Sunday, February 07, 2010

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खंजनि चलली बगढड़ाक चालि, अपनो चालि बिसरली अपन वस्तुलक परित्याकग क’ आनक अनुकरण कयलापर अपनो व्यिवहार बिसरि गेलापर व्यंपग्यय।
खइनी अछि दुइ मोहिनी पइघ पइघ पात, लाख टकाक आदमी सेहो पसारय हाथ खैनीमे एहन सम्मोलहन शक्ति अछि तथा ओकर पैघ-पैघ पात होइछ ।
खइनी अछि दुइ मोहनी सान अछि बेइमान, चीलम बेचारा की करे राखे सभक मान खैनीमे सम्मोीहनशकित्‍ अछि, ओकर बैमानीमे अछि।
खइनी खाय ने तमाकू पीये, से नर कइसे जीये जे पुरुष ने तँ खैनी खाइछ आ ने तमाकू पीबैछ, ओ कोन प्राकारेँ जीवित अछि, इएह तँ समस्या अछि।
खइनी पीनी टनमनी रोग खाइत-पीबैत अछि सब किछु, मुदा सतत रोगी हैबाक बहन्ना करैत रहैत अछि।
खइले पीने घोयने हाथ, के सूते केकरा साथ खा-पी क’ हाथ तँ धोलहुँ ।
खइहऽ भइया इहाँ, सूतीहऽ जमइया इहाँ भोजन करैत अछि भायक ओतय सुतैत अछि जमायक ओतय।
खग जाने खगहिक भासा चिड़े चिड़ैक भाषा सुगमतापूर्वक जानैछ।
खाटिक के धन खोटा खाय खटिकक धन कतहु खोटा खा सकैछ।
खटि कऽ मरला लुच्चान, जस लुटइ छथि फुच्चलन, ओहि ला ताल ठोकइत छथि लुच्चलन, सबटा लच्छलन भेल कुलच्छचन काज करैत-करैत लुच्चरन मरि रहल अछि, मुदा फुच्छान सब यश लुटि रहल अछि।
खट्टा अंगूर के खाय जे वस्तुग अप्राप्यट अछि तकरा निरर्थक कहब, तँ व्यंाग्य ।
खढ़ कटाए बाढ़नि बन्हायएब मारब बाढ़नि सूपे, टीक पकडि़ कऽ नगर घुमाएब हमरो साहेब ठीके पत्नीब पतिपर कोना शासन क’ ठीक रखैछ तकर चित्र प्रस्तुित कयल गेल अछि।
खतरी से गोरा पाण्डुर रोगी, कायथ से चतुर परभोगी खत्री गौर वर्ण होइछ।
खनजन चलल बगड़ाक चालि, अपनो चालि बिसरलनि अपन आधारकेँ छेडि़ जे आन आधारक अवलंबन करैछ, तकर परिणाम होइछ जे निज आधार सेहो समाप्त भ’ जाइछ।
खनोमे खन रंग, खनोमे तीन रंग एक क्षणमे एक रंग तथा दोसर क्षणमे दोसर रंगक भ’ जाइछ।
खबइया के राम देबइया खैनिहारकेँ भगवान कतहु-ने-कतहुसँ निश्चाये व्यहवस्थाो करैत छथि।
खयने पीयने धोयने हाथ, सुतने ककरा साथ भोजनोपरान्तध सब हाथ-पैर धो लेलक।
खयाली पुलाब, मनमोदक भोजन काल्प निक सुख कयनिहारपर व्यं ग्यल।
खरची के ओर तीसी, बरखा के ओर झींसी जतय तरकारीक स्था नपर तीसीसँ काज चलाओल जाइछ ततय अनुमान करबाक चाही जे ओहि परिवारमे खर्चाक अभाव अछि।
खर जितिया करब कोनो अशुभ घटनासँ बाल-बाल बाँचब, तँ कहल जाइछ।
खर मजूरी चोखा काम जँ मजदूरी नीक भेटत तँ काज सेहो नीके हैत।
खरबूजा के देखि खरबूजा रंग बदलैछ जेहन परिस्थिति रहैछ ताहि रूपक कार्य करब, तँ व्यंिग्य्।
खरही खरखराय, तऽ कैथ पराय कायस्थर खढ़ खरखरैला मात्रसँ पड़ा जाइत अछि।
खरी खा मसान जा अखाद्य वस्तुज खायब तँ श्मपशान जाय पड़त, कारण खरी दस्ता वर होइछ।
खरी ने खाय बड़द, कोल्हूप चाटे जाय सोझाँमे बड़दकेँ खरी देल गेल अछि, मुदा ओ कोल्हुब चाटि रहल अछि।
खयबाक मन अपना, गौसा‍ञि देलनि सपना खयबाक इच्छाद तँ अपना छलनि, मुदा लाथ कयलनि जे गोसाँइ हमरा स्वनप्न, देलनि अछि।
खन कि दआ पीठ के पूजा दुष्ट व्यपक्तिकेँ उचित मार्गपर रखबाक हेतु ओकरा संग मारिपीट करब उचित ।
खलिया बन्दूरक भड़ा भड़ी निरर्थक गप्प‍ हँकनिहारपर व्यं ग्या।
खलिया हाथ मुह ने पइस आन व्यहक्ति मात्र बोल भरोस द’ सकैछ, परन्तुह यथार्थ सहायता क्योद ककरो ने करैछ।
खसने ने लजाइ, हँसने लजाइ खसि पड़लासँ लज्जा क अनुभव नहि करबाक चाही।
खसल की गिरत जे गिरल अछि ओ आर की गिरत।
खसला सऽ हँसलाक लाज खसला सऽ हँसलाक लाज
खसली पहाड़ सऽ, रुसली भतार सऽ पहाड़परसँ स्व यं खसि पड़ली, मुदा पतिसँ रुसि क’ बैसल छथि।
खस्सीकक जान जाय, खबइया के सबादे ने खस्सीकक जान चल गेल, मुदरा खयनिहारकेँ कोनो स्वा दे ने भेटि रहल छैक।
खस्सीस के जान जाय, खबैया के सबाद बढ़े ककरो कष्ट सँ ककरो आनन्द क अनुभव होइछ, तँ प्रयुक्ति।
खस्सीक खा कऽ खस्सीतक आँड़ बाँतर खस्सीक खायब, मुदा ओकर अंडकोषकेँ वर्जित मानब।
खस्सीत मारि घरबइया खाय, हत्याँ नेने पाहुन जाय खस्सी मारि क’ तँ घरबारी खयलक, मुदा ओकर हत्या क पाप नेने पाहुन गेल।
खाइ छी घरे सऽ, कनैत छी अगहने सऽ घरमे खयबाक सब व्य वस्थाी छनि, मुदा सतत करैत रहैत छथि।
खाइतो जाय, बड़बराइतो जाय भोजनो क’ रहल छथि तथा बड़बड़ा सेहो छथि।
खाइतो रहे के, आ ललाइतो रहे के कोनो वस्तुक प्राप्तल होइतहिस ओकरा हेतु पुन: लालयित भेलापर व्यं ग्यइ ।
खाइ साग पात, आ सुती नबाबक साथ भोजन करैत अछि सागपात, मुदा संगति करैत पैघ-पैघ व्यपक्तिक।
खा कऽ चले कोस, अपने मरे दइब के दोस देo खा कऽ जल्दीे चली कोस मरी अपने दइबक दोस
खा कऽ जल्दीो चली कोस, मरी अपने दइबक दोस भोजनोपरान्तो जे शीघ्रहि प्रस्थामन करैछ ओकर स्वायं जाइछ, मुदा ओ भगवानकेँ दोष दैछ जे वैह हमर एहन अवस्था कयलनि अछि।
खा कऽ पसरी, मारि कऽ ससरी भोजनोपरान्तव आराम तथा मारि-पीटक पश्चापत् ओतयसँ विदा हैब आवश्याक, अन्याथा अनिष्ट क भय रहैछ।
खा कऽ मूते सूते बाम, से की बइद बसाबे गाम भोजनोपरान्तस लग्घी क’ बामा करौटे सुतनिहार व्याक्तिक गाममे वैद्य नहि बसबैछ, कारण कहियो क्योग अस्वसस्थछ नहि भ’ सकैछ।
खा करजा, जल्दीो मरि जा कर्ज खयलाक पश्चछपात् जल्दीम मरि जयबाक चाही।
खाक सन मीयाँ, बलाय सन दाढ़ी मियाँ तँ स्वशयं कुरूप अछि ताहिपर दाढ़ी रखने अछि।
खा कऽ सूते पट्ट, बइद बोलाबे झट्ट भोजनोपरान्तप पेटक बलपर सुतलापर शीघ्रहि वैद्य बजयबाक आवश्य कता होइछ।
खा कऽ सुते दहिने, बइद बोलाबे तहिने भोजनोपरान्तद दहिन करोट सुतलापर शीघ्रंहि वैद्य बजबाक प्रयोजन पड़ैछ।
खा कऽ सूते चित्त, बइद बोलाबे नित्त भोजनोपरान्तच जे चित्त सूति रहैछ ओकरा नित्यच वैद्य बजयबाक प्रयोजन पड़ैछ।
खा के पसरी, मारि कऽ ससरी भोजनोपरान्तच आराम मारि-पीटक पश्चाात् ओतयसँ विदा हैब समुचित।
खा के मूती, बामा करोटे सूती खा क’ लग्घी। क’ कए बामा करोटे सुतबाक चाही।
खाट घोरू तऽ दिनक बिचार, बाट चलू तऽ दिनक बिचार खाट घोरबामे एवं बाट चलबामे दिनक विचार करब पोंगापंथी विचार थिक।
खाता के राम दाता जे ख्पा यनिहार अछि तकरा भगवान कोनो-ने-कोनो रूपेँ व्यकवस्थान करैत छथि।
खा पी करे असलाना, तापर खुसी रहे भगबाना भोजनोपरान्तस स्नाकन कयलापर भगवान प्रसन्ना रहैत छथि।
खाय काल मन छटपट करे, ई मन होइयऽ खाइते रही, कमाय काल मन कसमस करे ई मन होइयऽ पड़ले रही खयबाक लेल मन छटपअ करेत रहैछ।
खाय काल सब केओ, करम काल केओ ने खयबा काल सब प्रस्तुरत भ’ जाइछ, परन्ुबा कोनो उपस्थित भेलापर क्योत ने उपस्थित होइछ।
खाय के नाना के, कहाय के दादा के खाइत अछि नानाक अन्नय, मुदा कहबैत अछि दादाक ।
खाय के बाघ, कमाय के मुरगी खयबा काल बाघ सदृश भोजन करैछ, मुदा काज करबा काल मुर्गीक समान रहैछ।
खाय के भसर भसर, उपजे के एक पसर क्षणहि-क्षण भोजन करैत अछि, मुदा खेती करबाक प्रश्न-पर मौन भ’ जाइत अछि।
खाय के रोजी ने, नहाय के तड़के भोजनक तँ कोनो उपाय नहि, मुदा स्नाेन प्रात: काल करैछ।
खाय के लाइ ने, पादे के मिठाइ घरमे खयबाक कोनो व्य वस्थाठ नहि छनि, मुदा बात तँ खूब बनबैत छथि।
खाय के साग पात, बैठे के अमीर के साथ भोजन तँ सागपात करैछ, तथापि अमीरक संगतिमे रहैत अछि।
खाय खरही सुखाबय पेट, तब ओ लछमी से भेट कम भोजन क’ कए जे पेट सुखबैत अछि तकरा लक्ष्मी’सँ भेट होइछ।
खाय बकरी जकाँ, सुखाय लकड़ी जकाँ खाइत अछि तँ बकरी सदृश, मुदा सुखायल जा रहल अछि लकड़ी सदृश।
खायब नानाक रोटी, कहायब दादाक पोती खाइत अछि नानाक रोटी आ कहबैत अछि दादाक पोती।
खायमे बरोबरि आ पादेमे अधिया भोजन करबा काल तँ बरोबरि रहैछ, मुदा कार्य करबाकाल आधा करैछ।
खायब से खायब, आरो की मोआ बान्हसब खायब ततबे धरि ने आ कि मोटा बान्हि क’ थोड़बहि संग ल’ जायब ? ककरो पेटपर शंका उत्प न्नस कयनिहारपर व्यं?ग्यप।
खायबाक हैत तऽ गहूँम खायब, ने तऽ किछु ने खायब चिक्कनन चुनमुन खयनिहार व्य क्तिपर व्यंकग्यन।
खाय भला कि माय भला भोजनप्रिय वस्तुभ अछि आ ओहूसँ प्रिय होइछ माय।
खायमे लोढ़ी, कमाबेमे कोढ़ी खयबामे अत्यसधिक पेटू, मुदा काज करबामे अत्यमन्त‍ कोढि़ ।
खाय ला आली बाली, तेल लगाबे ला तीन माली भोजनक तँ कोनो उपाय ने छनि, परन्तुे मालिस करैत छथि तीन माली तेलसँ।
खाय लेल घासपात, नाम पसेरी मल भोजन करैछ तुच्छत, मुदा नाम रखने छथि सेठ सदृश ।
खाय लै आली बाली, तेल लगाबे लै तीन माली वाह्माडम्बर तँ बड़ बेसी, किन्तुी यर्थाथत: गुण किछु ने तकरा संबंधमे कहल जाइछ।
खाली दिमाग अटपट सूझे बेकार बैसल व्यटक्तिक मनमे नाना प्रकारक विध्वंबसकारी बात अबैछ।
खाली दिमाग सैतानक डेरा बेकार बैसल लोकक मनमे अनेक खुराफत जन्मर लैछ।
खाली बइसल अटपट सुझे जे व्यइक्ति बेकार बैसल रहैछ तकर मनमे नाना प्रकारक विध्वंबसकारी बात सुझैत रहैछ।
खाली बनियाँ की करे, एहि कोठीक धान ओहि कोठी करे बनियाँ खाली अछि तेँ ओ एहि कोठीक धानकेँ ओहि कोठीमे करेत रहैछ।
खाली सऽ बेगारी नीक बेकार बैसल रहलासँ बेगारी करब उचित अछि।
खाली सिर सैतानक डेरा खाली मनमे शैतान निवास करैछ, अर्थात् जकरा कोनो काज नहि अछि, ओकर मनमे सतत अधलाहे बात अबैछ।
खाली हाथ मुह ने समाय खाली हाज्ञि मुहमे नहि प्रवेश क’ सकैछ।
खाली हाथ मुह समाय छै खाली हाथ कतहु मुहक लगा जा सकैछ ?
खा ले पी ले डेरामे आगि लगा ले घरसँ ततबे धरि संबंध छनि जाधरि हजुनका भोजन भेटैछ।
खिचड़ी खायमे मन लागे, तसला माजेमे गाँडि़ फाटे खिचडि़ खयबामे आनन्देक अनुभव होइछ, मुदा दुर्गञ्जन होइछ ओकर बासन मजबा काल।
खिसियाल बिलाइ खम्भा नोचे देo खिसियाल बिलाइ धुरखुर नोचे
खिसियाल बिलाइ धुरखुर नोचे बिलाइ क्रुद्ध अछि तेँ धुराखुर नोचि रहल अछि।
खिस्साक खतम, पइसा हजम जाहि कथापर विचार-विमर्श भ’ रहल छल ओ तँ समाप्तव भ’ गेल।
खिचड़ीक चारि इयार, पापर घी दही अँचार खिचडि़क भोजन पापड़, घी, दही एवं अँचार संग होइछ।
खिसिऐल बिलाडि़ धुराखुर नोचय क्रोधित व्यडक्ति अपनहि माथ नौचेछ।
खिस्सात गेल बिलमे, सोचू अपना दिलमे कथा तँ समाप्ता भ’ गेल, आगाँ की भेलैक ताहि प्रसंगमे अपना मनमे विचार करू।
खीर खयलनि गब दऽ, नोर खसलनि टप पऽ शीघ्रतासँ गरमा गरम खीर ले‍लनि जकर परिणाम भेज जे जी पाकि गेलनि आ आँखिसँ सोर टप द’ खसि पड़लनि।
खीर खाइक मन छल अपना, गोसा‍ञि देलनि सपना अपन स्वा र्थ सिद्धिक लेल कोनो बहन्नाि ताकब, तँ प्रयुक्ति।
खीर देखि आगू, खोरनाठ देखि पाछू खीरपर नजरि पडि़तहि ओकरा प्राप्तद करबाक उद्देश्य़सँ, मुदा ओतय खोरनाठ देखि क’ पड़यलाह।
खीर देखि कऽ बाभन नाचे, तन मन होबे राजी खपीर भोजन देखि ब्राह्मण प्रफुल्लित भ’ कए नाचय लगैछ, कारण ओकर मन हर्षित भ’ जाइछ।
खुट्टाक बले पड़रू चुकड़े खुट्टाक बलपर पड़रू चुकड़ैत अछि।
खुट्टाक बले पड़रू चुप्प़ अछि खुट्टाक बलपर पड़रू चुप्पि रहैत अछि।
खुद्दी खा कऽ भूख नष्ट् मुख्यी वस्तु्क अभावमे गौण वस्तुछक प्रयोग क’ कए अपन कार्य सिद्ध करबापर कहल जाइछ।
खुद्दी खा के बरत भंग तुच्छी वस्तुगक लोभमे संकल्प तोडनिहारपर व्यंछग्यत।
खुद्दी चुन्नीं के भात पकौलूँ अदहन देलूँ बहुत, भरि कठौती माड़ पसौलूँ पीआ न देहजरुआ पूत, नैहर खेलूँ सासुर खैलूँ कुल परिवार, गंगा पैस के आँचर बिनबों कब मुइहेँ भतार चाउरसँ खुद्दी बहार क’ भात बनौलहुँ, जाहिमे अदहन बेसी देल जे एक कठौती माड़ हैत, ओ हमर सब सन्ताान पीबि गेल।
खुरपी छुइलहुँ, बोझनि पौलहुँ खुरपीक स्पहर्श कयल आ बोनि (पारिश्रमिक) पाबि गेलहुँ।
खुसामदीक मुह कारी खुशामदी व्यहक्ति मुह उठा क’ नहि चलि सकैछ।
खुसी खोलाड़ी के खेल कयनिहार जेहन चाहैछ, तदनुरूप ओ करैछ।
खुसी रहू आबाद रहू, एतय रहू इलाबाद रहू एतय रहू वा कतहु रहु, खुशी रहू।
खुनक बदला फाँसी ककरो क्यो खून करैछ तँ ओकरा फाँसी देल जाइछ।
खेत खाय गदहा, मारि खाय जोलहा खेतक फसिल तँ गदहा खाइत अछि, मुदा ओकर बदला मारि खयलक ओकर मालिक जोलहा।
खेत खायत भँइस, मुह थुरल जाय पड़रू के खेत खाइत अछि महीस, मुदा ओकर बदला मुह थुरल जाइत अछि पड़रूकेँ।
खेत गुन खेत गुन पडि़ गेल बिआ, जइसन मइया तइसन धिया जेहन खेत रहैछ ओहिमे तदनुरूपेँ बीआ बाओग कयल जाइछ।
खेत तर खेतारी, जार तर भतारी खेतक लग खेत रहलापर चोरि करबामे सुविधा होइछ।
खेत ने जोती राड़ी, महीस ने पोसी पाड़ी राड़ी घासवला परती खेत जोतबामे तथा पाड़ी पोसि क’ महीस बनयबामे अत्यपधिक परिश्रम पड़ैछ, संगाहि फल प्राप्तिक हेतु दीर्घ प्रतीक्षा करय पड़ैछ।
खेत भासे आडि़ कोड़ी खेत भासल जा रहल अछि आ आडि़ कोडि़ रहल छी।
खेत महीस चरि, पड़रूआहि मारि खेत तँ महीस चरि गेल, मुदा मारि पड़ल पड़रूपर।
खेती कइली जीये ला, बड़द बिकासयल बीये ला खेती जीवन-निर्वाह करबाक हेतु प्रारंभ कयल, परन्तुह परिणाम भेल जे बीआ पर्यन्तव नहि उपर भेल।
खेती के परदेस जाय, तकर जनम अकारथ जाय खेती क’ कए जे ओकरा छोडि़ क’ परदेस चल जाइछ तकर जन्म निरर्थ्कि नष्टी भ’ जाइछ।
खेती जोरू जोर के, जोर घटे तऽ और के खेती आ पत्नीर दुनू शक्तिक अनुरूप ठीक रहैछ।
खेती धन पूरा धन आधा धन गहना, कपड़ा धरन किछुओ ने झाँटि धन लहना खेतीमे लगाओल धन प्रत्येगक दृष्टिएँ उत्तम मानल जाइछ।
खेती नासे कोल बेकोल, तिरिया नासे पुरुख के मोल खेतकेँ छोट-छोट खण्डयमे विभाजित क’ देलासँ ओ नष्ट भ’ जाइछ।
खेती ने करिहऽ बेपार ने करिहऽ, बिद्या के धन बइसल खइहऽ ने खेती करब, ने व्या पार करब, विद्याधन एहन अछि जे घर बैसल ओकरा भजा क’ खा सकैत छी।
खेती ने पथारी, पहाड़पर घरारी खेती-बारीक कतहु चर्चा नहि, परन्तुर घर बनौने अछि पहाड़पर।
खेती ने पथारी, हाकिम पोत माँगइये खेती-बारी हमरा किछु ने अछि, लेकिन अधिकारी भूमिकर माँगि रहल अछि।
खेती ने बारी, रब्बी के सात टा बखारी खेती-पथारी, प्रार्थना एवं घोड़ाक सवारी तुंग कयलासँ सुचारु रूपें चलैछ।
खेती बेटी नित्ते गाय, जे ने देखे तकर जाय नित्यबप्रति जे अपन खेती, बेटी एवं गायकेँ नहि देखैछ तँ ओकर विनाश भ’ जाइछ।
खेनाइ पिनाइ किछुओ ने, दुनू बेर दोमकज्जान खाइत-पिबैत किछु नहि अछि, मुदा भिनसर साँझ दोमकज्जाि करैत अछि।
खेबैया के राम देबैया खयनिहारकेँ राम पूरा कयनिहार होइत छथि।
खेबो दी भसिआयलो जाइ खेबो सेहो द’ रहल छी तथा नदीमे नाओ भसिया क’ डूबि रहल अछि।
खेबो ने से अगिले माँगि बिनु खेबाक नाओक अगिला माँगिपर चढ़निहारपर व्यं ग्यग।
खेल खतम, पइसा हजम खेल आब तँ समाप्त‍ भ’ गेल तेँ ओहि हेतु जे पैसा देलहुँ ओहो समाप्त भ’ गेल।
खेल खेलाड़ी भट्टा बाड़ी, बाड़ीमे पटकि मारी कोनो व्य क्तिकेँ उचित दण्डभ भेटलापर प्रयुक्त ।
खेल खेलैलनि बंगामे, किरिया खयलनि गंगामे बाँगक खेतमे खेल खेलौनि, मुदा अपनाकेँ निर्दोष प्रमाणित प्रमाणित करबाक हेतु गंगा नदीमे किरिया खयलनि।
खेल गे खेलनी, साँय आगू बेलनी गे खेलनी ! स्वासमीक परोक्षमे खूब खेल खेलाइत छेँ, परन्तुग स्वाषमीक आगाँ झूठ बजैत छेँ।
खेलनीक खेल किछु कहलो ने जाय, अदहन चढ़ाय खेलनी आगि लाबे जाय दुश्चचरित्र स्त्री क चरित्रक प्रसंगमे किछु ने कहल जा सकैछ।
खेलनीक खेल किछु कहलो ने जाय, बेर बरे खेलनी पानि भरे जाय खेलनी स्त्री क प्रसंगमे की कहल जाय ? ओ बारबार कोनो-ने-कोनो बहन्ना बना क’ पानि भरय जाइछ, जे अपन इयारक संग गप्प क’ सकय।
खेलरी छउड़ी के बेलक तेल जे छौड़ी खेलारि रहैछ तकरा बेलक तेलक प्रयोजन पड़ैछ।
खैनिहार के के रोकनिहार जे खायवला अछि तकरा क्योर नहि रोकि सकैछ।
खैने बीघा बइसने कोस यात्रामे भोजनार्थ बैलासँ एक बीघाक दूरी बढि़ जाइछ तथा बेसी बैसलासँ कोसक दूरी बढ़ैछ।
खैबऽ तऽ जैबऽ कहाँ खायब तँ अवश्येह किछु-ने-किछु करय पड़त।
खैबाक मन भेल अपना, गोसा‍ञि दे‍लनि सपना कार्य करबाक इच्छा तँ अपना छलनि, मुदा बहन्नाक बनौलनि जे हमरा भगवान स्वबप्नम देलनि अछि।
खैबा बेर सब केओ, करबाक बेर केओ ने भोजनक समय तँ सब उपस्थित भ’ जाइछ, मुदा जखन कार्य करबाक अवसर अबैछ, तँ क्योन नहि।
खैबामे चटनी, पलंगपर नटनी देखबा सुनबामे तँ अवश्येन नीक अछि, मुदा पतिक लग पलंगपर लटाढ़म करैत अछि।
खैबामे सेर कमयबामे बकरी भोजनक समय तँ शेर सदृश रोब-दाव प्रदर्शित करैछ, परन्तुव काज करबाक समय बकरी सदृश करय लगैछ।
खोंखली तऽ खोखली छीकली तऽ ने हम तँ मात्र खोखलहुँ अछि, मुदा छिकलहुँ कहाँ।
खोंखी ने करी, तऽ नाओ बूडि़ जाय खोखी कयलासँ कतहु नाओ डूबि सकैछ ? ककरो डरसँ कोनो संकेत नहि भेलापर व्यं ग्यन।
खैनिहार के के रोकनिहार जे खायवला अछि तकरा क्योब नहि रोकि सकैछ।
खैने बीघा बइसने कोस यात्रामे भोजनार्थ बैसलासँ एक बीघाक दूरी बढि़ जाइछ तथा बेसी बैसलासँ कोसक दूरी बढ़ैछ।
खैबऽ तऽ जैबऽ कहाँ खायब तँ अवश्येह किछु-ने-किछु करय पड़त।
खैबा बेर सब केओ, करबाक बेर केओ ने भोजनक समय तँ सब उपस्थित भ’ जाइछ, मुदाउ जखन कार्य करबाक अवसर अबैछ, तँ क्योख नहि।
खैबामे चटनी, पलंगपर नटनी देखबा सुनबामे तँ अवश्येख नीक अछि, मुदा पतिक लग पलंगपर लटाढ़म करैत अछि।
खैबामे सेर कमयबामे बकरी भोजनक समय तूं शेर सदृश रोब-दाव प्रदर्शित करैछ, परन्तु काज करबाक समय बकरी सदृश करय लगैछ।
खोखली तऽ खोंखली छीकली तऽ ने हम तँ मात्र खोंखलहुँ अछि, मुदा छिकलहुँ कहाँ।
खोंखी ने करी, तऽ नाओ बूडि़ जाय खोंखी कयलासँ कतहु नाओ डूबि सकैछ ? ककरो डरसँ कोनो नहि भेलापर व्यंछग्यछ।
खोंपा बान्होल जे पिआ के नीक लागय, नगरक लोक थूक फेकय खोंपा बान्हकल जे हमर स्वाीमीकेँ नीक लगतनि।
खोदलहुँ पहाड़ निकलल चुहिया अधिक श्रम कयलोपर तदनुरूप फल नहि भेटलापर प्रयुक्त ।
खोरनाठे पोखरि अमहारु खोरनाठसँ कतहु पोखरि खूनल जा सकैछ ? असंभव कार्य अनुपयुक्त साधनक माध्यठमे करबाक प्रयासपर व्यंकग्यन।
खोरनाठल बिलाडि़, बिजली देखि चमके बिलाडि़ खोरनाठसँ झरकाओल गेल अछि तेँ ओ बिजलौका देखि क’ चमकि जाइत अछि।
खोलू ढेका उतरू पार, एहि नदिया के इहे बेबहार बिनु ढेका खोलमे एहि नदीकेँ के पार क’ सकैछ, कारण एतय इएह व्यरवहार अछि।
खोसामद लौड़ा घी खिचड़ी ककरो बेसी खुशामद कयला सन्ताह ओहि कार्यक हैबाक अत्याधिक संभावना रहैछ।
गंगा अछइत कूपक दोहाइ गंगाक रहैत इनारक दोहाइ की देल जाय ? उत्कृ ष्टद वस्तुाक अछैत अधलाह वस्तु क कामना अदूरदर्शितापूर्ण मूर्खतापूर्ण अछि।
गंगा गंगा भेट, बहिन बहिन ने भेट दुइ नदी आपसमे मिल जा सकैछ, किन्तुै दुइ बहिन एक संग नहि मिल सकैछ।
गंगा गेल गंगादास, जमुना गेल जमुनादास जे गंगा गेल ओ गंगादास तथा जे यमुना गेल ओ यमुनादास कहौलक।
गंगा नहेला तऽ गंगादास, जमुना नहेला तऽ जमुनादास जे गंगा गेल ओ गंगादास तथा जे यमुना गेल ओ यमुनारदास कहौलक।
गंगा नहेला तऽ गंगादास, जमुना नहेला तऽ जमुनादास जे जतय स्नातन करैछ तकर नाम तदनुरूप भेलापर प्रयुक्त होइछ।
गंगा नहउनी ढीर खसउनी दुनू बरोबरि गंगामे नहायब आ ढीर खासायब दुनू समाने अछि, कारण क्योू भयंकर पापक पश्चा त् पुण्यर करबाक प्रयास करैछ, तँ वस्तु त: ओ फलप्रद नहि होइछ।
गंगा पारमे बेटी लाड़ो, नइ तऽ गाड़ो गंगा पारक बेटीक प्रसंगे कहल जाइछ जे ओ दुइए रूपक होइछ।
गंगा मइया डूबइ छी, तऽ हाथ पैर लारू चारू क्यो गंगासँ कहलक, ‘हम डूबि रहल छी।’
गूंजा रतन करए समतूल करजनी एवं रत्नसक मूल्यां कन पारदर्शी क’ सकैछ।
गँजेरी इयार ककर, दम लगयलक घसकल गाँजा पिनिहार ककरो मित्र नहि भ’ सकैछ।
गइयो हूँ बड़दो हूँ गायक विषयमे कहू तइयो हूँ, बड़दक विषयमे कहू तइयो हूँ।
‘ग’ कहइत गारा हाथ ‘ग’ कहिते गर्दनिपर हाथ लगा देलक।
गज भनि ने हारी, थान भरि फारी एक गज फारबाक हेतु प्रस्तुदत नहि, मुदा संपूर्ण थान हारि जयबाक हेतु तैयार अछि ।
गठरी खोली ने बहुरिया दुबरैली व्यीक्तिक कृपणतापर व्यं ग्य ।
गड़ल मुरदा उखरब समाप्तु बातकेँ पुन: जागृत करब, तँ प्रयोग।
गडि़ गेल छातीमे काँट छातीमे काँटा कोना गडि़ गेल? अकस्मा।त् कष्टममे पडि़ गेलापर कहल जाइछ।
गदहा के जेहने छओ मन तेहने नौ मन गदहाक पीठपर जेहने छओ मनक बोझा रहय तेहने नौ मनक, दुनू समाने रहैछ।
गदहा के न आन किसान, धोबिया के न आन बाहन धोबी आ गदहा परस्पनराश्रित अछि।
गदहा के न दोसर गोसँइयाँ, धोबिया के न दोसर परोहन गदहा तँ मरल कुम्हाँरक, मुदा ओहि धोबिन सत्ती भ’ रहल अछि।
गनगुआरिक एक टांग टुटने की गुनगुआरिक एक टाँग टुटि गेलासँ कोनो हानि होइछ।
गनल गायमे चोरि गायक संख्याो गनल छल ताहीमे चोरि कोना भेल ?
गनल गाहीमे चोरी गनल-गुथल वस्तु मे चोरि कोना भ’ सकैछ ?
गप्पीा मारलनि बटेर, नौ कनमा तेरह सेर अतिशयोक्तिपूर्ण कथनपर व्‍यंग्य ।
गरजमन्द् करे, बा दरदमन्द करे कोनो कार्य वैह करैछ जे गरजमन्दम अछि वा जकरा स्ववयं पीड़ाक अनुभव छैक।
गरजू किरतनिया अपने तेले नाचे गरजू कीर्तन कयनिहार अपन तेल जरा क’ नाच करैछ।
गरजे कतहु, बरिसे कतहु मेघ गर्जन करैछ कतहु आ वर्षा होइछ कतहु।
गरदनिमे कंठी, काँखि तर बोआरी ढोंगी व्यिक्तिपर व्यंकग्यी।
गरम लोहा ठंढा लोहा कटैछ गर्म लोहाकेँ ठंढा लोहा काटि दैछ।
गराक ढोल बजाबहि पड़त गरामे जे ढोल परि जाइछ तँ ओकरा बजाबहि पड़ैछ।
गरीबक जीबन की, सजमनिक तीमन की जहिना गरीबक कोनो मूल्यत नहि तहिना सजमनिक तरकारीमे गणना नहि होइछ।
गरीबक बहु सभक सरहोजि गरीब व्युक्तिक पत्नीा सभक सराहोजि होइछ।
गरीबक बेटा धनिकाहा घर गेल, एक सूप धानमे उजबुज भेल गरीब घरक बेटाक विवाह धनिक व्य क्तिक ओतय भेलैक।
गरीबक बेटी धनीक घर गेल, एक सूप चाउरमे तर उपर भेल देo गरीबक बेटा धनिकाहा घर गेल, एक सूप धानमे उजबुज भेल
गरीब के हाथी जहिना गरीब हाथी नहि राखि सकैछ तहिना क्यो अपनापर अनसम्हानर बोझा राखि ओहि उत्तरदायित्वनक निर्वाह नहि क’ पबैछ।
गरीबहाक बहु सभक भउजाइ निर्धन व्युक्तिक पत्नी सभक होइछ।
गरीबीमे आटा गील आसन्नम आर्थिक संकटमे निरर्थक कोनो व्य्य भार उपस्थित भेलापर प्रयुक्तो।
गबाह चुस्ता, मुद्दइ सुस्त् गवाह तँ चुस्तय अछि, मुदा मुद्दइ सुस्त अछि।
गहकी के घेघ, सौदागर के बेत्था घेघ तँ ग्राहककेँ छैक, मुदा ओहि हेतु सौदागर (बनियाँ) केँ पीड़ा भ’ रहल छैक।
गहना गुरिया भरल छी, अन बिनु टगल छी वस्त्रारभूषणसँ भरल-पूरल छी, किन्तुल अन्न्क अभावमे शरीर शिथिल भेल जा रहल अछि।
गहना ने गुडि़या, भरि घर अहुरिया निरर्थक पश्चायत्ताप कयलापर प्रयुक्त ।
गहिकिए पसाबी, बसाते ओसाबी ग्राहक रहलापर बनियाँ सौदाबारीक बिक्री करैछ तथा बसात रहलापर अन्नि ओसाओल जाइछ।
गहूँमक रोटी पातर होय, राहरिक दालिमे होय पातर गहूँमक रोटी तथा दुब्बार पातर पत्नीओ एवं आमिल देल राहडि़क दालि स्वा्दमे नीक होइछ।
गाँडि़ ककरो पादे केओ काज ककरो अछि, मुदा चिन्ताप आनकेँ अछि, तँ व्यंलग्यत।
गाँडि़ गन्हापय आ रबि करी शरीरसँ तँ दुर्गन्धय बहार भ’ रहल छैक, मुदा सूर्यव्रत क’ रहल अछि।
गाँडि़ गन्हारय मखमल के भगबा शरीरसँ दुर्गन्धक भ’ रहल छैक, मुदा मखमलक भगवा पहिरत।
गाँडि़ घुसके ने आ गहूँम चाही बोइन कार्य करबाक क्षमता तँ अपना नहि छनि, मुदा पारिश्रमिक चाही गहूँम।
गाँडि़ घुसके ने बोनि सोरहिया आलसी व्युक्ति कमे परिश्रममे बेसी पारिश्रमिक चाहैछ, तँ व्यं ग्यश।
गाँडि़ चले घुसकल, गहूँम चाही बोइन देo गाडि़ घुसके ने आ गहूँम चाही बोइन
गाँडि़ जतने छी, पाद गेल भरौरा गोपनीय बात प्रगट भ’ गेलापर कहल जाइछ।
गाँडि़ टारी, पेट हाँड़ी शरीर तँ टारीक समान दुब्ब र पातर छैक तथा पेट हाँ‍ड़ीक समान गहींर।
गाँडि़ लंगरी, हाथ लहठी गाँडि़मे लंङोटा पर्यन्तक नहि छैक, मुदा भरि हाथ लहठी पहिरने अछि।
गाँडि़ ने गरदनि, ओकरा चारू भर सिरहन्नाे ने तँ शरीर छैक आ ने गर्दनि, मुदा माथ रखबाक हेतु सिरन्नीे चारू भाग छिडि़औने अछि।
गाँडि़ ने धुए, से ओझा हुए देo गाँडि ने धुए, से भक्तिन हुए
गाँडि़ ने लंगउटी, नाम फत्ते खाँ वस्त्रानभाव छैक, मुदा नाम रखने अछि फत्तेखाँ।
गाँडिमे गुँह ने, नौ सुगर के नौता शरीरमे शक्ति नहि, मुदा नौ सुगरकेँ युद्ध करबाक हेतु निमंत्रित कयलक अछि।
गाँडि़मे घाओ भेल भङरोइया लगाउ, बूरिमे घाओ भेल चोदबइया लगाउ अभिधेयार्थ स्प ष्टग अछि।
गाँडि़मे दम ने, आ भालू सऽ लड़ाइ शरीरमे शक्ति नहि, मुदा भालूसँ युद्ध करबाक क्षमता प्रदर्शित करैछ।
गाँडि़मे दम ने, बजारमे धक्काय शरीरमे शकित नहि, मुदा बजारमे धक्काक खयबाक सतत आकांक्षी रहलापर व्यंदग्ये।
गाँडि़मे लाठी पेटमे खर, से देबता कतहु सहायता कर जे व्यहक्ति राड़ अछि ओ कोनो स्थितिमे ककरो सहायतार्थ प्रस्तु त नहि होइछ।
गागो घरमे आगि लागल, सौ सौ मनक पाद जरल गप्पीरक घरमे आगि गेलैक आर तँ किछु ने जड़ल, मुदा सौ-सौ मनक पाद धरि अवश्ये जरल ।
गाछपर चढ़ा कऽ छओ मारी ककरो आगाँ बढ़ा क’ ओकर मार्गकेँ अवरुद्ध कयलापर कहल जाइछ।
गाछपर सऽ खसी, तऽ मुँगरक मारि वृक्षपरसँ खसलहुँ तँ मुँगराक मारि सेहो लागल।
गाछमे पाकल बेल, कउआक बाप के की वृक्षमे बेल पाकल अछि, ताहिसँ कौआक बापकेँ की लगैछ ? आनक वस्तुकक हेतु लोभ लोभ कयलासँ कोनो फल नहि अथवा ओहन वस्तससँ कोन प्रयोजन नहि जे उपभोग योग नहि हो ?
गाछे कटहर ओठे तेल कटहर एहखन गाछमे लगले अछि तथापि ओकरा खयबाक हेतु ठोरपर तेल लगाओल जा रहल अछि।
गाछीमे छओ गाही, बजारमे नौ गाही गाछीमे छओ गाछी (६  ५ =३०) क भावसँ विक्री भेल, परन्तु बजारमे ओएह नौ गाही (२ ५ = ४५) क भावसँ बिकायल।
गाँठीमे दाम ने, बाँकीपुरक सैर जेबीमे पैसाक अभाव अछि तथापि बाँकीपुरक सैर करबाक अभिलाषी अछि।
गाभिनो अछि आ साँढ़ो देखबैछ गाय गाभिन सेहो अछि आ ओकरा साँढ़ सेहो देखाओल जा रहल अछि।
गामक गोंयरा खेत करी महाजन करी भारी, लोआ पोआ बड़द करी हँसमुख करी नारी गामक लगमे खेतीबारी करबाक चाही तथा महाजन धनवान व्याक्तिकेँ बनयबाक चाही।
गामक जोगी जोगड़ा, आन गामक सिद्ध अपन गाममे लोकक महत्त्व नहि होइछ, किन्तुम आन गाममे वैह व्य क्ति सिद्ध कहबैछ।
गामक बुड़बक, बथानक मालिक गाममे जे मूर्ख रहैछ ओ बथानक मालिक बनैछ।
गाम करे हुलि मालि, बहु माँगे चुम्माय संपूर्ण गाममे कोनो कारणेँ हुलिमालि मचल अछि तथा एही स्थितिमे पत्नीह चुम्मा् माँगि रहल अछि।
गामक लेखेँ ओझा बताह, ओझा लेखेँ गाम बताह देo ओझा लेखे गाम बताह, गामक लेखे ओझा बताह
गाम जमीन्दाओरक, बाँट करे बक्खोम अनुचित रूपेँ बटबारा कयनिहारपर व्यंकग्यल।
गाम तोहर नाम हमर गाम तोहर छह, मुदा नाम हमर अछि।
गाम महाराज के, बाँट करे बख्खोछ गाम तँ महाराजक छनि, किन्तुछ ओकर आमदनीक बँटबारा बक्खो, करैछ।
गाम मालिक के, धोधि देबान जी के गाम मालिकक छनि, किन्तु धोधि तँ देवानजीकेँ निकलि रहल छनि।
गाममे घर ने सहरमे खेती गाममे घर तँ नहि छनि, मुदा शहरमे खेती करबाक कल्पँना करैछ।
गाममे नौते ने बेलाहीमे नौत गामक लोकककेँ निमंत्रित नहि कयल गेल, मुदा बेला‍हीमे निमंत्रंण पड़ल।
गाम सिकटिया महतो जीबन, जौं जौं उकटी तौं तौं तीअन गामक नाम छैक सिकटिया आ ओहि गामक प्रमुखक नाम जीवन।
गाय ओसर, भँइस दोसर पहिल बियानक गाय तथा दोसर बियानक महींस नीक दूध दैछ, स्वामद एवं पुष्टिक दृष्टिऐँ।
गायक चरबाह रिमझिम, भैंसक चरबाह चोर, बड़दक चरबाह घाटा सुगर, साँझे आँखि निपोर गाय, भैंस एवं बड़दक चरबाहक की-की क्रिया-कलाप एवं प्रवृत्ति होइछ तकर विश्लेिषण भेल अछि।
गायक दूध सऽ मायक दूध गायक दूधक अपेक्षा मायक दूध बेसी गुणकारी होइछ।
गाय गुन बछरू पिता गुन घोड़, नहि बहुत तऽ थोड़बो थोड़ जहिना गायक आकृति-प्रकृतिक अनुरूप बाछा वा बाछी होइछ, तहिना पिताक समान पुत्र।
गाय गोआर मिलान, ठेहुन भरि दुहान गाय एवं गोआरमे जखन मेल-मिलाप भ’ जाइछ तँ गोआर ठेहुन भरि दूधक बदला पानि मिलबैछ।
गाय ने चरौने छी, डगर तऽ देखने छी गायक बदला की बड़द दूहल जाय ? जखन ककरो असंभव कार्य करबाक आज्ञा देल जाइछ, तँ प्रयुक्ता।
गाय ने रहे तऽ बड़द दूही गायक बदला की बड़द दूहल जाय ? जखन ककरो असंभव कार्य करबाक आज्ञा देल जाइछ, तँ प्रयुक्ता।
गाय बाला कहैछ गाय बाहल ने, पड़ोसिया कहैछ गाय बाहल अछि जकर जे वस्तु अछि ओ स्वी़कार नहि करैछ, मुदा आन व्याक्ति लाठी हाथेँ स्वीेकार करयबाक हेतु तत्पमर अछि, तँ प्रयुक्तव ।
गाय बिकायल चरबाहिए चरबाहीमे गाय बिका गेल।
गाय मारि कऽ जुत्ता दान गो-वधक पापसँ मुक्ति प्राप्त, करबाक हेतु चमड़ाक जुत्ता दान क’ रहल छी ? पैघ अपराधसँ त्राण पयबाक हेतु छोट वस्तु दान कयनिहारपर व्यंदग्ये।
गाया गाँडि़ बनारस पीडि़या गायामे अपने बैसल छथि पीढ़ी बनारसमे छनि।
गाल बाली जीत गेल, माल बाली हारि गेल मुहजोड़ व्यतक्ति विजयी भ’ जाइछ तथा ज्ञानवान व्य क्ति हारि जाइछ, तँ प्रयुक्त्।
गारल दूध भेटुआ ने समाय स्तलनसँ गारल दूध पुन: स्तानमे नहि समा सकैछ।
गारि गंजनक लाज ने, पेट भरला सऽ काज गरि-गंजनक कोनो लाज नहि छैक, मात्र पेट भरलासँ काज।
गाल बाला जीत गेल, आ मालबला हारि गेल अत्य धिक बजन्ताल व्यलक्ति जीत गेल, मुदा पैसावला हारि गेल।
गिद्धक सरापे कतहु गाय मरल ककरो श्राप देलासँ किछु नहि होइछ।
गियान बढ़े सोच सऽ, रोग बाढ़े सोग सऽ बुद्धिक विकास चिन्तिन कयलासँ होइछ रोगक विकास दुश्चिन्ता कयलासँ।
गिरगिटिया जकाँ रंग बदलब एकहि क्षणमे स्वररूपकेँ परिवर्तन कयनिहार व्यं ग्यग।
गि‍रगिटिया नाचब कोनो संकटक संभावनाक स्थितिमे प्रयुक्तय।
गिरहथ के नेमान नइ, चोर करे दउनी गृहस्थकक घर तँ अद्यावधि नवान्नद नहि संपन्नक भेल अछि, मुदा चोरक ओतय दौनी भ’ रहल अछि।
गिरहथ गेल घर, दहिने बामे हर गृहस्थग हट्ठासँ घर गेल तँ हरबाह एम्हओर-ओम्ह्र हर चला देलक।
गीदरके मृत्युर आबय तऽ सहर दिस भागय भावाी प्रवल भेलापर कार्य स्व त: निष्पापदित भ’ जाइछ।
गीदरक मान जन के गारा पौआ गीदरकेँ सम्माकन देल जा रहल अछि तथा आदमीक गर्दनिमे पौआ बान्हदल जा रहल अछि।
गीदरभमकी देखायब निराधार ककरो भयभीत करबाक उपक्रम करब।
गीदर राखे मांसक थाती गीदर कतहु मांसक थाती रखैछ? भक्षक कोनो रखबार नहि भ’ सकैछ।
गुआरक गोनडि़, दुहू दिस चिक्करन गोआरक गोनडि़ दुनू चिक्क न रहैछ।
गुआर कतौ अपन दहीके खट्टा कहे अपन वस्तुअकेँ क्योह अधलाह नहि कहैछ।
गुआरक लाठी बीचे कपार मूर्ख व्यीक्ति प्रहार करबामे कोनो विचार नहि करैछ।
गुड़क नफा चुट्टी खाय गुड़क व्य वसायमे जे नफा भेल ओ चुट्टी खा गेल।
गुड़क मारि धोकड़े जाने गुड़क मारि बोरा जानि सकैछ, आन की जानत ? जकरापर बितैत बितैत छैक सैह जनैछ।
गुड़ खा कऽ गुलगुल्लाप सऽ परहेज गुड़ तँ खाइते छी, किन्तुप गुलगुल्लकसँ परहेज किएक करैत छी ? पैघ अनर्थकारी जखन अपनाकेँ छोट अनर्थसँ बचैबाक प्रयास करैछ, तखन कहल जाइछ।
गुड़ खाय गुलगुल्लान सऽ परहेज मुख्यख वस्तु केँ प्रधानता तँ देब, किन्तुँ ओहिसँ उत्पुन्न‍ अन्या वस्तुखकेँ गौण करब, तँ प्रयुक्तल।
गुड़ गोबर करब सब कार्यकेँ सत्य‍नाश करब।
गुड़ माछी दउड़ल आबे गुड़पर माछी दौडि़ क’ अबैछ।
गुड़े घीए मिठाइ, तेले कुड़े चिकनाइ गुड़ एवं घीक अधिकतासँ उत्कृशष्टे मिठाइ बनैछ तथा प्रचुर मात्रामे तेल-फुलेल लगौलासँ शरीर चिक्कतन होइछ।
गुदरी तऽ उजरी भला बेटी तऽ सुनरी भला, बेटा तऽ बुलन्ता भला घोड़ा कुदन्ताऽ भला साफ सुथरा कपड़ा, बेटी सुन्द रि, बेटा भ्रमणशील तथा घोड़ा कुदनिहार होइछ तखने ओकर सार्थकता अछि।
गुनमन्ता जे घरमे रहे अबगुन तीन बढ़न्तत, रीन बढ़े बुद्धि घटे दिन दिन देह गलन्तस जँ गुणी व्यरक्ति घरमे बैसि जाइछ तँ तीन प्रकारक अनिष्टकक संभावना रहैछ – ऋण बढ़ैछ, बुद्धि घटैछ तथा शनै: शरीर गलय लगैछ ।
गुरू करी जानि कऽ, पानि पीबी छानि कऽ जानल-बुझल व्य,क्तिकेँ गुरुं बनयबाक चाही तथा पानि सतत छानि क’ पीबाक चाही।
गुरू के गुरू बजनियाँ के बजनियाँ दोहरा काज कयनिहारपर व्यंबग्य ।
गुरू गुड़ चेला चिन्नी् ज्ञानमे गुरुसँ शिष्य आगाँ बढि़ जाइछ, तँ कहल जाइछ।
गुरू ने गुरभइया, सब से बड़ा रुपैया ने तँ गुरु पैघ आ ने गुरु भाय, प्रत्युगत सबसँ पैघ रुपैया थिक।
गूँहपर ढेला फेकब, तऽ छिटका परबे करत पौखानापर जँ ढेला फेकब तँ ओकर छिटका पड़बे करत।
गृह कारज नाना जंजाला गृहकार्यमे अनेक समस्या क सामना करय पड़ैछ।
गे छउड़ी लटकी, तोरा खोंइछामे फटकी कोनो छौड़ीकेँ क्योन संबोधित करैत कहैछ, ‘तोहर खोइछमे फटकि दी’ अर्थात् ओकरा सफ क’ दी।
गेठिया खुजे ने, आ बहुरिया दुबराय ने टेँट सेहो नहि खोलब आ कनियाँ सेहो नहि दुब्बसर होथि।
गेठीमे दम ने, बाँकीपुरक सैर संगमे एको पैसा नहि, किन्तुस बाँकीपुरक सैर करबाक आकांक्षा रखैछ।
गेल दिन पुनि पलट ने आब जे दिन चल जाइछ ओ पुन: वापस नहि अबैछ।
गेल महीस पानिमे पड़रू सहित पानिमे महीस तँ गेबे कयल संगहि-संग ओकर बच्चाी सेहो चल गेल।
गेल माघ दिन उनतीस बाँकी माघ तँ बीत गेल, मात्र उनतीस दिन बाँकी अछि।
गेल सोभा दरबार के, सब बीरबल के संग जखन नीक व्यबकित कतहु चल जाइछ तखन ओकर अभाव जनित अवस्था मे पीड़ाक अनुभव होइछ।
गेलो पानी बान्हिय आगी, तइयो सुमरी देल मुरारी खेतक पानि तँ बहि क’ निकलि गेल, तथापि आरि बान्हि दिऔक आ भगवानक स्मपरण करू।
गेलौं तोरे रोजा, गला पड़ल नेबाज कोनो कार्यसँ मुक्तिक प्रयास करब, किन्तुअ ओकरा बदला अतिरिक्ति भार भेटि जाय, तँ प्रयुक्ता।
गोआरक कहने गायक घी, गोआरक कहने महिसीक घी गोआर गोरसक प्रसंग जे कहैछ सएह विश्वगसनीय, अर्थात् जे जाहि कार्यमे निपुण अछि ओहिमे आनक बात सर्वथा अविश्विसनीय भ’ जाइछ।
गोआरक गोनर दुहु दिस चिक्कअन तुo गुआरक गोनर दुहु दिस चिक्कसन
गोआरक चढ़ाइ गोबरक ढेरी गोआरक रहन-सहन ठीक नहि होइछ तेँ ओ जतहि रहैछ ततहि गोबरक ढेरी लगा दैछ।
गोआरक लाठी माँझ ढेरी मूर्ख सोझहि प्रहार करैछ, तँ प्रयुक्तन।
गोआरिन अपन दही के खट्टा नहि कहय अपन वस्तुनकेँ क्योि अधलाह नहि कहैछ।
गोएरा बिआहे से मरदा अपन घरक पछुआड़मे जे विवाह करैछ ओ वस्तुरत: मर्द कहबैछ।
गोंगा पूत खयलक पान, माय हँसल बहु निझमान कोनो गोंगा पान खयलक जकरा देखि क’ माय तँ अत्यखधिक हर्षित भेलीह, मुदा पत्नीट उदास भ’ गेलीह।
गोएँड़ा के खेती सिरमा के साँप, मइया कारण बादी बाप घरक लगक खेती, सिरमाक साँप सतमायक कारणेँ बाप जँ विरोधी भ’ जाय तँ कल्यााण नहि।
गोठ बिछनी बइसती कोहपर गोइठा बिछनिहारि कोहबर कोना बैसती? साधनहीन व्यहक्ति पैघ अभिलाषा रखैछ, तँ व्यंहग्यो।
गोढ़नी बेचे माछ, आ ने बेचे काँट सब वस्तुेकेँ बेचि देलापर प्रयुक्त होइछ।
गोतनी के सँठबनि ओल, तऽ गोतनी सँठती परोर हम गोतनीकेँ सनेसमे ओल पठैबनि तँ ओ हमरा परोर थोड़बे पठौती ? तात्पसर्य जकरा जेहन करबैक तेहने ओ करत ।
गोतनी ने हाइती सौतिन ने होइती मिनती गोतनी एवं सौतिनक संग विनशील भेलोपर अपन नहि भ’ सकैछ, तँ प्रयुक्तै।
गोदीमे चिल्काि नगरमे सोर बच्चाे तँ कोरामे छनि, मुदा सगरो हल्लार क’ रहल छथि।
गोदीमे लडि़का, नगमे ढिंढ़ोरा देo गोदीमे चिल्काढ नगरमे सोर
गोदीमे लडि़का, सहर भरि ढिंढोरा देo गोदीमे चिल्काढ नगरमे सोर
गोनू झाक खूटे बताह गोनू झाक संपूर्ण विक्षिप्त् छनि।
गोनू झाक बिलाडि़ एक बेर धोखा खायल आदमी सावधान भ’ जाइछ।
गोनू झाक बीये बताह देo गोनू झाक खूटे बताह
गोनू झाक लाठी कोनो बिनु ढंगक काज कयलापर कहल जाइछ।
गोनू झाक लेखेँ गाम बताह, गामक लेखेँ गोनू झा बताह गोनू झाक अनुसारेँ संपूर्ण गाम बताह अछि आ गामक अनुसारेँ गोनू झा ।
गोबर खसल तऽ किछु लऽ कऽ उठत खेतमे गोबर देल जाइछ तँ किछु-ने-किछु उपजा अवश्येद होइछ।
गोबर माटिक काज, मउगी के ने लाज गोबरमाटिक संग मौगी सतत काज करैछ तेँ ओकरा लाज नहि होइछ।
गोर गूँह के लपोर, कारी राम के सम्हाूरी एतय गोर एवं कारीक उपमान उपस्थित कयल गेल अछि।
गोर गोर गम्माा हाथ गोर नम्बा , रहड़ी खेतमे उड़ीदक खम्भाउ देखबामे तँ गोर अछि, हाथ-पैर लम्बा -चौड़ा छैक, मुदा अछि भुट्ट, तेँ राहडि़क खेतमे उड़ीदक खम्भाो लगबैत छथि।
गोर छी तऽ गोर छी, गोबरक चोत छी गोर व्यतक्ति अकार्यक रहैछ, तँ प्रयुक्त् ।
गोर मउगी गरभे आन्ह्र गोर स्त्रीर अपन सौन्दरर्यक गर्वसँ आन्हरर रहैछ।
गोरीक जौबन चुटकीमे स्त्रीजक युवावस्थान क्षणभंगुर रहैछ।
गोली कतहु जाय, महिना सऽ काज जाहि कार्यपर नियुक्तव छी ओ कार्य हो वा नहि हो ताहिसँ कोन प्रयोजन? हमरा तँ पारिश्रमिकसँ प्रयोजन अछि।
घंटा ठक ठक सिबाय नम: कतहु कोनो वस्तुय नहि प्राप्त भेलाक संभावनापर अथवा अभावक दशमे कहल जाइछ।
घइल भरि धान घटेसर राजा एक घैल धान भेलनि कि घटेसर राजा बनि गेलाह।
घटने घटबाल, बढ़ने टिकइत घर घटि गेलापर ‘घटवार’ भ’ गेल तथा बढि़ गेलापर ‘टिकैत’ ।
घटल घरमे नून कलउ अभावक स्थितिमे नूनसँ कलउ कयल जाइछ।
घटलाहा बहिनोइ केओ ने बनलाहा सार सब निर्धन भेलापर क्योन नहि बहिनोइ बनबाक हेतु तैयार, किन्तु साधन सम्पान्नब व्य क्तिक सार बनबाक हेतु लोक सतत प्रस्तु त रहैछ।
घटले नाती भतार अभावक स्थितिमे नापतिकेँ भतारक रूपमे करय पड़ैछ।
घटले नेना गुल्लनर खाय अभाव रहलापर बच्वाप गुल्लपर खा क’ काज चलबैछ।
घटलो तेली, तऽ नौ अधेली तेलीक अवस्था, जँ अधलाहो भ’ जाइछ तथापित संग किछफ ने किछु अद्धी अवश्ये रहैछ।
घडि़आरक मुहमे पड़ल वस्तुछ कतहु उपर होय बेइमान व्यहक्तिक हाथमे जे वस्तुह पडि़ जाइछ तँ ओ अत्यपन्ता कष्टुक पश्चाजतो हाथमे नहि अबैछ।
घड़ी ने बीते बाजी उलटे एक क्षण नहि व्यजतीत भेल की पाशा पलटि गेल।
घड़ीमे घर जरे नौ घड़ी भदबा क्षणमे घर जरि जाइछ आ नौ घड़ी भदवा हैबाक कारणोँ ओकरा नहि मिझायब।
घने तऽ मने सघन बीज बपन कयला सन्ताम नीक फसिलक संभावना होइछ।
घर आयल कुकूरो के लोक नहि बहार करैछ घर आयल आदमीक तिरस्का र नहि करबाक चाही।
घर आयल लछमी के केओ लात मारैछ घर आयल लक्ष्मी क क्यो तिरस्काचर नहि करैछ।
घर आयल लछमी के केओ लात मारैछ घर आयल लक्ष्मी क क्यो तिरस्कासर नहि करैछ।
घर इयारक, पूत भतारक घर तँ प्रेमीक अछि, किन्तुि सन्ता‍न तँ पतिक छनि।
घर उजाड़ने जारनक दु:ख जखन घरे उजाड़ल गेल अछि तखन जारनक कोनो अभाव नहि भ’ सकैछ।
घरक आटा गील दोसराक कार्यक निमित्त अपन व्यरय कयलापर कहल जाइछ।
घरक गीदड़, जायत कीधर घरमे रहनिहार व्य क्ति कखनहुँ पकड़ल जा सकैछ।
घरक गीदर, जायत कोम्हकर घरेमे रहनिहार भाकि क’ कतय जायत?
घरक घरनी, हम लल भरनी हम जेँ गृहस्वाभमिनी छी तेँ लाल वस्त्रा धारण करैत छी।
घरक जड़ल बन गेलहुँ, बनो लागल आगि अभागल व्यबक्ति अभागल व्येक्ति जतय जाइछ ततहि काज बिगाडि़ जाइछ, तँ प्रयुक्ति।
घरक जोगी जोगड़ा, आठ गामक सिद्ध अपन घरक साधु-सन्त क कोनो महत्त्व नहि रहि जाइछ तथापि ओ अन्यनत्र सिद्ध पुरुषक रूपमे प्रतिष्ठित होइछ।
घरक जोगी जोगड़ा, आन गामक पीड़ देo घरक जोगी जोगड़ा आठ गामक सिद्ध
घरक जोगी जोगना, आन गामक सिद्ध घरक योगी जोगना कहबैछ, मुदा आन गामक ओ सिद्ध पुरुष बनि जाइछ।
घरक जोगी जोगेस, आन गामक पीड़ देo घरक जोगी जोगड़ा, आठ गामक सिद्ध
घरक दालि गोबराइन लागे घरक दालि गोबर सदृश लगैछ।
घरक दुलरुआ बाहर गेल, मुह सूखि कऽ चोंचा भेल घरक अत्य न्तग दुलारु पुत्र घरसँ नोकरी करबाक हेतु गेल जकर परिणाम भेलैक जे मुह सुखा क’ चोंच सदृश गेलैक।
घरक दूत भूत भऽ लागल के करत बइदाइ अपन घरक भूत-पिशाचसँ तँ डर लगैछ तँ दोसराक ओहिठामक बैदाइ वा ओसाझाइ जा क’ कोना करब? जे अपन परिस्थितिकेँ नहि सम्हाूरि पबैछ तँ ओ आनक सहायता की करत ?
घरक बराहमन बैल बरोबर घरमे जँ ब्राह्मण अछिओ तँ ओकर कोनो महत्त्व नहि होइछ।
घरक बिलाइ घरहि सिकार घरक बिलाइ अपनहि घरमे शिकार करैछ।
घरक भेदिया लंका डाह घरक भेद खूजि जयबाक कारणेँ संपूर्ण लंका जरि गेल।
घरक मरम तहिखन बुझलहुँ, चउक पुरय ला ढाकन अलनहुँ घरक यथार्थ स्थितिक जानकारी तत्क्षउण भ’ गेल जखन चौक पुरबाक हेतु ढाकन अनलनि।
घरक मुरगी दालि बरोबरि घरमे बनल मुर्गी यथार्थत: दालि सदृश होइछ।
घर करू घर करू घर बड़ रगड़ी, तीन चीज जान मारे नून तेल लकड़ी गृहस्थी बसयबाक आग्रह करैछ, परन्तुत गृहस्थी बसयबामे अनेक अछि।
घर के गोर तऽ पिपरक सोंठ घरहिमे तँ गोर छथि, बाहर जयतीह तँ सुखा क’ सोंठि भ’ जयतीह।
घर खरची तऽ सूती निचित घरमे खेबाक खर्चा रहलापर सब निश्चिन्त रहैछ।
घर खरची ने, डेउढ़ी ढेकार घरमे खर्चो नहि छनि, मुदा डेउढ़ीपर ढेकार करैत छथि।
घर खरची ने, नगर नेओत घरमे खर्ची नहि छनि, मुदा नगरक लोककेँ निमंत्रित कयलनि अछि।
घर घर घुमला सऽ चारि चोता थूक, अपना घर रहला सऽ टकुआ सूत घर-घर घुमैत रहलासँ लोक सतत निन्दाल करैछ, किन्तुह अपना ओतय रहलासँ कम-सँ-कम तँ सूत अवश्येत काटब।
घर घर देखा, एकहि लेखा सब ठाम समाने स्थिति रहलापर व्यंखग्यट।
घर घोड़ा नखास मोल घोड़ा तँ घरहिमे अछि, मुदा ओकर मोल-भाव बजारमे होइछ।
घर घोड़ा पैदल चले अछैत काढ़े रीन, अपन थाती जमाय घर धरे बुड़बक लच्छथन तीन घरमे घोड़ाक अछैत पदैल चलनिहार, घरक सम्प न्न रहलोपर ऋण लेनिहार तथा अपन सम्प त्ति जमायक घरमे रखनिहार मूर्ख कहबैछ, कारण ई नीति विरुद्ध बात थिक।
घर चैन तऽ बाहरो चैन घरमे सुख रहैछ तँ बाहरो गेलापर लोकककेँ सुख भेटैछ।
घर जरे घूर मिझाबी घर जरि रहल छनि आ घूर मिझा रहल छथि।
घर जरे तऽ जरे, मुदा चालि ने बिगड़े घर जरि जाय से स्वीलकार्य, परन्तुन घरक जे परंपरा चलि आबि रहल अछि तकरा नहि बिगाड़ी।
घर जरे तऽ सब देखे, मन जरे तऽ केओ ने देखे घरमे आगि लगैछ तँ सब क्योक देखैछ, किन्तुग जखन मनमे आगि लगैछ तँ क्यो ने देखैछ।
घर जाय तऽ बीबी मारे, बाहर जाय तऽ मियाँ मारे घर जाइत छी तँ घरबाली मारैछ आ बाहर जाइछ तँ मियाँ मारैछ।
घर तंग बहु जब्बार रंग गरीबक घरमे जखन बेसी खर्च कयनिहारि स्त्रीघ आबि जाइछ तँ कहल जाइछ।
घर दही तऽ बाहरो दही घरमे नीक वस्तुो भेटैछ तँ बाहरो तदनुरूपे।
घर दुआर बासी, बहुरिया पंच गरासी घर द्वारि तँ बसिया पड़ल छनि अर्थात् झाड़ नहि पड़ल अछि आ ने नीपल-पोतल गेल अछि, लेकिन कनियाँ तँ पंचग्रास अर्थात् भोजन कयलनि।
घर दुआर भउजो के छल छल करतनि ननदो घर तँ वस्तुोत: भौजीक छनि, किन्तु ननदि निरर्थक अपन शान देखा रहल छथि।
घरनिए घर, हरबाहे हर गृहस्वारमिनीसँ घरक शोभा होइछ तथा हरक शोभा होइछ हरबाहसँ।
घरनी रहल लजाय, चोरनी कहलक झात गृहस्वालमि‍नी तँ लजा गेली, मुदा जे चोरनी छल ओएह झात कहलक।
घर ने दुआर सिबचन्दहर राजा, ढोल ने ढाक अंगरेजी बाजा घर दुआरिक ठेकान ने, परन्तु बनल छथि राजा शिवचन्द्रठ।
घर ने बर कन्या दान करबाक हेतु तँ ने नीक घर भेटैछ आ ने वर।
घर पइसइत जाँघ काँपे आनक घरमे जँ कयो प्रवेश करैछ, तँ ओकर काँपय लगैछ।
घरपर खर ने, कानपर बीड़ी खयबाक रहबाक उपाय नहि, मुदा व्य सनी बनल रहब, तँ व्यंपग्यओ।
घर फूँकि तमासा देखब घरमे आगि लगा क’ तमाशा देखि रहल छथि।
घर फूटे गमार लूटे अपनामे वैमनस्यूता भेलापर आन लाभान्वित होइछ।
घरपर फूस ने नाम धनपत घर फूस पर्यन्तमक नहि छनि, किन्तुन नाम छनि धनपत।
घर फूटे गमार लूटे, गाम फूटे जबार लूटे घरमे जखन फूट होइछ तँ गमार अर्थात् मूर्ख व्यफक्ति सेहो ओहिसँ लाभान्वित होइछ।
घरबइया के भात ने, पंच के लाज ने घरक लोकककेँ भोजन करबाक हेतु भात नहि छनि, मुदा पंच लोकनिकेँ लज्जाह नहि भ’ रहल छनि।
घर बइसल झाम गुड़इत छी घर बैसल-बैसल झख मारैत छथि।
घर बाला बर तर, बर बाला घर तर घर वाला घर छोडि़ बरक गाछक नीचाँ गेल तथा जे बरवाला छल ओ घरक अन्तीर्गत प्रवेश पौलक।
घर बालीक घरे ने, भतरोइयाँ बालीक घर गृहणीक तँ घरे ने छनि, मुदा भतरोइयाँवाली घरपर अधिकार जमौलनि।
घर बाँसे ने घर घासे फूसक घरकेँ छाड़बाक हेतु बाँस एवं खढ़-पातक प्रयोजन पड़ैछ।
घर बिगाड़े बुरही, पेट बिगाड़े मुरही वृद्ध घरकेँ तथा मुरही पेटकेँ बिगाड़ी दैछ, तँ प्रयुक्तक।
घर भर घोड़ा दउड़बिहऽ, मउगी के मन पतिअबिहऽ घरहिमे घोड़ाक सवारी करब वा दौड़ायब तथा पत्नीडकेँ फुसिए अपन बहादुरीक प्रसंगमे कहब।
घर भरल तऽ बाहरो भरल घरमे जे सुखी रहैछ ओकरा बाहरो गेलापर सुखानुभूति होइछ।
घर भात तऽ बहरो भात घरमे भोजनार्थ भात भेटैछ तँ अन्यलत्र गेलापर सेहो भेटैछ।
घर भेटैछ तऽ बरे ने, बर भेटैछ तऽ घर ने कन्या दानक हेतु घर भेटि जाइछ, मुदा वर नहि, जँ वर भेटि जाइछ, तँ घर नहि।
घर भूजी भाङ ने, बीबी फाँ‍कथि चूड़ा वस्तुजक अभाव रहितहुँ नीक वस्तुाक भोग करबाक आशा कयलापर प्रयुक्तह होइछ।
घरमुहा बड़द धरासल मरद कतय टीके बड़द जखन बथान दिस जाइछ तखन हरबाह अपन घर दिस।
घरमुहा बड़द, बूरिमुहा मरद जहिना हट्टासँ खुजल बड़दकेँ घर पहुँचबाक शीघ्रता रहैछ तहिना तहिना परदेसमे रहनिहारक हेतु घर पहुँचबाक।
घरमुहा बड़द सदिखन घरमुहा रहैछ घर दिस गेनिहार बड़द घरे दिस जयबाक हेतु उताहुल रहैछ।
घरमे आगि लागल, चोर के दाओ लागल घरमे आगि लगलापर चोरकेँ चोरि करबामे सुगमता होइछ।
घरमे कुरथीक रोटी, बाहर कोरबाला धोती घरमे कुर्थीक रोटी खाइत अछि, मुदा जखन कतहु बहराइत अछि तखन कोरबाला धोती पहिरैत अछि।
घरमे खरची ने डयौढ़ीपर नाच घरमे खर्ची नहि छनि, मुदा दरबज्जामपर नाच करबा रहल छथि।
घरमे खरची ने नगरमे नौता घरमे खर्चीक कोनो पता ठेकान नहि, मुदा संपूर्ण शहरकेँ निमंत्रित कयलक अछि।
घरमे खरची ने बाहर ढेकार जीविकोपार्जनार्थ कोनो साधन घरमे नहि छनि, मुदा दरबज्जारपर आबि क’ ढेकार करैत छथि।
घरमे खीर तऽ बाहरो खीर घरमे नीक भोजन भेटैछ तँ बाहरो।
घरमे घर लड़ाइक डर जकर परिवार अत्यडधिक विस्तृ त होइछ ततय झगड़ा-लड़ाइ हैब स्वािभाविके अछि।
घरमे चिराक ने, बाहर मसाल घरमे साँझ देबाक हेतु चिराक पर्यन्तृ नहि छनि, मुदा बाहर मसाल जारैत छथि।
घरमे चोर, नगरमे ढिढोरा लगक वस्तु क खोज नहि परंच दूरक खोज करब, तँ प्रयुक्त ।
घरमे चोर, नगरमे सोर चोर तँ घरहिमे छनि आ संपूर्ण शहरमे निरर्थक हल्ला करैत छथि।
घरमे धान ने, बहु के बड़ गुमान घरमे धान नहि अछि, मुदा पत्नीा बड़ गुमान अर्थात् अभिमान करैछ।
घरमे धान ने, बीबी कुटथि चूड़ा घरमे धानक कोनो पाता ठेकान नहि अछि, किन्तुा पत्नीठ चूड़ा कूटबाक ओरिआओन क’ रहल अछि।
घरमे टुके टुके रोटी, बाहर घुट्ठी सोभे धोती घरक हालत इएह छनि जे एक रोटीकेँ बाँटि क’ खाइछ, किन्तुी बाहर गेलापर घुट्टी धरि धोती रहैछ।
घरमे ने गुड़, बेटा माँगे मोतीचूर घरमे गुड़ पर्यन्त नहि छनि, मुदा बेटा मोतीचूरक लड्डू माँगि रहल अछि।
घरमे ने बूट, बेटा माँगे मोतीचूर घरमे तँ बूट पर्यन्ति नहि छनि तथापि बेटा मोतीचूरक लड्डू माँगि रहल छनि।
घरमे पाके कुरथीक रोटी, बाहर सोभे जोड़ा धोती घरमे कुथीक रोटी पाकि रहल छनि अर्थात् अन्नाकभाव छनि, मुदा घरक बाहर एक जोड़ा धोती देखबैत छथि।
घरमे भूजी भाङ ने, तम्बूु ले फरमाइस घरक दयनीय स्थिति रहलोपर आडम्बरपूर्ण व्य वहारपर व्यंआग्य्।
घरमे भूजी भाङ ने, नौ कउआ के नोत घरमे खर्चाक अभाव छनि, मुदा नौ व्यलक्तिकेँ निमंत्रित कयलनि।
घरमे भूजी भाङ ने, रजोखरिपर पूजा धनभाव अछि तथापि रजोखरिपर पूजा करैछ।
घरमे बहु ने, बाहर बेटा किरिया घरमे पत्नीे तँ नहि छनि, मुदा बाहरमे सबठाम बेटा किरिया खाइत छथि।
घरमे बिआह तऽ,साढूक बरियात विवाह तँ अपना घरेमे छनि तथा स्वतयं साढूक ओतय बरियात जा रहल छथि।
घरमे बारह तेरह तीन, दरबारमे एके बुद्धी घर एवं बाहर भनहि मतैक्य नहि होइछ, मुदा जखन दरबार जाइत अछि तखन एकहि प्रकारक बुद्धि भ’ जाइत छैक।
घरमे मुड़ुआक रोटी, बाहर कोरबला धोती घरमे अन्नाआभावक कारणेँ मड़ुआक रोटी खाइत छथि, मुदा जखन बाहर जाइत छथि तखन कोरवला धोती पहिरैत छथि।
घरमे भात तऽ बाहरो भात देo घर भात तऽ बाहरो भात
घरमे भूजी भांग ने, काठापर धमगज्जूर घरमे खर्ची पर्यन्त नहि छनि, मुदा वेश्याटक ओतय जा क’ आनन्द मनबैत छथि।
घरमे भूजी भांग ने, बाहर ढेकार घरमे खयबाक तँ कोनो उपाय नहि छनि, मुदा बाहर ढेकार करैत छथि।
घरमे भूजी भांग ने, बीबी फाँकथि चूड़ा घरमे भोजनार्थ कोनो सामग्री नहि छनि, मुदा गृहस्वाथमिनी चूड़ा फाँकि रहल छथि।
घरमे भूजी भांगने, बूढ़ा लेताह चूड़ा घरमे खर्चीक किछु ने छनि तथापि बूढ़ा चूड़ा खयताह।
घरमे भूजी भांग ने, भरि गाम नौता घरमे अपना खयबाक हेतु तँ कोनो वस्तुम नहि छनि, किन्तुन संपूर्ण गामकेँ निमंत्रित क’ अयलाह।
घरमे मन्थ रा, बाहरमे दुर्मुख मन्थ रा एवं दुर्मुख पौराणिक पात्र छथि जे अपन व्य्वहारक कारणेँ कुख्याणत छथि।
घरमे मही ने, बाहर दही घरमे मठ्ठा पर्यन्तह नहि भेटैत छनि, मुदा बाहर जाइत छथि तँ दहीक खोज करैछ।
घरमे संझउत ने, बाहर ऊक सन बाती घरमे साँझ देबाक तँ उपाय पर्यन्त नहि छनि, मुदा बाहर ऊक सन बाती ल’ कए जाइछ।
घरमे होय कुरथीक रोटी, बाहर सुखे नयन सुख धोती घरमे प्रतिदिन कुर्थीक रोटी पकैत छनि, मुदा बाहरमे अति सुन्द र, आँखिकेँ सुख देनिहार धोती सुखा रहल छनि।
घर रहे न बाहर गए, मूड़ मुड़ाके फजिहत भए ने घरक काज करैछ, ने तँ बाहर जा क’ कोनो काज करैछ, प्रत्युतत घरहिमे दुर्गञ्जन सहैछ।
घररोग जाय तऽ बंसरोग ने जाय भौतिक रोग तँ छुटि जाइछ, किन्तुह वंश रोग एहन होइछ, जाहिसँ कहियो ककरो मुक्ति नहि भेटैछ।
घर सऽ तऽ घर जायब, फाटि कऽ की मरि जायब एक घरसँ दोसर घर जयबाक अछि ताहिसँ फाटि क’ अर्थात् करेज फाटि क’ मरि जायब की ? कोनो नवविवाहिता नैहरसँ सासुर जयबाकाल करेजा फारि क’ कनैछ ताहिपर दोसर स्त्रीा ओकरा आश्वाहसन दैछ जे किएक कनैत छी।
घर सऽ बैर दिगर सऽ नाता एहन मति जुनि दिहऽ बिधाता अपन घरक लोकसँ दुशमनी तथा अन्यि व्य क्तिसँ दोस्तीन करबाक बुद्धि हमरा नहि दिअ हे भगवान।
घरहिमे बइद मरब किए जखन घरहिमे वैद्य रहैछ तखन मृत्युत किएक हैत? घरहिमे साधन उपलब्धा रहलापर लोक ओहि लेल बिथुत नहि होइछ।
घरहिमे मरद घरमे मर्द रहैछ।
घर हे पेट घर कोठी लागल पेहान, पसरह हे पेट पसरह आयल खेत खरिहान पेटकेँ संबोधित कयल जाइछ जे एखन कोठीमे अन्‍न नहि अछि तेँ तोँ अपन स्वीरूप छोट करह।
घरीमे घर जरे नौ घरी भद्रा एकहि घणटामे घर जडि गेल, मुदा अभागल नौ घण्टा भदबाक प्रतीक्ष करैछ।
घाओ कतहु पओ कतहु घाव कतहु अछि, किन्तु् ओकर पाओ कतहु।
घाट घाटक पानि पीब अनेक घाटक पानि पीने अछि।
घाटी तर गेने माटी जे किछु खायल जाइछ ओ जखन गर्दनिक नीचाँ जाइछ तँ ओ माटिक समान भ’ जाइछ।
घानी सऽ बहतउनी भारी कोल्हूऽमे तेल पेड़बा काल घानी देल जाइछ, ओहिसँ बेसी बहतौनी अर्थात् पारिश्रमिक लगैछ।
घीउ पचे ने, पूरी लेल मारि ओहि वस्तुेक लेल प्रयास करब जाहिसँ कष्टव हो।
घीउ बनाबे खिचड़ी, बड़की कनियाँक नाम खिचडि़मे स्वाेद अबैछ घी देलाक कारणेँ, मुदा नाम भ’ रहल छनि बड़की कनियाँक।
घीओ तरऽ तेलो तरऽ, तइयो करइला तीत घीमे तरु अथवा तेलमे तथापि करैला तीतक तीते रहैछ।
घीओ तरऽ तेलो तरऽ, तइयो करैला तीते घीमे तरू वा तेलमे तथापि करैला तीते रहत‍।
घी कतय हेरायल तऽ दालिमे ककरोसँ क्योय फुछलक, ‘घी कतय हेरायल?’ उत्तर भेटलनि, ‘दालिमे।’
घीक लड्डू टेढ़ो भला घीमे बनल टेढ़ो लड्डू नीक लगैछ, कारण स्वा दमे परिवर्त्तन भ’ जाइछ।
घी गुड़ हरदी, इहे तीनू सऽ छूटे सरदी घी, गुड़ एवं हरदी तीनूकेँ मिला क’ पीलासँ सर्दी छूटि जाइछ।
घी देखि बाभन नरिआबथि घी देखि क’ ब्राह्मण नुडि़आइत अछि।
घी देत घोड़ नरियाय घी देलापर घोड़ा नरियाइत अछि।
घी पचे ने पूरी ला मारि घी तँ नहि पचैत छनि तथा पूरीक हेतु मारि क’ रहल छथि।
घुरि कऽ दरबज्जाछपर लात ने देब अप्रसन्‍न भेलापर वचनक प्रतिबद्धता रखलापर कहल जाइछ।
घेघ छल तोरा, उछटि गेल मोरा घेघ तँ अहाँकेँ छल, मुदा उछटि क’ हमरा भ’ गेल।
घोंघाक मुह फुटल घोंघाक मुह सेहो फुटि गेल अर्थात् जे बजनिहार नहिस छल ओहो बाजब प्रारंभ क’ देलक।
घोंघा के ने दोसर डाबर, थारू के ने दोसर देस जहिना घोंघा अन्य डबरामे नहि जा सकैछ तहिना थारू आन देशमे नहि भेटैछ।
घोंघामे पकायब, सितुआमे खायब घोंघामे भानस करैछ तथा सितुआमे भोजन।
घोकन्ते बिद्या लपटन्तम जोर, नहि बहुत तऽ थोड़बो थोर अभ्याडसोपरान्तप विद्या होइछ।
घोकन्त़ बिद्या सोखन्तम पानी जहिना बालु पानिकेँ तुरन्तव सोखि लैछ तहिना अभ्याबसोपरान्तर विद्याक उपलब्धि होइछ।
घोघ डोलैये, मुह बोलैये परदामे रहि टर्र टर्र बाजयवाली स्त्री क प्रसंगमे प्रयुक्तर।
घोघरडीहाक घुघनी स्थाडन-विशेषक वस्तु‍ प्रसिद्ध भेलापर कहल जाइछ।
घोघो रानी घोघो रानी कते पानी बच्चार सब खेलमे एकर प्रयोग करैछ।
घोड़ ने कूदे, बखार कूदे घोड़ा तँ नहि कूदैछ, कूदैछ ओहिपर लादल वस्तु सभ।
घोड़ाक अगारी आ हाकिम पछारी ने जाइ घोड़ाक आगाँ तथा हाकिमक पाछाँ-पाछाँ चलब सतत खतरा जनक अछि।
घोड़ा कूदे घोड़ी कूदे, बीचमे बछेरी कूदे घोड़ा एवं घोड़ी कूदि रहल अछि तथा बीच-बीचमे बछेरी सेहो कूदैत अछि।
घोड़ा के चरमाजा कोठीपर, घोड़ी के चरमाजा पीढ़ीपर घोड़ा बच्चाी नहि दैछ, किन्तुर घोड़ी तँ बच्चा् दैछ।
घोड़ा गाड़ी नोन पानि आ राँड़क धक्का , एहि तीनू सऽ बचल रही तऽ केलि करी कलकत्ता घोड़ा गाड़ी, नोनगर पानि एवं राँड़क धक्का सँ बाँचल रहले उत्तर क्योन कलकत्ताक वास्त विक आनन्द ल’ सकैछ।
घोड़ा सरपट भागल, आगू पाछू ससरल पलान घोड़ा तँ सरपट भागल जा रहल अछि तथा ओकर पलान जेम्हभर-तेम्हसर ससरि रहल अछि।
चंडीक स्थाेनमे रंडीक पूजा देव स्थाथनमे वेश्यापवृत्ति भेलापर व्यंीग्य्।
चुंदरी फाटि गेल, चकमक मेट गेल चुनरी फटबाक संगाहि चकमकी सेहो विलुप्तट भ’ जाइछ।
चइतक चउदह अगहनक आठ, जहाँ जहाँ मन करय तहाँ तहाँ काट चैत्र मासक चौदह दिन एवं अग्रहणक आठ दिन बितलापर एवं धनकटनी प्रारंभ भ’ जाइछ।
चइत सूतय भोगी, कुँआर सूतय रोगी चैत्र मासमे भोगी एवं आश्विनमे रोगी दिनमे सुतैछ।
चउठी चन्दाे बड़ अनन्दा , साँझ खन खीर पूरी हैत रे बन्दा़ भाद्र मासक चतुर्थीक चन्द्र्मा आनन्दी देनिहार होइछ, संध्या काल खीर-पूड़ीक दर्शन होइछ।
चउबे गेला छब्बे् बने, दुब्बेइ बनि कऽ अयला चौबे छब्बेछ बनबाक प्रत्यायशमे दूबे बनि गेलाह।
चउबे मरे तऽ बानर होय, बानर मरे तऽ चउबे होय चौबे मृत्यु परान्त, बानर भ’ जाइछ तथा बानर चौबे।
चक ने पिआली, लौड़ाक कलाली प्याेला-प्यााली अछिए ने तँ कलाली कोन बातक ? साधनहीन जखन अपनाकेँ पेशा विशेषक जानकार कहैछ, तँ व्यंाग्‍य।
चचा चोर भतीजा पाजी, चचाक सिरपर जूता बाजी एक परिहासपूर्ण लोकक्ति प्रयोग बच्चाक सभ करैछ।
चट मकइ, पट सनइ शीघ्रतासँ मकइ भेल तकरा बाद पुन: ओही खेतमे सनइ बाओ कयल।
चट मँगनी पट बिआह, टुटि गेल टँगरी रहि गेल बिआह शीघ्रहि विवाह स्थिर भेल तथा ओकरा सम्परन्‍न करबाक ओरिआओन होमय लागल, किन्तुल अकस्मानत् टाँग टुटि जयबाक कारणेँ विवाह स्थािगित भ’ गेल।
चट राँड कि पट अहिबाती विधवा वा सधवा भ’ कए रहब समुचित।
चढ़य के बाइसिकिलपर घंटी छनि ने साइकिलपर तँ चढ़ैत छथि, किन्तुच ओहिमे घण्टील नहि लागल छनि।
चढ़य के हाथीपर, पयर उठबो ने करे हाथीपर चढ़य तँ चाहैत छथि, मुदा पैर नहि उड़ैत छनि।
चढ़ल देहे लहर, जखन आयल आंगन घर आंगनमे ओकरा देखतहि संपूर्ण शरीरमे लहरि उठि गेल।
चढि़ते बरिसे आदरा बरिसे हस्तर, कतेक राजा दउड़े आनन्दस रहे गिरहस्त आर्द्रा नक्षत्रक प्रारंभमे एवं हस्ति नक्षत्रक अन्त्मे जँ वर्षा भ’ जाय तँ धानक फसिल नीक होइछ।
चतुरक सौदा मने मन चतुर व्यदक्ति मनहि मन क्रय-विक्रय करैत अछि।
चतुर के चउगुन्नाय, मुरुख के सौ गुन्नार जतय चतुर व्यनक्ति चारि गुणा खर्च करैछ मूर्ख सौ गुणा खर्च अपन मूर्खताक कारणेँ करैछ।
चतुर मउगी बिलड़बे साँय चतुर स्त्रीणक समक्ष ओकर स्वाेमी बिलाइक समान रहैछ।
चतुर मउगी सियानी, पैचा माँगे पानी चलाक स्त्रीि पानि पर्यन्तम पैंच माँगि क’ अपन कार्य करैछ।
चतुर भेलहुँ कहिया, भीन भेलहुँ तहिया चतुर कहियासँ अहाँ भेलहुँ? सम्मिलित परिवारसँ पृथक् भेलहुँ ताही दिनसँ।
चतुरी मउगी कबुतरी नाम, साँय ला दालि भात भाय ला भूजा चतुर स्त्रीय अपन स्वााभीकेँ दालि भातक संग नीक-निकुत खोअबैछ, किन्तुँ भायक अयलापर भूजा फाँकबाक हेतु दैछ।
चनाक अंडी चट चट चनकय अण्डीअ चन-चन आवाजक संग चनकैत अछि।
चन्द न परे चमार घर नित उठि कतरे चाम, नित उठि चन्दिन कनैत अछि पड़ल राड़ सऽ काम चाननक लकड़ी कोनो चमारक घर चल गेल।
चमइनक आगाँ ढीर नुकाय चमइनक सोझाँ क्योु गर्भ नहिग नुका सकैछ।
चमइन सऽ कोखि कतेक दिन नुकायब चमइनक समक्ष कोखि नुकाओल जा सकैछ।
चमइन सऽ पेट नहि नुकाइछ तुo चमइन सऽ कोखि दिन नुकायब
चमउटी लागे चमचम, बिद्या आबे झमझम चमौटीपर छूराकेँ रगड़लापर सान जहिना आबि जाइछ तहिना अभ्यालसोपरान्त विद्या सेहो अबैछ।
चमका ऐलहुँ, छमका ऐलहुँ, सइयाँ के देखा ऐलहुँ स्त्रील नववस्त्रम वा आभूषण धारण करैछ, तँ सर्वप्रथम ओ अपन स्वासमीक समक्ष प्रदर्शन करैछ तत्प श्चा्त् आनक समक्ष ।
चमके उत्तर चच्छिम ओर, तब जानब पानी के जोर उत्तर एवं पश्चिम दिशासँ बिजली रहि-रहि क’ चमकय, तँ बुझबाक चाही जे वर्षा निश्चिते हैत ।
चमड़ी जाय से जाय दमड़ी ने जाय शरीरक चमड़ी द’ देब स्वीुकार, किन्तुा एक अद्धी खर्च नहि करब ।
चमत्काखरी मउगी के पितिऔती साँय आत्मकप्रदर्शनवाली दुश्चीरित्र स्त्री पर व्यं्ग्यर।
चमारक बहु के टुटल जुत्ता चमारक पत्नीे भ’ कए टुटल जुत्ता पहिरैछ ।
चमारक बेटी चन्दटन नाम बेटी तँ चमारक अछि, मुदा नाम छैक चन्द न।
चमारक सरापे कतहु गाय मरल चमारक श्रापसँ गाय नहि मरैत अछि।
चरए गेला चोथल अयलाह चारबाक हेतु गेल छलाह, किन्तुै ओतय चुरयलाह।
चरखा आब नहि चलत कार्य करबाक क्षमता क्षीण भेलापर कहल जाइछ।
चरखाक कमाइ डयनपनहि पार चर्खा चलाक धनोपार्जन कयल, किन्तुन सब डइनपनमे समाप्तप भ’ भेल।
चरखा तूर अबैयै काटय, ओहि बिधि करब निरबाह, हमर भरोस एको नहि राखब हमरो बहुत बिआह हे पति पत्नी सँ कहैछ जे अहाँ हमर भरोस नहि राखब, प्रत्युेत चरखा काटि क’ गुजर क’ लेब किएक तँ हमरा वियाह भेल अछि।
चररी भररी नीक, भीतर घुन्नाभ ने नीक जे बाजि-भूकि क’ अपन क्रोधक शमन करैछ ओ नीक, किन्तुु जे मने-मने सब बातकेँ रखैछ, ओ व्युक्ति अधलाह होइछ।
चलइत रोजीपर लात मारब उपलब्धो कार्यक परित्यायग कयलापर व्यंछग्यत।
चल गे तऽ अबइछ छी, तोरा ला किछु लबइ छी एक दोसराकेँ कहैछ, ‘चलू’ ।
चल घोड़ी धाने धान ई घोड़ी धानेक खेत द’ चलत।
चल घोड़ी धाने धान, जतय जयबह ततहि जजमान घोड़ीक सबार धानक खेतहि द’ चलबाक आदेश दैछ जे धान चरबामे कोनो प्रकारक असुविधा नहि होयतैक।
चल चलन्तीह हग भरन्तीप, जे रहन्तीत से पोछन्तीत चलबाक बेरमे मलत्या ग क’ देलहुँ कारण जे रहत से ओकरा साफ करत।
चल जइहे जी, तऽ की करब घी प्राणे चल जायत तँ घी किनबाक कोन लाभ? पेट काटि क’ बचौनिहारपर व्यंरग्यक।
चल जइहेँ जी, तऽ लाँड़ खइहेँ घी प्राणे चल जायत तँ घी किनबाक कोन लाभ ? पेट काटि क’ बचौनिहारपर व्यंरग्यक।
चल जइहेँ जी, तऽ लाँड़ खइहेँ घी प्राणेँ चल जायत तँ घी के खायत? पेट काटि क’ पैसा एकत्रित कैनिहापर व्यंरग्यं।
चलतीक नाम गाड़ी चलता-पुरजा आदमीक चलती-बनतीपर प्रयोग।
चलतीक पौ बारह महत्त्वपूर्ण भेलापर सब कार्य भ’ जाइछ।
चलनीमे दूध दूहे, करम के दोस दिये दूध तँ चलनीमे दूहैछ आ दोष दैछ भाग्यदकेँ ।
चलू तऽ अबइत छी, आर किछु लबइत छी संग नहि देनिहारक प्रसंगमे प्रयुक्ते होइछ।
चले के चेट्ठा ने, तम्मू के फरमाइस चलबाक शक्ति छनि नहि, मुदा रहबाक हेतु तम्बू क फरमाइश करैत छथि।
चले के चेट्ठा ने, रहरी के मुरेट्ठा चलबाक शक्ति तँ छनि नहि, मुदा बान्हुता राहडि़क।
चले ने जानी तऽ अङने टेढ़, अङने टेढ़ ने बहुरिए टेढ़ कोना चलबाक चाही तकर लूरि तँ नहि छनि, मुदा कहैत छथि जे आङन टेढ़ अछि।
चले ने जानी तऽ अङने टेढ़
अङने टेढ़ ने बहुरिए टेढ़
कोना चलबाक चाही तकर लूरि तँ नहि छनि मुदा कहैत छथि जे आङन टेढ़ अछि।

चले बटोही थाके बाट बाटपर चलैछ बटोही, किन्तु़ बा‍ट नहि थकैछ, प्रत्युित बटोही थकैछ।
चले बटोही पादे सिपाही परिश्रम बटोही करैछ, किन्तुथ सिपाही निरर्थक परिश्रम करबाक आडम्ब र करैछ।
चलेबने बुल्ल्रा के, तऽ गुल्ल र तर खरिहान
बुल्लनरक वेश चलती छनि, तेँ ओ अपन खरिहान गुल्ललरक नीचाँमे कयलनि।
चाउर के पू3छे गहूम छओ पसेरी क्यो चाउरक भाव पुछलक तँ ओकरा कहलक गहूँम छओ पसेरी।
चाउर चूड़ा भरि फँका गहुँम गोट दस, बूट केराओ एक दू तब मिले रस चाउर, चूडा, गहूँम दस दाना तथा बूट वा मटर एक दुइ दाना भूजामे मिला क’ खैलापर रस भेटैत छैक।
चाउर ताउर छैन्हि ने कंसार धिपाबह चाउर वा आन कोनो भूजाक सामग्री तँ छनि ने, मुदा कंसार धिपैबाक हेतु कहैत छथि।
चाकर के चउकस मड़इक असोरा नोकरकेँ सतत चौकस रहबाक चाही, किन्तुथ मड़ैयामे असोरा नहि लगाओल जा सकैछ।
चाकर के चूकर मड़इक असोरा नोकरकेँ सेहो नोकर रहैछ तथा मड़ैयामे सेहो ओसारा निकालि देल जाइछ, जे असंगत कार्य थिक।
चामक घर कुत्ता नेने जाइ घर जयबाक हेतु एतेक शीघ्रताक कोन प्रयोजन ? घर कोनो चमड़ाक थोड़बे अछि जे कुकूर ल’ कए भागि जायत।
चामक जुत्ताक कुत्ता रखबार चमड़ाक जुत्ताक कुकूर कतहु करय ? कतहु रखबारी करय ? लोभीकेँ रक्षाक भार नहि देबाक चाही।
चामे तेल गुलामे रोटी चमड़ापर तेल देलासँ ओ मोलायम होइछ तथा प्रजाकेँ भोजन देलासँ ओ प्रसन्नथ रहैछ।
चारि आङन जायब तऽ चारि चोता थूक, अपना घर रहब तऽ चारि कुकड़ी सूत


चारि आङन जायब तँ चारि चोत थूक, देत, तेँ अपना घरमे रहब बेसी आनन्द दायी अछि जे चारि टुकड़ी सूत काटब।

चारिक चारि मत चारि व्यरक्तिसँ मत लेलापर चारि प्रकारक मत सुनिश्चित अछि।
चारिक मुह के पकड़े चारि व्यहक्तिक मुह के बन्दच क’ सकैछ? संपूर्ण समाजक अप्रसन्न अछि, तँ ओकरा मनायब असंभव।
चारि कौर भीतर, तब देबता पीतर पहिने भोजन तखन देवी-देवताक स्मकरण होइछ।
चारि चोर चउरासी बनियाँ एक एक कऽ लुटलक
कोनो गाममे चारि चोर तथा चौरासी बनियाँ निवास करैत छल।
चारि जाति लायक, बाभन छतरी कायथ ब्राह्मण, क्षत्रिय, बनियाँ एवं कायस्थकक गणना नीक जातिक अन्त र्गत होइछ जे परंपरासँ चलि आबि रहल अछि।
चारि दिन इजोत फेर अन्हातर इजोरिया चारि दिन रहैछ, पश्चाछत् अन्धिकार भ’ जाइछ।
चारि दिनक चान्दरनी, फेर अन्ह रीया राति सुखक छोट अवधिक उपरान्ता पुन: दुखक समय अयबाक सम्भ वना रहलापर प्रयुक्तफ।
चारि दिन के गेलै, मुरगा मोर हो के औले एक ग्रामवासी किछु दिनक लेल शहर गेल, पश्चारत् ओकर क्रिया-कलापमे परिवर्त्तन भ’ गेलैक, ताहिपर व्यंलग्यल।
चारू कात धान, बीचमे भगबान नेना-भुटका द्वारा खेलक क्रममे प्रयुक्त।।
चारू दिस लत्ती, बीमे भगबत्ती नेना-भुटका द्वारा खेलक क्रममे प्रयुक्त।।
चारि मास पोखरि के, चारि मास इनार के चारि मास पोखरिक जलसँ तथा चारि मास इनारक जलासँ काज चलैछ।
चारि बेद आर सब लबेद वेद तँ चारिएटा अछि जाहिमे संपूर्ण संसारक ज्ञान-विज्ञान भरल अछि।
चालनि दुसल सूप के, जनिका सहस्त्रन गोट छेद स्व यं दोषपूर्ण रहि अनका दोषपूर्ण कललापर व्यंसग्यर।
चालि चली सदा, निबहे बाप दादा अपन व्यवववहार एहन रखबाक चाही जाहिसँ युग-युग धरि ओ मर्यादापूर्णरूपें चलैत रहय।
चालि प्रकृति बेमाय, ई तीनू संगे जाय चालि-चलन, शील-स्व भाव तथा बेमाय ई तीनू, मनुष्यगक मृत्युू धरि संगे रहैछ।
चालीस तऽ घपचालीस
चालीस वर्षोपरान्तन मनुष्यूक स्वासस्य्ेम मे क्रमश: ह्रास होमय लगैछ।
चालैन दुसलनि सूप के, जनिका सहरत्र छेद देo चालनि दुसल सूप के जनिका सहरत्र गोट छेद
चास दी बास ने दी आगन्तु कक स्वा गत-सत्कारर अवश्य करबाक चाही, किन्तुग ओकरा ठहराबाक हेतु स्थाकन नहि देबाक चाही।
चाह पीब कऽ चण्डी पाठ
चाह पीब क’ चण्डीठ पाठक कोन प्रयोजन ? खा-पी क’ पूजा-पाठ कयनिहारपर व्यंशग्य ।
चाहे तऽ बिलाइ बाघ के पछारे, लेकिन बिलाइ चाहे तब ने
कमजोर व्येक्ति सेहो अपनासँ कय गुना बलशीलकेँ परास्ते क’ सकैछ, किन्तुे एहि लेल ओकरामे इच्छायशकित होयब आवश्यकक।
चिकरा भोकरा सऽ लागिहो, भितर घुन्नाभ से अलगे रहियो
बेसी बजनिहार स्पेष्ट वादी होइछ, तेँ ओकर हृदय साफ होइछ, किन्तु जे कम बजैछ ओकर हृदय मलिन होइछ, तेँ ओकरासँ फराके रहब उचित।
चिक्क न घोड़ापर पानि नहि ठहरैछ तेल घोड़ाक पीठपर परितहि ओ बसात सदृश दौड़य लगैछ।
चिक्कदन मुह के सब चुम्मास लैछ नीक व्यडक्ति समान रूपेँ सबठाम सम्मादन प्राप्तड करैछ।
चिड़इक जान जाय, लडि़का के खेलौना ककरो प्राइज़ा जा रहल अछि तथा क्योक आनन्दप उठा रहल अछि।
चिड़इ चोंचक चउथाइ हिस्साि कोनो वस्तुकक कम हिस्सा् भेटलापर कहल जाइछ।
चिड़इमे कउआ जातिमे नउआ ककरो ने चिड़ैमे कौआ तथा जातिमे नौआ ककरो ने होइछ।
चित मोरा चंचल जियरा उदास, मन मोरा बसय इयारक पास मनक चंचलताक कारणेँ हृदय उदास अछि तकर कारण अछि जे मन तँ प्रेमीक लगमे अछि।
चितरा बरसे माटी मारे, आगे गेरूई के कोरे चितरा नक्षत्रमे वर्षा भेलापर माटिक उर्वरा शक्ति नष्टत भ’ जाइछ तथा झुरपित्ती बेसी होइछ।
चितरा बरिसे चित मड़राय, घर बैसल गिरहथ नितराय चित्रा नक्षत्रक वर्षा आनन्दीक वर्षा मानल, जाइछ, कारण फसिलमे वृद्धि होइछ।
चितरा बरिसे तीन जाय कोदो तेल कपास, चितरा बरिसे तीन होय सक्क र के आस चित्रा नक्षत्रमे वर्षा भेलापर कोदो, तेलहन एवं रुइयापर प्रतिकूल पड़ैछ, किन्तुा ई वर्षा गहूँम एवं कुसियारक फसिलपर अनुकूल दैछ।
चित हमर पट हमर सब स्थितिमे लाभ भेलापर प्रयुक्तल।
चिरइक जान जाय, लडि़काक खेलौना चिड़ैक जान जा रहल अछि
, किन्तु बच्चा ओकरा अपन खेलौना बनौनो अछि।
चिराक नीचाँ अन्हालर चिराकक नीचाँ अन्हाौर होइछ।
चिराकमे बत्ती आँखिमे पट्टी चिराकमे बत्ती रहलापर ज्योीति होइछ, किन्तुे आँखिमे पट्टी बान्होल रहलापर नहि देखि सकैछ।
चिलकाओरक चिलका ने धरी, हरबाहाक हर ने धरी चिलकाउरसॅम्ंे चिलका एवं हरबाहसँ हर नहि लेबाक चाही, कारण ओकर बाद ओ निश्चिन्त भ’ जाइछ।
चिलम फूटल उसास भेल चिलम फूटि गेल से नीके भेल, कारण आब ओकरा भरय नहि पड़ल।
चित्त छइ चंचल मन छइ उदास, पानीमे खड़ा छी लागल छल पिआस चंचल चित्त, उदास मन रहलापर पानिमे ठाढ़ भेलोपर मन अस्थिर रहैछ।
चिन्ताे से चतुराइ घटय, दुख से घटे सरीर चिन्ताेसँ चतुरता घटि जाइछ तथा दुखक कारणेँ शरीर ।
चिन्हँय ने जानय मउसी मउसी करे परिचय-पात कोनो ने अछि तथापि मौसी कहि क’ संबोधित करैछ।
चिन्हँल कनियाँ चिन्हछल बर, धऽ पडि़् कऽ कोहबर कर कनियाँ वर तँ चिन्हयले अछि, तेँ दूनकेँ ध’ पकडि़ क’ विवाह करा देल गेल।
चिल्ल ड़ चुनला सऽ हल्लुदक चिल्ल ड़ बीछ देलासँ भगवा कतहु हल्लुकक हो ? हल्लुेक कार्यसँ पैघ लाभक आशा नहि कयल जा सकैछ।
चिल्लाड़ मरय कुकूर खाय चिल्लाड़क मरलासँ बच्चा क माय जीवित रहैछ।
चीनमे अफीम, मिथिलामे बेदान्त जहिना चीन देशमे अफीमक आधिक्यल अछि तहिना मिथिलांचलमे वेदान्तक ज्ञानक।
चीनाक बंसमे सपूत भेल माढ़ा चीनाक वंशमे माढ़ा सपूत भ’ कए जन्म लेलक।
चीना चरी गेल मुकुन्दू सुतले रहल चीना चरि गेल तथापि मुकुन्द क नीन नहि टुटल।
चीलरक डरे भगबा खोलब चीलरक डरेँ क्यो भगवा थोड़बे खोलैछ ? छोटछोअ बातक हेतु डेरयनिहारपर व्यंोग्ये।
चीन्हअय ने जाने मौसी मौसी करय अप्रासंगिक सम्बनन्धम फडि़छॉततनजारपर व्यंाग्य ।
चील्हों रंग सब कोय, सियारोक सन कोय ने चील्हो सदृश सब हो, किन्तुक सियारो सदृश क्योह ने।
चुगलखोर भगबानक चोर चुगलखोर व्याक्ति भगवानक चोर होइछ।
चुगला चु।गलीमे ने चुकय चुगलखेर व्याक्ति चुगली करबाम कखनो नहि चुकैछ।
चुट्टीक घर सब दिन मातम चुट्टीक घरमे सतत मातम रहैछ, कारण ओकर वंशक विनाश कखनो भ’ सकैछ।
चुट्टी के मरय बेर पाँखि जनमैछ मरबा काल चुट्टीकेँ पाँखिर जनमि जाइछ।
चुड़ैलपर मन आबि गेल तऽ परीक्षा जाइछ। अधलाहे वस्तु जँ प्रिय लागि गेल तँ नीक वस्तुेक कोनो प्रयोजन नहि।
चतुड़ सऽ सुपारी भाङब असंभव कार्य संपादित करबाक क्षमता प्रदर्शित कयनिहारपर व्यंकग्य्।
चुन्नाश पोठी चालि देबय रहुक बिसाय छोट-छोट माछ पोखरिमे कूदि-फानि क’ ई सूचित करैछ जे एहिमे माछक अ‍ाधिक्यश अछि।
चूड़ा कूट गे रमनी झमनी, ठकुरा दे रे मुनसा रमनी झमनी दुइ मिलि क’ चूड़ा कूटि रहल छल, जाहिमे खोइला देबाक कार्य ओकर स्वा मी कयलक।
चूड़ा के गबाही दही एक दोसराक कार्यमे गवाही दैछ तँ कहल जाइछ।
चूड़ा दही बारह कोस, पूड़ा-पूड़ी अठारह कोस चूड़ा दही भोजन भेटलापर बारह कोस,किन्तुल पूड़ी तरकारी भोजनपर अठारह कोस गेल जा सकैछ।
चूड़ा मुर मुर दही खट्टा, साउस पुतहुमे हँसी ठट्ठा चूड़ा तँ नीक, किन्तु़ दही खट्टा अछि।
चूतड़पर जे रंगताल जमे, से रंगताल तबलापर जमे तब ने चूतड़पर ताल देमय सबकेँ अबैछ, किन्तुट तबलापर देबाक जखन अवसर अबैछ तखना सब तेजी समाप्तस भ’ जाइछ।
चूतड़ ठेलि कऽ गाछ चढ़ाबी, तकर तोड़’ फल कतय पाबी जकरा अवलम्बक द’ कए गाछपरी चढ़ाओल जायत तकरा द्वारा तोड़ल फल कतयसँ पाबि सकब? सामर्थ्ययहीन व्यीक्ति आनक की सहायता करत ?
चूतिया मरि गेल, संतान छोडि़ गेल अधताह व्यिक्ति तँ चल गेल, मुदा प्रतीक रूपेँ अपन प्रतिनिधिकेँ छोडि़ गेल।
चुन आ चमार कुटलेपर ठीक चून एवं चमार मारि-पीट क’ ठीक राखल जाइछ।
चून तमाकू सानि कऽ जे बिनु मँगने दे, सुरपुर नरपुर नागपुर तीनू बास करे तंबाकू बिनु मँगने जे दैछ ओकर निवास स्वार्ग, मृत्यु एवं पताल तीनू लोकमे होइछ।
चेरियाक गोड़ जाँतला सऽ बहुतिरयाक गुजर जाय नौड़ी पैर जाँतलासँ नवकनियाँक निर्वाह होइछ।
चेरिया बिआयल महरक, महतनिया कहलक बेटिए अत्य न्त कष्टोनपरान्तछ बच्चाकक तथापि बेटिये।
चोखो आ मुरमुरो चोखा सदृश मुलायम तथा भूजा सदृश दुनू कोना भ’ सकैछ ? दुइ विपरीत बात एकहि संग संभव नहि।
चोटालय साँप शत्रुता प्रदर्शित कयनिहारपर व्यंुग्यत।
चोदे चमइन आ करे एतबार नितिषद्ध कर्म क’ कए सूर्यव्रत करैत अछि।
चोदे लेल चटाइ ने, आ खोले लेल तम्बूछ सुतबाक हेतु चटाइ पर्यन्त नहि छैक, मुदा सतत तम्बूत तकैत्‍ रहैत अछि।
चोर उचक्काु चउधरी, कूटनी भेल परधान समाजमे चौधरीक गणना चोर आ उचक्का मे होइछ एवं कुटनीक प्रधानता भ’ गेल अछि।
चोरक अरजल सभ केओ खाय, हरन मरन चोर असगर जाय चोर उपार्जन्‍ करैछ तँ सब खाइछ, किन्तुक ओकरा जखन मारि-पीट खाय पड़ैछ होइछ तकखन क्योम संग नहि दैछ।
चोरक आगू ताला की, आ बइमानक आगू केबाला की चोरक आगू ताला तथा बइमानक आगू केबाला कोनो अर्थ नहि रखैछ।
चोरक खेती बादसाहक नोकरी बरोबरि चोरक संग खेती करब करब तथा बादशाह ओतय नोकरी करब लाभप्रद नहि होइछ, कारण दुनू कोनो स्थितिमे किछु क’ सकैछ।
चोरक गबाहीक ने आस चोरक गवाहीक कोनो आशा नहि कयल जा सकैछ।
चोरक गबाही गिरहकट्ट गिरकट्ट जँ चोरक गवाही देत तँ ओहिमे निष्पाटक्षताक अभाव निश्चिये रहत।
चोरक चाउर टके सेर चोरिक माल सस्तस दामपर बिकाइछ।
चोरक दाढ़ीमे तिनका चोर चोरि करैछ तेँ सतत ओकर मन सशंकित रहैछ।
चोरक धन छिपारे खाय चोरक धनक उपयोग आने व्यओक्ति करैछ।
चोरक भगबा डाही दुष्टभ व्येकितक कोनो निशानी अहितकर होइछ।
चोरक मन बसय ककरी खेत चोर तँ सतत चोरिक बात सोचैछ तेँ ओकर मन बरोबरि ओहीरमे तल्लीरन रहैछ, जे कखन अवसर भेटत।
चोरक माय चोरनी, कोठी मुह दऽ कानथि चोरक माय चोरनी कहबैछ।
चोरक माल आन खाय, ओकर जान अकारथ जाय चोरिक धनक सदुपयोग आने आन करैछ, किन्तुध पकड़यलापर ओकर जान निरर्थक चल जाइछ।
चोरक मुह चाँइ सन ककरो मुह देखहिँ ओकर वास्तओविक स्‍वभावक परिचय भेटि जाइछ।
चोरक मुह चान सन चोर चोरि करैछ, किन्तुा अपन आकृति-प्रकृति भलमानुस सदृश रखैछ, जाहिसँ क्योि ई नहि बुझय जे ई चोर अछि।
चोरक मुह स्या ह चोरक मन सतत सशंकित रहैछ।
चोरक संग चोर, पररुक संग खबास चोरक संग तँ चोरि करैछ, किन्तु पहरेदारक संग खबास हैबाक अभिनय करैछ।
चोरक सरिया घेंटकट चोरक साक्षी घेंटकट बनैछ।
चोर के कहे चोरी कर, साहू के कहे जागल रह चोरकेँ चोरि करबाक हेतु प्रोत्सायहित करब आ धनवानकेँ कहब धनक रक्षा करू।
चोर के गरहथा उसास अपराधी व्यथक्तिकेँ उचितसँ कम दंड आनन्दा यक होइछ।
चोर के चोरे बसात चोर चोरि करबाक वातावरण सतत बनबैछ।
चोर के पैर नहि चोरक पता ठेकान कलगाबय अत्य न्तं कठिन अछि।
चोर के मारले, नेबो के गारले जहिना चोरकेँ मालासँ वास्तेविकताक रहस्योचदघाटन होइछ तहिना नेबोकेँ गारलासँ रस बहराइछ।
चोर चलल फाँसी, तऽ नौ गोटे के संग लऽ जखन चोर फाँसीपर चढ़य लागल तखन अपना संगे आर नौ व्ययक्तिकेँ संग क’ लेलक।
चोर चाकर चूके, किन्तु् चुगला ने चूके चोर एवं चाकर चूकि सेहो जाइछ, किन्तुे चुगलखोर व्यरक्ति कखनो ने चूकि सकैछ।
चोर चिन्ह्ने गाँओ उजाड़ चोरकेँ चिन्ह‍लासँ ओ गाममे विख्याकत भ’ जाइछ।
चोर चिन्हनने जग उजागर चोरकेँ चिन्ह‍ला उत्तर ओ संसारमे विख्याेत भ’ जाइछ।
चोर चोर मसिअउत भाय, साँझे हँसुआ धैल पिजाय चोर-चोर आपसमे मसिऔत भाय होइछ।
चोर चोरियो सऽ गेल, तऽ टाँरा फेरा फेरियो सऽ गेल चोर व्यसक्ति पहिने चोरि करैत छल, किन्तुभ पश्‍चात् ओ साधु बनि गेल।
चोर चोरी सऽ गेल, की तुम्मा फेरा फेरियो सऽ गेल चोर जँ चोरी करबासँ गेल तँ की तुम्माम फेरा-फेरीसँ गेल? स्वलभाव अकस्माकत् परिवर्त्तित नहि भ’ सकैछ।
चोर जाने चोरक धान चोर ई नहि बुझैछ जे ई धान चोरेक अछि।
चोर जाने मंगनीक बासन चोर सब वस्तुाक चोरि करैछ तँ ओकरा हेतु कोन बासन मंगनीक अछि आ कोन नहि, ताहिसँ कोन प्रयोजन ?
चोर जेहने हीरा के, तेहने खीरा के चोर चोर अछि चाहे ओ हीराक कराय वा खीराक।
चोरनी होइहऽ तऽ गलगर होइहऽ चोरनी भेलापर मुहफट्ट एवं बात बनयबामे पटु हैब आवश्यमक।
चोर ने सुनय धर्मक कथा चोर कतहु धर्मक बात सुनैछ।
चोर ने जोन मँगनीक बासन चोर जखन चोरी करय जाइछ तखन ओकरा थोड़बे ध्या न रहैछ जे बासन मँगनी क’ कए गृहस्वातमी अनलनि अछि।
चोर न्या यहि नष्टन चोरक संग न्याएय भेलासँ ओकर विनाश होइछ।
चोर पकड़ाय गांठ सऽ, छिनार पकड़ाय खाट सऽ जहिना चोरकेँ मोटरीक संग पकड़ब आसान अछि तहिना छिनारक छिनरपन ओकरा खाटेपर पकड़लापर होइछ।
चोरबाक अरजल सब केयो खाय, असगर चोरबा फाँसी जाय चोर द्वारा उपार्जित संपत्तिक सब उपयोग करैछ, मुदा पकड़यलापर ओ एसगर फाँसीपर चढ़ैछ।
चोरबाक ध्याैन मोटरीपर चोरक ध्यायन सतत मोटीरीपर रहैछ जे अवसर भेटितहि चोरा लेब।
चोरबाक मोन बसे ककड़ीक खेत चोरक मन सतत ककड़ीक खेतमे रहैछ जे कखन अवसर भेटत जे चोरि क’ कए ककड़ी तोडब।
चोर बाजे जोर सऽ चोर जोरसँ बाजि अपन अपराधकेँ झाँपय चाजहैछ, तँ व्यं ग्यए।
चोर बान्हेब चउकीदार के चोर उनटे चौकीदारकेँ बान्है त अछि।
चोर बोले मनहूस जकाँ चोर मनहूस जकाँ गप्प करय जेना ओकरा कोनो ज्ञान नहि छैक।
चोर मोट बान्हिनहि पाबी चोर एवं मोब्टिरी कसि क’ बन्हकला उत्तर ठीक रहैछ।
चोर मोट बन्हटनहि पाबी चोर मोटरी चोरा क’ लए गेल से नीके भेल, कारण भार उठयबासँ मुक्ति भेटल।
चोर ला चाउर, आ हरबाह ला खुद्दी चोरक हेतु चारउक तथा हरबाहक हेतु खुद्दीक व्यावस्था भेलापर कहल जाइछ।
चोर सऽ कही चोरी करऽ, आ साह सऽ कही जगैत रहऽ चोरसँ चोरि करबाक हेतु तथा साहुसँ जगैत रहबाक आग्रह कयल जाइछ।
चोरिएक रसपानमे बेसी आनन्द चोरिसँ आनल वस्तुआसँ बेसी आनन्दह ओकर रसपान करबामे होइछ।
चोरा ने बनोरा, ने तोरा हाथी, ने तोरा घोड़ा चोर जीवन भरि चोरि करैछ तथापि ओकरा हाथी घोड़ा कहियो ने होइछ।
चोर सहय इजोत चोर प्रकाशक सहन नहि क’ सकैछ, कारण चोरि करब नहि फबतैक।
चोरी आ सीना जोरी चोरिक संगाहि संग सीना जोरी करबामे सेहो निपुण अछि।
चोरी करे निमोछिया, लग जाय मोछगरहा के बिनु मोछबला चोरि करैछ, मुदा भकरार मोछबला पकड़ल जाइछ।
चोरी के माल मोरीमे जाय चोरिक धन नष्टो भ’ जाइछ, कारण ओकर सदुपयोग नहि भ’ पबैछ।
चोरी ने करी बनिज ने जाय, बिद्याक कमाइ बइसले खाय ने चोरि करबाक प्रयोजन ने वाणिज्य क आवश्यरकता, प्रत्युात विद्या एहन वस्तु अछि जकर कमाइ लोक बैसले-बैसल खाइत अछि।
चैत के जाड़ राड़ के बोली, बिसम कहार छोट के डोली, रामेसर आसिन के धाम, ई मति कबहुँ सहाबे राम साहेब रामदासक कथन छनि जे आश्विन मासक गर्मी, चैत मासक जाड़, छोट कहार द्वारा पालकी ल’ जायब कष्ट कर होइछ।
चैत के पछबा भादो के जल्लाै, भादो के पछबा माघ के पल्लाज चैत मासमे पछबा, बसात, भादो मासमे मासमे वर्षाक संग पछबा बहय तँ माघ मासमे पाला निश्च ये पड़त।
चैत के परोर भादो के ओल, की खाय राजा की खाय चोर चैत मासमे परोर तथा भादोमे महग रहैछ तेँ ओकरा राजा वा चोरे खा सकैछ।
चौबे गेला छब्बेा बनऽ, दुब्बेद बनि के एला देo चउबे गेला छब्बेह बने दुब्बेम बनि कऽ अयला
छइ घरनी घर हँसइ छइ, नइ घरनी घर कानइ छइ पत्नीन घरमे अछि तँ घर हँसैत रहैछ, कारण ओ गृहलक्ष्मीम थिक।
छउड़ी गे छँहधरी तोरा काँखितर कहतरी, तोरा आगि ला पठौली तोँ कि करय गेले कचहरी छौड़ी क्षणहि क्षण छाँह धरैत अछि।
छउड़ी गे तोहर मन बुझैत छिअउ एक लड़की दोसराकेँ संबोधित क’ कहि रहल अछि, ‘तोहर मन कतय छौक से हम बुझि रहल छी।
छउड़ी छल छल कर, छौंड़ा पुछबे ने कर लड़की अपना दिससँ विभिन्नत भावादि प्रदर्शित करैछ, किन्तुभ लड़का दिससँ ओहि भवादिक प्रति कोनो ध्या्न नहि देल जाइछ।
छउड़ी लटलट कर, छौड़ा पुछबो न कर देo छउड़ी छल छल कर छौंड़ा पुछबे ने कर
छओ मासक कुत्ता, बारह बरखक पुत्ता कुकूर छओ मासक तथा बेटा बारह भेलापर सचेष्टछ मानल जाइछ।
छओ मास जीतिया अगते पारन जीवित्पुीत्रिका व्रतमे एखन छओ मास शेष अछि, मुदा ओकर पार्वण एखनहि क’ रहल अछि।
छओ मास डिरीयानी, तऽ एक बच्चाम बियानी अधिक प्रयासोपरान्तद बच्चाएक जन्मच भेल।
छओ मासमे कटनी बँधनी बरिस भरिमे पुल्लाी, हमरा संग कटनी क्योि ने करय टोला छओ मास पहिने ऋतु आबि जाइछ।
छकल नारीक मुह गारी कोनो वाद-विवादमे परास्त स्त्री सतत गारि पढ़ैछ।
छक सऽ भक भेल, झींगामे झोर भेल आश्चऽर्यजनक कार्य-व्याभपार भेलापर प्रयुक्त‍।
छ खइली छुछुन्न्र खइली, छ गदाहाक खइली, छुछरी अँचार खइली एक परिहासपूर्ण लोकोक्ति जकर प्रयोग बच्चाि सभ बेसी करैछ।
छठिहारक दूध मन पड़ब अत्याधिक अधलाह रूपेँ असफल भेलापर बुद्धि रस्तायपर आबि जाइछ।
छतीस प्रकारक भोजनपमे बहत्तर रोग विभिन्नर प्रकारक सुरुचिपूर्ण सुस्वा्दु भोजनसँ अनेक संभावना रहैछ।
छनगल मउगीक टीटपर हाथ छनकल मौगी अपन आथेँ सतत गुप्तांचगकेँ नुकौने रहैछ।
छनमे रानी, छनमे चेरी स्वा मी अपन पत्नीेक संग क्षणहिमे रानी एवं क्षणहिमे नौड़ी सदृश व्यरवहार करैछ।
छनहिमे छन रंग, छनहिमे तीन रंग एक क्षणमे एक रंग रहैछ, मुदा दोसरहि क्षणमे पुन: परिवर्त्तित भ’ जाइछ।
छप्पमरपर खढ़ ने डयौढ़ीपर नाच घरपर तॅं खढ़ पर्यन्त नहि छनि, मुदा दरबज्जांपर नाच करबा रहल छथिङ
छबि ने छटा मसुरीक दालि बड़ खट्टा छवि-छटा तँ किछु ने छनि, मुदा जीह एहन पातर छनि जे मसुरीक दालि बड़ खट्टा लागि रहल छनि।
छवि ने छटा खेसारीक दालि बड़ खट्टा रूप रंग तँ तेहने छनि, किन्तु् खयबाकाल खेसारीक दालि खट्टा लागि रहल छनि।
छबे नबे उठे दँता, कहिया ने छूटे दूधा भता छओ अथवा नओ मासक अन्त,र्गत बच्चाटकेँ जँ दाँत बहराइछ तँ ओ शुभ सूचक अछि।
छबे बकरी नबे गाय, बरख दिनपर महिस बिआय छौ मासमे बकरी, नौ मासमे गाय एवं एक बरिसपर महीस बच्चा दैछ।
छर से भर झींगामे झोर बुद्धि तँ एहने छनि जे झीगामे झोर लगबैत छथि।
छल छउड़ी जोगनी, भेल भगजोगनी लड़की तँ छल योगिनी सदृश, मुदा अपन व्यकवहारसँ आब भगजोगिनी बनि गेल।
छल छल कयलहुँ पूआ पकओलहुँ, सेहो पूआ खाहू ने पौलहुँ प्रसन्नौचित्तसँ पूआ तँ पकओलहुँ, किन्तुक ओकरा खा नहि पौलहुँ।
छलनि बहुरिया झाँपल, लेलनि बहुरिया खापरि कनियाँकेँ झाँपि-तोपि क’ रखलनि, मुदा अवसर उपस्थित भेलापर ओ हाथमे खापरि ल’ लेलनि।
छाइ सन कनियाइन, नओ आना खोंइछ कनियाँक स्वारूप तँ राख सदृश छनि, मुदा हुनका खोइछ नौ आना देल जाइत छनि।
छातीपर केस ने भालू सऽ लड़ाइ छातीमे केश नहि छनि, मुदा अपनाकेँ बहादुर मानैत छथि।
छातीपर मूँग दड़रब छातीपर मूँग दरडि़ रहल अछि।
छान ने बान दोकान ला झगड़ा ने घर छनि ने ओहिमे देबाक उपाय, किन्तुह दोकान बनयबाक हेतु झगड़ा क’ रहल छथि।
छान बाँटल हम, भैंस देता सोखा छानक रस्सीह तँ हम बाँटि क’ राखि नेने छी, आशा लगौने छी जे महीस भगवान देताह।
छार भार हुनक कपार कोनो वस्तुनक जिम्मोछवारी अपनापर नहि लेब, तँ प्रयुक्ती।
छारल छोपल घर पौलहुँ बान्ह्ल पौलहुँ टाटी, अनकर जनमल बेटा पौलहुँ चुम्मा ली की चाटी जहिना क्योम बनल बनाओल घर पाबि गेलापर प्रसन्नौतासँ उत्फु ल्लप भ’ जाइछ तहिना अनकर जनमल बेटा पाबि चुम्मा‍ ली कि चाटी तकर निर्णय तकर निर्णय करब कठिन भ’ जाइछ।
छिछरी पटिया उठब कोनो कार्य क हेतु अत्यतधिक परेशान हैब।
छितनी बढ़नी लगाउ कोनो कार्य नहि भेलापर ओकरा प्रति उपेक्षाक दृष्टिऍं देखब।
छिनारक बुद्धि छिनारे जान छिनारक बुद्धि छिनारे जानि सकैछर।
छिनरा मनसा जनकपुर गेल, खन अइ गली खन ओइ गली, दरसनो ने भल पट बन्दओ भऽ गेल दुश्च्रित्र व्येक्तिक संग रहलापर मनोरथक सिद्धि नहि भेलापर प्रयुक्तस।
छिनरीक हाल के जाने छिनारिक हाल के जानि सकैछ ? जे रूपक रहैछ तकर बुद्धि तदनुरूपेँ रहैछ।
छिनरोक मन देहजरबे नाम छिनारिक हाल देहजरबा जनैछ।
छीक गेल भरौरा, नाक दबनहि छी छीक भरौरा चल गेल तथापि नाक दबनहि छी।
छीके तऽ नीके छीक शुभ सूचक सेहो कखनो-कखनो मानल जाइछ।
छीके नहाबे छीके खाय, छीके पर घर ने जाय छींकलापर नहायब, खायब शुभसूचक मानल जाइछ, मुदा छीकलापर यात्रा करब अशुभ मानल जाइछ।
छुच्छाा के के पुच्छाक निर्धनकेँ कयो ने पुछैछ।
छुछुन्नेरक चानी चमेलीक तेल छुछफन्नेरक माथामे जँ चमेलीक तेल लागोओल जाइछ तथापि ओकर दुर्गन्ध नहि समाप्तछ होइछ।
छटुने घोड़ भुसकड़बहि ठाढ़ घोड़ा जखन बंधनसँ छूटैछ तखन भुस्सानक घर लग ठाढ़ भ’ जाइछ।
छेरक कान गोंसयाँ हाथ बकरीक कान सदिखन मालिकक हाथमे रहैछ।
छेरी भेड़ी हर चले, बड़द बेसाही किये जखन बकरी आ भेड़ीसँ हर जोतबाक काज भ’ जाइछ तखन बड़द कीनबाक कोन प्रयोजन ? जखन छोअ व्यकक्ति अपन सामर्थ्य सँ पैघ काज करैछ, तखन व्यंमग्या।
छोट खिखिरक मोट नाङरि खिखिर तँ स्वोयं छोट अछि, मुदा ओकर नाङरि बड़ मोट छैकङ
छोट पूँजी बनिज खाय अल्पप पूँजी व्या पारकेँ समाप्ता करैछ।
छोट बड़ जग करब करब भारी, खनदान देख कऽ बिआह करब गोर हो बा कारी छोट वा पैघ यज्ञ, महाजन पैघ आदमी वंश परंपरा देखि क’ विवाह करबाक चाही, भनहि वर वा कनियाँ गोर हो वा कारी।
छोट मुह पैघ बात छोअ व्य क्तिक द्वारा पैघ व्याक्तिक समक्ष धृष्ट्ता प्रदर्शित करब।
छोट मोट टंगरी पेट बरोबरि देखबा सुनबामे तँ बड़ छोट अछि, मुदा भोजन करबा काल पैघ-पैघ खाधुरकेँ छका दैछ।
छोटे मियाँ तऽ छोटे मियाँ, बड़े मियाँ सुहान अल्लात छोटे मियाँ तँ सजजहिँ छोट छथि, किन्तुस बड़े मियाँ तँ हुनकोसँ बढि़ क’ छथि।
छोड़ झार मोर डूबय दे हे झार, तों हमरा छोडि़ दे, हम डूबय चाहैत छी।
छोपे छोपे भीत, जोडे़ जोड़े गीत जहिना कोदारिसँ छओ काटि क’ भीत बनओल जाइछ, तहिना जोडि़-जाडि़ क’ गीत गाओल जाइछ।
छोहे छाती फाटे, लोरक ठेकान ने दयासँ छाती तँ फाटि रहल अथ्छो, किन्तुय आँखिमे नोरक कोनो ठेकान नहि।
छौड़ा टहलू टटुआ घोड़, खाय बहुत काज करे थोड कम वयसक नोकर तथा छोअ कदक घोड़ा खाइत अछि बेसी, मुदा ओ काज कम करैछ।
छौड़ा नौरा गाम, पढ़ना भेल हेमान अज्ञान व्य क्ति गाम-गाममे मार्यादित भ रहल अछि, किन्तुद जे पढ़ल-लिखल अछि से हैवान बुझल जाइछ।
छौड़ा माड़र बूढ़ देबान, ममिला उनटे साँझ बिहान नेना जँ मालिक बनि जाय, मंत्री जँ वृद्ध व्यझक्ति होथि तँ कार्य बनबाक संभावना नहि रहैछ।
छौड़ी गे तोहर अङने कतेक कन्या क एक सीमा होइछ जाहिमे ओकरा रहय पड़ैछ।
छौ तऽ छकाओ, ने तऽ बिकाओ वस्तु अछि तँ ओकरा प्रदर्शित करू अर्थात् उचतिसँ पाछू नहि हटू।
जंगी घोड़ाक भंगी असबार युद्धक घोड़ाक सबार घोड़े सदृश मस्ति भ’ युद्ध-कौशलक प्रदर्शन करैछ।
जंडाक रोटी खेसारीक दालि, हे हनुमान तोरे पोन कैन्हें लाल बच्चाप सभ एकर प्रयोग बानरकेँ लक्ष्यन क’ करैछ।
जँहकर पानी ओही जो, हमरो लूँआ सूखि जो पानि जतयसँ आयल छेँ ततहि चल जो आ’ हमर वस्त्रिकेँ सुखा दे।
जँह धोबीपर धोबी बसे, तँह कपड़ापर साबुन चढ़े जतय बेसी धोबी रहैछ ततय जँ स्व्यं कपड़ापर साबुन लगायब पड़य तँ एहिसँ दुर्भाग्याक बात आर की भ’ सकैछ ? साधनक प्रचुरतापर अभावग्रस्त ता सहजहिं समाप्तप भ’ जाइछ।
जइ कोखि धी जे अन छोडि़ पानि ने दी जे गर्भवती अछि तकरा प्रचूर परिणाममे भोजन देब अन्यिथा ओकर स्वामस्य्ैन पर अधलाह प्रभाव पड़ैछ।
जइसन करनी, ओइसन भरनी जे जेहन कार्य करैछ तकरा तदनुरूपेँ फल भेटैछ।
जइसन के तइसन जे जेहन रहैछ तकरा संग तेहने व्येवहार करब उचित।
जइसन कोखि तइसन पूत मायक स्व भावक अनुरूप पुत्रक जन्मर भेलापर कहल जाइछ।
जइसन जेहन होनहार, तइसन तेहन बुद्धि जखन जेहन हैबाक रहैछ तखन बुद्धि सेहो तदनुरूपे भ’ जाइछ।
जइसन तोहर फाँफर कोदो, तइसन हमर हींग अपन वस्तु केँ नीक कहनिहारपर व्यंदग्य ।
जएह अनंग, सएह दिगम्बहर जेँ कामदेव छथि तेँ दिग्ब्र र बनलाह।
जएह गोनू झाक चुअकुला, सएह तेतरिक खटमिट्ठी तेतरिक खटमिट्ठी सदृश गोनू झाक चुटकुला चहटगर होइछ।
जएह दिअए पाकल आम, सएह ढोंढ़ाइ मिसर जकरेसँ लाभ होइछ लोक ओकरे जयकारी करैछ।
जएह हर सएह मार परिश्रम करब तँ लाभ, अन्य़सथा विपत्ति।
जऽ कतहु बरिसे उतरा, तऽ कोदो ने खाय कबूतरा जँ उतरा नक्षत्रमे वर्षा भ’ जाइछ तँ कबूतर सेहो कोदो खायब छोडि़ दैछ, अन्न क आधिक्यक आशामे ।
जकर इयार कोतबाल तकरा ने डर जकर प्रेमी कोतवालक काज करैछ तकरा कोनो वस्तु क डर नहि होछ।
जकर ऊक ने तकर फूक भारी अकार्यक व्यकक्ति फुफकार अत्यनधिक रहैछ।
जकर खाइ, तकर गाइ जकरासँ लाभ होइछ लोक तकरे गुनगान करैछ।
जकर खुट्टा मजगूत तकर पड़रू मजगूत, जकर खुट्टा कमजोर पड़रू कमजोर बरदहस्त् प्राइज़ व्यमक्ति सतत सामर्थ्य वान रहैछ, किन्तुइ जे व्यसक्ति एहिसँ वंचित अछि से सतत कमजोर।
जकर जोरू कर पहरादार, ओकर मनसा हल्लुूक बिलार जकर पत्नीु गृहकार्यमे कुशल अछि अर्थात् गृहस्थीनक सब कार्य सम्हाकरि लैछ ओ अपन स्वा्मीकेँ सतत मूर्ख बुझैछ।
जकर बड़द आन्हार, सैह भरे गाम गढ़हा समर्थहीन व्य क्ति कोनो काज करबामे अनुपयुक्तव भ’ जाइछ, तँ प्रयुक्तह होइछ।
जकर बनरी सैह नचाबे सब कार्य सब नहि क’ सकैछ।
जकर बनल आखरबा रे तकर बारहो मास जाहि गृहस्थबक अषाढ़ मासमे खेती भ’ गेल ओकर बारहो मासक चिन्ताक दूर भ’ जाइछ।
जकर बाप नरकटमे मरल, तकर बेटा मृदंगी भेल जकर पिता हीनावस्था्मे कष्टक भोगि क’ मुइल तकर बैटा मृदंग बजा क’ खुशी मनबैछ।
जकर मंत्री थिक भिखारी, ओकर गाम दरिद्रा भारी जँ भिखारि मंत्री रहैछ, तँ दरिद्रा अपन प्रभुत्वि स्था पित करैछ।
जकर मड़बा तकरे गीत जकर मड़बापर बैसब तकरे गीत गायब।
जकर मन ने पाइ, तकरा लग ने जाइ जकरा हृदयसँ मेल नहि हो तकरा लग नहि जयबाक चाही।
जकर मन बसे बड़ी दूर, तकर मन बिधाता पूर जकर मन बड़ पैघ अछि, जे महत्त्वाकांक्षी ओकर कामना ईश्व र निश्चलये पूर्ण करैत छथि।
जकर लाठी तकर भइँस जे लाठीक जोरगर अछि वैह महीस सकैछ।
जकर लाठी तकर महींस देo जकर लाठी तकर भइँस
जकरा कतहु ने पुछारी, से सउराठक नोतिहारी जाहि वरक कतहु विवाह नहि होइछ ओ विवाहार्थ सौराठमे उपस्थित होइछ।
जकरा खेबा ने से अगले मांगि जाहि यात्रीकेँ नाओक खेवा नहि रहैछ ओ नाओपर सबसँ आगोँ बैसैत अछि।
जकरा घर ने आङन से बड़ हलचल जकरा घर दुआरि किछु ने छैक ओ अनेर हड़बड़ीक प्रदर्शन करैछङ
जकरा जोरू ने जाँता, तकरा खुदा मियाँ सऽ नाता जकरा ने तँ पत्नीत छैक आ ने सखा-संतान, ओकरा एहि संसारसँ कोन प्रयोजन? तेँ ओकरा भगवत-भजनमे लागल रहब सैह उचित।
जकरा ने हर बड़द सेहो जोतनियाँ जकरा हर बड़द किछु ने छैक सेहो खेत जोतिनिहार बनि गेल।
जकरा पैर ने फाटल बेमाई, से की जाने पीर पराई जकर पैरमे बेमाय नहि फाटल ओ आनक पीड़ाक की अनुभव करत ? जकरा कोनो पीड़ा नहि भेलैक ओ आनक पीड़ाक अनुभव नहि क’ सकैछ।
जकरा बारह बीधा खेत, तकरा डाँरमे डाँरमे डाँराडोरि ने जे बारह बीघा खेत जोतैत अछि ओकरा डाँरमे एक सूत पर्यन्तत नहि छैक।
जकरा बीघा भर बाङ , तकरा डाँर मे डाँराडोरी ने जकरा एक बीघा बाङक खेती छैक तकरा डाँरमे डाँडोरि पर्यन्त नहि छैक।
जकरा मुह ने कान, तकरा बीचे ठाम दोकान जकरा मुह कान किछु नहि छैक ओ बीच रस्तामपर दोकान सजौने अछि।
जकरा ला कानी, तकरा आँखिमे नोर ने जकरा हगतु नोर बहाओल जाय ओकरे आँखिमे नोर नहि अछि।
जकरा लेल कानी, तकरे आँखिमे लोर ने जकरा लेल कानि रहल छी तकरे आँखिमे नोर नहि अछि।
जकरा लेल चोरि केलौं, सैह कहलक चोरा जकर उपकार कयल जाय सैह जँ बदनाम क’ दैछ, तँ प्रयुक्तक।
जकरे खैबैक, तकरे गैबैक जकरे खायब तकरे गीत गायब ।
जकरे धारी, तकरे आँड़ दागी जकरा ओतय बैसि क’ घूड़ तापि‍ रहल छी तकरे आँड़ दागि रहल छी।
जकरे बिआह तकरे गीत अनुकूल स्थिति रहलापर प्रयुक्तू होइछ।
जकरे बिबाह तकरे गीत जकर विवाह भ’ रहल अछि तकरे गीत गाओल जाइछ।
जकरे भोज तकरे पात भात ने जकरा ओतय ओरिआओन भेल अछि तकरे पातपर भात नहि अछि।
जकरे माय मरय तकरे पात भात ने जकर माय मरि गेल अछि तकरे पातपर भात नहि पड़ल अछि।
जकरे मूरे मूर, तकरे मारब तीन हूर जकरा माध्यममे मूल पूँजी बनल अछि तकरे लाठीक हूरसँ मारि रहल छी।
जखन उखडि़मे मूड़ी देल, तखन मूसरक चोट सहियारहि पड़त जखन उखडि़मे मूड़ी देल अछि तखन मूसरक चोटक कोनो डर नहि करबाक चाही।
जखन चारि भाय, तखन टाँय टाँय जखन चारि भायक छी तखन आपसमे झगड़ा-तकरार तँ होयबे करत।
जखन छउड़ी सुनलक सासुरक नाम, बुलि आइलि छउड़ी सउँसे गाम जखन छौड़ी सासुर जयबाक नाम सनुलक त5खन ओ संपूर्ण गाम अपन प्रेमीसँ भेअ क’ कए आबि गेल।
जखन नाचय चलली तऽ घोघ कथीक जखन नाचब प्रारंभ कयलनि तखन घोघ काढबाक कोन प्रयोजन ? जखन ककरो विरुद्ध कार्य करब प्रारंभ कयल तखन ओकरा नुकयबाक कोनो प्रयोजन ने।
जखन बूट छल तखन दाँत ने, जखन दाँत भेल तखन बूट ने बूट खयबाक अवसर भेल तँ दाँत नहि छल, जखन दाँत भेल तखन बूटे नहि रहल।
जखन भेल अपन बेटी, तखन बिसरलहुँ बापक बेटी जखन बेटी जन्मे लेलक तखन बापक बेटीकेँ गेलहुँ।
जखन मड़ुआक गाछी भेल, धिया पुता सुख सुख माछी भेल जखन मडुआक गाछ भेल तखन बच्चात सभ प्रमुदित भेल जे आब भोजन निश्च ये भेटत।
जखन मङुआमे बालि भेल, धिया पुता के गाल भेल अन्नाक उपजा भेलापर भोजनादिक समस्या क निराकरण भेलापर कहल जाइछ ।
जखन लौड़ाक मारि जायत, तखन बूरि पका कऽ चटनी करब समयेपर प्रत्येबक वस्तुरकउपयोगिता होइछ।
जखन होय ढाँसी तखन पिआबह बाकस पाती जखन नेना-भुटकाकेँ खोंखी होइछ तखन ओकरा बाकसक पात औंटि क’ पियौलासँ आरम होइछ ।
जखने चरखा टनमन भेल, साउसक झोंटा पुतोहु लेल जखन चर्खा चलब बन्दि भेल तखन बुझलहुँ जे सासु-पुतोहुमे झगड़ा हैब‍ प्रारंभ हैत ।
जखने छौंड़ा कहलक काकाहो, तखने बुझलहुँ जे हँ सुआ हेरौलक जखने काका कहि क’ छौड़ा हल्लाे कयलक, तखने बुझलहुँ जे ओ हँसुआ हेरा देलक।
जखने छौड़ी सुनलक गौनाक नाम, मखने मारलक सौंसे गाम देo जखन छउड़ी सुनलक सासुरक नाम, बुलि आइलि छउड़ी सउँसे गाम
जग जीतलक कानी, बर उठे तऽ जानी विवाहक अवसरपर क्योँ कहलक, ‘कनही तँ संसारकेँ जीत लेलक।
जग बिगाड़य कउथा, आ तीर्थ बिगाड़य चउबे यज्ञकेँ कौआ बिगाडि़ दैछ अपन अपवित्रतासँ तथा तीर्थकेँ चौबे बिगाड़ैछ, कारण ओ दान-दक्षिणार्थ यजमानकेँ तंग करैछ।
जगरनाथक भात ला सब पसारय हाथ जगन्नथथक भातक हेतु सब अपन हाथ पसारैछ।
जऽ गोअर पिंगल पढ़य, तीन बात जंगल के कहय जँ गोआर पिंगल अर्थात् छन्दसशास्त्र क ज्ञाता भ’ जाइछ तँ सब बात जंगलकेँ कहि अबैछ।
जड़लपर नून छिटब पीडि़त व्य क्तिकेँ जँ क्योे आर पीड़ पहुँचाबैछ, तँ प्रयुक्तो।
जत चाह तत राह इच्छाहशक्ति प्रबल रहलापर लक्ष्यअक प्राप्ति निश्चित होइछ।
जतने गाँगू लाम, ततने सोहाइक चाकर गाँगू आ सोहाइ दुनू कोनो-ने-कोनो रूपेँ समान अछि। तेँ दुनूक लामकाक बेसी छैक।
जतय बुढ़बा बुढियाक संग ततय खरचीक तंग, जतय छौड़ा छउड़ीक संग ततय झालि मृदंग वृद्धावस्थादमे अनेक समस्याडक समाधानार्थ लोक सतत चिन्तित रहैछ तेँ खर्चीक समस्यातपर विचार-विमर्श बेसी होइछ।
जतय भोज ततय खबइया ने, जतय बूरि ततय चोदबइया ने जतय भोज भ’ रहल अछि ततय खैनिहारक अभावा अछि।
जतय मुरगा ने, ततय बिहान ने मुर्गाक अनुपरिस्थ तिमे प्रात कतहु नहि होइछ? ककरो अभावमे कोनो कार्य नहि रूकि सकैछ।
जतय सूइया ने समाय, ततय फार घुसियाय जतय सूइया नहि प्रवेश पाबि सकैछ ततय फार कोना प्रवेश क’ सकैछ ? असंभव वा बिनु ढंगक कार्यपर व्यंाग्यय।
जतय सेर ततय साबा सेर जकरापर भार छैक तकरापर आर कनेक्शन भार पड़लासँ कोनो अन्त्र नहि अबैछ।
जतबे खाय सउँसे बरियात, ततबे खाय दुलाहक बाप जतेक भोजन संपूर्ण बरियात करैछ ततके वरक बाप एसगरे करैछ।
जतबे गरमायत, ततबे बरसत जतेक बेसी गर्मी पड़त ततेक वर्षा हैबाक संभावना रहत।
जतबे तर, ततबे ऊपर गंभीर व्यहक्तिक प्रसंगमे प्रयुक्त होइछ।
जतबे भागमे हैत ततबे ने हैत कतबो किछु किएक ने करू भाग्युमे जे हैत ओकर भोग भोगहि पड़त।
जतहि धर, ततहि घर जतहि लोक रहैछ ततहि घर बनबैछ।
जतहि बड़द गेल, ततहि तरक्कीय भेल जाहि दरबज्जालपर बड़द अछि ठाम तरक्कीे निश्चित अछि, जतय बड़द नहि अछि ततय खेती-पथारी कहियो नहि भ’ सकैछ।
जतिया सऽ पतिया बड़ भारी जातिसँ प्रतिष्ठाड पैघ मानल जाइछ।
जतेक के कनियाँ ने, ततेक के लहठी वस्तुकक मूल्य सँ बेसी ओहिपर व्य य कयलापर प्रयुक्त ।
जतेक के बहु ने, ततेक के लहठी जतेक मूल्युवान पत्नी नहि अछि ओहिसँ मूल्यमवान लहठी आनल गेल।
जतेक के लाइ ने ओतेक बिदाइ जतेक दामक वस्‍तु नहि आनलक ओहिसँ ओकर विदाइ लागि गेल।
जतेक गुड़ ततेक मीठ कोनो वस्तुतमे जतेक बेसी गुड़ देल जाइछ ओ ततेक मीठ होइछ।
जतेक चोख ने ततेक छुटछुटाहे बड़ जतेक कार्यक उपयोगी नहि अछि ओहिसँ बेसी अधलाह करबापर आतुर अछि।
जतेक मुह ततेक रंगक बात जतेक रंगक लोक अछि ततेक रंगक बात कहैछ।
जते मुह तते बात देo जतेक मुह ततेक रंगक बात
जऽ धोबीपर धोबी बसय, तऽ कपड़ापर साबुन पड़य कोनहुँ व्या पारमे व्येवसायी व्यसक्तिक पारिवारिक स्पीर्धा होइछ, तँ सर्वधारणकेँ अधिक लाभ होइछ।
जनता चोर, गाम उजाड़ परिचित चोर सफलता पूर्वक चोरि क’ गाँवकेँ उजारि दैछ।
जनमक दुखिया करमक हीन, तकरा राम महन्थीा दीन जन्ममसँ दु:खी एवं भाग्य क हीन व्य क्तिकेँ भगवान महन्थीम देलथिन।
जनमक सब केओ करमक संगी केओ ने मनुष्यबक जन्मगक संगी सब होइछ, किन्तुि ओकर भाग्येक संगी क्योम नहि होइछ।
जनम देल माय बाप, करम हैत अपन माय-बाम मात्र जन्मय देनिहार छथि, किन्तुि अपन भाग्याक विधायक मनुष्यम स्वयं अछि।
जनम पत्री सब देखैछ, करम पत्री केओ ने देखैछ माता-पिता जन्मधदेनिहार होइछ, किन्तुन ओ ओकर भाग्य -विधायक नहि।
जनिक पैर पनही ने छल तनिकदुआरिपर कार, बाभन बृत तोहर किरपा की अजगूत संसार जनिका पैरमे जुत्ता पहिरबाक उपाय नहि छल तनिका दरबज्जात पर एखन मोटर अछि।
जनिका मुखसुधिक नहि परकार, तनिका अडि़यातक बड़ चमत्काार जकरा दरबज्जातपर गेलहुँ तँ ओकरा एक खण्ड सुपारी देबाक सामर्थ्यओ नहि छलैक, किन्तुर ओ अतिथिकेँ अडि़यातबामे बड़ हर्षक अनुभव करैछ।
जनिहें मियाँ धुनिहें के बेरिया तुरक की भाव पड़ैछ तकर अनुभव धुनियाँकेँ तखन होइछ जखन ओकरा धूनय पड़ैछ।
जनै देखियो चान, तनै करिओ सलाम चन्द्रखमा जाहि भाग दृष्टिगत ताहि भाग सलाम करैछ।
जनेत चोर गाम उजारे परिचित चोर चोरि क’ गाँवकेँ उजाडि़ देत अछि।
जब जेठ चले पुरवाई, तब साबन धूर उड़ाई जेठ मास जँ पुरबा बसात चलैछ
, तँ सावन मासमे वर्षा नहि हैत आ धूरा उडि़आयत।
जप जपै छी, ठक ठकै छी पूजा-पाठक बहन्नाठ क’ कए लोककेँ ठकब।
जऽ पेटमे पड़ल खुद्दी, उमकय लागल जुज्जीम पेटमे अन्नड गेलापर मनमे नाना प्रकारक तूफान उठय लगैछ।
जबक संग घून पिसाय प्रधान व्यनक्तिपर विपत्ति पड़ने साधारणो व्यधक्तिपर प्रभाव पडैछ, तँ प्रयुक्तक होइछ।
जब जनियह खरचा के हीन कितिकामे तूँ बोइहऽ चीन कृतिका नक्षत्रमे चीना बाओग करबाक उपयुक्तन समय मानल जाइछ।
जऽ बनियाँ के मोती फरे, तऽ ने बनियाँ खेती करे व्याापारीकेँ अपन व्यइवसायमे अत्यँधिक उन्नाति होमय लगैछ तँ कोनो परिस्थितिमे ओ खेती नहि करैछ।
जब बालु सड़य, तब मोती फरय बलुंआह खेतमे बालु सडि़ क’ माटि बनि जाइछ, तखन नीक उपजा होइछ।
जब सब कोई सूते, तब पदेसी चुल्हाि फूके आन ठाम रहनिहार व्य क्ति साधारणतया देरीसँ चूल्हि फूकैत अछि, कारण ओ देरीसँ घर वापस अबैछ।
जब से उतरली गंगा पार, दुखक मोटरी पड़ल कपार गंगापार विवाहोपरान्त एक मात्र दु:खे रहल अछि।
जबान जाय पताल, बुढि़या मांगे भतार जवान व्य क्ति सब मरल जा रहल अछि, किन्तु् वृद्धा स्वारमीक खोज क’ रहल अछि।
जबान डेराय भगला सऽ, बूढ़ डेराय मरला सऽ
नवयुवक परिवारक परित्यासग करबासँ तथा वृद्ध व्यिक्ति मृत्युयसँ सतत भयभत रहैछ।
जबान हारल, तऽ सब हारल लोक प्रतिज्ञासँ च्युतत भ’ जाइछ तँ ओकर सर्वस्वत समाप्त‍ भ’ जाइछ।
जबानी जमा खर्च मुहजबानी हिसाब देखायब।
जबानी मउगत नीक, अधपेटा खोनाइ ने नीक युवावस्थातमे मरि जायब नीक, मुदा आधा पेअ भोजनप करब नहि नीक।
जबानीमे गदहीओपर जउबन अबैछ युवावस्थादमे गदही सेहो नीक लगैछ।
जबानीमे झरकयलनि, आ बुढ़ारीमे झुनझुना बजौलनि जहिया सौख-मौज करबाक अवसर तहिया तँ झरकबैत रहलाह, मुदा बूढ़ भेलहुँ तँ सौख करबाक हेतु प्रेरित करैछ।
जऽ बिलाइ दस्ता ना पतिहरत, तऽ मूस के पकड़त जे जाहि कार्यक हेतु उपयुक्ति अछि ओकरा वैह कार्य करबाक चाही।
जम मारे बेरा बेरी यमराज एकक बाद दोसराक प्राण लैछ।
जमराजक सहोदर यमराज सदृश कर्कश व्‍यवहार कयलापर व्यंजग्यव।
जमाति करय करामति सम्मिलित समूह कोनो कार्य क’ सकैछ।
जमाय जमलौं पैंचो निस्तायर जमायाकेँ खोआ देलहुँ पैंचाक निस्ता र भ’ गेल।
जमाय रूसल घर भरल, बेटा रूसल घर खसल जमाय जँ रूसि जाइछ तँ घरक वस्तुट दान-दहेजमे नहि जाइछ, किन्तुू कमौआ पूतक रुसलापर घरगृहस्थी समाप्तु भ’ जाइछ।
जमाय संगे नहि, बेटी सऽ रास जमायसँ मेल नहि, मुदा बेटीक लग आयब जायब अछि।
जय गोपाल भइया, असली मूल रूपइया जँ संगमे पैसा रहत तँ सब सलाम करत।
जय जगदम्बाै जय जगदीस, जे देत दही चूड़ा तकरे दीस हे जगदम्बात ! हे जगदीश ! अहाँक जय हो ! हमरा जे भरि पोख चूड़ा-दही देत तकरे दिस हम रहब।
जरल घोड़ाक जरले लगाम अधलाह घोड़ाकेँ अधलाहे लगाम रहैछ।
जरल जे जुरैली, भूखल ने अघैली जड़ल व्युक्ति कोना जुड़ा सकैछ।
जरलपर नोन देब जरलपर नोन द’ कए ओकरा आर पीड़ा देब।
जरला बनमे राखक अकाल जरल वनमे राखक कतहु अकाल हो ? वस्तुनक अधिकता रहलापर तकरे न्यूानता भेलापर व्यंखग्या।
जऽ राड़क लग्धीक कऽ प्रयोजन पड़य, तऽ ओ छओ मास लग्घीं ने करय क्षुद्र व्य क्तिसँ प्रयोजन पड़लापर ओ अपनाकेँ सामर्थ्यववान बुझैछ, तँ व्यंपग्य ।
जरे बिआह भेल जरे गौना, तोहर साँय पाँच हाथ हमर किए बौना एक सखी अन्यर सखीकेँ संबोधित करैछ, -हमरा दुनुक संगाहि संग विवाह भेल, गौना भेल, किन्तुव तोहर स्वाछमी पाँच हाथक छथुन, हमर स्वा‍मी बौना सदृश भुट्ट किएक छथि ?’
जरैबाक लेल फूस ने, तपबाक हेतु कोइला मुइलापर जरैबाक हेतु खढ़ पर्यन्ता नहि छनि, मुदा अगियासीक हेतु कोइलाक व्यलवस्थाद क’ रहल छथि।
जलक सूर बाभन, रनक सूर क्षत्री ब्राह्मण जलमे तथा क्षत्रिम रणमे वीर होइछ।
जलमे रहि कऽ मगर सऽ बैर पानिमे रहैत छथि , मुदा मगरसँ शत्रुता करैत छथि।
जस जनाबर, तस गड़गड़ी जेहन जानवर रहैछ ओकर आवाज तदनुरूपेँ होइछ।
जहन जेम्ह रे बहे बसात, तहन तेम्ह्रे करी पीठ जतय-जतय माधोक घर छनि ततय-ततय भुतही बहैछ।
जहाँ नहि जाथि रबि, तहाँ जाथि कबि कविक कल्पजना सूर्यक किरणोसँ प्रखर होइछ।
जहाँ बुझि ने बड़ाइ, तहाँ से भाग रे भाइ जतय कनेको आदर सम्मा न नहि हो, ततय नहि जयबाक चाही।
जहाँ सगरे गाम कसाइ, तहाँ एक रामदास के बसाइ जतय सम्पू र्ण गाम कसाइ बसैछ ततय सदृश भक्त क निर्वाह कोना भ’ सकैछ ?
जहाँ साँझ, तहाँ बिहान जतय साँझ भ’ जाय ततहि प्रात चाही।
जहाँ सै गो कसाइ, तहाँ एक के कहाँ बसाइ जतय सैकड़ो कसाइ बसल अछि ततय एक नीक व्यडक्तिकेँ कतय बसाओल जाय ?
जहिना जनमासौच, तहिना दिकसूल सब काज समान रूपेँ भेलापर व्यं ग्या।
जहिना लोकमे, तहिना बेदमे लौकिक एवं वैदिक व्येवहार समान रूपक प्रयुक्तं होइछ।
जहिना हेम तहिना खेम, दुनू दिस सऽ कुसल छेम हेम एवं क्षेम दुनू बरोबरि अछि, दुनूक बीच मात्र कुशल-क्षेम होइछ।
जहि पातमे खाइ, तहीमे छेद करी कृतघ्नत व्य क्तिक आचरणपर व्यंऽग्य ।
जहिया धरि नौकरी तहिया धरि पान, छूटि गेल नौकरी घुसरि गेल पान अर्थाभावक कारणेँ पान खायब छूटल, तँ व्यंाग्यप।
जाँता देखि कऽ झींक देब जाँताक सामर्थ्‍य देखि क’ ओहिमे झीक देल जाइछ।
जाँता फूटल, नाता टूटल फूटल जाँत आ टूटल सम्बबन्धल निरर्थक भ’ जाइछ।
जाइ छी नैहिरा, जीये ससुरा हम तँ नैहर जा रहल छी आब सासुर जीवित रहत।
जाइ छी पटना, जोड़ा एक जाँत अहाँ पटना जा रहल छी।
जाइ छी पटना सहर नेने माथपर मोहर, एना किए चलइ छी जबानी के टर पटना जा रहल छी सँ की माथपर मोहर लागल अछि ? जवानीक नशामे छी तँ अंइठाक चलैत छी ? जवानी देखौनिहारपर व्यंाग्ये।
जाइत गेलहुँ, अबैत भेल लाज जयबाक बेर तँ चल गेलहुँ, मुदा अयबाकाल लाज किएक भ’ रहल अछि? कोनो कार्यमे हाथ आगाँ बढ़ा क’ पाछाँ भनिहारपर व्यंआग्ये।
जाउते बसी, सतउते उजड़ी जाउतक संग निर्वाह भ’ सकैछ, मुदा सौतिनक संतानक संग निर्वाह कठिन भ’ जाइछ अर्थात् सौतिनक सन्ता न कष्ट दायी होइछ।
जा ओझा पातरि लगौता
, ता ओझाइन फूकि सेरउती जाधरि ओझा पा‍तरि लगौता ताधरि हुनक पत्नी ओझाइन फूकि-फाकि भ’ भोजन क’ लेतीह।
जा करब बाबू बाबू, ता करब अपन काबू कोनो कार्यक हेतु जाधरि दोसरक निहोरा करब ता‍धरि ओ काज अपने क’ लेब।
जा करी पुत्ता पुत्ता, ता करी अपन बुत्ता कोनो कार्यक संपादनार्थ जा अपन बेटाक शक्तिक स्मकरण करब ता अपन शक्तिसँ कार्यै संपादित क’ लेब।
जाके जहाँ न गुन लेहे ताके तहाँ न ठाम, धोबी बसके की करै दिगम्बकर के गाम जतय जीवकोपार्जनक साधन नहि हो ततय निवासक कोन प्रयोजन? जेना दिगम्बयरक गाममे धोबीकेँ कपड़ा धोयबाक अवसर नहि भेटैछ।
जाके पैर ने फटे बिमाई, सेकी जाने पीर पराई जकरा पैरमे बेमाय नहि फाटल अछि ओ आनक पीड़ाक की अनुभव क’ सकैछ।
जागल जागे, कि सुतल जागे सुतल व्येक्ति जगौलापर जागैछ, किन्तुक व्यलक्ति जागैछ ? अचेतकेँ सचेत कयल जा सकैछ, किन्तुछ जे सचेते अछि तकरा की ?
जागल पूतक नास ने होइछ, कहने छथि भगबान भगवानक कथन छनि जे जागल पूतक कहियो विनाश होइछ।
जागल रह सन्तोि, बिलाइ मारे मटकी दुष्टर व्य क्तिक उपस्थितिसँ सज्ज न व्यमक्तिक सतषर्कता अपेक्षित।
जा जुअनका करे लोटपोट, ता बुढ़बा मारे तीन चोट जा नवयुवक लोटपोट अर्थात् विश्राम करैछ ता बूढ सभ तीन चोट मारि लैछ।
जाड़ कहे हम हाड़ हाड़ तोड़ब, आगि करे धरहरिया जाड़ मास वस्त्रा भावेँ कष्टरदायी होइछ, किन्तुा आगि ओकर सहायतार्थ उपस्थित रहैछ।
जाड़ बड़ जाड़ गोसाइ बड़ दाता, कम्म र बिनौता हमरो देता जाड़ मासमे धीयापूता द्वारा प्रयुक्तस होइछ।
जाड़ बड़ जाड़ गोसाइ बड़ पापी, धिपले खिचड़ी खुआ गे काकी जाड़ मासमे गरम खिच्चाडि़ खयलासँ गरमी उत्प न्नग होइछ।
जाड़ बड़ जाड़ तप तपुआड़, माय देलक चूड़ा पैली बाप देलक टाट, छोटका भइया धोती देलक तब छुटल जाड़ जाड़ाधिक्यदक कारणेँ छोट-छोट बच्चाा सभक द्वारा प्रयोग कयल जाइछ।
जाड़ राड़क कोन चिरउरी, कम्मछरपर जब हो पिछअउरी कम्बिलपर जँ एक चादर हो तँ जाड़क कोन खुशामद ?जाड़ मात्र कम्‍‍बलसँ नहि समा‍प्त् होइछ।
जातिओ गमौलहुँ, सबादो ने पौलहुँ जाति सेहो चल गेल, मुदा कोनो स्वाकद नहि भेटल।
जातिक बइरी जाति, काठक बइरी काठ शत्रु अपनहि जाति लोक होइछ।
जाति सऽ परजाति नीक अपन जातिक अपेक्ष आन जाति नीक होइछ।
जातो गमयली, भातो ने खयली अभीष्टम वस्तुा नहि प्राप्तस भेलापर प्रयुक्तक होइछ।
जाधरि साँस, ताधरि आस जाधरि श्वाअस-प्रश्वानस क्रिया अछि ताधरि जीवित छी।
जान चले ने केराक भार अपन शरीर तँ नहि चलैत छनि, किन्तुस केराक भार ढोइत छथि।
जान जाय मुदा माल नै जाय जान चल जाय से स्वीैकार, मुदा टेंटसँ रुपैया ने जाय।
जान जाय तऽ जाय, जबान ने जाय प्रत्ये क स्थितिमे प्राणसँ बेसी मूल्यावान जवान होइछ।
जान तऽ जहान जँ शरीरसँ छी तँ संपूर्ण संसारक प्रत्येमक वस्तुी आनन्दरदायक अछि, अन्ययथा सब निरर्थक।
जानथि ढोंढ़क मन्त्रद नहि, देथि दराधक माथा हाथ अयोग्या व्य्क्ति जनसामान्यूक संगहि-संग विशिष्ठो‍ व्यणक्तिकेँ ठकय चाहैछ, तँ प्रयुक्तस होइछ।
जान ने पहचान, बड़ी बीबी सलाम परिचय-पात कोनो ने अछि, मुदा सलाम क’ रहल छथि।
जान बचल तऽ लाखो पाओल कोनो खतरासँ अपनाकेँ सुरक्षित राखब आवश्यखक, कारण जीवन बहुमूल्यल अछि।
जान बचे तँ लाख उपाय जान बचे तँ अनेक उपाय भ’ सकैछ।
जान मारे बनियाँ, अनजान मारे ठक बनियाँ परिचिते व्याक्तिक ठकपनी करैछ, मकुदा ठक अपरिचित व्य‍क्तिकेँ ठकैछ, कारण ओकरा सतत भयल बनल रहैछ जे कदाचित रहस्योबद्घाटन ने भ’ जाय।
जान मारे बनियाँ, अनजार मारे ठक बनियाँ परिचिते व्यबक्तिक संग ठकपनी करैछ, मुदा ठकपनी करैछ, मुदा ठक अपरिचित व्यिक्तिकेँ ठकैछ, कारण ओकरा सतत भय बनल रहैछ जे कदाचित रहस्यो द्घटन ने भ’ जाय।
जान मारे बनियाँ, पहचान मारे चोर बनियाँ सौदाक खरीद फरोख्यहतमे प्राण ल’ लैछ तथा चोर परिचितक ओतय चोरि करैछ।
जानल ने जाय निसाचर माया राक्षस कोनो प्रकारक उपद्रव कखन क’ सकैछ ताहि प्रसंगमे किछु ने कहल जा सकैछ।
जानले घर बिआहले बर विवाह भेलेपर ककरो घर एवं वरक यथार्थताक परिचय होइछ।
जान ले सासत धन ले दु:ख जाधरि जीवन अछि ताधरि अनेक कष्टथ अछि।
जानि कऽ कुकुरबधिया करब जानि बु‍झि क’ कोनो असंगत काजकयलापर प्रयुक्त होइछ।
जानी घोंघाक मन्त्र ने, दी दराधक माथा हाथ घोंघाक मन्त्रन पर्यन्त नहि जनैछ, मुदा विषयुक्तन साँपक माथपर हाथ फरैछ।
जानी ने सुनी मउसी मउसी करी परिचय पात किछु ने अछि, मुदा मौसी कहि क’ संबोधित क’ रहल छथि।
जाने गहूँम जाने पिसनिहार गहूँमक कोन स्थिति होइछ ओ तँ गहूँम वा ओकरा पिसनिहारे जानि सकैछ।
जाने जौ जाने जाँता जकरा जे प्रयोजन होइछ वैह ओकर हाल जनैछ।
जाबत छलैन्हय लाल नूआ ताबत छली कनियाँ, फाटि गेलैन्हब लाल नूआ भऽ गेली पुरनियाँ जावत धरि लाल नूआ रहलनि तावत धरि कनियाँ बनल रहलीह।
जाबत पुन्न धाबय धाबय, ताबत पाप गोंति मारय जावत पुण्य दौडि़ क’ आओत तावत प्राण ल’ लेत।
जाबत साँस, ताबत आस देo जाधरि साँस ताधरि आस
जाबत सोखार भार हैत, ताबत पुतार आँखे चल जैत जाधरि ओझा ताधरि बेटाक आँखि चलि जायत।
जाय जमान, रहे ईमान प्राण चल जाय ओ स्वीाकार, किन्तु् ईमान नहि जयबाक चाही।
जाय नेपाल, संगे कपार नेपाल किएक ने चल जाउ, मुदा भाग्यन तँ संगहि जायत।
जाय लाख, रहे साख लाखक लाख किएक ने चल जाय, मुदा विश्वाास नहि जयबाक चाही।
जाहि गाछ के बगुला, ओही गाछमे लागे जाहि वृक्षक खपलोइया रहैछ ओ ओही वृक्ष मे सटैत अछि अर्थात् अपनहि व्यीक्ति अपन होइछ।
जाहि गाछ तर आम पाइ, ताहि गाछ तर दउर दउर जाइ जाहि गाछक नीचाँ आम भेटैछ ओतय दौड़-दौड़ क’ जाइछ।
जाहि ने अबिबेकक कोताही अविवेकी व्यीक्तिक कृपणतापूर्ण व्यरवहारपर प्रयुक्तव।
जाही पत्ते खाइ, ताही पत्ते भूर करी जाही पातमे भोजन करैत छी ओही पातमे भूर करैत छी।
जाहि पाप ताहि खै जे पाप करैछ तकर विनाश होइछ।
जाही बिधि राखे राम ताही बिधि रहियो जहिना भगवान राखथि तहिना चाही।
जाही मुह सऽ पान खाइ, ताही मुह सऽ कोइला ने खाइ जाहि मुहसँ पान खायल जाइछ ओहि मुहसँ कोइला कोना खायल जा सकैछ ? असम्बसद्ध कार्यपर व्यंाग्यओ।
जिट जाट फिट फाट बड़ बढि़ गेल, पेटमे खर ने सिंहमे तेल भोजनाभाव अछि तथापि शान-शौकतमे कोनो अभाव नहि भेलापर व्यंुग्यन।
जिनकर भूजा ने तिनकर फक्का बड़ जिनकर भूजा नहि छनि तिनकर फक्काु बड़ पैघ होइछ।
जिन्नेघ देखियो दही, हुन्नेो बोलियो सही जेम्हेर दही देखी तेम्ह रेक बात ठीक मानी।
जिबैत सैयाँ लग ने आबय, मुइने दे सपना जीवनकालमे कोनो महत्त्व नहि देल, किन्तुा मृत्यूलपरान्त् स्मुरण करब, तँ प्रयुक्तष।
जीअक जीअब जी सधने जीअब जीवित रहबाक निमित जीहपर नियन्त्र ण राखब उचित अन्यमथा प्राणान्तु भ’ जाइछ।
जीअत बाप के पानि ने, मूइला बाप के पिण्डाक जीवितावस्था मे बापकेँ निरादर कयलनि, किन्तुव बाप जखन मरि गेलथिन तँ पिण्डुदान करैत छथि।
जी जाय घी ने जाय प्राण चल जास से स्वी कार, मुदा घी खर्च नहि करब।
जीतक आगाँ, हारिक पाछाँ स्वा र्थी व्यरकित लाभमे आगाँ रहैछ, मुदा हानिमे पाछाँ।
जीतामे गूँहा भत्ता, मुइलापर दूध भत्ता जीवितावस्थाामे महत्त्व नहि देब, किन्तु् मुइलापर प्रदर्शनार्थ सत्कािर करब।
जीतिया पाबनि बड़ भारी, धियापूता के ठोकि सुतौलनि, अपने खैलनि भरिथारी जीवित्पुौत्रिका व्रत अत्य न्तठ कठिन मानल जाइछ।
जीने आस, मरने उपास जीवित रहलापर बरोबरि लोक आशान्वित रहैछ जे भोजन भेटबे करत, मुदा मरि गेलापर उपवासे-उवास।
जीबनक अन्त- मरन जीवन लीलाक अन्तत मृत्यु सँ भ’ जाइछ।
जीबी तऽ की-की ने देखी, तारक गाछ तरेगन देखी जीवित रहब तँ की-की ने देखब, तारक गाछमे तरेगन देखब।
जीबै छी ने मरै छी, हुकुर हुकुर करै छी जीवन एवं मृत्युछक बीच संघर्षरत व्यकक्तिक कथन।
जीबो पुत्ता जनि दिओ भत्ता पुत्र परवरिश करय वा नहि, मुदा ओ जीवित रहे तकर मंगलवार कामना मायबाप करैछ।
जीबैतमे गुड़ नै, मुइलापर खाजा जीवितावस्था़मे भोजन नहि दैछ आ मुइलापर खाजाक भोज कयल जाइछ।
जीबैत सइयॉं लग ने आबय, मुइने दे सपना देo जिबैत सैयाँ लग ने आबय, मुइने दे सपना
जीये के ने मरे के, हुकर-हुकुर करे के ने जीवित छथि आ ने मरैत छथि, प्रत्युुत हुकर-हुकुर करैत छथि।
जीये भाय गली गली भउजाइ जँ हमर भाय सकुशल रहत तँ गल्लीग-कुच्ची मे अनेक भौजाइ भेटि जायत।
जीर सन छलहुँ जमाइन सन भेलहुँ, सासुर गेने गिरथाइन सन भेलहुँ जीराक समान छलहुँ, किन्तु पश्चाचत् जा क’ जमाइन सदृश भ’ गेलहुँ।
जुआन मउगत नीक, अधपेटा खेनाइ ने नीक युवावस्था मे मृत्युे नीक, किन्तुप आधा पेट भोजन नहि नीक होइछ।
जुग भेल जमाना अपना भतार कहे छउड़ी नाना जमाना एहन आबि गेल जे कनियाँ अपन स्वाामीकेँ नाना कहैछ।
जुगमे भूर भेल, ढेलामे ढीर भेल युग परिवर्त्तित भ’ रहल अछि तेँ ढेला-चेपा पर्यन्तत गर्भवती भ’ रहल अछि।
जुजि मुही घोड़ी के कटही लगाम अधलाह घोडीकेँ नीक लगाम लगौलापर कहल जाइछ।
जुड़यली ने साग से तऽ जुड़ायब सागक पानि से सागसँ सन्तोसष नहि भेल तँ की सागक संतोष हैत ? मुख्यँ वस्तुषसँ लाभक कोनो आशा नहि तँ गौण वस्तुनसँ की लाभ भ’ सकैछ ?
जुत्ता सिआइ सऽ चण्ड़ीह पाठ सब कार्यक उत्तरदायित्वि जखन एकहि व्यकक्तिपर आबि जाइछ, तखन कहल जाइछ।
जुन्ना् जरि गेल ऐंठन रहिये गेल रस्सीा जडि़ जाइछस, किन्तुन ओकर ऐंठन यथावत् रहैछ।
जुरले माढ़ा मंगले घी माढ़ा जुरैत नहि छनि, मुदा घी माँगैत छथि।
जूड़ा बन्हौ ने पिया नीक लगैयऽय, हमरा तऽ नीक लगैयऽ, गामक लोक थूक मेलइयऽ पत्नीे पतिसँ पुछलक, ‘हम खोंपा बान्हनलहुँ अछि, अहाँकेँ नीक लगैत अछि’ ।
जूड़े मियाँ के माड़ ने, खोजे मिया ताड़ी देo जूड़े मियाँ के माड़ ने गाम भरिके ताड़ी
जूड़े मियाँ के माड़ ने, गाम भरिके ताड़ी अपना किछु ने छनि, तथापि सम्पू र्ण गामकेँ ताड़ी पियबाक हेतु निमन्त्रित करैछ।
जूड़े तँ ठाँ कए कए पादी, ने तँ भगितो जाइ पदितो जाइ सामर्थ्या नुरूप कार्य करबाक चाही।
जूरब रूचब पचब, ईग्‍ तीनू ककरो ककरो जे खयबाक हेतु भेटय ओ रुचिकर हो तथा पचि जाय तँ सौभाग्य बात मानबाक चाही।
जूर सीतलक सिपाही ककरो कोनो काजक प्रति सतचर्कतापर कहल जाइछ।
जूरे भाँग ने खायब बतासा भाँग तँ भेटैत नहि छनि, मुदा बतासा खयबाक इच्छाै छनि।
जूरे माड़ ने खोजी ताड़ी माड़ पर्यन्त नहि भेटि रहल छनि, मुदा ताड़ी खोजि रहल छथि।
जूरे मियाँ के माड़ ने ताड़ी के फरमाइस दo जूरे माड़ ने खोजी ताड़ी
जूरै गमछा ने पहिरी धोती गमछा रखबाक सामर्थ्यध तँ छनि ने, मुदा धोती पहिरबाक सौख भ’ रहल छनि।
जूरै नोन ने खाय बतासा देo जूरै नोन ने खाय मलाइ
जूरै नोन ने खाय मलाइ नोन पर्यन्त भाग्यजमे नहि छनि, मुदा महत्त्वाकांक्षा छनि मलाइ खयबाक।
जे अषाढ़ पाहुन, से अगहनहुँ पाहुन जे गृहस्थप आषाढ़ मासमे विदा भ’ जाइछ ओकर गृहस्थीह निश्चमये समाप्तु भ’ जाइछ।
जे आगि खाय से अंगोरा हगे जे आगि भोजन करत से अंगोरा दिसा फिरत।
जेकर कटहर घर घर पाट, तकर धियापुता कमरी चाट जकर कटहर धरे-घर बाँटल जाइछ धियापूता कमरी चाटि रहल अछि।
जेकर कमाइ से बन बन कानय, फकिरबा ठोकि ठोकि खाय कमौननिहार रने-वने बौआइछ, मुदा फकीरबा बैसले-बैसले खाइत अछि।
जेकर गारि, तकर दुआरि जे आनकेँ कष्ट दैछ ओकरो क्यो कष्टी देनिहार जन्मट लैछ।
जेकर घर तेकर पुरुब मुह दुआरी, जेकर घर ने तेकर पछिम मुह दुआरी विपरीत परिस्थितिमे कहल जाइछ।
जेकर चून तकर पुन्न जे अन्नन दैछ वैह पुण्यकक भागी होइछ।
जेकर धन जाय, तेकर धरम जाय जकर धन समाप्तप भ’ जाइछ
तकरा कर्त्तव्यापकर्त्तव्यरक कोनो रहल अछि।
जेकर पुरुखा माँगय भीख, से की जानय धरमक रीत जकर पूर्वज भीख माँगैत छल ओ कतहु धर्मक प्रसंगमे विचार करत।
जेकर पैर न फाट बेमाइ, से की जानत अनकर पीड़ा देo जकरा पैर ने फाटल बेमाई, से की जाने पीर पराई
जे करब पूता, से करब अपन बूता कोनो कार्यक सम्पाकदनार्थ जाधरि दोसराक खुशामद करब ताधरि अपन शक्तिक सदुउपयोग क’ लेब।
जेकर मन बसे बड़ी दूर, ओकर मन बिधा ता पूर जकर मनोकामना पैघ रहैछर ओकरा विधाता निश्च ये पूर्ण करैत छथि।
जेकर माय मरय, तकरा पात भात ने जकर माय मरि जाइछ तकरे पातपर भात नहि पड़ैछ।
जेकर मौगी दूँतुली ओकर बड़ भाग, दाँत से हँडि़या खखोरि के खा गेल ओ पति भाग्यिशाली अछि जकर पत्नी क दाँत बाहर छैक।
जेकर आबय झाँपय तोपय, ओकरा आबय आगि ने तापय जकरा कोनो विषयकेँ समाप्त, करबाक क्षमता रहैछ ओकरा पुन: कोना जागृत कयल जाय ताहि प्रसंगमेक कोनो जानकारी नहि रहैछ।
जेकरा दुआरपर मियाँ जी, तेकरा घरे कुकूर के जूठ फेकल जाय जकरा दरबज्जा पर शिक्षक उपस्थित ओहिठाम की ऐंठ फेकल जा सकैछ ? शिक्षकक उपेक्षापर कटाक्ष।
जेकरापर बितैत छैक सेहे जनेत अछि जाहि व्यबक्तिपर विपत्ति अबैछ वैह ओकर वास्तवविकताकेँ जानि सकैछ।
जेकरा पीठपर अगरधत के नगारा बाजे, से की सूपक भड़भड़ौने भागे जे बलवान अछि ओ निर्बलसँ नहि भयभीत होइछ।
जेकरा पिया मानय सेहे सोहागिन जकरा स्वाामीक अत्यिधिक प्रेम भेटैछ, वैह वस्तुसत: सोहागिन मानल जाइछ।
जेकरा भूजा नइ से फकना बड़, जेकरा मउगी नेइ से चोदना बड़ जकरा भूजा पर्यन्त खयबाक उपाय नहि छैक ओ फक्कार मारयमे बड़ तेज होइछ।
जेकरा ला कानी तेकरा आँखिमे लोर नइ जकरा हेतु नोर बहाओल जाय तकरे आँखिमे नोर नहि अछि।
जेकरा ला चोरि कयलहुँ सेहे कहे चोरनी जकरा हेतु चोरि कयलहुँ वैह चोर बना रहल अछि।
जेकरा हाथ लोइ, ओएह सबकोइ जकरा हाथमे भोजनक व्यँवस्थाी रहैछ ओकरे गुणगान सब करैछ।
जेकरा हाथमे ने कउड़ी, तेकर बात लपउड़ी जकरा हाथमे पाइकौड़ी नहि अछि ओकर बातक कोनो मूल्यम नहि होइछ।
जेकरे घर तेकरे जुगुत जेकरे घर रहैछ, तकरे युक्ति चलैछ।
जेकरे घूड़ा आगि तापो, ओकरे आँड़ दागी जकर घूड़ तर बैसि क’ आगि तपैत छी तकरे कुचेष्टाै क’ रहल छी।
जेकरे बनरी सेहे नचाबे जकर बानर रहैछ वैह ओकरा नचबैछ।
जे कहे बइसू, तकरेमे पइसू जे बैसबाक हेतु स्थाकन देलक ओकरे घरमे प्रवेश क’ ओकर यथास्थितिकेँ जनबाक प्रयास करैछ।
जे कौड़ा देलक सेहे घोड़ा देत जे जीविका दैछ वैह चढ़बाक निमित घोड़ा सेहो।
जे खाइत ने लजाय, से अँचबइत पछताय भोजन काल कोनो संकोच नहि भेलनि, किन्तुा अँचयबा काल पश्चाअत्तापक कोन प्रयोजन? अवसरपर संकोच कयलासँ पश्चाजत्ताप करय पड़ैछ।
जे गरजय से बरिसय नहि देo जे गरजैछ से बरसैछ नहि
जे गरजैछ से बरसैछ नहि अत्यरधिक गर्जन कयनिहार मेघ वर्षा नहि करैछ।
जे गुड़ सऽ मरे ओकरा माहुरने देब जे मात्र गुड़ देलासँ मरि जाइछ तकरा विष देबाक कोन प्रयोजन ? सुगमता पूर्वक भेनिहार कार्यमे निरर्थक तूल-फजूलक कोन प्रयोजन?
जे गुनि कयलहुँ तेलिया भतार, से बहतौनियाँ लगले रहल लाभक बात सोचि क’ तेलीकेँ अपन स्वाहमी स्वी कारल, किन्तुन तेल पेड़बासँ पिण्डा नहि छुटल।
जे घर चुक्का , से घर फुक्काे घरक लोक जखन चुक्का -चुक्कीफमे अन्ना लगैछ तखन ओ घर निश्चयये खाली भ’ जाइछ।
जे चढ़ल से गिरबे करत उन्नढतिक पश्चातत् अवनति अवश्य’भावी अछि।
जे चाटी जाँघपर चलैछ से तबलापर नइ चाटी जतेक सुगमतासँ जाँघपर चलैछ ओ तबलापर नहि।
जे छउड़ी लगौलक आगि, ऊहे दरबज्जाय ठाढि़ जे आगि लगौलक वैह दरबाजापर ठाढ़ अछि।
जे छउन गे छउड़ी, तेहन छाजइ छें बड़ गे छौड़ी ! जेहने छें तेहने नीक लगैत छौक।
जे जगदीपेँ नगर उजारल राकस छोड़ल पीपर, से जगदीपा आबि रहल लेने मूसर जाहि जगदीपक कारणेँ नगर उजरि गेल, राकस पर्यन्तक पीपरक गाछ छोडि़ पड़ा गेल, ओएह आबि रहल हाथमे मूसर ल’ कए।
जे जाय बदरी, से ने आबे ओदरी जे बदरी नारायणक तीथ्र यात्री बनैछ तकर पुनर्जन्मा नहि होइछ, एहन मान्य ता अछि।
जे जीबए से खेले फाग, जे मरए से लेखा जाय जे जीवित रहत ओ अगिला फगुआ खेलत।
जेठक दुपहरिया भादबक राति, माघक भिनसरबा अभागल बहराथि जेठ मासक दुपहरिया, भादव मासक अन्धमकार राति तथा माघ मासक भिनसरबामे अभागल व्य क्तिघरसँ बहाराइत अछि, कारण ई विश्रामक समय मानल जाइछ।
जेठक भरोसे पेट भैंसुरक भरोसे कतहु बच्चाि जनमल अछि।
जेठ तबे तऽ अखाढ़ लबे जेठ मासमे गर्मी पड़लापर वर्षा अषाढ़मे वर्षा अवश्यर होइछ।
जेइ बिआहने सब हो सारि जेठ कन्याेसँ विवाह भेला सन्ता शेष सभ सारि भ’ जाइछ।
जे दिअ चूड़ादही तकरे दिस जकरोसँ लाभ होइछ तकरे गुणगान करब ।
जे दिन पूत भेलन सब जजमान सरंग चल गेलन जाही दिन पुत्र पढि़-लिखि क’ पंडित भेलाह ताही दिनसँ सब यजमान स्वनर्ग चल गेलाह।
जे दुख देलन राम, से के मेटत आन भगवान जे दुख देलनि ओकरा क्योे ने मेटा सकैछ अर्थात् भोगय पड़बे करत।
जे देखले ने से चिखले जे देखबे ने कयल तकर स्वा द कोना बूझब?
जे देत ने सोना ओ देत खेतक एक कोना जकर उपलब्धि सोनो देलापर नहि भ’ सकैछ ओ परिश्रम कयलासँ प्राइज़ कयल जा सकैछ।
जे धऽ नङराबय से कतहु पाँका लागल छोड़ाबय जे कोनो वस्तु क हेतु पाछाँ पड़निहार अछि, अनेक व्यववधान उपस्थित भेलोपर ओकरा छोडि़ नहि सकैछ।
जे नइ होए तीन लोक सऽ, से होए सन्तो ख सऽ संतोषसँ बढि़ दोसर किछु नहि।
जे नजर से ने मरत, ओ मारि से की मरत जे आँखि देखौला उत्तर नहि डेराइछ ओ कतहु मारिसँ डेरा सकैछ ?
जेना नचाबे तेना नाची घरक प्रमुख लोककेँ जहिना रखैछ तहिना ओकरा रहय पड़ैछ।
जे नाचल से बाँचल कहिया जे नाच करबामे फँसि गेल ओ अधलाह कार्यसँ कहियो ने बाँचि सकैछ।
जे नुनुआ से गरमे नुनुआ जन्मुजात जे गुण रहैछ सबदिन यथावत् रहैछ।
जे ने करय खेत, तेकर ने भरय पेट खेती नहि कयनिहारक पेट कहियो ने भरैछ।
जे ने करे माय, से करे भादोक राय जतेक सेवा माय नहि क’ सकैछ ओ भादो मासमे सरिसोंक चटनी खयलासँ होइछ।
जे ने करे बाबू, से करे रुपइया पैघ-पैघ व्यखक्ति जे कार्य नहि क’ सकैछ ओ रुपैया खर्च कयलासँ आसानीसँ भ’ जाइछ।
जे ने करे लकीर, से करे फकीर जे परंपरानुसार नहि भ’ सकैछ तकरा साधु-सन्तह सुगमतासँ क’ सकैछ।
जेने गेली खेरी रानी, लेले गेली आगि पानी जा रानी खेरी आनय गेलहक ता लोक हुनक आगि पानि ल’ गेल।
जे ने देखली बापक राजमे, से देखली भतारक राजमे जे बापक राजमे कहियो ने देखलहुँ ओ आब स्वा मीक राजमे देख रहल छी।
जे ने बाजय तकरा कुच्चमम कुच डेंगाबे जे नहि बजैछ तकरा अनेक कष्टखक सामना करय पड़ैछ।
जे ने मानय बड़दक खीस, से खपरी लऽ कऽ माङय भीख जाहि गृहस्थभकेँ बड़दक क्रोध करबाक क्षमताक अभाव अछि ओ खापरि ल’ कए निश्चाये भीख माँगैछ।
जे ने हैत आन से, से हैत भगबान से जकर प्राप्ति तीनू लोकमे ने भ’ सकैछ ओ सन्तो्ष कयलासँ भेटि सकैछ।
जे ने होय माय सऽ, से होय गाय सऽ जे मायसँ संभव नहि अछि ओ गायक दूधसँ संभव अछि।
जे पांडे के पतरामे, से पडि़आइन के अचरामे जे पंडितक पतरामे रहैत छनि ओ पंडिताइनक आँचरमे।
जे पूत दरबारी भेल, देब पितर सब सऽ गेल जे पूत दरबार करय लागल ओ देवता-पितर दूर चल जाइछ।
जे पूत बन बहार गेलन, देब पितर सब सऽ गेलन जे पूत परदेस नौकरी करय जाइछ ओ देवता-पितर सबसँ चल जाइछ।
जे फल नहि चिखलहुँ से बड़ मीठ जाहि फलजक स्वाहद नहि भेटल ओ बड़ मीठ होइछ।
जे बड़ कमउआ से बड़ खन्ती अत्यडधिक कार्य कयनिहार खाधुर होइछ।
जे बड़ पढुआ, से बर भजुआ शैशवावस्थुहिसँ पढ़बामे जे तेज छात्र रहैछ ओ बड़ सहनशल होइछ।
जे बड़ बुधियार से तीन ठाम माखे अत्यडधिक बुद्धिमान व्य क्ति साधारतया छोट-छोट कार्यमे गलती करैछ, ताहिपर व्यंतग्या।
जे बढ़य ने से बूढ़ ने कहाबे जकर लंबाइ नहि बढ़ैछ ओ कतहु बूढ़ नहि कहा सकैछ ? लंबाइमे बौना सदृश, किन्तुग उम्रमे बेसी भेल व्य क्तिपर व्यं,ग्यु।
जे बने से मटिये तेलमे जाहि वस्तुमक विन्याेस भेल अछि ओ सब मटिया तेलमे।
जे बाभनक जीहपर, से बाभनक पोथीमे जे बात ब्राह्मण मुहसँ कहैछ वैह बात हुनक पोथीसँ बहराइछ।
जे बाभनक पोथीमे, से इयारक जबानपर जे बात ब्राह्मण पोथी देखि क’ कहैछ ओ कहैछ ओ सब बात हमर प्रेमीकेँ मुखस्थर छनि।
जे बाँस के बसुली, ओही बाँस के दउड़ी जाहि बाँसक बँसुली बनैछ ओहो चङेडा-चङेड़ी बनैछ।
जे बाँस के बाँस बसौरा, ओही बाँसक सूप दउड़ा जाही बाँसक बसौरा ताही बाँसक सूप एवं दउड़ा बनैछ।
जे बिअयलन से ललयलतनि, बेटा लेल परोसिन अगरयलनि जे बच्चाग जनमौलनि से तँ जीवन भरि लालायित रहली।
जे बियेली से ललैली, बेटा लऽ पड़ोसिन अघैली कष्टस क कए उपार्जन करैछ, जकर सुखोपभोग दोसर तँ करैछ, किन्तुऽ स्वखयं ओहि लेल लालायित रहैछ, तँ व्यं ग्यव।
जे बेटी देखलक बापक घर, से बेटी कयलक अपन घर जेहन व्य वहार वा रहलन-सहन बेटी अपन बापक घर अर्थात् नैहर मे देखैछ तेहन कार्य सासुरमे करैछ।
जे बोले से केबाड़ खोले घरक भीतरसँ जे बजैछ वैह आबि क’ केवाड़ खोलैछ।
जे भनसिया सेहे हाँड़ी चटनी जँ भनसिया चटोरा बहरा जाय तँ भोजन पवित्र नहि भेटि सकैछ।
जे भाबे ने, से पाबे ने जे वस्तुन पसिन नहि रहैछ ओकरा प्राप्त़ करबाक कोनो प्रयास नहि कयल जाइछ।
जे भेल रक्षक, ओएह भेल भक्षक रक्षाक भार जकरापर छलैक वैह भक्षण करब प्रारंभ करैछ, तखन व्यंभग्यब।
जे भोज नै करै से दालि बड़ खौक कृपण एवं पेटू व्यदक्तिपर व्यं ग्यब।
जे मउगी साँय के ने भेल, से गोसाँइ के होयत जे स्त्री अपन पतिक नहि भेल ओ अपन प्रेमीक कोना भ’ सकैछ? दुश्च रित्र स्त्री ककरो नहि होइछ, ताहिपर व्यं ग्यु।
जे माइक दुलार, से बहुक फटकार माय सतत दुलार करैछ, किन्तुन ओकर विपरीत पत्नीर सतत फटकारि क’ काज करबैछ।
जे माथ उठा कऽ चलत से ठोकर खायत जे धमण्ड करत ओ निश्चित रूपेँ ठोकर खायत।
जे मोर जाने तोर मरोर, बाँका कुटिया देबो फोर जकरा नीक-अधलाहक ज्ञान छैक से चतुर व्याक्तिकेँ अनुकुल रखैछ तथा अन्यवसँ निरपेक्ष भ’ जाइछ।
जेम्हकरे जाय भूखा, तेम्हवरे पड़य सूखा जाहि दिस भूखल व्याक्ति जाइछ ताहि भाग अकाल पडि़ जाइछ।
जेम्हपरे देखी खीर
, तेम्हटरे बइसी फीर जेम्हपरे खीर देखैछ तेम्ह रे लोक घुमि क’ बैसि जाइछ।
जेम्हजरे बहय बसात, तेम्हेरे करी पीठ जाहि प्रकारक परिस्थिति अबैछ ओही अपनाकेँ तैयार करी।
जे रूचे से पचे जे रुचिक अनुकूल होइछ वैह भोजन पचैछ।
जे रोगिया के भाबे, से बइदा फरमाबे जे वस्तुा रोगीक भोजनानुकुल होइछ संयोगवश वैद्य सेहो वैह वस्तुक खयबाक हेतु कहैछ।
जेहन उद्दी तेहन भात, हुनका पोछ ने हुनका कान उद्दी आ भात संज्ञा थिक अर्थात् सूर्य आ चनद्रमा।
जेहन ऊक ने तेहन फूक बड़ भारी जतेक पैघ कार्य ने करैछ ओहिसँ बेसी हल्लाप करैछ।
जेहन कनियाँ तेहन बर उभय पक्षक समानतापर कहल जाइछ।
जेहन करनी तेहन भरनी जाहि प्रकारक कार्य करब फल तदुनुरूपेँ भेटत।
जेहन कबि नहि तेहन आनि बड़ जतेक पैघ कवि नहि छथि ओहिसँ बेसी घमंड देखबैत छथि।
जेहन खोजलऽ हो कुटुम्बओ, तेहन मिललऽ हो कुटुम्बट जे जेहन रहैछ तकरा तदनुरूप भेटलापर कहल जाइछ।
जेहन गाँओ, तेहने राओ जाहि प्रकारक गाम रहैछ ओकर मालिको तदनुरूपेँ रहैछ।
जेहन गोनू झा पान के खबइया, तेहन हुनकर चामक पनबट्टा जहिना गोनू झा पान खौबामे दक्ष छथि तहिना हुनक पनबट्टा चमड़ाक छनि।
जेहन गोनू झा पान के खबइया तेहने बेरक पात बैरक पातकेँ गोनू झा पान सदृश खाइत छथि।
जेहन तेल कूड़ लगौने, तेहने मुह झरकौने कुरूप व्यकक्ति कतबो तेल-फुलेल किएक ने लगा लेअय तथापि ओकर स्वकरूपमे कोनो परिवर्त्तन नहि होइछ।
जेहन दिगम्बनर पाड़े तेहन रसुल्लार, हुनका ने छान छपर हुनका ने चुल्हान दिगम्बनर पाण्डेाय आ हुनक रसुल्लाक एकहि रंगक अछि, जनिका ने घर छनि, ने द्वार छनि, ने छप्पकर आ ने चूल्हि छनि।
जेहन देखइत बिकार, तेहन चली बेबहार जाहि रूपक परिवर्त्तन दृष्टिगत हो ओही रूपक व्यकवहार करब अपेक्षित।
जेहन देखी सभाक रीत, ओहने गाबी गीत समाजमे जे परंपराक अनुरूप रहैछ लोक ओही रूपेँ कार्य करैछ।
जेहन देखमे नीक, तेहन छिडि़याह बड़ देखबामे तँ तेहने छथि, मुदा लटाड़म बड़ बेसी करैछ।
जेहन देबता तेहन अक्षत देवताकेँ सेहो अपन व्य क्तित्व क अनुरूपेँ अक्षत भेटैछ।
जेहन देस ओहन भेस जेहन देश रहैछ ओकर अनुरूपेँ वेष-भूषा होइछ।
जेहन नीयत ओहन बरकत विचार जाहि रूपक रहैछ ओही रूपेँ फल सेहो भेटैछ।
जेहन नेना तेहन झुनझुना जे बच्चाा जाहि रूपक रहैछ ओकरा ओही रूपक खेलौना भेटैछ।
जेहन नैहर छल तेहन सासुर ने, जेहन सकल सुख तेहन गहना ने, जेहन अपने छलहुँ तेहन पहुना ने जाहि प्रकार नैहर छल तेहन सासुर नहि, जेहन जेहन सुख-सुविधा अछि तेहन आभूषण नहि, जेहन अपने देखबा सुनबामे सुन्द र छी, ओहन पति नहि।
जेहन पछिमक माटि बज्र तेहन लोको बज्र जलवायुक अनुरूप लोकक स्वहभाव होइछ।
जेहन पैघ तेहन भतार जाहि प्रंकारक पुरुष उपलब्धल हो ओहीमेसँ पति चुनबाक चाही।
जेहन बर देखनुक ने, तेहन छिरिआह बड़ वर देखबामे यद्यपि कुरूप, किन्तुि छिडि़आह बड़ छथि।
जेहन बाड़ीक ओल, तेहन चुगला बहु भकोल जहिना बाड़ीक ओल कबकब होइछ तहिना चुगिलाक स्त्रीलक बोली होइछ।
जेहन बेटी रानीक, तेहन बेटी कानीक जहिना रानीक बेटी प्रिय होइछ तदनुकूले कनहीक बेटी सेहो ।
जेहन मियाँ काठ, तेहन सानक दाढ़ी जाहि प्रकारक मियाँ छथि ताहि प्रकारक हुनक दाढ़ी सेहो सनगर छनि।
जेहन राजा तेहन परजा राजाक अनुरूपेँ प्रजा होइछ।
जेहन सकल सुख तेहन पहुना नहि स्त्रीक कहैछ, ‘जाहि रूपेँ अपने सुन्दहर छी ओहि रूपक हमर स्वाकमी नहि भेलाह।
जेहन होस नै, तेहन जोस बर सामर्थ्य हीन व्यतक्ति जखन दुरूह काज करबाक उत्सारह देखबैछ तखन कहल जाइछ।
जेहने अङना तेहेने घर जेहन आङन छनि घर सेहो तदनुरूपेँ।
जेहने एक मन, तेहने अस्सीँ मन ककरोपर एक मनक भार पड़य वा अस्सीस मनक, बात बरोबरि होइछ।
जेहने ककरी ओहने बीया, जेहने मइया ओहने धीया जाहि रूपक ककड़ी होइछ ओकर बीया सेहो तदनुरूपेँ।
जेहने कदीमा छान्होपर, ओहने कदीना भूँइयाँ कदीमा छप्पारपर फडय अथवा जमीनपर दुनूमे कोनो अन्तपर नहि होइछ।
जेहने करनी तेहने भरनी जेहन कार्य करबफल ओहने भेटत।
जेहने करे तेहने पाबय, पूत भतार सऽ आगाँ आबय जेहन करब फल तेहने भेटत।
जेहने खीराक चोर, तेहने रीराक चोर खीरा सदृश तुच्छन वस्तुनक चारौनिहार ओतबे अपराधी अछि जतेक हीरा सदृश मूल्यनवान वस्तुीक।
जेहने खोजलह हो कुटुम, तेहने भेटलह हो कुटुम जाहि प्रकारक अपन व्य वहार छनि ताही प्रकारक व्यववहार कुटुम्ब क सेहो।
जेहने गंगा नहायब, तेहने फल खायब जाहि प्रकारक कार्य करब तेहने फल प्राप्तय होयत।
जेहने चुलाइ राम तेहने सुलोचना, वैह नूआ फेर फार वैह मुह पोछना पति चुलाइक अनुरूप पत्नीन सुलोचना छथि।
जेहने छलहुँ तेहने भेलहुँ जेहने अहाँ छी गति सेहो तदनुरूपेँ अछि।
जेहने जोलहा धुनियाँ, तेहने रामदास नुनियाँ रामदास नोनियाँक व्येवहार ओहने अछि जेहन जोलहा धुनियाँक।
जेहने दुल्हाु तेहने बरियात जाहि प्रकारक दुल्हा। अछि बरियात सेहो तदनुरूपेँ।
जेहने देखय गामक रीत, तेहने करब लोक सऽ पिरीत गामक जाहि प्रकारक व्यअवहार अछि तदनुरूपेँ लोकसँ प्रीति कयल जाइछ।
जेहने देखी गामक रीत, तेहने उठाबी अपन भीत जेहन प्रथा गामे प्रचलित अछि तदनुरूपेँ लोक अपन घरक भीत उठबैछ अर्थात् समाजमे जेहन-व्यरवस्थाल चलि आबि रहल अछि ओकर अनुरूपेँ कार्य होइछ।
जेहने बिरह तेहने सिनेह विरह जतेक बेसी हैत प्रेम ओतेक बेसी हैत।
जेहने देस तेहने भेस देशक अनुरूप रीतिक अनुगमन करब उचित थिक।
जेहने नागनाथ, तेहने साँपनाथ जेहन नागनाथ छथि तेहन साँपनाथ अर्थात् दुनू बेरोबरि।
जेहने भोनू तेहने भान, ने हुनका नाङडि़ ने हुनका कान समान धर्मक व्यँक्तिक प्रसंगमे कहल जाइछ।
जेहने मइया तेहने धिया मायक अनुरूपेँ बेटी अछि।
जेहने मनसा तेहने फल, जेहने अङना तेहने घर जहिना नेतक अनुरूपेँ फल भेटैछ तहिना आङनक अनुरूपेँ घर होइछ।
जेहने मियाँ तेहने खोर दूनू मिललनि जोड़म जोर जेहन मियाँ अछि तेहन ओकर मित्र सेहो।
जेहने मुरदा पर एक मन तेहने नओ मन मुर्दापर एक मन माटि पड़य अथवा नओ मन, दुनू बरोबरि अछि।
जेहने सिलाइ बहु तेहने सुलोचना, देखू हे आइ माइ घरक रचना जेहन सिलाइ छथिर तेहन हुनक स्त्री सुलोचना सेहो छथिन।
जेहने हरि गुन गौने, तेहने बेनु बजौने जेहन फल हरि भजन कयलासँ भेटैछ तहिना बेनु क’ आराधना कयलासँ।
जेहने हसन तेहने हुसेन हसन हुसेन दुनू समाने छथि।
जे हमर कोला कोली से तोहर सुरंग हमर खेतक जे टुकड़ा-टुकड़ी अछि, अहाँक सुरंग सदृश सदृश खेतसँ कोना समता पाबि सकैछ ? अत्यँन्तप छोअ वस्तुलक समानता कोनो पैघ वस्तुँसँ युक्तिसंगत नहि होइछ।
जे हर जहिना बहे तकरा तहिना जोती हर जाहि प्रकारेँ बहैछ ओकरा ओही प्रकारेँ जोतबाक चाही।
जे हहाबे से बुतबय करे आगि जतबे शीघ्रतासँ पजरैछ ओ ओतबे शीघ्रतासँ बुला जाइछ।
जेहे घोड़ा लदनी सेहे पदनी एकहि वस्तु सँ सब काज भेलापर कहल जाइछ।
जे हैत आन सऽ, से हैत भगबान सऽ आनक अपेक्षा ईश्व,रेच्छाभ सर्वोपरि अछि।
जैं चालीस तैं घपचालीस चालीस हो वा ओहिसँ एक बेसी हो, बात बरोबरि अछि।
जै ले कनलहुँ सेहो ने भेल, एतेक नोर अकारथ गेल जाहि निमित्त नोर बहौलहुँ तकर पूर्त्ति नहि भेल तेँ नोर बहायब सेहो निरर्थक भ’ गेल।
जैसन साजन पाय, तैसन सेज बिछाय जाहि प्रकारक पति भेटैछ ओछाइन तकर अनुरूपेँ स्त्रीि बिछबैछ।
जोंकमे जोंक ने सटे जोंक अत्यंन्तत चिक्कछन एवं कोमल होइछ तेँ ओकरामे किछु नहि सटि सकैछ।
जों जों मुरगी मोटानी, तों तों दुम सुरटकानी मुगी्र जहिना-जहिना मोट होइत अछि तहिना-तहिना ओकर नाङरि सटकि जाइछ।
जोगना जोगे, भोगना भोगे संचय कयनिहार येनकेन उपायेन संचय करैछ तथा ओकर उपयोग नहि करैछ, किन्तुथ भोगनिहार संचयक अपेक्षा भोगपर विशेष बल दैछ।
जोग से जोग मिलल चतुरक समक्ष कोनो चतुराइ नहि चलैछ।
जोगीक आगाँ धुरखेल योगीक सौझाँ हँसी करब समुचित नहि।
जोगीक बेटा साँप सऽ खेलैछ साधुक बेटा साँपक संग खेलाइछ।
जोगीक कुकूर बलाय योगीक हेतु कुकूर आफ़त भ’ जाइछ।
जोगी जुगुत सऽ जुग जुग जीबे साधु लोकनि संयमक कारणेँ युग-युग धरि जीवित रहैछ।
जोगी बढ़य तँ तुम्मार बोय योगीक संख्या मे वृद्धि भेलापर तुम्मािक खेतीक आधिक्य स्वाृभाविके अछि।
जोगी सऽ धुर खेल साधु-सन्त सँ हँसी-ठट्ठा करब उचित नहि।
जोजन खाय से कोस अघाय जे बड़ खाधुर होइछ ओकरा थोड़बासँ संतोष नहि होइछ, प्रत्युबत ओ बेसी खाइछ तखन पूर्णताक अनुभव करैछ।
जोर बादसाह कबि बजीर बादशाहकेँ बलवान तथा कवि एवं वजीरकेँ मृदु स्वँभावक हैब उचित।
जोरू जमीन जोर के, जोर घटे तऽ आन के पत्नी , जमीन बलवान व्यकक्तिक समक्ष रहैछ।
जोलहाक आइपाइ, चमरा के बिहान जोलहा कहय जे कपड़ा तैयार अछि, मात्र ओकरा ठीक करबाक अछि तथा जूता बनौनिहार कहय काल्हि जूता भेटि जायत तँ विश्वािस नहि करबाक चाही।
जोलहाक छुछरी, छनेमे बिछुरी नीच प्रकृतिक व्य,क्ति क्षणहिमे संबंध जोड़ैछ तथा क्षणहिमे तोडि़ लैछ।
जोलहाक बेगारी कतहु पैठान करय उच्चा वर्गक लोक जखन नीच वर्गक खुशामद करैछ, तखन कहल जाइछ।
जोलहा गेले रोजा बकसाबे निबाज परल गरे जोलहा रोजासँ मुक्तिक हेतु गेल, मुदा ओकरा नवाज पढ़बाक भार सेहो भेटि गेलैक।
जोलहा जाने जौ काटे जोलहा जौ कटबाक हाल की जानय गेल? करघा चलयबामे जोलहा निपुण होइछ।
जोलहा जोडि़हें नरिए नरिए, खोदा लऽ जइहें एकहि बेरिए करघा चलौनिहार जोलहा एक-एक पाइ क’ जमा करैछ, मुदा भगवान एकहि बेर सब ल’ जाइत छथि।
जोलहा धुनियाँ कयलक खेती, नै उपज लै अल्हुनआ सती जे जाहि कार्यक हेतु अनुपयुक्त अछि ओ जँ करैछ तँ ओकरा परिणामक चिन्ता नहि रहैछ।
जोलहा भुतिआयल तीसी खेत जोलहा तीसीक खेतमे भुतिया गेल।
जो सोया सो खोया, जो जागा सो पाया सचेष्टत व्यसक्ति सब वस्तु प्राप्त क’ सकैछ, किन्तुत आलसी किछु नहि।
जोहैत-जोहैत धिया भेली कनाहि रस्ताु देखैत-देखैत बेटी कनाहि भ गेलीह।
जौं एतना रीन तऽ बरदा कीन जँ एतेक ऋण भेवे कयल तँ बड़द कीनबामे कोन क्षति? ऋणकेँ करबे करत।
जौक रोटी गब्ब र गब्बरर, साउस सऽ पुतोह जब्बबर जहिना जौक रोटी स्वा द मे गबर-गबर लगैछ तहिना सासुसँ पुतोहु जबर्दस्तर अछि।
जौक संग घून पिसाय जौक संगहि-संग घून सेहो पिसा जाइत अछि।
जौ काटे गेला, सतुआइन केने एला कोनो काजमे अकारण अति विलम्बआ भेलापर कहल जाइछ।
जौ जडि़ गेल भार ला बान्ह।ल छी जौ भुजबा काल तँ जडि़ गेल, किन्तुप ओकर भुजाइ (पारिश्रमिक) क हेतु बंधनमे पड़ल छी।
जौ जुड़य ने गहूँम पचय ने घरमे जौ पर्यन्तँ नहि जुड़ैत छनि, मुदा बाहर शेखी देखा रहल छथि जे हमरा गहूँम नहि पचैछ।
जौ जूरे ने गहूँम बाँतर मिथ्याे आडम्बबर प्रदर्शित करब।
जौड़ जडि़ गेल ऐंठन बाँकिए अछि विनाश भ’ गेल तथापि अपन घमण्डत परित्यािग नहि करब।
जौड़ जरि गेल ऐठन ठामक ठामहि रहल व्य क्ति स्व भावमे कोनो परिवर्त्तन नहि होइछ अर्थात् यथावत रहैछ।
जौं पुरबइया पुरबा बहय, सुखलो नदिया नइया चलय जखन पुरबा नक्षत्रमे पुरबा बसात चलैछ तखन वर्षाक आधिक्यमक संभावना रहैछ।
जौं मियाँक दाढ़ीमे चिलर फड़य, बीबी के बिछइत बिछइत बिपत पड़य मियाँक दाढ़ीमे जँ कदाचित चीलर फडि़ जाइछ तँ ओकर पत्नी केँ ओकरा बिछैत-बिछैत विपत्ति पडि़ जाइछ।
जौं बरसे बैसक्खाि राऊ, एक धानमे दोबर चाऊ बैसाखमे वषा्र भेलापर एक धानमे दुइ चाउर होइछ।
जौमे गेल से सतुआइन कयने आयल क्यो जौ बाओग करय गेल से सतुआइन क’ कए आयल।
जैसन करनी, बैसन भरनी कर्मक अनुसारहि फल भेटैछ।
जैह मुह पान खुआबे सैह मुह लात व्य वहारानुरूप सम्मा न वा अपमान भेटलापर प्रयुक्तर।
जैह रस विद्यापति बरयौबतिमे, सैह मालदह आममे विद्यापतिक वरयुवतीरमे तथा मालदह आम समान रूपें समान रसयुक्ति होइछ।
जैह हाथ सैह साथ जतबे उपलब्ध होइछ वैह संग रहैछ।
झगड़ाक जडि़ हाँसी, रोगक जडि़ खाँसी जहिना ककरोसँ झगड़ाक मूल कारण हँसी-ठट्ठा अछि, तहिना प्रत्येजक रोगक जडि़ खोखी थिक।
झगड़ाक तीन जडि़, जन जमीन जोरू संसारमे कोनो झगड़ाक मूल तीन कारण होइछ जन-बोनिहार, जमीन-जायदाद एवं स्त्रीन।
झगड़ा झूठ कब्जाी साँच कोनो वस्तुकपर कानूनी दृष्टिएँ कब्जाक प्राप्त करब सत्यत, किन्तुए ओहि हेतु झगड़ा करब निरर्थक अछि।
झगड़ा भतार सऽ, रुसली संसार सऽ कोनो स्त्रीसकेँ झगड़ा तँ स्वाऽमीसँ भेलनि, मुदा ओ संपूर्ण संसारसँ रूसि रहलीह।
झगड़ा ने ई रगड़ा छइ ई झगड़ा नहि अछि, प्रत्युवत अनेरे रगड़ा भ’ रहल अछि।
झगड़ा ने दन्नह, हुक्काब किएक बन्नभ झगड़ा नहि भेल तथापि हुक्काह चीलम किएक बन्द अछि।
झटपट घानी आधा तेल आधा पानी कोल्हूामे जल्दीप-जल्दील घानी देलासँ समुचित रूपेँ तेल नहि बहराइछ।
झरकल मरकल के चरकल गाँडि़ जे स्वरयं अधलाह अछि ओकरा संपूर्ण संसार अधलाहे दृष्टलगित होइछ।
झरकल मुह झपने नीक अधलाह वस्तुन वा गप्पछ गोपनीय राखबे उचित।
झरकाओल नीक, परिकाओल ने नीक दुष्टल व्य क्तिकेँ फटकारि क’ राखब नीक अछि ने कि ओकरा प्रश्रय देब।
झरकाओल मुह झाँपनहि नीक जनिक मुह झरकल छनि तनिका झाँपि क’ राखब समुचित, अन्यिथा अनेरे पर्दाफाश भ’ जाइछ।
झरकी ने उठाउ एहन काज कथमपि नहि करबाक चाही जाहिसँ अनेरे लोककेँ कष्टक हो।
झाँटि उपारने मुरदा हल्लुकक कम प्रयत्न्े‍ कयलासँ समस्या क निराकरण नहि होइछ।
झिंगुर चढ़ला कुब्जाहपर, कहथि हाथी हमरहि बाप झिंगुर कोनो कुब्जाापर चढि़ गेल तँ ओ कहलक जे हाथी हमर बाप थिक।
झिंगुर बइसल ठाठ तऽ, सब माल ओकर बापक धूर्त्त व्य क्ति जतहि जाइछ ततहि अपन अधिकार जमयबाक प्रयत्नक करैछ।
झिंगुर बइसल थानपर, तऽ बजाज बनि गेल झिंगुर कपड़ाक थानपर बैसल तँ अपनाकेँ कपड़ाक व्याावसायी बुझय लागल।
झिंगुर बाजत रनारनी, तऽ छोड़ब जनाजनी झिंगुरक बजबासँ वर्षाक आभास भेटैछ।
झिटकी सऽ फूटि जाइछ घैल झिअकीक स्पूर्शसँ पाकल घैल पर्यन्तब फूटि जाइछ।
झूठक खेती धरमक दोहाइ
झूठक खेत क’ कए धर्मकेँ साक्षी राखब।
झूठ कोरबे खैबऽ तऽ तेलही किएक घीबही खैबऽ मात्र बातेसँ भोजन करबाक अछि तँ तेलक वस्तु किएक, घीक किएक ने खैब? बाह्माडम्बसरे करबाक अछि तँ विशेष रूपेँ करब उचित।
झूठ बात साँच होइछ, दस आदमीक घोखले झूठो बातकेँ जँ दस व्य क्ति एक संग मिलि क’ कहैछ तँ ओ सत्यब बनि जाइछ।
झूठा के धऽ नङराबी झूठ बजनिहारक पाछाँ करब समुचित।
झोंटहापंच कुकरी झौहरि स्त्रीपगण जतय एकत्रित होइछ ततय कुकूरक समान आपसमे झाँओ-झाँओं क’ गप्पर करैछ।
टंगबह तऽ टांगह नहि तऽ नौ नरीक हरक्क त होयत टांगब तँ टाँगि दिअ ने तँ आब उत्पाइत प्रारंभ हैत।
टाँय टाँय‍ फिस भूमिका अधिक देब, काज किछु नहि कयलापर कहल जाइछ।
टकसाली बात सब बात साफ-साफ परिछा क’ कहब।
टनटा मोल लेब निरर्थक ककरोसँ झगड़ापर व्यंछग्यन।
टाटक अंगापर रेसमक बखिया अंगा बनल अछि टाट सदृ
श कपड़ाक, किन्तुन ओहिपर रेशमक बखिया देल जा रहल अछि।
टिटही टेकल परबत टिटही पर्वत टेकने अछि।
टिकुली सेनुर जरल, तऽ पेटो बज्जरर खसल सिन्दू र टिकुली पर्यन्त नहि भेटि रहल अछि आ आब तँ भरिपोख भोजनपर सेहो वज्र खसि पड़ल।
टीक कटा कऽ तुरुक बनब अपन जाति गमा क’ अजाति बनब, तँ कहल जाइछ।
टीक पकडि़ कऽ झूलब जातिक नामपर अपनाकेँ न्यो छाबर करब।
टीम टाम एतना, जलपात्र नदारत ठाठ बाट तँ खूब बेसी छनि, मुदा घरमे लोटा पर्यन्तू ने छनि।
टुटलो तेली तऽ नओ अधेली पैघ आदमी जँ कदाचित परिस्थितिवश कतबो निर्धन भ’ जाइछ तथापि ओकर तथापि ओकर स्थिति साधारण व्यछक्तिसँ नीके रहैछ।
टुटलो हथिसार तऽ नओ घरक साङह हथिसार टुटिओ जाइत अछि तथापि ओ तँ नौ घरक निर्माणक सामग्री प्रदान करैछ।
टेंगरा पोठी चालि दिये, रहुक सिर बिसाय पोखरिमे टेंगरा एवं पोठी माछ उधम मचबैछ, किन्तुी ओकर परिणाम रोहु माछकेँ भोगय पड़ैछ।
टोके ने चालय, भुस्सा टनटन बाजय बिनु पुछलोपर जँ क्योत ककरो विचार दैछ, तँ प्रयोग कयल जाइछ।
ठक ने देखलहुँ देखलहुँ हलुआइ, बाघ ने देखलहुँ देखलहुँ बिलाइ, कनियाँ ने देखलहुँ देखलहुँ कनिया भाइ हलुआइ बड़ ठक होइछ।
ठक मारे अनजान, बनियाँ मारे जान ठक तँ अनजान व्यइक्तिक संग ठकपनी करैछ, किन्तुभ बनियाँ परिचितकेँ ठकि क’ प्राण लैत अछि।
ठकि ठकि कऽ जे काँकर खइली, सूतय बेरमे मूतय गेली कंकड़-पाथर बिछि-बिछि क’ खयलहुँ, मुदा सुतबाक बेरमे पेशाव लागि गेल।
ठठेरीक बिलाइ सूप ढनमनयला सऽ ने डेराय ठठेरीक बिलाइ दिवारात्रि बासन बनयबाक कर्कश आवाजसँ अभ्यरस्त रहैछ तँ सूपक आवाज सुनि क’ नहि डेराइछ।
ठठेरी ठठेरी के कतहु बदला होय ठठोरी ठठेरीमे पारिस्पदरिक रूपेँ अदला-बदला नहि भ’ सकैछ।
ठनठन गोपाल मदन गोपाल, भोग लगाबे सकल पाल अभावक दशामे भगवानकेँ कोनो वस्तुकक भोग लगाओल जाइछ।
ठनढायल लोहा गर्म लोहा के काटैछ ठंढा लोह गर्म लोहकेँ काटि दैछ।
ठाठ बाट अनेक, जलपान नदारत ठाठबाट तँ बड़ बेसी रखने छथि, मुदा ककरो कहियो जलपान नसीब नहि होइछ।
ठाढ नाच मोरा, निहुरि नाच तोरा जँ अहाँ हमरा हेतु ठाढ़ भ’ क’ नाचब तँ हम अहाँक हेतु निहुरि क’ नाचब।
ठाम गुन काजर, ठाम गुन कारिख काजर आँखिमे लगयबाक वस्तुठ अछि।
ठारिक चूकल बानर आरिक चूकल किसान एहि ठारिसँ ओहि ठारिपर जयबामे जँ बानर चूकि अछि तँ ओ धराशायी भ’ जाइछ।
ठेस लगने बुद्धि बढ़य कोनो कार्यमे ठोकर खयलासँ आदमीक बुद्धिमे विकास होइछ ।
ठेस लगाय परबत, फोड़ी घरक सिलउट ठेस लागल पहाड़सँ ताहि खातिर घरक सिलौट फोरि रहल छी।
ठेहुन सऽ नोर खसब नोर खसयबाक निरर्थक अभिनय करब।
ठोका करू ठोकी करू भात बरोबरि नहि, काका करू काकी करू माय बरोबरि नहि रोटी आर सतुआ कतबो नीक किएक ने हो तथापि ओ भातक बराबरी नहि क’ सकैछ।
डाँर टूटे रण्डीा के, भडुआ ओढे़ दोसाला परिश्रम तँ रण्डी‍ करैत अछि, मुदा दोशाला ओढि़ क’ भडुआ घुमैत अछि।
डइनियो मउगी के, अपन जमाय पियार डाइनकेँ सेहो अपन जमाय प्रिय होइछ।
डगरक बइगन हेल बेल डगराक भाँटा एम्हलरसँ ओम्ह र गुड़कैत रहैछ।
डगरा बजौने कतहु ऊँट भागय डगरा बजौलासँ कतहु ऊँट भागैत अछि?
डाइन अपन बच्चात के नहि छोड़ैछ डाइन अपनो चिल्हहकाके ने छोड़ैछ।
डाढ़ी गाममे चोरक बास जरल गाममे चोर नहि क’ की करत ? जतय किछु प्राप्ति नहि होइछ ततय स्वागर्थी व्य क्ति नहि रहैछ।
डाली झारि बरहमाक पूजा सबसँ अन्त मे ब्रह्माक पूजा करबाक अछि।
डुबकी मारि कऽ पानि पीबे, एकादसीक बापो ने जाने डुब्बी मारि क’ पानि पीबैत छी जे एकादशीक पिता पर्यन्त नहि जानि सकैछ।
डुबनिहार के तिनका सहारा कष्टिमे फँसल लोकक हेतु सहायता बड़ बुझाइछ।
डीह ने तऽ डाबर खेती वा तँ अत्य धिक ऊँच स्था नपर अथवा अत्य धिक ऊँच स्था नपर अथवा निम्नवस्थाँनपर करबाक चाही।
डेढ़ गुरिया ढोंढ़ी ले हार मालामे डेढ़ दाना अछि, मुदा ओकर लंबाइ ढोंढ़ी पर्यन्तन अछि।
डेढ़ गोट घोड़ी, नो गोट फौज घोड़ीक संख्याी तँ डेढ़ गोट अछि, मुदा ओहिपर सवार भेनिहारक संख्याड नौ अछि।
डेढ़ गो बोझा दीयरमे खरिहान खेतमे बोझा भेलनि डेढ़ गो, मुदा खरिहानक इन्तेजाम कयलनि दीयरमे जा क’।
डोली ने कहार, बीबी अछि तइयार डोली आ कहारक पता-ठेकान कतहु नहि अछि, किन्तु पत्नीह नैहर जयबाक हेतु तैयार अछि।
डोलीमे कनबे ने करे, लोकनियाँ भोकारि पारे डोलीमे बैसल कनियाँ निश्चिन्तत अछि अर्थात् कानि नहि रहल अछि, मुदा संगक नौड़ी भोकारि पारि क’ कानि रहल अछि।
डोली सऽ बहु उतरली, ऐपन देखि बिघुयली, कोन धी डाही ऐपन देल, सेर भर चाउर मोर ऐपनलहि गेल तेहन बनायब घर तेहन बनयब, ऐपन पोछि कऽ लिटी लगायब नव कनियाँ डोलीसँ उतरलीह।
ढँगाहि मउगी के भैंसुर ओझा स्त्री ढंग कयने अछि तेँ अपन भैंसुरकेँ ओझा बनौने अछि।
ढब सऽ खेती ढब सऽ न्याकय, ढब सऽ न्याऽय, ढब सऽ होइछ बूढ़क बिआह ढंगसँ खेती एवं न्यायय प्राप्तो होइछ।
ढाक के तीन पात निरर्थक एवं निरुद्देश्यन बात करब।
ढाकन कुम्हा र के, घी जजमान के, सुहाय नम: सुहाय नम: ढाकन कुम्हा रक तथा घी तँ यजमानक छनि।
ढीठगर कनियाँ के भैंसुर लोकनियाँ कनियाँ बड़ ढीढगर अछि तेँ तँ भौंसुरकेँ लोकनियाँ बनौने अछि।
ढील लेखे भात पहाड़ ढीलकेँ भात पार करब पहाड़ सदृश बुझना जाइछ।
ढील हेरे चितू पेट भरे हीतू ढील हेरबामे वैह निपुण अछि जकर चित्त स्थिर छैक तथा पेट वैह भरि सकैछ जे हितैषी अछि।
ढेउआ दऽ कऽ दुख बेसाही पैसा व्यकय क’ कए पीड़ा कीनब।
ढेउआ ने कउड़ी, सलाम करे छउड़ी संगमे पैसा रुपैया नहि अछि, किन्तुउ छौड़ी सलाम करैत अछि अर्थात् पैसाक माँग क’ रहल अछि।
ढेला ऊपर चील बोले, गली गलीमे पानी डोले जँ ढेलापर चील बैसि क’ बजैछ तँ लोकविश्वा स अछि जे ओहि वष्र वर्षाक अधिकता रहत अर्थात् गलीकूचीमे पानि बहय लागल।
ढेला खेतमे मेला लागलए जयबो करबह हे, कोठीपर चउअन्नीब राखलिए लेबो कयलह हे क्यो कहैछ जे ढेला खेतमे मेला लागल अछि।
ढोंढ़ीमे दम ने बजारमे धक्का ढोंढीमे दम तँ छनि ने, मुदा बजारमे धक्का लैत छथि।
ढोंरही तक कौर गेल, नबो नारायन बाकिये अन्नय ढोढ़ी धरि चल गेल, मुदा कहैछ जे पंचग्रासक प्रक्रिया बाँकी अछि।
ढोढ़बा के फुफकारे बर वि
षहीन ढोंढ़ साँप बड़ बेसी फुफकार छोड़ैत अछि।
ढोलक भीतर पोल ढोलक भीतरमे किछु ने रहैछ।
ढोल ने ढाक अंगरेजी बाजा ढोल-पिपही नहि छैक।
ढोल ने ढाक अंगरेजी बाजा, राज ने पाट सिबचन्देर राजा ढोल-ढाक किछु ने मात्र अंग्रेजी बाजावला अछि।
ढोल ने ढाक सहनाइ बाजा ढोल ढाक किछु ने अछि एक मात्र सहनाइ बाजा बाजि रहल अछि।
ढोल ने ढाक हर हर गीत बाजा-गाजाक कतहु नाम निशान नहि, खाली गीत गाओल जा रहल अछि।
ढोल लेलक ढोलकिया, आ टीक भेल ठाढ़ कोनो कार्यक कारणक जिज्ञासा कयलापर कहल जाइछ।
तउलाक भाफ ढकनी सऽ झाँपब, मुहक भाफ कथी लऽ झाँपब तौलाक भाफ ढाकनसँ तँ झाँपल जा सकैछ, किन्तुभ मुहक भाफकेँ नहि झाँपल नहि जा सकैछ, अर्थात् जखने बाजब तखने ओ बहरायत।
तत करिअ जत फाबए चोरि उपयुक्त स्था्नमे काज बरक उचित थिक।
ततय गाछ ने बिरीछ, ओतय रेड़ महापुरुष जतय गाछ वृक्षर नहि रहैछ ततय अण्डीागाछक गणना महावृक्षमे होइछ।
तन कसरतमे, मन मउगीमे
कसरत क’ कए शरीर बनरैलनि अछि, मुदा मन सतत मौगीमे लागल रहैत छनि, जे कोनो ओकर सामीप्यल सुख पायब।
तन के कपड़ा ने पेट के रोटी शरीर झाँपबाक हेतु वस्त्र पर्यन्तअ नहि छनि आ ने पेट भरबाक हेतु रोटी।
तनपर ने लत्ता, पान खाय अलबत्ता शरीर झाँपबाक हेतु कपड़ा नहि छनि, मुदा अलबत्त पान खाइत छथि।
तनिक तमाकू गजब कराबे जगरनाथक भात, जनिक पुरखा भीख ने मंगलवार सेहो पसारथि हाथ तमाकू एहन वस्तु अछि जे लोक अपन प्रतिष्ठा क परित्याभग क’ ओकरा हेतु जगन्ना्थ पुरीक प्रसाद सदृश हाथ दैत अछि।
तप चूक राज आ राज चूक नरक तपस्या मे व्य वधान भेलापर लोक राजा बनबासँ वंचित भ’ जाइछ।
तपे जेठ तऽ बरखा भरिपेट जेठ मासमे गर्मी जतेक बेसी हैत।
तबहु तीन गे तबहु तीन, पाबनि तिहार भेल तबहु तीन ककरो प्रत्येहक दिन तीन रोटी खयबाक हेतु भेटैत छलैक।
तर तेल ने ऊपर नून नीचाँमे ने तेल अछि आ ऊपरमेने नोन।
तरल खाय गलल जाय, गुण्डाट खाय भुसुण्डाग होय तेल-घीमे तरल भूजल बेसी खयलासँ स्वाणस्य्रल पर अधलाह प्रभाव पड़ैछ।
तर धरती ऊपर रास नीचाँमे पृथ्वीस अछि तथा ऊपरमे भगवान छथि।
तरबूजा के देखि कऽ तरबूजा रंग बदलैछ एक तरबूजाकेँ देखि दोसर सेहो अपन रंग बद लि लैछ।
तरी भरी सऽ पाइ, भीतर मरमी केने पाइ भीतर घुन्नाप व्य क्तिपर व्यंनग्यप।
तरुआरिक घाओ भरि जाइछ, बातक घाओ नहि भरैछ तरुआरिक धाव भरि जाइछ, किन्तु बातक चोट गंभीर होइछ।
तरुआरि मारे एक बेर, एहसान मारे बेर बेर तरुआरिक चोट अत्येन्त, भयानक होइछ जकर प्रहारक प्रभाव एकहि बेर पड़ैत अछि, मुदा एहसान अवसर-अवसरपर बारबार मारैत अछि।
तरे तर चूड़ा दही, उपर सऽ एकारसी चोरा नुका क’ चूड़ादही ,खाइत छी तथा ऊपरसँ एकादशी करबाक अभिनय करैत छी।
तरे तरे जडि़ खूनब, ऊपरे ऊपरे पानि नीचाँसँ जडि़ खूनि क’ सत्येनाश क’ रहल छी आ ऊपरसँ पानि द’ कए ओकरा सिचन करबाक अभिनय करैत छी।
तरे तरे सउरा जाय, कोढि़या कुत्ता छूछे खाय तुo तरे तरे सउरा जाय, मारे पूत छूछ खाय़
तरे तरे सउरी जाय, मोर पूत छूछ खाय सभ क्यो चोरा नुका क’ तँ सौरा खाइत अछि आ हमर बेटा छूछ खाइछ।
तरे तरे सउरी जाय, मोर पूत छूछ खाय सभ क्यो चोरा नुका क’ तँ सौरा माछ खाइत अछि आ हमर बेटा छूछ खाइछ।
ताकन समधी तरकन जमाय, चुल्हिक सार कहाबे भाय साधारणतया समधि ताकि झाँकि क’ देखबाक प्रयास करैछ तँ ओ ‘ताकन’ कहौलनि।
तामा बिना नगर उदास रुपैया-पैसाक अभावमे नगरमे रहबाक कोनो नहि रहि जाइछ।
तार कटबइया खजूर मठबइया, जोगियाराक छौंड़ा से के जितबइया तार कटनिहार तथा खजूरकेँ मठनिहारसँ के विजयी भ’ सकैछ अर्थात् क्योव विजयी नहि भ’ सकैछ।
तारक मारल बेल तर गेल, बेलक मारल बबुर तर गेल रौदक आधिक्यरक कारणेँ कोनो बटोही छायाक लोभँ तारक गाछक नीचाँ ठाढ़ भेल कि अकस्माँत् ताड़क फल ओकरा माथपर खसलैक ताहिसँ चोट लगलैक।
तारपर सऽ खसल, खजूरपर लटकल एक विपत्तिसँ पूर्ण मुक्ति भेल नहि कि दोसर आबि जाय, तँ प्रयुक्ति।
ताल तऽ भोपाल ताल आर सब तलइया, राजा तऽ सिब सिंह आर सब रजइया तालमे भोपाल ताल सर्वोपरि अछि।
ताल महग हाट सस्तस उत्पाहदन स्थ‍लपर वस्तु महग रहैछ, मुदा बजारमे सस्ताप भेटैछ।
तिरहुत मण्डाल, हाथ कमण्डुल मिथिलाक लोक पूजा-पाठमे बेसी लागल रहैछ, तेँ सतत पूजाक पूजाक सामग्री संगे रखैछ।
तिरिया कानय बिना, खेती कानय बड़द बिना पुरुषक अभावमे स्त्री कानैछ तथा बड़दक अभावमे खेतीक सब कार्य ठप पडि़ जाइछ।
तिरिया गे तोहर चाकर हयबउ, तोहर पठाओल हम नइहर जयबउ पुरुष स्त्री सँ कहैछ, ‘हम तोहर नोकर भ’ कए रहबउ।
तिरिया तेग तुरंग ओ रइयत के ठट्ठ, ई सब ने अपन परे पराइ हत्थे स्त्रीे, तेरह वर्षमे तथा पुरुष अठारह वर्षमे जवान भ’ जाइछ।
तिलक कंठी मधुरी बानी, दगाबाज के तीन निसानी माथपर तिलक, कंठमे तुलसीक माला तथा मधुर वाणी इएह दगाबाजक तीन निशानी अछि।
तिलक बाली टिक्कान, दहेज बाली फिक्काा जकरा विवाहमे तिलक भेटैछ ओ घरमे प्रमुख बनि जाइछ तथा जकरा मात्र दहेज भेटैछ ओ फीका पडि़ जाइछ।
तिल रहे तऽ ने तेल निकले तिल रहत तखन ने तेल बहरायत।
तीतर पंख मेघ उड़े ओ बिधबा मुसकाय, कहे डाक सुन डाकिनी ऊ बरसे ई जाय जँ तीतर पाँखि जकाँ मेघ हवामे उडि़ रहल हो तँ वर्षा अवश्यज हैत आ विधवला हँसैत हो तँ डाकक कथन छनि जे ओ घरसँ पड़ा जायत।
तीतर पंखी बदरी राँड़ फुलेल लगाय, कह भड्डर सुन भड्डरी ओ आबय ई जाय भड्डरा भड्डरीकेँ कहैछ जे तीतर पक्षीक पाँखिक समान मेघ अबैछ तँ वर्षा अवश्यक होइछ आ राँड जँ तेल-फुलेल लगाबे तँ ओ निश्चित रूपें घरसँ पड़ा जाइछ।
तीनक तीसी तेरह लागल, तब तेलियाँ पेरय लागल तीन टाकाक भावसँ कीनल तीसी जखन टाकाक भाव लागि गेल तखन तेलिन ओकरा पेड़य लागल।
तीन कमउनी तेरह चास, तब करियह मड़ुआ के आस तीन बेर कमौला उत्तर तथा तेरह बेर हर चलौला उत्तर मड़ुआक उपजाक आशा कयल जाइछ।
तीन कानू तेरह हुक्काप, तइयो होइछ थुक्काम थुक्काज तीन कानून (जाति विशेष) क हेतु तेरह हुक्का आनल गेल तथापि सब हुक्का-हुक्का कलेल हल्लाह करैत अछि।
तीन चोर नओ कत्थलक नचाबे बनमे किरतन होय, एक जनपर तीन तीन जने मुक्का मुकउअल होय कोनो जंगल द’ कए नौ कतहु जा रहल छल।
तीन जाति आन्हुर
, ऊँट बिदारथी बानर ऊँट विद्यार्थी एवं बानर विचित्र स्वजभावक होइछ।
तीन जाति हड़भोम, अहीर धोबी डोम अहीर, धोबी एवं डोम तीनू जाति स्वटभावसँ उद्धत होइछ।
तीन टाँगक घोड़ी नौ मन लदनी घोड़ीकेँ तीनए टा टांग छैक अर्थात् नाङर अछि, मुदा नौ मन ओहिपर लादल गेल अछि।
तीन टेकट महाबेकट तीनक संख्याा अशुभ होइछ।
तीन तिरहुतिया तेरह पाक व्य क्ति तँ तीनिए छथि,
मुदा भोजन बनौताह तेरह ठाम।
तीन नरीमे तेरह गज कोनो छोट वस्तु मे पैघ वस्तुाक समावेश भेलापर कहल जारइछ।
तीन परानी पदुमा रानी संपूर्ण परिवारमे कुल मिला क’ तीन आदमी अछि।
तीन पानी तरेह कोर, तब देखह कुसियारक पोर कुसियारक खेतमे तीन बेर पानि तथा तेरह बेर ओकरा कोड़लासँ ओकर पोड़ पैघ-पैघ होइछ।
तीन फूके चानी कोनो कार्य तीन बेर कयलापर ओ नीक जकाँ संपादित होइछ।
तीन बरिआती नौ पओनियाँ बरियातमे तँ तीनिए छथि, मुदा ओ सब नो गोट नोकर अनने छथि।
तीन बेटा राम के, एको गोने काम के रामकेँ तीन टा बेटा छनि, मुदा कार्यक एको टा नहि छनि अर्थात् सब अकार्यक।
तीन बोलाबे तेरह आबे देखा घर की रीत, बाहर बाला खा गेल घर के गाबे गीत गीत तीन व्य क्तिकेँ निमंत्रित कयल गेल, मुदा तेरह व्य,क्तिक आगमन भ’ गेल, जाहिसँ घरक स्थिति देखार भ’ गेल।
तीनमे की तेरहमे, तीन कट्ठा जमीनमे तुo तीनमे की तेरहमे, सुतरी के तिगरहमे
तीनमे ने तेरहमे, सुतरी के गिरहमे तीन गोत्र गार्ग, गौतम आ शाण्डिलय, तत्पगश्चाीत योग्यआतानुसार तेरह पयासी, समादारी, चौरी, वृहग्राम, धर्म, कंचनी माल, सुपाल, त्रिफल, पिण्डि, इटिया, इटारी तथा राही होइछ।
तीन लहेरी तेरह हुक्काल, ताहू होइछ थुक्कहम थुक्काल लहेरी तँ तातिनएटा अछि एवं हुक्काय तेरह गोट, तथापि आपसमे झगड़ा करैछ।
तीन लोक सऽ मथुरा न्या री तीनू लोकमे मथुरा अत्य न्त भव्यह अछि, तीर्थ स्थेल रहबाक कारणेँ ।
तीमन जरि गेल तऽ रहि गेल नोन मिरचाइ, सब केओ मरि गेल रहि गेल भउजाइ तरकारी जडि़ गेलापर मात्र नोन मिरचाइ बाँकी रहि जाइछ।
तीर ने कमान, मियाँ कथीक पैठान अपन मर्यादाक रक्षार्थ प्रत्येठक व्यइक्तिकेँ तत्संेबंधी उपकरण रखबाक आवश्येकता अछि।
तीस दिन चोर के, एक दिन साधु के सब दिन चोर चोरि मुदा कोनो-ने-कोनो दिन ओ पकड़ा जाइछ।
तीसी के ने टोके जाय तीसी कहे चन बिनु बजाओल बजनिहारपर व्यंकग्यध।
तीसी तीमन लुका इजोर, नाती मुइने बंसक ओर जकरा ओतय तीसीक चटनी तरकारी रूपेँ व्यावहृत होइछ, खढ़ जकरा क’ घरकेँ प्रकाशित कयल जाइछ, ओकर दुर्भाग्यक बुझबाक चाही।
तीसी बीसी मकर पचीसी जाड़ कतेक दिन धरि रहैछ ताहि प्रसंगमे प्रयुक्तक।
तुमड़ी फुटि गेल बाहरे गोसाँइ तुमड़ी तँ फुटि गेलनि, मुदा अपनाकेँ गोसाँइ मानैत छथि ।
तुरंत दान महाकल्या।न कोनो कार्यक पश्चाात् शीघ्रहि देलासँ दान कर्त्ताक स्वाशर्थक सिद्धि भ’ जाइछ।
तुरुक तारी बैल खेसारी, बाभन आम कैथ काम तुर्क ताड़ीद पीलापर, बड़द खेसारी खेसारी खयलापर, ब्राह्मण आमक भोजनोपरान्तख तथा कायस्थल कार्य कयलाक पश्चातते प्रसन्न होइछ।
तुरुक तोता ओ खरगोस, ई तीनू ने माने पोस तुर्क, सुग्गार एवं खरहा ई तीनू कहियो पालतू नहि बनाओल जा सकैछ।
तुलसीक पात कोन छोट कोन बड़ तुलसीक पैघ वा छोट पात सब समान अछि।
तुर लदइतेँ पुनु लोह लदाय कोनो वस्तु पर तूर लदलाक पश्चा त् पुन: लोहा लादल जाइछ।
तेतरि बेटी राज लगाबे, तेतर बेटा भीख मंगाबे तीन बेटाक पश्चालत् जँ बेटी होइछ तँ ओ राज्ये लगबैत अछि तथा तीन बेटीक पश्चाेत् जँ बेटा होइछ तँ ओ भीख मँगबैत अछि।
तेल जरे तेली के, पेट फाटे मसालची के तेल जरि रहल अछि तेलीक, मुदा पेट फाटि रहल अछि मशाल जरौनिहारक।
तेल जरे तेली के गाँडि़ फा‍टे मसालची के देo तेल जरे तेली के, पेट फाटे मसालची के
तेल जरे तेली के, आँखि फाटे मसालची के मशालमे तेल तँ तेलीक जरि रहल अछि, मुदा आँखि लागि रहल छैक मशाल जड़ौनिहारक।
तेल जरे सरकार के, मिरजा खेले फगुआ तेल तँ सरकारक जरि रहल अछि, मुदा मिर्जा फगुआ खेला रहल अछि।
तेल बनाबय बड़ी तऽ बड़की कनियाँक नाम तेल बढि़या छल तेँ बड़ी नीक बनल, मुदा नाम तँ भेलनि बड़की कनियाँक।
तेल बनाबे तीमन,तऽ बहुरियाक नाम तरकारीमे नीकजकाँ तेल देलापर बनैछ, किन्तुम नाम तँ भेलनि कनियाँक।
तेल सिनुर ककरो, घीढ़ारी करे मंगरो तेल सिनूर क्यो देलक तथा घीढ़ारी करबा काल क्योर आबि गेल।
तेल सिनुर जरल, तऽ पेट बज्ज़र खसल तल सिन्दू र तँ नहि भेटैछ संगहि संग आब पेट सेहो नहि भरि रहल अछि।
तेलिन रुसली तऽ कुप्पाअ लऽ कऽ बइसली तेलिन रूसि रहली तँ कुप्पाक चोरा क’ राखि देलनि जे आब ककरो तेल नहि देब।
तेलिन सऽ धोबिन कथीमे घाट, ने हिनका मुँगड़ी ने हुनका जाठ तेलिनसँ धोबिन कोन बातमे नीचाँ रहत।
तेलिआ सऽ न धोबिआ घाट, एकरा मुंगरा ओकरा जाट तेलीसँ धोबी कोनो स्थितिमे कखनो कम नहि रहैछ, कारण तेलीकेँ कोल्हुाक बिचला खंभा तथा धोबीकेँ कपड़ा मुंगरी छैक।
तेलीक काज तमोली करे, चुल्हि सऽ आगि उठे तेल पेड़बाक कार्य जँ पान उपजौनिहार तमौली करत तँ चूल्हिसँ आगि उठबे करत।
तेलीक बड़द ला कुम्हैँन सती तेलीक बड़द खातिर कुम्हैगन सती भ गेलीह।
तेली काने तेल लेल, गोनू काने खरी लेल तेल पेड़बा काल तेलीकेँ जँ कम तेल बहराइछ तँ ओ विलाप करैछ।
तेली के तेल जरे, मासालची के करेज फाटे तुo तेली के तेल जरे, मसालची के गाँडि़ फाटे
तेली के तेल जरे, मसालची के गाँडि़ फाटे खर्च भ’ रहल अछि तेलीक, मुदा प्राण जा रहल अछि मशाल जरौनिहारक।
तेरहो गंजन करब कोनो दुर्दशा बाँकी नहि राखब।
तेहन पाठ ने पड़लह पूत्ता अपने माथ बिसानी तेहन विषयक ने आहवान कयलहुँ जे अपने माथपर बिसा रहल अछि।
तोँ कुलबोरना तीन तीमन संग नोन तेल मिरचाइ, हम कुलबंती छुच्छेड खाइ छी दही दूध मिठाइ देo ओ धी जरुआ तीन तीमन संग नोन तेल मिरचाइ, हम कुल मन्तीत छूछे खाइ दही दूध मिठाइ
तोँ डारि डारि, हम पात पात अहाँ अपनाकेँ धूर्त्त बुझि डारिए-डारि चलैत छी हम अहूँसँ धूर्त्त छी, कारण हम पाते पाते चलब।
तोता मैना ओ फतिंगा ठोरे कारण गेला, हम बक्काक टक टक ताकी तट्टीपर जे रही, सब तमासा देखैत रही डर से नै बाजी सुग्गा , मैना एवं फतिंगा अपन वाचलताक कारणेँ पिजरामे बन्दब राखल जाइछ।
तोर कान तरकी मोर कान पात, गोतनी हे बराबरे बात एक गोतनी दोसर गोतनीसँ कहैछ ‘हम पटिदा‍रीमे अहाँसँ कम नहि छी।
तोर पाबनि मोरी की, कनी देबऽ तऽ होयत की अहाँक घरमे पावनि अछि ताहिसँ हमरा कोन प्रयोजन? कनेक्शन बैन देब ताहिसँ हमरा की हैत ? कम बैन देलापर व्यंहग्या।
तोरा किछु होइत छौक, हमरा कुरथी उलबय दे अहाँकेँ कष्ट अछि ताहिसँ हमरा कोन प्रयोजन ? हमरा कुर्थी उलायब नितान्तय आवश्यजक अछि।
तोरा घर के खरची, हमरा घर जलखइ जतेक ककरो घरमे भोजनमे खर्च होइछ ओ दोसरा घरमे जलखइमे लगैछ।
तोरा लेखे तोर पिया मोरा लेखेँ पदना अहाँक हेतु अहाँक पति श्रेष्ठँ छथिर, किन्तुह ओ हमरा हेतु कोनो महत्त्व नहि रखैछ।
तोहर करनी तोरा आगाँ, हमर करनी हमरा आगाँ अहाँ जे करैत छी तकर फल अहाँकेँ भेटत।
तोहर खइअउ रे भइया खो गे बहिन, तोहर खइअउ गे बहिन बहिनोइक देखल छौक बहिन भायसँ पुछलक, ‘हम ई वस्तुह खाइत छी’।
तोहर घर हमरो देखल अछि, नौ सय गदहा बान्हरल अछि अहाँक घर हम नीक जकाँ देखने छी।
तोहर धन ततमा खाय अतमा ने खाय धनक उपयोग अन्या करैछ, परन्तुइ अपने नहि करैछ, तँ व्यंयग्य ।
तोहर पतरबा जरे, हमर पतरबा भरे अहाँक सब वस्तुा समाप्तम भ’ जाय ताहिसँ हमरा कोन प्रयोजन? हमर सब वस्तुे भरल रहय तकर हमरा प्रयोजन अछि।
तोहर सील तोहर लोढ़ा, ओएह लोढ़ा भाँङब तोर दाँतक गोरा अहींक लोढ़ी आ सिलौट अछि जाहिसँ अहाँक दाँत तोडि़ देब।
थइलीक चोर बनिये जाने थली चोरिक संबंधमे बनियाँ समुचित जानकारी द’ सकैछ।
थइलीमे रुपइया आ मुहमे गुड़ रुपैया पैसा तँ थैलीमे अछि तथा मुहमे गुड़ अछि तँ कोना बता सकैत छी ? थैली रखनिहार जँ किछु नहि बजैछ तँ काज भ’ जाइछ।
थाकल ऊँट सराय देखैछ ऊँट जखन थाकि जाइछ तखन ओ सराय अर्थात् धर्मशालाक खोज करैछ।
थाकल तरबाक फेन चाटे थाकल आदमी तरबाक फेन चाटय लगैछ।
थाकल नटुआ झिटुकी बीछे थाकल नटुआ कंकर-पाथर बिछैत अछि।
थाकल बैलक पटोर पड़ भारी जे बड़द थाकल अछि ओकरा हेतु पटोर भारी भ’ जाइछ।
थाकल बैल पलान भेल भारी, आब की लदबह हो बेपारी बड़द थाकि गेल अछि।
थान भरि हारी, गज भरि ने फारी मूर्खता, कृपणता वा जिद्दी स्वआभावक कारणेँ छोअ हानिक स्थाअनपर पैघ हानि उठबय पड़ैछ, तखन कहल जाइछ।
थान हारि जायब, मुदा गज ने फारब एक गज कपड़ा हारि जयबाक हेतु तैयार नहि, मुदा थान हारि जयबाक हेतु कटिबद्ध रहब, तँ कहल जाइछ।
थारीक झनकार सब सुनलक थारी जे फेकल गेल तकर झनकार सब सुनैछ।
थारू के ने दोसर देस, घोंघा के ने दोसर डाबर जहिना थारू जातिक निर्वाह अन्य देश मे नहि होइछ तहिना घोंघा एक डबराक परित्याछग क’ अन्यि डबरामेनहि जा सकैछ।
थूक सऽ सतुआ सानब थूकसँ कतहु सतुआ सानल जाइछ ? क्षीण साधनसँ पैघ कार्य संभव नहि।
थेथर कउआ जौं जौं मारे तौं तौं थउआ कौआ थेथर अछि।
थेथरा के उस जबाब जकरा कोनो बातक चिन्ता नहि रहैछ ओ नीक बेजाय बिनु सोचने फटसँ जवाब द’ दैछ।
थोड़ अच्छ त देबता बहुत पूजनार्थ अक्षत कम अछि, किन्तुछ देवताक संख्या् बेसी अछि।
थोड़ करे बाली मियाँ, बहुत करे डफाली बाली मियाँ तँ कम कयलनि, मुदाउ हुकनक दलाल सब बेसी कयलक।
थोड़ धनक सुखिया, बहुत धनक दुखिया थोड़ धन रहलापर सुख बेसी होइछ।
थोड़ पानि चहचह कर पोठी थोड़ धन पाबि जखन लोक ऐंठय लागय तखन प्रयुक्तच होइछ।
थोड़ पूँजी बनिजे खाय थोड़ पूँजीसँ व्याखपारमे प्रगति नहि भ’ सकैछ, कारण मूलधन सेहो व्यातजेमे चल जाइछ।
थोड़े खयने अंग लगैने, बेसी खयने कूड़ा बनौने कम भोजन शरीरकेँ स्वेस्थब एवं प्रसन्न रखैछ।
थोथी आगाँ पोथी की करत जे बलजोरी दलील करैछ ओकरा समक्ष पुस्तजकक सारगर्भित वाणी निरर्थक।
थोथी दाँत बड़हरक बीआ, ओइमे हगे चमइनक धीआ नेना-भुटका बूढ़-बुढ़ानुसकेँ खौंझयबाक हेतु प्रयोग करैछ।
दउड़ कऽ चलब ने, हारि कऽ खसब ने दौडि़ क’ ने चलब, ने तँ हारि क’ खसब।
दउनी मोटाबे बड़द, भोजे मोटाबे मरद दौनीमे बड़द तथा भोजमे मर्द आनक अन्न खा क’ मोटा जाइछ।
दगाबाज के तीन निसानी, कण्ठीे चानन मधुरी बानी प्रपंची व्यबक्तिक तीन निशानी होइछ चानन, कण्ठीच तथा मधुरी वाणी।
दबल बनियाँ पर कऽ तउले परिस्थितिक मारल बनियाँ पूर्ण क’ तौलैत अछि, कारण घट्टी तौललासँ ओकर व्याैपर आर मंद पडि़ जायत।
दबा के दरार एहन, घरक भतार एहन घरक दाबामे दराडि़ अछि, कारण स्वारमी अकर्मण छथि।
दमड़ीक घोड़ी, छओ पसेरी दाना एक दमड़ीक घोड़ी छनि, किन्तु् ओकरा छओ पसेरी दाना खोअबैत छथि।
दमड़ीक पाग, अद्धीक जुत्ता एक दमड़ीक पाग छनि तथा एक अद्धीक जुत्ता पहिरने छथि ।
दमड़ीक बाछी, जनमक हत्याध एक दमड़ीक बाछी छल मरि गेल जकर हत्याडक पाप लागि गेल।
दमड़ीक बुलबुल, टाका हलाली जतेक मूल्याुवान बुलबुल नहि छल ओकरा करयबामे ओहिसँ बेसी टाका लागि गेल।
दमड़ीक भाजी, घर भर राजी एक दमड़ीक तरकारी आनल ताहीमे संपूर्ण परिवारकेँ संतोष भ’ गेल।
दमड़ीक मुरगी, छओ टाका हलाली एक दमड़ी मुर्गीक छल, मुदा छओ टाका हलाल करयबामे लागि गेल।
दमड़ीक लाइ, टाका बिदाइ एक दमड़ीक लाइ सनेस पठौलनि जाहिमे एक टाका विदाइ लागि गेल।
दमड़ीक संग ने लखपति नाम संगमे एको दमड़ी नहि छनि, मुदा नाम रखने छथि लखपति।
दमड़ीक सुइया, सबा मनक मलीदा जतेक दामक सुइया ने छनि, किन्तुद ओकरापर सबा मनक मलीदा लगौने छथि।
दमड़ीक हाँड़ी गेल, कुकूर जाति जानल गेल एक दमड़ीक हाँड़ी छुआयल, किन्तुल कुकूरक जातिक वास्ताविकताक जानकारी भेल।
दम ने दुरगा, पादे मुरगा देहमे शक्ति नहि छनि तथापि अपनाकेँ शक्तिशाली प्रमाणित करैत छथि।
दया बिन सन्तर कसाइ दयाक अभावमे संतक हृदय कठोर भ’ जाइछ।
दरजीक बेटा जाधरि जीये ताधरि सीये दर्जीक बेटा सेहो वंशानुरूप कपड़ा सीबाक कार्य जीवन भरि करैछ।
दरजीक सुइया, कखनो लासपर, कखनो टाटपर दर्जीकेँ कखनो चैन नहि होइछ, कारण ओ अपन सुइया कखनो लाशपर तँ कखनो टाटपर चलबैछ।
दरजी के पूत
, जब तक जीता, तब तक सीता दर्जीक बेटा जन्म
भरि कपड़ा सीअत।
दरब के दरबार पैसा-रुपयैया सभक मूल अछि।
दरबज्जादपर आयल बरियात, कनियाँ माय के लागल हगबास जखने दुआरिपर बरियात आबि गेल तखने कनियाँ मायकेँ दिशा लागि गेलनि।
दरबे से सरबे, चाहबे से करबे द्रव्येसँ सब कार्य सम्प न्नक होइछ।
दलालक देबाला की, मसजिदमे ताला की दलाली कयनिहारक लेल देवाला होयब कोनो महत्त्व नहि रखैछ।
दलालीक पाछाँ फिफिआएब दलाली कार्य साधनार्थ अपस्याँोत रहब, तँ कहल जाइछ।
दल्लिदर घरमे भेल पकमान जकर घर घटल छैक ओकरा ओतय संयोगसँ जँ पकमान बनैछ तँ ओ शीघ्रे समाप्तँ भ’ जाइछ।
दसक लाठी एकक बोझ दस व्यठक्तिक लाठी जँ एकत्रित क’ देल जाय तँ ओ एक आदमीक बोझ भ’ जाइछ।
दस टके ने नितराइ, दस संगे नितराइ संगमे जँ दस टाका हो तँ नहि नितरयबाक चाही।
दस मिलि कऽ करी काज, हारनमे जितने ने हो लाज दस व्यनक्तिक विचारेँ जे कार्य होइछ तकर परिणाम साधारणतया नीके होइछ।
दहीक घरमे बिलाइ भण्डा री घरमे दही अछि तथा ओकर भंडारी बिलाइ अछि।
दही कटैत खैंक गड़ल अतिशय सुकुमारतापर व्यंंग्य ।
दही दूध तोरा, मथनी बाजे मोरा दूध दही तँ अहाँक घरमे अछि, मुदा ओकरा जे महल जा रहल अछि ओ हमरा सुनबामे अबैछ।
दही परसैत खोंच लागे दही परसबा काल हाथमे खोंच लागि जाइछ।
दही मीठ कहतरी तीत दही खयबा काल मीठ लागैछ
, मुदा ओकर बासन कहतरी आब अधलाह लागि रहल अछि।
दहीमे सही सब बातमे हँ-मे-हँ मिलायब, तँ प्रयुक्तक।
दही लेब दही राति कतय रही, राति रही कुञ्ज बनमे, काल्हि बेचब दही क्योक दही बैचैछ।
दाँत गेल सबाद गेल, आँखि गेल संसार गेल दाँत टूटि गेलापर कोनो वस्तु क स्वााद नहि भेटैछ।
दाँत जनमितहु दुख टुटितहु दुख दाँत जनमबा काल एवं टुटबा काल दुनू कष्टाजदायी होइछ।
दाइये जाने अपन हाल दाइक अवस्थाअ केहन छनि, ताहि प्रसंगमे वैह कहती।
दागे के साँढ़ दागि देलनि लोहार दागबाक छलनि साँढ़, मुदा ओ लोहारकेँ दागि देलनि।
दाढ़ी मोछ भरखर, ननुआ नाम धयले दाढ़ी मोछ सब बहरा गेलनि, मुदा एखनो ननुआ नाम रखने छथि।
दाता आ सोम के बराबारे खरच दान देनिहारक तथा कृपणक समान रूपेँ खर्च होइछ, कारण दाता उदारपूर्वक दान करैछ तथा कृपणक कृपणताक कारणेँ समाने रूपेँ खर्च होइछ।
दाताक नाब पहाड़ चढ़े दाताक पुण्यह-प्रतापक कारणेँ हुनक नाओ पहाड़पर चढि़ जाइछ।
दाता कहने बनियाँ गुड़ नहि दैछ दाता कहलोपर बनियाँ गुड़ नहि द’ सकैछ, कारण ओ जँ गुड़ बाँटिए देत तँ व्यानपारमे ओकरा की लाभ भ’ सकैछ? कृपणसँ किछु प्राप्त करबाक हेतु ओकर खुशामद निरर्थक अछि।
दाता दिये भंडारीक पेट फाटे दाता अपन खजानासँ दान करैछ, किन्तु हुनक मैनेजर अर्थात् भंडारीक पेट फटैछ।
दाता पुण्यर करे, कंजूस झुरझुर मरे दानी द्वारा कयल गेल दान पुण्येकेँ देखि कृपणक करेज फाटि जाइछ।
दादाक भरोसे नौता दादाक भरोसपर अदौड़ी भातक प्राप्त‍ होइछ।
दादाक भरोसे फउदारी दादाक बलपर ककरोपर फौजदारी करय चाहैत छथि।
दादा मरता तऽ पोता राज करत दादाक मृत्यू परान्ती पोता राज करत।
दादा मरताह तऽ बैल बिकायत दादा जखन मरि जयताह तखन बैल बिका जायत।
दादा लऽ कऽ तेरह क्यो कोनो लाभक स्थाकनमे अपने दलकेँ महबूत अछि तखन एकर प्रयोग होइछ।
दानक बाछीक दाँत ने देखल जाइछ दानमे प्राप्तद बाछीक दाँत नहि देखल जाइछ।
दान दहेज बहु फिक्काद, मँगनीक बहु मंगटिक्का दान दहेजक संग पत्नीद प्राप्तच भेल ओ फीका पडि़ गेलीह, किन्तुच मूंगनीक पत्नीज अमृत समान भ’ जाइछ।
दान सत्पा त्र के, बीज सुखेत के दान सत्पा त्रकेँ तथा बीआ नीक खेतमे देब उचित।
दाना ने घास, दुनू साँझ सबारी घास दानाक कोनो पता-ठेकान नहि, मुदा घोड़ापर दुनू साँझ सवारी कसल जाइछ।
दाना पानीक बात जकरा जाहि वस्तुँक भोग जतेक दिन लिखल रहैछ ओ ओतेक दिन भोगैछ।
दानी कतहु सोम भेल, सोम कतहु दानी भेल दानी कहियो कृपण नहि भ’ सकैछ तथा कृपण कहियो दानी नहि भ’ सकैछ।
दानी बूरि भदक्कान चोदे जेँ दानमे भेटल अछि तेँ भक्तच लो‍कनि क्रिया करबाक हेतु तैयार छथि।
दाबक दूदिसिया दुनू पक्षक समर्थन समान भावेँ करैछ।
दाम करे सब काम द्रव्ये खच्र कयलासँ सब कार्य सुगमतापूर्वक भ’ जाइछ।
दाम बनाबय काम देo दाम करे सब काम

2 comments:

  1. बहुत बढिया परियास बा समाज के गियान के आगे बढावे के।
    मैना: अंक - 24 (21 अप्रैल 2015)

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  2. बहुत अच्छी कहावतें हैं। एक बहुत ही सुन्दर और लाभकारी कार्य। धन्यवाद और बधाइ दोनो।
    स्वयं शून्य

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पूर्वपीठिका : इंटरनेटपर मैथिलीक प्रारम्भ हम कएने रही 2000 ई. मे अपन भेल एक्सीडेंट केर बाद, याहू जियोसिटीजपर 2000-2001 मे ढेर रास साइट मैथिलीमे बनेलहुँ, मुदा ओ सभ फ्री साइट छल से किछु दिनमे अपने डिलीट भऽ जाइत छल। ५ जुलाई २००४ केँ बनाओल “भालसरिक गाछ” जे http://www.videha.com/ पर एखनो उपलब्ध अछि, मैथिलीक इंटरनेटपर प्रथम उपस्थितिक रूपमे अखनो विद्यमान अछि। फेर आएल “विदेह” प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका http://www.videha.co.in/पर। “विदेह” देश-विदेशक मैथिलीभाषीक बीच विभिन्न कारणसँ लोकप्रिय भेल। “विदेह” मैथिलक लेल मैथिली साहित्यक नवीन आन्दोलनक प्रारम्भ कएने अछि। प्रिंट फॉर्ममे, ऑडियो-विजुअल आ सूचनाक सभटा नवीनतम तकनीक द्वारा साहित्यक आदान-प्रदानक लेखकसँ पाठक धरि करबामे हमरा सभ जुटल छी। नीक साहित्यकेँ सेहो सभ फॉरमपर प्रचार चाही, लोकसँ आ माटिसँ स्नेह चाही। “विदेह” एहि कुप्रचारकेँ तोड़ि देलक, जे मैथिलीमे लेखक आ पाठक एके छथि। कथा, महाकाव्य,नाटक, एकाङ्की आ उपन्यासक संग, कला-चित्रकला, संगीत, पाबनि-तिहार, मिथिलाक-तीर्थ,मिथिला-रत्न, मिथिलाक-खोज आ सामाजिक-आर्थिक-राजनैतिक समस्यापर सारगर्भित मनन। “विदेह” मे संस्कृत आ इंग्लिश कॉलम सेहो देल गेल, कारण ई ई-पत्रिका मैथिलक लेल अछि, मैथिली शिक्षाक प्रारम्भ कएल गेल संस्कृत शिक्षाक संग। रचना लेखन आ शोध-प्रबंधक संग पञ्जी आ मैथिली-इंग्लिश कोषक डेटाबेस देखिते-देखिते ठाढ़ भए गेल। इंटरनेट पर ई-प्रकाशित करबाक उद्देश्य छल एकटा एहन फॉरम केर स्थापना जाहिमे लेखक आ पाठकक बीच एकटा एहन माध्यम होए जे कतहुसँ चौबीसो घंटा आ सातो दिन उपलब्ध होअए। जाहिमे प्रकाशनक नियमितता होअए आ जाहिसँ वितरण केर समस्या आ भौगोलिक दूरीक अंत भऽ जाय। फेर सूचना-प्रौद्योगिकीक क्षेत्रमे क्रांतिक फलस्वरूप एकटा नव पाठक आ लेखक वर्गक हेतु, पुरान पाठक आ लेखकक संग, फॉरम प्रदान कएनाइ सेहो एकर उद्देश्य छ्ल। एहि हेतु दू टा काज भेल। नव अंकक संग पुरान अंक सेहो देल जा रहल अछि। विदेहक सभटा पुरान अंक pdf स्वरूपमे देवनागरी, मिथिलाक्षर आ ब्रेल, तीनू लिपिमे, डाउनलोड लेल उपलब्ध अछि आ जतए इंटरनेटक स्पीड कम छैक वा इंटरनेट महग छैक ओतहु ग्राहक बड्ड कम समयमे ‘विदेह’ केर पुरान अंकक फाइल डाउनलोड कए अपन कंप्युटरमे सुरक्षित राखि सकैत छथि आ अपना सुविधानुसारे एकरा पढ़ि सकैत छथि।
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'विदेह' २२५ म अंक ०१ मई २०१७ (वर्ष १० मास ११३ अंक २२५)

ऐ  अंकमे अछि :- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१. १. राजदेव मण्‍डल -  दूटा बीहैन क था २. रबीन्‍द्र नारायण मिश...