Monday, July 30, 2012

'विदेह' ११० म अंक १५ जुलाइ २०१२ (वर्ष ५ मास ५५ अंक ११०)- PART IV


बालानां कृते
अमित मिश्र
बाल गजल


भनसा धर दिश दौड़लनि बौआ
अपन जलखइ माँगलनि बौआ

बीच आँगन मे ऊँच पिढ़ी लगेला
छरपला , डोलल खसलनि बौआ

देखलनि माँ के ठाढ़ हाथ फैलेने
चोट बिसरि कोरा बैसलनि बौआ

दादी एलखिन लेने बाटी बौआ के
दूध देख क' बाटी फेकलनि बौआ

बाबू खेलखिन मिरचाइ सोहारी
हुँनको चाही से जीद धेलनि बौआ

गेँद गुड्डा हाथी , देब मोटर कार
बहुते मनेलौँ नै मानलनि बौआ

संग मे जाएब घुमै लए सर्कस
"अमित" सँ चारि लड्डू लेलनि बौआ

बर्ण-13

*******************************

सखी सब गेल लागल छैक रेला चल
चलेँ गै माइ घूमै लेल मेला चल

कहै छल सरबतीया सजल छै सर्कस
कुकुर बानरक देखै लेल खेला चल

कते छै भीड़ छोड़े नै पकड़ आँङुर
उठा ले अपन गोदी तखन मेला चल

स सीँ पू पीँ करत बड पीपही फूक्का
गुड़ीया कीन दे सब भरल ठेला चल

कने छै भूख झिल्ली देख लागल गै
गरम कचरी कने मुरही ल' केला चल

मफाईलुन[1222 तीन बेर सब पाँतिमे]
बहरे_हजज

************** ******************

कुकुर उनटल पड़ल लार पर
बंदरो बैसलै चार पर

मूस दौगै गहुँम भरल घर
कोइली तन दै तार पर

नादि पर गाय दै दूध छै
नजर देने श्रवन ढार पर

स्वागत लेल बौआ कए
फूल मुस्कै गुथल हार पर

भोर भेलै उठल राजा यौ
"अमित " बौआ चढ़ल कार पर

*दीर्घ _हर्स्व _दीर्घ ३ बेर*
बहरे -मुतदारिक

******************* ********************

आइ तारा केर नगरीसँ एथिन माँ
अपन कोरा झट द' हमरा उठेथिन माँ

खेलबै माँ संग आ रूसबै हँसबै
पकड़ि आँङुर गाम-घर मे बुलेथिन माँ

थाकि जेबै जखन भोजन करा हमरा
गाबि लोड़ी आँचरक त'र सुतेथिन माँ

राम कक्का के परू छैक मरखहिया
सुरज के बकरी सँ हमरा बचेथिन माँ

हमर संगी संग माँ के घुमै सर्कस
आबि घर हमरो सिनेमा ल' जेथिन माँ

कत' सँ एलै मेघ कारी इ अंबर मे
"अमित" मन डेराइ यै कखन एथिन माँ

फाइलातुन-फाइलातुन-मफाईलुन
2122-2122-1222
बहरे-कलीब

******************** ********************
कोइली कहलकै सूगासँ
हम बड पैघ छी तोरासँ

सूगा कहलकै जुनि बाज
तोड़िये देबौ लोल रोड़ासँ

गाछी-बिरछी तूँ घुमै छहीँ
कारी रूप देख ले ऐनासँ

कोइली तुनकि क' बाजल
मीठ बाजै छी हम तोरासँ

हम घुमै छी अप्पन मोनेँ
बान्हल रहेँ तूँ पिँजरासँ

उठम-बजड़ा , धक्का -मुक्की
खूने-खूनाम भेल पैनासँ

मोर जी तखन कहलनि
नै ल'ड़ तूँ अपने भैयासँ

सूगा "अमित" राम गाबै छेँ
सीख ले कोइली गबैयासँ
वर्ण- 10

************************************

माँटिक चाउर पानिक दूध पातक थारी बनेबै
माँटिक चुल्हि पर खीर राइन्ह तरकारी बनेबै

बालुक चिन्नी कादो के दही गेना फूलक चूरा हेते
घैलक चकुला सनठी के बेलना सँ पूरी बनेबै

मैया के फोटो आनि झूठ-मूठ के पूजा-पाठ करब
बाबी सँ एकरंगा माँगि कुमारि लेल साड़ी बनेबै

फेर करब गुड्डा के वियाह गुड़िया खूब सजेबै
साजि एतै बरियाती बाबा के लाठी के गाड़ी बनेबै

नै डर मास्टर के आइ छुट्टी छै चल मीता खेलब
आइ ''अमित'' नाचबै-गेबै बड़का खेलाड़ी बनेबै

वर्ण -१९

*********************** *******************

संग चल ने मिल क' सब खेल खेलेबै
एक दोसर के पकड़ि रेल देड़ेबै

कोइली के गीत बंदर नचेबै हम
चान तारा धरि पहुँचि आइ देखेबै

कागजक नैया बना फूल कमलक चल
चल बड़ी पोखरि भसा नाव नेहेबै

दीप माटिक गढ़ि क' सब देबता पूजब
रोपि अरहुल खेत मे चल पटा एबै

माँटि लोटाएब आ साँझ धरि खेलब
"अमित" पढ़बै मन सँ बड़का त' बनि जेबै

फाइलातुन-फाइलातुन-मफाईलुन
बहरे-कलीब

******************* **************

बौआ एहिठाम कानै छै
माँ जलखइ बनबै छै

बाबा आनलनि टिकुला
बाबी चटनी बनबै छै

कक्का लगाबै छथि सानी
काकीयो अंगना नीपै छै

बलहा बाली पानि भरै
जुगेसरो चेरा फारै छै

पापा छथि परदेश मे
ट्रिन-ट्रिन फोन बाजै छै

दीदी पढ़' गेल इस्कुल
सोनू भैया खेत जोतै छै

सब लागल छै काज मे
तेँ "अमित" बौआ कानै छै

वर्ण-9
********************** *****************

भोरे-भोरे मुर्गा बाजै छै
सोना बौआ के उठाबै छै

नबकी बाछी दूध देतै
तीरो कक्का दूध दूहै छै

माँ देलनि चुसनि भरि
गुटुर-गुटुर पिबै छै

दूये दाँत के हँसै बौआ
आ हपकुनियाँ काटै छै

भरल कठौत पानि मे
बौआ नहाइ छै कूदै छै

पाउडर काजर ठोप्पा
नव कपड़ा चमकै छै

हाथी घोड़ा आ झुनझुना
"अमित" बौआ बजबै छै

वर्ण-9

*******************************************

डरकडोरि मे झुनझुना बड मीठ बाजै छै
जुता मे लागल पिपहू पीँ पीँ राग सुनाबै छै

तीन टंगा गुरकुन्ना धेधै बौआ घूमै अंगना
बकरी के बच्चा देखिते कूदि कूदि क' नाचै छै

भालू वला नाच देखाबै बौआ के दलान पर
दू टाँग पर नाचल भालू बौओ नाचि हँसै छै

भरि कटोरी दूध पिबै लेए ढंग ध' कानै छै
जखन पूछौँ नाम त' माएक नाम बताबै छै

नाचैत रहैए सब ललना एहि संसार मे
बोआ के हँसी देख "अमित" कलम चलाबै छै

वर्ण-17

***********************************

आइ नौला* मे माछ चल मारब कने
जाल मच्छरदानी वला फेकब कने

बहुत टिकुला छै खसल गाछी भरल छै
ओकरो झोरी भरि क' चल आनब कने

माछ चटनी खाएब रोटी भात रौ
डोलपाती चल संग मे खेलब कने

छोट बौआ छी पैघ सन छै सोच रौ
आब कखनो संसार नै बाँटब कने

एक छी हम सब एक थारी मे रहब
" अमित" नवका मिथिला अपन माँगब कने

फाइलातुन-मुस्तफइलुन-मुस्तफइलुन
2122-2212-2212
बहरे-हमीम

*नौला{पोखरि के नाम}

******************** *************

सूगाके आइ वियाह हेतै
मैना रानी कनियाँ बनलै

पेड़ा वर्फी और रसगुल्ला
पूरी सब्जी पलाऊ बनतै

कोइली बहिन गीत गेतै
जुगनू संगी बाँल्ब जरेतै

बंदर मामा ढोल बजेतै
मोर चाची झूमि क' नाचतै

हाथी दादा लड़का ल' जेतै
खरहा खूब बम फोड़तै

जंगल के सब बरियाती
भालू भैया सब के बैसेतै

शेर देतै आशीष "अमित"
गीदर सब मंत्र पढ़ेतै

सरल वार्णिक बहर
वर्ण-10

*****************************8
सखी सब चल तोड़ब आमके गै
सफेदा गाछपर फेकब झामके गै

बहै छै पवन केहन मीठगर छै मन
भयानक रौद जड़बै छै चामके गै

कने ले बरफ बोतल मे पानि भरि ले
करब वनभोज छै बड़का जामके गै

झहड़तै मारतै चोभा जखन कौआ
ठकै छै फेँकि ढेपा नव नामके गै

अपन झोरी भरल हेतै साँझमे गै
"अमित" कतरा कते हेतै दामके गै

मफाईलुन-मफाईलुन-फाइलातुन
1222-1222-2122
वहरे-करीब-

****************** *****************

पीठ पर छै बैग बौआ चलल इस्कुल
लाल पियर ड्रेस चमकै भरल इस्कुल

मांथ टोपी घेँट मे छै लंच लटकल
दाइ संगे चलल मोने रमल इस्कुल

खेल सेहो नीक खेलै छोट बौआ
वर्ग छै मैदान खेलक बनल इस्कुल

चित्र पाड़ै मे लगै छै मोन ओकर
मीठ झगड़ो पर त' खूबे हँसल इस्कुल

नै पहाड़ा पढ़ब नै सीखब ककहरा
आब छै कंपुटर सीखा रहल इस्कुल

भेल छुट्टी संग हल्ला घर चलल ओ
नाम जहिया "अमित" अपनो लिखल इस्कुल
फाइलातुन
2122 तीन बेर
बहरे-रमल

*****************************

माँ धरा मामा चान छै

सूर्य दादा नै आन छै

छै बिलाई मौसी चतुर

लैत मूसा के जान छै

कुकुर खेहारे चोर के

उड़ल चोरक त' प्राण छै

आम सब बनरा खेलकै
डाढ़ि तोड़ै शैतान छै

चलल हाथी जी ट्रेन चढ़ि
सूढ़ बड़का टा कान छै

बाघ छै हम सब छी तखन
शेर जंगाल के शान छै

फाइलातुन-मुस्तफाइलुन
2122-2212

दौरू कक्का दौरू काकी
देखू बौआ छीनै बाटी

दाँतो काटै केशो घीचै
मारै छै लेने ओ लाठी

चिन्नी लेतै चूरा लेतै
छाली लेए माँगै चाभी

दीदी छी तोरे रौ बौआ
तोरे लेए कीनै राखी

कोरा मे तूँ शोभै छेँ रौ
मानेँ खेबै संगे रोटी

आठ टा दीर्घ सब पाँति मे

अमित मिश्र

************************
बाल गजल

फूलल कचौरी छै मीठगर छै खीर
सुअदगर छै छोला छौँक मे छल जीर
 

रूसल किए सोना आब खेबै संग
जल्दी चलू खा जाएत कौआ खीर

टाँछी ल' इस्कूलो चलब खेलब पढ़ब
ओतौ अहाँ सन नेनाक लागल भीड़

छै लाल कक्काके लाल पाकल आम
जामुन खसल कारी , भेल कारी चीर

दिनकर अहाँ चन्ना राम आ लक्षमण
जीतब अहाँ माँछक आँखि मारू तीर

मुस्तफइलुन-मफऊलातु-मफऊलातु
2212-2221-2221
बहरे-- सलीम

अमित मिश्र
************************8
बाल गजल

बौआ पानि बरसै कखन
फाटै जखन मेघक वसन

नाचै मोर बजबै ढोल
गाबै कोइली नव भजन

हरियर गाछ फूलाएत
देता रौद दिनकर जखन

खरहा तखन जीतत दौड़
आलस छोड़ि काजे मगन

छै एरोपलेनक आश
पढ़ि लिख लिअ त' चानो अपन

धरती के बसेलनि राम
भोरे भोर करियौ नमन

आँङुर पकड़ि बढ़बै डेग
राखू "अमित" खुजले नयन

मफऊलातु{2221} दू बेर सब पाँतिमे

अमित मिश्र

*********************

बाल गजल

उड़ल सबटा चिड़ैयाँ गाछपर फुर्रसँ
जँ बैसल चारपर चारो खसल चुर्रसँ

हमर गाड़ी लतामक डाढ़ि आ सनठी
चलै छै तेज अपने मुँह करै हुर्रसँ

गिलासक दूध मिसियो नीक नै लागै
भरल तौला दही आँङुर लगा सुर्रसँ

अपन बाछी अपन गैया त ता थैया
अपन झबरा करै अपनपर नै गुर्रसँ

फटक्का फूटलै ब्राम ब्रम ब्रूमसँ
जड़ै छै छूरछूरी छूर्र छू छुर्रसँ

मफाईलुन
1222 तीन बेर
बहरे हजज

अमित मिश्र

********************

बाल गजल

कारी महिस के दूध उज्जर छै कते
भरि मोन पारी पीबि दुब्बर छै कते

रसगर जिलेबी गरम नरमे नरम छै
लड्डू बनल बेसनक बज्जर छै कते

छै पात हरियर फूल शोभित गाछ छै
जामुन लिची आमक इ मज्जर छै कते

दू एक दू आ चारि दूनी आठ छै
अस्सी कते नै जानि सत्तर छै कते

भालू बला देखाब' सबके नाँच हौ
झट आगि छड़पै दौड़ चक्कर छै कते
 

बाल गजल

फाटले पहिरब भूखले हम रहब गै
माइ गै हम इस्कूल जेबे करब गै

महिस पोसब सब दिन चराएब साँझक'
बैस ओकर पीठपर पोथी पढ़ब गै

खेत जोतब कोरब पटाएब मोनसँ
मस्त पानिक धारा जकाँ हम बहब गै

चान के पूजै छै सगर लोक जग मे
नाम चमकाबै लेल चन्ना बनब गै

छीन ले खेलौना हमर ढोल डमरू
आब हम काँपी कलम बिन नै रहब गै

फाइलातुन-मुस्तफइलुन-फाइलातुन
2122-2212-2122
बहरे-खफीफ

अमित मिश्र

******************
बाल गजल

रानी मेघ सगरो जल पटाएत ना
बौआ हमर खेलत आ नहाएत ना

चलतै ढेह पानिक बीच सड़कपर ना
तै पर कागजक नैया बहाएत ना

देहसँ घाम चूबै रौद छै काल ना
हीटर आब तन के नै बनाएत ना

रोपत धान बैसल खेत के आड़ि ना
कादो करत पालो ह'र चलाएत ना

हेलत साल भरि पोखरि भरल पानि ना
बौआ "अमित" माँछक झोर खाएत ना

मफऊलातु-मफऊलातु-मुस्तफइलुन
2221-2221-2212
बहरे--कबीर

अमित मिश्र

&&&&&&&&&&&

बाल गजल

पाकल पियर पियर केरा
खाएत सब मीठ पेड़ा

खाजा मिठाई जिलेबी
बौआ भरल छै चगेँरा

मुँह मोर राजाक सुन्नर
चन्ना लजा गेल डेरा

डाँरक त' घुँघरु छनकलै
लेलक जखन घरक फेरा

माएक ओ करत सेबा
फाड़त "अमित" खूब चेरा

मुस्तफइलुन-फाइलातुन
2212-2122
बहरे मुजस्सम

बच्चा लोकनि द्वारा स्मरणीय श्लोक
.प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त्त (सूर्योदयक एक घंटा पहिने) सर्वप्रथम अपन दुनू हाथ देखबाक चाही, ई श्लोक बजबाक चाही।
कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥
करक आगाँ लक्ष्मी बसैत छथि, करक मध्यमे सरस्वती, करक मूलमे ब्रह्मा स्थित छथि। भोरमे ताहि द्वारे करक दर्शन करबाक थीक।
२.संध्या काल दीप लेसबाक काल-
दीपमूले स्थितो ब्रह्मा दीपमध्ये जनार्दनः।
दीपाग्रे शङ्करः प्रोक्त्तः सन्ध्याज्योतिर्नमोऽस्तुते॥
दीपक मूल भागमे ब्रह्मा, दीपक मध्यभागमे जनार्दन (विष्णु) आऽ दीपक अग्र भागमे शङ्कर स्थित छथि। हे संध्याज्योति! अहाँकेँ नमस्कार।
३.सुतबाक काल-
रामं स्कन्दं हनूमन्तं वैनतेयं वृकोदरम्।
शयने यः स्मरेन्नित्यं दुःस्वप्नस्तस्य नश्यति॥
जे सभ दिन सुतबासँ पहिने राम, कुमारस्वामी, हनूमान्, गरुड़ आऽ भीमक स्मरण करैत छथि, हुनकर दुःस्वप्न नष्ट भऽ जाइत छन्हि।
४. नहेबाक समय-
गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति।
नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरू॥
हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिन्धु आऽ कावेरी  धार। एहि जलमे अपन सान्निध्य दिअ।
५.उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्।
वर्षं तत् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः॥
समुद्रक उत्तरमे आऽ हिमालयक दक्षिणमे भारत अछि आऽ ओतुका सन्तति भारती कहबैत छथि।
६.अहल्या द्रौपदी सीता तारा मण्डोदरी तथा।
पञ्चकं ना स्मरेन्नित्यं महापातकनाशकम्॥
जे सभ दिन अहल्या, द्रौपदी, सीता, तारा आऽ मण्दोदरी, एहि पाँच साध्वी-स्त्रीक स्मरण करैत छथि, हुनकर सभ पाप नष्ट भऽ जाइत छन्हि।
७.अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषणः।
कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरञ्जीविनः॥
अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनूमान्, विभीषण, कृपाचार्य आऽ परशुराम- ई सात टा चिरञ्जीवी कहबैत छथि।
८.साते भवतु सुप्रीता देवी शिखर वासिनी
उग्रेन तपसा लब्धो यया पशुपतिः पतिः।
सिद्धिः साध्ये सतामस्तु प्रसादान्तस्य धूर्जटेः
जाह्नवीफेनलेखेव यन्यूधि शशिनः कला॥
९. बालोऽहं जगदानन्द न मे बाला सरस्वती।
अपूर्णे पंचमे वर्षे वर्णयामि जगत्त्रयम् ॥
१०. दूर्वाक्षत मंत्र(शुक्ल यजुर्वेद अध्याय २२, मंत्र २२)
आ ब्रह्मन्नित्यस्य प्रजापतिर्ॠषिः। लिंभोक्त्ता देवताः। स्वराडुत्कृतिश्छन्दः। षड्जः स्वरः॥
आ ब्रह्म॑न् ब्राह्म॒णो ब्र॑ह्मवर्च॒सी जा॑यता॒मा रा॒ष्ट्रे रा॑ज॒न्यः शुरे॑ऽइषव्यो॒ऽतिव्या॒धी म॑हार॒थो जा॑यतां॒ दोग्ध्रीं धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः सप्तिः॒ पुर॑न्धि॒र्योवा॑ जि॒ष्णू र॑थे॒ष्ठाः स॒भेयो॒ युवास्य यज॑मानस्य वी॒रो जा॒यतां निका॒मे-नि॑कामे नः प॒र्जन्यों वर्षतु॒ फल॑वत्यो न॒ऽओष॑धयः पच्यन्तां योगेक्ष॒मो नः॑ कल्पताम्॥२२॥
मन्त्रार्थाः सिद्धयः सन्तु पूर्णाः सन्तु मनोरथाः। शत्रूणां बुद्धिनाशोऽस्तु मित्राणामुदयस्तव।
ॐ दीर्घायुर्भव। ॐ सौभाग्यवती भव।
हे भगवान्। अपन देशमे सुयोग्य आसर्वज्ञ विद्यार्थी उत्पन्न होथि, शुत्रुकेँ नाश कएनिहार सैनिक उत्पन्न होथि। अपन देशक गाय खूब दूध दय बाली, बरद भार वहन करएमे सक्षम होथि आघोड़ा त्वरित रूपेँ दौगय बला होए। स्त्रीगण नगरक नेतृत्व करबामे सक्षम होथि आयुवक सभामे ओजपूर्ण भाषण देबयबला आनेतृत्व देबामे सक्षम होथि। अपन देशमे जखन आवश्यक होय वर्षा होए आऔषधिक-बूटी सर्वदा परिपक्व होइत रहए। एवं क्रमे सभ तरहेँ हमरा सभक कल्याण होए। शत्रुक बुद्धिक नाश होए आमित्रक उदय होए॥
मनुष्यकें कोन वस्तुक इच्छा करबाक चाही तकर वर्णन एहि मंत्रमे कएल गेल अछि।
एहिमे वाचकलुप्तोपमालड़्कार अछि।
अन्वय-
ब्रह्म॑न् - विद्या आदि गुणसँ परिपूर्ण ब्रह्म
रा॒ष्ट्रे - देशमे
ब्र॑ह्मवर्च॒सी-ब्रह्म विद्याक तेजसँ युक्त्त
आ जा॑यतां॒- उत्पन्न होए
रा॑ज॒न्यः-राजा
शुरे॑ऽबिना डर बला
इषव्यो॒- बाण चलेबामे निपुण
ऽतिव्या॒धी-शत्रुकेँ तारण दय बला
म॑हार॒थो-पैघ रथ बला वीर
दोग्ध्रीं-कामना(दूध पूर्ण करए बाली)
धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः धे॒नु-गौ वा वाणी र्वोढा॑न॒ड्वा- पैघ बरद ना॒शुः-आशुः-त्वरित
सप्तिः॒-घोड़ा
पुर॑न्धि॒र्योवा॑- पुर॑न्धि॒- व्यवहारकेँ धारण करए बाली र्योवा॑-स्त्री
जि॒ष्णू-शत्रुकेँ जीतए बला
र॑थे॒ष्ठाः-रथ पर स्थिर
स॒भेयो॒-उत्तम सभामे
युवास्य-युवा जेहन
यज॑मानस्य-राजाक राज्यमे
वी॒रो-शत्रुकेँ पराजित करएबला
निका॒मे-नि॑कामे-निश्चययुक्त्त कार्यमे
नः-हमर सभक
प॒र्जन्यों-मेघ
वर्षतु॒-वर्षा होए
फल॑वत्यो-उत्तम फल बला
ओष॑धयः-औषधिः
पच्यन्तां- पाकए
योगेक्ष॒मो-अलभ्य लभ्य करेबाक हेतु कएल गेल योगक रक्षा
नः॑-हमरा सभक हेतु
कल्पताम्-समर्थ होए
ग्रिफिथक अनुवाद- हे ब्रह्मण, हमर राज्यमे ब्राह्मण नीक धार्मिक विद्या बला, राजन्य-वीर,तीरंदाज, दूध दए बाली गाय, दौगय बला जन्तु, उद्यमी नारी होथि। पार्जन्य आवश्यकता पड़ला पर वर्षा देथि, फल देय बला गाछ पाकए, हम सभ संपत्ति अर्जित/संरक्षित करी।


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पूर्वपीठिका : इंटरनेटपर मैथिलीक प्रारम्भ हम कएने रही 2000 ई. मे अपन भेल एक्सीडेंट केर बाद, याहू जियोसिटीजपर 2000-2001 मे ढेर रास साइट मैथिलीमे बनेलहुँ, मुदा ओ सभ फ्री साइट छल से किछु दिनमे अपने डिलीट भऽ जाइत छल। ५ जुलाई २००४ केँ बनाओल “भालसरिक गाछ” जे http://www.videha.com/ पर एखनो उपलब्ध अछि, मैथिलीक इंटरनेटपर प्रथम उपस्थितिक रूपमे अखनो विद्यमान अछि। फेर आएल “विदेह” प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका http://www.videha.co.in/पर। “विदेह” देश-विदेशक मैथिलीभाषीक बीच विभिन्न कारणसँ लोकप्रिय भेल। “विदेह” मैथिलक लेल मैथिली साहित्यक नवीन आन्दोलनक प्रारम्भ कएने अछि। प्रिंट फॉर्ममे, ऑडियो-विजुअल आ सूचनाक सभटा नवीनतम तकनीक द्वारा साहित्यक आदान-प्रदानक लेखकसँ पाठक धरि करबामे हमरा सभ जुटल छी। नीक साहित्यकेँ सेहो सभ फॉरमपर प्रचार चाही, लोकसँ आ माटिसँ स्नेह चाही। “विदेह” एहि कुप्रचारकेँ तोड़ि देलक, जे मैथिलीमे लेखक आ पाठक एके छथि। कथा, महाकाव्य,नाटक, एकाङ्की आ उपन्यासक संग, कला-चित्रकला, संगीत, पाबनि-तिहार, मिथिलाक-तीर्थ,मिथिला-रत्न, मिथिलाक-खोज आ सामाजिक-आर्थिक-राजनैतिक समस्यापर सारगर्भित मनन। “विदेह” मे संस्कृत आ इंग्लिश कॉलम सेहो देल गेल, कारण ई ई-पत्रिका मैथिलक लेल अछि, मैथिली शिक्षाक प्रारम्भ कएल गेल संस्कृत शिक्षाक संग। रचना लेखन आ शोध-प्रबंधक संग पञ्जी आ मैथिली-इंग्लिश कोषक डेटाबेस देखिते-देखिते ठाढ़ भए गेल। इंटरनेट पर ई-प्रकाशित करबाक उद्देश्य छल एकटा एहन फॉरम केर स्थापना जाहिमे लेखक आ पाठकक बीच एकटा एहन माध्यम होए जे कतहुसँ चौबीसो घंटा आ सातो दिन उपलब्ध होअए। जाहिमे प्रकाशनक नियमितता होअए आ जाहिसँ वितरण केर समस्या आ भौगोलिक दूरीक अंत भऽ जाय। फेर सूचना-प्रौद्योगिकीक क्षेत्रमे क्रांतिक फलस्वरूप एकटा नव पाठक आ लेखक वर्गक हेतु, पुरान पाठक आ लेखकक संग, फॉरम प्रदान कएनाइ सेहो एकर उद्देश्य छ्ल। एहि हेतु दू टा काज भेल। नव अंकक संग पुरान अंक सेहो देल जा रहल अछि। विदेहक सभटा पुरान अंक pdf स्वरूपमे देवनागरी, मिथिलाक्षर आ ब्रेल, तीनू लिपिमे, डाउनलोड लेल उपलब्ध अछि आ जतए इंटरनेटक स्पीड कम छैक वा इंटरनेट महग छैक ओतहु ग्राहक बड्ड कम समयमे ‘विदेह’ केर पुरान अंकक फाइल डाउनलोड कए अपन कंप्युटरमे सुरक्षित राखि सकैत छथि आ अपना सुविधानुसारे एकरा पढ़ि सकैत छथि।
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'विदेह' २२५ म अंक ०१ मई २०१७ (वर्ष १० मास ११३ अंक २२५)

ऐ  अंकमे अछि :- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१. १. राजदेव मण्‍डल -  दूटा बीहैन क था २. रबीन्‍द्र नारायण मिश...