Sunday, August 30, 2009

'विदेह' ४० म अंक १५ अगस्त २००९ (वर्ष २ मास २० अंक ४०)

'विदेह' ४० म अंक १५ अगस्त २००९ (वर्ष २ मास २० अंक ४०)

वि दे ह विदेह Videha বিদেহ http://www.videha.co.in विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका Videha Ist Maithili Fortnightly e Magazine विदेह प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA. Read in your own scriptRoman(Eng)Gujarati Bangla Oriya Gurmukhi Telugu Tamil Kannada Malayalam Hindi
एहि अंकमे अछि:-
१. संपादकीय संदेश

२. गद्य
२.१. कामिनी कामायनी-कथा-लालकाकी

२.२. मिथिलेश कुमार झा-लघुकथा- समय संकेत
२.३. अनमोल झा- लघुकथा- अन्हरजाली
२.४ कुसुम ठाकुर- प्रत्यावर्तन -१५
२.५ दयाकान्त- तिरंगा
२.६. कथा-कलाकार- कुमार मनोज कश्यप

२.७. मनोज झा मुक्ति

३. पद्य

३.१. सतीश चन्द्र झा-बुधनी
३.२. विवेकानन्द झा-ओ प्रेमहि छल

३.३. आशीष अनचिन्हार-गजल-गद्य-कविता

३.४.पंकज पराशर- -तक्षशिला
३.५.कामिनी कामायनी-असमंजस


३.६.निशाप्रभा झा (संकलन)-आगां


३.७. हिमांशु चौधरी-तोँ स्वतंत्र छेँ
३.८. ज्योति-प्रतीक्षा सँ परिणाम तक-२
३.९. रूपेश- जय हिन्द जय-जय मिथिला


४. मिथिला कला-संगीत-तूलिकाक चित्रकला

५. गद्य-पद्य भारती -पाखलो -३ (धारावाहिक)- मूल उपन्यास-कोंकणी-लेखक-तुकाराम रामा शेट, हिन्दी अनुवाद- डॉ. शंभु कुमार सिंह, श्री सेबी फर्नांडीस, मैथिली अनुवाद-डॉ. शंभु कुमार सिंह

६. बालानां कृते- देवांशु वत्सक मैथिली चित्र-श्रृंखला (कॉमिक्स)
७. भाषापाक रचना-लेखन - पञ्जी डाटाबेस (आगाँ), [मानक मैथिली], [विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary.]

8. VIDEHA FOR NON RESIDENT MAITHILS (Festivals of Mithila date-list)
8.1.Original poem in Maithili by Gajendra Thakur Translated into English by Jyoti


9. VIDEHA MAITHILI SAMSKRIT EDUCATION(contd.)

विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ( ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी मे ) पी.डी.एफ. डाउनलोडक लेल नीचाँक लिंकपर उपलब्ध अछि। All the old issues of Videha e journal ( in Braille, Tirhuta and Devanagari versions ) are available for pdf download at the following link.
विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे
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१. संपादकीय
१५ अगस्त १९४७ आ १५ अगस्त २००९ मे
भारतक रूपमे बहुत रास परिवर्तन आएल अछि।
भारत आइ विश्वक सोझाँ एकटा एहन रूप लेने
अछि, एहन छवि बनेने अछि, जकर अस्तित्व
विश्वक आर्थिक मन्दीमे सेहो अविचल छैक। मुदा
बहुत रास समस्या एखनो विकराल अछि।
असामान्य नगरीकरण जाहिमे मात्र महानगरपर
बोझ बढ़ल अछि, छोट-छोट नगरक विकास
अवरुद्ध भऽ गेल अछि। गाम बिला रहल अछि।
स्वाइन-फ्लू जतए कतहुसँ आएल होअए, भारतमे ई एकटा विकट रूप लऽ लेने अछि। बढ़ैत
जनसंख्याक संग हमरा सभ सए-पचास
नागरिकक मृत्युक बादो टेमी-फ्लू दवाइ दोकान
सभमे बिक्री लेल नहि दऽ सकल छी। सरकार
द्वारा जारी डॉक्टर सभक मोबाइल नम्बरक सूची,
जाहिमे एम्स आ आर पैघ हॉस्पीटल सम्मिलित
अछि, आश्चर्यजनक रूपसँ स्विच-ऑफ रहैत
अछि, तखन विज्ञापनपर ओतेक पाइ खर्च कऽ
के की होएत? देखू..


संगहि "विदेह" केँ एखन धरि (१ जनवरी २००८ सँ
१४ अगस्त २००९) ८३ देशक ८७९ ठामसँ २७,४८१
गोटे द्वारा विभिन्न आइ.एस.पी.सँ १,९१,५१९ बेर
देखल गेल अछि (गूगल एनेलेटिक्स डाटा)-
धन्यवाद पाठकगण।
अपनेक रचना आ प्रतिक्रियाक प्रतीक्षामे।


गजेन्द्र ठाकुर
नई दिल्ली। फोन-09911382078
ggajendra@videha.co.in
ggajendra@yahoo.co.in

२. गद्य
२.१. कामिनी कामायनी-कथा-लालकाकी

२.२. मिथिलेश कुमार झा-लघुकथा- समय संकेत
२.३. अनमोल झा- लघुकथा- अन्हरजाली
२.४ कुसुम ठाकुर- प्रत्यावर्तन -१५
२.५ दयाकान्त- तिरंगा
२.६. कथा-कलाकार- कुमार मनोज कश्यप

२.७. मनोज झा मुक्ति

कामिनी कामायनी

लाल काकी
टक टक टक टक टुन टुऩ टुन टुन घंटी बजबैत तांगा के सोर सँ ओहि सूतल सूतल सुस्त सुस्त टोल मे हरकत आबि गेलए ।कोनो अभ्यागत सएह आबैत छलाह ताँगा पर किनको बेटा पूतौह किनको धी जमाए़ किनको समधी़ किनको सर कुटुम ।आऽ टक टक टुन टुन’ क ध्वनि जेना अहि खबरि के समस्त घर धरि पहुँचा दैत़ कियो आयल अछि पाहुन पड़क ।
दिनक करीब दस बाजल छल । मुदा गाम मे तँ पराते सब उठ़ि पराती गबैत पूजा पाठ नेम टेम करैत़ अपन दिनचर्या मे व्यस्त भऽ जाइत छल ताहि लेल दस एगारह बजैत बजैत फुरसते फुरसत ।
किछु अपन दरवज्जा सँ निकलि किछु अपन दलान सँ बहिराति ताँगा धरि औला़ ।आऽ खबरि पसरि गेल चारोंकात जे लालकाकी पटना जा रहल छथि।हुनक बड़का पाैत्र कन्हैयाजी आबि गेलखिन्ह लेबए लेल ।
लाल काकी अपन जमाना के परम सुन्नरि गोरवाहि स्त्री ततेक गोऱ जेना साक्षात चान बुलि रहल अछि धरती पर। आऽ एकदम लाल बूँद़ जेना अंगरेज ।
खिस्सा छल हुनका पाछाँ जे बड़का घरक बेटी के गौरव ढाह लेल सासुर मे हुनक पति के दोसर विवाह कराओल गेल ।ओहि समय समाज मे बहु विवाह पूर्णरूपेण प्रचलित छल । आऽ एकए क गोट कतेक कतेक विवाह करैत छलाह ।मुदा सौतिनियाँ डाह ।सौतिन संगे रहनाय एकटा बड़का दुखदायी प्रसंग छलैक स्त्रीगण समाजक लेल ।
सौतिन एतैन्ह़ करेज पर राहड़ि दड़रतैन्ह़ तखन हिनक टहंकार मारैत गौरव ढहतैन्ह़ बड़ उत्तान भऽ कऽ चलैत छथि। घरवला के विवाह भऽ गेलन्हि मुदा नबकी कनिया सासुरक मुँहो नहि देख सकलीह ।नैहरे मे भोजक पात उठब गेलीह त कोना नै कोना बिषहरा महाराज डँसि लेलखिन्ह ।जखन लाल काकी के ई खबरि भेटलैन्ह़ तँ ठठ्ठा कऽ हॅसैत बजलीह ‘लैह हमर गौरव तँ भगवति सेहो नहि ढाहि सकलीह ।’बाजए काल मे हुनक बुट्टी बुट्टी चमकैन्ह । आऽ दोसर खिस्सा हुनक जे प्रचलित छल ‘विवाहक बड़ दिन धरि हुनका पूत नै होए छल खाली धी धी धी । तँ ओ भगवान सँ कबुला केलथ़ि ‘ हे स़त्तनारैन महाराज ज्योँ हमरा पूतौह झोँट पकड़ि कऽ मरत तँ हम बाजा गाजा सँ अहाँक पूजा करब ।’एहि पर बड़ हॅसी ठठ्ठा भेलए मुदा भगवान जेना हुनका पर बड़ अनुग्रही छलखिन्ह । आऽ ओहो दिन एलैन्ह जखन घर मे पूतौह आबि गेलन्हि । मुदा ओ कबुला भगवानक पूजा के । आब करल की जाए । कबुला कबुला छल़ ।आखीर मे भगवानक पूजा के समय बीध जकाँ पूतौह हुनक एक टा लट पकड़लखिन्ह ओ ढोल पीपही सँ पूजा सम्पन्न भेल छल ।
मुदा हम जे लाल काकी के देखने रहियैन्ह पाकल़ पाकल छोट छोट केश़ वृद्वा़ कनि देहगर मुदा गेराई वएह बड़ स्नेहिल़ गप्पक सप्प के सिनेह ।
हम सब जखन गाम जाई हमर पपा ढेर रास फलफूल नेने जाइथ ।आऽ शरीफा लाल काकी के बड़ पसिन्न । ‘गै बच्चा दू टा सरीफा ला’।तखन एकोटा नैक सँ पाकल शरीफा नै छलै हम कनि कनि पाकल शरीफा के हाथ सँ कैस कैस कऽ दाबि दाबि कऽ एकदम घुल्लल बना कऽ द’ देलियैन्ह ।कनिए कालक बाद काकी हमरा तकने फिरैत छलीह ‘कत्त छै़ बुचिया ’ ।आऽ हमरा देखैत मातर बजली ‘ हे ले अपन सरीफा काँचे छाै।’
एक दिन हमर आंगन मे बनल मॅड़वा़ भाई सबहक उपनैनक पर बैसि हमरा खिस्सा सुनबूत छलीह ‘ जार्ज पंचम इंगलैंडक गद्दी प बैसलै तेकरा बाद जार्ज छठम जार्ज सप्ताम़ ।’आऽ ओहिक्रम जे ग्प्पर मोन पङैत अछ़ि ओ बाजल छलीह ‘उजरा जीर होइत छै़ ऊजरा मरीच हमर पीत्ती कलकत्ता सँ आनैत छलाह ।लोक चान प पहुँच गेलए ।’
हम अपन दाय सँ पूछलियैन्ह । ‘दूर हुनक गप्पठ सप्पल एहने रहैत छैन्ह उजरा मरीच आऽ चान परलोक ।चौरचन मे चान महाराज के अरघ देल जाइत अछि ओ भगवान छथि हुन्कर कि ओ त कनिए दिनक बाद सूरूज महाराज पर सेहो लोकवेद के पठा देती ।’
हुनक गप्पय पर पीठ पाछाँ बड़ मखौल उङै़ ।जीभक बड़ पातरि नीक नूकूत खायब़ नीक पहिरब ।
एक दिन दाय के बड़का पोत जमाए एलखिन्ह त ’हुनक कनिए कालक बाद अपन दरवज्जा सँ टहलैत टहलैत हमरा आंगन कऽ मॅड़वा पर आबि बैसलिह ‘बौआ दाए म्या़ अपन छोट दियादिनी के ओ अहि नाम सँ बजबए छलीह ‘कि सब बनेलहुँ अछि जमायक लेल’ ।आऽ दाय जे परम ओरियानी बुधियारि मृदूभाषी़ मर्यादा वाली सुन्नरि स्त्री छलीह़ बड़ आदर सँ अपन पैघ दियादिनी सँ जमाए्र के गेलाक बाद़ चाह पियाबैत बैस क विन्यास सँ गप्पआ करैथ ।
जीभ बस मे नहिं छलैन्ह तँ पेट सेहो जवाब द’ देने छलैन्ह ।आऽ लालकाकी बीमार भऽ गेल छलीह ।छोटका बेटा के पेलवार त ल’ग मे छलैन्ह मुदा पटना वला बेटा के मोन मे छरपट्टी लागि रहल छलै ‘माए के हम अपन लग राखि क बड़का डाक्टार सँ इलाज करैब।आँखिक सोझा रहत तँ हमरो मोन मे चैन रहत ।’
आऽ ताहि लेल टमटम आयल छल ।उम्हर काकी बड़का टा के भांगटि ठाढ केनो ‘मरि जायब मुदा मगह नहि जायब कॅह कासी कॅह उसर मगहर मगह मे जे मरै छै तेकरा पैठ नै होय छाै मगं दोषं दधाति इति मगध ’ ‘मगहीया डाेम सँ बत्तर हम्र जीनगी भ जायतँ ‘किन्नो किन्नों हम मगह नै जायब ।’
छोटकी पूतौह दरवज्जा पर बैस व्याख्यामन द रहल छलीह ‘तीन दिन सँ अन्न पानि तियागने छथिन्ह भरि राइत जागल़ कुहरैत ‘हम मगह नै जायब।’
अपन नूआ आंगी वला झोरा के छोटका टेबूल पर ठाढ भऽ क” दही के खाली मटकूङी मे राखि चार सँ लटकैत सींक पर टाँगि क नूका देने रहथि कखनो ओकरा कोठी के दोग मे नूका दैथ मुदा ताकैत ताकैत लोक ताकिए लैक ।कखनो अपना लग मे रहय वला पोता सब के बजा कऽ नहुँ नहुँ निहौरा करैथ’ ‘हे बाऊ अपन हिस्सा के जमीन हम तोरे सब के लिख देबऽ हमरा मगह नै जाए द’ ।’मुदा हुनक प्राणक रच्छा करय लेल सबके लगै पटना जेनाए आवश्यक छल ओतय पैघ पैघ ङाक्ट र ।
कन्हैया जी हुनक झोरा झपटा उठाबैन्ह ताँगा पर राखय लेल तँ ओ झपटि कऽ ओकर हाथ सँ झीक कऽ अपन करेज सँ लगा कऽ घाना पसारि दैथ़ ‘हम नहि जायब ई गाम छोङि कऽ एतय सँ हमर अर्थीए उठत अहि आंगन मे हम मॅहफा पर सँ उतरल छलहुँ ।’आऽ ओ भोकासी पाङि कऽ नीच्चा मे औंघङा औघङा कानथ़ि दरवज्जा के नीचा ठाढ सबहक आँखि झर झर बहैत छल विशेख करिक पूरना लोक सब के जे हुनका बड़ दिन सॅ़ कएक बरक सँ जनैत छल ।
ट्रेनक समय लगचिया गेल छल ।जेनाए परम आवश्यक ।आऽ बेर बेर अपन हाथक घङी देखैत एत्ते काल धरि किंकर्त्तव्य विमूढ ठाढ कन्हैयाजी काकी के भरि पाॅज पकङि कोरा मे उठा ताँगा पर बैसा देलकैन्ह जा ओ अन्न पानिक पोटरा पोटरी बाेरा झोरा राखय लेल मुड़ला असक्तद निर्बल काकि नै जानि कोन दैवीक शक्ति सँ उछैलकऽ ताँगा सँ नीचा उतरि दुर्गास्थान दिस पङाय लगलीह ।जेना कसाई के देख कऽ गाय चिकरैत छै़ ओहिना ओ अपन प्रिय बड़का पाैत्र के देख क। चिकरय लगलीह़ ।चिकरैत चिकरैत हुनक गरा बाझि गेलन्ह़ि ।कन्हैयाजी हुनका पाछाँ भगला आऽ लपकि कऽ फेर अपन कोरा मे उठा ताँगा प बैसा देलकैन्ह़ कियो लोटा मुँह मे लगा कऽ दू चारि घोँट पानि पीया देलकैन्ह ।कन्हैयाजी अपनो छरपि कऽ बैस रहला आऽ काकि के पॅजिएने रहला ।चीज वाेस्त लोके सब राखि देलकै आऽ तांगा वला के इसारा करि देलकै़ ओ तङाक सँ भगबए लागल घाेङा ओ हुनक कानब जेना कोने बच्ची दुरगमनिया कनिया के ।ताँगा के पाछाँ पाछाँ भरि टोलक लोक़ अङियातए़ बाेल भरोस दैत़ दियादिनी आऽ पुतौह सब़ ‘हे बौआ यौ गोड़ लगैत छी काकी के अवस्से पठा देबैन्ह ।’’ ‘ इलाज करा कऽ चलि अबिहथि ’ ‘जुनि कानैथ़ हिनका हमर सप्पहत़ ।’
आऽ पोखरि धरि अङियैत कऽ जखन ओ सब आपस हुनक दरवज्जा पर आबि बैसली त सबहक मूह नाक आँखि लाल लाल जेना रंग अबीर मलि देने होय ।झर झर नोर बहि रहल छलै एखनो धरि ।
आऽ ओहि दिन की रातियो मे धिया पुत्ता के छोङि पैघ ककरो अन्न नै धसले मुँह मे ।रहि रहि कऽ लाल काकी के ओ करूण क्रंदन जेना सबहक कान मे घुरियाति रहल छल ।पचासो वरखक अपन बास छोङि पहिल बेर ओ नैहर वा’ सासूर क आगाँ कत्ताे पएर राखने छलीह ।
कामिनी कामायनी
11।8।09
_________ मिथिलेश कुमार झापरिचय-पात

नाम ________ मिथिलेश कुमार झा
पिता ________ श्री विश्वनाथ झा जन्म ________ 12-01-1970 केँ मनपौर(मातृक) मे पैतृक ________ ग्राम-जगति, पो*-बेनीपट्टी,जिला-मधुबनी, मिथिला, पिन*- 847223 डाक-संपर्क _____ द्वारा- श्री विश्वनाथ झा, 15, हाजरा रोड, कोलकाता-- 700026 शिक्षा :
प्राथमिक धरि- गामहिक विद्यालय मे। मध्य विद्यालय धरि- मध्य विद्यालय, बेनीपट्टी सँ। माध्यमिक धरि- श्री लीलाधर उच्च विद्यालय,बेनीपट्टीसँ इतिहास-प्रतिष्ठाक संग स्नातक-कालिदास विद्यापति साइंस काँलेज उच्चैठ सँ, पत्रकारिता मे डिप्लोमा-पत्रकारिता महाविद्यालय(पत्राचार माध्यम) दिल्ली सँ, कम्प्युटर मे डी.टी.पी ओ बेसिक ज्ञान। रचना: हिन्दी ओ मैथिली मे कविता, गजल, बाल कविता, बाल कथा,साहित्यिक ओ गैर-साहित्यिक निबंध, ललित निबंध, साक्षात्कार, रिपोर्ताज, फीचर आदि। प्रकाशित पहिल रचना:
हिन्दी मे– मुखपृष्ठ अखबार का- जनसत्ता(कलकत्ता संस्करण) मे 19-10-94 केँ(कविता) मैथिली मे- विधवा(कविता)-प्रवासक भेंट(मैथिली मासिक कोलकाता)-रिकार्ड तिथि उपलब्ध नहि, आरक्षण सिर्फ सत्ताक हेतु- आलेख(प्रवासक भेंट-कोलकाता)- नवम्बर 1994 कें। प्रकाशित रचना: मैथिली:- प्रायः 15 गोट कविता, 17 गोट बाल कविता, 18 गोट लघुकथा, 3 गोट कथा, 1 टा बालकथा, 44 गोट आलेख आ 6 गोट अन्य विविध विषयक रचना प्रकाशित। प्रकाशित रचना:- हिन्दी:- प्रायः 10 गोट कविता/गजल, 18 गोट आलेख, 1 गोट कथा ओ 3 गोट विविध विषय प्रकाशित।

समय—संकेत

___ नमस्कार,कहिया एलहुँ गामसँ ? काज नीके- जना सम्पन्न भेलै ने?
___ हँ- हँ, खूब नीकसँ सब किछु भ’ गेलै ।
___ ऎं यौ, अहाँक बडका भैयाक की समाचार छनि ?
___ बडका भैया ! ठीक छथि । --- माएक काज मे सब भाँइ जुटल रहिऎ ने । ओहो भेटल छलाह । --- ठीक छथि ।

___ --- --- !1 --- --- ‘ त ‘ भाए-भैयारीक भेंट सेहो आब काजे-परोजने हेतै की !!! ‘ --- --- ओ छगुंता मे पडि गेल छलाह।



अनमोल झा (१९७०- )-गाम नरुआर, जिला मधुबनी। एक दर्जनसँ बेशी कथा, साठिसँ बेशी लघुकथा, तीन दर्जनसँ बेशी कविता, किछु गीत, बाल गीत आ रिपोर्ताज आदि विभिन्न पत्रिका, स्मारिका आ विभिन्न संग्रह यथा- “कथा-दिशा”-महाविशेषांक, “श्वेतपत्र”, आ “एक्कैसम शताब्दीक घोषणापत्र” (दुनू संग्रह कथागोष्ठीमे पठित कथाक संग्रह), “प्रभात”-अंक २ (विराटनगरसँ प्रकाशित कथा विशेषांक) आदिमे संग्रहित।
अन्हरजाली

भऽ गेलै। आइ कठराबालीक दोसरो बेटीक बियाह भऽ गेलै। बेचारीकेँ भरोस नै छलै जे ई अन्तिम बेटीक बियाह करा निसास छोड़ब। आ दुरागमन तऽ अपना हाथमे छैक, जे जुड़तै से देतै, नै जुड़तै नै देतै। दहेज जकाँ मोल-मोलाइ आब नै ने हेतै।

कठराबालीक घरबाला पाँच हजार महीना दिल्लीमे कमाइत छलै। मुदा नै कहियो सैंयेक देहपर एकटा वस्त्र भेलै नै अपने वा दीये-पुतेकऽ। की करतै कहुना समय काटै छल। से जे आइ बेटीक बियाह छलै हुइल बजड़ल छलै। बरियातीक पचास टा अबैया छलै आ एलै एक सय गोटा। कठराबालीक मोन अपसियाँत छलै, सबटा एस्टीमेट फेल भऽ गेलै। हाँइ-हाँइकऽ सब सामान आनल गेल।

तरकारी काटैक हुइल भेलै। तीमन बन्ना हाँसू कठराबाली अपने सऽ अँगने-अँगने जा पाँच टा आनि देलकै। बेस तरकारी सब बनलै।

वर-बियाह भऽ गेलै। जसो भेलै। दोसर दिन भेने रुनियाँ माय समाद देलकै कठरा बालीकेँ जे हमर तीमन-बन्ना हाँसू नै पहुँचल हे, से दऽ जाथु नै तऽ बात नै ठीक हेतैन।

कठराबाली कतबो ताकै हाँसू, भेटबे नै करैय। तरकारी बनबै काल कियो दाइ-माय हाथ लगा नेने चल गेल रहथिन। एक दिन रुनियाँ फेर आयल जे माय कहलक हे आँच जरै छै से कनि तामे अहाँ अपने हाँसू दियौ। कठराबाली देलकै अपन बला हाँसू। जखन दोसर दिन एकरो आँच जरै छलै तऽ हाँसू लेबय अपने गेलै तऽ रुनियाँ मायक गप्प सुनि ओकरा ठकमूड़ी लागि गेलै।

रुनियाँ माय कहलकै- ऐँ अहाँक ई सपरतीब, हाँसू हराकऽ ठेसी सऽ अहाँ अपन हाँसू लेमऽ एलहुँ हेँ। सठ्ठा नै छल तऽ बेटी कियै जनमेलहुँ। हमर हाँसू दऽ जाउ तखने ई हाँसू भेटत। नै तऽ अहूँ घर हमहूँ घर। आदि-आदि।

कठराबालीकेँ ठकमूड़ी नै लगितै, मुदा लगलै एहि लके जे पाँच हजारक कमेनहारक बहु रहैत आ दूये टा बेटीमे दू लोक सुझय लागल अछि हमरा। आ रुनियाँ, हिनियाँ, गिनियाँ आ रनियाँ एहि चारि गोट बेटीक माय आ सब कुमारिये। घरबाला एकटा साधारण गिरहस्थ। कोना कऽ अपना नून-तेले निमाहि लेत एही चारि गो भगवतीक चण्डीस्वरूपा माय। आ कठराबाली खाली हाथे अपना अँगना घुमि गेल, मुदा पयरे नै उठि रहल छै, पैर लोथ भऽ गेलै। जे हमरा देखियोकऽ एकर अन्हरजाली नै हटलै....!!


कुसुम ठाकुर
प्रत्यावर्तन
१५
एहि सिनेमाक प्रेमिएर पटना मे छलैक आ हम श्री लल्लन जी के संग ओहि के लेल पटना गेल छलहुँ।
ओना तs जमशेदपुर मे १९८१ सs श्री लल्लन प्रसाद ठाकुर केर नाटक आ सांस्कृतिक गतिविधि शुरू भs गेल छलैन्ह मुदा मैथिली केर सेवा आ हुनका अपना संतुष्टि भेंटलैन्ह १९८३ मे, जहिया ओ अपन लिखल पहिल मैथिली नाटक केर मंचन केलाह, मुदा ओहियो मे किछु त्रुटि हुनका अपना बुझेलैन्ह।


मिथिलाक्षरक स्थापनाक बाद पहिल नाटक छलैक "मिस्टर निलो काका" जाहि केर पहिल मंचन जमशेदपुर मे भेलैक आ दोसर मंचन "अन्तराष्ट्रीय नाट्य समारोह" पटना मे। "मिस्टर निलो काका" क s मंचन केर बाद प्रतिवर्ष मैथिली भाषा भाषी के एकटा नाटक देबाक आ मंचन करबाक लेल प्रतिबद्ध श्री ठाकुर जी प्रतिवर्ष एकटा नाटक केर रचना करैत रहलाह आ ओकर मंचन होइत रहलैक। एहि बीच बिना कोनो अनुभव के एकटा मैथिली विडियो फ़िल्म सेहो बनौलाह। जमशेदपुर मे पहिल फिल्मोत्सव श्री ठाकुर जी केर देन छैन्ह। प्रकाश झा जी केर सँग हुनक सिनेमा मे काज केलाक बाद प्रकाश झा फिल्मोत्सव जमशेदपुर मे भेल छलैक जाहि केर पूरा व्यवस्था श्री ठाकुर जी अपनहि कएने छलाह। त्रिदिवसीय नाट्य समारोहक केर इच्छा पहिल नाट्य समारोह सs छलैन्ह, ओ जमशेदपुर मे भेलैक आ खूब नीक जकां संपन्न भेलैक।


प्रकाश झा जी के सात कड़ी वाला धारावाहिक "विद्रोह" केर शूटिंग से मदनपुर( बेतिया) केर जंगल जंगल आ बम्बई मे भेलैक आ ओ शूटिंग के बीच मे श्री ठाकुर जी केर मोन किछु ख़राब भs गेल छलैन्ह जाहि चलते ओ धारावाहिक केर शूटिंग जल्दी खतम होइते चलि अयलाह। हमरा से पता नहि कियैक जहिया सs श्री ठाकुर जी शूटिंग के लेल गेलाह मोन बहुत घबराइत छल। फोनक बेसी सुविधा नहि छलैक तथापि हुनका खबरि भेंट गेलैन्ह आ अपन शूटिंग खतम करि कs आपस आबि गेलाह।


बेतिया सs अयलाक बाद पता नहि कियाक आ की भेलैंह, बीच बीच मे बुखार लागि जायत छलैन्ह, डॉक्टर सs देखा दबाई होइत छलैन्ह तs फेर दू तीन दिन मे ठीक भsजाइत छलाह। एहिना करीब चारि पॉँच मास तक चलैत रहलैक बीच बीच मे हम कहियैन्ह नीक सs डॉक्टर के देखा लिय, डॉक्टर सँs देखाबथि तs मुदा पूरा पूरा चेक अप नहि होय। हमरा ओहिना मोन अछि अचानक एक दिन बुखार भेलैंह आ एकहि बेर खूब तेज़ बुखार भs गेलैन्ह। एहि बेर हम सोचि लेने रहियैन्ह जे पूरा नीक सय जांच करवाबय के छैन्ह मुदा ओ अपनहि बजलाह एहि बेर हॉस्पिटल मे भरती भsजाइत छी आ नीक सँ पूरा जाँच करवा लैत छी। राति मे ततेक बेसी बुखार भsगेलैन्ह जे ओहि समय भरती कराबय परि गेलैन्ह।


भोर मे हम हॉस्पिटल गेलहुँ तs डॉक्टर बी.एन.झा राउंड(round) मे छलाह पुछला पर कहलाह "बुखार नहि अछि साँझ तक छोरि देबैन्ह आ नहि तs काल्हि घर जा सकैत छथि" हम हुनका भोजन करवेलाक के बाद घर आबि गेलहुँ। सांझ मे बच्चा सब के लs कs अयलहुं। पता चलल जे डॉक्टर साहेब केर आदेश छलैन्ह जे बिना सबटा जाँच कएने घर नहिं जाय देताह। हम सब राति मे घर आबि गेलहुँ। दोसर दिन किछु एहेन भेलैक जे हम भोर मे हॉस्पिटल नहिं जा सकलहुँ । बड़का बेटा पुत्तु आ पंडित जी सँ चाय नाश्ता पठा देलियैन्ह आ हम एकहि बेर दुपहर मे हुनकर कपडा लs कs गेलहुँ जे आइ तs घर आपिस आबिये जयताह।


हॉस्पिटल मात्र हुनकर कपडा आ चाय लs कs गेल रही। पहुँचलहुँ तs हिनका उदास देखलियैन्ह, पुछला पर कहलाह जे अइयो डॉक्टर साहब नहि छोरताह। हम सुनतहि डॉक्टर बी. एन. झा लग गेलहुँ, कहलाह जे "हम आब ठाकुर जी के किछु आओर दिन रखबैन्ह हुनका खुनक बहुत कमी छैन्ह "। इ सुनतहि हमरा चिन्ता भेल मुदा करितहुँ की राति मे फेर सs खाना लs कs आबय परल आ राति भरि हम सुति नहिं पयलहुँ ।


दोसर दिन श्री ठाकुर जी केर सबटा खून इत्यादि केर जाँच शुरू भेलैक । जाँच केलाक बाद डॉक्टर बी. एन. झा ओहि जांचक सबटा रिपोर्ट देखि खुश नहि छलाह हुनका किछु आशंका छलैन्ह, की से तs नहि कहलाह, कहलाह "bone marraw" करवाबय परतैन्ह।
तिरंगा
भारतक राजधानी दिल्ली मे शायद ट्रैफिक के सेहो राजधानी छैक ओहो मे बीआरटी रोड पर सबसे बेसी ट्रैफिक रहैत अछि चिराग दिल्ली रेड लाइट पर ओही रेड लाइट पर एकटा बच्चा बहुत रास तिरंगा झंडा लय के बेचैत छल आओर जोर जोर सं बजैत छल तिरंगा ले लो कल पंद्रह अगस्त है बाबूजी कम से कम एक झंडा तो ले लो एकटा कार सं जा के चिपैक गेल और हाथ जोरी के झंडा लेबाक आग्रह कराय लागल बाबूजी आपके गारी मे बहुत अच्छा लगेगा कार मे बैसल बाबूजी के गुस्सा आबी गेलैन और कार के दरबाजा खोली के ओकरा मरबाक कोशिस केलैथ दरबाजा के चोट बच्चा के कपार मे लगलैक और बच्चा रोड पर खसी परल आ ओकरा माथा से खून बहय लगलैक एतबा मे लाल बत्ती भय गेल और बाबूजी गारी ल के चलैत बनलाह विजय के दहिना टांग पर से एकटा कार पास कय गेल |
विजय के पता छलैक जे आई जे स्कुल मे मास्टर जे पढेने रहैक तिरंगा के महात्म ई केसरिया शहीद के प्रतीक थीक उज्जर रंग सादगी के और हरियर हरियाली के ओकरा मास्टर इहो कहने रहैक जे तु सब कि बुझबिन शहीद महात्म तोरा सबके ते आजादी ओहिना भेटी गेलौक ! बेचारा विजय दिन मे स्कुल करैत अछि और साँझ के लाल बत्ती पर हरेक सीजन के हरेक रंगक सामान बचैत अछि ! जखन ओकरा होस भालैक ते देखैत अछि पायर लग माय बैसल अछि और हमर दहिना टांग नहि अछि आई ओकरा मास्टर जी के केसरिया रंगक महात्म बेर बेर याद आबी रहल छैक ।


कुमार मनोज कश्यप
जन्म मधुबनी जिलांतर्गत सलेमपुर गाम मे। बाल्य काले सँ लेखन मे आभरुचि। कैक गोट रचना आकाशवानी सँ प्रसारित आ विभिन्न पत्र-पत्रिका मे प्रकाशित। सम्प्रति केंद्रीय सचिवालय मे अनुभाग आधकारी पद पर पदस्थापित।


कलाकार

ओकर उमरि सात-आठ साल सँ बेसी तऽ नहिये हेबाक चाही। मुदा एक बात मानऽ पड़त जे कमाल के करतब करई छई छौंड़ा ..आगिक गोलाक बीच सँ चीता जकाँ छलांग लगा कऽ निकलि गेनाई, दुनू पैर के मोड़ि कान्ह पर राखि हाथ सँ चलनाई,छोट छल्ला के बीच सँ शरीर निकालि लेनाई़..आर की की ने़..! सभ कहैक जे कमाल के चुस्ती-फुर्ती छै छौंड़ा मे। एकर शरीर जेना रबड़ के बनल हो। सत्ये एहन सहजता आ चुमकी सँ ई सभ करतब करब सर्कसक कोनो माँजल कलकारो लेल कठिने हेतई। मात्रा तीन टा बच्चा मीलि कऽ कय रहल छल करतब - जनपथक तीर्मुहानी बला लाल बत्ती पऱ़ एक टा बच्चा ढोल पीटैत, दोसर कलाकार आ तेसर सहायक। लाल बत्ती पर रुकल सभ लोक अपलक देखि रहल छल करतब़ मुग्ध़..चकित।

दृश्य परिवर्तन भेलैक। खेल रुकि गेलैक। सहसा महान कलाकारक हाथ झड़कल बाटी लऽ कऽ याचना मे सभक आगू घुमऽ लगलैक .. एक रुपया़..दू रुपयाक हेतु .. पेटक खातिर, वस्त्रक खातिऱ़..। ओकर याचक नजरि एक दीस जतऽ लोक सँ सहायताक उम्मीद बन्हने छलैक ततहि एक हाथ पेट-मुंह पर जा कऽ भूख कें संकेतित कऽ रहल छलै .. संकेतित कऽ रहल छलै जे पेटे खातिर जान जोखिम मे दऽ कऽ रहल छी ई खतरनाक खेल । बत्ती ताबते मे हरियर भऽ गेलैक। लोक तरकश सँ छुटल तीर जकाँ अपन-अपन वाहन सँ भागऽ लागल। लोक बिसारि देने छल छौंड़ाक अजगुत करतब के़ लोक अनसुना कऽ देने छल छौंड़ाक याचना के। छौंड़ा सड़कक कात मे ठाढ भेल अपन खालिये रहि गेल झड़कल बाटी दिस तकलकै फेर देखैत रहल सर्र -सर्र भागल पड़ायल जाईत गाड़ी के हुजुम के ।

एक बेर फेर सँ छौंड़ा प्रतिक्षा कऽ रहल छलै बत्ती कें लाल हेबाक़..किश्मतक कोन भरोस?


मनोज झा मुक्ति
चाँद के टुकडा

अखनो, अहु समय मे आविक मनुख्ख किया एहन पुरान सोँच रखै छयि? आन-आन चन्द्रमा पर जाक घर बनयबाक सोँचि रहल अछि आ हम सब अपन घर के उजाडैत छी।
मनुष्यक जन्म किछु करबाक लेल होइत छैक ओनाहिएँ नष्ट करबाक लेल नहि। हँ कहियो काल एहन परिस्थिति आबि जाइत छैक जे मनुख्खके विचलीतक दैत छैक मुदा एहन विचलनक परिस्थिति मे अपना आपके सम्हरबाक चाही, संकट के सामना करबाक चाही जे अखनो लोक नइ बुझि सकल अछि। मनोज मुक्तिजी हम अहाँक कार्यक्रम के नियमित श्रोता छी आ एही कार्यक्रम मादे बहुत लोकक जीवन मे घटल घटना सब सुनैछी ताही स हमरा जीवन मे त नइ मुदा हमरा मित्र के घर मे घटल ई घटना हम पठावि रहल छी। एकरा सुनिक श्रोता सबके किछु लाभ होय तन्हि ताइ आश स पठाबि रहल छी।
हमर घर धनुषा जिलाक एकटा गाम मे अछि। हम आ हमर मित्र विनोद बच्चे स बाले वरख सँ संगे पठित छलौ। ओना संगी सभ त आरो छल मुदा विनोद जका दोसर नहि। विनोद सभ दिन सब क्लास मे हमरा स निक नम्बर लाबिक पास होइत छल। पठनाइ लिखनाइ के संगही सभ काज मे विनोद ओतवही निपुण छल चाहे वो खेलकुद हुए, बाजभुक मे हुए वा अनुशासने मे हुए। सब तरहेँ विनोद निक छल। हम सब संगे संग मैट्रिक पास कयलहुँ।
मैट्रिक क बाद मे I.SC. पठबाकलेल जनकपुरक रा. रा. व. काँलेज मे एडमिशन लेलहुँ।
ओना ई बात आइस 10 वर्ष पहिनेक बात अछि।
विनोद के परिवार सेहो बड हँसी खुशी रहैत सखी स जिविरहल परिवारक उदाहरण गाम मे छल। विनोदक परिवार छोटे छल- माय, बाबुजी एकटा बहिन आ विनोद के जोडि क चारि गोटे छल ओहे परिवार मे। विनोदक बहिन से हो सातम क्लास मे अध्ययनरत छलीह। विनोदक बाबु एकटा सरकारी अस्पताल मे काज करैत रहथिन। हमर सब हक गाम जनकपुर स लगे भेलाक कारण स बेसी पावनि मे हम सब
गामे चलि जाइत छलहुँ। हमरा अन्य,अन्य कोनो संगीके जौ कोनो तरहक परेशानी चाहे उलझन होइत छलै त सभ गोटे विनोदे लग जाक सल्लाह –सुझाव लैत छलौ। अर्थात विनोद बहुत सुझबुझ बला व्यक्ति छल। जहिना विनोद नाम छल तहिना ओ विनोदी अर्थात हँसमुख लोक से हो रहय, ने कोनो गम, ने कोनो चिंता, कोनो काज मे आत्म विश्वास---(दन दन दनाइत रहु)।
अहिना हम सभ I.SC. पास कयलहुँ। I.SC . पास कयलाक बाद दुनु गोटे काठमाण्डू गेलहुँ। डाँक्टरी पढाइयक प्रवेशक तैयारी करबाक लेल। काठमाण्डू मे से हो हम सब एकही रूम मे रहीत छलहुँ। विनोदक घर सँ आ हमरा घरक लोक सब स फोन मे बातचीत भ जाइत छल। एकबेर छठिक पावनि मे हम सब गाम गेलहुँ। विनोदक योजना छल जे ओ 4/5 दिनक बाद आओत आ हम पहिन ही चलि आयब। छठिमे गाम पर से हो बहुत मनोरञ्जन भेल छल। छठिक प्रातःभिने हम काठमाण्डू अयलहुँ, ओ
सोमदिन छल आ विनोद आयबाक रविदिन रहै। ओना असगर त मेनेजर नइ लगैत छल,
मुदा वेसी दिनक बात थोड्वे छैक कहैत असगरे कहुना शनिदिन धरि वितयलहुँ। रविक दिन भोर मे छः, सात बाजिगेल विनोद नइ आयल। भेल,फेर आइ बाट मे गाडी जाम भ गेल होय तै ताही स देरी भ रहल छैक। अहिना हम ग्यारह बजे तक इंतजार क क खाना बनाक खयलहुँ, इ सोचेक जे बुझाइया विनोद दिनुका गाडी स आयत साझ मे सेहो सात-आठ बजिगेल, विनोदक कोनो अता- पता नइ छल। अहिना 9, 10, होइत 11 बजिगेल विनोद नइ आयल। हमरा आशंका होवए लागल। विनोद वचन के एकदम पक्का लोक छल।राति कटनाइ मुश्किल बुझाइत छल। बहुत राति धरि जगले छलहु निन्न कखन पडिगेलो पते नइ चलल। भोर मे दरबज्जा ढकढकयबाक आवाज स हमर निन्न टुटल।
गामस फोन आयल छल। गेलहुँ त फोन पर विनोद छल। विनोद कहलक जे हमारा नइ
आब सकलहुँ किछु दिन आओर हमरा लागत। विनोदक बहिनक विवाह ठिक भ गेल छल
बुधेदिन विवाह भेलाक कारणे हडबडी मे सभ काज करबाक छलै। ओना अयबाक लेल
त हमरो कहलक मुदा अखुनका क्लास छोडए बला नइ भेलाक कारण स हम नइ जा सकलहुँ। बेस्पति दिन एहन समाचार आयल जे अबाके रहि गेलहुँ। विनोद, विनोदक बाबु,
आ विनोदक माय तीन गोटे फाँसी लगाक मरि गेल। माथ पकरिक वैसि गेलहुँ जे एहन खुशी मे एहन विपत कोना? ई समाचार त हम बुझियवै नइ केलौ मुदा बुझियवाक लेल विवश भ गेलौ। तैयो अपन मनके मनयबाक लेल हमारा तखने गामक लेल विदा भेलौ जनकपुरक गाडी नइ भेटल,विरगंजक गाडी पकरलहुँ। शाम पहुँचित-पहुँचित 5 बजि गेल। शाम जाइते सबस पहिने विनोदे ओत गेलहुँ। तिनु लहास के मेडिकल चेक के लेल जनकपुर लगेल छलैक। राति मे सभ खेडा हमरा बुझए मे आयल जे किया सामुहिक आत्महत्या भेलैक। विनोदक बहिन जकर विवाह बुधदिन होब बला छलैक ओ बरियाती
आबस पहिनही एकटा चिठ्ठी लिखिक छोरि देने रहे जे—{“बाबु,माय,आ भैया,हमरा माफ करब।ओना ई बात हमरा आहाँ सबके पहिनही कहीं देबाक चाही मुदा संकोच स नइ कहए सकलहुँ आ ऐ हम विवश छी ई काज करबाक लेल। अखन हम बहुत बडका धर्मसंकट मे छी, एक दिस सब परिवार ओअर मान इज्जत आ मर्यादा अछि त दोसर दिस हमर पुरा जिवनक प्रश्न अछि जे हमरा जिवाक अछि। ताही स हम अपन जिवनक लेल क रहल छी। निहोरा अछि जे हमरा तकबाक प्रयाश नइ करब।“}-- आहाँक--
कुलच्छिन/बहिन॥
विनोदक बहिन गामेक एकटा पासमान जातिक लडिका संगे चलि गेलाक बाद समाज स बँचबाक लेल विनोद आ विनोदक माय, बाबु मृत्यु के चुमने छल अपन इज्जत बचयबाक लेल सबस सस्ता काज हुनका सबके याह बुझयलनि।
मनोज जी हम श्रोता सभके ई घटना अइ लेल सुनयलहुँ जे की सबके समझाब-बुझाब बला विनोद द्वारा कायल गेल ई काज उचित भेल?
ने जानि अखन कतेक विनोद समस्या स घेराक आत्महत्याक रस्ता चुनत?
जीवन त जीवाक लेल होइत छैक, किछु करबाक लेल होइत छै। जीवन मे छोटछिन रूकाहट त होइते रहैत छैक। आत्महत्याक बाट चुनब एकटा निक लोकक काज किनहु नइ भेल जेना हमरा बुझाइत अछि। जीवन संघर्षक दोसर नाम छियै---।
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[1]
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ओना जीवनक सम्बन्ध मे बहुत गोटे अपन-अपन परिभाषा करै छयि, मुदा हमरा बुझि पडैत अछि जीवन मात्र देखावा छियै। ओना ई सब ठाम शत-प्रतिशत सत्ये नही भ सकैय। बहुत दिन स उकुस-मुकुस करैत हमर मोन के गठरी के अछि टेंज मैथिली गुञ्जन मार्फत खोलि रहल छी। अखुनका समय बहुत आगा बढि गेल छैक ताएँ हमसब सत्य, झूठ, आ देखावा के चिन्हिक, बुझिक किछु करबाक चाही से समस्त श्रोता स हमर आग्रह अछि।
हमर नाम ए. कुमार अछि। हमर घर जनकपुर अञ्चल मे पडैत अछि। हम अखन विराटनगर मे रहैत छी। ओना बचपने स ने उधोके लेव,ने माधव के देव से सिद्धांत
रही आयल अछि हमर। अपना घर स दूर विराटनगर मे रहियो क जे किछु समय भेटैत अछि तकरा अपन संस्कृतिक प्रचार- प्रसारक कार्यक्रम मे जाक वितवैत छी आ नइ त घरक पाछु मे रहल वारी मे काज करैत रहैछी। हम आइ अप्पन नहि कि किछु महानुभाव सबहक ,देखावा केहन-केहन छन्हि से श्रोता के सुनाव चाहैत छियन्हि।
मैथिलीक कोनो कार्यक्रम, सामाजिक काज वा किछु रहैत अछि त सबस आगा-आगा रह वला व्यक्ति सबमे स रहैत छयि एकटा व्यक्ति संदेश कुमार, संदेश जीक मिठ बोली, आर्कषक व्यक्तित्व आ निक पाइबला नौकरी हूनक विशेषता छन्हि। विरटनगरक कोनो संस्था हुए, हूनक उपस्थिति आनिवार्य रहै छन्हि। संदेश जीक कार्यप्रणाली पर किनको कोनो आपत्ति नइ रहैन। ककरि घरबला- घरबालीक पंचेती हुए, किटनैतिक गप्प हुए चाहि जातिक सभा, सब ठाम हूनके वोलबला रहैत छन्हि। हमरे नहि की एत रहबला प्रायः लोकके ई विश्वास छलै की संदेश जी गलत नइ क सकै छयि। विश्वास ककरो पर नइ कायल जा सकैत छैक तकर वडका प्रमाण सदेश जी छयि। मैथिल ब्राह्मण सबहक वैसार छल विराटनगर मे, ओना नहियो त 45-50 गोटेक उपस्थिति छल ओहि ठाम। मुद्धा छल’ राकेश के सभ काज मे उपस्थितिक। मैथिली वा मैथिलक कोनो काज होइत छल त संदेशे जी जक राकेश के सेहो अनिवार्य उपस्थिति रहैत छल ओतय। राकेश सप्तरी जिल्लाक वासी छथि। किछु दिन पहिने राकेश दोसर जाति मेँ विवाह क लेने छल। विवाहक बाद कोनो काज परोजनमे राकेशक उपस्थिति संदेश जी के नीक नइ लगनि। संदेश जीक ई पूरा कोशिश रहैत छल जे राकेश के समाजिक बहिष्कार कायल जाए। सभा मे संदेश जीक कहब छलनि जे राकेश कुसंस्कारी भ गेल, समाज के विगाडि देलक। एहन-एहनके सामाजिक बहिष्कार जरुरी छैक नइ त एकदिन समाज नष्ट भ जायत। हम मौन रहिक एकटा कोना मे वैसल
विचार सब सुनैत छलहुँ। ओना आनो बहुत बाबु लोक सब रहैय ओतय मुदा सब “बरोक भाइ आ कनियोक भाइ“ जका तनिक चुप्प छलैय। सभा मे उपस्थित लोक सब मे छलयि, एकगोट वृद्ध से हो। आइ स पहिने हुनका हमारा एत नइ देखने रहियै न।
ओ वृद्ध ठाढ भ बाजब शुरु कयलन्हि- हमर नाम रघुनन्दन मिसर अछि। हमर घर संदेश बाबुक बगल के गाम मे पडैत अछि।
संदेश बाबु हमरा नइ चिन्हैत हेता मुदा हम हिनका चिन्हैत छियनि। हम मोरङ्ग़े जिल्लाक एकटा गामक स्कूल मे शिक्षक छी।
ओना आइ हम पहिले दिन एहन सभा मे अएलहुँ, या आ बाज नहि चाहितो अपनोक नहि रोक सकलहुँ अछि। किया त हमारा शुरुए स एत देखि रहलछी, एतुक्का सब लोक भ्रम मे फँसल छयि। के ओ हँ, हँ करैत त के ओ चुप्प-चाप रहिक। तखने सँ हम सुनि रहल छी, जातिक संस्कार अपन संस्कृतिक जोगय बाक गप्प। मुदा एकैटा समाधान जे अंतर्जातिय विवाह क लेने राकेश के सामाजिक बहिष्कार कि मैथिलक संस्कार आ जातीय संस्कृति मे मात्र स्वजाति वा विजाति मे विवाह अवैध छैक? हम कनिको एही स सहमत नहि छी।
संदेश बाबु तखने स समाजक, जातिक, संस्कारक, संरक्षण ल बडका भाषण द रहल छयि। हमर प्रश्न अछि अपने सब स जे की अपन जन्म देब बला माय, बाबुके गारि पढब, मारब-पीटब आदि काज सँ समाज की संस्कारिक होइत छैक? संदेश बाबु, अपन टेटर से हो देखियौ। जे लोक अपने समाजकेँ बिगाडि रहल छयि, से एत आबिक समाजक बाहक बनल छयि। एहन- एहन सँ हमरा आहाँके सचेत होयबाक चाही। हँ ई जे बौवा छयि संदेश बाबु सने हँ मे हँ मिलवैत हिनको हमारा निक जका चिन्हैत छियै।
बाबु बेचारा बडका विद्वान छलनि मुदा हिनका सन पुत भेलनि। जाधरि पंडित जी जीवित छलाह ई एकहुँ सेर दूध नइ देलखिन्ह, गाम पर एत स जाइ छयि त सब एक दोसर के मुँह तकैत रहै छयि जे कोन घर भोजन बनत त भोजन करब। ई बउवा एत जातिक इज्जत मे लागल दागक बात करै छयि। अपन भतिजी, एकटा नइ दू-दू टा भागि गेलनि दौसर जाति संगे। कि यौ? याह विराटेनगर स 25 दिन पर ल जाक पुनः ब्राह्मणे मे वियाह करा देलखिन्ह। की अपना जातिक लेल नीक काज केने छयि। हमरा स बुझू त जे हिनका सँ लाख गुणा निक राकेश बाबु जे कम स कम दोसर लडकी के त अपना संस्कार मे मिलौने छयि।
एत उपस्थित सब समाज सँ हमर याह आग्रह अछि जे जौँ समाज के संस्कृति आ संस्कार बचब चाहित छी त चुप्पे रहला स काज नइ चलत समाज मे अगडीया बन बला संदेश बाबु सबहक चरित्र के नापेँ पडत- तौलेँ पडत। समाज ककरो बपौती सम्पति नइ होइत छैक। एहन मात्र दोसर के टेटर देख बला स समाजक सचेत करबाक हमर आ आहाँक कर्तव्य अछि।
जी ताइ दिनक बाद संदेश जी आ हुनक पिछुलग्ग मित्र सब झुठ-फुस बजनाइ छोडि देने छयि। आ हम आभारी, कृतज्ञ छी ओ बुढा मास्टर साहेब के। कार्यक्रम मैथिली गुञ्जन मे ई घटना पढयबा मे मात्र एकैटा हमर लक्ष्य अछि जे मैथिल समाज मे अपने करब आ दोसर के-धरब “बला प्रवृति के हमरा आहाँके अंत करहि टा पडत। चुप रहला स काज नइ चलत जे अपन जन्मदाता के आदर नइ कर सकै या ओ
समाज के कत ल जाक छोडत”, एहन- एहन स लोक के पर्दा उठाबही पडत। जौ अहुँक गाम वा शहर मे कियो संदेश बाबु सन अछि त देखब भाग ने जायब। एहन लोकक चरित्र ठीक ओहने रहित छैक जे दहेजक विरोध कय निहार अपना बेटाक वियाह मे मोटगर नोट लैत छयि----॥
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शनिवार
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जीवन, ओझरायल डोरा जका बुझिपडैय या। वास्तव मे सब किछु एकही आदमी के नइ भेटक सकैय किछु ने किछु के कमी प्रत्येक मनुख्य के रहवे करै छन्हि। कहियो एक –एकटा पाइला तरसैत रह-वला व्यक्ति जखन बहुत पाइ कमालइ छयि त बाहरस देख वला सब हक नजरि मेँ ओ सर्वगुण सम्पन्न लगैछयि मुदा कि? पाइएक लेल हुनका कि-कि छोड परल हैतनि से केओ नइ सोचेक छिन्ह। किछु तही तरहक हमरो जीवन मे भेल अछि। अपना जीवन मे भोगने किछु क्षण, आ चाहियो क नइ कर पाविरहल किछु वंदना के हम प्रस्तुत करबाक लेल दिल्ली स इ पत्र पठावि रहल छी। ओना हम त नहिए सुनाओ सकब तथापि आशा अछि अवश्य प्रसारण क देवइ। गाम पर छलहुँ त एही कार्यक्रम के आनन्द भरपुर मात्रा मे उठवित छलहुँ। एखन हमर जीवन कत स कत चलि गेल
हमर नाम महेन्द्र आनन्द अछि। हमर जन्म एकटा मध्यम वर्गिय परिवार मे, बिहार राज्यक मधुबनी जिल्ला मे भेल। हमारा अपना माय-बाबुक पहिल संतानक रुप मे जन्म लेने छलहुँ। माय के क ओ ट के ज्ञान नइ छलैन्हि, आ बाबुजी दिल्ली मे काज कहाँदोन
करथिन्ह। कहाँदोन अइला कि हमरा जन्म भेलाक छऎ मासेक बाद बाबु के मृत्यु भ गेलनि। कहाँदोन हमरा ओ देखनहुँ नइ रहथिन। हमरे देखएला जखन ओ दिल्ली स अवैत रहथिन सन 1963 मे त बस एक्सिडेण्ट मे हुनक मृत्यु भ गेलनि। बहुत कष्ट क-क माय हमरा पोसने होइथिन से अनुभव, हमहे की केओ क सकैछथि। बाबु स जेठ एकटा कका छथिन्ह। जहिया बाबुक मृत्यु भेलनि त दादी- दादा दुनु गोटे जिविते रहथिन्ह। बेटाक मृत्यु दादी आ दादा दुनु गोटेक तोरि देलकनि। बाबु मरलाक दुए साल के भीतर मे दादी-दादा सेहो ई संसार छोडिक चलि गेलखिन्ह। पतिक मृत्यु के बाद माय के छहरि देनिहार गाछ के रुप मे रहल दादी- दादाक मृत्यु क विछोह परीक्षा गेल कनि हुनका।
अपना जीवन मे एकके बाद आयल दोसर आफत- विपत स हडबराइयोक माय मात्र हमरा लेल अपन जीवन जिय लगलिह। कहबी छै—“डूबैत सुरज के केओ पुछुनिहार नहि होइत छैक”। तहिना कका माय के भिन्न क देलखिन्ह। दुःख सहब माय के आदति भ गेल रहनि, माय नइ हडबडेलखिन्ह। ओना मामा आविक माय के अपना गाम लगेलखिन्ह आ ओतही सभ दिन रहबाक लेल कह लगलखिन्ह मुदा बच्चा लक नैहर ओगरब माय के नइ नीक लगलैन्ह आ ओ 10/15 दिनक बाद अपने गाम घुरि एलखिन्ह। हूनक जीवनक एक मात्र सहाराक आशा हमही छलियैक। ओना खेत एते हिस्सा भेटल छलै जकर उपजनी स कहुना साल कटा जाइत छलै। घरे मे माय चर्खा चलवैत छलिह। महिना मे 2 वेर मामा अवैत छलखिन्ह आ चर्खाक सूत मधुबनी आ सूतक पाइ आ सामान माय के द अवैत छलखिन्ह। गामे मे क स्कूल सँ हम आठ क्लास पास कयलहुँ आ गामक से एक/डेढ कोस पर रहल एकटा हाइस्कूल मे नाम लिखा, पढ लगलहुँ। हमरा बाबु नइ होइतो गाम मे ककरो स खराब कपडा आ पढाइयक समान मे कमी, हमरा माय कहियो नइ होब देलखिन्ह। माय के बैसी समय चर्खेकाटए मे वितैत छलन्हि। हमरा याद अछि जहिया हम 9 वाँ क्लास मेअ रही त माय के मोन बहुत जोर सँ खराब भ गेल रहन्हि। बेसीकाल हुनकर माथ दुखाइत। डाँक्टर जाँच क क हुनका चश्मा देने रहनि आ चर्खा कनि कमे कटबाक सलाह देने रहनि। समय-वितैत जा रहल छल अपना गति मे। हम मैट्रिकक परीक्षा देवाक तैयारी मे छलहुँ। ओना बच्चे क्लास स हमपढाइ लिखाइ मे ठीक होयबाक कारणे पुरा गामक आश हमरा पर छलै। हँ एकटा बात हम चाहियोक नइ विसरल छी जे जौ केओ हमरा ‘टुग्गर’ वा ‘टुगरा’ कहीं दै से हमरा माय के कनिको बर्दाश्त नइ होइन। हमर मैट्रिक परीक्षाक सेंटर बेनीपट्टी मे परल छल। परीक्षा देबाक लेल बेनीपट्टी मे एकटा रुम भाडा ल क
ओत रहल छलहुँ। अपन संतानक प्रति सिनेक भावना माय के, परीक्षा समय मे बेनीपट्टी
हमरा संगे रह स नइ रोक सकलनि। मायक आर्शिवाद आ हमर मेहनत दुनु सफल भेल। हम फर्स्ट डिभिजन सँ मैट्रिक पास कयलहुँ। रिजल्टक दिन जे हम मायके खुशी देखलियैन तकर वर्णन हम नहि क सकैत छी। माय ओहिदिन पूरा गाम मे लड्डू बटने छलखिन्ह। “एहन खुशी छलखिन्हजेना एकटा बच्चा अपना घर मे भ रहल दीदीक वियाह मे खुशी रहैत छयि।“
मैट्रिक पास कयलाक बाद माय फेर चिंता मे परीक्षा गेलखिन्ह। डाँक्टर हुनका बेसी चर्खा कटबाक लेल मना केने रहनि मुदा ओ हमरा पढाइयक खातिर विसरि गेलखिन्ह,
आ दिन-राती चर्खे मे बिताव लगलखिन्ह। हम मधुबनीक आर. के. काँलेज मे काँमर्स बिषय ल क पढ लगलहुँ। बच्चे स माय स कहियो दुर नइ रहल, हमरा शुरू-शुरू मे 10/15 दिन बहुत केनादोन लागल मुदा कहुना- कहुना रहा लगलहुँ। अहिना हमारा
I.COM से हो फर्स्ट डिविजन सँ पास कयलहुँ। दिन रातिक मेहनत सँ मायके स्वास्थ्य
खराब होब लागल रहनि।माय के कतबो जीद्द के हम नइ सुनि अपन मौसा ओत गेलहुँ जे दिल्ली मे छलैथ। माय के मोन रहनि जे हम आओर पढी। दिल्ली मे एकटा फैक्ट्री मे सहायक एकांटेंट मे काज भेट गेल। एक वर्ष जल्दीए बिति गेल ओत। ओना हमारा 2 बेर
गाम आयल छलहुँ। आब हमर तनखा एते भ गेल छल जहिसँ प्रत्येक मास हम गाम पर
सेहो हजार/पन्द्रह सय पठा दैत छलियै। माय के छती बडजोर दुखाय वला बीमारी स परेशान रह लगलखिन्ह। हमरा चिठ्ठी लिखबाक बजवौ लयि आ विवाह करबाकलेल जोर देव लगलयि। हम मात्र 10 दिनक छुट्टी मे आयल छलहुँ। माय के बात के हम नइ काट सकलहुँ। आ ओही दस दिन मे ममे गाम मे हमर विवाह भेल आ दुरागमन से हो। माय के मोन बेसी खराब होब लगलैंन्ह। ऐबेर हम नया कनिया सहित मायके ल क दिल्ली चलि एलाहुँ। डाँक्टर सँ जाँच के बाद पता चलल जे हुनका केँसर भ गेल छन्हि।एकर कारण छला वैसी चर्खा काटब। हम इलाज मे अपना तरफ स कोनो कमि नइ रखलियै मुदा ओइ सालेक अंतधरि माय से हो हमरा अनाथ बनाविक एही संसार स चलि देलीह। अहिना समय बितैत गेल। अखन हम फैक्ट्री मे सिनीयर एकाउंटेंट छी। अखन हमरा परिवार मे हम सब 3 तीन गोता छी, हम, कनियाँ, आ एकटा 2 वर्षक बेटा ‘सुकोमल’
अछि। देखियौ, समय कोना चलैछै, अखन अपना कनियाँ बच्चा कहु अपन पुरा परिवार आ पाइ स से हो भरल-पुरल होइ तो बहुत दुःख होइ या अपन नेन्हपनक बात सब याद क! क! अखन हमारा चाहियोक संगी सभ संगे खेलायबला आसपास, झिझिर-कोना, पकढिल्लो, कबड्डी-कबड्डी, सुर्रा नइ खेल सकैत छी। ओना आन बच्चा जका हम मायक
अत्यधिक सिनेहक कारणे बहुत कमे खेल सकलहुँ ओ खेल सभ। मनोज जी हम प्रायः
निश्चित क नेने छी जे अपना सुकोमल के गामक माटिमे खेलाव खातिर सभ चुट्टी गामे पर वितायब। संस्कृति, भाषा, आ माटि-पानि बुझबाक लेल गामक मे रहनाइ बड़ जरुरी
होइत छैक से हमरा बुझाइया। हमारा समस्त श्रोता सँ आग्रह से हो करबनि जे अपना बच्चाके गाम मे सेहो खेलबाक मौका दियौ, कियाक त खेलनाइ जीवन मे सब दिन सम्भव नहि। हमरा बस एक्हीटा बातक कचोट होइत रहैया जे अपन गाम हमरा के पडल अछि जकर याद मे सदिखन लिप्त रहैछी।

(चाँद के टुकडा)

हमरा हमर गाम।

३. पद्य

३.१. सतीश चन्द्र झा-बुधनी
३.२. विवेकानन्द झा-ओ प्रेमहि छल

३.३. आशीष अनचिन्हार-गजल-गद्य-कविता

३.४.पंकज पराशर- -तक्षशिला
३.५.कामिनी कामायनी-असमंजस


३.६.निशाप्रभा झा (संकलन)-आगां


३.७. हिमांशु चौधरी-तोँ स्वतंत्र छेँ
३.८. ज्योति-प्रतीक्षा सँ परिणाम तक-२
३.९. रूपेश- जय हिन्द जय-जय मिथिला


सतीश चन्द्र झा

बुधनी
घुरलै जीवन दीन - हीन कें
बनलै जहिया टोलक मुखिया।
नव- नव आशा मोन बान्हि क’
सगर राति छल नाचल दुखिया।

घास फूस कें चार आब नहि
बान्हब कर्जा नार आनि क’।
नहि नेन्ना सभ आब बितायत
बरखा मे भरि राति कानि क’।

माँगि लेब आवास इन्दिरा
काज गाम मे हमरो भेटत।
जाति - जाति कें बात कोना क’
ई ‘दीना’ मुखिया नहि मानत।

भेलै पूर्ण अभिलाषा मोनक
भेट गेलै आवास दान मे।
दुख मे अपने संग दैत छै
सोचि रहल छल ओ मकान मे।

की पौलक की अपन गमौलक
की बुझतै दुखिया भरि जीवन।
मुदा बिसरतै बुधनी कहिया
बीतल मोन पड़ै छै सदिखन।

पड़ल लोभ मे गेल सहटि क’
साँझ भोर मुखिया दलान मे।
होइत रहल भरि मास बलत्कृत
विवश देह निर्वस्त्रा दान मे।

जाति- धर्म, निज, आन व्यर्थ कें
छै बंधन जीवन मे झूठक।
जकरा अवसर भेटल जहिया
पीबि लेत ओ शोणित सबहक।

सबल कोना निर्बल कें कहियो
देत आबि क’ मान द्वारि पर।
कोना बदलतै भाग्य गरीबक
दौड़त खेतक अपन आरि पर।

भाग्यहीन निर्धन जन जीवन
बात उठाओत की अधिकारक।
नोचि रहल छै बैसल सभटा
छै दलाल पोसल सरकारक।

विवेकानन्द झा

ओ प्रेमहि छल...!
प्रातः केर स्वर्णिम आभा मे
पटिया पर सरिया कऽ राखल
तानपूरा, हारमॊनियम आ तबला-डुग्गीक मध्य
अहाँक कॊरा मे फहराइत
कापीक पन्ना
आ एमहर-ओमहर छिरिआयल
हमर किछु शब्द
अहाँक आँखि मे सेतु
बनयबाक प्रयास कर रहल छल
आ अहाँ खिड़की सँऽ बाहर
विद्यापीठ दिस देख रहल छलहुँ
कि हम आयल रही ....,

एकटा पिआसल दुपहरियाक एकांत मे
वाद्ययंत्रक मिश्रित तान मे
हमर शब्द सभ केँ बहुत सेहंता सँऽ
अपन ठॊर पर अहाँ रखनहि छलहुँ
कि हम आयल रही ....,

पुनः
एकटा श्यामवर्णी साँझ मे
दीप केर ज्यॊति किछु कहि उठल छल
कि अहाँक ठॊर पर तखने
हम अंकित कऽ देने रही
वाद्ययंत्र सँऽ निकसल मिश्रित संगीत
आ देखलहुँ
अहाँक आरक्त नेत्र मे
आ अहाँक गाल पर नचैत
अप्रतिम धुन
कि हम आयल रही !..,..

ओ प्रेमहि छल...!

आशीष अनचिन्हार

गजल २०

इजोतक दर्द अन्हार सँ पुछियौ
धारक दर्द कछेर सँ पुछियौ

नहि काटल गेल हएब जड़ि सँ
काठक दर्द कमार सँ पुछियौ

समदाउनो हमरा निर्गुणे बुझाएल
कनिञाक दर्द कहार सँ पुछियौ

सभ पुरुषक मोन जे सभ स्त्री हमरे भेटए
अवैध पेटक दर्द व्यभिचार सँ पुछियौ

करबै की हाथ आ गला मिला कए
अनचिन्हारक दर्द चिन्हार सँ पुछियौ
गजल २१
अनका रोकबाक चक्कर मे अपने रुकि गेलहुँ
अनका बझएबाक चक्कर मे अपने बझि गेलहुँ

करेजक उत्फाल इ नहि छल बुझल हमरा
अनका बसएबाक चक्कर मे अपने बसि गेलहुँ

एतेक गँहीर हेतैक खाधि-खत्ता थाह नहि छल
अनका खसएबाक चक्कर मे अपने खसि गेलहुँ

माथक भोथ मुँहक चोख सभ दिनुका छी हम
अनकर कहैत-कहैत अपने कहि गेलहुँ

मिडिआक प्रभाव एतेक विस्तार मे नहि पूछू
अनका चिन्हा अपने अनचिन्हार रहि गेलहुँ
किछु गद्य कविता
१) सीमा

अर्थ मास्टरमाइन्ड भए सकैत छैक । मास्टरपीस भए सकैत छैक । मास्टर नहि ।

२ ) काटब

पेट भरबाक लेल घेंट कटैत छी आ घेंट ऊँच रखबाक लेल पेट

३ ) दोसराति

जखन भए जाइत छी हम अपने अशक्त ।
तखने जरूरति परैत अछि दोसरातिक ।

४ )

प्रगति १.

शंख । महाशंख । डपोरशंख । हराशंख ।

प्रगति २.

कनिया देशी । पिया परदेशी । बच्चा विदेशी ।

५) मूलमंत्र

अपन कनियांक हाथ पकड़ू आ दोसरक कनियांक करेज । चिन्हारक गरिदन पकरू आ अनचिन्हारक पैर । कहियो कोनो काजमे असफलता नहि भेटत ।

६ ) मोश्किल काज

कोनो कनैत जीव के चुप्प करब ओतबे मोश्किल काज छैक , जतेक की अपन आँखिक नोर के रोकब ।

७ ) सुआद

सोहारी आ गप्प दूनू नून मरचाई लगेला सं सुअदगर भए जाइत छैक ।
पंकज पराशर
तक्षशिला
एकटा कबूतरक पंख आ दू टा सांपक केचुआ
हत-प्रतिहत स्व रक अनुगूंज सँ संतप्ता वातावरण
शिला सँ आभासित किला केर अतीत
चलैत जाइत छी जिज्ञासाक सीमांत धरि
बुझाइत अछि ओस सँ नम भूमि पर
मर्दित भ' रहल अछि बहुत रास वार्तिक
घुमंतू पएर सब सँ कतेक बरख सँ

शिला पुछैत अछि शिला सँ
अतीतक मादे तीत अकत्त भेल
अतीतक सुस्वाीदु जिह्वा पर
समयांतरित होइत रहैत अछि
मूअनजो-दाड़ो केर भंसाघरक पक्वि-गंध

कांट-कांट भेल प्रहरी सब चौचंक अछि
अतीत केँ संग ल जेबाक आकांक्षी वर्तमान सँ
कांटयुक्तस तार सँ घेरल-बेढ़ल अतीत
औनाइत रहैत अछि हमरा मोन मे ओहिना

हत-प्रतिहत मनुक्ख क अंतिम स्वीर
दसो दिशा मे पसरल अछि हाहाकर जकां
मुदा निर्धारित स्वछर-पंथी कर्ण-कुहर फराक रहैत अछि
बहुत रास मिज्झ री स्व र संघनन सँ
श्रुत परंपरा सँ प्राप्त ऋचा
अष्टा ध्यारयीयो सँ पूर्वक व्यासकरण मे निबद्ध
औनाइत रहैत अछि हमरा कान मे अहर्निश

तक्षशिला मे अक्षविहीन शिला सबहक बीच
पक्ष-विपक्षक कोनो तर्क-वितर्क
कोनो तरहक जिज्ञासा शमनार्थ संवाद-विवाद
असंभव लगैत अछि आब

इजोरिया रातिक नील-धवल आकाश मे
अहर्निश खसैत रहैत अछि
नहि जानि कतेक ग्रह-उपग्रहक स्वरर केर पग-धूर
आ मलिन होइत रहैत अछि अनेक शिलामुख
झाड़ल-पोछल वर्तमानक बीच
तक्षशिला मे !

कामिनी कामायनी

असमंजस
ओ लड़ाइ तँ
अहाँ स्वयं लड़ने रही़
जय पराजयक
बिनू चिंताक
लोकवेदक निंदा केँ अनठाबैत़़
सेहो तखऩ ओहि बयस मे
जखन अहाँकेँ गट्टा एतेक मजगूत नहि छल
जे सम्हारि पाबैत हथियारक बोझ़
एक दिस चक्रब्यूह़ आ़ऽ दोसर दिस अनंत जुआएल जोद्धा़
आने कि दुनु छोर प मृत्युतक तांडव
मुदा बिनु इथ़-ऽऽउथ क
अपन लक्ष्य मे लागल
अहाँ संग्राम सँ मुँह नै नुकेलहुँ
फेर आय चिकन चौरस
अहि मैदान मे़ एतेक उदभ्रान्त किएक़
बढैत चलू .. विलमू नह़ि
जिनगीक ई लड़ाइ सेहो
अहीं के लड़बाक अछि़
हमर बीर अभिमन्यु .. ।
3।7।09

निशाप्रभा झा (संकलन)



विवाह क गीत

जाँघ जोडी बाबा बैसलनि मंडप चढि,
आब बाबा करू कन्यादान यो।
जौओ तिलक लए धीया केड उसरगलऊ,
आब धीया भए गेल विरान यो।
सुसुकि-सुसुकि कानशि माए सुनैना,
बाबूजी केड चेहरा उदास यो।
जाहि बेटी लए नटुआ नचाओल,
सहए बेटी भए गेल विरान यो।
कन्यादान करए उठलनि बाबा जनक रीखि,
मोती जका झहरनि नोर यो।
जाँघ जोडी बाबा बैसलनि मंडप चढि,

आब बाबा करु कन्यादान यो।

(अगिला अंकमे)।
हिमांशु चौधरी।
तोँ स्वतंत्र छेँ

विचारक देवाल मे बन्द छी
हाथ-पएर काटल अछि
ने लिखि सकैत छी
ने चलि सकैत छी
तैयो कहैत छी--- तोँ स्वतंत्र छेँ।
ठोर हमर बोली अहाँक
आँखि हमर दृष्टि अहाँक
भाषा हमर चिंतन अहाँक
तैयो कहैत छी--- तोँ स्वतंत्र छेँ।
निर्दोषता अशुद्ध भेल
प्रष्टा विपरीत भेल
आशा गुदरी-गुदरी ओछाओन सन
के शत्रु, के मित्र
विश्वास जखन उपहास बनल
के बूझत अंतरक धाह
एहि उहापोह मे धरती भेल बाँझसन
तैयो कहैत छी--- तोँ स्वतंत्र छेँ।
एक कोना मे रहितहुँ
नव युगक वैजयंती ठाढ अछि
देश-देशांतरक कथा सूनि
सिंहासन जल्लादक लगैत अछि
हमरा अभागल कहितहुँ
अपना केँ स्वतंत्र कहैत छी
जे अन्हारकेँ नहि बुझलक
ते ओ इजोत की बूझत
गुज-गुज अन्हरिया मे बेउ कएने छी
तैयो कहैत छी--- तोँ स्वतंत्र छेँ।

ज्योति
प्रतीक्षा सँ परिणाम तक-२

दरबान सब मूर्छित भऽ पड़ल
बन्धन मुक्त भेल कारागार
सब बाधा दूर होइत गेल
खूजल अपने सँ सब द्वार
शिशुकेँ उठाकऽ विदा भेल
पार करऽ उमड़ैत यमुनाक धार

छत्र तानि तैनात शेषनाग
वर्षा सँ स्वामीक रक्षा मे
चरणस्पर्शक आकांक्षी यमुना
मुदा अडिग अपन हठमे
वासुदेव केँ रस्ता देबऽ लेल
भक्तदवत्सलक पैर भीजल धारमे

जकरा अपन अभाग बुझने छल
वा बुझने छल कुसंजोगक फेर
प्रकृतिक उद्गारक अभिव्यक्तिक
ई सब छल एक अद्भुत खेल
मथुरा सँ गोकुल लेल विदा
कंसक मृत्युक आरक्षण लेल

रूपेश कुमार झा 'त्योंथ'
जय हिन्द! जय जय मिथिला!!

राष्ट्र हमर भारत थिक
जे विश्वगुरुक महिमा सँ मंडित
तकर कान्ह पर थिक सुशोभित
हमर जन्मभूमि मिथिला
जय हिन्द! जय जय मिथिला!!

अनेकता मे एकता थिक देशक प्राण
यैह तऽ थिक एक्कर पहिचान
ओहि अनेक मे सँ एक
हमर जन्मभूमि मिथिला
जय हिन्द! जय जय मिथिला!!

हिन्दक मही पर थिक विद्यमान
संस्कृति अनेक बनि चान
मिथिलाक संस्कृति सेहो एक
अविरल दीप्तिमान विशेष शिला
जय हिन्द! जय जय मिथिला!!

माटि सोन ओ देश मणि
कन्हुआ कऽ ताकै एम्हर कनी
आँखि देबौ दुनू फोड़ि आ
दम लेबौ तोरा माटि मिला
जय हिन्द! जय जय मिथिला!!

माटिक सेवक छी हम देशभक्त
एकरा लेल बहा सकै छी रक्त
माटि लेल पसीनाक ठोप-ठोप
सुखा सकब ने कथिला?
जय हिन्द! जय जय मिथिला!!

पहिने हित देशक फेर प्रदेशक
अगुआ सभ ले तोँ ई सबक
नहि तऽ एहि देशक जनता
चटिएतौ तोरा झोट्टा हिला
जय हिन्द! जय जय मिथिला!!

-रूपेश कुमार झा 'त्योंथ'।

पाखलो
मूल उपन्यास : कोंकणी, लेखक : तुकाराम रामा शेट,
हिन्दी अनुवाद : डॉ. शंभु कुमार सिंह, श्री सेबी फर्नांडीस.मैथिली अनुवाद : डॉ. शंभु कुमार सिंह

पाखलो- भाग-३



सोनू जखन शालीक लग आएल, तँ शाली नहुँ-नहुँ अपन आँखि खोललक। दुनूक अवाके बन्न भ’ गेल रहैक। सोनू शालीकेँ शोर पारलकैक आ पानि पीबा लेल देलकैक। शाली‘आहि-आहि’ कहि कए जबाब देलकैक। एतबहिमे सोनूक अंदर केर भाव बाहर निकलि गेलैक।

* * *

शालीक शीलभंग कएलाक पश्चात् पाखलो ओकरा सोनूक ओहिठाम छोड़ि देने छलैक एहिलेल गामक लोक सभ सोनूकेँ समाज सँ बाड़ि देने छलैक। शालीकेँ गर्भ छनि ई बात समूचा गाममे पसरि गेलैक। समूचा गाममे ने तँ क्यो सोनूसँ बात करैक आ ने क्यो ओकरा काज पर बजबैक। सोनूक रोजी बन्न भ’ गेलैक।
ओहि घटनाक दोसरहिं दिन शाली आत्महत्या करबाक प्रयास कएने रहय मुदा सोनूकेँ बीचहिं मे घर आबि जयबाक कारणेँ ओकर जिनगी बाँचि गेलैक। गर्भवती हेबाक लाजक कारणेँ ओ कैक बेर घरसँ भागि गेल छलीह मुदा सब बेर सोनू ओकरा घुरा लैक।
ओकर घर गामक सीमान पर रहैक। एहि लेल गामक आन लोकसँ ओकरा कोनहुँ प्रकारक संबंध नहि रहैक। तकरा बादो गामक मौगी सभ शालीकेँ देखि ओकरा नाम पर थूक फेकैक। ओकरा पर फब्ती कसैत रहैक। शाली बेचारी सभ किछु सहैत जा रहल छलीह। “चाहे जे किछु भ’ जाए मुदा अपन जान नहि देब शाली!” सोनू ओकरा कहलकैक। ओ इहो कहलकैक—“बीया चाहे कथुक हो वा केहनो हो जँ एकबेर ओ माटिमे पड़ि जाइत अछि तँ ओकर पालन-पोषण माटिए करैत छैक। माटि बंजर नहि हेबाक चाही।”
सोनूकेँ काज भेटब मोसकिल भ’ गेलैक, आ ओ दुनू प्रायः भूखले रहय लागल। उपरसँ लोक सभक ऊँच-नीच सुनैत-सुनैत ओ आजिज भ’ गेल छल। ओ बहुत परेशान रहय लागल। जँ आर किछु दिन गाममे रहि जाइ तँ भूखसँ मरि जाएब आ लोकक ऊँच-नीच तँ सुनहि पड़त, एहना सोचि कए ओ एकदिन गाम छोड़ि कए शेळप्या पड़ा गेल। शाली घरमे एसगरे रहि गेलीह। सोनू कहियो-काल गाम आबैक आ शालीकेँ अन्न-पानि द’कए आपिस चलि जाइक।
भोरका पहर रहैक। शाली दरबाजासँ देखाब’ वला सरंग केँ निहारैत छलीह। तखने ओ दरबाजासँ भीतर आबैत कार्मो प्रधानकेँ देखलकैक। ओकर तँ करेजा धक् द’ रहि गेलैक। अपन कनहा आ छाती पर तमगा लगौने कार्मो प्रधान अपना हाथक बंदूक धरती पर राखैत ओत्तहि बैसि गेल। शाली तँ डरक मारल काँपय लागलीह। कार्मो प्रधान ओकरा किछु कहय चाहैत छल मुदा बाजि नहि सकल। ओकरा कोंकणी नहि आबैत रहै साइत एहि लेल ओ चुप रहि गेल। पछाति जा कए ओ जे किछु पुर्तगाली भाषामे कहलकैक ओकरा शाली नहि बुझि सकलीह। ओ शालीकेँ अपना लगहि मे बैसबाक इशारा केलकैक। आ फेर किछु खिन्न भ’ कए चुप रहि गेल। भ’ सकैछ जे ओकरा पश्चाताप भेल हो, “एहन शाली केँ लागलैक।” ओ उठल, अपन बंदूक अपना कनहा पर राखलक आ चलि देलक। ओकरा जूताक आबाज शालीक करेजक धुकधुकीक पाछाँ गुम्म भ’ गेलैक।
शाली अपना घरमे पाखलो केँ सहारा देने छैक, क्यो ई बात समूचा गाममे छिड़िया देलकैक। ई खबरि समूचा गाममे लुत्ती जकाँ पसरि गेलैक। सोनूकेँ ई खबरि जखन शेळप्यामे भेटलैक तँ ओ अपन हाथसँ कान दाबि लेलक। आब ओ कोन मुँहे गाम जाएत? ऐहन सोचि ओ अपन कान ऐंठ लेलक।
कार्मो रेयश पुलिस स्टेशनक सभ पाखलोक प्रधान छल। ओकरा लिस्बनसँ भारत एनाइ छओ-सात बरखक लगधक भ’ गेल रहैक। एहि गामक पुलिस-स्टेशनमे ओकर दोसर बरख रहैक। ओकर डील-डॉल- लाल, गोर, कैल केश आ मोछ वला रहैक। बाघ-सन ओकर दुनू आँखिसँ लोककेँ डर भ’ जाइक। ओ जहियासँ एहि गाममे आयल तहिये सँ एहि गामक लोक पर अपन हुकुम चलबए लागल छल। दू महीना धरि ओ लोक सभकेँ बहुत डरौलक-धमकौलक-सतौलक आ पीटलक। आब ओ लोककेँ सताएब तँ बन्न क’देने छल मुदा गामक लोककेँ ओकरासँ बहुत डर लागैक।
दोसरहिं दिन साँझकेँ जखन शाली अपन घरक दीप लेसैत छलीह, तखनहि दरबाजा पर जूताक आबाज सुनलक। कार्मो प्रधान सीधे घरमे घूसि गेलैक, आ बन्दूक कनहा परसँ नीचाँ राखि बैसि गेल। डरसँ शालीक हाथसँ दीप छूटि गलैक आ चारू दिस अन्हार भ’गेलैक। प्रधान अपना जेबीसँ सलाइ निकालि दीप लेसलक आ हँसए लागल। ओकरा हँसबाक आबाजसँ पूरा घर गूँजायमान भ’ गेलैक। ओ शालीकेँ अपना लगहिं मे बैसा लेलक आ ओकर गाल, ठोर आर ठुड्डीकेँ सहलाब’ लागलैक। ओ स्वयं हँसि रहल छल आ शालियो केँ हँसएबाक प्रयास क’ रहल छल। मुदा शाली डरसँ काँपि रहल छलीह। जाहि समय पाखलो शालीकेँ अपना बाँहिमे घीचैत छल ठीक ओहि समय ओकर नजरि ओकरा नोर पर गेलैक। ओ ओकर गरम नोरकेँ पोछलक आ ओकरा समझएबा-बुझएबाक लेल ओकरा पीठ पर थपकी मारए लागल। बादमे ओ शालीक ठुड्डीकेँ उठबैत ओकरा अपना दिस देखबाक लेल इशारा करए लागल। मुदा शाली ओकरा दिस नहि देखि सकलीह। ओ अपन दुनू हाथेँ अपन आँखि झाँपि काँपैत-काँपैत ओतएसँ जयबाक उपक्रम करए लागलीह। एतबहिमे पाखलो ओकरा अपन दुनू हाथेँ अपना बाँहिमे घीच लेलकैक।
दोसरहिं दिन भोरे-भोर गामक लोग कार्मोकेँ शालीक घरसँ निकलैत देखलकैक। ओकरा देखतहि लोक सभ शालीक नाम पर थूक फेकय लागल आ ओकरा संबंधमे भिन्न-भिन्न प्रकारक बात सभ करए लागल।
“हे-बे देखिऔक! शालीक भरुआ”
“ओ पाखलो केँ अपना घरमे राखि धंधा सुरह क’ देने छैक वा अपन नव दुनियाँ बसा नेने अछि?”
“दुनियाँ केहन यौ? धंधा कहियौक, धंधा।”
“छी-छी, ओ लाज-शरम पीबि गेल अछि”
“औजी! लाज-शरम रहतैक कतए सँ! ओ तँ अपन जातिओ-धरम भ्रष्ट क’ नेने अछि।”

* * * * * *

गाम वलाक नजरिमे हम पाखलोएक रूपमे एहि धरती पर जनम लेलहुँ। ठीक ओहि साल पुर्तगाली सरकार गामसँ पुलिस-स्टेशन हटा लेलकैक। हमर बाप ओहि समय गाम छोड़ि पणजी शहर चलि गेलाह। हुनकर रूप कहियो हमरा आँखिक समक्ष नहि आबि सकल। नेनपनमे हम हुनका कहियो देखने रहियनि की नहि? सेहो हमरा स्मरण नहि अछि।
हमर माए शाली, वास्तवमे एकटा देवीक रूपमे एहि संसार मे आएल छलीह। हुनकर वर्ण तँ श्याम छलनि मुदा सुन्नरि छलीह। एकदम सोटल देह। ओ प्रायः लाल आ कि हरियर रंगक साड़ी पहिरैत छलीह आ माथ पर सिनूरक टीका लगबैत छलीह। एहि परिधानमे ओ एकदम सुन्नरि लागैत छलीह। एकदम सांतेरी माए-सन। हमर जनम एकादशी दिन भेल छल, एहि लेल माए हमर नाम विठ्ठल राखने छलीह। एहि धरतीक पाथरसँ बनाओल गेल श्री विठ्ठल केर कारी प्रतिमा ओहि दिन ओहि मंदिरमे स्थापित कएल गेल रहैक, ई बात हमर माए बतौने छलीह। ओ अपन मधुर आबाजसँ हमरा विठू कहि बजबैत छलीह।
कार्मो प्रधान (हमर बाप) केँ पणजी शहर चलि गेलाक पश्चात् हमर मायक हालति आब साँचहिमे बहुत खराप होमए लागल छल। समूचा गाम ओकरा मंदिरक दासीक सदृश देखैत रहय जखन कि ओ एकटा पतिव्रता नारी छलीह। गामहिमे एकटा ब्राह्मणक घरमे बहिकरनीक काज क’ कए ओहिसँ प्राप्त मजूरीसँ ओ हमर पालन-पोषण कएने छलीह।


(क्रमशः)

श्री तुकाराम रामा शेट (जन्म 1952) कोंकणी भाषामे ‘एक जुवो जिएता’—नाटक, ‘पर्यावरण गीतम’, ‘धर्तोरेचो स्पर्श’—लघु कथा, ‘मनमळब’—काव्य संग्रह केर रचनाक संगहि कैकटा पुस्तकक अनुवाद,संपादन आ प्रकाशनक काज कए प्रतिष्ठित साहित्यकारक रूपमे ख्याति अर्जित कएने छथि। प्रस्तुत कोंकणी उपन्यास—‘पाखलो’ पर हिनका वर्ष 1978 मे ‘गोवा कला अकादमी साहित्यिक पुरस्कार’ भेटि चुकल छनि।

डॉ शंभु कुमार सिंह
जन्म: 18 अप्रील 1965 सहरसा जिलाक महिषी प्रखंडक लहुआर गाममे। आरंभिक शिक्षा, गामहिसँ,आइ.ए., बी.ए. (मैथिली सम्मान) एम.ए. मैथिली (स्वर्णपदक प्राप्त) तिलका माँझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर, बिहार सँ। BET [बिहार पात्रता परीक्षा (NET क समतुल्य) व्याख्याता हेतु उत्तीर्ण, 1995] “मैथिली नाटकक सामाजिक विवर्त्तन” विषय पर पी-एच.डी. वर्ष 2008, तिलका माँ. भा.विश्वविद्यालय, भागलपुर, बिहार सँ। मैथिलीक कतोक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिका सभमे कविता,कथा, निबंध आदि समय-समय पर प्रकाशित। वर्तमानमे शैक्षिक सलाहकार (मैथिली) राष्ट्रीय अनुवाद मिशन, केन्द्रीय भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर-6 मे कार्यरत।
सेबी फर्नांडीस

क्रमशः
बालानां कृते-
देवांशु वत्सक मैथिली चित्र-श्रृंखला (कॉमिक्स)

देवांशु वत्स, जन्म- तुलापट्टी, सुपौल। मास कम्युनिकेशनमे एम.ए., हिन्दी, अंग्रेजी आ मैथिलीक विभिन्न पत्र-पत्रिकामे कथा, लघुकथा, विज्ञान-कथा, चित्र-कथा, कार्टून, चित्र-प्रहेलिका इत्यादिक प्रकाशन।
विशेष: गुजरात राज्य शाला पाठ्य-पुस्तक मंडल द्वारा आठम कक्षाक लेल विज्ञान कथा “जंग” प्रकाशित (2004 ई.)
नताशा: मैथिलीक पहिल-चित्र-श्रृंखला (कॉमिक्स)
नताशा अठारह

नताशा उन्नैस





बच्चा लोकनि द्वारा स्मरणीय श्लोक
१.प्रातः काल ब्रह्ममुहूर्त्त (सूर्योदयक एक घंटा पहिने) सर्वप्रथम अपन दुनू हाथ देखबाक चाही, आ’ ई श्लोक बजबाक चाही।
कराग्रे वसते लक्ष्मीः करमध्ये सरस्वती।
करमूले स्थितो ब्रह्मा प्रभाते करदर्शनम्॥
करक आगाँ लक्ष्मी बसैत छथि, करक मध्यमे सरस्वती, करक मूलमे ब्रह्मा स्थित छथि। भोरमे ताहि द्वारे करक दर्शन करबाक थीक।
२.संध्या काल दीप लेसबाक काल-
दीपमूले स्थितो ब्रह्मा दीपमध्ये जनार्दनः।
दीपाग्रे शङ्करः प्रोक्त्तः सन्ध्याज्योतिर्नमोऽस्तुते॥
दीपक मूल भागमे ब्रह्मा, दीपक मध्यभागमे जनार्दन (विष्णु) आऽ दीपक अग्र भागमे शङ्कर स्थित छथि। हे संध्याज्योति! अहाँकेँ नमस्कार।
३.सुतबाक काल-
रामं स्कन्दं हनूमन्तं वैनतेयं वृकोदरम्।
शयने यः स्मरेन्नित्यं दुःस्वप्नस्तस्य नश्यति॥
जे सभ दिन सुतबासँ पहिने राम, कुमारस्वामी, हनूमान्, गरुड़ आऽ भीमक स्मरण करैत छथि, हुनकर दुःस्वप्न नष्ट भऽ जाइत छन्हि।
४. नहेबाक समय-
गङ्गे च यमुने चैव गोदावरि सरस्वति।
नर्मदे सिन्धु कावेरि जलेऽस्मिन् सन्निधिं कुरू॥
हे गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिन्धु आऽ कावेरी धार। एहि जलमे अपन सान्निध्य दिअ।
५.उत्तरं यत्समुद्रस्य हिमाद्रेश्चैव दक्षिणम्।
वर्षं तत् भारतं नाम भारती यत्र सन्ततिः॥
समुद्रक उत्तरमे आऽ हिमालयक दक्षिणमे भारत अछि आऽ ओतुका सन्तति भारती कहबैत छथि।
६.अहल्या द्रौपदी सीता तारा मण्डोदरी तथा।
पञ्चकं ना स्मरेन्नित्यं महापातकनाशकम्॥
जे सभ दिन अहल्या, द्रौपदी, सीता, तारा आऽ मण्दोदरी, एहि पाँच साध्वी-स्त्रीक स्मरण करैत छथि, हुनकर सभ पाप नष्ट भऽ जाइत छन्हि।
७.अश्वत्थामा बलिर्व्यासो हनूमांश्च विभीषणः।
कृपः परशुरामश्च सप्तैते चिरञ्जीविनः॥
अश्वत्थामा, बलि, व्यास, हनूमान्, विभीषण, कृपाचार्य आऽ परशुराम- ई सात टा चिरञ्जीवी कहबैत छथि।
८.साते भवतु सुप्रीता देवी शिखर वासिनी
उग्रेन तपसा लब्धो यया पशुपतिः पतिः।
सिद्धिः साध्ये सतामस्तु प्रसादान्तस्य धूर्जटेः
जाह्नवीफेनलेखेव यन्यूधि शशिनः कला॥
९. बालोऽहं जगदानन्द न मे बाला सरस्वती।
अपूर्णे पंचमे वर्षे वर्णयामि जगत्त्रयम् ॥
१०. दूर्वाक्षत मंत्र(शुक्ल यजुर्वेद अध्याय २२, मंत्र २२)
आ ब्रह्मन्नित्यस्य प्रजापतिर्ॠषिः। लिंभोक्त्ता देवताः। स्वराडुत्कृतिश्छन्दः। षड्जः स्वरः॥
आ ब्रह्म॑न् ब्राह्म॒णो ब्र॑ह्मवर्च॒सी जा॑यता॒मा रा॒ष्ट्रे रा॑ज॒न्यः शुरे॑ऽइषव्यो॒ऽतिव्या॒धी म॑हार॒थो जा॑यतां॒ दोग्ध्रीं धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः सप्तिः॒ पुर॑न्धि॒र्योवा॑ जि॒ष्णू र॑थे॒ष्ठाः स॒भेयो॒ युवास्य यज॑मानस्य वी॒रो जा॒यतां निका॒मे-नि॑कामे नः प॒र्जन्यों वर्षतु॒ फल॑वत्यो न॒ऽओष॑धयः पच्यन्तां योगेक्ष॒मो नः॑ कल्पताम्॥२२॥
मन्त्रार्थाः सिद्धयः सन्तु पूर्णाः सन्तु मनोरथाः। शत्रूणां बुद्धिनाशोऽस्तु मित्राणामुदयस्तव।
ॐ दीर्घायुर्भव। ॐ सौभाग्यवती भव।
हे भगवान्। अपन देशमे सुयोग्य आ’ सर्वज्ञ विद्यार्थी उत्पन्न होथि, आ’ शुत्रुकेँ नाश कएनिहार सैनिक उत्पन्न होथि। अपन देशक गाय खूब दूध दय बाली, बरद भार वहन करएमे सक्षम होथि आ’ घोड़ा त्वरित रूपेँ दौगय बला होए। स्त्रीगण नगरक नेतृत्व करबामे सक्षम होथि आ’ युवक सभामे ओजपूर्ण भाषण देबयबला आ’ नेतृत्व देबामे सक्षम होथि। अपन देशमे जखन आवश्यक होय वर्षा होए आ’ औषधिक-बूटी सर्वदा परिपक्व होइत रहए। एवं क्रमे सभ तरहेँ हमरा सभक कल्याण होए। शत्रुक बुद्धिक नाश होए आ’ मित्रक उदय होए॥
मनुष्यकें कोन वस्तुक इच्छा करबाक चाही तकर वर्णन एहि मंत्रमे कएल गेल अछि।
एहिमे वाचकलुप्तोपमालड़्कार अछि।
अन्वय-
ब्रह्म॑न् - विद्या आदि गुणसँ परिपूर्ण ब्रह्म
रा॒ष्ट्रे - देशमे
ब्र॑ह्मवर्च॒सी-ब्रह्म विद्याक तेजसँ युक्त्त
आ जा॑यतां॒- उत्पन्न होए
रा॑ज॒न्यः-राजा
शुरे॑ऽ–बिना डर बला
इषव्यो॒- बाण चलेबामे निपुण
ऽतिव्या॒धी-शत्रुकेँ तारण दय बला
म॑हार॒थो-पैघ रथ बला वीर
दोग्ध्रीं-कामना(दूध पूर्ण करए बाली)
धे॒नुर्वोढा॑न॒ड्वाना॒शुः धे॒नु-गौ वा वाणी र्वोढा॑न॒ड्वा- पैघ बरद ना॒शुः-आशुः-त्वरित
सप्तिः॒-घोड़ा
पुर॑न्धि॒र्योवा॑- पुर॑न्धि॒- व्यवहारकेँ धारण करए बाली र्योवा॑-स्त्री
जि॒ष्णू-शत्रुकेँ जीतए बला
र॑थे॒ष्ठाः-रथ पर स्थिर
स॒भेयो॒-उत्तम सभामे
युवास्य-युवा जेहन
यज॑मानस्य-राजाक राज्यमे
वी॒रो-शत्रुकेँ पराजित करएबला
निका॒मे-नि॑कामे-निश्चययुक्त्त कार्यमे
नः-हमर सभक
प॒र्जन्यों-मेघ
वर्षतु॒-वर्षा होए
फल॑वत्यो-उत्तम फल बला
ओष॑धयः-औषधिः
पच्यन्तां- पाकए
योगेक्ष॒मो-अलभ्य लभ्य करेबाक हेतु कएल गेल योगक रक्षा
नः॑-हमरा सभक हेतु
कल्पताम्-समर्थ होए
ग्रिफिथक अनुवाद- हे ब्रह्मण, हमर राज्यमे ब्राह्मण नीक धार्मिक विद्या बला, राजन्य-वीर,तीरंदाज, दूध दए बाली गाय, दौगय बला जन्तु, उद्यमी नारी होथि। पार्जन्य आवश्यकता पड़ला पर वर्षा देथि, फल देय बला गाछ पाकए, हम सभ संपत्ति अर्जित/संरक्षित करी।
Input: (कोष्ठकमे देवनागरी, मिथिलाक्षर किंवाफोनेटिक-रोमनमे टाइप करू। Input in Devanagari, Mithilakshara orPhonetic-Roman.)
Language: (परिणाम देवनागरी, मिथिलाक्षर आ फोनेटिक-रोमन/ रोमनमे। Result in Devanagari, Mithilakshara and Phonetic-Roman/ Roman.)
इंग्लिश-मैथिली कोष/ मैथिली-इंग्लिश कोष प्रोजेक्टकेँ आगू बढ़ाऊ, अपन सुझाव आ योगदान ई-मेल द्वाराggajendra@videha.com पर पठाऊ।
विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary.

१.पञ्जी डाटाबेस आ
२.भारत आ नेपालक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली
१.पञ्जी डाटाबेस-(डिजिटल इमेजिंग / मिथिलाक्षरसँ देवनागरी लिप्यांतरण/ संकलन/ सम्पादन-पञ्जीकार विद्यानन्द झा , नागेन्द्र कुमार झा एवं गजेन्द्र ठाकुर द्वारा)
जय गणेशाय नम:

(80) ।।32।।
घनेश सुता रघुनन्दान गोविन्द (219/02) परमानन्दाा: (92/05) पबौली सै रतन् दौ (30/08) शिवदत्त सुता भानुदत्त (43/08) (62/07) कृष्ण1दत्त हरदत्त रूपदत्ता: (63/08) टकबाल सै शिरू दौ (09/06) माण्ड र सै सुधाकर द्दौणा।। हरदत्त सुतौ रतनूक: खौआल सै हरि दौ (22/01) (169/01) हरि सुता सोदरपुर सै हरि दौ (28/08) सतo: चान्दत द्दौणा रतन् (43/09) सुतो गोढ़ाई अफेलौ पनिo हरि दौ (17/01) (82/07) बाछ सुतौ हरि गोपालौ (77/06) दरिo कुसुमाकर दौ (24/09) फनन्द9ह सै गोविन्दग द्दौणा हरि सुता राजनपुरा दरिहरा सै जीवेदौ (16/01) दिवाकर सुतौ बाटुक: सरिसब सै माने दौ (27/03) वलिo बसाउन द्दौ (32/07) बाइ सुतौ (78/03) पराउ जीवे कौ महियासोदरपुर सै हरिनाथ दौ (23/10) कुo बंशवर्द्धन द्दौणा जीव सुतौ विष्णुौपति गणपति रखवारी हरिअम सै खूदी दौ (31/09) (139/04) खूदी सुतौ (48/05) धरमूक: कटमा माण्डगर सै रविपति दौ (24/05) मo मo उपाoरविपति सुतौरतनू राम (178/01) (36/105) लाखन वु‍द्धिकरा: उजान वुधवाल सै देवे (22/08) बेलउँच सै गयादित्यप द्दौणा रघुनन्दरन सुता और खण्ड्बला सै मo मo उपाoविश्वाम्भ2र दौ (04/06) मo मo उपाo दामोदर सुतौ अग्निहोत्रिक मo मo उपाoविश्व7म्भकर: हरिअम सै गयन दौ (19/03) गयन सुता राजनपुरा दरिहरा सै बसावन दौ (32/04) बाइ (34/08) सुतौ बसावन: बहेराढ़ी सै जनार्दन दौ (10/01) जनार्दन सुता नरउन सै कोने दौ (14/05) सकराढ़ी सै जीवेश्व्र द्दौणा (53/04) बसावन सुता सोदरपुर सै मo मo उपाo नासे दौ (23/01) मo मo भासे सुता दामोदर पुरूषोत्तम कृष्णा़: सतo शंकर दौ (24/07) (89/06) शंकर सुता रतिकर (41/07) लक्ष्मीखकर वुद्धिकरा: फनन्द ह सै बासुदेव सुत महेश्वनर दौ कुजौली सै शशिकर अग्निहोत्रिक महामहोपाध्यानय विश्व म्भ र (95/08) सुतौ भवेश: (49/06) दरिहरा सै महेश दौ (23/03) दाशेसुता (247/03) शंकर महेश महादेव भीम



(81)
रामदेवा: (81/03) शक्रिरायपुर नरउन सै नारू दौ (25/05) जगद्धर (318/08) प्रoमुशे सुतौ लाखू नारू शै बेलउँच सै जयादित्यन दौ (30/09) पण्डुुआसै हल्ले श्व5र द्दौणा नारू सुतौ हल्ले श्वमर: (85/05) बेहट माण्डूर सै सोम दौ (20/01) सोम सुता (54/10) रतिकर बाइ चाणा: (131/05) सरिसब सै माने सुत गंगेश्वमर दौ (27/09) खौआल सै नोने द्दौणा महेश सुतौ भवानी (42/02) नाथ: कटमा हरिअम सैभवपति दौ (25/09) विभू सुता (51/06) (37/04) बसावन जसाइन विष्णुनपति भवपति गिरिपतिय: दिगउन्धद खौआल सै सतू दौ (11/02) नोने सुतौ श्रीधर: धोसोत सै रविकर दौ (56/03) श्रीधर सुतौ रालूक: पनिचोभ सै धराई दौ (26/06) सकo भीम द्दौणा शतू सुता हलधर कान्हा शिव महिपतिय: कुजौली सै दिवाकर सुत मधुकर दौ पनिचोभ सै मांगु द्दौणा भवपति सुतौ रमापति सिहौली माण्डतर सै ओहरि दौ (31/01) ओहरि सुता सिमरवाड़ सोदरपुर सै रूपे दौ (28/08) अपरा हरि सुतौ रूपेक: मिट्ठी खौआल सै राम दौ (21/10) फनन्द ह सै मोरि द्दौणा रूपे सुतौ (60/01) नारू प्रo गदाधर (2066/06) गागु प्रo नारायण कौ उजान वुधवाल सै दैवे दौ (22/08) बेलउँच सै गयादित्यर द्दौणा एवं धराधरविवाह समांप्त ।। शुभ शाके 1778 सन् 1263 सालश्रावण कृष्णेतृतीयायां दिनकरौ पण्डुतआ सै पाँ हर्षानन्दध लिखित सिंह ठ. लक्ष्मीसधर सुतो गणेश: पतनुका माण्डरर सै घनश्याणम दौ (22/04) विधूपति सुता प्राणपति जी उँतपति प्रभापति वेणी का राधवास सरिसब सै गंगेशवर दौ (27/09) खौआल सै नोने द्दौणा प्राणपति सुता काशी (44/09) लड़ावन नरसिंहा देउँरी खण्डणबला सै सान्हि दौ (22/09) सकराढी सै देवे द्दौणा लड़ाउँ सुतो रामदेव



(82) ।। 33।।
होराई कौ कन्हौ ली एकहरा सै टूनी दौ (25/01) टूनी सुतो हरिपति कुजौली सै गिरीश्वरर सुत हरीश्विर दौ माण्ड रसै नोने द्दौणा होराई सुता मधुसूदन गोपीनाथ लक्ष्मीददेवा: गढ़ खण्डरबला सै माधव दौ (28/04) हराई सुतौ माने सोनाकौ दरिहरा सै ग्रहेश्वसर दौ अल्यथ सै साठू द्दौणा माने सुता धारू (74/08) (38/05) चाण जीवेका: बुधवाल सै गंगेश्वसर दौ (11/06) माण्डरर सै जीवेश्वसर द्दौणा चान्द0 सुतौ माधव: नरउन सै दिवाकर सुत दिनकर दौ (24/08) दरिo कुसुमाकर द्दौणा माधव सुता बेलऊँच सै भवादित्यव दौ (30/09) (63/06) हरदत्त सुता पौखू रति भवादित्यर सोमा शक्रिरायपुर नरउन सै योगीश्वकर सुत हरिश्व र दौ (25/05) विस्फी सै होराई दौ (71/08) भवादित्यम प्रo भवाई सुता शंकर रघु गोंढ़ेका द्वारम खौआल सै धारू दौ (21/04) धारू (83/10) सुता शिरू पदम लाखू गादूका: एकहरा सै श्री कर सुत चान्द दौ खौआल सै मूसेहर भूले द्दौणा मधुसूदन सुता उमापति (84/01) विद्यापति (26/103) लक्मीूलेपति प्रo भट्टा: अनलपुर करमहा सै रघु सुत शिव दौ (02/08) भवेश्व र सुतौ धर्मादित्यप: नरउन सै गौरीश्वआर दौ (03/07) टकबाल सै रूद द्दौणा धर्मादित्य सुतौ बासुदेव: ब्रह्मपुर जजिवाल सै कान्हत सुत नारू दौ (25/08) वरूआली सै रवि प्रसिद्ध रूचिकर दौहित्रे द्दौ (74/07) बासुदेव सुतौ रघु खूदे कौ मुराजपुर वलियास सै शिवादित्यस सुत सर्वादित्यव दौ (12/09) शिवादित्यद सुतौ सर्वादित्या: हारीपाली सै राम दत्त दौ (41/02) पवौलि सै बागे द्दौणा साध्यि प्रo सर्वादित्य् (70/02) (41/08) सुता बाढ़ सोढ़ू नोने गोढ़े का: फरहरा बुधवाल सै भानु सुत महेश्वौर दौ (19/04) माण्ड0र सै रविदत्त दौहित्र दौ रघुसुता शिव दामू मधुसूदना सोदरपुर सै सोल्हेन दौ (21/07) सोल्हान सुता श्री (82/02) पति दूबेमुरारिका: कन्हौ ली बेलऊँच सै हरि दौ (10/04) प्राणादित्या।।


(83)
सुतौ हरि (70/09) (14/03) गयनौ फनन्दूह सै बासुदेव सुत महेश्व/र दौ कुजौली सै शशिधर द्दौणा हरि सुतौ विश्वेनाथ प्रo रविनाथ देवनाथौ गढ़घोसोत सै रविपतिसुत कुलपति दौ (25/10) वलियास सै मधुकर द्दौणा शिव सुता महनौरा खौआल सै जीवे दौ (20/09) मित्रकर (48/02) सुतौ हरखू (55/06) जीवेकौ काको बेलउँच सै केशव दौ (21/07) केशव सुतो गोनू बागे कौ पाली सै लक्ष्मीतधर प्रo माधव सुत गोपाल प्रoगोप दौ जजिवाल सै भव द्दौणा जीवे सुतो पीताम्बोर: दिगउन्ध सोदरपुर सै शक्तूध सुत उचोरण दौ (22/01) (37/08) देवनाथ सुता मिशरू (55/08) (50/01) (47/07) शकतू का: कुजौली वंशवर्द्धन दौ (23/03) जालय सै मo मo रामेश्व र द्दौणा शक्तुर सुतौ उघोरण: मधुकरयट्टो दरिहरा सै शंकर दौ (11/08) गुणाकर सुता शंकर चन्द्राकर सूर्यकरा: विठुआल सै नोने दौ (36/02) शंकर सुता विरपुर सोदरपुर सै रूद्रेश्वतर सुत हरिहर दौ बेलउँच सै रूद्रादित्य द्दौणा उद्योरण (57/07) सुतौ गंगाधर: कड़राइन बमनियाम सै ग्रहेश्ववरसुत होरें दौ (22/01) होरे सुतौ विष्णुयपति: सकराढ़ीसै गुणपति दौ (30/02) डालू सुतौ रघुपति कुलपति सै दौ ।। रघुपति सुतौ गुणपति शिवपति कुजौली सै रूपन दौ गुणपति सुता जजिवाल सै हरिहर सुत पुराई दौ सरौभीसै पुराई द्दौणा एवम् भट्ट मात्रिक चन्द्राप भट्ट सुता घनश्याुम राम श्री कृष्णा बेहर खण्ड/वला सै जनार्दन दौ (01/07) (40/09) महिपति सुतौ कान्हभ: राजनपुरा दरिहरा सै दिवाकर सुत बाइ दौ (32/07) बाटू सुता अलय सै नारायणसुत श्रीकर सै खौआल सै शुचिक द्दौणा।। ठ. (72/02) कान्ह सुतौ विष्णुरपति: कुरैल सकराढ़ी सै रूचिकर दौ (24/03) लाख सुता रूचिकर।।



(84) ।।34।।
शुचिकर मतिकर (59/07) (46/03) रामकर कृष्णककरा: (52/06) पालीसै गंगाधरसुत नरसिंह दौ वलियास सै रति द्दौणा रूचिकर सुतौ (46/09) अफेल पइमो (36/03) पाली सै सुधाकर सुतमुशे दौ (24/03) सुधाकर सुतौ मित्रकर प्रo मुसेक: वलियास सै रूचिकर दौ।। मुसै सुता खौआल सै डालू सुत विद्यापति दौ भण्डाररिसम सै शुभे द्दौणा ठo (91/10) विष्णुमपति सुतौ जनार्दन कुआ तिसउँत सै जीवेश्वसर सुत नन्देन दौ (14/05) गणपति सुतौ नन्दीमश्व9र रघुरामों बरेबा सै देवे दौ।। नन्दीुश्वजर सुता गौरी मौरि चण्डे श्व र रबीका: पचाउँट सै कीर्तिशर्म्मन दौ।। चण्डे‍श्वोर सुतौ श्रीवेश्व र: दिशोसै बासुदेव सुत रति शर्म्मड दौ कूचित् पण्डोील सै सुयन द्दौणा झून शा पनिo घनपति द्दौणा जीवेश्व‍र सुता रघुपाणिहरिपाणि रंजन (51/06) राम नन्दरन (36/02) माधूका: सुदै बेसउँच सै होरे दौ (30/07) सोदरo कान्ह1 द्दौणा (147/05) नन्दमन सुतौ गोपीनाथ विजहरा माण्डार सै शिरू दौ (29/03) रतिकर सुतौ हेलूक: पबौली सै श्रीदत्त दौ (20/05) श्रीदत्त सुता माण्ड र सै बागेश्वदर दौ (17/01) कुजौली सै राजू द्दौणा हेलू सुता बिइ शिरू लाखू परभू ज्ञाना: कुजौली सै सुपन दौ (30/05) दरिहरा सै सुपन दौणा शिरू सुता साधुकर (37/04) मानुकर भस्कूरा: सकुरी गंगोली सै डालू सुत सुरेदौ (05/04) विश्विरूप ड़गाम सुतौबहुरूप ए सुतौ मधुकर: ए सुतौ सर्वदत्त: ए सुतौ लक्ष्मीुदत्त: ए सुतौ भवदत्त: ए सुतो सोमदत्त: ए सुतौ डालूक: ए सुता रघुपति (44/07) कान्ह सुरेश्वसरा: बरेबासै साउले दौ।। सुरेश्व)र सुतों होरे शोरेकौ भन्दसवालसै विधू सुत फूलहर दौ माण्डसरसै सागर द्दौणा एवम् जनार्दन मात्रिक चक्रम।।



(85)
ठ. जनार्दन सुता वावू प्रo (95/04) रघुदेव (82/01) जयकृष्णु जयराम (111/02) जय शिव श्याडम गोविन्दाे:गंगौरा बुधवाल सै रामदेव दौ (11/03) रूचिकर (37/03) सुतौ रविकर वुद्धिकरौ एक थानू दौ (22/08) दरिo प्रितिशर्म्म( द्दौणा रविकर सुता माधव साधुकर अमरू (85/01) लोटना: (37/04) ओझोलिबेलउँच सै धरादित्या सुत बाढ़ दौ (10/05) बाढू सुता जाने माने महेश्वरर गौरीश्व/र (45/07) चान्दार: भरेहा सै गणपति सुत केशव दौ सुगन सै देवनाथ द्दौणा माधव (47/02) सुतौ परभूके: महिया सोदरपुर सै रूचिनाथ (23/01) पाली सै गांगु द्दौणा परभूसुता बासुदेव रामदेव गोविन्दाप: खडीक खौआल सै गौरीनाथ दौ (24/03) गौरीनाथ (62/09) सुतौ अमरू उद्धवौ पाली सै देवादित्यर सुत गांगु दौ (28/03) गांगु सुता विदू कुलपति श्रीपति (332/09) जागे का: केउँटगामा सोदरपुर सै बाइ दौ (19/01) माण्डगर सै होरे द्दौणा रामदेव सुतौ नारायण: जगति सै काशी दौ (29/01) नोने सुता मि‍मांशक (87/05) मिसरू होरे (156/08) वेणी (43/03) काशीका: करमा हरिअम सै मितू दौ (28/04) दरिहरा सै रवि द्दौणा काशी सुतौ भवानीनाथ विठौली सोदरपुर सै नोने दौ (30/07) (48/05) जोर सुतौ नोने हचलू कौ माण्डशर सै विशोसुत हरिकर दौ (28/05) हरिकर सुतौ वेणी वुद्धिकरो (173/04) भंगरौना हरिअम सै केशव दौ (27/05) दरिहरा सै वर्द्धमान द्दौणा नोने सुता परान विष्णु3पति एकमा बलिया सै रघु दौ (16/03) शुविभाकर सुता गुणाकर मतिकर दिवाकरा: गंगोरसै देवनाथ दौ मतिकरसुतौ रघु फनन्दघह सै माधवदौ ।। रघु सुतौ महाईक: गाउल करमहा सै बाटू सुत हरिदौं सकराढ़ी सै लनिद्दौणा एवम् घनश्याफम मातुकचक्रम।। घनश्या म (109/04) सुतौ कुनाईक: (116/03) कन्हौिली



(86) ।। 35।।
सोदरपुर सै छोटाई दौ (28/081) बसाउन सुता पशुपति विद्यापति (73/02) (49/07) महिपति उँमापतिका (136/08) खौआल सै गोविन्दी दौ (22/01) खण्ड(बला सै नरहरि द्दौणा पशुपति सुता (78/05) दामू नरहरि श्री हरिय: (44/02) महिषी पाली सै महिषी बागे दौ (28/03) बागे सुता थेध डालू रघुपतिय: भौआल दरिहरा सै कारू दौ (23/09) कारू (40/04) कारू सुतौ रति महाईकौ झंझारपुर करमहा सै राम दौ (02/09) राम सुतौ हरिहर (65/02) दिवाकरौ जगौर माण्डुर सै रघुपति दौ (23/06) सोदरo खांतू द्दौणा नरहरि सुता (11/05) रामदेव कामदेव (153/01) (120/07) लोटाई छोटाईका: हारीपाली सै जसाई दौ (32/05) रघुपति (42/05) सुतौ जसाई वाचस्पजतिडीह दरिहरा सै भवे दौ (28/05) रविसुतौ भवेक: हरिअम सै नोने दौ (16/03) वलियास सै नितिकर द्दौणा भवे सुतों मेंघाकर प्रo मेधू रत्नाकर: बघवास सरिसव सै गौरि दौ (27/09) गौरि सुतौ जोर: टकवाल सै शिरू दौ (09/06) माण्डोर सै सुधाकर द्दौणा जसाई सुता लाखू (51/07) शंकर (809/03) गणेशा: हसौली सोदरपुर सै शिव दौ (16/05) रातू सुता बाटू रूचि (52/03) (37/01) वासुदेवा: नरउन सै जगद्धर दौ (33/01) बेलउँच सै जयादित्यव द्दौणा बाटू सुता शिव चान्द2 परान (133/04) विष्णु9पतिय: खौआल सै इबे दौ (23/02) इबे (48/06) सुतौ चौबेक: (53/01) पवौलि सै देवदत्त दौ (24/01) देवदत्त सुता वलियास सै इबेसुत शक्रि दौ गंगोली सै सोमदत्त द्दौणा शिवसुताश्रय शोभाज्ञानोंकें वभनियाम सै कुलपति दौ (27/07) (81/06) कुलपति सुतो जाटू बाटू कों माण्डतरसै किरतू दौ (221/02) किरतू सुतो इबेक: सुपरानी गंगोली सै गोनूसुत शिवदौ पनिचोभ सै केउँदू द्दौणा एवम् छोटाई मात्रि कचक्रं।। (03/01) छोटाई सुतौ अनिरूद्ध: (09/02) मलंगियह कुजौली सै हरिनाथ दौ (18/02) जीवे सुतो महाई गौरी कौ माण्ड0र सै सुधाक सुत चाण दौ वुधo दामू द्दौणा (37/08) महाई सुतो गोपीनाथ: पाली सै कुलपति दौ (26/04) उगरू सुतो कुलपति महिपति के उँटू का:



(87)
कुजौली सै लक्ष्मी श्वसर दौ गंगोली सै हरिश्ववर द्दौणा कुलपति सुतो मुथेक: खौआल सै हरपति दौ (25/04) हरपति सुता चान्दी माने सोनेका: (43/09) (38/07) (77/05) पाली सै गोपाल दौ (31/06) खैआल सै शुचिकर द्दौणा गोपीनाथ सुतौ (92/03) गोपीनाथ सुतौ प्रितिनाथ (81/08) हरिनाथौ कुआ तिसउँत सै माधू दौ (34/05) माधू सुतौ रूचिदत्त: लोहय सकराढ़ी सै पइम दौ (34/01) पइम सुता (87/07) विश्व1नाथ हरिनाथ (164/01) लक्ष्मीूनाथा: हरिअम सै परमू प्रo प्रभाकर सुत इबे दौ (251/03) परमू सुतों इबेक: माण्डथर सै गिरीश्व र दौ (27/05) कुजौली सै मितू द्दौणा इबे सुतो गोविन्दर: बलियास सै मितू दौ (28/03) महिधोध सुधाकर सुतौ भितूक: टकबाल सै सोम दौ।। मितू सुता गुणेशंकर महाई गहाईका: सोदरo माधवदत्त सुत शुभदत्त दौ सतoरत्नाकर द्दौणा हरिनाथ मातृक चक्रं।। हरिनाथ सुता सोम आनन्दम मांझी डुमरा बुधवाल सै गुणपति दौ (19/04) विश्वेनश्वकर (44/10) सुता कुशे प्रo देवानन्दत (151/08) बसाउन (67/07) राज (173/09) परानमणिका: (52/05) बेलo. रूद्रादित्य् दौ नरहरिश्वूर दौणा क्वतचित वलिo जोर द्दौणा (32/03) बहेo ठ. विश्वरम्भ:र द्दौणा कू: न शाएवा सदुo मणि सुता (82/10) गणपति गुणपति विष्णुदपति उँमापति सुरपतिय: (40/03) रजौरामाण्ड(र सै यग्यकपति दौ (32/07) पाली सै रूद द्दौणा गुणपति सुतौ गोविन्दण: सोदरo बासुदेव दौ (31/07) (40/03) बासुदेव सुता पाली सै होराइ प्रoहोरिल दौ (20/07) सुतथ सुतोनाथ प्रo (169/09) मणिधर माण्ड्र सै मधुकर दौ (28/05) मधुकर सुता जोर जान बलभद्रा: करमहा सै प्रजाकर दौ।। नाथू सुतौ होराई क: पबौलि सै देवदत्त सुत शिवदत्त दौ (।30/08) माण्ड र सै सर्वाई द्दौणा.



(88) ।। 36।।
होराई सुता कुजौली सै बैजू सुत ओहरि दौ (23/03) यशोधर सुतौ वैजू कौ विशोकौ सोदरपुर सै वर्द्धन दौ (21/02) माणडर सै भवदत्त द्दौणा बैजू सुतो नोने ओहरि अलप सै बुद्धिपर प्रo वुधेदौ (181/02) दरिo गौरी द्दौणा (मूo नo शाo) गंगोली सै शिरू द्दौणा (मूo नo शाo) ओहरि सुतो गणपति पशुपति दरिहरा सै शंकर दौ (34/05) (41/08) शंकर सुता बभनियाम सै रूचिकर दौ (15/04) रूचिकर सुता खौआल सै श्रीधर दौ (33/04) पनिo धरादित्य) द्दौणा (मo नo शाo वैजू दौ) एवम् ठ. लक्ष्मीहधर प्रथम विवाह समाप्ता ठ. गणेश सुतो बैद्यनाथ दुर्गादत्तौ पुड़े नाउन सै रमाकान्तद दौ (24/08) (76/07) विर सुतौ ज्यो्o रामनाथ: माण्ड्र सै रतिपति सुत लाखन दौ (32/06) लाखन सुते मेध (247/06) धरमू कौ कुजौली सै श्रीकर दौ (30/06) श्रीकर सुतों ज्ञान (131/06) मधुकरपट्टो दरिहरा सै चाण दौ (34/05) चाण प्रoचन्द्रमपति सुतो मतिकर वभनिo (54/05) रूचि दौ ज्यो)तिर्व्विद रामनाथ सुतौ श्रीधर (77/02) पबौली सै कल्यारण दौ (30/08) (189/10) रामदत्त सुता (52/01) (48/02) शुभे कल्या ण जसाईका: बेलउँच सै जोर दौ (19/07) पवौलि सै देवधर दौ।। कल्यारण सुता करमहा सै विद्यापति दौ (26/09) (58/05) शम्भू सुता विद्यापति घनपति महिपतिय: माण्डार सै मनोरथ दौ (09/03) मनोरथ सुता जीवे शीरू चाण:(71/01) जालय सै रामेश्व रसुत महिघर दौ यमुगाम सै गेणाई द्दौणा विद्यापति सुतो भगीरथ: वलियास सै शीरू दौ (32/03) शीरू सुता (57/03) (85/02) बसाउन भवनाथ नोने सोने का (90/10)



(89)
बहेराढ़ी सै नरहरि सुत विश्वदम्भ/र दौ (07/06) खौआल सै रघुपति दौणा श्रीधर सुता गणेश्व नरोत्तम धरनीधरा: सोदरपुर सै वेणीसुत रतिनाथ दौ (35/06) वासुदेव सुतो वेणी काशी कौ माण्डीर सै नगाई सुत विश्व म्भपर दौ फनन्दाह सै जगन्ना)थ द्दौणा वेणी सुतो रतिनाथ: पाली सै देवादित्यत सुत बागे दौ (35/02) दरिहरा सै कारू द्दौणा रतिनाथ सुतो श्री कृष्णथ (165/08) अच्युुतौ पाली सै विष्णोीदेवसुत कामदेव दौ (32/05) विष्णुापति सुता बासुदेव कामदेव बo (03/10) सोमदेवा माण्ड र सै बसाउन सुत देशरथ दौ सरिसब:हलधर दौहित्र दौ।। कामदेव सुता माण्डदर सै शिरू सुत साधुकर दौ (34/07) साधुकर सुतो नरपति रवि: हरिअम सै विमूसुत जसाउन दौ (33/03) जसाउन सुता माण्ड3र सै सुपे सुत गिरू दौ पाली सै वद द्दौणा धरनीधर सुतौ रमाकान्ति कमलाकान्तोे बेहर (91/07) करमहा सै रामचन्द्र दौ (27/02) जयदे सुतौ बासुदेव शिवदेवों (98/06) पवौली सै रूचिदत्त सुत रघुदत्त दौ (30/01) रघुदत्त सुता बलियास सै होरे सुत सोंढू दौ (15/04) दूबे सुता शक्ति श्रीधर गणपतिका पाली सै नरसिंह दौ।। गणपति सुता हेलू (47/02) सुरे होरेका आद्दया गंगोली सै सोमदत्त दौ।। अन्योुत टकबाल सै माधव दौ (09/07) दरिहरा सै सोढू द्दौणा होरे सुतौ बाटू कौ बेलऊँच सै दिनकर दौ (128/24) सोदू सुता कुजौली सै जीवे सुत महाई दौ (135/01) महाई सुतौ रतनू पूरखूकौ सोदरपुर सै (34/04) देवनाथ दौ देवनाथसुतोनाथू (70/01) (73/03) पौथू कौ पाली सै नादू सुत यशु दौ सरिसब सै खांतू द्दौणा बासुदेव सुतौ रामचन्द्रध भगीरथौ (78/06) सोदरपुर सै निकार दौ (23/02) मo मo गोविन्दा (49/03) सुता रघुनन्दसन (39/08)



(90) ।। 37।।
गोन्दूर (66/04) निकारा: खौआल सै वीर दौ (30/05) (44/03) बाइ सुतौ वीर: बेलउँच सै धरादित्या सुत महादित्य‍ दौ टकo दूनभ द्दौणा (47/07) वीर सुतौ रंजन (73/05) परानौ हरिअमसै लाखू दौ (25/08) (65/06) लाखू सुतौ खखनू धारू कौ दरिहरा सै नारू सुत लाखू दौ वुधवाल सै गंगादित्यु द्दौणा निकारसुता महिपति (77/04) (272/04) (103/04) चूड़ामणि विष्णु् कृष्णर हरिनन्द4न (75/01) लक्षमन अच्यु/ता: (63/08) वुधवाल सै चाण सुत धारू दौ (35/01) रूचिकर सुता चाण (46/03) दिनकर नोने का: (49/02) माण्डलर सै कोने सुत जीवेश्व3र दौ बुधवाल सै डालू द्दौणा चाण सुता मानू (48/06) (73/06) मति रतिपति (52/08) श्री पति (77/07) धरापति प्रo धारू का: बेलउँच सै गयादित्य सुत कृष्ण पति दौ (29/08) पणडुआ सै शुभंकर द्दौणा (77/01) धारू सुतौ रघुनाथ जी (89/09) जीवनाथों (78/10) एकहरा सै कृष्ण8पति सुत श्री पति दौ (22/08) (42/03) दिने सुता गुणपति (304/04) कृष्ण6पति शुद्यापति नरपतिय: अलय सै हरि दौ।। कृष्ण2पतिसुता (45/01) कुलपति (50/07) श्रीपति रमापतिय: जजिवाल सै लाखू दौ (17/03) गौरीश्वकर सुत रत्नपाणि सुतौ जीवे लाखू कौ फनन्दपह सै विदू दौ।। लाखू सुतौ रघुपाणि (72/05) (189/04) हरिपाणि करमहा सै गंगेश्वसरसुत राम दौ (35/03) माण्डार सै रघुपति द्दौणा श्रीपति सुता सोदरपुर सै भद्रेश्व0र सुत सोम्हाल दौ (33/01) बेलउँच सै हरि द्दौणा रामचन्द्रख सुता रामकृष्णाा कृष्णु लक्ष्मीदकांता दरिहरा सै रामचन्द्रस दौ (22/05) (47/03) हरि सुता मति गोविन्द् दामू (75/02) मधुसूदन श्री हरि का: (4/03) बेलउँच सै जयादित्य सुत सुधे दौ (30/09) सुधेसुता (43/07) माधू मित्रकर (60/09) यशु (51/09) गुणेका: पाली सै हचलूसुत दिनकर दौ (35/01) माण्डुर सै सुरसर द्दौणा गोविन्दध सुता केशव अर्जून प्रदभूभना: करमहा सै रवि सुतमांगु दौ (20/08) रवि सुतो मांगुक: तल्हडनपुर सै गोविन्द् सुत गोपाल दौ



(91)
(25/01) पाली सै नन्दी श्वार द्दौणा मांगू सुता महाई (179/06) (68/05) नरहरि विशोका दरिहरा सै हरिकर सुत पद्मूकर दौ (10/09) पद्मकरसुतो (58/01) रघु कान्हुा कौ जजिवाल सै सोमसुतमाधव दौ (31/01) माधव सुतौ देघ: उचति सै हटवय सुत माधवदौ खौआल सै भवे द्दौणा अपराप्रदूभन सुता गौरीपति (97/03) रघुनाथ (78/04) रघुनाथ लक्ष्मीौनाथा खण्डौबला सै मेघदौ खौजग: प्रद्यूम्मम सुता रामचन्द्र रामभद्र वलभद्रा: (60/01) (06/02) बलभद्रा: बुधवाल सै मणि सुत विष्णुमपति दौ (36/07) विष्णु पतिय शिवनाथ: खौआल सै यशोधर दौ (31/04) (39/03) (88/01) रामकर सुता हरि गणपति कुशा: हरिअम्बभ सै हारू सुत शिरू दौ (19/01) वलियास सै रूचि द्दौणा गणपति सुतौ यशौधर सरिसद केशव दौ (29/06) वलियास सै नितिकर द्दौणा यशोधर सुता जजिवाल सै रघु दौ (12/08) शंकर सुता भैरवपुर होरे शोरे का दरिहरा सै धराधर सुत लाखू दो करमहा सै धार रघुसुतौ देवदत्त भवे कौ माण्ड र सै रतनू सुत बागे दौ नरउन सै शशि द्दौणा रामचन्द्रर सुतौ रघुनन्द न (02/04) (83/06) हरिनन्दशनौ खण्डाबला सै रतिनाथ दौ (33/03) जी सुता रामनाथ पॉथू हरिहरा बेलoबाढू सुत मानू दौ पाली सै शुभंकर द्दौणा (64/08) पौथू सुतौ रतिनाथ: बहेo शंकर दौ (27/01) मतिश्वढर सुताजोर महनूकुशे जीवे शंकर सकo नितिकर दौ।। शंकर सुताहोरिल रत्नपाणि राघव (236/01) शूलपाणि का सरिसब सै इन दौ (20/04) (69/01) ग्रहेश्विर सुतारूद चाण (44/03) इन्द्रभ महेन्द्र (147/08) (60/02) रविका: करमहा सै लक्ष्मीगपतिक्षो इन सुतों थेध सुधाकरौ पनिo महि सुत रतनू दौ माण्ड‍र सै नगाई द्दौणा रतिनाथ सुता महिषी बुधवाल सै डालूसुत श्रीदत्त दौ (10/1) सूर्यकर सुतौ राम लाखन खण्ड1बला सै बलभद्र दौ लाखन प्रo लक्षमन सुता ग्रहेश्व्र (57/09) भोगीश्वौर मतिश्वसर नन्दीसश्वहरा: तत्राद्यो तिसूही सै गुणेश्वदर दौ अन्त्योव पण्डुरआ सै हल्ले(श्व र दौ भोगीश्वररसुतो धार धाने कौ
(92) ।। 38।।
माण्ड2र सै सागर दौ।। धारू सुता श्रीपति गिरपति ठालू प्रo रतिपति मणिपति गणपतिकां वलियाससै विभाकर सुत मित्रकर दौ गंगोली सै सादू द्दौणा रतिपतिय प्रoडालू सुता जजिo अमांई दौ (12/05) ग्रेहश्वार प्रo. अमांइ सुता दरिहरा सै पॉंथू दौ (23/08) कोने सुतो पॉंथूक: फनo हरिनाथ दौ।। पौथू सुता सोदo देवनाथ दौ श्री दत्त सुता कृष्णंदाश पुरूषोत्तम वलभद्रा: माण्डसर सै विशो सुत बासुदेव दौ (27/01) कुलपति सुतौ विशोक: करमहा सै जागू दौ (53/06) विशो सुतो वासुदेव: बुधवाल सै देवे सुत सोम दौ (22/08) सोम सुता जीवे (41/03) (88/07) (74/09) भवे अमरू बाइक: गढ़: माण्ड र सै दिनकर दौ (22/08) (80/04) दिनकर सुता जमुनी जजिवाल सै महेश्व4र सुत रवि दौ तिसुरी सै खाजो द्दौणा वासुदेव सुतो रूपधर: पाली सै सुरपति दौ (25/01) वागू सुता गोविन्दण (62/02) दामोदर माधवहरिहरा: (89/08) (81/04) माण्डुर सै बुद्धिकर दौ (27/04) वुद्धिकर सुता भवनाथ रवि (64/02) गोरीका।। गोविन्दर सुतो सुरपति बनमाली हृषिकेशा: दरिo रवि सुत भवे दौ सरिo गोरि द्दौणा सुरपतिसुता खौआल सै माने दौ (36/01) माने सुता वेद गर्व्वश (90/09) नोने गोविन्दर धाने अमरू शंकरा: बहेराढ़ी सै गदाघर दौ (25/04) गदघर सुतो विष्णुुपति (49/03) सकराढ़ी सै गोविन्दो सुत चाणौ दौ (05/08) खण्ड बलासै मेघ द्दौणा एवम् रमाकान्तर मातृक चक्रं।। रमाकान्तण सुता सिहौलि माण्डार सै महिपति सुत बलदेव दौ (31/08) (54/02) इबे सुतौ विभाकर भगीरथ दौ सोदरपुर सै वर्द्धनसुत हरिनाथ दौ (21/03) दरिहरा सै राम द्दौणा विभाकर सुतौ वैदिक विश्वरम्भसर हीरेदेवौ वुधवाल सै लाखूसुत गोपी दौ (19/06) लाखू सुता



(93)
सुता गोपी (85/07) गौरी रूदा: खौआल सै बुद्धिकर दौ (14/05) बभनिo रूचिकर द्दौणा गोपी सुतो दामोदर: खौआल सै सोजू दौ (19/09) किशोटू सुता विशो रघुशोभीक टकo प्रितिकर दौ।। रघु सुतो सोजू (85/07) जगन्ना थौ करमहा सै गणपति दौ जजिo सोम द्दौणा सोजू सुतो रंजन: पनिo लाखू दौ (30/01) सकराढ़ी सै हरिश्वोर द्दौणा वैदिक: विश्विम्भ र (86/01) सुतो हरिपति (92/01) महिपति खण्डीबला सै मoमo ढ़o दामोदर दौ (32/07) हरिअम सै गयन द्दौणा महिपति (77/03) सुता बलदेव जयदेव भागीरथा: घुसौत सै जगतगुरूo. सदानन्दो दौ (29/01) कंटकोद्वार कारक मoमo (82/02) मधुसूदन सुतो कृष्णावनन्दल (82/05) जगत्तगुरू मo मo सदानन्दो) दरिहरा सै शक्तूकसुत इन दौ (25/06) शक्तूद सुता होरे चाण इन शोरे (49/01) महिन्द्रा : (66/02) बेलउँच सुधे दौ (37/08) पाली सै दिनकर द्दौणा इन सुतो श्रीराम: (128/02) हरिअम सै पीताम्ब0र दौ (31/08) मांगु सुतो पीताम्बेर गुदीकौ माण्डैर सै रमापति दौ (22/04) पक्षधर सुतो महिपति रमापति तिसुरी सै ग्रहेश्वुर दौ।। रमापति सुता नरउन सै खांतू दौ (19/03) माण्ड र सै वागीश्व2र द्दौणा पीताम्ब्र सुता सकराढ़ी सै सुधाकर दौ (34/09) अपरा लाखू सुतो सुधाकर: करo बाराह दौ (20/8) खण्डणoज्ञानपति पाली सै जगत् गुरू मo मo सदानन्दौ सुता पबौली सै भरथी दौ (30/09) रूचिदत्त सुतो उद्ये ज्ञानो हरिअम सै विभू दौ (33/03) खौआल सै रातू द्दौणा सुधाकर सुतो परमुक: पाली सै हरिपाणि दौ (31/06) हरिया ज्ञान सुता रामदेव कामदेव (88/09) (55/02) (78/01) भवदेव कृष्णसदेव पाली सै महाई दौ (21/03) महाई सुता (65/07) परान हरखू गोविन्दाम सकo गुणे सुत विद्यापति दौ सुरगन सै होरे द्दौणा रामदेव सुता भरथी खुदाई (93/06) यदुनाथ प्रितिनाथा (03/02) सकराढी सै श्रीपति दौ (24/03) मतीश्व र सुता रघु (80/01) गणपति श्रीपतिय: अलय सै हेलू दौ (21/06) नारायण सुतो हेलूक: माण्ड र सै रविदत्त दौ (19/05) टकबाल सै बाटू द्दौणा हेलू सुता सतo दिवाकर दौ (24/07) दिवाक सुतौ (59/08) गौरीश्व र: पनिo श्री पति दौ।। श्री पति सुता करमहा सै रतिघर सुत पशुपति दौ (30/03)

(94) ।।39।।
पशुपति (173/04) सुता भागीरथ दशरथ (232/04) मनोरथा एकहरा सै महाई दौ (26/07) माण्डररसै ज्ञानपति द्दौणा भरथी सुता शंकर (219/03) शुभंकर विश्व)भरा: कुजौली सै पागु सुत माधव दौ (30/06) पागु सुतो राम भीम गोढ़े माधवा बहेराढ़ी सै ढोढ़े सुत रतिकर दौ (19/09) अपरा ढोढ़े (40/06) सुतो रूचिकर रतिकरौ माण्डोर सै विशो सुत सुधाकर दौ (19/02) करमहा सै गंगेश्व़र द्दौणा रतिकर सुतो विदूक: खौआल सै श्रीकर सुतरामकर दौ रामकर सुतो रत्नाकर होरे कौ (54/07) पाली सै नन्दीे सुत बागू दौ (21/06) माण्डौर सै सुरपति द्दौणा माधव सुता माण्ड0र सै राम सुत गोन्टू‍ दौ (31/09) चन्द्र पति सुता गोढ़े (40/07) गौरि राम रूचि (61/06) पराना: वुधवाल सै गुणीश्व0र सुत देवे दौ (22/08) बेलo गयादित्यव द्दौणा राम सुतो गोन्इ का हरिअम सै दामू दौ (27/06) दामू सुता धनपति (47/04) विधुपति नरपति सुरपति (237/07) (70/08) नरपति सुरपति (82/07) चन्द्ररपतिय: उदनपुर जजिo दामु सुत पागु दौ (25/02) (68/08) पागु सुता माण्डमर सै हरि सुत गंगेश्वतर दौ (22/02) हरि सुता गंगेश्व र (77/02) भवेश्विर कारू भानुकर किर्तिकर विद्याकरा: जजिवाल सै हरि सुत जायी दौ भण्डाेरिसम सै साठू दौणा।। गोन्इ0 सुतो बाटूक: जजिवाल सै गुणे सुत रवि दौ (12/01) रवि सुता नरउन सै मुशेसुत धारू दौ वटोढ़ी सै रूचिकर द्दौणा एवम् बलदेव मात्रिक चक्रं।। (111/11) बलदेव सुतौ सोदरपुर सै नरपति सुत शुभंकर दौ (37/09) रघुनन्ददन सुता रमापति प्रo (44/01) बावू नरपति हरपतिय: हरिअम सै बेणी सुत जुड़ाउन दौ (19/0/1) शीरू सुतो (71/04) सोने बेणीकौ सकराढ़ी सै केशव दौ।। बेणी सुतो जुड़ाउन: सोदरपुर सै राय कान्ह( सुत राय महनू दौ (21/07) कान्हूह सुतो महनूक: करमहा सै रतिपति दौ (21/08) रतिपति सुतो नरपति (50/01) गंगोर सै केशवनाथ दौ (19/06) पाली सै दुर्गादित्यै द्दौणा



(95)
राय महन् सुतो विष्णुगपति (66/05) बेलऊँच सै प्राणदित्यत सुत सुपे दौ (33/01) अपराप्राणादित्य0 (69/04) सुतो सुपेक: अलयसै वास्तु दौ (48/03) सुपे सुता शिरू रूचि भवे बुद्धिकरा दरिo विशौ दौ (30/06) विशोसुतो नोनेक: (76/08) वभनि सै एंठोदौ जेठौरसकo दिवाकर द्दौणा (37/08) पाली सै दिनकर द्दौणा जुड़ाउनसुता माoजोर दौ (26/09) गागे सुता जोर मनोरथ गोविन्दाौ खण्ड्बला सै गंगहरि दौ।। जोर सुतो श्री नाथ मतिनाथौ वभनियाम सै इशर सुत गढ़कू दौ माण्ड/र सै जोए द्दौणा नरपति सुता (81/04) भागीरथ शुभंकर दशरथा बुधवाल सै मणि सुत सुरपति दौ (36/07) सुरपति सुतो पदूम: सोदरपुर सै सुधाधर सुत बासुदेव दौ (36/07) बासुदेव (53/09) सुतो छोटाई (305/02) कामदेवो करमहा सै रघु सुत चक्रपाणि दौ (20/08) देवे सुता रघु राम रूचि इबन कान्हाे पबौली सै सुपन सुत देवदत्त दौ (20/05) फनन्द ह सै विश्व0नाथ द्दौणा रघु सुता (60/05) ठकरू हरदत्त (61/02) केशव चक्रपाणि हरिपाणि रत्न्पा णिय एकहरा सै कोचे सुत महाई दौ (26/07) महाई सुता रतन् राम (128/02) वेणी चाणा सोदरपुर सै रविनाथ सुत मo मo देवनाथ दौ (37/08) पाली सै यशु द्दौणा चक्रपाणि सुता सकo नन्दी सुत नोने दौ (05/08) गंगोर सै रघुनाथ द्दौणा शुभंकर सुता करमहा सै राघव सुत विराई मo मo देवनाथ दौ (37/08) पाली सै यशु द्दौणा चक्रपाणि सुता सकo नन्दीैसुत नोने दौ (05/08) गंगोर सै रघुनाथ द्दौणा शुभंकर सुता करमहासै राघव सुत काई विराईद विराई सुता माण्डरर सै शिव सुत अनिरूद्ध दौ (39/04) गोढि सुता शिव (111/02) हरिभवाईका सोदरपुर सै देवे सुत पौखू दौ (51/04) धीरेश्वदर सुतो देवेक: दरिहरा सै सिद्धेश्व/र दौ।। देवे सुतो जोर पौखूक घुसौत सै गुणाकर दौ वलियास सै श्रीधर द्दौणा पौखू सुता चाण गोंग शिरू सुधीकौ अलय सै रत्नकधर सुत भवदत्त दौ माण्डशर सै नरसिंह द्दौणा शिव सुतो (51/06) अनिरूद्ध: बेहद खण्डरबला सै दिनू सुता गुणाकर दौ (34/08) महिपति सुतो दिनू धनपति करमहा सै माधव ढोढे सुतो सुधाकर रामकरा (13/05) सोदरपुर सै केशव दौ।।


(96) ।।40।।
दरिहरा सै मुनि द्दौणा दिनू सुतो गुणाकर: पनिo सै खोत दौ (17/01) खाँतू सुतो हरिपति: दरिहरा सै सुपन सुतखांतु दौ बुधवाल सै डातू द्दौणा गुणाकर सुतो सत्य।भामाकें दरिo भवे सुत मेधू दौo रवि सुत भवे सुतो मेधू रतनू कौ सरिo गौरि दौ।। मेधू सुता सुपन (909/8) रतिपति रमापतिय: बहेराढ़ी सै बाराह सुत नोने दौ।। खौआल सै रतिकर द्दौणा उपर सै तेसा पं‍क्रिक टीप अनिरूद्ध सुतो मोहन मनोहरो करमहा सै राघव दौ (28/07) सोदरपुर सै माधू द्दौणा अनिरूद्ध सुता पाली सै पशुपति दौ (28/03) रत्नाेदित्यु सुता हरि (80/02) (94/03) (92/01) (81/02) गणपति नोने सोने का: (81/02) सतलरवा सै रत्नाैकर सुत चाण दौ (28/09) टकबाल सै ग्रहेश्व3र द्दौणा नोने सुता कृष्णुपति वाचस्प ति (80/05) (77/07) बाइका: दरिहरा सै कारू दौ (35/02) कारू सुता पाली सै गोपाल सुत रत्नपाणि दौ (24/01) खौआल सै श्रीकर द्दौणा कृष्ण0पति सुतो पशुपति खण्ड बला सै ठ. चाण दौ (04/06) सकराढी सै रूद द्दौणा पशुपति सुता (10/06) वलियास सै रामनाथ सुत जगन्नािथ दौ (32/03) रघुनाथ सुतो रामनाथ कवि शेखर रोपंकित (55/02) चन्द्र नाथौ हरिअम सै रघु दौ (31/09) रघु सुता (78/08) उद्योरण (58/09) वणीकाशी (52/09) जगन्ना था: (58/08) (52/02) (801/06) माण्ड र सै आगनिसुत नरपति दौ (24/05) नरपति सुता (60/04) सुता सोदरपुर सै विश्वबनाथ सुत रतिनाथ दौ (19/01) दरिहरा सै मुनि द्दौणा रामनाथ सुता (81/02) सुता जगन्नारथ भमह (86/10) बागेका बहेराढ़ी सै शिव सुत रतिनाथ दौ (27/01) त्रिपुरे सुत शिव सुतो रतिनाथ रूद्रनाथौ गंगोली सै डगरू दौ।। रतिनाथ सुतो थेद्य: (71/04) सकo चाण्डेरश्व1र सुत महेश्वतर दौ जल्लाकी सै उँमापति द्दौणा जगन्नाोथ सुतो महेश: खण्‍डबला सै उधेसुत जगन्नााथ दौ (22/09) बुधे सुतो उगरू शिरूकौ वभनियाम सै उधे सुत हेलू दौ माण्डनर सै किरतू द्दौणा जाग्गूा प्रoजगन्ना थ सुता


(97)
(93/08) काशीनाथ भवानीनाथ प्रान्नाथा: माण्ड र सै गागे दौ (26/09) कुजौली सै सुरपति द्दौणा अपरा ठ. गणेश सुता गरीब रूचिकर विश्वीनाथा: जगतपुर उइनि सै महाराज रूद्रनारायणासुत राजा देवनारायणा दौ मंगरौनी पाली सै पाँ मोहन द्दौणा एवम् ठ. बैद्यनाथ मातृक चक्रं।। ज्येूष्ठा कृष्णा त्रयोदशयां बुधे (28.05.2003.Wednesday) अपरा ठ. लक्ष्मी्धर सुतो पुरन्द‍र: खनाम फनन्द्ह सै गोशौई बलदेव दौ (20/06) बन् (59/03) सुतो महो गोढ़ीक: सकराढ़ी सै दिवाकर दौ।। महो गोढि सुतो सन्याोसी रूचि गोपीकौ नरउन सै गाइ सुत राम दो सरिसब सै सन्ति द्दौणा सन्यागसी रूचि सुता सदुपाध्यािय (143/03) मुकुन्दन महो काशी महो निकारा: माण्डनर सै गाइ दौ (22/02) ऋषि (54/08) सुतो गाइ बनमाली कौ खण्डनo होरे दौ गाइ सुता वेणी विशोनरपतिय: खुबाल सै रविदत्त दौ (25/04) रविदत्त सुता रूद चान्दद मति सर्वाइ शशि शम्मुo नोनेका बलिo गोपाल दौ।। निकार सुतो मo मo रामभद्र: सकुरी सरिसब सै शंकर दौ (20/04) अपरा गंगेश्वारसुता गोगे (76/01) भोगे गोढि (295/04) जुड़ाउना खौआल सै सूर्यकर दौ।। जुड़ाउन (45/05) सुता यशोधर सुधाधर मणिधरा: सतलखा सै रतिकर दौ (32/09) रतिकर सुतो श्रीकर: (51/02) बुधवाल सै केशव सुत नारू दौ पकoसुपन द्दौणा सुधाकर सुतो शंकर: टकo होरे सुत जीवे दौ विस्फीन सै सुधाकर द्दौणा शंकर सुतो शूलपाणि बेलo गादू दौ।। ऋषि सुत शशि सुतो गाइक: पाली सै गांगू द्दौणा गाइ सुता वलियास सै नोने सुत अमरू दौ फनन्दिह सै गुदि द्दौणा मo मo रामभद्र सुता (69/03) पंडित राज पदांकित मo मo पाo मधुसूदन विद्यानिधि राज पदां वैद्यानाथ प्रo पीताम्बार (172/05) महो उमानन्द। (178/07) मo मo बागीश (232/01) त्रिदण्डीा सन्या‍सीकारक मo मo रतीशा: (129/03) भवरौलीसकराढी सै



(98) 41
श्रीकान्ति दौ गोविन्द सुतो पृथ्वी धर: ए सुता गंगेशवर हल्लेतश्वीर राजेश्व र यटेश्व5र: यटेश्वजर सुतो राम: ए सुतो चन्द्रनकर: ए सुतो गुणाकर: ए सुतो डालू ए सुतो प्रितिकर श्रीकरौ त्रिलाठी सै राम दौ श्रीकर सुता रविकर शंकर शुभंकर रूचिकर मतिकरा: पनिoयशोनन्दु दौ।। शंकर सुत मोने सुतो गोविन्दि: मराढ़ सै क्रान्ति दौ।। सदुपाध्याकय गोविन्दद सुतो सदुगदाधर (144/07) पअनामो बुधबालसै इबे दौ।। कान्हद सुत गंगाधर सुतो इबेक: ।। ए सुता शंकर भानुकर (65/04) राजा पुरूषोत्तमा: विजनपुर दरिo सै हरि शिव दौ।। सदुo गदाधर सुता गोपाल जगदीश (170/02) श्री कान्ता शिरोमणिय: यमुगाम सै नरपति सुत हरिहर दौ पालीसै रत्नाकर द्दौणा सदुo श्रीकान्तर सुता मनोहर मोहन पूरख बधाई हृषिकेश मधुरेशा: पनिo कविराज दौ (17/05) (59/04) अपरा रामदेव रामदेव सुतो वासुदेव सानोकौ बुसवनसै घृतिकर दौ।। बासुदेव सुतो देवनाथ राजन प्रo (54/04) हरपति पतौना खौआलसै होरिल दौ।। देवनाथ सुतो शिवनाथ: डीह दरिहरा सँगोरी दौ।। शिवनाथ सुतो कविराज: वेलासकo गोढ़े सुत पथरू अलयसै सोने द्दौणा कविराज सुता सकराढ़ी विश्वतनाथ दौ।। मधुकर सुत साधुकर सुतो विश्वाढनाथ: पाली सै रवि दौ।। विश्वकनाथ सुता हरिअमसै सोन सुत जयदेव दौ वलिo लाखू द्दौणा पण्डित पदा. मo मo मधु सूदन सुतो गोशौइ मदन वलदेवौ दरिहरा सै उँमापति सुत मिरवाई दौ (36/02) उपरा शंकर सुतो सुधाकर तलपुर सैगढ़वय दौ (12/02) पाली सै धिखाई द्दौणा सुधाकर सुतो गुदिक: हरिअम सै गोरि दौ (16/08) माधव सुतो स्ती क: ए सुतो रूचि गाई कौ।। रूचि सुत बागे सुतो गुदिक: डीह दरिहरा सै सुपन दौ।।



(99)
गुदिसुतो गोढि सोनीकौ (45/01) यमुगाम सै रत्नाकर दौ।। गौरीसुतो उँमापति समौलि पाली सै परमगुरू पठांo मo मo वनस्प ति दौ (09/02) सोंसे सुतो उँमापति (224/03) गिर पति गिरिपति (63/01) सुता सुधापति परमगुरू पदां‍ङित वाचस्पमति मिश्र कान्हाा: (56/02) पचही जजिवाल सै लक्ष्मीठपति दौ।। परमगुरू वाचस्पिति (45/04) श्रीराम रत्नरपाणि हरिपाणि श्री हरिश: सतलखा सै चान्दै दौ।। उँमापति सुतो भिरवाईक: बहेराढ़ी सै परान दौ (25/02) अपरा बाराह सुतो दिनकर (81/01) भानुकरौ सकराढ़ी (57/09) सै चांड़ो दौ (05/08) उचति हटवय द्दौणा दिनू प्रoदिनकर सुतो परान: एकहरा सै मo मo गढ़कू दौ (28/06) मo मo गढूक सुतो राम (46/02) राम लाखनौ (62/05) खौआल सै भांगु दौ।। परान सुता माण्ड/र सै शशि सुत गोविन्दन दौ पनिचोभ सै धाम द्दौणा भिरवाई सुता पाली सै नन्दनन दौ (35/04) अपरा रघुपति सुतो गिरीपति रत्नपति (92/03) सोदरपुर सै पौखू दौ (40/07) धीरेश्वुर सुत देवेश्वरर सुते (71/09) पौखूक: धुसौत सै गुणाकर दौ।। पौखूसुतौ चान्दस गांगुकौ अलय सै भवदत्त दौ (18/01) रत्नघर सुत भवदत्त सुतो रूचिनाथ: माण्ड2र सै नरसिंह दौ रत्नपति सुतो अनन्तव: सोदरपुर सै हलधर दौ (31/05) अपरा कीर्तिनाथ सुता (81/02) गांगुहलधर जागे का: माण्डअर सै सोम दौ (33/02) सरिo गंगेश्वनर द्दौणा हलधरसुत (75/02) खौआल सै बाइ दौ।। अनन्तण सुतो नन्दान: सोदरपुर सै जुड़ाउन दौ (24/04) अफलसुतो (60/05) दिवाकर विभाकरप्रo भैरवो दरिहरा सै कोने दौ।। दिवाकर (47/07) सुतो खातर जुड़ाउनो (52/08) वलियास सै जयादित्यन दौ।। जुड़ाउन सुता सतलखा सै सुपे सुत जागे दौ उदनपुर जलिo सोनू द्दौणा नन्दभन सुतो शिव: काको बेलउँच



(100)
बनमालीसुत गणेश दौ पाली सै दिनकर द्दौणा सदुo बलदेव सुतो गोशौइ (293/09)जीवनाथ सोमौई प्रo (256/07) रमानाथ हरिनाथा दरिहरा सै सदानन्दु दौ (33/02)भवानी नाथ सुतो सदानन्दल: (135/02) एकहरा सै बलभद्र दौ (37/05) (86/04) दिनेसुता गुणपति (82/04) कृष्ण2पति सुधापति नरपतिय: अलय सै हरि दौ।। कृष्णापतिसुता मुरारि विद्यापति प्रजापति टकबाल सै रामकर दौ।। नरउन सै श्रीकर द्दौणा मुरारि सुतोलक्ष्मीतनाथ: वलिया सै शोरे सुत मति दौ पनिo सुधे द्दौणा (89/03) लक्ष्मी।नाथसुतोकविकंठाभरण पदाङित वाचस्प ति यशस्पतति बुधवाल सै विश्वे5श्व2र दौ वलिo जोर द्दौणायशस्प ति सुतो बलभद्र: दरिo सोने दौ।। बलभद्र सुता पाली सै रति सुत बसूदौ सुरगन सैविशो द्दौणा सदानन्दि सुतो रघुनाथ: सोदरपुर सै अनिरूद्ध दौ (27/08) अपरा (54/03)माधव सुतो सुरपति: करमहा सै रविकर सुत सोने दौ माण्डहर सै पाणि दौ। सुरपति सुतोदेवानन्दू हरिअम सै भांगु दौ (25/08) दरिo बासू दौ।। देवानन्दा सुतो कृष्णुदाश:करमहा सै बासुदेव दौ (40/04) देवे सुता रघु राम रूचि (46/02) (45/01) इबन कान्हा।(45/01) (57/08) पबौली सै देवदत्त दौ (20/05) फनन्द1ह सै विश्व्नाथ द्दौणा(46/02) राम सुता माधव (45/02) बासुदेव अनन्त दिवाकर (67/09) शंकरा: खौआलसै बुद्धिकर दौ (14/05) अपरा बुद्धिकर (150/05) सुतां रूपे अमरू विशेका: (93/01)बहेराढ़ी सै धाम सुत गुणेश्वरर दौ दरिहरा सै कुसुमाकर द्दौणा बासुदेव सुतो रघुनन्देन: (92/08) दरिo जीवे दौ (28/02) अपरा जीवे सुतो (63/01) मुरारी एकo कृष्णघपति दौ(42/02) टकबाल सै रामकर द्दौणा कृष्ण8दाश सुतो अनिरूद्ध वलियास सै बासुदेव सुतकामदेव दौ हरिअम सै रामचन्द्रा द्दौणा अनिरूद्ध सुतो गोविन्दे दाश: हरिअम सै भिखू दौ(36/03) परमू (35/08) सुता ||

भारत आ नेपालक मैथिली भाषा-वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक शैली
मैथिलीक मानक लेखन-शैली

1. नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक उच्चारण आ लेखन शैली आऽ 2.मैथिली अकादमी, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली


1.नेपालक मैथिली भाषा वैज्ञानिक लोकनि द्वारा बनाओल मानक उच्चारण आ लेखन शैली

मैथिलीमे उच्चारण तथा लेखन

१.पञ्चमाक्षर आ अनुस्वार: पञ्चमाक्षरान्तर्गत ङ, ञ, ण, न एवं म अबैत अछि। संस्कृत भाषाक अनुसार शब्दक अन्तमे जाहि वर्गक अक्षर रहैत अछि ओही वर्गक पञ्चमाक्षर अबैत अछि। जेना-
अङ्क (क वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ङ् आएल अछि।)
पञ्च (च वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ञ् आएल अछि।)
खण्ड (ट वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे ण् आएल अछि।)
सन्धि (त वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे न् आएल अछि।)
खम्भ (प वर्गक रहबाक कारणे अन्तमे म् आएल अछि।)
उपर्युक्त बात मैथिलीमे कम देखल जाइत अछि। पञ्चमाक्षरक बदलामे अधिकांश जगहपर अनुस्वारक प्रयोग देखल जाइछ। जेना- अंक, पंच, खंड, संधि, खंभ आदि। व्याकरणविद पण्डित गोविन्द झाक कहब छनि जे कवर्ग, चवर्ग आ टवर्गसँ पूर्व अनुस्वार लिखल जाए तथा तवर्ग आ पवर्गसँ पूर्व पञ्चमाक्षरे लिखल जाए। जेना- अंक, चंचल, अंडा, अन्त तथा कम्पन। मुदा हिन्दीक निकट रहल आधुनिक लेखक एहि बातकेँ नहि मानैत छथि। ओलोकनि अन्त आ कम्पनक जगहपर सेहो अंत आ कंपन लिखैत देखल जाइत छथि।
नवीन पद्धति किछु सुविधाजनक अवश्य छैक। किएक तँ एहिमे समय आ स्थानक बचत होइत छैक। मुदा कतोकबेर हस्तलेखन वा मुद्रणमे अनुस्वारक छोटसन बिन्दु स्पष्ट नहि भेलासँ अर्थक अनर्थ होइत सेहो देखल जाइत अछि। अनुस्वारक प्रयोगमे उच्चारण-दोषक सम्भावना सेहो ततबए देखल जाइत अछि। एतदर्थ कसँ लऽकऽ पवर्गधरि पञ्चमाक्षरेक प्रयोग करब उचित अछि। यसँ लऽकऽ ज्ञधरिक अक्षरक सङ्ग अनुस्वारक प्रयोग करबामे कतहु कोनो विवाद नहि देखल जाइछ।

२.ढ आ ढ़ : ढ़क उच्चारण “र् ह”जकाँ होइत अछि। अतः जतऽ “र् ह”क उच्चारण हो ओतऽ मात्र ढ़ लिखल जाए। आनठाम खालि ढ लिखल जएबाक चाही। जेना-
ढ = ढाकी, ढेकी, ढीठ, ढेउआ, ढङ्ग, ढेरी, ढाकनि, ढाठ आदि।
ढ़ = पढ़ाइ, बढ़ब, गढ़ब, मढ़ब, बुढ़बा, साँढ़, गाढ़, रीढ़, चाँढ़, सीढ़ी, पीढ़ी आदि।
उपर्युक्त शब्दसभकेँ देखलासँ ई स्पष्ट होइत अछि जे साधारणतया शब्दक शुरूमे ढ आ मध्य तथा अन्तमे ढ़ अबैत अछि। इएह नियम ड आ ड़क सन्दर्भ सेहो लागू होइत अछि।

३.व आ ब : मैथिलीमे “व”क उच्चारण ब कएल जाइत अछि, मुदा ओकरा ब रूपमे नहि लिखल जएबाक चाही। जेना- उच्चारण : बैद्यनाथ, बिद्या, नब, देबता, बिष्णु, बंश, बन्दना आदि। एहिसभक स्थानपर क्रमशः वैद्यनाथ, विद्या, नव, देवता, विष्णु, वंश, वन्दना लिखबाक चाही। सामान्यतया व उच्चारणक लेल ओ प्रयोग कएल जाइत अछि। जेना- ओकील, ओजह आदि।

४.य आ ज : कतहु-कतहु “य”क उच्चारण “ज”जकाँ करैत देखल जाइत अछि, मुदा ओकरा ज नहि लिखबाक चाही। उच्चारणमे यज्ञ, जदि, जमुना, जुग, जाबत, जोगी, जदु, जम आदि कहल जाएवला शब्दसभकेँ क्रमशः यज्ञ, यदि, यमुना, युग, याबत, योगी, यदु, यम लिखबाक चाही।

५.ए आ य : मैथिलीक वर्तनीमे ए आ य दुनू लिखल जाइत अछि।
प्राचीन वर्तनी- कएल, जाए, होएत, माए, भाए, गाए आदि।
नवीन वर्तनी- कयल, जाय, होयत, माय, भाय, गाय आदि।
सामान्यतया शब्दक शुरूमे ए मात्र अबैत अछि। जेना एहि, एना, एकर, एहन आदि। एहि शब्दसभक स्थानपर यहि, यना, यकर, यहन आदिक प्रयोग नहि करबाक चाही। यद्यपि मैथिलीभाषी थारूसहित किछु जातिमे शब्दक आरम्भोमे “ए”केँ य कहि उच्चारण कएल जाइत अछि।
ए आ “य”क प्रयोगक प्रयोगक सन्दर्भमे प्राचीने पद्धतिक अनुसरण करब उपयुक्त मानि एहि पुस्तकमे ओकरे प्रयोग कएल गेल अछि। किएक तँ दुनूक लेखनमे कोनो सहजता आ दुरूहताक बात नहि अछि। आ मैथिलीक सर्वसाधारणक उच्चारण-शैली यक अपेक्षा एसँ बेसी निकट छैक। खास कऽ कएल, हएब आदि कतिपय शब्दकेँ कैल, हैब आदि रूपमे कतहु-कतहु लिखल जाएब सेहो “ए”क प्रयोगकेँ बेसी समीचीन प्रमाणित करैत अछि।

६.हि, हु तथा एकार, ओकार : मैथिलीक प्राचीन लेखन-परम्परामे कोनो बातपर बल दैत काल शब्दक पाछाँ हि, हु लगाओल जाइत छैक। जेना- हुनकहि, अपनहु, ओकरहु, तत्कालहि, चोट्टहि, आनहु आदि। मुदा आधुनिक लेखनमे हिक स्थानपर एकार एवं हुक स्थानपर ओकारक प्रयोग करैत देखल जाइत अछि। जेना- हुनके, अपनो, तत्काले, चोट्टे, आनो आदि।

७.ष तथा ख : मैथिली भाषामे अधिकांशतः षक उच्चारण ख होइत अछि। जेना- षड्यन्त्र (खड़यन्त्र), षोडशी (खोड़शी), षट्कोण (खटकोण), वृषेश (वृखेश), सन्तोष (सन्तोख) आदि।

८.ध्वनि-लोप : निम्नलिखित अवस्थामे शब्दसँ ध्वनि-लोप भऽ जाइत अछि:
(क)क्रियान्वयी प्रत्यय अयमे य वा ए लुप्त भऽ जाइत अछि। ओहिमेसँ पहिने अक उच्चारण दीर्घ भऽ जाइत अछि। ओकर आगाँ लोप-सूचक चिह्न वा विकारी (’ / ऽ) लगाओल जाइछ। जेना-
पूर्ण रूप : पढ़ए (पढ़य) गेलाह, कए (कय) लेल, उठए (उठय) पड़तौक।
अपूर्ण रूप : पढ़’ गेलाह, क’ लेल, उठ’ पड़तौक।
पढ़ऽ गेलाह, कऽ लेल, उठऽ पड़तौक।
(ख)पूर्वकालिक कृत आय (आए) प्रत्ययमे य (ए) लुप्त भऽ जाइछ, मुदा लोप-सूचक विकारी नहि लगाओल जाइछ। जेना-
पूर्ण रूप : खाए (य) गेल, पठाय (ए) देब, नहाए (य) अएलाह।
अपूर्ण रूप : खा गेल, पठा देब, नहा अएलाह।
(ग)स्त्री प्रत्यय इक उच्चारण क्रियापद, संज्ञा, ओ विशेषण तीनूमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना-
पूर्ण रूप : दोसरि मालिनि चलि गेलि।
अपूर्ण रूप : दोसर मालिन चलि गेल।
(घ)वर्तमान कृदन्तक अन्तिम त लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना-
पूर्ण रूप : पढ़ैत अछि, बजैत अछि, गबैत अछि।
अपूर्ण रूप : पढ़ै अछि, बजै अछि, गबै अछि।
(ङ)क्रियापदक अवसान इक, उक, ऐक तथा हीकमे लुप्त भऽ जाइत अछि। जेना-
पूर्ण रूप: छियौक, छियैक, छहीक, छौक, छैक, अबितैक, होइक।
अपूर्ण रूप : छियौ, छियै, छही, छौ, छै, अबितै, होइ।
(च)क्रियापदीय प्रत्यय न्ह, हु तथा हकारक लोप भऽ जाइछ। जेना-
पूर्ण रूप : छन्हि, कहलन्हि, कहलहुँ, गेलह, नहि।
अपूर्ण रूप : छनि, कहलनि, कहलौँ, गेलऽ, नइ, नञि, नै।

९.ध्वनि स्थानान्तरण : कोनो-कोनो स्वर-ध्वनि अपना जगहसँ हटिकऽ दोसरठाम चलि जाइत अछि। खास कऽ ह्रस्व इ आ उक सम्बन्धमे ई बात लागू होइत अछि। मैथिलीकरण भऽ गेल शब्दक मध्य वा अन्तमे जँ ह्रस्व इ वा उ आबए तँ ओकर ध्वनि स्थानान्तरित भऽ एक अक्षर आगाँ आबि जाइत अछि। जेना- शनि (शइन), पानि (पाइन), दालि ( दाइल), माटि (माइट), काछु (काउछ), मासु(माउस) आदि। मुदा तत्सम शब्दसभमे ई नियम लागू नहि होइत अछि। जेना- रश्मिकेँ रइश्म आ सुधांशुकेँ सुधाउंस नहि कहल जा सकैत अछि।

१०.हलन्त(्)क प्रयोग : मैथिली भाषामे सामान्यतया हलन्त (्)क आवश्यकता नहि होइत अछि। कारण जे शब्दक अन्तमे अ उच्चारण नहि होइत अछि। मुदा संस्कृत भाषासँ जहिनाक तहिना मैथिलीमे आएल (तत्सम) शब्दसभमे हलन्त प्रयोग कएल जाइत अछि। एहि पोथीमे सामान्यतया सम्पूर्ण शब्दकेँ मैथिली भाषासम्बन्धी नियमअनुसार हलन्तविहीन राखल गेल अछि। मुदा व्याकरणसम्बन्धी प्रयोजनक लेल अत्यावश्यक स्थानपर कतहु-कतहु हलन्त देल गेल अछि। प्रस्तुत पोथीमे मथिली लेखनक प्राचीन आ नवीन दुनू शैलीक सरल आ समीचीन पक्षसभकेँ समेटिकऽ वर्ण-विन्यास कएल गेल अछि। स्थान आ समयमे बचतक सङ्गहि हस्त-लेखन तथा तकनिकी दृष्टिसँ सेहो सरल होबऽवला हिसाबसँ वर्ण-विन्यास मिलाओल गेल अछि। वर्तमान समयमे मैथिली मातृभाषीपर्यन्तकेँ आन भाषाक माध्यमसँ मैथिलीक ज्ञान लेबऽ पड़िरहल परिप्रेक्ष्यमे लेखनमे सहजता तथा एकरूपतापर ध्यान देल गेल अछि। तखन मैथिली भाषाक मूल विशेषतासभ कुण्ठित नहि होइक, ताहूदिस लेखक-मण्डल सचेत अछि। प्रसिद्ध भाषाशास्त्री डा. रामावतार यादवक कहब छनि जे सरलताक अनुसन्धानमे एहन अवस्था किन्नहु ने आबऽ देबाक चाही जे भाषाक विशेषता छाँहमे पडि जाए। हमसभ हुनक धारणाकेँ पूर्ण रूपसँ सङ्ग लऽ चलबाक प्रयास कएलहुँ अछि।
पोथीक वर्णविन्यास कक्षा ९ क पोथीसँ किछु मात्रामे भिन्न अछि। निरन्तर अध्ययन, अनुसन्धान आ विश्लेषणक कारणे ई सुधारात्मक भिन्नता आएल अछि। भविष्यमे आनहु पोथीकेँ परिमार्जित करैत मैथिली पाठ्यपुस्तकक वर्णविन्यासमे पूर्णरूपेण एकरूपता अनबाक हमरासभक प्रयत्न रहत।

कक्षा १० मैथिली लेखन तथा परिमार्जन महेन्द्र मलंगिया/ धीरेन्द्र प्रेमर्षि संयोजन- गणेशप्रसाद भट्टराई
प्रकाशक शिक्षा तथा खेलकूद मन्त्रालय, पाठ्यक्रम विकास केन्द्र,सानोठिमी, भक्तपुर
सर्वाधिकार पाठ्यक्रम विकास केन्द्र एवं जनक शिक्षा सामग्री केन्द्र, सानोठिमी, भक्तपुर।
पहिल संस्करण २०५८ बैशाख (२००२ ई.)
योगदान: शिवप्रसाद सत्याल, जगन्नाथ अवा, गोरखबहादुर सिंह, गणेशप्रसाद भट्टराई, डा. रामावतार यादव, डा. राजेन्द्र विमल, डा. रामदयाल राकेश, धर्मेन्द्र विह्वल, रूपा धीरू, नीरज कर्ण, रमेश रञ्जन
भाषा सम्पादन- नीरज कर्ण, रूपा झा

2. मैथिली अकादमी, पटना द्वारा निर्धारित मैथिली लेखन-शैली

1. जे शब्द मैथिली-साहित्यक प्राचीन कालसँ आइ धरि जाहि वर्त्तनीमे प्रचलित अछि, से सामान्यतः ताहि वर्त्तनीमे लिखल जाय- उदाहरणार्थ-

ग्राह्य

एखन
ठाम
जकर,तकर
तनिकर
अछि

अग्राह्य
अखन,अखनि,एखेन,अखनी
ठिमा,ठिना,ठमा
जेकर, तेकर
तिनकर।(वैकल्पिक रूपेँ ग्राह्य)
ऐछ, अहि, ए।

2. निम्नलिखित तीन प्रकारक रूप वैक्लपिकतया अपनाओल जाय:भ गेल, भय गेल वा भए गेल। जा रहल अछि, जाय रहल अछि, जाए रहल अछि। कर’ गेलाह, वा करय गेलाह वा करए गेलाह।

3. प्राचीन मैथिलीक ‘न्ह’ ध्वनिक स्थानमे ‘न’ लिखल जाय सकैत अछि यथा कहलनि वा कहलन्हि।

4. ‘ऐ’ तथा ‘औ’ ततय लिखल जाय जत’ स्पष्टतः ‘अइ’ तथा ‘अउ’ सदृश उच्चारण इष्ट हो। यथा- देखैत, छलैक, बौआ, छौक इत्यादि।

5. मैथिलीक निम्नलिखित शब्द एहि रूपे प्रयुक्त होयत:जैह,सैह,इएह,ओऐह,लैह तथा दैह।

6. ह्र्स्व इकारांत शब्दमे ‘इ’ के लुप्त करब सामान्यतः अग्राह्य थिक। यथा- ग्राह्य देखि आबह, मालिनि गेलि (मनुष्य मात्रमे)।

7. स्वतंत्र ह्रस्व ‘ए’ वा ‘य’ प्राचीन मैथिलीक उद्धरण आदिमे तँ यथावत राखल जाय, किंतु आधुनिक प्रयोगमे वैकल्पिक रूपेँ ‘ए’ वा ‘य’ लिखल जाय। यथा:- कयल वा कएल, अयलाह वा अएलाह, जाय वा जाए इत्यादि।

8. उच्चारणमे दू स्वरक बीच जे ‘य’ ध्वनि स्वतः आबि जाइत अछि तकरा लेखमे स्थान वैकल्पिक रूपेँ देल जाय। यथा- धीआ, अढ़ैआ, विआह, वा धीया, अढ़ैया, बियाह।

9. सानुनासिक स्वतंत्र स्वरक स्थान यथासंभव ‘ञ’ लिखल जाय वा सानुनासिक स्वर। यथा:- मैञा, कनिञा, किरतनिञा वा मैआँ, कनिआँ, किरतनिआँ।

10. कारकक विभक्त्तिक निम्नलिखित रूप ग्राह्य:-हाथकेँ, हाथसँ, हाथेँ, हाथक, हाथमे। ’मे’ मे अनुस्वार सर्वथा त्याज्य थिक। ‘क’ क वैकल्पिक रूप ‘केर’ राखल जा सकैत अछि।

11. पूर्वकालिक क्रियापदक बाद ‘कय’ वा ‘कए’ अव्यय वैकल्पिक रूपेँ लगाओल जा सकैत अछि। यथा:- देखि कय वा देखि कए।

12. माँग, भाँग आदिक स्थानमे माङ, भाङ इत्यादि लिखल जाय।

13. अर्द्ध ‘न’ ओ अर्द्ध ‘म’ क बदला अनुसार नहि लिखल जाय, किंतु छापाक सुविधार्थ अर्द्ध ‘ङ’ , ‘ञ’, तथा ‘ण’ क बदला अनुस्वारो लिखल जा सकैत अछि। यथा:- अङ्क, वा अंक, अञ्चल वा अंचल, कण्ठ वा कंठ।

14. हलंत चिह्न नियमतः लगाओल जाय, किंतु विभक्तिक संग अकारांत प्रयोग कएल जाय। यथा:- श्रीमान्, किंतु श्रीमानक।

15. सभ एकल कारक चिह्न शब्दमे सटा क’ लिखल जाय, हटा क’ नहि, संयुक्त विभक्तिक हेतु फराक लिखल जाय, यथा घर परक।

16. अनुनासिककेँ चन्द्रबिन्दु द्वारा व्यक्त कयल जाय। परंतु मुद्रणक सुविधार्थ हि समान जटिल मात्रा पर अनुस्वारक प्रयोग चन्द्रबिन्दुक बदला कयल जा सकैत अछि। यथा- हिँ केर बदला हिं।

17. पूर्ण विराम पासीसँ ( । ) सूचित कयल जाय।

18. समस्त पद सटा क’ लिखल जाय, वा हाइफेनसँ जोड़ि क’ , हटा क’ नहि।

19. लिअ तथा दिअ शब्दमे बिकारी (ऽ) नहि लगाओल जाय।

20. अंक देवनागरी रूपमे राखल जाय।

21.किछु ध्वनिक लेल नवीन चिन्ह बनबाओल जाय। जा' ई नहि बनल अछि ताबत एहि दुनू ध्वनिक बदला पूर्ववत् अय/ आय/ अए/ आए/ आओ/ अओ लिखल जाय। आकि ऎ वा ऒ सँ व्यक्त कएल जाय।

ह./- गोविन्द झा ११/८/७६ श्रीकान्त ठाकुर ११/८/७६ सुरेन्द्र झा "सुमन" ११/०८/७६


VIDEHA FOR NON-RESIDENT MAITHILS
8.VIDEHA FOR NON RESIDENTS
8.1.Original poem in Maithili by Gajendra Thakur Translated into English by Jyoti

DATE-LIST (year- 2009-10)

(१४१७ साल)

Marriage Days:

Nov.2009- 19, 22, 23, 27

May 2010- 28, 30

June 2010- 2, 3, 6, 7, 9, 13, 17, 18, 20, 21,23, 24, 25, 27, 28, 30

July 2010- 1, 8, 9, 14

Upanayana Days: June 2010- 21,22

Dviragaman Din:

November 2009- 18, 19, 23, 27, 29

December 2009- 2, 4, 6

Feb 2010- 15, 18, 19, 21, 22, 24, 25

March 2010- 1, 4, 5

Mundan Din:

November 2009- 18, 19, 23

December 2009- 3

Jan 2010- 18, 22

Feb 2010- 3, 15, 25, 26

March 2010- 3, 5

June 2010- 2, 21

July 2010- 1

FESTIVALS OF MITHILA

Mauna Panchami-12 July

Madhushravani-24 July

Nag Panchami-26 Jul

Raksha Bandhan-5 Aug

Krishnastami-13-14 Aug

Kushi Amavasya- 20 August

Hartalika Teej- 23 Aug

ChauthChandra-23 Aug

Karma Dharma Ekadashi-31 August

Indra Pooja Aarambh- 1 September

Anant Caturdashi- 3 Sep

Pitri Paksha begins- 5 Sep

Jimootavahan Vrata/ Jitia-11 Sep

Matri Navami- 13 Sep

Vishwakarma Pooja-17Sep

Kalashsthapan-19 Sep

Belnauti- 24 September

Mahastami- 26 Sep

Maha Navami - 27 September

Vijaya Dashami- 28 September

Kojagara- 3 Oct

Dhanteras- 15 Oct

Chaturdashi-27 Oct

Diyabati/Deepavali/Shyama Pooja-17 Oct

Annakoota/ Govardhana Pooja-18 Oct

Bhratridwitiya/ Chitragupta Pooja-20 Oct

Chhathi- -24 Oct

Akshyay Navami- 27 Oct

Devotthan Ekadashi- 29 Oct

Kartik Poornima/ Sama Bisarjan- 2 Nov

Somvari Amavasya Vrata-16 Nov

Vivaha Panchami- 21 Nov

Ravi vrat arambh-22 Nov

Navanna Parvana-25 Nov

Naraknivaran chaturdashi-13 Jan

Makara/ Teela Sankranti-14 Jan

Basant Panchami/ Saraswati Pooja- 20 Jan

Mahashivaratri-12 Feb

Fagua-28 Feb

Holi-1 Mar

Ram Navami-24 March

Mesha Sankranti-Satuani-14 April

Jurishital-15 April

Ravi Brat Ant-25 April

Akshaya Tritiya-16 May

Janaki Navami- 22 May

Vat Savitri-barasait-12 June

Ganga Dashhara-21 June

Hari Sayan Ekadashi- 21 Jul

Guru Poornima-25 Jul
Original poem in Maithili by Gajendra Thakur
Translated into English by Jyoti Jha Chaudhary

Gajendra Thakur (b. 1971) is the editor of Maithili ejournal “Videha” that can be viewed at http://www.videha.co.in/ . His poem, story, novel, research articles, epic – all in Maithili language are lying scattered and is in print in single volume by the title “KurukShetram.” He can be reached at his email: ggajendra@airtelmail.in


Jyoti Jha Chaudhary, Date of Birth: December 30 1978,Place of Birth- Belhvar (Madhubani District), Education: Swami Vivekananda Middle School, Tisco Sakchi Girls High School, Mrs KMPM Inter College, IGNOU, ICWAI (COST ACCOUNTANCY); Residence- LONDON, UK;Husband- Sunit Chaudhary, Father- Sh. Shubhankar Jha, Jamshedpur; Mother- Smt. Sudha Jha- Shivipatti. Jyoti received editor's choice award from www.poetry.com and her poems were featured in front page of www.poetrysoup.com for some period.She learnt Mithila Painting under Ms. Shveta Jha, Basera Institute, Jamshedpur and Fine Arts from Toolika, Sakchi, Jamshedpur (India). Her Mithila Paintings have been displayed by Ealing Art Group at Ealing Broadway, London.

The Trumpet Player Of A Musical Band’s Accompaniments
Observing the note of a trumpet
Among the crowd of a band
Perceiving the scene of emptiness
Painted on the canvas of nature
Picture of a roaring ocean
Words of characters painted in a dark cave
No one can see the picture in this darkness
At least people can hear voice of my aspiration
Sailing yacht in the sea crossing the waves
Short of time to hear the sound they make
Viewing the musical notes of fluctuating waves
The lilting sea waves are countless
The indefinite sky doesn’t have any end
The oceans, by joining each other
Misapprehend to be endless
On the rotating round earth
An illusion of a gigantic whirl
But man triumphed over
The boundary of sea too
Measured its circumference
Is the illusion of sky limited?
Is there any end to this too?
Accept it endless unless proved
In viewing words
Hearing pictures
Crossing seas
Counting time-period-countries
Left viewing the
Pictures of the dark cave
Left listening to
Roar of the seas
Can see the voice and hear the picture
A strange sage
Joining the crowd of band
Turned into a trumpet player
Of a musical band’s accompaniments
Note – In the street bands in Rajasthan, many musicians do play trumpet in order but at the same time many of them just pretend to play by bringing the trumpet to the mouth. These unskilled members of a band are instructed not to blow the trumpet in any case. Such musicians are addressed as band’s accompaniments.

VIDEHA MAITHILI SANSKRIT TUTOR- XXIV
संस्कृत शिक्षा च मैथिली शिक्षा च- २४
(मैथिली भाषा जगज्जननी सीतायाः भाषा आसीत् - हनुमन्तः उक्तवान- मानुषीमिह संस्कृताम्)
-गजेन्द्र ठक्कुरः
(आगाँ)

ENGLISH संस्कृतम् मैथिली
This shirt is very nice. एतत् युतकं सुन्दरम् अस्ति। ई अंगा बड्ड नीक अछि।
Is this a new pair of shoes, dear friend? एतत् पादत्राणं नूतनं किं मित्र? ई जुत्ता नबका अछि की, भाइ(सखी)?
Where did you buy this saree? एतां शाटिकां कुत्र क्रीतवती? ई नूआ कत्तऽ सँ किनलहुँ?
How is the ‘palloo’? अञ्चलः कथम् अस्ति? आँचर केहन अछि?
I could not get a matching blouse for this saree. एतस्याः शाटिकायाः अनुरूपः चोलः एव न लब्धः। एहि नूआक मिलान बला ब्लाउज नहि भेटि सकल।
Your trouser’s cut is stylish. भवतः ऊरुकस्य विन्यासः विशिष्टः एव भोः। अहाँक फुलपेंटक कटिंग स्टाइल बला अछि।
It is the latest fashion dear. अत्याधुनिकः विन्यासः मित्र। ई नबका फैशन अछि, भाइ (सखी)।
I too have a pair of earrings like this. मम समीपे अपि एतादृशं कर्णाभरनम् अस्ति। हमरो लग एहने कानबला अछि।
The width of this saree is very less. शाटिकायाः परिणाहः बहु न्यूनः। एहि नूआक चकराइ बड्ड कम छै।
This colour suits you. एषः वर्णः भवत्याः युज्यते। ई रंग अहाँपर जँचै अछि।
How much did you pay for this sweater? एतस्य स्वेदकस्य कृते कियत् दत्तवान्? एहि स्वीटर लेल कतेक टाका खर्चा भेल?
I want to buy new trousers. अहं नूतनम् उरुकं क्रेतुम् इच्छामि। हम नव फुलपेंट कीनए चाहै छी।
See, his hairstyle. तस्य केशविन्यासं पश्यतु। ओकर केशविन्यास देखू।
This is very beautiful, isn’t it? बहु सुन्दरमस्ति खलु एतत्? ई बड्ड नीक छै, छै की नञि?
The saree makes her look older. शाटिकया सा प्रौढा इव दृश्यते। नूआ पहिरने ओ वयसगर लगैत छथि।
The style of this bangle is very attractive. कंङ्कणस्य विन्यासः आकर्षकः अस्ति। एहि चूड़ीक डिजाइन बड नीक छै।
I need a saree like that. तादृशी शाटिका आवश्यकी। ओकरसन नूआ हमरा चाही।

२४
चतुर्विंशतितमः पाठः

अद्यापि वयं संस्कृत संभाषणस्य अभ्यासं कुर्मः। पूर्वतन् पाठे वयँ प्राणिनान् नामानि संस्कृतेन् कथं वक्तव्यानि इति ज्ञातवंतः। अस्मिन पाठे तस्य पुनः स्मरण कृत्वा अग्रे गच्छामः। इदानीं भवद्भिः वाक्यानि वक्तव्यानि।
गजः अश्वस्य अपेक्षया बलवान्।
व्याघ्रः श्रृगालस्य अपेक्षया क्रूरः ।
एतादृशानि वाक्यानि वक्तव्यानि।
वाक्ये प्राणिद्वयस्य नाम भवेत्।
अपेक्षया इत्यस्य अपि प्रयोगः करणीयः। एतादृश वाक्यानि वक्तव्यानि।
अत्र आगच्छतु।
मम हस्ते सुधाखण्डः अस्ति।

भवती स्पर्शम् कर्तुं शक्नोति वा। प्रयत्नं करोतु।
भाग्यश्रीः न शक्नोति।
भवान् शक्नोति।
तिलकः अपि न शक्नोति। शक्नोति वा।
तिलकः शक्नोति।
मम मुष्टौ (हस्ते) किमपि अस्ति।
उद्घाटयतुम् शक्नोति वा।
शक्नोति- शक्नुवंति (ब.व.)
शक्नोति इति क्रियापदम् भवेत्।
शिशुः चलितुम् न शक्नोति।
कृषकः परिश्रमं कर्तुं शक्नोति।
अहम् एकवचनं वदामि भवंतः बहुवचनं वदेयुः।

वृद्धः चलितुं न शक्नोति।
वृद्धाः चलितुं न शक्नुवंति।
मातरः पाकं कर्तुं शक्नुवंति।
भरतनाट्यं कर्तुं शक्नोति।
भरतनाट्यं कर्तुं शक्नुवंति।

अहं देशं रक्षणं कर्तुं शक्नोमि।
वयं देशं रक्षणं कर्तुं शक्नुमः।
वयं सर्वे किम् किम् कर्तुं शक्नुमः।

दृश्यः

-वासुदेवः आगच्छतु। एतद् अपि नेतुं न शक्नोति किम्?
-नेतुं न शक्नोति।
-गृह्णातु। इदानीं नेतुं शक्नोति।
-शक्नोमि।


तिलकस्य लेखनी मम लेखनी इव अस्ति।
मम घटी तिलकस्य घटी इव नास्ति।
एतस्य युतकम् नास्ति।
एतस्याः तिलकं तस्याः तिलकम् इव नास्ति।
संस्कृत भाषा अमृतम् एव मधुरा भाषा।
त्रिवेणी कोकिलः इव गायति।
सुदर्शनः कुम्भकरण इव निद्रां करोति।
सुदर्शनः वकासुर इव भोजनं करोति।
विनोदार्थं वदामि।
सत्यम् इति न चिंतयतु।
उत्तमम्।
सः मल्लः इव युद्धं करोति।
अहम् अंधकारे अंधः इव चलामि।
भिक्षुकः पंगु इव चलति।
अभिनयं करोति।

दृश्यः:

-किं भोः। मंत्री इव विलम्बेन् आगच्छति वा।
-क्षम्यताम्। विलम्बः अभवत्।
-गजः इव मन्दं चलित्वा आगतवान् वा।
-अहं किं करवाणी। अहं नगरयानेन आगतवान्। तत यानम् अश्व शकटः इव मन्दं चलति स्म।
-भवतु। कः विशेषः।
-भवान् कृष्णकुमारं जानाति खलु।

सः ....इव अभिनयं करोति।
कालिदासः इव काव्यं लिखति।
...इव सः उपन्यासं लिखति।
बहुप्रसिद्धः सः।
-सत्यम्। अहं श्रुतवान् यत सः अनूप जलोटा इव गीतं गायति इति।
-वदति सत्यम्। वयम् अस्माकं युवकमण्डले तस्य सम्मानं कुर्मः किम्।
-अवश्यम्। अन्य सर्वे अपि कुर्वंति चेत् अवश्यं कुर्मः। अद्यपि गोष्ठियां भवान् एतं विषयम् उपस्थापयतु। सर्वे चर्चां कृत्वा वयं निर्णयं कुर्मः।
-सत्यमेव तर्हि गच्छामः।
-आम्। गच्छामः।

सुभाषितम्

मातेव रक्षति पितेव हिते नियुङ्कते
कान्तेव चाभिरमयत्यपनीयं खेदम्।
लक्ष्मीं तनोति वितनोति च दिक्षुं कीर्ति
किं किं न साधयति कल्पलतेव विद्या॥

श्रुतस्य सुभाषितस्य अर्थः एवम् अस्ति। अस्मिन् सुभाषिते सुभाषितकारः विद्यायाः महत्वं वर्णयति। विद्या माता इव अस्मान् रक्षति। यथा माता स्वपुत्रं पुत्रीं वा रक्षति तदवत् विद्या अपि अस्मान् रक्षति। पिता इव पिते नियुंते। पिता स्वपुत्रं उत्तम् कार्यं इव नियोजयति। विद्या अपि अस्मान् सत्कार्ये नियोजयति। कांता इव अभिरमयति। पत्नी इव संतोषं ददाति। विद्या अपि-एवमेव ऐश्वर्यम् ददाति। विद्याभ्यासं यः करोति सः तदबलात् उद्योग प्राप्यात् ऐश्वर्यं प्राप्तुम् शक्नोति। अतः सः ऐश्वर्यं अपि प्राप्नोति। एवमेव तस्य जनस्य कीर्तिः अपि सर्वत्र प्रसारिता भवति। अतः अंते सुभाषितकारः वदंति- किं किं न साधयति कल्पलतेव विद्यया- विद्या सर्वं साधयति। किं न साधयति। इति सः प्रश्नं पृच्छति।
वयम् अद्यतन् पठे इव इत्यस्य अव्ययस्य परिचयं प्राप्तवंतः। एतस्मिन् सुभाषिते तस्य एव अधिकः प्रयोगः कृतः अस्ति। कथम् । पश्यंतु।
विद्या किं करोति- मातेव (माता इव) रक्षति। पिता इव हिते नियुङ्ंते।
कांता इव अभिरमयंति।
एवम् अस्मिन् श्लोके त्रिवारम् इव इत्यस्य अव्ययस्य प्रयोगः कृतः अस्ति।

१.विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी रूपमे Videha e journal's all old issues in Braille Tirhuta and Devanagari versions
२.मैथिली पोथी डाउनलोड Maithili Books Download,
३.मैथिली ऑडियो संकलन Maithili Audio Downloads,
४.मैथिली वीडियोक संकलन Maithili Videos
५.मिथिला चित्रकला/ आधुनिक चित्रकला आ चित्र Mithila Painting/ Modern Art and Photos

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६.विदेह मैथिली क्विज :
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११.विदेह फाइल :
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१२. विदेह: सदेह : पहिल तिरहुता (मिथिला़क्षर) जालवृत्त (ब्लॉग)
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१३. विदेह:ब्रेल: मैथिली ब्रेलमे: पहिल बेर विदेह द्वारा
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१७. 'विदेह' प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका वीडियो आर्काइव
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२०.श्रुति प्रकाशन
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२१.विदेह- सोशल नेटवर्किंग साइट
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२२.http://groups.google.com/group/videha
२३.http://groups.yahoo.com/group/VIDEHA/
२४.गजेन्द्र ठाकुर इडेoक्स
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२५.विदेह रेडियो:मैथिली कथा-कविता आदिक पहिल पोडकास्ट साइटhttp://videha123radio.wordpress.com/

२६. नेना भुटका
http://mangan-khabas.blogspot.com/

महत्त्वपूर्ण सूचना (१):महत्त्वपूर्ण सूचना: श्रीमान् नचिकेताजीक नाटक "नो एंट्री: मा प्रविश" केर 'विदेह' मे ई-प्रकाशित रूप देखि कए एकर प्रिंट रूपमे प्रकाशनक लेल 'विदेह' केर समक्ष "श्रुति प्रकाशन" केर प्रस्ताव आयल छल। श्री नचिकेता जी एकर प्रिंट रूप करबाक स्वीकृति दए देलन्हि। प्रिंट संस्करणक विवरण एहि पृष्ठपर नीचाँमे।
महत्त्वपूर्ण सूचना (२): 'विदेह' द्वारा कएल गेल शोधक आधार पर १.मैथिली-अंग्रेजी शब्द कोश २.अंग्रेजी-मैथिली शब्द कोश श्रुति पब्लिकेशन द्वारा प्रिन्ट फॉर्ममे प्रकाशित करबाक आग्रह स्वीकार कए लेल गेल अछि। संप्रति मैथिली-अंग्रेजी शब्दकोश-खण्ड-I-XVI. प्रकाशित कएल जा रहल अछि: लेखक-गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा एवं पञ्जीकार विद्यानन्द झा, दाम- रु.५००/- प्रति खण्ड । Combined ISBN No.978-81-907729-2-1 e-mail: shruti.publication@shruti-publication.com website:http://www.shruti-publication.com

महत्त्वपूर्ण सूचना:(३). पञ्जी-प्रबन्ध विदेह डाटाबेस मिथिलाक्षरसँ देवनागरी पाण्डुलिपि लिप्यान्तरण- श्रुति पब्लिकेशन द्वारा प्रिन्ट फॉर्ममे प्रकाशित करबाक आग्रह स्वीकार कए लेल गेल अछि। पुस्तक-प्राप्तिक विधिक आ पोथीक मूल्यक सूचना एहि पृष्ठ पर शीघ्र देल जायत। पञ्जी-प्रबन्ध (शोध-सम्पादन, डिजिटल इमेजिंग आ मिथिलाक्षरसँ देवनागरी लिप्यांतरण)- तीनू पोथीक शोध-संकलन-सम्पादन-लिप्यांतरण गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा एवं पञ्जीकार विद्यानन्द झा द्वारा Combined ISBN No.978-81-907729-6-9

महत्त्वपूर्ण सूचना:(४) 'विदेह' द्वारा धारावाहिक रूपे ई-प्रकाशित कएल जा' रहल गजेन्द्र ठाकुरक निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा, उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प-गुच्छ), नाटक(संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बाल-किशोर साहित्य विदेहमे संपूर्ण ई-प्रकाशनक बाद प्रिंट फॉर्ममे।कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक, खण्ड-१ सँ ७ (लेखकक छिड़िआयल पद्य, उपन्यास, गल्प-कथा, नाटक-एकाङ्की, बालानां कृते, महाकाव्य, शोध-निबन्ध आदिक समग्र संकलन)-लेखक गजेन्द्र ठाकुर Combined ISBN No.978-81-907729-7-6विवरण एहि पृष्ठपर नीचाँमे ।

महत्त्वपूर्ण सूचना (५): "विदेह" केर २५म अंक १ जनवरी २००९, प्रिंट संस्करण विदेह-ई-पत्रिकाक पहिल २५ अंकक चुनल रचना सम्मिलित। विवरण एहि पृष्ठपर नीचाँमे।

महत्त्वपूर्ण सूचना (६):सूचना: विदेहक मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली कोष (इंटरनेटपर पहिल बेर सर्च-डिक्शनरी) एम.एस. एस.क्यू.एल. सर्वर आधारित -Based on ms-sql server Maithili-English and English-Maithili Dictionary. विदेहक भाषापाक- रचनालेखन स्तंभमे

नव अंक देखबाक लेल पृष्ठ सभकेँ रिफ्रेश कए देखू। Always refresh the pages for viewing new issue of VIDEHA.
कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक- गजेन्द्र ठाकुर

गजेन्द्र ठाकुरक निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा, उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प-गुच्छ), नाटक(संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बाल-किशोर साहित्य विदेहमे संपूर्ण ई-प्रकाशनक बाद प्रिंट फॉर्ममे। कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक, खण्ड-१ सँ ७
Ist edition 2009 of Gajendra Thakur’s KuruKshetram-Antarmanak (Vol. I to VII)- essay-paper-criticism, novel, poems, story, play, epics and Children-grown-ups literature in single binding:
Language:Maithili
६९२ पृष्ठ : मूल्य भा. रु. 100/-(for individual buyers inside india)
(add courier charges Rs.50/-per copy for Delhi/NCR and Rs.100/- per copy for outside Delhi)

For Libraries and overseas buyers $40 US (including postage)

The book is AVAILABLE FOR PDF DOWNLOAD AT

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Delhi-110002 Ph.011-23288341, 09968170107

e-mail:shruti.publication@shruti-publication.com



विदेह: सदेह: 1: तिरहुता : देवनागरी
"विदेह" क २५म अंक १ जनवरी २००९, प्रिंट संस्करण :विदेह-ई-पत्रिकाक पहिल २५ अंकक चुनल रचना सम्मिलित।

विदेह: प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका http://www.videha.co.in/
विदेह: वर्ष:2, मास:13, अंक:25 (विदेह:सदेह:1)
सम्पादक: गजेन्द्र ठाकुर

गजेन्द्र ठाकुर (1971- ) छिड़िआयल निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा, उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) ,पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प-गुच्छ), नाटक(संकर्षण),महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बाल-किशोर साहित्य कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक (खण्ड 1 सँ7 ) नामसँ। हिनकर कथा-संग्रह(गल्प-गुच्छ) क अनुवाद संस्कृतमे आ उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) क अनुवाद संस्कृत आ अंग्रेजी(द कॉमेट नामसँ)मे कएल गेल अछि। मैथिली-अंग्रेजी आ अंग्रेजी मैथिली शब्दकोश आ पञ्जी-प्रबन्धक सम्मिलित रूपेँ लेखन-शोध-सम्पादन-आ मिथिलाक्षरसँ देवनागरी लिप्यांतरण। अंतर्जाललेल तिरहुता यूनीकोडक विकासमे योगदान आ मैथिलीभाषामे अंतर्जाल आ संगणकक शब्दावलीक विकास। ई-पत्र संकेत- ggajendra@gmail.com

सहायक सम्पादक: श्रीमती रश्मि रेखा सिन्हा
श्रीमति रश्मि रेखा सिन्हा (1962- ), पिता श्री सुरेन्द्र प्रसाद सिन्हा, पति श्री दीपक कुमार। श्रीमति रश्मि रेखा सिन्हा इतिहास आ राजनीतिशास्त्रमे स्नातकोत्तर उपाधिक संग नालन्दा आ बौधधर्मपर पी.एच.डी.प्राप्त कएने छथि आ लोकनायक जयप्रकाश नारायण पर आलेख-प्रबन्ध सेहो लिखने छथि।सम्प्रति “विदेह” ई-पत्रिका(http://www.videha.co.in/ ) क सहायक सम्पादक छथि।
मुख्य पृष्ठ डिजाइन: विदेह:सदेह:1 ज्योति झा चौधरी
ज्योति (1978- ) जन्म स्थान -बेल्हवार, मधुबनी ; आइ सी डबल्यू ए आइ (कॉस्ट एकाउण्टेन्सी); निवास स्थान- लन्दन, यू.के.; पिता- श्री शुभंकर झा, ज़मशेदपुर; माता- श्रीमती सुधा झा, शिवीपट्टी।ज्योतिकेँ www.poetry.comसँ संपादकक चॉयस अवार्ड (अंग्रेजी पद्यक हेतु) ज्योतिकेँ भेटल छन्हि। हुनकर अंग्रेजी पद्य किछु दिन धरि www.poetrysoup.com केर मुख्य पृष्ठ पर सेहो रहल अछि।
विदेह ई-पत्रिकाक साइटक डिजाइन मधूलिका चौधरी (बी.टेक, कम्प्यूटर साइंस), रश्मि प्रिया (बी.टेक, कम्प्यूटर साइंस) आ प्रीति झा ठाकुर द्वारा।
(विदेह ई-पत्रिका पाक्षिक रूपेँ http://www.videha.co.in/ पर ई-प्रकाशित होइत अछि आ एकर सभटा पुरान अंक मिथिलाक्षर, देवनागरी आ ब्रेल वर्सनमे साइटक आर्काइवमे डाउनलोड लेल उपलब्ध रहैत अछि। विदेह ई-पत्रिका सदेह:1 अंक ई-पत्रिकाक पहिल 25 अंकक चुनल रचनाक संग पुस्तकाकार प्रकाशित कएल जा रहल अछि। विदेह:सदेह:2 जनवरी 2010 मे आएत ई-पत्रिकाक26 सँ 50म अंकक चुनल रचनाक संग।)
Tirhuta : 244 pages (A4 big magazine size)
विदेह: सदेह: 1: तिरहुता : मूल्य भा.रु.200/-
Devanagari 244 pages (A4 big magazine size)
विदेह: सदेह: 1: : देवनागरी : मूल्य भा. रु. 100/-
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"मिथिला दर्शन"

मैथिली द्विमासिक पत्रिका

अपन सब्सक्रिप्शन (भा.रु.288/- दू साल माने 12 अंक लेल भारतमे आ ONE YEAR-(6 issues)-in Nepal INR 900/-, OVERSEAS- $25; TWO YEAR(12 issues)- in Nepal INR Rs.1800/-, Overseas- US $50) "मिथिला दर्शन"केँ देय डी.डी. द्वारा Mithila Darshan, A - 132, Lake Gardens,
Kolkata - 700 045 पतापर पठाऊ। डी.डी.क संग पत्र पठाऊ जाहिमे अपन पूर्ण पता, टेलीफोन नं. आ ई-मेल संकेत अवश्य लिखू। प्रधान सम्पादक- नचिकेता। कार्यकारी सम्पादक- रामलोचन ठाकुर। प्रतिष्ठाता सम्पादक- प्रोफेसर प्रबोध नारायण सिंह आ डॉ. अणिमा सिंह। Coming Soon:
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अंतिका प्रकाशन की नवीनतम पुस्तक
सजिल्द

मीडिया, समाज, राजनीति और इतिहास

डिज़ास्टर : मीडिया एण्ड पॉलिटिक्स: पुण्य प्रसून वाजपेयी 2008 मूल्य रु. 200.00
राजनीति मेरी जान : पुण्य प्रसून वाजपेयी प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु.300.00
पालकालीन संस्कृति : मंजु कुमारी प्रकाशन वर्ष2008 मूल्य रु. 225.00
स्त्री : संघर्ष और सृजन : श्रीधरम प्रकाशन वर्ष2008 मूल्य रु.200.00
अथ निषाद कथा : भवदेव पाण्डेय प्रकाशन वर्ष2007 मूल्य रु.180.00

उपन्यास

मोनालीसा हँस रही थी : अशोक भौमिक प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 200.00


कहानी-संग्रह

रेल की बात : हरिमोहन झा प्रकाशन वर्ष 2008मूल्य रु.125.00
छछिया भर छाछ : महेश कटारे प्रकाशन वर्ष 2008मूल्य रु. 200.00
कोहरे में कंदील : अवधेश प्रीत प्रकाशन वर्ष 2008मूल्य रु. 200.00
शहर की आखिरी चिडिय़ा : प्रकाश कान्त प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 200.00
पीले कागज़ की उजली इबारत : कैलाश बनवासी प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 200.00
नाच के बाहर : गौरीनाथ प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 200.00
आइस-पाइस : अशोक भौमिक प्रकाशन वर्ष 2008मूल्य रु. 180.00
कुछ भी तो रूमानी नहीं : मनीषा कुलश्रेष्ठ प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 200.00
बडक़ू चाचा : सुनीता जैन प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 195.00
भेम का भेरू माँगता कुल्हाड़ी ईमान : सत्यनारायण पटेल प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 200.00


कविता-संग्रह



या : शैलेय प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 160.00
जीना चाहता हूँ : भोलानाथ कुशवाहा प्रकाशन वर्ष2008 मूल्य रु. 300.00
कब लौटेगा नदी के उस पार गया आदमी : भोलानाथ कुशवाहा प्रकाशन वर्ष 2007 मूल्य रु.225.00
लाल रिब्बन का फुलबा : सुनीता जैन प्रकाशन वर्ष2007 मूल्य रु.190.00
लूओं के बेहाल दिनों में : सुनीता जैन प्रकाशन वर्ष2008 मूल्य रु. 195.00
फैंटेसी : सुनीता जैन प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु.190.00
दु:खमय अराकचक्र : श्याम चैतन्य प्रकाशन वर्ष2008 मूल्य रु. 190.00
कुर्आन कविताएँ : मनोज कुमार श्रीवास्तव प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 150.00
पेपरबैक संस्करण

उपन्यास

मोनालीसा हँस रही थी : अशोक भौमिक प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु.100.00

कहानी-संग्रह

रेल की बात : हरिमोहन झा प्रकाशन वर्ष 2007मूल्य रु. 70.00
छछिया भर छाछ : महेश कटारे प्रकाशन वर्ष 2008मूल्य रु. 100.00
कोहरे में कंदील : अवधेश प्रीत प्रकाशन वर्ष 2008मूल्य रु. 100.00
शहर की आखिरी चिडिय़ा : प्रकाश कान्त प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 100.00
पीले कागज़ की उजली इबारत : कैलाश बनवासी प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 100.00
नाच के बाहर : गौरीनाथ प्रकाशन वर्ष 2007 मूल्य रु. 100.00
आइस-पाइस : अशोक भौमिक प्रकाशन वर्ष 2008मूल्य रु. 90.00
कुछ भी तो रूमानी नहीं : मनीषा कुलश्रेष्ठ प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 100.00
भेम का भेरू माँगता कुल्हाड़ी ईमान : सत्यनारायण पटेल प्रकाशन वर्ष 2007 मूल्य रु. 90.00
मैथिली पोथी

विकास ओ अर्थतंत्र (विचार) : नरेन्द्र झा प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 250.00
संग समय के (कविता-संग्रह) : महाप्रकाश प्रकाशन वर्ष 2007 मूल्य रु. 100.00
एक टा हेरायल दुनिया (कविता-संग्रह) : कृष्णमोहन झा प्रकाशन वर्ष 2008 मूल्य रु. 60.00
दकचल देबाल (कथा-संग्रह) : बलराम प्रकाशन वर्ष2000 मूल्य रु. 40.00
सम्बन्ध (कथा-संग्रह) : मानेश्वर मनुज प्रकाशन वर्ष2007 मूल्य रु. 165.00 शीघ्र प्रकाश्य

आलोचना

इतिहास : संयोग और सार्थकता : सुरेन्द्र चौधरी
संपादक : उदयशंकर

हिंदी कहानी : रचना और परिस्थिति : सुरेन्द्र चौधरी
संपादक : उदयशंकर

साधारण की प्रतिज्ञा : अंधेरे से साक्षात्कार : सुरेन्द्र चौधरी
संपादक : उदयशंकर

बादल सरकार : जीवन और रंगमंच : अशोक भौमिक

बालकृष्ण भट्ïट और आधुनिक हिंदी आलोचना का आरंभ : अभिषेक रौशन

सामाजिक चिंतन

किसान और किसानी : अनिल चमडिय़ा

शिक्षक की डायरी : योगेन्द्र

उपन्यास

माइक्रोस्कोप : राजेन्द्र कुमार कनौजिया
पृथ्वीपुत्र : ललित अनुवाद : महाप्रकाश
मोड़ पर : धूमकेतु अनुवाद : स्वर्णा
मोलारूज़ : पियैर ला मूर अनुवाद : सुनीता जैन

कहानी-संग्रह

धूँधली यादें और सिसकते ज़ख्म : निसार अहमद
जगधर की प्रेम कथा : हरिओम

अंतिका, मैथिली त्रैमासिक,सम्पादक- अनलकांत
अंतिका प्रकाशन,सी-56/यूजीएफ-4,शालीमारगार्डन,एकसटेंशन-II,गाजियाबाद-201005 (उ.प्र.),फोन : 0120-6475212,मोबाइल नं.9868380797,9891245023,
आजीवन सदस्यता शुल्क भा.रु.2100/-चेक/ ड्राफ्ट द्वारा “अंतिका प्रकाशन” क नाम सँ पठाऊ। दिल्लीक बाहरक चेक मे भा.रु. 30/- अतिरिक्त जोड़ू।
बया, हिन्दी छमाही पत्रिका,सम्पादक- गौरीनाथ
संपर्क- अंतिका प्रकाशन,सी-56/यूजीएफ-4,शालीमारगार्डन,एकसटेंशन-II,गाजियाबाद-201005 (उ.प्र.),फोन : 0120-6475212,मोबाइल नं.9868380797,9891245023,
आजीवन सदस्यता शुल्क रु.5000/- चेक/ ड्राफ्ट/ मनीआर्डर द्वारा “ अंतिका प्रकाशन” के नाम भेजें। दिल्ली से बाहर के चेक में 30 रुपया अतिरिक्त जोड़ें।
पुस्तक मंगवाने के लिए मनीआर्डर/ चेक/ ड्राफ्ट अंतिका प्रकाशन के नाम से भेजें। दिल्ली से बाहर के एट पार बैंकिंग (at par banking) चेक के अलावा अन्य चेक एक हजार से कम का न भेजें। रु.200/- से ज्यादा की पुस्तकों पर डाक खर्च हमारा वहन करेंगे। रु.300/- से रु.500/- तक की पुस्तकों पर 10% की छूट, रु.500/- से ऊपर रु.1000/- तक 15%और उससे ज्यादा की किताबों पर 20%की छूट व्यक्तिगत खरीद पर दी जाएगी ।
एक साथ हिन्दी, मैथिली में सक्रिय आपका प्रकाशन


अंतिका प्रकाशन
सी-56/यूजीएफ-4, शालीमार गार्डन,एकसटेंशन-II
गाजियाबाद-201005 (उ.प्र.)
फोन : 0120-6475212
मोबाइल नं.9868380797,
9891245023
ई-मेल: antika1999@yahoo.co.in,
antika.prakashan@antika-prakashan.com
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श्रुति प्रकाशनसँ
१.पंचदेवोपासना-भूमि मिथिला- मौन
२.मैथिली भाषा-साहित्य (२०म शताब्दी)- प्रेमशंकर सिंह
३.गुंजन जीक राधा (गद्य-पद्य-ब्रजबुली मिश्रित)- गंगेश गुंजन
४.बनैत-बिगड़ैत (कथा-गल्प संग्रह)-सुभाषचन्द्र यादव
५.कुरुक्षेत्रम्–अन्तर्मनक, खण्ड-१ आ २ (लेखकक छिड़िआयल पद्य, उपन्यास, गल्प-कथा, नाटक-एकाङ्की, बालानां कृते, महाकाव्य, शोध-निबन्ध आदिक समग्र संकलन)- गजेन्द्र ठाकुर
६.विलम्बित कइक युगमे निबद्ध (पद्य-संग्रह)- पंकज पराशर
७.हम पुछैत छी (पद्य-संग्रह)- विनीत उत्पल
८. नो एण्ट्री: मा प्रविश- डॉ. उदय नारायण सिंह “नचिकेता” प्रिंट रूप हार्डबाउन्ड (ISBN NO.978-81-907729-0-7 मूल्य रु.१२५/- यू.एस. डॉलर ४०) आ पेपरबैक (ISBN No.978-81-907729-1-4 मूल्य रु. ७५/- यूएस.डॉलर २५/-)
९/१०/११ 'विदेह' द्वारा कएल गेल शोधक आधार पर१.मैथिली-अंग्रेजी शब्द कोश २.अंग्रेजी-मैथिली शब्द कोश श्रुति पब्लिकेशन द्वारा प्रिन्ट फॉर्ममे प्रकाशित करबाक आग्रह स्वीकार कए लेल गेल अछि। संप्रति मैथिली-अंग्रेजी शब्दकोश-खण्ड-I-XVI. लेखक-गजेन्द्र ठाकुर, नागेन्द्र कुमार झा एवं पञ्जीकार विद्यानन्द झा, दाम- रु.५००/- प्रति खण्ड । Combined ISBN No.978-81-907729-2-1 ३.पञ्जी-प्रबन्ध (डिजिटल इमेजिंग आ मिथिलाक्षरसँ देवनागरी लिप्यांतरण)- संकलन-सम्पादन-लिप्यांतरण गजेन्द्र ठाकुर , नागेन्द्र कुमार झा एवं पञ्जीकार विद्यानन्द झा द्वारा ।
१२.विभारानीक दू टा नाटक: "भाग रौ" आ "बलचन्दा"
१३. विदेह:सदेह:१: देवनागरी आ मिथिला़क्षर संदस्करण:Tirhuta : 244 pages (A4 big magazine size)विदेह: सदेह: 1:तिरहुता : मूल्य भा.रु.200/-
Devanagari 244 pages (A4 big magazine size)विदेह: सदेह: 1: : देवनागरी : मूल्य भा. रु.100/-
श्रुति प्रकाशन, DISTRIBUTORS: AJAI ARTS, 4393/4A, Ist Floor,AnsariRoad,DARYAGANJ. Delhi-110002 Ph.011-23288341, 09968170107.Website: http://www.shruti-publication.com
e-mail: shruti.publication@shruti-publication.com
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२. संदेश-

[ विदेह ई-पत्रिका, विदेह:सदेह मिथिलाक्षर आ देवनागरी आ गजेन्द्र ठाकुरक सात खण्डक- निबन्ध-प्रबन्ध-समीक्षा, उपन्यास (सहस्रबाढ़नि) , पद्य-संग्रह (सहस्राब्दीक चौपड़पर), कथा-गल्प (गल्प गुच्छ), नाटक (संकर्षण), महाकाव्य (त्वञ्चाहञ्च आ असञ्जाति मन) आ बाल-मंडली-किशोर जगत- संग्रह कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक मादेँ। ]

१.श्री गोविन्द झा- विदेहकेँ तरंगजालपर उतारि विश्वभरिमे मातृभाषा मैथिलीक लहरि जगाओल, खेद जे अपनेक एहि महाभियानमे हम एखन धरि संग नहि दए सकलहुँ। सुनैत छी अपनेकेँ सुझाओ आ रचनात्मक आलोचना प्रिय लगैत अछि तेँ किछु लिखक मोन भेल। हमर सहायता आ सहयोग अपनेकेँ सदा उपलब्ध रहत।

२.श्री रमानन्द रेणु- मैथिलीमे ई-पत्रिका पाक्षिक रूपेँ चला कऽ जे अपन मातृभाषाक प्रचार कऽ रहल छी, से धन्यवाद । आगाँ अपनेक समस्त मैथिलीक कार्यक हेतु हम हृदयसँ शुभकामना दऽ रहल छी।

३.श्री विद्यानाथ झा "विदित"- संचार आ प्रौद्योगिकीक एहि प्रतिस्पर्धी ग्लोबल युगमे अपन महिमामय "विदेह"केँ अपना देहमे प्रकट देखि जतबा प्रसन्नता आ संतोष भेल, तकरा कोनो उपलब्ध "मीटर"सँ नहि नापल जा सकैछ? ..एकर ऐतिहासिक मूल्यांकन आ सांस्कृतिक प्रतिफलन एहि शताब्दीक अंत धरि लोकक नजरिमे आश्चर्यजनक रूपसँ प्रकट हैत।

४. प्रो. उदय नारायण सिंह "नचिकेता"- जे काज अहाँ कए रहल छी तकर चरचा एक दिन मैथिली भाषाक इतिहासमे होएत। आनन्द भए रहल अछि, ई जानि कए जे एतेक गोट मैथिल "विदेह" ई जर्नलकेँ पढ़ि रहल छथि।...विदेहक चालीसम अंक पुरबाक लेल अभिनन्दन।

५. डॉ. गंगेश गुंजन- एहि विदेह-कर्ममे लागि रहल अहाँक सम्वेदनशील मन, मैथिलीक प्रति समर्पित मेहनतिक अमृत रंग, इतिहास मे एक टा विशिष्ट फराक अध्याय आरंभ करत, हमरा विश्वास अछि। अशेष शुभकामना आ बधाइक सङ्ग, सस्नेह...अहाँक पोथी कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक प्रथम दृष्टया बहुत भव्य तथा उपयोगी बुझाइछ। मैथिलीमे तँ अपना स्वरूपक प्रायः ई पहिले एहन भव्य अवतारक पोथी थिक। हर्षपूर्ण हमर हार्दिक बधाई स्वीकार करी।

६. श्री रामाश्रय झा "रामरंग"(आब स्वर्गीय)- "अपना" मिथिलासँ संबंधित...विषय वस्तुसँ अवगत भेलहुँ।...शेष सभ कुशल अछि।

७. श्री ब्रजेन्द्र त्रिपाठी- साहित्य अकादमी- इंटरनेट पर प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" केर लेल बधाई आ शुभकामना स्वीकार करू।

८. श्री प्रफुल्लकुमार सिंह "मौन"- प्रथम मैथिली पाक्षिक पत्रिका "विदेह" क प्रकाशनक समाचार जानि कनेक चकित मुदा बेसी आह्लादित भेलहुँ। कालचक्रकेँ पकड़ि जाहि दूरदृष्टिक परिचय देलहुँ, ओहि लेल हमर मंगलकामना।

९.डॉ. शिवप्रसाद यादव- ई जानि अपार हर्ष भए रहल अछि, जे नव सूचना-क्रान्तिक क्षेत्रमे मैथिली पत्रकारिताकेँ प्रवेश दिअएबाक साहसिक कदम उठाओल अछि। पत्रकारितामे एहि प्रकारक नव प्रयोगक हम स्वागत करैत छी, संगहि "विदेह"क सफलताक शुभकामना।

१०. श्री आद्याचरण झा- कोनो पत्र-पत्रिकाक प्रकाशन- ताहूमे मैथिली पत्रिकाक प्रकाशनमे के कतेक सहयोग करताह- ई तऽ भविष्य कहत। ई हमर ८८ वर्षमे ७५ वर्षक अनुभव रहल। एतेक पैघ महान यज्ञमे हमर श्रद्धापूर्ण आहुति प्राप्त होयत- यावत ठीक-ठाक छी/ रहब।

११. श्री विजय ठाकुर- मिशिगन विश्वविद्यालय- "विदेह" पत्रिकाक अंक देखलहुँ, सम्पूर्ण टीम बधाईक पात्र अछि। पत्रिकाक मंगल भविष्य हेतु हमर शुभकामना स्वीकार कएल जाओ।

१२. श्री सुभाषचन्द्र यादव- ई-पत्रिका "विदेह" क बारेमे जानि प्रसन्नता भेल। ’विदेह’ निरन्तर पल्लवित-पुष्पित हो आ चतुर्दिक अपन सुगंध पसारय से कामना अछि।

१३. श्री मैथिलीपुत्र प्रदीप- ई-पत्रिका "विदेह" केर सफलताक भगवतीसँ कामना। हमर पूर्ण सहयोग रहत।

१४. डॉ. श्री भीमनाथ झा- "विदेह" इन्टरनेट पर अछि तेँ "विदेह" नाम उचित आर कतेक रूपेँ एकर विवरण भए सकैत अछि। आइ-काल्हि मोनमे उद्वेग रहैत अछि, मुदा शीघ्र पूर्ण सहयोग देब।

१५. श्री रामभरोस कापड़ि "भ्रमर"- जनकपुरधाम- "विदेह" ऑनलाइन देखि रहल छी। मैथिलीकेँ अन्तर्राष्ट्रीय जगतमे पहुँचेलहुँ तकरा लेल हार्दिक बधाई। मिथिला रत्न सभक संकलन अपूर्व। नेपालोक सहयोग भेटत, से विश्वास करी।

१६. श्री राजनन्दन लालदास- "विदेह" ई-पत्रिकाक माध्यमसँ बड़ नीक काज कए रहल छी, नातिक एहिठाम देखलहुँ। एकर वार्षिक अ‍ंक जखन प्रि‍ट निकालब तँ हमरा पठायब। कलकत्तामे बहुत गोटेकेँ हम साइटक पता लिखाए देने छियन्हि। मोन तँ होइत अछि जे दिल्ली आबि कए आशीर्वाद दैतहुँ, मुदा उमर आब बेशी भए गेल। शुभकामना देश-विदेशक मैथिलकेँ जोड़बाक लेल।.. उत्कृष्ट प्रकाशन कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक लेल बधाई। अद्भुत काज कएल अछि, नीक प्रस्तुति अछि सात खण्डमे।

१७. डॉ. प्रेमशंकर सिंह- अहाँ मैथिलीमे इंटरनेटपर पहिल पत्रिका "विदेह" प्रकाशित कए अपन अद्भुत मातृभाषानुरागक परिचय देल अछि, अहाँक निःस्वार्थ मातृभाषानुरागसँ प्रेरित छी, एकर निमित्त जे हमर सेवाक प्रयोजन हो, तँ सूचित करी। इंटरनेटपर आद्योपांत पत्रिका देखल, मन प्रफुल्लित भऽ गेल।

१८.श्रीमती शेफालिका वर्मा- विदेह ई-पत्रिका देखि मोन उल्लाससँ भरि गेल। विज्ञान कतेक प्रगति कऽ रहल अछि...अहाँ सभ अनन्त आकाशकेँ भेदि दियौ, समस्त विस्तारक रहस्यकेँ तार-तार कऽ दियौक...। अपनेक अद्भुत पुस्तक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक विषयवस्तुक दृष्टिसँ गागरमे सागर अछि। बधाई।

१९.श्री हेतुकर झा, पटना-जाहि समर्पण भावसँ अपने मिथिला-मैथिलीक सेवामे तत्पर छी से स्तुत्य अछि। देशक राजधानीसँ भय रहल मैथिलीक शंखनाद मिथिलाक गाम-गाममे मैथिली चेतनाक विकास अवश्य करत।

२०. श्री योगानन्द झा, कबिलपुर, लहेरियासराय- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पोथीकेँ निकटसँ देखबाक अवसर भेटल अछि आ मैथिली जगतक एकटा उद्भट ओ समसामयिक दृष्टिसम्पन्न हस्ताक्षरक कलमबन्द परिचयसँ आह्लादित छी। "विदेह"क देवनागरी सँस्करण पटनामे रु. 80/- मे उपलब्ध भऽ सकल जे विभिन्न लेखक लोकनिक छायाचित्र, परिचय पत्रक ओ रचनावलीक सम्यक प्रकाशनसँ ऐतिहासिक कहल जा सकैछ।

२१. श्री किशोरीकान्त मिश्र- कोलकाता- जय मैथिली, विदेहमे बहुत रास कविता, कथा, रिपोर्ट आदिक सचित्र संग्रह देखि आ आर अधिक प्रसन्नता मिथिलाक्षर देखि- बधाई स्वीकार कएल जाओ।

२२.श्री जीवकान्त- विदेहक मुद्रित अंक पढ़ल- अद्भुत मेहनति। चाबस-चाबस।

२३. श्री भालचन्द्र झा- अपनेक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखि बुझाएल जेना हम अपने छपलहुँ अछि। एकर विशालकाय आकृति अपनेक सर्वसमावेशताक परिचायक अछि। अपनेक रचना सामर्थ्यमे उत्तरोत्तर वृद्धि हो, एहि शुभकामनाक संग हार्दिक बधाई।

२४.श्रीमती डॉ नीता झा- अहाँक कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ। ज्योतिरीश्वर शब्दावली, कृषि मत्स्य शब्दावली आ सीत बसन्त आ सभ कथा, कविता, उपन्यास, बाल-किशोर साहित्य सभ उत्तम छल। मैथिलीक उत्तरोत्तर विकासक लक्ष्य दृष्टिगोचर होइत अछि।

२५.श्री मायानन्द मिश्र- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक हमर उपन्यास स्त्रीधनक विरोधक हम विरोध करैत छी। कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पोथीक लेल शुभकामना।

२६.श्री महेन्द्र हजारी- सम्पादक श्रीमिथिला- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़ि मोन हर्षित भऽ गेल..एखन पूरा पढ़यमे बहुत समय लागत, मुदा जतेक पढ़लहुँ से आह्लादित कएलक।

२७.श्री केदारनाथ चौधरी- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक अद्भुत लागल, मैथिली साहित्य लेल ई पोथी एकटा प्रतिमान बनत।

२८.श्री सत्यानन्द पाठक- विदेहक हम नियमित पाठक छी। ओकर स्वरूपक प्रशंसक छलहुँ। एम्हर अहाँक लिखल - कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखलहुँ। मोन आह्लादित भऽ उठल। कोनो रचना तरा-उपरी।

२९.श्रीमती रमा झा-सम्पादक मिथिला दर्पण। कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक प्रिंट फॉर्म पढ़ि आ एकर गुणवत्ता देखि मोन प्रसन्न भऽ गेल, अद्भुत शब्द एकरा लेल प्रयुक्त कऽ रहल छी। विदेहक उत्तरोत्तर प्रगतिक शुभकामना।

३०.श्री नरेन्द्र झा, पटना- विदेह नियमित देखैत रहैत छी। मैथिली लेल अद्भुत काज कऽ रहल छी।

३१.श्री रामलोचन ठाकुर- कोलकाता- मिथिलाक्षर विदेह देखि मोन प्रसन्नतासँ भरि उठल, अंकक विशाल परिदृश्य आस्वस्तकारी अछि।

३२.श्री तारानन्द वियोगी- विदेह आ कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक देखि चकबिदोर लागि गेल। आश्चर्य। शुभकामना आ बधाई।

३३.श्रीमती प्रेमलता मिश्र “प्रेम”- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ। सभ रचना उच्चकोटिक लागल। बधाई।

३४.श्री कीर्तिनारायण मिश्र- बेगूसराय- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक बड्ड नीक लागल, आगांक सभ काज लेल बधाई।

३५.श्री महाप्रकाश-सहरसा- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक नीक लागल, विशालकाय संगहि उत्तमकोटिक।

३६.श्री अग्निपुष्प- मिथिलाक्षर आ देवाक्षर विदेह पढ़ल..ई प्रथम तँ अछि एकरा प्रशंसामे मुदा हम एकरा दुस्साहसिक कहब। मिथिला चित्रकलाक स्तम्भकेँ मुदा अगिला अंकमे आर विस्तृत बनाऊ।

३७.श्री मंजर सुलेमान-दरभंगा- विदेहक जतेक प्रशंसा कएल जाए कम होएत। सभ चीज उत्तम।

३८.श्रीमती प्रोफेसर वीणा ठाकुर- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक उत्तम, पठनीय, विचारनीय। जे क्यो देखैत छथि पोथी प्राप्त करबाक उपाय पुछैत छथि। शुभकामना।

३९.श्री छत्रानन्द सिंह झा- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक पढ़लहुँ, बड्ड नीक सभ तरहेँ।

४०.श्री ताराकान्त झा- सम्पादक मैथिली दैनिक मिथिला समाद- विदेह तँ कन्टेन्ट प्रोवाइडरक काज कऽ रहल अछि। कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक अद्भुत लागल।

४१.डॉ रवीन्द्र कुमार चौधरी- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक बहुत नीक, बहुत मेहनतिक परिणाम। बधाई।

४२.श्री अमरनाथ- कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक आ विदेह दुनू स्मरणीय घटना अछि, मैथिली साहित्य मध्य।

४३.श्री पंचानन मिश्र- विदेहक वैविध्य आ निरन्तरता प्रभावित करैत अछि, शुभकामना।

४४.श्री केदार कानन- कुरुक्षेत्रम् अन्तर्मनक लेल अनेक धन्यवाद, शुभकामना आ बधाइ स्वीकार करी। आ नचिकेताक भूमिका पढ़लहुँ। शुरूमे तँ लागल जेना कोनो उपन्यास अहाँ द्वारा सृजित भेल अछि मुदा पोथी उनटौला पर ज्ञात भेल जे एहिमे तँ सभ विधा समाहित अछि।

४५.श्री धनकर ठाकुर- अहाँ नीक काज कऽ रहल छी। फोटो गैलरीमे चित्र एहि शताब्दीक जन्मतिथिक अनुसार रहैत तऽ नीक।

४६.श्री आशीष झा- अहाँक पुस्तकक संबंधमे एतबा लिखबा सँ अपना कए नहि रोकि सकलहुँ जे ई किताब मात्र किताब नहि थीक, ई एकटा उम्मीद छी जे मैथिली अहाँ सन पुत्रक सेवा सँ निरंतर समृद्ध होइत चिरजीवन कए प्राप्त करत।

४७.श्री शम्भु कुमार सिंह- विदेहक तत्परता आ क्रियाशीलता देखि आह्लादित भऽ रहल छी। निश्चितरूपेण कहल जा सकैछ जे समकालीन मैथिली पत्रिकाक इतिहासमे विदेहक नाम स्वर्णाक्षरमे लिखल जाएत।

४८.डॉ. अजीत मिश्र- अपनेक प्रयासक कतबो प्रशंीसा कएल जाए कमे होएतैक।

४९.श्री ठाकुर प्रसाद मुर्मु- अद्भुत प्रयास। धन्यवादक संग प्रार्थना जे अपन माटि-पानिकेँ ध्यानमे राखि अंकक समायोजन कएल जाए। नव अंक धरि प्रयास सराहनीय। विदेहकेँ बहुत-बहुत धन्यवाद जे एहेन सुन्दर-सुन्दर सचार (आलेख) लगा रहल छथि। सभटा ग्रहणीय- पठनीय।


कुरुक्षेत्रम् अंतर्मनक- गजेन्द्र ठाकुर

Ist edition 2009 of Gajendra Thakur’s KuruKshetram-Antarmanak (Vol. I to VII)- essay-paper-criticism, novel, poems, story, play, epics and Children-grown-ups literature in single binding:

Language:Maithili

692 pages : Price INR Rs.100/-(for individual buyers inside india)

(add courier charges Rs.50/-per copy for Delhi/NCR and Rs.100/- per copy for outside Delhi)

(send M.O./DD/Cheque in favour of AJAY ARTS payable at DELHI.)

DISTRIBUTORS: AJAY ARTS, 4393/4A,

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'विदेह' २३२ म अंक १५ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३२)

ऐ  अंकमे अछि :- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१. जगदीश प्रसाद मण्‍डलक  दूटा लघु कथा   कोढ़िया सरधुआ  आ  त्रिकालदर ्शी २.२. नन...