Wednesday, September 16, 2009

मनभरनि डूबि मरलैए-रूपेश कुमार झा 'त्योंथ'

दू दिन पर अयलहुं
मधुबनी सं गाम त' देखै छी-
आइ गाम लगैछ
सुन्न-मसान
नहि क्यो अछि कतौ
भम्म पडैछ सभक दलान
कखनो काल क' सुनय मे अबैछ
कुकुरक कटाउझ
छोट हड्डी टुकडी लेल
सभ अछि हरान
दाइ-माइक सेहो पता नहि
लगैछ गाम आइ मरघट समान
कखनो काल क' सुनय मे अबैछ
कनिया-मनियाक फुसफुसायब
कोनो विषय पर कनफुसकी
सीमा तोडि भेल हल्ला
सुनि हल्ला भेल झ'ड़ कान
कतय गेलाह पुरूष ओ
दाइ-माइ , नेना-भुटका
कोना बुझब जे भेलैछ की ?
हम भेलहुँ फिरेसान
नजरि पडिते एकटा नेना पर
पुछलियै की भेलैए ?
मनभरनि डूबि मरलैए
कहलक ओ अबोध जान
सुनीते पड़ऐलहुं पोखरि दिस
पहुँचलहुं ओतहि, जतय
लोकक लागल छल करमान
देखि लागल हमरा ठक-बक
भीड़क बीचो-बीच राखल
मनभरनिक देह बेजान
मायक रूदन ओ तड़पब
देखल नहि गेल हमरा
मुदा बाप भेल छल कठोर
लगै छल जेना मरल हो क्यो आन
किएक ने लगै ?
भेल छलैक बेटी गराक घेघ
सर्वगुण संपन्न रहितो
नहि होइत छलैक बियाह
द' सकै छल ने ओ मोटगर दहेज़
नहि छलैक ओकरा नगदी-नरायन
द्वारे-द्वारे क'ल जोडैत
थाकि गेल छल ओ
कएक थम त' सहय पडैक अपमान
बेटी कें देखल नहि गेलैक
बापक फिरेसानी
गेल दुनिया सं निश्चिंत क' बाप कें
अपने हाथे तेजि प्राण

3 comments:

  1. Manav Mishra2:37 PM

    kavita samvednak star par neek achhi. vaicharik star par ta gaamak kanyak madhyame vidroh hevak chahi.dahej ka harait dekhayab jaruri achhi.ona yatharth teji san badaltaik. ekhan zarur dahejak bazar nit garma rahal chhaik.muda ahi yatharth par ten bahut kichhu ahi tarhak likhal jaa chukal achhi.

    ReplyDelete
  2. Rama Jha9:33 AM

    दू दिन पर अयलहुं
    मधुबनी सं गाम त' देखै छी-
    आइ गाम लगैछ
    सुन्न-मसान
    नहि क्यो अछि कतौ
    भम्म पडैछ सभक दलान
    कखनो काल क' सुनय मे अबैछ
    कुकुरक कटाउझ
    छोट हड्डी टुकडी लेल
    सभ अछि हरान

    bad nik roopesh ji

    ReplyDelete

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'विदेह' २३२ म अंक १५ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३२)

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