Friday, January 01, 2010

'विदेह' ४९ म अंक ०१ जनबरी २०१० (वर्ष ३ मास २५ अंक ४९) PART I

'विदेह' ४९ म अंक ०१ जनबरी २०१० (वर्ष ३ मास २५ अंक ४९)

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एहि अंकमे अछि:-
१. संपादकीय संदेश

२. गद्य
२.१. प्रोफेसर राधाकृष्ण चौधरी-मिथिलाक इतिहास (आगाँ)

२.२.१. शीतल झा-नेपालमे मघेशीकेँ समस्याp आ सामाधान! २.पाकिस्तान मे सेक्स-विचा कुमार राधारमण

१. चिड़ै-सुजीतकुमार झा२. . कामिनी कामायनी-डाविर्नक बानर३. प्रो. प्रेमशंकर सिंह-मणिपद्मक कथा यात्रा ४. रामलोचन ठाकुर-समकालीन मैथिली-कथाक यथार्थ-उर्फ यथार्थक-कथा

२.४.१. बिपिन झा-आवश्यकता अछि मैथिली शब्दतन्त्र निर्माणक ॥२. गोपाल प्रसाद-फराक मिथिला राज्यक गठन कियक नहि ?
२.५.१.दुर्गानन्द मंडल -बकलेल,२.कपिलेश्वर राउत- छूआ-छूत,३.राजदेव मंडल ,रखबार (दोसर भाग)

२.६.१. शरदिन्दु चौधरी-समय–संकेत २. शीतल झा-गामक अधिकारी....भैया....पोखरि....चम्पा फूल.... ३. विजय–हरीश-किछु लघु कथा ४. सुनीता ठाकुर-अपहरणक सच-५. श्रीमति कुमुद झा-उच्चैठ भगवतीक महात्म-६. शम्भू झा वत्स-ग्राहर्स्थ्य जीवनक समस्याम

२.७.१.मिथिला मे रंगकलाक समकालीन दृष्टि - प्रकाश २.२.राकेश कुमार रोशन-पञ्चैति (कथा)३. भीमनाथ झा-चन्दाा झा, हरिमोहन झामिलिकऽ४. हेमचन्द्र झा दूटा कथा
२.८.१. सुभाष चन्द्र यादव-पति-पत्नी सम्वाद २. मानेश्वर मनुज-‘जीत’३.(सं. सा. सं) नागेश्वर लाल कर्ण ४. डॉ. रवीन्द्र कुमार चौधरी-विद्यापतिक फोटोकेँ लोक सभामे लगएबाक मांग


२.९.- जिनगीक जीत उपन्यास- जगदीश प्रसाद मंडल
३. पद्य

३.१. कालीकांत झा "बुच" 1934-2009- आगाँ

३.२.१.लोकगीत संकलन– निशा प्रभा झा २. २.उमेश मंडल-लोकगीत संकलन

३.३.१. लक्ष्मण झा ‘सागर’-चुट्टीधारी २. विभूति आनन्द-एक- दू- तीन- चारि- पाँच- छओ- सात- आठ- नओटा- कविता ३. रमण कुमार सिंह ४. मायानाथ झा-मातृगिरा ५. विनीत उत्पल-समाज
३.४.१. जीवकान्तन-जन-जन याचक

३.५.१. रघुनाथ मुखिया-किछु पद्य २.सच्चिदानन्द सौरभ-किछु पद्य

३.६.१. ई वर्ष-अजित मिश्र २. नव वर्ष ३. शिव कुमार झा-किछु पद्य
३.७.१. अशोक दत्त-किछु कविता २. शीतल झा--किछु कविता ३. शंम्भु नाथ झा ‘वत्स’--किछु कविता

३.८.१.डॉ. योगानन्द झा घर


४.१. किछु लघु कहानी आशीष चौधरी २. जगदीश प्रसाद मंडल-किछु लघुकथा ३. देवांशु वत्सक मैथिली चित्र-श्रृंखला (कॉमिक्स)

5.VIDEHA FOR NON RESIDENTS
5.1.Original Maithili Poem by Smt.Shefalika Varma,Translated into English byDr.Anamika
5.2.1. Yogendra Yadava- MAITHILI 2. Sindhu Poudyal-Mithila :- mother land of Navya- Nyaya Language.
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गौरी-शंकरक पालवंश कालक मूर्त्ति, एहिमे मिथिलाक्षरमे (१२०० वर्ष पूर्वक) अभिलेख अंकित अछि। मिथिलाक भारत आ नेपालक माटिमे पसरल एहि तरहक अन्यान्य प्राचीन आ नव स्थापत्य, चित्र, अभिलेख आ मूर्त्तिकलाक़ हेतु देखू 'मिथिलाक खोज'


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१. संपादकीय

मैथिली लेल साहित्य अकादमी पुरस्कार 2009- स्व.मनमोहन झाकेँ कथा संग्रह गंगापुत्रपर देल गेल छन्हि।
मनमोहन झाक जन्म 1918 ई. मे सरिसबमे भेलन्हि आ मृत्यु 2009 ई. मे भेलन्हि। हिनकर रचना सभ छन्हि- अश्रुकण, वीरभोग्या, मिथिलाक निशापुरमे, गंगापुत्र। एहि बेरसँ पुरस्कार राशि बढ़ा कए एक लाख टाका कए देल गेल अछि।
पुरस्कार 16 फरबरी 2010 केँ देल जाएत।

साहित्य अकादेमी पुरस्कार- मैथिली

१९६६- यशोधर झा (मिथिला वैभव, दर्शन)
१९६८- यात्री (पत्रहीन नग्न गाछ, पद्य)
१९६९- उपेन्द्रनाथ झा “व्यास” (दू पत्र, उपन्यास)
१९७०- काशीकान्त मिश्र “मधुप” (राधा विरह, महाकाव्य)
१९७१- सुरेन्द्र झा “सुमन” (पयस्विनी, पद्य)
१९७३- ब्रजकिशोर वर्मा “मणिपद्म” (नैका बनिजारा, उपन्यास)
१९७५- गिरीन्द्र मोहन मिश्र (किछु देखल किछु सुनल, संस्मरण)
१९७६- वैद्यनाथ मल्लिक “विधु” (सीतायन, महाकाव्य)
१९७७- राजेश्वर झा (अवहट्ठ: उद्भव ओ विकास, समालोचना)
१९७८- उपेन्द्र ठाकुर “मोहन” (बाजि उठल मुरली, पद्य)
१९७९- तन्त्रनाथ झा (कृष्ण चरित, महाकाव्य)
१९८०- सुधांशु शेखर चौधरी (ई बतहा संसार, उपन्यास)
१९८१- मार्कण्डेय प्रवासी (अगस्त्यायिनी, महाकाव्य)
१९८२- लिली रे (मरीचिका, उपन्यास)
१९८३- चन्द्रनाथ मिश्र “अमर” (मैथिली पत्रकारिताक इतिहास)
१९८४- आरसी प्रसाद सिंह (सूर्यमुखी, पद्य)
१९८५- हरिमोहन झा (जीवन यात्रा, आत्मकथा)
१९८६- सुभद्र झा (नातिक पत्रक उत्तर, निबन्ध)
१९८७- उमानाथ झा (अतीत, कथा)
१९८८- मायानन्द मिश्र (मंत्रपुत्र, उपन्यास)
१९८९- काञ्चीनाथ झा “किरण” (पराशर, महाकाव्य)
१९९०- प्रभास कुमार चौधरी (प्रभासक कथा, कथा)
१९९१- रामदेव झा (पसिझैत पाथर, एकांकी)
१९९२- भीमनाथ झा (विविधा, निबन्ध)
१९९३- गोविन्द झा (सामाक पौती, कथा)
१९९४- गंगेश गुंजन (उचितवक्ता, कथा)
१९९५- जयमन्त मिश्र (कविता कुसुमांजलि, पद्य)
१९९६- राजमोहन झा (आइ काल्हि परसू)
१९९७- कीर्ति नारायण मिश्र (ध्वस्त होइत शान्तिस्तूप, पद्य)
१९९८- जीवकान्त (तकै अछि चिड़ै, पद्य)
१९९९- साकेतानन्द (गणनायक, कथा)
२०००- रमानन्द रेणु (कतेक रास बात, पद्य)
२००१- बबुआजी झा “अज्ञात” (प्रतिज्ञा पाण्डव, महाकाव्य)
२००२- सोमदेव (सहस्रमुखी चौक पर, पद्य)
२००३- नीरजा रेणु (ऋतम्भरा, कथा)
२००४- चन्द्रभानु सिंह (शकुन्तला, महाकाव्य)
२००५- विवेकानन्द ठाकुर (चानन घन गछिया, पद्य)
२००६- विभूति आनन्द (काठ, कथा)
२००७- प्रदीप बिहारी (सरोकार, कथा
२००८- मत्रेश्वर झा (कतेक डारि पर, आत्मकथा)
२००९- स्व.मनमोहन झा (गंगापुत्र, कथासंग्रह)

साहित्य अकादेमी मैथिली अनुवाद पुरस्कार

१९९२- शैलेन्द्र मोहन झा (शरतचन्द्र व्यक्ति आ कलाकार-सुबोधचन्द्र सेन, अंग्रेजी)
१९९३- गोविन्द झा (नेपाली साहित्यक इतिहास- कुमार प्रधान, अंग्रेजी)
१९९४- रामदेव झा (सगाइ- राजिन्दर सिंह बेदी, उर्दू)
१९९५- सुरेन्द्र झा “सुमन” (रवीन्द्र नाटकावली- रवीन्द्रनाथ टैगोर, बांग्ला)
१९९६- फजलुर रहमान हासमी (अबुलकलाम आजाद- अब्दुलकवी देसनवी, उर्दू)
१९९७- नवीन चौधरी (माटि मंगल- शिवराम कारंत, कन्नड़)
१९९८- चन्द्रनाथ मिश्र “अमर” (परशुरामक बीछल बेरायल कथा- राजशेखर बसु, बांग्ला)
१९९९- मुरारी मधुसूदन ठाकुर (आरोग्य निकेतन- ताराशंकर बंदोपाध्याय, बांग्ला)
२०००- डॉ. अमरेश पाठक, (तमस- भीष्म साहनी, हिन्दी)
२००१- सुरेश्वर झा (अन्तरिक्षमे विस्फोट- जयन्त विष्णु नार्लीकर, मराठी)
२००२- डॉ. प्रबोध नारायण सिंह (पतझड़क स्वर- कुर्तुल ऐन हैदर, उर्दू)
२००३- उपेन्द दोषी (कथा कहिनी- मनोज दास, उड़िया)
२००४- डॉ. प्रफुल्ल कुमार सिंह “मौन” (प्रेमचन्द की कहानी-प्रेमचन्द, हिन्दी)
२००५- डॉ. योगानन्द झा (बिहारक लोककथा- पी.सी.राय चौधरी, अंग्रेजी)
२००६- राजनन्द झा (कालबेला- समरेश मजुमदार, बांग्ला)
२००७- अनन्त बिहारी लाल दास “इन्दु” (युद्ध आ योद्धा-अगम सिंह गिरि, नेपाली)
२००८- ताराकान्त झा (संरचनावाद उत्तर-संरचनावाद एवं प्राच्य काव्यशास्त्र-गोपीचन्द नारंग, उर्दू)


प्रबोध सम्मान

प्रबोध सम्मान 2004- श्रीमति लिली रे (1933- )
प्रबोध सम्मान 2005- श्री महेन्द्र मलंगिया (1946- )
प्रबोध सम्मान 2006- श्री गोविन्द झा (1923- )
प्रबोध सम्मान 2007- श्री मायानन्द मिश्र (1934- )
प्रबोध सम्मान 2008- श्री मोहन भारद्वाज (1943- )
प्रबोध सम्मान 2009- श्री राजमोहन झा (1934- )


यात्री-चेतना पुरस्कार


२००० ई.- पं.सुरेन्द्र झा “सुमन”, दरभंगा;
२००१ ई. - श्री सोमदेव, दरभंगा;
२००२ ई.- श्री महेन्द्र मलंगिया, मलंगिया;
२००३ ई.- श्री हंसराज, दरभंगा;
२००४ ई.- डॉ. श्रीमती शेफालिका वर्मा, पटना;
२००५ ई.-श्री उदय चन्द्र झा “विनोद”, रहिका, मधुबनी;
२००६ ई.-श्री गोपालजी झा गोपेश, मेंहथ, मधुबनी;
२००७ ई.-श्री आनन्द मोहन झा, भारद्वाज, नवानी, मधुबनी;
२००८ ई.-श्री मंत्रेश्वर झा, लालगंज,मधुबनी
२००९ ई.-श्री प्रेमशंकर सिंह, जोगियारा, दरभंगा


कीर्तिनारायण मिश्र साहित्य सम्मान


२००८ ई. - श्री हरेकृष्ण झाकेँ कविता संग्रह “एना त नहि जे”
२००९ ई.-श्री उदय नारायण सिंह “नचिकेता”केँ नाटक नो एण्ट्री: मा प्रविश

संगहि "विदेह" केँ एखन धरि (१ जनवरी २००८ सँ ३० दिसम्बर २००९) ९१ देशक १,०२७ ठामसँ ३५,८७४ गोटे द्वारा विभिन्न आइ.एस.पी.सँ २,१७,३९८ बेर देखल गेल अछि (गूगल एनेलेटिक्स डाटा)- धन्यवाद पाठकगण।


गजेन्द्र ठाकुर
नई दिल्ली। फोन-09911382078
ggajendra@videha.co.in
ggajendra@yahoo.co.in
२. गद्य
२.१. प्रोफेसर राधाकृष्ण चौधरी-मिथिलाक इतिहास (आगाँ)

२.२.१. शीतल झा-नेपालमे मघेशीकेँ समस्या आ सामाधान! २.पाकिस्तान मे सेक्स-विचा कुमार राधारमण

१. चिड़ै-सुजीतकुमार झा२. . कामिनी कामायनी-डाविर्नक बानर३. प्रो. प्रेमशंकर सिंह-मणिपद्मक कथा यात्रा ४. रामलोचन ठाकुर-समकालीन मैथिली-कथाक यथार्थ-उर्फ यथार्थक-कथा

२.४.१. बिपिन झा-आवश्यकता अछि मैथिली शब्दतन्त्र निर्माणक ॥२. गोपाल प्रसाद-फराक मिथिला राज्यक गठन कियक नहि ?
२.५.१.दुर्गानन्द मंडल -बकलेल,२.कपिलेश्वर राउत- छूआ-छूत,३.राजदेव मंडल ,रखबार (दोसर भाग)

२.६.१. शरदिन्दु चौधरी-समय–संकेत २. शीतल झा-गामक अधिकारी....भैया....पोखरि....चम्पा फूल.... ३. विजय–हरीश-किछु लघु कथा ४. सुनीता ठाकुर-अपहरणक सच-५. श्रीमति कुमुद झा-उच्चैठ भगवतीक महात्म-६. शम्भू झा वत्स-ग्राहर्स्थ्य जीवनक समस्याो

२.७.१.मिथिला मे रंगकलाक समकालीन दृष्टि - प्रकाश २.२.राकेश कुमार रोशन-पञ्चैति (कथा)३. भीमनाथ झा-चन्दाा झा, हरिमोहन झामिलिकऽ४. हेमचन्द्र झा दूटा कथा
२.८.१. सुभाष चन्द्र यादव-पति-पत्नी सम्वाद २. मानेश्वर मनुज-‘जीत’३.(सं. सा. सं) नागेश्वर लाल कर्ण ४. डॉ. रवीन्द्र कुमार चौधरी-विद्यापतिक फोटोकेँ लोक सभामे लगएबाक मांग


२.९.- जीत उपन्यास- जगदीश प्रसाद मंडल
प्रोफेसर राधाकृष्ण चौधरी (१५ फरबरी १९२१- १५ मार्च १९८५) अपन सम्पूर्ण जीवन बिहारक इतिहासक सामान्य रूपमे आ मिथिलाक इतिहासक विशिष्ट रूपमे अध्ययनमे बितेलन्हि। प्रोफेसर चौधरी गणेश दत्त कॉलेज, बेगुसरायमे अध्यापन केलन्हि आ ओ भारतीय इतिहास कांग्रेसक प्राचीन भारतीय इतिहास शाखाक अध्यक्ष रहल छथि। हुनकर लेखनीमे जे प्रवाह छै से प्रचंड विद्वताक कारणसँ। हुनकर लेखनीमे मिथिलाक आ मैथिलक (मैथिल ब्राह्मण वा कर्ण/ मैथिल कायस्थसँ जे एकर तादात्म्य होअए) अनर्गल महिमामंडन नहि भेटत। हुनकर विवेचन मौलिक आ टटका अछि आ हुनकर शैली आ कथ्य कौशलसँ पूर्ण। एतुक्का भाषाक कोमल आरोह-अवरोह, एतुक्का सर्वहारा वर्गक सर्वगुणसंपन्नता, संगहि एतुक्का रहन-सहन आ संस्कृतिक कट्टरता ई सभटा मिथिलाक इतिहासक अंग अछि। एहिमे सम्मिलित अछि राजनीति, दिनचर्या, सामाजिक मान्यता, आर्थिक स्थिति, नैतिकता, धर्म, दर्शन आ साहित्य सेहो। ई इतिहास साहित्य आ पुरातत्वक प्रमाणक आधारपर रचित भेल अछि, दंतकथापर नहि आ आह मिथिला! बाह मिथिला! बला इतिहाससँ फराक अछि। ओ चर्च करैत छथि जे एतए विद्यापति सन लोक भेलाह जे समाजक विभिन्न वर्गकेँ समेटि कऽ राखलन्हि तँ संगहि एतए कट्टर तत्त्व सेहो रहल। हुनकर लेखनमे मानवता आ धर्मनिरपेक्षता भेटत जे आइ काल्हिक साहित्यक लेल सेहो एकटा नूतन वस्तु थिक ! सर्वहारा मैथिल संस्कृतिक एहि इतिहासक प्रस्तुतिकरण, संगहि हुनकर सभटा अप्रकाशित साहित्यक विदेह द्वारा अंकन (हुनकर हाथक २५-३० साल पूर्वक पाण्डुलिपिक आधारपर) आ ई-प्रकाशन कट्टरवादी संस्था सभ जेना चित्रगुप्त समिति (कर्ण/ मैथिल कायस्थ) आ मैथिल (ब्राह्मण) सभा द्वारा प्रायोजित इतिहास आ साहित्येतिहास पर आ ओहि तरहक मानसिकतापर अंतिम मारक प्रहार सिद्ध हएत, ताहि आशाक संग।-सम्पादक
मिथिलाक इतिहास


अध्याय–१०
मिथिला आ नेपाल


नेपाल शब्दक उद्गम एखन धरि रहस्यमय अछि। अति प्राचीन कालसँ नेपालक इतिहास मिथिलाक इतिहास संग निकटतम रूपें संबंधित अछि। मिथिला एहेन स्थान रहल अछि जाहिठाम नाना प्रकारक धार्मिक आन्दोलन एवँ दर्शनक उत्पत्ति भेल छैक आर नेपाल ओहि आन्दोलन सबकेँ उर्वरा शक्ति देलकै जाहिसँ वो आन्दोलन सब पुष्पित वो फलदायक भेल। नेपाल मे आर्यत्वक विकास मिथिले बाटे भेलैक। एहि ठाम हम मिथिला आ नेपालक मात्र राजनैतिक सम्बन्धक चर्चा करब।
किरातः- भूतकालक कुहेसक मध्य नेपालक प्रारंभिक इतिहासक विषयमे किछु विशेष ज्ञात नहि अछि। ई. पू. ५९०सँ ११०ई. धरि नेपाल किरात संस्कृतिक प्रधानकेँन्द्र छल। किरातक वर्णन शुक्ल यजुर्वेद मे आएल छैक। इहो कहल जाइत छैक जे अति प्राचीन कालसँ किरात लोकनि पूर्वी नेपाल मे रहैत जाइत छलाह।‘किराते’ शब्द जंगली अनार्य जाति केँ सूचित करैछ जे पहाड़ पर एवँ भारतक उत्तरपूर्वी भाग मे रहैत छलाह। सिल्वाँ लेवीक विचार छन्हि जे किरातक उत्पत्ति मंगोलसँ भेल छल आर दुनु एक्के छलाह। महाभारतसँ ज्ञात होइछ जे जखन अर्जुन हिमालयमे तपस्या करैत छलाह तखन महादेव किरातक भेष मे अर्जुनक परीक्षा लेने छलाह। महाभारतक वनपर्वमे एकटा किरातपर्व सेहो अछि आर यजुर्वेद शतरूद्वीपसँ सेहो एहि पर प्रकाश पड़इयै। भारतक उत्तरी पूर्वी सीमा सेहो किरात संस्कृतिसँ सम्बन्धित छल। ओ सब पूर्वी हिमालयक वासी छलाह। अपन दिग्विजयक क्रममे भीमकेँ विदेश देश छोड़लाक पश्चात किरात सबसँ भेंट भेल छलन्हि। किरात लोकनि पीअर रंगक होइत छलाह। लेभीक अनुसार किरातक सम्पर्क चीन आर म्लेच्छसँ सेहो छलन्हि। रामायणसँ सेहो प्रमाणित अछि जे किरात लोकनि पीअर रंगक होइत छलाह। विष्णु पुराण एवँ मार्कण्डे पुराणसँ ज्ञात होइछ जे ई लोकनि पूर्वी भारत मे रहैत छलाह। वो हिमालयक दक्षिणी मार्ग पर सम्पूर्ण उत्तर–पूर्वी भारतमे, नेपालसँ सटले उत्तरी बिहार मे आ गंगाक उत्तरी भागमे बसि गेल छलाह। ई उएह प्रवेश छल जाहि मध्यसँ चीनक व्यापार भारतक गंगावर्ती धरातलसँ होइत छलैक। नेपाल–मिथिलाक संस्कृतिक इतिहासमे हिनका लोकनिक महत्वपूर्ण स्थान छैक। प्रारंभऽ मे संभऽवतः किरात लोकनि नेपालक स्थानीय राजवंशी छलाह।
नेपाल पर किरात लोकनिक राज्य बहुत दिन धरि छलन्हि। वो लोकनि ई. पू, ६००सँ संभऽवतः नेपाल पर राज्य करैत छलाह। हिन्दू संस्कृतिक विकास मे वो नेपाल मे भारतीय मंगोलियनक प्रमुखताक हेतु सब पृष्ठाधार बनौलन्हि। प्रायः ई.पू.३१२ मे जखन संभूत विजय मरि गेला तखन जैन धर्मावम्बी मे विभाजन भेल आर तकर पश्चात उत्तर भारतमे बारह वर्ष धरि अकाल रहलैक। भऽद्रवाहु नामक एक जैन साधु अकाल भेला पर दक्षिण दिसि चल गेला आ अकाल समाप्त भेला पर घुरला। जैन धर्मसँ छुटकारा लए ओ अपन शेष जीवन व्यतीत करबाक हेतु नेपाल चल गेला। जैनी सबहक जुटान पटनामे भेल आ हुनका तकबाक हेतु स्थूलभऽद्र नेपाल गेला आ ओतए हुनकासँ चौदह पर्व पओलन्हि। गौतम बुद्धक जन्म तँ नेपाल क्षेत्र मे भेल परञ्च ओ नेपाल भ्रमणकेँने छलाह अथवा नहि से कहब कठिन। अशोकक प्रयाससँ नेपाल मे बौद्ध धर्मक प्रसार भेल। कहल जाइछ जे कौटिल्यकेँ सेहो नेपालक पूर्ण ज्ञान छलन्हि। अशोकक समकालीन नेपालमे छलाह स्थुमिको। नेपाल उनक हेतु विशेष प्रसिद्ध छल। लुम्बिनी मे अशोक ४८ गोट स्तूपक निर्माण करौने छलाह आर स्थुमिकोक शासन काल मे वो स्वयं नेपालो गेल छलाह। अशोकक समयमे नेपालक शासन किरात लोकनिक हाथमे छलैक। अशोकक पुत्री आ जमाय नेपाल मे छलाह। अशोकक वादो दशरथक प्रभाव नेपालमे बनल छलैक। नेपाल आ मिथिलाक सम्पर्क मौर्य साम्राज्यक ह्रासक समय धरि बनल छलैक। शूंग कालक मुद्रा पश्चिमी नेपालसँ प्राप्त भेल अछि जाहि आधार पर ई अनुमान लगाओल जाइत अछि जे शुंग लोकनिक एक प्रकारक दुर्वल नियंत्रण नेपाल पर छलन्हि। कुषाण लोकनिक शासन चम्पारण धरि छल आर तिरहूतो पर हुनका लोकनिक प्रभाव छलन्हि। नेपाल पर कुषाण शासन हेबाक समर्थन स्वर्गीय जायसवाल महोदयकेँने छथि। कुषाण मुद्राक पता काठमाण्डु लग सेहो लगलैक अछि तैं जायसवाल महोदयक विचारकेँ मान्यता भेटैत छैक। ‘रधिया’ नामक ग्रामसँ सेहो कतेक रास ताँवाक मुद्रा विम कैडफ्रिसेज आर कनिष्कक भेटल छैक जाइक तँ कुषाण शासनक प्रमाण सिद्ध होइत छैक।
कैक शताब्दी धरि नेपाल पर शासन करैत काल किरात सबकेँ जखन–तखन अनायास विड़रो सबसँ संघर्ष करए पड़लन्हि। राजनैतिक अस्थायित्वक रहितहुँ ओ सांस्कृतिक जीवन आ राजनीतिक नियमक स्थापनामे बहुत किछुकेँलन्हि। किछु विद्वानक मत छन्हि जे इण्डो मंगोलाइड सब सर्वप्रथम भारत पर शासनकेँलन्हि आ तब नेपाल गेला। सुसंस्कृत इण्डो मंगोलाइडक रूपमे नेपालक नेवारक उल्लेख भेल छैक। नेवार लोकनि प्रायः ई. पू. तेसर शताब्दीमे एला। ताधरि अशोक पाटनमे बहुत रास बौद्ध चैत्यक निर्माण कै चुकल छलाह। तहियासँ ओहि क्षेत्रमे बौद्ध धर्मक प्रसार बनले रहल आ बादमे महायान सम्प्रदायक पद्धति ओ विचार सेहो बिहारेसँ ओतए गेल। ओहिठामक शैव, शक्ति आर वैष्णव धर्मक सम्बन्धमे सेहो इएह कहल जा सकैत अछि। ई सभऽ आंशिक रूपमे उत्तरी बिहारक आरंभऽक मंगोलाइडक प्रतिक्रिया स्वरूप छल। आर्यीकरणक पूर्व मिथिला सेहो किरात संस्कृतिक प्रधानकेँन्द्र छ्ल। इण्डोलाइड एकटा सामूहिक संस्कृतिक विकासमे पैघ योगदान देलन्हि।
११०ई.क आसपास किरात वंशक अंत नेपालमे भेल आ तखनसँ लकए २०५ ई. धरि नेपालक इतिहास अन्धकारपूर्ण अछि। एहि बीच कोनो लिखित प्रमाण नहि भेटइयै। गुणाढ़यक ‘बृहकथा’मे नेपाल देशक शिव नामक नगरमे राजा यशकेतुक शासन करबाक उल्लेख भेटइयै। कखन आ कोन प्रकारे किरात लोकनिक ह्रास भेल से हमरा लोकनि नहि जनैत छी आ नेऽ तकर कोनो ठोस सबुते भेटैत अछि। इहो कहल जाइत अछि जे ‘निमिष’ नामक एक गोट राजा नेपालमे विजय प्राप्तकेँने छलाह आ निमिष राजवंश करीब १४५ वर्ष धरि ओतए शासनकेँने छलाह आ एहि वंशमे पाँच गोट राजा भेल छलाह– निमिषम मनाक्ष, काकवर्मन, पशु प्रेक्ष देव, पशु प्रेक्ष देव, आ भास्कर वर्मन। एहि राजवंशक समयमे आर्य लोकनिकेँ नेपालमे पशुपतिनाथक मन्दिरक स्थापनाकेँलन्हि आ भारतसँ आर्यसब केँ अनलन्हि। एकर बाद नेपालमे लिच्छवी वंशक शासन शुरू होइत अछि।
लिच्छवी वंशक इतिहास:- लिच्छवीक सम्बन्ध मनु लिखैत छथि–
“द्विनातयः सर्वणासु जनयन्य व्रतांस्तुयान्।
तांसावित्री परिभ्रष्यनं व्रात्यानितिविनिर्हिशेत्॥
व्रात्यातु जायते विप्रात्पापात्मा भूजकण्टकः।
आवंत्यवाट घानौच पुष्पधः शैख एवचः॥
झल्लोमल्लश्च राजन्याद व्रात्यन्निच्छिवि देवच।
नरश्य करणश्चैव खसाँ द्रविड एवच”॥
(एहि सम्बन्धमे देखु हमर “व्रात्यज इन एंसियेंट इण्डिया”)
लिच्छवी लोकनिक सम्बन्ध नेपालसँ बड्ड घनिष्ट छलैक। किछु विद्वानक विचार छन्हि जे इहो लोकनि मंगोलाइडसँ अदभूत छलाह। नेपालक मल्ल, खास आदिक कोटि मे मनु लिच्छवी (निच्छवी)केँ रखने छथि। लिच्छवी लोकनिक प्रभाव मिथिलामे अत्यधिक विकसित छलैक आ ओतहिसँ ई लोकनि नेपाल धरि अपन शक्तिक प्रसारकेँलन्हि। नेपालमे किरात शासनक संदिग्ध प्रमाण अछि। निमिष वंशकेँ सोमवंशी कहल गेल अछि आ ओकर वादे सूर्यवंशी राज्यक स्थापना भेल।
लिच्छवी लोकनि निमिष वंशकेँ उखाड़ि फेकलन्हि आर तकर बाद लगभऽग ५००वर्ष धरि नेपाल पर शासनकेँलन्हि। नेपाली संवत जे १११ई.सँ आरंभऽ छैक सैह संभऽवतः लिच्छवी लोकनिक राज्यारोहणक संकेत दैत अछि। ओहुना अखन इएह मान्य अछि जे लिच्छवी लोकनि नेपाल मे इस्वीसन् प्रथम शताब्दीक समीप अपन साम्राज्यक स्थापनाकेँने छलाह आ अपन संवतक प्रारंभऽ सेहो। सूर्यवंशी शासनक स्थापनाक पश्चाते नेपालमे यथार्थ एतिहासिक कालक प्रारंभऽ मानल जाइत अछि। दुनु राजवंश मिथिलासँ आएल छल एहि सब राजवंशक समय मे नेपाल आर मिथिला नियमित रूपें राजनैतिक आ साँस्कृतिक सन्दर्भ बनल रहलैक। प्रथम ऐतिहासिक राजा भेलाह जयदेव द्वितीयक बीचमे 33टा राजा भेल छलाह।
समुद्रगुप्तक समय मे नेपाल गुप्त साम्राज्यक चाङ्गुरमे पड़ल छल। प्रयाग प्रशास्तिसँ एकर स्प्ष्टीकरण होइछ– नेपालक सीमांत शासकक सिवा प्राप्त करबाक संदर्भ अछि। सूर्यवंशी लिच्छवी कोनो शासक नेपालमे तखन रहल होयताह जनिका हेतु “प्रयत्न नेपाल नृपति” शब्दक व्यवहार कैल गेल अछि। मिथिलासँ नेपाल धरि तखन लिच्छवी लोकनिक विस्तार छलन्हि आर समुद्रगुप्त लिच्छवी दौहित्र छलाह तैं एहि घटनाकेँ मात्र घरेलु घटना मानल जासकइयै। एहि युगमे नेपालमे वैष्णव वादक प्रवेश भेल। मान देवक चंगुनारायण मन्दिरक शिलालेख एवँ आन–आन शिलालेखसँ ई ज्ञात होइछ जे लिच्छवी राजा लोकनि बौद्ध धर्म, ब्राह्मण धर्म, शैव धर्म, वैष्णव धर्म, शाक्त आदि सबकेँ प्रोत्साहन दैत छलाह। नरेन्द्र देवक शासन कालमे मत्स्येन्द्र नाथ नामक संप्रदायक प्रचलन भेल। लिच्छवीक समयमे महायान शाखा सेहो अपन आकार ग्रहणकेँलक। लिच्छवी लोकनि ३५०सँ ८९९ धरि शासनकेँलन्हि–बीचमे मात्र अंशुवर्मन आर जिश्नुगुप्त छोड़िकँे जे स्वतंत्र शासनकेँने छलाह।
अंशुवर्मन:- महासामंत अंशुवर्मन सातम शताब्दीक पूर्वाद्धक एकटा महत्वपूर्ण शासक भेल छथि। वो अपनाकेँ महासामंत कहने छथि। वो वेश शक्तिशाली शासक छलाह आर तराई राज्यक विशिष्ट भागकेँ अपना राज्यमे मिला लेने छलाह। अपन राज्यक विस्तार ओ वेतिया धरि कलेने छलाह जतए हुनक साम्राज्यसँ मिलैत छल। प्रसिद्ध व्याकरणाचार्य चन्द्रवर्मन एवँ नालन्दा विश्वविद्यालयक प्रसिद्ध शिक्षक अंशुवर्मनक दरबारक शोभा बढ़ौने रहथिन्ह। अंशुवर्मन जाहि नेपाल राज्यक स्थापनाकेँलन्हि ताहि परम्पराकेँ जिश्नुगुप्त रखलन्हि आर बढ़ौलन्हि। ६४३मे अंशुवर्मनक मृत्युक पश्चात नरेन्द्र देवक नेतृत्वमे नेपालमे लिच्छवी शासनक पुनर्जन्म भेलैक।
लिच्छवी शासन नेपालमे किछु अवधि धरि रहलैक एकर प्रमाण हमरा मंजूश्री मूलकल्पसँ भेटैत अछि–
“भऽविष्यति तदाकाले उत्तरां दिशिमा श्रृतः।
नेपाल मण्डले ख्याते हिमाद्रे कुक्षिमाश्रिते॥
राजा मानवेन्द्रस्तु लिच्छवीनां कुलोद्भवः।
सोऽपि मंत्रार्थ सिद्धस्तु महाभोगी भऽविष्यति॥
पतनक कारण– “उदयः जिहनुनोह्यंते म्लेच्छानां विविधास्तथा।
अभ्योधे भ्रष्ट मर्यादा बहिः प्राज्ञोपभोजिनः॥
शस्त्र सम्पात विध्वस्ता नेपालाधिपतिस्तदा।
विधा लुप्ता लुप्तराजानो म्लेच्छ तस्कर सेविनः”॥
(राहुलजी द्वारा सम्पादित)
मानदेव लिच्छवी छलाह आ तकर बादो कैकटा लिच्छवी शासक भेलाह। लिच्छवी शासनक प्रसंगक उल्लेख हियुएन संग सेहोकेँने छथि। अंशुवर्मन‘महासामंत’ कहबै छथि जाहिसँ मान होइयै जे जो ६३३ई.धरि लिच्छवी राजाक प्रभुत्वक स्वीकार करैत छलाह। नेपालक वैवाहिक सम्बन्ध सेहो बिहारसँ चलैत छल। सोमदेवक विवाह मौरवरी भोगवर्मनक पुत्री ओ आदित्य सेनक प्रपौत्री वत्स देवीसँ भेल छलन्हि।
अहीर:- मंजूश्री मूलकल्पमे मानदेव द्वितीयक पश्चात राज विप्लवक वर्णन भेटइयै जाहिसँ ज्ञात होइछ जे नेपालमे गोलमाल भेल छल। अहीर लोकनिक आक्रमणसँ नेपाल आक्रांत छल। वंशावलीक अनुसार वो लोकनि भारतक समतलसँ आएल अहीर छलाह। हिनका लोकनि अहीरगुप्त सेहो कहल गेल छन्हि। ५००सँ ५९०क बीच एहिमे पाँचटा शासक भेलाह जाहिमे परमगुप्त पराक्रमी छलाह आ ओ लिच्छवी लोकनिकेँ शिकस्तकेँने छलाह। हुनक एकटा पौत्र सिमरौनगढ़मे शासन करैत छलाह। ओहि राजवंशक दोसर शाखा तराईमे शासन करैत छल। जयगुप्त द्वितीयक मुद्रा चम्पारण आ मगधमे भेटल अछि।
६४३–४४मे जिश्नुगुप्तक पश्चात अहीरवंश दू भागमे बटि गेल छल आ लिच्छवी लोकनि पुनः अपन राज्यकक स्थापना कलेने छलाह। तकर बाद नेपालकेँ तिब्बतमे मिलि जेबाक संभावना बुझि पड़इयै आ मंजूश्री मूलकल्पमे एकर अप्रत्यक्ष प्रमाण अछि। ई उएह समय छल जखन तिब्बती राजा चीनी राजदूतकेँ तिरहूत पर आक्रमण करबाक हेतु साहाय्य भेटल रहथिन्ह आ संभऽव जे ओहिक्रममे नेपाल पर तिब्बती प्रभाव बढ़ि गेल हो। मंजूश्री मूलकल्पसँ ज्ञात होइत अछि नेपाल शासन अन्यायी म्लेच्छ पर निर्भर रहए लागल छल तथा राज्यक प्रथा समाप्त भऽगेल छलैक। तिब्बती शासक श्राँगक विवाह अंशुवर्मनक बेटीसँ भेल छलैक। ७०३क बाद नेपाल विदेशी शासनसँ मुक्ति पेवाक हेतु माथ उठौलक। धर्मदेवक पुत्र मान देव तृतीय विजयक चारिटा स्तंभऽ निर्मितकेँने छलाह। लिच्छवी लोकनिक पुनरागमनसँ नेपालक सवतोमुखी विकास भेल। ७०५ ई. मानदेव तृतीयक चंगुनारायण अभिलेखसँ ज्ञात होइछ जे ओ मल्ल सबहिक संग युद्ध कएने छलाह आ गण्डक धरि पहुँचि गेल छलाह। स्वंयभुनाथ शिलालेखसँ तत्कालीन संविधान पर सेहो प्रकाश पड़ैत अछि। एहिठाम ई स्मरणीय थिक जे नेपालक लिच्छवी बरोबरि मिथिलासँ सम्पर्क बनौने रखैत छलाह। शिवदेवक विवाह आदित्यसेनक पौत्रीसँ छलन्हि। शिवदेवक जयदेव गद्दी पर बैसलाह आ हुनक पदवी छलन्हि‘परचक्रकाम’। जयदेव शक्तिशाली शासक छलाह। शिवदेव अपना शिलालेखमे अपनाकेँ–“भऽद्धारक महाराज लिच्छवी कुलकेतु” कहने छथि। जयदेवकेँ कश्मीर धरि विजयक श्रेय देल जाइत छन्हि। जयदेव मिथिलाक सीमा धरि अपन रज्यक विस्तारकेँने छलाह आ हुनक सम्पर्क पाटलिपुत्र आ गौड़सँ सेहो बढ़िया छलन्हि।८७९–८८०मे राघव देव नेपालक संवत चलौलन्हि मुदा हिनका जयदेवसँ कोन सम्बन्ध छलन्हि से हमरा लोकनि नहि जनैत छी।
लिच्छवीक पश्चात नेपालक ठाकुरी राजवंशक सम्पर्क अपना सबहिक क्षेत्रसँ बढ़िया छलैक। नेपालमे महायानक प्रधानता छल आ ओहिठामक विद्यार्थी नालंदा (आ बादमे विक्रमशिला)मे पढ़बाक हेतु अवैत छलाह। पालवंशक समयमे ई सम्बन्ध आ घनिष्ट भऽगेल। रमेश चन्द्र मजुमदारक मत छैन्ह जे इमादपुर (मुजफ्फरपुर)मे जे पाल अभिलेख भेटल अछि ताहि पर जे संवत ४८मे पढ़ल गेल अछि से भ्रामक अछि आर ओकरा नेपाली (नेवारी) संवत–१४८ बुझबाक थिक जे १०४८ई.क बरोबरि होइत अछि आ जखन मिथिला पर महिपाल प्रथम शासन करैत छलाह। सब तथ्यक स्पष्ट अध्ययनकेँला उत्तर हुनक मंतव्य छन्हि जे मूर्तिक समर्पितकेँनिहार व्यक्ति नेपाल वासी रहल होयताह आ तैं ओ नेवारी संवतक व्यवहार कएने छथि। १०३८मे नेपाली लोकनि मिथिला बाटे विक्रमशिला गेल छलाह आ ओतएसँ अनीशक नेपाल पहुँचलाक बाद नेपाली महायानमे तंत्रक प्रवेश भेलैक। एग्यारहम शताब्दीमे नेपाल आंतरिक रूपें बटि गेल तीन राज्यमे–पाटन, काटमाण्डु आ भातगाँव आ ओहिठामकेँन्द्रीय सत्ताक सर्वथा अभाव भऽगेल आ एहिसँ लाभऽ उठाकेँ विभिन्न राज्यक आक्रमण नेपाल पर शुरू भऽगेलैक। चालूक्य, कलचुरी, यादव, जैतुंगी आदिक शिलालेखसँ ज्ञात होइछ जे ई सब नेपाल पर आक्रमण कएने छलाह। एहि स्थितिसँ लाभऽ उठाए नान्यदेव सेहो नेपाल पर आक्रमणकेँलन्हि। नान्यदेव नेपाल पर मिथिलाक आधिपत्य स्थापित करबामे समर्थ भेलाह। राजकरैत शासक सबकेँ पदच्युत कै वो अपन राजधानी भातगाँवमे बनौलन्हि। नेपाली परम्पराक अनुसार वो काठमाण्डुक जगदेव मल्ल एवँ पाटन–भातगाँवक आनंद मल्लकेँ बची बनौलन्हि आ जे सब हिनक प्रभुत्व स्वीकारकेँलन्हि हुनका ई माफ क देलथिन्ह। नेपाल नान्यदेवकेँ कहियो चैन नहि भेटलन्हि आ बरोबरि किछु ने किछु खटपट होइते रहलैन्ह। एकमत इहो अछि जे नान्यदेवकेँ पुनः दोसर वेर (११४१मे) नेपाल पर आक्रमण करए पड़लन्हि। नान्यदेवक प्रभुत्व तँ नेपाल पर बनल रहलैन्ह मुदा हुनक उत्तराधिकारी लोकनि ओकरा रखबामे समर्थ भेलाह कि नहि से एकटा संदिग्ध विषय। परम्परानुसार नान्यदेवक एकटा पुत्र नेपालपर शासन करैत छलाह। संभऽवतः मल्लदेव एहिठामक शासक छलाह आ भीठ भऽगवान पुर धरि हिनक राज्यक प्रसार छल। नरसिंह देवक समयमे मिथिला आ नेपालमे फेर खटपट भेलैक आ दुनु राज्य अलग भऽगेल। मिथिलासँ नेपाल पृथक भऽगेल। नान्यदेवक वादहिसँ नेपालमे कर्णाट शासन दुर्बल भऽगेल छलैक आ नेपालमे कर्णाट शासनकेँ ठाकुरी राजा लोकनि उखाड़ि फेकने छलाह। एहि आस पासमे नेपालमे मल्ल लोकनिक उत्थान सेहो देखबामे अवइयै। ई वंश अरि मल्लदेवसँ शुरू होइछ। नीलग्रीव स्तंभऽ अभिलेखसँ ज्ञात होइछ जे धर्ममल्ल आर रूपमल्ल नेपालक मल्ल लोकमोक पूर्वज छलाह। एहि वंशक प्रमुख शासक छलाह अरि मल्लदेव।
मल्ल लोकनिक प्रभुत्वक कालमे मिथिलाक मंत्री चण्डेश्वर नेपाल पर आक्रमणकेँलन्हि आ नेपालक राजाकेँ पराजितकेँलन्हि। चण्डेश्वरक ‘कृत्य रत्नाकर’मे सेहो एकर विवरण अछि। वाग्मतीक तट पर एहि उपलक्षमे तुलापुरूष दानक उल्लेख सेहो अछि। १३१४मे नेपाल पर दक्षिणसँ (मिथिला) चढ़ाईक प्रमाण स्पष्ट अछि। हरिसिंह देव पराजित भेला उत्तर नेपाल गेला आर नेपाली शासक बिना प्रतिरोध आत्मसमर्पणक देलखन्हि। हरिसिंह देवमे भातगाँवमे सूर्यवंशी राजवंशक परिपाटी स्थापितकेँलन्हि। ओ अपन शक्तिकेँ नेपालमे पुनः संगठितकेँलन्हि आ कर्णाट प्रभुत्वक स्थापना सेहो। भातगाँवसँ ओ शासन करैत छलाह आ ओतहि ओ तुलजादेवीक मन्दिरक स्थापनाकेँलन्हि। नेपालमे हुनक सार्वभौम होएबाक निम्नलिखित अभिलेखसँ स्पष्ट अछि–
“जातः श्रीहरिसिंह देव नृपति प्रौढ़ प्रतापोरयः।
तद्वंर्श विमले महारिपुहरे गाम्मीर्यरत्नाकरः॥
कर्त्तायः सरसामुपेत्य मिथिलां संलक्ष्य लक्षाप्रियो।
नेपाले पुनरोध वैभऽवयुते स्थैर्य विधते चिरम्॥
हरिसिंह देवक नेपाल आक्रमणक प्रश्न पर इतिहास कार मध्य काफी मतभेद अछि। लुसिआनो पेतेकक विचार छन्हि जे मल्ल लोकनि स्वतंत्र छलाह आ अपनाकेँ महाराजिधराज परमेश्वर परमभऽद्दारक कहैत छलाह जाहिसँ ई मान होइछ जे हुनका लोकनि पर कोनो विदेशी सत्ताक शासन नहि छलन्हि। मिथिला पर चण्डेश्वर द्वारा आक्रमणक बातकेँ ओ मनैत छथि परञ्च ओ इहो कहैत छथि जे ओहि आक्रमणक फले मिथिलाक आधिपत्य नेपाल पर नहि भेलैक। मिथिलासँ भागला पर ओ नेपालमे अपन राज्य बनौलन्हि तकरा वो नहि मनैत छथि। एकटा वंशावली पोथीक आधार पर इहो सिद्ध कएने छथि जे हरिसिंह देव नेपाल पहुँचलाक बाद मरि गेला आर रजगाँवक माँझी मारो हुनक पुत्रकेँ गिरफ्तार कए वंदी बना लेलकन्हि आ धन–वित्त छीनि लेलकन्हि। एवँ प्रकारे हरिसिंह देवक वंश एहिठाम समाप्त भऽगेलैन्ह।
लुसिआनो पेतेकक मतकेँ हम ओहिना राखि देने छी जेना वो लिखने छथि। इहो कहल जाइत अछि जे ओहि समयमे पश्चिमी नेपालसँ आदित्यमल्लक आक्रमण सेहो भेल छल। तिरहुतिया जगतसिंह सेहो किछु दिनक हेतु नेपालमे राज्यकेँने छलाह। एक विद्वानक अनुसार हरिसिंह देवक परिवार एवँ हुनक उत्तराधिकारी हुनका वादो नेपाल पर शासनकेँलक। उत्तराधिकारी लोकनिक नाम एवँ प्रकारे अछि–
i. मतिसिंह–(१३१५–६९)–सिमरौनगढ़क राजगद्दी पर सेहो राज्यकेँलन्हि आर नेपाल पर सेहो। चीनक सम्राट सिमरौनगढ़ शासककेँ मान्यता दैत छलथिन्ह। शमशुद्दीन इलियास जखन नेपाल पर आक्रमण करबाक हेतु बढ़लाह तखन ओ सिमरौन गढ़क शासककेँ सेहो परास्तकेँलन्हि आ ओहि बाटे नेपाल गेलाह। मतिसिंहक नाम पर मोतिहारी अछि।
ii. शक्ति सिंह
iii. श्यामसिंह– हिनका कोनो पुत्र नहि भेल आ हुनक पुत्रीक विवाह मल्लवंशक राजकुमारसँ भेल। मतिसिंहक ओतए चीनक दूत आएल छल। चीनक सम्राटक ओहिठामसँ एकटा मोहर सेहो आएल छलैक आ शक्तिसिंहक ओहिठाम सेहो एकटा चीनी सम्राटक मोहर आ पत्र आएल छलैक। श्यामसिंहक राज्यारोहनक चीनी सम्राटक हाथे भेल छल। एहितथ्य सबसँ प्रत्यक्ष अछि चीनी सम्राट एहि कर्णाटवंशीयकेँ नेपालक सार्वभौम राजा बुझैत छलाह। अहु सम्बन्धमे पेतेकक मत अछि जे ई सब बात गलताथिक। १३८२ ई. क इथाम बहाल अभिलेखसँ स्पष्ट होइयै जे मदन रामक पुत्र स्जक्तिसिंह नेपाली अनेक रामक वंशज छलाह ने कि कर्णाट वंशीय। नेपालक इतिहास मे अहुखन कतेको मतभेद अछि आ रहत।
रज्जलदेवीक पति जयार्जुनक शासनकालमे जयस्थिति मल्ल द्वारा राज्य शासनमे नियम विरूद्ध विप्लव कैल गेल। जयस्थितिकेँ सिमरौनक हरिसिंह देवक वंशज कहल गेल अछि। नायक देवी आ जगतसिंहक पुत्री रज्जलादेवीसँ जयस्थिति विवाहकेँलन्हि। जयस्थिति जयार्जुनकेँ पराजित कए नेपालक राजा भेलाह। ओ सूर्यवंशी कर्णाटक योग्य प्रतिनिधि सिद्ध भेलाह। पृथ्वीसिंहक आधिपत्य स्थापित होयबाक समय धरि हुनक वंश शासन करैत रहल। जयस्थितिमल्लक संग रज्जल्ला देवीक विवाह भेलासँ तीनटा शक्तिशाली शासक परिवार–ठाकुरी, कर्णाटओ मल्ल संयुक्त भऽगेल। जयस्थितिमल्ल शक्तिशाली शासक छलाह। हुनक उत्तराधिकारी यक्षमल्ल अपन अधिकार मिथिला धरि बढ़ौलन्हि। ओ अपन प्रतिद्वन्दीकेँ हराय राज्यकेँ चारि भागमे विभऽक्तकेँलन्हि।
__ i. भातगाँव – अपन ज्येष्ठ पुत्र राज्यमल्लकेँ
__ ii. बनेया – रणमल्लकेँ
__ iii.काठमाण्डु – रत्नमल्लकेँ
__ iv.पाटन – अपन पुत्रीकेँ।
एकर परिणाम भैल नेपालक सर्वनाश। सत्रहम शताब्दीमे नेपाल अनेकानेक जागीरमे बँटि गेल। सबसँ पूबमे किरात प्रदेश छल जाहिमे दूध कोशीक समतल, ओकर शाखा तथा सून कोशीक पूबमे तराईक किछु भाग सेहो छलैक।
मुसलमानी आक्रमणः- ऐतिहासिक सम्पर्क पकड़बाक हेतु पुनः ईस्वीसन् चौदहम शताब्दीक चर्चा करए पड़ैत अछि। कहल जाइछ जे अलाउद्दीन खलजी सेहो अपन प्रभाव नेपाल धरि बढ़ौने छलाह यद्धपि एकर कोनो ठोस प्रमाण हमरा लोकनिकेँ उपलब्ध नहि अछि। १३४६–४७मे बंगालक शासक शमसुद्दीन हाजी इलियास नेपाल पर आक्रमणकेँलन्हि आ एहिबातक उल्लेख स्वयंभूनाथक अभिलेखमे अछि। एहि शिलालेखक अनुसार हाजी इलियास काठमाण्डुकेँ घेर लेलक, शहरमे आगि लगादेलक, लूट पाट मचौलक एवँ मूर्त्ति सबकेँ ध्वस्तकेँलक। शिलालेखक तिथि अछि नेवारी ४९२=१३७१–७२ई.–मन्दिर पुनः निर्मित भेलैक आ स्तूप पुनर्स्थापित भेल आ ओकर समारोह मनाओल गेल। एहि शिलालेखक संपादनकेँ.पी.जायसवालकेँने छथि। तकर बादसँ पुनः कोनो आक्रमणक उल्लेख नहि भेटैत अछि।
मल्लक शासनः- जयस्थितिक चर्च हमर पूर्वहि कचुकल छी। हुनक उत्तराधिकारी छलाह जगज्योतिमल्ल। ओ मैथिल वंशमणिक मिलिकेँ ‘संगीत भास्कर’ नामक पुस्तकक रचनाकेँने छलाह। हुनक उत्तराधिकारी ज्योतिमल्ल भेला आ हुनक यक्षमल्ल। यक्षमल्ल अपन अधिकारक विस्तार समतल भूमि दिसि सेहोकेँलन्हि। यक्षमल्लक तृतीय पुत्र रत्नमल्ल मैथिल ब्राह्मणक प्रभावक अधीन छलाह। रत्नमल्लक उत्तराधिकारी छलाह अमरमल्ल आ हुनक महेन्द्रमल्ल जे चानीक मुद्राक व्यवहार शुरूकेँलन्हि। ओ तिरहूतसँ हानी मंगवैत छलाह।
एम्हर आवि मिथिला आ नेपालक बीचक सम्बन्ध खूब बढ़िया नहि रहल। खण्डवला कुलक राजा महिनाथ ठाकुर अपन राज्य विस्तारक क्रममे मोरंगकेँ जीति लेलन्हि। मिथिला, तिरहूति गीतक प्रचार एहि राजाक समयमे भेल छल। नेपाल तराईक लोग सब खटपट करैत छल आ तै मोरंगक जमीन्दार सबकेँ दबेबाक हेतु औरंगजेब गोरखपुरक फौजदार आ मिथिलाक फौजदारकेँ पठौलन्हि। सत्रहम शताब्दीमे मिथिला आ नेपालमे खटपट होयबाक एकटा कारण मकवानी राज्य ते तराई वो घाटीक उपहिमालय मार्गक सटले दक्षिण आ दक्षिण–पश्चिममे रहैक। एहिठाम एकटा प्रमुख शासक छलाह राजा हरिहर जे बड्ड महत्वाकाँक्षी छलाह। राघवसिंह जखन मिथिलाक राजा भेलाह तखन फेर एहि राज्यकेँ लकए नेपालसँ खटपट शुरू भेल। नेपाल तराईक पंचमहलाक राजा भूपसिंहकेँ युद्धमे हरौलन्हि आ भूपसिंह ओहिमे मारल गेला। दरभंगाक खण्डवला राज्यक सीमा मकवानी राज्यक सीमा मकवानी राज्य धरि पहुँचल। मोरंग राजाक ओतए सेहो मिथिलाक धाख बनल। बंजर सब सेहो तराईक क्षेत्रमे शरणलेने छलाह आ अलीवर्दी हुनका सबहिक विरूद्ध उचित कारवाईकेँने छलाह। बंजर लोकनि भऽपटिआटी टीसनसँ मकवानी राज्यक सीमा धरि पसरल छल।
१७६५मे नेपालमे गोरखा लोकनि शक्तिशाली भऽगेलाह। १८०२ई.सँ नेपालक सम्पर्क इस्ट इण्डिया कम्पनीक अधिकारीसँ भेल जखन कि नेपाली लोकनि हुनकासँ भेंट करबाक हेतु पटना अवैत गेल। नेपाल आ इस्ट इण्डिया कम्पनीक सम्बन्ध मधुर नहि भऽसकल आ दिनानुदिन झंझट बढ़ि गेल। अंग्रेज आ नेपालीक बीच युद्ध भऽइयैकेँ रहल आ ओ युद्ध भेल मिथिला भूमि पर। युद्धमे नेपाली लोकनि अपन अधिकारक विस्तार तराईमे छपड़ा (सारन) धरिक चुकल छलाह। चारूकात लड़ाई प्रारंभऽ छल। सारनसँ कोशी धरि आ वीचमे मकवानी होइत अंग्रेजक एकटा टुकड़ी नेपालक राजधानी दिसि बढ़ल। लड़ाईक भीषण रूप देखि गजराज मिश्र शांतिक वार्त्ता चलौलन्हि। १८१५मे एक समझौताक अनुसार ई निश्चित भेलैक जे नेपालकेँ ओहिभूमि पर अधिकार छोड़ि देवाक चाही जाहि पर ब्रिटिशक कब्जा भऽगेल छलैक। एहि संधिसँ कोनो संतोषजनक परिणाम नहि बहरेलैक। १८१६मे पुनः मकवानी पुर लग फेर भिड़ंत भेलैक आ गोरखा पराजित भेल १८१४ई.२८ नवम्बरक सुगौलीक संधिकेँ जखन गोरखा लोकनि बिना कोनो शर्त्त स्वीकारकेँलन्हि तखनहि अंग्रेज युद्धवंदी घोषणा १८१६मेकेँलन्हि। एवँ प्रकारे अंग्रेज आ नेपालक बीच संघर्षक मुख्य स्थल मिथिले रहल आ सुगौलीक सन्धिक पश्चात दुनु राज्यक वीचक सम्बन्ध सुधरल।













































अध्याय–११
मुल्ला तकियाक वयाजक अनुसार मिथिलाक इतिहास

मुल्ला तकिया अकबरक समकालीन छलाह आ ओ अपन असमक भ्रमणक क्रममे मिथिला बाटे गेल छलाह। ओ मिथिलामे जे देखलन्हि–सुनलन्हि से आ अन्यान्य साधन केँ आधार अपन एकटा ‘वयाज’ (डायरी) लिखलैन्ह जे मिथिलाक इतिहासक अध्ययनक हेतु सर्वथा अपेक्षित अछि। एहि वयाज पर आधारित एकटा विस्तृत निबन्ध पटनाक मासिर पत्रिकामे १९४६मे छपल छल आ दरभंगासँ प्रकाशित डॉ. लक्ष्मण झा द्वारा संपादित साप्ताहिक मैथिली “मिथिला” (२ फरबरी, ९ फरबरी आर १९ फरबरी १९५३क अंक सब)मे सेहो एकरा पर आधारित किछु अंश प्रकाशित अछि। मिथिलाक इतिहासक हेतु ई एकटा अपूर्व साधन मानल जा सकइयै आ एकर उपयोग हम अपन ‘हिस्ट्री ऑफ मुस्लिम रूल इन तिरहूत’मे सेहो कैल अछि। मैथिली पाठकक हेतु हम एहिठाम मुल्ला तकियाक वयाजक सारांश उपस्थित क रहल छी। मिथिला पर मुसलमानी राज्यक विस्तारक अध्ययन क्रममे सेहो एकर विवरण भेटत।
वयाजक अनुसार राजा लक्ष्मणसेन पर आक्रमणक पूर्व वख्तियार खलजी मिथिलाक किछु भाग पर आक्रमण कयने छलाह। मिथिलाक राजा नरसिंह देव बंगालक राजा लक्ष्मण सेनक अधीन शासन करैत छलाह। पाछाँ ओ मुसलमान राजाक अधीनता स्वीकारकेँलन्हि आ तखनसँ ओ मुसलमान शासक गियासुद्दीन इवाजक समय धरि कर दैत रहलाह। १२२५मे जखन इल्तुतमिश बंगाल पर आक्रमणकेँलन्हि तखन गियासुद्दीन इवाज हुनकासँ मेल कलेलन्हि। बिहारकेँ बंगालसँ फराक कए फुटे प्रांत बना देल गेल आ मल्लिक अलाउद्दीन जानीकेँ ओहिठामक राज्यपाल नियुक्त कैल गेल। इल्तुतमिसक घुरला पर गयासुद्दीन नरसिंह देवक मदतिसँ पुनः बिहार पर आधिपत्य स्थापित कलेलन्हि। बदला लेबाक विचारसँ सुल्तानक बंगाल पर आक्रमणकेँलन्हि आ गियासुद्दीन मारल गेला। नतसिंह देव हुनकासँ माँफी माँगिकेँ अपनाकेँ छोड़ोलन्हि आ कर देवाक वचन देलन्हि। रजिया बेगमक शासन कालमे बंगाल पुनः दिल्लीक नियंत्रणसँ मुक्त भऽगेल। राजा नरसिंह देव सेहो विद्रोह क देलन्हि तुगलक तुगान खाँ मिथिला विद्रोहकेँ दबेबाक हेतु पठाओल गेलन्हि आ ओ ओहि राज्य पर अपन सत्ता स्थापित कए बहुत रास वस्तुजात लूटिकेँ लगेलाह। मिथिलाक राजा बहुत दिनधरि नजरबन्द रहलाह। १२४४मे ओ चंगेज खाँक आक्रमणक समयमे ओ अपन बहादुरी देखौलन्हि आ तकर पुरस्कार स्वरूप हुनका सुल्तान अलाउद्दीन मसूद प्रसन्न भऽए तिरहूत राज्य घुरा देलथिन्ह आ हुनका एकटा सम्मानित राजा घोषित कए बिदाकेँलथिन्ह। मिथिलाकेँ सूबेदारक मातहदीसँ हटा देल गेल आ एकरा सोझे दिल्लीक अधीन कलेल गेल। आव ई अपन कर दिल्लीकेँ देवए लगला। ‘तबाकते नासिरी’मे एहि आक्रमणक वर्णन अछि। विद्यापति सेहो अपन‘पुरूष परीक्षा’मे नरसिंह देवक दिल्ली प्रवासक चर्चा कएने छथि। हिनक पुत्र रामसिंह देवक समयमे सेहो किछु संघर्ष भेल छल। हिनके समयमे दरभंगामे राम चौक नाम मोहल्लाक स्थापना भेल।
अलाउद्दीनक समयमे मिथिला पर पुनः मुसलमानी आक्रमणक चर्च भेटैत अछि। इतिहासमे एकर उल्लेख आनठाम नहि भेटैत अछि मुदा मुल्लाकवयाजमे एकर विस्तृत विवरण अछि। एहि आक्रमणक अंतर्गत मखदून ताज मोहम्मद फकीहक पुत्र शेख मुहम्मद इस्माइलक नेतृत्वमे तीन वेर युद्ध भेल छल। पहिल एवँ दोसर वेर शाही सेना पराजित भऽगेल छलाह आर मिथिलाक जीत भेल छल। प्रथम लड़ाईक स्थान दरभंगामे अखनो “मुकबेश” नामसँ प्रसिद्ध अछि। शेख मुहमद इस्माइल जखन राजा दोसर बेर आक्रमण करबाक विचारकेँलक तखन सेना पठेबाक हेतु बादशाहसँ निवेदनकेँलक। रजीउल मुल्क मलिक महमूदक सेना पतित्वमे शाही फौज मिथिलाक धरती पर उतरल। अहुबेर हुनका अपने सन मुँह लकए पराजित भऽकए घुरे पड़लैन्ह। ई लड़ाई जाहि स्थान पर भेल छल ताहि स्थान पर राजा अपन राजधानी दरभंगासँ उठाकेँ लगेला। शक्रसिंहक नाम पर ओ स्थान सम्प्रतिसकरी नामसँ विख्यात अछि। तेसर वेर पुनः युद्ध भेल जाहिमे मिथिलाक पराजय भेल आ राजा अपन मंत्री सबहिक संग पकड़ल गेला। गिरफ्त भेला उत्तर राजा क्षमा याचनाकेँलन्हि आ आजीवन कर देबाक वचन देलन्हि। एहिशर्त्त पर अलाउद्दीन हुनका राज्य घुरा देलथिन्ह। वादमे शक्तिसिंह (शक्रसिंह) अलाउद्दीन हिन्दू फौजक सेना पति सेहो नियुक्त भेल।
जखन अलाउद्दीनकेँ हम्मीर देवसँ युद्ध भेलन्हि तखन शक्रसिंह अलाउद्दीनक आर्थिक आ सैनिक साहायता देलन्हि। शक्रसिंह स्वयं रणक्षेत्रमे उतरलाह आ एहिसँ अलाउद्दीनकेँ बड्ड बल भेटलन्हि। शक्रसिंह एवँ प्रकारे निथिलाक स्वतंत्रताकेँ सुरक्षित रखबामे समर्थ भेलाह। दरभंगाक ‘सुखी दिग्घी’ अखनो शक्रसिंहक स्मारक स्वरूप अछि।
हरिसिंह देव कर्णाट वंशक अंतिम राजा छलाह आ हरिसिंह पुर सेहो अपन राजधानी बनौने छलाह। गयासुद्दीन तुगलक जखन बंगालक विद्रोहकेँ दबाकेँ घुरलाह तखन ओ तिरहूत पर ध्यान देलन्हि। तिरहूतक राज्य ओ दखलकेँलन्हि। कहल जाइत अछि जे तिरहूतक राजा बंगालक मदतिमे छलाह। हरिसिंह देव अपन मजबूत किला, कठिन रास्ता ओ दुरूह जंगल आदिक बमे पहिने तँ गयासुद्दीनक विरोधकेँलन्हि परञ्च बादमे पराजित भऽए पकड़ल गेलाह। सुल्तान हुनका पकड़िकेँ दिल्ली लगेला आ मिथिलाक शासन भार अहमद खाँक हाथमे देलन्हि। गयासुद्दीनक मुहम्मद तुगलक दिल्लीक शासक भेलाह। राज्याभिषेकक अवसर ओ हरिसिंह देवकेँ मुक्त क देलैन्ह। हरिसिंह देव कर देवाक बचन देलन्हि तखन हुनका राज्य घुरा देल गेलैन्ह आ ओ प्रमुख सेनापतिक पद पर सेहो नियुक्त भेलाह। ई सब भेलाक बाद सुल्तानकेँ बुझबामे एलन्हि जे राजाक मंत्री वीरेश्वर ठाकुरक संग एक विचित्र पाथर छन्हि जकर संसर्गसँ सब प्रकारक धातु सोना भऽजाइत अछि। ई पाथर अलाउद्दीन खलजीकेँ नहि देल गेल छल। सुल्तान आदेश बाहरकेँलन्हि वाजाप्ता एक फरमान द्वारा जो ओहि पाथरकेँ शाही खजानामे जमा क देल जाइक। वीरेश्वर जखन पाथरक बदलामे हीरा उपस्थितकेँलन्हि तखन सुल्तान ओकरा लेबासँ अस्वीकारकेँलन्हि। तकर बाद वीरेश्वर बजलाह जे काशीमे गंगा स्नानकेँलाक उत्तर ओ ओहि पाथरकेँ शाही खजानामे जमा करताह। शाही सरंक्षणमे वीरेश्वरकेँ काशी आनल गेल। काशी एवाक पूर्व ओ राजा हरिसिंह देवसँ सेहो भेंटकेँलन्हि आ काशीमे स्नान करबाक क्रममे ओ पाथरकेँ गंगेमे राखि देलन्हि। शाही संरक्षक एहि प्रसंगकेँ लकए हरिसिंह देवक शिकायत सुल्तान लग कदेलक। एहि पर मिथिला राज्य जप्त भेल आ हरिसिंह देवकेँ कारावासक आदेश भेटल। एहिबातक सूचना राजाकेँ पहनहि भेट गेलन्हि आ ओ तरत पड़ाएकेँ नेपाल चल गेला। बादमे हुनक पता नहि लागल। मिथिलाकेँ तुगलक साम्राज्यमे मिला लेल गेल। सुल्तान तिरहूतकेँ एक अलग प्रांत बना देलैन्ह आ तिरहूतक महत्व बढ़ल आ दरभंगा ओकर राजधानी बनल। तिरहूतकेँ तुगलकपुर सेहो कहल गेल। ओतए एकटा किला आ जामा मस्जिदक स्थापना भेल।
१३४०मे मुहम्मद तुगलक मिथिलाक शासन भार कामेश्वर ठाकुरकेँ देलन्हि। बंगालक शासनक भार सुल्तान शमसुद्दीन हाजी इलियासकेँ देलन्हि। मिथिलासँ कर वसूली करब आ राजा पर निगरानी रखबाक भार सेहो हिनके पर देल गेलैन्ह। कामेश्वर ठाकुर ओइनी गामक रहए वाला छलाह आ ई गाम हुनका पूर्वजकेँ कर्णाट शासकसँ जागीरक रूपमे भेटल छलैन्ह। कामेश्वर ठाकुर राज्य प्राप्तकेँला उत्तर अपनहि गामकेँ राजधानी बनौलन्हि। मुहम्मद तुगलकक जीवैत हाजी इलियास अपन निवास दरभंगामे रखलक परञ्च मुहम्मद तुगलकक मुइलाक बाद ओ अपनाकेँ स्वतंत्र घोषित कए देलक आ कर देव सेहो बंदक देलक। अपन साम्राज्य क्षेत्र विस्तारक योजनाक क्रममे ओ अपन आधिपत्य स्थापित कदेलक। ओ मिथिलाक राजाक संग युद्ध कए मिथिलाक राज्य रहल आ ओकर दक्षिणमे इलियासक राज्य भेल। एवँ प्रकारे नेपाल तराईसँ बेगूसराय धरि ओ अधिकारक स्थापनाकेँलक आ कामेश्वर वंशकेँ ओइनीसँ हँटोलक। मिथिलाक एहि अप्राकृतिक बटवाराक विरोधमे कामेश्वर ठाकुर विद्रोहक देलन्हि मुदा ओहि विद्रोहकेँ शख्तीसँ दवाओल गेल। एहि शख्तीसँ विद्रोह दवेबाक क्रममे बहुतो गाम नष्ट–भ्रष्ट भऽगेल। विद्रोह दबौलाक पश्चात ओ बूढी गण्डकक तट पर अपन राज्यक सुरक्षार्थ एकटा प्रशासनिककेँन्द्र बनौलक जे शमसुद्दीन पुर (समस्तीपुर)क नामे ताहि दिनमे प्रसिद्ध छल। गंगाक तट पर ओ हाजीपुर वसौलक आ ओतए एकटा किलाक निर्माण सेहोकेँलक।
फिरोज तुगलककेँ जखन ई सूचना भेटलैक तँ ओ आगि वव्वुला भऽगेल आ समाचार सुनवहि ओ दिल्लीसँ मिथिलाक हेतु विदा भऽगेल। आवत फिरोज गोरखपुर पहुँचल तावत हाजी इलियास अपन बोरिया–विस्तर बान्हिकेँ पण्डुआ दिसि विदा भऽगेल। ओतहु अपनाकेँ सुरक्षित नहि देखि ओ ओतएसँ एकदला दिसि चलगेल। जखन फिरोज मिथिला पहुँचल तखन कामेश्वर ठाकुर तथा छोट–मोट जमीन्दार लोकनि उपहार लकए सुल्तानक समक्ष उपस्थित भेलाह आ हाजी इलियासक लूट–पाटक शिकायतकेँलन्हि। सुल्तान कामेश्वर ठाकुरकेँ पुरस्कृतकेँलथिन्ह। कामेश्वर ठाकुर हुनक अधीनता स्वीकारकेँलन्हि आ कर देवाक प्रतिज्ञाकेँलन्हि। फिरोज मिथिलाक दुनु भागकेँ मिलाकेँ फेर एक कदेलैन्ह आ ओहिठाम अपन काजी नियुक्तकेँलन्हि। सुल्तान ओहिठामसँ एकदला दिसि विदा भेला। १३५३ फिरोज तुगलक कामेश्वर ठाकुरकेँ छोट बालक भोगीश्वरकेँ राजा बनौलन्हि मुदा मुल्ला तकिया एहि प्रसंगमे चुप्प छ्थि। बरनी सेहो एहि विषयमे किछु नहि कहैत छथि। फिरोज विद्रोही इलियासकेँ दबाकेँ जखन घुरला तखन ओ मिथिलामे अपन हाकिम बहालकेँलन्हि। मुल्ला तकिया कोनो स्पष्ट संकेत एहि सम्बन्धमे नहि दैत छथि। मिथिलामे मुसलमानी शासनक प्रसारक सम्बन्धमे जखन विवरण प्रस्तुत करब तखन सब बातक समीचीन व्याख्या करब। एहिठाम तँ मात्र मुल्ला तकियाक वयाजक आधार पर वस्तुस्थितिकेँ उपस्थिति कैल गेल अछि। फिरोज तुगलक पुनः मिथिलाकेँ दिल्लीक एकटा प्रांत बनालेलन्हि आ एहिठामक राजा पुनः दिल्लीक अधीन भऽगेलाह भऽनेऽ हुनका स्वायत्ता प्राप्त रहल होन्हि से दोसर गप्प। कर वसूल करबाक हेतु फिरोज तुगलक एतए अपन आदमीकेँ नियुक्तकेँलन्हि। भोगीश्वर फिरोजक मित्र छलाह।
दरभंगाक उत्पत्तिः- एहि प्रसंगमे दरभंगाक उत्पत्तिक सम्बन्धमे दूएक बात कहि देव आवश्यक बुझना जाइत अछि। दरभंगा शब्दक उत्पत्ति कहिया आ कोना भेल एहि प्रश्न पर अखनो धरि मत विभिन्नता अछिए। तवारिखुल फितरत(फितरतक इतिहास)क अनुसार दरभंगाकेँ बसायवला गयासुद्दीन तुगलक छलाह। हरिसिंह देवकेँ पराजित कए ओ एहि नगरकेँ बसौलन्हि एहेन बुझल जाइत अछि। हरिसिंह देव पड़ायकेँ जंगल–पहाड़ दिसि चल गेल छलाह। सुल्तान गयासुद्दीन तुगलक अपन आक्रमणक क्रममे हुनका पर कब्जा करबा लेल जंगल कटबा देलन्हि। एहि साफ कैल जंगलक नाम “दारू भंग” राखल गेल। संस्कृतमे “दारू”क अर्थ होइछ लकड़ी आ ‘भंग’क अर्थ भेल काटब, छाटब आ नष्ट करब। चूंकि स्वयं सुल्तान अपना हाथे तरूआरिसँ जंगलकेँ काटिकेँ नष्टकेँने छलाह आ ओहिठाम अपन ओहि स्थानकेँ“दारूभंग” कहल गेल जे क्रमेण दरभंगाक नाम प्रसिद्ध भेल। अखन धरि ई मत सर्वमान्य नहि भेल अछि।
विलियम हण्टर दरभंगी खाँसँ दरभंगाक उत्पत्ति बतबैत छथि। दरभंगी खाँ आईसँ करीब १२५ वर्ष पहिने भेल छलाह आ ओ मुहम्मद रहीम रूहेलाक पौत्र छलाह। हिनक वंशज अखनो दरभंगा बाला सिद्धांत कोनो तरहे मान्य नहि बुझि पड़इयै परञ्च तइयो हम देखैत जे ओमैली सेहो हण्टरेक मतकेँ मानने छथि। दरभंगा ओहिसँ पुरान नगर अछि तैं हण्टर आ ओमैलीक मत अमान्य अछि। सिद्धांत प्रतिपादित कैल गेल अछि जे ‘द्वार–वंग’ अथवा दूर–वंग या दार–ई–वंगलसँ दरभंगा शब्दक निर्माण भेल अछि। दरभंगाकेँ ‘द्वार वंग’क संज्ञा देव उपयुक्त नहि बुझि पड़इयै कारण कोन रूपे एकरा बंगालक द्वार कहल जेतैक? ई बात ठीक जे मध्य युगमे दिल्लीक सेना एहि बाटे बंगाल जाइत छल।
(१६१५–१६४८) मिथिलाक संस्कृत लेखक पण्डित गंगादत्त झा अपन अपन भृंगदूतमे दरभंगा शब्दक उल्लेख कएने छथि–
“तस्याः पाथः परम विमलं सन्निपिया भिरामा–
गारां कामायुध दरभंगा राजधानी मुपेयाः”।
अहुँसँ ई सिद्ध होइछ जे दरभंगीक पूर्वहिसँ दरभंगा नाम प्रचलित अछि। १७७८मे प्रतापसिंह सेहो दरभंगामे अपन राजधानी बनौने छलाह मुदा हुनकासँ १०० वर्ष पूर्वसँ‘दरभंगा’ राजधानीक रूपमे प्रख्यात छल जकर प्रमाण हमरा ‘भृंगदूत’क कविसँ भेटैत अछि। ओहि कविक विवरणसँ इहो ज्ञात होइछ जे दरभंगा (राजधानी) वाग्मती नदीक तट पर स्थापित छल आ ओतए एहेन एहेन सुन्दर भऽवन सब छल जे देखबामे कामदेवक तरू आरि सन लगैत छल। भृंगदूतक आधार ई कहल जा सकइयै जे ‘दरभंगा’ १७म शताब्दीमे एकटा प्रसिद्ध दर्शनीय नगर छल। दरभंगामे ताहिदिनमे मुगल बादशाहक प्रतिनिधि रहैत छलाह आ खण्डवला कुलक राजधानी “भौर”मे छल आ भौर आ दरभंगाक मध्य मधुर सम्बन्ध छल। महाराज माधव सिंहक समयसँ खण्डवला कुलक महाराज लोकनि स्थायी रूपेँ दरभंगामे रहए लगलाह। एक इहो सिद्धांत प्रतिपादित कैल गेल अछि जे ‘दलभंग’सँ दरभंगाक उत्पत्ति भेल अछि–गजरथपुरमे शिवसिंहक पराजय भेला पर ओहि स्थानक नाम ‘दलभंग’ राखल गेलैक कियैक तँ ओहिठाम शिवसिंहक ‘दल’केँ ‘भंग’ कैल गेल छलन्हि। परञ्च अहुमे विशेष तथ्य नहि बुझा पड़ैत अछि।
ओना तँ सब गोटए अपन–अपन तर्क उअपस्थित कएने छथि मुदा कोनो तर्क नेऽ अखन धरि मान्य भेल अछि आ नेऽ ओकरा हेतु कोनो प्रामाणिक साधने उपलब्ध अछि। १७म शताब्दीमे ‘दरभंगा’ नामक प्रचलन ई सिद्ध करैत अछि जे ई नाम बहुत पूर्वहिसँ प्रख्यात रहल होएत। तैं हमर अपन विचार ई अछि जे एहि शब्दक उत्पत्ति गयासुद्दीन तुगलकक समयमे भेल जे ‘दारू’–‘भंग’केँलैन्ह आ ओहि दारूभंगसँ दरभंगा शब्दक विन्यास भेल। ई जखन तुगलक साम्राज्यक एकटा अंग बनल तखन मिथिला तुगलक पुरक नामे प्रसिद्ध भेल आ ओकरे राजधानी भेल ‘दरभंगा’। दरभंगा ताहि दिनमे जंग़ल छल आ तकरा कटबामे सबकेँ डर होइत छलैक तैं गयासुद्दीन अपनहि जखन जंगल काटब शुरूकेँलन्हि तखन आ सबकेँओ मिलिकेँ एहिमे योगदान देलथिन्ह आ जंगल साफ भेलैक आ ओहिठाम तुगलक साम्राज्यक प्रधान कार्यालय बनल। तिरहूतक तुगलक कालीन सिक्का सेहो भेटल अछि।

अध्याय–12
मिथिलाक इतिहासमे मुसलमानी अमल
२९४ सँ ३१६
कर्णाट वंशक समयसँ मिथिलामे मुसलमान लोकनि हुलकी–बुलकी देव शुरू कऽ देने
छल। ७११ ई.जखन सिन्ध पर अरब लोकनिक आक्रमण भेलैक ताहिसँ पूर्वहुसँ अरब
लोकनिक सम्पर्क पश्चिमी आ दक्षिणी भारतसँ छलैक आ ओ लोकनि ओहि क्षेत्रमे
व्यापार करबाक हेतु अवैत छलाह। जखन अरब लोकनि सिन्ध पर आक्रमण केलन्हि
तकर बादहिसँ भारत्क संग राजनैतिक सम्बन्धक शुरूआत मानल जाइत अछि। ७११ सँ १२०० ई.क बीच बहुत रास मुसलमान चिंतक आ संत उत्तर भारतक विभिन्न क्षेत्रमे पसरि गेलाह आ मिथिला क्षेत्र सेहो सूफी लोकनिक एकटा प्रधान केन्द्र छल। ओम्हर पूबमे बंगाल धरि वख्तियार खलजीक समय धरि मुसलमानी प्रकोप बढ़ि चुकल छल आ बिहारोमे गंगा दक्षिण भागमे मगध पर मुसलमान लोकनि अपन आधिपत्य जमा चुकल छलाह। मिथिलेश एकटा भाग बचल छल जाहि पर हिनका लोकनिक नियंत्रण अखन धरि नहि भेल छलन्हि यद्धपि ई लोकनि अहि बातक हेतु सतत प्रयत्नशील रहैत छलाह।
मुल्ला तकियाक वयाजक अनुसार तँ मुसलमान लोकनि बख्तियार खलजीक समयमे मिथिलो पर आक्रमण कएने छलाह यद्धपि एकर कोनो आन प्रमाण ओना नहि भेटैत अछि। गंगाक मार्गसँ जेवा काल किवाँ गंगा कोशीक संगम दिसिसँ भनेऽ ई लोकनि लूट–पाट करैत होथिसँ दोसर कथा मुदा हिनका लोकनिक आधिपत्य तिरहूत पर भेलन्हि छलन्हि। पूबमे मिथिलाकेँ मुसलमानी प्रगतिक पथमे वाधक बुझल जाइत छलैक कारण ताहि दिनमे अहिठाम सशक्त कर्णाट लोकनिक शासन छल आ तैं सब ठामसँ विद्वान लोकनि पड़ायकेँ एतए अबैत छलाह। पश्चिमक मुसलमान लोकनितँ तत्काल मिथिलाकेँ अपना नियंत्रणमे नहि आनि सम्राट परञ्च बंगालक मुसलमान शासक गृद्ध दृष्टि सेहो मिथिलाक स्वतंत्र कर्णाट राज्य पर लगले रहैत छलैक आर तैं जखन कोनो मौका भेटैक तखने वो लोकनि मिथिला दिसि बढ़ि जाइत छलाह। गंगदेवक कर्णाट शासक लोकनिमे ओ शक्ति नहि रहि गेल छलन्हि जाहिसँ ओ लोकनि शक्तिशाली आक्रमणक विरोध करितैथ। १२११ आ १२२९क बीचमे बंगालक विजेता गयासुद्दीन इवाज मिथिलाक राजाक क्षेत्र अपन नाम घुसौलन्हि आ हुनकासँ कर वसूल केनाई प्रारंभ केलन्हि। अहिसँ पूर्व मिथिलाक राजा ककरो सामने नेऽ कर देने छलाह। बंगाल पड़ोसिया होइतहुँ मिथिला पर मुसलमानी आक्रमणक श्रीगणेश केलक।
बंगालसँ तिरहूतमे एबाक हेतु रस्तो सुगम छलैक। कोशी, गण्डक आ गंगाक काते कात तिरहूत होइत बंगाल जाएव–आएव सुगम छल आ तैं ताहि दिन पश्चिम आ पूबक आक्रमण कारी लोकनि अहि मार्गक प्रश्रय लेने छलाह। बीचमे पड़ैत छल तिरहूतक राज्य जे समयानुसार ‘वेतसिवृति’क पालन करैत अपन स्वतंत्रताक सुरक्षाक हेतु यथासाध्य परिश्रम करैत छल। कानूनगोय महोदयकेँ ई बात बुझबामे नहि अवैत छन्हि जे जखन मिथिला आ कामरूपक स्वतंत्र राज्यकेँ वख्तियार नहि जीत सकल तखन ओ तिब्बत दिसि बढ़बाक प्रयास कियैक केलक? वख्तियार खलजीक मूल उद्धेश्य छल प्रांत सबकेँ लूटब आ धन जमा करब तैं कोन प्रांत स्वतंत्र रहल अथवा गुलाम भेल तकर चिंता हुनका नहि छलन्हि। आखोमात्र अपन मात्र स्वार्थ आ महत्वा काँक्षाक पूर्त्तिक हेतु सब काज करैत छ्लाह। पश्चिमसँ एक्के वेर बंगाल धरि मुसलमानी राज्यक प्रसारक देव ताहि दिनमे कि कोनो कम उपलब्धिक बात भेलैक? बंगाल विजयक क्रममे नदीक मार्गक अवलंबनमे मिथिला दक्षिण पूर्वी सीमा देने जँ ओ गुजरल होथितँ कोनो आश्चर्यक गप्प नहि सेनवंशक संग बरोबरि खटपल रहलसँ मिथिलाक ई अंश विशेष काल अरक्षित रहैत छल आ तैं यदि अहि बाटे बंगाल जेबाक क्रममे मुसलमान लोकनि अपन प्रभाव क्षेत्र एकर बिना लेने होथि तँ सँ संभव। परञ्च एतए स्मरण रखबाक अछि जे गयासुद्दीन इवाजक पूर्व धरि कोनो मुसलमान शासक मिथिलाक राजासँ कर नहि वसूल केने छलाह। तैं वख्तियारक पुत्र इख्तियारोक तिरहूत पर आक्रमण लूट–पाटे जकाँ छल कारण ओहिसँ तिरहूत राज्यक अक्षुण्णता एवं अखण्डता पर कोनो आँच आक्रमण विश्वविद्यालयकेँ उहै नष्ट केलक आ अपन बहादुरीक प्रदर्शन कुतुबुद्दीन ऐबकक दरबारमे दिल्लीमे जाके केलक।
बंग कामरूप आ तिरहूतक शासकसँ ऐतिहासिक तौर कर मूलकेँ निहार व्यक्ति छलाह गयासुद्दीन इवाज। कानूनगोएक मत जे तिरहूतक सम्बन्धमे छन्हि जे पूर्णतया भ्रामक मानल जाइत अछि आ ओकर कोनो ऐतिहासिक प्रमाण नहि भेटइयै। अरिमल्लदेव नामक कोनो राजा मिथिलामे नहि भेल अछि आ ओहिकालमे नरसिंह देव अहिठामक शासक छलाह। अहि शंकाक समाधानक हेतु हम प्रोफेसर, कानूनगोएकेँ लिखने छलियन्हि आ हुनके आदेशानुसार डॉ. रमेश मजूमदारकेँ सेहो। श्री मजूमदार महोदय ई लिखलैन्ह जे कर्णाटवंशमे अरिमल्लदेवक नामक कोनो शासक नहि भेल छथि जकर राज्य मिथिलाक पूर्वी भाग ताहि दिनमे लखनावतीक अधिकार भऽ गेल छलैक। कोन आधार पर कानूनगोए महोदय अहि निर्णय पर पहुँचल छथि तकर प्रमाण ओ नहि देने छथि आ अहिकालमे मिथिलाक राज्य तुकड़ा–तुकड़ामे बटबाक प्रमाण हमरा लोकनिकेँ नहि भेटल अछि। यदि ओ सिलवाँ लेवीसँ प्रेरित भए अपन निर्णय बनौने छथि तखन आव एतवे कहि देव उचित जे अत्याधुनिक शोधक आधार लेवी महोदयक मत मान्य नहि अछि।
नरसिंह देवक शासन कालसँ मुसलमानी प्रकोप मिथिलामे बढ़ल सेटा मान्य अछि आ मैथिल परम्परामे सेहो अहिबातकेँ स्वीकार कैल गेल अछि आ विद्यापतिक पुरूष परीक्षा एकर साक्षी अछि। नरसिंह देव पहिल व्यक्ति छलाह जे कर देलन्हि आ दिल्ली आ बंगाल दुनु ठामसँ सम्बन्ध बनौलन्हि। ई सब होइतहुँ ओ अपन स्वतंत्रताकेँ सुरक्षित रखबामे सफल भेला। बछवाड़ाक समीप ब्रह्मपुरा गाममे एकटा मस्जिद अखनहु वर्त्तमान अछि जकरा इल्तुतमिशक प्रचुर मात्रामे दान देने छ्लैक। अहिसँ बुझि पड़इयै जे मिथिलाक अहि क्षेत्र पर इल्तुतमिशक प्रभाव रहल हेतैक आ तखने नेऽ ओ दान हेतैक। इल्तुतमिशक समयमे तुगान खाँ बिहारक राज्यपाल छलाह मुदा ताहि दिनक विहारमे मिथिला सम्मिलित नहि छल। मिथिला बिहारसँ फुटे एक स्वतंत्र राज्य छल जकरा जीतबाक लेल बंगाल आ दिल्ली दुनु समान रूपसँ प्रयत्नशील छलाह। तुगान खाँ अपनाके बंगाल आ बिहारक शासक बनालेलक आ रजिया बेगमसँ ओकर मंजूरी लऽ लेलक। अहि स्थितिकेँ देखि नरसिंह देव पुनः अपनाकेँ स्वतंत्र घोषित कलेलन्हि आ कर देव बन्द कदेलन्हि। मुदा थोड़बे दिनक बाद ओ गिरफ्त भगेला आ दिल्ली लजाएल गेलाह। चंगेज खाँक विरूद्ध अपन बहादुरी देखा ओ पुनः मिथिलाक स्वतंत्रता प्राप्त केलन्हि आ अहि आदेशसँ घुरला जे ओ सोझे दिल्लीकेँ कर देल करौथ।
रामसिंह देवक समयमे मुसलमानी आक्रमणक प्रकोप बढ़ि गेल छी। तुगान खाँक तिरहूत आक्रमण उल्लेख मुसलमानी श्रोतमे भेटैत अछि परञ्च ओहिमे राजाक नाम नहि अछि। कालक हिसाबे तखन रामसिंह देव मिथिला पर शासन करैत छलाह। तुगानक आक्रमणसँ मिथिलाक स्वतंत्रताकेँ धक्का अवश्य पहुँचले परञ्च स्वतंत्रता सुरक्षित रहलै। तुगान प्रचुर मात्रा धन–विन प्राप्त केलक। तिब्बती यात्री धर्मस्वामी जे रामसिंहक शासनकालमे एतए आएल छलाहसँ अपना आँखि सब किछु देखलन्हि आ लिखैत छथि जे मुसलमानी प्रकोपसँ वैशालीक निवासी हड़कम्पित छलाह आ मुसलमानी सेनाक आवागमनसँ जे धुरा उड़ैत छल ताहिसँ सौसे मेघ अन्हार भजाइत छल। तुरूक आक्रमणक संख्या दिन प्रतिदिन बढ़िते जाइत छलैक आ तिरहूतक राजा रामसिंह देव मुसलमानी प्रकोपसँ बढ़िया किलाबंदी करौने छलाह। किछु संस्कृतक पाण्डुलिपिक पुष्पिकासँ सेहो ई ज्ञात होइछ जे रामसिंहकेँ मुसलमान सबसँ संघर्ष करए पड़ल छलन्हि। चारूकातसँ मुसलमानक प्रकोप रहितहुँ रामसिंह अपन पूर्वजक जकाँ मिथिलाक स्वतंत्रताकेँ सुरक्षित रखबामे समर्थ भेलाह आ एहि हेतु हिनक शासन काल मानल गेल अछि।
शक्तिसिंहक समयमे मिथिला पर अलाउद्दीनक आक्रमणक विवरण मुल्ला तकियाकवयाजमे भेटैत अछि परञ्च कोनो आन साधनसँ एकर संपुष्टि नहि होइत छैक। अलाउद्दीनकेँ हम्मीरक विरूद्ध ई सहायता देने छलथिन्ह आ हिनका हम्बीरध्वांत भानुः कहल गेल छन्हि। हिनका संग देवादित्य ठाकुर आ देवादित्यक पुत्र वीरेश्वर सेहो गेल छलथिन्ह। चण्डेश्वरक कृत्यचिंतमणिमे एकर उल्लेख अछि। फरिश्ताक विवरणमे अछि जे अलाउद्दीन समस्त बिहारकेँ जीत लेने छलाह मुदा तहिया मिथिला बिहारसँ भिन्न छल आ बिहार कहलासँ मिथिलाक बोध नहि होइत छल। अलाउद्दीन मिथिलाक व्यक्तित्व आ वैभवकेँ देखि ओकरा मित्र बनौने होथिसँ संभव कारण ओहि मित्रतासँ हुनका कैकटा लाभ छलन्हि। सर्वप्रथम लाभतँ ई भेलैन्ह जे ओ मैथिल शासककेँ अपना पक्षमे कए हम्वीरक विरोधमे ठाढ़ केलन्हि आ देवादित्यकेँ ‘मंत्री रत्नाकर’ पदवीसँ विभूषित केलन्हि। अहि सबसँ बुझि पड़इयै जे ओ बिना युद्ध केनहि मिथिलाकेँ अपना मैत्री भावसँ मिला लेने होयताह आ ओहिठाम अपन प्रभाव क्षेत्र बढ़ौने होयताह। मिथिलामे प्रभाव क्षेत्र बढ़ाएब आवश्यक छल कियैकतँ ओम्हर बंगाल दिसि मुसलमान लोकनि मिथिला पूर्वी दक्षिणी क्षेत्रमे घुसि रहल छलाह।
अहि प्रसंगक विवरणक पूर्व बलबनक संक्षिप्त उल्लेख आवश्यक अछि। कहल जाइत अछि जे अपन बंगाल अभियानक क्रममे बलबन इकालिम–इ–लखनौती तथाअरशाह–इ–बंगालकेँ दबाकेँ अपना अधीनमे केने छलाह आ मुसलमानी बंगालक राज्यपालक रूपमे ओ अपन पुत्र बुगरा खाँकेँ ओतए नियुक्त केलन्हि। बुगरा खाँकेँ ओ कहलन्हि जे अहाँ “दियार–इ–बंगाल”केँ जीतवाक प्रयास करू। किछु गोटएक मत छन्हि जे सोनार गाँवक दशरथ दनुजराय (वंग)क राज्य ‘दिआर–इ–बंगाल’मे छलन्हि। अहिदिआर–इ–बंगालकेँ किछु तिरहूत जिलाक दरभंगा बुझैत छथि जे हमरा बुझबे अप्राँसगिक बुझि पड़इयै कारण अहिठाम दशरथ–दनुअरायक राज्य छल ने कि कर्णाट वंशक। बंगालक द्वारजँ एकरा बुझल जाइकतँ ई क्षेत्र कतहु बंगालक समीप रहल होइत कारण बलबनक समयमे मिथिलामे कर्णाट वंशक राज्य छल आ ओ तीर भुक्तिक नामे प्रसिद्ध छल आ ‘दिआर–इ–बंगाल’क नाम ताधरि प्रचलित नहि भेल छलैक। बलबनक समयमे बिहारकेँ बंगालसँ अलग कैल गेल छलैकसँ बात ठीक मुदा तखन मिथिला बिहारसँ फराकेँ एकटा स्वतंत्र राज्य छल।
१९५५मे महेशवारा (बेगूसराय)सँ फिरूजएतिगिन (१२९०–९२)क एकटा सुप्रसिद्ध एवं अद्वितीय शिलालेख उपलब्ध भेल अछि जकरा हम पूजासँ प्रकाशित करौने छी। फिरोज एतिगीन बंगालक रूकनुद्दीन कैकश द्वारा नियुक्त एक प्रशासक छलाह जे अपनाकेँ ओहि अभिलेख द्वितीय सिकन्दर आ खानक खान। एहि प्रशासकक नामक एक गोट आ अभिलेख लक्खीसराय (मूंगेर)सँ सेहो प्राप्त भेल अछि। रूकनुद्दीन कैकस बलबनक वंशक छल आर मिथिला क्षेत्रमे ओकर अधिकारक प्रसार अहिबात संकेत दैत अछि जे शक्तिसिंह आ हरिसिंह देवक समय बंगालक शासक दक्षिणसँ गंगा पार कए गण्दक धरि बढ़ि चुकल छलाह आ कर्णाट शासककेँ ओहि क्षेत्रसँ धकिया चुकल छलाह। कर्णाट शासक लोकनि बंगालक दबाबसँ तबाह भऽ रहल छलाह। मुल्ला तकिआ अहिबातक उल्लेख नहि कएने छथि मुदा अभिलेख जखन साक्षाते मौजूद अछि तखन दोसर साधनक अपेक्षे कोन? गण्डक क्षेत्रसँ अहि शिलालेखक प्राप्ति अहि बातकेँ स्पष्ट कदैत अछि जे ओहिकाल धरि अवैत–अवैत कर्णाट लोकनिक शक्ति दक्षिणमे क्षीण भऽ चुकल छलन्हि। अहि क्षेत्रमे गंगाक दुनु कात बंगालक सीमा धरि दियारा सब अछि–अहि दियारा सबकेँ संकेत “दियार–इ–बंगाल”सँ होइत होसँ संभव कारण गंगाक दुनु काते बंगाल जेबा–एबाक रास्ता छल। अहि अभिलेखसँ कर्णाट राज्यक वास्तविक विस्तारक सम्बन्धमे प्रश्न उठब–स्वाभाविक बुझि पड़इत अछि। बलबनक बाद बलबनी शाखा बंगालमे स्वतंत्र शासन करए लागल छ्ल आ एतए धरि अपन राज्यक सीमा बढ़ा लेने छल। एकर बाद छिट–पुट ढ़ंगसँ मुसलमान लोकनि एम्हर–ओम्हरसँ हुलकी–बुलकी दैत रहलाह आ लूट–पाट करैत रहलाह। चारूकात मुसलमानी प्रभावक वावजूदो जे मिथिलाक कर्णाट लोकनि अखन धरि अपन स्वतंत्रता सुरक्षित रखने छलाह, ई कोनो कम गौरवक विषय नहि। लखनौती जेबाक बाटमे मिथिला पड़ैत छल आ तैं अहि पर एबा–जेबा कालमे सब केओ अपन किछु ने किछु बनालैत छलाह। संगठित रूपेँ मिथिला पर सुनियोजित आक्रमण केनिहार व्यक्ति छलाह गयासुद्दीन खलजी। सुगति सोपानसँ ज्ञात होइछ मिथिलाक राजनैतिक स्थिति दयनीय भगेल छल। दान रत्नाकरक एक श्लोकमे कहल गेल अछि जे मिथिला म्लेच्छ रूपी समुद्रमे डुबि गेल छल (मग्नाम्लेच्छमहार्णवे. . .)। कहबाक तात्पर्य ई भेल जे हरिसिंह देवक समय तक अवैत मुसलमानी आक्रमणक प्रकोप मिथिला पर बढ़ि गेल छल आ हरिसिंह देव अखन धरि ककरो समक्ष झुकल नहि छलाह जेना ज्योतिरीश्वरक विवरण सँ स्पष्ट होइछ। अपितु हमरा बुझना जाइत अछि जे वो कोनो सुरतानकेँ पराजित सेहो केने छलाह–आव ई सुरतानकेँ छलाहसँ कहब कठिन? नामक अभाव किछु निश्चित नहि कहल जा सकइयै। नाबालिक होएबाक कारणे हरिसिंह देवकेँ बहुत दिन धरि अपना मंत्री सबक अधीनमे रहए पड़ल छलन्हि।
१३२३–२४मे मिथिला पर गयासुद्दीन तुगलकक आक्रमण भेल। मिथिला पर आक्रमणक पूर्व ओ बंगाल पर आक्रमण कएने छलाह मुदा कानूनगोए महोदय कहैत छथि जे ओ पहिने तिरहूत आ तब बंगाल पर आक्रमण केलन्हि। मुदा से मत मान्य नहि अछि। गयासुद्दीनक आक्रमणक विवरण सब मुसलमानी श्रोतमे भेटैत अछि, मुल्ला तकिआमे सेहो आ अहि घटनाक एकटा चश्मदीद गवाह सेहो छथि जनिक पोथी वशातिनुलउन्स अखनो उपलब्ध अछि आ जकर फोटो कॉपी पटनाक काशी प्रसाद जायसवाल शोध संस्थानमे अखनो राखल अछि। ओहि पाण्डुलिपिक बारहम पात पर मिथिलाक राजाक सम्बन्धमे कहल गेल अछि जे ककरो कोनो बात नहि सुनलन्हि, तर्क आ बुद्धिसँ काजनहि लेलन्हि आ अनेरो पहाड़ दिसि पड़ा गेलाह–आगि जकाँ पाथरक पाछु नुका गेला मुदा तइयो चकमक करिते रहलाह। इशामीक अनुसार गयासुद्दीन तिरहूत पर आक्रमण केलन्हि आ ओहिठामक राजा एत्तेक भयभीत भगेला जे बिना कोनो प्रकारक विरोध केने भागि गेला। हिन्दू लोकनि सेहो जंगलमे नुका रहलाह। सुल्तान जखन अपनहि हाथसँ जंगल काटब शुरू केलन्हि तखन सैनिक सेहो ओहिमे जुटिगेला आ तीन दिनमे सम्पूर्ण जंगल साफ भगेल। तकर बाद राजाक किला पर चढ़ाई भेल जे सातटा पैघ–पैघ पानि भरल खाधिसँ घेरल छल। किला पर विजय प्राप्त कए राजा धन सम्पत्ति सबटा लूटलन्हि आ विरौधीक हत्या केलन्हि। अहमदकेँ अहिठामक शासक नियुक्त कए ओ ओतएसँ वापस गेलाह। फरिश्ता आ मुल्ला तकिआमे हरिसिंह देवक गिरफ्तारक गप्प झूठ अछि कारणवशातिनुल–उंसक विवरणसँ ई बात कटि जाइत अछि। वशातिनुलउंस (लेखक–इखतिस्सान)क अनुसार–तिरहूतक राजाकेँ प्रचुर सामग्री उपलब्ध छलन्हि, जन–धनक कोनो अभाव नहि छलन्हि, मजबूत किला छलन्हि, नीक व्यक्तित्व छलन्हि मुदा ओ घमण्डे चूर रहैत छलाह आ विद्रोहक भावनाक्ल नेतृत्व सेहो करैत छलाह। राजद्रोह हुनकामे कूटि–कूटिकेँ भरल छल। अहिसँ पूर्वक शासकक प्रति कहियो ओ अपन माथ नहि झुकौने छलाह, नेऽ ककरो मातहदी गछने छलाह आ नेऽ कहिओ पराजित भेल छलाह। सुल्तानक आगमनक सूचनासँ ओ भयभीत भगेला आ संगहि चिंतित सेहो। ओ किकंर्तव्यविमूढ़ भए बैसि गेला। एतेक चिंतातुर आ अपाहिज जकाँ ओ भगेला जे सब किछु रहितहुँ ओ सुल्तानक विरोध करबाक वजाय किला छोड़ि भगवाक घोषणा करैत ओ सबसँ तेज घोड़ा पर चढ़िकेँ भागि गेलाह। भोरमे जे अपनाकेँ सम्राट बुझैत छलाह तिनके स्थिति साँझमे भिखारि जकाँ भऽ गेलैन। ओ ओतए पहाड़ दिसि भगलाह आ अपना पाथरक पाछु नुका लेलन्हि। सुल्तान ओहिठाम बहुत दिन धरि रूकला आ प्रशासनिक व्यवस्था केलन्हि। जे केओ सुल्तानक आज्ञा मानलन्हि हुनका क्षमादान भेटलन्हि आ बाँकीकेँ सजा। सब किछु ठीक ठाक केलाक बाद ओ ओहिठामसँ दिल्ली दिसि विदा भेला। तिरहूत तुगलक साम्राज्यक एकटा अंग बनि गेल आ ओकरा तुगलकपुर सेहो कहल जाइत छल। एवँ प्रकारे कर्णाट कालक गौरव पूर्ण शासनक अंत भेल आ शुद्ध रूपे मिथिलामे मुसलमानी अमल शुरू भेल। एतवा दिन मुसलमान एम्हर–आम्हरसँ हस्तक्षेप करैत छलाह मुदा आव मिथिला दिल्ली सल्तनतक एकटा प्रांत बनि गेल आ एकर स्वतंत्र सत्ता समाप्त भऽ गेलैक जकरा पुनर्स्थापित करबाक प्रयास बादमे शिवसिंह आ भैरव सिंह केलन्हि।
कर्णाट वंशक पराभव भेला पर मिथिलामे ओइनवार वंशक स्थापना भेल आ ई राजवंश तुगलक साम्राज्यक करद राज्य छल। ओना आंतरिक मामलामे जे स्वायतत्ता प्राप्त रहल हौक सँ दोसर बात मुदा वास्तविकता आव इएह जे कर्णाट कालीन स्वतंत्रता लुप्त भऽ चुकल छल आ मुसलमानी प्रभाव मिथिलामे काफी बढ़ि गेल छल। खास ककए तुगलक लोकनिक सम्बन्ध ओइनवार शासकक संग बरोबरि बनल रहलैन्ह आ जखन तुगलक वंशक ह्रास भेल तखन आन–आन शक्ति सब सेहो मिथिलाकेँ धमकावे लागल। बंगाल, जौनपुर, अवध आ दिल्ली सबहिक मुसलमान शासकक नजरि मिथिला पर बनल रहैन्ह आ जखन जे मौका पावैथि सैह हाथ मारि लैत छलाह। कोनो तरहे मिथिलाकेँ चैन नहि छलैक आ बेचारे शिवसिंह आ भैरवसिंहक सत्प्रयासक बादो मिथिला स्थायीरूपेण राजनीतिक क्षेत्र कर्णाटकालीन मर्यादा नहि प्राप्त कऽ सकल। ई तँ धन्य विद्यापति जे अहिवंशक गौरव गाथाक यशोगान कए एकरा अमरत्व प्रदान करेबामे समर्थ भेलाह। गयासुद्दीन तुगलकक समयमे तिरहूतकेँ बंगालसँ फूट करा कए एकटा अलग प्रांत बनाओल गेल छल आ दरभंगामे ओकर राजधानी छल।
ताहि दिनसँ दरभंगा मुसलमानी शक्तिक प्रसारक जे एकटा केन्द्र बनलसँ बनले रहल जा धरि कि ओहि पर अंग्रेजक कब्जा नहि भऽ गेलैक। ओइनवार वंशकेँ तुगलक लोकनिक हाथे राज्य भेटल छलन्हि तैं ओ लोकनि ओहिवंशक उपकृत छलाह। मोहम्मद तुगलकक समयमे एकर आ प्रसार भेलैक आ तिरहूत पर तुगलक शक्तिक विस्तार सेहो मुदा महत्वाकाँक्षी लोकनिक तँ कतहुँ अभाव नहि अछि आ इएह कारण छल जे बंगाल शमसुद्दीन हाजी इलियास रक्षकक स्थान पर भक्षकक काज केलन्हि आ तिरहूत आ नेपाल पर आक्रमण कए देलन्हि। तुगलक साम्राज्यमे मोहम्मद तुगलकक पगलपनीक चलते जे अव्यवस्था उत्पन्न भऽ गेल छलैक ताहिसँ प्रोत्साहित भए गोरखपुर, ब्रह्मचर्य, चम्पारण, तिरहूत आदिक राजा ढ़ीट भगेल छलाह आ शमसुद्दीन इलियास अपन महत्वाकाँक्षाक पूर्त्ति करबाक हेतु हिनका लोकनिकेँ सजा देवाक ढ़ोंग रचलक। हिन्दू राजा लोकनि आपसमे बटल छलाह जकर परिणाम ई भेल जे ई लोकनि सम्मिलित भए ओकर मुकाविला नहि कऽ सकलाह आ हाजी इलियास अपन विजयक डंका बजबैत हाजीपुर धरि पहुँचि गेल। गोरखपुर धरि ओकर प्रभाव बढ़लैक आ मिथिलामे ओइनवार राजाक अधिकारकेँ ओ सीमित ककए बूढ़ी गण्डकक उत्तरी भागमे राखि देलक आ दक्षिणक समस्त भाग पर अपन आधिपत्य स्थापित केलक। समस्तीपुर सँ बेगूसराय धरि आ ओम्हर हाजीपुर धरि इलियासक आधिपत्य बढ़लैक आ समस्तीपुर सँ बेगूसराय धरि आ ओम्हर हाजीपुर धरि इलियासक संस्तापको इएह मानल जाइत अछि। हाजीपुरक सामरिक महत्व ताहि दिन सँ बनले रहल आर मुसलमान कालमे एकर महत्व छल। बंगालोक प्रतिनिधि अहिठाम रहैत छलाह।
जखन फिरोजतुगलक गद्दी पर बैसलाह तखन इलियासक ढ़ीटपनी दिसि हुनक ध्यान आकृष्ट भेलन्हि आ तैं तुगलक साम्राज्यक निर्धारित सीमा पर अपन सत्ता स्थापित करबाक हेतु ओ अग्रसर भेलाह। एम्हर जे हिन्दू राजा सब इलियास सँ पराजित भेल छलाह सेहो सब इलियास सँ खिसियैले छलाह आ तैं ओ लोकनि हषोत्फ्फुल भेलाह। फिरोज तुगलकक स्वागतमे ठाढ़ भेला गोरखपुर, कारूष, चम्पारण आ तिरहूतक शासन लोकनि। अहि सब पर अपन सत्ता स्थापित कए फिरोज सरयु नदीसँ कोशी नदीक क्षेत्र धरिक इलाका पर अपन प्रशासनिक व्यवस्था ठीक केलन्हि आ ओकरा अपन अधीनमे पुनः आलन्हि। फिरोजक प्रगतिक सूचना सुनितहि इलियास तिरहूतसँ भागल आ फिरोज हुनका पाँछा गेला। इलियास पहिने पण्डुआ पहुँचल आ तकर बाद एकदला। फिरोज तुगलक तिरहूत बाटे बंगाल दिसि गेलाह आ झंझारपुर अनुमण्डलमे सम्प्रति एकटा पिरूजगढ़ अछि जे फिरोज द्वारा स्थापित कहल जाइत अछि। ओहिठामसँ ओ राजविराज लग कोशी पार करैत बंगाल पहुँचलाह आ इलियासकेँ हरौलन्हि। ओहिठामसँ घुरला पर मिथिलाक सहयोगक प्रतिदान स्वरूप ओ भोगीश्वरकेँ अपन प्रियसखा कहैत मिथिलाक राजा बनौलन्हि। कहल जाइत अछि जे तिरहूतक दुनु भागकेँ मिलाकेँ ओ एक केलन्हि आ समस्त राजक भार ओइनवार लोकनिकेँ देलन्हि। मुदा किछु गोटएक मत छन्हि जे ई काजक श्रेय शिवसिंहकेँ छलन्हि। दिल्ली घुरबासँ पूर्व फिरोज मिथिलाक हेतु अपन कलक्टर आ काजी बहाल केलन्हि। हाजी इलियासकेँ मिथिलासँ भगाकेँ ओहि पर ओ पुनः अपन आधिपत्य स्थापित केलन्हि आ ओइनवार वंशकेँ करद राज्यक रूपमे रहए देलन्हि। ई लोकनि वार्षिक कर तुगलककेँ दैत रहलाह। इलियास अपना अमलमे तिरहूतमे बहुत रास किला बनबौने छल मुदा ओकरा गेला पर ओहि सब किलाकेँ हिन्दू लोकनि तोड़ देलन्हि।
फिरोज तुगलकक दिल्ली चल जेबाक बाद ओइनवार वंशमे आंतरिक संघर्ष प्रारंभ भेलैक आ एम्हर तुगलक लोकनिक हत्यासँ मिथिलामे एक नवस्थिति उत्पन्न भेल जकर चर्च हम पूर्वहि कऽ चुकल छी। बिहारमे मालिक वीर अफगान तुगलक लोकनिक प्रतिनिधि छलाह मुदा तिरहूत पर हुनक कोनो अधिकार छलन्हि अथवा नहि से कहब कठिन कारण तिरहूत तखन बिहार सँ अलग राज्य छल। कीर्तिसिंह आ वीर सिंहक जौनपुर यात्राक उल्लेख पूर्वहि भऽ चुकल अछि आ ई लोकनिक जौनपुरक इब्राहिम शर्कीसँ मदति लेबाक हेतु विद्यापतिक संगे ओतए गेल छलाह। फिरोज तुगलकक पोता सुल्तान महमूद बिहार आ तिरहूतक राज्य अपन वजीर ख्वात्रा जहाँ (जकरा मालिक–उस–शके) सेहो कहल जाइत छैक)केँ देने छलाह आ ओ जखन देखलन्हि जे दिल्लीक गद्दी लड़खड़ा रहल अछि तखन ओ अपन स्वतंत्रता घोषित कऽ लेलन्हि। ओ अपन पद्वी सुल्तान–उस–शर्क रखलन्हि आ अपनाकेँ जौनपुरक शासक घोषित केलन्हि। आ अवध, बिहार, तिरहूत तथा गंगाक दो आव धरि ओ अपन आधिपत्य कायम रखलन्हि। एतवा धरि निश्चित अछि जौनपुरक आक्रमण मिथिला पर भेल छलैक मुदा ओ कीर्ति सिंह–वीर सिंहक हेतु अथवा बंगालमे मुसलमानी सत्ताक पुनर्स्थापितक क्रममे से कहब कठिन। मुल्ला तकिआ विवरणमे इब्राहिम शाह शर्कीक शिलालेख उल्लेख अछि जाहिसँ तथ्यक पुष्टि होइछ मुदा तत्कालीन घटना क्रमक सम्बन्ध ततेक रास नेऽ बात सब मिभझर भेल अछि जे ओहिमे सँ कोनो वास्तविक तथ्यकेँ बाहर करब कठिन गप्प। अहि हेतु अखन आरो प्रयास करए पड़त आ तखनहि हमरा लोकनि ओहि औझरैल जालसँ बाहर हैब। १४६० धरि मिथिला जौनपुरी राज्यक मातहदी राज्य छल तकर कोनो प्रमाण हमरा लोकनिकेँ नहि भेटैत अछि। मुसलमानी साधन सेहो एत्तेक स्पष्ट नहि अछि जाहि आधार किछु ठोसबात कहल जा सकइए।
जखन तुगलक साम्राज्यक पतनक बाद चारूकात अस्थायित्व छल आ कोनो निस्तुकी राजाक शासन जमि नहि रहल छल तखनहि मिथिलामे शिवसिंहक उदय भेलैन्ह आ ओ मिथिलाकेँ मुसलमानी नियंत्रणसँ मुक्त कए अपन सोनाक सिक्का बाहर केलन्हि। बंगाल, जौनपुर, दिल्ली आ आन–आन, छोट–छोट राज्य जखन सब अपन डफली बजा रहल छलाह तखन शिवसिंहे कियैक चुप्प वैसितैथ? शिवसिंहक संघर्ष जौनपुरक शर्की राजाक संग भेल छलन्हि। ओना तँ अहि युद्धक पूर्ण विवरण नहि ज्ञात अछि मुदा कीर्तिपताकाक विवरणसँ एहि युद्धक संकेत भेट सकइयै। हुनका द्वारा घोषित मिथिलाक स्वतंत्रताक सुरक्षार्थ अपन जानक बाजी लगौलन्हि। शिवसिंह लड़ैत –लड़ैत मारल गेला अथवा कतहु पड़ा गेला–सेकहब कठिन। शिवसिंहक बादसँ मिथिला पर आधिपत्यक हेतु दिल्ली, जौनपुर आ बंगालक बीच घीचांतीरी होइत रहल। शिवसिंहक पछाति कालक्रमेण इलियास वाला बटबाराकेँ बंगालक शासन पुनः जीऔलक आ ओहिक्षेत्र पर पुनः अपन स्तित्व कायम केलक। भैरवसिंहक समयमे ओहिक्षेत्र पर बंगालक प्रतिनिधिरहैत छल से वर्धमानक दण्डविवेक ग्रंथसँ ज्ञात होइछ–
_ “गौड़ेश्वर प्रतिसरीरमति प्रतापः।
केदार रायमवगच्छति दारतुल्यम्”॥_
ई केदार राय बंगाल सुल्तानक प्रतिनिधि छलाह। ई हाजीपुरमे अपन मुख्यालय रखने छलाह। भैरव सिंह हिनका पराजित कए पंचगोड़ेश्वरक पद्वीसँ विभूषित भेल छलाह आ मिथिलाक दुनु भागकेँ एक वेर पुनः जोड़िकेँ एक केने छलाह आ संगहि अपनाकेँ स्वतंत्र सेहो घोषित केने छलाह। तकर बाद लोदी वंशक प्रभाव मिथिला पर बढ़लैक आ सिकन्दर लोदी मिथिलाक राजाक परम मित्र छलाह जकर उल्लेख हम पूर्वहि कऽ चुकल छी। सिकन्दर जौनपुरकेँ हराकेँ अपन राज्यक विस्तार पटना, तिरहूत आ सारन चम्पारण धरि केने छलाह। वाकिआत–ई–मुस्तकीसँ ज्ञात होइछ जे ताहि दिनमे चम्पारणमे मियाँ हुसैन फारमुली जागीरदार छलाह। आधिपत्यक हेतु लोदी आ बंगालक शासकक बीच संघर्ष होइत रहल आ मिथिला पेड़ाइत रहल। लोदीक समयसँ मिथिला पर मुसलमानक प्रभाव एकदम प्रत्यक्ष होमए लगलैक। बेगूसरायमे एकटा लोदीडीह अखनो अछि आ तुगलकसँ लकए शाह आलम धरिक सिक्का ओतएसँ प्राप्त भेल अछि। दिल्ली आ बंगाल दुनु मिथिला पर अधिकार प्राप्त करबा लेल संघर्ष शील रहैत छलाह। भगिरथपुर अभिलेख अहिबातक साक्षी अछि जे मिथिला पर चारूकात सँ मुसलमानी प्रकोप खूब जोड़–शोर सँ बढ़ि गेल छल।
१५२६मे पानीपतक पहिल लड़ाईमे इब्राहिम लोदी परास्त भेला। बाबरक लेख इत्यादिमे तिरहूतक राजा रूपनारायणक उल्लेख भेटइयै। तिरहूत बाबरकेँ कर दैत छल। बाबर सँ पूर्वहुँ तिरहूतमे अपन आधिपत्य कायम रखबाक हेतु मुसलमान लोकनि किछु उठा(उठौ)नहि रखलन्हि। बंगालक राजा नसरत शाह तिरहूतक राजाकेँ परास्त केलक आ नसरत शाहक एकटा अभिलेख बेगूसरायक मटिहानी गामसँ प्राप्त भेल छैक। नसरत अलाउद्दीनकेँ तिरहूतक गवर्नरक रूपमे नियुक्त केलक। नसरतक अवसान भेला पर मकदूम शाह विद्रोह केलक आ सासारामक अफगान नेता शेरशाहक संग मित्रता सेहो। शेरशाह चम्पारणसँ चटगाँव धरि जीतबाक प्रयास केने छल। हुमायुँक भारक प्रभाव नरहनमे छलैक जेकि महेश ठाकुर सर्वदेश वृतांत संग्रहसँ बुझना जाइत अछि। हाजीपुर पर शेरशाहक प्रभाव छलैक। १५४६मे हुमायुँ मिरजा हिन्दालकेँ हाजीपुर पर कब्जा करबाक आदेश देलकै। १५३० सँ १५४५ धरि मिथिलामे अराजकता रहलैक आर तकर किछु दिनक बाद केशव कायस्थ राजा भेल। दिल्लीये ई राज्यक भार हुनका भेटल छलन्हि। शेरशाह आ हुनक वंशजक शासन तिरहूत पर छलन्हि। तेघड़ा क्षेत्रमे मुगल–अफगानक संघर्ष भेल छल। मुगल साम्राज्यक समयमे मिथिलाक हेतु दिल्ली दिसि गवर्नर अथवा मुगलक प्रतिनिधि नियुक्त कैल जाइत छल। दरभंगामे बरोबरि फौजदार रहैत छल। महेश ठाकुरक शासनकालमे बहुत रास पठान सब हुनक संग देलन्हि। दाउदकेँ दबेबाक हेतु अकबर बिहार, तिरहूत आ हाजीपुरसँ सेना जमा केने छलाह। सैनिक दृष्टिकोणसँ मुगलकालमे हाजीपुरकेँ बरोबरि सुरक्षित राखए चाहैत छलाह आ खान–ई–आजमकेँ बंगाल आ तिरहूतक गवर्नर नियुक्त केने छलाह। मुजफ्फर खाँ चम्पारणक राजा उदीकरणक संग मिलि विद्रोही लोकनिकेँ दबौने छलाह। तिरहूतक राजा सम्राटकेँ कर दैत छलथिन्ह। १५८०क बाद शुभंकर ठाकुर भौरमे मिथिलाक राजधानी बनौलन्हि आ मुगल सम्राटसँ अपन बढ़िया सम्बन्ध बनाके रखलन्हि।
शुभंकर ठाकुरक समयमे जखन अकबर काबुल दिसि गेल छलाह तखन एम्हर तिरहूतमे बदम्क्षीक पुत्र बहादुर शाह साम्राज्यक विरूद्ध विद्रोह केलन्हि आ अपन नामक सिक्का आ खुतबा शुरू कदेलन्हि। पश्चात् ओ आजम खाँक नौकर सब द्वारा मारल गेला। पुरूषोत्तम ठाकुर जखन राजा भेलाह तखन हुनका राजस्व जमा करबाक हेतु किला घाटमे बजाओल गेलन्हि आ ओतहि धोखासँ मारि देल गेलन्हि। हुनक पत्नी दिल्ली जाए जहाँगीरक दरबारमे एकर शिकायत कैलक आ पुरूषोत्तमक हत्याराकेँ मृत्युदण्ड देल गेलैक। रानी ओतहि जमुना नदीक निगम बोध घाट पर सती भऽ गेलीहे। हुनक बाद नारायण ठाकुरक शासन कालमे कोनो एहेन महत्वपूर्ण घटना नहि घटल आ मुसलमानक सम्बन्ध यथावत रहल। तब सुन्दर ठाकुर राजा भेलाह। १६६१मे औरंगजेब एकटा फरमान अछि जाहिमे उल्लिखित अछि जे महिनाथ ठाकुर पलामू आ मोरंगकेँ जीतबामे साहाय्य देने छलाह। हुनका समय नवाब मिरजा खाँ दरभंगाक फौजदार छलाह। पलामूक चेर्रा सरदार प्रतापराय सम्राटकेँ करदेव बन्द कऽ देने छलाह आ अपना क्षेत्रमे तहलका मचौने छलाह। हिनका दबेबाक हेतु औरंगजेबक आदेश एला पर फौजदार महिनाथ ठाकुरसँ मदति लेलन्हि आ पलामूक संग-संग मोरंगक विद्रोही लोकनिकेँ सेहो दबाओल गेल। ओहि हेतु औरंगजेब हिनका धन्यवाद सेहो देने छलथिन्ह। अहिसँ ई स्पष्ट अछि जे मुगल सम्राटक अधीन छलाह। हिनका पारितोषिक हेतु मूंगेर, हवेली, ताजपूर, पूर्णियाँ, धरमपुर आदिक जमीन्दारी भेटलन्हि आ माछक निशान सेहो। मोरंगक विरूद्धक लड़ाइमे नरपति ठाकुर सेहो संग देने छलथिन्ह। महिनाथक बाद नरपति ठाकुर राजा भेलाह। मिरजा खाँक पश्चात मासूमखाँ, नुसेरी खाँ, शाहनवाज खाँ आ हादी खाँक ओहिठामक फौजदार भेला।


१. शीतल झा-नेपालमे मघेशीकेँ समस्या आ सामाधान! २.पाकिस्तान मे सेक्स-विचार- कुमार राधारमण


१.शीतल झा

नेपालमे मघेशीकेँ समस्या आ सामाधान!
(1) नेपाल
भारतके उत्तरदिलस बिहार स उत्तर, पश्चिम बंगाल स पश्चिम, उत्तरप्रदेश स उत्तर पूर्वमे हिमालय पर्वत के एक अंशमे स्थित एकटा देश नेपाल अछि। २४० वर्ष पहिले गोरखा के एकटा लड़ाकु राजा पृथ्वीे नारायण शाहके राज्ये बिस्ता२रमे महत्वाोकांक्षा स्वतरूप उपत्यरका सहित पूर्वमे तिस्ठा नदी आ पश्चिमे कांगड़ा किल्लात तक बिस्तातरके क्रममे दक्षिणके सम्तल भूमिमे स्थित बिभिन्नत ऐतिहासिक मुलुक पर बिजय प्राप्तल करैत गेल ब्रिटिस्टत भारत सरकारके प्रतिरोधक बाद युद्ध भेल। १८१६ के सम्पकन्ना संधि नेपालके बर्तमान अवस्था कायम करैत १८६० के संधि सँ एकटा पूर्णता प्राप्तक भैलै आ १९२३ के संधि एकटा देश मान्यकता देलक।
(२) मधेश
मध्य) एशिया स बनल शब्दा मधेश नेपालक समतल भूमिमे रहल जाति जनजातिके मधेशी शब्दम सँ सम्बोधन कएल गेल। एहि समतल भू-भागके तराई कहितोमे यही ठामक बासिन्दाीके तराई बासी या मधेशी कहित खष भाषिक पहाडि वर्ग सम्बोगधन करैत रहल १८१६ के सन्धिके खाकामें राप्तीत आ कोशी के बिचक भूभाग ब्रिटिस्ट भारत लेने छल आ नेपालके २ लाख रुपैया देने छल। मुदा अन्तिम कालमे नेपालक अनुरोधपर ओ छोडि देलक। १८५९ भारतके प्रसिद्ध स्व तन्त्रमता युद्ध सैनिक बिद्रोह के दमन करावक लेल नेपाली सेना भारतमो पठोलक बदलामे पश्चिमके चार जिल्लातके लएक जे सहित महाकालि सँ मेची तक समग्र २०-२२ जिल्लाश मधेशक अछि आ एहि ठामक बासिन्दास मधेशी।
(३) मधेशी प्रति ब्यएवहार
राजनीतिक-बर्तमान मधेशमे तत्काहलिन अवस्था‍मे जे स्व तन्त्री राज्यप सब रळे तकरा उपर प़थ्वीब नारायण शाह हमला करैत गेल आ मिथिला राज्यठ सेहो कब्जा‍ कएलक आ एकर १०००० ( दश हजार) सेनाके सहायता ल क पूर्वमे आक्रमण सफल कएलक आ तिरहुतिया सेनाके भंग कएलक। सम्पूहर्ण मधेश पर ओ, साम्राज्यस काएम करेके लेल सबपर जातिय साँस्कृनतिक प्रशासनिक भाषिक दमन सुरु कएलक आ मधेशके पूर्ण उपनिवेश के रुपमे देखैत एकटा पूण्तिन ओपनिबेशिक शासन चलव लागल। एही मधेशीके कहियो कोनो अधिकार नहि भेटलै जौँ कतहु नेपालक इतिहासमे मधेशीके चर्चा अवैतछैक ओ राजाके षडयन्त्र में ओकरा प्रयोग करवमे आएल छै। खस जातिमे २ जात शाह आ राणा आ क्षेत्री सत्ता संघर्षक क्रममे राजा के कटपुतली बनाक राखके काज जंग बहादुर राणा कएलक जेकर वंश १०४ वर्ष तक राजा आ प्राजा दुनुपर शासन कएल। जकरा कालमें चाकरीेवाज शोषक पहाडी के शासनमें अंश रहलै, मुदा तहियो मधेशी निर्मम शोषण दमनके शिकार भेल। सम्पूीर्ण मधेश शाह आ राणा सभक के जमिन्दािर छलैक या दरवरियाक भाइभरदार दार के प्रशासन मार्फत राजनीतिक होइछलै आ प्रशासन मे मधेशी नहिं छलै ।
राणा शासनक अन्त थ आ शाह शासनक प्रारम्भर २००९ सालक कथित क्रान्तिमें। राजनीतिक स्वनतन्त्रआता नहीं, शाह वंशीय स्वपतन्त्र्ता अएलै। २००७ साल सँ २०१७ सालतक विभिन्नक राजनीतिक घटना क्रममें मधेशी के जनसंख्यााके अनुपातमें कतहु राजनीतिक स्थाैन नही देल गेलै। जौ किनको स्थाघन भेटल ओ राजनीतिक आन्दोालनमें विशेष योगदान कएलनि तै। प्रशासनमें आ सुरक्षा क्षेत्रमें प्रवेश नही कतहु मधेशीकै देशक हरेक क्षेत्र पर रहल जाहिमे मधेश पूर्णत: पिसा गेल। एकरा अस्तित्वकपर प्रत्येलक क्षण खतरा रहै। नागरिकता ऐन कडा एकल गेल आ मधेशी के नागरिकता पर शंका करैत, देव में हाथ कठोर कएलक। एकरा कता संख्याधके न्यूतन देखावक लेल पहाड स पूनर्वासिके नाम पर पहाडीके बसोवास मधेश में करौलक। जंगलके विचमे स राजमार्ग वनाक मधेशीके जनसंख्यासक कम देखावकें खडयन्त्र करैत मधेशके मरभूमि बनावके चाल चलला। आसामी भुटानी वर्मेली नागरिक समेतके बसौलक आ सामाजिक अस्तित्वू सेहो खतडा में पडैत गेल। एक भाष एकभेष एकराज्यब एकदेश क निर्मम नीति के मधेश मे जे दमनपूर्वक प्रयोग क सकै तेहन मेधशी नेताके प्रयोग करैत रहल।
तथापि २०४६ सालमें आन्दो लन भेले आ लोकत पुर्जीवित प्राप्त कएलक। मुदा मधेशीके जीवन में कोनो परिवर्तन नहीं भेल। राजनीतिकमें कोनो अधिकार नहीं, सतामे कतछु पहुँच नही। सरकारी नीति निर्माण में किनको स्थािन नही। दलके उच्ची तहमें कोनो संख्या त्म।क परिवर्तन नही। कोनो सम्मा नजनक स्थांन नही। केवो टिकाउ नही। किनको स्वापभिमान नही। सवपर एकटा कलंक मढल रहैछ। मधेशी नेताक निर्यात इएह भेल। प्रशासनमें मधेशी न्यू न होइत गेल। जनपद प्रारीमें सेहो घटे तगेल सेनामें कतहु प्रवेश नही प्रावधिक क्षेत्रमे रहल सभके दमन वेस्नील वृत्तिविकाश कम एहि यस अवस्थाम सभ दलमें देखल गेला कोना प्रगतिशील कोन प्रजातान्त्रिक अन्या्य भेल कहि नहीं सकैछी तुरुन्तद सम्प्र दायिक आरोप, तुरुन्ती निस्का्सन, एहन निति रहल ०४६ स ०६२ तक राजा ज्ञानेन्द्रनक शाही कालमे विभिन्नी जाति, जात सभक विचमें लोकहतान्त्रिक चेतना प्रवेश्‍ कएलक समावेशीकरण, समानुपातिक उपस्थिति जातीय स्वानयाता संधीय संरचना आत्महनिणर्निक अधिकार आदि शब्दजक राजनीतिक अर्थ जनतामें प्रवेश कएलक आ विभिन्नस आन्दोमलन भरहल अछि। राज्य पक्ष शब्दीमें स्वी कार कएलक अछि मुदा नियतव एह पुरान छै, प्रवृति राणाकालीन छै। कपटपूर्ण मनशाय शाहकालीन छै। दलक केन्द्रीाय निकायामें वएह रबैआ छै। मधेशी अधिकारक आन्दो लनपर वएह आरोप, वएह कलंक, वएह दमनक धम्कीक, वएह मिथ्या अस्वाीसन वएह स्थापन, सम्मा न नहिं देवाक सामन्तीक प्रवृति।
(४) आर्थिक
मधेशी पर भ रहल आर्थिक शोषणक अनन्ती स्व रुप अछि। 1816 के संधिताकाल में मधेश मांगल गेल छैक पहाडीके पलएवाक लेल चितौनके सामने मधेश नहीं मांगल गेल छेक1 किए ओतेक भूभाग में ओहि क्षेत्रक सामन्तिक पोषण भजेतै भन्सांर मधेसमें सव खर्च पदाडके लेल। कारखाना मधेश मधेशमें राजस्व् पहाडके लेल। उत्पासदन मधेश मधेशी नियन्त्र ण वेचविखन भष्ट पहीके हाथ में कोनो निकायपर मधेशीके नियन्त्राण नही भ्रष्टानचार मे सलग्नम पहाडी सजाय मधेशी के मधेशीस्थिति गाँव गाँवमें एकेटाकें पहाडी जीमन्दा र के राजनीतिक हस्तीक्षेप ओकरे प्रशासनिक पहुँच ओकरें। पूरे क्षेत्रमें आर्थिक शोष ओकरें । ओहे प्रभावशाली व्यतक्ति। ओकरें सामाजिक हैसियत। गामक झगडाके न्या्यधीश ओहे। सारा जमिनपर ओकरें कब्जा । कोनो छोअ जीमन्दा र मधेशी त ओकरा उपर क जीमन्दा र पहाडी । मध्यं युगीन निर्मम सामन्ती। शोषण अखनो देखल जाति अछि मधेश में।
(५) सांस्कृशतिक भाषिक, सामाजिक दमन
• नेपाल विभिन्ना जाति आ वर्णके मिश्रित देश अछि स्वीदकारितोमें विभिन्न जातिक विभिन्नि भाषा, विभिन्न भेष अलग सामाजिक सम्ब‍न्ध सांस्काेृति पहिचानके स्वीोकार नै कएकल कहिओ पहाडी सत्ता शाही प्रशासनके मजबूत आ निर्मम वनकेलेल एकहि भाषा, खस भासा अर्थात शाही भाषा, अर्थात गोरख भाषा, अर्थात नेपाली भाषा के दमनकारी नीति प्रयोग एकलक बाँकी सभ भाषा पर सम्बैथधनिक रुपस प्रतिबन्ध लागल आ सरकारी कामकाजक भाषा भेष आ ओहि भाषाभाषीके जे पारम्पारिक पहिरन रहै से पहिरनके के दरवारक पहिरन मानल गेल। ओहे भेष सरकारी भेष भेल ओ है प्रशासनिक भेष भेल पहिरन आ राजनीतिक भेष होइत आ अन्तिमें जनप्रतिनिधिक औपचारिक भेष होइत-होइत सम्रग नेपाली नागरिकके भेष जकाँ ओकरें। ओपचारिक पोषाक मानल गेल। शिक्षामें सरकारी काम काजके आ इएह भाषा रहल आ अदालत एहि विषयमें शाही हाथक कठपुतली रहल।
• ६. जातिय जनजातीय शोषण
• आई प्रत्येषक जातीय क्षेत्रमें खसजाति, पहाडी वर्गाके दमनकारी, नीति प्रवे भेल अछि। अल्पअसंख्यभक जाति, विलिन भ रहल अछि। कहाँ थाररु कहाँ दनुवार अहि सभक जातिय क्षेत्रक उन्मू,लन भएरहल अछि सभक भाषाभेषक विलनक अवस्थाह में सांस्कृातिक अतिक्रमण आक्रमण प्रतीक्षा जनजातिक खस क्षेत्रमें।
• (७) प्रशासनिक
• प्रशासनिक क्षेत्रमें रहल पक्षपात उत्पीसडन, शोषन दमन अति निर्मत आ उल्लेाखनीय अछि। कर्मचारी तन्त्ररके उच्चे पद पर बहुत नगन्या मधेश्‍ी रहल छथिआ तिनका हतोत्सा‍हित आ कमजोर बनाएल जाइत अछि। निचका कर्मचारी सव सेहो हुनका टेरैत नहि छनि। निक कार्य क नहि सकै छथि1 मधेशी पर दमन चलावके हुनकर योग्यसता बनाबल जाइत छनिअ पहाडी ओकरा मधेशी पर दमनके लेल लाठी के रुपमे प्रयोग करैत अछि। ओ स्वगयं भयभीत रहैत छथिअ समग्र पहाडी वर्ग जातीय आ साम्प्रा दायिक भावनासँ ग्रस्तर रहैत अछि आ मधेशी पर सम्प्रोदायिक आरोप लगवैत अछि। मधेशी के उपर मानव अधिकारके हनन होइत अछि आ ओकरा कतहु दर्ज करैत अछि।
• (८) न्यािकि क्षेत्र
• अदालती कामकाजक भाषा खस भाषा अछि। न्यातयधीअशवादी प्रतिवादी के मर्म, भाषा, पीडा अर्थ विना बुझ्ने न्याकय सम्पासदन करैत छथि उल्टाध अर्थ लगाक फैसला होइत अछि। सारा खस भाषामें होव के कारणस मधेशी न्याय प्राप्तद ने क सकैछे आ न्याअयधीश सभ सेहो पहाडी (खस) र के हित में कहछथि आ स्वणयं सम्प‍द्रायिक भावना स ग्रस्ते रहैत छथि।
• (९) अन्य‍ क्षेत्र
• कोनो निर्वाचित मनोनित संस्थायमे मधेशी के पहुँच स्थाैना, सम्मासन नहिं अछि मानव अधिकार आयोग प्राध्या पकसंघ, चि‍कित्स क, संघ, अधिवक्ता संघ, इन्जिनियर संघ, विद्यार्थी संघ, शिक्षक संघ, महिला संघ, किसान संघ, कर्मचारी संघ, कतहु मधेशीके शायदे गोठे स्थाथन दैत अछि आ। तकरो नीति निर्माण में अल्पनमत रहला के कारण वात रखवाक अवसर नीहं रहैछै। कोनी राष्ट्रायी दलक मातृ संगठन मे सेहो यह अवस्थास अछि । तै शोषणा उत्पीवडन, अवहेलना, दमन सर्वत्र व्यातप्ते अछि असहय अछि।
• (१०) प्रजातन्त्रिक आन्दोनलन मा आ राष्ट्रठ निर्माण में मधेशक भूमिका
• राजा शासनके विरुद्ध में भेले प्रजातान्त्रिक आन्दोमलनके केन्द्री य स्थाेन मधेश छल। ओहि आन्दो लनके लेल मधेश भूमि मात्र नहीं देलक मधेशी आन्दो्लनमें भाग लेलक आ रक्तद देलक आ जान देलक २०१७ सालकेँ पचायती विरुद्धकेँ आन्दोमलन सेहो मधेशमें केन्द्रीलत रहल २०३६ सालक आन्दोपलन मधेशमें सेहो भेल। विद्यार्थीद्वारा कएल गल प्रत्येधक प्रगतिशील प्रजातान्त्रिक आन्दो लन में मधेशक व्या्पक आ अग्र भूमिका छल । आ क जनआन्दो्लन-2 त सेहो पूर्णत मधेश ओकरा उर्वराभूमि प्रदान कएलक आ अखनक संसद कमे पूनर्जीवन देलक। नेपालक कोनो प्रगति शील आ प्रजा‍तान्त्रिक नेता नहि छथि। जिनका मधेश राजनीतिक जन्म् आ पालन पोषण आ कर्म भूमि देलक। मुदा मधेशक एतेक योगदान आ एकरा प्रति एतेक गद्धारी एतेक कृतध्नीत्रा ।
• एकटा प्रश्नर प्रत्येभक मधेशीके अनुतरित करैत अति जे मधेश सभक स्त रके पहाडी नेताके जितवैत अछि मुदा कोनो उच्च। तहक मधेशक नेताक पहाड में टिकट भेटिते आ ओत स ओ जिविका अविर्त यह प्रश्नद अछि जे कोनो मधेशी नेता मात्र नही पहाडी नेता के सेहो अनुतरि त वना दैत अछि। निर्लज्ज वना दैत अछि। मुदा 2014 साल सँ अखन तक सभ चुनावमें कोनो भेदभाव नही राखि मधेशी पहाडी के भोट दैत अछि। टिकट पवाएक अधिकार होइतो में पहाडीके लेल टिकट छोडिदैन। अछि उत्साीहपूर्वक ओकरा जिवैत अछि मुदा ओकर इज्जधत ओतवे। ओकरालेल ओहे दुर्भाग्यद ओहे विडम्ब‍ना।
• प्रत्येरक आन्दोतलनमें जेकरा पहाडी जेकरा राष्ट्रियता के आन्दोहलन कहलकै, बुझने आ विना मधेशी ओहिमें सामेल भेल1 मुदा ओ राष्ट्रीरय नागरिक नही, राष्ट्री य व्यवक्ति नही। इह छै मधेशी क नियति !

• (११) शोषण, दमनक इएह स्थिति देखैत असहय भेला स ०६३ माघ में मधेशी आन्दोंलन फुटि पडल मधडेशी आन्दो्लनक किछु प्रमुख कारण:
• (क) हजारो वर्ष सँ (मधेशपुर) रहल सामन्ती् शोषण उत्पीेडन दमन दिक्कियाए अछि।
• (ख) गोर्खा राजा का शाह वंशीय राजतन्त्रापत्म क निर्मता जे जनतापर हरेक क्षेत्रमें व्या।प्ति छैय, जे उपरोक्त बूँदा पर देखावल गेल अछि, जकर अन्त्य लोकतासन्त्रिक सरकार क अवस्थारमें सेहो संभावना नहीं देखलगेल आ नैरश्य ता आ असहयताक अवस्थाज आएल।
• (ग) लोकतातन्त्रिक आन्दो लन उठावएकालमें दलक नेता सभद्वारा नमहर आश्वा्सन मुदा सरकार वनलापर उएह स्थिति, उएह दमन।
• (घ) मानवअधिकार, जातीय अधिकार, लोकतान्त्रिक अधिकार सम्बआन्धव में वेसी सँ वेसी लेख, रचना, अन्त(र्राष्टि्य जगतमें ख्या।ति प्रप्तध विद्वान सभक महत्वकपूर्ण विचार सब आएल वौधिक जगतमें हलचल पैदा करैत रहल, चेतना लवैत रहल आ आन्दोतनलिन करैत रहल।
• (ङ) राजनीतिक दलमें मधेशी समुदायक नगव्य पहुँच रहितोमे ओकरा प्रति दमन, उत्पीौडन स आएल ओकरा में उकुसमुकुस होइल रहल जे नीत वनिक फुटैल छल आक्रोस वनैत छल चाहे अपना व्यकक्तिगत उत्थामन के लेल मात्र सही।
• (च) माओवादी जनयद्धताका ओ विभिन्न जातीय स्वा यतताके नारा लगौलक आ ओहि अनुसार संघीय संरचना के भ्रूण स्वलरुप जातिय क्षेत्र निर्माण कएलक जे एकटा कान्तिकारी चेतना छलैक मुदा वाद में ओकर नीतिका व्यभवहार नहिं रहलै।
• (ज) एहन सिर्जल वातावरणमें अन्त रिम संविधानक घोषणा। भेल जाहिमे कोनो दल विगतकेँ आस्वारसन वचन, घोषणा लागु नही कएलक आ धैर्यताक सीमा टुटि गेल।
• (झ) जनप्रतिनिधिद्वारा बनावल गेल सभास सम्बिधानसभा वनत आ ओ जनताके संविधान होएत से मान्याता अनुकुल अपना सभानुपातिक उपास्थिति संविधान सभामें नही होएत से सम्भांवना निश्च य देखैत आन्दोालन भ गेल।
• (ञ) जनसंख्या के आधारपर समानुपातिक निर्वाचन क्षेत्र निर्धारण करव दल आ नेता सभ पछा र हल थि। ओ सभ मधेश स जिते मुदा मधेशक सीट कम रहैक से मनसाय देखि जनता नहि सहल।
• (ट) कोनो दल भितरके मधेशी एहन स्वेतन्त्रत आन्दोतलन नहि उठावि सकैत अछि ओ दलक नीति, अनुशासन, लोभस वाहनहल रहलाके कारण सँ अलग आन्दोवलन भँडकि उठल।
• (ठ) मधेशी जनअधिकार फोरमके किछु वर्ष स लगातार बौद्धिक क्षेत्रमें एकल गेल तथ्यांठक सहित के चेतामूलक पुस्तिका पुस्तशकके प्रकाशन आ मधेशी अधिकारका विषयमें करै काजसँ किछु प्रतिष्ठाठ आ विश्वाेस के कारण सँ आन्दोालन ई स्वकरुप लेलक।
• (ड) शान्तिपूर्ण आन्‍दोलन में एकलगेल प्रहरी दमन आ सरकारी दमन सँ मधेश उत्तेजित भेल।
• (ढ) शान्तिपूर्ण बन्द‍के कार्यक्रम पर माओवादी के हिंसात्मदक प्रहार सँ आ राहारतप्राप्तव मधेशी कार्यकर्ता के मृत्युँ सँ आगि मे घ्यूनके काज एकलक आ माओवादी विरुद्धमें आन्दोदलन केन्द्री त होइत समग्रमें खस वादी सत्ता केँ विरुद्ध में उत्तेजित होइत गेल।
• (ण) प्रधानमन्त्री को पहिल सम्बो धन कपटपूर्ण रहल वात में मधेशीले विश्वा‍स भेल आ आन्दोआलन उत्तेजित होइत गेल ।
• (१२) वर्तमान अस्था्
• (क) आठ दलद्वारा अनुमोदित प्रधानमन्त्रीआ क देशक नाम सँ सम्बोंधन के कतहु कोनो रुपमें लागु नहि भेल अछि।
• (ख) शान्ति तथा पुननिर्माण मन्त्री तथा वार्ता टोली संयोजनक साथ कएल गेल सहमति लागु नहि भेल छै। जाहिमे राजनीतिक मुद्दापर सहमति नहि वनलै सिर्फ प्राविधिक मुद्दा पर।
• (ग) संघीय संरचनाक अधार तय सरकार नही कएलक जाहिस मधेश आ जनजाति सबके शंका सरकार पर छै।
• (घ) सरकारद्वारा समानुपातिक उपास्थिति (राज्येके प्रत्येंक अंगमें) के कोनो प्रयास नहि कएक गेल अद्धि पुराने खसवादी अहंकारी प्रवृत्ति कपट वर्तमानो मे अछि।
• (ङ) सात दलके पार्टी संगठन में तथा नीति निर्माणके स्था न पर कोनो समानुपातिकता अवलम्ब न नहि कएलक अछि।
• (च) 1 दर्जन सँ वेसी हथियार धारी संगठन मधेशमें संचालन भेल जे अछि हिंसा, अपहरण, धम्कीस के माओवादी शैली अपनौने अछि।
• (छ) किछु हा‍थियारधारी समूह मधेशके एकटा स्वंतन्त्रज देश, राष्ट्र के नीति ‘क’आन्दोतलन अछि।
• (ज) मधेशके उत्तरीक्षेत्रमें राजमार्ग के कातेकात परिस्थितिवस वस बसल आ बसाओल गेल पहाडी वर्ग मधेश आन्दो लन, मधेशी आ मधेशी आ मधेककके विरुद्धमें अपन शक्ति प्रयोग करेत अछि। राजमार्गपर कब्जाम नियमित बन्द मधेशी पर हमला, मधेशी अधिकार प्रति विष वमन, संघीय अन्तरर्गत मधेश राज्य के विरुद्ध मे अलग राज्यतकमाग कत्‍यादिस मधेशमें एकटा खास प्रकारक शंका भय आ छै आ उत्तेजना के सम्भा्वना छै। ओनाक हुनका पहाडी समुदायक सभके मधेशमें अधिकार, सम्माछन, सुरक्षा, स्था न इत्या्दी खतडा देखैत आक्रोशित अछि। आ एकटा नयाँ द्वन्दाक संभावना अछि ।
• (झ) अखन कोनो एकता दल एकटा नेता मधेशक भावनाके प्रतिनिधित्वस नहिक रहल अछि। संगिठत आवाज नहि आवि रहल अछि। समग्र मधेश अहिंसात्मनक आ हिंसात्माक आन्दोिलनमें केन्द्री त अछि।
• (ञ) मधेश मे वर्तमान राज्यमसत्ता प्रति अविश्वामस आक्रोस आ आग्रह मात्र अछि मुदा एकरा अपराधिक कृयाकलाप के आरोप लगवैत सीमा कडा करारहल अछि जैस नेपाल भारतके सम्बकन्धआके गलत प्रयोग आ भविष्यामें गलत व्यामख्या कएल जाएबाक संभावना अछि।
• (ट) राज्यम पक्ष सँ जायज माग पूरा करके बदलामें या सहमति भेलवात के पुरा कर के बदलामें गृहमन्त्रीे तथा अन्यड विशाल नेता सभक धमकीसँ सेहो आक्रोस में बृद्धि भ रहल अछि। मधेशकै हतियारधारी समूह उत्साेहित अछि। आ उदाहरणीय बुझैत अछि।
• (ड) दिना‍नुदिन मधेशक होइत मरुभूमिकरण राज्यआपक्षद्वारा उत्तरी मधेशमें कएल गेल जंगल विनास पहाडी मूलके नागरिकके बसोबास स मात्र भेल से मधेशमें बौद्धिक क्षेत्र आ राजनीतिक क्षेत्रमें व्याेपक उठि रहल अछि। ई सभ अखन वर्तमान मनस्थिति आ पतिरि‍स्थधति नेपालमें अछि।
• (१३) मेधशी समस्याि के समाधान:
• (क) सुगौली सन्धि पश्चाआत मधेशमें रहल मधेशी के पहाडी सत्ता नेपाली ने बुझैत रहल अछि। मधेश नेपाल आ मधेशी इन्डीलयन कहिक बुझैत रहल, व्येवहार करैत रहल, सनीति वनबैत रहल, अपमान करैत रहल, नागरिकता सँ बञ्चि त करैत रहल। तैं मधेशी के नेपाली बुझैक सम्माबन दैक व्यतवहार नीक करैत। अर्थात मधेशी के अपन पहिचान सहित नेपालमें रहए पाएव।
• (ख) राज्य क प्रत्येलक अंगमे मधेशीके समानुपातिक आ सम्माकनजनक उपस्थिति:-
• राज्यथ नीति निर्माणक प्रत्ये्क अंगमें राज्यकक प्रतीक्षा अंगमे मधेशीके उपस्थिति देखवनाई अति आवश्याक अछि। दलक केन्द्री य निकाय, राज्य क अग सभमें शीघ्रतिशिघ्र मधेशीके स्थाेन नहीं भेटत मधेश शान्ता नही रहत से सम्भाकवना।
• (ग) राज्यसक पुनसंरचना
• राज्यथक पुनर्संरचना होइक आ ओ संघीय संरचनाके निर्णय करैक आ संघीय संरचना जाति, संस्कृ्ति, भाषा भौगोलिक एकरुपता, प्राकृतिक सम्पसदा इत्या दिके आधारपर होइक जे मधेशक चाहना आ माग छैक। समग्र मधेश पर स पहाडी शोषणा उत्पी्डन के अन्य्दा होइक आ तहन संधीय संरचना के प्रत्याछभूति होइत एहन संधीयता र पृथकतावादी आन्दो्लन कमजोर होइछ।
• (घ) राज्व्न् क समुचित उपयोग
• कर भन्सा)र, मालपोत इत्यामदी राजस्वआक जे आय छै तकरा मधेसमें नगणय मात्रामें व्यूय करबाक नीति आव व्य वहार रहि आएल छै तै एकरा मधेशमें मधेशी प्रतिनिधिके राखि नीति निर्माण कएनाई आवश्य क छै।
• (ङ) सन्धि सम्झौ ता कालमें मधेशीक सहभागिता
• भारत नेपालक वीचमें ऐतिहासिक, भगौलिक, राजनैतिक सांस्कृ तिक साहित्यकक सम्ब न्धय छै तकरा देखैत भारत के कोको सम्झौतता, सन्धि के कालमे मधेशी प्रतिनिधि बुद्धिजीवी रहनाई आवश्यकक छै, अन्ययथा निर्णय अव्यकवहारिक होइत छैक। खास के जल सम्बिन्धीे जलविद्युत सम्ब न्धि कोनो सम्झौ,ता में।
• (च) संविधान सभामें समानुपातिक सहभागिता:
• आगामी संविधानसभामें मधेशाकी केँ मधेशक जनजातिके समानुपातिक उपस्थिति, संविधान सभाके लेल अगामी संविधान के लेल देशक शान्तिकेँ लेल, मधेशाक समस्या्के समाधान के लेल आ राष्ट्रिय धारमें मधेशीके सम्मा हितक लेल नेपालके सवल राष्ट्रस बनकेलेल आवश्याक अछि।
• (१४) अन्तेमे
मधेशके समस्या के तत्कािल समाधान आ दीर्घकालीन समाधानक उपाय में उपरोक्त विविसभ दीर्घकालीन अछि त तत्कासलीन समाधान के रुपमें मधेशके प्रत्येदक शक्ति सँ विना धम्कीर वार्ता के ‘क’ समस्यातक शान्तिपूर्ण समाधान करबाक चाही आ मधेशीके साथ विना कोनो छलकेपट, विशवासमें लक राष्ट्रिय समाधानदिस जएवाक चाहि।

शीतल

जनकपुर, धनुषा

कुमार राधारमण

संक्षिप्त परिचयः
* श्रम आ रोज़गार मंत्रालय,नई दिल्ली में बतौर अनुवादक कार्यरत। आकाशवाणी दिल्ली में नैमित्तिक समाचारवाचक सेहो।
* विविध विषयक पांच सए सं बेसी रचना प्रकाशित।
* मैथिली साहित्य में वर्ग-पहेली केर सूत्रधार।
* दैनिक हिंदुस्तान,पटना केर रीमिक्स परिशिष्ट में शनिकए फिल्म पर स्थायी स्तंभ प्रकाशित।
* शिक्षा-एम.ए. हिंदी,एम.ए. मैथिली(स्वर्णपदक प्राप्त)। सम्प्रतिःएम.ए.(भोजपुरी)में अध्ययनरत।
* मूलतः बघांत(मनीगाछी,दरभंगा) निवासी,किंतु पालन-पोषण बनमनखी(पूर्णिया) सं।
* ब्लॉगः www.krraman.blogspot.com, www.maithilionline.blogspot.com
पाकिस्तान मे सेक्स-विचार
-कुमार राधारमण

"बीमार" एन डी तिवारी सं फेर प्रमाणित भेल जे सेक्सवृत्ति नहिं जाइत छैक। स्वर्गीय एन.टी.रामाराव के मुइला पर बड्ड खिस्सा सभ बहरायल छलैक जे कोना ओ प्रतिमाह कतेक हजार टका उत्तेजक दबाई सभ कीनबालेल खर्च करैत छलाह। सुनबा में आयल अछि जे ओही रामाराव पर रामगोपाल वर्मा एकटा फिल्म सेहो बना रहल छथि जहि में अपन बिहारी बाबू मुख्य भूमिका में छथि। देखा चाही जे ओहि फिल्म में एहि एंगल सं किछु नव तथ्य प्रकाश में अबैत अछि कि नहिं ।एम्हर खुशवंतो सिंह अपन बहुचर्चित कॉलम बुरा मानो या भला में स्वीकार कएलन्हि जे ओ एतेक बूढ भेलहु पर एखनो रूमानी कल्पना करैत छथि।
सेक्स देया इएह धारणा छैक जे करू आ बुझू खूब मुदा बाजू किछु नहिं। सकदम भेल रहू । ओशो जहिना बजलाह कि आध्यात्मिक सं हटा,सेक्सगुरू के टैग द देल गेलनि। आब ई गप्प दोसर छैक जे आइयो हुनकर संभोग से समाधि की ओरसभसं बेसी पढल गेल भारतीय पुस्तक छैक।
कखनो पढबा में अबैत छैक जे सऊदी अरब में सेक्स चर्चा पर आधारित एक कार्यक्रम में शामिल हेबाक कारणें,एंकर के 60 कोड़ा लगएबाक सजा स्थानीय अदालत सुनओलक । सूडान में स्कर्ट पहिरला पर एक टा किशोरी के 50 कोड़ा लगलैक। ईरान में जनानी सभ में मेकअप क कए टीवी पर अएबाक मनाही छैक । देवबंद दारुल उलूम के कहब छैक जे कंडोम के इस्तेमाल उचित नहिं छैक। आओर त आओर,इंडोनेशिया में बनल एक ताजा कानूनक मोताबिक,अगिला साल जं कोनो जनानी के टाइट जींस में देखल जेतैक,त ओकरा ओही ठाम,तुरंत स्कर्ट पहिरएबाक बंदोबस्त कएल जेतैक।एना में के बाजत सेक्स पर। थोड़ बहुत जं बजितो छथि त पुरुखे सभ। मुदा एम्हर एकटा तथ्य प्रकाश में आएल छैक जे जहि पाकिस्तान में तालिबान द्वारा महिला सभहक लेल बुर्का केर अनिवार्यता अथवा एक लिमिट सं बेसी नहिं पढबाक तालिबानी फरमान जखन-तखन जारी होइत रहैत छैक,ओही पाकिस्तान में सेक्स विषयक(यद्यपि एहि में राजनीति पर सामग्री सेहो रहैत छैक) एकटा पत्रिका धमगिज्जर मचा देने अछि। एहि पत्रिक के रूप में पाकिस्तानी महिलालोकनि कें एकटा एहन मंच भेट गेल छन्हि जहि में ओ सेक्स पर खुलि क चर्चा क सकैत छथि। एहिमैगजीन कें प्रबंधक लोकनिक लेल, पत्रिकाक वेबसाइट पर पाठकीय प्रतिक्रिया के सम्हारभ मोसकिल भ रहल छैक। पछिला साल ई मैगजीन लाहौर के दू कन्या- कैला पाशा आ साराह सुहैल द्वारा शुरू कएल गेल छल।
नाम छैक- 'चे मैगजीन'। पाकिस्तान में "चे" ओहिना छैक जेना हिंदी में 'च' । 'च' सं बिखिन-बिखन गारि सभ शुरू होईत छैक आ मैगजीन एही 'च' अक्षर सं जुड़ल विडंबना के देखाबए चाहैत छैक। वेबसाइट के कहब छैक जे सेक्स पर बाजब बेजाए बूझल जाइत छैक,तें दैनिक जीवन के अप्रसन्नता, हिंसा, शर्म, तनाव आ सामाजिक कष्ट कें जाहिर करबाक लेल ई मैगजीन शुरू कएल गेल छैक।

ओना,मैथिलीयो साहित्य में सेक्स कोनो नव विषय नहिं छैक। कविकोकिल विद्यापति एहन कतेको रचना क गेल छथि जनिका देया महिला प्रोफेसर लोकनि के ऩहिं बुझबा में अबैत छन्हि जे ओ कोना पढाओल जाए। वामरति पर अभिनव जयदेव लिखै छथिः-
"किंकिनि किनि-किनि कंकन कन-कन घन-घन नूपुर बाजे
रतिरणे मदन पराभव मानल जयजय डिंडिम बाजे"

चंदा झा एहि तरहक रचना सभ पर खिसिआएल छलाह आ ओ एहन रचनाकार लोकनिकें "बोतुक" कहबा में संकोच नहिं केलनि। बोतुक अर्थात् एहन जीव जकर दाढी त पाकल जा रहल छैक मुदा उमर के ख्याल नहिं कए संभोगवृतांत में व्यस्त अछि। मुदा सेक्स विषय के लोकप्रियता में संदेह नहिं । ई एकटा तथ्य छैक जे इंटरनेट पर सभसं बेसी सर्च सेक्स विषय पर भ रहल छैक। मोहल्ला ब्लॉग पर सविता भाभी के ल कए बड्ड हो-हल्ला मचलैक। हालहि में कनाडा में भेल एकटा सर्वेक्षण के निष्कर्ष (http://krraman.blogspot.com/2009/12/blog-post_03.html) छैक जे पोर्न सं केओ नहिं बांचल अछि। बाहर गुरू-गंभीर बनला सं की,सभ केओ कखनहु ने कखनहुं कंप्यूटर पर पोर्न देखनहिं छथि। सेक्स संबंधी आलेखक प्रतिक्रिया में कतेको पाठक लिखैत छथि जे पूरा आलेख पढि गेलहुं मुदा कोनो "ठोस" सेक्स-चर्चा नहिं पाबि निराश भेलहुं;समय "खराब" भ गेल। मिथिलो में,एखन कंप्यूटर के पसार ओतेक नहिं भेल छैक,तें किछु गोटे बांचल छथि। पाठकलोकनिक रुचि जं नहिं रहितनि,तं सभ अखबार में किएक रंगीन तस्वीर समेत रोज़ कोनो ने कोनो सेक्स संबंधी खबरि छपितैक?आइयो,समय-साल पत्रिका में जे लतिका जी के लेख छपैत छनि,तेकर पाठकीयता बड्ड छैक।
शारदा सिन्हा कतबो कहथु जे अश्लीलता लोकगीतक आत्मा के मारि दैत छैक,मुदा लोकगीत में प्रारम्भहिं सं अश्लीलता केर पुट रहल छैक। विवाहो-दान में जे गीतनाद होइत छैक,तहि में बड़का गामबला सभ त किछु मर्यादा रखैत छथि मुदा कनेक कम परिचय बला गामक अथवा आन जातिक बियाह में गीत-नाद सुनि कए देखियउ। गहे-गहे सेक्स भरल छैक।
संसदीय समिति भने कहने हुअए कि स्कूल में सेक्स-शिक्षा उचित नहिं हएत,मुदा कोलकाता विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के प्रोफेसर श्री जगदीश्वर चतुर्वेदी के कहब छन्हि जे "सेक्स" इच्छा के सघनीकरण,रूपान्तरण आ संशोधन करैत छैक। एहि सं सेक्स के दायरा बढ़ैत छैक। सेक्स ,विमर्श के दायरा सं बाहर नहिं हेबाक चाही। एकर गोपनीयता भंग भेलहि सं चुप्पी के कम कएल जा सकैत छैक।
फूको के कहब रहनि जे सेक्स कोनो एहन चीज नहिं छैक जकर अहां मूल्यांकन क सकैत छी। बल्कि, सेक्स एहन चीज छैक जकरा निगमित करए पड़ैत छैक । ओकर क्षमता सार्वजनिक होइत छैक। एकरा लेल प्रबंधन प्रक्रिया के जरूरत होइत छैक। सेक्स पर पुलिसिया पहरा ओकरा "टैबू" बना दैत छैक। सम्पूर्ण नेटवर्क सेक्स के इर्द-गिर्द घूमि रहल छैक । कोनो ने कोनो रूप में, थोड़- बहुत फर्क के साथ समस्त किस्म के विमर्श पर ओकरा थोपि देल जाइत छैक। सेक्स के नव दृष्टि सं देखब जरूरी भ गेल छैक । हम सभ अहू तथ्य सं परिचित छीहे जे खासकए मुस्लिम महिलालोकनिक ई समस्या गंभीर छनि जे हुनकर पति खाड़ी आ अरब देश में कतेको साल धरि बीवी-बच्चा सभ के छोड़िकए नौकरी करैत छथि जखन कि इस्लाम में कहल गेल छैक जे पति के अपन पत्नी सं,चारि महीना सं बेसी अलग नहिं रहबाक चाही।सेक्स देया जत्तेक बात हेतैक,ओकर ओतबे स्वत:-स्फूर्त्तह उपकरण आगू आओत। एतबा जरूर जे ई काज सीमित आ सतर्क ढंग सं संहिताबद्ध हेबाक चाही।

१. चिड़ै-सुजीतकुमार झा२. . कामिनी कामायनी-डाविर्नक बानर
३. प्रो. प्रेमशंकर सिंह-मणिपद्मक कथा यात्रा ४. रामलोचन ठाकुर-समकालीन मैथिली-कथाक यथार्थ-उर्फ यथार्थक-कथा


सुजीतकुमार
झा


चिड़ै
सुजीतकुमार झा
“ यदि नलिनी, अहिं सन होशियार रहितै अहाँ कतेक सुख दैत छी, आ एकटा ओ छथि, जे हमर दूटा बच्चाकेँ माय भऽ कऽ मात्र रहैत छथि । मनोजक स्वरमे विवशताक अभास नई छल । मात्र एकटा इच्छा छलन्हि — यदि नलिनी सेहो उषा जकाँ सुन्दरी, होशियार आ सुख देबऽ बाली रहितए तँ सम्भवतः उषाकेँ आइँखो उठा कऽ नहि तकतैथि । उषा दिश एकटक देखैत मनोज पुछलन्हि— “ की, नलिनीके विषयमे सोचिरहल छी ? ”
नई, हम किए सोचू हुनका विषयमे ? हम तँ हुनका देखनो नहि छियैन— उषा मुस्कैत मनोजक गर्दैनिमे अपन बाँहि लेपटा देलन्हि ।
मनोज सोचऽ लगलथि जे पढ़ल लिखल रुपवती उषाकेँ कार्यालयमे डेग धरिते सभहक आँखि हुनकेपर नाचि उठैत हएत, कतेक मजामे रहैत हएत हिनकर हाकिम । जखन मोन करैत हेतन्हि लग बजा अपन आँखिक पियास मेटा लैत हेताह । ओना उषा ओहन नहि छथि । ओ मात्र हमरा चाहैत छथि ।
ओहि दिन मनोज बहुत प्रशन्न रहथि । कए दिनक बाद उषाक टेलिफोन आएल रहैक आ हुनका अपन घर बजौने छल ।
उषा अपन घरकेँ खूब सजौने छलिह । मनोजक पसिनक सिंगार कएने छलिह, पसिनक खाना सेहो बनऔने छलिह ।
मनोजकेँ घर पहुँचलापर उषा गप्पक क्रममे पुछलन्हि “ एना कहियाधरि चलत ? ”
“ की ? ” मनोज सहजहिं जिज्ञासा कएलन्हि । “ की, एहने सम्बन्ध रहत हमरा सभक ? ”
“ तँ की गृहस्थीके झण्झटिमे पड़ऽ चाहैत छी ? धुर बताहि तहन एहन उल्लासमय क्षण नहि रहत आ ने एहन हल्लुक वातावरण ” मनोज हरेक शब्दपर जोड दैत बजलथि । प्रतिक्रियामे उषा किछु नहि बजलीह ।
“ तमसा गेलियै ? हम तँ सम्झा रहल छलहुँ । ठीके छै, कोनो ने कोनो बहन्ने नलिनीकेँ डाइवोर्स दऽ देबै । आब उठू ।”
कए दिन सँ मनोज सँ भेट नहि होएबाक कारण उषा मने — मोन टूटऽ लागल छलिह । नै कार्यालयमे मन लगनि आ ने घरमे । ओहि दिन बहुत बियाकुल भेलापर आलमारी सँ एल्बम निकालि कऽ पन्ना उन्टाबऽ लगलि । उन्टबैत — उन्टबैत एकटा फोटोपर नजरि स्थिर भऽ गेलनि ।
अही सोफापर दूनु बैसल रहथि आ आटोमेटिक क्यामरा एडजस्ट कऽ जल्दि सँ उषाकेँ माथ अपन कन्हापर धएने रहथि मनोज आ ओम्हर ‘क्लिक’ ।
‘कतेक स्वभाविक छैक ई चित्र ?’ ओहि दिन अनायसे मनोजक मुह सँ निकलि गेल रहनि । “ यू लुक बन्डरफूल.... लाइक ए ब्राइड”
“ तँ बना लिअ ने” ।
जँ सम्भव होइतै.... आ मनोज चुप भऽ गेलाह ।
किए चुप भऽ गेलियै ? नालिनी सँ डेराइत छियैक । उषा जानि — बुझि कऽ बात उठौने रहथि । नलिनी सँ तँ नहि मुदा डर तँ अछिए । लोक की कहत ?
“ लोक ? ओ तँ एखनो कहैत हैत ” उषा कटाक्ष कएलन्हि ।
तिर निशानापर लागल रहैक । मनोज तिलमिला कऽ रहि गेलथि । किछु काल तक खिडकी सँ बाहर देखैत रहलथि आ किछु कालक बाद बजलाह “ अहाँ हमर गर्ल फ्रेण्ड नहि, अहाँ तँ प्राण छी ।”
मनोजकेँ स्वभाव बड़ विचित्र छलनि । सदिखन ओ उषाकेँ ओझराहटिमे धऽ दैत छलाह । ओहि दिन मुसलाधार पानि पडैत रहैक । एकाएक मनोज उषाक घर पहुँच गेलाह आ कहलन्हि चलू समान किनै छी ।
“ एतेक पानिमे ?”
“ हँ, दोकानमे भीड कम हैते ।” आ हँसऽ लगलाह । कहियौ कोनो पावनि दिन चौकपर भिड होइतै तँ ओइ भिडमे मनोज उषाकेँ लऽ कऽ हेरा जाय चाहथि । जाहि सँ हुनक गतिविधि सँ लोक अनजान रहैक आ कहियो अबेर रातिधरि खाली सडकपर घुमैत रहबाक आनन्द लेबऽ चाहथि । कतेक विरोधाभास छल ।
कोनो— कोनो दिन तँ मनोज आबि कऽ घण्टो सोफापर सूतल चुपचाप अपनेमे हेराएल रहैत छलाह । तखन उषा सोचथि सायद विजनेसकेँ कोनो चक्कर हेतैक वा हिनकर ओझराहटि नलिनी नहि बुझैत हेतीह ।
चाँैक कऽ उषा घडी दिश तकली । एखन देर छन्हि हुनका आबऽ मे, हम नहा लैत छी । तखने डोरबेल बाजि उठल ।
एहि समयमे के आएल सोचिते द्वार खोलि कऽ देखलन्हि तँ मनोज ठाढ़ छलाह ।
“ अहाँ कार्यालय सँ चलि एलियै । मनोज अबिते उषा सँ प्रश्न कएलन्हि ।
“ गेबे नहि केलियै ।”
“किए । ”
अहाँ जे आबऽ बला छलहुँ ।
“ से अहाँके पहिनहि सँ पता छल”— मनोज पुछलनि ।
हँ अहाँके पसिनक खाना बनौने छी । आई कोनो बहन्ना नहि चलत, आइ एतै खाय पडत— कहि बाथरुममे चलि गेली ।
लाल रंगक पारदर्शी साडीमे ओ बहुत सुन्दर लागि रहल छलीह । मनोज पत्रिकाक पन्ना उनटा रहल छलाह । सेन्टक सुगन्ध सँ उषाक समिपताकेँ आभास होइते मनोज मुडी उठा कऽ देखलन्हि आ लपकि कऽ हुनका अपन बाँहिमे कसि लेलन्हि ।
ओम्हर नलिनीकेँ फुर्सत कहाँ छलन्हि ? ओ मनोजक व्यस्ततापर अपन तामस देखाबऽ लगैत छली । महिनो नीक जकाँ गप्प नहि करथि, मनोजक ई उपेक्षा हरेक कार्यमे देखाइत छल । अपन आदत अनुसार घर अबिते स्कूलके बच्चा जकाँ घडी, पेन, चश्मा एम्हर ओम्हर राखि दैत छलथि । मुदा दोसर दिन सभ व्यवस्थित रहैत छल । यदि नलिनी तमसा जाइत तँ कोनो समान तकैत तकैत मनोजक धैर्य टूटि जाइत छल ।
नलिनी नुका कऽ सभ चिज देखैत रहैत छली आ आबि व्यवस्थित कऽ दैत छली । आ आँखिए आँखिमे सल्लाह भऽ जाइत छल ।
“ की सोचि रहल छी ?” उषाक प्रश्नपर मुस्कैत मनोज हुनका दिश देखैत बजलाह“ अहिंक विषयमे, कतेक काज करैत छी अहाँ ? एकटा नोकरनी राखि लिअ ने”
आइ काल्हिक पढल लिखल लडकी नोकरी सेहो करैत अछि । घरके काम आ उपर सँ घर बला, साउस, ननदिके उलहन सेहो सहैत रहैत अछि ।
“ तएँ अहाँ बियाह नै कएलहुँ ? ” मनोज पुछलन्हि ।
“अहाँ सोचऽ के अवसर कहाँ देलहुँ” ई कहि मनोजकेँ अपना दिश खिच लेलन्हि ।
नलिनीक यादकें मनोज बिसरऽ चाहैत रहथि । तएँ हुनका अपना सँ अलग कऽ बजलथि — भूख लागल अछि, चलू खाइ छी ।
उषा नाना प्रकारके व्यञ्जन बनौने छलीह । आनि कऽ आगामे पडोसि देलीह । मनोज अपने धुनिमे खाइत रहलथि । उषा हुनक हरेक सुख सुविधामे जूटल रहलथि ताकी एतय आबि कऽ ओ कोनो प्रकारक कमी नहि महसूस करथि ।
खाना खाइत मनोज पुछलन्हि “ सिनेमा देखऽ चलब ?”
“ पिक्चर ? आइ, ?”— उषा सोचमे पडि गेली, महिनो बाद एतय अएला है आ अपन समय सिनेमामे बरबाद करब । ओ हरेक क्षणके संजोगि कऽ राखऽ चाहैत छलीह । एतेक प्रतीक्षाके बाद आई अवसर भेटल अछि । ओकरो सिनेमा घरमे बचकाना प्रेम प्रसंगके देखऽ मे बीता दी ? नहि एना नहि हैत सोचैत बजली । चारि बाजि गेलै इन्टरभल भऽ गेल हेतै ।
“ ठीक छै दोसर शो देखब ।” कहि ओछाओनपर पडि रहलाह मनोज । उषा टेपरेकर्डरमे गजलके कैसेट लगा देलन्हि । संगीतक मधुरता वातावरणकेँ मनमोहक बनाबऽ लागल । टेपरेकर्डर मनोजे देने रहन्हि ।
उषा टयूबलाइट अफ कऽ नाइटलैम्प बारलन्हि । पुरना जमानाबला लालटेन के आकारबला ओ नाइटलैम्प सेहो मनोजे देने रहन्हि । आब तँ हरेक पुरान चिज फैशन बनि गेल छैक । ओ केश झाडि कऽ जुट्टी गुहऽ लगली । मनोजकेँ एकटक अपना दिश देखैत ओ पुछलन्हि –“ की देख रहल छी ?”
“ अहिंक सुन्दर केश, किए बन्हैत छियै एकरा ? खोलि दियौ ? खूजले नीक लगैत अछि । हरेक सुन्दर चिजके स्वतन्त्र रखला सँ ओकर सुन्दरता अओर निखरैत छैक । केशमे एकटा क्लिप लगा दियौ , बस्स ।“ जुट्टी खोलि उषा केशमे क्लिप लगा लेली । हलका मेकअप कऽ कऽ साडी बदलऽ लगली । बहुत रास साडी मनोज किन देने छलन्हि मनोजकेँ तँ बहन्ना चाही । बाट चलैत कोनो महिलापर नजरि पडिते पुछि बैसथि “ चाही ओहन साडी ? ”
तँ की हम ओकर साडी देखैत छलियै ? ओ तुनकि कऽ कहैत छलि । “ आओर की ? दोसर महिलाक रुपपर अहाँक नजरि थोडबे टीकत । की पता ओ अहाँ सँ सुन्दर .... ।
“ मनोज डोण्ट वी सिली ?” उषा प्रेम सँ...... ।
किए प्रेम करैत छी हुनका । हरेक साडीके पाछु एहने कोनो मधुर प्रसंग होइत छलैक । ओ सोचमे डूबि गेली कोन साडी पहिरु ? रातिमे सिल्क बढियाँ लगैत अछि अपने सँ कहैत आसमानी रंगक साडी, गलामे नेकलेस, कानमे हिराके टप्स आ हातमे सोनक चुडी पहिर ओ मनोजक आगाँमे ठाढ भेलि तँ रुपसीके देखि मनोज क्षणभरि स्तब्ध रहि गेलथि ।
अरे ! गहनाक प्रदर्शनी छै की ? एखन तँ सिनमा देखऽ जाइत छी । दिनमे जँ ई पहिरने रहितौं तँ कतेको महिला एहने गहना बनएबाक हेतु...........।
प्लीज मनोज, कहियोकाल तँ बाहर निकलै छी । अपने देल समानके एकबेर नहि देखब हमरापर केहन लगैत अछि ? एहने प्रेमालापक सँग दुनू घरसँ बाहर भऽ गेलाह ।
सिनेमा । प्रेमालाप, हीरोकेँ पराक्रम मुदा दूनु अपनेमे लीन । फिल्म समाप्त भेलै । दूनु बाहर अएलथि तँ रातिके एगारह बजैत छल । ठण्डा ठण्डा हवा बहिरहल छल आ ताहुमे इजोरिया राति एकाधेटा सवारी सडकपर चलैत छल । दूनु एक दोसरमे लीन मौसमक आनन्द लैत पैदले घर दिश बिदाह भेलथि । विजुलीके खम्भा पाछु छुटैत गेल । गप्पक जेना कोनो अन्त नहि छल, मुदा उषाकेँ घर चलि आएल गलीकेँ मोडपर मनोज गुडनाइट कहैत उषा सँ बिदा लेलन्हि ।
गलीमे प्रवेश करिते संयोग उषाके तीन चारिटा गुण्डा घेर लेलकन्हि । स्वयंके छोडबैत उषा मनोज मनोज चिचिआए लगली । मुदा मनोज तँ.........।
खाली आँखि सँ उषा उज्जर वस्त्रमे घुमैत नर्सके देखैत रहलीह । डाक्टर एखने जाँचि कऽ गेल छल । नर्स कहलन्हि —“ बेहोशीकेँ हालतमे कोनो पडोसी अहाँके एतँ पहुँचौने छल । चौबीस घण्टापर होश आएल अछि । “ नर्स दबाइ पिआ कऽ चलि गेली । तखने मुस्कैत मनोज उषाकेँ समिप आबि बैसि रहलाह । उषा निर्विकार भाव सँ खिडकीपर बैसल चिडैकेँ देखैत रहली जे बीच बीचमे उडि जाइत छल आ पुनः ओहिपर आबि कऽ बैसि जाइत छल ।
केहन हाल अछि उषा ? ” उषाक हाथ अपना हाथमे रखैत मनोज नहुँऐ सँ पुछलन्हि ।
“ बस जीवि रहल छी ।” आ दोसर दिश ताकऽ लगलि ।
पुलिसमे रिपोर्ट कएलियै ? बेसी चोट तँ नहि आएल ?
नहि रिर्पोट नहि कएलियै — उषा रुष्ट होइत बजली ।
उषा डियर, एम्हर देखू, गहना लूटागेल सैह दुःख अछि ने । जाए दियौ गहना फेर बनि जाएत ।
“ बन्द करु एहन बकवास । आब हमरा गहनाकेँ मोन नहि अछि । ओ जेना आएल ओहिना चलि गेल”— कहैत हिचुकि—हिचुकि कऽ कानय लगली ।
“ की देहमे बुहत दर्द अछि, उषा बताउ ने, अहाँकेँ कतँ चोट लागल अछि ।”
“ चोट लागल अछि हमरा हृदयमे”— कहि अओर कानऽ लगली ।
“ प्लीज ठीक सँ बताउ ने ।”
“ अहाँ तँ एना चलि गेलांै जेना हम अहाँके केउ नई छी” — ओ बजली ।
मनोज चुप रहलाह ।
कहू ने, नलिनीकेँ एना छोडि कऽ भागि जेतियै ? हम यदि नलिनी रहितहुँ तखन ?
.. तखन हम अपन प्राण दऽ कऽ सेहो हुनकर रक्षा करितियै ।
तखन हमरा छोडि किएक भागि गेलहुँ ।
उषा अहाँ नहि बुझबै ई बात । बदनामीके डर सभ व्यक्तिकेँ होइत छैक । बिजनेस मैन छी । समाचारपत्रमे नाम छपि जाएत तँ फेर .... ओ बजैत बजैत रुकि गेला ।
“ कहू न फेर की ? ”
“ अहाँ... नलिनी...हमर मतलब...हमर कनियाँ तँ नहि ने छी ... ।
अहाँ तँ... अहाँ छी .... ।

२.. . कामिनी कामायनी

डाविर्नक बानर
23।12।09
ओहि सूनमसान बङका गाछी बला चौबटिया प’ ओकरा देखिते मातर. ‘ओ’ सिताहल नढिया सन दुम दबौने . . . पङाए . लागल। . ‘ओकर पङेनाय देखि ‘ओ’ गाछ प’ सॅ छरपल. . .धेलक ओकर पछोङ. . . ।मुदा ओ’ गहूॅमक चिक्कस . सायकिल प’ पाछॉ बन्हने कनियो घुरि क’ नहि तकलक़ . . आ’ ताबङतोङ पैडिल मारैत अप्पन दलाने प’ आबिक श्वॉस नेने छल . .।
एना हॅफसैत . . . फागुन मास में .. घामें पसीने देख़ि दरवज्जा प’ बैसल पिताजी. कनि घबङैल सन पूछला. .. . . “कि बाऊ. . . कि गप्प .. . एना किएक फिरीशान छहक़ . . . .किछु अनसोहॉत त’ नञि. . .” पिताजी के चिंतित मुॅह देखि बाऊ मुस्कैत बजला. ‘नै. . नै . . तेहेन कोनो गप्प नहि . ।मुदा .. .गुमटी बला चौक प’ जे बतहबा दाढी बला बुढबा गाछ प’ बैसल दूनू टांग मग में झूलबैत रहै छै .. . . . किएक नै किएक हमरा देखिते मातर. . अपन बङका बङका पकलाहा दाढी प’ हाथ फेरैत .. . डरौन सन ऑखि चमकबैत .. . .अांगुर सॅ ईसारा करैत. . .थम. . . थम’ कहैत हमरा लग दौङि क’ आबए चाहैत अछि. . . . हमरा बङ डर होईत अछि .. . आय त’ ओ आमक मोटका डारि सॅ धम्म सॅ कूदि हमरा खिहारने खिहारने नरेशबा के आरा मिल धरि चलि आयल छल .. . मुदा बीचे में बहेङा बला रोड प’ मोटरक आवाजाही सॅ ओकर दौङनाय में व्यवधान उपस्थित भेलए. . . .आ’ हम देकुली .. .बला रस्ता धरि जान बचौने .चलि आबि रहल छी . ..।’
पिताजी बेस चिन्ता में पङि गेल छलथि. . ।सब लोक त’ ओहि बाटे सहर बजार जाईत अछि राति .. बिराति .. सेहो . . .केकरो किछु नै कहियो भेलए .. . .।ओहि बङका गाछी सॅ कनि हटि कए . . .रेलवे गुमटी लग . . .के दोकान दार सब सेहो किछु तेहेन नै कहलकै. . ‘कत्तो सॅ आबि गेल छै साधुबबा .ओ अपाहिज .. . .ओ कि खिहारतै . .. आ’ कि गाछ प’ चढतै. . ।’
मुदा बौआ . .उर्फ तंतू के डर अजस्त्र. . . ।गाम सॅ बहराए के एक मात्र सोझ बाट त’ वएह . छल. . ।आ’ बौआ घर में बन्न भ’ रहितथि त’ कोना ..कोनो छौमसिया त’ छलैथ नहि .. कओलेजिया .. . .किलास करए त’ जेबे करितथि. . .. ।तखन पिताजी रमकिसुनमा के छोटका सार के लगा देलखिन्ह संग़ . .जे विशेष डिलडौल क’ पहलवान लोक छल.. . “खाली तौं गुमती टपा दिहक ।”
अपन बहिनक सासुर में भरि दिन ओ बैसले रहै. . . त’ गुमती प’ सेहो कओलेज जेबा आ’ एबा काल बैसै. . .पिताजी के पाय सॅ चाह बिस्कुट खा पीबि क’ समय काटि लैक . .।आश्चर्य कि ओकरा संगे रहला प’ तंतु ओहि दढियल के ऑखि में ऑखि दैत टकटकी लगौने रहै .. .तैयो ओ बङका गाछक जङि लग संचमंच भ’ निर्लिप्त भाव सॅ बैसल रहैक .. ।
मुुदा अहि सॅ समस्या नहि पङेलै . ..।आन प्रकारक उत्पात त’ बढिते चलल गेल छल. .।भेलए कि जे ओहि दिन दिनकर कका के छोटका बालकक विवाह छल. .. .. टोलक सबटा जर जुआन. .. बूढ पुरान पुरूष पात बरियाती चलि गेल रहैथ .. . । तंतु बाबू के एम ए फाइनलक परिच्छा चलि रहल छलैन्ह. . .त’ मोन मसोसिक’ रहि गेलाह. . .बरियाती के सरस खेनाय सॅ ऑखि मूॅदि नीरस किताब में धियान लगौल्ौन्ह. ।. .पराते भ’ क’ पेपर छल ..ताहि लेल ओ दलाने प’ रहि क’ पढि रहल छला कि आंगन सॅ चिकरैत मॉ कहलखिन्ह. . ‘बौआ रौ. . . कनि पछबरिया बाङी सॅ चारि टा नेबो तोङि क’ आनि दे. . .ओलक सन्ना में देबए . ..’।ओलक सन्ना हुनका बङ पसिन्न. . ।ओ जहिना पछवारि खेत दिस जाए लेल करिया कका के खङिहान सॅ मुङला . .कि हुनक एकमात्र बरद . . .अचौक उठि जोर जोर सॅ पोंछ हिलबैत .. कूदय लगलै. . . जेना ओकरा में बिजली प्रवेश करि गेल होय .. .ओ रंभाय लागल आ’ खूॅट्टा के एके झटका मे उपाङि .. .खूट्टा सहित हुनका पाछॉ पङैल. . . ।ओ बेचारे त’ ब्रिटीश एम्पायरक गर्वनर सबहक कार्यकाल में ङूबल . ..हाथ में कौपी नेने मूङी झुकौने . . . .नेबो के गाछ दिस बढल चलल जा रहल छला. . . कि पाछॉ सॅ बरद हुनका धक्का मारि क’ खेत में खसा देलकैन्ह . ..अकबकैल सन ओ .. . .कनिकाल त’ हुनका ठकबक्की लागि गेलैन्ह . .. ओ चारो नाल चित्त खेत में पङल रहला . . . मुदा ओहो बारह सॅ पनरह सोहाङि खाय बला . . .बेस तंदुरूस्त . .जुआन लोक छलाह .. .त’ नीचा खसले खसले बरदक दुनु सींग पकङि जोर सॅ जुमा क’ लात मारैत ओकरा कनि फराक ठेलवा में विजयी होइत .. . ठाढ भ’ क’ अपना के बचबैत ओकरा दिस झपटला .. . .मुदा बरद के नहि जानि की भ’ गेल छलै .. . .ओ फेर हुङकि क’ हुनका प’ पूरा जोर सॅ दौगल . . .आ’ ओहि गॅहुम बॉग भेल खेत में पटकि .. . .अपन खूर सॅ हुनक पैजामा के डोरी फोलबा के कोरसीस कयने छल .। . . .ताबैत में कोनो जनानीए अपन आंगन सॅ देखिक’ चिचिएलकै .. . तेकरा बाद आओर स्त्रीगणक जोर जोर सॅ सोर सुनि दोसर टोलवैया सब हाथ में डंटा नेने दौङल आ’ बरद सॅ तंतु के कहुना करि क’ छोङबेलकैन्ह. . . ।आ’ ओहि दिन सॅ बरद आ’ बौआ में अघोषित जुद्व शुरू भ’ गेल छल .. . . आब ओ बरद .. . . बरद नै भ’ क’ साक्षात. . . .पकलाहा दाढी बाला बुढबा भ’ गेल. . .क्रोध सॅ पागुर करैत. . हुनका घुईर घुईर क’ ताकए लागल छल. . ।
ओम्हर सबहक आश्चर्यक ठेकान नै रहलै. . . एतेक सीधा बरद. . . जेकरा पॉच बरक नेना सेहो सानी पानी दैत पीठ प’ .. मूॅह. . प’ . . हाथ फेर दैत छलैक .. .औचक ओ एहेन मरखाह. . .बदियल आ” डरौन कोना भ’ गेलय. . आ’ ओहो खाली तंतुए प’ किएक गुम्हरैत रहै छै .. . ।अपन मूॅह नमरा क’ कत्तो सॅ .. .तंतु के देखि पगुरैत भोकरए लागे छै .. ।
पिताजी के आश्चर्य त’ सातम आकास प’ .. .आन धिया पुत्ता छलैन्ह . .. टोल में सेहो जनसंख्या कम नै. . .मुदा एकरे प’ किएक़ . .लाल वस्त्र सेहो नहि पहिरति अछि ई. . . ।
सब गोटे मिलक’ एकर समाधान जे निकाललैन्ह. . . ताहि सॅ ओहि कात हुनक गेनाय वर्जित भ’ गेलन्हि . .. ‘कोन बेगरता छै उम्हर जेबा के. . ।’ंंमॉ के आदेश त’ सर्वोपरि .. . ।
इम्हर टोल में जखन सब कियो अपन अपन काज निबटा क’ हिनका लग जिज्ञासा करए पहुॅचल. . .ठट्टा केनाय शुरू. . ‘आखिर तोरे प’ किएक झपटै छ सब कियो. . ।’ तंतू कनि सीरियस भ’ क’ अपन टेबुल प’ खुजल किताब में मूॅह गोति क’ आई ए एस के तैयारी में लागि जायथ ।ओना जतेक प्रकारक प्रति योगी परीक्षा होईत छै .. . .आ’ आर्टस के छात्र ओहि में बैस सकैत अछि . ..ओ सबहक फारम मॅगबाबैथ . .. आ’ किताब खरीदथि. . ।एवम प्रकारेण ई त’ निश्चित छल जे हुनका अपना भीतर सॅ कोनो पद क’ लेल ‘हूबा’ नहि छलैन्ह .. .।जे कनि भरिगर पदक नाम सुनैथ .. .त’ ओकर फारम अनबाबए लेल लोक वेद के बजार दौङा दैथ ।दोसर उल्लेखनीय गप्प जे कोनो पोस्टक लेल एप्लाई करबा सॅ पहिने ओकर बेसिक सैलरी आ’ अपन ज्येष्ठ भ्राता के बेसिक सैलरी सॅ तुलना करि क’ प्रसन्न भ’ जायथ .. ।एकरा पाछॉ मनोवैज्ञानिक के कहबी छल . . . सिबलिंग रिवालरी .. .. ...े पिताजी सदिखन अपन ज्येष्ठ बालकक बङाई करैथ त’ ई बेचारे मन्हुआईलसन अपना के अस्तित्वविहिन पाबि मोने मोन तिलमिलाईत रहि जायथ आ’ ओंघीओ में इएह स्वप्न देखैत जे भायजी सॅ नीक पोस्ट हासिल करी जे तारिफ हमरो हुए. . . . . ।
रटबा में हुनका साक्षात देवी के बरदान जेना .. . .. मुदा बिसरियो ततबे करैथ. . . आ’ एक के पॉति दोसर में जोङि तेसरे वाक्य बना दैथ .. . .कतेक आलेख सब रटि क’ इस्कूल में पुरस्कार सब सेहो जीत चुकल छलाह. . . ।अहि रटबा के क्रम में अंग्रेजी हिन्दी डिक्शनरी सम्पूर्ण संपुट लगा क’ रटि चुकल छलाह .. .मुदा जखन भायजी के चिट्टी में “चूङा विल बी ट्रान्समिटेड” लिखला .. त’ जनानी के माध्यम सॅ गप्प पसैर क’ पिताजी के कान में पहुॅचलन्हि .. जे चूङा के कोन विद्वुत तरंग में बदलि क’ ट्रांसमिट करता . त’ एक क्षण लेल बाबूजी सेहो थकमका गेल रहथि .. ।अप्पन अहि ओजस्वी संतानक बुद्वि प’ त’ हुनको यदा कदा संशय भ’ जानि . ।मुदा गलती त’ केकरो सॅ भ’ सकैत अछि’ ई कहि क’ तंतू बाबू कहियो अपन नाक प’ माछी नहि बैसय देलथि।
उत्तिष्ठतः .. .जागृतः. . . .धावत :’ ई हुनक बीज मंत्र . .. जेकरा ओ रोज घोटैथ. । . घोटैत घोटैत ओ बैंकक पी ओ के परीक्षा देबा लेल सेहो तैयार .. ।. गणितक कठिनाई. . . मुदा बहादुर बौआ. . . गणितक सवाल के .. . . एबीसीडी .. .इम्हर सॅ आ’ ई एफ जी उम्हर सॅ. . . ..ह्यग्रएातएर तहान्। । । ।।ल्एस्स् तहान्हृ ..... .. . . . . . . .. . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . . .. . . . . . . . . .रटैत रटैत भरल दलान प’ ओहि दिन ई उदघोषित करि देला जे आब ओ पी .. ओ .. के परीक्षा लेल पूर्ण रूपेण लंगोट कसि क’ तैयार छथि. . . ..आ’ अहिबेर कत्तो नै कत्तो ओ अवस्स निकालि लेताह . . .सफलता आखिर जेत्तै कत्त .. . .ऋ
बेस. . .मॉ दही चीनी सॅ जतरा करा क’ विदा करोलथि. . .।विशेष उत्साहक संग किसुनमा के सार आ” हुनक अप्पन दुनु अनुज दङिभंगा आबि पटना बाला बस प’ बैसा देलकैन्ह. .।
परीच्छा दैत तेसरा दिन ओ घुरला. . .।किसुनमा के सार बस स्टैंड प’ पहिने सॅ मुस्तैद. .. .अपन सायकिल गौंआ पानबाला के दोकान सॅ उठबैत दुनु अपन अपन सवारी प’ बैसला .. ।मुन्हरि सांझ म्ों . . .प्रधानमंत्री विकास योजना के तहत बनल सुचिक्कन पीच रोड टपैत . .. गामक खरंजा प’ बढल चलल जा रहल छलथि. . .कि नहि जानि कतए सॅ एक गोट सङल पीलिया कुकूर आबि क’ हुनक बाम कातक पैंट भरि मुॅह पकङि लेलकैन्ह. . .अहि क्रम में ओ घुट्टी सॅ ऊपर हबैक सेहो लेलकैन्ह. . .।एकरा एकटा अपशगुन मानैत. .. . सबटा प्रसन्नता क्षणांश में कर्पूर जकॉ .. .उङि . . . .चारूकात जरल माछ जेकॉ गंधाए लगलै. . ।
पिताजी के चिन्ता जायज़ . . . ‘ई कत्तो नौकरी चाकरी करैथ . .. तखन नै .. .कत्तो विवाहोदान. . . .।वएस त’ भइए गेल छन्हि . . .।खरच दुनिया भरि के. . .।
बङ दिन धरि ओ अपार चिन्ता में डूबल रहि गेल छलाह. .।
बौआ. . . .ऊर्फ तंतु .. . . दुनिया जहान सॅ भिन्न . . .।पूब में किरिन फूटबा सॅ पहिने उठि क’ घंटा भरि दंड बैठक करैथ ।. ..कसरति करैत मातर. . . .ओ ‘मनुक्ख गंध’. . “मनुक्ख गंध’ जकॉ .. . ‘भोजन गंध’ ‘ भोजन गंध’ करैत खेनाय प’ झ्पटैथ. ।भूख त’ हुनका सुतलि रातियो में फिरिशान करि दैक .. . त’ ओ तुरंत जोङन देल दुध के उठा क’ पीबि जायथ .. . ।भिनसरे माय ताकिते रहि जायथ. ‘भरि सक बिलाङि पीबि गेल हेतए ..’आ’ दही पोरनिहारिके अक्षमता प’ आरोप लगबैत . .अपन मोनक भङास निकालि लैथ नीैक सॅ झपने नहि हेतैक .. ।’
मुदा कतेको बेर जखन ई प्रक्रिया दोहराओल तेहराओल गेल त’ मॉ पूतौह आ’ बेटी के कात करैत अपने हाथ सॅ मटकूङी के ऊपर चकला . . . . . ओहि प’ लोढी सेहो राखि देलथि .. .चूल्हि के एकदम लग’ में. . . भनसा घरक सबटा खिङकी केवाङ बन्न. . . ।मुदा तैयो जखन परात भेने मटकूङी खाली. . . भेटलैन्ह .. .त’ हुनक आश्चर्यक ठेकान नै. . . “कियो टोना टापर त’ नहि करि रहल अछि. . . .दियाद बाद त’ अहिना दुष्ट. . . नजरि त’ हमरे घर प’ लागल रहै छै .. .बजर खसुआ सबके’. . .. ।’तखने दनदनाईत जलखई करबा लेल बौआ तंतु अयला त’ मायक’ ई विलाप सुनि रहस्योदघाटन करैत बजला. . ‘गै््््ऽऽऽऽ. ..हमरा रातिक पढैत पढैत भूख लागि जाईत अछि. . ..हमहीं. . .पीबि लैत छियो।’ ताहि दिन सॅ मॉ चारिटा सोहारी आ’ तरकारी .. .अरबेस क’ हुनक चौकी प’ राखि दैथ. . . जतय ओ पढैत रहैत छलाह. . . जाहि सॅ सुतली राति में भनसा घर त’ नहि जायथ .. . ।मुदा भनसा घर सॅ की परहेज . . .ओ त’ भगबति के उसरगए लेल थारी में राखल केरा दूध. . .चिनबारि प’स’ दिन दहाङे उठा क’ खा गेलाह. . ..पाथर भेल मॉ. . .थरथर कॉपैत. . .भगबति लग क’ल जोङने कलपि कलपि क’ हुनक सदबुद्वि लेल प्रार्थना करए लगली. . ।
जहिया सॅ बरद पटकने रहैन्ह तहिया सॅ बाङी झाङी बाला खास करिक’ घरसॅ बहराए .. बला काज त’ छुटिए गेल
छल जे हुनक आलसी सुभाव लेल बरदाने सिद्व भेल छल । आब अपन विशेख समय शरीरे प’ लगाबैथ. . . मुनहरि सांझ में सेहो घंटा दू घंटा . .. .कसरत करैथ . . . .ड़ाऊ डाऊ करि क’ खेनाय प’ छूटैथ . . . .।सेर सवा सेर . . .चाऊर बूटक भुज्जा फॉकैत . . . .दरवज्जा प’ . . .लैम्प जरौने . . कुरसी प’ बैसल झूलि झूलि क’ आई ए. एस क’ तैयारी सुरू करि दैथ. . आठ बजैत बजैत. . .भोजन भात भइए जाए. . .दस बाजैत बाजैत ओंघी सेहो दबोचि लैक . .. .गाम में तहिया साढे आठ धरि त’ लोकवेद खा पीबि क’ निफिकिर भ’ क’ सुतियो रहै. . .।
ओहि राति बङ धुऑ धार बरसा भेल रहै. . . भदवारि मास. . . चारो कात. . .बेंग़ . झिंगुरक जुगलबंदी. .. .सब तरि पिच्छङि. . . ..।परात भेने .. ..कनि अंधारे सन छलै. . . पिछौत में . . .नहाए लेल चप्पा क’ल चलब गेला . . ..।औचक में पएर पिछैङ गेलन्हि. . . . .आ दू .
मूॅहा घरक सीढी के कोन में पानि बुनी सॅ नूकैत घुरमुङिया क’ सूतल बिलाङि क’ उपर धंम्म सॅ खसला. . .. ओ त’ पहिने म्याऊ म्याऊ करैत एक दू .. .क्षण कराहलक .. .. मुदा तेकारा बाद खिसिया खिसिया क’ हुनका से भंभोरलक जे हिनकर होश हवास गुम .. .।
ई अन्हार में पङल पङल ‘मॉ गै .. . मॉ . .’ करैत चिकरए लगला. . त’ बगलक कोठरी में चारि मसुआ नाति आ’ बेटी के संग सूतल मॉ चिहुक क’ भकुआयल ऑखि मीजैत मीजैत .. . बहरेली. . .।लालटेमक टेमी ऊच करैत .. .बेटा के ई रूप देखैत .. . हुनक एङी के पारा मगज प’ चढि गेलन्हि. . . ।सब किछु बिन कहने बुझि गेलथि. . ‘तोरा कहिया भगबत्ती अकिल देथुन. . .।धीया पुत्ता सेहो पिच्छङि के डरै . .. क’ल प’ ओहि दिस सॅ नहि जाए छै. . . ।’उम्हर चिल्का जे बीमार छलै. . आ’ भरि राति नहि सूतल छलै हिनकर चिकरनाए प’ नीद सॅ उठि क’ . चेंहुॅ चेहूॅ करैत गला फाङय लगलै. . .।आंैधाएल बहिन .. .कहुना करि क’ बैसैत .. . पलथा प’ ओकरा नेने .. . .आरे निनिया. . . . .आ’. . . ।’करि ओकरा सूतब में लागल .. . आ’ नहूॅ नहूॅ फुसफुसा क’ अपन ‘तंतूभाय’ प’ आन्तरिक पीत्त सेहो. . .व्यक्त करि लैत छली. ‘हिनकर ताल अलबत्ते. . . भरि भरि राति .. . लोक जागल छै. . .आ’ भोरे भोर हिनकर ताल. . ।’ बाजि भ्ुाकि क’ मायक ह्दय मोम जकॉ पिघैल गेलै. . . ओ कङूक’ तेल आगि प’ पका क’ आनलथि . .. ‘ला ऽऽऽऽदेखो. . . देखी त’ . . . एकटा .. बिलाङियो तोरा नै गुदानै छै.ा .. . आर सबसॅ लङबा लेल त’ सिंग निकालि क’ सदिखन तैयार .. . ।दादी के त’ सौंसे भंभोरने छलौ .. . .नै लागै . ..छै एकर विष . . .।ओना त’ तू कुकूरो बला सूईया सेहो त’ लगबैनेए छलैह . .।’
फरिच्छ भेने तंतू. . .चारि टा पजेबा आनि पिच्छङ दिस सॅ लगा देलथि. . ‘आब नै खसतै कियो. . ।’ भौजाए बहिन सब हॅसए लगली .. ‘ अपने नै खसू . ..सएह .. .बङ. . .छै. ।. . आन सब त’ ठेकनगर छै . .।’
पिताजी के कोनो जोतखी कहलकैन्ह. . जे तंतू बाबू के किछु दिन स्थान परिवत्र्तन भ’ जेनाय आवश्यक़ . .किएक त’ हिनक मंगल बङ खराप .. . ।तंतू अपनो बङ दिन सॅ. मोन में नियारने रहथि जे भायजी के’ पटिया क’ कहुना ..कुशीनगर प्रवासक इंतजाम करी. . .।आब ई सब ताल बेल देखि पिताजी सेहो सहर्ष तैयार भ’ गेला . . . ‘अहू ठाम तैयारी करै छ. . .ओहु ठाम करियह. . .।’ताकल गेल जे ओतय कोन संबंधी छथि. . . आ’ सबसॅ नजदिकक भायजीक सासुरक कुटुंब. . . ..ओही विद्दार्थीक डेरा प’ आसन जमौला. . ।
अजगुत लोक़ . .अजगुत पढाई. .. ।मुदा नीके छै. . .कसरति करैथ . ..होटलक खेनाय . ..भूख पेट सॅ फाजिल लागै. ..।कोठरी में चना . . मूॅग़ . . गेहुॅम फूला क’ अंकुरी क’ संग़ . . सलाद लेल पत्ता कोबी .. टमाटर खीरा . .के संग कॉच भॉटा सेहो अजमेलाह . .।मुदा भॉटा के सलाद देखिक’ ओहि ठामक’ विद्दार्थी सब ठट्टा केलकैन्ह आ’ अपनो रूचिगर नहि लगलैन्ह .. . त’ भॉटा के सलाद सॅ निर्वासित करि देलथि .. .।
मुदा अहु ठाम सेहो हुनका बङका बङका दाढी बाला बूढबा के लाल टरेस ऑखि पछोङ नहि छोङलक़ . .।आ’ नीन में .. .जेना कियो घेंट मोईक रहल होयन्हि. . . जखन. तखन ओ घोंघियाय लागैथ .. .औंचक श्वास बन्न भ’ जायन्हि . . . .।तखन करितथि त’ की. . .घुईर अयल.ा अप्पन गाम. . ।मॉ कहली. . ‘जे जान रहतै. . त’ .गामे में रहि क’ खेत पथार देखतै. एत्ते त’ देने छथिन्ह भगवान।’
उम्हर कुटुमक’ संघतिया सब कौंचबैन्ह. . ‘ कि भाय. . . कत्तए गेला अहॉ के चिङिया घर सॅ पङाएल संबंधी ..? . .भाय हम त’ कहैत छी जे विशुद्वरूपेण ओ अपन गार्जियन के ठकि रहल छैक .।एहेन वज्र. . . दू दू घंटा कसरत. .। . ओहि दिन इम्हर सॅ हम जाईत छलौं .. .सुनलौं .. .अहॉ के कोठरी सॅ ठहक्का . ..भेल अहॉ अपन घर सॅ आपस आबि गेल होयब . . . खिङकी सॅ झकलौं .. . .त’ देखैत छी . ..कुटुम एकसरे जोर जोर सॅ ठहक्का लगा रहल छथि. . . .पूछलोपरांत कहलन्हि जे हॅसी बला कसरत करि रहल छी .. . .।’
तंतू दोबारा घुईर क’ कुशीनगर नहि गेलाह .. .।ओ स्थान सेहो हुनका नहि धारलकैन्ह .. . ।तखन आब की कयल जाओ. . .।बङ सोचि विचारि क’ अपन छोट पुत्र संग लगा क’ पिताजी हुन का अपन ब्ङका सुपुत्र लग मायानगर पठा देलखिन्ह .. ।
भायजीक विवाह सॅ पूर्व सेहो ओ मायेनगर में रहथि .. . ।मुदा कोचिंग .. . . .आई ए. . एस आ’ पी .. ओ क’. . . .समाप्त करि फेर सॅ गाम आपस आबि गेल छलाह .. ।आब त’ खाली तैयारिए करबा के न छै .. .एयह सोचि क’।
पहिने त’ हुनक ईलाज कराओल गेल .. ..एना जौं सुतली राति में श्वॉस अटकि जेतै. . ऋ. . कतेक दिन भाय सब अगोरने रहतै. . . ।आ’ भगबतिक बङका असीरबाद जे डाक्टरी दवाए सॅ मास भरि के भीतरे श्वॉस निर्विघ्न सुचारू रूप सॅ चलय लगलैन्ह . ..।मुदा ओ भयौन स्वप्न ऋ.. . .ओ .. चिंहुकि क’ नीन सॅ उठनाय. .? . बूढबाक लाल टरेस ऑख़ि . ऋ. ड़ाक्टर सॅ पूछला प’ कहलकै .. .साइकियाटी्र.स्ट सॅ इलाज कराऊ ।
भायजी सॅ अनुरोध करि क’ मुदगर. . .वेट लिफ्टिंग के आन समान सब सेहो किन नेने रहैथ. . ।आ’ बेसी काल आब ड्राईंग रूम में वा .. .बालकनी में ठाढ भ’ क’ मुदगरि भॉजैथ .. .।कखनो काल त’ कनि अनसोहॉत भ’ जाय .. . जे भेटघॉट करबा लेल लोक वेद ड्राईंग रूम में आबै .. . आ’ ओ बीच दीवान प’ मूङी नीचा पएर ऊपर. . ।
अहि बीच भायजी अपन फ्लैट बदलि क’ कनि दूर दोसर ठाम चलि गेल छलाह .. .।बङ दिन सॅ ओतए रहैत छलाह .. .त’ सर कुटुम . ..गौंआ सब के आबए में कोनो फिरिशानी नै होय .।मुदा नबका पता .. . । ‘तंतू भायजीक मकान शिफ्ट करबा काल स्वयं मुस्तैद छलाह ।भाय के अनुरोध प’ ओ सब सर कुटुम के नबका पता लिखक’ पठा देलखिन्ह .. . ।अहि बीच ओ’ गाम चलि गेलाह .. ।
उम्हर सब कियो फिरीशान . . .नबका मकानक पता गलत छै. ।किएक आ’ केकरा कहने फूसियाही पता देल गेल ? .. .अहि में गामक लोक के नब न्ुाकूत कनिया के कूट चालि बूझाए पङलैन्ह. . .।
कनिए दिनक बाद .. तंतु बाबू. . .फेर सॅ मायानगर प्रवासक लेल पधारलथि। ओहो भायजीक डेरा में केकरो आओर के पाबि क’ घबङा गेलथि. . ।ई की केलथि भायजी चालाकी . .।झोरा झपटा नेने अस .पस में पङल. . .कत्तजाऊ. .। .. .तखने मोन पङलै. . . . शुक्रवारी हाट त’ अहि सङक प’ लागैत छेै ।. ..ई पूछला प’ लोक हुनका पौकेट सी पठा देलकैन्क ।.. .आ’ अहि ठाम भाई जी मौजूद छलाह .. ।सी के स्थान प’ बी लिख क’ ओ सबके ईएह पता पठौने छलैथ. . ।एहेन गलती त’ ओ’ सदिखन करैत छलैथ ।मुदा हुनका के की सकैत छल . .।
एहेन एहेन त’ कतेक रास प्रमाण छल .. .मुदा तखन तंतू बाबू अपन गलथोथरि प’ उतरि जायथ .. ‘हमरा जएह कहब सेएह नै. . ।’मायानगर प्रवास के ई खूब नीक जकॉ मुदगर घुमेबा में. . .अखबार में कपङा के सेल देखबा में .. . .आ’ छह मासक भतीजी के डिब्बा के दूध .. आ’ फैरेक्स चोरा क’ फॉकवा में . . ...कनि नुका क’ सङक प’ आबैत जाईत आईटम गल्र्स के देखबा में .. .आ’ सूतबा के संग किछु जेनरल नॉलेजक पत्रिका रटबा में लगौलथि .. ।
एक दिन सीढी सॅ उपरका फ्लैट में चढैत उतरैेत. . हुनका आध्यात्मिक भान भेलन्हि जे किंस्यात .. .ई सब गमला बाहर सॅ आबए वला शुद्व वायु के अवरूद्व करि दैत छै .. .आ’ ओहि प्रदूषित वायु के कारणे. . जे बी. बी . .सी . .के अनुसारे दिल्ली में बङ बेशी छै. . .हुनक नाक अवरूद्व करए लागै छैन्ह .. ।त’ ओ अपन भायक सोझा में एकर पुरकस विरोध . . .व्यक्त करि . .. हुनका प’ दबाव देलखिन्ह .. .जे पङोसी के गमला के सीढी प’ सॅ हॅटवा दियौ. . ।भाय के कनि संकोच त’ अवस्से भेलैन्ह. . .मुदा अगियाबेताल अनुजक आग्रह ओ नहि ठुकरा सकलन्हि. . ।
गमला त’ बाहर छलै . ..हॅटि गेलए .. ... मुदा हिनक दरवज्जा सॅ सटले ओकर दरवज्जा जखन खुजै. . .आ’ मोटका सिकङी सॅ बान्हल बङका अलशेशियन कुकुर पूरा पूरा मुॅह खोलि जीभ निकालने .. . हॉफैत हॉफैत .. . . . . .नौकरक हाथ के डंटा के अछैत हुनका दिस ताकि लैक .. . त’ ओ’ जेना पैजामा में नदी . .लग्घी करबा लेल प्रस्तुत .. ..।मुदा भायक एत्ते औकात कत्त जे .. ओ ब््िरागेडियर साहबक घर सॅ कुकुर के सेहो हॅटबा दैथ. . ।ताहि लेल ओ हुनक नौकर सॅ निहोरा पाति करि क’ टाईम पूछि लैत छलाह ओकर बहराय के . .।ओहि टाईम के ओ बङ मुस्तैदी सॅ व्यवहार में आनए लगला ्र।. . .किछु भ’ जाए .. .चाहे .. दुनिया एम्हर सॅ ओंम्हर ..
ओहि समय ओ घर सॅ बाहरि पएर नहि निकालथि. . ।
टा्रंजीस्टरक बङ पे्रमी .. . ।प्रायः सबटा समाचार आदि सॅ अंत धरि सुनैथ ।अहिना एक दिन शीर्षासन करैत न्यूज सुनि रहल छला ..्र। भीषण गरमी के बङका भोर. . । . .भायजी बाथरूम सॅ दौङल अयला ‘बौआऽऽऽऽ .. .कि कहलकै. . राजीव गॉधी के बारे में .. ?’ .. . ‘भायजी अहिना कहैत छै . ..दू टा . .बच्चा छै .. पैलवार में त’ की कहतै. ?’शीर्षासन जारी छल .।भाय ठाढ । ‘अवस्स किछु भ’ गेलए अछि ताहि लेल कहि रहल छै. .।’बस तङाक दिन पएर जमीन प’ ।.. ‘खट द’ उठि बैसला .. ‘कनिए काल में न्यूज जग जाहिर भ’ गेल छल।
समय अपन यात्रा जारी रखने छल . ..।बरख प’ बरक बीतैत चलल गेल . . .हिनकर कंपीटीशन कहियो समाप्त होमए के नामे नहि लै. . . . जाहि परीक्षा सबहक उमैर . ..वा चांस बचल छल. . तेकरे नांगङि पकङि लैथ. . . ।उम्हर गाम में लोकवेद पिताजी के बूझबैन्ह. . “बङ भेलए कंपीटीशन सब. . . . ढेर रास नौकरी सब छै .. .अप्पन सामर्थ देखि कत्तो धय’ लेताह. . . . .मायानगर में नौकरी के कोन कम्मी छै. . ।वा’ अहिं के एतेक लोक जनैत अछि . .. कत्तौ लगवा दियौ. . . ।आन धिया पुत्ता प’ धियान देब . . . . . ओकरो विवाह दान .. ।. मायानगर में रहि क’ कंपीटीशनक तैयारी करैत छै. लङका . . सुनबा में त’ मधुर लगै छै. ..मुदा कत्तए छै . ऋ.. .. भायक कपार प’ कतेक दिन एना बोझ रखबै. . . ओ कोन टाटा वा अंबानी अछि .. . ..।’पिताजी के तखन दिमाग खुजलैन्ह . . ।आ’ व्यर्थक उम्मीदक किला ढाहैत ओ’ किछु ठोस कदम उठबतैथ. . .कि अहि सॅ पहिने हुनक तेसर बालिग पुत्र बाजि उठला ‘पिताजी .. . हुनका गाम कथि लेल बजैबैन्ह. . . व्यर्थक बदनामी. . . .लोक वेद अहिना खिस्सा गढैत अछि. . .आ’ ओ अलगटेंट . .. कोन गप्प प’ उखङि जेता तेकर कोन ठेकान. . . ।पोरकें. . .गगन चचा के बङका बेटा के करेज प’ बैसि क’ ततेक मारि मारने रहथि जे ओकरा सप्ताह धरि हरदि चून लगबए पङलै. . ।चाची गरिया गरिया क’ टोल भरि के’ एकट्टा करि लेलन्हि. . ‘ई मोचंड . . .मारि दैत हमर बेटा के. ।’ आ’ ओहो छोटसन गप्प प’ ।ओ’ कहलकै ‘तंतूभाय आब जंतू सब सॅ ड’र नहि होबैत अछि ..? ’अहॉ कत्तो बाहर गेल रहि. . ।ताबैत मे छोटका बेटा सेहो बाजि उठला “हॅ ..पिताजी .. .छोटका पीसा के सेहो अहिठाम अहि चौकी प’ पटकने रहथीन्ह. . . ।ओहो फुसियाहिए गप्प प’ ।पीसा त’ सप्पत खा लेलथि .. .जे जौं ई एत्तय रहता त’ ओ घुईर क’ सासुर नहि औता .. ।अपन हॅसी केर बलजोरि रोकैत . . .आगॉ बाजैत गेल ‘ओय दिन पीसा के सोझॉ हुनका बिरनी काटि लेलकैन्ह .. . बाम ऑखि आ’ गाल फुलि क’ लालटरेस .। .. .आ’ फेर हुनके माथ लग उङै. . .त’ हॅसैत पीसा बजला ‘बिरनी कटलकौ .. .तूंबा फुलेलकौ. . .फेर गुम्हरै छौ तोरे प’ से किएक हौ।’ अहि प’ कनि पीत्ता क’ ओ बजला ‘हे हॅसू जुनि . .. हमर जनम ओहि नक्षत्र में भेल छै. ..जाहि में गॉधी जी के भेल छलैन्ह. ।’ ‘जुलुम गप्प. ..तखन त’ तोरो हत्या कैल जेत्तऽऽऽऽ।’ कत्तेक कहल जाए . .. ‘बङका कका के ओत्तए विवाह में कुटुम सब आयल छलैन्ह .. .त’ किछु लोक हिनका दरवज्जा प’ पढैत देखिक हिनका लग आबि बैसला . .. सब पढल लिखल . ..नौेकरीहारा .. .।गप्प करबा में त’ तंतू भाय सबके पछाङि दैत छथिन्ह . .. ।चीन प’ गप्प चललै .. त’ ई बङ जोश में आबिक टांग झूला झूला क’ बाजय लगला ‘चीन में देखियौ .. .कत्तेक विकास भ’ गेलए .. .सांस्कृतिक रिवोल्युशन. . . . ‘चलू गामक ओर’ .. .नारा सॅ ओकर गाम गाम एकटा शहरिक कान काटबा में माहिर भ’ गेलै. . .देखैत देखैत .. .ओ’ सुपर पावर .. . .माओत्से तुंग की नेता छलै. . ।’ ‘मुदा ओकर नेता सब बङ अत्याचार सेहो केलकै. . ।’ कोने कुटूम हिनक गप्प काटिक बाजल त’ ई पिनकि गेलखिन्ह .. ‘की जनैत छी अहॉ माओत्से .. के बारे में. . . खाली नाम सुनला टा सॅ नहि होइत छै . ..गहीङ में जा कए जानए पङै छै. . ।’ताबैत बङका कका के सार फुद्दी बाबू बाजि देलखिन्ह. . ‘हौ. . माओत्से तोहर माम छ’ जे ओकर हिनताई प’ एतेक पिनकै . .छ ।’ ‘ंमाम त’ अहॉक हेताह . ..।’गप्प गरमै लगलै. . कि हम तुरंते हुनका मॉ के बहाना करि आंगन पठा देने रहियै. . ।
उम्हर अगत्ती धिया पुत्ता सब अपन दलान प’ बैसि बुझौब्बल खेलाय. . ‘खिस्सा कहै . .खिसनी .. सुन भाय मॅकङा जी जान लगा क’ चारि टांग केकरा. . .।’ ‘तंतू भाय के’ . . सब एके बेर चिकरै .बुेझक्कङ फेर सॅ पूछै. . . ‘खिस्सा कहे .. . . . . . . जी जान छोङि क’ चारि टॉग केकरा. . ।’ ‘तंतुभायके।’ ‘अै रौ .. .जी जान छोङियो क’ आ जी जान लगाबियो क’ तंतुए भाए कोना .. ।’ त’ चट दनी जबाब भेंट जाए. . . ‘जखन ओ’ चौकी प’ सूति क’ शवासन करैत छथि. ..तखन जी जान छूटले रहै छैन्ह .. .आ’ चौकी के चारि टांग .. . ।आ’ जखन ओ दंङ बैसकी लगाबैत छथि .. .तखन दुनू हाथ आ’ पएर धरती प’ रोपने. . .भेलै नै जी जान लगा क’ चारि टांग . .।’आ’ तखन जे समवेत ठहक्का के स्वर गूजै. . .तखने किये बाजि उठै. .हे . .सुनता कत्तो सॅ तंतु भाय त’ खिहारि खिहारि क’ अधमर्रू करि देथुन ।’छोटका बेटा अपन कान सॅ सुनने छल ई सब ।
मॉ सेहो अहि गंभीर समस्या प’ .. . . .भोजन करबा काल . . .पिताजी के सोझॉ में बैस क’ .. . . .बाजल छलीह . .. ‘ओहू ठाम त’ ओकरा दिक्कते होईत छै. . . भौजाए सॅ पटिते नै छै. . ।छोट सन बरख दिनक भतीजी. . . .तेकर लत्ता के बिलङबा. . . ह्य.टैडी बियर हृ .. . .सॅ खेलाईत खेलाईत .. .तेना नै . ..जोर सॅ फेकलकै. . .जे नेना मूहें भरि खसलै. . .दुनू दुधी दॉत उखङि .. . खुनम खुन चारहु कात .. . .।हमहुॅ त’ ओहि ठाम छलियै पोरकॉ . .. .ओ’ ततेक डेराए छै आब ओकरा सॅ. . ओकरा देखिते मातर पलंग .. .कुरसी केदोग में नूका जाय छै. . ओ त’ भाए एहेन नीक छै. . जे बर्दाश्त करि लैत छै. .. . .एतय गाम में लोकवेद घटक मोङि दैत छै. . . आब त’ सब ईहो कहय लगलै .. .मोचंडक संग ओकरा भूत सेहो खिहारै छै. . ।कहनिहारक मूॅह में ऊक लागै .. ।’
अहि बतकही सॅ फराक पिताजी गहन चिन्तन मनन के बाद अपन ज्येष्ठ संतान सॅ टेलिफोन प’ वार्तालाप करि मायानगरक रूख धेलन्हि .। . . .अहि होनहार बिरवान के’ क़त्तो नौकरीक जोगाङ में कत्तेक लोकक दरवज्जा खटखटबए लगला .. . .. ।अहि बेर हुनका लोक सब छुच्छ आश्वासन द’ क’ टारि देलकैन्ह . . .।भाग्य तंतू बाबू के. . .कत्तो दालि गलबे नहि करै. . .जे पिताजै केक्कर कहॉ के नौकरी लगबा क’ अपन हाई कनेक्शनक परचम लहरौने छलाह .. .अहि बीर बालक में .असोथकित भ’ गेल छलाह .. ।
अहि बीच गरमी के तातिल में छोटकी बहिनक विवाह में सब गोटे गाम गेला. . . ।गामक राजनीति . . .दिन प’ दिन विचित्रे भेल चलल जा रहल छल .. . .भोरे भोर लछमन कका आंगन में आबि क’ मॉ के सुनबए लगलाह. . .. ‘पूबरिया बाङी के मालभोग आमक गाछ हमरा जमीन प’ अछि .. .से . ..एकरा कटबा दियौ .. ।’ पिताजी कत्तो बाहर गेल छलथि. . .।मॉ तंतू के कहलखिन्ह. . ‘बौआ रे . ..ई त’ अजगुत गप्प करै छथुन .. एतेक सिनेह सॅ तोहर पिताजी अहि मालभोगक बिरबा के कत्तए दन सॅ नै आनि क’ अपने हाथ सॅ. ..रोपने छलाह .. . .एकरा एहेन मधुर फल अहि परो पट्टा में त’ कोने गाछक नहि छै. .।मुदा ई त’ आब नब गप्प .. . . .हमर जमीन में .. .जखन की अहि आङि सॅ दू बङका डेग आगॉ धरि अपने जमीन अछि।तू अमीन के बजबा ले आ’ अपना सोझा में नापि करबा क’ अहू कलेस के ... . पॉच लोकक सोझा में जल्दी सॅ फरीछा ले. . नहि त’ जनिते छी दियादबादक कूकूर चालि. .मांझ काज तिहारक आंगन में अङंगा लगा देत. . ।’
तंतू तखन भारतीय इतिहासक किछु पन्ना रटैत चौकी प’ बैसल.. बङका पितङिया बाटी में . दूध .. .चूङा चीनी बङ प्रेम सॅ पलथा झूलबैत खा रहल छला . .।मॉ मनेसरा के अमीन ओतए दौङा देने छलैथ. . ।मुदा एखन त’ आधो घंटा नहि भेल छलैक ।ओ खेनाय समाप्त करि हाथ में कॉपी नेने .. .अकबरक नीति संबंधी किछु पाठ घोटैत बाङी अयला. . . लछमन कका ओहि ठा’ विचित्र सन मनः स्थिति में ठाढ छलैथ. .।अहि बेर ई गाछ लुधकि क’ फङल. . . .बङका. . बङका टा के आम .. . । ‘तंतू बाबू . .. ई गाछ त’ हमरे नमीन प’ छौ .. .देखहक .. . .अहि ठाम सॅ ओ जे गाछी सोझे सोझ भीखना के दरवज्जा लग देखाय पङै छै. . एत्त सॅ लक’ ओत्त धरि .. . ।’ओ अपन आंगुर सॅ देखबए लगला . .. मुदा तंतू के कनि हङबङी छलैन्ह . . ‘बेस कका अहॉ फुसि थोङबे कहबै. . ..।एना करू . ..जौं अहॉ के जमीन में गाछ अछि त’ पहिने एकरा काटिए दियौ. ..।’ कहबा के देर छलै .. . . ..कोदारि हाथे में .. .लछमन कका तङातङि बङका मोटका गाछ के घ्ांटा. भरि लागि क’ जङ मूल फङ समेत . .. असहाय अवस्था में अनाथ सन. . . धरती प’ खसा देलखिन . .।ताधरि अमीन सेहो आबि गेल .. . . जमीन नपलक .. .त’ गाछ. .तंतूए के जमीन में आ’ दू डेग आगॉ धरि हुनके जमीन .. ।’ मॉ बाङी जाकए देखली . .. .हुनकर त’ माथे घुमि गेलन्हि. . ।कनि बेरक बाद तेना बियाकुल भ’ क’ करूण स्वर में क्रंदन करए लगली .. .जे लग पासक कतेक लोक जमा भ’ गेलए .. ।तीन दिन धरि मुॅह में पानिक एक ब्ूॉन नहि लेलथि .. . . .नै मुॅह सॅ एक आखर बहरेलैन्ह. . ।मुदा ऑखि अपन नोर बहा क’ मोनक उद्वेग के हल्लुक करैत रहलै. . ।
तंतू बाबू सॅ लोकवेद बङ सिनेह सॅ गप्प करै. . ।पिताजी सेहो हुनका परोछ में बाजैथ. . ‘हौ . .मुरूखक लाठी बीच्चे कपार. . ।कखन कोन नोकसान करि देत के जनैत अछि . .।आब जे छै . .से त’ भोगबा के छै ।
उम्हर बरियाती में बरक पिता के पाकल पाकल दाढी देखैत मातर. . ओ’ पंडाल छोङि लत्ते पत्ते पङेला .. . ।पिताजी पीत्ते आन्हर .. . ‘बरियाती के सुआगत करबा लेल कोन काबिलती के काज़ . . अहि काजक लेल त’ कोनो . ..कोचिंग के आवश्यकता नहि. . ।’ मुदा एकर परवाह नै करैत ओ’ अपन छोट भाय सॅ बजला. . ‘पिताजी के बूझेनाय हमरा बूता के बाहरक चीज़ . . .ओहि बूढबा.. के दाढी आ’ लाल टरेस ऑखि हमरा फेर सॅ खिहरनाय सुरू करि ग्ोलक़ . .आ’ हमरा प’ की बीतैत अछि . . .हमहीं जनैत छी. . ।’अनुज हुनका शांत करिक’ भरारक डयुटि संभारय लेल कहि अपने बरियातिक सुआगत में चलि गेल छला. . ।
भरार घर में राखल छोटका मचिया प’ बैसि आगॉ एक गोट स्टूल प’ अपन किताबक पन्ना खोलने .. .किछु रटबा में लागल छलाह .. . आ’ कागदक एक गोट प्लेट में . .किछु लडडु . ..पैनतोवा रखने खाईत सेहो छलाह . ..कि तखने रोशनदान दिस हुनक नजरि गेलन्हि .. ।लाल लाल बङका बङका ऑखि . .पाकल पाकल दाढी .. . अांगुर सॅ किछु ईसारा करैत. .. ।ठाकुरजी कोल्ड ड्रिंक्स के बोतल लेबए एलथि. . . त’ देखैत छथि .. . तंतू भाय .. . लडू के चंगेरा प’ ओंघराएल पङल छथि . .. ।सोर पाङलखिन्ह ‘तंतू भाए. . .औ’ तंतू भाय’. . .मुदा किछु कत्तो नै. . ।ओ घबङेलाह .. .आन सारसबके बजौला .. ‘तंतू भायके दॉति लागल छैन्ह .. .।’ भरि पॉज उठा पुठा क’ . .चारि चारि गोटा मिल क’ हुनका दोसर कोठरी में आनि पलंग प’ सुतौलन्हि . .।कनि प्रयासक पश्चात हुनक मुरछा टूटलैन्ह .. . पानि पीबी . .स्वस्थ भेला. . .।उम्हर दलान प’ बरियाती . ।. .एक गोटे के छोङि सब कियो दलान प’ भागल. . ।
कनि काल में तंतू बाबू उठि पुठि क’ बैसैत बजलाह. . ‘भरारक रौशन दान सॅ झॅकैत ओ पाकल पाकल दाढी वला बुढबा. . . ।’ठाकुरजी दौगला .. . भरारक रौशनदान सॅ कनि सटल. . . पङोसिया के खपरैल प’ कारी बिलाङि सूतल . . ।आब ई कोन काजक जोगर. . . कनि बिलमि क’ ठाकुर जी हुनक छुच्छ स्वाभिमानक रच्छा करैत कहलखिन्ह. . ‘भायजी अहॉ पढबे करू. . . भरार हमीं संभारि लैत छियै. . ।
ंमायक कबूला रहैन्ह. . बरहम स्थान में घोङा चढेबाक़ . .तंतूके हाथे. . . .।आ’ अहि कन्यादानक सेहो. ..। .जेठक धूप. . . सकाले जा कए बरम थान सॅ आपस भ’ जैब नै त’ बङका टहटहौआ रौद पकङा जैत. . .हालाकि एखन सातो नहि बाजल छलै. . मुदा सुरूज महराज अपन ढिठाई देखबए लगला जे हिनका सॅ पंगा नेनाए नीक नहि .. .यथाशीघ्र प्रस्थान करबा चाही. . । . ।त’ तंतू बाबू बाजा गाजा .. ठोल पिपही के संग गामक टेढ मेढ कच्ची रस्ता सॅ हाथ में घोङा नेने बढल चलल जाईत छलाह. . ।माय पितियानि .. मौसी पिसी .. .बहिन भौजाय .. .आहे माहे स्त्रीगण सब पाछॉ सॅ गीत गाबैत चलल आबि रहल छलाह. . .।
एतबै में तंतू के हाथक घोङा सक्रिय होईत हुनका तेहेन कसि क’ दुलत्ति मारलकैन्ह . .कि ओ त’ सीधे जोतलाहा खेत में उनटल . . . ।संगक छौङा सब दौगल. . . ।माय पितियानि गीत गबैत लग अयली त’देखैत छथि जे पिपही ढोलबाला त’ आगॉ बढल चलल जा रहल छै. . मुदा धिया पुत्ता ओहि खेत में . . झूंड बनौने की क’ रहल छै .. .ऋ।
तंतू कत्तो देखाए नहि पङि रहल छला. . ।मायक माथ ठनकलैन्ह . .. ओहो एकपेङिया सॅ नीचा उतरलिह. . . देखैत छथि . . .तंतू आ’ हुनक घोङा दूनू दू ठाम खसल. . .।तामसे त’ माहुर भ’ गेली. .मुदा क्रोध के’ पिबैत बजली. ‘रे अनमोल. . .तू घोङा उठा ले. . आ’ तंतू .. .चल झटकि क’ बेर बीतल जाए छै . . .आंगन में सेहो पूजा छै. . ।’
घर आबिक मायक कोढ फाटि गेलन्हि. . ‘आब त’ तंतुआ के माटियो के घोङा पटैक दैत छै. .कि विपत्ति छै . .किजाने. गेलियै. . . ।हुनका लेल ओ’ कोन व्रत उपास नै करै छलीह .. ।
तंतू के अहि बेर मायानगर जयबा काल माय बिलखि क’ अपन बङका होसियार पूत के कहलखिन्ह ‘तू ही देखही .. . हमरा त’ एकर लच्छन कोनो नी क नहि लगैत अछि. .कोनो नोकरी लगबा दही. . .सतमा अठमा पास लङकी सॅ. . गरीबक बेटी सॅ .. विवाह दान करा दही जे एकर घर बसा दैक़ . ।’ मुदा बङका बेटा हिम्मत नै हारलैन्ह .. ‘मॉ अहॉ निफिकिर रहूॅ . .सब नीक करथिन्ह भोलेनाथ . .।’
भायक एक गोट संगी जे हुनका बारहो बरीख सॅ जानि आ’ देख रहल छल. . .आ’ हुनक बौधिक क्षमता के संग .. .शारीरिक शक्ति के नापि तौल रहल छल . ..बङ सोचि बिचारि क’ गप्प के घुमबैत फिरबैत . . .जाहि सॅ हुनका खराप सेहो नहि लागैन्ह . . .आ’ बेचारा के जिनगी सेहो बनि जाए .. . सलाह देलकैन्ह. . ‘एकबेर हिनका बालाजी ल’ क’ जईयो राजस्थान में .. ।जौं किछु उपरि चक्कर हेतए त’ सेहो दूर भ’ जेतै. . ।’
अप्पन आफिस सॅ छुट्टी लईत भाय राता राती गाङी प’ हुनका बैसा क’ बालाजी के लेल प्रस्थान केलथि .. ।मई मासक ओ’ टहटहौआ .. रौद . . .चारो कात जेना आगि बरैस रहल छल. . .।मुदा भाय त’ अपन अहि भा एक लेल हिमालयक बरफ प’ सेहो बिशटी पहिर एक टंगा द’ तप करय लेल तैयार छला . . .त’ ई फौर्टी एट डिग्री तापमान की छल .. ।
आ’ आश्चर्य . . . .. . ओहि सीझैत गरमी में. . ओहि बङका गाछक चब्ूातराके नीचा . . ..लोबान अगर बत्ती के मॅहक सूॅघैत मातर . .. थरथर कॉपैत तंतू . . .अपन दूनू ऑखि सॅ दहो बहो नोर बहबैत
बाजए लगलाह “ हम त’ पिछला दू सौ बरीख सॅ अतृप्त अहि अखिल ब्रंहांड में भटकि रहल छी. .।अपन किछु आरोपित सिद्वांत प’ लोकवेद संगे हमरो संशय छल . .. ताहि लेल हम गाम गाम गली गली भटकैत ओहि सिद्वांत के परम सत्य के कसौटी प’ कसबा लेल बिलखि रहल छलहूॅ . . .कि . .कओलेजक पछौति में आमक गाछ प’ चढि क’ पोथी पढैत ई देखाए पङल. .।दोसरा दिन अपन बुशट के ऊपर पैजामा के बन्हने. . .एक बीत्त डोरी आगॉ में लटकल .. .संघतिया सबहक मखौलक परवाह नै करैत . .. जाहि आत्म विश्वास सॅ ई अपन कओलेज सॅ चलल आबि रहल छल कि हमर गॅहकी नजरि एकरा प’ पङल. . .।हमरा लागल छल . ..हमर ‘सबजेक्ट’ हमरा सोझॉ ठाढ . .एकर क्रिया कलाप .. एकर व्यवहार .. .गप्प .. शप्प .. . सबटा हमरा आदि मानव के मोन पाङैत रहल .।कतेक साल धरि . .. असंख्य . ..जीव जंतु सब प’ अनुसंधान करैत अहि निचोङ प’ पहुॅचल छलहुॅ .. .कि मनुक्ख . .. .बानरक विकसित रूप अछि .. .।मुदा अहि मनुक्ख के देखि हमरा आश्चर्य भेल . .कि मनुक्ख एखनो बानर अछि. . . वा . ..बानर मन्ुक्ख बनि क’ बूलि टहलि रहल अछि. . ।
हम अप्पन शंका के समाधानक वास्ते एकरा पाछॉ लागि एकर पैजामा उतारि क’ ई देखबा के प्रयास में छलहुॅ .. कि एकरा पोंछ छै. . .वा नहि .. . . ।आब .. . .जौं पोंछ नहियो हेतय .. . तैयो ई बिसवास भ’ गेल जे ई बानरे थीक .. .पोंछ विहिन बानर .. . ।हमर आत्मा जुङा गेल. . . परितृप्त भेल .. . ।हम एकरा स्वीकार करैत छी . .जे बानरक विकसित रूप मनुक्ख .. .नहिं .. .परंच .. .मनुक्ख आ’ बानरक आदि पुरूख कियो एके गोट छल होयत .. ।आब हमर भटकाव समाप्त भेल . . . लिअ .. . हम अप्पन ठाम चललहूॅ .. . ।’
तेकरा बाद तंतू त’ तंतुए रहला .. . मुदा फेर कोनो जंतु हुनका प’ कोनो उपद्रव नहिं केलकैन्ह. . . ।
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'विदेह' २३२ म अंक १५ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३२)

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