Thursday, May 07, 2009

मिथिला सन इतिहास ककर ? कविः स्वर्गीय बबुआजी झा अज्ञात

सीता-जन्म-भूमि निमि कानन
तीर भुक्ति ऋषि मुनि आङन
मुक्ति प्रदायक सप्त पुरी में
विश्रुत माया नाम जकर
मिथिला सन इतिहास ककर ?

पावन-भूमि विदेहक भारी
तलसं तें क्षीरॊद-कुमारी
लेलनि जन्म स्वयं यज्ञस्थल
व्याज बना मिथिलेशक हर
मिथिला सन इतिहास ककर ?

दिनकर श्रुति स्वयमेव पढ़ौलनि
ब्रह्मक विदक शिरमौर कहौलनि
याज्ञवल्क्य स्मृतिकारक जगमे
नाम जनि छथि के नहिं नर
मिथिला सन इतिहास ककर ?

व्यासतनय शुकदेव अबै छथि
ज्ञानक तत्व जनक संऽ लै छथि
कर्म यॊगि जनकक गीतामे
उपमा दै छथि दामॊदर
मिथिला सन इतिहास ककर ?

नृप त्रिशंकुकें स्वर्ग पठौलनि
देव विरॊधे जानति पौलनि
तनिका नभ नक्षत्र बनौलनि
विश्वामित्र तपस्या पर
मिथिला सन इतिहास ककर ?

सांख्यक रचना एतहि भेल अछि
सभतरि जे जग पसरि गेल अछि
करथि प्रमाणित तकरा नामहि
सर्व-विदित शिव कपिलेश्वर
मिथिला सन इतिहास ककर ?

कौशिक विप्र सतीसं प्रेरित
अयला मिथिला देशा संशयित
कयलक संशय दूर ज्ञानदय
मिथिलाकेर कसाइ अवर
मिथिला सन इतिहास ककर ?

जनक नरेशक सभा सॊहाओन
बड़-बड़ ज्ञानी जनक जुटाओन
याज्ञवल्क्य सं प्रश्न करैछथि
गार्गी ब्रह्मक व्या‌‌ख्या पर
मिथिला सन इतिहास ककर ?

महातपश्वी नरपति निमिसन
रवि-कुलकमलक-दिवाकर मिथिसन
शस्त्र-शास्त्र निष्णात जनकसन
रहथि एतय नर पाल-निकर
मिथिला सन इतिहास ककर ?

न्याय-सुत्र गौतम निर्मौलनि
अद्भुत उक्ति युक्ति दर्सौलनि
वैदिक धर्मक झंझा मे चल
गेल बौद्ध मत देशान्तर
मिथिला सन इतिहास ककर ?

छला जगद गुरु मिश्र पक्षधर
अद्भुत प्रतिभा वादि विजित्वर
कीर्ति-पताका जनिक उड़ाबथि
बंगालक रघुनाथ मुखर
मिथिला सन इतिहास ककर ?

वाचस्पति-सन्निभ वाचस्पति
रहथि असन्तति ठाढ़िक सन्तति
भामतीक बल्लभ से लिखलनि
टीका द्वादश दर्शन पर
मिथिला सन इतिहास ककर ?

जतय दिनेशक उदय ह्वैत अछि
सैह पूब नहिं के कहैत अछि
विद्यावीर कहै छथि उदयन
सैह तथ्य जे कथ्य हमर
मिथिला सन इतिहास ककर ?

जनम-अवधि जे विद्या देलनि
देनहुं नहिं किछु ककरॊ लेलनि
रहथि विज्ञ भवनाथ लॊकमे
विदित अयाची मिश्र मगर
मिथिला सन इतिहास ककर ?

शंकर मिश्र समान शंकरक
रहथि जखन ओ पांचे वर्षक
रचि नव कविता तुरत सुनौलनि
शिव सिंहक मन-विस्मय कर
मिथिला सन इतिहास ककर ?

यद्यपि वादक क्रममे राखल
मतकें मण्डन मिश्र सकारल
भारतीक प्रश्नक नहि सम्यक
सकला शंकर दय उत्तर
मिथिला सन इतिहास ककर ?

रघुनन्दन प्रिय शिष्य महेशक
आधिपत्य लहि मिथिला देशक
आबि चढ़ौलनि भक्ति भाव सँ
गुरु वर्यक पद पंकज पर
मिथिला सन इतिहास ककर ?

जनिका जीति सकथि नहि वाणी
भेल तनिक तेँ गाम नवाणी
बच्चा झा सन सर्व विजेता
तत्व-प्रणेता के दॊसर ?
मिथिला सन इतिहास ककर ?

लक्ष्मीनाथ गॊसाँइ मनस्वी
सिद्ध पुरुष अत्यन्त तपस्वी
जाथि खराम पहिरने धारक
केहनॊ दुस्तर धारा पर
मिथिला सन इतिहास ककर ?

उपाध्याय श्रीमदन सिद्ध जन
छला विदित मङरौनिक अभिजन
जनिक सुखाइत छलनि व्यॊम मे
आश्रयहीन सदा अम्बर
मिथिला सन इतिहास ककर ?

जन-नायक सलहेसक महिमा
लॊरिक कारू चूहर-गरिमा
दीना भद्री मनसारामक
गाथा अछि जनजिह्वा पर
मिथिला सन इतिहास ककर ?

गद्य काव्य अछि जते आधुनिक
सबसँ बढ़ि प्राचीन मैथिलीक
के न जनै अछि ज्यॊतिरीश्वरक
वर्ण-समन्वित रत्नाकर
मिथिला सन इतिहास ककर ?

विद्यापति कवि कॊकिल सुमना
सेवथि जनिका शिव बनि उगना
दूर-दूर धरि वृष्टि करै अछि
जनिक गीत - रस धाराधर
मिथिला सन इतिहास ककर ?

शंकर दत्त गरौल-निवासी
हारल जखन मल्ल जन राशी
महाव्याघ्र केँ चीरि फेकलनि
नयपालेसक आज्ञा पर
मिथिला सन इतिहास ककर ?

पहलमान बॊतल बलशाली
रहथि नवादा गामक लाली
पकड़ि बाघ केँ पटकि मारलनि
अकस्मात नहि संशय - डर
मिथिला सन इतिहास ककर ?

गॊनू झा सन धूर्त शिरॊमणि
रहथि एतय नहिँ के जनैत छनि ?
प्रत्युत्पन्न मतित्वक गाथा
के न जनै अछि आपामर ?
मिथिला सन इतिहास ककर ?


(साहित्य अकादमीक सौजन्य सँ)

मिथिलाक लुप्तप्राय गीत-हृदय नारायण झा


कला आ संगीत शिक्षा

हृदय नारायण झा, आकाशवाणीक बी हाइग्रेड कलाकार। परम्परागत योगक शिक्षा प्राप्त।

मिथिलाक लुप्तप्राय गीत



विवाह संस्कारक लुप्तप्राय गीत



मिथिला मे अत्यंत व्यापक रहल अछि विवाह संस्कार गीतक परंपरा । विवाहपूर्वहि सॅ गीतक रीत अछि मिथिलाक लोक जीवन मे । विवाह योग्य कन्याक हेतु जखन सुयोग्य वर खोजऽ लेल पिता आ अन्य संबंधी लोकनि जाइत छथि तखन जे गीत गाओल जाइत अछि से सम्मर ,कुमार ,लगन आदि गीतक नाम सॅ जानल जाइत अछि । एहने एकटा सम्मर के बानगी अछि जकर विषय सीता स्वयंवर सॅ संबंधित अछि । मिथिलाक बेटी रूप मे सर्वमान्य सीताक विवाहक ओ सम्मर एखनहुॅ बीज रूप मे ,लोककण्ठ मे

सुरक्षित किन्तु लुप्तप्राय अछि । से गीत अछि -



जानकि अंगना बहारल धनुखा उठाओल हे । आहे पड़ल पिता मुख दृष्टि पिता प्रण ठानल हे ।।

राजा राज ने भावय भाखथि रानी हे । आहे बेटी बियाहन जोग सुजोग वर खोजह हे ।।

जे इहो धनुखा कॅे तोड़त देव लोक साक्षी हे। आहे राजा हो आ कि रंक ताहि देव जानकि हे ।।

देश हि विदेश केर भूप स्वयंवर आयल हे । आहे धनुखा तोड़ल सीरी राम मंगल धुनि बाजल हे ।।



विवाह सुनिश्चित भेला पर आंगन मे लगनक गीत गेबाक परंपरा रहल अछि । विवाह सॅ पूर्व कन्या क जे कोनो विध बेवहार होइत अछि ताहि मे लगनक गीत स्त्रीगण लोकनि द्वारा समूह मे गाओल जाइत अछि । एहन पारंपरिक गीतक पद आ धुन आबक विवाह संस्कार मे लुप्तप्राय अछि । लोककण्ठ सॅ प्राप्त एहने एकटा गीत अछि -



राजा जनक जी कठिन प्रण ठानल आहो राम रामा । दुअरहि राखल धनुखिया हो राम रामा ।।

जे इहो धनुखा केॅ तोड़ि नराओत आहो राम रामा । सीता केॅ व्याहि लय जाएत आहो राम रामा ।।

देश हि विदेश केर भूप सब आएल आहो राम रामा । धनुखा केॅ छुबि छुबि जाय आहो राम रामा ।।

लंकाधिपति राजा रावण आएल आहो राम रामा । ओ हो रे घुमल आधि बटिया हो राम रामा ।।

मुनि जी के संग दुई बालक आएल आहो राम रामा । धनुखा तोड़ल सीरी राम आहो राम रामा।।



विवाहक संबंध निश्चित कऽ बाबा अबै छथि आ विवाहक दहेज आ अन्य अनुष्ठान सभक चिन्ता मे सोचैत आॅखि मूनि बिछान पर पड़ि रहै छथि । आंगन मे सभक मोन मे विवाह सुनिश्चित हेबाक आनन्द आ उत्साह अछि । इ देखि बेटी केॅ जिज्ञासा होइ छै ओ बाबा सॅ हुनक एहि भावक कारण पुछैत अछि । एहि भावक एकटा ‘ कुमार ‘गीत अछि जाहि मे बाबा आ बेटी विवाहक संबंध मे परस्पर जिज्ञासाक समाधान अछि। पारंपरिक कुमार गीतक से पद आ धुन लुप्तप्राय अछि । ओहने एकटा गीत अछि -

बेटी- नदिया के तीरे तीरे बाजन बाजल किए बाबा सूतह निचिन्त हे ।

बाबा- किछु बाबा सूतल किछु बाबा जागल किछु रे बियाहक सोच हे ।।

के हे सम्हारत एते बरियात , के हे करत कन्यादान हे ।

बेटी -भइया सम्हारत एते बरियात , बाबा करता कन्यादान हे ।।

कथिए बिना बाबा खीरीयो ने होअए ,कथी बिनु होम ने होय हे ।

कथिए बिना इहो सइरा अन्हार भेल , कथी बिनु होमा ने होए हे ।।

बाबा-दूध बिना बेटी खिरीयो ने होअए , घीउ बिनु होम ने होय हे ।

बेटा बिना इहो सइरा अन्हार भेल , धिया बिनु धर्म ने होय हे।।

मिथिलाक विवाह संस्कार मे परिछन गीतक बहुतो पारंपरिक गीत आ धुन लुप्तप्राय अछि। ओहेन किछु

धुनक परिछन गीतक उदाहरण एहि रूपेॅ देखल जा सकइछ । बेटी के लछमी आ जमाय के विष्णु रूप मे व्यक्त करैत पारंपरिक परिछन अछि -

सखी हे लछमी के दुलहा लगइ छनि कोना ? जेना विष्णु उतरि अएला अंगना ।।

सखी हे दुलहा के चानन लगइ छनि कोना ? जेना बिजुरि तरंग छिटकु नभ ना ।।

सखी हे दुलहा के केस लगइ छनि कोना ? जेना साओनक श्याम घटा घन ना ।।

सखी हे दुलहा के हाथ सोभय कंगना । जेना हरि केर हाथ सुदर्शन ना ।।

सखी हे नहूॅ नहॅू दुलहा चलइ छथि कोना । जेना सिंह चलय निरभय वन ना ।।

परिछनक बिध जखन आरंभ होइत अछि तॅ सबसॅ पहिल बिछ होइछ धुरछक अर्थात् दुलहाक स्वागतगीत । एहि मे एक सोहागिन स्त्री माथ पर कलश लऽ कऽ दुलहाक समक्ष ठाढ होइत अछि आ परिछनक डाला सजओने विधकरीक सॅग स्त्रीगण लोकनिक समूह धुरछक के गीत गबइत अछि । ओहि गीत मे दुलहा सॅ जलपूर्ण घट मे द्रव्य अर्पित करबाक संकेत होइत अछि । एहन एक गीत अछि -

सुन्दरि नवेली ठाढ़ि धुरछक गाबथि हे सोहाओन लागे ।

सोना के कलसिया नेने माथ हे सोहाओन लागे ।।

आनन्द बधावा बाजे नृप जनवासा हे सोहाओन लागे ।

दशरथ बिराजथि सुत के साथ हे सोहावन लागे।।

सुनल अवधपति दुलहा के स्वागत सोहाओन लागे ।

कलशा मे देल मानिक सात हे सोहाओन लागे ।।

तखन वशिष्ठ मुनि देल अनुशासन हे सोहाओन लागे ।

करू जाय सिया के सनाथ हे सोहाओन लागे ।।

धुरछक के बाद जे परिछनक बिध होइत अछि ताहि मे अरवा चाउरक पीसल चानन ,सिन्दुर , काजर , ठऽक ,बऽक , बेसन , भालरि ,राई ,लवण आदि विविध उपचार सॅ सजाओल डाला होइत अछि बिध बेबहारक रीत परिछन गीत में व्यक्त होइत अछि । एहने एक परिछन अछि -

सखिया परीछू दुलहा हरषि अपार हे । जेहने सलोनी धीया तेहने कुमार हे ।।

चानन सजाउ सखि ऊॅचे रे लिलार हे । काजर लगाउ सखी नयना किनार हे ।।

निहुछू लवण राई टोनमा जे टार हे । बिहुॅसब चोराबे चित दिअ पान डार हे ।।

लखिये हरैये सुधि बुधियो हमार हे । कनक परीछू खोलि अन्तर दुआर हे ।।

एहन गीत गबइत दुलहा केॅ परीछि क आॅगन विवाहक वेदीक समीप ल जेबाक परंपरा अछि । दुआर सॅ आॅगन में प्रवेश भेला पर दुलहाक आॅगन मे स्वागत होइत अछि शुभकामनाक परिछन गीत सॅ । एहि भावक शुभकामना सॅ भरल परिछन गाबि गाइनि लोकनि दुलहा दुलहिन लेल शुभ शुभ कामना गीत मे व्यक्त करैत छथि । एहन एक गीत अछि -

परीछि लिअ वर केॅ शुभे हो शुभे दूभि अक्षत निछारू शुभे हो शुभे ।।

दधि केसर सम्हारू शुभे हो शुभे लगाउ निल दिठौना शुभे हो शुभे ।।

लागे जइ सॅ नइ टोना शुभे हो शुभे नीहछू लौन राई शुभे हो शुभे ।।

नैन करू आॅजनाइ शुभे हो शुभे फूल माला सजाउ शुभे हो शुभे ।।े

पान बीड़ा पवाउ शुभे हो शुभे घ्राण बासू अतर दय शुभे हो शुभे ।।

गाल सेदू शिला दय शुभे हो शुभे मूज लए मूजिआऊ शुभे हो शुभे ।।

रही लऽ रहियाऊ शुभे हो शुभे धन्य सीता सहेली शुभे हो शुभे ।।

ब्रह्म पाओल घरहि मे शुभे हो शुभे राखु हिय कोबरहि मे शुभे हो शुभे ।।

आब आगॉ लऽ चलियनु शुभे हो शुभे बिध आगॉ करबियनु शुभे हो शुभे ।।



मिथिला मे पर्वतराज हिमालय केॅ राजा , गौरी आ भगवान शिव केॅ जमाय रूप मानि कऽ बेटीक विवाह मे शिव विवाहक परिछन गीतक परंपरा समृ( रहल अछि । शिव विवाहक एक परिछन अछि -

शुभ दिन लगन बियाहन गौरी बनि ठनि दुलहा अएला हे ।

कंठ गरल नर उर सिर माला कंठ नाग लपटएला हे ।। शुभ दिन लगन .....

भाल तिलक शशिपाल लगैला जटा मे गंग बहएला हे ।

बूढ़ बड़द असवार सदासिब डमरू डिमिक बजएला हे ।। शुभ दिन लगन .....

भूत परेत डाकिन साकिन संग जोगिन नाच नचएला हे ।

अन्हरा लुलहा बहिरा लंगरा अगनित भेस सोभएला हे ।। शुभ दिन लगन ......

स्वान सुगर सिर जाल मुखर तन संग बरियतिया लएला हे ।

नगरक लोक सब सुनि सुनि बाजनि कोठा चढ़ि कऽदेखएला हे ।। शुभ दिन लगन .....

बजर परौ बरियात भयंकर सब कोई देखि पड़ैला हे ।

साहस करि सब सखियन संग भए परिछन मैना कएला हे ।। शुभ दिन लगन .....

नाग छोड़ति फुफुकार डेरएला खसति पड़ति घर अएला हे ।

सब बरियतिया हुलसति छतिया सब जन बासा गएला हे ।। शुभ दिन लगन.....

कन्यादानक वैदिक कर्मकाण्डीय विधिक बीच कन्यादानक गीतक परंपरा सेहो नवतुरिया पीढ़ीक बीच लुप्तप्राय अछि । एहन गीत मे शिव पार्वतीक विवाहक कन्यादान गीत गेबाक परंपरा अछि । एहन एक गीत अछि -

देखियनु देखियनु हे बहिना

जनक सुनयना मणिमंडप पर सुता दान दए ना ।।

जनु मएना हिमगिरि पुनि अएला पुण्य सुकृत अयना ।

देखु दुलह दुलहिन के जोड़ी चारू रती मएना ।।

पुलकित तन हुलसैछ मगन मन फूटनि नहि बएना ।

कर पर करतै पर फल अक्षत शंख सुसोहय ना ।।

सदानंद मृदु मंत्र पढ़ावथि करथि लोक विधि ना ।

सियाराम वात्सल्य भाव रस हिय मे उमड़य ना ।।

देखियनु देखियनु हे बहिना ।।

सीता राम विवाहक जे कन्यादान गीत अछि ताहि मे बेटीक वियोगक करूणा भाव व्यक्त अछि । बेटीक प्रति माएक भाव एहन गीत मे व्यक्त होइत अछि । मुदा आबक विवाह मे ई गीत सभ लुप्तप्राय अछि । कन्यादानक एहन एक गीत अछि -

जॅघिया चढ़ाए बाबा बैसला मण्डप पर बाबा करू ने धीया दान हे ।

वर कर कंजतर ललीकर ऊपर ताही मे सोहत फल पान हे ।।

गुरू वशिष्ठ जी मंत्र उचारथि मंत्र पढ़थि सीरी राम हे ।

सब सखियन मिलि मंगल गाबथि फुलबरिसत वहु वार हे ।।

सिसकि सिसकि कानथि मातु हे सुनैना आब बेटी भेल वीरान हे ।

जाहि बेटी लेल हम नटुआ नचओलहुॅ सेहो बेटी भेल मोर वीरान हे ।।

चुपे रहू चुपे रहू मातु हे सुनयना ई थिक जग बेवहार हे ।।



बरियातीक भोजनक समय मे प्रचलित ‘जेवनार ‘ गीत सेहो लुप्तप्राय अछि । परंपरा सॅ ई प्रचलन रहल जे जखन बरियाती भोजन जेमय बैसथि तॅ हुनक स्वागत जेवनार गीत सॅ कएल जाए । एहि गीत मे हास्य विनोदक शब्द ,स्वर आ प्रस्तुति सॅ परिपूर्ण बरियातक भोजन सेहो देखऽ जोग होइत छल । आब ओहन पद सभक गायन लुप्तप्राय अछि । ओहने एकटा ‘जेवनार‘ गीत अछि -

भोर भए मिथिलापति मंदिर समधी जेमन आयो जी ।।

खोआ के गिलाबा बना के बरफी के इटावा जोरायो जी ।

इमरती जिलेबी के जॅगला लगायो गुलजामुन के खंभा लगायो जी ।। भोर भए....

पापड़ के सखी छवनी छवायो निमकी के फाटक बनायो जी ।

दही चीनी के चूना पोतायो रचि रचि महल बनायो जी ।। भोर भए ......

पूड़ी कचैड़ी बिछौना बिछायो मलपूआ के चनमा टॅगायो जी ।

लड्डू के लटकन लटकायो खाजा के झाड़ लगायो जी ।। भोर भए ....

मंदिर मे बइसल समधी जन बाजे आनन्द बधाबा जी ।

छप्पन भोग बत्तीसो बेअंजन भरि भरि सोने के थारी जी ।।

भोर भए मिथिलापति मंदिर समधी जेमन आयो जी ।।

दुलहा मे धैर्य ,विनम्रता आ सहिष्णुताक भाव जगाबऽ लेल ‘डहकन ‘गीतक परंपरा रहल अछि । मान्यता अछि जे मिथिला मे भगवान श्रीराम सेहो विवाह मे मैथिलानीक गारि सुनि कऽ प्रसन्न भेल छलाह तेॅ ई परंपरा निर्बाध प्रचलित रहल । श्री राम लला केॅ जे गारि डहकन मे सूनऽ पड़लनि तकर पद अछि -

राम लला सन सुन्दर वर केॅ जुनि पढ़ियनु कियो गारि हे ।।

केवल हास विनोदक पुछियनु उचित कथा दुई चारि हे ।। राम लला ....

प्रथम कथा ई पुछियनु सजनी गे कहता कनेक विचारि हे ।

गोरे दशरथ गोरे कोशिल्या राम भरत किए कारी हे । । राम लला ....

सुनु सखी एक अनुपम घटना अचरज लागत भारी हे ।

खीर खाय बेटा जनमओलनि अवधपुरी के नारी हे ।। राम लला ....

अकथ कथा की बाजू सजनी हे रघुकुल के गति न्यारी हे ।

साठि हजार पु़त्र जनमओलनि सगरक नारि छिनारी हे ।। राम लला .....

मिथिला मे दुलहा सॅ हॅसी मजाकक परंपरा सेहो डहकन गीत मे अछि । दुलहाक समक्ष विवाहक विविध विध बेवहार सम्पन्न कराबऽ लेल उपस्थित गाइनि लोकनि डहकन गाबि कऽ दुलहा सॅ मजाक करैत छथि आ सब लोक हठाका लगाकऽ एकर आनंद लैत अछि । एहने एक गीत मे दुलहा के संबोधित गाइनि लोकनिक भाव अछि -

दुलहा गारि ने हम दइ छी बेवहार करइ छी । हम्मर बाबा छथि कुमार अहॉ के दाई मॉगइ छी ।।

दुलहा गारि ने हम दइ छी एकटा बात कहइ छी । हम्मर बाबू छथि कुमार अहॉ के माई मॉॅगै छी ।।

दुलहा गारि ने हम दइ छी एक विचार पूछै छी । हम्मर भइया छथि कुमार अहॉ के बहिन मॉगै छी ।।

विवाहक पश्चात् दुलहा दुलहिनक शयन कक्ष कोहबर मे चारि दिन तक रहबाक जे परंपरा अछि तकर पोषण करैत अछि कोहबर गीत । एहि तरहक गीत मेे कोहबरक बिलक्षण वर्णन होइत अछि जे दुलहा दुलहिन मे परस्पर प्रेम भाव केॅ बढ़ाबऽ बला भाव जगबइत अछि । सीता रामक कोहबर गीत मिथिलाक विवाह संस्कार गीत मे विशेष प्रसि( रहल अछि । मुदा आब ई गीत आ धुन लुप्तप्राय अछि । एहने एक गीत अछि -

कंचन महल मणिन के दियरा कंचन लागल केबाड़ रे बने बॉस के कोहबर ।।

गज दन्त सेज आ फूलक बिछौना । रतन के बनल श्रृंगार रे बने बॉस के कोहबर ।।

ताहि पर सूतथि रघुवर दुलहा । सीता दुलहिन संग बाम रे बने बॉस के कोहबर ।।

यों मुख फेरि सोवे रघुवर दुलहा । दुलहिन सोवे करि मान रे बने बॉस के कोहबर ।।

दुलहा दुलहिन अंग परसि परस्पर । हरषि नयन जल छाय रे बने बॉस के कोहबर ।।



मिथिला मे विवाह संस्कारक अभिन्न अंग अछि मधुश्रावणी । एहि पर्व मे नवविवाहिता तेरह दिनक व्रत अनुष्ठान एकभुक्त पूर्वक करैत छथि । नित्य दिन अपराह्ण मे फूल लोढ़ि कऽआनबाब परंपरा अछि । एहि परंपरा मे गाम भरिक नवविवाहिताक टोली फूल लोढ़बाक गीत गावि मनोरंजनपूर्वक व्रत निष्ठाक पालन करैत अछि । नाग नागिनक पूजा कएल जाइत अछि ताहि बीच बिसहाराक गीत गाओल जाइत अछि । ई दूनू तरहक गीत आब लुप्तप्राय अछि । फूल लोढ़ऽ सॅ संबंधित गीत अछि -

दुई चारि सखी सब सामर गोरिया कुसुम लोढै़ लेै चललि मालिन फुलवरिया कुसुम लोढ़ै लए

चलली मालिन फुलबरिया ।।

मॉग मे सिन्दुर सोभे माथे पे टिकुलिया पोरिया पोरिया ना सोभे अॅउठी मुनरिया पोरिया पोरिया ना ।

हाथ मे लेल सखी फूल के चॅगेरिया से रहिया चलइ ना ताके तिरछी नजरिया रहिया चलै ना ।।

फूल लोढ़ऽ के गौरीगीत विशेष प्रचलित रहल अछि । इ गीत परंपरा सॅ आबि रहल अछि आ वर्तमानहु मे प्रचलित अछि मुदा नवतुरिया पीढ़ीक बीच लुप्तप्राय अछि । एहन एक गीत अछि -

गौरी फूल लोढ़ऽ गेली फुलबरिया संग मे सहेलिया ना ।।

केओ सखी आगॉ आगॉ चलली केओ सखी पाछॉ पाछॉ चलली ।

केओ सखी बीचे बीचे गेली फुलबरिया संग मे सहेलिया ना ।।

राधा आगॉ आगॉ चलली सीता पाछॉ पाछॉ चलली ।

गउरी बीचे बीचे चलली फुलबरिया ।। संग मे...

केओ सखी डाली भरि लोढ़लनि केओ फुलडाली भरि लोढ़लनि

केओ सखी लोढ़ि लेलनि भरि फूल डलिया ।। संग मे.....

राधा डाली भरि लोढ़लनि सीता फुलडाली भरि लोढ़लनि

गउरी लोढ़ि लेलनि भरि फूल डलिया ।।संग में.....

केओ सखी कृष्ण वर मॉगलनि केओ सखी राम वर मॉगलनि

केओ सखी मॉगि लेलनि तपसी भिखरिया ।। संग मे.....

राधा कृष्ण वर मॉगलनि सीता राम वर मॉगलनि

गउरी मॉगि लेलनि तपसी भिखरिया संग में सहेलिया ना ।।

मधुश्रावणी पूजा मे पवनइतिन जखन नाग नागिनक पूजा करइ छथि तखन हुनक सुहागक शुभकामना व्यक्त करइत बिषहारा गीत गेबाक परंपरा अछि ।

विषहारा गीत

कथी के घइला बिषहरि कथीके गेरूलि राम कथी केर डोरी सॅ भरब निरमल जल ।।

सोना के घइला विषहरि रूपा के गेरूलि राम रेशमक डोरी सॅ भरब निरमल जल ।।

घइला भरि भरि बिषहरि असरा पुराएब राम एहि पर नाग बाबूू करथि असनान ।।

ओहि पार बिषहरि माइ रोदन पसार राम छोरू छोरू आहे नाग आॅचर हमार ।।

राम रोबइत होयतीह सेवक हमार ।।

लबे लब नबेरिया भइया लबे बॉस खेब राम कोने भइया खेबनहार किये होयती पर ।।

लबे लब नबेरिया भइया लबे बॉस खेब हे भैरव भइयार खेबनहार बिसहरि होयती पार।।

जहिना जुड़ाएलि सुहबे तहिना जुड़ाउ राम तोरो कन्त जीबउ गेे सुहबे लाख बरिस ।।

लुप्तप्राय अछि विवाह संस्कारक समदाउन । समदाउनक गायन बेटीक द्विरागमनक अवसर पर स्त्रीगण लोकनिक समवेत स्वर मे होइत अछि । नवतुरिया पीढ़ीक बीच करूणा प्रधान उदासी ओ समदाउन गीतक पद आ भास प्रायः लुप्तप्राय अछि । दू विभिन्न भासक गीत उल्लेखनीय अछि -

गोर लागूूॅ पैयॉ परूॅ सुरूज गोसइयॉ बेटी केे जनम जुनि देब ।।

बेटी के जनम जुनि देब हे विधाता निरधन कोखि जन्म जुनि देब ।।

निरधन कोखि जन्म जॅओ देब हे विधाता रूप अनूप जुनि देब ।।

रूप अनूप जॅओ देब हे विधाता पुरूख मुरूख जुनि देब ।।

कहरिया भासक एक समदाउन मे सीताक नहिरा सॅ बिछोहक करूणा भाव व्यक्त अछि -

सुभग पवित्र भूमि मिथिला नगरिया । हमरा केॅ कहॉ नेने जाइ छेॅ रे कहरिया ।

बेला ओ चमेली चम्पा मालती कुसुम गाछ । आब कहॉ देखबई हाय रे कहरिया।।

सुन्दर सुन्दर वन सुन्दर सुन्दर घन सुन्दर सुन्दर सब बाट रे कहरिया ।

केरा ओ कदम्ब आम पीपर पलास गाछ । आब कहॉ देखबइ हाय रे कहरिया ।।

किनकर नयना सॅ गंगा नीर बहि गेल किनकर हृदय कठोर रे कहरिया ।

माएक नयना सॅ गंगा नीर बहि गेल बाबू के हृदय कठोर रे कहरिया ।।

केहि मोरा सॉठल पउती पेटरिया । केहि मोरा देल धेनु गाय रे कहरिया ।

माए मोरा सॉठल पउती पेटरिया । बाबू मोरा देल धेनु गाय रे कहरिया ।।

बाबा के मुॅह हम देखबइ कोना आब काकी कोना बिसरब हाय रे कहरिया ।

भाइ भतीजा आओर सखिया सलेहर आब कहॉ देखबई हाय रे कहरिया ।।

आगॉ आगॉ रामचन्द्र पाछॉ भाइ लछुमन पहुॅचि गेल झटपट अवध नगरिया।

महल मे कोसिला रानी आरती उतारए लगली अयोध्या बाजए बधाई रे कहरिया।।

मिथिला के व्यावहारिक लोकगीत मे परस्पर सहयोग एवं श्रम प्रधान गीत ‘लगनी ‘;जॅतसार द्ध गृहस्थीक

अभिन्न अंग रहल अछि । ई गीत जॉत चलबइत दू स्त्रीक स्वर मे गायनक परंपरा रहल अछि । लगनी गीत भक्तिभाव ,करूणा आ व्यवहार प्रधान हेबाक कारणेॅ परस्पर संबंध के समृ( बनेबा मे सहायक अछि । मशीनीकरणक युग मे जॉतक चलन प्रायः बन्द भऽ गेल ,मुदा दूर देहात मे एखनहुॅ कतहुॅ कतहुॅ लोक कण्ठ मे सुरक्षित अछि लगनीक गीत आ एकर भास । राधाकृष्ण भक्ति पर आधारित किछु लगनी गीत साहेबदास पदावली सॅ संकलित कए प्रस्तुत अछि ।

;1द्ध

बसहुॅ वृन्दावन मोर जीवन धन

आ रे कान्हा सुनि सुनि छतिया मोरा सालय रे की ।।

जौं तोहें जएबह हरि जियबइ ने एको घड़ी ।

आ रे कान्हा हमर सपथ तोहि माधव रे की ।।

जाहु जुनि मधुबन तेजि कहुॅ मोहन ।

आ रे कान्हा हमर सपथ तोहि माधव रे की ।।

कंस के जान हॅति दइए अधम गति ।

आ हे राधा साहेब आओत कृष्ण माधव रे की ।।



;2द्ध काहि कहब दुःख वचन ने आबए मुख ।

आ रे उधो धइरज धएलो नहि जाइछ रे की ।।

किए तेजि हरि गेल कुबुजी अधीन भेल ।

आ रे उधो केओ ने कहए एहि गोकुल रे की ।।

शरण धएल जन्हि दुःख न पाओल तनि ।

आ रे उधो सत्य निगम गुण गाओल रे की ।।

कत गुण गएबउ कत नित हम रोएबउ ।

आ रे उधो कओन साहेब हरि आनब रे की ।।



;3

कत दूर मधुपुर जतए बसए माधव । आ रे सजनी वन वन माधव मुरली टेरए रे की ।।

अनबो मे चनन काठी लिखबो मे भाति भाति । आ रे सजनी दुख सुख लिखियो बनाइए रे की ।।

एक अंधियारी राति हरि बिन फाटय छाती । आ रे सजनी कोइली शबदे हिया मोरा सालय रे की ।।

साहेब गुनि गुनि बैसलहुॅ सिर धुनि । आ रे सजनी जगत जीवन नियरायल रे की ।।

मिथिला मे प्रचलित )तुप्रधान गीत मे मलार गीत आ धुन सेहो लुप्तप्राय अछि । मिथिला मे मलार गीतक परंपरा समृ( रहल अछि । वर्तमान मे मलारक ओ गीत आ धुन लुप्तप्राय अछि । मलार गीतक किछु पद साहेबदास पदावली सॅ संकलित प्रस्तुत अछि ।



;1द्ध

अली रे प्रीतम बड़ निरमोहिया ।।

आतुर वचन हमर नहि मानए । परम विषम भेल रतिया ।।

कॉपत देह घाम घमि आवत । ससरि खसत नव सरिया ।।

आवत वचन थिर नहि आनन । बहत नीर दुहू अॅखिया ।।

रमानन्द भामिनि रहूॅ थिर भए । सुख बीच कहू दुःख बतिया ।।



;2द्ध

हे उधो लिखब कओने विधि पाती ।।

अंचल पत्र नयन जल काजर । नख लिखि नहि थिर छाती ।।

चन्द्र किरण बध करत एतय पिय । ओतय रहहु दिन राति ।।

रेशम वसन कनक तन भूषण तेसर पवन जिबघाती ।।

कहथि रमानन्द सुनु विरहिनि तोहे । आओत श्याम विरहाती ।।

हे उधो लिखब कओने विधि पाती ।।



;3द्ध

हे उधो बड़ रे चतुर घटबरबा ।।

दूर सॅ बजओलनि नाव चढ़ओलनि । खेबि लए गेल मॅझधरबा ।।

नाव हिलओलनि मोहि डेरओलनि । कएलनि अजब खियलबा ।।

आॅचर धएलनि मोहि झिकझोरलनि । तोड़लनि गजमोति हरबा।।

सुकविदास कह तुम्हरे दरस को । जुग जुग जीबए घटबरबा ।।



प्रेम ,श्रृंगार आ रति भावक अभिव्यक्ति सॅ परिपूर्ण बटगमनी गीतक परंपरा सेहो लुप्त प्राय अछि । ओना एखनहु मांगलिक अनुष्ठान मे जखन स्त्री गण लोकनिक समूह ग्राम देवता डिहबार,ब्रह्मस्थान , माटिमंगल , आम महु बियाह आदि विधि लेल ढोल पिपही बाजा के संग निकलैत छथि तॅ बाट मे बटगमनी गीत गबइ छथि । मुदा नब पीढ़ीक मैथिल ललनाक बीच ओहि उमंग उत्साह आ प्रगल्भताक अभाव तॅॅॅ अछिए ,ओहन गीतक प्रति उदासीनताक कारणेॅ ओ बटगमनी गीत सभ लुप्त प्राय अछि । ओहने किछु संग्रहित बटगमनी प्रस्तुत अछि ।

स्नेहन , चुम्बन , आलिंगन ,राग आ अनुराग युक्त संभोगक वर्णन नायिकाक उक्ति मे प्रस्तुत बटगमनी अछि -

कॉच कली पहु तोड़थि सजनी गे , लए कोरा बैसाए सजनी गे ।।

अधर सुधा सम पीबथि सजनी गे , यौवन देखि लोभाय सजगी गे ।।

लए भुजपाश बान्हि दुनू सजनी गे, जखन करथि बरजोरि सजनी गे ।।

तखनुक गति की कहिए सजनी गे, पहु भेल कठिन कठोर सजनी गे ।।

नहि नहि जौं हम भाखब सजनी गे , तौ राखिए मन रोख सजनी गे ।।

पति जखन बहुतो दिन पत्नी केॅ विरह मे व्याकुल केलाक बाद अबैत अछि तॅ पति सॅ मिलनक उत्साह

केहन भऽसकैत अछि ? बहुत दिनक बाद परदेश सॅ आएल पति सॅ मिलन हेतु की की तैयारी आ साज श्रृंगार करबाक उत्कंठा होइत अछि , तकर वर्णन करैत बटगमनी अछि -

कतेक दिवस पर प्रीतम सजनी गे आएल छथि पहु मोर सजनी गे ।।

मन दए नेह लगाएब सजनी गे , रचि रचि अंक लगाएब सजनी गे ।।

पहु थिक चतुर सयानहि सजनी गे , हम धनि अंक लगाएब सजनी गे ।।

ई दिन जौं हम काटब सजनी गे , तखन करब बर गान सजनी गे ।।

गाबि सुनेबनि हुनकहुॅ सजनी गे , पहु करता बड़ मान सजनी गे ।।

नाटक- संकर्षण - गजेन्द्र ठाकुर

खण्ड-५
नाटक


संकर्षण

(एक-एक अंकक दू कल्लोल आ दू-दू अंकक तीनटा कल्लोल- माने पाँच कल्लोलक अन्तर्गत आठ अंकक मैथिली नाटक)
पात्र परिचय
संकर्षण- अभिनेता आ खलनायक दुनू- लिकलिक करैत भूत सन कारी रंग, कतेक कारी से ओहि खापड़िकेँ देखि लिअ ततेक।
संकर्षणक बाबू
संकर्षणक कनियाँ
भाष्कर
भाष्करक बाबूजीक संगी
बंगाली बाबू
कलक्टर
कलक्टरक स्टेनो
तीन टा कारी कुकूर- एकर अभिनय तीन गोटे कारी कपड़ा पहिड़ि कऽ सकैत छथि
एकटा हलवाई- मधुरक दोकानक मालिक हिनका लग मिठाई छनबाक कराह, बड़का मोटगर बड़दामी, एकटा मोटगर लाठी आ एक गोटे कर्मचारी रहतन्हि तँ हिनका अभिनयमे सुविधा हेतन्हि।
हलवाई जीक कर्मचारी लुत्ती झा तखन अबस्से
एकटा शिवलिंग-मन्दिर, फेर कनेक उजरा दूध- चूनकेँ घोरि बना सकैत छी।
एकटा पुजेगरी आ बड़ रास भक्त- किछु गोटे दर्शककेँ बजा कए सम्मिलित सेहो कए सकैत छी।
गोनर भाइ
नित्या काका
जयराम
लाल काका
लाल काकी
घटक
दू टा पुलिस आ एकटा ओकर अफसर
एकटा बूढ़ी- ट्रेनक पसिन्जर
चोर बजारक दोकानदार, बजारमे आन दोकानदार आ भीड़-भरक्का



पहिल कल्लोल- पहिल अंक
(गाम।लगक जिला कार्यालय जतए गामक लोकक आँखिमे दुनियाँक सभसँ पैघ हाकिम कलक्टर बैसैत छथि। जकरा अभिनेता-अभिनेत्री कालिदासक “इति शरसंधानं नाटयति” जेकाँ सांकेतिक रूपमे देखा सकैत छथि। बादमे ट्रेनक यात्राक आ दिल्ली नगरक वर्णन सेहो अहिना कऽ सकैत छथि।)
(भाष्कर अपन दलानपर बैसल छथि आकि ओम्हरसँ संकर्षण अबैत छथि।)

संकर्षण: भाष्कर भाइ, सुनलहुँ कोनो काज अटकल अछि।
भाष्कर: हँ भाइ। कलक्टर ऑफिसमे एकटा काज ओझरायल अछि।
संकर्षण: कोनो काज पड़लापर हमरासँ कहब। कलक्टरक ओहिठाम भोर-साँझक बैसारी होइत अछि हमर। घंटाक-घंटा बैसल रहैत छी, आबए लगैत छी तँ रोकि कऽ फेर बैसा लैत अछि, दोसर-दोसर गप सभ शुरू कए दैत अछि।
भाष्कर: ठीक छैक भाइ जी। कोनो जरूरी पड़त तँ कहब। नाम की छन्हि हुनकर सेहो नहि बुझल अछि हमरा।
संकर्षण: बड्ड नमगर नाम छन्हि, भा.प्र.से. प्रशांत। आब भा.प्र.से. केर पूर्ण रूप हुनकासँ के पुछतन्हि, से प्रशांते कहैत छन्हि।
भाष्कर: भारतीय प्रशासनिक सेवाक संक्षिप्त रूप छैक भा.प्र.से., ई हुनकर नामक अंग नहि हेतन्हि।
संकर्षण: अच्छा तँ फेर सैह होयतैक। ताहि द्वारे नेम-प्लेट पर नामक नीचाँमे ई लिखल रहैत छैक, भा.प्र.से.।
भाष्कर: ठीक छैक भाइ जी। कोनो जरूरी पड़त तँ अहाँकेँ कहब।
(संकर्षण चलि जाइत छथि आ भाष्कर सोचए लगैत छथि जे परुकाँ जखन एकटा आन काज संकर्षणसँ पड़ल रहए तँ ओ की कहने रहथि, भाष्कर सोचिते छथि आकि कनेक दूरमे पछुलका गपक वर्णनक लेल नाटकक निर्देशक संकर्षणकेँ मंचपर कनेक दोसर कात बजा लैत छथि।)
भाष्कर: (मोनहि मोन) ईहो कमाल छथि परुकाँ जे काज पड़ल रहए तँ बजैत रहथि जे...
संकर्षण: परुकाँ साल किएक नहि कहलहुँ, ककर-ककर काज नहि करएलहुँ। मुदा एहि बेर तँ कोनो जोगारे नहि अछि। कहियो कोनो काज नहि कहने छलहुँ आ आइ कहलहुँ तँ हमरासँ नहि भऽ पाबि रहल अछि। आ से जानि कचोट भऽ रहल अछि।
(संकर्षण फेर चलि जाइत छथि, भाष्कर सेहो जाइत छथि मुदा तखने संकर्षण फेर अबैत छथि।)
संकर्षण: सत्यार्थीक बाल-बच्चा सभ बड़ टेढ़। कहियो घुरि कए नहि आयल छल भेँट करए। आ आइ काज पड़ल छैक तखन आयल अछि।
(संकर्षण फेर चलि जाइत छथि, भाष्कर तखने अबैत छथि।)

भाष्कर: (एकटा पुरान गप सोचैत- बाबूजीक संगी एक दिन वात्सल्यसँ एक बेर कोनो बङ्गाली बाबूकेँ, भाष्करक सोँझामे एक गोट बड़ नीक गप कहने छलाह।)
भाष्करक बाबूजीक संगी: (मंचक दोसर कात कोनो बंगाली बाबूकेँ भाष्करकेँ देखबैत आ कहैत) देखू दादा। ई छथि भाष्कर। हमर अत्यंत प्रिय मित्र सत्यार्थीक बेटा।
बंगाली बाबू: हुनकर बेटा तँ बड्ड छोट छल।
भाष्करक बाबूजीक संगी: यैह छथि। अहाँ बड्ड दिन पहिने देखने छलियन्हि तखन छोट छलाह, आब पैघ भए गेल छथि। कहैत छलहुँ जे हिनकर पिता हिनका लेल किछु नहि छोड़ि गेलाह। मुदा हमर पिताक मृत्यु १९६० ई. मे भेल छल आ हमरा लेल ओ नगरमे १२ कट्ठा जमीन, एकटा घर आ एकटा स्कूटर ओहि जमानामे छोड़ि गेल छलाह। आ आब ज्योँ ई बच्चा ककरो लग कोनो काजक लेल जायत, तँ एकरा उत्तर भेटतैक जे परुकाँ किएक नञि अएलहुँ आ परोछमे कहतन्हि, जे काज पड़लन्हि तखन आयल छथि।
बंगाली बाबू: ई तँ गलत बात।
भाष्करक बाबूजीक संगी: मुदा एकरा जखन समस्या पड़लैक तखने अहाँकेँ पुछबाक चाही छल, मुदा से तँ अहाँ नहि पुछलियन्हि। आ अहाँक लग आयल अछि, तखन अहाँ उल्टा गप करैत छी। आ ज्योँ ई बच्चा सहायताक लेल नहि जायत आ अपन काज स्वयं कए लेत आ ओहि श्रीमानकेँ से सुनबामे आबि जएतन्हि, तँ उपकरि कए अओताह आ पुछथिन्ह जे काज भऽ गेल आकि नहि। कहलहुँ किएक नहि। आ तखन ई बच्चा कहत जे काज भऽ गेल, भगवानक दया रहल। से दादा क्यो कोनो काजक लेल आबए तँ बुझू जे कुमोनसँ आयल अछि आ समस्या भेले उत्तर आयल अछि आ तेँ ओकर सहायता करू।
(भाष्करक बाबूजीक संगी आ बंगाली बाबू चलि जाइत छथि। भाष्कर सेहो चलि जाइत छथि।)
पहिल कल्लोलक दोसर अंक
(कलक्टरक ऑफिस। कलक्टरक चेम्बर। बाहर स्टेनो बैसल, मंचपर दोसर कातमे स्थान दऽ दियन्हु। भाष्कर कलक्टरसँ किछु गप कऽ रहल छथि। दू टा कुरसी तेना कऽ राखि दियौक जे भाष्कर जी आबथि तँ कलक्टरक मुँह सोझाँ पड़न्हि मुदा भाष्करक पीठ देखा पड़न्हि, मुँह नहि। भाष्कर कोनो काजे कलक्टरक ऑफिस गेल छथि। गपशप भइए रहल छन्हि आकि संकर्षण धरधड़ाइत चैम्बरमे अबैत छथि।)

कलक्टर: (तमसा कए) बाहर जाऊ देखैत नहि छी गप भऽ रहल अछि।
(संकर्षण बाहर रूमसँ निकलि स्टेनोक कक्षमे बैसि रहलाह। १०-१५ मिनटक बाद- जरूरी नहि एतेक काल भाष्कर आ कलक्टर गप करथि, घड़ी देखि १०-१५ मिनट १५ सेकेन्डमे खतम कएल जा सकैत अछि। जखन भाष्कर बाहर निकललाह तँ स्टेनोक रूमसँ संकर्षण बहराइत छलाह। एहि बेर संकर्षणक पीठ भाष्करक सोझाँ छलन्हि आ ताहि द्वारे एहि बेर सेहो दुनू गोटेमे सोझाँ-सोँझी नहि भऽ सकल। तखने पटाक्षेप करबाऊ । पटाक्षेपक बाद गामपर दुनू गोटे पहुँचैत देखल जाइत छथि)
भाष्कर: कहू संकर्षण। कतएसँ आबि रहल छी।
संकर्षण: ओह। की कहू कलक्टर साहेब रोकि लेलन्हि। ओतहि देरी भऽ गेल।
भाष्कर: हुनकर स्टेनोसँ सेहो भेँट भेल रहय?
संकर्षण: नहि। ओना बहरएबाक रस्ता स्टेनोक प्रकोष्ठेसँ छैक। मुदा ओ सभ तँ डरे सर्द रहैत अछि।
(तखन भाष्करकेँ नहि रहल गेलन्हि आ एकटा खिस्सा सुनबए लगलाह ओ संकर्षणकेँ। आब एतए कारी वस्त्र पहिरने तीन टा अभिनेता भों-भों करैत जेना कुकुर होथि, मंचक दोसर कात आबि जाइत छथि।)
भाष्कर: संकर्षण। सुनू, एकटा खिस्सा सुनबैत छी। तीन टा कारी कुकुर छल। एके रङ-रूपक। ओकरा सभकेँ मोन भेलैक जे गरमा-गरम जिलेबी मधुरक दोकान जा कए खाइ। से बेरा-बेरी ओतए जएबाक प्रक्रम शुरू भऽ गेल।
(खिस्सा शुरू होइते भाष्कर आ संकर्षण मंच सँ हटि जाइत छथि। बीच-बीचमे भाष्करक अबाज मंचक पाछाँसँ अबैत अछि।)
भाष्कर: (मंचक पाछाँसँ) पहिने पहिल कुकुर पहुँचल ओहि दोकान पर।
(मधुरक दोकान। मालिक अपन कर्मचारी संगे झाँझसँ जिलेबी छानि रहल छथि। तखने मालिक देखलनि जे कुकुर दोकानमे पैसि रहल अछि, से बटखरा फेंकि कए ओकरा मारलक। पहिल कुकुर-बेचाराकेँ बड़ चोट लगलैक। मुदा जखन घुरि कए गाम पर- माने मंचक दोसर कात अपन दोसर दुनू संगी लग पहुँचल तँ पुछला पर सुनू की कहलक।)
दोसर कुकुर: की भाइ केहन रहल।
तेसर कुकुर: बड्ड अगराइत चलैत आबि रहल छी।
पहिल कुकुर: (पीठपर बटखराक चोटपर हाथ दैत) एह की कहू। बड़ सत्कार भेल। बटखरासँ जोखि कए जिलेबी खएबाक लेल भेटल। बटखरासँ जोखैत गेल, दैत गेल, पैघ बटखरा, छोट बटखरा, सभसँ जोखि-जोखि दैत गेल।
दोसर कुकुर: तखन हमहीं किएक पाछाँ रहब सत्कार कराबएमे।
(आब दोसर कुकुर अपनाकेँ रोकि नहि सकल आ अपन सतकार करएबाक हेतु पहुँचि गेल मधुरक दोकान पर। रूप-रङ तँ एके रङ रहए ओकरा सभक, से मधुरक दोकानक मालिककेँ भेलैक जे वैह कुकुर फेरसँ आबि गेल अछि। ओ पानि गरम कए रहल छल।)
मधुरक दोकानक मालिक: (भरि टोकना धीपल पानि ओहि कुकुरक देह पर फेकैत) देखू ई फेर आबि गेल। पछिला बेर बटखारा फेंकि कए मारलियैक तकर बाद जे आएल तँ यैह टा ने उपाए बाँचल रहए।
(बेचारा कुकुर जान बचा कए भागल। आब गाम पर- माने मंचक दोसर कात पहुँचला पर ओकरा तेसर कुकुर पुछलकैक-)
तेसर कुकुर: केहन सत्कार भेल।
दोसर कुकुर: की कहू। (पीठपर गरम पानिसँ जरल स्थानकेँ छुबैत) गरमा-गरम जिलेबी छानि कए खुएलक। बड़ नीक लोक अछि मधुरक दोकानक मालिक। छनैत गेल आ गरमागरम खुआबैत गेल।
(तेसर कुकुरक मोन लसफसा जाइत छैक। ओ निकलैत अछि अपन सत्कार कराबए लेल।)
तेसर कुकुर: तखन हमहूँ चलैत छी अपन सत्कार कराबए।
(दोकानपर हल्ला भऽ रहल छैक जे शिवलिंग दूध पीबि रहल छथि, सोर भऽ रहल अछि।)
मधुरक दोकानक मालिकक कर्मचारी लुत्ती झा: महादेव भगवान दूध पीबि रहल छथि, चलू ने कनेक अपनो सभ दूध पिया आबी।
मधुरक दोकानक मालिक: सत्ते लुत्ती झा। चलह देखी।
(तेसर कुकुर दोकानमे पैसैत अछि आकि मालिक आ लुत्ती झा सटर खसा दैत छैक। बेचारा बन्न भऽ जाइत अछि। मालिक आ लुत्ती झा मन्दिर पहुँचैत छथि, एकटा लोटामे दूध लऽ कए।)
मधुरक दोकानक मालिक: (मन्दिर लग भीड़ देखैत) एक्के लोटा दूध अछि, तोँ जेबह आकि हम जाइ।
लुत्ती झा: अहीं जाऊ ने। एक्के गप ने छैक।
(मालिक दूध चढ़ा कए देखैत छथि, सभटा दूध नाली बाटे बाहर निकलि जाइत छन्हि।)
मधुरक दोकानक मालिक: (स्वतः सोचैत बाहर निकलैत) भगवान सभक हाथे दूध पीलन्हि मुदा हम जे सभकेँ कहबैक जे हमरा हाथे नहि पीलन्हि तँ सभ कहत जे हम पापी छी तेँ भगवान हमरा हाथे दूध नहि पीलन्हि।
लुत्ती झा: की मालिक। महादेव दूध पीलन्हि।
मधुरक दोकानक मालिक: हँ हौ लुत्ती झा। एतेक प्रतिष्ठित जीवन बिता रहल छी से महादेव सभक हाथे दूध पीलन्हि तँ हमरो हाथे पीलन्हि।
(दुनू गोटे दोकान खोलैत छथि तँ फेरसँ कारी कुकुर देखैत छथि। मालिकक सौँसे देह पित्त लहरि गेलन्हि।)
मधुरक दोकानक मालिक: लुत्ती झा। भागए नहि पाबए ई। दू बेरमे मोन नहि भरलैक। रस्सा ला, लाठी लाबह।
(दुनू गोटे रस्सामे बान्हि कऽ कुकुरकेँ लाठीसँ पुष्ट पिटान पिटैत छथि। फेर बेचारा कोहुना बन्हन छोड़ा कऽ लँगड़ाइत गाम दिस पड़ाइत अछि। ओतए पहिल आ दोसर कुकुर छथि।)
पहिल कुकुर: अहाँकेँ तँ बड्ड काल लागि गेल, की की सत्कार भेल।
दोसर कुकुर: हँ ठीके। बड़ी काल लागल, दोकान तँ बन्न नहि रहए।
तेसर कुकुर: बड्ड सत्कार भेल। आबैये नहि दैत रहथि। कहैत रहथि जे आर खाऊ, आर खाऊ। कोहुना कऽ जान बचा कऽ आएल छी जे आब नहि खाएल जएत, पेट फाटि जएत। (लङराइत) देखैत नहि छी जे चलियो नहि भऽ रहल अछि।
(तीनू कुकुर जाइत छथि आ भाष्कर आ संकर्षण मंचपर अबैत छथि।)
भाष्कर: सुनलियैक संकर्षण ई खिस्सा। से जखन कलक्टर अहांकेँ दबाड़ि रहल छल तखन ओकरा सोझाँ हमही बैसल छलहुँ। हमर पीठ अहाँक सोझाँ छल तेँ अहाँ हमरा नहि देखि सकलहुँ। फेर अहाँ स्टेनोक प्रकोष्ठमे किछु काल बैसलहुँ आ जखन ओतएसँ बाहर निकललहुँ तँ लोक सभकेँ भेल होएतैक, जे अहाँ कलक्टरसँ ओतेक काल धरि गप कए रहल छलहुँ। मुदा कोनो बात नहि। हम ई गप ककरो नहि कहबैक। मुदा आजुक बाद मिथ्या कथनसँ अहाँ अपनाकेँ दूर राखू।
(संकर्षण मुँह गोतने बैसल रहलाह।)

भाष्कर: आउ, मुरहीक भुज्जा बनबैत छी।
(दुनू गोटे भुज्जा फाँकय लगैत छथि।)

दोसर कल्लोल पहिल अंक
(पुरनका गामक दृश्य। जयराम दौगल-दौगल अबैत छथि। संकर्षण सोझाँ छथि।)

जयराम: संकर्षण। नीक भेल भेटि गेलहुँ। नित्या काका लग जाइत रही मुदा ओतए जाइत-जाइत देरी भऽ जएत। ननकिड़बाक मोन बड्ड खराप छैक। बोखार, रद्द-दस्त सभ एक्के-बेर शुरू भऽ गेल छैक।
संकर्षण: धुर बताह, पसीझक काँटक रस पिआ ने दहीं। हम जाइत छी महीँस चरेबाक लेल डीह दिशि। कोनो चिन्ता जुनि करब। जुल्मी दबाइ छैक। एक्के चोटमे सभ बेमारी खतम।
(संकर्षण एक दिस आ जयराम दोसर दिस जाइत छथि। फेर नित्या काका एक दिससँ आ जयराम दोसर दिससँ अबैत छथि।)
नित्या काका: की जयराम? कलम दिससँ की आनि रहल छी।
जयराम: की कहू काका। ननकिड़बाकेँ बोखार, रद्द-दस्त सभ एक्के-बेर शुरू भऽ गेल छैक। संकर्षण कहलन्हि जे पसीझक काँटक रस पिआ देबा लेल सभ बेमारी खतम भऽ जएतैक। सैह आनए लेल गेल रही।
नित्या कक्का: ई संकर्षण बड़ बुरि अछि। परुकाँ पसीझक काँटक रस पोखरिमे दऽ कए सभटा माँछ मारि देने रहए ई। ई जहर बच्चाकेँ पिएबन्हि तँ मोन ठीक नहि होएतन्हि, सोझे प्राण निकलि जयतन्हि। चलह दबाइ-दोकान दिस, दबाइ दिअबैत छिअह।
(दुनू गोटे जाइत छथि आ ओम्हर डीहपर महींसक पीठपर संकर्षण बैसल देखबामे अबैत छथि। दोसर दिससँ एकटा दोसर महिसबार गामपरसँ आबिये रहल छथि।)
संकर्षण: की भाइ, गामेपरसँ आबि रहल छी।
महिसबार: हँ भाइ।
संकर्षण: जयरामक टोलसँ कन्नारोहटो सुनबामे आएल रहए।
महिसबार: कन्नारोहट तँ नहि, मुदा डिहबारक स्थानपर पंचैती बैसल अछि, अहाँकेँ बजाबए लेल हम आएल छी।
(महिसबार संकर्षणकेँ लेने मंचसँ जाइत छथि। फेर पंच सभक लग सभ फेरसँ अबैत छथि आ संकर्षणपर सभ थू-थू करैत छथि। घोँघाउज होइत अछि आ संकर्षणपर दण्ड सेहो लगैत छन्हि।)
संकर्षण: हम अपन घट्टी मानैत छी आ आइ दिनसँ कंठी लऽ रहल छी। दण्ड सेहो काल्हि साँझ धरि दऽ देब।
(पटाक्षेप होइत अछि।)

दोसर कल्लोल दोसर अंक
(संकर्षण भोरे- भोर खेत दिशि कोदारि आ छिट्टा लए बिदा भेल छथि। बुन्ना-बान्नी होइत छल। तखने आरिकेँ तरपैत एकटा पैघ रोहुकेँ देखि कए संकर्षण कोदारि चला देलन्हि। आ रोहु दू कुट्टी भऽ गेल।)
संकर्षण: आरौ तोरी के। आब दोसर काज छोड़ी आ गामपर चली।
(दुनू ट्कड़ीकेँ छिट्टामे राखि माथ पर उठा कए विदा भेलाह संकर्षण गाम दिशि। तकरा देखि हुनकर समवयस्क गोनर भाए गाम पर जाइत काल गामक बाबा दोगही लग ठमकि कए ठाढ़ भए गेलाह।)
गोनर भाइ: (मोनमे सोचैत छथि ) वैष्णव जीसँ रोहु कोना कए लए ली। (प्रत्यक्ष भऽ) यौ संकर्षण भाइ। ई की कएलहुँ। वैष्णव भऽ कए माछ उघैत छी।
संकर्षण: रौ गोनर। हमर बतारी छह मुदा तैयो हम तोहर भाइ कोना भेलियह। तोरा बुझल नहि छह जे जतए तोँ ठाढ़ छह से कहबैत छैक बाबा दोगही। एतए जनमलो बच्चा गामक लोकसँ सम्बन्धमे बाबा होइत अछि।
गोनर भाइ: ठीके कहलहुँ संकर्षण। मुदा हम कहैत रही जे......
संकर्षण: (गप काटैत) रौ माछ खायब ने छोड़ने छियैक। मारनाइ तँ नञि ने।
(अपन सनक मुँह लए गोनर भाइ विदा भए गेलाह। फेर दुनू गोटे मंचसँ जाइत छथि आ फेर अबैत छथि। गोनर झा टेलीफोन डायरी देखि रहल छथि।)
संकर्षण: की देखि रहल छी।
गोनर झा: टेलीफोन नंबर सभ लिखि कए रखने छी, ताहिमे सँ एकटा नंबर ताकि रहल छी।
संकर्षण: आ ज्योँ बाहरमे रस्तामे कतहु पुलिस पूछि देत जे ई की रखने छी तखन।
गोनर झा: ऐँ यौ से की कहैत छी। टेलीफोन नंबर सभ सेहो लोक नहि राखय।
संकर्षण: से तँ ठीक। मुदा एतेक नंबर किएक रखने छी, ई पुछला पर ज्योँ जबाब नहि देब तँ आतंकी बुझि पुलिस जेलमे नहि धए देत?
गोनर झा: से कोना धए देत। एखने हम एहि डायरीकेँ टुकड़ी-टुकड़ी कऽ कए फेंकि दैत छियैक।
(गोनर भाइ ओहि डायरीकेँ फाड़ि-फूड़ि कए फेंकि दैत छथि।)

तेसर कल्लोल
(संकर्षणक बाबू दलानपर बैसल छथि। एक गोट घटक चूड़ा-दही-मधुर सरपेटने जा रहल छथि।)
घटक: मीतक चेहरापर जे पानि छन्हि से लोक नञि देखैत अछि। कारी टुहटुह छथि संकर्षण कारी-खटखट नहि। चन्सगर छथि।
संकर्षणक बाबू: हे एकटा आर मधुर लियौक ने।
घटक: दियौक। यौ लाइन लागि जएत लड़की बलाक। धरफराऊ धरि जुनि।
(ओ घटक जाइत छथि आकि दोसर घटक अबैत छथि आ ओहो इशारामे गप करैत चलि जाइत छथि।)
संकर्षणक माए: हे एकटा कन्यागत अओताह आइ। लाल काकीक फोन आएल छन्हि दिल्लीसँ।
संकर्षणक बाबू: शरबत घोरि कए राखू तखन। कागजी नेबो तँ घटक सभकेँ शरबत पियाबैत-पियाबैत खतम भऽ गेल देखैत छी गाछमे जमीरी नेबो सेहो बाँचल अछि आकि नहि।

(मंचसँ सभ जाइत छथि आ बुझना जाइत अछि जे संकर्षण सासुरसँ आएले छथि, कनेक मोट भऽ गेल छथि। गोनर भाइ रस्तामे भेटि जाइत छथिन्ह।)
गोनर भाइ: मीत यौ, कनिया केहन छथि, पसिन्न पड़लथि ने।
संकर्षण: हँ, हँ जगन्नाथ भाइ। बड़ सुन्दर छथि। हेमामालिनीकेँ देखने छियन्हि? एन-मेन ओहने।
गोनर भाइ: अच्छा।
संकर्षण: मुदा रंग कनेक हमरासँ डीप छन्हि।
(गोनर भाइ मुँह बाबि दैत छथि। दुनू गोटे मंचसँ जाइत छथि आ फेर अबैत छथि। संकर्षण हाथमे लोटा लेने पोखरि दिशि जा रहल छथि तँ गोनर गोबर काढ़ि छथि। बगलमे गोनर भाइक कनियाँ ठाढ़ि रहथिन्ह।)
गोनर भाइ: यौ मीत, हमरे जेकाँ अहूँ सभकेँ भोरे-भोर गोबर काढ़य पड़ैत अछि?
(संकर्षण देखलन्हि जे गोनरक कनिञा सेहो बगलमे ठाढ़ि छलखिन्ह। से एखन किछु कहबन्हि तँ लाज होएतन्हि। से बिनु किछु कहने आगू बढ़ि गेलाह। जखन घुरलाह तँ.........)
संकर्षण: भाइ, पहिने बियाहमे पाइ देबय पड़ैत छलैक, से अहाँकेँ सेहो लागल होएत। ताहि द्वारे ने उमरिगरमे बियाह भेल।
गोनर भाइ: हँ से तँ पाइ लागले छल।
संकर्षण: मुदा हमरा सभकेँ पाइ नहि देबय पड़ल छल आ ताहि द्वारे गोबरो नहि काढ़य पड़ैत अछि, कारण कनियाँ ओतेक दुलारू नहि छथि ने।
(गोनर भाइ मुँह बाबि दैत छथि। दुनू गोटे मंचसँ जाइत छथि आ फेर अबैत छथि।)
गोनर भाइ: सर्दमे गुरसँ खूब लाभ होइत छैक, ई ठेही हँटबैत अछि। गूरक चाह पीब मीत।
मीत भाए: (स्वगत) किछु दिन पहिने गोनर एहि गपक चर्च कएने छलाह जे ओ जोमनी छोड़्ने छलाह तीर्थस्थानमे आ तैँ जोम खाइत छलाह। हरजे की एहिमे। अधिक फलम् डूबाडूबी। (प्रत्यक्ष) परुकाँ जे पुरी जगन्नाथजी गेल छलहुँ, से कोनो एकटा फल छोड़बाक छल से कुसियार छोड़ि देलहुँ। आ कुसियारेसँ तँ गुर बनैत छैक। चुकन्दरक पातर रसियन चीनी बला चाहे ने पिआ दिअ।
(गोनर भाइ मुँह बाबि दैत छथि। दुनू गोटे मंचसँ जाइत छथि आ फेर अबैत छथि। लगैत अछि जे पन्द्रह बरिखक बादक गप अछि। दुनू गोटे उमरिगर भऽ गेल छथि।)
संकर्षण: यौ,लोक सभ यौ लोक सभ। लाल काका बियाह तँ करा देलन्हि मुदा तखन ई कहाँ कहलन्हि जे बियाहक बाद बेटो होइत छैक। जबान बेटा घर छोड़ि भागि गेल। आब की करब ?
गोनर भाइ: हो नहि हो दिल्लीये गेल होएत। सभ ओतहि जाइत अछि भागि कऽ।
संकर्षण: आब बेटाकेँ ताकए लेल आ बेटाक नहि भेटला उत्तर अपना लेल नोकरी तकबाक हेतु हमरो दिल्लीक रस्ता धरए पड़त।
(निर्देशक पाछाँ सँ बजैत छथि- दिल्लीक रस्तामे संकर्षणक संग की भेलन्हि हुनकर बुधियारी आकि कबिलपनी काज अएलन्हि वा नहि, एहि लेल कनेक धैर्य राखए पड़त। कारण ट्रेनक सवारी अछि आ मंच कलाकार उत्साहित छथि मुदा देखिनहार थाकल बुझि पड़ैत छथि। पटाक्षेप होइत अछि।)

चारिम कल्लोल
(ट्रेनक दृश्य। संकर्षण जनकपुरसँ जयनगर अबैत छथि से जनकपुर आ जयनगरक बोर्ड लगा कए मंचित कएल जा सकैत अछि। जयनगर मे ट्रेनपर संकर्षण चढ़ैत छथि । ट्रेन खुजैत अछि आ संकर्षण ट्रेनमे कोनहुना बैसैत छथि।)
एकटा बूढ़ी: (संकर्षणसँ) बौआ कनेक सीट नञि छोड़ि देब।
संकर्षण: माँ। ई बौआ नहि। बौआक तीन टा बौआ।
(बूढ़ी मुँह बाबि लैत छथि। ट्रेन आगाँ बढ़ैत अछि अलीगढ़मे पुलिस आयल बोगीमे। संकर्षणक झोड़ा-झपटा सभ देखए लगलन्हि। चेकिंग किदनि होइत छैक से। ताहिमे किछु नहि भेटलैक ओकरा सभकेँ। हँ खेसारी सागक बिड़िया बना कए संकर्षणक कनियाँ सनेसक हेतु देने रहथिन्ह, लाल काकीक हेतु। मुदा पुलिसबा सभ एहिपर हुनका लोकि लेलकन्हि।)
सिपाही एक: ई की छी।
संकर्षण: ई तँ सरकार, छी खेसारीक बिड़िया।
सिपाहीक अफसर: अच्छा, बेकूफ बुझैत छी हमरा। मोहन सिंह बताऊ तँ ई की छी।
सिपाही दू: गाजा छैक सरकार। गजेरी बुझाइत अछि ई।
सिपाहीक अफसर: आब कहू यौ सवारी। हम तँ मोहन सिंहकेँ नहि कहलियैक, जे ई गाजा छी। मुदा जेँ तँ ई छी गाजा, तेँ मोहन सिंह से कहलक।
संकर्षण: सरकार छियैक तँ ई बिड़िया, हमर कनियाँ सनेस बन्हलक अछि लाल काकीक..........
सिपाही एक: लऽ चलू एकरा जेलमे सभटा कहि देत।
(संकर्षणक आँखिसँ दहो-बहो नोर बहय लगैत छन्हि। मुदा सिपाही छल बुझनुक।)
सिपाही दू: कतेक पाइ अछि सँगमे।
(दिल्लीमे स्टेशनसँ लालकाकाक घर धरि दू बस बदलि कए जाए पड़ैत छैक। से सभ हिसाब लगा कए बीस टाका छोड़ि कए पुलिसबा सभटा लऽ लेलकन्हि। हँ खेसारीक बिड़िया धरि छोड़ि देलकन्हि। पाइक आदान प्रदान भेल। पुलिसबा सभ उतरि गेल। संकर्षण सेहो कनेक कालक बाद दिल्ली स्टेशनपर उतरि गेलाह। फेर मंचपर लाल काका, लाल काकी आ संकर्षण ड्राइंग रूममे बैसल छथि।)
लाल काका: (फोनपर) अच्छा। ई तँ नीक खबरि सुनेलहुँ। मीत तँ रहैत छथि, रहैत छथि की सभटा गप सोचा जाइत छलन्हि आ कोढ़ फाटि जाइत छन्हि। (फोन राखैत) सुनलियै यै। मीतक बेटा गाम पहुँचि गेलन्हि।
लाल काकी: बाह। रच्छ भगवान। मुदा बौआ ई सप्पत खाऊ जे आब पसीझक काँट जेहन हँसी नहि करब। (लाल काका दिस मुँह कए) हिनकर नोकरीक की भेलन्हि।
संकर्षण: नोकरी-तोकरी नहि होयत काकी हमरासँ। सप्पत खाइत छी जे पसीझक काँट बला हँसी आब नहि करब। आब तँ गाम घुरबाक तैयारी करए दिअ।
लाल काकी: दिल्ली तँ घुमि लिअ। लाल किला देखि लिअ।

पाँचम कल्लोल पहिल अंक
(दिल्लीक लाल किलाक पाछूमे रवि दिन भोरमे जे चोर बजार लगैत रहए ताहिमे संकर्षण अपन भाग्यक परीक्षणक हेतु पहुँचैत छथि। संकर्षणकेँ एहि बजारसँ, सस्त आ नीक चीज किनबाक लूरि नहि छन्हि से सभ कहैत छलन्हि। से गामक बुधियार संकर्षण पहुँचलाह एतए।ओहि परीक्षणक दिन, संकर्षणक ओतय पहुँचबाक देरी छलन्हि आकि एक गोटे संकर्षणक आँखिसँ नुका कय किछु वस्तु राखय लागल आ देखिते-देखिते ओतएसँ निपत्ता भय गेल। संकर्षणक मोन ओम्हर गेलन्हि आ ओ ओकर पाछाँ धय लेलन्हि। बड्ड मुश्किलसँ संकर्षण ओकरा ताकि लेलन्हि।)
संकर्षण: की नुका रहल छी ?
चोर बजारक दोकानदार: ई अहाँक बुत्ताक बाहर अछि।
संकर्षण: अहाँ कहू तँ ठीक, जे की एहन अलभ्य अहाँक कोरमे अछि।
चोर बजारक दोकानदार: (झाड़ि-पोछि कय एक जोड़ जुत्ता निकाललन्हि) कोनो पैघ गाड़ी बलाक बाटमे छी जे गाड़ीसँ उतरि एहि जुत्ताक सही परीक्षण करबामे समर्थ होएत आ सही दाम देत।
संकर्षण: दाम तँ कहू।
चोर बजारक दोकानदार: अहाँ कहैत छी तँ सुनू। चारि सए टाका दाम अछि एकर। हँ।
संकर्षण: हमरा लग तँ मात्र तीन सए साठि टाका अछि।
चोर बजारक दोकानदार: हम पहिनहिये ने कहने छलहुँ। कतए घर भेल अहाँक।
संकर्षण: जनकपुर।
चोर बजारक दोकानदार: पड़ोसिया छी तखन तँ। अहाँसँ की लाभ कमाएब। दस टाका तँ डी.टी.सी. बसक किरेजा सेहो लागत। चलू साढ़े तीन सय दिअ।
संकर्षण: चलू आइ काल्हिक युगमे अहाँ सन लोक अछि जे पड़ोसीक कदर करैत अछि।
चोर बजारक दोकानदार: दिल्लीमे सभ अपने लोक अछि। एतए तँ थूको फेकैत छी तँ अपने लोकपर पड़ैत अछि।

पाँचम कल्लोल दोसर अंक
(संकर्षण गाम घुरलाह। जाहि दिनसँ ई जुत्ता आयल, एकरामे पानि नहि लागय देलन्हि। गोनर भाइ आ संकर्षणक मंचपर पदार्पण।)
गोनर भाइ: यौ मीत जुत्ता किएह हाथमे उठेने छी।
संकर्षण: हौ गोनर। पानि कोना लागए देबैक एकरा। पैरक चमड़ा सड़त तँ फेर नवका आबि जएत। मुदा ई सड़ि जएत तखन कतए सँ अएत।
(दुनू गोटे जाइत छथि आ फेर आबि जाइत छथि। संकर्षण जुत्ता सिअबा रहल छथि।)

गोनर भाइ: ई की कऽ रहल छी मीत। एतेक नीक रंग रूपक जुत्ताकेँ सिअबा रहल छी।
संकर्षण: हौ गोनर। बड्ड ठकान ठकेलहुँ। कतओ पानि देखी तँ पैरके सड़ा दैत रही आ एहि जुत्ताकेँ हाथमे उठा लैत छलहुँ। चारिये दिनतँ पहिरने होएब। आइ जुत्ताक पूरा सोल, करेज जेकाँ, अपन एहि आँखिक सोझाँ जुत्तासँ बाहर आबि गेल।
गोनर भाइ: अहाँकेँ के ठकि लेलक। अहाँक नाम तँ बुझनुक लोकमे अबैत अछि।
संकर्षण: मित्र की कहू? क्यो बुझनुक कहैत अछि आकि एहि जुत्ताक बड़ाइ करैत अछि, तँ कोढ़ फाटय लगैत अछि। कोनहुना सिया-फड़ा कय पाइ ऊप्पर करब। बड्ड दाबी छल, जे मैथिल छी आ बुधियारीमे कोनो सानी नहि अछि। मुदा ई ठकान जे दिल्लीमे ठकेलहुँ तँ आब तँ ओतुक्का लोककेँ दण्डवते करैत रहबाक मोन करैत अछि। एहि लालकिलाक चोर-बजारक लोक सभ तँ कतेको महोमहापाध्यायक बुद्धिकेँ गरदामे मिला देतन्हि। अउ जी, भारत-रत्न बँटैत छी, आ तखन एहि पर कंट्रोवर्सी करैत छी। असल भारत-रत्न सभ तँ लालकिलाक पाँछाँमे अछि, से एक दू टा नहि वरन् मात्रा मे।
गोनर भाइ: भारत रत्न सभ!
संकर्षण: आन सभतँ एहि घटनाकेँ लऽ कय किचकिचबैते रहैत अछि, कम सँ कम यौ भजार, अहाँ तँ एहि घटनाक मोन नहि पारू।
(पटाक्षेप)

भाषा आ प्रौद्योगिकी (संगणक,छायांकन,कुँजी पटल/ टंकणक तकनीक): गजेन्द्र ठाकुर

भाषा आ प्रौद्योगिकी (संगणक,छायांकन,कुँजी पटल/ टंकणक तकनीक) , अन्तर्जालपर मैथिलीविश्वव्यापी अन्तर्जालपर लेखन आ ई-प्रकाशन

 

गूगल आ वर्डप्रेस द्वारा जालवृत्त खोलबाक लेल बहुत रास बनल बनाएल परिकल्पित नमूना स्थल निर्माण लेल उपलब्ध अछि आ ओतए लेखन, संदेश आ टिप्पणीक लेल असीमित दत्तांशनिधि उपलब्ध अछि जतए जालोद्वहन मँगनीमे देल जा रहल अछि। ई सभ जालवृत्त निर्माण स्थल उपभोक्ता केन्द्रित अछि आ एतए सरल लेखन-पद्धतिक व्यवस्था सेहो कएल गेल अछि मुदा जे अहाँ संविहित पृच्छन भाषा (एस.क्यू.एल.) आधारित जालस्थलक निर्माण आ प्रबन्धन करए चाहैत छी तँ ओहि लेल ई निबन्ध अहाँक लेल उपयोगी रहत। पहिने मिथिलाक्षर आ देवनागरीक यूनीकोडमे लिखल जएबाक प्रक्रम दए रहल छी आ से अन्तर्जालपर पढ़ल जा सकबा योग्य कोना होएत तकरो चरचा होएत। तकर बाद जालस्थल निर्माण पद्धतिपर विस्तृत चरचा होएत।

 

 

देवनागरी लिपिकेँ रोमन टाइपराइटरपर कोन टाइप करी-

पहिने www.bhashaindia.com पर जा कए  हिन्दी IME V.5 अवारोपित (डाउनलोड) करू । एहि विधि (प्रोग्राम) केँ अपना संगणक (कंप्युटर) पर प्रतिष्ठापित (इंस्टॉल) करू । फेर नियन्त्रण पटल (कंट्रोल पैनल) मे क्षेत्रीय आ भाषा (रेजनल आ लंग्वेज) पर जा कए लंग्वेज प्लावक (टैब) केँ दबाऊ । देखू जे कॉम्प्लेक्स स्क्रिप्ट/ राइट टू लेफ्ट लैंगुएज पर सही केर निशान लागल छैक आकि नहि । नहि छैक तँ करू आ  संगणक ( कंप्युटर)  ताहि लेल जे जे कहैत अछि से करू । एकरा बाद लंग्वेज प्लावक (टैबकेँ) आ  डिटेल्स केँ दबाऊ । फेर ओतए  ऐड क्लिक करू आ ओतए  लंग्वेज मे हिन्दी आ  कीबोर्ड मे HINDI INDIC IME 1[V.5.1] सेलेक्ट कए  अप्लाइ दबाऊ । कंप्युटरकेँ रीस्टार्ट करू । आब वर्ड डोक्युमेंट खोलू । वाम Alt+Shift केँ  सम्मिलित दबेला उत्तर H कुँजीपटल (कीबोर्ड) आओत नहि तँ नीचाँ  लंग्वेजक़ेँ क्लिक करू आ  हिन्दी  चुनि लिअ । कुँजीपटलमे  हिन्दी transliteration आ आन तरहक विकल्प जेना रेमिंगटन/ इन्सक्रिप्ट कुँजीपटल उपलब्ध अछि  । चुनि  कए टाइप शुरू करू ।

आब transliteration कुँजीपटलपर राम टाइप करबा लए  raama टाइप करए पड़त । क् (हलन्त सहित)  टाइप करबाक हेतु k दबाऊ आ  माउसक लेफ्ट बटन क्लिक करू  अन्यथा स्पेस पिञ्जक  आकि एंटर  पिञ्जक दबेला पर हलंत उड़ि जाएत ।

 

 

विकीपीडिया पर मैथिली पर लेख तँ छल मुदा मैथिलीमे लेख नहि छल,कारण मैथिलीक विकीपीडियाक स्वीकृति नहि भेटल छल । हम बहुत दिनसँ एहिमे लागल रही आ ई सूचित करैत हर्षित छी जे २७.१०.२००८  केँ  मैथिली भाषामे  विकी शुरू करबाक हेतु स्वीकृति भेटल छैक । एतए संगणक शब्द सभक स्थानीयकरणमे बहुत रास अंग्रेजी शब्दक अनुवाद हम कएने रही आ ताहिसँ एह क्रयमे रुचि बढ़ल आ मदति सेहो भेटल ।

देवनागरीमे टाइप करबाक हेतु एकटा आर तन्त्रांश साधन (सॉफ्टवेअर टूल) उपलब्ध अछि टूल अछि जे  http://www.baraha.com/BarahaIME.htm  लिंक पर उपलब्ध अछि । एकर विशेषता अछि एकर संस्कृत कुञ्जी फलक  जे आन कोनो तन्त्रांशमे उपलब्ध नहि अछि ।  एहिमे उदात्त, अनुदात्त स्वरित   किछु आन संस्कृत अक्षर उपलब्ध अछि मुदा एतहु स्वास्तिक, ग्वाङ, अञ्जी इत्यादि उपलब्ध नहि अछि । स॑ , स॒ , स॓ , सऽ केँ  स लिखलाक बाद सिफ्ट ३,,४ आ ७ दबेलासँ लिखि सकैत छी ।

तिरहुता लिपि लिखबाक हेतु एहि लिंक पर जाऊ।

http://www.tirhutalipi.4t.com/

मुदा एकरा हेतु एहि लिंक पर जे प्रीति फॉंन्ट छैक तकरा सेहो अवारोपित कए  प्रतिकृति करू   दुनू केँ ध्रुववृत्त चालक (हार्डडिस्क ड्राइव)  C/windows/fonts मे लेपन करू । एहिमे जे फॉन्ट अछि से Ascii मे अछि । क्रुतदेव , शुशा ई सभ फॉण्ट सेहो एहि तरहक अछि, पहिने उपयोगी छल मुदा आब सर्च इंजिनमे यूनिकोड-यू.टी.एफ.8 केर सर्च होइत छैक आ  Ascii  मे लिखल देवनागरीक सर्च नहि भए पबैत अछि । विन्डोजमे मंगल वर्णमुख (फॉन्ट) अबैत छैक से यूनीकोडमे छैक  आ एहिमे लिखल देवनागरी सर्च भए जाइत अछि । मिथिलाक्षरक यूनीकोड रूपक आवेदन (अंशुमन पाण्डेय द्वारा देल गेल) लंबित अछि जाहिमे बर्कले विश्वविद्यालयक प्रोफेसर डेबोराह एन्डरसन, Project Leader, Script Encoding Initiative, Dept. of Linguistics, UC Berkeley क आग्रहपर हमहुँ योगदान देने रही ।

आब किछु बात यूनीकोड आ  जालस्थल (वेबसाइट)  केर संबंधमे ।

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पी.डी.एफ. स्प्लिटर आमर्जर सॉफ्टवेयर ( जेना फ्रीवेयर सॉफ्टवेयर पी.डी.एफ. हेल्पर/ सैम) केर मदतिसँ आसानीसँ पी.डी.एफ. फाइल जोड़ि आ तोड़ि सकैत छी।

 

 

 

आब वेबसाइट बनेबाक पूर्व किछु मुख्य बातकेँ देखि लिअ । पाँच तरहक अन्तरजाल गवेषक (इंटरनेट ब्राउजर) अछि, शेष सभटा एकरा सभकेँ आधार बना कए रचित अछि । तखन सभसँ पहिने ई चारू अपना कंप्युटरमे प्रतिष्ठापित (इंस्टॉल) करू-

.ओपेरा , २.मोजिल्ला , ३. माइक्रोसॉफ्टक इंटरनेट एक्सप्लोरर (ई तँ होएबे करत) , ४. गूगल क्रोम आ ५. एपलक,अखन धरि ई मेकिनटोसक लेल छल आब विन्डो लेल सेहो अछि, सफारी । आब जखन जाल पृष्ठ (वेब पेज) उपारोपित (अपलोड) करू वा पहिनहुँ  तँ एहि सभपर खोलि कए अवश्य देखि लिअ ।

देवनागरी लिखबामे बराह आइ.एम.ई. केर योगदान विशिष्ट अछि । एहिमे संस्कृतक उदात्त , अनुदात्त आ  स्वरित केर संगे बिकारी, देवनागरी अंक आ किछु संगीतक स्वरलिपि  लिखबाक सुविधा अछि । विदेहक संगीत शिक्षा स्तंभ बिना एकर सहयोगक संभव नहि छल । मंद्र सप्तक, तीव्र आ  कोमल स्वरक नोटेशन एहिमे अछि । ऋ,ॠ आ  ,ॡ आ  , ऎ अ, ~ हलन्तक बाद जोड़क सुविधा एहिमे सुविधा छैक । अनुदात्त क॒ उदात्त क॑ आ स्वरित क॓ सेहो उपलब्ध अछि । ई विस्टामे सेहो कार्य करैत अछि । आ  यूनीकोड फॉंटमे रहबाक कारण इंटरनेट पर पठनीय अछि ।

अ सँ ह तक वर्णमाला अछि । क्ष, त्र ,ज्ञ ओनातँ संयुक्त्त अक्षर अछि  मुदा बच्चेसँ हमरा सभ अ सँ ज्ञ तक वर्णमालाक रूपमे पढ़ने छी । श्र सेहो क्ष, त्र, ज्ञ जेकाँ संयुक्त अक्षर अछि । ज्ञ केर उच्चारण ताहि द्वारे हमरा सभ ग आ  य केर मिश्रण द्वारा करैत छी से धरि गलत अछि । ई अछि ज आ  ञ केर संयुक्त । ऋ केर उच्चारण हमर सभ करैत छी, री । लृ केर उच्चारण करैत छी, , र आ  ई केर संयुक्त्त । मुदा ऋ आ  लृ स्वयं स्वर अछि, संयुक्ताक्षर नहि ।  विदेहक आर्काइवमे शुद्ध उच्चारणक आवश्यकताकेँ देखि कए अ सँ ज्ञ तक सभ वर्णक उच्चारण देल गेल अछि । भारतीय अंकक अंतर्राष्ट्रीय रूपक प्रयोगक देवनागरीमे चलन भऽ  गेल अछि । भारतीय संविधानक अनुच्छेद 343(1) कहैत अछि जे संघक राजकीय प्रयोजनक हेतु प्रयुक्त होमए बला अंकक रूप, भारतीय अंकक अंतर्राष्ट्रीय रूप होएत।  मुदा राष्ट्रपति अंकक देवनागरी रूपकेँ सेहो प्राधिकृत कऽ  सकैत छथि ।

 

http://www.bhashaindia.com पर tbil converter सॉफ्टवेयर डाउनलोड करू । मंगल फॉंटमे आन फॉटसँ परिवर्त्तन करबाक अछि तँ डॉक्युमेन्ट .doc चयन करू इनपुट भाषामे हिन्दी आ  ascii फॉन्टमे फॉन्ट चयन करू । आउटपुटमे भाषा हिन्दी आ  फॉन्ट Unicode mangal चयन करू । आब ब्राउज कऽ  कए  फाइल सेलेक्ट करू । अहाँक कम्प्युटर मे ऑफिस २००७ अछि आ  वर्ड डॉक्युमेन्ट .docx एक्सटेंशन अछि , तखन एक्सटेंशनकेँ रिनेम करू .docआब ब्राउजमे डॉक्युमेन्ट आबि जाएत ।  अहाँक कम्प्युटर मे ऑफिस २००७ नहि अछि तखन रिनेम केलासँ कोनो फाएदा नहि । आब कंवर्ट क्लिक करू । नूतन फाइल Unicode Mangal फॉन्टमे बनि जाएत । अहाँक शब्द संसाधक सञ्चिका )(वर्ड डॉक्युमेन्ट फाइल) मे यूनीलोड आ ascii वर्णमुख (फॉन्ट) मिलल अछि, तखन अंदाजीसँ ascii वा  बेशी प्रयुक्त होएबला ascii  केर चयन करू । कंवर्ट क्लिक करू कन्वर्ट भऽ   जाएत यूनीकोड मंगल वर्णमुखमे।

 

 

जालस्थल निर्माण

पहिने कोनो ऑनलाइन प्रतिष्ठित संस्थासँ प्रदेश नाम (डोमेन नेम)  कीनू । उदाहरणस्वरूप रिडिफ डॉट कॉम पर जाऊ आ रिडिफ होस्टिंगपर क्लिक करू । ओतए बुक यूअर डोमेन पर जा कए इच्छित नाम ट्कित कए देखू जे ओ उपलब्ध अछि आकि नहि । अहाँ अपन जालस्थलक हेतु उपयुक्त डोमेन नेम क्रेडिट कार्डसँ ऑनलाइन कीनि सकैत छी  । ई  सस्ता छैक  दश डॉलर प्रतिवर्ष एकर अधिकतम मूल्य छैक । तकरा बाद  जालोद्वहन सेवा (वेब होस्टिंग सर्विस) केर लिंकपर जाऊ । ५ वा दस साल लेल १०० एम.बी. स्थानक संग जालोद्वहन सेवा लिअ आ एकरा संग माय एस.क्यू.एल. सेवा मुप्त छैक मुदा ओहिमे लाइनक्सपर काज करए पड़त जे कनेक कठिनाह/ तकनीकी भए सकैत अछि से माइक्रोसॉफ्ट एस.क्यू.एल. सेवा किछु आर पाइ लगा कए अहाँ कीनि सकैत छी । आब अहाँ लग २० एम. बी. केर एस.क्यू.एल. दत्तनिधि (डाटाबेस) आ ८० एम.बी.केर साइट लेल जगह बाँचत (माने पूरा १०० एम.बी.) आ से पर्याप्त अछि। आर स्पेसक जोगार मँगनीमे भए जाएत, तकर चरचा आगाँ होएत। माइक्रोसॉफ्ट एस.क्यू.एल. सेवा लेबाक उपरान्त अहाँ अपन माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल सञ्चिका ओतए चढ़ा सकैत छी आ तकर उपयोग अपन जालस्थलपर एकटा मध्यस्थ (इन्टरफेस) बना कए अहाँ कए सकैत छी ।

 

आब जालस्थल (वेबसाइट) बनेबाक विधिपर विचार करी।

माइक्रोसॉफ्ट फ्रन्टपेज  ऑफिस एक्स.पी. क संग अबैत अछि । ऑफिस २००३ मे सेहो ई अलग सँ उपलब्ध अछि ।

प्रन्टपेजमे बनल-बनाओल वेबसाइट विजार्ड चलाऊ । मोटा-मोटी पाँच पृष्ठक जाल-स्थल बनि जाएत। एहिमे वाम कात राइट क्लिक कए पृष्ठक संख्या बढ़ा सकैत छी । ऊपरमे स्थित थीमसँ अपन इच्छा मोताबिक बनल-बनाओल डिजाइन सेहो लए सकैत छी । साइटक कोनो पृष्ठकेँ अहाँ फोटो एलीमेन्ट द्वारा फोटो गैलरीमे परिवर्तित कए सकैत छी आ ३-४-६ स्तम्भमे फोटो सभ सजा सकैत छी । ओहि पृष्ठपर डबल क्लिक कए अपन संगणकसँ फोटोकेँ आनू आ यूनीकोड टाइपराइटर द्वारा वर्णन टंकित करू । पृष्ठ सुरक्षित करबा काल चित्रक गुणवत्ता जे.पी.जी. फोटोमे १ सँ १०० धरि चुनबाक विकल्प छैक । जतेक पैघ फाइल चुनब ततेक बेशी जगह छेकत ।वाम आ नीचाँमे लिक लेल चिल्ड्रेन सेटिंग विकल्प चयन कएला उत्तर जालस्थलक सभ पृष्ठक सूचना ओतए आबि जाएत । बेशी पृष्ठ भेला उत्तर कोनो पृष्ठक भीतर पृष्ठ सभक श्रृंखला दए सकैत छी । आब अहाँक संगणकमे अहाँक जालस्थल माय डोक्युमेन्ट्स/ माय वेबमे सुरक्षित अछि ।

अपन वेबसाइटक वास्तविक स्वरूप प्रीव्यू विकल्प द्वारा ऊपर वर्णित ५ प्रकारक गवेषकमे देखू । किछु आवश्यक परिवर्तन प्रन्टपेजपर कएला उत्तर एहि साइटकेँ अपन सर्वरपर उपारोपित कए दियौक। एहि लेल फाइलजिला डॉट कॉम पर जाऊ जे मुफ्त तंत्रांश उपलब्ध करबैत अछि । एतए क्लाइन्ट आ सर्वर मे सँ क्लाइन्ट विकल्प चुनू आ तंत्रांश अपन कम्प्यूटरमे प्रतिष्ठापित करू । एकरा बाद यूजर नेम आ पासवर्ड दिअ आ एफ.टी.पी. डॉट डोमेन नेम पर पूर्ण जालस्थल वितरक (सर्वर) केर मूल फोल्डरमे पर उपारोपित कए दिअ। अहाँक जालस्थल अन्तरजालपर नियत जालस्थल पतापर देखाइ पड् लागत।

अपन अपन दत्तसङ्ग्रह कोनो तन्त्रांश जेना ई.एम.एस. एस.क्यू.एल.मैनेजर केर माध्यमसँ अपन वितरकपर चढ़ाऊ आ एहि लेल अपन सेवा प्रदातासँ दूरभाषपर गप कए किछु विशेष ओर्टक जानकारी लिअ। सभटा सामग्री चढ़ि गेलाक बाद अपन जालस्थलक पृष्ठपर बनाओल मध्यस्थ पृष्ठपर कोडमे यूजर नेम आ पसवर्ड देनाइ नहि बिसरू।

कोनो पृष्ठपर पृष्ठसँ संगीत अन्बाक लेल कम्प्यूटरसँ ओहि पृष्ठपर संगीतक सञ्चिका आयात करू मुदा आइ काल्हि मात्र ओपेरा आ इन्टरनेट एक्सप्लोररपर प्रन्टपेजसँ बनल जालस्थलमे संगीत बजैत अछि।

आब किछु गप पृष्ठ शैली (स्टाइल शीट) पर।

अहाँ सम्पूर्ण जालस्थलक डिजाइन जे एक्के रंगक राखए चाही तँ  एहि लेल सभ पृष्ठमे एकर विधिलेख दए दियौक आ एकटा फोल्डरमे डिजाइन राखि दियौक। एहिमे पृष्ठभूमिमे बाजए बला संगीत सेहो रहि सकैत अछि । एहिसँ ई फायदा अछि जे सभ पृष्ठ खुजबा काल फेरसँ तागति नहि लगबए पड़त मात्र एक बेर डिजाइन आ संगीत खुजबामे जे समय लागत सएह टा। दोसर पृष्ठपर जे लिखित अंश वा फोटो आदि रहत ताहिमे जतेक देरी लागत सएह समय मात्र लागत। माने अहाँक जालस्थल हल्लुक भए जाएत आ जल्दीसँ खुजत।

 

आब आर.एस.एस.फीडक विषयमे जानकारी ली।

जालस्थल तँ बनि गेल आब एकर प्रचार प्रसार सेहो होएबाक चाही। आर.एस.एस. फीड अछि रिअल सिम्पल सिन्डिकेशन फीड केर संक्षिप्त रूप। एकटा वा कैक टा .xml फाइल बना कए अहाँ अपन वितरकपर चढ़ा दियौक। अहाँ .css  डिजाइन तकर बाद ई एक तरहेँ जालस्थलक नक्शा बना दैत अछि आ जखने एहिमे कोनो परिवर्तन अबैत छैक तँ फीड-रीडर/ एग्रीगेटरकेँ जालस्थलपर नव सामग्री अएबाक सूचना भेटि जाइत छैक। एहिमेमे मुख्य घटनाक/ लेखक सारांश रहैत छैक जे लिंकसँ जुड़ल रहैत अछि। ओहि लिंककेँ क्लिक केला उत्तर अहाँ विस्तृत जानकारी प्राप्त कए सकैत छी। .xml युक्त पृष्ठकेँ जालवृत्त (ब्लॉग) पर ऐड गाडजेट/ फीड/ मे पताक रूपमे लिखि कए ५ सँ २० धरि नूतन सामग्रीक (क्रमशः गूगल आ वर्डप्रेस ब्लॉगमे) अद्यतन जानकारी लेल जालवृत्त (ब्लॉग) पर राखल जा सकैत अछि। एकर आर उपयोग छैक जेना फीडबर्नर केर माध्यमसँ ई-पत्र द्वारा सदस्यकेँ सूचना देब, हेडलाइन एनीमेटर जालस्थल/ जालवृत्तपर लगाएब/ ई-पत्र द्वारा इच्छित सामग्रीक लिंक संगीकेँ पठाएब आ गवेषक वा फीड/ न्यूज रीडरक माध्यमसँ पढ़ब।

तकर बाद अपन जालस्थकेँ गूगल, याहूसर्च, लाइव सर्च आ आस्क डॉट कॉमपर सबमिट युअर साइट केर अन्तर्गत दए दियौक जाहिसँ ई सभ अन्वेषण यन्त्र अहाँक साइटकेँ ताकि सकए। .xml फाइलबला विश्वव्यापी अन्तर्जाल पता/ संकेत तकबामे एहि यन्त्र सभकेँ आर सुविधा होएतैक से अहाँ साइटक मुफत प्रचार होएत। .xml फाइल .htm केर स्थान लेत से नहि छैक मुदा एहिसँ फीड एग्रीगेटर/ अन्वेषण यन्त्र सभकेँ जालस्थलपर नव सामग्री तकबामे सुविधा होइत छैक। जखन अहाँक जालस्थलमे परिवर्तन आबए तँ अपन मूल .xml फाइलकेँ परिवर्तित कए वितरकपर चढ़ाऊ, शेष कार्य फीड एग्रीगेटर/ अन्वेषण यन्त्र स्वयं कए लेत। अहाँक अन्तर्जाल गवेषक सेहो साइटमे फीड रहला उत्तर विकल्प चुनलाक बाद जालस्थलक पृष्ठकेँ रिफ्रेश कए लैत अछि, कारण कखनो काल कऽ टेम्परोरी फाइल संगणकमे रहने पुरनके सामग्री इन्टरनेटपर देखाएल जाइत रहैत अछि।  मुदा एहि लेल सभ पृष्ठमे एकटा कूटसंकेत देमए पड़त।

आब किछु चरचा ४०४ एरर पृष्ठक। अहाँक जालस्थपर कोनो फोटो/ लिंक जे पहिने छल मुदा आब नहि अछि केँ टाइप कएला उत्तर ४०४ एरर संकेत अन्तर्जाल गवेषक दैत अछि। अपन सेवा प्रदातासँ कन्फ्युगरेशन सम्बन्धी जानकारी लऽ कए अपन जालस्थलक स्टाइलसीटक हिसाबसँ एरर पृष्ठ बनाऊ जतए किछु व्यक्तिगत संदेश जेना- अहाँ द्वारा ताकल सामग्री आब उपलब्ध नहि अछि केर संग जालस्थलक दोसर लिंक सभ राखू। मुदा एकर ध्यान राखू जे एहि पृष्ठपर एहन कूटसंकेत रहए जाहिसँ अन्वेषण यन्त्र ओकरा सर्च नहि करए।

अपन जालस्थलपर girgit.chitthajagat.in वा google translate गाडजेट राखि सकैत छी जाहिसँ मैथिलीक सामग्री दोसरलिपि सभमे एक क्लिकमे परिवर्तित भए जाए।

साइटक प्रचार अपन ब्लॉग/ ग्रुप बना कए आ ऑनलाइन कमेन्ट सबमिशन लेल सेवा प्रदातासँ डॉट नेट सुविधा लए-जाहिसँ वितरक कमेन्ट अहाँक ई-पत्र संकेतपर पाठकक कमेन्ट प्रेषित कए सकए आ फीड एग्रीगेटरमे अपन फीड पंजीकृत कराए पाठकक संख्या बढ़ाओल जा सकैत अछि। कमेन्ट सबमिशन टाइपपैड डॉट कॉम (पेड ब्लॉगर सेवा प्रदाता) सँ सेहो प्राप्त कएल जा सकैत अछि, ई ब्लॉग लेल तँ पाइ लैत अछि मुदा प्रोफाइल बनबए लेल नहि आ ओहि संगे ब्लॉग आ साइट लेल कमेंट फॉर्मक कोड आ सुविधा दुनू उपलब्ध करबैत अछि, एहिमे अहाँ जालस्थलपर कमेंटक एक पृष्ठपर सँख्या, कमेंटपर आपसी वार्तालाप, आ कमेंट मॉडेरेशन विकल्प चुनि सकैत छी।

अपन जालस्थलक आर्काइव लेल गूगल साइट आ वर्डप्रेस १० आ ३ जी.बी. क्रमशः स्थान मुफ्त दैत अछि। फाइल ओतए अपलोड करू मुदा अपन साइटपर ओकर लिंक दए दियौक। एहिसँ अहाँ अपन बजट ठीक कए सकैत छी।

ब्लॉगक यू.आर.एल. यदि नीक नहि लागए तँ मोनमाफिक यू.आर.एल. सुविधा १० डॉलर सालानापर उपलब्ध अछि, मुदा ब्लॉगक सुविधाक अतिरिक्त कोनो आर सुविधा एहिसँ नहि भेटत। मुदा जे अहाँक बजट बहुत कम अछि तँ एकर उपयोग करू।

अहाँ लग जे पूर्ण साइट अछि तँ ओकर एकटा पृष्ठ पर एफ.टी.पी. अपलोडसँ डिसकसन फोरम आदि अपन साइटक ऊपर राखि सकैत छी आ ब्लॉगकेँ अपन साइटमे सम्मिलित कए सकैत छी। ब्लॉगरक भीतर प्रकाशनक अन्तर्गत यू.आर.एल. सुविधा १० डॉलर सालानापर आ  एफ.टी.पी. अपलोड ई दुनू सुविधा उपलब्ध छैक।

आब चरचा फेव आइकनक। अपन लोगो ब्राउजरक पताक संग देबाक लेल .ico प्रारूपमे लोगोक चित्र बनाऊ आ अपलोड करू, संगमे स्टाइलसीटपर एकर विवरण दए दियौक।

अपन ई-पत्रमे सिगनेचर, माय स्पेस, फेसबुक, ओरकुट, ट्विटर,यू ट्यूब, पिकासा, याहूग्रुप आ गूगलग्रुप केर माध्यमसँ, आर.एस.एस.फीड आ हेडलाइन एनीमेटर जे ई-पत्र सिगनेचरमे सेहो राखल जा सकैत अछि केर माध्यमसँ सेहो एकर प्रचार कए सकैत छी।

गूगल एनेलेटिक्स आ वेबमास्टर टूलक सेहो उपयोग करू। एनेलेटिक्सक ट्रैकर कोड सभ पृष्ठपर दिअ जाहिसँ प्रतिदिन कतएसँ के आ कोना अहाँक जालस्थलपर अएलाह तकर जानकारी भेटि सकवे आ वेबमास्टर टूलसँ जालस्थल वेरीफाइ करू आ .xml फाइल सबमिट करू।

यदि कोनो पृष्ठपर कोनो फोटो/ लिंककेँ दोसर टैब/ गवेषकमे खोलए चाही तँ टारगेट फ्रेम/ न्यू विन्डो-ब्लैंक चुनू।

सी-डैक पुणेक अओजार आ फान्ट सेहो छैक मुदा ओहिसँ विशेष लाभ परिलक्षित नहि भए रहल अछि, उनटे बहुत रास दिक्कत जेना “द् ध” आ “ग् र” क्रमशः द्ध आ ग्र केर बदलामे देखबामे आओत।

विदेह ई-पत्रिका http://www.videha.co.in/ पर ऑनलाइन यूनीकोड टाइपराइटर उपलब्ध अछि। विशेष दिक्कत भेलापर/ वा एकर ऑफलाइन रूप हमरासँ ggajendra@videha.com पर ई-मेल कए मँगबा सकैत छी/ पूछि सकैत छी।

पी.डी.एफ.सँ सव एज टेक्स्ट केलापर देवनागरी रूप यूनीकोडमे आ कखनो काल आनोमे नहि सेव होइत छैक। यूनीनगरीमे पी.डी.एफ.सँ कॉपी कए पेस्ट केलासँ देवनागरी रूप आबि जाइत छैक। आस्की कन्वर्टरक सहायतासँ पी.डी.एफसँ यूनीकोडमे बदलैत छैक मुदा प्रारूपण खतम भए जाइत छैक।

फन्ट कन्वर्टरमे SIL कन्वर्टर एहन टूल अछि जाहिमे प्रारोपण खतम नहि होइत अछि आ ई अछियो फ्री तन्त्रांश। 

विस्मृत कवि स्व. रामजी चौधरी (1878-1952)

भजन भैरवी

 

आब मन हरि चरनन अनुराग।

त्यागि हृदयके विविध वासना दम्भ कपट सब त्याग॥

सुत बनिता परिजन पुरवासी अन्त न आबे काज।

जे पद ध्यान करत सुर नर मुनि तुहुं निशा आब जाग॥

भज रघुपति कृपाल पति तारों पतित हजार

बिनु हरि भजन बृथा जातदिन सपना सम संसार

रामजी सन्त भरोस छारि अब सीता पति लौ लाग॥

 

 

॥ राग विहाग ॥

 

को होत दोसर आन रम बिनु॥ जे प्रभु जाय तारि अहिल्या जे बनि रहत परवान॥ जल बिच जाइ गजेन्द्र उबारो सुनत बात एक कान॥ दौपति चीर बढ़ाई सभा बिच जानत सकल जहान॥ रामजी सीता-पति भज निशदिन जौ सुख चाहत नादान॥

 

 

चैत के ठुमरी

 

चैत पिया नहि आयेल हो रामा चित घबरायेल।।

भवनो न भावे मदन सताबे नैन नीन्द नहि लागल॥

निसिवासर कोइल कित कुहुकत बाग बाग फूल फूलल॥

रामजी वृथा जात ऋतुराजहि जौंन कन्त भरि मिललरामा॥

चित घबरायेल चैत पिया नहि आयल॥

चान आ चान्नी

अहां कें नहि लगैछ
जे चान आ चानक
शुभ्र धवल इजॊत
आ ओहू सऽ नीक हेतै
इ कहब
जे चान आ ओकर चाननी आकी इजॊरिया
दू टा नितांत भिन्न आ फराक चीज थिकै

ईश्वर जखन बनौलकै चान
तऽ सुरुज संऽ मंगलकै
कनेक टा इजॊत
आ ओहि इजॊत कें चान
कॊनॊ जादूगर जेकां
इजॊरिया बना देलकै
जेना प्रेम जाधरि रहैत छै
करेज में
कॊनॊ जॊड़ा कें
लैला मजनू बना दैत छै
चंद्रमॊहन के चांद
आ अनुराधा कें फिजां
बना दैत छै
आ फेर तऽ वएह अन्हरिया व्यापि जाइत छैक चहुंदिश

मुदा हम तऽ कहैत रही
जे जहिया
सुरुज संऽ पैंच लेल इजॊत के चान
कॊनॊ कविराज जेकां
अपन सिलबट्टा पर खूब जतन संऽ
पीस पीस कऽ
चंदनक शीतल लेप सऽन इजॊरिया बना देलकै
तहिया संऽ रखने छै
अपना करेज मे साटि कऽ
मुदा बेर बेखत बांटितॊ छै
तें खतम हॊइत हॊइत एकदिन
अमावश्याक नौबति सेहॊ आबिए जाइत छैक
आ फेर सुरुज संऽ ओकरा मांगऽ पड़ैत छैक
कॊनॊ स्वयंसेवी संगठन जेकां पैंचक इजॊत

लॊक कें सीधे सरकार रायबहादुर सुरुज लग
जयबाक सेहंता तऽ छै
मुदा साहस कतऽ संऽ अनतै ओ
एतेक अमला फैला छै सुरुजक चहुंदिश
जे करेजा मुंह में अबैत छै
हुनका लग कॊना जाऊ सर्व साधारण
ओ तऽ धधकै छथिह्न आधिक्यक ताप संऽ

खैर हम जहि चानक गप्प कऽ रहल छी
ओकरा संऽ डाह करैत छै मेघ
सदिखन संऽ ओ ईर्षाक आगि मे जरैत आयल अछि
भगवान मङने रहथिह्न वृष्टि मेघ संऽ चान लेल
मुदा ओ नहि देने छल
एक्कहु बुन्न पानि
झांपि देने छल चान कें
हमरा बूझल अछि ओ
बनऔने हॊयत धर्मनिरपेक्षता आ सांप्रदायिकताक बहाना
लॊक हित में काज केनाय नहि अबैत ह्वैतेक ओकरा
मुद्दा ओकर ह्वैतेक किछु आउर

मुदा हऽम तऽ एम्हर
मात्र एतबे
कहऽ चाहैत रही
जे हमरा केओ चान
आ अहांके चान्नी
जुनि कहय

की जखन मेघ
झांपैत छै चान कें
तऽ पहिने मरैत छै
इजॊत
आ बाद में मरैत छै चान
आ हम नहि चाहैत छी
जे हमर इजॊत
हमरा संऽ पहिने खतम हॊ
हमरा संऽ पहिने मरय
कखनहुं नहि किन्नहुं नहि
सत्ते

कविता आ की सुजाता

बूझल नहि
कखन कत्त आ कॊना
हमरा आंखि मे बहऽ लागल
कविता
नदी बनि कऽ

भऽ गेल ठाढ़
पहाड़
करेज मे
जनक बनि कऽ

देखलिए
चिड़ै चुनमुन
नहि डेराइत अछि
आब

खेलाइत अछि
हमरा संग
गाछीक बसात
अल्हड़ अछि
मज्जर विहीन
भूखले पेट
नचैत अछि

झूमैत अछि
कारी मेघ माथ पर
अकस्मात कानि उठैछ
सुजाता सुन्नरि
नॊर संऽ चटचट गाल
चान पर कारी जेना

'विदेह' २२४ म अंक १५ अप्रैल २०१७ (वर्ष १० मास ११२ अंक २२४)

ऐ  अंकमे अछि :- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१. डॉ. कैलाश कुमार मिश्र -    मैथिलानी केर उपराग राम सं आ समाज ...