Friday, May 08, 2009

शीला सुभद्रा देवी

शीला सुभद्रा देवी

(१९४९- ) कैकटा तेलुगु पद्य संग्रह प्रकाशित। १९९७ . मे तेलुगु विश्वविद्यालयसँ उत्तम लेखकक पुरस्कार प्राप्त।

जयलक्ष्मी पोपुरी, निजाम कॉलेज, ओस्मानिया विश्वविद्यालयमे अध्यापन।


तेलुगुसँ अंग्रेजी अनुवाद

गजेन्द्र ठाकुर (अंग्रेजीसँ मैथिली अनुवाद)

 

पसीझक काँट

 

बाड़ीमे लगाओल पसीझक काँट गहना लेल

केना ओऽ सभ पसरैत अछि सोहड़ैत!

चुपचाप बुनैत रस्ता आच्छादित करैत स्थान।

 

भीड़-भाड़ सभठाम

सभ कोणमे काँटबला पसीझक झाड़

सभ, सभ रोकैत स्नेहक अनवरुद्ध प्रवाह

चिन्तन विखण्डित पड़ि काँटक मध्य

वाणी अवरुद्ध फँसि कोनो झाड़

मस्तिष्क उर्ध्वपतित चुपचाप

हृदय बनैछ मात्र एकटा अंग

आ मौन करैत राज यांत्रिक रूपे॥

मुनैत, बहत नहि बसाल एकताक

तेनाकेँ ठुसैत

सभक आश कोनहुना निकसी आकाश।

 

मुदा की अछि विस्तृत खेत मध्य?

कतए गेल फूलक क्यारी फुनगैत मित्रताक

हिलबैत अपन माथ आमंत्रणमे?

 

कतए गेल ओ चाली सभ अपन तन्तुसँ बढ़ैत?

सभकेँ समेटैत ओ लता-कुञ्जक मंडप कतए गेल

छोड़ि मात्र अशोक आ साखुक वृक्ष

जे पसारि रहल आकाश मध्य अपन हाथ

नीचाँ देखैत विश्वकेँ

घासक पात सन तुच्छ?

यदि हम मोड़ी आ घुमी घोरैत अपनाकेँ नोरमे

वेधए बला मोथा नहि भोकैत अछि मात्र पएर वरन् आँखि सेहो।

सभठाम लोक उन्मुक्त ठाममे

मानवीय सम्पर्कसँ घृणा करैत

परिवर्तित कएलक नगरकेँ सेहो बोनमे।

पसारैत काँट सभ ठाम

परिवर्तित भेल पसीझक झाड़मे

साँसक फुलब पसरैत चारू दिश

दोसराक संवेदना नहि आबए दैछ विचार

जिनगी भेल उसनाइत खेत सन।

इच्छा भागबाक पएर केने आगाँ।

आश्चर्य, मथि नहि सकैत छी, औँठा धरि।

देखि सकी जौँ अपनेकेँ मात्र

भीतरसँ बाहर पसीझक काँट मात्र।


 


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'विदेह' २३१ म अंक ०१ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३१)

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