Sunday, October 14, 2012

'विदेह' ११६ म अंक १५ अक्टूबर २०१२ (वर्ष ५ मास ५८ अंक ११६) PART I


                     ISSN 2229-547X VIDEHA
'विदेह' ११६ म अंक १५ अक्टूबर २०१२ (वर्ष मास ५८ अंक ११६)India Flag Nepal Flag

 

अंकमे अछि:-

. संपादकीय संदेश


. गद्य








. पद्य









...BalMukundPathakबाल मुकुन्द पाठक- किछु गजल २.SandipKumarSafiसन्दीप कुमार साफी- दूटा कविता

...Vinit_Utpalविनीत उत्पल- गजल .Anil_Mallikअनिल मल्लिक- गजल ३.KrishnaKumarRoyKishanकिशन कारीगर- (हास्य कविता)

. मिथिला कला-संगीत . JyotiJhaChaudharyज्योति झा चौधरी २.RajnathMishraराजनाथ मिश्र (चित्रमय मिथिला) . UmeshMandal2उमेश मण्डल (मिथिलाक वनस्पति/ मिथिलाक जीव-जन्तु/ मिथिलाक जिनगी)

बालानां कृते-.ShivJhaशि‍वकुमार झा टि‍ल्‍लू’- बिना रदीफक बाल-गजल .munnikumarivarmaमुन्नी कामत- किछु बाल कविता .AmitMishraअमित मिश्र- बाल गजल .JagdanandJhaजगदानन्द झा मनु- माटिक बासन

 

भाषापाक रचना-लेखन -[मानक मैथिली], [विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary.]


विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ( ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी मे ) पी.डी.एफ. डाउनलोडक लेल नीचाँक लिंकपर उपलब्ध अछि। All the old issues of Videha e journal ( in Braille, Tirhuta and Devanagari versions ) are available for pdf download at the following link.

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example

ज्योतिरीश्वर पूर्व महाकवि विद्यापति। भारत आ नेपालक माटिमे पसरल मिथिलाक धरती प्राचीन कालहिसँ महान पुरुष ओ महिला लोकनिक कर्मभमि रहल अछि। मिथिलाक महान पुरुष ओ महिला लोकनिक चित्र 'मिथिला रत्न' मे देखू।

example

गौरी-शंकरक पालवंश कालक मूर्त्ति, एहिमे मिथिलाक्षरमे (१२०० वर्ष पूर्वक) अभिलेख अंकित अछि। मिथिलाक भारत आ नेपालक माटिमे पसरल एहि तरहक अन्यान्य प्राचीन आ नव स्थापत्य, चित्र, अभिलेख आ मूर्त्तिकलाक़ हेतु देखू 'मिथिलाक खोज'


मिथिला, मैथिल आ मैथिलीसँ सम्बन्धित सूचना, सम्पर्क, अन्वेषण संगहि विदेहक सर्च-इंजन आ न्यूज सर्विस आ मिथिला, मैथिल आ मैथिलीसँ सम्बन्धित वेबसाइट सभक समग्र संकलनक लेल देखू "विदेह सूचना संपर्क अन्वेषण"
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"मैथिल आर मिथिला" (मैथिलीक सभसँ लोकप्

ऐ बेर युवा पुरस्कार(२०१२)[साहित्य अकादेमी, दिल्ली] लेल अहाँक नजरिमे कोन कोन लेखक उपयुक्त छथि ?

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श्रीमती ज्योति सुनीत चौधरीक अर्चिस” (कविता संग्रह)  25.56%   
 
श्री विनीत उत्पलक हम पुछैत छी” (कविता संग्रह)  7.22%   
 
श्रीमती कामिनीक समयसँ सम्वाद करैत”, (कविता संग्रह)  5.56%   
 
श्री प्रवीण काश्यपक विषदन्ती वरमाल कालक रति” (कविता संग्रह)  3.89%   
 
श्री आशीष अनचिन्हारक "अनचिन्हार आखर"(गजल संग्रह)  25.56%   
 
श्री अरुणाभ सौरभक एतबे टा नहि” (कविता संग्रह)  6.11%   
 
श्री दिलीप कुमार झा "लूटन"क जगले रहबै (कविता संग्रह)  6.67%   
 
श्री आदि यायावरक भोथर पेंसिलसँ लिखल” (कथा संग्रह)  5.56%   
 
श्री उमेश मण्डलक निश्तुकी” (कविता संग्रह)  12.22%   
 
Other:  2%   
 
 
 

ऐ बेर अनुवाद पुरस्कार (२०१३) [साहित्य अकादेमी, दिल्ली] लेल अहाँक नजरिमे के उपयुक्त छथि?

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श्री नरेश कुमार विकल "ययाति" (मराठी उपन्यास श्री विष्णु सखाराम खाण्डेकर)  31.3%   
 
श्री महेन्द्र नारायण राम "कार्मेलीन" (कोंकणी उपन्यास श्री दामोदर मावजो)  12.17%   
 
श्री देवेन्द्र झा "अनुभव"(बांग्ला उपन्यास श्री दिव्येन्दु पालित)  11.3%   
 
श्रीमती मेनका मल्लिक "देश आ अन्य कविता सभ" (नेपालीक अनुवाद मूल- रेमिका थापा)  20.87%   
 
श्री कृष्ण कुमार कश्यप आ श्रीमती शशिबाला- मैथिली गीतगोविन्द ( जयदेव संस्कृत)  13.04%   
 
श्री रामनारायण सिंह "मलाहिन" (श्री तकषी शिवशंकर पिल्लैक मलयाली उपन्यास)  10.43%   
 
Other:  0.87%   
 

फेलो पुरस्कार-समग्र योगदान २०१२-१३ : समानान्तर साहित्य अकादेमी, दिल्ली

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श्री राजनन्दन लाल दास  46.6%   
 
श्री डॉ. अमरेन्द्र  32.04%   
 
श्री चन्द्रभानु सिंह  19.42%   
 
Other:  1.94%   
 

 

1.संपादकीय


समन्वय २-४ नवम्बर २०१२ इण्डिया हैबीटेट सेन्टर भारतीय भाषा महोत्सव SAMANVAY 2-4 November 2012 IHC INDIAN LANGUAGES' FESTIVAL
-समन्वय २०१२: भारतीय लेखनक उत्सव:२-४ नवम्बर २०१२: (इण्डिया हैबीटेट सेन्टर भारतीय भाषा महोत्सव)
-एकर साइट अछि http://samanvayindianlanguagesfestival.org
-समन्वयक छथि सत्यानन्द निरूपम आ गिरिराज कराडू
-उत्सवक निदेशक छथि- राज लिबरहान
-उत्सवक एडवाइजरी बोर्डमे छथि-आलोक राय, के.सच्चिदानन्दन, लक्ष्मण गायकवाड, ओम थानवी, महमूद फारूकी, ममता सागर, रवि सिंह, सीतांशु यशचन्द्र, तेमशुला आओ।
-आयोजन कमेटीमे छथि- १.इण्डिया हैबीटेट सेन्टरक प्रोग्राम टीम, २.पारस नाथ, अनन्त नाथ।
-सहयोगी छथि, दिल्ली प्रेस आ प्रतिलिपि बुक्स।
-समन्वय २०११ मे मैथिलीक प्रतिनिधित्व केने रहथि- गंगेश गुंजन। http://samanvayindianlanguagesfestival.org/2011/gangesh-gunjan/


समन्वय २-४ नवम्बर २०१२ SAMANVAY 2-4 November 2012
 IHC INDIAN LANGUAGES' FESTIVAL
Venue: Indian Habitat Centre, Lodhi Road, New Delhi -- 110 003

 
SAMANVAY 2012
Venue: Indian Habitat Centre, Lodhi Road, New Delhi -- 110 003
2 November 2012
Afternoon
4.00- 4.30: Inauguration
By Chandrashekhar Kambar, Ratan Thiyam
4.45 – 5.45: Opening Session: Boli is Back
Speakers: Ratan Thiyam, Kashinath Singh, Gurvinder Singh, Nilesh Mishra
Moderator: Alok Rai
6.00 – 7.00: Opening Reading
Nabaneeta Dev Sen, Sitanshu Yashaschandra, Udaya Narayana Singh, Mamang Dai, Arun Kamal, Arjun Deo Charan, Narender Singh Negi
7.15 – 8.15: Evening Performance
Ugana re: Vidyapati by Shovana Narayanan
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3 Nov 2012
10.30-11.30: Manipuri: The Idea of Nation
Speakers: Yumlembam Ibomcha, Dr. Dhanabir Laishram, Bijoykumar Tayenjam
Moderator: Robin Ngangom
11.45-12.15: Interaction: Mapping Cities
Kashinath Singh, Laxman Gaikwad, Om Thanvi
12.30-1.30 Maithili: Love’s Own Language
Speakers: Uday Narayan Singh, Dev Shankar Naveen, Gajendra Thakur
Moderator: Arvind Das
2.30 -3.30 Kannada: Tales of Modernities: Small Spaces, Big Ideas
Speakers:Gopalkrishna Pai, Banu Mushtaq, B.T. Jahnavi
Moderator: Mamta Sagar
3.45-4.15 Interaction
Munawwar Rana
4.30-5.30 English: Where’s My Reader?
Speakers: Palash Krishna Mehrotra, Biman Nath, S.Hussain Zaidi, Madhuri Banerjee
Moderator: Jai Arjun Singh
5.45-6.30: Future of Indian Languages Publishing in Digital Era
Speakers:Akshay Pathak, Prem Prakash, Shiva Kumar
Moderator: Rahul Dixit
7.00-8.30 Evening Performance: Kashmiri Sufiyana Kalam
Gulzar Ahmad Ganie and party
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4 November 2012
10.00-11.00 Oriya: Reclaiming Language, Space and Body: Women Writing
Speakers: Pratibha Ray, Sarojini Sahoo, Yashodhara Mishra, Aparna Mohanty
Moderator: Paramita Satpathy
11.15- 12.15: Folk Performance: Pad Dangal
Jagan, Dhavale and others
Introduction: Prabhat
12.30-1.30 Marathi: The City of No Outsiders Mumbai
Speakers: Arun Sadhu, Hemant Divate
Moderator: Prakash Bhatambrekar
2.30-3.30 Kashmiri: My Reality, My Language
Speakers: Shahnaz Rasheed, Gulshan Badrani, Elyas Azad
Moderator: Nisar Azam
14 3.45-4.15: Interaction
Girish Kasaravali, Banu Mushtaq, Mamta Sagar
4.30-5.30: Hindi: Culture and Power: A Tale of Seven Cities (Allahabad, Benares, Bhopal, Delhi, Kolkata, Lahore, Patna)
Speakers: Kashinath Singh, Ashok Vajpeyi, Arun Kamal, Alka Saraogi
Moderator: Neelabh
5.45- 6.30: Mind Your Language
Speakers: Sneha Khanwalkar, Varun Grover, Ratan Rajpoot, Simran Kohli
Moderator: Vineet Kumar
6.30 – 7.00: Award Ceremnoy and Closing
Speakers: K. Satchidanandan, Raj Liberhan, Paresh Nath, Anant Nath, Satyanand Nirupam, Giriraj Kiradoo
7.15 – 8.30: Evening Performance
Solo by Rabbi Shergill



चीनक लेखक "मो यान (लेखकीय नाम मो यान, वास्तविक नाम गुआन मोये) " केँ साहित्य लेल २०१२ क नोबल पुरस्कार देल जेतन्हि, स्वेडिश एकेडमी ११ अक्टूबर २०१२केँ ई घोषणा केलक। प्रेस कॉनफेरेन्समे कहल गेल जे "मो यान" लोकगाथा, इतिहास आ समकालीन घटनाक मिलनसँ जागल अवस्थाक आभासी(जागल अवस्थाक स्वप्न)वास्तविकताकेँ चित्रित करैत छथि। मो यान पहिल चीनक नागरिक छथि जिनका साहित्य लेल नोबल पुरस्कार देल जेतन्हि।
पूर्वी चीनक शाण्डोंग प्रान्तमे हिनकर जन्म भेलन्हि, मो यान (१९५५- ) क माता-पिता किसान छलखिन्ह। जखन ओ १२ बर्खक रहथि तखन सांस्कृतिक क्रान्तिक बाद हुनका स्कूल छोड़ि पहिने खेती आ फेर फैक्ट्रीमे काज करऽ पड़लन्हि। फेर ओ जन स्वतंत्रता सेनामे चलि गेला, हुनकर पहिल लघुकथा १९८१ ई. मे प्रकाशित भेलन्हि।
ओ अपन लेखनमे अपन युवावस्था आ अपन जन्मस्थलीक वर्णन करै छथि, जेना रेड सोर्घम- लाल ज्वारमे, ऐपर फिल्म सेहो बनल, डकैती, जापानी कब्जा आ बोनिहारक दुखद स्थितिक ऐमे विवरण अछि।
उपन्यासक अतिरिक्त हुनकर लघुकथा सभक संग्रह प्रकाशित छन्हि। मो यानक कहब छन्हि जे एकटा महान उपन्यास लिखल जाएब अखन बाकी अछि।
समारोह १० दिसम्बरकेँ हएत। पुरस्कारमे ८० लाख क्रोनर (स्वेडन) देल जाइत अछि जे लगभग दस लाख डॉलर (अमेरिका)क बराबर अछि।

ऐ बेर मूल पुरस्कार(२०१२)-विदेह भाषा सम्मान (प्रसिद्ध समानान्तर साहित्य अकादेमी पुरस्कार) श्री राजदेव मण्डल जीकेँ हुनकर कविता संग्रह "अम्बरा" लेल देल जा रहल छन्हि। राजदेव मंडल अम्बरा-कविता-संग्रह आ हमर टोल (उपन्यास) लिखने छथि। अम्बरा https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/Home/Ambara_Rajdeo_Mandal.pdf?attredirects=0  सँ आ हमर टोल https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/Home/HammarTol_Rajdeo_Mandal.pdf?attredirects=0  सँ डाउनलोड कएल जा सकैत अछि। http://www.videha.co.in/  पर भऽ रहल ऑनलाइन वोटिंगमे ऐ पोथीकेँ सभसँ बेशी वोट भेटलै। वोटिंगक परिणाम ऐ तरहेँ रहल:
श्री राजदेव मण्डलक अम्बरा” (कविता-संग्रह) 12.67%
श्री बेचन ठाकुरक बेटीक अपमान आ छीनरदेवी”(दूटा नाटक) 11.02%
श्रीमती आशा मिश्रक उचाट” (उपन्यास) 6.34%
श्रीमती पन्ना झाक अनुभूति” (कथा संग्रह) 4.68%
श्री उदय नारायण सिंह नचिकेतानो एण्ट्री:मा प्रविश (नाटक) 5.23%
श्री सुभाष चन्द्र यादवक बनैत बिगड़ैत” (कथा-संग्रह) 4.96%
श्रीमती वीणा कर्ण- भावनाक अस्थिपंजर (कविता संग्रह) 5.23%
श्रीमती शेफालिका वर्माक किस्त-किस्त जीवन (आत्मकथा) 8.54%
श्रीमती विभा रानीक भाग रौ आ बलचन्दा” (दूटा नाटक) 6.61%
श्री महाप्रकाश-संग समय के (कविता संग्रह) 5.51%
श्री तारानन्द वियोगी- प्रलय रहस्य (कविता-संग्रह) 4.96%
श्री महेन्द्र मलंगियाक छुतहा घैल” (नाटक) 9.64%
श्रीमती नीता झाक देश-काल” (कथा-संग्रह) 5.51%
श्री सियाराम झा "सरस"क थोड़े आगि थोड़े पानि (गजल संग्रह) 7.16%
Other: 1.93%
श्री राजदेव मण्डल जीकेँ बधाइ। हुनका ई सम्मान विदेह नाट्य उत्सव २०१३ क अवसरपर देल जाएत।
मैथिलीकेँ बी.पी.एस.सी.सँ हटाबै लेल लालू प्रसाद जिम्मेवार वा मैथिलीक कट्टरपंथी प्रोफेसर सभ जिम्मेवार- जखन लालू प्रसाद पहिल बेर मुख्यमंत्री बनल रहथि तखन बी.पी.एस.सी. नाम आ टाइटिलक संग बिहार प्रशासनिक/ आर्थिक/ (आ सम्भवतः वन आदि) सेवाक रिजल्ट सभ हिन्दी अखबारमे छापने रहए। मैथिल ब्राह्मण सफल उम्मीदवारसँ ई लिस्ट भरल रहए, झा-झा देखि लोक घबड़ा गेल रहए। की ९०% मार्क्स हिसाब छोड़ि मैथिली लिटेरेचरमे आबि सकैत अछि? बी.पी.एस.सी. मे एल.एस.डब्लू., भूगोल आदिक मार्क्स सेहो कोनो कोनो साल बहुत अबै छलै, मुदा एना नै, आ ओइमे कोनो एक टाइटिलकेँ फाएदा नै होइ छलै। मैथिलीक प्रोफेसर सभक मूल्यांकनमे देखाओल गेल मूर्खतासँ लालू प्रसादपर चारू दिससँ दवाब पड़लन्हि, हुनकर सामाजिक न्यायक हँसी उड़ाओल गेल आ अन्ततः हुनका बी.पी.एस.सी.सँ मैथिलीकेँ हटाबऽ पड़लन्हि। आ तखन हुनका ज्ञात पड़लन्हि जे ई तँ मैथिल ब्राह्मणोक ९०% लोकक हृदएमे कोनो शूल उत्पन्न नै कऽ सकल। जे २-४ सए गोटे प्रशासनिक/ आर्थिक/ (आ सम्भवतः वन आदि) सेवामे मैथिलीक कारणसँ गेलथि, वएह मात्र जँ कोनो मैथिली पत्रिकाक ग्राहक बनि जाथि तँ मैथिली पत्रिका सभक ई स्थिति नै रहत। मुदा ऐमेसँ ९९% केँ आइ मैथिलीसँ कोनो सरोकार नै अछि। मैथिलीक कट्टरपंथी मूर्खाधिराज प्रोफेसर सभ जातिवादिताक कारण मैथिलीक जे नोकसान पहुँचेलन्हि से इतिहास हुनका सभकेँ क्षमा नै करत।

विद्यापतिक मिथिला सांस्कृतिक परिषद द्वारा यज्ञोपवीत संस्कार आ पाग-प्रतिष्ठापन
संस्कृत आ अवहट्ठ बला विद्यापति ठक्कुरः आ कविकोकिल विद्यापतिक बीचक अन्तर "मिथिला सांस्कृतिक परिषद" आ ओइसँ जुड़ल "किशोरीकान्त मिश्र" आदि नै बुझि सकला वा नै बूझऽ चाहलन्हि। ऐतिहासिक लिखित तथ्य अछि जे गोनू झा १०५०-११५० मे भेलाह मुदा उषा किरण खान संस्कृत आ अवहट्ठबला विद्यापतिसँ हुनकर शास्त्रार्थ करबै छथि (हिन्दीक ऐतिहासिक उपन्यास सिरजनहार, भारतीय ज्ञानपीठमे)। वीरेन्द्र झा कहै छथि जे गोनू झा ५०० साल पहिने भेला आ तारानन्द वियोगी गोनू झा केँ ३०० साल पहिने भेल मानै छथि (दुनू गोटेक हिन्दीमे प्रकाशित गोनू झापर पोथी, क्रमसँ राजकमल प्रकाशन आ नेशनल बुक ट्रस्टसँ प्रकाशित) तँ विभा रानीक गोनू झापर हिन्दी पोथी (वाणी प्रकाशन) मे कुणाल गोनू झाकेँ भव सिंहक राज्यमे (१४म शताब्दी) भेल मानैत छथि। जखन पंजीमे उपलब्ध लिखित अभिलेखन गोनू झाकेँ संस्कृत आ अवहट्ठबला विद्यापतिसँ दस पीढ़ी पहिने अभिलेखित करैत अछि, तखन ई हाल अछि।
समानान्तर परम्पराक विद्यापति आ पाग- विद्यापतिक संस्कृत ग्रन्थमे ठक्कुर विद्यापति कृता लिखल अछि/ आ ओ विद्यापति ब्राह्मण छथि। हमर उद्देश्य मैथिली पदावली बला विद्यापतिसँ अछि, हुनका किए पाग पहिरा कऽ "हम्मर विद्यापति" बना लेल गेल। ई तखन नै भेल जखन बिदापत नाचक माध्यमसँ आठ सए बर्ख गएर ब्राह्मण समुदाय विद्यापतिकेँ जिएने रखलक, मुदा तखन भेल जखन बंगाल विद्यापति आ गोविन्ददासक पदावलीकेँ अपन बना लेलक मुदा बंगालेक विद्वान राजकृष्ण मुखोपाध्याय सर्वप्रथम १८७५ ई. मे कहलन्हि जे विद्यापति मिथिलाक कवि छथि आ बंगालेक नगेन्द्रनाथ गुप्त सर्वप्रथम कहलन्हि जे गोविन्ददास सेहो मिथिलाक कवि छथि आ जखन ई तथ्य सोझाँ उठल तँ पहिने तँ सगर बंगाल हुनकापर मार-मार कऽ उठल आ बादमे मानि गेल।
राजकृष्ण मुखोपाध्याय जइ विद्यापतिकेँ मिथिलाक कहने रहथि ओ पदावलीक विद्यापतिक सन्दर्भमे छल, संस्कृत आ अवहट्ठक विद्यापति ठक्कुरः केँ बंगाल कहियो अपन नै कहने छल।
ज्योतिरीश्वरक संस्कृत धूर्तसमागम नाटक आ संस्कृत आ अवहट्ठबला विद्यापतिक गोरक्षविजय नाटक मध्य देल मैथिली गीत सेहो पदावलीक पुरान परम्पराक द्योतक अछि आ ऐ दुनू लेखकपर मैथिली पदावलीक प्रभाव देखबैत अछि।
फेर मिथिलाक विद्वानकेँ सोह एलन्हि आ विद्यापतिक संस्कृत-अवहट्ठ ग्रन्थ, गोविन्ददास नाम्ना आ विद्यापति नाम्ना पञ्जीमे उपलब्ध विवरण दऽ विद्यापति ठाकुर आ गोविन्ददास झा (!!!) निकालल गेल, एतऽ रमानाथ झाक पञ्जीक सतही ज्ञान आ सीमित दृष्टिकोण नोकसान पहुँचेलक। फेर अनचोक्के पाग पहिरा कऽ (मिथिला सांस्कृतिक परिषद- ई संस्था भारतक स्वतंत्रताक बाद विद्यापतिकेँ पाग पहिरा कऽ हुनका ब्राह्मण घोषित करबाक कुकृत्य केलक) विद्यापति (मैथिली बला, संस्कृत बला नै) केँ "हम्मर विद्यापति" ब्राह्मण वर्ग द्वारा बना लेल गेल। मुदा कवीश्वर ज्योतिरीश्वर सन बहुत रास कवि पञ्जीमे उपलब्ध छथि। आ जे नामक अन्तर विद्यापतिमे आबि जाइ छन्हि (जखन कि सभ काज प्लानिंगसँ भेलै तैयो एकटा सबूत बचि गेलै) से ज्योतिरीश्वरमे किए नै अबैए।
आब आउ गएर ब्राह्मण द्वारा गाओल बिदापत, जे ज्योतिरीश्वरसँ पूर्व (सम्भवतः) नौआ ठाकुर जातिमे भेल रहथि आ तकर प्रमाणमे ज्योतिरीश्वर द्वारा वर्णन रत्नाकरमे ऐ कविक चर्चा अछि।
विद्यापतिक कोनो पदावलीक रचनामे अपन संस्कृत/ अवहट्ठ लेखक हेबाक चर्च नै केने छथि। मुदा हुनकर रचना (संस्कृत आ अवहट्ठक विरुद्ध, जे दोसर विद्यापतिक रचना छी, जे ब्राह्मण रहथि) सर्वहाराक लेल जे दर्द अछि से संस्कृत आ अवहट्ठक विद्यापतिमे किए नै अछि? संस्कृत आ अवहट्ठक विद्यापति तँ सर्वहारासँ घृणा करै छथि आ लिखित रूपमे कट्टर ब्राह्मण छथि।
मुदा पदावलीक विद्यापति तँ निश्छल छथि, किछु कट्टर पद कट्टर ब्राह्मणवादी सम्पादक लोकनि द्वारा घोसोआओल गेल अछि (हास्यास्पद रूपमे)।
पिआ देसान्तर (विद्यापतिक बिदेसिया)क कन्सेप्ट आब सुधीगणक समक्ष अछि आ मैथिल बिदेसिया लोकनिक वर्तमान दुर्दशाक बीच ई महाकवि विद्यापतिक प्रति ससम्मान अर्पित अछि। की ई दर्द अवहट्ठ आ संस्कृतक विद्यापतिमे छन्हि?
पदावली एकटा पैरेलल संस्कृतिक द्योतक अछि। एक्के समयमे संस्कृत आ अवहट्ठ एक्के लेखक लिख लेत, ओकरा कष्ट छै जे अवहट्ठमे लिखलापर विद्वान ओकर उपहास करै छथि, मुदा ई दर्द की एकर लेशोमात्र पदावलीक विद्यापतिमे छन्हि? ओतए तँ उल्लास आ दर्द छै, सर्वहाराक उल्लास आ दर्द। ओ विद्यापति जे संस्कृत आ अवहट्ठ मे लिखलन्हि ओ राजपण्डित छला से विद्वान रहथि, हुनका अवहट्ठोमे लिखलापर लोक निन्दा करन्हि। मुदा मैथिलीक विद्यापति जे पैरेलल परम्पराक अंग छथि, ओइसँ दूर छला। ई पैरेलल परम्परा ऋगवेदक समयसँ छै (ओइ समयमे नाराशंसी रहै)। ई पैरेलल परम्पराक विद्यापति नौआ ठाकुर जातिक रहबे करथि, वा ब्राह्मण जातिक रहबे करथि, से इतिहास ओइपर मौन अछि।
मुदा लोककथा आ परम्परा, बिदापतक सर्वहारासँ सघन सम्बन्ध, बिस्फीक परम्परा हुनका गएर ब्राह्मण सिद्ध करैए। संस्कृत आ अवहट्ठक कोनो पाँति नहिये ओइ विद्यापतिक पदावलीक चर्चा करैए आ नहिये पदावली पदावलीक विद्यापतिक संस्कृत वा अवहट्ठ केर रचनाक चर्चा करैए। संस्कृत आ अवहट्ठ मुस्लिम आक्रमणक, जनौ आ मन्दिर भ्रष्ट हेबापर दुखी अछि मुदा पदावली तँ सर्वहाराक हर्ष, उल्लास आ संघर्ष अछि; ओइ तरहक हाक्रोस ओतए नै, हुनका समएमे तँ प्रायः मुस्लिम मिथिलामे रहबो नै करथि।आ जखन मैथिलीबला विद्यापति ब्राह्मण रहबो करथि वा नै तहीपर सवाल अछि तखन पाग पहिरा कऽ कोन सोच हम सभ पैदा कऽ रहल छी, "विद्यापति" हम्मर छलाह कि नै? की विद्यापतिक ब्राह्मण नै रहलासँ ओ हमर नै हेताह? की हुनकर "पिआ देशांतर" बला माइग्रेशन बला गीत महत्वहीन भऽ जेतै? की हुनकर शृंगारिक गीतक मात्र चर्चा कोनो षडयंत्र तँ नै? विद्यापति सन कविकेँ पाग पहिरा कऽ जातिगत बन्धनमे बान्हब कतेक सही अछि? "मध्यकालीन मिथिला"मे विजय कुमार ठाकुर लिखै छथि: "मिथिलाक धार्मिक क्षेत्रमे एहि सामन्तवादी युगीन धार्मिक विचारधाराक प्रभाव एहन सर्वव्यापी छल जे एखनहुँ एहि परम्पराक निम्नलिखित अवशेष समाजमे विद्यमान अछि: ...(घ) पाग सेहो तांत्रिक विचारधारासँ सम्बद्ध अछि।" (पृ.२६)
 तँ ईहो तंत्र मंत्र बियाह उपनयन धरि ने रहए दियौ। किए ओइ पैरेलल परम्पराक विद्यापतिकेँ ओइमे सानै छियन्हि। आ ई कुकृत्य किशोरीकान्त मिश्रक मिथिला सांस्कृतिक परिषद केलक। ऐ तरहक लोक जै मिथिलाक संस्कृतिक रक्षक, ओ संस्कृति आ भाषा जँ आइयो बाँचल छै, तँ ई ओइ संस्कृति आ भाषाक विशेषता छिऐ।
आ रामलोचन ठाकुर अही प्रतिक्रियावादी "किशोरीकान्त मिश्र"क मंचसँ मंच सापेक्ष बयान देलन्हि (उपन्यासक संख्याक सम्बन्धमे) जकर कोनो ऐतिहासिक महत्व नै छै। चेतना समितिक पत्रिकामे मानेश्वर मनुज सेहो मंच सापेक्ष बयानमे जगदीश प्रसाद मण्डलक उपन्यासक संख्या मात्र ४ लिखलन्हि!!!
जगदीश प्रसाद मण्डलक नाममे जँ मण्डल टाइटिल नै रहैत मात्र जगदीश प्रसाद रहैत तँ रमानाथ झाक अनुयायी हुनका श्रोत्रिय, अमर-रामदेव झाक अनुयायी हुनका ब्राह्मण आ "लालदासक स्मारिका"क लेखक वर्मा जी हुनका कायस्थ घोषित कऽ दैतथि।
आ ्जँ जगदीश प्रसाद मण्डलक फोटो उपलब्ध नै रहितै तँ किशोरीकान्त मिश्रक प्रतिक्रियावादी मिथिला सांस्कृतिक परिषद जगदीश प्रसाद मण्डलक यज्ञोपवीत संस्कार कऽ हुनका पाग पहिरा फेर वएह कुकृत्य करितए जे ओ विद्यापतिक संग एक हजार सालक बाद केलक। आ बेरमाक कोनो बुढ़बा माटिक ढिमकाकेँ देखबैत जगदीश प्रसाद "झा/ ठक्कुरः" केर काल्पनिक घराड़ी, यएह छी, घोषित कऽ दितए।
मलंगियाक बेटा, रामदेव झाक बेटा आ ढेर रास छद्मनामीक देल गाड़ि सेहो विदेहमे बिना काँट-छाँटक छपने अछि, जे लोक पढ़ि सकए, किछु गाड़ि जे नै छापल जा सकैए, सएह टा नै छपने छी। आ गारिक डरसँ अखन धरिक मैथिली आ मिथिलाक इतिहासकार ऐ विषयपर इशारा तँ केलन्हि मुदा आगाँ नै बढ़ला।

तेँ ओ ज्योतिरीश्वर(१२७५-१३५०) पूर्व विद्यापतिये रहथि से फेर सिद्ध होइए। जयदेव (लगभग १२००)क गीत-नृत्य आ किरतनियाँ ज्योतिरीश्वर पूर्व विद्यापतिक पदावली मेल खाइत अछि, संस्कृत आ अवहट्ठबला विद्यापतिक काव्य सौष्ठवसँ मेल नै खाइत अछि।

आब पुनः आबी मिथिला सांस्कृतिक परिषदक मंच जतएसँ रामलोचन ठाकुर मंच सापेक्ष बयान देलन्हि। ई परिषद विद्यापतिक यज्ञोपवीत संस्कार नै, मैथिलीक यज्ञोपवीत संस्कार केलक। ओकर विद्यापतिकेँ पहिराओल पाग, कोलकातासँ बिन्ध्येश्वर मण्डल आ श्रीकान्त मण्डलकेँ लुप्त कऽ देलक आ मैथिलीक यज्ञोपवीत संस्कार पूर्ण भऽ गेल।
संस्कृत आ अवहट्ठबला विद्यापतिक जातिगत कट्टरताक बानगी देखी:-
कीर्तिलता- जाति-अजातिक विवाह अधम कएँ पारक।
पुरुष-परीक्षामे विद्यापति कथा कहैत-कहैत लेखकीय वक्तव्य दै छथि कि राजपूतक स्त्री चरित्रहीन होइत अछि, ई ओहिना भेल जेना अथर्ववेदमे शूद्रक पत्नीकेँ बिना स्वीकृतिक कियो हाथ पकड़ि लऽ जा सए बला वक्तव्य। संस्कृत आ अवहट्ठबला विद्यापति जाति-अजातिपर विशेष बल दै छथि, रक्त शुद्धता/ जाति हुनका लेल महत्वपूर्ण छन्हि। संस्कृत आ अवहट्ठबला विद्यापति कहै छथि- अकुलीन कोनो दयाक अधिकारी नै अछि!! आ सौन्दर्य मात्र धनिक आ विशिष्ट वर्गक एकाधिकार अछि!! संस्कृत आ अवहट्ठबला (किशोरीकान्त मिश्रक मिथिला सांस्कृतिक परिषदक जनौ आ पागबला) विद्यापति कहै छथि- जाति सामाजिक जीवनमे अन्तिम निर्धारक तत्व अछि। जे खराप कुलमे जन्म लैए ओ दुष्ट दिमागक साँप मात्र बनि सकैए!! किशोरीकान्त मिश्रक मिथिला सांस्कृतिक परिषदक जनौ आ पागबला संस्कृत आ अवहट्ठबला विद्यापति कहै छथि- ओ देश जतऽ जातिक निअम लागू नै होइए से म्लेच्छ देश थिक( Aspects of Society and Economy of Medieval Mithila)- Upendra Thakur
अमीर खुसरोसँ पहिने पागक वर्णन हमरा नै भेटल अछि।
मुदा ज्योतिरीश्वर पूर्व विद्यापति (पदावलीक लेखक) कहै छथि:- नृप इथि काहु करथि नहि साति।
पुरख महत सब हमर सजाति॥
ताहि द्वारे राजा ककरो दण्ड नहि दैत छथि आ सभटा पैघ लोक एके रंग छथि।
गोविन्ददासक पद्यो क्लिष्ट छलन्हि आ एकर समानान्तर परम्परा सेहो नै छल (सम्भवतः सवर्ण मध्य प्रचलनक कारण ई दुनू चीज छल), से बिदापत नाच जकाँ ओ एतुक्का माँटिमे संरक्षित नै भऽ सकल। गंगेश उपाध्यायक तत्त्वचिन्तामणिक चर्चा मुदा वर्धमान जे हुनका सुकविकैरवकाननेन्दुः कहै छथि, ओ कविता सभ कतऽ गेल? पक्षधर लिखैपर प्रतिबन्ध लगेलन्हि मुदा रघुनाथ शिरोमणि आ हुनकर शिष्य उदयनगंगेशक कृतिकेँ रटि कऽ चलि गेलाह आ नवद्वीपमे नव्य-न्याय स्कूलक स्थापनाक संगे बंगालसँ विद्यार्थी एनाइ बन्द भऽ गेल।
ज्योतिरीश्वर पूर्व विद्यापति:- कश्मीरक अभिनव गुप्त (दशम शताब्दीक अन्त आ एगारहम शताब्दीक प्रारम्भ)- ग्रन्थ ईश्वर प्रत्याभिज्ञा- विभर्षिणीमे विद्यापतिक उल्लेख करै छथि।
श्रीधर दासक सदुक्तिकर्णामृत, - श्रीधर दास विद्यापतिक पाँच टा पद उद्धृत केने छथि जे विद्यापतिक पदावलीक भाषा छी।
जाव न मालतो कर परगास
तावे न ताहि मधुकर विलास।
मुन्दला मुकुल कतय मकरन्द
(मध्यकालीन मिथिला, उपेन्द्र ठाकुर)
ज्योतिरीश्वर (१२७५-१३५०)  षष्ठः कल्लोल- ॥अथ विद्यावन्त वर्णना॥….. विदातञो आस्थान भीतर भउ. तका पछा तेलङ्गी. मरहठी. वि।दओतिनी दुइ चित्रकइ गाङ्ग जउन निहालि अइसनि देषुअह. चउआञ्चरि चीरि एकहोङ्क परिहने …….से कइसन देषु. जइसे प्रयागक्षेत्र सरस्वतीकेँ गङ्गाजमुनाक सम्वाहि। का हो तइसे ता विदाञोतके दुअओ सम्वाहिका हो भउअह . दशञुन्धी राजा अवधान कराउ. विदाञोत आस्थान वइसु.
(विदाञोत (पुरुख) भीतर भेल, तकर पाछाँ तेलङ्गी, मरहठी। विदओतनी (स्त्री) दूटा रंगक गङ्गा यमुनामे नहायलि एहन देखाइए। चारि-चारि आँचरबला चीर एकहकटा पहिरने। से केहन देखू. जेना प्रयागक्षेत्र सरस्वतीकेँ गङ्गाजमुनाक संगबे तेहने ओइ विदाञोतकेँ दुनू सम्वाहिका। दशञुन्धी राजाकेँ अवधान करेलक, विदाञोत स्थानपर बैसला।
अष्टमः कल्लोलः- ॥अथ राज्य वर्णना॥ विदाञोत त।न्हिक गीत. नृत्य. वाद्य. ताल. घाघर परिठरइतेँ आह
विदाञोत लोकनिक गीत, नृत्य, वाद्य, ताल, घाघर पहीरि कऽ भेल।
उगना महादेव: महादेव (उगनारूपी) विद्यापतिक ऐठाम गीत सुनबा लेल उगना नोकर बनि रहै छलाह। मैथिलीक आदिकवि विद्यापति (ज्योतिरीश्वर पूर्व) आ विद्यापति ठक्कुरः (संस्कृत आ अवहट्ठक लेखक आ राजा शिवसिंहक दरबारी) दुनूसँ सम्बद्ध कऽ उगनाक ई कथा प्रसिद्ध भेल।
बोधि कायस्थ: विद्यापति ठक्कुरःक पुरुष परीक्षामे हिनक गंगालाभक कथा वर्णित अछि। महाकवि विद्यापति (ज्योतिरीश्वर पूर्व मैथिली पदावली सभक लेखक) क विषयमे सेहो गंगालाभक ई कथा प्रचलित छल आ बादमे विद्यापति ठक्कुरक (संस्कृत आ अवहट्ठक लेखक) विषयमे सेहो गंगालाभक ई कथा प्रचलित भेल।

विद्यापति ठक्कुरःक संस्कृत साहित्य मिथिलाक विद्वान परम्पराक लोपक बाद सोझाँ आएल, आ संस्कृत साहित्यमे विद्यापति ठक्कुरःक कोनो खास चर्च नै भेटैत अछि आ बंगालक विद्यार्थीक एनाइयो कम भऽ गेल छल, जे अबितो रहथि हुनका लेल विद्यापति ठक्कुरःक संस्कृत आ अवहट्ठ साहित्य समकालीनक साहित्य छल जे खतम होइत विद्वता परम्पराक साहित्य छल आ सेहो तखन लिखाइये रहल छल, मुदा ज्योतिरीश्वर-पूर्व पदावली प्रसिद्धि प्राप्त कऽ लेने छल। ओइ कालक गोनू वा विद्यापतिक समय पाग रहबो करए सेहो निश्चित नै, कारण अमीर खुसरो (१२५३-१३२५) मात्र एकर चर्च केने छथि। विजय कुमार ठाकुर एकरा सामन्तवादी प्रतीक आ तंत्र मंत्रसँ सम्बद्ध मानै छथि। मुस्लिम आक्रमणक बाद अधीनस्थ सामन्तकेँ ई पहिराओल गेल हएत आ ई मुस्लिम टोपीसँ मेल खाइतो अछि, आ मात्र ब्राह्मण-कायस्थ मुस्लिम आक्रमणक बाद मिथिलामे सामन्त रहथि (राजपूत नै) आ आइयो अही दू वर्गक बीच ई कहियो काल बियाह आदिमे प्रयुक्त होइए।
महाकवि विद्यापति- कवीश्वर ज्योतिरीश्वर(लगभग १२७५-१३५०)सँ पूर्व (कारण ज्योतिरीश्वरक ग्रन्थमे हिनक चर्च अछि), मैथिलीक आदि कवि। संस्कृत आ अवहट्ठक विद्यापति ठक्कुरःसँ भिन्न। सम्भवतः बिस्फी गामक नौआ ठाकुर श्री महेश ठाकुरक पुत्र (परम्परा अनुसार)। समानान्तर परम्पराक बिदापत नाचमे विद्यापति पदावलीक (ज्योतिरीश्वरसँ पूर्वसँ) नृत्य-अभिनय होइत अछि।
विद्यापति ठक्कुरः १३५०-१४३५ विषएवार बिस्फी-काश्यप (राजा शिवसिंहक दरबारी) आ संस्कृत आ अवहट्ठ लेखक। कीर्तिलता, कीर्तिपताका, पुरुष परीक्षा, गोरक्षविजय, लिखनावली आदि ग्रंथ समेत विपुल संख्यामे कालजयी रचना। ई मैथिलीक आदिकवि विद्यापति (ज्योतिरीश्वर पूर्व)सँ भिन्न छथि।
जगदीश प्रसाद मण्डल- एकटा बायोग्राफी...
भुमहुर आगि‍ जकाँ गामक राजनीति तरेतर जोड़ पकड़ए लागल। भगवती‍ स्‍थान अगुआएल। तइ संग एकटा आरो भेल। आरो ई भेल जे खुदरा-खुदरी सभ कि‍यो सभ-स्‍थान (देव स्‍थान) अबै-जाइ छलाह मुदा मने-मन बँटाएल छलाह। खाली डि‍हवारे स्‍थान सार्वजनि‍क बूझल जाइ छल। जेकर स्‍पष्‍ट रूप बि‍‍आह, मूड़न, उपनैन इत्‍यादि‍मे देखल जाइत अछि‍। डि‍हवार स्‍थान एकहरे वंशक स्‍थापि‍त कएल अछि‍। दुर्गापूजा एकहरे दि‍यादकेँ तोड़लक। भेल ई जे एकहरे परि‍वार (दि‍यादी) गामक ब्राह्मणमे सभसँ नमहर दि‍यादी अछि जे दू टोलमे वि‍भाजि‍त छथि‍। उत्तरवारि‍ टोल आ दछि‍नवारि‍ टोल। बड़की पोखरि‍क उत्तरवरि‍यो आ दछि‍नवरि‍यो महारपर दुर्गापूजा होइत अछि‍। पोखरि‍ बीचमे सीमा अछि। गामक सीमा (टोल-टोलक) गजपटे रहि‍ गेल। जना आन-आन गाममे कतौ सड़क सीमा होइए तँ कतौ स्‍कूल, से नै भेल। पानि‍येमे सीमा गड़ा गेल। उत्तरवारि‍ दुर्गा-स्‍थानक अगुआइ बेरमा नि‍वासी मधेपुर ब्‍लौकक प्रमुख आ जगदरक नथुनी सि‍ंह केलनि‍। प्रमुख गामक भगि‍नमान, तँए एकहरे परि‍वारमे गुन-गुनी उठल। मुदा दुनू गोटे माने प्रमुखो आ नथुनि‍यो सि‍ंह एकहरे परि‍वारसँ दुर्गाक माटि‍ लेलनि‍। दछि‍नवारि‍ टोलक एकहरे अपन स्‍थान बूझि‍ दस-आना छ-आना हुअए लगलाह। आबाजाहीमे बढ़ोतरी भेल। भोज-भात सेहो बढ़ल। ओइ समए बचनू मि‍श्र जे राजनीति‍क दृष्‍टि‍सँ माटि‍ धऽ नेने छलाह। आर्थिक वि‍षमता रहबे करनि‍। ओना चारि‍ भाँइक भैयारी छलनि‍। चारू भाँइ गामक सेसर देहबला माने हाड़-काठक। मुदा मुकदमामे ओझरा गेल रहथि‍। दछि‍नवारि‍ टोलक एकहरे परि‍वारमे बचनू मि‍श्रक नीक पइठ रहनि‍। ओ दि‍न-राति‍ एकबट्ट कऽ दछि‍नवरि‍या दुर्गाक माटि‍ सेहो एकहरे परि‍वारसँ लि‍औलनि‍। एकहरे परि‍वार वि‍भाजि‍त भऽ गेल। ब्राह्मण बँटा गेला, जइसँ पूजा-पाठक कोनो अभाव कहि‍यो नै भेल अछि‍। अही बीच कपलेश्वर राउतक बाबा मरलनि‍। पुरोहि‍त अपन ललकारा भरलनि‍। लड़ाइ फँसि‍ गेल। लड़ाइ ई फँसल जे एक दि‍स पुरोहि‍त अपन शक्‍ति‍ देखबए लगलाह तँ दोसर दि‍स कपि‍लेश्वर अड़ि‍ कऽ ठाढ़ भऽ गेल। मुदा पाँचे-सात दि‍नक बीच (सराध-मृत्‍युक बीच) इलाका गनगना गेल। मृत्‍यु दि‍न वि‍वाद तँ नै उठल मुदा नव चेतना जरूर जागल। नव चेतना ई जे पार्टीक भीतर बंधनक रूपमे जि‍नगीकेँ पकड़लक, मृत्‍युक समाचार सुनि‍ते लोकक ढबाहि‍ लागि‍ गेल, जना समस्‍ये हरा गेल। कि‍यो कपड़ा कि‍नए गेल, कि‍यो बाँस काटि‍ चचरी बनबए लागल, कि‍यो अछि‍या खुनए गेल। बजरूआ करखाना जकाँ कारोबार चलल। मुदा जहि‍ना एक कम्‍पनीक इंजनक पार्ट दोसर कम्‍पनीक लगौने अनेरो खड़खड़ाइत-झड़झड़ात रहैत अछि‍ तहि‍ना शुरूहेसँ हुअए लागल। चचरी बनबैसँ पहि‍ने बाँस कटैमे रक्का-टोकी शुरू भेल। रक्का-टोकीक मूल कारण भि‍न्न-भि‍न जाति‍क भि‍न्न-भि‍न्न वि‍धि‍-वि‍धान। मुदा संयोग तँ एहेन भेल जे सभ टोलक लोक एकठाम पहुँच गेलाह। जहि‍ना गजेरी धुआँक गंध लगि‍ते प्रेमी दि‍स आँखि‍ उठा-उठा देखए लगैए तहि‍ना जइ काजक जे प्रेमी ओ अपन-अपन प्रेमी दि‍स ताकए लगलाह। मुदा ऐ बातपर सभ सहमत जे जइ जाति‍क काज छी हुनकर महत बेसी होइ। घरबैया (कपि‍लेश्वर तीनू भाँइ) कुबेरक खजाना खोलने। जइ काजमे जे जरूरति‍ होइ, पुछैक कोनो खगता‍ नै। अपन गाछी-कलम अछि‍, बँसबारि‍ अछि‍। तीनटा बाँस चचरी ले कटल। चचरी बनबै काल केहेन बल्‍ला आ फट्ठा होइ, तइले फेर रक्का-टोकी उठल। मुदा पार्टीक भीतर एहेन-एहेन नेता रहथि‍ जे घरहटि‍यो रहथि‍। तँए हुनके जुति‍सँ चचरी बनल। फेर लकड़ी कटैमे झंझट उठल। एकटा शीशोक (जइमे सारी नै भेल रहै) सूखल गाछ। जइसँ काज चलि‍ सकै छल। मुदा भेल ई जे बि‍ना बुझने-सुझने अपने फुरने दू गोटे फड़ैबला आमेक गाछ काटि‍ कऽ खसा देलक। मुदा कएले कि‍ जा सकैए। सूखल जरनाक सेहो जरूरत अछि‍ये, ओहो शीशो कटाएल। तीन-चारि‍ दि‍न तक डोम लकड़ी उघि‍ते रहि‍ गेल। खैर जे होउ..। मुदा सैकड़ो आदमी एकठाम बैसि‍ असमसान देखलक। पसाही जकाँ कोन लुत्ती कि‍महर उगि‍ कऽ पकड़ि‍ लइत, तेकर ठेकाने ने रहल। एक गोटे असमसानसँ आएल। आन गाम जाइक रहै, दाढ़ी-केश कटा कऽ चलि‍ गेल। दाढ़ी केश तेसर दि‍न कटाइ छै, तहि‍ना सीमा टपैक बात सेहो उठल। जना सौंसे गाम रंग-बि‍‍रंगक पसाही लागि‍ गेल। कोनो एक मुँहरी गप नै, सभ गड़ि‍मुड़ाह। केकरो मुँह कि‍म्हरो तँ केकरो नांगड़ि‍ कि‍म्हरो। मुदा ललकाराक मैदानमे तँ ललकरे जोर पकड़ै छै। तँए कि‍यो अपना तर्ककेँ वि‍तर्क-कुतर्क मानैले तैयारे नै। मुदा जहि‍ना कलकत्ता सड़कपर गाड़ीपर गाड़ी, लगले रहै छै तहि‍ना तते समस्‍या (गप-सपक क्रममे) उठए लागल जे गप्‍पे-गपमे ओझरा जाइ छल। कोनो घटनाक गप कोनो घटनामे मि‍लि‍ जाए। जहि‍ना दू देशक बीच लड़ाइमे सीमा कातक लोककेँ नीन हराम भऽ जाइ छै तहि‍ना गामक लोकक बीच भऽ गेल। पहि‍ल दि‍न बहुतो गोटे नै बूझि‍ पेला, दोसर दि‍न पता चललनि जे कि‍छु गोटे जहि‍ना अपन कुरहड़ि‍‍-टेंगारी लऽ कऽ गेल रहथि‍ ओ संगे नेने चलि‍यो एला, चलनि‍ अछि‍ जे तेराइत तक सभकेँ छुतका लागि‍ जाइ छै, तँए तीन दि‍न ओहो सभ कि‍छु ने करत। जे सभ कुरहड़ि‍‍-टेंगारी लऽ कऽ आएल रहथि‍ हुनका जगदीश प्रसाद मण्डल पुछलखिनजे कि‍अए अनलि‍ऐ? ओ सभ जबाब देलखिन‍ जे झंझारपुरबला पार्टीक (लकड़ी कारोबार केनि‍हार) कुरहड़ि‍‍ छि‍ऐ, आइ समाज दुआरे काज कामै केलौं, जँ कुरहड़ि‍ बरदा जाइत तखन तँ काजे बन्न भऽ जइतए। तही बीच एक गोटा बाजि‍ उठलाह जे आन गामक कुरहड़ि‍ भेल कि‍ने, गामक कुरहड़ि‍केँ ने छुतका लगतै आकि‍ आनो गामक ओजारकेँ छुतका लागत। मुदा कुरहड़ि‍बला गप ओते नै पकड़लक जते केशबला पकड़लक। रंग-रंगक गप चलए लागल। तेरहा सराध होइत तँ दि‍याद-वाद सहि‍त नह-केश दि‍न केश कटौताह, तँए घरवालीकेँ कोनो मतलबे नै। समाजमे एक जाति‍क संग आनो जाति‍ आ एक टोलक संग आनो टोलक लोक रहथि‍ मुदा वैचारि‍क टकराव टोले-टोल, घरे-घर हुअए लागल। वि‍चि‍त्र स्‍थि‍ति‍ बनि‍ गेल। जहि‍ना गाममे झंझट बढ़ल तहि‍ना पंचैति‍यो बढ़ल। अधि‍क पंचैति‍यो बढ़ने झंझट कमबो कएल आ बढ़बो कएल। कि‍यो बजै छल जे जखन मुरदा जरौला बाद पोखरि‍मे नहेलौं, आंगन आबि‍ लोह-पाथर छूलौं, अपना ऐठाम आबि‍ सोहराइ वा मि‍रचाइ खा नहा कऽ कपड़ा बदलि‍ लेलौं तखन छुतका कतेटा अछि‍ जे तैयो लगले रहि‍ गेल। तँ कि‍यो बजै छल जे केश-कट्टा दि‍याद होइ छै कि‍ आनो हेतइ। तँ कि‍यो बजै छल जे काल्हि‍ये दस रूपैया दऽ कऽ केश बनौने छलौं, केना कटा लेब। गाममे गपो चलैत आ पराते भने कि‍छु गोटे केश कटा लेलनि‍। बि‍ना पनचैति‍येक पनचैती भऽ गेल जे केशमे कि‍छु लागल रहै छै जि‍नकर मन मानए कटाबए, नै मन मानए नै कटाबए। दू दि‍न एहि‍ना चलल। तेसर दि‍न छाउर-झप्‍पी हएत। अखन धरि‍ सभ (समाज) कोनो ि‍नर्णए नै केने छल जे की कएल जाए, मुदा परि‍स्‍थि‍ति‍क सामना जरूर कएल जाएत से तय छल, ई सबहक मनमे रहबे करनि‍। जखन जे समस्‍या उठत तेकर समाधान तखने करब। जइ दि‍न छाउर-झप्‍पी छल ओइ दि‍न घरवारी (कपि‍लेश्वर राउत) एकटा समांगकेँ महापात्र ऐठाम पठौलनि। बेरमामे महापात्र नै अछि, कछुबीक पुजबै छथि‍। जेहो सभ नै बाजक चाही सेहो सभ महापात्र कहि‍ ि‍नर्णए सुना देलखि‍न जे नै जाएब, कछुबीसँ आबि‍ ओ समांग बाजल। छाउर-झप्‍पीक समए भेल जाइत रहए। की कएल जाए? बि‍देश्वर ठाकुर (नौआ) बाजल जे छाउर-झप्‍पीक सभ लूरि‍ हमरा अछि‍। हम झँपबा देबै। सएह भेल। राति‍मे सराध कर्ममे पुरोहि‍तक (ब्राह्मण) ओते महत नै होइत अछि जते महापात्रक। ि‍नर्णए कि‍छु नै भेल, भेल एतबे जे जहि‍ना महापात्रकेँ कहलि‍यनि‍ तहि‍ना पुरोहि‍तोकेँ पुछि‍ लि‍अनु। सएह भेल। दोसर दि‍न जखन पुरोहि‍तकेँ पुछल गेलनि‍ तखन ओहो ओहने जबाब देलखि‍न जे नै जाएब। सभ वि‍चारि‍ये नेने रहथि‍। दि‍नेमे बेरूपहर अपनामे बैसार भेल। सर्वसम्‍मति‍ ि‍नर्णए भेल जे पुरोहि‍त-पात्र छोड़ि‍ देल जाए। सराधमे दू काज होइ छै। क्रि‍या-कर्म आ भोज। जे खर्च क्रि‍या-कर्ममे हएत ओ भोजेमे लगा दि‍औ। ओना बरइ सभ गाममे नै छथि‍, कि‍छु गनल-गूथल गाममे छथि, सभ कुटुमैतीमे सघन गूथल छथि‍। जहि‍ना शंख फूकि‍ महाभारत शुरू भेल तहि‍ना शंख फुका गेल। चौबगली गाममे समाचार पसरि गेल। आन-आन गाममे सेहो रंग-बि‍रंगक सवाल उठए लागल। कतौ उठल जे जँ क्रि‍या-कर्म नै हएत, तँ भोज नै खाएब। कतौ उठल जे कि‍यो अपन बाप-दादाक करैए तइसँ कि‍ पंचक (भोज खेनि‍हारक) मुँह छुबा जाएत। कुटुम सभ जि‍ज्ञासा करए अाबए लगलनि‍। जे आबथि‍ हुनकर जबाब होन्‍हि‍ जे सामाजि‍कता टुटने कुटुमैती थोड़े टूटि‍ जाएत। समाज बनि‍ कऽ नै कुटुम बनि‍ कऽ तँ खेबे करब। गामोमे जाति‍क बीच वि‍वाद उठल। मृत्‍युक दसम दि‍न, जइ दि‍न नह-केश कट्टी हएत। भि‍नसुरके पहर करीब आठ बजे बैसार भेल। बैसार अइले भेल जे अखन धरि‍क भोज-भात खाजा-मूंगबापर अँटकल छल। लोकक जीवन स्‍तर एत्ते नि‍च्चाँ छल। ऐठाम खाजा-मूंगबा वा लड्डू तक पहुँचल छल तँए खान-पानमे धक्का मारल जाए। तँए रसगुल्‍ला-लालमोहनक संग पर्याप्‍त दहीक बेवस्‍था हुअए। भोज-भातक ई स्‍थि‍ति‍ अखनो थोड़-थाड़ अछि‍ये मुदा पहि‍ने कि‍छु जाति‍ भोजक मामलामे बदनाम छल। एक बरतन चाह बनल, जि‍नका जते मन फुरलनि‍ से तते पीलनि‍। पान चलल, ओना पान बर्जित अछि तैयो‍। अखन धरि‍ जाति‍क ओझरी छुटि‍ चुकल छल। एगारहो गामक जाति‍ सहमत भऽ गेलाह जे भोज खाएब। वातावरणमे उठल जे कि‍यो अपन माए-बापक कि‍रि‍या-कर्म करत आकि‍ अनकर। तइसँ अनका कि‍ जे अनेरे कुटुम-परि‍वारसँ मुँह फूल्‍ली कऽ लेब। अखन धरि‍क सोझराएल काज देखि‍ सबहक मन हरि‍अर। तइपर चाहक झोंक सेहो रहए। तइमे रसगुल्‍ला-लालमोहन आगूएमे अछि‍, सभकेँ बुझले जे गौआँसँ अनगौआँ धरि‍क हि‍स्‍सा बराबरे अछि‍। गप शुरू होइते तीनू बहि‍न (बेटी) आबि‍ प्रश्न ठाढ़ केलक जे नह-केशक भोज हम करब, प्रश्न जटि‍ल भऽ गेल, तीनू कहै छै हम करब। अच्‍छा कहि‍ तीनू बहि‍नकेँ वि‍दा कएल गेल। मुदा ओझरी लगि‍ते गेल। जखन नमहर भोजक योजना बनि‍ गेल तखन छोटका-छोटकाकेँ तँ रोकए पड़त। कुबेरक भंडार तँ नै छि‍ऐ जे जते निकालब तते बढ़तै। नह-केश भोजमे खाइले केकरा देल जाइ छै ओकरे ने जे कठि‍यारी गेल रहल। भोज कथीक होइ छै, तँ भतभोज। सभ जाति‍क बीच तँ भातक चलनि‍ नै छै। तखन? एक्के काज केनि‍हारमे दू रीति‍ नीक हएत। होइत-हबाइत नह-केश दि‍नक भोजे उठाव भऽ गेल। तीनू बहि‍नकेँ कहल गेल जे भोज नमहर भइये रहल अछि‍ तेहीमे अहूँ सभ जे ि‍दअ चाहै छी से मि‍ला दि‍औ। ओते घरवारीकेँ असान हेतइ। तीनू बहि‍न राजी भऽ गेलीह। दोसर प्रश्न उठल जे पुरोहि‍त-महापात्र नै औताह तेकर की करब। कि‍यो जाति‍क पुरोहि‍त ताकए लगलाह तँ कि‍यो कि‍छु। मुदा कि‍छु आन जाति‍मे शुरू भऽ गेल मुदा से नै भेल। तँए जाति‍मे भेटबे ने कएल। कि‍छु गोटेक वि‍चार जे जखन ओ सभ (पुरोहि‍त-पात्र) एबे नै करताह तखन सोलहो आना छोड़ि‍ दि‍औ। कि‍छु गोटेक वि‍चार जे जखन गामेमे देखै छि‍ऐ राम, सदाय, पासवान इत्‍यादि‍केँ अपन सभ कि‍छु छै तखन हमहूँ सभ कि‍अए ने बना ली। तखन कि‍ हुअए? रामअवतार राउतकेँ पुजबैक भार देल गेलनि‍ आ बि‍देश्वर ठाकुर सहयोगी बनि‍ पुजा देथि‍न। पुजौल केना जाए? कोन जरूरी कोनो चीजक अछि‍, से नै तँ केरे पातपर पुजौताह आ दछि‍नामे दुनू गोरेकेँ एक-एक जोड़ धोती देल जेतनि‍। सएह भेल। सराधे दि‍न (एकादशा) भोज करैक वि‍चार भेल। भोज भलै। काफी जस भोजमे भेल। मुदा जाति‍क बीच जे रि‍एकशन भेल ओ...।
अखन धरि‍ दसो दि‍न रंग-रंगक बैसार गामसँ आन गाम धरि‍ होइते रहल। अंतमे रतीश बाबूक (नवानी) ि‍नर्णए भेल, जे जति‍या आगू पति‍या नै लगै छै।
        

सन् सैंतालीस...
भारतक स्वतंत्र त्रिवार्णिक झण्डा फहरा रहल छल।
मुदा कम्यूनिस्ट पार्टीक माननाइ छल जे भारत स्वतंत्र नै भेल अछि।
असली स्वतंत्रता भेटब बाँकी छै...
मिथिलाक एकटा गाम
जन्म भेल रहए एकटा बच्चाक.. ओही बर्ख ...
ओइ स्वतंत्र वा स्वतंत्र नै भेल भारतमे...
पिताक मृत्यु...गरीबी.. केस मोकदमा...
वंचितक लेल संघर्षमे भेटलै स्वतंत्र भारतक वा स्वतंत्र नै भेल भारतक जेल....
आइ बेरमामे पाँच-दस बीघासँ पैघ जोत ककरो नै..
ओइ गाममे जीवित अछि आइयो किसानी आत्मनिर्भर संस्कृति...
पुरोहितवादपर ब्राह्मणवादक एकछत्र राज्यक जतऽ भेल समाप्ति..
संघर्षक समाप्तिक बाद जिनकर लेखन मैथिली साहित्यमे आनि देलक पुनर्जागरण...

जगदीश प्रसाद मण्डल- एकटा बायोग्राफी...गजेन्द्र ठाकुर द्वारा (अनुवर्तते...)
अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ।

'विदेह' २२५ म अंक ०१ मई २०१७ (वर्ष १० मास ११३ अंक २२५)

ऐ  अंकमे अछि :- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१. १. राजदेव मण्‍डल -  दूटा बीहैन क था २. रबीन्‍द्र नारायण मिश...