Saturday, March 21, 2009

डॉ विजयकांत मिश्र


डॉ विजयकांत मिश्रा जिक जन्म १० अगस्त १९२७


डो. विजयकांत मिश्रक जन्म मंगरौनी गाम - जे नव्य न्याय आ तांत्रिक साधनाक जन्म-स्थली अछि- (जिला मधुबनी) मे
भेलन्हि।

ओ 1948 मे प्राचीन भारतीय इतिहास आ संस्कृति विषयमे एलाहाबाद विश्वविद्यालयसँ सनात्तकोत्तर उपाधि कएलाक बाद कतेक बरख धरि बिहार सरकार आ पटना विश्वद्यालयसँ सम्बद्ध रहलाह आ 1957 ई. सँ भारतीय पुरात्तत्व विभागमे काज कएलन्हि आ ओकर शिशुपालगढ़, कौशाम्बी, वैशाली, हस्तिनापुर, कुम्हरार, पाटलिपुत्र, करियन, सोनपुर, बिलावली, नालन्दा, राजगीर, चन्द्रवल्ली, आ हम्पी खुदाइमे विभिना भूमिकामे भाग लेलन्हि।
हिनकर लिखल-सम्पादित पोथी सभमे अछि:
1.वैशाली,1950
2.कुम्हरार एक्सकेवेशंस: 1950-1957
3.पुरातत्व की दृष्टिमे वैशाली
4.नागेश भट्टाज पारिभाषेन्दुशेखर
5.मिथिला आर्ट एण्ड आर्किटेक्चर (सम्पादित)
6.कल्चरल हेरिटेज ऑफ मिथिला
7.श्रृंगार भजनावली- एक अध्ययन
8.क्षेत्र पुरातत्वविज्ञान -
9.पुरातत्व शब्दावली

जुल्मी- मंत्रेश्वर झा

दुनिया मे अहीं टा त' नहिं छी जुल्मी,
अपना पर बजरत तखन बुझवै जे की।

काल्हियो छलहुँ हमारा आ काल्हियो रहब,
बीतत वर्तमान तखन बुझबै जे की।

फूसि फासि ठूसि ठासि भरलहुँ जिनगी,
अंतकाल पछताके बुझबै जे की।

बजौलहुँ इनाम ले बदनामी खातिर,
नाम जुटत अपनो त' बुझबै जे की।

नुका नुका पर्दा मे बाँचब कते दिन,
खोलब जौं भेद तखन बुझबै जे की।

जागि गेल छी- महेन्द्र नारायण राम

नम्हर-नम्हर
मोटगर-मोटगर
सादा कागत पर
रे अन्यायी,
हमारा अऊँठा निशान लगा गेल छी,
तकरे प्रभावे
आइ धरि
देख! कतेक हमारा सुखा गेल छी।
रक्त, हाड़-माँसु समर्पित क' तोरा
शोषण उत्पीड़नक बीच
भावनाक चिक्कस बनि पीसा गेल छी।
जरि गेल अछि आब मुदा
अन्हार घरक दीया
पढ़ब, लिखब, गुनब
मोन मे
गड़ि गेल अछि
आब हमारा खुश भ' रहल छी
आखर-आखर पढ़ि रहल छी
कुशल भ' रहल छी
साक्षर भ' रहल छी
हमारा जागि गेल छी।
आब क्यो अऊँठा निशान नहीं लगबाओत
रक्त-हाड़-माँसु केँ नहीं चिबाओत
सुन्दर हृष्ट-पुष्ट शरीर केँ नहीं तड़पाओत॥

बाल कविता-२ गाछ मे -जीवकांत

गाछ मे पात
पात मे बसात

पात मे फूल
गाछ झूल-झूल

पात मे छाह
गाछ वाह! वाह!

गाछ मे आम
गमकैए गाम

गाछ मे मेघ
भीजैए खेत

पातमे उछाह
गाछ वाह! वाह!

बुढ़ी माता- कथा- अमित कुमार "गोपाल",

परिचयः हम छी अमित कुमार "गोपाल", बाबु जीः काली कांत झा, ग्रामः चैनपुर, सहरसा. बर्तमान में आदित्या बिरला ग्रुप मे सहायक मनैजर के पद पर र्कायरत छी। बुढी माता' एक आपबीती कहानी छी, कहानी अेाए समय के छी, जखन हम अपन परिवार(माँ, बाबू जी, भाई बहिन)के संग पटना में रहैत रही। बाबू जी पी० डब्लु० डी में एस० डी० आे० रहथिन। संत जेविअर साँ बारहवी करेत संग ही आर० एम० आर० साँ मेडिकल के कोचिंग करेत रही ।

बुढी माता - Source of inspiration
ई बात जनवरी १९९५ के छी, मेडिकल केाचिगं क्लास ५.३० बजे भेार साँ हेायत रहै, हम घर साँ अन्हारे ४.३० - ४.४५ में निकलैत रही, पटना में जनवरी मास में बहुत ठंढा परैत छै। वेा समय में आई काल साँ बेसी ठंढा परैत रहे। ठंढा उपर साँ सुनसान रास्ता बहुत डर लागैत रहै, लेकिन इक नया जोश में सब किछ बिसेर जाईत रही, ११ जनवरी के कोचिंग में मेाडयुल टेस्ट रहै ई कारण हम ४.०० बजे भेारे घर साँ निकल परलु जे ठंढा के कारन लेट ने हुए। हम जहिना पुनाईचक-हरताली मेार के बीच रेलवे लाईन लग पहुँच लु, अचानक इक टा घेाघ तानने , करिया कंबल अेाढने एक टा मनुख सामने आबि गेल, डर साँ हम साईकिल सा गिर परलु, वो बहुत बुढ आ कमर लग साँ झुकल लागल। हम ऊठ के ठाढ भेलु...गरदा सब झार कऽ जहिना चले लाऽ भेलु तहिना आबाज देलक सुन...अ....बैाआडर साऽ हालत खराब भ गेल....चारेा तरफ सा सन..सन जकाऽ अवाज महसुस हुए लागल, डरल-डरल आेकरल लग गेलु...पुछलक कताऽ जाए रहल छै...हमरा सा पुछलक (ता तक अपन घेाघ नए हटाने रहे)..डर साँ आवाज जल्दी नेऽ निकलल..लेकिन हिम्मत कऽ के जबाब देलु...केाचिगं जा रहम छी।फेर पुछलक कथी के पढाई करे छैहम कहलु... डाक्टरी के तैयारी करे छी.. अच्छा बेस.देासर पढाई में मेान नेऽ लागे छेा...कनि देर रूक तखन जाभियेता तक टाईम लगभग ४.४५ भऽ गेल रहे, एक..दु टा आदमी सब सडक पर सेहेा नजर आबे लागल, लेट हेाएत रही ए कारन हि्म्मत कऽ के कहलेा.. हमरा लेट भ रहल ये..हमर आइ परीक्षा छी ।कुनु बात नेऽ । जबाब भेटलबर असमंजस में पैर गेलु..की करी नइ करी, एक मेान हेाए रहे राह चलैत लेाग के अवाज दी लेकिन रेाड फेर सुनसान भऽ गेल lतखन वेा अपन घेाघ हटालक हुनकर चेहरा के देखते लगभग बेहोश भऽ गेलु...बुढ झुरीदार चेहरा आ उपर साँ मर्द जका मुछ दाढी..हे भगवान आई तक एहन नेऽ देखने रहु ।हमर हाउ भाउ के देख बाजल - हमरा देख क डर लागे छेा.. नए डर हम देासर कियेा नए छियेा ।पता नए किए वेा किछ अपन जकाँ लागल, ता तक लगभग ५ साँ उपर टाईम भ गेल रहे, रेाड पर दुध बाला, पेपर बाला सब नजर आबे लागल, किछ देर के बाद आवाज भेटल आब तु जेा...घुरेत काल आभये।हम हवा के भाति तीर सा भे बेसी तेज साँ निकलु..बहुत लेट भा गेल रहु साईकिल के अपन क्षमता सा भी तेज स्पीड सा चलाएब सुरु का देलु, जहिना गाँधी मैदान-सब्जी बाग के मुह पर पहुचलु ..देखलु जे जबरदस्त एक्सीडेंट भेल रहे, पुरा रास्ता पुलिस बंद क देने रहे, एक्सीडेंट लगभग १५-२० मिनट पहले भेल रहे जही में ४ टा आउर १ टा चाई बाला दुकानदार मारल गेल रहे.. उ ४ टा हमरे केाचिगं के छात्र रहे, जे चाए पीबा के खातिर रुकल रहे लेकिन ?हमहु अेाहि चाई वाला के दुकान पर रेाज रुकेत रही ( अगर बुधी माता नए भेटतिए ता हमहु उ टाईम चाए के दुकान पर रहतु...फेर पता नए )चाए पीबे के आदत नए रहे लेकिन ठंढा के चलते पीब लेत रही ।कहुना केाचिगं पहुच लु...उ ठाम घटना के सुचना पहुच गेल रहे.. केाचिगं २ दिन के वास्ते बंद भा गेल, छात्र के घर वाला के सुचना द देल गेले, हमहु बुझल मेान साँ घर वापस हुए लागलु घर घुरेत काल वेा बुढिया फेर वही ठाम भेटल वेाहिना घेाघ तानने, लग जा के सब घटना सुनाले के बाद भी हमर जबाब नए देलक...किछ देर के बाद कहलक - बेाआ हमरा भुख लागल ये,कि खेबे - हम पुछलुचुरा आ सकर जबाब भेटल।संयेाग एहन रहे ताबि तक ई सब तरह के समान खरीदे के वास्ते दुकान पर नेए गेल रहु (कारन जे घर मे काज करे लेल ढेर आदमी रहे, आउर हम सब साँ छेाट रही)फिर भी दुकान जा कऽ चुरा सकर किनि काऽ आनलु,किछ देर के बाद हम पुछलु - कतेऽ जेभी हम पहुंचा देबेाकतेा नेऽ - जबाब भेटलरह भी कतऽ - हम पुछलुए जगह - सीधा जबाब भेटलखाना कतऽ खेवी, पुछला पर जबाब भेटल - तु खुआ, बेसी बक-बक ने कर खाए ले दे फेर पुछए जे पुछे के छेा (बिल्कुल रुखल जबाब भेटल)संग ही स्नेह साँ कहलक - तुहेा खेा ।हम ता अजीब मु्स्किल मे पर गेलु, अेाकराअकेले छेाएर के जाए के मेान सेहेा नए करेत रहे..बहुत सोचला के बाद डिसिजन ले लु जे एकरा अपन संग लऽ जाइल जाए ।रिक्सा पर बुढिया माता आ साईकिल साँ हम घर पहुच लु, अेाकरा गेट के बाहर ठाढ कऽ हम घर गेलु, सब कहानी अपन माता जी के बतालु, बुढी माता बाहर ठाढ छे सेहेा कहलु, माता जी के आज्ञा भेल नीचा में एकटा रुम खाली छै अेाए में हुनका जगह देल जाए सब ब्यबस्था (बिछेाना, कंबल ,साफ सारी) कऽ क घर में बेसालु, शाम में बाबु जी आफिस सा एला ता हुनकेा सब कहानी बतालु, बाबु जी पुछला - कहिया तक इ रहतेा, नए पता हम कहलेा, फेर माता जी सब संभाल लेली आ बाबु जी के समझा देलखिन । बुढी माता के सेवा करब हमर रेाज के ड्युटी भ गेल, केाचिग जाए सा पहिने आ आबे के बाद १ सा १.३० घंटा हमर टाईम बुढी माता लग बीते लागल । खाना के अलग-अलग फरमाइश हेाएत सब किछ पुरा करेत १ ह्फता बीतल, एक दिन अपना लग बेसा हमरा बारे में पुछे लागल (जेना अपन दादी, बाबा,अग्ज) अतिंम में कहल गेल देासर पढाई (मेडकल छेार क) कर बहुत नाम हेतेा, बहुत पैसा कमाबे, माइ-बाबु जी के नाम सेहेा हेतेा । १० वाँ दिन रात में बिना कीछ बताने पता नए कतऽ चैल गेली..आइ तक नेऽ भेटली..हम इंतजार करे छी बुढी माता इक दिन जरुर भेटती । बुढी माता के बात बिल्कुल सही निकलल जखन १४-१५ घंटा पढाई केला के बाबजुद सी०बी०एस०सी० मेडिकल मे वेटिगं आबी गेलु, बी०सी०इ०इ० में डेयरी टेडॄ भेटल, एम०डी०ए०टी० में १०० परसेंट चांस रहे(९० परसेंट सही रहे, सलेक्सन ६०-७० परसेंट पर हेाएत रहे) मगर सेंटर केंसिल ब गेल, एही सब कारन साँ हम फरस्टरेसन में रेहा लागलु, पढाई-लिखाइ बंद कऽ देलु जे एतक मेहनत करे के बाद जखन नए सफल भेलु ता आब कहियेा नेऽ हेाएब। हमरा बुढी माता के बात याद आबि गेल..संग ही बाबु जी सेहेा कहला - अपन टेॄक चेंज करु, लगभग वही समय यु०जी०सी० सा ३ टा नया केासॅ पटना युनिवसिटी एवं मगध युनिवसिटी के भेटल ((१) Bio Tecnology (२) Water & Enviromental Management & (३) BCA)। प्रतियेागिता परीक्षा के आधार पर एडमिसन के प्रेासेस सुरु भा गेल, बी०सी०ए) हमर किछ ढंग के क्रेास बुझाएल हमहु प्रतियेागिता परीक्षा में बेसलु आ पास कऽ गेलु, यु०जी०सी० बी०सी०ए० के पहलुक बैच के पहलुक छात्र हम रही जे फाइनल परीक्षा में ८९ परसेंट सा पास करलु, बाबु जी कहला आब यु०पी०एस०सी या ढंग के सरकारी नैाकरी के तैयारी कारु लेकिन हमर सेाच किछ आउर रहे / अखन तक ये । “अगर अपन मेरिट / एविलिटी के युज करना ये ता सरकारी नैाकरी नए करना चाही" फेर पटना बेलटान साँ साफ्टवेयर मे पेास्ट ग्रेगुएट डिप्लोमा करलु, फेर एम०सी०ए० करलु, मैान भेल जे एम०बी०ए० करल जाए (बहुत कठिन रहे आइ० टी० सा एम०बीए०ए० करब) बुढी माता के क्रपा सा एम०बीए०ए० भी कऽ ले लु अपन खचा चलबे लेल पाट टाइम नैाकरी सेहेा करलु, केम्पस सलेक्सन में रिलांयस इनफेाकाँम के आफर भेटल ज्वाइन करलु, फेर एच० डी० एफ० सी० बैंक साँ आफर भेटल ता बैंक ज्वाइन करलु.. दिल में इच्छा रहे टाटा , बिरला में नैाकरी करी बुढी माता कर क्रपा साँ इच्छा पुरा भेल आ बिरला ग्रुप सा निक पेाजिसन के आफर आइब गेल ज्वाइन सेहेा करलु आ अखन तक एही जगह छी ।..आब इच्छा यऽ दि्ल्ली, मुंबई के बहुत सेवा करलु आब अपन बिहार - मिथिला के सेवा करल जाए..बुढी माता के दया साँ सेहेा भा जेते.....लेकिन सबसाँ पैघ इच्छा बुढी माता के दशन के पता नए .................।

'विदेह' २२४ म अंक १५ अप्रैल २०१७ (वर्ष १० मास ११२ अंक २२४)

ऐ  अंकमे अछि :- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१. डॉ. कैलाश कुमार मिश्र -    मैथिलानी केर उपराग राम सं आ समाज ...