Saturday, May 02, 2009

कॉलेज देखलक बौआ -रूपेश कुमार झा 'त्योंथ'


अपने छी हम मैट्रिक
गरीबीक चक्की मे पिसा क'
फेल भेल हमर बैटरी
चिंता सं हम पेरायल छलहुं
मुदा तइयो भरोस भेल
कॉलेज देखलक बौआ
टिभी केबल छल कटल
घरक राशन छल घटल
बुझि सकै छी, की कहू ?
अभावो कें देखि ओ
फैशनक हिसाबे
कीनलक जींस झमकौआ
किछु दिन कॉलेज क'
बढौलक ओ हिप्पी
अप्पन उमेर देखि
सधलहुं हम चुप्पी
खा गेल ओ हमरो तहिये
जहिया ओकर मोंछ कटलकै नौआ
एकदिन छागुनता लागल
ओकर जेंसक पतलून सं गुटखा बहरायल
बुझय मे आबि गेल
करैत होयत ई कत्ते
नशाक सेवन नुकौआ
घींच-घाचि क' थर्ड ईयर मे अछि
हे उच्चैठक महरानी, अहीं पर लगबियौ
भरोस एक्को रत्ती नहि अछि
मैया अहीं कें गोहरबै छी
जं भेल ई पास त'
चढायब छागर हम जौआ
खर्चक पहाड़ सं देलक ई नमरा
बेचीं घरारी आ की बेचीं हम डबरा
कर्जो नहि भेटै छै , कहियौ हम ककरा
ई त' कुपात्र भेल, ठेस लागल हमरा
एकरा सं किछु छुटल नहि छै
कए खेप ई चिखने होयत पौआ
फैशन सं लैस भ'
जेबी मे किछु कैश ल'
चलैए अनबिसेख एना
हो शाहरुख़ , सलमान जेना
आब ने उजियाएत ई
हमर मोन भेल कौआ
आब हम नियारल
बियाह करा दी एकर
घट्टक अबैए ढेर -ढाकी
कनिया हम चिक्कन ताकी
दिन-दुनिया ठीक करबा वास्ते
दहेज़ लेबै मोटकौआ


Blog : http://www.rkjteoth.blogspot.com/


E-mail : rkjteoth@gmail.com

बहुत गलत बात अछि --


समस्त मैथिल और मिथिला पाठक गन के चर्ण स्पर्श अछि ---
हम आए से कुछ दिन पहिने एकटा रचना '' ''
बहुत महत्त्व अछि ""
से पाठक गन के सामने उपस्थित केने रही , एकटा फेर छोट छीन
शब्द कोष डिक्सनरी से लके हम आय
मैथिल और मिथिला में पुनः
""
बहुत गलत बात अछि "" से लके पाठक गन के सामने हाजिर छि ,

प्रेम सं कहू जय मैथिल जय मिथिला ---

""
बहुत गलत बात अछि ""

दूध में पैन के , दुश्मनी में आईंन के , गाम में डैन के ,
बहुत गलत बात अछि --------
बर्बाद करै में मुस के , नोकरी मे घुस के , बनिया में मखीचूस के ,
बहुत गलत बात अछि --------
भाई में बैमान के , कर्म में अभिमान के , मनुष्य में सैतान के ,
बहुत गलत बात अछि --------
नशा में दारू के , आदमी में भारू के , मिया - बीबी संग झारू के ,
बहुत गलत बात अछि --------
मेला में जेवर के , डैविटिज में मिठाई घेवर के , बदमाशी में देवर के ,
बहुत गलत बात अछि --------
पूजा -पाट बिना पीपल के ,श्रधकर्म बिना पीतल के , बरी -भात बिना जूरी शीतल के ,
बहुत - गलत बात अछि ---------------
नारी गर्दन बिना अठन्नी के, समान बेचनाय बिना पन्नी के , पेंटिंग बिना मधुबनी के ,
बहुत - गलत बात अछि ---------------
डिगरी बिना ईग्न्नु के , खिसा -पिहानी बिना गन्नू के , लेन - देन में भीख मग्न्नु के
बहुत - गलत बात अछि ---------------
आदमी में दुराचारी के , फल में मह्कारी के , इंडिया में बेरोजगारी के ,
बहुत गलत बात अछि --------
समाज में काम चोर के , आदमी में सुईद खोर के , लराई में लातखोर के ,
बहुत गलत बात अछि --------
ब्यबसय में मन मर्जी के , सिग्नेचर में फर्जी के , फोज में बिना बर्दी के ,
बहुत गलत बात अछि --------
बस में जेब कत्तर के , हर बात में अक्तर के , गंदगी में बत्तर के ,
बहुत गलत बात अछि --------
सरक पर भीख माँगा के , सहर में लफंगा के , शरीर में बिना अंगा के
बहुत गलत बात अछि --------
चलें में मटकैत के , जंगली एरिया में डकैत के , गाम में लठैत ,
बहुत गलत बात अछि --------
नशा में सिकरेट के , हर बात में डारेकट के , आदत में क्रिकेट के ,
बहुत गलत बात अछि --------
इंडिया में बिना टेक्स के , दफ्तर में बिना फेक्स के , फॉरनर में सेक्स के ,
बहुत गलत बात अछि --------
विराद्धा अबस्था में बिना लाठी के , चिता पर बिना काठी के , सीरियल में बिना मराठी के ,
बहुत गलत बात अछि -----
शरक पर क्च्चरा के , बारादरी में झगरा के , कागज - पत्तर में लफरा के ,
बहुत गलत बात अछि -----
गाम में बिना भोज के , मजदूरी में बिना रोज के , साइंस में बिना खोज के ,
बहुत गलत बात अछि -----
यात्रा बिना मंगल के , प्रोग्राम बिना दंगल के , व्रत में अंजल के ,
बहुत गलत बात अछि -----
विदियार्थी बिना मास्टर के , हॉस्पिटल बिना डाक्टर के , फिल्म बिना डारेक्टर के ,
बहुत गलत बात अछि -----
उग्रवादी बिना तालिवान के , कुस्ती बिना पहलवान के , अतिथि के बिना जलपान के,
बहुत गलत बात अछि -----
मनोरंजन बिना खेल के , बिजनेस बिना सेल के , कैदी बिना जेल के ,
बहुत गलत बात अछि -----
रेड लाइट बिना अक्सिडेंट के , हॉस्पिटल बिना पेशेंट के , दाँत बिना पेप्सोडेंट के ,
बहुत गलत बात अछि -----
जनौऊ संस्कार बिना बरुवा के , मैथिल भोजन करेनाय बिना तरुवा के , आराम केनाय बिना गेरुवा के ,
बहुत गलत बात अछि ---------
अध्ययन बिना कम्पूटर के , पंखा बिना रेगुलेटर के , नियूज बिना प्रेशरिपोटर के ,
बहुत गलत बात अछि ---------
भगवन पूजा बिना माला के , घर छोरी बिना ताला के , सासुर जेनाय बिना साला के ,
बहुत गलत बात अछि ---------
शहर में बिना लाइट के , लराई में बिना फाइट के , जींस पेंट बिना टाईट के ,
बहुत गलत बात अछि -----
नागरिकता बिना मतदान के , जिनगी बिना कन्यादान के , परोपकर बिना रक्तदान के ,
बहुत गलत बात अछि -----------
महाभारत में शोक्न्नी के , शहर में बिना पत्त्नी के , आ रचना में बिना टिप्पणी के ,
बहुत गलत बात अछि -----


मदन कुमार ठाकुर ,
पट्टीटोल , भैरव स्थान , झंझारपुर ,मधुबनी , बिहार - ८४७४०४
Mo - 9312460150 ,E-mai - madanjagdamba@yahoo.com

अन्हरिया- कांचीनाथ झा ‘किरण’

की रविकर प्रहार पीड़ित धराक

निवास धूम भरि रहल व्योम?

की रविपतिक अस्त

लखि, भयें त्रास्त

तिमिर चीर

झाँपल शरीर

अवनी अनाथिनी

की रवि दूर गेल

शशि अन्ध भेल

बुझि, अन्धकार

पटकेर ओहार

लगा, व्योम संग विहार

करैत अछि वसुधा भएकाकार?

की कारी कोसी अछि उत्फाल भेल

तकरे जलसँ करैछ

भू-नभकें एकाकार?

की निसि रमैत अछि कलिक संग

तें भेल एकर अछि कृष्ण रंग?

झड़ैत खुदिया खद्योत भास

उड़ैत चमकी उडुगण प्रकास?

मानव समाजमे वर्ण भेद

सुरुहेसँ अनलक अहंकार

करैत आएल अछि अनाचार अत्याचार

तेंॅ तकरा मेटबै लेल

दलित उपेक्षित मानव जातिक हृदय-वह्नि गिरिसँ

समुभूत तामस तमोपुंज

बढ़ि रहल भरैत अम्बर दिगदिगन्त?

की कांग्रेसी शासनगत अनाचार

अन्धकार बनि अछि व्यक्त भेल?

की अणुबमक पहाड़

देखि मानव जातिक भविष्य

साकार थिक ई अन्धकार?

नताशा 05 (चित्र-श्रृंखला पढ़बाक लेल नीचाँक चित्रकेँ क्लिक करू आ आनन्द उठाऊ।)

माँ मिथिला ताकय संतान- दयाकान्त


माँ मिथिला ताकय संतान

ससरी गेल कतेको टाट
खसि परल कतेको ठाठ
नहि अछि कतहु पर्दा टाट
नहि राखल दलान पर खाट
कतेको घर साँझ-प्रात सं बंचित
कतेको घर ताला सं संचित
जतय रहै छल जमाल दलान
आई बाबा बिन सुन्न दलान
माँ मिथिला ताकय संतान

सगर देश मे भय रहल पलायन
मिथिला सन नहि दोसर ठाम
बी०ए०, एम०ए० घर बैसी के
कहिया धरि देता इम्तिहान
जीबिकाक नहि बचल कोनो साधन
नहि रोजगारक कोनो ठेकान
गाम बैसी करता की बैउया
कोना बचेता घरक प्राण
माँ मिथिला ताकय संतान

पढ़ल लिखल बौक बनल अछि
धुरफंदी सब मौज करैत अछि
एक आध जे पोस्ट निकलैत अछि
भाई-भतीजा छापि लैत अछि
सबतरि बन्दर बाँट मचल अछि
कोनो विभाग नहि आई बांचल अछि
बिना पाई कियो बात नहि करताह
कतेक सहत सज्जन अपमान
माँ मिथिला ताकय संतान

हमर बुद्धि-विवेकक लोहा
देशे नहि विदेशो मानैया
हमर मेहनत-लग्नक वल पर
आई कियो बाबु कह्बैया
हमर उन्नति देखि के आई
सब प्रांत हमरा सं जरैया
करितहु प्रतिभाक सदुपयोग
रहिता जँ मिथिलामे ओरियान
माँ मिथिला ताकय संतान

                दयाकान्त

'विदेह' २३० म अंक १५ जुलाइ २०१७ (वर्ष १० मास ११५ अंक २३०)

ऐ  अंकमे अछि :- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१. आशीष अनचिन्हार-  "कतेक रास बात" इंटरनेटपर मैथिलीक पहिल उपस्थिति नै अछि ...