Thursday, September 30, 2010

'विदेह' ६६ म अंक १५ सितम्बर २०१० (वर्ष ३ मास ३३ अंक ६६)- PART- V


विदेह नूतन अंक मिथिला कला संगीत
१.श्वेता झा चौधरी २.ज्योति सुनीत चौधरी

श्वेता झा चौधरी
गाम सरिसव-पाही, ललित कला आ गृहविज्ञानमे स्नातक। मिथिला चित्रकलामे सर्टिफिकेट कोर्स।
कला प्रदर्शिनी: एक्स.एल.आर.आइ., जमशेदपुरक सांस्कृतिक कार्यक्रम, ग्राम-श्री मेला जमशेदपुर, कला मन्दिर जमशेदपुर ( एक्जीवीशन आ वर्कशॉप)।
कला सम्बन्धी कार्य: एन.आइ.टी. जमशेदपुरमे कला प्रतियोगितामे निर्णायकक रूपमे सहभागिता, २००२-०७ धरि बसेरा, जमशेदपुरमे कला-शिक्षक (मिथिला चित्रकला), वूमेन कॉलेज पुस्तकालय आ हॉटेल बूलेवार्ड लेल वाल-पेंटिंग।
प्रतिष्ठित स्पॉन्सर: कॉरपोरेट कम्युनिकेशन्स, टिस्को; टी.एस.आर.डी.एस, टिस्को; ए.आइ.ए.डी.ए., स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया, जमशेदपुर; विभिन्न व्यक्ति, हॉटेल, संगठन आ व्यक्तिगत कला संग्राहक।
हॉबी: मिथिला चित्रकला, ललित कला, संगीत आ भानस-भात।
 करिया झुम्मरि
मिथिलाक लड़की सभमे करिया-झुम्मरि खेलक खूब चलनि अछि। छोट आ पैघ सभ एहि खेलक आनन्द लैत छथि...

२.

ज्योति सुनीत चौधरी
जन्म तिथि -३० दिसम्बर १९७८; जन्म स्थान -बेल्हवार, मधुबनी ; शिक्षा- स्वामी विवेकानन्द मि‌डिल स्कूल़ टिस्को साकची गर्ल्स हाई स्कूल़, मिसेज के एम पी एम इन्टर कालेज़, इन्दिरा गान्धी ओपन यूनिवर्सिटी, आइ सी डबल्यू ए आइ (कॉस्ट एकाउण्टेन्सी); निवास स्थान- लन्दन, यू.के.; पिता- श्री शुभंकर झा, ज़मशेदपुर; माता- श्रीमती सुधा झा, शिवीपट्टी। ज्योतिकेँwww.poetry.comसँ संपादकक चॉयस अवार्ड (अंग्रेजी पद्यक हेतु) भेटल छन्हि। हुनकर अंग्रेजी पद्य किछु दिन धरि www.poetrysoup.com केर मुख्य पृष्ठ पर सेहो रहल अछि। ज्योति मिथिला चित्रकलामे सेहो पारंगत छथि आ हिनकर मिथिला चित्रकलाक प्रदर्शनी ईलिंग आर्ट ग्रुप केर अंतर्गत ईलिंग ब्रॊडवे, लंडनमे प्रदर्शित कएल गेल अछि। कविता संग्रह अर्चिस्प्रकाशित


गद्य-पद्य भारती
डॉ. मिथिलेश कुमारी मिश्रक दुइ गोट लघुकथा
-लेखिकाक संस्कृत लघुकथा संग्रह लघ्वीसँ मैथिली रूपान्तर:डॉ. योगानन्द झा
          १.वीरभोग्या वसुन्धरा
दुर्भाग्यसँ गृहस्वामी देवदत्तक मृत्यु भऽ गेलनि। लगले हुनक दुनू पुत्र हुनक श्राद्धादिक कर्मक बाद आपसी बाँट-बखरा कऽ लेलनि। ज्येष्ठ रमेश स्वभावसँ किसान छल। ओ अपन काजक व्यवस्था स्वयं संचालित करऽ लागल। मुदा छोट पुत्र सुरेश परम आलसी छल। ओकर खेती-बाड़ी जन-मजूरपर आश्रित रहऽ लगलैक। तेँ ओकर उपजा-बाड़ी अत्यल्प भऽ गेलैक। क्रमशः ओ अत्यन्त दरिद्र होइत चल गेल। एक दिन ओ अपन भाइसँ पुछलक- भाइजी यौ, हमर खेत सभक उपजा-बाड़ी किएक कम होइत चल गेल? हमरासँ कोन त्रुटि भेल अछि? हमहूँ तँ अहींक संगे समयेपर रोपनी-पटौनी आदि करैत अएलहुँ अछि मुदा तैयो हमरा खेतमे पहिने जकाँ उपजा नहि भऽ पाबि रहल अछि। आखिर कोन ढंगक दोष हमरासँ भऽ रहल अछि?
रमेश बाजल- सुरेश! तोँ किछु करऽ नहि चाहैत छेँ। तोहर खेती-बाड़ी जने-मजूरपर टिकल छौक। ई जानिले जे जाधरि तोँ स्वयं अपन खेतमे परिश्रम नहि करबेँ ताधरि पर्याप्त अन्न नहिञे उपजतौ। सनातनसँ ई नीतिवाक्य प्रचलित छैक- वीरभोग्या वसुन्धरा

२. अति सर्वत्र वर्जयेत्
कोनो दुर्घटनामे महेशक अकालमृत्यु भऽ गेलनि। तखन हुनक युवती पत्नी माधुरी आ दुइ गोट छोट-छोट नेना अकस्मात् अनाथ भऽ गेलनि। पर-परिजन सभ हुनका सभकेँ सांत्वना दऽ अपन-अपन काजमे लागि गेल। केशव महेशक बालसंगी छलैक। ओ माधुरीक सहायताक हेतु कृतसंकल्पित भेल। ओ सरकारी कार्यालयमे वरीय लिपिक छल। ओ अपन माइक संग माधुरीयेक पड़ोसमे रहैत छल आ निराश्रिता माधुरीक ध्यान राखैत छल। ओ माधुरीक हेतु बजार जाय खाद्य सामग्री कीनि कऽ अनैत छल आ ओकर आनो आवश्यकताक पूर्तिक हेतु कटिबद्ध रहैत छल। ओकर एहि प्रकारक प्रयासक कारणे माधुरी कहियो कष्टक अनुभव नहि कऽ सकल। केशवक माय सेहो माधुरीक धिया-पुता सभक ताक-छेम कएल करथि। ई सभ देखि कऽ लोकापवाद प्रचलित होमऽ लगलैक- ई सभ कोनो परोपकारक भावनासँ नहि कएल जा रहल अछि। माधुरीक युवावस्था ओ सौन्दर्य एकर मूल कारण अछि। केशव माधुरीपर आकर्षित भऽ गेल अछि आ ओकरासँ प्रेम करऽ लागल अछि। एहि तरहक सन्देहक दृष्टि सर्वत्र व्यापक होइत चल गेल। से सभ देखि केशवक माय बजलीह- बेटा, आइसँ माधुरीक घर जाएब बन्न करू। कहलो गेल अछि- अति सर्वत्र वर्जयेत्। लोक निरंकुश होइत अछि।


 बालानां कृते
                         
. ब्युटी कुमारी- राहुलजी एक  नजरिमे २.अर्चना कुमर  १.आस, २.विद्वान-१ (दादीसँ सुनल कथाक पुनर्लेखन) .डॉ. शेफालिका  वर्मा- स्मृति-शेष

१.
 ब्युटी कुमारी, सहायक  शिक्षिका, संस्कृत मधुराम इंटर स्तरीय विद्यालय, ग्वालपाड़ा, मधेपुरा (बिहार)।



राहुलजी एक  नजरिमे
 
दुनियाँमे प्रतिभाक धनिक लोकक कमी नै अछि तखन सर्वतोमुखी प्रतिभाक धनिक व्यक्ति तँ ओंगुरीपर गिनल जा सकैत अछि । राहुल सांकृत्यायन गिनल-चुनल ओहेन प्रतिभाक धनिक लोकमे छथिन जिनकर जोड़ ने अछि । हिनकर तुलना करै लऽ रुपकक कल्पना करनाय दुस्साध्य लागैत अछि।
        राहुलजी जीवनक सब अंगक सामाजिक विज्ञानक सब शाखाक केँ समृद्ध आ विकसित कऽ लिखने छथि। बौद्ध धर्मावलम्बी केँ तँ दावा अछि कि 20वीं सदी मे भगवान बुद्धक विचारकेँ सबसे बेसी प्रचार- प्रसार करैवाला लोक मे राहुलजी अग्रगण्य छथि। औपनिषदिक परम्परा सँ आधुनिक स्वरुपक  कल्पना करैवाला ज्ञानक खोज मे तलवारक धार पर चलैवाला मनीषि राहुल सांकृत्यायन छथि। दर्षन साहित्य राजनीति आ इतिहासक पण्डितो स्वीकार करैत छथि कि राहुलजी श्रेष्ठ पण्डित छलाह।
        राहुलजी ओं महापण्डित रहथि जे अतीतक प्रमाणिक आ प्रसांगिक अनुभव सऽ लाभ लऽ नवज्ञानक मार्ग प्रशस्त कएलथि। राहुलजी कर्मठ कर्मयोगी जेकाँ अपन अनमोल समयक उपयोग कए वास्तविक स्वरुप केँ देखलखिन्ह आ बुझलखिन्ह। ओकर संगे-संग अपन देषक लोको केँ बुझबैक प्रयास कलथिन्ह । हुनका लए चुपचाप बैसनाए असंभव रहै। ओ अपन एक-एक क्षणक उपयोग सार्थक कार्य मे करैत रहैथ। चरैवेति -चरैवेतिक सिद्धान्तक अक्षरशः पालन करैत रहैथ। विश्लेषण आ संश्लेषण कलामे महारत हासिल रहै हुनका। ग्राह्य आ अग्राह्य वस्तु केँ परिखैत रहैथ राहुलजी।
        राहुलजीक व्यक्तिव्यक  निर्माण कोना भेल एकर अध्ययन जेतै मजेदार अछि ओतबैक प्ररेणादायक। आजमगढ़ जिलाक मझोला किसान परिवारमे  हिनकर जन्म भेल रहै। नाम छलैन्ह केदारनाथ  पांडे। पाँच सालक उमरमे हिनकर शिक्षा आरम्भ भेल मुदा परिवारक  वातावरण  एहन नै  रहै कि पढ़ाय-लिखाय  ठीक -ठाक चलि सकै। इएह बीच मे हिनकर विवाह भऽ गेल परिवारक वातावरण सऽ केदारनाथक मन उचैट गेल, तखन घरसँ भागैक सिलसिला शुरु  भऽ गेल- कलकता बनारस मद्रास अयोध्या लाहौरक चक्कर लगाबैं लगलाह। यही चक्कर मँ ओ एक मठक महन्तक शिष्यत्व ग्रहण कएलथिन जेकर बाद हुनकर नाम रामोदार साधु भऽ गेल। बाद मे मठक महन्ती मिलैत रहैन्ह मुदा अपना आप केँ बांहि केँ नै राखि सकलाह। तखनक मनोदषाक वर्णन आगू आबि केँ कएने छथि-
        भावी महन्त बनाबै लऽ महन्त लक्ष्मणदास हमरा बनारस सँ लाबलैथ। यदि हम मठ मे ठहैर केँ नै रहि सकलौं आ महन्त नै बनि सकलूँ तऽ  एहि मे हमर अपन घुमक्कड़ी आ ज्ञानक तीव्र जिज्ञासा रहै।
भागैक दौर मे कतौ किछ समय रुकि कऽ केदारनाथ संस्कृत अंग्रेजी हिन्दी अरबी सभक अध्ययन कैलथिन्ह। लाहौर मे अध्ययन करैत आर्यसमाजक अनुयायी भऽ गेलाह। बौद्ध साहित्यक संग बड़ लगाव भऽ गेल रहैन्ह । घुमक्कड़ प्रवृति तऽ रहबै करै आब बौद्धधर्मक प्रति झुकाव होएबाक कारणेँ लुंबिनी सारनाथ राजगृह नालन्दा आदि बौद्ध तीर्थस्थानक यात्रा कएलैन्ह। इहा बीच गाँधीक आँधीमे अर्थात् स्वाधीनता आन्दोलनोमे कुदि गलैथ। छह मासक जेलमे सजा भऽ गेल। संन्यासी रामोदार उर्फ केदारनाथ उर्फ राहुलजी केँ आजादी खातीर लड़ैत देखि लोक हुनकर चरण धूलि पाबै लऽ दौड़ेत रहैथ। ओ राजनीति मे त्याग आ समर्पणभावक विशेष महत्व दैत रहैथ। हुनकर कहब रहैन्ह -
        राजनीतिमे खूनक वएह स्थान अछि जे पूजा पाठ मे चन्दनक। राजनीतिमे रहैत हुनकर विद्यानुराग कम नै भेल। जेलयात्रा आ ज्ञानयात्रा दूनूक क्रम ने टूटल। ज्ञानक खोज मे कतै बेर श्रीलंका तिब्बत इंगलैण्ड रुस ईरान मंगोलिया चीन आदि देशक यात्रा कएलैन्ह। तिब्बत जाए केँ एहेन-एहेन दुर्लभ ग्रन्थक खोज कैलखिन्ह जेकर अभावमे भारतक इतिहासक अभिन्न अंग भऽ गेल । ज्ञानक साधना जारी रहल। किछ दिन बौद्धक चीवर धारण कए ओकरो सऽ मूँह मोड़ि ललैन। 1937 मे सोवियत संघ गेलैथ ओतहि एक रुसी महिला संग विवाह कएलन्हि जिनका सऽ पुत्र ईगोर क जन्म भेल।अखन धरि राहुल सांकृत्यायन प्रसिद्ध भारतीय विद्वानक रुपमे सभठाम प्रतिष्ठित भऽ गेल रहैथ। हुनकर ग्रन्थ आ लेख केँ  धूम मचल रहै। आम लोकक मुक्ति लऽ राजनीतिक हथियार केँ ओ सही तरीका सँऽ उपयोग मे लाबै पर जोर देयि रहैथ। अपन अनुभवक आधार पर क्रान्तिकारी दृष्टिकोणक समर्थक भऽ गेल रहैथ राहुलजी। 1938-39 केँ जमाना रहै। देशपर अंग्रेजक शासन रहै। किछैक राज्यमे काँग्रेसक शासन रहै। राहुलजीक इच्छा रहै कि किसानकेँ जमीन्दारक आ भू- स्वामिक  अन्याय सँ छूटकारा मिलवाक चाही-भला इहो कोनो निक बात भेल कि किसान जमीन जोते बुने फसल उपजाबै आ मिले भूस्वामी केँ राहुलजी एहेन अन्यायक घोर विरोधी छलाह। गरीब किसानक पक्ष मे बिहारक अमवारी गाम मे राहुलजी सत्याग्रहीक दलक संग उतैर गलाह सत्याग्रह करवाक लेल । हुनका सब केँ कुचलेक लेल जमीन्दारक हाथी गुण्डा पुलिस सिपाही सब रहै। राहुलजी हाथमे हसिया लए फसल काटै लागलाह। हुनकर ई रूप देखि जमीन्दारक इशारापर एगो महावत राहुलजीक माथ पर जोरदार लाठीक प्रहार कएलक माथ फाइट गेल। खूनक धारा बहि गेल। तैइयो राहुलजीकँ अन्य सत्याग्रही संग गिरफ्तार कए लेल गेल। तखन बिहारमे कांग्रेसक शासन रहै। राहुलजी केँ हथकड़ी पहिराए पुलिस जेल लइ गेल। लोकमे एहि धटनासँ क्षोभ आ रोष रहै। मुदा राहुलजीक मन मे प्रतिषोधक भावना नै रहै। सिद्धान्त पर चलैवाला निर्भीक योद्धा जेना शोषणमुक्त समाजक स्थापना खातिर संघर्षरत रहैथ राहुलजी। मुदा अमवारी मे जे हुनका माथ पर चोट लागल रहै ओ बड़ गहीर रहै जेकर परिणाम भेल कि 1961 मे माथक पक्षाघात सँ ओ पीड़ित भऽ गेलाहा इएह हुनकर मौतक कारणो बनल।
 दोसर विश्वयुद्धक जमानामे राहुलजी अमवारी सत्याग्रह वाला केसमे जेलक सजा काटि रहल रहैथ। ओहि समय मे महात्मा गाँधी, नेहरु, आ रवीन्द्रनाथ ठाकुर सनक लोक हिटलरक नाजीवाद आ जापानक सैन्यवादक खिलाफ लोक केँ जागरुक करै मे लागल रहैथ। राहुलजी सेहो एकरा खातिर लोकभाषा मे नाटक लिखलैन्हि जेकर मंचन करि आमलोक केँ फासीवाद विरोधी आन्दोलन मे भाग लेबाक खातिर प्रेरित कैलथिन्ह।
1945 मे राहुलजी लेनिनग्राद विश्वविद्यालयक प्राच्यविभाग मे प्राध्यापकक पदकेँ सम्हारबाक लेल सेावियत संघ गेलैथ। ओतए अपन अर्धांगनी आ पुत्रसँ मिलके बड़ प्रसन्न भेलाह। अखन दोसर विश्वयुद्ध खतमे भेल रहै। स्तालिनग्रादमे सहस़्त्र टूटल-फूटल मोटर आ हवाई जहाजक  ढ़ेर लागल रहै। आधासँ अधिक मकान धराशायी भऽ गेल रहै। मुदा लोकके जोश देखैत बनैत रहै। सब एकजुट भऽ निर्माण कार्यमे लागल रहैथ। आमजनक भागीदारी देखि सोवियत जन सोवियतक भूमि दूनुक प्रति हुनकर अनुराग आ सम्मान दुगुना भऽ गेल। एकर चर्चा करैत ओ लिखैत छथिं 
इतिहास मानैत अछि आ मनेत रहतै कि मानवताक प्रगतिमे सबसे बड़का बाधक शक्ति हिटलरक फासिज्मक रूपमे उपजल रहै जेकर नाश करैक श्रेय सोवियत रूस केँ जाइत अछि।
     एहिबेर राहुलजी पचीस मास तक सोवियत संघ मे रहला। ओतए अध्यापनक संगे मध्य एषियाक इतिहासक ढ़ेर सामग्री आ दुर्लभग्रन्थ  जमा कएलैन्हा। अनके भाषा सिखलैखिन्ह आ अनेक किताबक हिन्दी अनुवादो कएलैन्ह। सावियत संघ सँ विदा काल पुत्र आ अर्धंगनी दूनू मे सँ कियों छोड़े लएँ तैयार नै रहथिन्ह ओ दूनू  फूटि-फूटि कऽ कानैत रहथिन्ह मुदा जीवन कर्तव्य कोनो माया- मोह केँ माने लए तैयार नै रहैत अछि। द्रवित हृदय केँ कठोर कए राहुलजी विदा भेलाह। एहि यात्राक बाद राहुलजी हिन्दीक प्रचार -प्रसार, ग्रन्थक  सम्पादन, लेखन मे अपन जीवन समर्पित कऽ देलथिन्ह। राहुलजी सामाजिक कुरीति, वर्ण -व्यवस्था, जातीय उन्माद, साम्प्रदायिक वैमन्स्यक  सबदिन विरोध कैलथिन्हि। हुनकर समझ्ा रहै कि आर्थिक विषमता सब कुरीतिक जैड़ थिक। भाषाक सम्बन्धों मे हुनकर विचार साफ रहै कि अंग्रेजी के ँ भारतक लोक पर नै थोपबाक चाहि। एकर विकल्प खोजे मे जतैक अबेर भऽ रहल अछि राष्ट्रीय एकता ओतेक खतरा मे पड़ि रहल अछि।
२.
अर्चना कुमर  १.आस, २.विद्वान-१ (दादीसँ सुनल कथाक पुनर्लेखन)
२.१.
आस- अर्चना कुमर  
   आइ हम एकटा एहेन व्यक्तिक कथा लिखि रहल छी जे आजुक युगमे बहुत कम भेटैए।
मुन्ना माने प्रकाश।  ओ एकटा एहेन घरक बेटा रहथिन जकर बाप बैंकमे रजिस्टार रहनि, घरमे जमीन-जत्था खूब रहनि, पाइक कमी नै रहनि। मुदा जखन ओ छोटे रहथि तखने हुनकर एकटा बहिनकेँ साँप काटि लेलकनि। बहुत जगह हुनकर पापा देखेलखिन मुदा किछु नै भऽ सकलै, आर ओ मरि गेलखिन।
मुन्ना अपना मिलाकऽ चारि भैयारी आर तीन बहिन रहथिन, एक आर बहिन रहथिन जे मरि गेलखिन। बेटीक शोकमे हुनकर पिताक दिमागी हालत खराब भऽ गेलनि आर पूरा परिवार शोकमे डूमि गेल। पापाक नोकरीयो छुटि गेल। घरमे जेना-तेना खेती गृहस्थीसँ गुजर जाए लागल। ई सभ एखन बच्चे रहथिन। दियाद-बाद सभ चाहे सभ लुटि लिऐ लेकिन हिनकर माताजी कहुनो सभ किछु बचा कऽ राखलथिन। फेर ई सभ कनी पैघ भेलाह। जखन मुन्ना इन्टर फाइनल पार्टमे गेलखिन तखन गामसँ भागि गेलखिन आर दिल्ली आबि गेलखिन। मुदा एतौ हुनका कम मेहनति नै करए पड़ल। पहिने मालीक काजसँ ई शुरुआत केलखिन। घरपर किछु पता नै रहनि जे ई कत्तऽ छथिन। आस्ते-आस्ते ई पाइ एकट्ठा कऽ अपन उपनेन आ दादीक श्राद्ध केलखिन, ओकर बाद फेर कमेलखिन तँ बड़की बहिनक बियाह केलखिन। ओकर बाद ओ अपन बियाह केलखिन। परिवारक सभकेँ सभ किछु देलखिन मुदा अपनाले एकटा कपड़ा तक नै किनलखिन, किएक तँ फेर हुनका दूटा बहिनक बियाह करबाक रहै। बहुत कष्ट सहित, एते तक कि अपन पत्नीक मधुश्रावनी ओ अपने लग दिल्लीमे करेलखिन ताहि किछु पैसा बचि जाएत। फेर अपन दोसर बहिनक बियाह केलखिन। हुनकर बियाहक बाद २ बर्खक बाद माताजी कहलखिन घर बनेबा लेल। दू रूम ढलैय्या केलखिन, तकर बाद सोचैत रहथिन तेसर बहिनक बियाह करैले तँ बीचबला बहनोइ खतम भऽ गेलखिन। ओहि ठमा जा कऽ बहिनक सभटा व्यवस्था कऽ कऽ एलखिन। ता कमाइत रहथिन ५ हजार टका। आइक जमानामे की होइ छै पाँच हजार टकासँ। कतेक दुःख सहि कऽ ओ पैसा राखैत रहथिन। मुदा अपनाले कहियो नै सोचलखिन। कनियाँ हुनका कतबो तानी देथिन किन्तु ओ अपन फर्जसँ कहियो नै चुकलखिन। आर माइ-पापाक सभ सपना पूर्ण केलखिन। छोटकी बहिनक बियाह ऐ साल खूब धूमधामसँ केलखिन। तेँ ईश्वरसँ कहै छी, भगवान सभकेँ एहेने बेटा देथिन, जे सभकेँ पार उतारि दै। बहिन सभकेँ एत्ते प्रेम करै छथिन जे पुछू नै।
बहिन सभक मुँहसँ किछु खसैक काज तुरत्ते आबि जाइ छै। मुदा पत्नी किछु माँगि लैअए तँ बड़ भारी।
आइ हम हुनकर पत्नी ई सभ लिखि रहल छी। किन्तु तैयो हमरासँ ओ बड्ड प्रेम करै छथिन। हमराले हुनका किछु नै रहै मुदा प्रेम तँ छै। हम ओहीमे हुनकासँ खुश छी।
हुनकर प्रेमे हमरा चाहबो करे। हम जानै छी हुनकर हुनकर मजबूरी। एक इन्सान कत्ते तक कऽ सकैए। आर हम नै बुझबै तँ के बुझतै।
अन्तिममे जखन छोटकी बहिनक बियाह दान कऽ लेलखिन तखन जखन बरियाती बिदा भऽ गेल ओहि रातिमे ओ खूब खुश भऽ गेलखिन आ आँखिसँ नोर खसऽ लगलनि। खूब कानलखिन आ बहिनसँ कहथिन, हुनकर नाम लऽ कऽ जे आइ हमर सभ टेंशन दूर भऽ गेल। आब हम ..अपना गाड़ी..लऽ..आर खुबो कानथिन आर कहथिन। बहिनकेँ पकड़ि कऽ कानथिन आ कहथिन, हम तोरा जाइले नै देबौ। तूँ अही ठामे रहबी। कतौ नै जेमी। तोरा हम कतौ जाइले नै देबै। ओहि राति घरमे जतेक लोक रहथिन सभ कानए लागल। कतबो हम सभ बुझाबी मुदा ओ खूब कानैत रहथिन, अपन कर्तव्य पूरा होइपर। लोक खुशियोमे कानैए, से हम ओही राति देखलौं।
तकर बाद हम सभ दिल्ली आबि गेलौं। किन्तु आइयो हुनका गाड़ी लैके इच्छा पूरा नै भेल।
बच्चा सभ, शाइत परिवारक सोचैबलाकेँ अपन इच्छाक अनादर करए पड़ै छै।

२.२.
अर्चना कुमर- विद्वान-१ (दादीसँ सुनल कथाक पुनर्लेखन)
एक विद्वान पंडित रहथिन। मुदा ओ बड्ड गरीब रहथिन। ताहि कारण हुनका हुनकर पस्त्नी सदिखन कहथिन- कतहु जाउ कमाइले। किछु करू। बच्चा सभ भूखे मरैए। कृपा कऽ कऽ किछु तँ करू जे दू वक्तक भोजन नसीब हुअए।
तँ ओ पत्नीकेँ कहथिन जे हम एतेक पैघ विद्वान छी जे विद्वता लेल पैसा कियो दैये नै सकत। तैयो अहाँ कहै छी तँ हम जाइ छी।
आर ओ चारि पाँती लिखि लेलखिन आर बजार जाए ओहि चारि पाँतिक चारि लाख दाम लगा देलखिन। ओहि चारि पाँतिक चारि लाख टका दाम देखि सभ अचम्भित भऽ जाइत रहथिन। आर कियो नै किनथिन। एकटा व्यापारी रहथिन। ओ सोचलखिन जे किछु तँ बात एहि चारि पाँतीमे जरूर हएत जे एकर चारि लाख टाका दाम छै, से नै ई हम लऽ लै छी। आ ओ चारि लाख टाका दऽ कऽ ओ च्रि पाँती कीनि लेलखिन, आर अपन तलवारपर खोदबा लेलखिन। ओ शब्द सभ रहै।
आसनम प्रभु चालन।
पथ कन्या विर्जयते।
पहिल राति निवारी।
पहिल क्रोध निवारी।
फेर ओ अपना व्यापार करैले निकललखिन। हुनका लग ढेरिक पैसा-कौड़ी सभ रहनि। एक जगह राति हुअए लागल तँ सोचलखिन, अपना दोस्त ओहिठाम रहि जाएब। दोस्त लग गेलखिन तँ बात-बातमे दोस्तकेँ पता लागि गेल जे हिनका जिमा ढेरिक पैसा छनि। भोर भेल, हिनकर दोस्त अपना पत्नीकेँ बतेलखिन जे दोस्त लग ढेरिक पैसा छै। फेर दुनू मिलिकऽ हुनका मारैके सोचलखिन आर अंगनामे बड़का तरहरा खुनि लेलखिन, आर बिना घोरल खाट, अइपर बिछा, नीकसँ ओछैन कऽ देलखिन, आर अपना दोस्तकेँ बजेलखिन जे चलू खाइले। आइ अंगनेमे भोजन लागल ऐ।
ई गेलखिन खाइले अंगना, जहिना खटियापर बैसऽ लागलखिन तहिना हुनकर नजरि तलवारपर पड़लनि। ओइमे लिखल रहै-
आसनम प्रभु चालन।
माने कतौ बैसी तँ बिछौन कनी झाड़ि ली। ओ बिछौनकेँ जहिना झाड़लखिन तहिना अंदर देखि दंग रहि गेलखिन, आर सोचलखिन हमर मौक्षक पूरा इन्तजाम भेल रहै। जे आइ ई शब्द नै पढ़ने रहितहुँ तँ आइ हम ऊपर पहुँचि गेल रहितौं। से नै तँ पंडितकेँ एक लाख आर हम देब। आर ओत्तऽ सँ ई कहि कऽ भागि गेलखिन जे हम पैखानासँ आबै छी।

बच्चा सभ आ दोसर कथा सुनू, हम थाकि गेल छी आ दोसर कथा पूरा मोनो नै पड़ि रहल अछि, तखन देखू...

ओतएसँ जाइक बाद रस्तामे एकटा बहुत सुन्दर नारी जाइत रहए। आर किछु बदमाश हुनका तंग करैत रहए। हुनका देखि कऽ व्यापारीक मोन मचलि गेल आर ओ ओहि ठाम गेलखिन, तँ राजाक सिपाही आबि गेल आर सभकेँ पकड़ि कऽ लऽ गेल, हिनकोसँ..हिनकोसँ..

लिअ बिसरि गेलहुँ खिस्सा। फेर जखन मोन पड़त तखने...

.

डॉ. शेफालिका  वर्मा 
स्मृति-शेष
                                    
आय बटवृक्ष क मधुर छाहिर कत'
दनुजता क लंका मे अंगदक
अटल पैर कत' ?
काल पंथ पर चलि गेलाह जे
सिनेह हुनक
सरसावैत अछि 
मोन प्रानक भ्रमित दिशा के
बाट वैय्ह  देखाबैत छैथ
चिर मंगलमय छल लक्ष्य महान
जीवन एक ,पग एक समान !
स्निग्ध अपन जीवन कय क्षार 
करैत रहलाह  आलोक प्रसार 
श्रृष्टि क इ अमिट विधान 
मिटबा  मे  सय वरदान ...
सुनी हुनक  हुंकार 
नव यौवन बल  पावैत छल 
माथ पर बाँधी कफ़न  
कर्मक्षेत्र मे आबि अत्याचार
मेटाबैत छल
हुनक सहस देखि देखि
तरुण सिंह लजावैत छल !
आय
मानवता क धवल आकास कत'
मानव एक  मानवता  गुण ,
बतवै वाला  धाम  कत'
अय विश्व  !
अहीं बताबु
भारतवर्ष   सन   गाम   कत'       ???

 बच्चा लोकनि द्वारा स्मरणीय श्लोक
.प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त्त (सूर्योदयक एक घंटा पहिने) सर्वप्रथम अपन दुनू हाथ देखबाक चाही, ई श्लोक बजबाक चाही।
कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥
करक आगाँ लक्ष्मी बसैत छथि, करक मध्यमे सरस्वती, करक मूलमे ब्रह्मा स्थित छथि। भोरमे ताहि द्वारे करक दर्शन करबाक थीक।
२.संध्या काल दीप लेसबाक काल-
दीपमूले स्थितो ब्रह्मा दीपमध्ये जनार्दनः।
दीपाग्रे शङ्करः प्रोक्त्तः सन्ध्याज्योतिर्नमोऽस्तुते॥
दीपक मूल भागमे ब्रह्मा, दीपक मध्यभागमे जनार्दन (विष्णु) आऽ दीपक अग्र भागमे शङ्कर स्थित छथि। हे संध्याज्योति! अहाँकेँ नमस्कार।
३.सुतबाक काल-
रामं स्कन्दं हनूमन्तं वैनतेयं वृकोदरम्।
शयने यः स्मरेन्नित्यं दुःस्वप्नस्तस्य नश्यति॥
जे सभ दिन सुतबासँ पहिने राम, कुमारस्वामी, हनूमान्, गरुड़ आऽ भीमक स्मरण करैत छथि, हुनकर दुःस्वप्न नष्ट भऽ जाइत छन्हि।
४. नहेबाक समय-
गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति।
नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरू॥
हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिन्धु आऽ कावेरी  धार। एहि जलमे अपन सान्निध्य दिअ।
५.उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्।
वर्षं तत् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः॥
समुद्रक उत्तरमे आऽ हिमालयक दक्षिणमे भारत अछि आऽ ओतुका सन्तति भारती कहबैत छथि।
६.अहल्या द्रौपदी सीता तारा मण्डोदरी तथा।
पञ्चकं ना स्मरेन्नित्यं महापातकनाशकम्॥
जे सभ दिन अहल्या, द्रौपदी, सीता, तारा आऽ मण्दोदरी, एहि पाँच साध्वी-स्त्रीक स्मरण करैत छथि, हुनकर सभ पाप नष्ट भऽ जाइत छन्हि।
७.अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषणः।
कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरञ्जीविनः॥
अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनूमान्, विभीषण, कृपाचार्य आऽ परशुराम- ई सात टा चिरञ्जीवी कहबैत छथि।
८.साते भवतु सुप्रीता देवी शिखर वासिनी
उग्रेन तपसा लब्धो यया पशुपतिः पतिः।
सिद्धिः साध्ये सतामस्तु प्रसादान्तस्य धूर्जटेः
जाह्नवीफेनलेखेव यन्यूधि शशिनः कला॥
९. बालोऽहं जगदानन्द न मे बाला सरस्वती।
अपूर्णे पंचमे वर्षे वर्णयामि जगत्त्रयम् ॥
१०. दूर्वाक्षत मंत्र(शुक्ल यजुर्वेद अध्याय २२, मंत्र २२)
आ ब्रह्मन्नित्यस्य प्रजापतिर्ॠषिः। लिंभोक्त्ता देवताः। स्वराडुत्कृतिश्छन्दः। षड्जः स्वरः॥
आ ब्रह्म॑न् ब्राह्म॒णो ब्र॑ह्मवर्च॒सी जा॑यता॒मा रा॒ष्ट्रे रा॑ज॒न्यः शुरे॑ऽइषव्यो॒ऽतिव्या॒धी म॑हार॒थो जा॑यतां॒ दोग्ध्रीं धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः सप्तिः॒ पुर॑न्धि॒र्योवा॑ जि॒ष्णू र॑थे॒ष्ठाः स॒भेयो॒ युवास्य यज॑मानस्य वी॒रो जा॒यतां निका॒मे-नि॑कामे नः प॒र्जन्यों वर्षतु॒ फल॑वत्यो न॒ऽओष॑धयः पच्यन्तां योगेक्ष॒मो नः॑ कल्पताम्॥२२॥
मन्त्रार्थाः सिद्धयः सन्तु पूर्णाः सन्तु मनोरथाः। शत्रूणां बुद्धिनाशोऽस्तु मित्राणामुदयस्तव।
ॐ दीर्घायुर्भव। ॐ सौभाग्यवती भव।
हे भगवान्। अपन देशमे सुयोग्य आसर्वज्ञ विद्यार्थी उत्पन्न होथि, शुत्रुकेँ नाश कएनिहार सैनिक उत्पन्न होथि। अपन देशक गाय खूब दूध दय बाली, बरद भार वहन करएमे सक्षम होथि आघोड़ा त्वरित रूपेँ दौगय बला होए। स्त्रीगण नगरक नेतृत्व करबामे सक्षम होथि आयुवक सभामे ओजपूर्ण भाषण देबयबला आनेतृत्व देबामे सक्षम होथि। अपन देशमे जखन आवश्यक होय वर्षा होए आऔषधिक-बूटी सर्वदा परिपक्व होइत रहए। एवं क्रमे सभ तरहेँ हमरा सभक कल्याण होए। शत्रुक बुद्धिक नाश होए आमित्रक उदय होए॥
मनुष्यकें कोन वस्तुक इच्छा करबाक चाही तकर वर्णन एहि मंत्रमे कएल गेल अछि।
एहिमे वाचकलुप्तोपमालड़्कार अछि।
अन्वय-
ब्रह्म॑न् - विद्या आदि गुणसँ परिपूर्ण ब्रह्म
रा॒ष्ट्रे - देशमे
ब्र॑ह्मवर्च॒सी-ब्रह्म विद्याक तेजसँ युक्त्त
आ जा॑यतां॒- उत्पन्न होए
रा॑ज॒न्यः-राजा
शुरे॑ऽबिना डर बला
इषव्यो॒- बाण चलेबामे निपुण
ऽतिव्या॒धी-शत्रुकेँ तारण दय बला
म॑हार॒थो-पैघ रथ बला वीर
दोग्ध्रीं-कामना(दूध पूर्ण करए बाली)
धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः धे॒नु-गौ वा वाणी र्वोढा॑न॒ड्वा- पैघ बरद ना॒शुः-आशुः-त्वरित
सप्तिः॒-घोड़ा
पुर॑न्धि॒र्योवा॑- पुर॑न्धि॒- व्यवहारकेँ धारण करए बाली र्योवा॑-स्त्री
जि॒ष्णू-शत्रुकेँ जीतए बला
र॑थे॒ष्ठाः-रथ पर स्थिर
स॒भेयो॒-उत्तम सभामे
युवास्य-युवा जेहन
यज॑मानस्य-राजाक राज्यमे
वी॒रो-शत्रुकेँ पराजित करएबला
निका॒मे-नि॑कामे-निश्चययुक्त्त कार्यमे
नः-हमर सभक
प॒र्जन्यों-मेघ
वर्षतु॒-वर्षा होए
फल॑वत्यो-उत्तम फल बला
ओष॑धयः-औषधिः
पच्यन्तां- पाकए
योगेक्ष॒मो-अलभ्य लभ्य करेबाक हेतु कएल गेल योगक रक्षा
नः॑-हमरा सभक हेतु
कल्पताम्-समर्थ होए
ग्रिफिथक अनुवाद- हे ब्रह्मण, हमर राज्यमे ब्राह्मण नीक धार्मिक विद्या बला, राजन्य-वीर,तीरंदाज, दूध दए बाली गाय, दौगय बला जन्तु, उद्यमी नारी होथि। पार्जन्य आवश्यकता पड़ला पर वर्षा देथि, फल देय बला गाछ पाकए, हम सभ संपत्ति अर्जित/संरक्षित करी।
Input: (कोष्ठकमे देवनागरी, मिथिलाक्षर किंवा फोनेटिक-रोमनमे टाइप करू। Input in Devanagari, Mithilakshara or Phonetic-Roman.)
Output: (परिणाम देवनागरी, मिथिलाक्षर आ फोनेटिक-रोमन/ रोमनमे। Result in Devanagari, Mithilakshara and Phonetic-Roman/ Roman.)
इंग्लिश-मैथिली-कोष / मैथिली-इंग्लिश-कोष प्रोजेक्टकेँ आगू बढ़ाऊ, अपन सुझाव आ योगदानई-मेल द्वारा ggajendra@videha.com पर पठाऊ।
विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary.
मैथिलीमे भाषा सम्पादन पाठ्यक्रम
नीचाँक सूचीमे देल विकल्पमेसँ लैंगुएज एडीटर द्वारा कोन रूप चुनल जएबाक चाही:
वर्ड फाइलमे बोल्ड कएल रूप:  
1.होयबला/ होबयबला/ होमयबला/ हेबबला, हेमबला/ होयबाक/होबएबला /होएबाक
2. आ
/आऽ
3. क
लेने/कऽ लेने/कए लेने/कय लेने/ल/लऽ/लय/लए
4. भ
गेल/भऽ गेल/भय गेल/भए गेल
5. कर
गेलाह/करऽ गेलह/करए गेलाह/करय गेलाह
6. लिअ/दिअ लिय
,दिय,लिअ,दिय/
7. कर
बला/करऽ बला/ करय बला करै बला/कबला / करए बला
8. बला वला
9. आङ्ल आंग्ल
10. प्रायः प्रायह
11. दुःख दुख
12. चलि गेल चल गेल/चैल गेल
13. देलखिन्ह देलकिन्ह
, देलखिन
14. देखलन्हि देखलनि/ देखलैन्ह
15. छथिन्ह/ छलन्हि छथिन/ छलैन/ छलनि
16. चलैत/दैत चलति/दैति
17. एखनो अखनो
18. बढ़न्हि बढन्हि
19. ओ
/ओऽ(सर्वनाम)
20. ओ (संयोजक) ओ
/ओऽ
21. फाँगि/फाङ्गि फाइंग/फाइङ
22. जे जे
/जेऽ
23. ना-नुकुर ना-नुकर
24. केलन्हि/कएलन्हि/कयलन्हि
25. तखन तँ/ तखन तँ
26. जा
रहल/जाय रहल/जाए रहल
27. निकलय/निकलए लागल बहराय/ बहराए लागल निकल
/बहरै लागल
28. ओतय/जतय जत
/ओत/ जतए/ ओतए
29. की फूरल जे कि फूरल जे
30. जे जे
/जेऽ
31. कूदि/यादि(मोन पारब) कूइद/याइद/कूद/याद/ यादि (मोन)
32. इहो/ ओहो
33. हँसए/ हँसय हँसऽ
34. नौ आकि दस/नौ किंवा दस/ नौ वा दस
35. सासु-ससुर सास-ससुर
36. छह/ सात छ/छः/सात
37. की की
/कीऽ (दीर्घीकारान्तमे ऽ वर्जित)
38. जबाब जवाब
39. करएताह/ करयताह करेताह
40. दलान दिशि दलान दिश/दलान दिस
41. गेलाह गएलाह/गयलाह
42. किछु आर/ किछु और
43. जाइत छल जाति छल/जैत छल
44. पहुँचि/ भेटि जाइत छल पहुँच/भेट जाइत छल
45. जबान (युवा)/ जवान(फौजी)
46. लय/लए
/कऽ/लए कए/ लऽ कऽ/ लऽ कए
47. ल
/लऽ कय/ कए
48. एखन/अखने अखन/एखने
49. अहींकेँ अहीँकेँ
50. गहींर गहीँर
51. धार पार केनाइ धार पार केनाय/केनाए
52. जेकाँ जेँकाँ/ जकाँ
53. तहिना तेहिना
54. एकर अकर
55. बहिनउ बहनोइ
56. बहिन बहिनि
57. बहिन-बहिनोइ बहिन-बहनउ
58. नहि/ नै
59. करबा
/ करबाय/ करबाए
60. तँ/ त ऽ तय/तए
61. भाय भै/भाए
62. भाँय
63. यावत जावत
64. माय मै / माए
65. देन्हि/दएन्हि/ दयन्हि दन्हि/ दैन्हि
66. द
/ दऽ/ दए
67. (संयोजक) ओऽ (सर्वनाम)
68. तका
कए तकाय तकाए
69. पैरे (
on foot) पएरे
70. ताहुमे ताहूमे


71. पुत्रीक
72. बजा कय/ कए
73. बननाय/बननाइ
74. कोला
75. दिनुका दिनका
76. ततहिसँ
77. गरबओलन्हि
  गरबेलन्हि
78. बालु बालू
79. चेन्ह चिन्ह(अशुद्ध)
80. जे जे

81. से/ के से
/के
82. एखुनका अखनुका
83. भुमिहार भूमिहार
84. सुगर सूगर
85. झठहाक झटहाक
86. छूबि
87. करइयो/ओ करैयो/करिऔ-करइयौ
88. पुबारि पुबाइ
89. झगड़ा-झाँटी झगड़ा-झाँटि
90. पएरे-पएरे पैरे-पैरे
91. खेलएबाक
92. खेलेबाक
93. लगा
94. होए- हो
95. बुझल बूझल
96. बूझल (संबोधन अर्थमे)
97. यैह यएह / इएह
98. तातिल
99. अयनाय- अयनाइ/ अएनाइ
100. निन्न- निन्द
101. बिनु बिन
102. जाए जाइ
103. जाइ (
in different sense)-last word of sentence
104. छत पर आबि जाइ
105. ने
106. खेलाए (
play) –खेलाइ
107. शिकाइत- शिकायत
108. ढप- ढ़प
109. पढ़- पढ
110. कनिए/ कनिये कनिञे
111. राकस- राकश
112. होए/ होय होइ
113. अउरदा- औरदा
114. बुझेलन्हि (
different meaning- got understand)
115. बुझएलन्हि/ बुझयलन्हि (
understood himself)
116. चलि- चल
117. खधाइ- खधाय
118. मोन पाड़लखिन्ह मोन पारलखिन्ह
119. कैक- कएक- कइएक
120. लग
 
121. जरेनाइ
122. जरओनाइ- जरएनाइ/जरयनाइ
123. होइत
124. गरबेलन्हि/ गरबओलन्हि
125. चिखैत- (
to test)चिखइत
126. करइयो (
willing to do) करैयो
127. जेकरा- जकरा
128. तकरा- तेकरा
129. बिदेसर स्थानेमे/ बिदेसरे स्थानमे
130. करबयलहुँ/ करबएलहुँ/ करबेलहुँ
131. हारिक (उच्चारण हाइरक)
132. ओजन वजन
133. आधे भाग/ आध-भागे
134. पिचा
/ पिचाय/पिचाए
135. नञ/ ने
136. बच्चा नञ (ने) पिचा जाय
137. तखन ने (नञ) कहैत अछि।
138. कतेक गोटे/ कताक गोटे
139. कमाइ- धमाइ कमाई- धमाई
140. लग

141. खेलाइ (
for playing)
142. छथिन्ह छथिन
143. होइत होइ
144. क्यो कियो / केओ
145. केश (
hair)
146. केस (
court-case)
147. बननाइ/ बननाय/ बननाए
148. जरेनाइ
149. कुरसी कुर्सी
150. चरचा चर्चा
151. कर्म करम
152. डुबाबए/ डुमाबय/ डुमाबए
153. एखुनका/ अखुनका
154. लय (वाक्यक अतिम शब्द)- लऽ
155. कएलक केलक
156. गरमी गर्मी
157. बरदी वर्दी
158. सुना गेलाह सुना
/सुनाऽ
159. एनाइ-गेनाइ
160. तेना ने घेरलन्हि
161. नञि
162. डरो
रो
163. कतहु- कहीं
164. उमरिगर- उमरगर
165. भरिगर
166. धोल/धोअल धोएल
167. गप/गप्प
168. के के

169. दरबज्जा/ दरबजा
170. ठाम
171. धरि तक
172. घूरि लौटि
173. थोरबेक
174. बड्ड
175. तोँ/ तू
176. तोँहि( पद्यमे ग्राह्य)
177. तोँही / तोँहि
178. करबाइए करबाइये
179. एकेटा
180. करितथि करतथि

181. पहुँचि पहुँच
182. राखलन्हि रखलन्हि
183. लगलन्हि लागलन्हि
184. सुनि (उच्चारण सुइन)
185. अछि (उच्चारण अइछ)
186. एलथि गेलथि
187. बितओने बितेने
188. करबओलन्हि/ करेलखिन्ह
189. करएलन्हि
190. आकि कि
191. पहुँचि पहुँच
192. जराय/ जराए जरा
(आगि लगा)
193. से से

194. हाँ मे हाँ (हाँमे हाँ विभक्त्तिमे हटा कए)
195. फेल फैल
196. फइल(
spacious) फैल
197. होयतन्हि/ होएतन्हि हेतन्हि
198. हाथ मटिआयब/ हाथ मटियाबय/हाथ मटिआएब
199. फेका फेंका
200. देखाए देखा
201. देखाबए
202. सत्तरि सत्तर
203. साहेब साहब
204.गेलैन्ह/ गेलन्हि
205.हेबाक/ होएबाक
206.केलो/ कएलहुँ
207. किछु न किछु/ किछु ने किछु
208.घुमेलहुँ/ घुमओलहुँ
209. एलाक/ अएलाक
210. अः/ अह
211.लय/ लए (अर्थ-परिवर्त्तन)
212.कनीक/ कनेक
213.सबहक/ सभक
214.मिलाऽ/ मिला
215.कऽ/
216.जाऽ/ जा
217.आऽ/
218.भऽ/भ
( फॉन्टक कमीक द्योतक)
219.निअम/ नियम
220.हेक्टेअर/ हेक्टेयर
221.पहिल अक्षर ढ/ बादक/बीचक ढ़
222.तहिं/तहिँ/ तञि/ तैं
223.कहिं/ कहीं
224.तँइ/ तइँ
225.नँइ/ नइँ/
  नञि/ नहि
226.है/ हए
227.छञि/ छै/ छैक/छइ
228.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ
229. (
come)/ आऽ(conjunction)
230. आ (
conjunction)/ आऽ(come)
231.कुनो/ कोनो
२३२.गेलैन्ह-गेलन्हि
२३३.हेबाक- होएबाक
२३४.केलौँ- कएलौँ- कएलहुँ
२३५.किछु न किछ- किछु ने किछु
२३६.केहेन- केहन
२३७.आऽ (come)- (conjunction-and)/
२३८. हएत-हैत
२३९.घुमेलहुँ-घुमएलहुँ
२४०.एलाक- अएलाक
२४१.होनि- होइन/होन्हि
२४२.ओ-राम ओ श्यामक बीच(conjunction), ओऽ कहलक (he said)/
२४३.की हए/ कोसी अएली हए/ की है। की हइ
२४४.दृष्टिएँ/ दृष्टियेँ
२४५.शामिल/ सामेल
२४६.तैँ / तँए/ तञि/ तहिं
२४७.जौँ/ ज्योँ
२४८.सभ/ सब
२४९.सभक/ सबहक
२५०.कहिं/ कहीं
२५१.कुनो/ कोनो
२५२.फारकती भऽ गेल/ भए गेल/ भय गेल
२५३.कुनो/ कोनो
२५४.अः/ अह
२५५.जनै/ जनञ
२५६.गेलन्हि/ गेलाह (अर्थ परिवर्तन)
२५७.केलन्हि/ कएलन्हि
२५८.लय/ लए (अर्थ परिवर्तन)
२५९.कनीक/ कनेक
२६०.पठेलन्हि/ पठओलन्हि
२६१.निअम/ नियम
२६२.हेक्टेअर/ हेक्टेयर
२६३.पहिल अक्षर रहने ढ/ बीचमे रहने ढ़
२६४.आकारान्तमे बिकारीक प्रयोग उचित नहि/ अपोस्ट्रोफीक प्रयोग फान्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक ओकर बदला अवग्रह (बिकारी) क प्रयोग उचित

२६५.केर/-/ कऽ/ के
२६६.छैन्हि- छन्हि
२६७.लगैए/ लगैये
२६८.होएत/ हएत
२६९.जाएत/ जएत
२७०.आएत/ अएत/ आओत
२७१.खाएत/ खएत/ खैत
२७२.पिअएबाक/ पिएबाक
२७३.शुरु/ शुरुह
२७४.शुरुहे/ शुरुए
२७५.अएताह/अओताह/ एताह
२७६.जाहि/ जाइ/ जै
२७७.जाइत/ जैतए/ जइतए
२७८.आएल/ अएल
२७९.कैक/ कएक
२८०.आयल/ अएल/ आएल
२८१. जाए/ जै/ जए
२८२. नुकएल/ नुकाएल
२८३. कठुआएल/ कठुअएल
२८४. ताहि/ तै
२८५. गायब/ गाएब/ गएब
२८६. सकै/ सकए/ सकय
२८७.सेरा/सरा/ सराए (भात सेरा गेल)
२८८.कहैत रही/देखैत रही/ कहैत छलहुँ/ कहै छलहुँ- एहिना चलैत/ पढ़ैत (पढ़ै-पढ़ैत अर्थ कखनो काल परिवर्तित)-आर बुझै/ बुझैत (बुझै/ बुझैत छी, मुदा बुझैत-बुझैत)/ सकैत/ सकै। करैत/ करै। दै/ दैत। छैक/ छै। बचलै/ बचलैक। रखबा/ रखबाक । बिनु/ बिन। रातिक/ रातुक
२८९. दुआरे/ द्वारे
२९०.भेटि/ भेट
२९१. खन/ खुना (भोर खन/ भोर खुना)
२९२.तक/ धरि
२९३.गऽ/गै (meaning different-जनबै गऽ)
२९४.सऽ/ सँ (मुदा दऽ, लऽ)
२९५.त्त्व,(तीन अक्षरक मेल बदला पुनरुक्तिक एक आ एकटा दोसरक उपयोग) आदिक बदला त्व आदि। महत्त्व/ महत्व/ कर्ता/ कर्त्ता आदिमे त्त संयुक्तक कोनो आवश्यकता मैथिलीमे नहि अछि। वक्तव्य
२९६.बेसी/ बेशी
२९७.बाला/वाला बला/ वला (रहैबला)
२९८.वाली/ (बदलएवाली)
२९९.वार्त्ता/ वार्ता
300. अन्तर्राष्ट्रिय/ अन्तर्राष्ट्रीय
३०१. लेमए/ लेबए
३०२.लमछुरका, नमछुरका
३०२.लागै/ लगै (भेटैत/ भेटै)
३०३.लागल/ लगल
३०४.हबा/ हवा
३०५.राखलक/ रखलक
३०६. (come)/ (and)
३०७. पश्चाताप/ पश्चात्ताप
३०८. ऽ केर व्यवहार शब्दक अन्तमे मात्र, यथासंभव बीचमे नहि।
३०९.कहैत/ कहै
३१०. रहए (छल)/ रहै (छलै) (meaning different)
३११.तागति/ ताकति
३१२.खराप/ खराब
३१३.बोइन/ बोनि/ बोइनि
३१४.जाठि/ जाइठ
३१५.कागज/ कागच
३१६.गिरै (meaning different- swallow)/ गिरए (खसए)
३१७.राष्ट्रिय/ राष्ट्रीय

उच्चारण निर्देश:
दन्त न क उच्चारणमे दाँतमे जीह सटत- जेना बाजू नाम , मुदा ण क उच्चारणमे जीह मूर्धामे सटत (नहि सटैए तँ उच्चारण दोष अछि)- जेना बाजू गणेश। तालव्य मे जीह तालुसँ , मे मूर्धासँ आ दन्त मे दाँतसँ सटत। निशाँ, सभ आ शोषण बाजि कऽ देखू। मैथिलीमे केँ वैदिक संस्कृत जेकाँ सेहो उच्चरित कएल जाइत अछि, जेना वर्षा, दोष। य अनेको स्थानपर ज जेकाँ उच्चरित होइत अछि आ ण ड़ जेकाँ (यथा संयोग आ गणेश संजोगगड़ेस उच्चरित होइत अछि)। मैथिलीमे व क उच्चारण ब, श क उच्चारण स आ य क उच्चारण ज सेहो होइत अछि।
ओहिना ह्रस्व इ बेशीकाल मैथिलीमे पहिने बाजल जाइत अछि कारण देवनागरीमे आ मिथिलाक्षरमे ह्रस्व इ अक्षरक पहिने लिखलो जाइत आ बाजलो जएबाक चाही। कारण जे हिन्दीमे एकर दोषपूर्ण उच्चारण होइत अछि (लिखल तँ पहिने जाइत अछि मुदा बाजल बादमे जाइत अछि), से शिक्षा पद्धतिक दोषक कारण हम सभ ओकर उच्चारण दोषपूर्ण ढंगसँ कऽ रहल छी।
अछि- अ इ छ  ऐछ
छथि- छ इ थ छैथ
पहुँचि- प हुँ इ च
आब अ आ इ ई ए ऐ ओ औ अं अः ऋ एहि सभ लेल मात्रा सेहो अछि, मुदा एहिमे ई ऐ ओ औ अं अः ऋ केँ संयुक्ताक्षर रूपमे गलत रूपमे प्रयुक्त आ उच्चरित कएल जाइत अछि। जेना ऋ केँ री  रूपमे उच्चरित करब। आ देखियौ- एहि लेल देखिऔ क प्रयोग अनुचित। मुदा देखिऐ लेल देखियै अनुचित। क् सँ ह् धरि अ सम्मिलित भेलासँ क सँ ह बनैत अछि, मुदा उच्चारण काल हलन्त युक्त शब्दक अन्तक उच्चारणक प्रवृत्ति बढ़ल अछि, मुदा हम जखन मनोजमे ज् अन्तमे बजैत छी, तखनो पुरनका लोककेँ बजैत सुनबन्हि- मनोजऽ, वास्तवमे ओ अ युक्त ज् = ज बजै छथि।
फेर ज्ञ अछि ज् आ ञ क संयुक्त मुदा गलत उच्चारण होइत अछि- ग्य। ओहिना क्ष अछि क् आ ष क संयुक्त मुदा उच्चारण होइत अछि छ। फेर श् आ र क संयुक्त अछि श्र ( जेना श्रमिक) आ स् आ र क संयुक्त अछि स्र (जेना मिस्र)। त्र भेल त+र ।
उच्चारणक ऑडियो फाइल विदेह आर्काइव  http://www.videha.co.in/ पर उपलब्ध अछि। फेर केँ / सँ / पर पूर्व अक्षरसँ सटा कऽ लिखू मुदा तँ/ के/ कऽ हटा कऽ। एहिमे सँ मे पहिल सटा कऽ लिखू आ बादबला हटा कऽ। अंकक बाद टा लिखू सटा कऽ मुदा अन्य ठाम टा लिखू हटा कऽजेना छहटा मुदा सभ टा। फेर ६अ म सातम लिखू- छठम सातम नहि। घरबलामे बला मुदा घरवालीमे वाली प्रयुक्त करू।
रहए- रहै मुदा सकैए (उच्चारण सकै-ए)।
मुदा कखनो काल रहए आ रहै मे अर्थ भिन्नता सेहो, जेना से कम्मो जगहमे पार्किंग करबाक अभ्यास रहै ओकरा। पुछलापर पता लागल जे ढुनढुन नाम्ना ई ड्राइवर कनाट प्लेसक पार्किंगमे काज करैत रहए
छलै, छलए मे सेहो एहि तरहक भेल। छलए क उच्चारण छल-ए सेहो।
संयोगने- (उच्चारण संजोगने)
केँ/ के / कऽ
केर- (केर क प्रयोग नहि करू )
क (जेना रामक) रामक आ संगे (उच्चारण राम के /  राम कऽ सेहो)
सँ- सऽ
चन्द्रबिन्दु आ अनुस्वार- अनुस्वारमे कंठ धरिक प्रयोग होइत अछि मुदा चन्द्रबिन्दुमे नहि। चन्द्रबिन्दुमे कनेक एकारक सेहो उच्चारण होइत अछि- जेना रामसँ- (उच्चारण राम सऽ)  रामकेँ- (उच्चारण राम कऽ/ राम के सेहो)।

केँ जेना रामकेँ भेल हिन्दीक को (राम को)- राम को= रामकेँ
क जेना रामक भेल हिन्दीक का ( राम का) राम का= रामक
कऽ जेना जा कऽ भेल हिन्दीक कर ( जा कर) जा कर= जा कऽ
सँ भेल हिन्दीक से (राम से) राम से= रामसँ
सऽ तऽ त केर एहि सभक प्रयोग अवांछित।
के दोसर अर्थेँ प्रयुक्त भऽ सकैए- जेना के कहलक?
नञि, नहि, नै, नइ, नँइ, नइँ एहि सभक उच्चारण- नै

त्त्व क बदलामे त्व जेना महत्वपूर्ण (महत्त्वपूर्ण नहि) जतए अर्थ बदलि जाए ओतहि मात्र तीन अक्षरक संयुक्ताक्षरक प्रयोग उचित। सम्पति- उच्चारण स म्प इ त (सम्पत्ति नहि- कारण सही उच्चारण आसानीसँ सम्भव नहि)। मुदा सर्वोत्तम (सर्वोतम नहि)।
राष्ट्रिय (राष्ट्रीय नहि)
सकैए/ सकै (अर्थ परिवर्तन)
पोछैले/
पोछैए/ पोछए/ (अर्थ परिवर्तन)
पोछए/ पोछै
ओ लोकनि ( हटा कऽ, ओ मे बिकारी नहि)
ओइ/ ओहि
ओहिले/ ओहि लेल
जएबेँ/ बैसबेँ
पँचभइयाँ
देखियौक (देखिऔक बहि- तहिना अ मे ह्रस्व आ दीर्घक मात्राक प्रयोग अनुचित)
जकाँ/ जेकाँ
तँइ/ तैँ
होएत/ हएत
नञि/ नहि/ नँइ/ नइँ
सौँसे
बड़/ बड़ी (झोराओल)
गाए (गाइ नहि)
रहलेँ/ पहिरतैँ
हमहीं/ अहीं
सब - सभ
सबहक - सभहक
धरि - तक
गप- बात
बूझब - समझब
बुझलहुँ - समझलहुँ
हमरा आर - हम सभ
आकि- आ कि
सकैछ/ करैछ (गद्यमे प्रयोगक आवश्यकता नहि)
मे केँ सँ पर (शब्दसँ सटा कऽ) तँ कऽ धऽ दऽ (शब्दसँ हटा कऽ) मुदा दूटा वा बेशी विभक्ति संग रहलापर पहिल विभक्ति टाकेँ सटाऊ।
एकटा दूटा (मुदा कैक टा)
बिकारीक प्रयोग शब्दक अन्तमे, बीचमे अनावश्यक रूपेँ नहि। आकारान्त आ अन्तमे अ क बाद बिकारीक प्रयोग नहि (जेना दिअ, आ )
अपोस्ट्रोफीक प्रयोग बिकारीक बदलामे करब अनुचित आ मात्र फॉन्टक तकनीकी न्यूनताक परिचायक)- ओना बिकारीक संस्कृत रूप ऽ अवग्रह कहल जाइत अछि आ वर्तनी आ उच्चारण दुनू ठाम एकर लोप रहैत अछि/ रहि सकैत अछि (उच्चारणमे लोप रहिते अछि)। मुदा अपोस्ट्रोफी सेहो अंग्रेजीमे पसेसिव केसमे होइत अछि आ फ्रेंचमे शब्दमे जतए एकर प्रयोग होइत अछि जेना raison d’etre एतए सेहो एकर उच्चारण रैजौन डेटर होइत अछि, माने अपोस्ट्रॉफी अवकाश नहि दैत अछि वरन जोड़ैत अछि, से एकर प्रयोग बिकारीक बदला देनाइ तकनीकी रूपेँ सेहो अनुचित)।
अइमे, एहिमे
जइमे, जाहिमे
एखन/ अखन/ अइखन

केँ (के नहि) मे (अनुस्वार रहित)
भऽ
मे
दऽ
तँ (तऽ त नहि)
सँ ( सऽ स नहि)
गाछ तर
गाछ लग
साँझ खन
जो (जो go, करै जो do)

३.नेपाल भारतक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली

1.नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक
  उच्चारण आ लेखन शैली
(भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित)
मैथिलीमे उच्चारण तथा लेखन

१.पञ्चमाक्षर आ अनुस्वार: पञ्चमाक्षरान्तर्गत ङ,,, न एवं म अबैत अछि। संस्कृत भाषाक अनुसार शब्दक अन्तमे जाहि वर्गक अक्षर रहैत अछि ओही वर्गक पञ्चमाक्षर अबैत अछि। जेना-
अङ्क (क वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ङ् आएल अछि।)
पञ्च (च वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ञ् आएल अछि।)
खण्ड (ट वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ण् आएल अछि।)
सन्धि (त वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे न् आएल अछि।)
खम्भ (प वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे म् आएल अछि।)
उपर्युक्त बात मैथिलीमे कम देखल जाइत अछि। पञ्चमाक्षरक बदलामे अधिकांश जगहपर अनुस्वारक प्रयोग देखल जाइछ। जेना- अंक, पंच, खंड, संधि, खंभ आदि। व्याकरणविद पण्डित गोविन्द झाक कहब छनि जे कवर्ग, चवर्ग आ टवर्गसँ पूर्व अनुस्वार लिखल जाए तथा तवर्ग आ पवर्गसँ पूर्व पञ्चमाक्षरे लिखल जाए। जेना- अंक, चंचल, अंडा, अन्त तथा कम्पन। मुदा हिन्दीक निकट रहल आधुनिक लेखक एहि बातकेँ नहि मानैत छथि। ओ लोकनि अन्त आ कम्पनक जगहपर सेहो अंत आ कंपन लिखैत देखल जाइत छथि।
नवीन पद्धति किछु सुविधाजनक अवश्य छैक। किएक तँ एहिमे समय आ स्थानक बचत होइत छैक। मुदा कतोक बेर हस्तलेखन वा मुद्रणमे अनुस्वारक छोट सन बिन्दु स्पष्ट नहि भेलासँ अर्थक अनर्थ होइत सेहो देखल जाइत अछि। अनुस्वारक प्रयोगमे उच्चारण-दोषक सम्भावना सेहो ततबए देखल जाइत अछि। एतदर्थ कसँ लऽ कऽ पवर्ग धरि पञ्चमाक्षरेक प्रयोग करब उचित अछि। यसँ लऽ कऽ ज्ञ धरिक अक्षरक सङ्ग अनुस्वारक प्रयोग करबामे कतहु कोनो विवाद नहि देखल जाइछ।

२.ढ आ ढ़ : ढ़क उच्चारण “र् ह”जकाँ होइत अछि। अतः जतऽ “र् ह”क उच्चारण हो ओतऽ मात्र ढ़ लिखल जाए। आन ठाम खाली ढ लिखल जएबाक चाही। जेना-
ढ = ढाकी, ढेकी, ढीठ, ढेउआ, ढङ्ग, ढेरी, ढाकनि, ढाठ आदि।
ढ़ = पढ़ाइ, बढ़ब, गढ़ब, मढ़ब, बुढ़बा, साँढ़, गाढ़, रीढ़, चाँढ़, सीढ़ी, पीढ़ी आदि।
उपर्युक्त शब्द सभकेँ देखलासँ ई स्पष्ट होइत अछि जे साधारणतया शब्दक शुरूमे ढ आ मध्य तथा अन्तमे ढ़ अबैत अछि। इएह नियम ड आ ड़क सन्दर्भ सेहो लागू होइत अछि।

३.व आ ब : मैथिलीमे “व”क उच्चारण ब कएल जाइत अछि, मुदा ओकरा ब रूपमे नहि लिखल जएबाक चाही। जेना- उच्चारण : बैद्यनाथ, बिद्या, नब, देबता, बिष्णु, बंश, बन्दना आदि। एहि सभक स्थानपर क्रमशः वैद्यनाथ, विद्या, नव, देवता, विष्णु, वंश, वन्दना लिखबाक चाही। सामान्यतया व उच्चारणक लेल ओ प्रयोग कएल जाइत अछि। जेना- ओकील, ओजह आदि।

४.य आ ज : कतहु-कतहु “य”क उच्चारण “ज”जकाँ करैत देखल जाइत अछि, मुदा ओकरा ज नहि लिखबाक चाही। उच्चारणमे यज्ञ, जदि, जमुना, जुग, जाबत, जोगी, जदु, जम आदि कहल जाएबला शब्द सभकेँ क्रमशः यज्ञ, यदि, यमुना, युग, यावत, योगी, यदु, यम लिखबाक चाही।

५.ए आ य : मैथिलीक वर्तनीमे ए आ य दुनू लिखल जाइत अछि।
प्राचीन वर्तनी- कएल, जाए, होएत, माए, भाए, गाए आदि।
नवीन वर्तनी- कयल, जाय, होयत, माय, भाय, गाय आदि।
सामान्यतया शब्दक शुरूमे ए मात्र अबैत अछि। जेना एहि, एना, एकर, एहन आदि। एहि शब्द सभक स्थानपर यहि, यना, यकर, यहन आदिक प्रयोग नहि करबाक चाही। यद्यपि मैथिलीभाषी थारू सहित किछु जातिमे शब्दक आरम्भोमे “ए”केँ य कहि उच्चारण कएल जाइत अछि।
ए आ “य”क प्रयोगक सन्दर्भमे प्राचीने पद्धतिक अनुसरण करब उपयुक्त मानि एहि पुस्तकमे ओकरे प्रयोग कएल गेल अछि। किएक तँ दुनूक लेखनमे कोनो सहजता आ दुरूहताक बात नहि अछि। आ मैथिलीक सर्वसाधारणक उच्चारण-शैली यक अपेक्षा एसँ बेसी निकट छैक। खास कऽ कएल, हएब आदि कतिपय शब्दकेँ कैल, हैब आदि रूपमे कतहु-कतहु लिखल जाएब सेहो “ए”क प्रयोगकेँ बेसी समीचीन प्रमाणित करैत अछि।

६.हि, हु तथा एकार, ओकार : मैथिलीक प्राचीन लेखन-परम्परामे कोनो बातपर बल दैत काल शब्दक पाछाँ हि, हु लगाओल जाइत छैक। जेना- हुनकहि, अपनहु, ओकरहु, तत्कालहि, चोट्टहि, आनहु आदि। मुदा आधुनिक लेखनमे हिक स्थानपर एकार एवं हुक स्थानपर ओकारक प्रयोग करैत देखल जाइत अछि। जेना- हुनके, अपनो, तत्काले, चोट्टे, आनो आदि।

७.ष तथा ख : मैथिली भाषामे अधिकांशतः षक उच्चारण ख होइत अछि। जेना- षड्यन्त्र (खड़यन्त्र), षोडशी (खोड़शी), षट्कोण (खटकोण), वृषेश (वृखेश), सन्तोष (सन्तोख) आदि।

८.ध्वनि-लोप : निम्नलिखित अवस्थामे शब्दसँ ध्वनि-लोप भऽ जाइत अछि:
(क) क्रियान्वयी प्रत्यय अयमे य वा ए लुप्त भऽ जाइत अछि। ओहिमे सँ पहिने अक उच्चारण दीर्घ भऽ जाइत अछि। ओकर आगाँ लोप-सूचक चिह्न वा विकारी (’ / ऽ) लगाओल जाइछ। जेना-
पूर्ण रूप : पढ़ए (पढ़य) गेलाह, कए (कय) लेल, उठए (उठय) पड़तौक।
अपूर्ण रूप : पढ़’ गेलाह, क’ लेल, उठ’ पड़तौक।
पढ़ऽ गेलाह, कऽ लेल, उठऽ पड़तौक।
(ख) पूर्वकालिक कृत आय (आए) प्रत्ययमे य (ए) लुप्त भऽ जाइछ, मुदा लोप-सूचक विकारी नहि लगाओल जाइछ। जेना-
पूर्ण रूप : खाए (य) गेल, पठाय (ए) देब, नहाए (य) अएलाह।
अपूर्ण रूप : खा गेल, पठा देब, नहा अएलाह।
(ग) स्त्री प्रत्यय इक उच्चारण क्रियापद, संज्ञा, ओ विशेषण तीनूमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना-
पूर्ण रूप : दोसरि मालिनि चलि गेलि।
अपूर्ण रूप : दोसर मालिन चलि गेल।
(घ) वर्तमान कृदन्तक अन्तिम त लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना-
पूर्ण रूप : पढ़ैत अछि, बजैत अछि, गबैत अछि।
अपूर्ण रूप : पढ़ै अछि, बजै अछि, गबै अछि।
(ङ) क्रियापदक अवसान इक, उक, ऐक तथा हीकमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना-
पूर्ण रूप: छियौक, छियैक, छहीक, छौक, छैक, अबितैक, होइक।
अपूर्ण रूप : छियौ, छियै, छही, छौ, छै, अबितै, होइ।
(च) क्रियापदीय प्रत्यय न्ह, हु तथा हकारक लोप भऽ जाइछ। जेना-
पूर्ण रूप : छन्हि, कहलन्हि, कहलहुँ, गेलह, नहि।
अपूर्ण रूप : छनि, कहलनि, कहलौँ, गेलऽ, नइ, नञि, नै।

९.ध्वनि स्थानान्तरण : कोनो-कोनो स्वर-ध्वनि अपना जगहसँ हटि कऽ दोसर ठाम चलि जाइत अछि। खास कऽ ह्रस्व इ आ उक सम्बन्धमे ई बात लागू होइत अछि। मैथिलीकरण भऽ गेल शब्दक मध्य वा अन्तमे जँ ह्रस्व इ वा उ आबए तँ ओकर ध्वनि स्थानान्तरित भऽ एक अक्षर आगाँ आबि जाइत अछि। जेना- शनि (शइन), पानि (पाइन), दालि ( दाइल), माटि (माइट), काछु (काउछ), मासु (माउस) आदि। मुदा तत्सम शब्द सभमे ई निअम लागू नहि होइत अछि। जेना- रश्मिकेँ रइश्म आ सुधांशुकेँ सुधाउंस नहि कहल जा सकैत अछि।

१०.हलन्त(्)क प्रयोग : मैथिली भाषामे सामान्यतया हलन्त (्)क आवश्यकता नहि होइत अछि। कारण जे शब्दक अन्तमे अ उच्चारण नहि होइत अछि। मुदा संस्कृत भाषासँ जहिनाक तहिना मैथिलीमे आएल (तत्सम) शब्द सभमे हलन्त प्रयोग कएल जाइत अछि। एहि पोथीमे सामान्यतया सम्पूर्ण शब्दकेँ मैथिली भाषा सम्बन्धी निअम अनुसार हलन्तविहीन राखल गेल अछि। मुदा व्याकरण सम्बन्धी प्रयोजनक लेल अत्यावश्यक स्थानपर कतहु-कतहु हलन्त देल गेल अछि। प्रस्तुत पोथीमे मथिली लेखनक प्राचीन आ नवीन दुनू शैलीक सरल आ समीचीन पक्ष सभकेँ समेटि कऽ वर्ण-विन्यास कएल गेल अछि। स्थान आ समयमे बचतक सङ्गहि हस्त-लेखन तथा तकनीकी दृष्टिसँ सेहो सरल होबऽबला हिसाबसँ वर्ण-विन्यास मिलाओल गेल अछि। वर्तमान समयमे मैथिली मातृभाषी पर्यन्तकेँ आन भाषाक माध्यमसँ मैथिलीक ज्ञान लेबऽ पड़ि रहल परिप्रेक्ष्यमे लेखनमे सहजता तथा एकरूपतापर ध्यान देल गेल अछि। तखन मैथिली भाषाक मूल विशेषता सभ कुण्ठित नहि होइक, ताहू दिस लेखक-मण्डल सचेत अछि। प्रसिद्ध भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक कहब छनि जे सरलताक अनुसन्धानमे एहन अवस्था किन्नहु ने आबऽ देबाक चाही जे भाषाक विशेषता छाँहमे पडि जाए।
-(भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ निर्धारित)

2. मैथिली अकादमी
, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली

1. जे शब्द मैथिली-साहित्यक प्राचीन कालसँ आइ धरि जाहि वर्त्तनीमे प्रचलित अछि
, से सामान्यतः ताहि वर्त्तनीमे लिखल जाय- उदाहरणार्थ-

ग्राह्य

एखन
ठाम
जकर
, तकर
तनिकर
अछि

अग्राह्य
अखन
, अखनि, एखेन, अखनी
ठिमा
, ठिना, ठमा
जेकर
, तेकर
तिनकर। (वैकल्पिक रूपेँ ग्राह्य)
ऐछ
, अहि, ए।

2. निम्नलिखित तीन प्रकारक रूप वैकल्पिकतया अपनाओल जाय: भऽ गेल
, भय गेल वा भए गेल। जा रहल अछि, जाय रहल अछि, जाए रहल अछि। कर गेलाह, वा करय गेलाह वा करए गेलाह।

3. प्राचीन मैथिलीक
न्हध्वनिक स्थानमे लिखल जाय सकैत अछि यथा कहलनि वा कहलन्हि।

4.
तथा ततय लिखल जाय जतस्पष्टतः अइतथा अउसदृश उच्चारण इष्ट हो। यथा- देखैत, छलैक, बौआ, छौक इत्यादि।

5. मैथिलीक निम्नलिखित शब्द एहि रूपे प्रयुक्त होयत: जैह
, सैह, इएह, ओऐह, लैह तथा दैह।

6. ह्र्स्व इकारांत शब्दमे
के लुप्त करब सामान्यतः अग्राह्य थिक। यथा- ग्राह्य देखि आबह, मालिनि गेलि (मनुष्य मात्रमे)।

7. स्वतंत्र ह्रस्व
वा प्राचीन मैथिलीक उद्धरण आदिमे तँ यथावत राखल जाय, किंतु आधुनिक प्रयोगमे वैकल्पिक रूपेँ वा लिखल जाय। यथा:- कयल वा कएल, अयलाह वा अएलाह, जाय वा जाए इत्यादि।

8. उच्चारणमे दू स्वरक बीच जे
ध्वनि स्वतः आबि जाइत अछि तकरा लेखमे स्थान वैकल्पिक रूपेँ देल जाय। यथा- धीआ, अढ़ैआ, विआह, वा धीया, अढ़ैया, बियाह।

9. सानुनासिक स्वतंत्र स्वरक स्थान यथासंभव
लिखल जाय वा सानुनासिक स्वर। यथा:- मैञा, कनिञा, किरतनिञा वा मैआँ, कनिआँ, किरतनिआँ।

10. कारकक विभक्त्तिक निम्नलिखित रूप ग्राह्य:- हाथकेँ
, हाथसँ, हाथेँ, हाथक, हाथमे। मेमे अनुस्वार सर्वथा त्याज्य थिक। क वैकल्पिक रूप केरराखल जा सकैत अछि।

11. पूर्वकालिक क्रियापदक बाद
कयवा कए अव्यय वैकल्पिक रूपेँ लगाओल जा सकैत अछि। यथा:- देखि कय वा देखि कए।

12. माँग
, भाँग आदिक स्थानमे माङ, भाङ इत्यादि लिखल जाय।

13. अर्द्ध
ओ अर्द्ध क बदला अनुसार नहि लिखल जाय, किंतु छापाक सुविधार्थ अर्द्ध ’ , ‘’, तथा क बदला अनुस्वारो लिखल जा सकैत अछि। यथा:- अङ्क, वा अंक, अञ्चल वा अंचल, कण्ठ वा कंठ।

14. हलंत चिह्न निअमतः लगाओल जाय
, किंतु विभक्तिक संग अकारांत प्रयोग कएल जाय। यथा:- श्रीमान्, किंतु श्रीमानक।

15. सभ एकल कारक चिह्न शब्दमे सटा क
लिखल जाय, हटा कनहि, संयुक्त विभक्तिक हेतु फराक लिखल जाय, यथा घर परक।

16. अनुनासिककेँ चन्द्रबिन्दु द्वारा व्यक्त कयल जाय। परंतु मुद्रणक सुविधार्थ हि समान जटिल मात्रापर अनुस्वारक प्रयोग चन्द्रबिन्दुक बदला कयल जा सकैत अछि। यथा- हिँ केर बदला हिं।

17. पूर्ण विराम पासीसँ ( । ) सूचित कयल जाय।

18. समस्त पद सटा क
लिखल जाय, वा हाइफेनसँ जोड़ि क’ ,  हटा क नहि।

19. लिअ तथा दिअ शब्दमे बिकारी (ऽ) नहि लगाओल जाय।

20. अंक देवनागरी रूपमे राखल जाय।

21.किछु ध्वनिक लेल नवीन चिन्ह बनबाओल जाय। जा
' ई नहि बनल अछि ताबत एहि दुनू ध्वनिक बदला पूर्ववत् अय/ आय/ अए/ आए/ आओ/ अओ लिखल जाय। आकि ऎ वा ऒ सँ व्यक्त कएल जाय।

ह./- गोविन्द झा ११/८/७६ श्रीकान्त ठाकुर ११/८/७६ सुरेन्द्र झा "सुमन" ११/०८/७६


No comments:

Post a Comment

"विदेह" प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका http://www.videha.co.in/:-
सम्पादक/ लेखककेँ अपन रचनात्मक सुझाव आ टीका-टिप्पणीसँ अवगत कराऊ, जेना:-
1. रचना/ प्रस्तुतिमे की तथ्यगत कमी अछि:- (स्पष्ट करैत लिखू)|
2. रचना/ प्रस्तुतिमे की कोनो सम्पादकीय परिमार्जन आवश्यक अछि: (सङ्केत दिअ)|
3. रचना/ प्रस्तुतिमे की कोनो भाषागत, तकनीकी वा टंकन सम्बन्धी अस्पष्टता अछि: (निर्दिष्ट करू कतए-कतए आ कोन पाँतीमे वा कोन ठाम)|
4. रचना/ प्रस्तुतिमे की कोनो आर त्रुटि भेटल ।
5. रचना/ प्रस्तुतिपर अहाँक कोनो आर सुझाव ।
6. रचना/ प्रस्तुतिक उज्जवल पक्ष/ विशेषता|
7. रचना प्रस्तुतिक शास्त्रीय समीक्षा।

अपन टीका-टिप्पणीमे रचना आ रचनाकार/ प्रस्तुतकर्ताक नाम अवश्य लिखी, से आग्रह, जाहिसँ हुनका लोकनिकेँ त्वरित संदेश प्रेषण कएल जा सकय। अहाँ अपन सुझाव ई-पत्र द्वारा ggajendra@videha.com पर सेहो पठा सकैत छी।

"विदेह" मानुषिमिह संस्कृताम् :- मैथिली साहित्य आन्दोलनकेँ आगाँ बढ़ाऊ।- सम्पादक। http://www.videha.co.in/
पूर्वपीठिका : इंटरनेटपर मैथिलीक प्रारम्भ हम कएने रही 2000 ई. मे अपन भेल एक्सीडेंट केर बाद, याहू जियोसिटीजपर 2000-2001 मे ढेर रास साइट मैथिलीमे बनेलहुँ, मुदा ओ सभ फ्री साइट छल से किछु दिनमे अपने डिलीट भऽ जाइत छल। ५ जुलाई २००४ केँ बनाओल “भालसरिक गाछ” जे http://www.videha.com/ पर एखनो उपलब्ध अछि, मैथिलीक इंटरनेटपर प्रथम उपस्थितिक रूपमे अखनो विद्यमान अछि। फेर आएल “विदेह” प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका http://www.videha.co.in/पर। “विदेह” देश-विदेशक मैथिलीभाषीक बीच विभिन्न कारणसँ लोकप्रिय भेल। “विदेह” मैथिलक लेल मैथिली साहित्यक नवीन आन्दोलनक प्रारम्भ कएने अछि। प्रिंट फॉर्ममे, ऑडियो-विजुअल आ सूचनाक सभटा नवीनतम तकनीक द्वारा साहित्यक आदान-प्रदानक लेखकसँ पाठक धरि करबामे हमरा सभ जुटल छी। नीक साहित्यकेँ सेहो सभ फॉरमपर प्रचार चाही, लोकसँ आ माटिसँ स्नेह चाही। “विदेह” एहि कुप्रचारकेँ तोड़ि देलक, जे मैथिलीमे लेखक आ पाठक एके छथि। कथा, महाकाव्य,नाटक, एकाङ्की आ उपन्यासक संग, कला-चित्रकला, संगीत, पाबनि-तिहार, मिथिलाक-तीर्थ,मिथिला-रत्न, मिथिलाक-खोज आ सामाजिक-आर्थिक-राजनैतिक समस्यापर सारगर्भित मनन। “विदेह” मे संस्कृत आ इंग्लिश कॉलम सेहो देल गेल, कारण ई ई-पत्रिका मैथिलक लेल अछि, मैथिली शिक्षाक प्रारम्भ कएल गेल संस्कृत शिक्षाक संग। रचना लेखन आ शोध-प्रबंधक संग पञ्जी आ मैथिली-इंग्लिश कोषक डेटाबेस देखिते-देखिते ठाढ़ भए गेल। इंटरनेट पर ई-प्रकाशित करबाक उद्देश्य छल एकटा एहन फॉरम केर स्थापना जाहिमे लेखक आ पाठकक बीच एकटा एहन माध्यम होए जे कतहुसँ चौबीसो घंटा आ सातो दिन उपलब्ध होअए। जाहिमे प्रकाशनक नियमितता होअए आ जाहिसँ वितरण केर समस्या आ भौगोलिक दूरीक अंत भऽ जाय। फेर सूचना-प्रौद्योगिकीक क्षेत्रमे क्रांतिक फलस्वरूप एकटा नव पाठक आ लेखक वर्गक हेतु, पुरान पाठक आ लेखकक संग, फॉरम प्रदान कएनाइ सेहो एकर उद्देश्य छ्ल। एहि हेतु दू टा काज भेल। नव अंकक संग पुरान अंक सेहो देल जा रहल अछि। विदेहक सभटा पुरान अंक pdf स्वरूपमे देवनागरी, मिथिलाक्षर आ ब्रेल, तीनू लिपिमे, डाउनलोड लेल उपलब्ध अछि आ जतए इंटरनेटक स्पीड कम छैक वा इंटरनेट महग छैक ओतहु ग्राहक बड्ड कम समयमे ‘विदेह’ केर पुरान अंकक फाइल डाउनलोड कए अपन कंप्युटरमे सुरक्षित राखि सकैत छथि आ अपना सुविधानुसारे एकरा पढ़ि सकैत छथि।
मुदा ई तँ मात्र प्रारम्भ अछि।
अपन टीका-टिप्पणी एतए पोस्ट करू वा अपन सुझाव ई-पत्र द्वारा ggajendra@videha.com पर पठाऊ।

'विदेह' २२८ म अंक १५ जून २०१७ (वर्ष १० मास ११४ अंक २२८)

ऐ  अंकमे अछि :- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१. डॉ. कैलाश कुमार मिश्र -  गौरी चोरनी ,  गौरी डाईन आ गौरी छिनारि: मधुश्रावणी कथा केर ...