Monday, March 16, 2009

मैथिल के? --रूपेश कुमार झा 'त्योंथ'

मिथिलाक अति पावन महि पर
जकर भेल थिक जन्म
वा जे करैछ एहि भूमि पर
अपन जीवनक कर्म
जे कए रहलैछ प्रवास
मुदा पुरुषा सभ करैत छलनि
मिथिले मे वास
चाहे ओ
कोनो धर्मक कियए ने हो
धर्मक अन्तर्गत कोनो जातिक
कियए ने हो
एहि सोच पर अबैछ घृण
जे मैथिल अछि मात्र ब्राह्मण
मैथिल छलथि राजा जनक
हुनक सुता छलीहए सीते
जाहि पर गर्व करैछ सगरे मिथिला
ने वैह छलाह ब्राह्मण, ने हुनकर धिये
कि ओ मैथिल नहि?
ई जुनि कहि
अछि मिथिला कतेको विभूति जनने
सदति रहू सीना तनने
पुरा काल सँ ई माटि
उपजबैत अछि बड़-बड़ विद्वान
सुनू खोलि कऽ दुनू कान
बसै छथि कलकत्ता, काठमांडू
वा न्यूयार्क ओ दिल्ली
ओ छथि सुच्च मैथिल जिनक
ठोर पर खेलि रहल छथि मैथिली
सभ मैथिल मिलि निज मिथिला केँ
दियाबू एकर मान-सम्मान
जे उभरय विश्व मानचित्र पर
बनि एकटा विशिष्ट चान
बुझलहुँ ने, जे कहलहुँ से
आब नहि पूछू, मैथिल के?

'विदेह' २२८ म अंक १५ जून २०१७ (वर्ष १० मास ११४ अंक २२८)

ऐ  अंकमे अछि :- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१. डॉ. कैलाश कुमार मिश्र -  गौरी चोरनी ,  गौरी डाईन आ गौरी छिनारि: मधुश्रावणी कथा केर ...