Saturday, September 15, 2012

'विदेह' ११३ म अंक ०१ सितम्बर २०१२ (वर्ष ५ मास ५७ अंक ११३) - PART II



२.गद्य
२.१. आशीष अनचिन्हार- काफिया आ बहर


२.२.१. पूनम मण्डल- मैथिलीक तेसर विकीलीक्स २. नवेंदु कुमार झा-पटना मे पसरत हीराक चमक/निगरानी विभागक लेल बनि रहल विशिष्ट संवर्ग/ प्रदेश मे शौचालय सॅ वंचित अछि पैघ आबादी

२.३.१. कामिनी कामायनी- उत्तराक नोर २. सत्यनारायण झा-दुटा बात पुत्रक जन्म दिन पर ३. कैलास दास, खोजय पड़त मातृत्व बालगीत

२.४. डॉ.अरुण कुमार सिंह-मातृभाषाक माध्यमसँ उच्चशिक्षा

२.५. बेचन ठाकुर- बाप भेल पि‍त्ती‍

२.६.१. जगदीश प्रसाद मण्डल- पाँचटा विहनि कथा २. राम वि‍लास साहु-दूटा वि‍हनि‍ कथा ३.  चन्दन कुमार झा-विहनि कथा- टटका रचना


२.७.१. दुर्गानन्दर मण्डलल-बेटीक अपमान/ जीवन-मरण २. शि‍वकुमार झा ‘टि‍ल्लूक’-पृथ्वीापुत्र/ राजकमल ३. डा.राजेन्द्र विमल- नव–नव क्षितिजक सन्धान करैत सुजीतक जिद्दी

२.८.१.वि‍देह बाल साहि‍त्यक सम्माजन २०११ सँ सम्मानित  ले.क. मायानाथ झासँ  उमेश मण्डलक साक्षात्कार २.हम पुछैत छी: विदेह मैथिली समानान्तर रंगमंचक संस्थापक मैथिली नाटक आ रंगमंचक आइ धरिक सभसँ पैघ नाम  बेचन ठाकुरसँ  मुन्नाजीक गपशप
 आशीष अनचिन्हार- काफिया आ बहर

तँ आब आबी कने काफियाक दोसर प्रसंगपर---------

 मैथिली आ उर्दू वर्णमालामे अंतर

 जखन मैथिली गजलमे निअम सभ लागू होमए लागल तखन बहुत लोक सभकेँ कष्ट शुरु भेलन्हि। जिनका सभकेँ कष्ट एखनो छन्हि ओहिमे दू तरहँक आदमी छथि। पहिल तरहँक तँ ओ भेलाह जे पहिनेसँ गजल लिखै छथि मुदा बिना कोनो निअमक आ निअम लागू भेलासँ हुनक सभ रचनापर प्रश्न चिन्ह लागि गेल तँए ओ सभ निअमक विरोध करए लगलाह। दोसर तरहँक आदमी ओ छथि जे गजल तँ नै लिखै छथि मुदा गजल विधाक विकास नै सोहेलन्हि तँए ओहो विरोध करए लगलाह। तँ हमरा लग एकटा एहन आदमी छथि जे अपने गजल तँ नै लिखै छथि मुदा निअमक विरोध करै छथि। पेशासँ ओ राज्य सरकारक उच्चस्थ पदाधिकारी छथि। एक दिन ओ कतहुँसँ उर्दूक एकटा नीक शाइर केर गजल पोथी किनलन्हि जे की देवनागरीमे लिप्यंतरण भेल रहै। आब भाइ मैथिली आ उर्दू तँ अलग भाषा छै से ओ पदाधिकारी नै बूझि सकलाह आ हमरासँ प्रश्न पूछि देलाह जे ई महान उर्दू शाइर फल्लाँ केर पोथी थिक आ ऐमे " त " अक्षर केर काफिया " थ " अक्षर छै मुदा अहाँ मैथिलीमे तँ " त" आ "थ" केर अलग निअम बना देने छिऐ। जे निअम उर्दूमे नै चललै से मैथिलीमे कोना चलत आदि-आदि। हम तँ गुम्म रहि गेलहुँ। बहुत हिम्मति कए हम हुनकासँ पुछलिअन्हि जे श्रीमान् अपने पढ़ि कए पास केने छिऐ की पाइ दए क'। आब तँ ओहि सरकारी पदाधिकारीकेँ तामस जे चढ़लन्हि से की कहू---|
ई एकटा खिस्सा अछि मुदा एहन घटना अहाँ संग सेहो भए सकैत अछि। मानि लिअ जे अहूँ कोनो उर्दू गजलक देवनागरी लिप्यंतरण भेल पोथी किनलहुँ आ पढ़लापर देखलहुँ जे " भ " केर काफिया " ब" भेल छै तँ अहूँ भ्रममे पड़ि जाएब। मुदा ऐठाम मोन राखू जे उर्दू आ मैथिली भाषा अलग छै आ ओकर लिपि सेहो अलग-अलग छै तँए काफियाक निअम दूनू भाषामे थोड़े अलग रहतै। इहो मोन राखू जे उर्दू केर जन्म भारतमे भेलै मुदा लालन-पालन अरबी-फारसी बला सभ केलकै। फलस्वरूप उर्दू भाषामे भारतीय भाषाक संगे-संग अरबी-फारसीक निअम चलैत अछि।आ तँए हम अतए देवनागरी ( संगे संग मिथिलाक्षर सेहो ) आ उर्दू लिपिमे अंतर दए रहल छी जाहिसँ अहाँ सभ ओहि पदाधिकारी जकाँ भ्रमित नै हएब।----
देवनागरी ( संगे-संग मिथिलाक्षरमे सेहो ) कुल 16टा स्वर आ 36टा व्यंजन अछि मतलब जे हरेक ध्वनि लेल अलग-अलग अक्षर बनाएल गेल छै मुदा उर्दूमे किछुए अक्षर छै आ तकरामे नुक्ता लगा वा " ह" ध्वनिक प्रयोग कए नव शब्द बनाएल जाइत छै।नुक्ता लगा वा " ह ' मिला कए जे नव शब्द बनैत छै तकरा उच्चारणक हिसाबसँ चारि भागमे बाँटि सकैत छी--------------
a) जे लिखलो जाइत छै आ तकरा उच्चारणों कएल जाइत छै ( हर्फे मक्तूबा मलफूजा )------ई सरल बात छै आशा अछि जे एकरा बुझि गेल हेबै।
b) जे लिखल तँ जाइ छै मुदा ओकर उच्चारण नै कएल जाइत छै ( हर्फे मक्तूबा गैर मलफूजा )------उर्दूमे बहुत रास एहन शब्द छै जाहिमे किछु अक्षर लिखल तँ जाइ छै मुदा ओकर उच्चारण नै होइत छै आ मात्रा गनबा काल सेहो ओकरा नै गनल जाइत छै जेना---- "तुम अपनी" ऐकेँ आवश्यकता पड़लापर "तुमपनी" सेहो उच्चारित कएल जाइत छै। आब देखू जे "तुम अपनी"मे अ लिखल छै मुदा ओकर उच्चारण नै भए रहल छै ( आवश्यकता पड़लापर ) । शब्दकेँ ऐ तरीकासँ मिलेनाइकेँ " अलिफ वस्ल'क निअम कहल जाइत छै।
जे लिखल तँ नै जाइ छै मुदा ओकर उच्चारण नै कएल जाइत छै ( हर्फे मलफूज गैर मक्तूबा )----जेना पढ़ल तँ बिल्कुल जाइ छै मुदा लिखल बालेकुल जाइ छै। आ चूँकि उच्चारणमे आबि रहल छै तँए मात्रा सेहो गनल जाइत छै। एहन-एहन आर उदाहरण सभ अछि।
एहन अक्षर जकर अंतमे " ह" केर उच्चारण होइक ( हाए मख्तूली )------------लगभग कुल चौदहटा अक्षर उर्दू वर्णमालामे संस्कृत वर्णमालासँ लेल गेल छै। ई अक्षर सभ अछि-----------ख, घ, ङ, छ, झ,ठ,ढ,थ, ध,फ,भ, ल्ह,म्ह आ न्ह।
उर्दूमे ऐ शब्द सभकेँ एना लिखल जाइत छै------
क संग ह जोड़लापर ख
ग संग ह जोड़लापर घ
च संग ह जोड़लापर छ
ज संग ह जोड़लापर झ
ट संग ह जोड़लापर ठ
ड संग ह जोड़लापर ढ़
त संग ह जोड़लापर थ
द संग ह जोड़लापर ध
प संग ह जोड़लापर फ
ब संग ह जोड़लापर भ


ङ, ल्ह, म्ह आ न्ह स्वतंत्र रूपेँ लिखल जाइत छै।
आब अहाँ सभ देखि सकै छी जे देवनागरीमे तँ ख,घ इत्यादि लेल स्वतंत्र अक्षर आ तकर ध्वनि छै मुदा उर्दूमे एकरा लेल " ह' मिलाबए पड़ैत छै संगे संग ङ आदिक उच्चारणमे तँ " ह " छैके।आब जँ कोनो उर्दू शाइर " ह " फेंटाएल अक्षरक काफिया बनबै छथि तँ ओ उर्दूक उच्चारण परंपराक अनुसार " ह " केर उच्चारण नै करै छथि। तँए उर्दूमे " बात " शब्दक काफिया " साथ " बनि सकै छै। कारण " साथ "मे जे "थ" छै तकर "ह" निकालि देल जाइत छै। आन-आन " ह " मिश्रित शब्दक काफिया लेल एनाहिते बुझू। ऐठाँ ईहो मोन राखू जे मात्रा सेहो उच्चारणक हिसाबसँ गानल जाइत छै उर्दूमे तँए जँ कोनो देवनागरी लिप्यंतरण बला पोथी केर अधार पर मात्रा निकालि रहल छी तँ गड़बड़ भए सकैए। मूल उर्दू लिपि सीखू आ तकर उच्चारण सेहो तखने अहाँ उर्दू गजलक सही मात्रा पकड़ि सकै छी।

 2) वर्तमान सभ भारतीय भाषा लिपि बामसँ दहिन लिखल जाइत अछि मुदा उर्दू दहिनासँ बाम। तेनाहिते देवनागरीमे शब्द रचना काल अक्षरक स्वरूप नै बदलै छै मुदा उर्दूमे बदलि जाइत छै। ऐकेँ अतिरिक्तो आन-आन अंतर छै जे व्यवहारिक स्तरपर बूझल जा सकैए।
आब हमरा पूरा विश्वास अछि जे अहाँ सभ ओहि पदाधिकारी जकाँ भ्रमित नै हएब। एक बेर फेर मोन राखू जे देवनागरीक अलग-अलग ध्वनि लेल अलग-अलग अक्षर छै ( गाम घरक उच्चारणमे स, श आदि एसमान उच्चारण होइत छै जकर विवरण आगू देल जाएत ) मुदा उर्दूमे नै तँए देवनागरी ( मिथिलाक्षर )मे " त " केर काफिया " थ " नै बनि सकैए वा " प " केर काफिया " फ " नै बनि सकैए।
ऐ विवरणक बाद आबी बहरपर----
बहर ----

 गजल सदिखन कोने ने कोने बहरमे होइत छैक। बिना बहरक गजलक कल्पना असंभव। जेना छन्दक आधार लय होइत छैक तेनाहिते बहरक आधार अऱूज वा अऱूद होइत छैक। अऱूज वा अऱूद मने शेर मे निहित मात्रा-क्रम होइत छैक। अऱूज वा अऱूदके वज़न सेहो कहल जाइत छैक। बहरक चर्च आगाँ बढ़एबासँ पहिने एकटा गप्प आर| एहिठाम हम उर्दू बहर केर वर्णन कए रहल छी। आ मैथिली गजलमे इ बहर सभक प्रयोग मैथिली गजलक 100सालक इतिहासमे कहिओ नहि भेल | मैथिलीमे बहर नै छल मतलब कृत्रिम रूपेँ बहर नै छल। योगानंद हीरा जी बहुत पहिनेसँ अरबी बहरमे मैथिली गजल लिखैत छलाह, मुदा मैथिलीक बहर-अज्ञानी संपादक सभ हुनका कात कए देलक जाहिकेँ फलस्वरूप मैथिली गजलमे बहरक चर्चा नै भए सकल। मुदा हालहिमे गजेन्द्र ठाकुर द्वारा बहरे-मुतकारिबमे सफलतापूर्वक गजल लिखल गेल। तँए आब एकर चर्चा आवश्यक। ओना मैथिलीमे वार्णिक बहरक खोज सेहो गजेन्द्र ठाकुर द्वारा भेल अछि जकर अनुकरण प्रायः हरेक नव गजलकार कए रहल छथि। एहि लेखमे जतेक उदाहरण देल गेल अछि से वार्णिक बहर पर आधारित अछि। ओना एहि बहरक चर्चा हम बादमे सेहो करब। तँ पहिने उर्दूक बहर देखी।

 अऱूज वा अऱूदक अविष्कार हिजरीक दोसर सदीमे खलीले इब्ने अहमद बसरी केने छलाह। हुनका इ विचार मक्काक ठठेरा बजारमे बर्तन बनेबाक अवाज सूनि अएलन्हि। प्राचीन कालमे मक्काके अऱूज वा अऱूद सेहो कहल जाइत छलैक तँए बसरी ओहि मात्रा क्रमके अऱूज वा अऱूदक नाम देलथि। अरबी साहित्यमे 16 बहरक प्रयोग भेल। बादमे इरानमे तीन टा बहरक अविष्कार भेल। आब हम एहिठाम बहरक संक्षिप्त परिचय दए रहल छी।

 अरबी साहित्यमे बहर तीन खंडमे बाँटल गेल अछि 1) सालिम मने मूल बहर, 2 ) मुरक्कब मने मिश्रित बहर आ 3) मुदाइफ मने परिवर्तित बहर। एहि तीनूमेसँ मुदाइफ बहरके चर्चा हम बादमे करब|
अरबीमे सालिम मने मूल बहर मे सात टा बहर अबैत अछि। आ मुरक्कबमे बारह टा। बादमे एही बारहके उलट-फेर करैत आठ टा आर बहर बनाएल गेल। कुल मिला कए मुरक्कब बहर बीस टा भेल। हम अपना सुविधा लेल मुरक्कब बहरकेँ दू खंडमे बाँटि देने छी। संगहि-संग सालिम बहरके हम "समान बहर" नाम देने छिऐक। आ मुरक्कब बहरक पहिल खंड (जाहिमे कुल सात टा बहर अछि) तकरा अर्धसमान बहर नाम देलिऐक आ मुरक्कब बहरक दोसर खंड जाहिमे तेरह टा बहर अछि तकर नाम "असमान बहर" देलिऐ। तँ आब एकर विवरण निच्चा देखू।।
बहरसँ पहिने रुक्नकेँ बूझी।
संस्कृतक गण जकाँ अरबी मे सेहो होइत छैक जकरा "रुक्न" कहल जाइत छैक। इ रुक्न आठ प्रकारके होइत अछि। जकर विवरण एना अछि-------


रुक्नक स्वरूप
मात्रा


रुक्नक नाम
मात्रा क्रम

 खमासी रुक्न

 5

 फऊलुन ( फ/ऊ/लुन)
ISS (I/S/S)
खमासी रुक्न
5


फाइलुन (फा/इ/लुन)
SIS (S/I/S)
सुबाई रुक्न
7
फाइलातुन (फा/इ/ला/तुन)
SISS ( S/I/S/S )
सुबाई रुक्न

 7

 मफाईलुन (म/फा/ई/लुन)

 ISSS ( I/S/S/S )

 सुबाई रुक्न

 7

 मुस्तफइलुन (मुस्/तफ/इ/लुन

 SSIS ( S/S/I/S )
सुबाई रुक्न
 7

 मुफाइलतुन (मु/फा/इ/ल/तुन )


ISIIS ( I/S/I/I/S )
सुबाई रुक्न
7
मुतफाइलुन (मु/त/फा/इ/लुन
IISIS ( I/I/S/I/S )
सुबाई रुक्न
7

 मफऊलातु (मफ/ऊ/ला/तु

 SSSI ( S/S/S/I )

 ****** एहिठाम I मने 1 मने हस्व आ S मने 2 मने दीर्घ भेल संगे-संग खमासी मने पाँच मात्राक आ सुबाई मने सात मात्राक रुक्न भेल | एहि रुक्न सभकेँ इयाद रखबाक लेल गणितीय रूपसँ एना बुझू---------

 a) एकटा लघुकेँ बाद जँ दूटा दीर्घ हो तँ ओकरा "फऊलुन" कहल जाइत छैक।


b) एकटा लघुकेँ बाद जँ तीनटा दीर्घ हो तँ ओकरा "मफाईलुन" कहल जाइत छैक।
c) जँ "मफाईलुन" केँ उल्टा करबै तँ "मफऊलात" बनि जाएत मने तीनटा दीर्घकेँ बाद एकटा लघु।


d) दूटा दीर्घकेँ बीचमे जँ एकटा लघु रहए तखन ओकरा "फाइलुन" कहल जाइत छैक।
e) "फाइलुन" केर अंतमे जँ एकटा आर दीर्घ जोडबै तँ ओ "फाइलातुन" बनि जाएत।
f) "फाइलातुन" केर उल्टा रूप "मुस्तफइलुन" होइत छैक।
g) शुरुमे एकटा लघु तकरा बाद एकटा दीर्घ तकरा बाद फेर दूटा लघु आ तकरा अंतमे एकटा दीर्घ हो तँ "मुफाइलतुन" कहल जाइत छैक


h) "मुफाइलुन" केर अंतसँ तेसर या दोसर लघु हटा कए पहिल लघु लग बैसा देबै तँ "मुतफाइलुन" बनि जाएत। मने शुरुमे टूटा लघु तकरा बाद एकटा दीर्घ तकरा बाद फेर एकटा लघु आ तकरा बाद अंतमे एकटा दीर्घ।
1) समान ध्वनि---------एहि खंडमे कुल सात गोट बहर राखल जाइत अछि। जकर विवरण एना अछि--------
क) बहरे-हज़ज---------- एकर मूल ध्वनि अछि "मफाईलुन" मतलब I-S-S-S (1-2-2-2) मने हस्व् -दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ| इ ध्वनि शाइर अपना सुविधानुसार प्रयोग कए सकैत छथि। मतलब कोनो शाइर एक पाँतिमे एक बेर, वा दू बेर वा ...... कतेको बेर ( बेसीसँ बेसी सोलह बेर ) प्रयोग कए सकैत छथि, मुदा मात्रा-क्रम नहि टुटबाक चाही।आ जँ एहि ध्वनि के शेर के रुप मे देबै तँ एना हेतैक------
I-S-S-S
I-S-S-S
I-S-S-S + I-S-S-S

 I-S-S-S + I-S-S-S
I-S-S-S + I-S-S-S + I-S-S-S


I-S-S-S + I-S-S-S + I-S-S-S
I-S-S-S + I-S-S-S + I-S-S-S + I-S-S-S
I-S-S-S + I-S-S-S + I-S-S-S + I-S-S-S.......................................
तँ इ भेल बहरे-हज़ज केर ढ़ाँचा। एहिठाम फेर एक बेर गौरसँ देखू। उपरका ढ़ाँचा सभमे दूनू पाँतिमे मात्रा क्रम एकै छैक। अर्थात ह्रस्व के निच्चा ह्रस्व आ दीर्घ। आ मोन राखू जँ अहाँ बहरे-हज़जमे गजल लीखि रहल छी तँ हरेक शेरक मात्रा क्रम इएह देबए पड़त। नहि तँ गजल बे-बहर कहाओत। श्री गजेन्द्र ठाकुर द्वारा लिखित बहरे हजज केर एकटा उदाहरण देखू---------------------
महामाला महाडाला करै स्वाहा लगैए ई
 अकासी आस छै सोझाँ झझा देतै लगैए ई


कहैए ई मिलेबै आइ नोरोमे कने गोला
जँ भांगे पीबि एतै, भावना पीतै लगैए ई

 जहाँ ताकी लगैए प्रेम बाझै छै सरैलामे

 खने भोकारि पाड़ैए हँसै नै छै लगैए ई






टिपौड़ी छै बुझेबै बात की, धाही कनी देखू
कटैया पानि जेना ओ, नचै नै छै लगैए ई

 गजेन्द्र पूब सुरुजक रहत देतै सूर्यकेँ झाँखी

 चढ़त आकास देखै बानसब्बरै लगैए ई



 अमित मिश्र द्वारा लिखल बहरे हज़ज केर उदाहरण देखू----------

 उड़ल सबटा चिड़ैयाँ गाछपर फुर्रसँ
जँ बैसल चारपर चारो खसल चुर्रसँ


हमर गाड़ी लतामक डाढ़ि आ सनठी
चलै छै तेज अपने मुँह करै हुर्रसँ

 गिलासक दूध मिसियो नीक नै लागै
भरल तौला दही आँङुर लगा सुर्रसँ
अपन बाछी अपन गैया त ता थैया
अपन झबरा करै अपनपर नै गुर्रसँ
फटक्का फूटलै ब्राम ब्रम ब्रूमसँ
जड़ै छै छूरछूरी छूर्र छू छुर्रसँ
मफाईलुन
1222 तीन बेर
बहरे हजज
ख) बहरे-रमल------- एकर मूल ध्वनि एना अछि--- फाइलातुन मने ----- S-I-S-S,अर्थात दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ। आब जँ एहि ध्वनि के शेर मे प्रयोग करबै तँ एना हेतैक---
S-I-S-S + S-I-S-S + S-I-S-S + S-I-S-S
S-I-S-S + S-I-S-S + S-I-S-S + S-I-S-S
(एहिठाम हम खाली चारि-चारि ध्वनिके उदाहरण देलहुँ अछि, मुदा शाइर एकसँ लए कए कतेको बेर ( बेसीसँ बेसी सोलह बेर ) ध्वनिके प्रयोग कए सकैत छथि।) इ भेल बहरे-रमल। अमित मिश्र द्वारा लिखल बहरे रमल केर उदाहरण देखू----------
घोघ हुनकर उतरि गेलै
पवन संगे ससरि गेलै
आँखि रहि गेलै खुजल यौ
रूप यौवन निखरि गेलै

 टोह मे छल मोन बगुला
राशि सुन्नर उचरि गेलै
चउरचन मे चान पूजब

 पावइन सब बिसरि गेलै
जेठ मे मधुमास एलै
गाछ नव दिल मजरि गेलै
मधुप केलक आक्रमण बड
काम मे सब लचरि गेलै
अंशु आशक झाँपि लेलनि
कुकुर पर जे नजरि गेलै
पाप भेलै ,घोघ ससरल

 अमितके मन हहरि गेलै

 फाइलातुन ( I-U-U-U )

बहरे-रमल
ग) बहरे-कामिल----- एकर मूल ध्वनि अछि "मुतफाइलुन" मने I-I-S-I-S मने ह्रस्व-ह्रस्व-दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ। शेरमे एकर ढ़ाँचा एना छैक------
I-I-S-I-S + I-I-S-I-S + I-I-S-I-S + I-I-S-I-S + I-I-S-I-S
I-I-S-I-S + I-I-S-I-S + I-I-S-I-S + I-I-S-I-S + I-I-S-I-S


(एहिठाम हम खाली चारि-चारि ध्वनिके उदाहरण देलहुँ अछि, मुदा शाइर एकसँ लए कए कतेको बेर ( बेसीसँ बेसी सोलह बेर ) ध्वनिके प्रयोग कए सकैत छथि।) इ भेल बहरे-कामिल|अमित मिश्र द्वारा लिखल बहरे कामिल केर उदाहरण देखू----------
किछु बात एहन भेल छै
घर घर त' रावण भेल छै
बम फोड़ि छाउर देश छै
जड़ि देह जाड़न भेल छै


प्रिय नै विरह जनमै बहुत
सजि दर्द गायन भेल छै
जिनगी भ' गेल महग कते
झड़कैत सावन भेल छै
दस बात सूनब की "अमित"
सब ठाम गंजन भेल छै
मुतफाइलुन
11212 दू बेर
बहरे -कामिल


घ) बहरे-मुतकारिब-------- एकर मूल ध्वनि फऊलुन अछि मने I-S-S मने ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ। एकर ढ़ाँचा देखू-------
I-S-S + I-S-S + I-S-S + I-S-S + I-S-S
I-S-S + I-S-S + I-S-S + I-S-S + I-S-S
(एहिठाम हम खाली चारि-चारि ध्वनिके उदाहरण देलहुँ अछि, मुदा शाइर एकसँ लए कए कतेको बेर ( बेसीसँ बेसी सोलह बेर ) ध्वनिके प्रयोग कए सकैत छथि।)


इ भेल बहरे-मुतकारिब| अमित मिश्र द्वारा लिखल बहरे मुतकारिब केर उदाहरण देखू----------
जखन राति आएल कारी पिया यौ अहाँ मोन पड़लौ
जखन होइ घर मोर खाली पिया यौ अहाँ मोन पड़लौ

अहाँ दूर बैसल सताबैत छी साँझ-भोरे सदिखने

 सनेसोँ जँ आएल देरी पिया यौ अहाँ मोन पड़लौ


बरसलै प्रथम बूँद वर्षा मिलन यादि आबै तखन यौ
विरह केर तानल दुनाली पिया यौ अहाँ मोन पड़लौँ
पिया जी जखन बहल पवना मधुर गीत गाबैत कोयल
जखन काँट मे फसल साड़ी पिया यौ अहाँ मोन पड़लौँ
जँ देखब कतौ छिपकली डर सँ बोली फुटै नै हमर यौ
जँ धड़कै हमर सून छाती पिया यौ अहाँ मोन पड़लौँ
कने आबि नेहक जड़ल भाग फेरो सँ चमका दिऔ यौ
अमित आश देखैत रानी पिया यौ अहाँ मोन पड़लौ
बहरे -मुतकारिब


{ह्रस्व-दीर्ध-दीर्ध 6बेर सब पाँतिमे }


बहरे मुतकारिब बहुत लोकप्रिय आ संगीतमय बहर छै। आदि शंकराचार्य आ गोस्वामी तुलसी दास सेहो ऐ बहरक प्रयोग केने छथि। पहिने आदि शंकराचार्यक ई निर्वाण षट्कम देखू-----------
मनो बुद्ध्यहंकारचित्तानि नाहम् न च श्रोत्र जिह्वे न च घ्राण नेत्रे
न च व्योम भूमिर् न तेजॊ न वायु: चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवॊऽहम्
न च प्राण संज्ञो न वै पञ्चवायु: न वा सप्तधातुर् न वा पञ्चकोश:
न वाक्पाणिपादौ न चोपस्थपायू चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवॊऽहम्
न मे द्वेष रागौ न मे लोभ मोहौ मदो नैव मे नैव मात्सर्य भाव:
न धर्मो न चार्थो न कामो ना मोक्ष: चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवॊऽहम्


न पुण्यं न पापं न सौख्यं न दु:खम् न मन्त्रो न तीर्थं न वेदा: न यज्ञा:
अहं भोजनं नैव भोज्यं न भोक्ता चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवॊऽहम्
न मृत्युर् न शंका न मे जातिभेद: पिता नैव मे नैव माता न जन्म
न बन्धुर् न मित्रं गुरुर्नैव शिष्य: चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवॊऽहम्



 अहं निर्विकल्पॊ निराकार रूपॊ विभुत्वाच्च सर्वत्र सर्वेन्द्रियाणाम्
न चासंगतं नैव मुक्तिर् न मेय: चिदानन्द रूप: शिवोऽहम् शिवॊऽहम्
आब देखू तुलसी दास जी द्वारा लिखल ई स्त्रोत-------------
नमामी शमीशान निर्वाण रूपं
विभू व्यापकम् ब्रम्ह वेदः स्वरूपं
पहिल पाँतिकेँ मात्रा क्रम अछि---- ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घदोसरो पाँतिकेँ मात्रा क्रम अछि-----ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ
नोट--- दोसर पाँतिमे ब्रम्हकेँ गेबा कालमे बर् = दीर्घकएल जाइत छै।
ङ) बहरे-मुतदारिक--------एकर मूल ध्वनि अछि "फाइलुन" मने S-I-S मने दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ अछि। एकर ढ़ाँचा एना अछि------
S-I-S + S-I-S + S-I-S + S-I-S
S-I-S + S-I-S + S-I-S + S-I-S
(एहिठाम हम खाली चारि-चारि ध्वनिके उदाहरण देलहुँ अछि, मुदा शाइर एकसँ लए कए कतेको बेर ( बेसीसँ बेसी सोलह बेर ) ध्वनिके प्रयोग कए सकैत छथि)| इ भेल बहरे-मुतदारिक। अमित मिश्र द्वारा लिखल बहरे मुतदारिक केर उदाहरण देखू




कुकुर उनटल पड़ल लार पर
बंदरो बैसलै चार पर
मूस दौगै गहुँम भरल घर
कोइली तन दै तार पर
नादि पर गाय दै दूध छै
नजर देने श्रवन ढार पर

 स्वागत लेल बौआ कए

 फूल मुस्कै गुथल हार पर





 भोर भेलै उठल राजा यौ

 अमित बौआ चढ़ल कार पर

 दीर्घ- हर्स्व -दीर्घ 3 बेर

 च) बहरे-रजज------ एकर मूल ध्वनि "मुस्तफइलुन" छैक। मने S-S-I-S मने दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ। एकर ढ़ाँचा एना हेतैक------
S-S-I-S + S-S-I-S + S-S-I-S + S-S-I-S
S-S-I-S + S-S-I-S + S-S-I-S + S-S-I-S


(एहिठाम हम खाली चारि-चारि ध्वनिके उदाहरण देलहुँ अछि, मुदा शाइर एकसँ लए कए कतेको बेर ( बेसीसँ बेसी सोलह बेर ) ध्वनिके प्रयोग कए सकैत छथि।)
इ भेल बहरे-रजज |अमित मिश्र द्वारा लिखल बहरे रजज केर उदाहरण देखू----------
बाल गजल

 कारी महिस के दूध उज्जर छै कते
भरि मोन पारी पीबि दुब्बर छै कते

 रसगर जिलेबी गरम नरमे नरम छै
लड्डू बनल बेसनक बज्जर छै कते


छै पात हरियर फूल शोभित गाछ छै
जामुन लिची आमक इ मज्जर छै कते
दू एक दू आ चारि दूनी आठ छै
अस्सी कते नै जानि सत्तर छै कते
भालू बला देखाब' सबके नाँच हौ
झट आगि छड़पै दौड़ चक्कर छै कते

 मुस्तफइलुन
2212 तीन बेर
बहरे रजज
छ) बहरे-वाफिर------------ एकर मूल ध्वनि "मुफाइलतुन" छैक मने I-S-I-I-S मने ह्रस्व-दीर्घ-ह्रस्व-ह्रस्व-दीर्घ। एकर ढ़ाँचा देखू------
I-S-I-I-S + I-S-I-I-S + I-S-I-I-S + I-S-I-I-S
I-S-I-I-S + I-S-I-I-S + I-S-I-I-S + I-S-I-I-S
(एहिठाम हम खाली चारि-चारि ध्वनिके उदाहरण देलहुँ अछि, मुदा शाइर एकसँ लए कए कतेको बेर ( बेसीसँ बेसी सोलह बेर ) ध्वनिके प्रयोग कए सकैत छथि। इ भेल बहरे-वाफिर | अमित मिश्र द्वारा लिखल बहरे वाफिर केर उदाहरण देखू----------
खतम सब काज भेल हमर

 स्वतंत्र मिजाज भेल हमर

 कतौ जिनगी छलै धधकै
खुशी पर राज भेल हमर
पुरान जँ गाछ , मज्जर नव
अपन त' अवाज भेल हमर
सरस पल भेल बड दिनपर
सदेह इलाज भेल हमर
सदिखन गजल लिखैत रहब
अमित नव साज भेल हमर


बहरे-वाफिर
मुफाइलतुन U-I-U-U-I 2 बेर सब पाँतिमे
2) अर्धसमान बहर-------- एहि खंडमे कुल 56 बहर अछि मुदा मात्र 7 टा प्रचलित अछि। एकरा हम अर्धसमान बहर एहि द्वारे कहैत छिऐक जे एहिमे हरेक पाँतिमे कमसँ-कम अनिवार्य रुपसँ दूटा ध्वनिके समान रुपमे प्रयोग करए पड़ैत छैक। आब शाइर एहि दूनू ध्वनिके एक पाँतिमे जाए बेर ( बेसीसँ बेसी सोलह बेर ) प्रयोग कए सकथि ओ हुनका ऊपर छन्हि। आ एहि खंडक सभ बहर लेल एहने सन बूझू।। एकर विवरण निच्चा देल जा रहल अछि।




1) फऊलुन + फाइलुन ( एकर उल्टा रूप सेहो छै.....)
फाइलुन + फऊलुन
2) फऊलुन + फाइलातुन ( एकर उल्टा रूप सेहो छै.....)
फाइलातुन + फऊलुन
आ निच्चाक सभ बाँचल 26 टा बहरक लेल एनाहिते नियम छै। आ ऐ तरहें ऐ खंडमे कुल 56 टा बहर भेल।
3) फऊलुन + मफाईलुन

 4) फऊलुन + मुस्तफइलुन

 5) फऊलुन + मुफाइलतुन

 6) फऊलुन + मुतफाइलुन
7) फऊलुन + मफऊलातु
8) फाइलुन + फाइलातुन
9) फाइलुन + मफाईलुन
10) फाइलुन+ मुस्तफइलुन
11) फाइलुन + मुफाइलतुन
12) फाइलुन + मुतफाइलुन
13) फाइलुन + मफऊलातु

14)फाइलातुन + मफाईलुन

 15) फाइलातुन + मुस्तफइलुन
16) फाइलातुन + मुफाइलतुन
17) फाइलातुन + मुतफाइलुन
18) फाइलातुन + मफऊलातु
19) मफाईलुन + मुस्तफइलुन
20) मफाईलुन + मुफाइलतुन
21) मफाईलुन + मुतफाइलुन
22) मफाईलुन + मफऊलातु

 23) मुस्तफइलुन + मुफाइलुन

 24) मुस्तफइलुन + मुतफाइलुन

 25) मुस्तफइलुन + मफऊलातु

 26) मुफाइलतुन + मुतफाइलुन

 27) मुफाइलतुन + मफऊलातु

 28)  मुतफाइलुन + मफऊलातु
आब अहाँ सभ जरूर कहब जे जखन मात्र साते टा बहर प्रचलित छै तखन एतेक देबाक कोन काज। मुदा बेसी प्रचलित नै हेबाक मतलब ई नै छै जे ई गलत छै। वस्तुतः बहरक प्रयोग अभ्यास पर निर्भर छै आ हरेक शाइर अपना हिसाबसँ बहरक चुनाब करैत छथि। भए सकैए जे जाहि बहरकेँ अरबी जीह पर कठिनाह लागल हो से मैथिलीमे सहज लागए तँए ई सभ देल गेल अछि। तँ देखी ई सात टा बहु-प्रचलित बहर आ ओकर नामकेँ।
क) बहरे-तवील--------- एकर मूल ध्वनि छैक " फऊलुन-मफाईलुन"। एकर ढ़ाँचा देखू-------
I-S-S + I-S-S-S
I-S-S + I-S-S-S
I-S-S + I-S-S-S + I-S-S + I-S-S-S
I-S-S + I-S-S-S + I-S-S + I-S-S-S


I-S-S + I-S-S-S + I-S-S + I-S-S-S + I-S-S + I-S-S-S
I-S-S + I-S-S-S + I-S-S + I-S-S-S + I-S-S + I-S-S-S...........................
एहि बहर आ एहि खंडक बाँकी अन्य छहो बहरक लेल एकटा आर बात मोन राखू जे ध्वनि जाहि क्रममे देल गेल अछि ताही क्रममे रहबाक चाही। जेना की बहरे-तवीलमे अहाँ देखलहुँ जे एकर ध्वनि एना छैक " फऊलुन-मफाईलुन" मुदा जँ अहाँ एकरा " मफाईलुन- फऊलुन" बला क्रममे रखबै तँ इ बहरे-तवील नहि हएत। अमित मिश्र जीक लिखल बहरे तवील देखल जाए------------
पुन: जोडि लेबै नेहकेँ डोर राजा जी
कनेको बहै नै जानकेँ नोर राजा जी
 कने आउ राजा जानि नै की भ' जेतै यौ
कनेको नचाबू प्रेमकेँ मोर राजा जी


किए सुन्न भेलौं आइ बेमौत मारै छी
कने आइ मस्तीमे करू शोर राजा जी
जमाना मिलेतै नै सुनू बैलगा देतै
अनाड़ी बुझै छै प्रेम छै चोर राजा जी
चटा देब संगे प्यार के चाशनी हमरा
अमीतो बुझू भेलै सराबोर राजा जी

 हरेक पाँतिमे "फऊलुन-मफाईलुन" अर्थात ( ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ + ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ सँ बनल बहरे तवील )

 ख) बहरे-मदीद-----------एकर मूल ध्वनि अछि "फाइलातुन-फाइलुन"। एकर ढ़ाँचा एना छैक--------
S-I-S-S + S-I-S
अमित मिश्र जीक लिखल बहरे मदीद देखल जाए------------
कोन टोना केलकै जोगिया सदिखन करेजा हमर जरिते रहल
चोरि केने चैन होशो हमर सदिखन अनेरे उड़िते रहल
नै छलै डर एत' मरबाक आ नै मोन मे दर्द अंदेशा छलै
देख नवका एत' बहिते हवा से आब नेहक गजल मरिते रहल


भागि गेलै कोन नगरक गली मे आइ देखा क' सतरंगी सपन
बाट जोहैते भ' जेतै कखन की आँखिमे नोर बड भरिते रहल
उजरि गेलै जखन कोनो उपवनक कोनटा परक गाछक फूल यौ
तखन सबटा कोयलक मधुर बोली संग दर्दक हवा उड़िते रहल
आइ खोजै छी अपन ओहि जादूगर कए फेर खेला खेलबै
अमित केने आश नेहक सदिखने भीतरे-भीतर जरिते रहल
बहरे मदीद
फाइलातुन-फाइलुन ( I-U-I-I+ I-U-I ) 3 बेर

 ग) बहरे बसीत----- एकर मूल ध्वनि " मुस्तफइलुन-फाइलुन" छैक। एकर ढ़ाँचा एना हएत------------------

 S-S-I-S + S-I-S

 देखू अमित मिश्र द्वारा लिखल ई गजल जे की बहरे बसीतमे अछि-----

 बेटा अपन मुर्खके सोटासँ हम अकछ छी
बाबाक फूटलहबा लोटासँ हम अकछ छी
पेट्रोल कखनो त' कखनो गैस सब्जी महग
काला बजारी करै कोटासँ हम अकछ छी
बेटी कपारपर छै चिन्ता इ सदिखन बनल
कनियाक नेहक भरल मोटासँ हम अकछ छी
छै आगि धरती बनल नै पानि आकाश मे
पीबैत कारी धुआँ मोटासँ हम अकछ छी

 दै यै भगा काज छोड़ा जीब कोना बचब
छै खसल टाकाक लंगोटासँ हम अकछ छी
रचना करै छी त' खर्चा होइ यै नै मुदा
अतिथी अमित एत' दस गोटासँ हम अकछ छी
मुस्तफइलुन-फाइलुन दू बेर
बहरे-बसीत
घ) बहरे-मुजस्सम वा मुजास----------------------------- एकर मूल ध्वनि " मुस्तफइलुन-फाइलातुन" छैक। एकर ढ़ाँचा एहन छैक---------
S-S-I-S + S-I-S-S
अमित मिश्र जीक लिखल बहरे मुजास देखल जाए------------
बसलौँ अहाँ जखन मनमे हमरा चमकि गेल जिनगी
अनमोल नेहक उड़ल खुशबूमे गमकि गेल जिनगी
माधुर्य माँखैत खुजलै जखने कमल ठोर रानी
लवणी सँ छलकैत ताड़ी बूझू छलकि गेल जिनगी

 गाबी अहाँ गीत मोने मोने जँ तैयौ गजब धुन
मुस्की द' देलौँ चहटगर अमृत झमकि गेल जिनगी
नीरीह जानबर बनि नैनक मारि खेलौँ सदिखने
फूले छलै बाण नैनक तेँए धड़कि गेल जिनगी
सगरो अहाँ के लिखल छवि डूबल कलम नेहमे यै
गाबै अमित गजल लिखलक देखू दमकि गेल जिनगी
बहरे मुजास
ङ) बहरे- मुन्सरह----------- एकर मूल ध्वनि "मुस्तफइलुन-मफऊलात"। एकर ढ़ाँचा छैक---------------
S-S-I-S + S-S-S-I
अमित मिश्र जीक लिखल बहरे मुन्सरह देखल जाए------------
आखर जखन रूपक लिखल
उपमा सजल फूलक लिखल
आदर्श छी रूपक बनल
काजर नयन कातक लिखल
सरगम अहाँक स्वर सजल
मुस्की नगर तानक लिखल


कहलौँ करेजक सब कहल
किछु बात हम राजक लिखल

 चमकैत नभ मे छी चान
तारा गजल हाटक लिखल
मुस्तफइलुन-मफऊलातु


च) बहरे-मजरिअ-------------- एकर मूल ध्वनि छैक "मफाईलुन-फाइलातुन" एकर ढ़ाँचा एना छैक--------
I-S-S-S+S-I-S-S


छ) बहरे-मुक्तजिब------- एकर मूल ध्वनि छैक " मफऊलात-मुस्तफइलुन"। एकर ढ़ाँचा छैक-----------
S-S-S-I +S-S-I-S
ओम प्रकाश जीक लिखल बहरे मुक्तजिबमे लिखल ई गजल देखल जाए-------------------
धारक कात रहितो पियासल रहि गेल जिनगी हमर
मोनक बात मोनहि रहल, दुख सहि गेल जिनगी हमर


मुस्की हमर घर आस लेने आओत नै आब यौ
पूरै छै कहाँ आस सबहक, कहि गेल जिनगी हमर
सीखेलक इ दुनिया किला बचबै केर ढंगो मुदा
बचबै मे किला अनकरे टा ढहि गेल जिनगी हमर
पाथर बाट पर छी पडल, हमरा पूछलक नै कियो
कोनो बन्न नाला जकाँ चुप बहि गेल जिनगी हमर
जिनगी "ओम" बीतेलकै बीचहि धार औनाइते
भेंटल नै कछेरो कतौ, बस दहि गेल जिनगी हमर

 (बहरे मुक्तजिब)



 49टा बाँचल बहरक नाम हमरो एखन धरि नै पता लागल अछि। पता लगिते जरूर कहब।


3) असमान बहर--------- एहि खंडमे कुल 213 गोट बहर अछि मुदा मात्र 13 टा प्रचलित अछि। एकरा हम असमान बहर एहि द्वारे कहैत छिऐक जे एहिमे हरेक पाँतिमे कमसँ-कम अनिवार्य रुपसँ तीनटा ध्वनिके समान रुपमे प्रयोग करए पड़ैत छैक।आब शाइर एहि तीनू ध्वनिके एक पाँतिमे जाए बेर ( बेसीसँ बेसी सोलह बेर ) प्रयोग कए सकथि ओ हुनका ऊपर छन्हि। आ एहि खंडक आर अन्य बहर लेल एहने सन बूझू। एकर विवरण निच्चा देल जा रहल अछि।
ऐ असमान बहरक दू भागकेँ हमरा लोकनि देखी। पहिल भाग ओ भेल जाहिमे तीनटा अलग-अलग रुक्नकेँ एक पाँतिमे एक बेरमे प्रयोग कए जाइत छै। आ दोसर भाग ओ भेल जाहिमे दूटा एक समान रुक्न आ एकटा दोसर रुक्न लेल जाइत छै। तँ पहिने देखी ओ बहर जाहिमे तीनटा अलग-अलग रुक्नकेँ एक पाँतिमे एक बेरमे प्रयोग कए जाइत छै।
1) फऊलुन + फाइलुन + फाइलातुन ( एकर दूटा आर रूप हेतै)
a) फाइलुन + फाइलातुन+फऊलुन
b) फाइलातुन + फऊलुन + फाइलुन

 एनाहिते निच्चो बला सभक दू-दूटा आर रूप हेतै। कुल मिला ऐ खंडमे 45टा बहर प्राप्त भेल।
2) फऊलुन + मफाईलुन + मुस्तफइलुन
3) फऊलुन + मुफाइलतुन + मुतफाइलुन
4) फाइलुन + फाइलातुन + मफाईलुन
5) फाइलुन + मुस्तफइलुन + मुफाइलतुन
6) फाइलुन + मुतफाइलुन + मफऊलातु
7) फाइलातुन + मफाईलुन + मुस्तफइलुन
8) फाइलातुन + मुफाइलतुन + मुतफाइलुन
9) मफाईलुन + मुस्तफइलुन + मुफाइलतुन

 10) मफाईलुन + मुतफाइलुन + मफऊलातु

 11) मुस्तफइलुन + मुफाइलतुन + मुतफाइलुन
12) मुफाइलतुन + मुतफाइलुन + मफऊलातु
13) मफऊलातु + मुतफाइलुन + मुफाइलतुन
14) मफऊलातु + मुस्तफइलुन + मफाईलुन
15) मफऊलातु + फाइलातुन + फाइलुन
आब आबी दोसर भागमे जाहिमे दूटा एक समान रुक्न आ एकटा दोसर रुक्न लेल जाइत छै...........





 हरेक पाँतिमे फाइलातुन केर दू बेर प्रयोग आ मफाईलुन केर एक बेर प्रयोग ( एकर तीन रूप हेतै )

 फाइलातुन+ फाइलातुन+ मफाईलुन ( मने-----दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ+ दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ+ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ- दीर्घ)
मफाईलुन+फाइलातुन+ फाइलातुन
फाइलातुन+मफाईलुन+फाइलातुन
आ) हरेक पाँतिमे मफाईलुन केर दू बेर प्रयोग आ फाइलातुन केर एक बेर प्रयोग ( एकरो तीन रूप हेतै )
मफाईलुन+ मफाईलुन+फाइलातुन
फाइलातुन+मफाईलुन+ मफाईलुन
मफाईलुन+फाइलातुन+मफाईलुन
इ) हरेक पाँतिमे फाइलातुन केर दू बेर प्रयोग आ मुस्तफइलुन केर एक बेर प्रयोग ( एकरो तीन रूप हेतै)
फाइलातुन+ फाइलातुन+ मुस्तफइलुन
मुस्तफइलुन+फाइलातुन+ फाइलातुन
फाइलातुन+ मुस्तफइलुन+फाइलातुन
ई) हरेक पाँतिमे मुस्तफइलुन केर दू बेर प्रयोग आ फाइलातुन केर एक बेर प्रयोग (एकरो तीन रूप हेतै)
मुस्तफइलुन +मुस्तफइलुन + फाइलातुन
फाइलातुन+मुस्तफइलुन +मुस्तफइलुन
मुस्तफइलुन +फाइलातुन+मुस्तफइलुन
उ) हरेक पाँतिमे फाइलातुन केर दू बेर प्रयोग आ मुफाइलतुन केर एक बेर प्रयोग (एकरो तीन रूप हेतै)
फाइलातुन +फाइलातुन + मुफाइलतुन
मुफाइलतुन+फाइलातुन +फाइलातुन
फाइलातुन +मुफाइलतुन+ फाइलातुन
ऊ) हरेक पाँतिमे मुफाइलतुन केर दू बेर प्रयोग आ फाइलातुन केर एक बेर प्रयोग (एकरो तीन रूप हेतै)
मुफाइलतुन+ मुफाइलतुन+फाइलातुन
फाइलातुन +मुफाइलतुन+ मुफाइलतुन
मुफाइलतुन+ फाइलातुन+मुफाइलतुन
ए) हरेक पाँतिमे फाइलातुन केर दू बेर प्रयोग आ मुतफाइलुन केर एक बेर प्रयोग (एकरो तीन रूप हेतै)
फाइलातुन+ फाइलातुन+मुतफाइलुन
मुतफाइलुन +फाइलातुन+ फाइलातुन
फाइलातुन+ मुतफाइलुन+फाइलातुन
ऐ) हरेक पाँतिमे मुतफाइलुन केर दू बेर प्रयोग आ फाइलातुन केर एक बेर प्रयोग (एकरो तीन रूप हेतै)
मुतफाइलुन +मुतफाइलुन + फाइलातुन
फाइलातुन+मुतफाइलुन +मुतफाइलुन
मुतफाइलुन +फाइलातुन+मुतफाइलुन
ओ) हरेक पाँतिमे फाइलातुन केर दू बेर प्रयोग आ मफऊलात केर एक बेर प्रयोग (एकरो तीन रूप हेतै)
फाइलातुन+ फाइलातुन+मफऊलात
मफऊलात +फाइलातुन+ फाइलातुन
फाइलातुन+ मफऊलात +फाइलातुन
औ) हरेक पाँतिमे मफऊलात केर दू बेर प्रयोग आ फाइलातुन केर एक बेर प्रयोग (एकरो तीन रूप हेतै)
मफऊलात +मफऊलात + फाइलातुन
फाइलातुन+मफऊलात +मफऊलात
मफऊलात +फाइलातुन+मफऊलात
अं) हरेक पाँतिमे मफाईलुन केर दू बेर प्रयोग आ मुस्तफइलुन केर एक बेर प्रयोग ( एकरो तीन रूप हेतै)
मफाईलुन +मफाईलुन + मुस्तफइलुन
मुस्तफइलुन+मफाईलुन +मफाईलुन
मफाईलुन +मफाईलुन+मफाईलुन
अः) हरेक पाँतिमे मुस्तफइलुन केर दू बेर प्रयोग आ मुफाईलुन केर एक बेर प्रयोग (एकरो तीन रूप हेतै)


मुस्तफइलुन+ मुस्तफइलुन+ मुफाईलुन
मुफाईलुन+मुस्तफइलुन+ मुस्तफइलुन
मुस्तफइलुन+मुफाईलुन+ मुस्तफइलुन
क) हरेक पाँतिमे मफाईलुन केर दू बेर प्रयोग आ मुफाइलतुन केर एक बेर प्रयोग ( एकरो तीन रूप हेतै)
मफाईलुन+ मफाईलुन+ मुफाइलतुन
मुफाइलतुन+मफाईलुन+ मफाईलुन
मफाईलुन+ मुफाइलतुन + मफाईलुन
ख) हरेक पाँतिमे मुफाइलतुन केर दू बेर प्रयोग आ मफाईलुन केर एक बेर प्रयोग (एकरो तीन रूप हेतै)


मुफाइलतुन +मुफाइलतुन +मफाईलुन
मफाईलुन +मुफाइलतुन +मुफाइलतुन
मुफाइलतुन +मफाईलुन+मुफाइलतुन
आब आगूक हरेक वर्ग लेल एनाहिते तीन-तीनटा बहर बनैत रहत। हम समयक अबाभकेँ कारणै नै दए रहल छी। अहाँ सभ समय-समय पर एकरा बनबैत रहब। आब ऐठाम देखू जे कुल मिला कए ऐ विवरणमे 56टा वर्ग अछि आ हरेक वर्गमे तीन-तीन टा बहर अछि मने ऐ खंडमे कुल 168टा बहर भेल।


ग) हरेक पाँतिमे मफाईलुन केर दू बेर प्रयोग आ मुतफाइलुन केर एक बेर प्रयोग( एकरो तीन रूप हेतै)
घ) हरेक पाँतिमे मुतफाइलुन केर दू बेर प्रयोग आ मफाईलुन केर एक बेर प्रयोग ( एकरो तीन रूप हेतै)
ङ) हरेक पाँतिमे मफाईलुन केर दू बेर प्रयोग आ मफऊलात केर एक बेर प्रयोग ( एकरो तीन रूप हेतै)
च) हरेक पाँतिमे मफऊलात केर दू बेर प्रयोग आ मफाईलुन केर एक बेर प्रयोग ( एकरो तीन रूप हेतै)


छ) हरेक पाँतिमे मुस्तफइलुन केर दू बेर प्रयोग आ मुफाइलतुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
ज) हरेक पाँतिमे मुफाइलतुन केर दू बेर प्रयोग आ मुस्तफइलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
झ) हरेक पाँतिमे मुस्तफइलुन केर दू बेर प्रयोग आ मुफाइलतुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
ञ) हरेक पाँतिमे मुफाइलतुन केर दू बेर प्रयोग आ मुस्तफइलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)


ट) हरेक पाँतिमे मुस्तफइलुन केर दू बेर प्रयोग आ मफऊलात केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
ठ) हरेक पाँतिमे मफऊलात केर दू बेर प्रयोग आ मुस्तफइलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
ड) हरेक पाँतिमे मुफाइलतुन केर दू बेर प्रयोग आ मुतफाइलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
ढ़) हरेक पाँतिमे मुतफाइलुन केर दू बेर प्रयोग आ मुफाइलतुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
ण) हरेक पाँतिमे मुफाइलतुन केर दू बेर प्रयोग आ मफऊलात केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)

 त) हरेक पाँतिमे मफऊलात केर एक बेर प्रयोग आ मुफाइलतुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)

 थ) हरेक पाँतिमे मुतफाइलुन केर एक बेर प्रयोग आ मफऊलात केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)

 द) हरेक पाँतिमे मफऊलात केर दू बेर प्रयोग आ मफऊलात केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)

 ध) हरेक पाँतिमे फऊलुन केर दू बेर प्रयोग आ फाइलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)

 न) हरेक पाँतिमे फाइलुन केर दू बेर प्रयोग आ फऊलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
प) हरेक पाँतिमे फऊलुन केर एक बेर प्रयोग आ फाइलातुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)

 फ) हरेक पाँतिमे फाइलातुन केर दू बेर प्रयोग आ फऊलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)

 ब) हरेक पाँतिमे फऊलुन केर दू बेर प्रयोग आ मफाईलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)

 भ) हरेक पाँतिमे मफाईलुन केर दू बेर प्रयोग आ फऊलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)

 म) हरेक पाँतिमे फऊलुन केर दू बेर प्रयोग आ मुस्तफइलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)

य) हरेक पाँतिमे मुस्तफइलुन केर दू बेर प्रयोग आ फऊलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)

 र) हरेक पाँतिमे फऊलुन केर दू बेर प्रयोग आ मुफाइलतुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)

ल) हरेक पाँतिमे मुफाइलतुन केर दू बेर प्रयोग आ फऊलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)

 व) हरेक पाँतिमे फऊलुन केर दू बेर प्रयोग आ मुतफाइलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)

 श) हरेक पाँतिमे मुतफाइलुन केर दू बेर प्रयोग आ फऊलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
ष) हरेक पाँतिमे फऊलुन केर दू बेर प्रयोग आ मफऊलात केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
स) हरेक पाँतिमे मफऊलात केर दू बेर प्रयोग आ फऊलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
ह) हरेक पाँतिमे फाइलुन केर दू बेर प्रयोग आ फाइलातुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
क्ष) हरेक पाँतिमे फाइलातुन केर दू बेर प्रयोग आ फाइलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)

त्र) हरेक पाँतिमे फाइलुन केर दू बेर प्रयोग आ मफाईलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)

 ज्ञ) हरेक पाँतिमे मफाईलुन केर दू बेर प्रयोग आ फाइलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)

 ऋ) हरेक पाँतिमे फाइलुन केर दू बेर प्रयोग आ मुस्तफइलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)

 लृ) हरेक पाँतिमे मुस्तफइलुन केर दू बेर प्रयोग आ फाइलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)

 कृ) हरेक पाँतिमे फाइलुन केर दू बेर आ मुफाइलतुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
खृ) हरेक पाँतिमे मुफाइलतुन केर दू बेर प्रयोग आ फाइलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
गृ) हरेक पाँतिमे फाइलुन केर दू बेर प्रयोग आ मुतफाइलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)

 घृ) हरेक पाँतिमे मुतफाइलुन केर दू बेर प्रयोग आ फाइलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)

 चृ) हरेक पाँतिमे फाइलुन केर दू बेर प्रयोग आ मफऊलात केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
छृ) हरेक पाँतिमे मफऊलात केर दू बेर प्रयोग आ फाइलुन केर एक बेर प्रयोग(एकरो तीन रूप हेतै)
मुदा ऐ 213 बहरमेसँ मात्र तेरहे टा बहुप्रचलित छै। आ बाद बाँकी केर उपयोग मुजाइफ रूपमे होइत छै। आब अहाँ सभ जरूर कहब जे जखन मात्र तेरहे टा बहर प्रचलित छै तखन एतेक देबाक कोन काज। मुदा बेसी प्रचलित नै हेबाक मतलब ई नै छै जे ई गलत छै। वस्तुतः बहरक प्रयोग अभ्यास पर निर्भर छै आ हरेक शाइर अपना हिसाबसँ बहरक चुनाब करैत छथि। भए सकैए जे जाहि बहरकेँ अरबी जीह पर कठिनाह लागल हो से मैथिलीमे सहज लागए तँए ई सभ देल गेल अछि। तँ देखी ई तेरह टा बहु-प्रचलित बहर आ ओकर नामकेँ। ई तेरहटा बहर एना अछि--------
क) बहरे-खफीफ------एकर मूल ध्वनि छैक "फाइलातुन-मुस्तफइलुन-फाइलातुन"| एकर ढ़ाँचा छैक------

 S-I-S-S + S-S-I-S + S-I-S-S
ख) बहरे-जदीद----- एकर मूल ध्वनि छैक "फाइलातुन- फाइलातुन-मुस्तफइलुन"| एकर ढ़ाँचा छैक----------
S-I-S-S + S-I-S-S + S-S-I-S
देखू अमित मिश्र द्वारा लिखल ई गजल जे की बहरे जदीदमे अछि-




चादरो फाटल सड़ल बड उठबै कखन
बाढ़ि एलै भासलै घर बनतै कखन
कोन कोना नाह भेटत मजधार मे
राति दिनकर दिन क' चन्ना बूझै कखन
चोरि भेलै चैन आ चाहो के अमल
देह टूटै दोष अनका देबै कखन


डाँग लागै दैब के अधगेरे जखन
पानि मानव एक बूँदो माँगै कखन
बेचबै बेटा जँ जिनगी बचतै तखन
अमित कह ने पानि सगरो घटतै कखन
फाइलातुन-फाइलातुन-मुस्तफइलुन
{ I-U-I-I-I-U-I-I-I-I-U-I} एक बेर सब पाँति मे
बहरे-जदीद
ग) बहरे-सरीअ----- एकर मूल ध्वनि छैक " मुस्तफइलुन- मुस्तफइलुन-मफऊलात" | एकर ढ़ाँचा छैक-------

 S-S-I-S + S-S-I-S + SSSI
देखू अमित मिश्र द्वारा लिखल ई गजल जे की बहरे सरीअमे अछि-----


भेटल अहाँके संग हमरा जहियेसँ
जिनगी हमर लेलक करोटो तहियेसँ
हम एकरा की कहब छल एहन भाग
बैसल छलौँ हम बाटमे दुपहरियेसँ




गेलौँ शिखरपर भेल जे एगो स्पर्श
जुड़ि गेल श्वास प्राण संगे तहियेसँ
छी ग्यानके पेटी अहाँ जादू गजल
शाइरक कोनो कलम लागै हँसियेसँ
हम भेल नतमस्तक लिखब कोना शब्द
शाइर अमित छी संग हमरा जहियेसँ

 मुस्तफइलुन-मुस्फइलुन-मफऊलात


( I-I-U-I +I-I-U-I + I-I-I-U )

 बहरे-सरीअ
घ) बहरे-करीब------ एकर मूल ध्वनि छैक " मफाईलुन- मफाईलुन- फाइलातुन"| एकर ढ़ाँचा छैक----
I-S-S-S + ISSS + S-I-S-S
देखू अमित मिश्र द्वारा लिखल ई गजल जे की बहरे करीबमे अछि----
बिसरलौँ जग पिबै छी बोतल शराबक
मनक मारल चुमै छी बोतल शराबक


हमर छै जीत तड़िखानामे पियाबू
अपन नामे लिखै छी बोतल शराबक
 हमर छै जान ई अंगुरक पानि नै छै

बनै शोणित किनै छी बोतल शराबक


शहर के कोन मैखान जत' पिलौँ नै
जहर दर्दक कहै छी बोतल शराबक
गिलाससँ आब पल भरि दोस्ती क' देखू
घर स्वर्गक रहै छी बोतल शराबक



 जनम भेलै इयादक तहियेसँ झूमैँ

 अमित संगे रखै छी बोतल शराबक
मफाईलुन-मफाईलुन-फाइलातुन
बहरे-करीब

 ङ) बहरे-मुशाकिल------- एकर मूल ध्वनि छैक " फाइलातुन- मफाईलुन- मफाईलुन | एकर ढ़ाँचा छैक----

 S-I-S-S + I-S-S-S + I-S-S-S


देखू अमित मिश्र द्वारा लिखल ई गजल जे की बहरे मुशाकिलमे अछि—
हमर नेहक सजा जिनगी जड़ा देलक
गीत दर्दक बना जिनगी कना देलक
छै अनचिन्हार अपने नाम एखन यौ
खेल झूठक जमा जिनगी हरा देलक
नोर बहतै त' हमरे पर हँसत दुनियाँ
कसम झूठे गना जिनगी लिखा देलक





 जहर के प्रेम मे खूनो जहर भेलै
दाँत विरहक गड़ा जिनगी विषा देलक

गाम उजड़ल शहर कानल हँसल जत' ओ

भवर एहन फँसा जिनगी बझा देलक

 नै मवाली अहाँ हमरा कहू देखिक'

 नेह पागल बना जिनगी डरा देलक
जीब कोना बचल जिनगी कहू एखन
अमित मौतसँ सटा जिनगी मुआ देलक
फाइलातुन-मफाईलुन-मफाईलुन

 बहरे-मुशाकिल


च) बहरे-कलीब-------- एकर मूल ध्वनि छैक "फाइलातुन—फाइलातुन--- मफाईलुन" | एकर ढ़ाँचा छैक---
SISS--- SISS---- ISSS
देखू अमित मिश्र द्वारा लिखल ई गजल जे की बहरे कलीबमे अछि-----
युग विज्ञानक शोध एखन क' देखै छी
अपन मन परबोध एखन क' देखै छी
रहत जगमे अमर मानव मरत दानव
नव मशीनक रोध एखन क' देखै छी
भाग बनतै मात्र दस खा क' रसगुल्ला

 शक्ति के हम बोध एखन क' देखै छी
सत्त सी ओ टू बनल झूठ आँक्सीजन
कार्बनक अबरोध एखन क' देखै छी
डाहि हम संस्कार संस्कृति मुस्कै छी
मान लेल क्रोध एखन क' देखै छी
देश चलबै छी त' सब राज के देखू
जोड़ि कर अनुरोध एखन क' देखै छी
बहरे-कलीब
छ) बहरे असम------- एकर मूल ध्वनि छैक फाइलातुन--- मफाईलुन--- फाइलातुन | एकर ढ़ाँचा छैक---SISS---- ISSS--- SISS
देखू अमित मिश्र द्वारा लिखल ई गजल जे की बहरे असममे अछि—
आब आगिक पता पुछतै पानि ऐठाँ
नै जड़त यौ कतौ घर लिअ जानि ऐठाँ
कखन धरि लोक जड़तै चुप जानवर बनि
तोड़बै जउर से लेतै ठानि ऐठाँ
छै दहेजो त' महगाई कम कहाँ छै

 ओझरी सोझरेतै लिअ मानि ऐठाँ
बदलतै समय सगरो नवका जमाना
 नै जँ बदलत त' ओ मरतै कानि ऐठाँ
 जे जनम देलकै हुनका बिसरलै सब
माँथ पर जनकके रखतै फानि ऐठाँ
भाइ मे उठम-बजड़ा नै आब हेतै
आइ त' स्वर्ग के देबै आनि ऐठाँ
आगि पर पानि नेहक हँसि ढ़ारि दिअ ने

 अमित सब के मिला सुख लिअ सानि ऐठाँ



 फाइलातुन-मफाईलुन-फाइलातुन

( I-U-I-I + U-I-I-I + I-U-I-I )

बहर-असम

 ज) बहरे कबीर----- एकर मूल ध्वनि छैक मफऊलातु--- मफऊलातु--- मुस्तफइलुन| एकर ढ़ाँचा छैक ---SSSI--- SSSI--- SSIS





देखू अमित मिश्र द्वारा लिखल ई गजल जे की बहरे कबीरमे अछि-----
असगर जनम लेलहुँ असगरे जी रहल
अपने भाग अपनेपर भरोसा बचल
मोनक खेतपर बजड़ा अपन खाइ छी
गलती अपन तेँए बाट काँटसँ भरल


मोजर नै सिनेहक भेल कहियो हमर
 अपने तोड़ि नाता शहर मे जी रमल

 दै छी दोष नेताके किए आब यौ


अपने भोट दै छी घेँट अपने कटल
लोभी छी अधम छी अमित भटकै सगर
पक्षक नै अपक्षक मोन अपने बनल
मफऊलातु-मफऊलातु-मुस्तफइलुन ( दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व+ दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व +दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ सँ बनल बहरे-कबीर )

 झ) बहरे सगीर----- एकर मूल ध्वनि छैक मुस्तफइलुन--- फाइलातुन---- मुस्तफइलुन| एकर ढ़ाँचा छैक --SSIS--- SISS--- SSIS

 देखू अमित मिश्र द्वारा लिखल ई गजल जे की बहरे सगीरमे अछि-----

ञ) बहरे-सरीम----- एकर मूल ध्वनि छैक मफाईलुन--- फाइलातुन--- फाइलातुन | एकर ढ़ाँचा छैक------- ISSS + SISS + SISS
देखू अमित मिश्र द्वारा लिखल ई गजल जे की बहरे सरीममे अछि-किए एखन मोन हमर शाइर बनल छै
लिखल जेकर नाम ओ एखन कटल छै
बनाबी हम रूप जे शब्दक नगरमे

 नगर ओकर नैनके लागै जहल छै

 गजल जेहन हम लिखै सबदिन छलौँ से

 कहाँ हमरा मोनमे ओहन गजल छै

दिनक काटै रौद रातिक चान धधकै
बहर मारै जान पथ काँटक बनल छै
कखन हारब जीवनक अनमोल पारी
अमित जा धरि छी करै शेरक कहल छै
मफाईलुन-फइलातुन-फइलातुन
बहरे -सरीम

ट) बहरे सलीम----- एकर मूल ध्वनि छैक --- "मुस्तफइलुन-- मफऊलातु---मफऊलातु"| एकर ढ़ाँचा छैक----


SSIS + SSSI + SSSI
देखू अमित मिश्र द्वारा लिखल ई गजल जे की बहरे सलीममे अछि--
खिड़कीसँ सीधे देखै छलौँ हम चान
घन तिमिर मोनक छाँटै छलौँ हम चान
हेतै अपन फेरो भेँट ओतै जा क'
तेँ जागि आशा लगबै छलौँ हम चान
दिन भरि समाजक पहरा कतेको नयन


छवि संग तोहर भटकै छलौँ हम चान
लागै तरेगण लोचन पलक झपकैत
बनि मेघ घोघट लागै छलौँ हम चान
शुभ राति फेरो भेटब अमिय नेहक ल'
सब दिन अमित नव आबै छलौँ हम चान
मुस्तफइलुन-मफऊलातु-मफऊलातु
{दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व}


बहरे-सलीम
ठ)बहरे हमीद----- एकर मूल ध्वनि छैक--- "मफऊलातु----मुस्तफइलुन----मफऊलातु"| एकर ढ़ाँचा छैक---
SSSI + SSIS + SSSI
देखू अमित मिश्र द्वारा लिखल ई गजल जे की बहरे हमीदमे अछि—
नै जीयत शराबक नशा लागल लोक
कोना हँसत कोनो दुखक खेहारल लोक
काठी फेकबै आगि उठतै बोतलसँ
नै रहतै जवानी अपन जाड़ल लोक
के कानत कतौ आन लेए क'ह एत'

 नै छै समय ककरो अपन भागल लोक

 दै छै साँस कखनो अपन धोखा आब
एहन नेहमे छै किए पागल लोक
जड़तै एक दोसर सँ जिनगी मे जखन

 कटतै घेँट अपने सबर हारल लोक
क्षण भरि के नवल दोस्त नै चाही आब
हमरा अमित चाही अपन झाड़ल लोक
मफऊलातु-मुस्तफइलुन-मफऊलातु
बहरे-हमीद
ड) बहरे हमीम--- एकर मूल ध्वनि छैक-- "फाइलातुन--- मुस्तफइलुन--- मुस्तफइलुन" |एकर ढ़ाँचा छैक--
SISS + SSIS + SSIS
देखू अमित मिश्र द्वारा लिखल ई गजल जे की बहरे हमीममे अछि-
आइ नौला* मे माछ चल मारब कने
जाल मच्छरदानी वला फेकब कने
बहुत टिकुला छै खसल गाछी भरल छै
ओकरो झोरी भरि क' चल आनब कने
माछ चटनी खाएब रोटी भात रौ

 डोलपाती चल संग मे खेलब कने

 छोट बौआ छी पैघ सन छै सोच रौ
आब कखनो संसार नै बाँटब कने
एक छी हम सब एक थारी मे रहब
अमित नवका मिथिला अपन माँगब कने
फाइलातुन-मुस्तफइलुन-मुस्तफइलुन

बहरे-हमीम




ऐकेँ अतिरिक्त केओ चारि-चारिटा रुक्नक समूह सेहो बना सकैत छथि। मुदा ऐठाम ई मोन राखू जे गजल पूरा-पूरी उच्चारण आ संगीतक नियम पर आधारित छै तँए बड़का-बड़का पाँति गेबामे नै बनतै तँए ई चारि आ ओहिसँ बेसी रुक्न बला गजलक सफलता बहुत कम्म भेटतै। आ जखन देखिए रहल छिऐ जे जखन 213 मे टा मात्र तेरहे टा प्रचलित छै जे की तीन रुक्नक समूह थिक। तखन चारि आ ओहिसँ बेसी बलाक सफलता कतेक हेतै से अंदाजा लगा सकैत छी अहाँ।
आब हमरा लोकनि इ जानी जे अरबीक एहि आठो रुक्नकेँ मैथिलीमे केना बदलि सकैत छी। मैथिलीमे दू प्रकारक छंद पद्धति अछि-----मात्रिक आ वार्णिक |

 A) मात्रिक------ एहिमे दू, तीन, चारि, पाँच आ छह मात्रा खंडके जोड़ि कए अक्षर विन्यास कएल जाइत छैक। आ एहि अक्षर विन्यासकेँ गण कहल जाइत छैक। मात्रिक छंदमे पाँच टा गण होइत अछि-----
 क) ण (णगण) = द्विकल मने दू मात्राक खंड
 ख) ढ ( ढगण) = त्रिकल मने तीन मात्राक खंड
 ग) ड ( डगण) = चतुष्कल मने चारि मात्राक खंड
घ) ठ ( ठगण) = पंचकल मने पाँच मात्राक खंड
ङ) ट ( टगण) = षटकल मने छह मात्राक खंड
एहि गणकेँ अतिरिक्त मैथिलीमे एक मात्रा, सात मात्रा आ आठ मात्राक वर्ण विन्यास सेहो होइत छैक। मुदा ओकरा गण नहि मानल जाइत छैक। कारण एक मात्रा अपूर्ण भेल। तेनाहिते सात वा आठ मात्रा बला विन्यास कोनो ने कोनो रुपेँ उपरक पाँचो गणसँ मिलैत अछि। उदाहरण लेल सात मात्राक वर्ण विन्यास देखू---" पहिराओल" = IISSI । आब एहिमे देखू पहिल तीन मात्रा मने ( IIS) चतुष्कलक रुप थिक आ अंतिम दूनू मात्रा मने ( SI ) त्रिकलक रुप थिक। आठ मात्राक लेल एहने सन गप्प। उपरक पाँचो मात्रा विन्यासकेँ अलग-अलग रुपेँ लिखल जा सकैए आ एहि हिसाबें ------
द्विकल- दू रूप मे लिखल जाइत अछि-----
1) घर = II
2) ओ = S
त्रिकल- तीन रूप मे लिखल जाइत अछि-----

 1) भिजा = IS

 2) अपन = III

 3) आब = SI

 चतुष्कल- पाँच रूप मे लिखल जाइत अछि-----

 1) छौंड़ी = SS
2) तकरा = IIS
3) चुमान = ISI
4) फेकल = SII
5) सदिखन = IIII
पंचकल- आठ रूप मे लिखल जाइत अछि-----
1) लड़ाकू = ISS
2) तिलकोर = IISI
3) हौहत्ती = SIS
4) तरेगन = ISII
5) सरधुआ = IIIS
6) जागरण = SIII

 7) अंगूर = SSI
8) चहटगरि = IIIII
षटकल - तेरह रूप मे लिखल जाइत अछि--
1) सोहारी = SSS
2) बपखौकी = IISS


3) सुधामयी = ISIS
4) मादकता = SIIS
5) असगरुआ = IIIIS
6) सिताएल = ISSI
7) लालटेन = SISI
8) खटखटाह = IIISI


9) मोताबिक = SSII
10) अधमौगति = IISII
11) सुरेबगर = ISIII
12) राजभवन = SIIII
13) चपलचरण = IIIIII
तँ चलू आब एहि पाँचो गणसँ अरबी रुक्न बनाबी। इ अरबी रुक्न आठ अछि । तँ देखू एकर नियम-----
1) जँ द्विकलक (णगनक) एहन रूप जाहिमे एकसरें दीर्घ मने--SS (जेना-जे, गे, खो, जो आदि) रहए आ तकरा बाद पंचकल (ठगण)क ओ रूप रहए जाहिमे पहिल वर्ण लघु आ तकरा बाद दूनू दीर्घ (ISS) हो तँ जे रूप बनत से उर्दू मे "फाइलातुन" कहबैत छैक। एकटा उदारहरण लिअ " गे सुशीला" एकर मात्रा क्रम अछि (SISS) ---- आब एकरा "फाइलातुन" (SISS) सँ मिलाउ| एकरा एना देखू------ S + ISS = SISS
2) जँ पंचकल (ठगण)क ओ रूप जाहिमे पहिने दूटा दीर्घ आ तकरा बाद एकटा लघु हो (SSI) तकरा द्विकल (णगन)क ओहन रूपसँ जोड़ू जाहिमे एकसरें दीर्घ (S) हो। तँ ओ "मुस्तफइलुन" ( SSIS) बनत। एकरा एना देखू---------SSI + S = SSIS

 3) जँ त्रिकल (ढगण)क ओहन रूप जाहिमे पहिल लघु आ दोसर दीर्घ (IS) हो तकरा चतुष्कल (डगण)क ओहन रूपसँ जोड़ू जाहिमे दूनू दीर्घ (SS) छैक। तखन जे बनत तकरा "मफाईलुन" (ISSS) बनत मने। उदाहरण लेल---निशा एलै (ISSS)। एकरा एना देखू-----IS + SS = ISSS
4) जँ चतुष्कल (डगण)क ओहन रूप जकर शुरूआतमे दूटा लघु आ अंतमे एकटा दीर्घ होइ मने (IIS) तकरा त्रिकल (ढगण)क ओहन रूपसँ जोड़ू जाहिमे पहिल लघु आ अंतिम दीर्घ मने (IS) तँ "मुतफाइलुन" (IISIS) बनि जाएत। एकरा एना देखू-------IIS + IS = IISIS

 5) जँ पंचकल (ठगण)क ओहन रूप जाहिमे पहिल लघु दोसर दीर्घ आ तकरा बाद अंतिम दूनू लघु मने (ISII) हो तकरा द्विकल (णगण)क ओहन रूपसँ जोड़बै जाहिमे एकटा दीर्घ होइक मने (S) तँ मफाइलतुन बनि जाएत। एकरा एना देखू------ISII + S = ISIIS
6) जँ चतुष्कल (डगण)क ओहन रूप जाहिमे दूनू दीर्घ हो (SS) मने तकरा त्रिकल (ढगण)क ओहन रूपसँ जाहिमे पहिल दीर्घ आ अंतिम लघु (IS) मने हो तँ "मफऊलात" (SSIS) बनत। एकरा एना देखू-----SS + IS = SSIS
7) पंचकल (ठगण)क ओहन रूप जाहिमे पहिल लघु आ तकरा बाद दूनू दीर्घ हो मने (ISS) से "फऊलुन" कहाइत अछि। एकरा एना देखू------ ISS
8) पंचकल (ठगण)क ओहन रूप जाहिमे पहिल दीर्घ आ तकरा बाद लघु तकरा बाद फेर दीर्घ हो मने (SIS) से "फाइलुन" कहल जाइत अछि। एकरा एना देखू------SIS

 *****मात्रा गनबाक लेल मोन राखू जाहि अक्षरमे "अ", "इ", "उ", "ऋ" एवं "लृ" नुकाएल हो तकरा लघु मानू आ तकरा बाद सभकेँ दीर्घ। संगहि संग अनुस्वार तँ दीर्घ अछि मुदा चन्द्रबिंदु लघु।संगहि-संग जँ कोनो शब्दमे संयुक्ताक्षर हुअए तँ ताहिसँ पहिलेक अक्षर दीर्घ भए जाइत छैक चाहे ओ लघु किएक ने हुअए। उदाहरण लेल--प्रत्यक्ष शब्दमे दूटा संयुक्ताक्षर अछि पहिल त्य एवं क्ष। आब एहिमे देखू "त्य" सँ पहिने "प्र" अछि तँए ई दीर्घ भेल आ "क्ष" सँ पहिने "त्य" अछि तँए इहो दीर्घ भेल। ई नियम जँ दू टा अलग-अलग शब्द हो तैयो लागू हएत जेना उदाहरण लेल--- हमर प्रेम छी अहाँ... ऐमे "प्रे" संयुक्ताक्षर भेल आ ताहिसँ पहिने बला शब्द " र" दीर्घ भए जाएत। मतलब जे "हमर" शब्दक अंतिम अक्षर "र" दीर्घ भए जाएत । मुदा इ मोन राखू "न्ह" आ "म्ह" संयुक्ताक्षरसँ पहिने बला शब्दमे लघु दीर्घ नहि होइत छैक। जेना की "कुम्हार" मे "म्ह" सँ पहिने "कु" दीर्घ नहि भेल तेनाहिते "कन्हाइ" शब्दमे सेहो "न्ह"सँ पहिने "क" वर्ण दीर्घ नहि भेल। क्ष, त्र आ ज्ञ संयुक्ताक्षर अछि।तेनाहिते.... प्र, र्व, आदि सेहो संयुक्ताक्षर अछि।

 बहुत गोटेंकेँ समस्या होइत छन्हि जे इ लघु-दीर्घ कोना होइत छै। प्रस्तुत अछि किछु उदाहरण---



 बिगड़ि-----------एहि शब्दकेँ ह्रस्व-दीर्घ मानू वा दीर्घ-ह्रस्व मानू। बहरक जेहन जरूरति हो। अरबी बहरमे तीन टा लघु सँ कोनो बहर नै छै तँए लघु-लघु-लघु मानबाक कोनो जरूरति नै।
हुनकर---------- एहि शब्दकेँ दीर्घ-दीर्घ मानू वा दीर्घ-लघु-लघु मानू वा लघु-लघु-दीर्घ दीर्घ मानू जेहन जरूरति हो। अरबी बहरमे चारिटा लघु सँ कोनो बहर नै छै तँए लघु-लघु-लघु-लघु मानबाक कोनो जरूरति नै।
घर------- एहि शब्दकेँ दीर्घ मानू वा लघु-लघु बहरक जेहन जरूरति हो।
चोर------ इ साफे तौर पर दीर्घ-लघु अछि।




जँ कोनो शेरमे एना पाँति छै--- बिगड़ि चलै ।
आब एहि दू शब्दकेँ बान्हू। या तँ अहाँ " बिग" मने एकटा दीर्घ मानू आ "ड़ि" मने एकटा लघु फेर "च" एकटा लघू भेल आ "लै" एकटा दीर्घ। एकर मतलब जे " बिगड़ि चलै" केर संभावित बहर भेल--दीर्घ-ह्रस्व-ह्रस्व-दीर्घ।
एहि शब्दकेँ एकटा आर रूप दए सकैत छी जेना की---- "बि" के लघु मानू "गड़ि"केँ दीर्घ मानू आ फेर "च" एकटा लघू भेल आ "लै" एकटा दीर्घ। एकर मतलब जे " बिगड़ि चलै" केर संभावित बहर भेल--- लघु-दीर्घ-लघु-दीर्घ।
आब एहि दू रूपकेँ अहाँ बहरक हिसाबें प्रयोग करू। कतेको आदमी " बिग" केँ दीर्घ मानताह फेर "ड़ि" "च" केँ मिला दीर्घ मानताह आ "लै" भेल दीर्घ मने दीर्घ-दीर्घ -दीर्घ मुदा इ रूप गलत भेल। किछु दिन पहिने हम ओम प्रकाश आ अमित जीकेँ कहने छलिअन्हि जे एना कए सकैत छी। मुदा तखन हमर ज्ञान कम्म छल। हुनका दूनू गोटेँकेँ अलावे सभ गोटेसँ आग्रह जे ओ आब एना नै करथि।
मैथिलीमे वर्तनीकेँ हिसाबेँ ई उदाहरण देखू----
लए---- ह्रस्व-दीर्घ
लs------ह्रस्व

 ल'------ह्रस्व
लय--- ह्रस्व-ह्रस्व वा दीर्घ
इएह निअम कए, कs वा स', भए भs वा भ' लेल छै आन प्रारूप लेल एहने बात बूझल जाए।
B) वार्णिक छंदमे तीन-तीन मात्रा खंडक आठ विन्यास कएल जाइत अछि। एहि तीन-तीन खंडक गनणा "दशाक्षरी" पद्धतिसँ कएल जाइत अछि। इ एक प्रकारक सूत्र अछि। इ सूत्र अछि-----"यमाताराजभानसलगा"। एहि दसो अक्षरमेसँ पहिल आठ अक्षर आठो गणक नामक पहिल अक्षर थिक। आ इ आठ गण अछि-----
य = यगण

 मा = मगण
 ता = तगण
 रा = रगण
ज = जगण

 भा = भगण

 न = नगण

 स = सगण

 आ अंतिम दूटा अक्षर "लगा" कोनो गण नहि अछि। कारण इ जे वार्णिक छंदमे तीन-तीन मात्रा होइत छैक। मुदा "लगा" केर बाद कोनो अक्षर नहि अछि। तँए "स" के बाद कोनो गण नहि बनि सकैत अछि। आब गण बनेबाक तरीका देखू---- अहाँ जे गण बनबए चाहैत छी तकर पहिल अक्षर आ तकरा बादक दू अक्षर आरो लिअ। जे अक्षर क्रम आएत तकर मात्रा गणक मात्रा कहाएत। उदाहरण लेल मानू हमरा "मगण" बनेबाक अछि तँ सभसँ पहिने "मा" लिअ तकरा बादक दूशब्द अछि "तारा"। आब एकरा एकठाम लेने "मातारा" बनत। आब एकर मात्रा अछि---SSS | तँ इ भेल "मगण"। एकटा आर उदाहरण लिअ मानू हमरा जगण बनेबाक अछि तँ ज लिअ आ तकरा बाद दू शब्द अछि "भान"। तँ दूनू मिला कए "जभान" बनत मने "जगण" केर मात्रा क्रम ISIअछि। एनाहिते आठो गण बनैत अछि। आठो गणक रुप देल जा रहल अछि-----

 गणक नाम
दशाक्षरी खंड
मात्रा क्रम
यगण

 यमाता

 ISS

 मगण

मातारा

 SSS

 तगण

 ताराज

 SSI

 रगण

 राजभा

 SIS

 जगण
जभान

ISI

 भगण
भानस
SII
नगण
नसल
III

 सगण

 सलगा
IIS

 तँ चलू आब एहि आठो गणसँ अरबी रुक्न बनाबी। इ अरबी रुक्न आठ अछि । तँ देखू एकर नियम----
1) यगण (ISS)सँ पहिने एकटा दीर्घ लगेने " फाइलातुन" बनत। मने S + यमाता = SISS = फाइलातुन
( वैकल्पिक रुपें एनाहुतो कए सकैत छी------- रगण मने (SIS) केँ बाद एकटा आर दीर्घ लगेने "फाइलातुन" बनत।मने SIS + S = SISS
2) रगण (SIS)सँ पहिने एकटा दीर्घ लगेने " मुस्तफइलुन " बनत। मने S + रगण = SSIS = मुस्तफइलुन

 (वैकल्पिक रुपें एनाहुतो कए सकैत छी----- तगण मने (SSI) केँ बाद एकटा आर दीर्घ लगेने "मुस्तफइलुन" बनत। मने SSI + S = SSIS)

 3) यगण (ISS)केँ बाद एकटा दीर्घ लगेने "मफाईलुन" बनत। मने ISS + यगण = ISSS = मफाईलुन
(वैकल्पिक रुपें एनाहुतो कए सकैत छी---- मगण मने (SSS) सँ पहिने एकटा लघु लगेने "मफाईलुन" बनत। मने I+SSS = ISSS
4) रगण (SIS) सँ पहिने दूटा लघु लगेने "मुतफाइलुन" बनत। मने II + रगण = IISIS = मुतफाइलुन
( वैकल्पिक रुपें एनाहुतो कए सकैत छी--- सगण मने (IIS) केँ बाद एकटा लघु आ तकरा बाद एकटा दीर्घ लगेने "मुतफाइलुन" बनत। मने IIS + I + S = IISIS =

 5) जगण मने (ISI) केँ बाद एकटा लघु आ तकरा बाद एकटा दीर्घ लगेने "मुफाइलतुन" बनत। मने ISI + I + S = ISIIS



 6) मगण मने (SSS) के बाद एकटा लघु लगेने "मफऊलात" बनत। मने SSS + I = SSSI = मफऊलात

 ( वैकल्पिक रुपें एनाहुतो कए सकैत छी----- तगण मने (SSI)सँ पहिने एकटा दीर्घ लगेने “मफऊलात” बनत। मने S + SSI = SSSI

 7) यगण मने (ISS) पूरा-पूरी "फऊलुन" केँ बराबर अछि।

 8) रगण मने (SIS) पूरा-पूरी "फाइलुन" केँ बराबर अछि।
तँ दूनू प्रकारक छंद आ तकरा रुक्नमे बदलनाइ हमरा लोकनि सेहो देखलहुँ। तँ आब चलू तैआर भए जाउ गजल लिखए आ पढ़ए लेल। एहि लेखक सहायतासँ खाली मैथिलीए नहि कोनो आन भाषामे सेहो सही गजल लीखि सकैत छी, खाली काफियाकेँ नियम बदलि जेतै भाषाकेँ हिसाबें।
मैथिलीमे बहर
उपरमे हमरा लोकनि जतेक बहर देखलहुँ ताहि उपर मैथिलीमे आइ धरि गजल कहले नहि गेल। अर्थात जीवन झासँ लए कए 2008 धरि मैथिलीमे बहर नहि छल। बहर नै छल मतलब कृत्रिम रूपेँ बहर नै छल। योगानंद हीरा जी बहुत पहिनेसँ अरबी बहरमे मैथिली गजल लिखैत छलाह, मुदा मैथिलीक बहर-अज्ञानी संपादक सभ हुनका कात कए देलक जाहिकेँ फलस्वरूप मैथिली गजलमे बहरक चर्चा नै भए सकल। 2008क बाद गजेन्द्र ठाकुर उपरका बहरमे गजल तँ कहबे केलाह संगहि-संग मैथिली लेल एकटा अन्य बहर सेहो तकलाह जकर नाम देल गेल---वार्णिक बहर। एहि बहरक मतलब छैक मतलाक पहिल पाँतिमे जतेक वर्ण छैक ओहि गजलक आन हरेक शेरक पाँतिमे ओतबए वर्ण हेबाक चाही। उपरमे उदाहरण लेल हम अपन जतेक शेर देने छी ओ सभ सरल वार्णिक बहरमे अछि।तथापि एकटा उदाहरण आर-----

 जहिआ धरि हमरा श्वास रहत

 तहिआ धरि हुनक आस रहत

 आब एकरा गानू। एहि दूनू पाँतिमे 13-13 वर्ण अछि। इ भेल सरल वार्णिक बहर। वर्ण कोना गानल जाए ताहि लेल इ धेआन राखू-----


हलंत बला अक्षरकेँ 0 मानू
संयुक्ताक्षरमे संयुक्त अक्षरके 1 मानू। जेना की "हरस्त" मे स्त=1 भेल।


तकरा बाद सभ अक्षरकेँ 1 मानू चाहे ओकर मात्रा लघु हो की दीर्घ।
वार्णिक बहर दू तरहक अछि---


सरल वार्णिक बहर, आ वार्णिक
1) सरल वार्णिक बहर----- उपरका सभ उदाहरण सरल वार्णिकक अछि।
2) वार्णिक-------- एहिमे वर्णक संग-संग मात्राक सेहो धेआन राखए पड़ैत छैक। मने वर्णक संख्या तँ निश्चित हेबाके चाही संगहि-संग ह्रस्व के निच्चा ह्रस्व आ दीर्घ के निच्चा दीर्घ हेबाके चाही। उदाहरण लेल-----
नचनी नाच नचा गेल प्रेम हुनकर
जिनगी बाँझ बना गेल प्रेम हुनकर

 आब एहि शेरके देखू दूनू पाँतिमे 15 वर्ण तँ छैके संगे-संग पहिल पाँतिमे जाहि ठाम जे मात्रा छैक वएह मात्रा दोसरो पाँतिमे ओही ठाम छैक। तँ इ भेल वार्णिक बहर|
जँ अहाँ एकरा मात्रा क्रम देबै तँ पता चलत जे एकर रुप एना छैक----
SSSI-ISSS-SISS

 आब कने इ विचारी जे मैथिलीमे कोन बहरके प्रधानता दी। जेना की हमरा लोकनि जनैत छी "सरल वार्णिक बहर" सभसँ बेसी हल्लुक अछि तँए गजलगो ( शाइर) शुरुआतमे एही बहर मे गजल लिखैत तँ नीक। तकरा बाद अभ्याससँ दोसर बहर (वार्णिक बहर) पर आबथि आ तकरा बाद उर्दू बला बहर पर हाथ अजमाबथि। एखन मैथिलीमे दोसर बहर अर्थात वार्णिक बहरक प्रारंभिक चरण चलि रहल अछि। अंतमे सबसँ खास गप्प गजल चाहे अहाँ कोनो बहर मे किएक ने लिखब रदीफ आ काफियाक नियम सभ लेल एकै रंग रहत।
(ई आलेख शब्द साधक श्री जगदीश प्रसाद मंडल जीकेँ समर्पित छन्हि।)
 ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com पर पठाउ।
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'विदेह' २३२ म अंक १५ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३२)

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