Saturday, July 11, 2009

गजल- आशीष अनचिन्हार

गजल
इजोतक दर्द अन्हार सँ पुछियौ
धारक दर्द कछेर सँ पुछियौ


नहि काटल गेल हएब जड़ि सँ
काठक दर्द कमार सँ पुछियौ


समदाउनो हमरा निर्गुणे बुझाएल
कनिञाक दर्द कहार सँ पुछियौ


सभ पुरुषक मोन जे सभ स्त्री हमरे भेटए
अवैध पेटक दर्द व्यभिचार सँ पुछियौ


करबै की हाथ आ गला मिला कए
अनचिन्हारक दर्द चिन्हार सँ पुछियौ

6 comments:

  1. bahaut nik bhai, ehina likhait rahoo...bes manoranjak aa bhedi prastuti....ahank rachnak bat takait-TEOTH

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  2. करबै की हाथ आ गला मिला कए
    अनचिन्हारक दर्द चिन्हार सँ पुछियौ

    oho ho ho

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  3. इजोतक दर्द अन्हार सँ पुछियौ
    धारक दर्द कछेर सँ पुछियौ

    नहि काटल गेल हएब जड़ि सँ
    काठक दर्द कमार सँ पुछियौ

    समदाउनो हमरा निर्गुणे बुझाएल
    कनिञाक दर्द कहार सँ पुछियौ

    सभ पुरुषक मोन जे सभ स्त्री हमरे भेटए
    अवैध पेटक दर्द व्यभिचार सँ पुछियौ

    करबै की हाथ आ गला मिला कए
    अनचिन्हारक दर्द चिन्हार सँ पुछियौ
    ati sundar

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  4. gazal ke pran delahu ahan, saripau

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  5. hello... hapi blogging... have a nice day! just visiting here....

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'विदेह' २३२ म अंक १५ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३२)

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