Thursday, September 15, 2011

'विदेह' ८९ म अंक ०१ सितम्बर २०११ (वर्ष ४ मास ४५ अंक ८९) PART IV



आशीष अनचिन्हार
गजल/ रुबाइ/ कता
गजल

1
मालक खातिर तँ माल-जाल बनल लोक
देखाँउसक खातिर कंगाल बनल लोक

भूखक दर्द होइत छैक प्रकाशोसँ तेज
देखू पेटक खातिर दलाल बनल लोक

वृत तँ टूटल मिलल समानांतर रेखा
देखू बिनु कागजीक प्रकाल बनल लोक

सत्त-सत्त ने रहल ने रहल फूसि-फूसि
अपने लेल अपने जंजाल बनल लोक

उपरसँ गंगा घाट भीतर मोकामा घाट
एतए नुनिआएल देबाल बनल लोक



**** वर्ण---------16*****
2

चुप्प रहत मनुख गिद्दर भुकबे करतैक
निर्जीव तुलसी चौरा कुकुर मुतबे करतैक

जँ केकरो वीरता सीमित रहि जाए गप्प धरि
तँ दुश्मनक लात छाती पर पड़बे करतैक

विद्रोह आ अधिकारके अधलाह बुझनिहार
आइ ने काल्हि अपटी खेतमे मरबे करतैक

बसात पर बसात दैत रहू क्रांतिक आगिके
नहुँए-नहुँ सही कहिओ तँ जरबे करतैक

लिखैत रहिऔ विद्रोहक गजल अनचिन्हार
कहिओ केओ ने केओ एकरा पढ़बे करतैक







**** वर्ण---------18*******
3

एहि लाइलाज बेमारीक की हाल हेतै
स्वेछाचारी-चारणीक  की दलालहेतै

हरेक समय बितैए दुख आ दर्दमे
गरीब लेल नव पुरान की साल हेतै

नौकरी उड़िआ गेलै बालु जकाँ देशसँ
आब किएक केओ काजमे बहाल हेतै

अहुरिआ कटैत लोक डूबल नोरमे
ओ तँ नोरे पीबि मँगनी मे हलाल हेतै

धैरज धरु प्रतीक्षा करु अनचिन्हार
मरब तँ नीक जिनगी तँ जंजाल हेतै






**** वर्ण---------15********
4
मछगिद्ध जँ माछ छोड़ए तँ डर मानबाक चाही
लोक जँ नेता भए जिबए तँ डर मानबाक चाही

बेसबा खाली देहे टा बेचैत छैक अभिमान नहि
लोक अस्वभिमानी हुअए तँ डर मानबाक चाही

सभके छै बूझल शेर केखनो नहि खाएत घास
जँ बीर अँहिंसक बनए तँ डर मानबाक चाही

सीमा केर रक्षा करैत जे मरथि सएह बिजेता
माए बेचि जँ रण जितए तँ डर मानबाक चाही

सम्मानक रक्षा करब उद्येश्य अछि गजल केर
जँ ओकर उद्येश्य छुटए तँ डर मानबाक चाही





**** वर्ण---------19*******
5
एहि रुपें सभमे करार हेतै
खाए लेल मनुखे जोगार हेतै

मीडिआ तँ बनि गेलै पोर्नोग्राफी
आब सएमे सए फिराड़ हेतै

बयससँ पहिने बच्चा जबान
पंचमे बर्खे रति झमार हेतै

संबंध जरि रहल सभ ठाम
परिवार गूँहक भराड़ हेतै

चेतह अनचिन्हार रुकि जाह
छनेमे आदमी बेस्महार हेतै




**** वर्ण---------12******
6
कागतक नाह चलि रहल सुखाएल धारमे
ओ तँ घरमुरिआ दैए इजोरिआक अन्हारमे

नाङट समय नाङट आदमी आ नाङट व्याख्या
राधा भेटतीह गली-गली कान्ह हरेक छिनारमे

छद्म भेषे रहितहि तँ एहन सन गप्प नहि
मोश्किल छैक फर्क केनाइ मनुख आ हुराड़मे

बजैत लोकके सुनबाक फुर्सति कहाँ भेटतै
एहिठाम सभ लागल अछि आत्म-अभिसारमे

किछुओ कहब खतरनाक बुझाइए एतए
एकौटा अपन लोक कहाँ एते अनचिन्हारमे





**** वर्ण---------18******
7
मनुख पर भुकैए कुकूर
खजानाके चोरबैए कुकूर

की मनु की आदम की छै हौआ
नियम बना तोड़ैए कुकूर

लक्ष्य नै बाटे-बाट पसरल
बेमतलब दौड़ैए कुकूर

आगि-पानि-बसात बेकाजक
रंग-महलमे रहैए कुकूर

पदितो जाइ पड़ाइतो जाइ
कुकूरेके हबकैए कुकूर







**** वर्ण---------11*******
8
आबो परबोध करु
अपने विरोध करु

लोक तँ बढ़त आगाँ
अहाँ अवरोध करु

धनी बनि जाए धनी
एहने तँ शोध करु

बहर नै गजल नै
इ आबो तँ बोध करु

आएत अनचिन्हार
अहाँ अनुरोध करु



**** वर्ण---------8********
9
भेष हुनक भगवान सन
काज  हुनक सइतान सन

बेटा बलाके तँ पंडित बुझू
बेटी बला तँ जजमान सन

मँहगाइ बढ़ल छै तेना ने
कोबरो तँ झूरझमान सन

देहे जिंदा,भावना मरि गेलै
जग लगैए समसान सन

नहि बनत केओ राम मुदा
सेवक चाही हनुमान सन






**** वर्ण---------11********
10
इ दुराचार अँहिक खूरक प्रतापे
इ भ्रष्टाचार अँहिक खूरक प्रतापे

देखू लोक पढ़ैए जान अरोपि कए
मुदा बेकार अँहिक खूरक प्रतापे

जनबल,धनबल, आरो बल-बल
इ सरकार अँहिक खूरक प्रतापे

इद्दुत-विद्दुत सभटा फेल की कहू
भेल अन्हार अँहिक खूरक प्रतापे

हाथ मिलाउ, छाती लगाउ तैओ सभ
अनचिन्हार अँहिक खूरक प्रतापे





**** वर्ण---------14******
11
मूसक आखर बिलाइक नाम
गाएक नोर तँ कसाइक नाम

हुनका नै हुनकर धोधि देखू
घीअक सुगंधि मलाइक नाम

किएक शिक्षकके सम्मान हेतै
बापक कर्जा तँ पढ़ाइक नाम

आरि मने गारि, गारि मने मारि
खेतक उपजा बटाइक नाम

एहनो होइ छै कहिओ-कहिओ
पानिक प्रेम तँ सलाइक नाम





**** वर्ण---------12******
12
जीबनमेँ सभकेँ एनाहिते घाम चलैए
केखनो अराम तँ केखनो हराम चलैए

अधरतिआमे देखबै केखनो अनचोके
चुड़ैले जकाँ तँ उन्टा हमर गाम चलैए

आब तँ तरबा बचि जाइत छै सदिखन
बाट पर सदिखन जुत्ता-खराम चलैए

रामक आदर्श तँ मरि गेल हुनके संगे
बुझू आब तँ खाली हुनक नाम चलैए

चिन्हार तँ बिलमि जाइए चिन्हारक संग
देखू अनचिन्हार मुदा अविराम चलैए




**** वर्ण---------16******
13
गोली सँ तँ डेराएल अछि मनुखसँ सइतान धरि
जानवर तँ जानवर भगवत्तीसँ भगवान धरि

नीकक लेल सोहर तँ खरापक लेल समदाउन
गाबिए रहल गबैआ सोइरीसँ असमसान धरि

इ समालोचना केकरा कहैछ छन्हि किनको बूझल
पढ़ू, अछि सगरो पसरल निन्दासँ गुणगान धरि

राम नामक लूटि थिक लूटि सकी तँ लूटू सदिखन
लूटि रहल छथि दक्षिणा पंडितसँ जजमान धरि

सदिखन पसरि रहल पसाही सगरो कोने-कोन
घृणा-द्वेष-तामस क्रिसमस-होलीसँ रमजान धरि




**** वर्ण---------20*******
14
देह केराक थंब सन गोर-नार लगैए
अड़हूलक फूल सन भकरार लगैए

नोर अँहाक तँ बेली-चमेली,गेंदा-गुलाब
मुदा हँसी तँ अँहाक सिंगरहार लगैए

मरनाइ तँ एकै होइ छै सभहँक लेल
लहासे सन तँ कटल कचनार लगैए

सीसोक सीस कटल,चऽहुक चऽहु टुटल
आमक नव पल्लव तँ अंगार लगैए

आम-जाम,कुम्हर-कदीमा,लताम-सरीफा
आब तँ जकरे देखू अनचिन्हार लगैए



**** वर्ण---------16*******
15
मोन पड़ैए केओ अनचिन्हार सन
साइत कहीं इएह ने हो प्यार सन

जे नै कमा सकए टका बेसीसँ बेसी
लोक तँ ओकरे बुझै छै बेकार सन

समय कहाँ कहिओ खराप भेलैए
कमजोरके लगिते छै अन्हार सन

किछु तँ देखाएल चोके-अनचोकेमे
चोरे तँ बुझाइए पहरेदार सन

संग रहबै-छोड़बै तँ फरक देखू
बालु जकाँ समस्या पहाड़ सन




**** वर्ण---------14*******
16
जीबनमे दर्दक सनेश शेष कुशल अछि
हम नहि कहब विशेष शेष कुशल अछि

अन्हरे सरकार तँ चला रहल राज-काज
की कहू, छै बौकक इ देश शेष कुशल अछि

देहे टा बदलैए आत्मा नहि सूनि लिअ अहाँ
एहने सरकारक भेष शेष कुशल अछि

मुक्का आ थापड़क उपयोगके करत आब
खाली आँखिए लाल-टरेस शेष कुशल अछि

गजल कहब एतेक सोंझ नै अनचिन्हार
हम तँ आब चलै छी बेस शेष कुशल अछि




**** वर्ण---------17*******
17
अँहा तँ असगरेंमे कानब मोन पाड़ि कए
करेजक बाकसके घाँटब मोन पाड़ि कए

आइ भने विछोह नीक लागि रहल अँहाके
काल्हि अहुरिआ काटि ताकब मोन पाड़ि कए

मिझरा गेलैक नीक-बेजाए दोगलपनीसँ
कहिओ एकरा अँहा छाँटब मोन पाड़ि कए

अँहा जते नुका सकब नुका लिअ भरिपोख
फेर तँ अँही एकरा बाँटब मोन पाड़ि कए

आइ जते फाड़बाक हुअए फाड़ि दिऔ अहाँ
मुदा फेर तँ इ अहीँ साटब मोन पाड़ि कए



**** वर्ण---------17*******
18
जँ प्रेम अछि तँ कहनहि नीक
शीतल आगिमे जरनहि नीक

घोघक रहस्य तँ एना बुझिऔ
झरकल मुँह झपनहि नीक

लोक जहर दैए मुस्किया कए
आब तँ हँसीसँ डरनहि नीक

दबाइ देबै तँ बढ़बे करत
प्रेमक दर्दके सहनहि नीक

आब जँ भेटत दुख अहूँ लग
तखन संसार छोड़नहि नीक



**** वर्ण---------12*******
19
बाजू चोर आ चुहारक लेल ताला की
अँही कहू बेइमान लेल केबाला की

लोक डुबैत अछि भाव आ अभावमे
कहू डुबबाक लेल नदी आ नाला की

लोक तँ खुश होइए तेल मालिशसँ
एहि रोगीक लेल दबाइ वा आला की

फूसे घर पर होइए दैवी प्रकोप
इल्डिंग-बिल्डिंग लेल ठनका-पाला की

इज्जत सुकाजसँ भेटै छै संसारमे
एहि लेल बासन-सिंहासन-माला की



**** वर्ण---------14*******

20
आइ-काल्हि भाँड़े आ की भड़ुएक तँ चलती छैक
आइ-काल्हि चोरे की पहरुएक तँ चलती छैक

होइत रहल निपत्ता फल आ फूल बगैचासँ
सुखाएल सन जड़ि मालिएक तँ चलती छैक

चिचिआ कए जगबैत छल लोकके सदिखन
गोली खेलक ओ निशबद्दीएक तँ चलती छैक

घोघके घोघ नै ओकरा आब दोसरे चीज बुझू
साँझ-राति धंधामे बहुरिएक तँ चलती छैक

कलम लेने ठाढ़ अनचिन्हार चौबटिआ पर
कुबाट देखबैत कुमार्गिएक तँ चलती छैक



**** वर्ण---------18*******

21
कहू, इ की केलहुँ बैसले-बैसल अँहा
आगि तँ लगेलहुँ बैसले-बैसल अँहा

रोड़ी कहींक इँटा-बालु सीमेंट कहींक
महल बनेलहुँ बैसले-बैसल अँहा

इन्द्र की करताह परतर अँहा संग
तंत्र जन्मा देलहुँ बैसले-बैसल अँहा

अगस्तस्य तँ पीने छलाह एकटा नदी
समुद्रो पी गेलहुँ बैसले-बैसल अँहा

लाठी-भाला लेने बैसल छल ओ खेतमे
साँढ़ ढ़ुका देलहुँ बैसले-बैसल अँहा


**** वर्ण---------15*******
22
बाट अन्हारमे डूबल केकरा बजाउ
जगैत लोक तँ सूतल केकरा बजाउ

लेलहुँ हम सप्पत रहब एकै संग
ओ तँ मोड़ पर छूटल केकरा बजाउ

राम ठकाएल तँ अल्ला छथि बौआएल
मंदिर-मस्जिद टूटल केकरा बजाउ

दुनियाँ घालमेलक दुनियाँ भ्रमजाल
सीसी-छौंड़ी-पाइ घूमल केकरा बजाउ

चाहै छलहुँ आबथि हमर करेजमे
मुदा इ किस्मते रूसल केकरा बजाउ

**** वर्ण---------15*******
23
गजल सुख जिनगीक गजल दर्द जिनगीक
रहए ठाढ़ अविचल गजल मर्द जिनगीक

अँहा हिमालयक भाए छी वा कैलाशक जन्मल
बनि गेल आगिक गोला गजल सर्द जिनगीक

देखएमे तँ हेतैक लाजोके लाज तेहने सन
देखाएत अंग-अंग गजल बेपर्द जिनगीक

अनचिन्हार साकी दए रहल गजलक हाला
बनल छैक दबाइ गजल बेदर्द जिनगीक

इ तँ साफ करबे करत कोने-कोनमे जा कए
देखू कोना पसरल छै गजल गर्द जिनगीक



**** वर्ण---------18*******
24
किछु दूर चलब हमहूँ जँ संग दए सकी
रंगि देब हम तँ रंगमे जँ रंग दए सकी

अन्हारोमे चलब हम बिनु ठोकर खएने
हमरा चलबाक जँ कनिको ढ़ंग दए सकी

कहबै जँ चार पर तँ चढ़बै पहाड़ पर
किच्छो ने असंभव जँ कने उमंग दए सकी

हेताह कोने-कोन मे नुकाएल कतेको राम
मरत इ रावण जँ धनुष-भंग दए सकी

हमहूँ रहि सकै छी सभसँ दूर सदिखन
जँ अपने जकाँ भावना अपंग दए सकी


**** वर्ण---------17*******
25
हँसैत जिनगी कना बैसल छी
मोनमे केकरो बसा बैसल छी

नहि होइक अन्हार कोबरमे
तँ तँए करेज जरा बैसल छी

उराहल पानिसँ कब्ज होइए
गंगो-जलके सड़ा बैसल छी

भेटबे टा करत केओ ने केओ
उम्मीदे पर तँ जिया बैसल छी

करोटक तँ परिवर्तन नाम
जखन की आत्मे सुता बैसल छी


**** वर्ण---------12*******
26
अपन आँखिमे बसा लिअ हमरा
अपन श्वासमे नुका लिअ हमरा

जहाँ मरितो जीबाक आस रहए
ओहने ठाम तँ बजा लिअ हमरा

हाथ सटेलासँ मोन केना भरतै
अहाँ करेजसँ सटा लिअ हमरा

भरि जिनगी बौआइते रहलहुँ
अपने संग तँ बैसा लिअ हमरा

जाइ छी मुदा जेबाक मोन नै अछि
कोनो सप्पतसँ घुरा लिअ हमरा


**** वर्ण---------13*******
27
इजोतक दर्द अन्हारसँ पुछिऔ
धारक दर्द तँ किनारसँ पुछिऔ

नहि काटल गेल हएब जड़िसँ
काठक दर्द तँ कमारसँ पुछिऔ

समदाउनो तँ निर्गुने बुझाएल
कञिआक दर्द कहारसँ पुछिऔ

खेतक हरिअरी तँ नीक लगैए
इ अनाजक दर्द धारसँ पुछिऔ

करबै की हाथ आ गरा मिला कए
इ दर्द तँ अनचिन्हारसँ पुछिऔ


**** वर्ण---------13*******
28
()
केकनैए हमरा लेल
केहँसैए हमरा लेल

सपनामे एबै आस नै
केसुतैए हमरा लेल

जँ हम चलिए जाएब
केरहैए हमरा लेल

छोड़ि दिअ सुतले अहाँ
केउठैए हमरा लेल

अनचिन्हार नाम-गाम
केअबैए हमरा लेल

**** वर्ण---------9*******

()

केकनैत अछि एहिठाम हमरा लेल
केहँसैत अछि एहिठाम हमरा लेल

हुनकर सपनामे एबै विश्वास नहि
केसुतैत अछि एहिठाम हमरा लेल

उठनाइ खराप नहि मुदा अहूँ सोचू
केसुतैत अछि एहिठाम हमरा लेल

बसातक संग आबि गेल मनुख-गर्दा
केउड़ैत अछि एहिठाम हमरा लेल

अनचिन्हार नाम गामो तँ अनचिन्हार
केअबैत अछि एहिठाम हमरा लेल


**** वर्ण---------15*******
29
हमरा मोनमे बैसल मात्र अदना साँप
इ बाहर सह-सह करैत पदना साँप

लगबैत रहलहुँ भएट आ सूचना तंत्र
देखू बढ़ैत रहल महँगी-विपदा साँप

इ बिकनीक डिजाइन छैक की सुन्दरीक
देखिऔ छातीमे लेपटाएल तगमा साँप

हम तँ मनुसँ जन्मल रही की आदमसँ
बाजत किएक इ सेकुलर-भगवा साँप

बुझाएत नै रहत पातेमे मिझराएल
सुनू एनाहिते तँ डसैत छै सुगबा साँप

अनचिन्हार रहत वा चिन्हार की करबै
समय पर सभ बनै अजगरबा साँप


**** वर्ण---------16*******

30
एहने अहाँक प्रेम छल पछाति जानल हम
खाली मूहँक तँ छेमछल पछाति जानल हम

आगि लागल छै घर मे चिन्ताक गप्प नहि कोनो
कारण अपने टेम छल पछाति जानल हम

सड़ैत देखलिऐक किच्छोके कादो मे सदिखन
अपने घरक हेम छल पछाति जानल हम

कोंढ़ीके सुँघलकै आ बजरखसुआ चलि गेलै
दाइ ओ नकली भेम छल पछाति जानल हम

कानून तँ बनै छै आ टूटै छै बेर-बेर देशमे
लोके लेल नेम-टेम छल पछाति जानल हम


**** वर्ण---------18*******
31
माटि-पानि-बसात लेल युद्ध
देखू छोटको बात लेल युद्ध

आदर्श बनाम आदर्शवादी
बुद्ध-गाँधीक गात लेल युद्ध

जर-जमीन-जोरु एतबा नै
देखू फेकल पात लेल युद्ध

नून नै चटबए पड़तै बेटीके
आब तँ गर्भपात लेल युद्ध

तकनीकी जुगक इ व्यवस्था
साँझ होइते प्रात लेल युद्ध


**** वर्ण---------11*******


32
पतालमे जा अकास नपैत छी
डिबिआ मिझा प्रकाश तकैत छी

कागतमे लिखल कागती प्लान
घोटालासँ विकास करबैत छी

पानि सड़ि गन्हाइते रहलैक
आरिए बान्हि पानि बहबैत छी

बुड़िबक देवी कुरथी अक्षत
हम एहने विकास करैत छी

चिन्हार नहि अनचिन्हारे नीक
तँए तँ परिचय नुकबैत छी


**** वर्ण---------12*******
33
गुंगुआइत बसात चुप्प रहू
पदुराइत बसात चुप्प रहू

चारु दिस तँ पसरि गेल धुँआ
हे पझाइत बसात चुप्प रहू

अहाँक कुंठा जड़ि जमेने अछि
किकिआइत बसात चुप्प रहू

अहूँ पर हँसत केओ-कहिओ
ठिठिआइत बसात चुप्प रहू

जे भेटत अनचिन्हारे भेटत
चिचिआइत बसात चुप्प रहू



**** वर्ण---------12*******
34
अहूँ तँ पड़ाएल छलहुँ हमहूँ तँ पड़ाएल छलहुँ
अहूँ घबराएल छलहुँ हमहूँ घबराएल छलहुँ

शायद एहने भेंट लिखल छल कपारमे सदिखन
अहूँ तँ लजाएल छलहुँ हमहूँ तँ लजाएल छलहुँ

रुकलाहा जिनगीक लेल सौरी बेर-बेर सौरी सजनी
अहूँ उबिआएल छलहुँ हमहूँ उबिआएल छलहुँ

शेर तँ चल गेल आब ताल देनहे की हएत कहिऔ
अहूँ सुटिआएल छलहुँ हमहूँ सुटिआएल छलहुँ

रहि गेलहुँ अनचिन्हार करेज सटेलाक पछातिओ
अहूँ अगुताएल छलहुँ हमहूँ अगुताएल छलहुँ


**** वर्ण---------21*******
35
प्रकृति जँ दुश्मन बनए तँ ओकरा रोकब कठिन
काँटी जँ छाती पर रहए तँ ओकरा ठोकब कठिन

लक्ष्य जँ नहि रहत आँखिक सीमान पर सदिखन
जोर लगेलाक पछातिओ ओकरा लोकब कठिन

संसारमे पापक घैलके एहने गति छै से मानै छी
जँ नै रहबै सत्यक संग तँ ओकरा फोड़ब कठिन

आब जँ अहाँ चाही तँ एकरा कोनो नाम दए सकै छी
केकरो करेज सँ निकलल गप्पके तोड़ब कठिन

बौआइत रहू मसाने गाछिए-बिरछिए सदिखन
जँ अहाँ नहि बनब भूत तँ ओकरा टोकब कठिन



**** वर्ण---------20*******
36
बनतै कतेक बहन्ना देखबाक चाही
ओ बनतै कतेक सन्ना देखबाक चाही

आब तँ भेल नूनो-सोहारी पर आफद
सुनू फटकी कतेक चन्ना देखबाक चाही

थपड़ी तँ अदौसँ बजिते आएल अछि
लुटतैके कतेक टन्ना देखबाक चाही

घरक बोझ छिड़िआ रहल सदिखन
कोम्हर हेड़ा गेल जुन्ना देखबाक चाही

खेतोके पता नहि की भए गेलैक अछि
खादोक बाद मरहन्ना देखबाक चाही


**** वर्ण---------15*******
37
बटोही केहन छैक बाट पर चलि कए देखिऔक
पिआसलक पिआस घाट पर चलि कए देखिऔक

घर मे घोंघाउज केने कोनो लाभ नहि भेटत आब
सस्ती-महँग केहन हाट पर चलि कए देखिऔक

कमजोर वस्तुक मर्म ओना नहि बुझाएत अहाँके
कने दिबाड़ लागल टाट पर चलि कए देखिऔक

बुझिए जेबै कुसिआर आ सिठ्ठी केर संबंध अहाँ तँ
कनेक कोल्हुआरक राट पर चलि कए देखिऔक

नै रहत कनियों मोल अहाँक गुण केर दुनियाँमे
अहाँ बिनु पैकिंग के हाट पर चलि कए देखिऔक


**** वर्ण---------20*******
38
एक बेर फेर हँसिऔ कनेक
ओही नजरिसँ देखिऔ कनेक

बाजब प्रेम लेल जरुरी नहि
आँखि झुका चुप्प रहिऔ कनेक

हम आबि गेलहुँ अहींक लेल
हमरो लेल तँ चलिऔ कनेक

प्रेमक भाषा अहींके अछि पता
आब हमरो बुझबिऔ कनेक

नहि रहत केओ अनचिन्हार
हाथ बढ़ा कए देखिऔ कनेक

**** वर्ण---------12*******
39
अपनेसँ आगि लगबैत छी मिझबैत छी
अपनेसँ पीबि खसैत छी आ सम्हरैत छी

आँखिमे भरल छै नोरक धन लकथक
अपनेसँ जमा करैत छी आ लुटबैत छी

शांत इजोरिआमे अशांत करेज हमर
अपनेसँ हकार दैत छी आ नोंत पुरैत छी

टूटल करेजके तँ आरो टुटबाक इच्छा
अपने करेज तोड़ैत छी आ कुहरैत छी

केबूझत हमर दुख आ दर्द एहिठाम
चिन्हार रहितहुँ अनचिन्हार रहैत छी


**** वर्ण---------16*******
40
पिपरक पात जँका तँ डोलैत लोक
सिम्मरिक रुइ जँका तँ उड़ैत लोक

देखू सृष्टि तँ बनि गेल भुतहा गाछ
भोर-साँझ ओझाके सहैत लोक

नोर तँ मानल गेल गंगा-जल जँका
देखू नोरेसँ जिनगी धोबैत लोक

सीसा तँ मासे-मास टूटै लोहा बर्खमे
मुदा खने-खन भेटत टूटैत लोक

देव-दानवक डर तँ मानलो जाए
अपने डरें छुल-छुल मुतैत लोक




**** वर्ण---------14*******
41
देखिऔ तँ केना भेलैक गाछके कात भेने
चिड़ैआ बाजब छोड़ि देलक परात भेने

अहाँक दरस-परस बड्ड महँग अछि
सटि जैतहुँ अहाँक देह मे बसात भेने

आशो राखी तँ कनेक नीके जकाँ राखी भाइ
दालिए आ तीमन ने बचै छैक भात भेने

सभँहक घरमे एकटा अगत्ती जन्मए
सरकारक निन्न टुटै छै खुरफात भेने

लागि गेलै भरना सभँहक भाग-सोहाग
आब की हेतै आगि लग सप्पत-सात भेने


**** वर्ण---------16*******
42
भोज ने भात हर-हर गीत की करु
आब लागल भूख कहू मीत की करु

जिनगी अजगुत आदमी तँ विचित्र
केखनो घृणा तँ केखनो प्रीत की करु

प्रेम बदलि रहल समयोंसँ बेसी
केखनो आगि तँ केखनो सीत की करु

मनुख के पहिचानब बड्ड कठिन
केखनो बिग्घा केखनो बीत की करु

मिलेलहुँ गरासँ गरा तैऔ हमरा
भेटल दुश्मन नै मनमीत की करु


**** वर्ण---------14*******
43
एकटा चान हमरा लग रातिमे अबैए
देखू वएह कागत पर पाँतिमे अबैए

जीबाक लेल जी सकै छी अहाँक बिनु
मुदा देखू नोर बेर-बेर आँखिमे अबैए

आँखिसँ बेसी सपना नहि देखबाक चाही
फुनगीक आसमे बैसल माटिमे अबैए

पिजाएल लाठी किएक केकरा लेल कहू
अपने खु्ट्टाक बड़द जजातिमे अबैए

किएक केकरो घरबालीके कहबै हड़ाशंखिनी
अपने लोकक गनती हड़ाहिमे अबैए


**** वर्ण---------16*******
44
गीतक आखर-आखर धारके मोन छैक
रीतक आखर-आखर धारके मोन छैक

लोक अपनेसँ विश्वासघात करैए मात्र
प्रीतक आखर-आखर धारके मोन छैक

हारि गेलासँ लाभे-लाभ हेबाक अवसर
जीतक आखर-आखर धारके मोन छैक

नहि देखबिऔक डर आगिक धाह केर
सीतक आखर-आखर धारके मोन छैक

कट्ठा-बिग्घाक उपजा लोक तँ नहि बूझत
बीतक आखर-आखर धारके मोन छैक




**** वर्ण---------16*******
45
लोहछल मोनक खुरफात थिक संबंध
असली हाथीक नकली दाँत थिक संबंध

कोना बचतै आयोगक गठन करू अहाँ
काटल गाछक नवका पात थिक संबंध

केकरोसँ दोस्ती तोड़ब ओतेक सहज नै
करेजमे तँ अंगदक लात थिक सबंध

हटा लिअ अपन मुँहसँ मास्क तुरंत
इ शुद्ध प्राणरक्षक बसात थिक सबंध

बिनु बजने बैसल रहू आ तमाशा देखू
बैसल बुढ़िआक शह-मात थिक सबंध


**** वर्ण---------16*******
46
साओन-भादवमे तँ सुखा गेल धार
एक ठोप पानि लेल बिका गेल धार

पानिसँ बाढ़ि छै की बाढ़िसँ पानि
देखू अपने पानिसँ दहा गेल धार

कोना बचतै पिआसल ठोर आ कंठ
घैलके तँ देखि कए नुका गेल धार

गप्प तँ चललै बिजली आ बान्ह पर
देखू सुनिते-सुनैत डेरा गेल धार

कछेर पर तँ होइ छलै रसलिल्ला
देखू तँ अनचोकेमे जुआ गेल धार


**** वर्ण---------14*******
47
पूछए लागल पात नुका कए रातिमे
बूझए लागल पात नुका कए रातिमे

हम तँ बेशर्मीक हद टपि गेलहुँ
हूथए लागल पात नुका कए रातिमे

नै छै पाइ जे कराओत इलाज दर्दक
कूथए लागल पात नुका कए रातिमे

सुआद तँ लगलैक खाली शोणित केर
चुसए लागल पात नुका कए रातिमे

अनचिन्हार स्पर्शक रहस्य बुझलहुँ
छूबए लागल पात नुका कए रातिमे



**** वर्ण---------15*******
48
इजोत लेल अन्हेर नगरी जाइत लोक
सपनेमे तँ सपनाक भात खाइत लोक

खेत तँ आब पटाओल जाइछ शोणितसँ
पानि महँक तेले जकाँ तँ छताइत लोक

जकरा जतेक भेटैक सएह बड़ अगत्ती
खएलाक पछातिओ तँ गुंगुआइत लोक

छोड़लकै डनिञाँ तेहन ने अगिनबान
मोनेमे पजरि मोनेमे पझाइत लोक

बसातक कमी तँ छैक गामोक बगैचामे
आक्सीजनेक बोतलमे तँ औनाइत लोक


**** वर्ण---------16*******
49
सभहँक ठोर पर बस अहिंक नाम
आब तँ चारु पहर बस अहिंक नाम

इ संसार तँ मरैए अहाँक रुपे देखि
सुन्दरताक जहर बस अहिंक नाम

आब तँ किछु नहि बचल हमरा लग
तँए सगरो उमर बस अहिंक नाम

देखू मोनक उत्फाल करेजक बिहाड़ि
आब आँखिक भमर बस अहिंक नाम

नीके तँ लगैए इ दुखक गाम हमरा
आब सुखक नगर बस अहिंक नाम


**** वर्ण---------15*******
50
अपने रुकि गेलहुँ अनका रोकबाक चक्करमे
अपने टुटि गेलहुँ अनका तोड़बाक चक्करमे

एकरा हम नसीब कहू की दूनू गोटाकमिलान
अपने फुटि गेलहुँ अनका फोड़बाक चक्करमे

करेजक एहन उत्फाल नै बुझल छल हमरा
अपने जुड़ि गेलहुँ अनका जोड़बाक चक्करमे

एतेक गहींर हेतैक खाधि खत्ता थाह नहि छल
अपने लुटि गेलहुँ अनका लोढ़बाक चक्करमे

शिखर पर पहुँचिते लोक बनैए अनचिन्हार
अपने छुटि गेलहुँ अनका छोड़बाक चक्करमे

**** वर्ण---------19*******
51
हम कीनल खुशी पर नाचू कतेक
हम लोहाक कंठसँ बाजू कतेक

रहस्य बेपारक बुझबै नहुँ-नहुँ
कमजोर हाथमे तँ तराजू कतेक

आधुनिको नै उत्तर-आधुनिक जुग
भावनाकेँ बेचैत लोक चालू कतेक

ने माए ने बाप ने तँ भाए ने बहीनि
इ सार-सरहोजि-सारि-साढ़ू कतेक

मनुख तँ बनि जाइए अनचिन्हार
इ जानबरक रूप चिन्हाबू कतेक

**** वर्ण---------14*******
52
कथा जखन बिआहक लागल हेतैक
गरीबक बेटी तँ बड्ड कानल हेतैक

गोली लागल देह भेटत दसो दिशामे
कुशलक खोंइछ तँ कतौ बान्हल हेतैक

डेगे-डेग निद्रा देवीक प्रचार-प्रसार
आब केना कहू जे केओ जागल हेतैक

सड़ि गेलै एहि पोखरिक सुन्दर पानि
जुग-जुगान्तरसँ नहि उड़ाहल हेतैक

विश्वास करु समान कम नहि भेटत
देखिऔ बाटेमे बाट भजारल हेतैक



**** वर्ण---------15*******
53
कोनो सोहके केखनो नहि बिसारि राखब
मोनक गाछ केखनो नहि झखारि राखब

अबिते हएत मारिते रास कनैत आँखि
अहाँ थोड़ेक हँसी संगमे सम्हारि राखब

बहिते-बहैत बन्हा जाएब अहाँ बान्हसँ
संगमे हरदम कनिकबो जुआरि राखब

अबैत रहलाह नव-नव बिक्रमादित्य
कन्हासँ कहिआ इ बैताल उतारि राखब

नै कानू अबिते हएत रिलीफ लेने नेता
घर-दुआरि बना आँगन बहारि राखब


**** वर्ण---------16*******
54
बेमार छी मुदा बेमार नहि लगैत छी
दबाइ खाइ से कहिओ नहि चाहैत छी

हमरा अँहा नीक लगै छी सभ दिनसँ
मुदा प्रेम अछि से कहि नहि पबैत छी

विसर्जन बला मुरती छी हम धारमे
भसा देल गेलहुँ मुदा नहि डुबैत छी

सभ दिन हमरा लेल मधुश्रावनिए
टेमी दगेलाक बादो नहि कुहरैत छी

एकरा तँ प्रेम कहिऔ की स्वार्थ कहिऔ
आब तँ हुनके इसारा पर चलैत छी



**** वर्ण---------15*******
55
बाट टूटैत रहलैक हर समय
लक्ष्य छूटैत रहलैक हर समय

भाइ बाढ़ि-भूकंप आबै की नै आबै
बान्ह टूटैत रहलैक हर समय

समय सतयुग होइ की कलयुग
ओ तँ लुटैत रहलैक हर समय

भाइ धर्मक युद्ध होइ की अधर्मक
सेना कटैत रहलैक हर समय

बेसी तेज दौगने नै भेटत पदक
ओ तँ खसैत रहलैक हर समय


**** वर्ण---------14*******
56
बाउ किछु विरोधाभास तँ विचित्रे बुझाइत छैक
देखू पेटक आगि तँ पानिसँ नहि मिझाइत छैक

राम नाम तँ सत्त थिक मुदा श्मसाने धरि किएक
लोक रामसँ बेसी रावणें लेल घुरिआइत छैक

बम-गोली चलए लगलैक एना भए कए आब
देखू फटक्को छुटला पर लोक चकुआइत छैक

आब लोक छल-छद्म करए लगलै खुल्लमखुल्ला
शांति-महल पर युद्ध पताका फहराइत छैक

जले जिनगी थिक भेटत हरेक पोथीमे लिखल
बाढ़िमे तँए चारु दिस जिनगीए देखाइत छैक



**** वर्ण---------19*******
57
जँ देशमे आरो अन्ना हेतै
तँ इ भ्रष्टाचार सुन्ना हेतै

या तँ पुलिस या सरकार
दुन्नू दलालक मुन्ना हेतै

सत्य तँ निकलबे करतै
बान्हल कतबो जुन्ना हेतै

लिखेतै इतिहास खूनसँ
गजल हमर पन्ना हेतै

जे बदलतै अधलाहकेँ
ओ अकासमे चन्ना हेतै


**** वर्ण---------10*******

सोलह अगस्त 2011सँ महात्मा गाँधीक दोसर रूप अन्ना हजारे द्वारा कएल गेल भ्रष्टाचार विरोधी अनशनकेँ समर्थनमे लिखल गेल।
58
हमर मोन नहि भरैए मिलनक बेरमे
इ तँ अनचिन्हार बुझैए मिलनक बेरमे

जेहने विरह हो तेहने सिनेह सदिखन
अनचिन्हार मोन पड़ैए मिलनक बेरमे

इ जे देखै छी हमर देहक भाषा- अभिलाषा
आब अनचिन्हार कहैए मिलनक बेरमे

आब भगवानो जनैत छथिन्ह मोनक बात
देखू अनचिन्हार अबैए मिलनक बेरमे

हुनक रीत हुनकर प्रीत हुनकर गीत
आब अनचिन्हार लगैए मिलनक बेरमे




**** वर्ण---------19*******

59
अहाँ गप्प हमरा संग एहिना करैत रहू
आ एहिना मोन हमर अहाँ जुड़बैत रहू

ने तँ मोन भरतै ने करेज भरतै केकरो
हम अँहाके छूब अहाँ हमरा छूबैत रहू

चलू दोस्त नहि दुश्मने बनि जाउ हमर
आ करेजसँ करेज भिरा अहाँ लड़ैत रहू

बरसतै अमरित केर बरखा करेजमे
बस खाली अहाँ कनडेरिए तँ देखैत रहू

अनचिन्हार लिखत प्रेमक पाँति गजलमे
करेज पर हाथ राखि एकरा पढ़ैत रहू



**** वर्ण---------17*******
60
सोना भेटत सस्ता महँग चाउर देखब एक दिन
लोक एहिना तँ लूटत हबाउर देखब एक दिन

देशमे लोकसभा-विधानसभा बनि गेल शोकसभा
भूखल जनता तँ देतै धमाउर देखब एक दिन

हुनकर धोधिए देखि तँ मेटा गेल आब भूख हमर
अहूँ तँ एहिना करब चराउर देखब एक दिन

एकौ बेर देखि लेत हमरा अहाँके संग मे सजनी
तँ लोक जरत आ बनत छाउर देखब एक दिन

नोरक खिच्चरि दर्दक तिलबा आ कष्टक चुड़लाइ
एहिना अनचिन्हारक जड़ाउर देखब एक दिन



**** वर्ण---------20*******
61
आब दर्दक गीत गबैए अनचिन्हार
टूटल करेजके जोड़ैए अनचिन्हार

नै होइए भेंट-घाँट हुनकासँ केखनो
सपनेमे तँ देह छूबैए अनचिन्हार

जखने सटलै ठोरसँ ठोर तखनेसँ
प्रेम संसारमे घुमैए अनचिन्हार

जहिआसँ हुनका देखलक अझक्केमे
सपनेमे करोट फेरैए अनचिन्हार

जते मँहगाइ छै तते आमदनी नहि
दलाल लग बेटा बेचैए अनचिन्हार


**** वर्ण---------15*******
62
भाइ छोट्टे सन डिबिआ बारि दिऔ
अहाँ अन्हारक जड़ि उखाड़ि दिऔ

जँ काज नहि हुअए सोंझ ढ़गे तँ
सौंसे भाभट अपन पसारि दिऔ

भुतिआ गेलै मनुखताइ मोनसँ
कुशलक खढ़ी कने उचारि दिऔ

अनचिन्हारक मोन भीजल काठ
कने प्रेमक आगि तँ पजारि दिऔ

नीक काजके जे रोकत संसारमे
कने डाँड़ ओकर तँ ससारि दिऔ



**** वर्ण---------13*******
63
जादू-मंतर मारि देलकै ओ जाइत-जाइत
मोन केकरो हरि लेलकै ओ जाइत-जाइत

जकरा अबिते भोर आबि गेलै ठोर पर
आँखिमे साँझ आनि देलकै ओ जाइत-जाइत

हाथ थरथराइत छलैक फूलों तोड़बासँ
कोमल मोन तोड़ि देलकै ओ जाइत-जाइत

उखरल छलैक सुलबाइ मुदा तैओ देखू
आँकर-लोहा पचा लेलकै ओ जाइत-जाइत

अनचिन्हारक ठोर सटलै अनचिन्हारसँ
मुदा मुँह तँ घुमा लेलकै ओ जाइत-जाइत


**** वर्ण---------17*******
65
ने केकरो हीत ने तँ मुद्दैआ छी हम
अपने विरुद्धक लड़बैआ छी हम

हमर टूटल पाँखि देखि हँसू नहि
फाटल अकासक तँ चिड़ैआ छी हम

आरि लेल मारि करब नीको-बेजाओ
प्रेम-घृणाक तँ नीक गबैआ छी हम

इ जरुरी नहि जे जश भेटबे करत
नोंत देनिहार तँ घरबैआ छी हम

सम्मानक हमर नै तँ केकर हेतैक
ने सेर ने सवा-सेर अढ़ैआ छी हम

**** वर्ण---------14*******
65
शब्दक बरखासँ जरैत छी किएक
प्रेमक चरचासँ डरैत छी किएक

हमर गजल कोनो लाल रंग नहि
एना साँढ़ जकाँ भरतैक छी किएक

हम अँहाक दुश्मन छी सभदिनुका
एहन फूसि अहाँ बजैत छी किएक

कहू ने जे इ थन महँक दूध चाही
इ पड़रु जकाँ चुकरैत छी किएक

बिना कनने ओहो नै दूध पिआएत
तखन चुपचाप रहैत छी किएक


**** वर्ण---------14*******
66
कोम्हरसँ अएलै एहन फसादी रे जान
रे जान की लगलै बड़का पसाही रे जान

ओ जे मोटेलै बलू से कोना मोटेलै रे जान
खेने हेतै सभटा धन सरकारी रे जान

ओ तँ काजो करैए उपरसँ लातो खाइए
होइए एहने बुड़िबक बिहारी रे जान

पघिलैए जे लोहे जकाँ जमैए मोमे जकाँ
रे जान की कहबै ओहए सुतारी रे जान

हेतै कोना समाधान हड़तालेसँ रे जान
रे जान की तोड़बै कोना इ दिहाड़ी रे जान

**** वर्ण---------16*******


67
जहाँ देखलहुँ घर तहीँ धड़ खसा लेलहुँ
अँसगरेंमे तँ अपन जिनगी बसा लेलहुँ

लोक तँ फेकैत रहल पाथर पर पाथर
तकरे बीझि-बीझि एकटा घर बना लेलहुँ

झोल लागल देबाल पर टाँगल छै उदासी
अँहाक हँसी टाँगि हम ओकरा सजा लेलहुँ

मोनमे भूर छातीमे धाह मुदा देह साबुत
अपन भावनाके दरबारमे नचा लेलहुँ

देखू संसार तँ छोड़ि देलक हमरा कातेमे
हम अपन देहके अपनेसँ भसा लेलहुँ
.
**** वर्ण---------17*******

68
इ गप्प जखन जड़िआ जाइत छैक
मोन तँ अनेरे भरिआ जाइत छैक

कण-कण जुड़ल पाथर बनि गेल
भिन्न भेने उड़िआ जाइत छैक

कतबो कटतै मोनक जड़ि केओ
अहाँक सोहसँ हरिआ जाइत छैक

अपनोके अनचिन्हार बना देलासँ
अनठीओ आबि गरिआ जाइत छैक

लोक जखन अबैए आमने-सामने
तखने तँ बात फरिआ जाइत छैक

**** वर्ण---------14*******


69
आरे तिरपित पारे तिरपित
कनही कूकूर माँड़े तिरपित

बैसि रहल इ सरकार चुना
देशक जनता ठाढ़े तिरपित

मनबैए मधुमास धनिकबा
हमर भाग अखाढ़े तिरपित

देखू उठौना लागल दूनू साँझ
इ बाछी मुदा लथारे तिरपित

कतबो झपबै नँगटिनियाँके
निर्लज्जी मुदा उघाड़े तिरपित

**** वर्ण---------12*******


70
अंगूर खट्टा लताम थुर्री जामुन लाल
इ गाछो तँ मचा रहल बड़का बबाल

अखबारी विकास आ इ जनता उदास
आब तँ इ बहिरा नाचए अपने ताल

देखू पाँच बरख पर सुरुज उगैए
रहैए बाँकी समय तँ बदरी-बिकाल

एतए लागल हाट अछि गमला केर
आब तँ एतए फूल तकैए कादो-थाल

देखू अनचिन्हार तँ अनचिन्हारे अछि
आब चिन्हारो बनल अछि बड़का काल

**** वर्ण---------15*******


71
इ तबीयत ठीक रहत
जँ इ रैयत ठीक रहत

खल-खल हँसती धरती
जँ इ नीयत ठीक रहत

हेतैक नीक देशक जँ इ
जेठरैयत ठीक रहत

बेकूफ बेटा टके काबिल
जँ इ किस्मत ठीक रहत

हेबे करतैक समाधान
जँ सिकायत ठीक रहत

**** वर्ण---------10*******

72
चीजे जखन बेकार छैक कमार की करतै
एतए लोहार की करतै सोनार की करतै

लोक जखन फँसि जाइए अपनहि जालमे
तखन छिपार की करतै देखार की करतै

बाउ जतए धन के घाँटी बजैत हो ओतए
इ लचार की करतै आ इ पिआर की करतै

खेत तँ छैक मुदा खेतिहर नहि एहिठाम
आब तँ इ बाढ़ि की करतै सुखाड़ की करतै

जखन बढ़ि जाए टीस तँ आशीष लग आउ
इ चिन्हार की करतै अनचिन्हार की करतै


**** वर्ण---------17*******


73
शराबके खराप नहि मानू सदिखन
एकरा कञियें जकाँ तँ जानू सदिखन

भाइ बेसी पीब तँ मोन भरि जाएत
मीत अहाँ थोड़बे-थोड़ आनू सदिखन

स्वर्गक सुख भेटतै जँ देखबै एम्हरो
आरती छोड़ि लबनी दफानू सदिखन

इ दुखक पहाड़ तँ बड़की टा हौ भाइ
संगमे तँ बोतल राखि फानू सदिखन

भरल छैक निशा हुनकर जौबनमे
पिबै छी कनियें मुदा बेकाबू सदिखन

**** वर्ण---------15*******
74
रचना कतेक टका लगतै सपना किनबाक लेल
कहू जूटल घर सरदर अँगना किनबाक लेल

हम तँ मुक्त छी इ लिखनाइ-पढ़नाइ-बुझनाइसँ
रचना कतेक टका लगतै रचना किनबाक लेल

सत्त मानू हम काज करै छी लोकतंत्रक पद्धतिए
रचना कतेक टका लगतै पटना किनबाक लेल

हमरा देशमे पत्रकारिता गुलाम छै टी.आर.पीक
रचना कतेक टका लगतै घटना किनबाक लेल

देखू आब तँ भगवानो पड़ल छथि भक्तक फेरमे
रचना कतेक टका लगतै विधना किनबाक लेल


**** वर्ण---------20*******
75
कहिओ सम कहिओ विषम
कहिओ बेसी तँ कहिओ कम

होइत रहलै अकाल मृत्यु
कहिओ गोली तँ कहिओ बम

खेलाइत रहलै देह पर
कहिओ देवी तँ कहिओ जम

निकलि रहल हरेक दिन
कहिओ टका तँ कहिओ दम

ठकि रहल अनचिन्हारके
कहिओ अहाँ तँ कहिओ हम


**** वर्ण---------11*******
76
देश चुल्हामे गेल संसदमे हल्ला मचि रहल
कानून की भेल संसदमे हल्ला मचि रहल

अकाल, बाढ़ि, भूकंप इ सभ आबि चल गलैक
नेताक भत्ता लेल संसदमे हल्ला मचि रहल

घोटाला पर घोटाला बैसल कमीशन जाँचक
कमीशनक लेल संसदमे हल्ला मचि रहल

टूटि गेलै सपना आ मेटा गेलै आजादीक अर्थ
इ दलालक खेल संसदमे हल्ला मचि रहल

एकैटा लाश तँ भेटल बाट पर अनचिन्हार
ओकर जाति लेल संसदमे हल्ला मचि रहल

**** वर्ण---------18*******

सोलह अगस्त 2011सँ महात्मा गाँधीक दोसर रूप अन्ना हजारे द्वारा कएल गेल भ्रष्टाचार विरोधी अनशनकेँ समर्थनमे लिखल गेल।
77
यथा एन्नी तथा ओन्नी एन्नी-ओन्नी तथैव च
यथा माए तथा बाप मुन्ना-मुन्नी तथैव च
हमर करेज जरैए अहाँ गीत लिखै छी
यथा ओ तथा अच्छर पन्ना-पन्नी तथैव च

देखहक इ बोंगहक पोता कोना करै हइ
यथा मुल्ला तथा हम सुन्ना-सुन्नी तथैव च

देवतो तँ जड़ि पकड़ै हइ बचले रहू
यथा मौगी तथा भूत ओझा-गुन्नी तथैव च

बान्हि भँइ दूरा पर लेबै ढ़ौआ पर ढ़ौआ
यथा हम तथा तों, आ बन्ना-बन्नी तथैव च
बचिअह अनचिन्हार भाइ एहि गाममे
यथा साँप तथा ओ जहर चिन्नी तथैव च
**** वर्ण---------16*******
78
जँ सटतै ठोर अनचिन्हारसँ तँ बुझिऔ होली छैक
सदिखन बाजए केओ प्यारसँ तँ बुझिऔ होली छैक

बेसी टोइया-टापर देब नीक नै भाइ सदिखन
अहाँ निकलि जाएब अन्हारसँ तँ बुझिऔ होली छैक

देखू केहन-केहन गर्मी मगजमे रहै छैक बंधु
मनुख जँ बचि जाए गुमारसँ तँ बुझिऔ होली छैक

जहाँ कनही गाएक भिन्ने बथान तहाँ सुन्न-मसान
काज होइ सभहँक विचारसँ तँ बुझिऔ होली छैक

की दुख होइ छै चतुर्थीक राति मे नहि बुझि सकबै
सुनू जँ हँसी आबए कहार सँ तँ बुझिऔ होली छैक
**** वर्ण---------20*******
रुबाइ
1
हिम्मति रखने काज सदा बनि जाएत
देह तँ जरत नाम मुदा रहि जाएत
इ जे देखा रहल समस्या केर पहाड़
ठानि लेब तँ रुइ जकाँ उड़ि जाएत

2
भेटत खुशी केकरो देखलाक बाद
केकरो ठोरसँ नाम सुनलाक बाद
कहबामे लागत बरु एकै-दू छन
मजा भेटत आइ लव यू कहलाक बाद

3
अपन बाँहिमे अहाँके गछारि लेब हम
नजरिसँ करेजमे उतारि लेब हम
एक बेर हँ तँ कहि कए देखिऔ
सगरो बाट पर आँचर पसारि देब हम

4
ठोरसँ ठोर सटतै तँ गीत जनमत
आँखिसँ आँखि मिलतै तँ प्रीत जनमत
दुश्मनीमे जिनगी केखनो नहि बिताउ
हाथमे हाथ देबै तँ मीत जनमत

5
इ जे अहाँक मूँह अछि गुलाब सन
आ आँखि जे लगैए शराब सन
सगरो दुनियाँ बताह भेल देखि कए
मोन हमरो लगैए बताह सन
6
हमरा जीवन मे अहीं केर खगता
अहाँ बिना पड़लै करेज हमर परता
खेलाइत रहू अहाँ हमरा मोन मे
बनू अहाँ देवी हम बनब भगता



7
हमरा ठोरक पिआस भेल छी अहाँ
हमरा मोनक हुलास भेल छी अहाँ
हम बिसरि ने पाएब अहाँ के कहिओ
टूटल करेजक विश्वास भेल छी अहाँ

8
ओ मोन पड़ै छथि तँ निन्न ने अबैए
देह होइए सुन्न नीको ने लगैए
चाहै छी हम जे ओ हमरे लग रहथि
ओ तँ ओ हुनक इयादो ने अबैए

9
हुनका सँ दूर करबा पर बिर्त लोक
अकास मे भूर करबा पर बिर्त लोक
हमही मरब हुनकर प्रेम मे या तँ
अपटी खेत मे मरबा पर बिर्त लोक
10
एकटा हाथ बढ़लै हमरा दिस
एकटा डेग उठलै हमरा दिस
एतेक बड़का गप्प कोना कहू
एकटा नजरि उठलै हमरा दिस

11

रूपक रौद सँ जौबन पघलि जाएत
अहाँक श्वास सँ बसातो गमकि जाएत
अहाँक चलब करबैए मारि सगरो
ठमकब तँ मोन कने सम्हरि जाएत
12

जहिआ हमर पिआर के जानब अहाँ
तहिआ ओकर तागति मानब अहाँ
आइ भने बिता लेब राति सूति कए
काल्हि सँ आँगुर पर दिन गानब अहाँ

13
सपना जखन केकरो टूटि जाइत छैक
मोनक बात मोने मे रहि जाइत छैक
विश्वास सँ बड़का धोखा कोनो ने
टूटल करेज इ बात कहि जाइत छैक
14

हुनका देखने उमकैए मोन हमर
संग मे रहने रभसैए मोन हमर
ओ जखन अबै छथि हमरा सोझाँ मे
सभटा झंझटि बिसरैए मोन हमर

15
माटि मे पानि मे आगि आ बसात मे
दिन मे राति मे साँझ आ परात मे
देखाइ छी अहीं खाली चारु दिस
केहन तागति अछि अहाँक इयाद मे
16

कहब कतेक बात अहाँ सँ हम सजनी
चलब कने दूर अहाँ संग हम सजनी
जँ पकड़बै अपन हाथ सँ हाथ हमर
जीबैत रहब बहुत दिन धरि हम सजनी

17
बहुत बात रहि गेल घोलफच्चका मे
साँप-मगरमच्छ घूमि रहल चभच्चा मे
अहिंसा होइए सभ सँ नीक बुझलहुँ
राम-रज्यक कल्पना उठैए लुच्चा मे
18
देह मोन एकै मिलन के बेर मे
रूप-रंग एकै मिलन के बेर मे
अहाँ भने चल जाउ दूर हमरा सँ
प्रेमक दर्द एकै मिलन के बेर मे

19
हुनका जँ देखितहुँ तरि जइतहुँ हम
ओकरा पछाति बरु मरि जइतहुँ हम
अहाँ केर आँखिक निशा एहन नीक
जँ पीबितहुँ तँ सम्हरि जइतहुँ हम
20

हुनका अबिते मोन हमर हरिआ गेल
आँखिक बात मोन मे फरिआ गेल
ओ केलथि केहन जादू हमरा पर
हुनक इयाद अबिते मोन भरिआ गेल

21
हुनका लेल रूप सजा लेबाक चाही
आइ जबानी के लुटा देबाक चाही
काज नहि इजोत के हमरा-हुनका लग
इजोत लेल घोघ उठा लेबाक चाही
22

जँ खोट ने रहतै सरकारक नेत मे
अनाज उपजबे करतै हमरो खेत मे
पसारए ने पड़तै हाथ दोसर ठाम
रहतै किछु कोठी आ किछु पेट मे

23
चाम जँ अहाँक चाम सँ भीरि जेतै
बूझू मरलो मुरदा जीबि जेतै
इ प्रेमक आगि बड्ड कड़गर आगि
बूझू पाकलो बाँस लीबि जेतै
24
जखन हुनकर घोघ उठेलहुँ सच मानू
आँखिक निशा सँ मतेलहुँ सच मानू
हुनक रूप भमर जाल लगैए हमरा
तैओ हुनके सँ नेह लगेलहुँ सच मानू

25
एहि पार हम ओहि पार अहाँ बैसल छी
मुदा एक दोसराक करेज मे पैसल छी
जहाँ धरि देखी अहीँ देखाइ छी हमरा
देखू हमरो दिस एना अहाँ किएक रूसल छी
26
कते दिन जिबैत रहब उधार के जिन्दगी
जिबैत रहू सदिखन पिआर के जिन्दगी
ने काज आएत समय पर ई धन-बीत
बिका जाएत पाइ-पाइ मे हजार के जिन्दगी

27
रूप देखा बताह बना देलक छौंड़ी
सूतल मोन के जगा देलक छौंड़ी
की कहू छल ओ केहन हरजाइ
अचके मे हमरा कना देलक छौंड़ी
28
अपन करेज अपने सँ डाहि लेब हम
प्रेमक महल अपने सँ ढ़ाहि लेब हम
अहाँ जा सकै छी हमरा जिनगी सँ
असगरे कत्तौ जिनगी काटि लेब हम

29

इ जे अहाँक मूँह अछि गुलाब सन
आ आँखि लगैए अहाँक शराब सन
सगरो दुनियाँ बताह भेल देखि कए
मोन हमरो होइत रहैए खराब सन
30
नोर बनि आँखि मे आबि जाउ
गीत बनि ठोर पर गाबि जाउ
बढ़ि गेल दूरी संगो रहैत
के कतेक दूर प्रेम सँ नापि जाउ

31
हुनका देखिते बजा गेल आइ लव यू
मोन करेज पर लिखा गेल आइ लव यू
आब एकरा प्रेम कहू की बतहपनी
सुतली राति मे बजा गेल आइ लव यू 
32
प्रेम मे खून सुखा नोर बनि जाएत
हुनक ठोरक हँसी भोर बनि जाएत
चिन्हार मरबे करत हुनका देखि-देखि
अनचिन्हार जीबि चितचोर बनि जाएत

कता
1
जकर अगैंठीमोड़ एतेक सुन्दर
तकर देहक हिलकोर केहन हेतैक
जकर आँखिक नोर एतेक सुन्दर
तकर हँसी भरल ठोर केहन हेतैक
2
देखिते हुनका करेजक गाछ मजरि गेल
प्रेम गमकए लागल पहिल गोपी जकाँ
लगबिते चोभा गिनगी हमर सम्हरि गेल
बनि गेलहुँ हम कृष्ण अहाँ गोपी जकाँ

No comments:

Post a Comment

"विदेह" प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका http://www.videha.co.in/:-
सम्पादक/ लेखककेँ अपन रचनात्मक सुझाव आ टीका-टिप्पणीसँ अवगत कराऊ, जेना:-
1. रचना/ प्रस्तुतिमे की तथ्यगत कमी अछि:- (स्पष्ट करैत लिखू)|
2. रचना/ प्रस्तुतिमे की कोनो सम्पादकीय परिमार्जन आवश्यक अछि: (सङ्केत दिअ)|
3. रचना/ प्रस्तुतिमे की कोनो भाषागत, तकनीकी वा टंकन सम्बन्धी अस्पष्टता अछि: (निर्दिष्ट करू कतए-कतए आ कोन पाँतीमे वा कोन ठाम)|
4. रचना/ प्रस्तुतिमे की कोनो आर त्रुटि भेटल ।
5. रचना/ प्रस्तुतिपर अहाँक कोनो आर सुझाव ।
6. रचना/ प्रस्तुतिक उज्जवल पक्ष/ विशेषता|
7. रचना प्रस्तुतिक शास्त्रीय समीक्षा।

अपन टीका-टिप्पणीमे रचना आ रचनाकार/ प्रस्तुतकर्ताक नाम अवश्य लिखी, से आग्रह, जाहिसँ हुनका लोकनिकेँ त्वरित संदेश प्रेषण कएल जा सकय। अहाँ अपन सुझाव ई-पत्र द्वारा ggajendra@videha.com पर सेहो पठा सकैत छी।

"विदेह" मानुषिमिह संस्कृताम् :- मैथिली साहित्य आन्दोलनकेँ आगाँ बढ़ाऊ।- सम्पादक। http://www.videha.co.in/
पूर्वपीठिका : इंटरनेटपर मैथिलीक प्रारम्भ हम कएने रही 2000 ई. मे अपन भेल एक्सीडेंट केर बाद, याहू जियोसिटीजपर 2000-2001 मे ढेर रास साइट मैथिलीमे बनेलहुँ, मुदा ओ सभ फ्री साइट छल से किछु दिनमे अपने डिलीट भऽ जाइत छल। ५ जुलाई २००४ केँ बनाओल “भालसरिक गाछ” जे http://www.videha.com/ पर एखनो उपलब्ध अछि, मैथिलीक इंटरनेटपर प्रथम उपस्थितिक रूपमे अखनो विद्यमान अछि। फेर आएल “विदेह” प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका http://www.videha.co.in/पर। “विदेह” देश-विदेशक मैथिलीभाषीक बीच विभिन्न कारणसँ लोकप्रिय भेल। “विदेह” मैथिलक लेल मैथिली साहित्यक नवीन आन्दोलनक प्रारम्भ कएने अछि। प्रिंट फॉर्ममे, ऑडियो-विजुअल आ सूचनाक सभटा नवीनतम तकनीक द्वारा साहित्यक आदान-प्रदानक लेखकसँ पाठक धरि करबामे हमरा सभ जुटल छी। नीक साहित्यकेँ सेहो सभ फॉरमपर प्रचार चाही, लोकसँ आ माटिसँ स्नेह चाही। “विदेह” एहि कुप्रचारकेँ तोड़ि देलक, जे मैथिलीमे लेखक आ पाठक एके छथि। कथा, महाकाव्य,नाटक, एकाङ्की आ उपन्यासक संग, कला-चित्रकला, संगीत, पाबनि-तिहार, मिथिलाक-तीर्थ,मिथिला-रत्न, मिथिलाक-खोज आ सामाजिक-आर्थिक-राजनैतिक समस्यापर सारगर्भित मनन। “विदेह” मे संस्कृत आ इंग्लिश कॉलम सेहो देल गेल, कारण ई ई-पत्रिका मैथिलक लेल अछि, मैथिली शिक्षाक प्रारम्भ कएल गेल संस्कृत शिक्षाक संग। रचना लेखन आ शोध-प्रबंधक संग पञ्जी आ मैथिली-इंग्लिश कोषक डेटाबेस देखिते-देखिते ठाढ़ भए गेल। इंटरनेट पर ई-प्रकाशित करबाक उद्देश्य छल एकटा एहन फॉरम केर स्थापना जाहिमे लेखक आ पाठकक बीच एकटा एहन माध्यम होए जे कतहुसँ चौबीसो घंटा आ सातो दिन उपलब्ध होअए। जाहिमे प्रकाशनक नियमितता होअए आ जाहिसँ वितरण केर समस्या आ भौगोलिक दूरीक अंत भऽ जाय। फेर सूचना-प्रौद्योगिकीक क्षेत्रमे क्रांतिक फलस्वरूप एकटा नव पाठक आ लेखक वर्गक हेतु, पुरान पाठक आ लेखकक संग, फॉरम प्रदान कएनाइ सेहो एकर उद्देश्य छ्ल। एहि हेतु दू टा काज भेल। नव अंकक संग पुरान अंक सेहो देल जा रहल अछि। विदेहक सभटा पुरान अंक pdf स्वरूपमे देवनागरी, मिथिलाक्षर आ ब्रेल, तीनू लिपिमे, डाउनलोड लेल उपलब्ध अछि आ जतए इंटरनेटक स्पीड कम छैक वा इंटरनेट महग छैक ओतहु ग्राहक बड्ड कम समयमे ‘विदेह’ केर पुरान अंकक फाइल डाउनलोड कए अपन कंप्युटरमे सुरक्षित राखि सकैत छथि आ अपना सुविधानुसारे एकरा पढ़ि सकैत छथि।
मुदा ई तँ मात्र प्रारम्भ अछि।
अपन टीका-टिप्पणी एतए पोस्ट करू वा अपन सुझाव ई-पत्र द्वारा ggajendra@videha.com पर पठाऊ।

'विदेह' २२४ म अंक १५ अप्रैल २०१७ (वर्ष १० मास ११२ अंक २२४)

ऐ  अंकमे अछि :- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१. डॉ. कैलाश कुमार मिश्र -    मैथिलानी केर उपराग राम सं आ समाज ...