Thursday, April 23, 2009

फूलडालीक कनेर


कृष्णमोहन झा

जिलेबीक काँट जकाँ
हम अहाँक धानक लाबा सन तरबा मे गड़ि जायब
आ किछु दिन धरि बिसबिसायब

चतुर्थीक औंठी आ बरसाइतक मेहदी जकाँ
हम अहाँक विकल संसर्ग मे आयब
आ असंख्य सुग्गा बनि
अहाँक मोन मे उड़ियाएब

हम तँ फूलडालीक कनेर छी
अहाँक लौलसा मे भीजल देवता पर चढब
आ पराते
हजारो-हजार मौलायल फूलक संगे
नहि जानि कोन धार-पोखरि मे विलीन भ’ जायब!



'विदेह' २२४ म अंक १५ अप्रैल २०१७ (वर्ष १० मास ११२ अंक २२४)

ऐ  अंकमे अछि :- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१. डॉ. कैलाश कुमार मिश्र -    मैथिलानी केर उपराग राम सं आ समाज ...