Sunday, August 12, 2012

'विदेह' १११ म अंक ०१ अगस्त २०१२ (वर्ष ५ मास ५६ अंक १११) PART IX



१.अमित मिश्र-बाल गजल २. ओमप्रकाश झा- बाल गजल



अमित मिश्र
बाल गजल
1
भनसा धर दिश दौड़लनि बौआ
अपन जलखइ माँगलनि बौआ


बीच आँगन मे ऊँच पिढ़ी लगेला
छरपला , डोलल खसलनि बौआ


देखलनि माँ के ठाढ़ हाथ फैलेने
चोट बिसरि कोरा बैसलनि बौआ


दादी एलखिन लेने बाटी बौआ के
दूध देख क' बाटी फेकलनि बौआ


बाबू खेलखिन मिरचाइ सोहारी
हुँनको चाही से जीद धेलनि बौआ


गेँद गुड्डा हाथी , देब मोटर कार
बहुते मनेलौँ नै मानलनि बौआ


संग मे जाएब घुमै लए सर्कस
अमित सँ चारि लड्डू लेलनि बौआ




बर्ण-13


2


सखी सब गेल लागल छैक रेला चल
चलेँ गै माइ घूमै लेल मेला चल


कहै छल सरबतीया सजल छै सर्कस
कुकुर बानरक देखै लेल खेला चल


कते छै भीड़ छोड़े नै पकड़ आँङुर
उठा ले अपन गोदी तखन मेला चल


स सीँ पू पीँ करत बड पीपही फूक्का
गुड़ीया कीन दे सब भरल ठेला चल


कने छै भूख झिल्ली देख लागल गै
गरम कचरी कने मुरही ल' केला चल


मफाईलुन [U-I-I-I तीन बेर सब पाँतिमे]
बहरे हजज


3


कुकुर उनटल पड़ल लार पर
बंदरो बैसलै चार पर


मूस दौगै गहुँम भरल घर
कोइली तन दै तार पर


नादि पर गाय दै दूध छै
नजर देने श्रवन ढार पर


स्वागत लेल बौआ कए
फूल मुस्कै गुथल हार पर


भोर भेलै उठल राजा यौ
अमित  बौआ चढ़ल कार पर


दीर्घ- हर्स्व -दीर्घ 3 बेर
बहरे -मुतदारिक
4
आइ तारा केर नगरीसँ एथिन माँ
अपन कोरा झट द' हमरा उठेथिन माँ


खेलबै माँ संग आ रूसबै हँसबै
पकड़ि आँङुर गाम-घर मे बुलेथिन माँ


थाकि जेबै जखन भोजन करा हमरा
गाबि लोड़ी आँचरक त'र सुतेथिन माँ


राम कक्का के परू छैक मरखहिया
सुरज के बकरी सँ हमरा बचेथिन माँ


हमर संगी संग माँ के घुमै सर्कस
आबि घर हमरो सिनेमा ल' जेथिन माँ


कत' सँ एलै मेघ कारी इ अंबर मे
अमित मन डेराइ यै कखन एथिन माँ


फाइलातुन-फाइलातुन-मफाईलुन
बहरे-कलीब


 5


कोइली कहलकै सूगासँ
हम बड पैघ छी तोरासँ


सूगा कहलकै जुनि बाज
तोड़िये देबौ लोल रोड़ासँ


गाछी-बिरछी तूँ घुमै छहीँ
कारी रूप देख ले ऐनासँ


कोइली तुनकि क' बाजल
मीठ बाजै छी हम तोरासँ


हम घुमै छी अप्पन मोनेँ
बान्हल रहेँ तूँ पिँजरासँ


उठम-बजड़ा , धक्का -मुक्की
खूने-खूनाम भेल पैनासँ


मोर जी तखन कहलनि
नै ल'ड़ तूँ अपने भैयासँ


सूगा अमित राम गाबै छेँ
सीख ले कोइली गबैयासँ
वर्ण- 10


6


माँटिक चाउर पानिक दूध पातक थारी बनेबै
माँटिक चुल्हि पर खीर राइन्ह तरकारी बनेबै


बालुक चिन्नी कादो के दही गेना फूलक चूरा हेते
घैलक चकुला सनठी के बेलना सँ पूरी बनेबै


मैया के फोटो आनि झूठ-मूठ के पूजा-पाठ करब
बाबी सँ एकरंगा माँगि कुमारि लेल साड़ी बनेबै


फेर करब गुड्डा के वियाह गुड़िया खूब सजेबै
साजि एतै बरियाती बाबा के लाठी के गाड़ी बनेबै


नै डर मास्टर के आइ छुट्टी छै चल मीता खेलब
आइ अमित नाचबै-गेबै बड़का खेलाड़ी बनेबै


वर्ण -१९


 7


संग चल ने मिल क' सब खेल खेलेबै
एक दोसर के पकड़ि रेल देड़ेबै


कोइली के गीत बंदर नचेबै हम
चान तारा धरि पहुँचि आइ देखेबै


कागजक नैया बना फूल कमलक चल
चल बड़ी पोखरि भसा नाव नेहेबै


दीप माटिक गढ़ि क' सब देबता पूजब
रोपि अरहुल खेत मे चल पटा एबै


माँटि लोटाएब आ साँझ धरि खेलब
अमित पढ़बै मन सँ बड़का त' बनि जेबै


फाइलातुन-फाइलातुन-मफाईलुन
बहरे-कलीब


 8
बौआ एहिठाम कानै छै
माँ जलखइ बनबै छै


बाबा आनलनि टिकुला
बाबी चटनी बनबै छै


कक्का लगाबै छथि सानी
काकीयो अंगना नीपै छै


बलहा बाली पानि भरै
जुगेसरो चेरा फारै छै


पापा छथि परदेश मे
ट्रिन-ट्रिन फोन बाजै छै


दीदी पढ़' गेल इस्कुल
सोनू भैया खेत जोतै छै


सब लागल छै काज मे
तेँ अमित बौआ कानै छै


वर्ण-9
 9
भोरे-भोरे मुर्गा बाजै छै
सोना बौआ के उठाबै छै


नबकी बाछी दूध देतै
तीरो कक्का दूध दूहै छै


माँ देलनि चुसनि भरि
गुटुर-गुटुर पिबै छै


दूये दाँत के हँसै बौआ
आ हपकुनियाँ काटै छै


भरल कठौत पानि मे
बौआ नहाइ छै कूदै छै


पाउडर काजर ठोप्पा
नव कपड़ा चमकै छै


हाथी घोड़ा आ झुनझुना
अमित बौआ बजबै छै


वर्ण-9


 10




डरकडोरि मे झुनझुना बड मीठ बाजै छै
जुता मे लागल पिपहू पीँ पीँ राग सुनाबै छै


तीन टंगा गुरकुन्ना धेधै बौआ घूमै अंगना
बकरी के बच्चा देखिते कूदि कूदि क' नाचै छै


भालू वला नाच देखाबै बौआ के दलान पर
दू टाँग पर नाचल भालू बौओ नाचि हँसै छै


भरि कटोरी दूध पिबै लेए ढंग ध' कानै छै
जखन पूछौँ नाम त' माएक नाम बताबै छै


नाचैत रहैए सब ललना एहि संसार मे
बोआ के हँसी देख अमित कलम चलाबै छै


वर्ण-17




 11




आइ नौला* मे माछ चल मारब कने
जाल मच्छरदानी वला फेकब कने


बहुत टिकुला छै खसल गाछी भरल छै
ओकरो झोरी भरि क' चल आनब कने


माछ चटनी खाएब रोटी भात रौ
डोलपाती चल संग मे खेलब कने


छोट बौआ छी पैघ सन छै सोच रौ
आब कखनो संसार नै बाँटब कने


एक छी हम सब एक थारी मे रहब
अमित नवका मिथिला अपन माँगब कने


फाइलातुन-मुस्तफइलुन-मुस्तफइलुन


बहरे-हमीम


*नौला{पोखरि के नाम}


12




सूगाके आइ वियाह हेतै
मैना रानी कनियाँ बनलै


पेड़ा वर्फी और रसगुल्ला
पूरी सब्जी पलाऊ बनतै


कोइली बहिन गीत गेतै
जुगनू संगी बाँल्ब जरेतै


बंदर मामा ढोल बजेतै
मोर चाची झूमि क' नाचतै


हाथी दादा लड़का ल' जेतै
खरहा खूब बम फोड़तै




जंगल के सब बरियाती
भालू भैया सब के बैसेतै


शेर देतै आशीष अमित
गीदर सब मंत्र पढ़ेतै


सरल वार्णिक बहर
वर्ण-10


13
सखी सब चल तोड़ब आमके गै
सफेदा गाछपर फेकब झामके गै


बहै छै पवन केहन मीठगर छै मन
भयानक रौद जड़बै छै चामके गै


कने ले बरफ बोतल मे पानि भरि ले
करब वनभोज छै बड़का जामके गै


झहड़तै मारतै चोभा जखन कौआ
ठकै छै फेँकि ढेपा नव नामके गै


अपन झोरी भरल हेतै साँझमे गै
अमित कतरा कते हेतै दामके गै


मफाईलुन-मफाईलुन-फाइलातुन


वहरे-करीब


14


पीठ पर छै बैग बौआ चलल इस्कुल
लाल पियर ड्रेस चमकै भरल इस्कुल


मांथ टोपी घेँट मे छै लंच लटकल
दाइ संगे चलल मोने रमल इस्कुल


खेल सेहो नीक खेलै छोट बौआ
वर्ग छै मैदान खेलक बनल इस्कुल


चित्र पाड़ै मे लगै छै मोन ओकर
मीठ झगड़ो पर त' खूबे हँसल इस्कुल


नै पहाड़ा पढ़ब नै सीखब ककहरा
आब छै कंपुटर सीखा रहल इस्कुल


भेल छुट्टी संग हल्ला घर चलल ओ
नाम जहिया अमित अपनो लिखल इस्कुल
फाइलातुन
I-U-I-I तीन बेर
बहरे-रमल


15




माँ धरा मामा चान छै
सूर्य दादा नै आन छै




छै बिलाई मौसी चतुर
लैत मूसा के जान छै




कुकुर खेहारे चोर के
उड़ल चोरक त' प्राण छै




आम सब बनरा खेलकै
डाढ़ि तोड़ै शैतान छै




चलल हाथी जी ट्रेन चढ़ि
सूढ़ बड़का टा कान छै




बाघ छै हम सब छी तखन
शेर जंगाल के शान छै




फाइलातुन-मुस्तफाइलुन


16




दौरू कक्का दौरू काकी
देखू बौआ छीनै बाटी


दाँतो काटै केशो घीचै
मारै छै लेने ओ लाठी


चिन्नी लेतै चूरा लेतै
छाली लेए माँगै चाभी


दीदी छी तोरे रौ बौआ
तोरे लेए कीनै राखी


कोरा मे तूँ शोभै छेँ रौ
मानेँ खेबै संगे रोटी


आठ टा दीर्घ सब पाँति मे


अमित मिश्र


17
बाल गजल


बौआ पानि बरसै कखन
फाटै जखन मेघक वसन


नाचै मोर बजबै ढोल
गाबै कोइली नव भजन


हरियर गाछ फूलाएत
देता रौद दिनकर जखन


खरहा तखन जीतत दौड़
आलस छोड़ि काजे मगन


छै एरोपलेनक आश
पढ़ि लिख लिअ त' चानो अपन


धरती के बसेलनि राम
भोरे भोर करियौ नमन


आँङुर पकड़ि बढ़बै डेग
राखू "अमित" खुजले नयन


मफऊलातु{2221} दू बेर सब पाँतिमे


अमित मिश्र


18


बाल गजल


फूलल कचौरी छै मीठगर छै खीर
सुअदगर छै छोला छौँक मे छल जीर


रूसल किए सोना आब खेबै संग
जल्दी चलू खा जाएत कौआ खीर


टाँछी ल' इस्कूलो चलब खेलब पढ़ब
ओतौ अहाँ सन नेनाक लागल भीड़


छै लाल कक्काके लाल पाकल आम
जामुन खसल कारी , भेल कारी चीर


दिनकर अहाँ चन्ना राम आ लक्षमण
जीतब अहाँ माँछक आँखि मारू तीर


मुस्तफइलुन-मफऊलातु-मफऊलातु
2212-2221-2221
बहरे-- सलीम


अमित मिश्र


19




उड़ल सबटा चिड़ैयाँ गाछपर फुर्रसँ
जँ बैसल चारपर चारो खसल चुर्रसँ


हमर गाड़ी लतामक डाढ़ि आ सनठी
चलै छै तेज अपने मुँह करै हुर्रसँ


गिलासक दूध मिसियो नीक नै लागै
भरल तौला दही आँङुर लगा सुर्रसँ


अपन बाछी अपन गैया त ता थैया
अपन झबरा करै अपनपर नै गुर्रसँ


फटक्का फूटलै ब्राम ब्रम ब्रूमसँ
जड़ै छै छूरछूरी छूर्र छू छुर्रसँ


मफाईलुन
1222 तीन बेर
बहरे हजज


अमित मिश्र
20
बाल गजल


कारी महिस के दूध उज्जर छै कते
भरि मोन पारी पीबि दुब्बर छै कते


रसगर जिलेबी गरम नरमे नरम छै
लड्डू बनल बेसनक बज्जर छै कते


छै पात हरियर फूल शोभित गाछ छै
जामुन लिची आमक इ मज्जर छै कते


दू एक दू आ चारि दूनी आठ छै
अस्सी कते नै जानि सत्तर छै कते


भालू बला देखाब' सबके नाँच हौ
झट आगि छड़पै दौड़ चक्कर छै कते


मुस्तफइलुन
2212 तीन बेर
बहरे रजज


अमित मिश्र


21




फाटले पहिरब भूखले हम रहब गै
माइ गै हम इस्कूल जेबे करब गै


महिस पोसब सब दिन चराएब साँझक'
बैस ओकर पीठपर पोथी पढ़ब गै


खेत जोतब कोरब पटाएब मोनसँ
मस्त पानिक धारा जकाँ हम बहब गै


चान के पूजै छै सगर लोक जग मे
नाम चमकाबै लेल चन्ना बनब गै


छीन ले खेलौना हमर ढोल डमरू
आब हम काँपी कलम बिन नै रहब गै


फाइलातुन-मुस्तफइलुन-फाइलातुन
2122-2212-2122
बहरे-खफीफ


अमित मिश्र


22
बाल गजल


रानी मेघ सगरो जल पटाएत ना
बौआ हमर खेलत आ नहाएत ना


चलतै ढेह पानिक बीच सड़कपर ना
तै पर कागजक नैया बहाएत ना


देहसँ घाम चूबै रौद छै काल ना
हीटर आब तन के नै बनाएत ना


रोपत धान बैसल खेत के आड़ि ना
कादो करत पालो ह'र चलाएत ना


हेलत साल भरि पोखरि भरल पानि ना
बौआ "अमित" माँछक झोर खाएत ना


मफऊलातु-मफऊलातु-मुस्तफइलुन
2221-2221-2212
बहरे--कबीर


अमित मिश्र


23






पाकल पियर पियर केरा
खाएत सब मीठ पेड़ा


खाजा मिठाई जिलेबी
बौआ भरल छै चगेँरा


मुँह मोर राजाक सुन्नर
चन्ना लजा गेल डेरा


डाँरक त' घुँघरु छनकलै
लेलक जखन घरक फेरा


माएक ओ करत सेबा
फाड़त "अमित" खूब चेरा


मुस्तफइलुन-फाइलातुन
2212-2122
बहरे मुजस्सम


24
चल रे बटोही निनियाँक नव गाम चल
सुतल हमर बौआ चल परी धाम चल


खिस्सा कहेँ गोनू झाक तू चान रे
पवना सिहकि सूखाबैत तूँ घाम चल


मिथिलाक पाहुन सीताक तू भाग क'ह
टूटल घनुष कोनो ब'र बनल राम चल


माटिक त' छै एते मोल एलनि शिवम
ई जनम के चूकाबैत तू दाम चल


लोड़ी जपै छी निनियाँक बजबैत छी
श्वप्न परी बनि बैसल "अमित" बाम चल


मुस्तफइलुन-मफऊलातु-मुस्तफइलुन
2212-2221-2212


25
 हमर कटहर खाइ लेए देब तोरा
अपन टाका छै लतामक पात जोड़ा


दौड़ कखनो सड़कपर तूँ नै लगा रौ
आगि छूबेँ हाथ मे जेतौ भ' फोड़ा


खेल खेलाएब तीती आ कबड्डी
चोर पुलिसक खेल मे के बनत चोरा


सुरज दादा भोर मे सबके जगाबै
सीतबै छै सगर रातिक'  माँ ल' कोरा


फिलम बाबू संग देखब हँल जेबै
"अमित" चलिहेँ करब बाबू के निहोरा


      फाइलातुन
  2122 तीन बेर
        बहरे-रमल


26
देखियौ छै इ केहन अजनास बच्चा
लोक के ओ बनेनै छै दास बच्चा


छै बहसि गेल नेना सबहक दुलारसँ
साग फेकै कहै कतरा घास बच्चा


खेल मे मस्त सदिखन गर्दासँ पोतल
पढ़त नै नै बनेतै इतिहास बच्चा


ककर हिम्मत इ मेला ठेला घुमेतै
जीद मे कानतै एकै भास बच्चा


डांस मे गीत मे नंबर एक छै ओ
"अमित" तेँ मानलौँ सब खटरास बच्चा


फाइलातुन-मफाईलुन-फाइलातुन
2122-1222-2122
बहरे-- असम


27




पंखी लगा उड़ि जाएब आकाश मे
बनि कोइली हम गाएब नव भास मे


नै जो पढ़ाबै के लेल इस्कूल माँ
तू जाइ छेँ बदलै घर त' वनवास मे


बाबा अपन खैनी खाइ छथि क'ह किए
की छै मजा जे बाबू रमल ताश मे


हम बीच आँगन एगो बनेबै महल
सोना बहुत उपजेबै अपन चास मे


खरहा पकड़ि रोटी चाह देबै "अमित"
एतै मजा बानर के सफल रास मे


मुस्तफइलुन-मफऊलातु-मुस्तफइलुन
2212-2221-2212


अमित मिश्र


28
भेल मामा के शगुन हमरो करा दे
सेँट काजर आ पाग पौडर लगा दे


लूटबेँ लेमनचूष आ गीत गाबेँ
सर्ट नवका दे जीँस नवके अना दे


चल फिलम हमरो कैमरा मे बना दे
आब बाबी काकी कने माँ चुमा दे


बंद घर मे नाना कहू की करै छी
कत'सँ एलौ नानी इ टाका बता दे


हम त' बुझलौँ छै खेल कोनो इ नवका
आब नै मानब "अमित" गाड़ी सजा दे


फाइलातुन-मुस्तफइलुन-फाइलातुन
2122-2212-2122
बहरे--खफीफ
29
पढ़तै लिखतै बौआ डाँक्टर बनतै
गामे गामे सबहक सेबा करतै


रोगसँ लड़तै रोगी हँसतै गेतै
एकर नामसँ सबटा रोगो डरतै


अपनो बोखारक चिन्ता नै करतै
फर्जी डाँक्टर के चोरी नै चलतै


नामी लोकक किछु कहलो नै करतै
कमजोरो के ओ भैयारी बुझतै


टाका के लोभी कहियो नै बनतै
आशीर्वादे टा के इच्छा रहतै


मिथिला माँ के मैथिल बेटा छी ने
संकट हटतै दुश्मन संगे लड़तै


दस टा दीर्घ सब पाँति मे

३०

आइ मेला मे माँ झुनझुना किने दे
चल सिया झा के मीठ पेड़ा किने दे


कह कटै छै छागर किए खून पसरल
लिखल छै जत' कटनाइ पतरा किने दे


लाल पूक्का दे गै पियर फूल छापल
लाल देबै मिरचाइ सूगा किने दे


नाच नाचै नटुआ कते भीड़ लागल
हमहुँ सीखब बजेनाइ बाजा किने दे


दीप चल बारब हमहुँ मंदीर जगमग
"अमित" करबै उपवास केरा किने दे


फाइलातुन-मुस्तफाइलुन-फाइलातुन
2122-2212-2122
बहरे-खफीफ

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'विदेह' २२८ म अंक १५ जून २०१७ (वर्ष १० मास ११४ अंक २२८)

ऐ  अंकमे अछि :- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१. डॉ. कैलाश कुमार मिश्र -  गौरी चोरनी ,  गौरी डाईन आ गौरी छिनारि: मधुश्रावणी कथा केर ...