Tuesday, March 31, 2009

मैथिली मे चित्रकथा श्रृंखलाक शुरुआत

मैथिली मे नेना-भुटकाक प्रिय विधा चित्रकथाक खगता देख 'नताशा' चित्रकथा श्रृंखलाक संकल्पना हमरा मोन मे करीब एक दशक पहिने आयल छल. प्रकाशनक माध्यम आ प्रसार साधन केर अभाव मे हमर कल्पना हिंदी मे अनुदित भ' विभिन्न पत्र-पत्रिका मे छपय लागल आ' शनै:-शनै: ई हिंदिये के भ' गेलै.
'मैथिल आ मिथिला' से जुडलाक बाद दशकक दबल कामना पूर हेबाक लेल हिलकोर लेबै लागल अछि. अहि क्रम मे 'नताशा' केर मूल मैथिलीक अलावे एकर हिंदी संस्करणक अनुवाद मे लागल छी. अहि कार्य मे अनुज मित्र कुमार सौरभक सहयोग उल्लेखनीय अछि.
अगला सप्ताह सं दर सप्ताह अहि श्रृंखलाक एक गोट चित्रकथा प्रस्तुत कयल जायत. अहि सन्दर्भ मे दू टा बिंदु स्पष्ट क' देब आवश्यक अछि-
१. श्रृंखलाक चित्रकथा मे किछु प्रचलित चुटक्काक अलावे किछु मौलिक कथ्यक उपयोग कयल गेल अछि.
२. अहि श्रृंखलाक अनेको चित्रकथा बालहंस, चकमक, बच्चों का देश, प्रभात खबर, अंग्रेजी पत्रिका TINKLE आ रविवारीय जनसत्ताक यात्रा क' चुकल अछि.
हमर प्रयास सकारथ होयत जं' किछुओ धीया-पुता अहि माध्यमे मातृभाषाक साहित्यिक पक्ष सं जुड़ता.

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (चारिम कड़ी)


चतुर्थी दहनयी s बाद सब गोटे चलि गेलाह। हिनको कॉलेज खुजल छलैन्ह, इहो( हमर घर वाला) मुजफ्फरपुर, अपन कॉलेज चलि गेलाह। आन के गेला पर ओतेक सुन नय लागल, मुदा जहिया गेलाह ओहि दिन बड़ सुन लागल। कियाक होइत छैक नहि जानि, विवाह होइते s संग एतेक प्रगाढ़ सम्बन्ध कोना s जायत छैक जे एक दोसरा s अलग रहनाइ निक नय लागैत छैक। दादी हिनका s करार करवा लेलथिन जे मधुश्रावणी में अवश्य अओताह। दादी s s हँ कहि देलैथ मुदा हमरा s कहलैथ नहि आबि सकताह। हमर मोन s छोट s गेल मुदा फेर सोचलौं हमर s क्लास छूटिये रहल अछि हिनकर कियाक छूटैंह। हम कहलियैन्ह किछु नय, ओहि समय में हम हिनकर बात s हँ वा नय में जवाब दैत रहियैन्ह। ओनाहुं हम कम बाजति रहि, हिनका s s निक जकां बाजय में हमरा एक साल लागि गेल।


गाम पर बाबा दादी के छोरिकs घर में, हमर माँ बाबुजी हम छहु भाय बहिन रहि। ओहि समय में असगरो जे सभ गाम पर रहैत छलाह वा छलिह, किनको नय बुझैन्ह जे असगर छथि हमर घर में s विवाह भेल छलs रोज भोर साँझ गाम घरक लोकक अयनाइ गेनाइ लागल रहैत छलैक। एक s अहुना जहिया जहिया हम सब गाम जाइ, लोक सबहक एनाइ गेनाइ लागल रहैत छलैक अहि बेर s हमर विवाह भेल छलs अहि बेर कनि बिशेष लोकक एनाइ गेनाइ रहैत छलs, हमर कनि विशेष मान दान सेहो होइत छलs कहियो कतो s खेनाइ आबय कतो s खोइंछ भरय s लेल कियो कहय लेल आबथि , सभ कियो एतबा अवश्य कहैथ, ठाकुरजी बड़ जल्दी चलि गेलैथ। दादी सभ s कहथि फेर जल्दिये अओताह, पंचमी s मधुश्रावणी धरि रहताह। हुनका सभ s की बुझल जे ठाकुर जी नय आबि रहल छथि, हम सुनि s चुप रहि, किनको किछु नय कहियैन्ह, माँ तक s नय कहने रहि, मुदा जखन हिनकर एनाइ गेनाइ s गप्प सुनि मोन उदास s जाय।


हमर जहिया विवाह भेल हम ओहि समय फ्राक या स्कर्ट ब्लाउज पहिरति रहि। अचानक हमरा साड़ी पहिरय परि गेल। जहाँ कियो आबैथ, ख़ास s मौगी महाल महक s हमरा बजायल जाय। हमर बहिन सभ दौड़ s हमरा लग अबैथ कहय s लेल, ओकर बाद हम जल्दी s ककरो s साड़ी ठीक करवाबी तखैन्ह हम हुनका सभ लग जाइ। दियादि महक काकी पीसी सभ गोटे में s बराबरि कियो नय कियो रहैत छलिह, सभ ठीक s देथि, तइयो कैक बेर हमर पैर साड़ी में फँसल होयत हम खसल होयब जे कियो आबथि एतवा अवश्य कहथि, " देखिये कुसुम केहेन लागति छथि" देखलाक बाद कहथि "बड़ सीरी चढ़ल छैक" कतेक निश्छल भावना कतेक अपनापन रहैत छलैक हुनका लोकनि में।


हमर दु तीन टा पीसी सेहो ओहि समय में ओतहि रहति छलिह, जिनकर सबहक विवाह ओहि बरख भेल छलैन्ह सभ हमर संग तुरिया छलिह। भरि दुपहरिया घर भरल रहैत छलs हुनका सभ संग ओहिना समय बीति गेल पंचमी आबि गेल। पंचमी s एक दिन पहिने भोरे भोर हमर सासुर s भार आयल, ओहि में सब किछु बिधक ओरिओन s आयल छलs भरि गामक लोक के दादी हकार दियवा देलथिन, सभ भार देखैक लेल आबथि जे देखथि से कहथि, एतेक निक भार किनको ओतहि s नय आयल छलैक, गाम पर सभ गोटे भार देखि s बड़ प्रशंसा करथि, हमरा सुनि बड़ निक लागय। जिनका हम कहियो देखने सुनने नय हुनकर प्रशंसा सुनि हम खुश होइ। हमर दादी सेहो खुशी s सबके कहथि अरे महादेव झा ओतय s भार आयल अछि। हमरा ओहि समय में किछु नय बुझाय, हम सोचि हमर ससुरक नाम s हीरानंद ठाकुर छैन्ह, दादी बेर बेर कियाक कहैत छथि महादेव झा ओतय s आयल अछि। हम पुछs चाहि किनको s मुदा एम्हर ओम्हर में बिसरी जाइ।


कॉलेज s हमरा प्रतिदिन एकटा चिट्ठी लिखैथ, ओहि में सब दिन जवाब देवाक लेल लिखैत छलैथ, मुदा हमारा जवाब देबय में लाज होयत छल।एक दिन हमर भाय बाबुजी कोनो काज s मुजफ्फरपुर जायत छलाह। ओहि दिन हम पहिल चिट्ठी लिखि s भाय के देलियैन्ह जे हुनका s देबाक लेल।


पंचमी s एक दिन पहिनहि भोर में भार आयल छलs, साँझ में बाबुजी सब के सेहो अयबाक छलैन्ह। हमरा अपन संगी पीसी सब संगे फूल लोढ़य लेल जयबाक छलs दादी सब ट्रेन s हिनकर बाट ताकथि अंत में हमर बहिन सब s कहि पुछौल्थिन, हम बहिन सब s कहि देलियैन्ह हमरा किछु नय लिखने छथि। दादी तकर बाद s निश्चिंत s गेलिह तखनि s कहथि जे तोहर बाबुजी सब संग अवश्य अओताह।


साँझ में सब घान्जि बांधि s हमरा ओतहि आयल देखलियय सबहक हाथ में फूल डालि पथिया छलैक कियो कियो अपन खबासिनी कs सेहो संग में s लेने छलथि किछु कुमारि सब सेहो संग में छलथि हमरो संग हमर एकटा पितिऔत बहिन छलीह, हमर फूल डालि पथिया s लेलथि।हमसब पूरा टोलक सब गोटे गीत गाबति हँसी मजाक करैत अपन अपन फूल डालि पथिया लेने पहिने गाछी दिस गेलौन्ह। दादी हमरा हिदायति देने रहथि, जे बाँस वा अन्य पैघ गाछक पात कियो तोरय, जाहि जूही s पात फूल सभ हम अपने तोड़ी हमरा बड़ पोल्हा s कहलथि "हे मधुश्रावणी लोक के एकय बेर होयत छैक जहिना कहैत छी कयने जाउ" हमहु निक बच्चा जकां मुरी हिला s हँ कहि देलियनि


हम सब, सब s पहिने बंसबट्टी दिस बिदा भेलौंह बाँसक पात तोरलाक बाद हम सब जाहि जूही अन्य अन्य पात फुलक खोजि में सबहक बाड़ी बाड़ी जाइ सभ तरि s फूल सभ बटोरति जाइ हमरा तs बुझलो नय छलs जे कोन - कोन फूल कोन-कोन पात चाहि जेना जेना सभ कियो तोरथि हमहु तोरति जाइ दादी s हिदायति हमरा मोन छलs हम पथिया टा नहि उठा पाबति रहि सेहो हमर पितिऔत बहिन, देयादि महक छलिह से उठा दैथ। जखैन्ह हमरा सभ गोटे कहलथि जे आब s गेल, हमहु हुनका सभ संगे आपस हेबाक लेल चलि देलियैन्ह हमरा देखि s ततेक आश्चर्य भेल, हमसभ एक एक पथिया भरि s पात जाही जूही s लेने रहि


आब हमरा बसक नहि छलैक जे हम उठा s एको डेग आगू बढितौंह हमर पितिऔत बहिन ओकरा अपन माथ पर s s चललिह रास्ता भरि हँसी मजाक होइत छलैक, ओही में s बेसि मजाक हम नहि बुझति रहि बिच बिच में बटगभनी सेहो होयत छलैक इहो गप्प होयत छलैक जे किनकर सभहक वर आयल छथि किनकर सभहक बाद में अर्थात मधुश्रावणी s पहिने अओताह हमारो s सब पुछथि, हम किछु नय बाजि हमरा लाज होइत छलs नहि बजला पर सभ हमर आर मजाक उराबथि, हम अहिना दुखी छलौंह ताहि पर सभ मजाक करथि कखनो मोन होयत छल बेकारे सभ संग अयलौन्ह हमरा होयत छलs हम कहुना घर पहुँची, हम मजाक s तंग आबि s अपन बहिन s जे पथिया लेने रहथि, कहलियैन्ह अपना सब आगु चलु हम सभ आगु जल्दी जल्दी बढि रहल छलियैक मुदा कथि लेल हमरा कियो जल्दी जाय देत पकरि s बिच में हमरा सभ गोटे s लेलथि


ओहिना करैत हम सब मुखिया बाबा s घर लग पँहुची गेलौंह। हमर घर ओकर बाद छलैक हम हाथ में फुलक डालि लेने सभ संग बिच में चलति रहि घर लग पहुँच सभ गोटे जोर जोर s हंसैथ हमरा कहि आगु s देलथि जे आब हमर दादी देख लितथि तs हुनका सभ s डाँटि परतैंह हम आगु आबि जहिना बरामदा दिस बढलौंह देखैत छी कुर्सी पर बाबा आर बाबुजी कs संग बैसल छथि तिनु गोटे चाय पीबि रहल छथि हम लाज s जल्दी-जल्दी आँगन दिस भागि गेलौंह


आँगन पहुँचि देखैत छि दादी माँ व्यस्त छथि एक s पाबनि s ओरियोनि होयत छलैक, दोसर जमाय विवाहक बाद पहिल बेर आयल छलैथ, तेसर समधियोनि s पाहुन भार s s से आयल छलखिन्ह हमरा देखितहि दादी कहय छथि "यै अहाँ बिना माथ झपने अहिना बाबा बाबुजी s सोंझा s आबि गेलौंह" हम किछु नय बजलियैन्ह, हम हमर बहिन चुप चाप कोहबर घर जाय s फुल डालि पथिया राखि देलियैक ओहि समय में हमरा माथ झांपय में बड़ लाज होयत छलs हम बाहरि आबि s माँ s पुछलियैक," बाबुजी मुजफ्फरपुर s कखैन्ह एलैथ" जकर जवाब दादी s भेटल, "अहांक बाबुजी कॉलेज s ठाकुर जी s पकरि s s अनलैथ "


साँझ में किछु किछु बिधक ओरिओन गीत भेलैक दादी कहलथि सब गोटे जल्दी सुतय जो भोरे उठय परत। राति में सुतय काल पता नय हमरा कोना मोन छलs, हम हिनका s पुछलियैन्ह "भार कतय s आयल छैक "? हिनका किछु बुझय में नय अयलैन्ह, हमरा कहलाह "मतलब... कोन भार"? फेर मुस्कुरैत हमरा कहलाह "अहाँ के हमारा देखि s खुशी नय भेल जे अहाँ हमारा s भारक विषय में पुछैत छी " हम मुरी हिला s हाँ कहि देलियैन्ह मुदा फेर धीरे s कहलियैन्ह " दादी सब s कहति छथि महादेव झा ओतय s भार आयल छैक। सुनतहि जोर s ठट्ठा s हँसैथ हमरा कहलाह ".., अच्छा..., महादेव झा, हमर सबहक पाँज़ि अछि ताहि लेल बाजति होयतिह" तकर बाद हमरा पाँज़ि s विषय में सेहो बता देलैथ। हमरा अपना पर हँसी लागल कहु तs भोर सs हम इ सोचि कs परेशान छलौंह जे महादेव झा के छथि।


क्रमशः ..............

'विदेह' २२४ म अंक १५ अप्रैल २०१७ (वर्ष १० मास ११२ अंक २२४)

ऐ  अंकमे अछि :- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१. डॉ. कैलाश कुमार मिश्र -    मैथिलानी केर उपराग राम सं आ समाज ...