा नव बीमारी गामक भोजमे सेहो पकड़ि‍ लेने रहै जे मि‍ठाइक भोज रसगुल्‍लाक भोज भऽ गेल रहए। भोजपर नजरि‍ जाइनि तँ मन भटकि‍ जाइनि। होइनि जे अनेरे फेरामे पड़ता। कर्मकांड अजसक कांड छी। भनसि‍याक गलती वा बारिकक गलती भोजैतकेँ चटैत अछि‍। तइ संग मनमे एकटा ईहो उठैत रहनि जे अखुनका जे पचगामा बनल अछि‍, ई तँ हालमे बनल अछि‍। एकर खेबे कते केलिनि। भोज खेने छथि ननौर, भोज खेने छथि लकसेना, परसा इत्‍यादि‍मे। से तँ आब फुटि‍ कऽ ओहो दोसर दि‍स चलि‍ गेलै आ जगदीश प्रसाद मण्डल सभ दोसर दि‍स भऽ गेला। अपन आँट-पेट देखथि तँ चौथाइपर बूझि‍ पड़नि। भात-दालि‍क भोज केलनि। जहि‍ना कथा गोष्‍ठी सगर राति‍ दीप जरयमे भाय-बंधुकेँ करौने रहथि‍, तेहने भोज केलनि, नीक जस भेलनि। भोज खुआ भोज खाएब छोड़ि‍ देलनि।
माइक मुइला पछाति‍, जना कुम्‍हारक आबामे ढबाि‍ह लगै छै तहि‍ना ढबाहि‍ लगि‍ गेलनि। कि‍छुए दि‍नक पछाति‍ सासु मरि‍ गेलनि। हुनको उमेर करीब नब्‍बे बर्ख छलनि‍। ओहू भोजकेँ छोट केलनि। छोट एना जे तीन-भाए एक बहि‍नक बीच सासुक सराध। जेठ भाय सरकारी नोकरी करैत तँए सरकारी धाही। पत्नीसँ तकरार हेबे करतनि। मुदा सुतरलनि। नैहर लग रहने पत्नी माएक जीवि‍त मुँह देखए गेलीह से भरि‍ सराध रहि‍ये गेलीह। जगदीश प्रसाद मण्डल अनठा देलनि। मुदा सासुरेसँ समाद पहुँचलनि जे एक-सवा सए कठि‍आरी गेल रहै, तेकर खर्च अपने लागत कि‍ने। सुनि‍ कऽ अनठा देलनि। जखन आठ दि‍न बितलै, परसुए नह-केश हएत तँ समाद पठा देलनि जे अहाँ सभ अशौचक भोज नह-केश दि‍न करै छी। हम सभ (बेरमा) छोड़ि‍ देने छि‍ऐ तखन अहीं कहू जे हमर आएब उचि‍त हएत। मुदा खूब घौचाल भेलै। दुइये दि‍नमे कते घौचाले हएत, अनठा देलनि।
सासुर बि‍सरलो ने रहथि आकि‍ नरसि‍ंह मामा (करीब ८०-८५ बर्खक रहथिन‍) मरि‍ गेलखिन‍।  मुदा दीपक भोज नमहर होइतो छोट होइ छै। गाम नमहर तँए सौंसे गामक भोज करैत-करैत भोजैतक दम खड़ा जाइ छै। मुदा आन गाम तँ एको घरक कि‍अए ने हुअए ओ तँ गामे कहाएत। संयोग थोड़ेक नीक भेलनि‍ जे मृत्‍युसँ करीब आठ बर्ख पूर्व स्‍वतंत्रा सेनानी भेट गेल रहनि‍। जइसँ दू-अढ़ाइ बीघा खेत कीनि‍ लेलनि‍। स्‍वतंत्रता सेनानी भेटैसँ पूर्व गामेमे एक गोटे ऐठाम नौकरी करए लागल रहथि‍। जे पेंशन भेटलापर छोड़लनि‍।
चारि‍म भेलनि जे पत्नीक मामा (ममि‍औत ससुर) सेहो ओही पति‍आनीमे चलि‍ गेलनि। ओना हुनको उमेर अस्‍सी पार कऽ गेल रहनि‍। मुदा ओइठामसँ आबा-जाही नै रहने कोनो भारे ने पड़लनि।
एक पीढ़ीक (पुरान पीढ़ीक) अन्‍त भऽ गेलै।
जगदीश प्रसाद मण्डल लेल १९९९ ई. अबैत-अबैत आशा-ि‍नराशाक बीच संक्रमणक स्‍थि‍ति‍ बनए लगल रहनि‍। १९९८ ई.मे दफा ३०७क केसमे सजाए भऽ गेल रहनि‍। हाइ कोर्ट अपील होइमे २०-२५ दि‍न लागि‍ गेलनि‍। तइ समैमे रामपट्टी जेलमे रहथि‍। मने-मन आश्चर्य होन्हि‍ जे बि‍ना कि‍छु केनौं जहलमे छथि‍। तहि‍यो आ अखनो मन नै मानि‍ रहल छलनि‍‍ जे कोनो गलती हुनकासँ भेल हुअए। खएर, अपील भेल, जमानत भेलनि‍। वर्माजी (माननीय न्‍यायमूर्ति वीरेन्‍द्र प्रसाद वर्मा, पटना हाइकोर्ट) केँ फोन केलखि‍न तँ कहलकनि‍‍ जे कि‍छु ने हएत, नि‍चेनसँ अपन काज करू। सएह भेल। केस समाप्‍त भेल गेलनि से चारि‍ मासक पछाति‍ बुझलखि‍न। तेकर कारण रहए जे केस पैरवी करैक जिम्मा नै रहनि‍। जखन बहुत अधि‍क केस भऽ गेल रहनि‍ तखन अपनामे वि‍चारि‍ लेलखि‍न जे एक-एक केसक भार सभ कोइ आपसमे लऽ लि‍अ। जखन केस खुजत आ खर्च बढ़त तखन चन्‍दा कऽ लेब तइ बीच एक आदमीक जिम्मामे रहत। हाइ कोर्टबला ३०७-केस पहि‍नहि‍ जजमेंट तकक खर्च जमा भऽ गेल रहै। तँए नै बूझि‍ सकलाह। दोसर केस जे बचल रहै तइमे समझौताक बात भऽ गेल रहनि‍। ओना तैयो कि‍छु गोटे छह-पाँच कऽ देबे केलकनि‍। तँए केसक चि‍न्‍ता मनसँ हटि‍ गेल रहनि‍। ओना तीन बर्खक वारंटक पछाति‍ केसक भाँज तखन लगलनि‍ जखन थानासँ सूचना भेटलनि‍। झंझारपुर-मधुबनीक बीच जे कोर्टक हेरा-फेरी भेल तइमे केस हरा गेल छलै। फास्‍ट-ट्रेक कोर्ट खुजला पछाति‍ जखन ताक-हेर भेल तखन भेटलै। कि‍छु गोटे (२८गोटेमे) मरि‍ गेल रहथि‍, जइमे तीनटा मुद्दालह आ दूटा गवाह सेहो। संगठनक रूप सेहो छि‍ड़ि‍या जकाँ गेल रहनि‍। तेकर बहुत रास कारण छलै। सामाजि‍क, आर्थिक, साम्‍प्रदायि‍क इत्‍यादि‍। जहि‍ना अंति‍म केस छलै तहि‍ना समाजक अंति‍म अस्‍त्रक प्रयोग नीक जकाँ भेलै। मुदा जे भेलनि‍, दि‍नांक ५-५-२००५ ई.केँ समाप्‍त भऽ गेलनि‍। तइ बीच जगदीश प्रसाद मण्‍डलकेँ दोसर दि‍स बढ़ब उचि‍त नै बूझि‍ पड़नि‍। उपदेशक सभ तँ कहबे करनि‍‍ जे अनेरे परेशान होइ छी। मुदा सि‍मरि‍या पंडाक उपदेशे की। धार गंगा आ वि‍चारधाराक घाट सि‍मरि‍या छी आकि‍ की छी से तँ एके धारमे देखाइ छै। एक घाट (उत्तर) दोसर (दछि‍न) मग्‍गह।
      जगदीश प्रसाद मण्‍डलकेँ नव काल्हि‍ देखैक इच्‍छा शुरूहेसँ रहलनि‍। ओहि‍ना नै केलाक पछाति‍ आरो मजगूत भेलनि‍। उदाहरण, परि‍वारमे साधारण शि‍क्षाक आगमन भेल छलनि‍। तइठाम एम.ए. तक पढ़लनि। परि‍वारे नै गामेमे पहि‍ल एम.ए. भेलाह। ओना पछिला पीढ़ीमे संस्‍कृतक माध्‍यमसँ एक-पर-एक वि‍द्वान बेरमा भेलाह मुदा जेनरलमे जगदीश प्रसाद मण्‍डलेटा रहथि‍। दोसर, बोरि‍ंग-करौने खेति‍ओमे कि‍छु नवता आबि‍ गेल छलै गाममे। दुनू रंगक खेती करै छलाह मण्‍डलजी। दुनू रंगकसँ मतलब- अन्नो आ नगदि‍योक। नगदी खेतीमे तरकारी आ फलक खेती सेहो करए लगलाह। ओना जइ रूपे करए चाहैत छलाह ओइ रूपे नै होइक कारण छल, कि‍छु समैओक अभाव आ कि‍छु उपद्रवो। खेतीक एहेन उजाड़ि‍ होइत रहनि‍ जे जँ मारि‍-झगड़ा करए लगि‍तथि‍ तँ दि‍नमे तीन बेर होइतनि‍। पैघ समस्‍याक आगू छोट गौण पड़ि‍ जाइ छै। मुदा मन तोड़ैक तँ अस्‍त्र भेबे कएल। उपद्रवो चाहे जतए होउ मुदा मनकेँ प्रभावि‍त तँ करि‍ते अछि‍। तहूमे खेतीक उजाड़ि‍ मेहनत, पूँजी, समए सबहक क्षति‍। जइ दि‍न मधुबनी कोर्टमे ३०७ केसक जजमेंटमे सजा भेलनि‍ ओइ दि‍नक घटना- गामक जते देखार वि‍रोधी रहनि‍ ओकरा सभकेँ ई बूझल रहै जे सजा हेतनि‍, जहल जेताह। जखने जेताह तखने दस बर्खसँ पहि‍ने थोड़े नि‍कलता। सजाए भेलनि‍ जहल गेलाह। तीन कट्ठा बंधा कोबी बोरि‍ंगबला चौमासमे केने रहथि‍। हाँ एकटा बात आरो बीचमे कहि‍ दि‍अए चाहै छी जे १९७०-७१सँ १९८६-८७ धरि‍ बेरमाक खेती आगू ससरैत रहल। अनेको दमकल, बोरि‍ंग भऽ गेल। हालर चक्की, थ्रेशर इत्‍यादि‍ सेहो सभ भऽ गेल। मुदा १९८६-८७क बाढ़ि‍-भुमकम खेतीकेँ पाछू धक्का मारि‍ देलक। एक तँ सरकारी राशनक चहटि‍ बाढ़ि‍-भुमकमक पछाति‍ लागि‍ गेल दोसर अनेको बोरि‍ंग माटि‍क तरमे टूटि‍-फूटि गेल। गामक खेती पाछू ससरि‍ गेल। मुदा हि‍नकर तँ जीवि‍का भेलनि,  छोड़ने केना हेतनि‍? जइ दि‍न ३०७क जजमेंट भेलनि‍ ओइ समए जे कोबी छलनि ओ २ कि‍लोसँ लऽ कऽ चारि‍ कि‍लो धरि‍क फूल १८ सए गाछ रहनि। बंधा कोबीक भाव २-५ रूपैये किलो रहै। अन्‍दाजि‍ लि‍औ जे केहेन नोकसान भेलनि‍। अट्ठारहो सए गाछ दि‍न-देखार उखाड़ि‍ कऽ लऽ गेलनि। दाेसर, जहल‍ नि‍कललाक तीन मास पछाति‍ कछुबी गेलाह। कछुबी उत्तरवारि‍ टोलमे एकटा चाहक दोकानदार, जे बि‍शौलसँ कछुबी आबि‍ बसि‍ गेल अछि‍, चाहेक दोकानपर जना कते भारी अपराध कऽ जहलसँ आएल होथि‍ तही ढंगक बेवहार हि‍नका संग केलकनि‍। आ से ओ जेकरा अपने ठेकान नै छै, मुदा कि‍ करि‍तथि‍। कछुबीक रत्न काली बाबूक (काली कान्‍त झा, आइ.पी.एस.) परि‍वार संग खेनाइ-पीनाइ आबा-जाही छन्‍हि‍‍। ओना अखन धरि‍ कछुबीमे दुइये गोटे आइ.पी.एस केलनि‍ अछि‍, तइमे काली बाबू पहि‍ल। तहूमे वि‍द्यार्थिये जीवनसँ मंचक वक्‍ता बनि‍ गेल रहथि‍, गीताक मंच (गीता प्रवचन) पर अधि‍क बैसैत छलाह।
      राजनीति‍ सेहो ठमकि‍ गेलै। १९६० ई.क पछाति‍ मधुबनी जि‍ला कम्‍युनिस्ट पार्टीक मुख्‍य आन्‍दोलन कोशी नहरि‍, नूनथर, शीशा पानी, बराह क्षेत्रक डैमपर केन्‍द्रि‍त भऽ गेल। ओना आनो मुद्दा रहबे करै। बटाइदारी जमीनक लड़ाइ जोर पकड़नहि‍ रहै। नहरि‍क पानि‍ आ पनि‍बि‍जली जना कम्‍युनिस्टे पार्टीक होइ तहि‍ना लोकक धारणा बनि‍ गेल छलै। जेकरा समाधान भेने मि‍थि‍लांचलक उद्धार भऽ जाइत। खेतीसँ उद्योग धरि‍ बढ़ि‍ जाइत, से नै भेल। जते वि‍रोधी (कम्‍युनिस्ट  वि‍रोधी) ताकत छल रंग-रंगक आन्‍दाेलन, षड्यंत्र कऽ योजनाकेँ अखन धरि‍ सफल नै हुअए देलक। पार्टियोक राजनीति‍मे ठहराव आबि‍ गेल। एतबे नै जेकरा सभकेँ बटाइ-जमीन भेल ओहो सभ ओकरा (ओइ खेतकेँ) भरना लगा पंजाब-दि‍ल्‍ली जाए लागल। परि‍णाम ओहन आबए लगलनि‍ जे कि‍ केलाह तँ कि‍छु नै। ि‍सर्फ जि‍लेक राजनीति‍ नै। गामोमे सएह भेलनि‍। मनमे उठलनि‍ जे हजारो बर्खक गाछ कि‍छु ने कि‍छु अपनामे नवीनता अनि‍ते रहैए। चाहे नव टुसा होउ आकि‍ नव मुड़ी आकि‍ नव पात आकि‍ नव कलश। वि‍चार तँ उठल मुदा मनमे दुनू केस तँ रहबे करनि‍। जाइ-अबैक परेशानी नै, केसक सजाएक परेशानी। दुनू सेशन केस। दू-दि‍ना-चारि‍-दि‍ना तँ छी नै जे बुझबै पहुनाइ करए जहल गेल छलाह। सालक-साल दस साल, बारह साल। दुनू मि‍ला बीस सालसँ बेसी। तइ बीच कि‍ कएल जाए। जाधरि‍ केससँ छुटकारा नै पाबि‍ लेता ताधरि‍ दोसर दिस‍ बढ़ब नीक नै हेतनि‍।
      केसक छुटकारा पछाति‍ करबे कि‍ करि‍तथि‍। गुजर लेल खेती करि‍ते छलाह। नोकरी दि‍स कहि‍यो मनसँ तकबे ने केलाह, बेपार कएले ने हेतनि‍। मुदा जि‍नगि‍यो तँ छोट नै अछि‍। कठही साइकि‍ल (काठक पाइडि‍ल लगाओल साइकि‍ल) तँ नै जे थालो-कादो आकि‍ रस्‍ताक कटारि‍योमे कन्‍हापर उठा लेता आ टपि‍ जेता। जि‍नगीक गाड़ी छी। एक पटरीपर सँ दोसर पटरीपर आनब। एकर अर्थ ई नै जे जइठाम पाहि‍ कटैक जोगार छै तइठाम गाड़ीकेँ लऽ जा कऽ दोसर पटरीपर चढ़ा दि‍यौ। दोसर पटरीपर आनैक अर्थ ई जे छोटी लाइन (मीटर गेज लाइन) सँ बड़ी लाइनपर चढ़एबाक अछि‍। ओकर आँट-पेट छोट छै मुदा कि‍छु पार्ट- धुरी-चक्का बदलने तँ डि‍ब्‍बा आ आनो-आनो वस्‍तु उपयोगी बनि‍ जाइ छै। प्रश्न एतबे नै अछि‍, ऐसँ आगूओ अछि‍। ओ ई अछि‍ जे अदौसँ अबैत ई जि‍नगीक गाड़ी छी। जते रंगक पटरी तते रंगक पटरीक गति‍। तइठाम गाड़ीकेँ दोसर पटरीपर लऽ जाएब, असान नै। साहि‍त्‍यो जगतक जे दशा-दि‍शा अछि‍ ओ छपि‍त नहि‍येँ अछि‍। तहूमे लाठी सबहक हाथ पड़ल अछि‍। कोनो वस्‍तु मंगलापर नै दऽ छि‍पा लेब, लाथ कहबैत अछि‍। मैथि‍ली साहि‍त्‍य जगत समाजसँ एते दूर हटि‍ गेल अछि‍ जे जहि‍ना मनुष्‍य-देवताक बोट बि‍ला गेल छै। ई ि‍सर्फ मैथि‍लि‍येमे नै अछि‍ आनो-आन साहि‍त्‍यमे भरपूर अछि‍। जना- कबीर दासक चर्च मैथि‍ली साहि‍त्‍यमे कम अछि‍ मुदा कबीर दासक जे जि‍नगीक (जीवन पद्धति‍) इति‍हास प्रस्‍तुत कएल गेल अछि‍ ओ वि‍वेकपूर्ण जकाँ नै अछि‍। वि‍वेकपूर्ण नै हेबाक कारणे कबीर दर्शन समाजसँ हटि‍ गेल अछि‍। जेहो सभ दर्शनक प्रचार-प्रसार कऽ रहल छथि‍ ओहो सभ या तँ अपनो गुमराहे छथि‍ नै तँ लाथी छथि‍ जे गुमराह केने छथि‍। तहि‍ना तुलसी दास गोस्‍वामी कहबैत छथि‍, मुदा कतेक गाए पोसने छलाह? जरूरति‍ अछि‍ युगानुसार साहि‍त्‍यक ि‍नर्माण करब।
      तहि‍ना जाधरि‍ मैथि‍लि‍यो साहि‍त्‍य समाजक वस्‍तु (समाजक साहि‍त्‍य) नै बनत ताधरि‍ के केकरा कि‍ कहै छि‍ऐ से भाँज थोड़े लागत? तँए शुभेक्षु साहि‍त्‍यकारक दायि‍त्‍व बनैए जे एक आँखि‍ समाजपर राखि‍ दोसर आँखि‍ कागज कलमपर रखताह तखने मैथि‍ली साहि‍त्‍ये नै मि‍थि‍लाक कल्‍याण हएत। राज्‍यक अर्थ जँ राजधानीक एकटा कार्यालयसँ लैत छी तँए मि‍थि‍लाक समाज छूटि‍ जाइए। मि‍थि‍लाक समाजि‍क पद्धति‍ वैदि‍क पद्धति‍सँ आगू बढ़त तखने सर्वांगी‍न वि‍कास हएत।
 जगदीश प्रसाद मण्‍डल जीक, हाइ स्‍कूलक एकटा स्‍मृि‍त, केजरीवाल हाई स्‍कूलमे नाआें लि‍खेने छलाह। स्‍पेशल नाइनक (हायर सेकेण्‍ड्री) सि‍लेबसक वि‍स्‍तार भेल। मुदा तैयो आनर्स जकाँ वि‍षय नै भेलनि‍, समटाएले रहलनि। पुरने सेकेण्‍ड्री पद्धति‍क रहलनि‍। मुदा वि‍षयक वि‍स्‍तार तँ भेबे कएल। अर्थोशास्‍त्रक पढ़ाइ होइत छलनि‍। शुरूहक छह-मास पछाति‍ (हायर सेकेण्‍ड्री  कोर्सक) अर्द्धवार्षिक परीक्षा भेलनि‍। केजरीवाल स्‍कूलक बेवहार छल जे अर्द्धावार्षिक परीक्षाक काँपि‍ये वि‍द्यार्थीकेँ दऽ देल जाइ छल। कि‍छु वि‍द्यार्थी जे परीक्षा पछाति‍ दोहरा कऽ जे प्रश्नक उत्तर पढ़लनि‍ तँ ओ तँ पढ़ि‍ये कऽ मुदा जे से नै केलनि‍ तँ घरपर पोथीसँ मि‍ला देख लैत छलाह। ने शि‍क्षकक बीच कोनो मलानता छलनि‍ आ ने वि‍द्यार्थीकेँ होन्‍हि‍ जे मास्‍टर सहाएब जति‍आरए केलनि‍। ततबे नै लत्ती बाबूक (स्‍व. यदुनन्‍दन साहु) अलग सोच रहनि‍। हुनकर नम्‍बर दइक अलग कसौटी रहनि‍। हुनकर समझ रहनि‍ कम नम्‍बर देने वि‍द्यार्थी आरो मेहनति‍ करत। कि‍एक तँ सभ वि‍द्यार्थी पास करैक जि‍ज्ञासासँ पढ़ैत अछि‍। फेलक डर हेतै। तइ संग ईहो शि‍क्षकसँ वि‍द्यार्थी धरि‍-सभ बुझैत जे लत्ती बाबू हाथसँ जँ बीसो प्रति‍शत नम्‍बर आबि‍ जाएत तँ बोर्डमे पास हेबे करब।
हँ, अर्थशास्‍त्रक चर्च केने छलौं। स्‍पेशल नाइन्‍थमे पचास प्रति‍शतसँ अधि‍क नम्‍बर एलनि‍। सभ वि‍षयसँ बेसी। क्‍लासमे जखन श्‍याम बाबू (स्‍व. श्‍यामा नन्‍द झा) जोर सँ पढ़ि‍ कॉपी देलकनि‍ तखन जना अर्थशास्‍त्र मनकेँ एना पकड़ि‍ लेलकनि‍ जे दास कैपि‍टलसँ लऽ कऽ बादमे अमर्त्‍य सेन धरि‍क परि‍चय करा देलकनि‍। अोना हायर सेकेण्‍ड्री टपला पछाति‍ मनक दूटा वि‍षय- अर्थशास्‍त्र आ भूगोल तँ हटि‍ गेलनि‍ मुदा मनसँ नै हटलनि‍। वि‍षय समटा कऽ अंग्रेजी, हि‍न्‍दी आ राजनीति‍ शास्‍त्र धरि‍ रहि‍ गेलनि‍। ओहो एम.ए.मे घटि‍ गेलनि‍। प्रश्न उठैए कि‍यो एक वि‍षयसँ वि‍शेषज्ञ छथि‍ आ कि‍यो बहु वि‍षयी छथि‍, दुनूमे जि‍नगीक गाड़ी कि‍नकर समटल चलतनि‍?
      बीसम शताब्‍दीक मृत्‍यु आ एकैसम शताब्‍दीक जन्‍म बुझबे ने केलाह। गुनधुनेमे रहि‍ गेलाह जे कि‍ करी की‍ नै करी। ने बीसम सदीक सराध कऽ पेलाह आ ने एकैसम सदीक जन्‍मोत्‍सव। मुदा एकटा लाभ तँ जरूर भेलनि‍ जे सराधोक खर्च बँचलनि‍ आ जनम दि‍नोक।
      पंचवर्षीय चुनाव पद्धति‍क आगमन भेल। मन्‍हुआएल मन शि‍शि‍रक सि‍ताएल भौम्‍हरा खुजल। पंचायतसँ जि‍ला-परि‍षद धरि‍क योजना बना समाजकेँ ठाढ़ करए चाहलनि‍। आठ पंचायतक चुनाव जि‍ला परि‍षदक। आन समाजमे जाइसँ पहि‍ने अपन समाज मजगूत बनाएब आवश्‍यक बुझलनि‍। अंचल सम्‍मेलन गंगापुरक स्‍कूलमे भेल। पंचायत चुनावक कार्यक्रम बनल। बेरमाक योजना रखलखि‍न। सर्वमान्‍य भऽ गेलनि‍। मुदा एक नै अनेको सूत्र राजनीति‍क लागि‍ गेलनि‍। जइसँ चारि‍टा जि‍लो परि‍षदमे पार्टीक आ चारि‍टा पंचायतो मुखि‍याक लेल पार्टीक (कम्‍युनिस्ट पार्टी) उम्‍मीदवार बनि‍ कऽ ठाढ़ भऽ गेलनि‍। खएर जे भेल।
      पंचायत चुनाव (मुखि‍याक लेल) हारलथि‍। चुनाव भरि‍ तँ उत्‍साह रहलनि‍ मुदा समाजसँ जि‍ला पार्टीक बहुत बात बुझैमे आबि‍ गेलनि‍। एक दि‍स सरकारी योजना (चुनावमे आरक्षण) देखथि‍ तँ बूझि‍ पड़नि‍ जे अनेरे ऐ चुनावक भाँजमे पड़लाह। आरक्षणक एहेन तरीका अछि‍ जे एक चुनावसँ दोसर चुनावक रस्‍ते बन्न भऽ जेतै। पचास प्रति‍शत महि‍ला आरक्षणमे एक-एक टर्म हेबाक चाहै छलै। मुदा से नै भेल। जँ दू-दू टर्मपर चुनाव होइए तँ पूर्ण राउण्‍ड कते दि‍नमे हएत। खएर जे होउ, मुदा सरकारी लूट तँ बढ़ि‍ये गेल। जइ गति‍ये समाजकेँ ठाढ़ भऽ चलैक गति‍ हेबाक चाही से अखनो धरि‍ नै आबि‍ सकल अछि‍। अनेको कारणमे मुख्‍य  भ्रष्‍टाचार बनि‍ गेल अछि‍। भ्रष्‍टाचारी ओहन-ओहन अछि‍ जेकर सरकार छि‍ऐ। के केकरा देखार करत। जँ देखारे करत तँ कानूने कि‍ करतै। वि‍चि‍त्र महजालमे समाज फँसि‍ गेल अछि‍। आम आदमीकेँ आर्थिक तंगी छै। ओ केना पूर्ति हएत? पूर्तिक जे पद्धति‍ अछि‍ ओ एहेन बनल अछि‍ जे चरवाहि‍येमे गाइयो बि‍का जाइए! तइपर सँ देखौआ-चोरौआ फुट्टे!!
      जेकरा लेल अट्ठारह दि‍न जहलमे रहला ओ आगू आबि‍ ठाढ़ भऽ गेलनि‍। मन पड़लनि‍ महाभारतक ओ कथा जे महाभारतक उपरान्‍त भेल। मनमे मि‍सि‍यो भरि‍ शंकाक जन्‍म नै भेलनि‍। वि‍परीत भेलनि‍। पाछू उनटि‍ देखलनि तँ बूझि‍ पड़लनि‍ जे अखन धरि‍क जे मोटा कपार लादल छन्हि‍ ओकरा हेट करैक ऐसँ नीक अवसर नै भेटि‍तनि‍। सएह केलन्हि।
      मुदा एकटा प्रश्न तैयो रहबे केलनि‍ जे आगूसँ उसारी आकि‍ पाछूसँ आ दुनू दि‍ससँ आकि‍ एक्के बेर। आगूसँ उसारैक वि‍चार भेलनि‍। संयोगो नीक रहलनि। मधुबनी जि‍लाक वासोपट्टीमे पार्टीक (भाकपा) राज्‍य सम्‍मेलन भेलै। पार्टीक महासचि‍व वर्द्धन (ए.बी. वर्द्धन) सहाएबक संग-संग बंगालोक कामरेड सभ रहथि‍। ि‍बहारक सभ जि‍लाक रहबे करथि‍। नीक सम्‍मेलन भेल। जि‍लाक एकटा कार्यकर्त्ता होइक नाते रहबे करथि‍। राज्‍यक (पार्टीक) जे साहि‍त्‍य प्रेमी छथि‍ हुनका सभकेँ कहि‍ देलखि‍न‍- जे आब अहीं सबहक संग आबि‍ रहल छी।


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http://www.videha.co.in/Navendu.jpgनवेंदु कुमार झा
गाम मे विज्ञान केँ लोकप्रिय बनबऽ मे लागल छथि मानस बिहारी
     मिथिलांचलक पिछड़ल क्षेत्र मे नेना सभक मध्य विज्ञानक प्रति जागरूक करबाक लेल अभियान चलाओल जा रहल अछि। ऐ अभियानक अंतर्गत नेना सभ खेल-खेल मे विज्ञान केँ समझि-बुझि रहल छथि। महत्वबला ऐ अभियानक नेतृत्व पूर्व राष्ट्रपति डा..पी.जे. अब्दुल कलामक सहयोगी रहल भारत सरकारक पूर्व वैज्ञानिक मानस बिहारी वर्मा कऽ रहल छथि। बाढ़ि प्रभावित दरभंगा जिला मे ऐ अभियानक सफलताक बाद आब एकरा पूरा प्रदेशमे चलेबाक योजना अछि। दरभंगा जिलाक घनश्यामपुर प्रखंडक छपेर गाम भोउरक निवासी श्री वर्माक मोबाइल विज्ञान प्रयोगशाला (एमएसएल)क प्रशंसा पूर्व राष्ट्रपति डाक्टर कलाम तँ करबे कएलनि संगहि बिहारमे एकरा लोकप्रिय बना ओ नेना आ शिक्षक सभक आँखिक तारा सेहो बनि गेल छथि।
http://www.videha.co.in/Manas_Bihari_Varma_Scientist.jpg
     वैज्ञानिक आ बुद्धिजीवी सभक संस्था विकसित भारत फाउंडेंशनक नींव रखनाहार श्री वर्मा वर्ष 2010 मे बाढ़ि प्रभावित कमला बलान क्षेत्र सँ मोबाइल विज्ञान प्रयोगशाला प्रारंभ कएने छलाह। बाढ़ि प्रभावित दरभंगा, मधुबनी आ सुपौल जिलाक मे ई प्रयोगशाला चौबीस हजार छात्रक मध्य विज्ञानकेँ लोकप्रिय बनौलक अछि आ 758 शिक्षक केँ प्रशिक्षित सेहो कएलक अछि। ई प्रयोगशाला 2100 गामक दौरा सेहो कएलक अछि। अगिला वर्ष प्रयोगशालाक संख्या तीन सँ बढ़ा कऽ दस करबाक योजना अछि। श्री वर्माक अनुसार 1990 मे आन्ध्र प्रदेशक कुप्पम मे विज्ञान केन्द्रक मे गुड़ीबंका गामसँ प्रारंभक बाद मोबाइल प्रयोगशाला महत्वपूर्ण काज कएलक अछि। एखन धरि गोटेक 30 लाख छात्र ऐ मोबाइल प्रयोगशालासँ विज्ञानसँ संबंधित संवाद स्थापित कएलनि अछि।
     अगस्त्य फाउंडेंशन आ विकसित भारत फाउन्डेशन बिहार द्वारा प्रदेशमे मोबाइल प्रयोगशालाक कारण नेना सभ विज्ञानक प्रति जागरूक भेलाह अछि। जइ विद्यालय मे ऐ प्रयोगशालाक दौरा भेल अछि ओतए छात्र सभक उपस्थिति बेसी बढ़ल अछि। श्री वर्मा जनौलनि जे एक विद्यालयमे छओसँ सात बेर एम एम एल केँ लऽ जएबाक लक्ष्य अछि। एखन धरि तीन-चारि बेर एक विद्यालयक दौरा भेल अछि। प्रारंभिक अनुभव जनतब दैत अछि जे छात्र सभमे विज्ञानक प्रति आ ऐ विषयक प्रति सोच बदलल अछि। छात्र सभ मे प्रश्न पूछब, विश्लेषणात्मक सोच अपन सहपाठीसँ विचार-विमर्श करबाक क्षमता बढ़ल अछि, एम एस एल मे कक्षा छओ सँ बारह धरिक छात्र केँ ध्यान मे राखि विज्ञान मॉडल तैयार कएल गेल अछि। एन सी ई आर टी क पाठ्यक्रम पर आधारित एकर एक सय साठि विज्ञान मॉडल विषय केँ बुझबाक अंतर दृष्टि पैदा कऽ रहल अछि। ऐ अभियानक उद्देश्य बिहारमे बेसी नेना केँ वैज्ञानिक बनाएब अछि। ऐ सँ छात्र सभमे विज्ञानक प्रति रूचि बढ़ल अछि। शिक्षक सभ सेहो मांग करैत छथि जे बेसीसँ बेसी बेर प्रयोगशाला हुनक विद्यालय मे आबए जइसँ विद्यालय मे विज्ञानक शिक्षकक जे कमी अछि ओकरा दूर कएल जा सकए।
     लाइट कांबेट एयरक्राफ्ट परियोजनाक सुपरसोनिक जहाज तेजसक सफलताक संग तैयार करबा मे प्रोजेक्ट डायरेक्टर (जेनरल सिस्टम)क पद पर काज कऽ चुकल 69 वर्षक श्री वर्मा जनौलनि जे बिहार प्रतिभाक जमीन अछि। विज्ञानक प्रति नेना सभ मे रूचि जगेबाक अछि। विद्यालय सभ मे जमीनक स्तर पर संरचनाक अभाव मे ई एकटा चुनौतीबला काज अछि मुदा इमानदारीसँ प्रयास कएल जाए तँ ऐ मे सफलता अवश्य भेटत। श्री वर्मा विज्ञानकेँ लोकप्रिय बनेबाक संगहि उतर बिहारमे कोसी आ ओकर सहायक नदी सभक आबएबला बाढ़िक समस्याक क्षेत्रमे जियोमार्फो डायनेमिज्मक अध्ययन कऽ रहल छथि। हुनक उद्देश्य बिहारमे बाढ़िक समस्याक वैज्ञानिक अध्ययन करबाक अछि। श्री वर्मा मानैत छथि जे केन्द्र आ राज्य सरकार द्वारा बाढ़ि प्रभावित क्षेत्र मे नदी सभक हाइड्रोलॉजिकल विशेषताक अनदेखी कऽ पुल आ बान्ह आदि बनाएब भूल अछि।
     भारत सरकारक पूर्व वैज्ञानिक मानस बिहारी वर्मा दरभंगा जिला मे प्रारंभिक शिक्षा ग्रहण कएलाक बाद मधुबनीक जिला मधेपुरक जवाहर उच्च विद्यालय सॅ मैट्रिक परीक्षा पास कयलनि। पटना अभियंत्रण महाविद्यालयसॅ मैकेनिकल इंजीनियरिंगक पढ़ाइ पूरा कएलनि। पूर्व राष्ट्रपति डाक्टर कलामसँ हुनक पहिल भेँट इंटीग्रेटेड मिसाइल प्रोग्रामक सिलसिलामे रक्षा अनुसंधान विकास संगठनमे कार्यरत रहलाक दरमियान भेल छल। दरभंगा मे बिहार सरकार द्वारा स्थापित वीमेन्स इंस्टीच्यूट ऑफ टेक्नोलॉजीक संचालन मे सेहो हुनक महत्वपूर्ण योगदान अछि। दिसम्बर मास मे दरभंगा मे आयोजित विज्ञान मेला मे पूर्व राष्ट्रपति डा. कलाम उपस्थित भऽ श्री वर्माक लगन आ योगदानक प्रशंसा सेहो कएने छलाह। मोबाइल विज्ञान प्रयोगशाला बिहारक संगहि आन्ध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, उड़ीसा आ महाराष्ट्र मे सफलताक संग काज कऽ चुकल अछि।  
   

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http://www.videha.co.in/Satyanarayan_Jha.jpgसत्यनारायण झा
विहनि कथा- भोला  
बैरक न० ९ आ कैदी न० ९ |भोला एकटा दुर्दांत कैदी छैक |आजीवन काराबासक दंड देल गेल छैक |१२ बरख सं जहल मे अछि |आइ हाजरीक बाद जेलर साहेब भोला कबजेलखिन |भोला आबि गोर लगलकनि आ मुँह दिस ताकय लगलनि ?जेलर साहेब कहलखिन ,भोला ,तोहर चरित्र आ काज देखि सरकार निर्णय लेलक अछि जे तोरा
 आँठ बरख पहिने रिहाई कदेल जेतय आ जीवन यापन चलाबय लेल २ एकड़ जमीन आ इन्द्रा आबास सं एकटा घर आबंटन कयल जेतय |तोरा जल्दी छोरि देल जेतह |
भोलाक चेहरा पर कोनो भाव नहि अयलैक |ओ उठि बैरक मे आबि गेल |चुप चाप परि रहल आ एकटक सं छत दिस ताकय लागल ?की भेटल हमरा ?एकटा छोट गलती हमरा कतपहुँचा देलक ?मुखिया जी सं कोटाक अन्न लेबय गेल रही |हुनकर बईमानी देखि नहि रहल भेल |कहलियैन ,मुखियाजी सभटा अन्न तकालाबाजारी कदेलियैक ,आब २ किलो गहुम लहमरा सभक पेट कोना चलत |मुखिया जी गरजि उठलाह ,सार ,कानून पढ़ैत छह ?हम कहलियैन गारि नहि पढू ?एहि पर ओ दनादन लात जूता चलबय लगलाह |कतेको लोक छल |कियो नहि बचेलक |अपमानक ज्वाला मे हम धधकलगलौ |मुखिया सं बदला लेबाक धुनि सबार भगेल |एहने समय में एकटा नक्सली सं भेट भगेल |ओकर बात सुनि बुझायल एकरा सं हितेषी दोसर कियो नहि |उपेक्षित ,शोषित आ प्रताड़ित लोकक मददि केनाइ ओकर संगठनक मुख्य काज छैक |हम ओ संगठन पकरि लेलौ |बदलाक भावना सं हमरा देह मे आगि लागल छल |मुखियाक पूरा परिबार के गोली मारि देलियैक |ओहि दिन सं कतेक ह्त्या कयल से अपनो गिनती नहि अछि |बेसी निर्दोषे मारल जायत छल |संगठनक काज सं हमर मोन नहि मिलैत छल |संगठनक काज नीरस लागे \भरि दिन लूट आ   ह्त्या |फायदा किछु नहि |कोनों सामाजिक काज नहि |मुखिया जकाँ संगठनों गलत लगैत छल |एहि लूट ह्त्या सं ने समाज बदलल आने लोक |एक दिन पुलिसक हाथ परि गेलौ |आजीवन काराबास भ गेल |ताहि दिन सं जेल में छी |अपन गलती एतहि बुझलियैक|मुखिया मारलक तकी भेलैक ?ओकर जवाव हम दोसर तरीका सं देने रहितियैक तआइ ई दशा नहि ने होयत ? जीवनक कोन रसक हम आनन्द लेलौ ?
आइ बारह बरख सं जेल में छी |सभक सेवा  जेल मे कयल | लोक हमर नाम भोला गाँधी राखि देने अछि |भोला एक बेर करउट फेरलक |बाहर सं कियो उठेलकै |जेलर साहेब रहथिन |एकटा कागज़ पर दस्तखत करेलखिन आ जेल सं आजाद हेबाक कागज़ देलखिन |
जेलक बरका फाटक फुजलैक |भोला बाहर आयल |बरबस आँखि ऊपर आकाश दिस चलि गेलैक |बहुत ऊपर किछु पक्षी कउड़इत देखैत रहल बरी काल धरि |

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"विदेह" प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका http://www.videha.co.in/:-
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"विदेह" मानुषिमिह संस्कृताम् :- मैथिली साहित्य आन्दोलनकेँ आगाँ बढ़ाऊ।- सम्पादक। http://www.videha.co.in/
पूर्वपीठिका : इंटरनेटपर मैथिलीक प्रारम्भ हम कएने रही 2000 ई. मे अपन भेल एक्सीडेंट केर बाद, याहू जियोसिटीजपर 2000-2001 मे ढेर रास साइट मैथिलीमे बनेलहुँ, मुदा ओ सभ फ्री साइट छल से किछु दिनमे अपने डिलीट भऽ जाइत छल। ५ जुलाई २००४ केँ बनाओल “भालसरिक गाछ” जे http://www.videha.com/ पर एखनो उपलब्ध अछि, मैथिलीक इंटरनेटपर प्रथम उपस्थितिक रूपमे अखनो विद्यमान अछि। फेर आएल “विदेह” प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका http://www.videha.co.in/पर। “विदेह” देश-विदेशक मैथिलीभाषीक बीच विभिन्न कारणसँ लोकप्रिय भेल। “विदेह” मैथिलक लेल मैथिली साहित्यक नवीन आन्दोलनक प्रारम्भ कएने अछि। प्रिंट फॉर्ममे, ऑडियो-विजुअल आ सूचनाक सभटा नवीनतम तकनीक द्वारा साहित्यक आदान-प्रदानक लेखकसँ पाठक धरि करबामे हमरा सभ जुटल छी। नीक साहित्यकेँ सेहो सभ फॉरमपर प्रचार चाही, लोकसँ आ माटिसँ स्नेह चाही। “विदेह” एहि कुप्रचारकेँ तोड़ि देलक, जे मैथिलीमे लेखक आ पाठक एके छथि। कथा, महाकाव्य,नाटक, एकाङ्की आ उपन्यासक संग, कला-चित्रकला, संगीत, पाबनि-तिहार, मिथिलाक-तीर्थ,मिथिला-रत्न, मिथिलाक-खोज आ सामाजिक-आर्थिक-राजनैतिक समस्यापर सारगर्भित मनन। “विदेह” मे संस्कृत आ इंग्लिश कॉलम सेहो देल गेल, कारण ई ई-पत्रिका मैथिलक लेल अछि, मैथिली शिक्षाक प्रारम्भ कएल गेल संस्कृत शिक्षाक संग। रचना लेखन आ शोध-प्रबंधक संग पञ्जी आ मैथिली-इंग्लिश कोषक डेटाबेस देखिते-देखिते ठाढ़ भए गेल। इंटरनेट पर ई-प्रकाशित करबाक उद्देश्य छल एकटा एहन फॉरम केर स्थापना जाहिमे लेखक आ पाठकक बीच एकटा एहन माध्यम होए जे कतहुसँ चौबीसो घंटा आ सातो दिन उपलब्ध होअए। जाहिमे प्रकाशनक नियमितता होअए आ जाहिसँ वितरण केर समस्या आ भौगोलिक दूरीक अंत भऽ जाय। फेर सूचना-प्रौद्योगिकीक क्षेत्रमे क्रांतिक फलस्वरूप एकटा नव पाठक आ लेखक वर्गक हेतु, पुरान पाठक आ लेखकक संग, फॉरम प्रदान कएनाइ सेहो एकर उद्देश्य छ्ल। एहि हेतु दू टा काज भेल। नव अंकक संग पुरान अंक सेहो देल जा रहल अछि। विदेहक सभटा पुरान अंक pdf स्वरूपमे देवनागरी, मिथिलाक्षर आ ब्रेल, तीनू लिपिमे, डाउनलोड लेल उपलब्ध अछि आ जतए इंटरनेटक स्पीड कम छैक वा इंटरनेट महग छैक ओतहु ग्राहक बड्ड कम समयमे ‘विदेह’ केर पुरान अंकक फाइल डाउनलोड कए अपन कंप्युटरमे सुरक्षित राखि सकैत छथि आ अपना सुविधानुसारे एकरा पढ़ि सकैत छथि।
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'विदेह' २२८ म अंक १५ जून २०१७ (वर्ष १० मास ११४ अंक २२८)

ऐ  अंकमे अछि :- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१. डॉ. कैलाश कुमार मिश्र -  गौरी चोरनी ,  गौरी डाईन आ गौरी छिनारि: मधुश्रावणी कथा केर ...