Friday, May 08, 2009

शक्ति शेखर

शक्ति शेखर

पिता-श्री शुभनाथ झा, गाम- मोहनपुर, भाया-हरलाखी, जिला-मधुबनी।


कखन बदलब हम

बहुत तामस होइए भगवानक एहि कृत्यसँ जे अपन उपस्थिति मिथिलांचलमे दर्ज केनाय शायदे कोनो साल बिसरै छथि। मुदा हमरा सबकेँ एहि भयावह स्थितिसँ लड़बाक अलावा आओर कोनो रस्तो तँ नहि अछि। जी, हम बात कऽ रहल छी, एखन बिहारमे आयल बाढिक संदर्भमे। अनुमान लगायल जारहल अछि, जे अहि बाढिक चपेटमे करीब 50 लाख लोक आयल छथि। सभ साल जुलाई-अगस्तक मास अबिते बिहारक लोक आतंकित भऽ जाइत छथि।सबहक मोनमे डर रहै छनि, जे एहि बेर केकर घर उजरतौ। लोकसब भरि साल दिन राति मेहनत कऽ एकटा घर बनाबैत छथि, किछु पूंजी जमा करैत छथि,मुदा की होइए एहि सभसँ? बाढि तँ कोनो आतंकवादीसँ बेसी भयावह होइत अछि जे हर बेर कतेको गामकेँ, कतेको बिगहा जमीनकेँ अपन अंदर समेट लैत अछि। संबधित विभाग बाढिकेँ कऽ सब जानकारी राखितो कोनो तरहक कदम नहि उठाबैत अछि। शायद बाढि हुनका सभक लेल आमदनीक एकटा स्रोत जे होइ-ए। पछुलका बाढि सभक राहत-अनुदानपर नजर दौड़ाबी तँ निधोक एक बात कहनाइ अनुचित नहि होयत, जे बाढिसँ कतेको लोक करोड़पति सेहो गेलाह। ईश्र्वरक लीला देखियौक, जे एक दिस एहि बाढिसँ सभ बेर कतेको लोक (शायद अनुमान लगेनाय असंभव अछि) केर सब चीज लुइटे जाय छनि, तँ दोसर दिस बाढि घोटालाक अभियुक्त आओर कतेको लोक करोड़पतिक गिनतीमे आबि गेलाह। ओहि दृश्यक बारेमे सोचल जाय, जे पूर्णियामे बाढिक डरे अपन छत पर बैसल चारि सालक बच्चा भूखसँ अपन दम तोड़ि देलक, ओहि लोकक बारेमे सोचि, जिनका खेनाय तँ दूर पिबऽ के लेल पानि तक नहि भेटि रहल छनि लोकक चापाकल बाढिक पानिमे डुबि गेल छनि। हिनका सभ लग किएक नहि पहुंचि पाबि रहल छनि राहत सामाग्री। कहिं एहन तँ नहि जे फ़ेर सँ कतेको लोक एहि बाढिमे करोड़पति बनए वला छथि। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह बिहारक बाढिकेँ राष्ट्रीय आपदा घोषित तँ देलन्हि मुदा पीड़ितक लेल सांत्वना मात्र अछि। केन्द्र सरकार दिससँ बिहारक बाढि पीड़ितक लेल 1000 करोड़ रुपया अनुदानक राशि देल गेल अछि। मुदा एहि अनुदानक राशिक विषयमे अखनो कतेको बाढि पीड़ित केँ मालूम नहि चलि सकल अछि। जिनका अहि बारेमे जानकारी भेटबो कैल तँ निश्चित सोचने हेताह कि शायदे एहि राशिमे सँ हुनका सभकेँ किछु भेटत। केन्द्र सरकार राशि तँ अपन बाढि पीड़ितसँ तँ अपन पल्ला झाड़ि लेलाह, मुदा बाढि पीड़ित तक राशि कोना पहुंचि सकत, एहि बारेमे हुनकर ध्यान नहि गेल अछि। एक बेर फ़ेरसँ कहब जे अनुदानक राशि सब विभाग तक बटैत बटैत दस प्रतिशतो बाढि पीड़ित तक नहि पहुंचि सकत। आओर हँ, बाढिक दोगमे जे सभसँ पैघ चीज होइत अछि ओऽ अछि राजनीति। कतेको नेता सभ एहि बाढि पीड़ितक लेल आगिमे घी देनाय जेहेन काज करैत छथि। राज्य सरकार केँ दोषी ठहराबैत नेता सब ओहि जगह अपन सीट सुनिश्चित करबाक फ़िराकमे रहैत छथि। हेलीकाप्टरसँ बाढि क्षेत्रक सर्वेक्षण करैत बहुतो नेतासभकेँ अतबो जानकारी नहि रहैछनि जे ओऽ कोन क्षेत्रक दौड़ा कऽ रहल छथि। पता एहि बातसँ लगायल जासकैत अछि जे नेतासभ ओहि क्षेत्रक कतेक ज्ञान रखने छथि। इमहर राज्य सरकार सेहो कहां चुप रहए वला। ओऽ केन्द्रपर निशाना साधैत छथि तँ केन्द्र राज्य सरकार पर। एहि राजनीतिमे पिसाइत तँ बाढि पीड़ित छथि। कोनो बात नहि, समय आबि गेल अछि एकजुटता देखाबएबाक  मदति करबाक....बाढि पीड़ितक संग, बाढि पीड़ितक लेल। तखने हम स्वतंत्र भारतक कर्तव्यनिष्ठ नागरिक भऽ सकैत छी।  

जोगार

'हम आपको दिखा रहे हैं कि कैसे फ़ला आदमी किसी मामले को दबाने के लिए दुसरे को पैसा दे रहे है। यह हमारे चैनल के स्टिंग आपरेशन का नतिजा है जो सिर्फ़ दिखा रही है।' जी,इ पंक्ती अछि आजुक समय के सब घटना स अपना सब के देखा रहल इलेक्ट्रोनिक चैनल के। अपना के सब स ऊपर पहुंचाबय के लेल ओ सब हथकंडा अपना लैत अछि। विडंबना इहो देखु जे सब चैनल वला अपना के राजा हरिश्चंद्र के सत्य नीति पर आधारित बताबैत अछि। बहुतो चैनल वला सब कोनो काज के तह तक पहुचबाक लेल हमेशा एकटा हथकंडा अपनाबैत अछि जाहि के सहि युग मे स्टिंग आपरेशन कहल जाइत अछि। माने इ जे हम इ हम देखा रहल छी जे बस अहाँक लेल अछि आ सत्य अछि। मुदा कहल जाय तँ एकटा सत्य मीडिया खास क इलेक्ट्रोनिक मीडिया मे एहि शब्दक बोलबाला अछि। जी,हम बात क रहल छी 'जोगार' के। आजुक युग मे बहुतो युवा के रुझान पत्रकारिता दिस झुकि रहल छैन। लाखो रुपया ओ सब अहि पत्रकारिता के पढाई पर खर्च क दैत अछि। शायद किछ उम्मीद के संग जे ओहो सब एक दिन अहि क्षेत्र मे अपन नाम रौशन करताह। मुदा कि होइया अतेक पढाई लिखाई कएलासँ? पढाई के संग संग कतेको लोकनि के पत्रकारिता मे काज करबाक लेल जोगार सेहो लगाबअ पड़ै छैन। एक तरह स कहू त डीग्री डिप्लोमा स पहिले कोनो चैनल मे पहुंचबाक लेल हुनका सब के सब स पहिले त जोगार लगाबहे पड़ै छैन। अनुचित नहि हैत जौं कहि त जे पत्रकारीता क्षेत्र मे घुसबाक लेल सब स जरुरी जोगार होयत अछि। आब त कतेको चैनल सब आ अखबार एजेंसी सब अपन-अपन संस्थान सेहो खोलि लेने अछि,इ कहि क जे पढाई समाप्ती के बाद हुनका सब के ओहि चैनल आ अखबार एजेंसी मे काज देल जायत। साधारण वर्ग सब पत्रकारिता के पढाई करलाक बादो ओ सब अहि संस्थान मे नामांकन नहि ल सकैत छथि। चैनल वला सब के अहि  कदम  स साधारण तबका वला

युबासब के अहि चैनल मे काज खोजनाय पहाड़ खोदनाय एहन भ रहल अछि। सोचल जाय जे ओ चैनल वा अखबार एजेंसी वला सब अपन संस्थानक विद्यार्थी केँ छोड़ि क दोसर गाटे के किएक काज देत। बड पैघ पैघ गप्प करैत छथि इ चैनल वा अखबार वला सब जे भारत मे बेरोजगारी अहि हद तक बढि रहल अछि आ दोसर दिस अपने जोगारक मंत्र पर काज दैत अछि। ध्यान दि जे अखन समाचार चैनल वा अखबार एजेंसी मे काज क रहल छथि,ओहि मे स एहन कतेक व्यक्ती छथि जिनकर कोनो नहि कोनो संबंध अहि क्षेत्रक माफ़िया सब स नहि छैन। प्रतिशत मे देखल जाय त जोगार वला सबहक प्रतिशत शायद 80 तक पहुंच जायत। एक तरह स कहि त जे अहि पत्रकारीता क्षेत्र मे ज्यादा स ज्यादा दिन तक टिकबाक लेल जिगार रहनाय आवश्यक अछि। ओना त सब क्षेत्र मे जोगार अपन एक अलग स्थान राखैत अछि मुदा पत्रकारीता क्षेत्र के लेल एकर महत्व विशेष मे भ जायत अछि। पत्रकारीता के देशक चारिम स्तंभ मानल जायत अछि आ इ स्तंभ जोगार पर टिकल अछि। कि जिनका लक  जोगार नहि अछि,ओ पत्रकारीता क्षेत्र मे काज नहि क सकैत छथि? फ़ैसला ओहि सब लोकनि के लेबअ पड़तैन जे अहि मे संलिप्त रहै छथि,जिनकर नाम ल क जोगार लगाबअ पड़ैत अछि,ओहि सब युवासब के लेल के काल्हि के भविष्य छथि।


 

 

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'विदेह' २३२ म अंक १५ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३२)

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