Sunday, March 13, 2011

'विदेह' ७७ म अंक ०१ मार्च २०११ (वर्ष ४ मास ३९ अंक ७७) PART VII


विदेह नूतन अंक गद्य-पद्य भारती
मोहनदास (दीर्घकथा):लेखक: उदय प्रकाश (मूल हिन्दीसँ मैथिलीमे अनुवाद विनीत उत्पल)

उदय प्रकाश (१९५२- ) “मोहनदास”- हिन्दी दीर्घ कथाक लेखक उदय प्रकाशक जन्म १ जनवरी १९५२ ई. केँ भारतक मध्य प्रदेश राज्यक शहडोल संभागक अनूपपुर जिलाक गाम सीतापुरमे भेलन्हि। हुनकर हिन्दी पद्य-संग्रह सभ छन्हि: सुनो कारीगर, अबूतर कबूतर, रात में हारमोनियम, एक भाषा हुआ करती है। हिनकर हिन्दी गद्य-कथा सभ छन्हि: तिरिछ, और अन्त में प्रार्थना, पॉल गोमरा का स्कूटर, पीली छतरी वाली लड़की, दत्तात्रेय के दुख, अरेबा परेबा, मैंगोसिल, मोहनदास। मोहनदास- दीर्घकथा लेल हिनका साहित्य अकादेमी पुरस्कार २०१० (हिन्दी लेल) देल गेल अछि।

अनुवादक:
विनीत उत्पल  (१९७८- )
आनंदपुरा, मधेपुरा। प्रारंभिक शिक्षासँ इंटर धरि मुंगेर जिला अंतर्गत रणगांव आ तारापुरमे। तिलकामांझी भागलपुर, विश्वविद्यालयसँ गणितमे बीएससी (आनर्स)। गुरू जम्भेश्वर विश्वविद्यालयसँ जनसंचारमे मास्टर डिग्री। भारतीय विद्या भवन, नई दिल्लीसँ अंगरेजी पत्रकारितामे स्नातकोत्तर डिप्लोमा। जामिया मिल्लिया इस्लामिया, नई दिल्लीसँ जनसंचार आ रचनात्मक लेखनमे स्नातकोत्तर डिप्लोमा। नेल्सन मंडेला सेंटर फॉर पीस एंड कनफ्लिक्ट रिजोल्यूशन, जामिया मिलिया इस्लामियाक पहिल बैचक छात्र भs सर्टिफिकेट प्राप्त। भारतीय विद्या भवनक फ्रेंच कोर्सक छात्र। आकाशवाणी भागलपुरसँ कविता पाठ, परिचर्चा आदि प्रसारित। देशक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिका सभमे विभिन्न विषयपर स्वतंत्र लेखन। पत्रकारिता कैरियर- दैनिक भास्कर, इंदौर, रायपुर, दिल्ली प्रेस, दैनिक हिंदुस्तान, नई दिल्ली, फरीदाबाद, अकिंचन भारत, आगरा, देशबंधु, दिल्ली मे। एखन राष्ट्रीय सहारा, नोएडा मे वरिष्ट उपसंपादक। "हम पुछैत छी" मैथिली कविता संग्रह प्रकाशित

मोहनदास पोथीक आवरण चित्र मार्कूस फोरनेलक चित्रक उदय प्रकाश द्वारा रूपान्तरण।

(उदय प्रकाश जीकेँ "विदेह" विनीत उत्पलकेँ "मोहनदास"क मैथिली अनुवादक अनुमति देबाक लेल धन्यवाद दैत अछि- गजेन्द्र ठाकुर- सम्पादक।)

मोहनदास : उदय प्रकाश
(मूल हिन्दीसँ मैथिलीमे अनुवाद विनीत उत्पल द्वारा)

मोहनदास: चारिम खेप

मोहनदास ओरियंटल कोल माइंसक मुख्य गेटक बाहर सड़कपर ठाढ़ छल। एकदम बीचोबीच। ओकर दिमाग किछु सोचब छोड़ि देनेलै। एकटारौन सन गुमकी लै जे सौंसे वातावरणमे सांय-सांय करैत बाजि रहल छलै। ओकरा ईहो होश नै लै जे ओ सड़कक ठीक मांझमे ठाढ़ अछि आ ओकर दुनू कात ट्रक, मेटाडोर, टेंपो आ दोसर गाड़ी हॉर्न बजाबैत ओकरा कोनो तरहेँ थकुचेबा बचाबैत तेज गति लगातार जा रहल छलै

मोहनदासक जेबीमे ओ  पर्स एखनो छल जे ओ नोकरी लागैक आसमे तीस टकामे किनने रहए। ओमे अखनो एक सए सत्तरि टका छलै। ओकर मेहनति आ कमाक टका।  पैंसठि टका बसक किराया देलाक बादो ओकरा लग एत्ते टका बचल छलै। अप्पन जेबी पर्स छुला ओकर दिमाग शांत हुए लागल। एत्ते काल बाद ओकरा एकाएक रौदक तेज हेबाक अनुभूति भेलै। ओ झटकारि कऽ सड़कक कात आबि गेल। ओकरा भूख लागल छलै

"मोटू वैष्णव शुद्ध शाकाहारी होटलढाबामे खाइत काल ओकरा पता लगलै जे साझमे एत राज्य परिवहनक दूटा आर एकटा प्राइवेट बस सेहो ओकर गाम पुरबनरा दिस जाइ छै। एखन तँ खाली एक्के बजल छै। ओ निर्णय लेलक जे ओ एक चक्कर ओरियंटल कोल माइंसक कॉलोनी "लेनिन नगर' दिस घुमि आबए। ओतए किंसाइत चिन्हन-जानल कियो देखा जा। स्कूल-कॉलेजक कोनो पुरनका सहपाठी आकि कियो

लेनिन नगरमे एत ओत धरि ओ घुरिआइत रहल। दुपरिया काल छलै। सभटा फ्लैट एक्के जेहन बनल छलै। लोक काज करबा लेल कोलयरी जाइ गेल छल। घरमे  स्त्रीगण आ नेना सभ टा छल। स्कूलक एकटा बस ठामे-ठाम ठाढ़ होइत बच्चा सभके उतारि कआगू चलल जा रहल छल। लेनिन नगर बड़ पै कॉलोनी छल। जौ हमरा संग धोखाधड़ी आ जालसाजी नै ल गेल होत तमहूँ अप्पन परिवारक संग  लेनिन नगरक एहने कोनो फ्लैटमे रहतौं, सभ मास दरमाहा भेटति, देवदास आ शारदा तरहेस्कूल ड्रेस आ जूता-पैताबा हिरि कऽ ऐ बसस उतरिति। कूलर-पंखामे सुतिति। मुदा केहन भाग्यक खेला छल जे मोहनदासके बिसनाथक फ्लैटक पता पूछै लेल अप्पन नाम लिअ पड़ि रहल छलै

"मोहनदासक फ्लैट कोन छै, भा साहे?'
"कोन? सुपरवाइजर साहब?'
"हँ...!

"आगू चलि जाउ सोझे। तीन कट छोड़ि क चारिममे बामा हाथ घुमि जाब। तेसर मकान छै। ए बट्टा एगारह। डॉक्टर जनार्दन सिंहक बगलबला फ्लैट।'

फ्लैटक दरज्जा बंद छल। बाहरी देवालपर नेम प्लेट लटकि रहल छल, जापर लिखल छल- "मोहनदास विश्वकर्मा, कनिष्ठ आगार अधिकारी, ओरियंटल कोल माइंस”।

मोहनदास कनी काल धरि गुम्म भऽ नेम प्लेट पढ़ैत रहल, फेर ओ कॉलबेलक स्विच दबौलक, जे ठामे नेम प्लेटक नीचा छल। मोहनदास एक बेर त डरि गेल किएक तँ जे आवाज भेल ओ ठीक वएहटाह आवाज छल जे भर्ती दफ्तरक बाबूक टेबुलबला घंटीस भेल छलै कर बाद ओकरा संग ई दुर्घटना भेल छलै

दरवज्जा एकटा चौदह-पंद्रह बरखक बच्चा खोललक।

"साहब नै अछि! खने निकलल अछि। आगूबला बजारमे लस्सी पिबैत हत।' छौरा एक्के सूरमे बाजल

"पिबै लेल पानि भेटत की?”, मोहनदासक ठोंठ सुखा रहल छल। रौद बड़ तीख भऽ गेल छलै आ हवामे लू बहैलै, से ओ झरका रहल छलै। कोलयरीमे जखन ओकरा धक्का मारि कऽ पिटैत बाहर निकालल गेल छलओकर कोहनी, गाल आ पीठपर एक-दू ठाम नोछार लागि गेल छलै। ओ नोछार घामक नूनसहरि रहल छलै

"अहाएत ठाढ़ रहू, दैत छी।' छौरा ओकरा माथसर धरि निङहारलाक बाद कहलक आ भीतर चलि गेल।
मोहनदास तीन गिलास पानि सुरकि गेल। छौरा फ्रिजस ठर बोतल निकालि क आनने रहै। पानि पिलासँ ओकर देहमे जान एलै, खिमे रोशनी घुरलैमोन किछु शांत भेलै ँ ओ देखलक जे गिलास घुरा क लऽ जाबला छौरा ओकरा सहानुभूतिक संग देखि रहल अछि।

"ओकर घरमे एखन के-के छै?', मोहनदास पुछलक।
"कियो नै। कस्तूरी मैडम टा छै।...एखन सुतल छै। अहा पांच बजेक बाद आ' छौरा खाली बोतल आ गिलास लऽ कऽ अंदर जाय लागल त मोहनदास कहलक, "अहाक साहब आबथि त हुनकास कहब जे पुरबनरा गामस मोहनदास आल छल। साझके हम फेर आब।'

लड़का भीतर जाइत-जाइत ठाढ़ भऽ गेल। ओ मोहनदासकेँ निङहारि देखलक आ कहलक, "की कहलि?...के आल छल!

"मोहनदास!”, मोहनदास जोरसँ बाजल आ रकमे-रकमे म मासक आगिमे जरैत आ पसिझैत कोलतारक सड़कपर घुरि क आबि गेल।
लेनिन नगरक मार्केट बड़ पैघ नै छल। मुदा आधुनिक हेबा लेल ओ छटपटा रहल छल। तीन-चारि डिपार्टमेंटल स्टोर्स, किछु खुदरा सन किरानाक छोट सन दोकान। डोसा-इडली-बड़ा बला "कावेरी फास्ट फूड। दू तंदूर, साल मखनी, कड़ाही पनीर, बटर चिकेन, आलू पराठा बला होटल। एकटा देशी आ अंग्रेजी शराबक दोकान, मे "एतए शीत बीयर सेहो भेटैत अछि' क बोर्ड लागल छल। पान-सिरेटक दूटा गुमटी आ प्लास्टिक, इलेक्ट्रानिक्स आ इलेक्ट्रॉनिक्स सामानक, सीसा बला शो-विंडोजबला दूटा दोकान। एकटा कपड़ाक बड़ पैहालसन दोकान छल, जकर आगू गेटपर आ सीसाक भीतर सेहो, जालीदार ब्रोसरी आ जालीदार जंघिया पहिरने, अप्पन सभ किछु देखबैत, आदम-ईव सन उज्जर फाइबरक पुतुल ठा छल।

मोहनदास देखलक जे लक्ष्मी वैष्णव भोजनालयक आगू पुलिसक टाटा सुमो ठाछल, मे दू-तीन टा सिपाही संग ओकर गामक पंडित छत्रधारी तिवारीक लड़का विजय तिवारी, जे अप्पन ससुरक घुरपेंच दरोगा भऽ गेल छल, लस्सी पीबि रहल छल।...आ बिसना सेहो ओतै छल।
बिसनाथ कोनो गपपर ठठा कऽसि रहल छल आ अप्पन लस्सी सठा कऽ टाटा सुमो दिस बढ़ि रहल छल, तखने ओकर नजरि मोहनदासपर पड़लैओ सतर्क भऽ गेल। एक क्षण लेल ओकर चेहराक रंग उड़ि गेलै। एखन धरि जे हसी कर चेहरापर नाचि रहल छलै से तुरत्ते बिला गेलै। बिसनाथक चेहरापर आल गड़बड़ीकेँ अकानि कऽ विजय तिवारी घुरि क देखलक। ओ गाड़ीमे ड्राइवर सीटपर बैसल छल, वर्दीमे सजल-धजल।

मोहनदास चेड़ीमे, लू मे झरकै, सड़कक कात, बिजलीक खाम्ह लग, लगभग पंद्रह गजक दूरीपर ठा छल।

एकटा तनावस भरल गुमकी अनचोक्के दुपहरियाक रौदमे एत ओत धरि पसरि गेल छलै

बिसनाथ गाड़ीपर चढ़ि गेल। विजय तिवारी चाभी घुमा क इंजन स्टार्ट केलक आ एक्के धक्कामे ओकरा दौबैत जोरसँ दिस आजेम्हर मोहनदास ठा छल। मोहनदास थकमका गेल आ डोलि कऽ बिजलीक खुट्टा दिस हटल। विजय तिवारी जोरसँ ब्रेक मारलक आ गाड़ीके मोहनदासक ठीक आगू ठाढ़ कऽ देलक। ब्रेक नैगितियै तमोहनदास खुट्टा संग ओकर चपेटमे आबि जैतियै। मोहनदासके अदंक लऽ लेलकै

"एम्हर आ!', विजय तिवारी ओकरा बजेकै। आँ मोटामोटी सात-आठ बरख पहिने, एह विजय तिवारी ओकरा संग एम.जी. डिग्री कॉलेजमे पढ़ैत छल। सभ दिन एक्के क्लासमे ओ बैसैत छल। पढ़ै-लिखैमे ओ लद्धढ़ छल। ओकर बाप पंडित छत्रधारी ओकरा मोहनदासक उदाहरण दैत छलै जे सभ बरख फर्स्ट आबैत छल। अखन एह विजय तिवारी पुलिसक वर्दीमे बत्ती आ लाउडस्पीकर लागल टाटा सुमोमे बैसल ओकरा ज तरहे निङहारि रहल छल, मे अनचिन्हार बनबासँ बेसी हिंसा आ तामस साफ-साफ लखा दैत छल। एहन की भऽ रहल छल? की मोहनदास गरीब आ निचलका जातिक छल, ता? वा ता जे ओ बेरोजगार छल आ अप्पन मेहनतिचुपचाप अप्पन परिवारक आजीविका चला रहल छल? वा ऐ लेल जे ई सभ लोक ओकरा ठकने छल ओकर अहं मारि देने छल आ आब एत ओकर सोझाँ ओकर आजादी आ मौज-मस्तीमे बाधा बनि रहल छल?

"खुट्टा बचा लेलकै बरगाही भाइ, नै तँ अखन लोथ बनि गेल रहति!विजय तिवारी रकमस फुसफुसा क कहलक।
"हौ छोड़ू! माछी मारि आर हाथ गंध करत!' बिसनाथ बाजल।

"ओहिने हुड़कि दैत छिऐ! कखनो एम्हर दिस नै ताकत सार!'

मोहनदास खन धरि अप्पन ठामस हिलल नै छल।

विजय तिवारी जोरस कतेक बेर हॉर्न बजेलक, कर बाद एकाएक गाड़ीक ऊपर लागल स्पीकरमे ओकर आवाज चारू दिस गूंजै लागल, "हे हौ बिसनाथ! गाड़ीक आगू किकुलह हौ बिसनाथ? तोहर दिमाग सनकि गेल छ की बिसनाथ? बिसनाथ, बाजैत किए नै ? बहीर भऽ गेल छ की हौ बिसनाथ! बिसनाथ, हे हौ बिसनाथ!

गाड़ीक भीतर जोरस ठहक्का उठ लागल छल।

"भौजीके एतए नै आनलौं बिसनाथ? असकरे मरै लेल आल रह...हे!

बिसनाथ गाड़ीस उतरल आ मोहनदास लग आबि क ठा भऽ गेल। ओ अप्पन जेबीस पासएक एकटा नोट निकालि क मोहनदासक शर्टक जेबीमे खोंसि देलक।

"सुनू, आब अहा अप्पन पुरनका नाम बिसरि जा आ आब आक बाद कहियो लेनिन नगर दिस पनै बढ़ाब! बुझलि! आ हम दारू नै लस्सी पीबि राखनेही, ऊपरस बिजलीक खाम्ह आबि गेल, नै तँ चापि दैतौं। दोबारा कतौ आसपास देखा देलौं कॉलरीक भट्टीमे छाउर बना देब।

एकर बाद बिसनाथ घूमल आ मोटू वैष्णव ढाबा दिस देखैत जोरस गरजल, "हे हौ नंद किशोर, बिसनाथके एक गिलास लस्सी पिया देबहीं ठंडा! बरफ दऽ क! बरफ दऽ कऽ हौ! हम्मर पड़ोसी गामक अछि बिसनाथ...!टाटा सुमोक भीतरसअनवरत ठहक्काक आवाज आबि रहल छल।

बिसनाथ सेहो ह लागल छल। घुरि क गाड़ीमे चढ़ैत-चढ़ैत ओ रकमस विजय तिवारीस कहलक, "ई नंद किशोर अछि भखारक ढीमर मुदा एत बाभन बनि कवैष्णव शाकाहारी होटल चला रहल अछि। सजनपुरक चौबे घरेनक बहूकेँ बियाहि आनलक सार

"पंडीजी कहियौँ फूलि कऽ कुप्पा भऽ जाइत छै।

"नीके छै! समांग बढ़ैत छै।”,  विजय तिवारी बाजल आ ठहक्का लगा क ढाबा दिस मुह क बाजल, "बिसनाथकेनेटा सम्हरि लस्सी पियब पंडितजी, परका पेंच कनी लूज भऽ गेल छै...! हाँ रूपा हम्मर खातामे चढ़ा लेब।

निफिकिर रहू! निफिकिर! घरक काज छि! पेंच त हम सेट कऽ देबै!

मोहनदासमुहमे टाटा सुमोक धुरा-गर्दा आ धुआ छोड़ैओ सभ चलि गेल। मोहनदास ओ ठाम ठा रहल, बिजलीक खुट्टाके अप्पन हाथस थाम्हनेकी ई कोनो फिल्म छल जकर सीन एखने-एखन पूरा भेल आ जामे ओ सेहो एकटा पात्र छल? वा ई कोनो अजीबे सपना छल?

मोटू वैष्णव शाकाहारी ढाबास गोर-नार, कारी-चमकैतखिक अधवयसू बड़का पेटबला लुवा नंद किशोर लस्सीक गिलास हाथमे थम्हने गरजि रहल छल- "आबू भा बिसनाथ! लस्सी त पीबैत जा!

मोहनदास जखन लेनिन नगरक मार्केटस बस स्टैंड दिस जा रहल छल त ओकर रस्तामे एकटा परेशान-सन बैत लोक देखाल। ओ लेनिन नगर दिस जा रहल छल। कर अंगाक रंग कहियो लाल छल हेतै जे आब मैल आ पुरान भऽ कऽ कत्थ भऽ गेल छलै। मोहनदास लग आबि क ओे रूकल आ पुछलक- "भा, लेनिन नगरमे सूर्यकांतक फ्लैट कोन छै?

मोहनदासक मोनमे लै, जखन ओ बिसनाथक पता ताकि रहल छल, तखने ओ ई नेम-प्लेट देखने छल। ओ मन पाड़ैक कोशिश केलक।
"आगूसँ दहिन हाथ घुमि जाब आ सए गज आगू जा कऽ तिनमुहानी लग, मटियानी चौक लग ककरोस पूछि लेब। ओतै छै।

जखन ओ सभ जा लागल त मोहनदास रकमस ओकरासँ पुछलक- "अहां केकर फ्लैट ताकि रहल छी?
"सूर्यकांतक! उन्नाव लगक गामक छै।

"कर गामक की नाम छिऐ?
"गढ़ाकोला...!

"आ अहाक की नाम छी?

ओ लोक कनी काल चु रहल। कर ठोढ़ थरथरेलै, गहीर धसल आखिसँ पानि खसऽ लगलैकर सुखाएल गरा एकटा क्षीण रभराएल आवाज एलै- "सूर्यकांत! गढ़ाकोलाक सूर्यकांत।

ओ आदमी घुमल आ रकम-रकम थरथराइत लेनिन नगर दिस बढ़ि गेल।
(ई खिस्सा ओ कालक अछि जखन संसारक सभ देशक सभ सरकारक अर्थनीति आ राजनीति एक्कहि रंग छल, जखन धनीकक आ गरीबक बीचक खधा एत्ते गहीर आ चाकर भऽ गेल छलै जे कर कोनो प्रायोजित विज्ञापन नुका नै सकै छल...ओकाल जखन बीससदीक शुरूमे उत्पीड़ित आ शोषित मनुष्यताकेँ लऽ कऽ क्रांति करैबला तागति, साझा सरकार बनाबै लेल, पेट्रोलक दाम कम करबाक आ गरीबपर राज करबाक शतरंज खेला रहल छल...आ एहन समए जामे देशमे जे कियो ईमानदार छल आ अप्पन श्रम आ प्रतिभापर जिबैत छल, ओकरा मारबा वा थकुचबा लेल एकैसम सदीक उत्तर द्योगिक लोकतंत्रमे एकटा अभूतपूर्व सर्वदलीय तिहासिक सहमति छल...। राजनीतिक सभटा रूप सत्ताक एहन उपकरणमे बदलल गेल छल, जकर इस्तेमाल प्रजाक उत्पीड़न, दमन आ ओकरापर अन्याय लेल भऽ रहल छल)

रातिमे एगारह बजे मोहनदास अप्पन घर पहुचल। सभ कियो कर बाट जोहि रहल छल। कस्तूरी भात-दालिरामझुमनीक खुशीमा बनेने रहथि। कनीटा काच आमक चटनी सेहो ओ सिल्ला-लोरहीपर पिनेली। देवदास आ शारदा सुति गेल छल। काबा ओसारपर खाटपर पड़ल-पड़ल खोंखी कऽ रहल छल।
"आ तीन बेर खोंखीक संग खून आ मौस खसल।कस्तूरी बतेलकै

पुतलीबाओतकाबाक खाटक नीचाँ शतरंजी ओछा कऽ सुति गेल छलि। कस्तूरी एखनि धरि नै खेने लि। ओ थारीमे अप्पन आ मोहनदासक खेनाइ लगा कऽ झाँपि देने छल।

हाथ-पर धोलाक बाद जखन मोहनदास अप्पन कपड़ा उतारलक आ गमछा लपेटलक त ओकर उघा देहमे लागल चोट आ नोछाचेन्ह कस्तूरीके देखा पड़लै। ओ चिंतित भऽ गेलि

"की भऽ गेल? त्तऽ खसि पड़लि?”,  कस्तूरी उठि क ओकरा लग आयलि आ ध्यानस ओकर देहके छूबि-छूबि देख लागलि

"हे दा! ई त मारि-पीटक घाव छि!”,  मोहनदास चुपचाप हाथ-पर धोइत रहल। ठार पानिक संग ओकर दिन भरिक थकान धुआ कऽ नालीमे बहैत जा रहल छलै। मंजनौटे लग बेलक एकटा पै सन गाछ लागल छलैमे कतेक रास फूल भेल लै आ ओकर महक भरि आंगनमे भरल छलै। मोहनदास सांस घीचि क अप्पन कलेजामे भरि लेलक आ कनी काल धरि आखि मूनि सतगुरु कबीरक जाप करैत रहल।

कस्तूरी खेबाक थारीक ऊपरस परात हटेलक त भरि आंगनमे भातक गमक भरि गेलै। लोहंदी चाउर छलै, पुरनका। गोठल्लाक कोनो कोनमे पुतलीबा नुका कऽ राखने छल आ बिसरि गेल छल। आ ओकरा ओ जोगाएल चाउर मोन पड़लै जे छुबि-छुबि ओ पोटरी ताकि कऽ निकालने छल। मोहनदास हपसि ऽ खेलक। आमक चटनी आंगुरमे लगा क चाटि रहल छल कस्तूरी कहलक- "बिसैंधी आमक गाछपर खूब फल आल छल। बेचलापर कमस कम हजार-दू हजार त भेटबे करत। काल्हि बेचि दी की?मोहनदास तिरपित भऽ कऽ बड़का ढेकार मारलक आ कहलक, "अहाक हाथक पकाल भोजनमे जादू अछि कस्तूरी। आमक चटनी, भात आ भूखक संग जौं अहाक हाथसँ परसबाक संयोग भऽ जाए त स्वर्गे भेट जाइत अछि।कस्तूरीक आखि नोरा गेलै। ओ बुझैत छल जे आ मोहनदासक संग कोनो अनहोनी भेल छै, जकरा ओ सभ दिन जकाँ ओकरासनुका रहल छै।

राति कस्तूरीके बड़ राति धरि जगरनाक बाद सुतल भेलै मुदा मोहनदासक आखि एक्को क्षण लेल नै लगलै। ओ बेर-बेर उठैत छल आ गटागट पानि पिबैत छल। ओकर दिमागक भीतर कोनो धुरा-गर्दा आ कुहेसस भरल तेज आन्ही चलि रहल छलै। आन्हिये नै, कोनो कतेक रास घुरमैत बिर्रो

मोहनदास दू-एक बेर फेर ओरियंटल कोल माइंस गेल मुदा ओत जाब व्यर्थ भेलै किएकि ओत आर लेनिन नगरमे ई उक्का पसारि देल गेल छलै जे एकटा बताह हफ्ता-पंद्रह दिनपर एतए अबैत अछि आ अपनाके माइंसक असली डिपो सुपरवाइजर आ असली मोहनदास बी.. कहैत अछि। जौं ओकरा बिसनाथ कहि क गरजियौ तअंट-शंट बाज लागैत अछि आ ओकरा बतहपनीक दौड़ा पड़ै छै।
मोहनदास हारि गेल आ ओ कोलियरी जाब छोड़ि देलक। ओ दिन-राति पजरैत रहल। कठिनाक रेतपर राति भरि जागि कचुपचाप आकाशके घुरैत रहैत छल। गाममे ओहिनो कबीरपंथी बंसहर-पलिहा निचला जातिक मानल जाइत छल। ओ अनुसूचित जातिअछि वा आदिवासी वा आदिम जनजातिक, एखन धरि सरकारी गजेटमे ई फरिछानै छल।  दस बरख पहिने भेल जनगणनामे कर जातिक आगू "बंसोरवा "पलिहाटा लिखल छल। दोसर कागजमे धर्म "हिन्दू' आ राष्ट्रीयता "भारतीयकर सभक संख्या कम छलैकर समांगक कोनो लोक पार्टी वा सरकारमे नै छल। ओ मोहनदास एत मजाक आ ठट्ठाक विषय बनि गेल छल। ऊच जातिधनीक लोक ओकरा देखैत पुछैत छल, "तोहर नोकरी कहिया लागि रहल छौ रे मोहना?कियो ओकरा सलाह दैत छलै जे विजय तिवारीक महिसवारी सम्हारि ले। कमस कम खा-पिबैले तत्ता-सिहर तँ नै हेतौ। कस्तूरी सेहो मौज करतौ। साड़ी-सैंडिलक दिक्कत नै रहतौ
कियो-कियो तओकरा लेनिन नगर जा क बिसनाथक पर पकडि़ क ओकर घरक चाकरी करबाक सुझाव दैत छल। मोहनदास गामक पै लोके देखिये ऽ रस्ता बदलि लै छल। ओ ओकरा देखये कऽ दूरसँ घुमि जाइ छल।

हनो नै छल जे ओकरा लऽ कऽ गामक लोकके सहानुभू्त नै लै। सत तछै जे बेसी लोक ओकरा लऽ कऽ चिंतित छल। कोनो-नै-कोनो तरहे कर मदति कर चाहै छल। मुदा ई ओ लोक छल जे अपने कतेको तरहक संकट आ विपदामे बाझल छल। एकरामे स ककरो कत्तौस ऊपर धरि पहुनैलै। ओ स अप्पन घाम आ अप्पन-अप्पन नोरक संग कालमे चुपचाप जीबैबला लोक छल।
घनश्याम हने लोकमे एकटा रहए। जातिक कुर्मी रहै। मुदा ओ गरीब नै रह। तीस बीघाक खेती छल। बैंकमे किस्तपर ओ ट्रैक्टर लेने छल। शाक-सब्जी आदि उगाबैक अलावा ओ अप्पन ट्रैक्टर किरायापर उठा रखने छल। तखनो सभ मास साढ़े सात हजारक किस्त टायब ओकरा मुश्किल होल छलै। खेतमे उपजैबला अनाज आ दोसर फसलक दाम बाजारमे नै रहि गेल छलैलग-पासक गाम बलहराक बिसेसर जे ग्रामीण बैंकस कर्ज लऽ कऽ सोयाबीनक खेती केने छल, दू मास पहिने अप्पन खेतकेँ नीलामीस बचाबै लेल बिजलीक खुट्टापर चढ़ि नांग तारसटि मरि गेल छल। छोटका किसान आ जोन-मजदूर गाम छोड़ि-छोड़ि शहरक दिस भागि रहल छल। घनश्याम सेहो परेशान रहैत छल।
दिन मोहनदासकेनी जूड़ी चढ़ल छलै। दिन भरि सूप-टोकरी बुनाय आओर बड़ राति धरि पलियामे पानि पटाबैक बाद ओ एत्ते थाकि गेल छल जे बिना खाल-पील सुति गेल छल। भिनसरे उठल त देह गरम छलै। परछीमे पटाएल छल तखने घनश्याम आबि गेलै। ओ अपना संगमे मोहनदासक साढू गोपालदासके सेहो पकड़ि कऽ आनने छल। दुनू मोहनदासस कहलक जे कर चिन्हार एकटा लोक भेट गेल जे ओरियंटल कोल माइंसक जी.एम. (जनरल मैनेजर) ए.के. सिंहके जानैत अछि। ओ मोहनदासस कहलक जे ओ एखन तुरत हाथ-मुंह धो क तैयार भऽ जाए, अगला बसस ओत चलबाक छै। घनश्याम आ गोपालदास दुनू उत्साहमे छल। ओ सभ कहलकै जे आए पहुचब लेल जरूरी छै किएक तँ परसू स जी.एम. एक मासक छुट्टीमे बाहर जा रहल छै। गोपालदास अप्पन झोरा मोहनदासक पहिरबा लेल एकटा पैंट आ एकटा शर्ट सेहो कीन क आनने छल। ओ हसैत कहलक, "लिअ, एकरा पहिर लि! बुढबा बड़दक पोथा सन मैनेजर लग चेहरा लटका कऽ नै जा।" मोहनदास जूड़ीमे ह लागल।
ओरियंटल कोल माइंसक जनरल मैनेजर एस.के. सिंहस भेंट करबामे कोनो दिक्कत नै भेलै। गोपालदासक पैंट आ बुश्शर्ट मोहनदासक भीतर न आत्मविश्वास भरि देने छलै। ओ जी.एम. केटा खिस्सा बतौल जे कोना 18 अगस्त, 1997 केर्ती परीक्षामे ओ नोकरी लेल सलेक्ट भेल छल आ पाच कैंडिडेटक लिस्टमे कर नाम सभसँ ऊपर छलै। ओ दिन ओ अप्पन सभटा सर्टिफिकेट आ काग दफ्तरमे जमा कऽ देने छल मुदा ओकरा लग कहियो नियुक्ति पत्र नै एलै आ आब कोना बिछिया टोलाक बिसनाथ ओकर नामस पिछला पाच बरखस एतए नोकरी कऽ रहल छै आ डिपो सुपरवाइजर बनि दस हजारस ऊपर दरमाहा लऽ रहल छै। मोहनदासके घनश्याम कहि कऽ राखने छल जे ओ जी.एम. के दिनुका घटना नै बताबै, जहिया ओ कोलियरी अप्पन कागज मांगै लेल आल छल आ भरती दफ्तरक बाबू सभ ओकरा मारने लै आ फेर बादमे लेनिन नगरमे पुलिसक दरोगा विजय तिवारी आ बिसनाथ ओकरा धमकी देने छलै लेल मोहनदास एतबेपर रुकि गेल। कर गपक समर्थन ओत बैसल घनश्याम आ गोपालदास सेहो केलक। 
जनरल मैनेजर एस.के. सिंह केँ लऽ कऽ ई प्रसिद्ध छल जे ओ बड़ सोझ अफसर अछिधुरफंदीबला लोक संग जौ ओ रहितो अछिँ ऐ लेल जे ओकरा महग दारूक हिस्सक छै। नै ओ एत्ते सोझ छै जे ओ नै तँ केकरो अलाह कऽ सकैत अछि, नहिये केकरो नीक।
मुदा जी.एम. मोहनदासक सभटा गप सुनि क ओरियंटल कोल माइंसक वेलफेयर ऑफिसर ए.के. श्रीवास्तवकेँ ऐ मामिलाके जांचैक आदेश देलक आ कहलक जे अगला मास जखन ओ छुट्टीस घुरताह, तखन धरि हुनका जांच रिपोर्ट भेट जेबाक चाही। मोहनदास एस.के. सिंहक हि रूखसतेक भावुक भऽ गेल जे बेर-बेर ओकर आखि नोरा जालै। ओ मोने मोन सतगुरू कबीर आ मलइहा माक नाम जपि रहल छल।

गिला हफ्ता जांच भेल। वेलफेयर ऑफिसर ए.के. श्रीवास्तव लेनिन नगरक फ्लैट नंबर ए बटा एगारह पहुचल। बिसनाथके एक-एक गपक जानकारी पहिनेलैकर तार सभ जगह फिट छलैपछिला पाच बरखस ओ लेनिन नगरमे मोहनदास नामसरहि रहल छल ता ओ लेनिन नगरमे मोहनदासक नामस जानल जाइत छल। ए.के. श्रीवास्तव जकरास पुछैत छल जे फ्लैट नंबर ए बटा एगारहमे रहैबला लोकक की नाम छै त सभ कियो एक्के जवाब दैत छल, "मोहनदास।ओ सेहो पछिला चारि-पाच बरखसकरा मोहनदास नामस जानैत छल आ जकरा लेल ओ वर्कर्स वेलफेयर फंडस लोन सेहो सेंक्शन केने छल ओ "मोहनदास'  माने बिसनाथ छल। फेर ओ दिन जी.एम. क चैंबरमे जकरा ओ देखले छल जे अपनाकेमोहनदास कहि रहल छल, ओकरा देखि क ओकर मोनमे कत्तौ-नै-कत्तौ संदेह भऽ रहल छलै जे एहन लखा दै बला लोक ग्रेजुएट कोना भऽ सकैत अछि? अप्पन साढू गोपालदासक कपड़ा पहिर लेलाक बादो एत्ते बरखक बेरोजगारी, मेहनत आ अभावस मोहनदासक चेहरा आ समुच्चा देहक हुलिया एहन बनि गेल छलै जे एक नजरिमे ओ बेमार, बताह आ अनपढ़ नजर आबैत छल। इंक्वायरी ऑफिसर श्रीवास्तवक मन बेर-बेर कहैत छल जे भऽ सकैत अछि जे मोहनदास बनल लोक डिपो सुपरवाइजर मोहनदास नै हुए मुदा कियो आर हुए मुदा ई जे अपनाके मोहनदास हेबाक दाबी कऽ रहल अछि ओ सेहो कत्तौस मोहनदास नै लगैत अछि

बिसनाथ जबरदस्त व्यवस्था कऽ के राखने छल। अप्पन फ्लैटमे ओ श्रीवास्तवजीक खूब सत्कार केलक। अप्पन कनिया अमिताके ओ लो कट ब्लाउज आ नीचासारीमे शर्बतक ट्रे लऽ कऽ ड्राइंग रूममे आबै लेल कहि देने छल। लेनिन नगर मार्केटमे एम्हर खुल शिल्पा ब्यूटी पार्लरमे जा कऽ अमिता अप्पन फेशियल करौने छल। ओ शर्बतक ट्रे टेबुलपर राखैत मुस्कुराछ्ल जखन श्रीवास्तवजीकेनमस्ते केलक आ कहलक, "सरिता दीदीके संगमे नै आनलि सर? एकाएक ओतुक्का वातावरण आत्मीय, घरेलू आ ऐंद्रिक भऽ गेलै। इंक्वायरी ऑफिसरक नजरि बेर-बेर अमिताक खुढोढ़ीपर जाइत छल। टीवीपर तखन दिल्ली-मुंबमे चलैबला फैशन शो कार्यक्रमक समाचार चैनल नर-बड़ देखल जाइत छल। मुदा एतँ एकदम्मे जिंदा मॉडल जेहन स्त्री आगू ठालै। ई समाचार नै मुदा एकटा सत छलै

"ई हमर कनिया अछि सर!बिसनाथ नमकीन बिगजी श्रीवास्तवजी दिस  बढ़बैत कहलक-"कस्तूरी!'
"नाम कोनो पुरान स्टाइलक नै लगैत अछि? इंक्वायरी ऑफिसर ठाम टेबुल पर नमकीनक राखल प्लेटस एकटा बिसकुट उठबैत मुस्कियाइत कहलक।

अमिताकेसी लागि गेलै

"ई की अछि सर जे ज्योतिषी पिताजीसकहने छल जे मीन राशिवाली लड़कीके अप्पन बाजैबला नाम सेहो राशि बला राखबाक चाही...! तखन फल होत छै। तइ हमहू सेहो कहलि...चलू कोनो गप नै! राखि लैत छी।

"ओह! त कस्तूरी अहाक राशिबला नाम छी?इंक्वायरी ऑफिसर आब अमितास गप्प कऽ रहल छल। "अच्छा तँ बाजैबला नाम की छी अहा?ओकर हँसीमे आत्मीयताक घनत्व लगातार बढ़ि रहल छलै

अमिताक चेहरापर असमंजसक डरीड़ बन लागलै। एक पल लेल ओ चुप रहि गेल। बिसनाथ गपकेँ तत्काले बुझि गेल।

"खूब छी! आब नाम बताबैमे कथी लेल लजाइ छी कस्तूरी!" बिसनाथ ठहाका लगौलक-"चलू, हमही बता दैत छी!... सर हिनकर बाजैबला नामन्हि अमिता!... अमिता भारद्वाज। घरमे सएह कहै छन्हि

इंक्वायरी ऑफिसर श्रीवास्तव हंसै लागल।

"लेडिज केँ लाज नै हुए तनीक नै लागैत छै। कनीटा किछो त लेडिजपना बनल रहबाक चाही आकि नै!...चलू कस्तूरीजी हम अहाके अमिताजीए कहब! कोनो ऑब्जेक्शन त नै अहाके?

"नै सर! एक्को रत्ती नै!" अमिता फुदकि उठल।
"मुदा सत गप त ई अछि जे जखन कियो हमरा अमिता कहैत अछि लागैत अछि जे ओ हमरे घर दिसका अछि
अमिता एकटा बड़का सांस  भरलक, " इलाकामे अप्पन न किछु लागिते नै छै! बैकवर्ड छी हम स! बोर भऽ जाइत छी हम स

"एखन डेवलप हैमे टाइम लागत। ओना प्रोग्रेस त बड़ छै एम्हर। दू बरख पहिने की छल एत?' श्रीवास्तवजी सहज भऽ रहल छल। "अहाके टाइम कोना पास होइअछि एत, लेनिन नगरमे?

"बस भऽ जाइत अछि कोनो तरहे। किट्टी पार्टी भऽ जाइत छै। एक-दू कमेटे डालि देने छी, गरीब मजदूरक भला लेल। सोशल सर्विसमे मन लागि जाइत अछि
"नीक अछि, नीक अछि। सरिताके सेहो बड़ शौक छै सोशल सर्विसक। अहाल करू हमरा दिस। सरिताके सेहो इनवाल्व करू अपना सश्रीवास्तवजी बिसरि गेल छल जे ओ एत कोन काज लेल आल छल।

बिसनाथक बांहि फूलि गेलै। मौका सही छलै। ओ बाजल, "देखू सर, ई लेनिन नगर एहन कॉलोनी छै जतपड़ोसिये पड़ोसीक दुश्मन अछि। कियो ककरो हंसी-खुशी आर बढ़ैत देखिये नै सकै। आब यबिन-बातक बात। आर किछो नै भेटलै तँ पकड़ि आनलक ककरो दू-चारि दाना फेंक कऽ आ कऽ देलक शिकात। हम जानैत छी ककर कारस्तानी छिऐ ई। जातिवाद बेसी पसरि रहल छै आइ-काल्हि। ई सभ आब माथपर बैसत। हम बुझै छी जे ककर कराल छै ई सभटा खेल मुदा जाए दियौ। साचकेच की? अहाँ अपन इंक्वायरी निष्पक्ष भऽ कऽ करू।

इंक्वायरी ऑफिसर डायरी निकाललक आ पुछलक, 
"फादरक की नाम छी अहा?

"बाबूजी! ओ बाबूजी! कनी बैकीमे आबि जा!बिसनाथ जोरस चिकरल आ फेर मुस्कुरा क कहलक, 

"देखू संजोगे छै जे माय-बाबूजी दुनू काल्हि एतल छथि। अचार सबनल रहै। पहुचाबैक बहन्ना चलि आ, बेटा-बहुके देखबा लेल! हमर बल्दियत अहा हमर फादर-मदरस पूछि लियौ।

 "हम त जाइत छी।अमिता कहलक, "ट्रेडिशनल फैमिली अछि हमर।ओ उठि क भीतर चलि गेलि

नगेंद्रनाथक पाछाँ ओकर कनिया रेणुका देवी सेहो ड्राइंग रूममे आबि गेलि। तिलक चंदन देखि क इंक्वायरी ऑफिसर श्रीवास्तवजी अपन सोफास उठि कऽ हुनका नमस्कार करबाँ अपनाकेँ रोकि नै सकल। बड़ विनम्रताक संग ओ पुछलक, "अप्पन-अप्पन शुभ नाम बता दिअ अहाँ दुनू गोटे। असलमे कागजी कारवा छै। पूरा त करै पड़ैत छै।

नगेंद्रनाथ एक्को पलक देरी नै केलक, "हम्मर नाम छी काबादास।ओ कुरताके गरमे स खींच क माला निकालि बाजल- "ई तुलसीक माला जहियास धारण केने छी, तहियास तुलसीदासक चौपा हम्मर ओढ़ना-बिछौना अछि। "दासनाम हम तहियेजोड़ि राखने छी।...आ ई अछि हमर कनिया पुतलीबा। मोहनाक महतारी।" रेणुका देवी मूड़ी डोला कऽ हँ कहलक।

तरहे इंक्वायरी पूरा भऽ गेल। ओरियंटल कोल माइंसक वेलफेर ऑफिसर ए.के. श्रीवास्तव अप्पन जांचमे पेलक जे मोहनदास बल्द काबा दास, ग्राम पुरबनरा, थाना आ जिला अनूपनगर, मध्यप्रदेश केँ लऽ कऽ उठाल गेल सभटा आपत्ति निराधार अछि। ओ पुष्टि लेल पुरबनराक सरपंच छत्रधारी तिवारी आ जिला जनपद सदस्य श्यामला प्रसादक कल गेल तस्दीकक कागज सेहो रपटक संग नत्थी कऽ देलक जे ओकरा बिसनाथ देने रहै।

बिसनाथ आ अमिता माने मोहनदास आ कस्तूरीक आग्रहपर श्रीवास्तवजी दुपहर धरि ओत विश्राम केलन्हि, साझमे बियर आ बादमे व्हिस्की सेहो ओतए पिन्हि, सामिष आहारमे देशी मुर्गा आ जखन ओ राति एगारह बजे अप्पन नबका "मारुति जेनसं ओतँ बिदा भऽ रहल छल, तखन बेर-बेर अमिताके "कस्तूरीजीसंबोधित करैत अप्पन घर आबैक लेल आ अप्पन वाइफ सरिताके समाज सेवामे इन्वाल्व करैक आग्रह कऽ रहल छल।
मुदा नशा बादो कर आखि अमिताक ढोढ़ीपर टिकल छलै जे रातिक अन्हारमे पै भऽ कऽ कर समुच्चा चेतनापर आच्छादित भऽ गेललै
(ई सभटा गप कालक अछि जखन पंजाबमे लोक सेवा आयोगक चयन समितिक अध्यक्ष करोड़ो टका घूस खा क, पूरा राज्यमे हजारो सरकारी अधिकारीक नियुक्ति कऽ देने छल आ सी.बी.इ.क छापा मारल गेलापर फरार भऽ गेल छल। ...जखन पै-पै मंत्रीक आवासमे जेड सिक्योरिटीक भीतर सूटकेस आ नोटक बंडल पहुँचि रहल छल आ ओत भारतक कोनो साधारण लोक प्रवेश वर्जित छल।...जखन हरियाणाक एकटा आइ.जी. आओर उत्तरप्रदेशक एकटा कबीना मंत्री स्त्रीगणक संग अवैध संबंध आ हत्या आरोपमे गिरफ्तार छल आ मुंबमे एनकाउंटरस अंडरवर्ल्डक अपराधीके मारैबला "सुपरकॉपसेहो माफियाक "सुपारी किलर"छल।...एहन काल जखन उपमहाद्वीपक प्रजाक भाषा हिंदी आ उर्दू के "राजभाषा' नेलाक बाद प्रेमचंद, नेरूदा, फैज आ नजरूल-निराला के "राज-लेखकनेबा लेल सत्ताधारी राजनीतिक दलक लोक लेखकक मुखौटा लगा ककमेटी बना रहल छल। ...एहन काल जखन दिल्लीक एकटा बेमार आ कर्जदार दर्जी अप्पन दूटा संतान आ अप्पन कनियाकेँ माहुर खुआ क मारि देलाक बाद अप्पन हत्याक प्रयास करैत पकड़ल गेल, किएक तँ ओरा लग आजीविकाक कोनो विकल्प नै रहि गेल छल। आब ओकरा जेलमे दऽ कऽ इंडियन पीनल कोडक धारा 302 आओर 309 लगा कऽ हत्या आ आत्महत्याक कोशिशक मुकदमा चलाल जा रहल छल। ...आ...)
(अनुवर्तते............)

बालानां कृते
१.संस्कृति वर्मा- मेहनत
२.नवीन कुमार "आशा"- मस्ती करू यौ बौआ मस्ती करू



संस्कृति वर्मा 
मेहनत 
एक टा गाम में दू टा गाछ छल ,एकटा फूल से भरल दोसर काँट से भरल छल. फूल के अपन सुन्दरता पर बड घमंड छल. कांट वाला गाछ चुपचाप रहैत छल,किन्तु वो मेहनती छल..पानी लेल ओकर जड़ी  दूर दूर धरि चलि जायत छल. फूल वाला गाछ बड आलसी छल. ओ मालीक पटेल  पानि पर जिन्दा रहैत छल. अपने से पानी लेनाय त ओ सीखबे नहि केने छल. 
आ एक दिन  मालीक मृत्यु भ गेलैक. पानी क अभाव में फूल क गाछ सुखि साखि गेल ,फूल,पात सब टा सुखि बेजान भ गेलैक. एक दिन लकडहारा आबि ओहि गाछ के काटी ल गेल. ई देखि  कांट वाला गाछ डेराय गेल.मुदा ओहि गाछ के केओ नहि काटलक. ओकर ठारी के काटी सब ल जायत छल अपन पेड़ पौधाक रक्षा करवा लेल अपन फसिल  के रक्षा लेल....काँट क गाछ खुश भ गेल  हम केकरो काज ते आबि रहल छी..  एहि कारन कहल गेल छैक जे रूप से किछ नै होयत छैक, जे कर्म होयत अछ ओ फल दैत छैक. अस्तु, मेहनत से जी नै चुरेबाक चाही केकरो....

नवीन कुमार "आशा" (१९८७- )
पिता श्री गंगानाथ झा, माता श्रीमति विनीता झा। गाम- धानेरामपुर, पोस्ट- लोहना रोड, जिला- दरभंगा।

मस्ती करू यौ बौआ मस्ती करू

मस्ती करू यौ बौआ मस्ती करू
मुदा पढ़ाइपर कस्ती करू
आएल छला अहाँक मास्टर
कहि गेला कहि गेला हमरा दू आखर
बौआ जँ तूँ नै पढ़बेँ
तँ हमरा सभकेँ की देखबेँ
तोरामे अछि उम्मीद बसल
की ओ निकलत हम्मर भ्रम
नै तूँ तोरिहेँ हम्मर आस
नै तूँ करिहेँ हमरा निराश
मस्ती करू यौ बौआ मस्ती करू
मुदा पढ़ाइपर कस्ती करू
आब नै तूँ छह नेना
नै देखेबह तोरा ऐना
तूँ जँ अपने नै बौझबऽ
तँ तूँ केना की करबऽ
जखन देखी तोरा पढ़ैत
मनमे उल्लास फेर जागल
जखन देखी खैलै-खेलाइ
मनमे आबए रस मलाइ
मस्ती करू यौ बौआ मस्ती करू
मुदा पढ़ाइपर कस्ती करू
हमर आस तूँ नै तोरिहेँ
अपन माएकेँ नै बिसरिहेँ
माइक सपना पूरा करिहेँ
आ ओकर नाम अमर रखिहेँ
कहै छलौ तोहर माए
अहाँक बौआ नाम कमाए
देखबै बौआक बापू
अहाँकेँ मनपर नै रहत काबू
जखन बौआ बनत डॉक्टर
फेर होएत ओकरापर गर्व
की बौआ ई निकलत भ्रम
की बौआ तूँ तोरमे आस
तोरासँ अछि जुड़ल हमर साँस
नओ तूँ करिहेँ हमरा निराश
बौआ जौँ तोरा लगलौ अधला
जुनि तूँ करिहेँ तूँ अधला
कहैक मतलब छलौ बौआ
नै तूँ एना कतै टौआ
आइ हमर मन भेल प्रसन्न
किएक तँ तूँ भेलेहेँ पास
माइक सपना पूरा हेतौ
आ तोरा डिग्री भेटतौ
ऐसँ छौ सभकेँ संदेश
जुनि अहाँ बिसरू अपन भेष
जुनि बिसरू अपन देश
माता-पिताक करू सम्मान
पहिने देखू हुनकर मान
मस्ती करू यौ बौआ मस्ती करू
मुदा पढ़ाइपर कस्ती करू
ऐ रचनापर अपन मंतव्य ggajendra@videha.com  पर पठाउ।


 बच्चा लोकनि द्वारा स्मरणीय श्लोक
.प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त्त (सूर्योदयक एक घंटा पहिने) सर्वप्रथम अपन दुनू हाथ देखबाक चाही, ई श्लोक बजबाक चाही।
कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥
करक आगाँ लक्ष्मी बसैत छथि, करक मध्यमे सरस्वती, करक मूलमे ब्रह्मा स्थित छथि। भोरमे ताहि द्वारे करक दर्शन करबाक थीक।
२.संध्या काल दीप लेसबाक काल-
दीपमूले स्थितो ब्रह्मा दीपमध्ये जनार्दनः।
दीपाग्रे शङ्करः प्रोक्त्तः सन्ध्याज्योतिर्नमोऽस्तुते॥
दीपक मूल भागमे ब्रह्मा, दीपक मध्यभागमे जनार्दन (विष्णु) आऽ दीपक अग्र भागमे शङ्कर स्थित छथि। हे संध्याज्योति! अहाँकेँ नमस्कार।
३.सुतबाक काल-
रामं स्कन्दं हनूमन्तं वैनतेयं वृकोदरम्।
शयने यः स्मरेन्नित्यं दुःस्वप्नस्तस्य नश्यति॥
जे सभ दिन सुतबासँ पहिने राम, कुमारस्वामी, हनूमान्, गरुड़ आऽ भीमक स्मरण करैत छथि, हुनकर दुःस्वप्न नष्ट भऽ जाइत छन्हि।
४. नहेबाक समय-
गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति।
नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरू॥
हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिन्धु आऽ कावेरी  धार। एहि जलमे अपन सान्निध्य दिअ।
५.उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्।
वर्षं तत् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः॥
समुद्रक उत्तरमे आऽ हिमालयक दक्षिणमे भारत अछि आऽ ओतुका सन्तति भारती कहबैत छथि।
६.अहल्या द्रौपदी सीता तारा मण्डोदरी तथा।
पञ्चकं ना स्मरेन्नित्यं महापातकनाशकम्॥
जे सभ दिन अहल्या, द्रौपदी, सीता, तारा आऽ मण्दोदरी, एहि पाँच साध्वी-स्त्रीक स्मरण करैत छथि, हुनकर सभ पाप नष्ट भऽ जाइत छन्हि।
७.अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषणः।
कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरञ्जीविनः॥
अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनूमान्, विभीषण, कृपाचार्य आऽ परशुराम- ई सात टा चिरञ्जीवी कहबैत छथि।
८.साते भवतु सुप्रीता देवी शिखर वासिनी
उग्रेन तपसा लब्धो यया पशुपतिः पतिः।
सिद्धिः साध्ये सतामस्तु प्रसादान्तस्य धूर्जटेः
जाह्नवीफेनलेखेव यन्यूधि शशिनः कला॥
९. बालोऽहं जगदानन्द न मे बाला सरस्वती।
अपूर्णे पंचमे वर्षे वर्णयामि जगत्त्रयम् ॥
१०. दूर्वाक्षत मंत्र(शुक्ल यजुर्वेद अध्याय २२, मंत्र २२)
आ ब्रह्मन्नित्यस्य प्रजापतिर्ॠषिः। लिंभोक्त्ता देवताः। स्वराडुत्कृतिश्छन्दः। षड्जः स्वरः॥
आ ब्रह्म॑न् ब्राह्म॒णो ब्र॑ह्मवर्च॒सी जा॑यता॒मा रा॒ष्ट्रे रा॑ज॒न्यः शुरे॑ऽइषव्यो॒ऽतिव्या॒धी म॑हार॒थो जा॑यतां॒ दोग्ध्रीं धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः सप्तिः॒ पुर॑न्धि॒र्योवा॑ जि॒ष्णू र॑थे॒ष्ठाः स॒भेयो॒ युवास्य यज॑मानस्य वी॒रो जा॒यतां निका॒मे-नि॑कामे नः प॒र्जन्यों वर्षतु॒ फल॑वत्यो न॒ऽओष॑धयः पच्यन्तां योगेक्ष॒मो नः॑ कल्पताम्॥२२॥
मन्त्रार्थाः सिद्धयः सन्तु पूर्णाः सन्तु मनोरथाः। शत्रूणां बुद्धिनाशोऽस्तु मित्राणामुदयस्तव।
ॐ दीर्घायुर्भव। ॐ सौभाग्यवती भव।
हे भगवान्। अपन देशमे सुयोग्य आसर्वज्ञ विद्यार्थी उत्पन्न होथि, शुत्रुकेँ नाश कएनिहार सैनिक उत्पन्न होथि। अपन देशक गाय खूब दूध दय बाली, बरद भार वहन करएमे सक्षम होथि आघोड़ा त्वरित रूपेँ दौगय बला होए। स्त्रीगण नगरक नेतृत्व करबामे सक्षम होथि आयुवक सभामे ओजपूर्ण भाषण देबयबला आनेतृत्व देबामे सक्षम होथि। अपन देशमे जखन आवश्यक होय वर्षा होए आऔषधिक-बूटी सर्वदा परिपक्व होइत रहए। एवं क्रमे सभ तरहेँ हमरा सभक कल्याण होए। शत्रुक बुद्धिक नाश होए आमित्रक उदय होए॥
मनुष्यकें कोन वस्तुक इच्छा करबाक चाही तकर वर्णन एहि मंत्रमे कएल गेल अछि।
एहिमे वाचकलुप्तोपमालड़्कार अछि।
अन्वय-
ब्रह्म॑न् - विद्या आदि गुणसँ परिपूर्ण ब्रह्म
रा॒ष्ट्रे - देशमे
ब्र॑ह्मवर्च॒सी-ब्रह्म विद्याक तेजसँ युक्त्त
आ जा॑यतां॒- उत्पन्न होए
रा॑ज॒न्यः-राजा
शुरे॑ऽबिना डर बला
इषव्यो॒- बाण चलेबामे निपुण
ऽतिव्या॒धी-शत्रुकेँ तारण दय बला
म॑हार॒थो-पैघ रथ बला वीर
दोग्ध्रीं-कामना(दूध पूर्ण करए बाली)
धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः धे॒नु-गौ वा वाणी र्वोढा॑न॒ड्वा- पैघ बरद ना॒शुः-आशुः-त्वरित
सप्तिः॒-घोड़ा
पुर॑न्धि॒र्योवा॑- पुर॑न्धि॒- व्यवहारकेँ धारण करए बाली र्योवा॑-स्त्री
जि॒ष्णू-शत्रुकेँ जीतए बला
र॑थे॒ष्ठाः-रथ पर स्थिर
स॒भेयो॒-उत्तम सभामे
युवास्य-युवा जेहन
यज॑मानस्य-राजाक राज्यमे
वी॒रो-शत्रुकेँ पराजित करएबला
निका॒मे-नि॑कामे-निश्चययुक्त्त कार्यमे
नः-हमर सभक
प॒र्जन्यों-मेघ
वर्षतु॒-वर्षा होए
फल॑वत्यो-उत्तम फल बला
ओष॑धयः-औषधिः
पच्यन्तां- पाकए
योगेक्ष॒मो-अलभ्य लभ्य करेबाक हेतु कएल गेल योगक रक्षा
नः॑-हमरा सभक हेतु
कल्पताम्-समर्थ होए
ग्रिफिथक अनुवाद- हे ब्रह्मण, हमर राज्यमे ब्राह्मण नीक धार्मिक विद्या बला, राजन्य-वीर,तीरंदाज, दूध दए बाली गाय, दौगय बला जन्तु, उद्यमी नारी होथि। पार्जन्य आवश्यकता पड़ला पर वर्षा देथि, फल देय बला गाछ पाकए, हम सभ संपत्ति अर्जित/संरक्षित करी।

8.VIDEHA FOR NON RESIDENTS

Original Poem in Maithili by Kalikant Jha "Buch" Translated into English by Jyoti Jha Chaudhary


Kalikant Jha "Buch" 1934-2009, Birth place- village Karian, District- Samastipur (Karian is birth place of famous Indian Nyaiyyayik philosopher Udayanacharya), Father Late Pt. Rajkishor Jha was first headmaster of village middle school. Mother Late Kala Devi was housewife. After completing Intermediate education started job block office of Govt. of Bihar.published in Mithila Mihir, Mati-pani, Bhakha, and Maithili Akademi magazine.
Jyoti Jha Chaudhary, Date of Birth: December 30 1978,Place of Birth- Belhvar (Madhubani District), Education: Swami Vivekananda Middle School, Tisco Sakchi Girls High School, Mrs KMPM Inter College, IGNOU, ICWAI (COST ACCOUNTANCY); Residence- LONDON, UK; Father- Sh. Shubhankar Jha, Jamshedpur; Mother- Smt. Sudha Jha- Shivipatti. Jyoti received editor's choice award from www.poetry.comand her poems were featured in front page of www.poetrysoup.com for some period.She learnt Mithila Painting under Ms. Shveta Jha, Basera Institute, Jamshedpur and Fine Arts from Toolika, Sakchi, Jamshedpur (India). Her Mithila Paintings have been displayed by Ealing Art Group at Ealing Broadway, London.
Separation In The Season Of Spring

The old orchid tree laughed with new leaves
The aged Mahua is also filled with nectars

The magic of the Malay wind worked
The barren mango trees are also in florescence
The ages old pipal(plaksa) tree of the square
Is filled with the new leaves all over
The melody of cuckoo is pampering the nature
The aged Mahua is also filled with nectars

The Jasmine is hugging the Oleander (kanail)
The pot of juices underlying in the wood-apple
Arrangin  the newly organised look
Abuses the cold wind from west
The bride of banana is removing veil of hers
The aged Mahua is also filled with nectars

Blossoms have taken place on each spear
The Malati (mogra) has been making mind
 The Jasmine is filled with fragrance
The  Champa (Plumeria) went to in-laws’ place being angry
Even the widow simmer is filled with ruby flowers
The aged Mahua is also filled with nectars

What much can I say about my well-being
 I dreamed about my man in foreign
An overflowing chalice for a long-lasting thrust
The starvation had been washed up
The parched edge was soaked with the flow of extracts
The aged Mahua is also filled with nectars


I was awake in rest of the night
It wasn’t his fault, I was the unfortunate
The ocean of relish was overflowing
But I was dying for a drop
The moon is accompanying the sky, the earth remains dark
The aged Mahua is also filled with nectars
DR. SHEFALIKA VERMA

DISCRIMINATION  AGAINST WOMEN

Right cannot be enjoyed without knowledge of their existence. Justice cannot be obtained without awarness of the remedies available to correct injustice. Human rights are increasingly vulnerable. Our society is scared by an increasing number of Humun Rights violations.

It is an old saying that the hands of a women are behind every man's success. Even our religious and Scared book Durga-Saptashati  has recognized that every women possesses Power, Energy & Respect like Goddess Durga  and she is a part and parcel of the Goddess.

The concept of Ardh-Narishwar and it's worship are indicative of the basic fact that man and woman play equal parts in creation 'या देवी सर्व भूतेशु मात्रीरुपें संस्थिता ,' या देवी सर्व भूतेशु श्रध्हा रुपें संस्थिता'' या देवी सर्व भूतेशु शक्ति रुपें संस्थिता" etc. Mantras support the said concept. The aim of the humanity should be to give a practical shape to the concept and make the same a part  of our thought  and conduct . Then alone the development of Woman Folk and entire Nation is possible.

In conformity with the aforesaid thought Article-7 of the 1993 United Nations Convention on the elimination of all forms of discrimination against women calls upon all Government to ensure women's full participation in the political and public life of their countries, but our experience is that women are subjected to various types of discrimination including torture and harassment because of their civil, political, social, cultural or economic activities.

In principle Human Rights of Women are an integral part of Univerasal Declaration of Human Rights. The full and equal participation of women in Political, Civil, Economic, Social and Cultural life at the National, Regional and International level are the basic objectives of the International Community. Eradication of all forms of discrimination on grounds of sex is one of the main objectives, but discrimination and violence experienced are reported from every nook and corner of the world. Journalists in Morocco, Lawyers in the Phillipines, Judges in Columbia, Political Reforms in Burma, Opposition Leaders in Mozambique, Environmentalists in Kenya, Feminists in Peru, Academics in China have suffered the pangs of misries because of their participation in the political and public life of their countries.

Recently, efforts have been made worldwide to determine the condition of women. It has been found that majority of world's poor are women and the number of women living in rural poverty has increased by 50% since 1955. The number of illiterate women rose to 597 million in 1985 from 543 million in 1970. This shows that majority of world's illiterate are women. The statistics also showed that women earned 30% to 40% lesser than for doing equal work in violation of the human right of equal pay for equal work. They work for 13 hours a week more than men and in Asia and Africa they are mostly unpaid. They hold between 10% to 20% managerial and administrative jobs only. They make up less than 5% of the World's Heads of States.

It is thus evident that the discrimination against women is all pervasive throughout the world, though Equality of Rights for women is the basic feature of the United States.  

 In our Country the situation is more alarming. The marriage which is the basic need of human society for procreation has degenerated due to the virus of dowry system. Marriage can be performed by the equal participation of men & women, but dowry system has become so rampant that only women are victimized. We all know that marriage is a social system for systematic existence of our society, but it is not known why only women should be victimized, tortured, burnt or killed. Hardly any case has been reported in which any man has suffered due to the evils of dowry. Is not it a vital and fatal discrimination?

Women do jobs mostly for the financial support of their family, but when any trouble arises with women, men very often harass them instead of extending help. When the joint family breaks it is only the Women, who are made responsible for it. When a person dies in rural area the responsibility for the said death is thrown on women with the allegation of practising witchcraft and they are severely tortured. 

There are countless instances of discrimination of severe consequences. Will the society ever bring women on equal footing with men? 

                                                              Translatd  by writer herself

VIDEHA MAITHILI SAMSKRIT TUTOR
                                                                                     बिपिन कुमार झा

लैटेक्स : परिचयः उपादेयता च
 (गताङ्कतः अग्रे)

बिपिन कुमार झा
वरिष्ठ अनुसंधाता
भारतीयप्रौद्योगिकीसंस्थानम्
मुम्बई

तदनु txnic center इत्यस्य डेस्कटाप मध्ये संक्षिप्तचित्रिका सह संस्थापनं जातम्। अत, डेस्कटापस्थितस्य टेक्सनिक केन्द्रस्य उपरि नोदनद्वयं करोतु तदनु  लांच करोत्य्। सम्यक्, अत्र डेस्कटाप अस्ति। अहं अस्य प्रदर्शनं करवाणि। अहं अधुना अस्य पिधानं करोमि। सम्यक्। अस्तु यत् करणीयं अस्ति तत् अस्ति एतस्य् कन्फीगरकरणं । अत्र एतत् पृच्छति कुत्र टेक्सविभाजनंस्थितः अस्ति इति। तत् वयं जानीमः कुत्र अस्ति इति।अहं अत्र मार्गं ददामि c colon, program files, miktex 2.7, miktex, bin. नूनं भवान् एतस्य कृते अन्वेषणं कृत्वा मार्गप्रदानं कर्तुं शक्नोति।अवगतम्, अहम् अग्रिमे पृष्टे अस्मि, एतत् पोस्टलिपिदर्शकः अस्ति, वयं एतत् स्वीकुर्मः। अधुना वयं किंचिदपि तत्र न दद्मः। अत्र यत् अहं करिष्यामि तत् अस्ति यत्र अडोब रीडर स्थितम् असि तत्र डायरेक्टरी इत्यस्य ब्राउज तथा संस्थापनं। अवगतम्। एतत्  कार्यक्रम संचिकायाम् अस्ति अडोब रीडर, रीडर 9.0, रीडर। अहम अत्र नोदनं करोमि।अस्तु एतत चयनीकृतम्। अधुना अग्रिमः कुर्मः। पूर्णम्। शोभनम्। अधुना टेक्सनिक केन्द्रं सज्जितम्। अधुना यत् करणीयम् अस्ति तत् अस्ति अहं समानं करवानि यतोहि भवान् सम्यक् रूपेण पश्यतु> एतत् अत्र आगतम्। अहं किंचित् विस्तारं करोमि। सम्प्रति एतत् उपयोगार्थं सज्जितम् अस्ति। अधुना इतः प्रत्यावर्तनं भवेत्। अस्तु एतत् एका सूचना दास्यति पिधानं करोतु इति| एका सज्जासूची उद्घाटिता भविष्यति तथ लेटेक्स विभाजनस्थापनार्थं कथयिष्यति अनेन सह मिटेक्स इत्यस्यार्थमनुरोधमपि करिष्यति। अस्तु वयं तत् पूर्वमेव स्वीकृतवन्तः । वयं next इति अत्र नोदनं कृतवन्तः । एतत् प्रक्ष्यति यत् कुत्र मिटेक्स इत्यस्य संचिका संरक्षिता अस्ति इति। वयं तत्रापि गमनं कुर्मः। मदीयसूच्याम् एतत् अत्र अस्ति। अहम् हस्तप्रक्रियया एतत् पूरणं करोमि। PS इति संचिकायां किंचिदपि पुटीकरणं न अपेक्षते तथा जालान्वेषणं करणीयं अपि च अक्रोबाइट PDF रीडर  अन्वेषणं कृतवान्। अधुना टेक्सनिककेन्द्रं उपयोगार्थं सज्जितमस्ति|  यदि भवता पूर्वं न कृतवान् अस्ति तु कृपया मौखक शिक्षणं प्रति गच्छतु एतत् maudgalya.org  इत्यत्र विद्यते। एतदेवपूर्णाहूतिरूपमस्ति। अन्यत् सर्वं अनुमीयते यत् भवता दृष्टं स्यात् इति।

अस्तु, टेक्सनिक केन्द्रं प्रति गच्छामः एवं संचिकासूचीनोदनं करवामः। तर्हि किं करणीयम्? यदि भवान नूतनसंचिकां वाछति तु new इति नोदनं करोतु लेखनं तथा रक्षणमपि करोतु। मम पार्श्वे पूर्वतः एव संचिका अस्ति hello.txt’ load करोतु। अस्तु एतत् तदेव यत् करणीयमस्ति. सम्यक्? तत्र गच्छतु file> open, मम पार्श्वे लेटेक्स संचिका मध्ये एतत् अस्ति। अस्तु उद्घाटयामः।मम पार्श्वे एतत् इण्टेक्स संचिका मध्ये अस्तिhello.tex इति। सम्यक्, अत्र चलामः। टेक्सनिक केन्द्रस्य सर्वातिशयं साहाय्यम् अत्र दृश्यते। अन्य स्रोतरूपे  अस्तिtexniccenter.org एतत् पूर्वमेव दृष्टम्। अस्तु, help इत्यत्र चलामः। contents इत्यत्र नोदनं भवेत्। टेक्सनिककेन्द्रतः तथा लेटेक्स इत्यतः सहाय्यं मिलितुं शक्नोति। यत् मया इष्टम् अस्ति- वयं तत्र चलामः। help  contents इति अत्र सन्ति। अस्तु अत्र द्रष्टुं शक्यते यत् help इति कार्यद्वयस्य कृते उपलब्धम् अस्ति। नामितरूपे टेक्सनिककेन्द्रस्य कृते अपरम् लेटेक्स ईग्रन्थकृते। यदि भवान अत्र नोदनं करोति, बहूनि वस्तूनि द्रक्ष्यति। भवान एतदपि नोदनं करोतु, तत्राप् बहून् वस्तूनि मिलिष्यति। उदाहरणतया  लेटेक्स गणितं तथा ग्राफिक्स इति। गणितम्- इत्यत्र बहनि बस्तूनि प्राप्तुं शक्नोति फ्रिक्सन, मट्रिक्स प्रभृतयः अस्तु पिधानं कुर्मः। आधुनिकतम लेटेक्स विविध उपयोगिवस्तूनि ददाति यथा अलामेण्ट्स चित्राणि इति एतानि। अस्तु एतदपि पिधानं कुर्मः सम्यक् अधुना अत्र आगच्छामि। टेक्सनिककेन्द्रस्थः सहायकः सर्वप्रथमं लिपिसन्दर्भे साहाय्यं करोति। पश्यतु एवं टेक्सनिककेन्द्रस्यानुभवं करोतु।टेक्सनिककेन्द्रस्य समायोजनं कथं करणीयमिति कथयति एतत्। यदा कदा मेन्वल तथा वास्तविक प्रक्रिया इत्यनयोर्मध्ये भेदे सति अन्तर्जालम् अनुगम्य उत्तरं प्राप्नोतु। वास्तविकतया एषा मुक्त स्रोत साफ्टवेयर बहुसम्यक् प्रक्रिया अस्ति- कमपि पृच्छतु स उत्तरं दास्यति। अपरम् आसीत् लेटेक्स सन्दर्भित साहाय्यम्। केन प्रकारेण रिपोर्ट संरचनीयम् कथम् अनुसूची निर्मेयम् प्रभृतीनां उत्तरम् इतः प्राप्तुं शक्यते। नूनमेव अन्तर्जालान्वेषणम् दक्षविकल्परूपे अस्ति। अस्तु अत्र आगत्य अख्शरस्य आकारवर्द्धनं कुर्मः। एतत् कृतम्। एतत् अत्र अस्ति tools, options text format. यदि अक्षराकरः 12  स्यात् तु सम्यक् भवता दृषटम् यत् आकारः वर्धितः। मया एतस्याकारः वर्धितः। भवान् स्वेच्छया एडुटर इत्यतः पंत्कि संख्यायोजनं कर्तुं शक्नोति। अस्तु अत्र आगच्छावः tools, options, editor , show line numbers प्रभृति। अस्तु भवान् पंक्ति संख्या द्रष्टुं शक्नोति। अधुना स्वकीय संचिका सज्जार्थं चलामः। विकल्पं चिनोतु latex to pdf इति अस्तु latex to pdf करवामः। समकालिअकरूपे एव शिफट तथा f5  न्दनं करोतु। अहम् एतत् करोमि। यदि अहम् shift, crtl तथा f5 समकालिकरूपे एव नोदनम् करोमि तु किं भवति? एतत् सज्जां करोति तथा pdf  उद्घाटनं करोति। एतत् online  भवति। अधुना तदेव कुमः shift, crtl तथा f5 इति। भवान् सजां द्रष्टुं शक्नोति। अनेन pdf रीडर् उद्घाटितम्। अस्तु अत्र आगन्तव्यम्। अहम् दीर्घतरं कर्तुम् इच्छामि। भवान् on line द्रष्टुं शक्नोति। भवान् परिवर्द्धनं कर्तुं शक्नोति। अस्तु hello.txt  तथा hello.pdf पिधानं करोमि। भव्ष्ये अपि एवं कर्तुं शक्यते।
अधुना वयं अडोब रीडर सन्दर्भितं व्याख्यानं कुर्मः। एतस्य कृते तत्र मौखिकशिक्षणस्य कृते report लेखनक्रमे उपयुक्तस्य report.tex इत्यस्य स्थापनं करवानि। एतत् maudgalya.org इत्यत्र वर्तते। अस्तु अत्र एतत् स्वीकरवाणि येन सम्यक् रीत्या दर्शनं स्यात्। तावत् प्रथमं किं करणीयम्? तावत् ctrl, shift f5 नोदनद्वारा संचयनं करणीयम्। एतस्य संचयनं भवति । एकपृष्ठात्मकं report इत्यागतम्। अस्तु एतत् अत्र आनयामि। सम्यक्, किंचित् परिवर्धनं करोमि। सम्यक्.. किमभवत्?
वयं एतत् कृतवन्तः।अधुना यत् करणीयमस्ति तत् अस्ति संचिकातः रिपोर्ट मध्ये एतस्य वर्गपरिवर्तनम्। अत्र लेखः अस्ति।एतस्य लोपं करोमि तथा एतस्य परिवर्तनं रिपोर्टरूपे करोमि। रक्षनं करोतु तथा सचयं करोतु ctrl, shift f5. सम्यक् अधुना पृष्ठद्वयमागतम्। अनन्तरं एतत् स्वीकुर्मः। परिवर्द्धनं करोमि। अपरं पृष्ठं प्रति गच्छतु। शोभनम् एतत् द्वितीये पृष्ठे अस्तियथा दृष्टम् एतत् पृष्ठद्वयं यावत् अस्ति अतो अपरे पृष्ठे एतत् पश्यामि।अस्तु एकवारं पुनः संचयं करोमि। अत्र आगच्छतु।अस्तु एतस्य कार्यं नास्ति। पिधानं करोतु। report.pdf इत्यत्र आगच्छतु। यदहं कथयितुं इच्छामि तत् द्वितीये पृष्ठे अस्ति। भवान अत्र द्वितीये पृष्ठे एतत् द्रष्टुं शक्नोति वयं द्वितीयं पृष्ठं पश्यामः। अत्र आगच्छामि। पुनर्संचयं करोमि। ctrl, shift f5 भवान् द्रष्टुं शक्नोति यत् एतत् प्रथमे पृष्ठे आगच्छति इति। एतस्य पुनरुधाटनं भवति किन्तु प्रथमं पृष्ठम् एव दर्शयति। एतस्मात् कारणात् एव मया उक्तं प्रथमं पृष्ठमेव उद्घाटयति इति। वयं द्वितीयं पृष्ठमेव पश्यामः कितु संचयानन्तरं प्रथमं प्रति गच्छति। एषा समस्या अस्ति। अडोब रीडर तत् पृष्ठं न स्मरति यस्य अधुना दर्शनं भवति। एतत् बृहत् अभिलेखस्य कृते महती समस्या भविष्यति। यदि भवान् अडोब रीडर इत्यस्य उपयोगं करोति तु संचयानन्तरं प्रथमं पृष्ठमेव उद्घाटयिष्यति।बृहदभिलेखस्य कृते महती समस्या एषा। सुमात्रा एतस्य निराकरणं करोति। सुमात्रा स्वमेव pdf इत्यस्य रिफ्रेश करोति तथा पूर्वदृष्टपृष्ठस्य स्मरणं करोति। सुमात्रा मुक्तमूल्यरहितश्च साफ्टवेयर अस्ति। अस्तु एतस्य रीडर इत्यस्य अन्वेषणस्य कृते भवान् अत्र अस्ति। अहं संक्षेपेण अत्र दर्शयामि। एतत् अत्र अस्ति। एतस्य अवतारणं करोतु । एतत् स्थापनार्थं विकल्पं दर्शयति। प्रायशः 1.5 मेगाबाइट स्थानं वाछति एतत्। मया पूर्वम् अवतारितम्। पिधानं करोमि एतत्। अत्र आगच्छतु। अपरं पृष्ठं गच्छतु। बारद्वयं नोदनं कृत्वा तथा पूर्वनियत् उत्तरं दत्वा स्थापनं कुर्मः। तत् अहं अधुना करोमि। अपरं पृष्ठं गच्छामि। अस्तु मदीये संगणके सुमात्रा डाट पीडीएफ इत्यस्य स्थापनं जातम्।
प्रथमं तावत् टेक्सनिककेन्द्रस्य आवस्यकता अस्ति यत् सुमात्रायाः उपयोगं करिष्यति। build इत्यत्र गच्छतु तथा संचिकानियतनं करोतु। तदनु अन्यत् कुर्मः। अधुना viewer इत्यस्यावश्यकता। एतत् कुत्र? अन्वेषणं कुर्मः वस्तुतः एतस्य आवस्यकता अपि नास्ति। पिधानं करोमि। एतत् टेक्सनिक केन्द्रमस्ति। अस्तु क्रमेण एवं करोतु - build, define output profile, go to viewer. एतत् अडोब इत्यस्य सन्दर्भे अस्ति। परिवर्तनार्थं कथयामि। सम्यक्, इतः चलतु। कार्यक्रम संचिकायां सुमात्रायाः अन्वेषणं कुर्मः। एषा अत्र। सम्यक् वयं कृतवन्तः शोभनम्। एतत् सुमात्रायाः संचयार्थ प्रचलति। एतत् किं कृतम्। अन्वेषणं प्राप्तिश्च अभवत्। सुमात्रा उपयोगार्थं सज्जिता अस्ति। अडोब रीडर इति पिधानं करोमि। समकालिकरूपे ctrl and f7 नोदनेन सह report.tex इत्यस्य संचयं कुर्मः। तदेव कुर्मः न तु पूर्वं यत्कृतम्। crtl f7नोदनं कुर्मः। पश्यामि यत् एतत् संचितम्। अधुना किं करणीयम्। report.pdf इत्यस्य अन्वेषणं कुर्मः। सुमात्रया सह उद्घाटनं करोतु। लेटेक्स इत्यत्र गच्छतु। report.pdf  अत्र अस्ति। किं करणीयमस्ति? सुमात्रया सह उद्घाटनम् इति।
एषा सुमात्रा। एतां स्वीकरोमि। अपरं पृष्ठं प्रति गच्छतु। एतत् प्रथमं पृष्ठम्। द्वितीये पृष्ठे इतः गन्तुं शक्नोमि। यत् करणीयमस्ति तदस्ति द्वितीयं पृष्ठं प्रति गमनम्। अधुना एकां पक्तिं योजयामि। add line तदनु रक्षणं crtl f7. भवान् report.pdf द्रष्टुं शक्नोति। अधुनापि  पंक्तिसंख्या समाना अस्ति। वस्तुतया यत् मया कृतम् तत्  पूर्वतः एव अस्ति। सहजताकृते न्यूनं करोमि यतोहि समकाले एव उभौ दृष्टिपथि आगच्छेत्। एतस्य लोपं, रक्षणं संचयं च कुर्मः। उद्घाटयतु। भवान् द्रक्षति यत् एतत् गतम्।किं करणीयं तत्र गमनं इति।अधुना कथयामि ‘chapter- new” इति। पिधानं, रक्षणं च करोमि ctrl f7 . अस्तु अत्र आगच्छतु। तृतीयं पृष्ठं प्रति चलतु। यदि एतस्य् पुनर्संचयं स्यात्। अत्र आगच्छतु। एतत् परिवर्तितं नाभवत्।एतदेव वैशिष्ट्यम् अस्ति सुमात्रायाः। तत्र चलतु।pdf  स्वयमेव परिवर्तितं भवति। किंचित् न करणीयं अपेक्षते।प्रमुखता अस्ति यत् एषा पूर्वं पृष्ठं दर्शयति इति। परिषिष्टयोजनं करोतु ctrl f7 द्वारा संचयं करोतु। पृष्ठत्रयमस्ति। एतस्य पुनर्संचयं करोतु। तृतीये पृष्ठे एतत् निरन्तरं भविष्यति।
अधुना किम्? वयं मिटेक्स इत्यस्य प्रारंभिक संस्करणं स्थापितम्। केवलं प्रारंभिक संस्करणं एव उपलब्धं अस्ति लेटेक्स इत्यस्य। नूनमेव बहुविधं कार्यं कर्तुं क्षमं एतत्। विविध स्यूतं तु न उपलब्धं किन्तु काश्चित् सूचयः अत्र वर्तते। बीमर प्रभृति अपि उपयोगिनं सन्ति। शेषस्यूतानां उपयोगं कथं स्यात् इति अग्रिमे स्लाइड इत्यत्र वक्ष्यामि। यथा एव प्रारंभिक संस्करणं स्थापितं  अद्यतनं करोतु। टास्कबार् इत्यत्र् स्टार्ट इति नोदनं करोतु एतत् विण्डोज स्क्रीन इतस्य बामकोणे अधः विद्यते। programs तदनु miktex 2.7 इत्यत्र गच्छतु।  update इत्यत्र नोदनं करोतु। mirror इति चिनोतु अनेन सह  proxt प्रभृति यथा अपेक्षते। तर्हि.  Texnic center इत्यस्य यथानिर्दिष्टं उपयोगेन सह अग्रे चलतु।  यदा कापि संचिका विस्मर्यते स्थापनं करोतु। भवान् एतत् internet इत्यतः स्थापनं कर्तुं शक्नोति अथवा CD माध्यमेन कर्तुं शक्नोति। प्रथमतया स्वकीय हार्ड डिस्कमध्ये समग्रं रक्षणं करोतु तदनु एव स्थापनं करोतु। काचित् समस्या तु भविष्यति। एतत् 1GB इत्यस्य स्थानं अपेक्षते
यदि काचित् शंका अस्ति निःश्शंकभावेन उपयोक्तासमुदायेन सह वार्तां करोतु। उदाहरणरूपे  सम्पर्कं साधयतु TUG India. वयं fosee.in द्वारा अपि साहाय्यं कुर्मः।वयं भविष्ये  लेटेक्सकृते अधिकं मौखिकशिक्षणंदास्यामः। कृपया स्वकीयप्रतिक्रियां प्रेषयतु। एषः अस्ति बिपिन कुमार झा ( http://sites.google.com/site/bipinsnjha/ ) भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मुम्बईतः। धन्यवादाः
                                                         
                                                                       शुभमस्तु 
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पूर्वपीठिका : इंटरनेटपर मैथिलीक प्रारम्भ हम कएने रही 2000 ई. मे अपन भेल एक्सीडेंट केर बाद, याहू जियोसिटीजपर 2000-2001 मे ढेर रास साइट मैथिलीमे बनेलहुँ, मुदा ओ सभ फ्री साइट छल से किछु दिनमे अपने डिलीट भऽ जाइत छल। ५ जुलाई २००४ केँ बनाओल “भालसरिक गाछ” जे http://www.videha.com/ पर एखनो उपलब्ध अछि, मैथिलीक इंटरनेटपर प्रथम उपस्थितिक रूपमे अखनो विद्यमान अछि। फेर आएल “विदेह” प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका http://www.videha.co.in/पर। “विदेह” देश-विदेशक मैथिलीभाषीक बीच विभिन्न कारणसँ लोकप्रिय भेल। “विदेह” मैथिलक लेल मैथिली साहित्यक नवीन आन्दोलनक प्रारम्भ कएने अछि। प्रिंट फॉर्ममे, ऑडियो-विजुअल आ सूचनाक सभटा नवीनतम तकनीक द्वारा साहित्यक आदान-प्रदानक लेखकसँ पाठक धरि करबामे हमरा सभ जुटल छी। नीक साहित्यकेँ सेहो सभ फॉरमपर प्रचार चाही, लोकसँ आ माटिसँ स्नेह चाही। “विदेह” एहि कुप्रचारकेँ तोड़ि देलक, जे मैथिलीमे लेखक आ पाठक एके छथि। कथा, महाकाव्य,नाटक, एकाङ्की आ उपन्यासक संग, कला-चित्रकला, संगीत, पाबनि-तिहार, मिथिलाक-तीर्थ,मिथिला-रत्न, मिथिलाक-खोज आ सामाजिक-आर्थिक-राजनैतिक समस्यापर सारगर्भित मनन। “विदेह” मे संस्कृत आ इंग्लिश कॉलम सेहो देल गेल, कारण ई ई-पत्रिका मैथिलक लेल अछि, मैथिली शिक्षाक प्रारम्भ कएल गेल संस्कृत शिक्षाक संग। रचना लेखन आ शोध-प्रबंधक संग पञ्जी आ मैथिली-इंग्लिश कोषक डेटाबेस देखिते-देखिते ठाढ़ भए गेल। इंटरनेट पर ई-प्रकाशित करबाक उद्देश्य छल एकटा एहन फॉरम केर स्थापना जाहिमे लेखक आ पाठकक बीच एकटा एहन माध्यम होए जे कतहुसँ चौबीसो घंटा आ सातो दिन उपलब्ध होअए। जाहिमे प्रकाशनक नियमितता होअए आ जाहिसँ वितरण केर समस्या आ भौगोलिक दूरीक अंत भऽ जाय। फेर सूचना-प्रौद्योगिकीक क्षेत्रमे क्रांतिक फलस्वरूप एकटा नव पाठक आ लेखक वर्गक हेतु, पुरान पाठक आ लेखकक संग, फॉरम प्रदान कएनाइ सेहो एकर उद्देश्य छ्ल। एहि हेतु दू टा काज भेल। नव अंकक संग पुरान अंक सेहो देल जा रहल अछि। विदेहक सभटा पुरान अंक pdf स्वरूपमे देवनागरी, मिथिलाक्षर आ ब्रेल, तीनू लिपिमे, डाउनलोड लेल उपलब्ध अछि आ जतए इंटरनेटक स्पीड कम छैक वा इंटरनेट महग छैक ओतहु ग्राहक बड्ड कम समयमे ‘विदेह’ केर पुरान अंकक फाइल डाउनलोड कए अपन कंप्युटरमे सुरक्षित राखि सकैत छथि आ अपना सुविधानुसारे एकरा पढ़ि सकैत छथि।
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'विदेह' २३० म अंक १५ जुलाइ २०१७ (वर्ष १० मास ११५ अंक २३०)

ऐ  अंकमे अछि :- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१. आशीष अनचिन्हार-  "कतेक रास बात" इंटरनेटपर मैथिलीक पहिल उपस्थिति नै अछि ...