Saturday, September 01, 2012

'विदेह' ११२ म अंक १५ अगस्त २०१२ (वर्ष ५ मास ५६ अंक ११२)- PART VII


१.जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल’- की भेटल आ की हेरा गेल  (आत्म गीत)- (आगाँ)२. नारायण झा- एखनहुँ जकड़ल छीएकता
जगदीश चन्द्र ठाकुर अनिल
की भेटल आ की हेरा गेल  (आत्म गीत)- (आगाँ)
लिखबा आ पढबा केर नशा
सूनब आ सुनयबा केर नशा
शब्दक सोनाहीरामोती
देखब आ देखयबा केर नशा

सदिखन आनन्दित रहबाले
जीवनक अर्थ छल बुझा गेल
हम सोचि रहल  छी जीवनमे
की भेटल आ की हेरा गेल ।
  
हम गाम-गाम घूमय लगलहुं
सभठां सभ किछु देखय लगलहुं
नवतुरियाकें ताकय लगलहुं
दुखमोचनकें चीन्हय लगलहुं

मरनी’,‘बिल्टू’ केर देखि बगय
छल अपन सभ दुख पडा गेल,
हम सोचि रहल छी जीवनमे
की भेटल आ की हेरा गेल।

कवितामे देखलहुं हिमगिरिकें
कवितामे देखलहुं गंगाकें
कवितामे देखलहुं अपनहि सन
नहि जानि कते भिखमंगाकें

छल नाममूल आ गोत्र सभक
कवितामे सभटा बुझा गेल,
हम सोचि रहल छी जीवनमे
की भेटल आ की हेरा गेल।
  
हम आंखि खोलि चलइत रहलहुं
घुमइत रहलहुंदेखइत रहलहुं
पढइत रहलहुंसुनइत रहलहुं
गुनइत रहलहुंधुनइत रहलहुं

अहिनामे क्रमशः हमरहुसं
तोरा अंगनामे’ लिखा गेल,
हम सोचि रहल छी जीवनमे
की  भेटल आ की हेरा गेल ।
  
शशिकान्त-सुधाकान्तक जोडी
हमरा शब्दहुकें पांखि देलनि
उडि गेल शब्द सभ गाम-गाम,
पटनादिल्ली आ कोलकाता

गुरूजनप्रियजनक प्रशंसासं
छल हमर आत्मा जुडा गेल,
हम सोचि रहल छी जीवनमे
की भेटल आ की हेरा गेल।
  
सतनारायणक कथा सुनलहुं
सपता-विपताक व्यथा सुनलहुं
चौरचनमे खीर आ पूरीतं
छठिमे ठकुआ-भुसबा खेलहुं

दुर्गापूजामे बलिप्रदान
छल प्रश्न मोनमे उठा गेल
हम सोचि रहल छी जीवनमे
की भेटल आ की हेरा गेल ।
  

नारायण झाग्राम पोस्ट रहुआ . संग्राम। प्रखण्ड. मधेपुर, जिला. मधुबनी ;बिहार। पिन कोड 847408

कविता

1. एखनहु जकड़ल छी


अप्पन देस आ अप्पन गॅाव
पर पूर्वहि पड़ल स्वच्छन्दताक छॉव
एखनहु धरि छी हम जकड़ल
डेन पकड़ि जाइछ पकड़ल ।
परम्परा आ मनगढ़ बात
डेग . डेग पर खींचॅए हाथ
विचार सदिखन राखि सुविचार
गढै़त रही नीक आचार ।
आजादीक दिन होयत तखन पवित्र
जखन आनोक नयना सॅ देखव चित्र
नीकक सदिखन गमकए सुगंध
बेजाइक पल पल गन्हकए गंध ।
देखाबी हम मेहनत कॅ
फुलाबी छाती अपनहि मेहनत सॅ
मेहनतक फल होइछ मीठ
छीनल संपदा सदिखन तीत ।
हे शिक्षार्थीए हे नवतुरिया
खोलू चौपतल ज्ञानक पुरिया
दुनिया अछि लोक भॅाति . भॅाति सॅ बनल
एखनहु धरि ठाड़ छी परतंत्रक पॉति मे अड़ल ।
अप्पन देष आ अप्पन गॅाव
पर पूर्वहि पड़ल स्वच्छन्दताक छॉव
एखनहु धरि छी हम जकड़ल
डेन पकड़ि जाइछ पकडल ।


2.

एकता
बंधू एकताक डोर सॅं
बॉंटू सूत-सूत कॅं डोर मे
नहि चोट खाउ अनेकताक रोड सॅं
गढू एकताक जोर मे।
न केयो हिन्दु न मुसलमान
सभ थिकहु विवेकी इंसान
न केयो सिक्ख न ईसाई
सभ थिकहु छोट-पैघ भाई-भाई।
सभ तनक लहुक कण
मिलाउ देखु एकहि सन
किया करब मानवताक डाह
सोचव तँ नीनो मे आयत आह।
जे थिकाह अल्ला
हुनकहि राम
जे थिकाह ईसा
कहैत छी श्याम
कखनहुँ बनि साई
कखनहुँ हनमान
सभ देव-देवीक थीक नाना नाम।
जाति -पाति छूआ-छुत
एहि सॅं रहु सभ अछुत
पूत बनि भारत मॉं कए
जुनि दुतकारू एहि मॉं कए
एक भॅं लगाउ जयकारा
गुंजा दिअयो भू-नभ-तारा
जय भारत-भूमि जय हे माता
अपनेक छी सभहक विधाता
बंधू एकताक डोर सॅं
बॉंटू सूत-सूत कॅं डोर मे
नहि चोट खाउ अनेकताक रोड सॅं
गढू एकताक जोर मे।
 
ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ।


विदेह नूतन अंक मिथिला कला संगीत
१.राजनाथ मिश्र (चित्रमय मिथिला) उमेश मण्डल (मिथिलाक वनस्पति/ मिथिलाक जीव-जन्तुमिथिलाक जिनगी)
१.
राजनाथ मिश्र
चित्रमय मिथिला स्लाइड शो
चित्रमय मिथिला (https://sites.google.com/a/videha.com/videha-paintings-photos/ )

.
उमेश मण्डल

मिथिलाक वनस्पति स्लाइड शो
मिथिलाक जीव-जन्तु स्लाइड शो
मिथिलाक जिनगी स्लाइड शो
मिथिलाक वनस्पति/ मिथिलाक जीव जन्तु/ मिथिलाक जिनगी  (https://sites.google.com/a/videha.com/videha-paintings-photos/ )


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विदेह नूतन अंक गद्य-पद्य भारती
१. मोहनदास (दीर्घकथा):लेखक: उदय प्रकाश (मूल हिन्दीसँ मैथिलीमे अनुवाद विनीत उत्पल)
२.छिन्नमस्ता- प्रभा खेतानक हिन्दी उपन्यासक सुशीला झा द्वारा मैथिली अनुवाद
३.कनकमणि दीक्षित (मूल नेपालीसँ मैथिली अनुवाद श्रीमती रूपा धीरू आ श्री धीरेन्द्र प्रेमर्षि)
१.प्रो. चम्पा शर्माक डोगरी कविताक हिन्दी अनुवाद: श्रीमती रजनी शर्मा आ मैथिली अनुवाद डॉ. शंभु कुमार सिंह२.कुमार संभव भारद्वाज क हिन्दी कविताक मैथिली अनुवाद: मैथिली अनुवादकडॉ. शंभु कुमार सिंह



                                                                                                                      डोगरी कविता
मूल प्रो. चम्पा शर्मा
(अवकाश प्राप्त संस्थापक अध्यक्षस्नातकोत्तर डोगरी विभागजम्मू विश्वविद्यालयजम्मू)
हिन्दी अनुवाद : श्रीमती रजनी शर्मा
मैथिली अनुवाद : डॉ. शंभु कुमार सिंह
स्नेह-भरल सनेस
बाजू सैनिक! कोन ठाम?
स्नेह-भरल सनेस पठाबी
अहाँक नाम?
रहबाक अहाँक नहि कोनो ठेकान,
आइ सियासी काल्हि पुलगामा
आँखिएमे अहाँ काटी राति,
जड़कल्ला आकि हो बरसाति।
पठाबी स्नेहक मनि-आडर,
पूँछ’ ‘रजौरी’ ‘डोडा’, ‘पाडर
अहाँ लिखि भेजूकतए पठाबी,
अहाँक नाम?
बाजू सैनिक! कोन ठाम?
स्नेह-भरल सनेस पठाबी
अहाँक नाम?
कनहा पर सभदिन बोझ उठौने,
ठाम-कुठाम अहाँ डेग बढौने।
गरम सीरकमे हमसभ सूती,
अहाँ छातीसँ बन्दूक लगौने।
एक बरोबरि दिन आ राति,
की साँझ आ की परात।
कतए करै छी अहाँ विश्राम?
कोन ठाम?
बाजू सैनिक! कोन ठाम?
स्नेह-भरल सनेस पठाबी
अहाँक नाम?
सियाचीनमे कोना रहै छी,
बर्फ-बिछौना कोना सहै छी?
सहैत हएब अहाँ बहुत ठंढ
नहाएब तँ बुझू हैत दंड।
नीक-सन एकटा पैटर्न चूनिकए,
स्नेहक एकटा स्वीटर बुनिकए
छी रखनेबाजू कतए पठाबी
अहाँक नाम?
बाजू सैनिक! कोन ठाम?
स्नेह-भरल सनेस पठाबी
अहाँक नाम?
उत्तरलाई आ जैसलमेर
भेल अहाँक ड्यूटी कैक बेर।
चलैत बलुआही तुफ़ान
भेल हैब अहाँ केहन हरान?
करैत अमावस-सन अन्हार,
अपनहुँ चेहरा भेल अनचिन्हार।
स्नेह भरल हम चान चढ़ाबी
अहाँक नाम।
बाजू सैनिक! कोन ठाम?
स्नेह-भरल सनेस पठाबी
अहाँक नाम?
जहाज उड़ाएब भ जाए सरल,
सदिखन सीमान पर आँखि गरल।
दुश्मन बैसल अछि ताकमे,
नहि ओकर इरादा पाक अछि।
छल-कपट करि ओ घेरए नहि,
अहाँक मति ओ फेरए नहि।
स्नेहक हम बरखा बरसाबी,
अहाँक नाम।
बाजू सैनिक! कोन ठाम?
स्नेह-भरल सनेस पठाबी
अहाँक नाम?
कोच्चिगोवाविशाखापट्टनम्
अंडमान आ चेन्नई दक्खिन।
जल-सेना केर बेड़ा तारल,
देशक दुश्मनकेँ अहाँ मारल।
विश्व प्रशंसक अछि अहाँक,
स्वयं वरूण छथि रक्षक अहाँक।
एहिसँ बढ़िकए हम कहि की सकै छी?
अहाँक नाम?
बाजू सैनिक! कोन ठाम?
स्नेह-भरल सनेस पठाबी
अहाँक नाम?
साहस ऊँचजेना की पीर
कारगिल जाउ आकि कश्मीर।
रक्षा अहाँक करताह महेश,
गौरी-नन्दन श्रीगणेश।
देश बचाएबधरम निभाएब,
जोरावर सन यश अहाँ पाएब।
आशीर्वचनक खाता फुजाबी
अहाँक नाम।
बाजू सैनिक! कोन ठाम?
स्नेह-भरल सनेस पठाबी
अहाँक नाम?
खाखीचिट्टीलीलहा वर्दी
अछि सरिपहुँ हमरा हमदर्दी।
माथ सँ ल कए पयर धरि,
बुझू ईश्वर केर रूप अनेक।
मिलत जखन वीरता केर तगमा,
रचब एकटा सुन्नर-सन नगमा।
तार मुबारक केर पठायब
अहाँक नाम।
बाजू सैनिक! कोन ठाम?
स्नेह-भरल सनेस पठाबी
अहाँक नाम?
जखन सुनै छी अहाँके फोन,
प्रमुदित भ’ उठैछ हमर मोन।
चिन्तामुक्त भ हम सुतै छी,
मुक्त गगनमे हम उड़ै छी।
सभ कुछ लागए हमरा मीत।
मोन करए लिखू कोनो गीत,
अहाँक नाम।
बाजू सैनिक! कोन ठाम?
स्नेह-भरल सनेस पठाबी
अहाँक नाम?
यौ विक्कीगुरदीप कि तारक,
होमए अहाँकेँ जनम दिन मुबारक।
समय भेटए तँ गौशाला जाएब,
हरियर घास गायकेँ ओगारब।
घूरि कए करब फोन जलंधर,
दादी संग एखन जाइ छी मंदिर।
अशेष स्नेह लेल धूप जरायब
अहाँक नाम।
बाजू सैनिक! कोन ठाम?
स्नेह-भरल सनेस पठाबी
अहाँक नाम?
भूल्ली भैंसक दूधक घी,
सेहो छी हम संजोगने ।
कुलदेवता केर पूजासँ पहिने,
खा ने केओ सकता जे हो।
श्री-पुलाव अहाँकेँ भाबए,
जल्दी बनाउ आबि कही माए’!
सभ इच्छा हम पूर करब
खाइत छी किरिया हम?
बाजू सैनिक! कोन ठाम?
स्नेह-भरल सनेस पठाबी
अहाँक नाम?
बहुतो दिनसँ
एकादशीक हम व्रत छी रखने,
करब उद्यापन
आएब अहाँ घूरि घर जखने,
काज तँ आओरो.... छैक घर पर
दिल खोलि हम ककरा देखाउ?
हम्मर प्राण!
बाजू सैनिक! कोन ठाम?
स्नेह-भरल सनेस पठाबी
अहाँक नाम?
पागल-सन भेल अछि अहाँक बहिन,
कुशल पूछैत छथि ओ सभ दिन।
राहड़ा’* करैत छथि अहाँके नामक,
चर्च करैत छथि अहाँके काजक।
वीर हमर युद्ध जीतकेँ औताह,
कबुला करथि जा कए बाहवे।
देवी माँ केँ भेंट चढौती
अहाँक नाम।
बाजू सैनिक! कोन ठाम?
स्नेह-भरल सनेस पठाबी
अहाँक नाम?
युद्ध जीत कए अहाँ जे आएब,
करब यज्ञ आ भोज कराएब।
ठाम-ठाम पर फूल बिछायब,
रंगोलीसँ घर-द्वार सजायब।
अमृतसरबाहवेसतवारी
जाएब ओतए हम बेरा-बेरी।
पीर-मज़ार पर रोट चढ़ाएब
अहाँक नाम।
बाजू सैनिक! कोन ठाम?
स्नेह-भरल सनेस पठाबी
अहाँक नाम?
देखि अहाँकेँ चान चढ़ए,
केतनहुँ किएक नहि काज बढ़ए।
देखी अहाँके सूरत कोमल,
सदिखन रहए मोन अति हुलसल,
चहुँ-दिस आबि जाएत बहार,
बसात गबै अछि मेघ-मल्हार।
गीत प्रीत केर गबै अछि कोयल
अहाँक नाम।
बाजू सैनिक! कोन ठाम?
स्नेह-भरल सनेस पठाबी
अहाँक नाम?
*‘राहड़ा (जम्मू क्षेत्रमे मनाओल जाएवला भाय-बहिनक एकटा महत्वपूर्ण पर्व)


***

कुमार संभव भारद्वाज (उम्र-12 बर्षकक्षा-8ग्राम- लहुआरपत्रालय तेलहरअंचल-महिषी, जिला-सहरसाबाबू चतुर्भुज सिंहक प्रथम पौत्र छथि। मूल रूपसँ हिन्दीमे लिखल गेल मेरा भारत देश महान हिनक पहिल कविता छियनि।)
मैथिली अनुवादकडॉ. शंभु कुमार सिंह

हमर भारत देश महान
हमर भारत देश महान
जकर हम गाबी गुणगान
विद्या केर भंडार एतय अछि
कुरीति केर विनाशक अछि
आन कलामे परिपूर्ण अछि
व्यापक अछि ई अनुपम अछि,
हमर भारत देश महान
जकर हम गाबी गुणगान
कहल जाइछ एहि देशक आगू
सब क्यो माथ झुकौने अछि
आन नदी आ पर्वत सभ सेहो
एकर गुणकेँ गौने अछि,
एहि धरती पर गंगा-यमुना केर बहैत निर्मल धारा अछि,
हमर भारत देश महान
जकर हम गाबी गुणगान
वीर पुरूषसँ भरल पड़ल ई
हमर मुल्क हमर समाज ई
कुँवर सिंह आ गाँधीजी केर
यैह निवास स्थान अछि,
एहि धरती पर जनम नेने छथि
रामकृष्ण ओ बुद्ध सेहो
एहि धरती पर जनम नेने छथि
सीता ओ सावित्री सेहो,
हमर भारत देश महान
जकर हम गाबी गुणगान।
                              ****

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'विदेह' २२४ म अंक १५ अप्रैल २०१७ (वर्ष १० मास ११२ अंक २२४)

ऐ  अंकमे अछि :- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१. डॉ. कैलाश कुमार मिश्र -    मैथिलानी केर उपराग राम सं आ समाज ...