Friday, May 08, 2009

अयोध्यानाथ चौधरी

अयोध्यानाथ चौधरी

धनुषा, नेपाल 1947-

मूलत: कविक रूपमे परिचित छथि। नेपालक आधुनिक कविताक क्षेत्रमे हिनक नाम उल्लेखनीय अछि। श्री चौधरीक लेखनमे मानवीय संवेदनाक प्रतिबिम्ब पाओल जाइत अछि। कविताक संग कथा आ निबन्धमे सेहो ई कलम चलबैत छथि। फड़िछाएल लेखन हिनक विशेषता थिकनि।धनुषा जिलाक दुहबी गामक रहनिहार श्री चौधरीक जन्म ६अक्टुबर १९४७कऽ भेल छनि। हिनक क्षितिजक ओहिपार नामसँ एक कविता-संग्रह प्रकाशित छनि।


दू पत्र

 _________अयोध्यानाथ चौधरी

 अन्तत; आइ हम दिनेशकेँ पत्र लिखवाक लेल उद्यत भेलहुँ अछि। कागत-कलम सब दुरुस्त १९६९, माने ठीक ३६ वर्षक बाद। एतेक नम्हर अन्तराल ! की बूझत ओ ? खीझ होइत अछि हमरा जे जीवनमे एंकटा उत्साही पत्र लेखक किएक नहि वनि सकलहुँ हम ? एकटा सफल दायित्व किएक नहि निभा सकलहुँ हम ? जकरा हम पत्र लिखाक हेतु उद्यत भेलहुँ ओ हो त कहियो लिखवाक वात सेचि सकैत छल। खैर शरुआत हमरेसँ रहओ। ओकरा हेतु हमर पत्र एकटा अप्रत्याशित घटना सावित हेतैक ’अ सरप्राइज’ आ, जौं ओ जीवित नहि हो ............ ? बहुत नम्हर अत्नराल भेलैक ने ! पत्र फिर्ता आबि सकैत अछि .............ओहि पर “डेड’ जा मृत कानो संकेत रहि सकैत छैक। एतेक निराशाजनक वात नहि सोचवाक चाही। ओहना स्थितिमे पोस्टमैन पत्र फारि-फेकिकऽ अपन मथ-दुक्खी सँ मृक्त भऽगेल रहत।

ई समय पत्र लिखवाक अनुकूल +{बहुत अनुकूल वुझा रहल अछि। दशमीमे सब गाम अबैए- ओकरो जरुर गाम आवक चाही। तावत ओकर पत्नी, बेटा वा वेटी केओ ने के ओ पत्र सहेजिकऽराखि देने रहतैक। जाइ जमानामे हम सव – ’ग्रैजुएशनकेने रही, ओइ हिसाव सँ ओ जरुर कोनो नोकरी मे हैत किएक तनीक विद्यार्थी रहय। पता नहि पटना वोकारो, टाटा, दिल्ली कतऽ अइ..... आकि सुदुर दक्षिण केरला, मद्रास-नहि जानि कतऽ ?/

चारि वर्ष संगे अभिन्न रहवाक कारणे ओकरा पत्र लिखवामे एकटा पेन फ्रेन्डक मजा आओत। सबसँ पहिने तँओकरा परिवाक हुलिया लेवऽ पडत। ओकरा परिवारमे के सब छैक ? के कतऽ की करैत छैक ? पत्रक सिलसिला जौ चालु भऽ जायत त कालान्तरमे इ हो बूझऽ मे आवि जायत जे ओकरा एकटा मनोनुकूल पत्नी भेटलैक की नहि..... आकी कोनो ना शेष जीवन वितावऽक क्रममे अइ।

याददाश्त वा फेहरिस्त रहत। तहिया सी. एम. कलेजक आलीशान आर्ट्स व्लक नव हेवाक कारणे विल्कुल कोनो सुन्दर कागज पर पारल रंगीन नक्शा वुझाइक पार्क जकाँ। जतऽ जाउ जेना पक्षीक झुण्ड आ कलरव पसरल। विशाल पुस्तकालय। वागमतीक मनोरम आ खतरनाक किछेर। रहस्यमयं गर्ल्स-कामन-रुम। विभिन्न विषयक अलग डिपार्टमेन्टआ ओ रहस्यमय कोठली, उपर हेवाक कारणे, छात्रसब कौखन कार्यवश, कौखन अनेरो, कोनो सरसँ भेटवाक वहानामे उपर भीड कऽदैक। परन्तुजखन हुसैनसाहव माने वाइस प्रिन्सपल अपन चैम्बर सँ बहार भऽ केवल तर्जनी उठवैत छलाह तखन सब सिड़हीसँ नीचा भगैत छल कान कपार फुटवाक टांग टुटवाक कोनोटा डर नहि। हमरा सभक ग्रूपमे एकटा रीनिता नामक लड़की छलि जकरा मात्रेकार प्रतिदिन कालेज पहुँचा जाइक। लक्ष्मी आ सरस्वतीक अपूर्व संयोग ! मांजल अंग्रेजी वजैत आ लिख्यैत छलि। फस्ट इयरमे विदेहमे जे ओकर लेख छपैलक से लाजबाव रहैक शीर्षक छल “Exclusively ours “| लेख मार्फत ओ ओकरा सभक कोठलीक पर्दा हटा भीतरक बहुत रास रहस्योदघाटन कएने छलि। मुदा ओ एक बर्षक बाद नहि जानि कतऽ चल गेलि ? धनीक बापक वेटी रहए। प्राय: ओ कलेज झुझाअन लागल हेतैक।“ Exclusively ours” एखनो कहियो काल पढि लैतछी मुदा शीर्षकक तात्पर्य वुझवामे एखनो माथमे बल देवऽ पडैत अछि।

एकटा और घटना जकर हम सब कहियो नहि विसरि सकब। हम सव विश्वस्त छी जे जओं पत्र लेखनक शुरुआत मित्र दिनेश राय दिससँ होइत त ओहो ओइ घटनाक चर्च जरुर करैत। हम सव भाग्यवान रही जे ओहो कोनो नन्दीटाइटलवाली हमरे सभक ग्रुपक छलि आ वंगालिने छलि। ओकरा आँखिमे वास्तवमे एहन एकटा चमक छलैक जे आई ३६ वर्षसँ कतौ अन्तऽ नहिं अभरल, पता नहि ओ आँखि कतऽ अधि ? ओइ बड़का बड़का आँखिमे ओ चमक विद्यमाने छैक वा मलीन भेलैक अछि ? जे किछु। मुदा सारा कॉंलेज ओ जादुई आँखि देखने छल देखैत छल। अनहोनी भए गेलै। एकटा हमरे सवहक सहपाठी लड़का ओकरा नाम पर ओकर नाम लैत जहर खा लेलक मुदा समये पर अस्पताल पहुचाओल गेल आ जान वचि गेलैक। जंगली आगि जकाँ वात सौसे पसरि गेल। मुदा ओकरा लेल धन-सन। कोनो प्रतिक्रिया ने कोनो हलचल ने सव किछु विल्कुल सामान्य। असलमे एक तरफा प्रेम छलैक। वात ओकरो तक जरुर गेल हेतै लेकिन ओ वेहद गम्भीर जे छलि। Eng. Hons. Group मे टॉप कैलक। मुदा ओ जमाना वड़ वेजाए छलैक। लड़का लड़कीमे बार्ताक संचार नहि होइत छलैक। लाख कोशिशक वाद हमरा आ दिनेशक मुँहसँ कंग्राच्युलेसन शब्द नहि फुटल नहिए फुटल।

कालेज आ संवेदनशील घटना संवेदनशील घटना आ कालेज जेना एक दोसरक पर्याय रहैक। कतेक वात भेल। कतेक घटना घटल। मुदा पहिने पत्राचारक क्रम त शुरु होवऽ। दिनेश वहुत वातक जानकारी करा सकैए ओहि पानि कजे अइ। जन्मभूमि आ कर्मभूमि नेपाल भेलाक कारने बहुत रास अपन लोक छुटि गेल। ओना सीमा नहि बुझाइत छैक मुदा सम्पर्क जे टुटिगेल अछि। मुदा एकटा वात। एहि सन्धि-स्थल पर जीवाक अपन मजा छैक। कौखन उत्तराभिमुख, कौखन दक्षिणाभिमुख। दूटा संस्कृति मिश्रित जीवनक उत्फुल्लता जुनि पुछू। पहाड़क गीत खोलामे झहरिकऽ समुद्रक लहरिमे विलन भऽ जाइत अछि। भास दू-मुदा भाव एके ऐन-मेन। “जहाँ जहाँ वान्छौ तिमी, म पाइला वनि पच्छयाई रहन्छु “ तु जहाँ-जहाँ चलेगा, मेरा साया साथ होगा”।

पहाड़क गीतक सन्दर्भमे १९७१ ई. क एकटा सांझ मोन पडैत अछि। काठमान्डौ सँ दूर उत्तर वालाजुउद्यानसँ उपर पहाडीपर English Language Trainning Institute द्वारा आयोजित वनभोज समारोह। नाच करैए ओ सव। कोन लड़का-कोन लड़की-नाचमे फर्क नहि वुझायत। निर्विकार। निर्विकार भऽ नाचत आ गाओत। मुदा एम्हर, अपना समाजमे लज्ज कलाके प्रस्फुटिता नहि होवऽ दैत छैक। गीत गओलक राममणि। सम्पूर्ण मण्डली अभिभूत आ मंत्रमुग्ध भऽ गेल। पहाडमे केवल निर्जीव पाथरे नहि होइत छैक। एकटा प्रशिक्षार्थी एकटा शिक्षिकाक आँखिसँ नोर झहड़ए लागल आ समस्त वातावरण जेना जड़ भऽ गेल।, ओ गीत एखनो कहियो काल हंमरा मन-प्राणके जेना आन्दोलित कऽ जाइत अछि “कोई जव तुम्हारा हृदय तोड़ दे .......... “ दुर्गम पहाडी गाममे एहनो गीत गाओल जाइत अछि- आ ओतुक्को लोक ओकर तात्पर्य बूझि विभोर भऽ जाइत अछि हमरा आश्चर्य लागि गेल।

ओइ दिन हम पहाडक आँखि नोरायल देखने रही। स्पस्ट। निस्सन्देह। हमरा जनैत सैकड़ौ-हजारो वर्ष पहिने, कोनो युगमे ओइ गीत सँ बहुत बेसी, कैएक गुना वेसी दर्द-भरल गीत सुनि पहाड जे करुण क्रन्दन केने हैत तकरे फलस्वरुप एतेकं नदी नालाक जन्म भेल हैत। बहुत सम्भव गायक स्वंय Adam छल होयत आ सुननिहार ओकर प्रेयसी Eve

राममणि शर्मा ओहि दिन सँ हमर अभिन्न भऽ गेल। ओकर आओर कतेक साथी सभक पता हमरा डायरीमे ओहिना पड़ल अछि। आव त डायरीक पन्न जीर्ण-शीर्ण भऽ पीयर भऽगेल अछि। आइए ३४ वर्षक वाद एकटा पत्र हम और लिखव, एखने लिखव .........।

 

 १ जनवरी ,’०५

 जनकपुरधाम

 

दिनेश भाइ,

 

नव वर्षक हार्दिक मंगलमय शुभकामना। आशा अछि लिफाफ पर हमरनाम पढलाक बाद हमरा चिन्हऽ मे एको क्षण देरी नहि लागल हैत। ओना किछु चौंकल जरुर होएब। से त स्वभाविके ..........। कोनो अपराध वोध नहि भऽ रहल अछि। एकटा प्रश्न पुछै छिय। जीवन एना जटिल किएक भेल जा रहल छैक ? कतेक वेर विचार करैत छलहुँ ............ आई लिखैछी, काल्हि पक्के लिखव .......... मुदा आई ....... जावत दुनूपत्र हम लिखि नहिलेव, तावत हमराअ चैन नहि ........... चैन नहि .............।

शान्ति सदन, ढुहवी-१

(धनुषा)

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'विदेह' २३१ म अंक ०१ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३१)

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