Monday, July 30, 2012

'विदेह' १११ म अंक ०१ अगस्त २०१२ (वर्ष ५ मास ५६ अंक १११) PART I




                     ISSN 2229-547X VIDEHA
'विदेह' १११ म अंक ०१ अगस्त २०१२ (वर्ष ५ मास ५६ अंक १११)

ऐ अंकमे अछि:-
१. संपादकीय संदेश


२. गद्य


२.१.१.मुन्नाजी:बाल गजलः पुरान देहक नव चेहरा २.ओमप्रकाश झा: मैथिली बाल गजलक अवधारणा ३.जगदानन्द झा 'मनु' -बाल गजलक अवधारणा ४.आशीष अनचिन्हार- की थिक बाल गजल ५.चंदन कुमार झा- मैथिली बाल-साहित्य आ' बाल-गजल


२.२.१.योगेन्द्र पाठक ‘वियोगी’- लघुकथा- देववाणी २.नवेंदु कुमार झा- बिजलीक क्षेत्र मे आत्म निर्भरताक लेल सरकार कऽ रहल प्रयास

२.३.१.अमित मिश्र- बाल गजल: कोमल करेजक आखर २.मिहिर झा- बाल गजल

२.४.श्री राज- यात्रीक कवितामे गाम

२.५.मुन्नाजी-विहनि कथा संसार

२.६.आशीष अनचिन्हार द्वारा श्री जगदीश प्रसाद मण्डलजीसँ लेल साक्षात्कार

२.७.१. राजदेव मण्‍डल- जगदीश प्रसाद मण्‍डलक कवि‍ता संग्रह राति‍-दि‍नक समीक्षा २.डॉ. धनाकर ठाकुर- समीक्षा – फूल तितली आ तुलबुल (लेखक -श्री सियाराम झा 'सरस')

२.८.१.जवाहर लाल काश्यप- विहनि कथा- जमाना बदलि गेलै  २.जगदानन्द झा 'मनु'- विहनि कथा- मसोमात/ रहस्य ३.सुजीत कुमार झा- मिथिला पेन्टिङ्गक विदेशमे मांग बढल -छत्तामे मिथिला पेन्टिड्ड४.श्री जगदीश प्रसाद मण्डल- लघुकथा-सूदि‍ भरना


३. पद्य


३.१.१.मुन्नी कामत-सातटा कविता २.रूबी झा- बाल गजल ३.श्रीमती इरा मल्लिक-- बाल गजल

३.२.१. मुन्ना जी २.प्रशांत मैथिल-बाल गजल ३.पंकज चौधरी (नवलश्री)४.जवाहर लाल काश्यप५.क्रांति कुमार सुदर्शन

३.३.१.जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल- १.बाल गजल/ २.की भेटल आ की हेरा गेल (आत्म गीत)(आगाँ...) २.कामिनी कामायनी- चिडैक अभिलाष

३.४.१.अमित मिश्र-बाल गजल २. ओमप्रकाश झा- बाल गजल

३.५.१.शिव कुमार यादव- बाल गजल २.शिव कुमार झा- कविता/ गजल३.किशन कारीगर- हास्य कविता

३.६.चंदन कुमार झा- बाल गजल

३.७.१.जगदानन्द झा 'मनु' -बाल गजल २.राजेश कुमार झा- दूटा कविता ३. जगदीश प्रसाद मण्‍डलक किछु गीत/ कविता

३.८.१. राजीव रंजन मिश्र- बाल गजल २. मिहिर झा- बाल गजल ३.गजेन्द्र ठाकुर- बाल गजल


४. मिथिला कला-संगीत १. ज्योति झा चौधरी २.राजनाथ मिश्र (चित्रमय मिथिला) ३. उमेश मण्डल (मिथिलाक वनस्पति/ मिथिलाक जीव-जन्तु/ मिथिलाक जिनगी)



5.बालानां कृते-१.मुन्नी कामत-जड़ैत ज्योत२.पंकज चौधरी (नवलश्री)- मेघक चोर



6. भाषापाक रचना-लेखन -[मानक मैथिली], [विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary.]


7.VIDEHA FOR NON RESIDENTS
7.2.8.2.Maithili poem by Sh.Jagdish Prasad Mandal translated from Maithili into English by Sh.Vinit Utpal)
 विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ( ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी मे ) पी.डी.एफ. डाउनलोडक लेल नीचाँक लिंकपर उपलब्ध अछि। All the old issues of Videha e journal ( in Braille, Tirhuta and Devanagari versions ) are available for pdf download at the following link.
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भारतीय डाक विभाग द्वारा जारी कवि, नाटककार आ धर्मशास्त्री विद्यापतिक स्टाम्प। भारत आ नेपालक माटिमे पसरल मिथिलाक धरती प्राचीन कालहिसँ महान पुरुष ओ महिला लोकनिक कर्मभमि रहल अछि। मिथिलाक महान पुरुष ओ महिला लोकनिक चित्र 'मिथिला रत्न' मे देखू।



गौरी-शंकरक पालवंश कालक मूर्त्ति, एहिमे मिथिलाक्षरमे (१२०० वर्ष पूर्वक) अभिलेख अंकित अछि। मिथिलाक भारत आ नेपालक माटिमे पसरल एहि तरहक अन्यान्य प्राचीन आ नव स्थापत्य, चित्र, अभिलेख आ मूर्त्तिकलाक़ हेतु देखू 'मिथिलाक खोज'


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ऐ बेर मूल पुरस्कार(२०१२) [साहित्य अकादेमी, दिल्ली]क लेल अहाँक नजरिमे कोन मूल मैथिली पोथी उपयुक्त अछि ?
Thank you for voting!

श्री राजदेव मण्डलक “अम्बरा” (कविता-संग्रह)  12.5%  

श्री बेचन ठाकुरक “बेटीक अपमान आ छीनरदेवी”(दूटा नाटक)  9.88%  

श्रीमती आशा मिश्रक “उचाट” (उपन्यास)  6.69%  

श्रीमती पन्ना झाक “अनुभूति” (कथा संग्रह)  4.65%  

श्री उदय नारायण सिंह “नचिकेता”क “नो एण्ट्री:मा प्रविश (नाटक)  5.52%  

श्री सुभाष चन्द्र यादवक “बनैत बिगड़ैत” (कथा-संग्रह)  4.94%  

श्रीमती वीणा कर्ण- भावनाक अस्थिपंजर (कविता संग्रह)  5.52%  

श्रीमती शेफालिका वर्माक “किस्त-किस्त जीवन (आत्मकथा)  8.72%  

श्रीमती विभा रानीक “भाग रौ आ बलचन्दा” (दूटा नाटक)  6.98%  

श्री महाप्रकाश-संग समय के (कविता संग्रह)  5.52%  

श्री तारानन्द वियोगी- प्रलय रहस्य (कविता-संग्रह)  5.23%  

श्री महेन्द्र मलंगियाक “छुतहा घैल” (नाटक)  9.01%  

श्रीमती नीता झाक “देश-काल” (कथा-संग्रह)  5.81%  

श्री सियाराम झा "सरस"क थोड़े आगि थोड़े पानि (गजल संग्रह)  7.27%  

Other:  1.74%  

ऐ बेर युवा पुरस्कार(२०१२)[साहित्य अकादेमी, दिल्ली]क लेल अहाँक नजरिमे कोन कोन लेखक उपयुक्त छथि ?
Thank you for voting!
श्रीमती ज्योति सुनीत चौधरीक “अर्चिस” (कविता संग्रह)  27.45%  

श्री विनीत उत्पलक “हम पुछैत छी” (कविता संग्रह)  7.19%  

श्रीमती कामिनीक “समयसँ सम्वाद करैत”, (कविता संग्रह)  6.54%  

श्री प्रवीण काश्यपक “विषदन्ती वरमाल कालक रति” (कविता संग्रह)  4.58%  

श्री आशीष अनचिन्हारक "अनचिन्हार आखर"(गजल संग्रह)  18.95%  

श्री अरुणाभ सौरभक “एतबे टा नहि” (कविता संग्रह)  6.54%  

श्री दिलीप कुमार झा "लूटन"क जगले रहबै (कविता संग्रह)  7.84%  

श्री आदि यायावरक “भोथर पेंसिलसँ लिखल” (कथा संग्रह)  6.54%  

श्री उमेश मण्डलक “निश्तुकी” (कविता संग्रह)  12.42%  

Other:  1.96%  



ऐ बेर अनुवाद पुरस्कार (२०१३) [साहित्य अकादेमी, दिल्ली]क लेल अहाँक नजरिमे के उपयुक्त छथि?
Thank you for voting!
श्री नरेश कुमार विकल "ययाति" (मराठी उपन्यास श्री विष्णु सखाराम खाण्डेकर)  32.65%  

श्री महेन्द्र नारायण राम "कार्मेलीन" (कोंकणी उपन्यास श्री दामोदर मावजो)  13.27%  

श्री देवेन्द्र झा "अनुभव"(बांग्ला उपन्यास श्री दिव्येन्दु पालित)  13.27%  

श्रीमती मेनका मल्लिक "देश आ अन्य कविता सभ" (नेपालीक अनुवाद मूल- रेमिका थापा)  14.29%  

श्री कृष्ण कुमार कश्यप आ श्रीमती शशिबाला- मैथिली गीतगोविन्द ( जयदेव संस्कृत)  14.29%  

श्री रामनारायण सिंह "मलाहिन" (श्री तकषी शिवशंकर पिल्लैक मलयाली उपन्यास)  11.22%  

Other:  1.02%  





फेलो पुरस्कार-समग्र योगदान २०१२-१३ : समानान्तर साहित्य अकादेमी, दिल्ली
Thank you for voting!
श्री राजनन्दन लाल दास  53.09%  

श्री डॉ. अमरेन्द्र  24.69%  

श्री चन्द्रभानु सिंह  20.99%  

Other:  1.23%  

 


1.संपादकीय


ई अंक विदेहक बाल गजल विशेषांक अछि। विदेह प्रारम्भेसँ बाल साहित्य लेल अलग पन्ना रखने अछि, एक बेर बाल साहित्य विशेषांक सेहो निकलि चुकल अछि, मुदा बाल गजल नाम्ना नव विधापर एतेक रास आलेख आ गजल जेना आएल अछि तकर श्रेय आशीष अनचिन्हारकेँ जाइत छन्हि।
बाल गजल स्थापित भऽ बच्चा सभक कण्ठपर चढ़ए आ मैथिलीकेँ जीवन्त राखए तइ आशाक संग।

सुकान्त सोमक एकटा आएल छन्हि मिथिला दर्शनमे। ओइ आलेखमे बहुत रास गलत तथ्य अछि। अतीत मंथन २००७ सँ २००९ मे छपले नै छै से हुनका नै बुझल छन्हि। गामक जिनगी मैथिली साहित्यक सर्वश्रेष्ठ कथा संग्रह छै ई तथ्य ओ स्वीकार नै कऽ सकला। मैथिलीमे कोहुना कोनो पोथीकेँ पुरस्कार भेटौ ई घुमा कऽ कहि अपन मंशा ओ प्रकट कऽ देलन्हि। भगलपुरिया जूरीकेँ ओ दरभंगिया जूरी सन बना कऽ प्रस्तुत केलन्हि, आ अहूमे हुनकर निरपेक्षता घास चरै लेल गेल बुझाइत अछि| सुकान्त सोमकेँ बुझल छन्हि जे कार्यक्रम बंगलोर मे भेलै! जखनकि कार्यक्रम कोच्चिमे भेल रहै। सुकान्त सोम टैगोर साहित्य सम्मानकेँ रवीन्द्र पुरस्कार कहि रहल छथि!! सुकान्त सोमक अघोषित जातिवाद बहुत किछु कहि जाइत अछि।

सन् सैंतालीस...
भारतक स्वतंत्रताक त्रिवार्णिक झण्डा फहरा रहल छल।
मुदा कम्यूनिस्ट पार्टीक माननाइ छल जे भारत स्वतंत्र नै भेल अछि।
असली स्वतंत्रता भेटब बाँकी छै...
मिथिलाक एकटा गाम…
जन्म होइत अछि एकटा बच्चाक.. ओही बर्ख ...
ओइ स्वतंत्र वा स्वतंत्र नै भेल भारतमे...
पिताक मृत्यु...गरीबी..
केस मोकदमा...
वंचितक लेल संघर्षमे भेटलै स्वतंत्र भारतक वा स्वतंत्र नै भेल भारतक जेल....
आइ बेरमामे पाँच-दस बीघासँ पैघ जोत ककरो नै..
ओइ गाम मे जीवित अछि आइयो किसानी आत्मनिर्भर संस्कृति...
पुरोहितवादपर ब्राह्मणवादक एकछत्र राज्यक जतऽ भेल समाप्ति..
संघर्षक समाप्तिक बाद जिनकर लेखन मैथिली साहित्यमे आनि देलक पुनर्जागरण...
जगदीश प्रसाद मण्डल- एकटा बायोग्राफी...गजेन्द्र ठाकुर द्वारा
उन्नैस सए साठि‍क पछाति‍। केजरीबाल हाइ स्‍कूलमे नाओं लि‍खा लेने रहथि। स्‍कूल अबै-जाइक परेशानीसँ साइकि‍ल कीनैक वि‍चार परि‍वारमे भऽ गेल। ओना जखन टेन्‍थ (स्‍पेशल नाइन्‍थ) मे रहथि तखन दू सए बासठि‍ रूपैयामे सैब्रो साइकि‍ल कीनि लेलनि। मुदा जहि‍ना सीमा परक सि‍पाहीकेँ दुश्‍मन सि‍पाहीक हाथ पकड़ेलासँ होइए तहि‍ना समस्‍याक सि‍पाही चारू दि‍ससँ परि‍वारकेँ घेर लेलकन्हि। दुनू पि‍सि‍यौत भाय (जेठ गोनर मण्‍डल आ तइसँ छोट कारी मण्‍डल) केँ अपन बाप-दादाक डीह-डाबर जगलनि‍। कोसी धारक मुँह जे पछि‍म दि‍स जोर केने छलै ओ आब पूब दि‍स जोर केलक, जइसँ कि‍छु गाम जेना हरि‍नाही, मैनही अमही हरड़ी इत्‍यादि‍क गामक जमीनक कि‍छु भाग जागलै। भागल-पड़ाएल गामक लोक, अपन बाप-दादाक डूमल सम्‍पति‍क आशामे कान ठाढ़ केनहि‍ रहथि‍, गाम (हरि‍नाही) घुमबाक वि‍चार केलनि‍। बनल-बनाएल गाममे लोकक एहेन कने स्‍वार्थी प्रवृत्ति‍ बनिए‍ जाइए जे सौंसे गामक सभ कि‍छु हमरे भऽ जाए। प्रवृत्ति‍ बेजाए नै, मुदा खाली सम्‍पत्ति‍ये नै मनुक्‍खोक भार जँ उठा लेथि‍। हरि‍नाहीक कि‍यो कतौ, कि‍यो कतौ, कतौ-कतौ एहनो जे पान-सात परि‍वार एकोठाम छलाह। अपन कुटुमैतीक संग-संग नेपाल धरि‍ पसरि‍ गेल छलाह। सभसँ दुखद स्‍थि‍ति‍ गामक तखन भेल जखन सुभ्‍यस्‍त परि‍वार सबहक, जइ परि‍वारक लोक अपन घर-अंगनाक काजसँ बाहर नै भेल छलि, ओ सभ जखन बोनि‍हारि‍न बनि‍ भरि‍-भरि‍ दि‍न अनका खेतमे जि‍नका घरमे पचसमनी कोठी-बखारी सभ छलनि‍, एक पसेरी (कच्‍ची) अन्नपर अपन श्रम बेचैले मजबूर भेली। मुदा उपाये की? ई बात सत्‍य छी जे समयानुसार हाथकेँ हथि‍यार नै भेटत तँ ओ पाछू भगबे करत, हरहरा-हरहरा कऽ पाकल जामुन जकाँ हुनका सबहक जि‍नगी उतरि‍ गेलनि‍। जि‍नगीक सभ कि‍छु हराए लगलनि‍। हराइये गेलनि‍। भागल-पड़ाएल लोकक आन देश आ आन गाममे सरकारी सहायताक कते आशा होइत ओ तँ सबहक सोझहेमे अछि‍। जे अखनो गाममे ओहन गरीब लोककेँ इन्‍दि‍रा आवास नै भेट रहल छन्‍हि‍ जि‍नका अपना नामे जमीनक कागज नै छन्‍हि‍।

साठि‍ इसवीक काति‍क। अपन गाम देखैले पि‍सि‍यौत भाय गोनर मण्‍डल हरि‍नाही गेलाह। घोघरडीहामे ट्रेनसँ उतरि‍ भाँज लगौलनि‍ तँ पता लगलनि‍ जे पहि‍ने हटनी, हटनीसँ नौआ-बाखरि‍, नौआ बाखरि‍सँ अमही तेकर बाद हरि‍नाही। कते दूर हएत तँ दू कोस। दू कोस बूझि‍ मनमे उत्‍साह जगलनि‍ जे दू कोस जाइमे बेसी-सँ-बेसी दू घंटा लागतन्हि। मुदा ई नै बूझि‍ पौलनि‍ जे घोघरडीहा हटनीयेक बीच तीनटा धार पार करए पड़तन्हि। तहूमे गमैया सवारी छि‍ऐ कि‍ने, लोकेक वि‍चारे ने चलैत अछि‍। चारि‍ घंटामे हटनी पहुँचलाह। हटनी नौआ-बाखरि‍क बीचक सीमामे एकटा सेहो नीक धार माने नम्‍हर धार। सूर्यास्‍त भेलापर हरि‍नाही पहुँचलाह। गोनर मण्‍डलक एकटा दि‍याद पहि‍नहि‍ आबि‍ गेल छलाह जइसँ ओ बीघा डेढ़ेक जमीनक मालि‍क बनि‍ रसाएल खेतक उपजा पाबि‍ कुटुम-परि‍वार दि‍स सेहो ताकए लगलाह। हरि‍नाही पहुँचते दि‍यादी भाय चुल्हाइ मण्‍डलक पाहुन बनि‍ गेलाह। गरूगर रास्‍ता देखि‍ दू दि‍न रहैक आग्रह चुल्‍हाइ मण्‍डल केलखि‍न।

गामक जे पहि‍लुका बास-भूमि‍ छलन्हि ओ गहींर भऽ गेल रहै आ बाध ऊँच बनि‍ गेल छलै। मुदा ओ अखन सुपौल जि‍लाक सीमा कात। घर मधुबनी जि‍लाक हरि‍नाही गाममे आ सभ अगवास सुपौल जि‍लाक हरड़ी गाममे। जइठामक हेमलताजी छथि‍ जे फुलपराससँ वि‍धायक रहि‍ चुकल छथि‍। करीब पनरह परि‍वार आबि‍ गाममे बसि‍ गेल। तइमे दू परि‍वारक खूँटापर बड़दो आबि‍ गेल। बाकी सभ कोदारि‍क जि‍नगीमे। अपन जागल घराड़ी आ पोखरि‍ देखि‍ गोनर मण्‍डल आकर्षित भऽ गेलाह। बास जोग तँ नै मुदा चास जोग जमीन देखि‍ चुल्हाई मण्‍डलकेँ कहलखि‍न-
“भैया अगि‍ला आठम एतै छी।”
चारि‍म दि‍न बेरमा आबि‍ मामीकेँ कहलखनि‍-
“मामी, हम अपन गाम हरि‍नाही जाएब।”
मामी- “केना जेबहक?”
गोनर- “बाँस अपना अछि‍ये। एकटा लऽ जा कऽ पहि‍ने घर बनाएब तखन बूझल जेतैक।”

जहि‍ना कोनो ब्रह्मचारी ब्रह्माश्रमसँ नि‍कलि‍ दुनि‍याँ दि‍स देखि‍ते सतरंगी दुनि‍याँ देखए लगैत तहि‍ना ओहो (गोनर मण्‍डल) देखलनि‍। केना नै देखि‍तथि‍। पूर्बक हराएल गाम-घर, दि‍याद-वाद, सर-समाज जे इति‍हास बनि‍ चुकल छलनि‍, से जे सोझामे आबए लगलनि‍। ओना हुनका (गोनर मण्‍डल) एक बीघा धनहर आ अढ़ाइ कट्ठा बासक भूमि‍ माम (जगदीश प्रस मण्डल जीक पि‍ताजी) कीनि‍ देने छलखि‍न। ओहो दुनू भाँइ (गोनर मण्‍डल आ कारी मण्‍डल) हरि‍नाही बि‍सरि‍ गेल छलाह। केना नै बि‍सरि‍तथि‍ हराएलो जमीनक दस्‍ताबेज, खति‍यान जँ हाथमे छै तँ आशा बनल रहैत छै‍। जइठाम ओहो (दस्‍ताबेज, खति‍यान) नै रहल ओ तँ पानि‍क पाथर जकाँ कतए डुमल अछि‍ तेकर कोन ठेकान। आ जँ हेलबैया (पानि‍क भाँज बुझि‍नि‍हार) रहल तँ भाँजो-भुज लगा सकैए मुदा अनाड़ी तँ अनाड़ि‍ये छी।

सातम दि‍न एकटा बाँस काटि‍ पाँङि-पुङि कऽ गोनर मण्‍डल तैयार केलनि‍ जे काल्हि‍ गाम जाएब। बेरमासँ हरि‍नाही जाएब। चारि‍ दि‍न रहि‍, पहि‍ने रहै जोकर घर बना लेब, तखन आगू बूझल जेतैक। मामीकेँ गोनर मण्‍डल कहलखि‍न-
“मामी, चारि‍ दि‍न रहि‍ पहि‍ने घर बना लेब। पाँचम दि‍न फेरि‍ एतै छी।”
मामी- “बड़बढ़ि‍या, एक अढ़ैया चाउर आ एक अढ़ैया चूड़ासँ तँ काज चलि‍ जेतह?”

असमंजसमे गोनर पड़ि‍ गेलाह। जते अधि‍क बेसी खाइक ओरि‍यान करब ओते रस्‍तामे भारि‍यो हएत। एक तँ सात-आठ कोस धार-धुरक रास्‍ता, तइपर बाँस आ खेबाक समान। बहुत भारी हएत। गाममे माने बेरमामे भरि‍ पेट जलखै कऽ लेलथि‍ आ रास्‍तोले बान्‍हि‍ लेलथि‍। अपन लोटा-थारी, आ लत्ता-कपड़ा नै लेब, सेहो नै बनत। अंतमे एकटा छि‍पली, एकटा लोटा, बि‍छबैले दूटा बोरा, एक अढ़ैया-चूड़ा आ एक अढ़ैया चाउर लऽ कऽ दोसर दि‍न बि‍दा भेलाह। एक तँ ओहन भारी काज जि‍नगीमे कहि‍यो नै केने रहथि‍। हँ एते जरूर छलनि‍ जे बँसबारि‍सँ बाँस काटि‍ आ बाधसँ धानक बोझ उघि‍ कऽ अनैत छलाह तहि‍ना बाधसँ हर जोता दूगोरा चौकी अनै-लऽ जाइ छलाह, मुदा एते भारी काजसँ पहि‍ल दि‍न भेँट भेलनि‍।

बेरमासँ नि‍कलि‍ कछुबी-तमुरि‍या होइत सुन्‍दर-बि‍राजीत जाइत-जाइत बेदम भऽ गेलाह। पाछू हि‍अबैत तँ दुइये कोस टपला, आगू हि‍अबैत, तँ अखन पौनी-चपराम, कलि‍कापुर, मेटरस तँ कोसी बान्हक बाहरे भेल। मेटरसमे ने कोसी बान्‍ह टपि‍ भीतर हेता। तैयो तँ मेटरस टपि‍ दू कोस भीतरो जाइये पड़तन्हि। अबूह लागि‍ गेलनि‍। जि‍नगीक बाटमे बच्‍चा जकाँ बुकौर लागि‍ गेलनि‍। सुसतेलाक कि‍छु काल बाद फेर हूबा केलनि‍। पानि‍ पीब बाँस उठा वि‍दा भेला। मेटरस बान्‍हपर पहुँचैत-पहुँचैत धाह-जाड़ आबि‍ गेलनि‍। एहेन जगहमे के भेँट हएत? क्‍यो चि‍न्‍हारे नै। गाम-घरमे ने माए-बाप रहने बच्‍चा फोसरि‍योकेँ गुड़-घाव कहै छै मुदा नै रहने तँ गुड़ो-घाव फोसरि‍ये भऽ जाइ छै।

बेरमाक पच्‍चीसोसँ बेसी कुटुमैती मेटरसमे तहि‍यो छल आ अखनो अछि‍। कोसी बान्‍हपर बाँस राखल आ हि‍नका (गोनर मण्‍डलकेँ) पड़ल देखि‍ एक गोटे लगमे एलनि‍। ओ बाधसँ गाम पर जाइत रहथि‍। लगमे आबि‍ पुछलखि‍न-
“कतए रहै छी?”
धाह-जाड़सँ कँपैत गोनर मण्‍डल कहलखि‍न-
“बेरमा।”
“कतए जाएब?”
“हेरनाही।”
“एहेन अवस्‍थामे केना जाएब?”
“सएह ने कि‍छु फुड़ैए।”
“एकटा काज करू। हमहूँ कि‍यो आन नै छी। हमरो बहि‍न अहीं गाममे बसैए। कुटुमे भेलौं।”
कुटुमक नाओं सुनि‍तहि‍ जेना एकाएक कतौसँ होश एलनि‍। कहलखि‍न-
“कुटुम नारायण, कहुना-कहुना जँ गाम (बेरमा) घूमि‍ जाएब तँ जान बचि‍ जाएत, नै तँ नै बचब।”
“ऐठामसँ घोघरडीहा गेल हएत?”
“खाली देहे चलि‍ जाएब।”
“सभ समान हमरा ऐठीम राखि‍ दि‍औ आ अहाँ चलि‍ जाउ। यएह (बान्‍हसँ सटले पूब) हमर घर छी।”
आशा पाबि‍ गोनर बजलाह-
“अपना संगमे चूड़ो अछि‍। चलू कनि‍ये खाइयो लेब आ रखि‍ कऽ चलि‍यो जाएब।”

जोशपर तँ घोघरडीहा स्‍टेशन वि‍दाह भेला मुदा रास्‍तामे एहेन स्‍थि‍ति‍ भऽ गेलनि‍। जे ने बाट सुझन्‍हि‍ आ ने डेगे उठनि‍।  ओइ समए चारि‍ बजे गाड़ी नि‍रमलीसँ अबैत रहै। संजोग नीक बैसलनि‍। गाड़ी पकड़ा गेलनि‍। सात बजे साँझमे गाम (बेरमा) पहुँचलाह। एक तँ भरि‍ दि‍नक थाकल तइपर बोखार, गाम अबि‍ते बोम फाड़ि ओहि‍ना कानए लगलाह जेना माए-बापक सोजहाँमे बेटा-बेटी कनैए। अपन पोसलक दशा देखि‍ मामी (जगदीश प्रसाद मण्डल जीक माए) ऐ रूपे कानए लगलीह (डाक स्‍वरमे) जना भागि‍न नै बँचतनि‍। ताधरि‍ दुनू भाँइक बि‍आह-दुरागमन भऽ गेल रहनि‍। दुनू दि‍यादि‍नीयो बेरमेमे। ले बलैया जहि‍ना साँझू पहर एकटा नढ़ि‍या कोनो झारीसँ नि‍कलि‍ पू-पहैत आकि‍ जहाँ-तहाँसँ नढ़ि‍या भूकए लगैत। ततबे नै, पास-पड़ोसक नढ़ि‍या सभ समटा-समटा एकठाम भऽ समवैत स्‍वरमे भुकए लगैए। कि‍अए ने भूकत? डरे जे भरि‍ दि‍न झाड़ी धेने रहैए, ओकरा तँ अन्‍हारे ने संगी हेतइ। जहि‍ना चोर दुनू रंगक होइए दि‍नुको आ रौतुको, तहि‍ना ने नढ़ि‍योकेँ चरौर करैक समए भेटै छै। तहि‍ना मामीकेँ कनि‍ते दुनू दि‍यादि‍नी सेहो झौहरि‍ करए लगली। झौहरि‍ सुनि‍ एके-दुइये टोलक लोक ससरि‍-ससरि‍ आबए लगली। गोनर भैयाकेँ बि‍नु देखनौं लोक आँखि‍ मीड़ि‍-मीड़ि‍ कि‍यो ठुनकए लगली तँ कि‍यो पोथी-पतरा उनटाबए लगलीह। पाँच दि‍न पहि‍ने भदबा बीत चुकल छल मुदा एकटा बुढ़ीकेँ, अंति‍म दि‍न भदबाक पता लगलनि‍। ओ ओही दि‍नसँ जोड़ैत जे आइ छठम दि‍नक भदबा छी। बजली-
“केना पहि‍ले-पहि‍ल डेग भदबामे उठौलक। जानि‍ कऽ आगि‍मे पाकए जाएब तँ जरब नै।”
जइठाम सभ कननि‍हारे जमा भऽ जाएत तइठाम चुप के करत। खैर जे हौ....।

मास दि‍नक पछाति‍ ओ (गोनर) काज-उदेम करैबला भेलाह। अगहनक कटनी बजरि‍ गेल रहै। तहूमे १९५७ ई.मे सेहो नमहर बाढ़ि‍ आएल रहै। कहैले तँ बाढ़ि‍ दहारक कारण छी मुदा उपजोक कारण छी। ई ि‍नर्भर करैत गाम-गामक जमीनक बुनाबटि‍पर। कोनो गाममे गहींर खेत बेसी अछि‍ जइमे जँ शुरूहोमे दूटा नमहर बरखा भऽ जाएत तँ पानि‍ पकड़ि‍ लैत आ एहनो ऊँचगर गाम सभ अछि‍ (बहुआहा गाम) जइमे जतबे काल बरखा भेल ततबे काल पानि‍ रहल, बाकी बरखो गेल पानि‍यो गेल। गाम सुखल कऽ सुखले रहि‍ गेल। ओहन गामक लेल बाढ़ि‍ खेलौना छी, तँए जँ छहरो-बान्‍ह काटि‍ कऽ खेल-खेलल जाए तँ की हर्ज जे एहेन खेल नै हुअए।

दुश्‍मन सि‍पाही हाथे घेराएल सि‍पाही जकाँ परि‍वार घेरा गेल रहए। एक तँ १९५८ ई.क बाढ़ि‍सँ परि‍वार धँसि‍ गेल रहए। कि‍अए ने धँसैत। एक बाढ़ि‍ वा रौदी, कृषि‍ आधारि‍त परि‍वारकेँ पाँच साल धक्का मारैत अछि‍। शुरूहे फागुनमे दुनू भाँइ (पि‍सि‍यौत) एकटा बाँस, खेबा-खरचाक संग हरि‍नाही गेला। बाँसक खुट्टापर मनेजरक कोरो-बातीक घर ठाढ़ कऽ काशसँ छाड़ि‍ लेलनि‍। रहैक ठौर होइते अपन पोखरि‍बला जमीनकेँ साफ कऽ ताम-कोर करए लगलाह। खट्ठा पटेर-झौआक बोन। जहि‍ना बादमे वि‍यतनामक लोक एक-एक इंच भूमि‍, जे बम-बारूदमे नष्‍ट भऽ चुकल छल, खेती योग्‍य बनौलनि‍। तहि‍ना हरि‍नाहीक लोक गामक बोन उजाड़ए लगलाह। बोन एहेन जे दस धुर तमनि‍हार अपनाकेँ मेहनती बुझैत। दुनू भाँइ बोनो तोड़थि‍ आ गाम (बेरमा) आबि-आबि‍ खरचो लऽ जाथि‍। छह मासक बाद पहि‍ल उपजा हाथ लगलनि‍। ढेनुआर गाए जकाँ एक संग जली (धान), मकइ, काउन इत्‍यादि‍‍ हाथ लगलनि‍। परि‍वारक काज बढ़लनि‍। खेतीक लेल एकटा बड़द सेहो कीनि‍ कऽ लऽ गेलाह। परि‍वारक एकटा रूप रेखा तैयार भऽ गेलनि‍।

अखन धरि‍ हरि‍नाही गाममे बीस परि‍वार बसि‍ चुकल छलाह। तीनटा चापाकल सेहो गरि‍ चुकल छल। पानि‍क सुवि‍धा से भऽ गेल छलै। बीस फीट पाइप, छह फीट फील्‍टरमे भऽ जाइ। नगदी फसल पटुआक खेती शुरू भेल। तीस-पेंतीस बीधा जमीन उपजाउक हरि‍नाही गाम बनि‍ गेल।

१९६२ ई.मे कारी मण्‍डल (जगदीश प्रसाद मण्डल जीक छोट पि‍सि‍यौत भाए) बीमार पड़लाह। नीक बीमार। इलाजक कोनो सुवि‍धा हरि‍नाहीमे नै। तइ समैमे दरभंगा जि‍लाक झगडुआ गामक एक गोटे बेरमेमे डॉक्‍टरी करैत छलाह। मुसलमान छलाह। मनसारा मात्रि‍क। मनसारा-झगड़ुआ सटले दुनू गाम। जइसँ हिनका सभक मामा-भगि‍नाक संबंध ओइ डाॅक्‍टर सहाएबक संग बनल छलन्हि। ओना ओ रहै छला मुसलमान टोलमे, मुदा मात्रि‍कक अनेसँ बेसी काल अहीठाम रहै छलाह। हुनका माए कहलकनि‍ जे भैया, भागि‍न बड़ दुखि‍त अछि‍।
ओ जाइले तैयार भऽ गेलाह।

ओइ समए बेरमामे दूटा वैद्य छलाह। पहि‍ल सुन्‍दर ठाकुर आ दोसर छलाह नीरस महतो। सुन्‍दर ठाकुर पंडि‍त छलाह। आचार्य छलाह। मुदा शरीरसँ अबाह (नांगर) छलाह आ थोड़ेक बोली तोतराइ छलनि‍। मुदा ओ जि‍नगीकेँ एते लगसँ देखै छेलखि‍न जे परि‍वारसँ कि‍छु हटि‍ अपन आश्रम बनौने छलाह। औषधालय नाम छलैक। खेत-पथारबला परि‍वार रहने औषधालय अइल-फइलसँ बनौने छलाह। औषधालयक आंगनमे सइयो रंगक जड़ी-बूटी सभ लगौने छलाह। नि‍अमबद्ध जि‍नगी छलनि‍। ओना नि‍अम भंग सेहो होइत छलनि‍। नि‍अम भंगक कारण रहनि‍ वैदागरी करब। वैदागरी (डॉक्‍टरी) ओहन पेशा छी जे जि‍नगीक अंति‍म घाट धरि‍ बसैत अछि‍। तँए कखन कोन घाटक यात्री चलि‍ आओत तेकर ठेकान नै। मुदा वैद्यजी मे कि‍छु कर्मक प्रति‍ मजगुति‍यो रहनि‍। मजगूती ई रहनि‍ जखन ओ पूजा करए लगथि‍ तखन कि‍यो हुनका टोकि‍ नै पबैत। तइले ओ एकटा ओगरबाह रखै छलाह। मुदा मनमे ई कचोट रहबे करनि‍ जे जइले पूजा करै छी जँ ओ देवता आगूमे चलि‍ आबथि‍ तखन की करब? मुदा कि‍छुए दि‍नक पछाति‍ रूटि‍ंग बदलि‍ लेलनि‍। चौबीस घंटाक गाड़ीमे लोक अपना-अपना ढंगसँ रूटि‍ंग (काजक हि‍साबे) बना लैत अछि‍। तहि‍ना ओहो दि‍नक पूजा करब छोड़ि‍ राति‍मे करए लगलाह। जइसँ सभकेँ बराबरे लाभ हुअए लगलनि‍। जि‍नगि‍यो नमहर बनौने छलाह, अठबारे घोड़ापर चढ़ि‍ आन-आन गामक वैद्य सभ ऐठाम जाइ छलाह, हि‍नको ऐठाम अबै छलनि‍। जइसँ वैचारि‍क संबंधसँ लऽ कऽ बेवहारि‍क (जड़ी-बूटीक गाछ लगबैक संबंधसँ लऽ कऽ दवाइ बनबैक ढंग धरि‍) संबंध मजगूत छलनि‍।

दोसर वैद्य छलाह नीरस महतो। पं. सुन्‍दर ठाकुर जकाँ पढ़ल-लि‍खल नै मुदा मनुक्‍खोक तँ अजीव बुनाबटि‍ अछि‍। कि‍यो कओलेजसँ पढ़ि‍ डाॅक्‍टर-इंजीनि‍यर बनैत छथि‍ तँ कि‍यो गामे-घरमे घूमि‍-फि‍रि‍ बनि‍ जाइत छथि‍। तहि‍ना ओहन रामायण आ महाभारत पढ़नि‍हार (गाबि‍ कऽ पढ़नि‍हार) कतेको छथि‍ जि‍नका अपन नाओं-गाओं लि‍खए नै अबैत छन्‍हि‍। माटि‍सँ उपजल वैद्य नीरस महतो छलाह। गाममे दुनू गोटेक इलाज चलैत छलनि‍। मुदा एलोपैथी दवाइक आगमन गाममे सेहो भऽ चुकल छल। जइसँ बेरमाक बगलक गामक टूनीबाबू आ बुचकुन बाबूक आबा-जाही सेहो भऽ गेल छलनि‍। झगड़ुआबला डाॅक्‍टर करीब पनरह बर्ख बेरमामे रहलाह। ओना हुनकर नाओं अखनो नै ककरो बूझल छै। तेकर कारण छै‍ जे सभ ममे कहै छलन्हि आ ओहो भगि‍ने कहै छलखिन्ह‍। जगदीश प्रसाद मण्डलक माइयो भइये कहनि‍ आ ओहो बहीनि‍ये कहथि‍न। टोलक (मुसलमान) लोक डाॅक्‍टर सहाएब कहनि‍ तँ कि‍छु टोलक लोक मोलबी सहाएब कहनि‍। ओना ओ नवाजी सेहो छलाह। कि‍छु टोलक लोक मोलबी सहाएब डाॅक्‍टर कहनि‍ तँए हुनकर असल नाउँए हरा गेल रहनि‍।

जगदीश प्रसाद मण्डलक जेठ भाय (कुलकुल मण्‍डल) माए आ मामा (डॉक्‍टर) तीनू गोटे तमुरि‍यामे गाड़ी पकड़ि‍ घोघडीहा बान्‍ह (कोसी) तक तँ उत्‍साहसँ गेला, मुदा बान्‍हपरसँ जे देखलनि‍ तँ माइयो आ भैयोक मन डरि‍ गेलनि‍। आगू डेग बढ़बैक हि‍आउए ने होन्‍हि‍। बान्‍हक बगलेमे नमहर धार। जेकर पानि‍ काफी तेज गति‍मे चलैत। मामा बूझि‍ गेलखि‍न। ओ धैर्य बढ़बैत कहलखि‍न-
“बहि‍न, ई कोन धार छि‍ऐ, ऐसँ नमहर-नमहर धारमे नाव चलबै छी आ हेलबो करै छी। केहन बढ़ि‍या नाव छै। जहि‍ना सभ पार करत तहि‍ना हमहूँ सभ पार करब।”
तइ बीच एक गोटे हरि‍नाहि‍येक भेट गेलनि‍। बान्‍हेपर पूछ-आछसँ भाँज लागि गेलनि‍। शहर-बाजारमे बि‍ना मतलबे कि‍छु पूछब नीक नै होइ छै मुदा धारक इलाका, बोनक इलाका, मरूभूमि‍क इलाकामे ओहन नीक होइ छै जे संगी भेट जाइ छै।

तीनू गोटे हरि‍नाही पहुँचलाह। डॉक्‍टरक नाओं सुनि‍‍ते आनो-आन परि‍वारक लोक जमा भऽ गेल। पहुँचते सूइया-दवाइ चालू केलनि‍। कारी मण्‍डलक इलाज शुरू भेल।

चाहक नीक अभ्‍यासी डॉक्‍टर सहाएब। ओना चाहे टा अमलो रहनि‍। गाममे चाहक दोकानक कोन बात जे चाहपत्ती चि‍नि‍योक दोकान नै। बेरमासँ जखन वि‍दा भेला वा घोघडीहामे जखन गाड़ीसँ उतरलाह तैयो नै मन पड़लनि‍। मनो केना पड़ि‍तनि‍? बि‍नु देखल जगह केहेन अछि‍ केहेन नै तइ दि‍स नजरि‍ कि‍अए पड़ि‍तनि‍। पहि‍ल दि‍न तँ कहुना खेपि‍ गेलाह मुदा दोसर दि‍न तबाही हुअए लगलनि‍। बि‍नु चाह पीने मने भङठि‍ गेलनि‍। इमहर माइयो आ भैयोकेँ बूझि‍ पड़नि‍ जे कतए आबि‍ गेलौं।

पहि‍ल दि‍नक इलाजसँ हुनका (कारी मण्‍डल) मे कि‍छु सुधार भेलनि‍। मामाकेँ (डॉक्‍टर सहाएब) एक दि‍स चाहक झपनी धेने रहनि‍ तँ दोसर दि‍स रोगक इलाजसँ मनमे खुशि‍यो उपकैत रहनि‍।
अखन धरि‍ गाममे गोर दसेक महि‍सो-गाए भऽ गेल छलै। सहरसा जि‍ला (अखन सुपौल) आ मधुबनी जि‍लाक सीमाक कातमे हरि‍नाहि‍यो आ हरड़ि‍यो बसल अछि‍। बीचमे एकटा मरने धार, जे हरि‍नाहि‍यो आ जएह धार दुनू गामकेँ उपटौने छल। भैयाक घर (गोनर मण्‍डलक) गाममे सभसँ पछि‍म। कि‍एक तँ जहि‍ना बजार आगू मुँहे कऽकऽ घुसकैत चलैए तहि‍ना ने नव गामो चलैए। पूवे-पच्‍छि‍मे गाम, ओना ओ सूर्यमंडल गाम भेल। जे बासक हि‍साबसँ (पहि‍लुका) नीक नै भेल, कि‍एक तँ आगि‍-छाय आ हवा-बि‍हारि‍क दृष्‍टि‍सँ उजार बेसी हएत। धारक भीता-काते-काते जहि‍ना पच्‍छि‍म तहि‍ना पूब। जगदीश प्रसाद मण्डलक अपन दि‍याद चुल्‍हाइ मण्‍डल कहलखि‍न जे सभ दि‍याद लगाइये कऽ घर बान्‍हब। पछबारि‍ भाग हुनकर घर तँए जगदीश प्रसाद मण्डलक भैयो पच्‍छि‍मे दि‍स घर बन्‍हलनि‍। ओइ समए सभसँ पच्‍छि‍म घर रहनि‍ मुदा अखन ओइसँ बहुत पच्‍छि‍म तक गाम बढ़ि‍ गेल अछि‍।

दि‍नक करीब तीन बजे, हरि‍नाहि‍योक महींस आ हरड़ि‍योक पछबारि‍ टोल (जइ टोल परक हेमलताजी छथि‍।) जे फुलपरासक पूर्व वि‍धायक रहि‍ चुकल छथि‍।) हरि‍नाही बीस-पच्‍चीस घरक गाम आ हरड़ी तीन टोलमे बँटल। जे थोड़े हटि‍-हटि‍ कऽ बसल। धारेक पेट आ कि‍नछरि‍मे दुनू गामक महींस सभ चरैत रहै, कि‍ नै आकि‍ चरबाहा सभमे झगड़ा शुरू भेलै। दुनू गाम लगे-लगे। हँसेरा-हँसेरी भऽ गेल। खूब नमहर मारि‍ (लाठी-लठौबलि‍) भेल। कते गोटेकेँ कपार फुटल, हाथ-पएर टुटल। दू जाति‍क दुनू टोल, खूब मनसँ मारि‍ भेल। कम घर रहि‍तो हरि‍नाहीक कि‍छु परि‍वार सि‍ंहेश्वर स्‍थान दि‍ससँ आबि‍ बसल रहए, तीनटा सेसर खलीफा रहए, तँए मारि‍ बेसी हरड़ीबला खेलक। मुदा केश-फौदारी नै भेल। तेकर कारणो रहै जे एम्‍हर फुलपरासकेँ थाना चारि‍ धार टपि‍ आबए पड़ैत तँ ओम्‍हर सुपौल सन्‍मुख कोसीक कते छाँट-छुँट पार करए पड़ैत।

गोनर मण्‍डलक घरसँ करीब पाँच बीघा पच्‍छि‍म मारि‍ भेल। मरदा-मरदी तँ मारि‍ करए गेल रहथि‍ मुदा स्‍त्रीगण आ बच्‍चा सभ तमाशा देखलक। बेरमोक तीनू गोटे- डाँक्‍टरो सहराएब माइयो आ भैयो मारि‍ देखलनि‍। मारि‍ देखि‍ तीनू भयभीत भऽ जाइ गेलाह। तीनूक पाछू अपन-अपन कारण रहनि‍। डाॅक्‍टर सहाएब थाना-कचहरी जनैत रहथि‍ तँए भयभीत रहथि‍। अंदाज रहनि‍ जे जखने थाना औत तखने मारि‍ केनि‍हार गाम छोड़ि‍ देत। मुदा जगदीश प्रसाद मण्डलक.....।
तहि‍ना जगदीश प्रसाद मण्डलक माए आ भायकेँ सेहो बेरमाक १९५६-५७ ई.क पुलि‍सक दौड़ देखल रहनि‍। साँझू पहर सभ वि‍चार केलनि‍ जे काल्हि‍ भारे ऐठामसँ मरीज (कारी मण्‍डल) केँ लेने गाम (बेरमा) चलि‍ जाएब। सहए केलनि‍।

अपना ऐठाम (बेरमामे) तीनटा महींस  आ दूटा बड़द खूँटापर रहैत छलन्हि। समांग घटने महींस तीनसँ एक भऽ गेल। बड़द बि‍ना बनैबला नै। चारि‍-पान साल पहि‍नहि‍ १९५६-५७ ई.मे भाय मि‍ड्ल स्‍कूल छोड़ि‍ अमानत (अमीनी) मे नाओं लि‍खा लेलनि‍ छबे मासक पढ़ाइ। मुजफ्फरपुरसँ एकटा शि‍क्षक (अमीन) आबि‍ गाममे स्‍कूल चलौने रहथि‍। जइमे पहि‍ने दस गोटे नाओं लि‍खौलनि‍। मुदा कि‍छु दि‍न पछाति‍ आबि छह गोटे छोड़ि‍ देलनि‍। चारि‍ गोटे अन्‍तो-अन्‍त पढ़ि‍ अमीन बनलाह।

अखन धरि‍ जगदीश प्रसाद मण्डल महींस पाछू तँ नीक जकाँ नै पड़ल रहथि मुदा भाय सबहक संगे चरबए जाइत रह्थि। समांग घटने भारे पड़़ि‍ गेलन्हि। परि‍वारक आमदनी रहन्हि। पि‍सि‍औत भाइक परि‍वार गेने (हरि‍नाही गेने) परि‍वार कमलन्हि। जइसँ परि‍वारक काजो घटलन्हि। अखन तक माए घरसँ नि‍कलि‍ खेत-पथार नै जाइत छलन्हि, सेहो जाए लगलीह। जगदीश प्रसाद मण्डलक भैयाकेँ (गोनर मण्‍डल) जे जमीन देल गेल रहनि‍ ओ बेचि‍ कऽ लऽ गेला। जइसँ खेतो कमलन्हि। उपजो कमलन्हि। मुदा चारि‍म पीढ़ीमे आइयो ओइ परि‍वारक संग ओहने संबंध बनल छन्हि‍ जहि‍ना पहि‍ने छलन्हि। अखनो उमेश मण्‍डल (पुत्र) संग जे संजय रहैए‍ ओ पि‍सि‍औते भाइक पोता छि‍यनि‍।

हाइये स्‍कूलमे रहथि तखन दुरागमन भेलन्हि। बि‍आह पहि‍नहि‍ भऽ चूकल छलन्हि। पि‍सि‍औत भायकेँ गेलासँ परि‍वारे नै कमलन्हि, घरक कारोबार कमि‍ गेलन्हि। परि‍वारक भीतर अन्‍दरूनी वि‍वादक जन्‍म सेहो भेल। जगदीश प्रसाद मण्डलक पढ़ब वि‍वादक कारण मूलमे छल। जेकर दूटा सि‍र (स्रोत) छलै। पहि‍ल भाय सहाएबक आ दोसर समाजक हि‍त-अपेछि‍तक। खुल्‍लम-खुल्‍ला तँ परि‍वारमे नै छल मुदा भाय सहाएबक क्रि‍या-कलाप बदलए लगलनि‍। जइसँ घरक काज छोड़ि‍ भरि‍ दि‍न नाचक पाछू पड़ि‍ गेला। सासुरोमे नाच पार्टी चलनि‍।

१९६७ ई.क चुनाव आएल। जगदीश प्रसाद मण्डलो कम्‍युनि‍स्ट पार्टीक सदस्‍य बनि‍ गेल रहथि। चुनावमे जि‍ला भरि‍क बूथपर खूब धाँधली भेल। ओना जहि‍ना खूब धाँधली भेल तहि‍ना गामे-गाम मारि‍यो-पीट खूब भेल। केश-मोकदमा खूब बढ़ल। जहलक आबा-जाही सेहो बढ़ल। केश-मोकदमा भेने कोट-कचहरीक काज बढ़ल। राज्‍यमे (बि‍हार) सत्तरहे टा जि‍ला छलै। ओइमे बढ़ोत्तरीक संभावना बढ़ल। सवडि‍वीजन, ब्‍लौक इत्‍यादि‍ सभमे बढ़ोत्तरीक संभावना बढ़ल।

१९६७ ई.क चुनावमे (अखुनका मधुबनी जि‍ला, तइ समए अनुमंडले छल) कम्‍युनिस्ट पार्टीक एम.पी. भोगेन्‍द्र जी (भोगेन्‍द्र झा) भेलाह। दूटा पार्लियामेंट सीटमे एकटा कम्‍युनि‍स्ट पार्टीकेँ आ एकटा सोशलिस्ट पार्टी (शि‍वचन्‍द्र  झा) केँ भेल। ओना जि‍लासँ काँग्रेस जहि‍ना पार्लियामेंटसँ हारल तहि‍ना वि‍धान सभामे सेहो हारल। कम्‍युनि‍स्ट पाटीकेँ चारि‍टा एम.एल.ए. आ एकटा एम.पीक सीट भेटल। राज्‍यक सरकार बदलि‍ गेल मुदा देशक (दि‍ल्‍लीक) सरकार नै बदलल। मुदा वि‍रोधी दलक सदस्‍य बढ़ल। जइ-जइ राज्‍यमे काँग्रेसी सरकार टुटल ओइ-ओइ राज्‍यमे वि‍रोधीक सरकार बनल। मुदा एकछाहा कतौ ने बनल। खि‍चड़ी सरकार बनल। काँग्रेस पार्टीसँ एक ग्रुप टूटि‍ जनक्रान्‍ति‍ दल बि‍हारमे बनौने छल। जेकर नेतृत्‍व माहामाया बाबू करैत छलाह। मुख्‍यमंत्री बनलाह। अखन भ्रष्‍टाचार मुख्‍य समस्‍या बनि‍ गेल अछि‍। मुदा ओहू समैमे चोरनुकबा खूब रहए। चाहे जे कोनो वि‍भाग रहै भ्रष्‍टाचारसँ आक्रान्‍त छल। माहामाया बाबूक सरकार पछि‍ला काँग्रेसी मंत्रीक वि‍रोधमे सुप्रीम कोर्टक जजक नेतृत्‍वमे जाँच आयोग बनौलक। अय्यर आयोग नाओं पड़ल।
बैद्यनाथ राम अय्यर सुप्रीम कोर्टक जज छलाह। दक्षिणक छथि‍। करीब पनचानबे-छि‍यानबे बर्खक छथि‍। जीवि‍ते छथि‍। पूर्व बि‍हार सरकारक छहटा मंत्रीक वि‍रूद्ध अपन जाँच रि‍पोर्ट दऽ देलखि‍न। करोड़ोक लूट सावि‍त कऽ देने रहथि‍न।

१९६६ ई.मे बि‍हार रौदीक चपेटि‍मे आबि‍ गेल। ओना पहि‍ल बर्ख रहने ओते बुझि‍यो नै पड़लै। जँ बूझि‍ पड़ि‍तै तँ १९६७ ई.क चुनावी मुद्दा बनैत से नै बनल। मुदा सरकार बनला उत्तर दोसर बर्ख खूब बूझि‍ पड़ए लगलै। भुखमरी हुअए लगल। सरकारक सोझा जबर्दस्‍त सबाल उठि‍ कऽ ठाढ़ भेल। जमाखोर सबहक वि‍रोधमे अभि‍यान चलबैक ि‍नर्णए भेल। मुदा तेहेन नाटक ठाढ़ भऽ गेल जे अभि‍यान मजाक बनि‍ गेल। नाटक ई भेल जे दस बीसटा ओहन सभ पकडाए लगल जेकर कारोबार (अन्नक कारोबार) घोड़ा-घोड़ीपर चलैत रहए। मुदा सोलहन्नी सएह नै भेल, कि‍छु एहनो जमाखोर पकड़ाएल जेकरा गोदाममे लाखो क्‍वीन्‍टल अनाज रहए।

पार्लियामेंटक शपथ ग्रहण केला पछाति‍ भोगेन्‍द्र जी जखन मधुबनी घुमलाह तँ सकरीमे पहि‍ल आम सभा केलनि‍। एक तँ नव सदस्‍य रहने दोसर अपन पार्टीक रहने करीब पनरह-बीस गाम (बेरमा) सँ सभामे भाग लि‍अ गेलथि। गाड़ीक सुवि‍धा रहबे करन्हि। तहूमे लाल झंडाबला सभ दि‍ल्‍ली तक प्रदर्शन करि‍ते छल। ओना भोगेन्‍द्र जीक भाषणक गुण रहलनि‍ जे ओ पहि‍ने बाजि‍ दइ छलखि‍न जे जि‍नका जे प्रश्न पुछैक हुअए ओ पूछि‍ दि‍अ। जबाब देब हुनका भाषणक मूल बि‍न्दु छलनि‍। भाषणो नमहर करैत छलाह। समए भेटलापर तीन-तीन, चरि‍-चरि‍ घंटा बजि‍ते रहि‍ जाइत छलाह।

ओइ समए ि‍नर्मलीसँ समस्‍तीपुर एकटा गाड़ी चलैत रहए। बड़ी लाइनक कतौ पता नै। मुदा कम्‍युनिस्ट पार्टीक लड़ाइक एकटा मुद्दा ईहो रहए। कखनो उग्र तँ कखनो धीमी गति‍सँ चलि‍ते रहए। ओना पूबोसँ आ पच्‍छि‍मोसँ अबैबला गाड़ीक मेल सकरि‍येमे रहै मुदा से नै भेलै। ककरघटीमे मेल भेने पछबरि‍या गाड़ी पछुआ गेल। स्‍टेशनसँ थोड़बे हटि‍ कऽ दछि‍नबारि‍ भाग सभाक आयोजन भेल।

जगदीश प्रसाद मण्डल- एकटा बायोग्राफी...गजेन्द्र ठाकुर द्वारा (अनुवर्तते...)
ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com  पर पठाउ।

'विदेह' ११० म अंक १५ जुलाइ २०१२ (वर्ष ५ मास ५५ अंक ११०)- PART V


8.VIDEHA FOR NON RESIDENTS
8.1 to 8.3 MAITHILI LITERATURE IN ENGLISH



विदेह नूतन अंक भाषापाक रचना-लेखन  

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१.भारत आ नेपालक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली  २.मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम

१.नेपाल  भारतक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली

१.१. नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक
  उच्चारण आ लेखन शैली
(भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित)
मैथिलीमे उच्चारण तथा लेखन

१.पञ्चमाक्षर आ अनुस्वार: पञ्चमाक्षरान्तर्गत ङन एवं म अबैत अछि। संस्कृत भाषाक अनुसार शब्दक अन्तमे जाहि वर्गक अक्षर रहैत अछि ओही वर्गक पञ्चमाक्षर अबैत अछि। जेना-
अङ्क (क वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ङ् आएल अछि।)
पञ्च (च वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ञ् आएल अछि।)
खण्ड (ट वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ण् आएल अछि।)
सन्धि (त वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे न् आएल अछि।)
खम्भ (प वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे म् आएल अछि।)
उपर्युक्त बात मैथिलीमे कम देखल जाइत अछि। पञ्चमाक्षरक बदलामे अधिकांश जगहपर अनुस्वारक प्रयोग देखल जाइछ। जेना- अंकपंचखंडसंधिखंभ आदि। व्याकरणविद पण्डित गोविन्द झाक कहब छनि जे कवर्गचवर्ग आ टवर्गसँ पूर्व अनुस्वार लिखल जाए तथा तवर्ग आ पवर्गसँ पूर्व पञ्चमाक्षरे लिखल जाए। जेना- अंकचंचलअंडाअन्त तथा कम्पन। मुदा हिन्दीक निकट रहल आधुनिक लेखक एहि बातकेँ नहि मानैत छथि। ओ लोकनि अन्त आ कम्पनक जगहपर सेहो अंत आ कंपन लिखैत देखल जाइत छथि।
नवीन पद्धति किछु सुविधाजनक अवश्य छैक। किएक तँ एहिमे समय आ स्थानक बचत होइत छैक। मुदा कतोक बेर हस्तलेखन वा मुद्रणमे अनुस्वारक छोट सन बिन्दु स्पष्ट नहि भेलासँ अर्थक अनर्थ होइत सेहो देखल जाइत अछि। अनुस्वारक प्रयोगमे उच्चारण-दोषक सम्भावना सेहो ततबए देखल जाइत अछि। एतदर्थ कसँ लऽ कऽ पवर्ग धरि पञ्चमाक्षरेक प्रयोग करब उचित अछि। यसँ लऽ कऽ ज्ञ धरिक अक्षरक सङ्ग अनुस्वारक प्रयोग करबामे कतहु कोनो विवाद नहि देखल जाइछ।

२.ढ आ ढ़ : ढ़क उच्चारण र् हजकाँ होइत अछि। अतः जतऽ र् हक उच्चारण हो ओतऽ मात्र ढ़ लिखल जाए। आन ठाम खाली ढ लिखल जएबाक चाही। जेना-
ढ = ढाकीढेकीढीठढेउआढङ्गढेरीढाकनिढाठ आदि।
ढ़ = पढ़ाइबढ़बगढ़बमढ़बबुढ़बासाँढ़गाढ़रीढ़चाँढ़सीढ़ीपीढ़ी आदि।
उपर्युक्त शब्द सभकेँ देखलासँ ई स्पष्ट होइत अछि जे साधारणतया शब्दक शुरूमे ढ आ मध्य तथा अन्तमे ढ़ अबैत अछि। इएह नियम ड आ ड़क सन्दर्भ सेहो लागू होइत अछि।

३.व आ ब : मैथिलीमे क उच्चारण ब कएल जाइत अछिमुदा ओकरा ब रूपमे नहि लिखल जएबाक चाही। जेना- उच्चारण : बैद्यनाथबिद्यानबदेबताबिष्णुबंशबन्दना आदि। एहि सभक स्थानपर क्रमशः वैद्यनाथविद्यानवदेवताविष्णुवंशवन्दना लिखबाक चाही। सामान्यतया व उच्चारणक लेल ओ प्रयोग कएल जाइत अछि। जेना- ओकीलओजह आदि।

४.य आ ज : कतहु-कतहु क उच्चारण जकाँ करैत देखल जाइत अछिमुदा ओकरा ज नहि लिखबाक चाही। उच्चारणमे यज्ञजदिजमुनाजुगजाबतजोगीजदुजम आदि कहल जाएबला शब्द सभकेँ क्रमशः यज्ञयदियमुनायुगयावतयोगीयदुयम लिखबाक चाही।

५.ए आ य : मैथिलीक वर्तनीमे ए आ य दुनू लिखल जाइत अछि।
प्राचीन वर्तनी- कएलजाएहोएतमाएभाएगाए आदि।
नवीन वर्तनी- कयलजायहोयतमायभायगाय आदि।
सामान्यतया शब्दक शुरूमे ए मात्र अबैत अछि। जेना एहिएनाएकरएहन आदि। एहि शब्द सभक स्थानपर यहियनायकरयहन आदिक प्रयोग नहि करबाक चाही। यद्यपि मैथिलीभाषी थारू सहित किछु जातिमे शब्दक आरम्भोमे केँ य कहि उच्चारण कएल जाइत अछि।
ए आ क प्रयोगक सन्दर्भमे प्राचीने पद्धतिक अनुसरण करब उपयुक्त मानि एहि पुस्तकमे ओकरे प्रयोग कएल गेल अछि। किएक तँ दुनूक लेखनमे कोनो सहजता आ दुरूहताक बात नहि अछि। आ मैथिलीक सर्वसाधारणक उच्चारण-शैली यक अपेक्षा एसँ बेसी निकट छैक। खास कऽ कएलहएब आदि कतिपय शब्दकेँ कैलहैब आदि रूपमे कतहु-कतहु लिखल जाएब सेहो क प्रयोगकेँ बेसी समीचीन प्रमाणित करैत अछि।

६.हिहु तथा एकारओकार : मैथिलीक प्राचीन लेखन-परम्परामे कोनो बातपर बल दैत काल शब्दक पाछाँ हिहु लगाओल जाइत छैक। जेना- हुनकहिअपनहुओकरहुतत्कालहिचोट्टहिआनहु आदि। मुदा आधुनिक लेखनमे हिक स्थानपर एकार एवं हुक स्थानपर ओकारक प्रयोग करैत देखल जाइत अछि। जेना- हुनकेअपनोतत्कालेचोट्टेआनो आदि।

७.ष तथा ख : मैथिली भाषामे अधिकांशतः षक उच्चारण ख होइत अछि। जेना- षड्यन्त्र (खड़यन्त्र)षोडशी (खोड़शी)षट्कोण (खटकोण)वृषेश (वृखेश)सन्तोष (सन्तोख) आदि।

८.ध्वनि-लोप : निम्नलिखित अवस्थामे शब्दसँ ध्वनि-लोप भऽ जाइत अछि:
(क) क्रियान्वयी प्रत्यय अयमे य वा ए लुप्त भऽ जाइत अछि। ओहिमे सँ पहिने अक उच्चारण दीर्घ भऽ जाइत अछि। ओकर आगाँ लोप-सूचक चिह्न वा विकारी (’ / ऽ) लगाओल जाइछ। जेना-
पूर्ण रूप : पढ़ए (पढ़य) गेलाहकए (कय) लेलउठए (उठय) पड़तौक।
अपूर्ण रूप : पढ़’ गेलाह’ लेलउठ’ पड़तौक।
पढ़ऽ गेलाहकऽ लेलउठऽ पड़तौक।
(ख) पूर्वकालिक कृत आय (आए) प्रत्ययमे य (ए) लुप्त भऽ जाइछमुदा लोप-सूचक विकारी नहि लगाओल जाइछ। जेना-
पूर्ण रूप : खाए (य) गेलपठाय (ए) देबनहाए (य) अएलाह।
अपूर्ण रूप : खा गेलपठा देबनहा अएलाह।
(ग) स्त्री प्रत्यय इक उच्चारण क्रियापदसंज्ञाओ विशेषण तीनूमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना-
पूर्ण रूप : दोसरि मालिनि चलि गेलि।
अपूर्ण रूप : दोसर मालिन चलि गेल।
(घ) वर्तमान कृदन्तक अन्तिम त लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना-
पूर्ण रूप : पढ़ैत अछिबजैत अछिगबैत अछि।
अपूर्ण रूप : पढ़ै अछिबजै अछिगबै अछि।
(ङ) क्रियापदक अवसान इकउकऐक तथा हीकमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना-
पूर्ण रूप: छियौकछियैकछहीकछौकछैकअबितैकहोइक।
अपूर्ण रूप : छियौछियैछहीछौछैअबितैहोइ।
(च) क्रियापदीय प्रत्यय न्हहु तथा हकारक लोप भऽ जाइछ। जेना-
पूर्ण रूप : छन्हिकहलन्हिकहलहुँगेलहनहि।
अपूर्ण रूप : छनिकहलनिकहलौँगेलऽनइनञिनै।

९.ध्वनि स्थानान्तरण : कोनो-कोनो स्वर-ध्वनि अपना जगहसँ हटि कऽ दोसर ठाम चलि जाइत अछि। खास कऽ ह्रस्व इ आ उक सम्बन्धमे ई बात लागू होइत अछि। मैथिलीकरण भऽ गेल शब्दक मध्य वा अन्तमे जँ ह्रस्व इ वा उ आबए तँ ओकर ध्वनि स्थानान्तरित भऽ एक अक्षर आगाँ आबि जाइत अछि। जेना- शनि (शइन)पानि (पाइन)दालि ( दाइल)माटि (माइट)काछु (काउछ)मासु (माउस) आदि। मुदा तत्सम शब्द सभमे ई निअम लागू नहि होइत अछि। जेना- रश्मिकेँ रइश्म आ सुधांशुकेँ सुधाउंस नहि कहल जा सकैत अछि।

१०.हलन्त(्)क प्रयोग : मैथिली भाषामे सामान्यतया हलन्त (्)क आवश्यकता नहि होइत अछि। कारण जे शब्दक अन्तमे अ उच्चारण नहि होइत अछि। मुदा संस्कृत भाषासँ जहिनाक तहिना मैथिलीमे आएल (तत्सम) शब्द सभमे हलन्त प्रयोग कएल जाइत अछि। एहि पोथीमे सामान्यतया सम्पूर्ण शब्दकेँ मैथिली भाषा सम्बन्धी निअम अनुसार हलन्तविहीन राखल गेल अछि। मुदा व्याकरण सम्बन्धी प्रयोजनक लेल अत्यावश्यक स्थानपर कतहु-कतहु हलन्त देल गेल अछि। प्रस्तुत पोथीमे मथिली लेखनक प्राचीन आ नवीन दुनू शैलीक सरल आ समीचीन पक्ष सभकेँ समेटि कऽ वर्ण-विन्यास कएल गेल अछि। स्थान आ समयमे बचतक सङ्गहि हस्त-लेखन तथा तकनीकी दृष्टिसँ सेहो सरल होबऽबला हिसाबसँ वर्ण-विन्यास मिलाओल गेल अछि। वर्तमान समयमे मैथिली मातृभाषी पर्यन्तकेँ आन भाषाक माध्यमसँ मैथिलीक ज्ञान लेबऽ पड़ि रहल परिप्रेक्ष्यमे लेखनमे सहजता तथा एकरूपतापर ध्यान देल गेल अछि। तखन मैथिली भाषाक मूल विशेषता सभ कुण्ठित नहि होइकताहू दिस लेखक-मण्डल सचेत अछि। प्रसिद्ध भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक कहब छनि जे सरलताक अनुसन्धानमे एहन अवस्था किन्नहु ने आबऽ देबाक चाही जे भाषाक विशेषता छाँहमे पडि जाए।
-(भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित)

१.२. मैथिली अकादमी, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली

१. जे शब्द मैथिली-साहित्यक प्राचीन कालसँ आइ धरि जाहि वर्त्तनीमे प्रचलित अछि
, से सामान्यतः ताहि वर्त्तनीमे लिखल जाय- उदाहरणार्थ-

ग्राह्य 

एखन 
ठाम 
जकर
तकर 
तनिकर 
अछि 

अग्राह्य 
अखन
अखनिएखेनअखनी
ठिमा
ठिनाठमा
जेकर
तेकर
तिनकर। (वैकल्पिक रूपेँ ग्राह्य)
ऐछ
अहिए।

२. निम्नलिखित तीन प्रकारक रूप वैकल्पिकतया अपनाओल जाय: भऽ गेल
भय गेल वा भए गेल। जा रहल अछिजाय रहल अछिजाए रहल अछि। कर’ गेलाहवा करय गेलाह वा करए गेलाह।

३. प्राचीन मैथिलीक 
न्ह’ ध्वनिक स्थानमे ’ लिखल जाय सकैत अछि यथा कहलनि वा कहलन्हि।

४. 
’ तथा ’ ततय लिखल जाय जत’ स्पष्टतः अइ’ तथा अउ’ सदृश उच्चारण इष्ट हो। यथा- देखैतछलैकबौआछौक इत्यादि।

५. मैथिलीक निम्नलिखित शब्द एहि रूपे प्रयुक्त होयत: जैह
सैहइएहओऐहलैह तथा दैह।

६. ह्र्स्व इकारांत शब्दमे 
’ के लुप्त करब सामान्यतः अग्राह्य थिक। यथा- ग्राह्य देखि आबहमालिनि गेलि (मनुष्य मात्रमे)।

७. स्वतंत्र ह्रस्व 
’ वा ’ प्राचीन मैथिलीक उद्धरण आदिमे तँ यथावत राखल जायकिंतु आधुनिक प्रयोगमे वैकल्पिक रूपेँ ’ वा ’ लिखल जाय। यथा:- कयल वा कएलअयलाह वा अएलाहजाय वा जाए इत्यादि।

८. उच्चारणमे दू स्वरक बीच जे 
’ ध्वनि स्वतः आबि जाइत अछि तकरा लेखमे स्थान वैकल्पिक रूपेँ देल जाय। यथा- धीआअढ़ैआविआहवा धीयाअढ़ैया, बियाह।

९. सानुनासिक स्वतंत्र स्वरक स्थान यथासंभव 
’ लिखल जाय वा सानुनासिक स्वर। यथा:- मैञाकनिञाकिरतनिञा वा मैआँकनिआँकिरतनिआँ।

१०. कारकक विभक्त्तिक निम्नलिखित रूप ग्राह्य:- हाथकेँ
हाथसँहाथेँ, हाथकहाथमे। मे’ मे अनुस्वार सर्वथा त्याज्य थिक। ’ क वैकल्पिक रूप केर’ राखल जा सकैत अछि।

११. पूर्वकालिक क्रियापदक बाद 
कय’ वा कए’ अव्यय वैकल्पिक रूपेँ लगाओल जा सकैत अछि। यथा:- देखि कय वा देखि कए।

१२. माँग
भाँग आदिक स्थानमे माङभाङ इत्यादि लिखल जाय।

१३. अर्द्ध 
’ ओ अर्द्ध ’ क बदला अनुसार नहि लिखल जायकिंतु छापाक सुविधार्थ अर्द्ध ’ , ‘’, तथा ’ क बदला अनुस्वारो लिखल जा सकैत अछि। यथा:- अङ्कवा अंकअञ्चल वा अंचलकण्ठ वा कंठ।

१४. हलंत चिह्न निअमतः लगाओल जाय
किंतु विभक्तिक संग अकारांत प्रयोग कएल जाय। यथा:- श्रीमान्किंतु श्रीमानक।

१५. सभ एकल कारक चिह्न शब्दमे सटा क
’ लिखल जायहटा क’ नहिसंयुक्त विभक्तिक हेतु फराक लिखल जाययथा घर परक।

१६. अनुनासिककेँ चन्द्रबिन्दु द्वारा व्यक्त कयल जाय। परंतु मुद्रणक सुविधार्थ हि समान जटिल मात्रापर अनुस्वारक प्रयोग चन्द्रबिन्दुक बदला कयल जा सकैत अछि। यथा- हिँ केर बदला हिं। 

१७. पूर्ण विराम पासीसँ ( । ) सूचित कयल जाय।

१८. समस्त पद सटा क
’ लिखल जायवा हाइफेनसँ जोड़ि क’ ,  हटा क’ नहि।

१९. लिअ तथा दिअ शब्दमे बिकारी (ऽ) नहि लगाओल जाय।

२०. अंक देवनागरी रूपमे राखल जाय।

२१.किछु ध्वनिक लेल नवीन चिन्ह बनबाओल जाय। जा
ई नहि बनल अछि ताबत एहि दुनू ध्वनिक बदला पूर्ववत् अय/ आय/ अए/ आए/ आओ/ अओ लिखल जाय। आकि ऎ वा ऒ सँ व्यक्त कएल जाय।

ह./- गोविन्द झा ११/८/७६ श्रीकान्त ठाकुर ११/८/७६ सुरेन्द्र झा "सुमन" ११/०८/७६
  २. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम
२.१. उच्चारण निर्देश: (बोल्ड कएल रूप ग्राह्य):-   
दन्त न क उच्चारणमे दाँतमे जीह सटत- जेना बाजू नाम , मुदा ण क उच्चारणमे जीह मूर्धामे सटत (नै सटैए तँ उच्चारण दोष अछि)- जेना बाजू गणेश। तालव्य मे जीह तालुसँ , मे मूर्धासँ आ दन्त मे दाँतसँ सटत। निशाँ, सभ आ शोषण बाजि कऽ देखू। मैथिलीमे  केँ वैदिक संस्कृत जकाँ  सेहो उच्चरित कएल जाइत अछि, जेना वर्षा, दोष। य अनेको स्थानपर ज जकाँ उच्चरित होइत अछि आ ण ड़ जकाँ (यथा संयोग आ गणेश संजोग आ
गड़ेस उच्चरित होइत अछि)। मैथिलीमे व क उच्चारण ब, श क उच्चारण स आ य क उच्चारण ज सेहो होइत अछि।
ओहिना ह्रस्व इ बेशीकाल मैथिलीमे पहिने बाजल जाइत अछि कारण देवनागरीमे आ मिथिलाक्षरमे ह्रस्व इ अक्षरक पहिने लिखलो जाइत आ बाजलो जएबाक चाही। कारण जे हिन्दीमे एकर दोषपूर्ण उच्चारण होइत अछि (लिखल तँ पहिने जाइत अछि मुदा बाजल बादमे जाइत अछि), से शिक्षा पद्धतिक दोषक कारण हम सभ ओकर उच्चारण दोषपूर्ण ढंगसँ कऽ रहल छी।
अछि- अ इ छ  ऐछ (उच्चारण)
छथि- छ इ थ  – छैथ (उच्चारण)
पहुँचि- प हुँ इ च (उच्चारण)
आब अ आ इ ई ए ऐ ओ औ अं अः ऋ ऐ सभ लेल मात्रा सेहो अछि, मुदा ऐमे ई ऐ ओ औ अं अः ऋ केँ संयुक्ताक्षर रूपमे गलत रूपमे प्रयुक्त आ उच्चरित कएल जाइत अछि। जेना ऋ केँ री  रूपमे उच्चरित करब। आ देखियौ- ऐ लेल देखिऔ क प्रयोग अनुचित। मुदा देखिऐ लेल देखियै अनुचित। क् सँ ह् धरि अ सम्मिलित भेलासँ क सँ ह बनैत अछि, मुदा उच्चारण काल हलन्त युक्त शब्दक अन्तक उच्चारणक प्रवृत्ति बढ़ल अछि, मुदा हम जखन मनोजमे ज् अन्तमे बजैत छी, तखनो पुरनका लोककेँ बजैत सुनबन्हि- मनोजऽ, वास्तवमे ओ अ युक्त ज् = ज बजै छथि।
फेर ज्ञ अछि ज् आ ञ क संयुक्त मुदा गलत उच्चारण होइत अछि- ग्य। ओहिना क्ष अछि क् आ ष क संयुक्त मुदा उच्चारण होइत अछि छ। फेर श् आ र क संयुक्त अछि श्र ( जेना श्रमिक) आ स् आ र क संयुक्त अछि स्र (जेना मिस्र)। त्र भेल त+र ।
उच्चारणक ऑडियो फाइल विदेह आर्काइव  http://www.videha.co.in/ पर उपलब्ध अछि। फेर केँ / सँ / पर पूर्व अक्षरसँ सटा कऽ लिखू मुदा तँ कऽ हटा कऽ। ऐमे सँ मे पहिल सटा कऽ लिखू आ बादबला हटा कऽ। अंकक बाद टा लिखू सटा कऽ मुदा अन्य ठाम टा लिखू हटा कऽ– जेना
छहटा मुदा सभ टा। फेर ६अ म सातम लिखू- छठम सातम नै। घरबलामे बला मुदा घरवालीमे वाली प्रयुक्त करू।
रहए-
रहै मुदा सकैए (उच्चारण सकै-ए)।
मुदा कखनो काल रहए आ रहै मे अर्थ भिन्नता सेहो, जेना से कम्मो जगहमे पार्किंग करबाक अभ्यास रहै ओकरा। पुछलापर पता लागल जे ढुनढुन नाम्ना ई ड्राइवर कनाट प्लेसक पार्किंगमे काज करैत रहए
छलै, छलए मे सेहो ऐ तरहक भेल। छलए क उच्चारण छल-ए सेहो।
संयोगने- (उच्चारण संजोगने)
केँ/  कऽ
केर-  (
केर क प्रयोग गद्यमे नै करू पद्यमे कऽ सकै छी। )
क (जेना रामक)
–रामक आ संगे (उच्चारण राम के /  राम कऽ सेहो)
सँ- सऽ (उच्चारण)
चन्द्रबिन्दु आ अनुस्वार- अनुस्वारमे कंठ धरिक प्रयोग होइत अछि मुदा चन्द्रबिन्दुमे नै। चन्द्रबिन्दुमे कनेक एकारक सेहो उच्चारण होइत अछि- जेना रामसँ- (उच्चारण राम सऽ)  रामकेँ- (उच्चारण राम कऽ/ राम के सेहो)।

केँ जेना रामकेँ भेल हिन्दीक को (राम को)- राम को= रामकेँ
क जेना रामक भेल हिन्दीक का ( राम का) राम का= रामक
कऽ जेना जा कऽ भेल हिन्दीक कर ( जा कर) जा कर= जा कऽ
सँ भेल हिन्दीक से (राम से) राम से= रामसँ
सऽ तऽ त केर (गद्यमे) एे चारू शब्द सबहक प्रयोग अवांछित।
के दोसर अर्थेँ प्रयुक्त भऽ सकैए- जेनाके कहलक? विभक्ति क बदला एकर प्रयोग अवांछित।
नञि, नहि, नै, नइ, नँइ, नइँनइं ऐ सभक उच्चारण आ लेखन - नै

त्त्व क बदलामे त्व जेना महत्वपूर्ण (महत्त्वपूर्ण नै) जतए अर्थ बदलि जाए ओतहि मात्र तीन अक्षरक संयुक्ताक्षरक प्रयोग उचित। सम्पति- उच्चारण स म्प इ त (सम्पत्ति नै- कारण सही उच्चारण आसानीसँ सम्भव नै)। मुदा सर्वोत्तम (सर्वोतम नै)।
राष्ट्रिय (राष्ट्रीय नै)
सकैए/ सकै (अर्थ परिवर्तन)
पोछैले/ पोछै लेल/ पोछए लेल
पोछैए/ पोछए/ (अर्थ परिवर्तन) पोछए/ पोछै
ओ लोकनि ( हटा कऽ, ओ मे बिकारी नै)
ओइ/ ओहि
ओहिले/
ओहि लेल/ ओही लऽ
जएबेँ/ बैसबेँ
पँचभइयाँ
देखियौक/ (देखिऔक नै- तहिना अ मे ह्रस्व आ दीर्घक मात्राक प्रयोग अनुचित)
जकाँ / जेकाँ
तँइ/ तैँ/
होएत / हएत
नञिनहि/ नँइ/ नइँ/ नै
सौँसे/ सौंसे
बड़ /
बड़ी (झोराओल)
गाए (गाइ नहि)मुदा गाइक दूध (गाएक दूध नै।)
रहलेँ/ पहिरतैँ
हमहींअहीं
सब - सभ
सबहक - सभहक
धरि - तक
गप- बात
बूझब - समझब
बुझलौं/ समझलौं/ बुझलहुँ - समझलहुँ
हमरा आर हम सभ
आकि- आ कि
सकैछ/ करैछ (गद्यमे प्रयोगक आवश्यकता नै)
होइन/ होनि
जाइन (जानि नैजेना देल जाइन) मुदा जानि-बूझि (अर्थ परिव्र्तन)
पइठ/ जाइठ
आउ/ जाउ/ आऊ/ जाऊ
मे, केँसँपर (शब्दसँ सटा कऽ) तँ कऽ धऽ दऽ (शब्दसँ हटा कऽ) मुदा दूटा वा बेसी विभक्ति संग रहलापर पहिल विभक्ति टाकेँ सटाऊ। जेना ऐमे सँ ।
एकटा , दूटा (मुदा कए टा)
बिकारीक प्रयोग शब्दक अन्तमे, बीचमे अनावश्यक रूपेँ नै। आकारान्त आ अन्तमे अ क बाद बिकारीक प्रयोग नै (जेना दिअ
, आ/ दिय’ , ’, आ नै )
अपोस्ट्रोफीक प्रयोग बिकारीक बदलामे करब अनुचित आ मात्र फॉन्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक)- ओना बिकारीक संस्कृत रूप ऽ अवग्रह कहल जाइत अछि आ वर्तनी आ उच्चारण दुनू ठाम एकर लोप रहैत अछि/ रहि सकैत अछि (उच्चारणमे लोप रहिते अछि)। मुदा अपोस्ट्रोफी सेहो अंग्रेजीमे पसेसिव केसमे होइत अछि आ फ्रेंचमे शब्दमे जतए एकर प्रयोग होइत अछि जेना raison d’etre एतए सेहो एकर उच्चारण रैजौन डेटर होइत अछि, माने अपोस्ट्रॉफी अवकाश नै दैत अछि वरन जोड़ैत अछि, से एकर प्रयोग बिकारीक बदला देनाइ तकनीकी रूपेँ सेहो अनुचित)।
अइमे, एहिमे/ ऐमे
जइमे, जाहिमे
एखन/ अखन/ अइखन

केँ (के नहि) मे (अनुस्वार रहित)
भऽ
मे
दऽ
तँ (तऽ, त नै)
सँ ( सऽ स नै)
गाछ तर
गाछ लग
साँझ खन
जो (जो go, करै जो do)
 तै/तइ जेना- तै दुआरे/ तइमे/ तइले
जै/जइ जेना- जै कारण/ जइसँ/ जइले
ऐ/अइ जेना- ऐ कारण/ ऐसँ/ अइले/ मुदा एकर एकटा खास प्रयोग- लालति‍ कतेक दि‍नसँ कहैत रहैत अइ
लै/लइ जेना लैसँ/ लइले/ लै दुआरे
लहँ/ लौं

गेलौं/ लेलौं/ लेलँह/ गेलहुँ/ लेलहुँ/ लेलँ
जइजाहि‍/ जै
जहि‍ठाम/ जाहि‍ठाम/ जइठाम/ जैठाम
एहि‍/ अहि‍/
अइ (वाक्यक अंतमे ग्राह्य) / 
अइछ/ अछि‍/ ऐछ
तइतहि‍/ तै/ ताहि‍
ओहि‍/ ओइ
सीखि‍/ सीख
जीवि‍/ जीवी/ जीब 
भलेहीं/ भलहि‍ं 
तैं/ तँइ/ तँए
जाएबजएब
लइ/ लै
छइ/ छै
नहि‍/ नैनइ
गइ/ गै 
छनि‍/ छन्‍हि‍  ...
समए शब्‍दक संग जखन कोनो वि‍भक्‍ति‍ जुटै छै तखन समै जना समैपर इत्‍यादि‍। असगरमे हृदए आ वि‍भक्‍ति‍ जुटने हृदे जना हृदेसँ, हृदेमे इत्‍यादि‍।  
जइ/ जाहि‍/
जै
जहि‍ठाम/ जाहि‍ठाम/ जइठाम/ जैठाम
एहि‍/ अहि‍/ अइ/ 
अइछ/ अछि‍/ ऐछ
तइ/ तहि‍/ तै/ ताहि‍
ओहि‍/ ओइ
सीखि‍/ सीख
जीवि‍/ जीवी/
जीब 
भले/ भलेहीं/
भलहि‍ं 
तैं/ तँइ/ तँए
जाएब/ जएब
लइ/ लै
छइ/ छै
नहि‍/ नै/ नइ
गइ/
गै 
छनि‍छन्‍हि‍
चुकल अछि/ गेल गछि
२.२. मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम
नीचाँक सूचीमे देल विकल्पमेसँ लैंगुएज एडीटर द्वारा कोन रूप चुनल जेबाक चाही:
बोल्ड कएल रूप ग्राह्य:  
१.होयबला/ होबयबला/ होमयबला/ हेब’बला, हेम’बला/ होयबाक/होबएबला /होएबाक
२. आ’/आऽ
३. क’ लेने/कऽ लेने/कए लेने/कय लेने/ल’/लऽ/लय/लए
४. भ’ गेल/भऽ गेल/भय गेल/भए
गेल
५. कर’ गेलाह/करऽ
गेलह/करए गेलाह/करय गेलाह
६.
लिअ/दिअ लिय’,दिय’,लिअ’,दिय’/
७. कर’ बला/करऽ बला/ करय बला करैबला/क’र’ बला /
करैवाली
८. बला वला (पुरूष)वाली (स्‍त्री) ९
.
आङ्ल आंग्ल
१०. प्रायः प्रायह
११. दुःख दुख १
२. चलि गेल चल गेल/चैल गेल
१३. देलखिन्ह देलकिन्ह, देलखिन
१४.
देखलन्हि देखलनि/ देखलैन्ह
१५. छथिन्ह/ छलन्हि छथिन/ छलैन/ छलनि
१६. चलैत/दैत चलति/दैति
१७. एखनो
अखनो
१८.
बढ़नि‍ बढ़इन बढ़न्हि
१९. ओ’/ओऽ(सर्वनाम) 
२०
. ओ (संयोजक) ओ’/ओऽ
२१. फाँगि/फाङ्गि फाइंग/फाइङ
२२.
जे जे’/जेऽ २३. ना-नुकुर ना-नुकर
२४. केलन्हि/केलनि‍/कयलन्हि
२५. तखनतँ/ तखन तँ
२६. जा
रहल/जाय रहल/जाए रहल
२७. निकलय/निकलए
लागल/ लगल बहराय/ बहराए लागल/ लगल निकल’/बहरै लागल
२८. ओतय/ जतय जत’/ ओत’/ जतए/ ओतए
२९.
की फूरल जे कि फूरल जे
३०. जे जे’/जेऽ
३१. कूदि यादि(मोन पारब) कूइद/याइद/कूद/याद/
यादि (मोन)
३२. इहो/ ओहो
३३.
हँसए/ हँसय हँसऽ
३४. नौ आकि दस/नौ किंवा दस/ नौ वा दस
३५. सासु-ससुर सास-ससुर
३६. छह/ सात छ/छः/सात
३७.
की  की’/ कीऽ (दीर्घीकारान्तमे ऽ वर्जित)
३८. जबाब जवाब
३९. करएताह/ करेताह करयताह
४०. दलान दिशि दलान दिश/दलान दिस
४१
. गेलाह गएलाह/गयलाह
४२. किछु आर/ किछु और/ किछ आर
४३. जाइ छल/ जाइत छल जाति छल/जैत छल
४४. पहुँचि/ भेट जाइत छल/ भेट जाइ छलए पहुँच/ भेटि‍ जाइत छल
४५.
जबान (युवा)/ जवान(फौजी)
४६. लय/ लए ’/ कऽ/ लए कए / लऽ कऽलऽ कए
४७. ल’/लऽ कय/
कए
४८. एखन / एखने / अखन / अखने
४९.
अहींकेँ अहीँकेँ
५०. गहींर गहीँर
५१.
धार पार केनाइ धार पार केनाय/केनाए
५२. जेकाँ जेँकाँ/
जकाँ
५३. तहिना तेहिना
५४. एकर अकर
५५. बहिनउ बहनोइ
५६. बहिन बहिनि
५७. बहिन-बहिनोइ
बहिन-बहनउ
५८. नहि/ नै
५९. करबा / करबाय/ करबाए
६०. तँ/ त ऽ तय/तए
६१. भैयारी मे छोट-भाए/भै/, जेठ-भाय/भाइ,
६२. गि‍नतीमे दू भाइ/भाए/भाँइ  
६३. ई पोथी दू भाइक/ भाँइ/ भाए/ लेल। यावत जावत
६४. माय मै / माए मुदा माइक ममता
६५. देन्हिदइन दनि‍/ दएन्हि/ दयन्हि दन्हि/ दैन्हि
६६. द’/ दऽदए
६७.  (संयोजक) ओऽ (सर्वनाम)
६८. तका कए तकाय तकाए
६९. पैरे (on foot) पएरे  कएक/ कैक
७०.
ताहुमे/ ताहूमे
 ७१.
पुत्रीक
७२.
बजा कय/ कए / कऽ
७३. बननाय/बननाइ
७४. कोला
७५.
दिनुका दिनका
७६.
ततहिसँ
७७. गरबओलन्हि/ गरबौलनि‍/
  गरबेलन्हि/ गरबेलनि‍
७८. बालु बालू
७९.
चेन्ह चिन्ह(अशुद्ध)
८०. जे जे’
८१
. से/ के से’/के’
८२. एखुनका अखनुका
८३. भुमिहार भूमिहार
८४. सुग्गर
/ सुगरक/ सूगर
८५. झठहाक झटहाक ८६.
छूबि
८७. करइयो/ओ करैयो ने देलक /करियौ-करइयौ
८८. पुबारि
पुबाइ
८९. झगड़ा-झाँटी
झगड़ा-झाँटि
९०. पएरे-पएरे पैरे-पैरे
९१. खेलएबाक
९२. खेलेबाक
९३. लगा
९४. होए- हो – होअए
९५. बुझल बूझल
९६.
बूझल (संबोधन अर्थमे)
९७. यैह यएह / इएह/ सैह/ सएह
९८. तातिल
९९. अयनाय- अयनाइ/ अएनाइ/ एनाइ
१००. निन्न- निन्द
१०१.
बिनु बिन
१०२. जाए जाइ
१०३.
जाइ (in different sense)-last word of sentence
१०४. छत पर आबि जाइ
१०५.
ने
१०६. खेलाए (play) –खेलाइ
१०७. शिकाइत- शिकायत
१०८.
ढप- ढ़प
१०९
. पढ़- पढ
११०कनिए/ कनिये कनिञे
१११. राकस- राकश
११२. होए/ होय होइ
११३. अउरदा-
औरदा
११४. बुझेलन्हि (different meaning- got understand)
११५. बुझएलन्हि/बुझेलनि‍/ बुझयलन्हि (understood himself)
११६. चलि- चल/ चलि‍ गेल
११७. खधाइ- खधाय
११८.
मोन पाड़लखिन्ह/ मोन पाड़लखि‍न/ मोन पारलखिन्ह
११९. कैक- कएक- कइएक
१२०.
लग ल’ग 
१२१. जरेनाइ
१२२. जरौनाइ जरओनाइ- जरएनाइ/
जरेनाइ
१२३. होइत
१२४.
गरबेलन्हि/ गरबेलनि‍ गरबौलन्हि/ गरबौलनि‍
१२५.
चिखैत- (to test)चिखइत
१२६. करइयो (willing to do) करैयो
१२७. जेकरा- जकरा
१२८. तकरा- तेकरा
१२९.
बिदेसर स्थानेमे/ बिदेसरे स्थानमे
१३०. करबयलहुँ/ करबएलहुँ/ करबेलहुँ करबेलौं
१३१.
हारिक (उच्चारण हाइरक)
१३२. ओजन वजन आफसोच/ अफसोस कागत/ कागच/ कागज
१३३. आधे भागआध-भागे
१३४. पिचा / पिचाय/पिचाए
१३५. नञ/ ने
१३६. बच्चा नञ
(ने) पिचा जाय
१३७. तखन ने (नञ) कहैत अछि। कहै/ सुनै/ देखै छल मुदा कहैत-कहैत/ सुनैत-सुनैत/ देखैत-देखैत
१३८.
कतेक गोटे/ कताक गोटे
१३९. कमाइ-धमाइ/ कमाई- धमाई
१४०
. लग ल’ग
१४१. खेलाइ (for playing)
१४२.
छथिन्ह/ छथिन
१४३.
होइत होइ
१४४. क्यो कियो / केओ
१४५.
केश (hair)
१४६.
केस (court-case)
१४७
. बननाइ/ बननाय/ बननाए
१४८. जरेनाइ
१४९. कुरसी कुर्सी
१५०. चरचा चर्चा
१५१. कर्म करम
१५२. डुबाबएडुबाबै/ डुमाबै डुमाबय/ डुमाबए
१५३. एखुनका/
अखुनका
१५४. लए/ लिअए (वाक्यक अंतिम शब्द)- लऽ
१५५. कएलक/
केलक
५६. गरमी गर्मी
१५७
. वरदी वर्दी
१५८. सुना गेलाह सुना’/सुनाऽ
१५९. एनाइ-गेनाइ
१६०.
तेना ने घेरलन्हि/ तेना ने घेरलनि‍
१६१. नञि / नै
१६२.
डरो ड’रो
१६३. कतहु/ कतौ कहीं
१६४. उमरिगर-उमेरगर उमरगर
१६५. भरिगर
१६६. धोल/धोअल धोएल
१६७. गप/गप्प
१६८.
के के’
१६९. दरबज्जा/ दरबजा
१७०. ठाम
१७१.
धरि तक
१७२.
घूरि लौटि
१७३. थोरबेक
१७४. बड्ड
१७५. तोँतू
१७६. तोँहि( पद्यमे ग्राह्य)
१७७. तोँही / तोँहि
१७८.
करबाइए करबाइये
१७९. एकेटा
१८०. करितथि /करतथि
 १८१.
पहुँचि/ पहुँच
१८२. राखलन्हि रखलन्हि/ रखलनि‍
१८३.
लगलन्हि/ लगलनि‍ लागलन्हि
१८४.
सुनि (उच्चारण सुइन)
१८५. अछि (उच्चारण अइछ)
१८६. एलथि गेलथि
१८७. बितओने/ बि‍तौने/
बितेने
१८८. करबओलन्हि/ करबौलनि‍/
करेलखिन्ह/ करेलखि‍न
१८९. करएलन्हि/ करेलनि‍
१९०.
आकि/ कि
१९१. पहुँचि/
पहुँच
१९२. बत्ती जराय/ जराए जरा (आगि लगा)
१९३.
से से’
१९४.
हाँ मे हाँ (हाँमे हाँ विभक्त्तिमे हटा कए)
१९५. फेल फैल
१९६. फइल(spacious) फैल
१९७. होयतन्हि/ होएतन्हि/ होएतनि‍/हेतनि‍/ हेतन्हि
१९८. हाथ मटिआएब/ हाथ मटियाबय/हाथ मटियाएब
१९९. फेका फेंका
२००. देखाए देखा
२०१. देखाबए
२०२. सत्तरि सत्तर
२०३.
साहेब साहब
२०४.गेलैन्ह/ गेलन्हि/ गेलनि‍
२०५. हेबाकहोएबाक
२०६.केलो/ कएलहुँ/केलौं/ केलुँ
२०७. किछु न किछु/
किछु ने किछु
२०८.घुमेलहुँ/ घुमओलहुँ/ घुमेलौं
२०९. एलाक/ अएलाक
२१०. अः/ अह
२११.लय/
लए (अर्थ-परिवर्त्तन) २१२.कनीक/ कनेक
२१३.सबहक/ सभक
२१४.मिलाऽ/ मिला
२१५.कऽ/ 
२१६.जाऽ/
जा
२१७.आऽ/ 
२१८.भऽ /भ’ ( फॉन्टक कमीक द्योतक)
२१९.निअम/ नियम
२२०
.हेक्टेअर/ हेक्टेयर
२२१.पहिल अक्षर ढ/ बादक/ बीचक ढ़
२२२.तहिं/तहिँ/ तञि/ तैं
२२३.कहिं/ कहीं
२२४.तँइ/
तैं / तइँ
२२५.नँइ/ नइँ/  नञि/ नहि/नै
२२६.है/ हए / एलीहेँ/
२२७.छञि/ छै/ छैक /छइ
२२८.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ
२२९. (come)/ आऽ(conjunction)
२३०.
आ (conjunction)/ आऽ(come)
२३१.कुनोकोनो, कोना/केना
२३२.गेलैन्ह-गेलन्हि-गेलनि‍
२३३.हेबाक- होएबाक
२३४.केलौँ- कएलौँ-कएलहुँ/केलौं
२३५.किछु न किछ- किछु ने किछु
२३६.केहेन- केहन
२३७.आऽ (come)- (conjunction-and)/आ। आब'-आब' /आबह-आबह
२३८. हएत-हैत
२३९.घुमेलहुँ-घुमएलहुँ- घुमेलाें
२४०.एलाक- अएलाक
२४१.होनि- होइन/ होन्हि/
२४२.ओ-राम ओ श्यामक बीच(conjunction), ओऽ कहलक (he said)/
२४३.की हए/ कोसी अएली हए/ की है। की हइ
२४४.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ
२४५
.शामिल/ सामेल
२४६.तैँ / तँए/ तञि/ तहिं
२४७.जौं
/ ज्योँ/ जँ/
२४८.सभ/ सब
२४९.सभक/ सबहक
२५०.कहिं/ कहीं
२५१.कुनो/ कोनो/ कोनहुँ/
२५२.फारकती भऽ गेलभए गेल/ भय गेल
२५३.कोना/ केना/ कन्‍ना/कना
२५४.अः/ अह
२५५.जनै/ जनञ
२५६.गेलनि‍/
गेलाह (अर्थ परिवर्तन)
२५७.केलन्हि/ कएलन्हि/ केलनि‍/
२५८.लय/ लए/ लएह (अर्थ परिवर्तन)
२५९.कनीककनेक/कनी-मनी
२६०.पठेलन्हि‍ पठेलनि‍/ पठेलइन/ पपठओलन्हि/ पठबौलनि‍/
२६१.निअम/ नियम
२६२.हेक्टेअर/ हेक्टेयर
२६३.पहिल अक्षर रहने ढ/ बीचमे रहने ढ़
२६४.आकारान्तमे बिकारीक प्रयोग उचित नै/ अपोस्ट्रोफीक प्रयोग फान्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक ओकर बदला अवग्रह (बिकारी) क प्रयोग उचित
२६५.केर (पद्यमे ग्राह्य) / -/ कऽ/ के
२६६.छैन्हि- छन्हि
२६७.लगैए/ लगैये
२६८.होएत/ हएत
२६९.जाएत/ जएत/
२७०.आएत/ अएत/ आओत
२७१
.खाएत/ खएत/ खैत
२७२.पिअएबाक/ पिएबाक/पि‍येबाक
२७३.शुरुशुरुह
२७४.शुरुहेशुरुए
२७५.अएताह/अओताह/ एताह/ औताह
२७६.जाहि/ जाइ/ जइजै/
२७७.जाइत/ जैतए/ जइतए
२७८.आएल/ अएल
२७९.कैक/ कएक
२८०.आयल/ अएल/ आएल
२८१. जाए/ जअए/ जए (लालति‍ जाए लगलीह।)
२८२. नुकएल/ नुकाएल
२८३. कठुआएल/ कठुअएल
२८४. ताहि/ तै/ तइ
२८५. गायब/ गाएब/ गएब
२८६. सकैसकए/ सकय
२८७.सेरा/सरासराए (भात सरा गेल)
२८८.कहैत रही/देखैत रही/ कहैत छलौं/ कहै छलौं- अहिना चलैत/ पढ़ैत
(पढ़ै-पढ़ैत अर्थ कखनो काल परिवर्तित) - आर बुझै/ बुझैत (बुझै/ बुझै छी, मुदा बुझैत-बुझैत)/ सकैत/ सकै। करैत/ करै। दै/ दैत। छैक/ छै। बचलै/ बचलैक। रखबा/ रखबाक । बिनु/ बिन। रातिक/ रातुक बुझै आ बुझैत केर अपन-अपन जगहपर प्रयोग समीचीन अछि‍। बुझैत-बुझैत आब बुझलि‍ऐ। हमहूँ बुझै छी।
२८९. दुआरेद्वारे
२९०.भेटि/ भेट/ भेँट
२९१.
खन/ खीन/  खुना (भोर खन/ भोर खीन)
२९२.तक/ धरि
२९३.गऽगै (meaning different-जनबै गऽ)
२९४.सऽ/ सँ (मुदा दऽ, लऽ)
२९५.त्त्व,(तीन अक्षरक मेल बदला पुनरुक्तिक एक आ एकटा दोसरक उपयोग) आदिक बदला त्व आदि। महत्त्व/ महत्वकर्ता/ कर्त्ता आदिमे त्त संयुक्तक कोनो आवश्यकता मैथिलीमे नै अछि। वक्तव्य
२९६.बेसी/ बेशी
२९७.बाला/वाला बला/ वला (रहैबला)
२९८
.वाली/ (बदलैवाली)
२९९.वार्त्ता/ वार्ता
३००. अन्तर्राष्ट्रिय/ अन्तर्राष्ट्रीय
३०१. लेमएलेबए
३०२.लमछुरका, नमछुरका
३०२.लागैलगै (
भेटैत/ भेटै)
३०३.लागललगल
३०४.हबा/ हवा
३०५.राखलकरखलक
३०६. (come)/  (and)
३०७. पश्चाताप/ पश्चात्ताप
३०८. ऽ केर व्यवहार शब्दक अन्तमे मात्र, यथासंभव बीचमे नै।
३०९.कहैतकहै
३१०.
रहए (छल)/ रहै (छलै) (meaning different)
३११.तागतिताकति
३१२.खराप/ खराब
३१३.बोइन/ बोनि/ बोइनि
३१४.जाठि/ जाइठ
३१५.कागज/ कागच/ कागत
३१६.गिरै (meaning different- swallow)/ गिरए (खसए)
३१७.राष्ट्रिय/ राष्ट्रीय

DATE-LIST (year- 2012-13)
(१४२० फसली साल)
Marriage Days:
Nov.2012- 25, 26, 28, 29, 30
Dec.2012- 5,9, 10, 13, 14
January 2013- 16, 17, 18, 23, 24, 31
Feb.2013- 1, 3, 4, 6, 8, 10, 14, 15, 18, 20, 24, 25
April 2013- 21, 22, 24, 26, 29
May 2013- 1,2,3,5,6,9,12,13,17,19,20,22,23,24,26,27,29,30,31
June 2013- 2,3
July 2013- 11, 14, 15
Upanayana Days:
January 2013- 16
February 2013- 14, 15, 20, 21
April 2013- 22
May 2013- 20, 21
Dviragaman Din:
November 2012- 25, 26, 28, 29
December 2012- 2, 3, 14
February 2013- 14, 15, 18, 20, 21, 22, 27, 28
March 2013- 1
April 2013- 18, 22, 24, 26, 28, 29
May 2013- 12, 13
Mundan Din:
November 2012- 26, 30
December 2012- 3
January 2013- 18, 24
February 2013- 1, 14, 15, 20, 28
April 2013- 17
May 2013- 13, 23, 29
June 2013- 13, 19, 26, 27, 28
July 2013- 10, 15

FESTIVALS OF MITHILA (2012-13)
Mauna Panchami-08 July
Madhushravani- 22 July
Nag Panchami- 24 July
Raksha Bandhan- 02 Aug
Krishnastami- 10 August
Kushi Amavasya / Somvari Vrat- 17 August
Vishwakarma Pooja- 17 September
Hartalika Teej- 18 September
ChauthChandra-19 September
Karma Dharma Ekadashi-26 September
Indra Pooja Aarambh- 27 September
Anant Caturdashi- 29 Sep
Agastyarghadaan- 30 Sep
Pitri Paksha begins- 30 Sep
Jimootavahan Vrata/ Jitia-08 October
Matri Navami- 09 October
SomvatiAmavasya Vrat- 15 October
Kalashsthapan- 16 October
Belnauti- 20 October
Patrika Pravesh- 21 October
Mahastami- 22 October
Maha Navami - 23 October
Vijaya Dashami- 24 October
Kojagara- 29 Oct
Dhanteras- 11 November
Diyabati, shyama pooja-13 November
Annakoota/ Govardhana Pooja-14 November
Bhratridwitiya/ Chitragupta Pooja- 15 November
Chhathi -19 November
Devotthan Ekadashi- 24 November
ravivratarambh- 25 November
Navanna parvan- 25 November
KartikPoornima- Sama Visarjan- 28 November
Vivaha Panchmi- 17 December
Makara/ Teela Sankranti-14 Jan
Naraknivaran chaturdashi- 08 February
Basant Panchami/ Saraswati Pooja- 15 February
Achla Saptmi- 17 February
Mahashivaratri-10 March
Holikadahan-Fagua-26 March
Holi- 28 March
Varuni Trayodashi-07 April
Chaiti  navaratrarambh- 11 April
Jurishital-15 April
Chaiti Chhathi vrata-16 April
Ram Navami- 19 April
Ravi Brat Ant- 12 May
Akshaya Tritiya-13 May
Janaki Navami- 19 May
Vat Savitri-barasait- 08 June
Ganga Dashhara-18 June
Somavati Amavasya Vrata- 08 July
Jagannath Rath Yatra- 10 July
Hari Sayan Ekadashi- 19 July
Aashadhi Guru Poornima-22 Jul



"विदेह"क एहि सभ सहयोगी लिंकपर सेहो एक बेर जाउ 

६.विदेह मैथिली क्विज 
 : 
http://videhaquiz.blogspot.com/

७.विदेह मैथिली जालवृत्त एग्रीगेटर : 
http://videha-aggregator.blogspot.com/
८.विदेह मैथिली साहित्य अंग्रेजीमे अनूदित

http://madhubani-art.blogspot.com/
९.विदेहक पूर्व-रूप "भालसरिक गाछ" 
 : 
http://gajendrathakur.blogspot.com/
१०.विदेह इंडेक्स 
 : 
http://videha123.blogspot.com/
११.विदेह फाइल :
 
http://videha123.wordpress.com/
१२. विदेह: सदेह : पहिल तिरहुता (मिथिला़क्षर) जालवृत्त (ब्लॉग)
http://videha-sadeha.blogspot.com/
१३. विदेह:ब्रेल: मैथिली ब्रेलमे: पहिल बेर विदेह द्वारा
http://videha-braille.blogspot.com/
१४.VIDEHA IST MAITHILI  FORTNIGHTLY EJOURNAL ARCHIVE
१५. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मैथिली पोथीक आर्काइव

१६. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका ऑडियो आर्काइव
१७. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका वीडियो आर्काइव
१८. विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका मिथिला चित्रकलाआधुनिक कला आ चित्रकला
१९. मैथिल आर मिथिला (मैथिलीक सभसँ लोकप्रिय जालवृत्त)
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 महत्त्वपूर्ण सूचना:(१) 'विदेहद्वारा धारावाहिक रूपे ई-प्रकाशित कएल गेल गजेन्द्र ठाकुरक  निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षाउपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर)कथा-गल्प (गल्प-गुच्छ), नाटक(संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बाल-किशोर साहित्य विदेहमे संपूर्ण ई-प्रकाशनक बाद प्रिंट फॉर्ममे। कुरुक्षेत्रम्अन्तर्मनक खण्ड-१ सँ ७ Combined ISBN No.978-81-907729-7-6 विवरण एहि पृष्ठपर नीचाँमे आ प्रकाशकक साइट http://www.shruti-publication.com/ पर 
महत्त्वपूर्ण सूचना (२):सूचना: विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary. विदेहक भाषापाक- रचनालेखन स्तंभमे

कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक- गजेन्द्र ठाकुर

 

गजेन्द्र ठाकुरक निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षाउपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर)कथा-गल्प (गल्प गुच्छ)नाटक(संकर्षण)महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बालमंडली-किशोरजगत विदेहमे संपूर्ण ई-प्रकाशनक बाद प्रिंट फॉर्ममे। कुरुक्षेत्रम्अन्तर्मनकखण्ड-१ सँ ७
Ist edition 2009 of Gajendra Thakur’s KuruKshetram-Antarmanak (Vol. I to VII)- essay-paper-criticism, novel, poems, story, play, epics and Children-grown-ups literature in single binding:
Language:Maithili 
६९२ पृष्ठ : मूल्य भा. रु. 100/-(for individual buyers inside india)
(add courier charges Rs.50/-per copy for Delhi/NCR and Rs.100/- per copy for outside Delhi)

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विदेह: सदेह : १: २: ३: ४ तिरहुता : देवनागरी "विदेह" कप्रिंट संस्करण :विदेह-ई-पत्रिका (http://www.videha.co.in/क चुनल रचना सम्मिलित।

विदेह:सदेह:१: २: ३: ४
सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर।
Details for purchase available at print-version publishers's site http://www.shruti-publication.com  or you may write to shruti.publication@shruti-publication.com

२. संदेश-

[ विदेह ई-पत्रिका, विदेह:सदेह मिथिलाक्षर आ देवनागरी आ गजेन्द्र ठाकुरक सात खण्डक- निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा,उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प गुच्छ), नाटक (संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बाल-मंडली-किशोर जगत- संग्रह कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक मादेँ। ]

१.श्री गोविन्द झा- विदेहकेँ तरंगजालपर उतारि विश्वभरिमे मातृभाषा मैथिलीक लहरि जगाओलखेद जे अपनेक एहि महाभियानमे हम एखन धरि संग नहि दए सकलहुँ। सुनैत छी अपनेकेँ सुझाओ आ रचनात्मक आलोचना प्रिय लगैत अछि तेँ किछु लिखक मोन भेल। हमर सहायता आ सहयोग अपनेकेँ सदा उपलब्ध रहत।
२.श्री रमानन्द रेणु- मैथिलीमे ई-पत्रिका पाक्षिक रूपेँ चला कऽ जे अपन मातृभाषाक प्रचार कऽ रहल छीसे धन्यवाद । आगाँ अपनेक समस्त मैथिलीक कार्यक हेतु हम हृदयसँ शुभकामना दऽ रहल छी।
३.श्री विद्यानाथ झा "विदित"- संचार आ प्रौद्योगिकीक एहि प्रतिस्पर्धी ग्लोबल युगमे अपन महिमामय "विदेह"केँ अपना देहमे प्रकट देखि जतबा प्रसन्नता आ संतोष भेलतकरा कोनो उपलब्ध "मीटर"सँ नहि नापल जा सकैछ? ..एकर ऐतिहासिक मूल्यांकन आ सांस्कृतिक प्रतिफलन एहि शताब्दीक अंत धरि लोकक नजरिमे आश्चर्यजनक रूपसँ प्रकट हैत।
४. प्रो. उदय नारायण सिंह "नचिकेता"- जे काज अहाँ कए रहल छी तकर चरचा एक दिन मैथिली भाषाक इतिहासमे होएत। आनन्द भए रहल अछिई जानि कए जे एतेक गोट मैथिल "विदेह" ई जर्नलकेँ पढ़ि रहल छथि।...विदेहक चालीसम अंक पुरबाक लेल अभिनन्दन।  
५. डॉ. गंगेश गुंजन- एहि विदेह-कर्ममे लागि रहल अहाँक सम्वेदनशील मनमैथिलीक प्रति समर्पित मेहनतिक अमृत रंगइतिहास मे एक टा विशिष्ट फराक अध्याय आरंभ करतहमरा विश्वास अछि। अशेष शुभकामना आ बधाइक सङ्गसस्नेह...अहाँक पोथी कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक प्रथम दृष्टया बहुत भव्य तथा उपयोगी बुझाइछ। मैथिलीमे तँ अपना स्वरूपक प्रायः ई पहिले एहन  भव्य अवतारक पोथी थिक। हर्षपूर्ण हमर हार्दिक बधाई स्वीकार करी।
६. श्री रामाश्रय झा "रामरंग"(आब स्वर्गीय)- "अपना" मिथिलासँ संबंधित...विषय वस्तुसँ अवगत भेलहुँ।...शेष सभ कुशल अछि।
७. श्री ब्रजेन्द्र त्रिपाठी- साहित्य अकादमी- इंटरनेट पर प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" केर लेल बधाई आ शुभकामना स्वीकार करू।
८. श्री प्रफुल्लकुमार सिंह "मौन"- प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" क प्रकाशनक समाचार जानि कनेक चकित मुदा बेसी आह्लादित भेलहुँ। कालचक्रकेँ पकड़ि जाहि दूरदृष्टिक परिचय देलहुँओहि लेल हमर मंगलकामना।
९.डॉ. शिवप्रसाद यादव- ई जानि अपार हर्ष भए रहल अछिजे नव सूचना-क्रान्तिक क्षेत्रमे मैथिली पत्रकारिताकेँ प्रवेश दिअएबाक साहसिक कदम उठाओल अछि। पत्रकारितामे एहि प्रकारक नव प्रयोगक हम स्वागत करैत छीसंगहि "विदेह"क सफलताक शुभकामना।
१०. श्री आद्याचरण झा- कोनो पत्र-पत्रिकाक प्रकाशन- ताहूमे मैथिली पत्रिकाक प्रकाशनमे के कतेक सहयोग करताह- ई तऽ भविष्य कहत। ई हमर ८८ वर्षमे ७५ वर्षक अनुभव रहल। एतेक पैघ महान यज्ञमे हमर श्रद्धापूर्ण आहुति प्राप्त होयत- यावत ठीक-ठाक छी/ रहब।
११. श्री विजय ठाकुर- मिशिगन विश्वविद्यालय- "विदेह" पत्रिकाक अंक देखलहुँसम्पूर्ण टीम बधाईक पात्र अछि। पत्रिकाक मंगल भविष्य हेतु हमर शुभकामना स्वीकार कएल जाओ।
१२. श्री सुभाषचन्द्र यादव- ई-पत्रिका "विदेह" क बारेमे जानि प्रसन्नता भेल। विदेह’ निरन्तर पल्लवित-पुष्पित हो आ चतुर्दिक अपन सुगंध पसारय से कामना अछि।
१३. श्री मैथिलीपुत्र प्रदीप- ई-पत्रिका "विदेह" केर सफलताक भगवतीसँ कामना। हमर पूर्ण सहयोग रहत।
१४. डॉ. श्री भीमनाथ झा- "विदेह" इन्टरनेट पर अछि तेँ "विदेह" नाम उचित आर कतेक रूपेँ एकर विवरण भए सकैत अछि। आइ-काल्हि मोनमे उद्वेग रहैत अछिमुदा शीघ्र पूर्ण सहयोग देब।कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देखि अति प्रसन्नता भेल। मैथिलीक लेल ई घटना छी।
१५. श्री रामभरोस कापड़ि "भ्रमर"- जनकपुरधाम- "विदेह" ऑनलाइन देखि रहल छी। मैथिलीकेँ अन्तर्राष्ट्रीय जगतमे पहुँचेलहुँ तकरा लेल हार्दिक बधाई। मिथिला रत्न सभक संकलन अपूर्व। नेपालोक सहयोग भेटतसे विश्वास करी।
१६. श्री राजनन्दन लालदास- "विदेह" ई-पत्रिकाक माध्यमसँ बड़ नीक काज कए रहल छीनातिक अहिठाम देखलहुँ। एकर वार्षिक अ‍ंक जखन प्रिं‍ट निकालब तँ हमरा पठायब। कलकत्तामे बहुत गोटेकेँ हम साइटक पता लिखाए देने छियन्हि। मोन तँ होइत अछि जे दिल्ली आबि कए आशीर्वाद दैतहुँमुदा उमर आब बेशी भए गेल। शुभकामना देश-विदेशक मैथिलकेँ जोड़बाक लेल।.. उत्कृष्ट प्रकाशन कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक लेल बधाइ। अद्भुत काज कएल अछिनीक प्रस्तुति अछि सात खण्डमे।  मुदा अहाँक सेवा आ से निःस्वार्थ तखन बूझल जाइत जँ अहाँ द्वारा प्रकाशित पोथी सभपर दाम लिखल नहि रहितैक। ओहिना सभकेँ विलहि देल जइतैक। (स्पष्टीकरण-  श्रीमान्, अहाँक सूचनार्थ विदेह द्वारा ई-प्रकाशित कएल सभटा सामग्री आर्काइवमे https://sites.google.com/a/videha.com/videha-pothi/ पर बिना मूल्यक डाउनलोड लेल उपलब्ध छै आ भविष्यमे सेहो रहतैक। एहि आर्काइवकेँ जे कियो प्रकाशक अनुमति लऽ कऽ प्रिंट रूपमे प्रकाशित कएने छथि आ तकर ओ दाम रखने छथि ताहिपर हमर कोनो नियंत्रण नहि अछि।- गजेन्द्र ठाकुर)...   अहाँक प्रति अशेष शुभकामनाक संग।
१७. डॉ. प्रेमशंकर सिंह- अहाँ मैथिलीमे इंटरनेटपर पहिल पत्रिका "विदेह" प्रकाशित कए अपन अद्भुत मातृभाषानुरागक परिचय देल अछिअहाँक निःस्वार्थ मातृभाषानुरागसँ प्रेरित छीएकर निमित्त जे हमर सेवाक प्रयोजन होतँ सूचित करी। इंटरनेटपर आद्योपांत पत्रिका देखलमन प्रफुल्लित भऽ गेल।
१८.श्रीमती शेफालिका वर्मा- विदेह ई-पत्रिका देखि मोन उल्लाससँ भरि गेल। विज्ञान कतेक प्रगति कऽ रहल अछि...अहाँ सभ अनन्त आकाशकेँ भेदि दियौसमस्त विस्तारक रहस्यकेँ तार-तार कऽ दियौक...। अपनेक अद्भुत पुस्तक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक विषयवस्तुक दृष्टिसँ गागरमे सागर अछि। बधाई।
१९.श्री हेतुकर झापटना-जाहि समर्पण भावसँ अपने मिथिला-मैथिलीक सेवामे तत्पर छी से स्तुत्य अछि। देशक राजधानीसँ भय रहल मैथिलीक शंखनाद मिथिलाक गाम-गाममे मैथिली चेतनाक विकास अवश्य करत।
२०. श्री योगानन्द झाकबिलपुरलहेरियासराय- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पोथीकेँ निकटसँ देखबाक अवसर भेटल अछि आ मैथिली जगतक एकटा उद्भट ओ समसामयिक दृष्टिसम्पन्न हस्ताक्षरक कलमबन्द परिचयसँ आह्लादित छी। "विदेह"क देवनागरी सँस्करण पटनामे रु. 80/- मे उपलब्ध भऽ सकल जे विभिन्न लेखक लोकनिक छायाचित्रपरिचय पत्रक ओ रचनावलीक सम्यक प्रकाशनसँ ऐतिहासिक कहल जा सकैछ।
२१. श्री किशोरीकान्त मिश्र- कोलकाता- जय मैथिलीविदेहमे बहुत रास कविता, कथा, रिपोर्ट आदिक सचित्र संग्रह देखि आ आर अधिक प्रसन्नता मिथिलाक्षर देखि- बधाई स्वीकार कएल जाओ।
२२.श्री जीवकान्त- विदेहक मुद्रित अंक पढ़ल- अद्भुत मेहनति। चाबस-चाबस। किछु समालोचना मरखाह..मुदा सत्य।
२३. श्री भालचन्द्र झा- अपनेक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखि बुझाएल जेना हम अपने छपलहुँ अछि। एकर विशालकाय आकृति अपनेक सर्वसमावेशताक परिचायक अछि। अपनेक रचना सामर्थ्यमे उत्तरोत्तर वृद्धि होएहि शुभकामनाक संग हार्दिक बधाई। 
२४.श्रीमती डॉ नीता झा- अहाँक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ। ज्योतिरीश्वर शब्दावलीकृषि मत्स्य शब्दावली आ सीत बसन्त आ सभ कथाकविताउपन्यास, बाल-किशोर साहित्य सभ उत्तम छल। मैथिलीक उत्तरोत्तर विकासक लक्ष्य दृष्टिगोचर होइत अछि।
२५.श्री मायानन्द मिश्र- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक मे हमर उपन्यास स्त्रीधन जे विरोध कएल गेल अछि तकर हम विरोध करैत छी।... कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पोथीक लेल शुभकामना।(श्रीमान् समालोचनाकेँ विरोधक रूपमे नहि लेल जाए।-गजेन्द्र ठाकुर)
२६.श्री महेन्द्र हजारी- सम्पादक श्रीमिथिलाकुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़ि मोन हर्षित भऽ गेल..एखन पूरा पढ़यमे बहुत समय लागतमुदा जतेक पढ़लहुँ से आह्लादित कएलक।
२७.श्री केदारनाथ चौधरी- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक अद्भुत लागलमैथिली साहित्य लेल ई पोथी एकटा प्रतिमान बनत। 
२८.श्री सत्यानन्द पाठक- विदेहक हम नियमित पाठक छी। ओकर स्वरूपक प्रशंसक छलहुँ। एम्हर अहाँक लिखल - कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखलहुँ। मोन आह्लादित भऽ उठल। कोनो रचना तरा-उपरी।
२९.श्रीमती रमा झा-सम्पादक मिथिला दर्पण। कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक प्रिंट फॉर्म पढ़ि आ एकर गुणवत्ता देखि मोन प्रसन्न भऽ गेलअद्भुत शब्द एकरा लेल प्रयुक्त कऽ रहल छी। विदेहक उत्तरोत्तर प्रगतिक शुभकामना।
३०.श्री नरेन्द्र झापटना- विदेह नियमित देखैत रहैत छी। मैथिली लेल अद्भुत काज कऽ रहल छी।
३१.श्री रामलोचन ठाकुर- कोलकाता- मिथिलाक्षर विदेह देखि मोन प्रसन्नतासँ भरि उठल, अंकक विशाल परिदृश्य आस्वस्तकारी अछि।
३२.श्री तारानन्द वियोगी- विदेह आ कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखि चकबिदोर लागि गेल। आश्चर्य। शुभकामना आ बधाई।
३३.श्रीमती प्रेमलता मिश्र “प्रेम”- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ। सभ रचना उच्चकोटिक लागल। बधाई।
३४.श्री कीर्तिनारायण मिश्र- बेगूसराय- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक बड्ड नीक लागलआगांक सभ काज लेल बधाई।
३५.श्री महाप्रकाश-सहरसा- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक नीक लागलविशालकाय संगहि उत्तमकोटिक।
३६.श्री अग्निपुष्प- मिथिलाक्षर आ देवाक्षर विदेह पढ़ल..ई प्रथम तँ अछि एकरा प्रशंसामे मुदा हम एकरा दुस्साहसिक कहब। मिथिला चित्रकलाक स्तम्भकेँ मुदा अगिला अंकमे आर विस्तृत बनाऊ।
३७.श्री मंजर सुलेमान-दरभंगा- विदेहक जतेक प्रशंसा कएल जाए कम होएत। सभ चीज उत्तम।
३८.श्रीमती प्रोफेसर वीणा ठाकुर- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक उत्तमपठनीय, विचारनीय। जे क्यो देखैत छथि पोथी प्राप्त करबाक उपाय पुछैत छथि। शुभकामना।
३९.श्री छत्रानन्द सिंह झा- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँबड्ड नीक सभ तरहेँ।
४०.श्री ताराकान्त झा- सम्पादक मैथिली दैनिक मिथिला समाद- विदेह तँ कन्टेन्ट प्रोवाइडरक काज कऽ रहल अछि। कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक अद्भुत लागल।
४१.डॉ रवीन्द्र कुमार चौधरी- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक बहुत नीकबहुत मेहनतिक परिणाम। बधाई।
४२.श्री अमरनाथ- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक आ विदेह दुनू स्मरणीय घटना अछिमैथिली साहित्य मध्य।
४३.श्री पंचानन मिश्र- विदेहक वैविध्य आ निरन्तरता प्रभावित करैत अछिशुभकामना।
४४.श्री केदार कानन- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक लेल अनेक धन्यवादशुभकामना आ बधाइ स्वीकार करी। आ नचिकेताक भूमिका पढ़लहुँ। शुरूमे तँ लागल जेना कोनो उपन्यास अहाँ द्वारा सृजित भेल अछि मुदा पोथी उनटौला पर ज्ञात भेल जे एहिमे तँ सभ विधा समाहित अछि।
४५.श्री धनाकर ठाकुर- अहाँ नीक काज कऽ रहल छी। फोटो गैलरीमे चित्र एहि शताब्दीक जन्मतिथिक अनुसार रहैत तऽ नीक।
४६.श्री आशीष झा- अहाँक पुस्तकक संबंधमे एतबा लिखबा सँ अपना कए नहि रोकि सकलहुँ जे ई किताब मात्र किताब नहि थीकई एकटा उम्मीद छी जे मैथिली अहाँ सन पुत्रक सेवा सँ निरंतर समृद्ध होइत चिरजीवन कए प्राप्त करत।
४७.श्री शम्भु कुमार सिंह- विदेहक तत्परता आ क्रियाशीलता देखि आह्लादित भऽ रहल छी। निश्चितरूपेण कहल जा सकैछ जे समकालीन मैथिली पत्रिकाक इतिहासमे विदेहक नाम स्वर्णाक्षरमे लिखल जाएत। ओहि कुरुक्षेत्रक घटना सभ तँ अठारहे दिनमे खतम भऽ गेल रहए मुदा अहाँक कुरुक्षेत्रम् तँ अशेष अछि।
४८.डॉ. अजीत मिश्र- अपनेक प्रयासक कतबो प्रश‍ंसा कएल जाए कमे होएतैक। मैथिली साहित्यमे अहाँ द्वारा कएल गेल काज युग-युगान्तर धरि पूजनीय रहत।
४९.श्री बीरेन्द्र मल्लिक- अहाँक कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक आ विदेह:सदेह पढ़ि अति प्रसन्नता भेल। अहाँक स्वास्थ्य ठीक रहए आ उत्साह बनल रहए से कामना।
५०.श्री कुमार राधारमण- अहाँक दिशा-निर्देशमे विदेह पहिल मैथिली ई-जर्नल देखि अति प्रसन्नता भेल। हमर शुभकामना।
५१.श्री फूलचन्द्र झा प्रवीण-विदेह:सदेह पढ़ने रही मुदा कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देखि बढ़ाई देबा लेल बाध्य भऽ गेलहुँ। आब विश्वास भऽ गेल जे मैथिली नहि मरत। अशेष शुभकामना।
५२.श्री विभूति आनन्द- विदेह:सदेह देखिओकर विस्तार देखि अति प्रसन्नता भेल।
५३.श्री मानेश्वर मनुज-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक एकर भव्यता देखि अति प्रसन्नता भेलएतेक विशाल ग्रन्थ मैथिलीमे आइ धरि नहि देखने रही। एहिना भविष्यमे काज करैत रहीशुभकामना।
५४.श्री विद्यानन्द झा- आइ.आइ.एम.कोलकाता- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक विस्तारछपाईक संग गुणवत्ता देखि अति प्रसन्नता भेल। अहाँक अनेक धन्यवादकतेक बरखसँ हम नेयारैत छलहुँ जे सभ पैघ शहरमे मैथिली लाइब्रेरीक स्थापना होअएअहाँ ओकरा वेबपर कऽ रहल छीअनेक धन्यवाद। 
५५.श्री अरविन्द ठाकुर-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक मैथिली साहित्यमे कएल गेल एहि तरहक पहिल प्रयोग अछिशुभकामना।
५६.श्री कुमार पवन-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक पढ़ि रहल छी। किछु लघुकथा पढ़ल अछिबहुत मार्मिक छल।
५७. श्री प्रदीप बिहारी-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक देखलबधाई।
५८.डॉ मणिकान्त ठाकुर-कैलिफोर्निया- अपन विलक्षण नियमित सेवासँ हमरा लोकनिक हृदयमे विदेह सदेह भऽ गेल अछि।
५९.श्री धीरेन्द्र प्रेमर्षि- अहाँक समस्त प्रयास सराहनीय। दुख होइत अछि जखन अहाँक प्रयासमे अपेक्षित सहयोग नहि कऽ पबैत छी।
६०.श्री देवशंकर नवीन- विदेहक निरन्तरता आ विशाल स्वरूप- विशाल पाठक वर्गएकरा ऐतिहासिक बनबैत अछि।
६१.श्री मोहन भारद्वाज- अहाँक समस्त कार्य देखलबहुत नीक। एखन किछु परेशानीमे छी, मुदा शीघ्र सहयोग देब।
६२.श्री फजलुर रहमान हाशमी-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक मे एतेक मेहनतक लेल अहाँ साधुवादक अधिकारी छी।
६३.श्री लक्ष्मण झा "सागर"- मैथिलीमे चमत्कारिक रूपेँ अहाँक प्रवेश आह्लादकारी अछि।..अहाँकेँ एखन आर..दूर..बहुत दूरधरि जेबाक अछि। स्वस्थ आ प्रसन्न रही।
६४.श्री जगदीश प्रसाद मंडल-कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक पढ़लहुँ । कथा सभ आ उपन्यास सहस्रबाढ़नि पूर्णरूपेँ पढ़ि गेल छी। गाम-घरक भौगोलिक विवरणक जे सूक्ष्म वर्णन सहस्रबाढ़निमे अछिसे चकित कएलकएहि संग्रहक कथा-उपन्यास मैथिली लेखनमे विविधता अनलक अछि। समालोचना शास्त्रमे अहाँक दृष्टि वैयक्तिक नहि वरन् सामाजिक आ कल्याणकारी अछिसे प्रशंसनीय।
६५.श्री अशोक झा-अध्यक्ष मिथिला विकास परिषद- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक लेल बधाई आ आगाँ लेल शुभकामना।
६६.श्री ठाकुर प्रसाद मुर्मु- अद्भुत प्रयास। धन्यवादक संग प्रार्थना जे अपन माटि-पानिकेँ ध्यानमे राखि अंकक समायोजन कएल जाए। नव अंक धरि प्रयास सराहनीय। विदेहकेँ बहुत-बहुत धन्यवाद जे एहेन सुन्दर-सुन्दर सचार (आलेख) लगा रहल छथि। सभटा ग्रहणीय- पठनीय।
६७.बुद्धिनाथ मिश्र- प्रिय गजेन्द्र जी,अहाँक सम्पादन मे प्रकाशित विदेहआ कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक’ विलक्षण पत्रिका आ विलक्षण पोथी! की नहि अछि अहाँक सम्पादनमेएहि प्रयत्न सँ मैथिली क विकास होयत,निस्संदेह।
६८.श्री बृखेश चन्द्र लाल- गजेन्द्रजीअपनेक पुस्तक कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक पढ़ि मोन गदगद भय गेल हृदयसँ अनुगृहित छी । हार्दिक शुभकामना ।
६९.श्री परमेश्वर कापड़ि - श्री गजेन्द्र जी । कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक पढ़ि गदगद आ नेहाल भेलहुँ।
७०.श्री रवीन्द्रनाथ ठाकुर- विदेह पढ़ैत रहैत छी। धीरेन्द्र प्रेमर्षिक मैथिली गजलपर आलेख पढ़लहुँ। मैथिली गजल कत्तऽ सँ कत्तऽ चलि गेलैक आ ओ अपन आलेखमे मात्र अपन जानल-पहिचानल लोकक चर्च कएने छथि। जेना मैथिलीमे मठक परम्परा रहल अछि। (स्पष्टीकरण- श्रीमान्प्रेमर्षि जी ओहि आलेखमे ई स्पष्ट लिखने छथि जे किनको नाम जे छुटि गेल छन्हि तँ से मात्र आलेखक लेखकक जानकारी नहि रहबाक द्वारेएहिमे आन कोनो कारण नहि देखल जाय। अहाँसँ एहि विषयपर विस्तृत आलेख सादर आमंत्रित अछि।-सम्पादक)
७१.श्री मंत्रेश्वर झा- विदेह पढ़ल आ संगहि अहाँक मैगनम ओपस कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक सेहो, अति उत्तम। मैथिलीक लेल कएल जा रहल अहाँक समस्त कार्य अतुलनीय अछि।
७२. श्री हरेकृष्ण झा- कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक मैथिलीमे अपन तरहक एकमात्र ग्रन्थ अछिएहिमे लेखकक समग्र दृष्टि आ रचना कौशल देखबामे आएल जे लेखकक फील्डवर्कसँ जुड़ल रहबाक कारणसँ अछि।
७३.श्री सुकान्त सोम- कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक मे  समाजक इतिहास आ वर्तमानसँ अहाँक जुड़ाव बड्ड नीक लागलअहाँ एहि क्षेत्रमे आर आगाँ काज करब से आशा अछि।
७४.प्रोफेसर मदन मिश्र- कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक सन किताब मैथिलीमे पहिले अछि आ एतेक विशाल संग्रहपर शोध कएल जा सकैत अछि। भविष्यक लेल शुभकामना।
७५.प्रोफेसर कमला चौधरी- मैथिलीमे कुरुक्षेत्रम्‌ अंतर्मनक सन पोथी आबए जे गुण आ रूप दुनूमे निस्सन होअएसे बहुत दिनसँ आकांक्षा छलओ आब जा कऽ पूर्ण भेल। पोथी एक हाथसँ दोसर हाथ घुमि रहल अछिएहिना आगाँ सेहो अहाँसँ आशा अछि।
७६.श्री उदय चन्द्र झा "विनोद": गजेन्द्रजीअहाँ जतेक काज कएलहुँ अछि से मैथिलीमे आइ धरि कियो नहि कएने छल। शुभकामना। अहाँकेँ एखन बहुत काज आर करबाक अछि।
७७.श्री कृष्ण कुमार कश्यप: गजेन्द्र ठाकुरजीअहाँसँ भेँट एकटा स्मरणीय क्षण बनि गेल। अहाँ जतेक काज एहि बएसमे कऽ गेल छी ताहिसँ हजार गुणा आर बेशीक आशा अछि।
७८.श्री मणिकान्त दास: अहाँक मैथिलीक कार्यक प्रशंसा लेल शब्द नहि भेटैत अछि। अहाँक कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक सम्पूर्ण रूपेँ पढ़ि गेलहुँ। त्वञ्चाहञ्च बड्ड नीक लागल।
 ७९. श्री हीरेन्द्र कुमार झा- विदेह ई-पत्रिकाक सभ अंक ई-पत्रसँ भेटैत रहैत अछि। मैथिलीक ई-पत्रिका छैक एहि बातक गर्व होइत अछि। अहाँ आ अहाँक सभ सहयोगीकेँ हार्दिक शुभकामना।

विदेह

मैथिली साहित्य आन्दोलन

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'विदेह' २२५ म अंक ०१ मई २०१७ (वर्ष १० मास ११३ अंक २२५)

ऐ  अंकमे अछि :- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१. १. राजदेव मण्‍डल -  दूटा बीहैन क था २. रबीन्‍द्र नारायण मिश...