Monday, May 04, 2009

संबंध- श्यामल सुमन


साँच जिनगी मे बीतल जे गाबैत छी।
वेदना अछि हृदय मे सुनावैत छी।।
साँच जिनगी----------

कहू माता के आँचर मे सुख जे भेटल।
चढ़ैत कोरा जेना सब हमर दुख मेटल।
आय ममता उपेक्षित कियै राति दिन।
सोचि कोठी मे मुँह कय नुकाबैत छी।।
साँच जिनगी----------

खूब बचपन मे खेललहुँ बहिन भाय संग।
प्रेम सँ भीज जाय छल हरएक अंग अंग।
कोना संबंध शोणित के टूटल एखन?
एक दोसर के शोणित बहाबैत छी।।
साँच जिनगी----------

दूर अप्पन कियै अछि पड़ोसी लगीच।
कटत जिनगी सुमन के बगीचे के बीच।
बात घर घर के छी इ सोचब ध्यान सँ।
स्वयं दर्पण स्वयं केँ देखाबैत छी।।
साँच जिनगी----------
 

6 comments:

  1. साँच जिनगी मे बीतल जे गाबैत छी।
    वेदना अछि हृदय मे सुनावैत छी।।
    साँच जिनगी----------कहू माता के आँचर मे सुख जे भेटल।
    चढ़ैत कोरा जेना सब हमर दुख मेटल।
    आय ममता उपेक्षित कियै राति दिन।
    सोचि कोठी मे मुँह कय नुकाबैत छी।।

    nehal kay delho bhai

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  2. bad nik kavita shyamal ji

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  3. साँच जिनगी मे बीतल जे गाबैत छी।
    वेदना अछि हृदय मे सुनावैत छी।।
    साँच जिनगी----------कहू माता के आँचर मे सुख जे भेटल।
    चढ़ैत कोरा जेना सब हमर दुख मेटल।
    आय ममता उपेक्षित कियै राति दिन।
    सोचि कोठी मे मुँह कय नुकाबैत छी।।
    साँच जिनगी----------खूब बचपन मे खेललहुँ बहिन भाय संग।
    प्रेम सँ भीज जाय छल हरएक अंग अंग।
    कोना संबंध शोणित के टूटल एखन?
    एक दोसर के शोणित बहाबैत छी।।
    साँच जिनगी----------दूर अप्पन कियै अछि पड़ोसी लगीच।
    कटत जिनगी सुमन के बगीचे के बीच।
    बात घर घर के छी इ सोचब ध्यान सँ।
    स्वयं दर्पण स्वयं केँ देखाबैत छी।।
    साँच जिनगी----------

    ek-ek shabd mohit kelak

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  4. साँच जिनगी मे बीतल जे गाबैत छी।
    वेदना अछि हृदय मे सुनावैत छी।।
    bah bhai ji

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  5. साँच जिनगी----------

    खूब बचपन मे खेललहुँ बहिन भाय संग।
    प्रेम सँ भीज जाय छल हरएक अंग अंग।
    कोना संबंध शोणित के टूटल एखन?
    एक दोसर के शोणित बहाबैत छी।।
    साँच जिनगी----------

    bahut nik

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'विदेह' २३१ म अंक ०१ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३१)

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