Monday, May 11, 2009

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी(नवम कड़ी)

आजु साँझ मे माँ के अरुणाचल जेबाक छैन्ह। हमरा खराप s लागि रहल अछि मुदा एहि बेर हम कानैत नहि छी। माँ बड उदास छैथ। एक s हमरे छोरय मे हुनका नीक नहि लागैत छलैन्ह, आब s बिन्नी के सेहो छोरय परि रहल छैन्ह।माँ बिन्नी के हमरा काका के कहला पर छोरि s जा रहल छथि। पन्द्रह दिन s बिन्नी के बुखार छलैन्ह ठीक s s गेलैन्ह मुदा बहुत कमजोर s गेल छथि। डॉक्टर हुनका s s ओतेक दूर जएबाक लेल मना s देने छथिन्ह बाबुजी के चिट्ठी आयल छलैन्ह हुनक मोन ख़राब छैन्ह। माँ के किछु नहि फ़ुराइत छलैन्ह जे की करथि। जखैन्ह हम कहलियैन्ह जे अहाँ जाऊ बिन्नी के रहय दियौन्ह s अरुणाचल जयबाक लेल तैयार s गेलीह।


निक्की बड ताली छथि हुनका कोनो काज काका वा दोसर किनको s करेबाक होयत छैन्ह s ततेक नय नाटक करय छथि जे लोग के सच बुझा जायत छैक हुनका काज करय लेल भेट जाइत छैन्ह। जखैन्ह s माँ के जेबाक चर्च शुरू भेलैक निक्की माँ सँग जेबाक लेल हल्ला करय लगलीह।काका कतबहु निक्की के बुझेबाक प्रयास केलैथ मुदा नहि मानलिह हुनकर नाटक के आगू सब के हुनकर बात मानय परलैन्ह। माँ निक्की के अपना सँग अरुणाचल s जएबाक लेल तैयार s गेलीह।


साँझ मे माँ सोनी, अन्नू, छोटू निक्की के s मुजफ्फरपुर चलि गेलीह। कहने रहथिन्ह जे मुजफ्फरपुर बस अड्डा आबि जेताह ओहि ठाम s माँ सब के अपन कॉलेज s जयताह माँ सब भरि दिन कॉलेजक गेस्ट हाउस मे रहि साँझ के अवध आसाम मेल पकरि s चलि जेतीह। माँ के गेलाक बाद s घर एकदम सुन s गेल छलैक। एहि बेर बहुत दिन माँ सँग रहल रहि से आओर खराप लागैत छल। राति मे काका बहुत उदास छलैथ, हुनका निक्की के बिना नीक नहि लागैत छलैन्ह।


आय रबि छैक हमरा कॉलेज नहि जएबाक छलs भरि दिन प्रयास मे रहि जे बिन्नी के असगर नहि छोरियैन्ह। बेर बेर हुनका दिस देखियैन्ह जे उदास s नहि छथि। एक s हमही छोट बिन्नी s हमरो s करीब नौ साल छोट छथि मुदा हमरा पकरि मे नहि आबय दैथ जे हुनका माँ के याद अबैत छैन्ह। दिन भरि काका सेहो बिन्नी लग बैसल रहथि हुनका हंसेबाक प्रयास करैत रहलाह। राति मे काका कहलाह काल्हि s अहाँक कॉलेज अछि अहाँ अपन समय पर चलि जायब।


सोम दिन हमर दू टा क्लास होयत छलs दुनु भोरे मे छल। हम कॉलेज जाय लगलहुं s बिन्नी के समझा बुझा देलियैन्ह मौसी रहबे करथि। हमर क्लास १० बजे तक छलs, क्लासक बाद हम घर जल्दी जल्दी पहुँच सीधा अपन कोठरी मे गेलहुँ कियाक s माँ के गेलाक बाद बिन्नी हमरे कोठरी मे हमरे सँग रहैत छलिह। जओं अपन कोठरी मे पहुँचति छी s बिन्नी दूनू गोटे बिछाओन पर बैसि s गप्प करैत हँसैत छलाह। हमरा देखैत देरी बिन्नी तुंरत कहय लगलीह, "दीदी निक्की बोमडिला(बोमडिला, अरुणाचल मे छैक) नहि गेलीह। ततेक नय नाटक केलिह जे ठाकुर जी s पहुँचाबय लेल आबय परलैन्ह"


साँझ मे काका बड खुश छलथि, निक्की आपस जे आबि गेल रहथि। दोसर दिन फेर मुजफ्फरपुर आपस चलि गेलाह।

6 comments:

  1. नवम कड़ीमे कथाक प्रवाह बरकरार अछि।
    धन्यवाद।

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  2. ee katha bachha sabh ke seho nik lago rahal achhi

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  3. Didi ,
    Vey nice and refreshing memories !!!!
    Binny

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  4. मनीष गौतम2:15 AM

    कथा रोचकतासँ आगाँ बढ़ि रहल अछि।

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  5. Rama jha11:57 PM

    निक्की बड ताली छथि हुनका कोनो काज काका स वा दोसर किनको सs करेबाक होयत छैन्ह तs ततेक नय नाटक करय छथि जे लोग के ओ सच बुझा जायत छैक आ हुनका ओ काज करय लेल भेट जाइत छैन्ह। जखैन्ह सs माँ के जेबाक चर्च शुरू भेलैक निक्की माँ सँग जेबाक लेल हल्ला करय लगलीह।काका कतबहु निक्की के बुझेबाक प्रयास केलैथ मुदा ओ नहि मानलिह आ हुनकर नाटक के आगू सब के हुनकर बात मानय परलैन्ह। माँ निक्की के अपना सँग अरुणाचल लs जएबाक लेल तैयार भs गेलीह।

    bad nik lagal ghatnak varnan,
    nikki bad tali chhathi!

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  6. एहि बेरक अंश सेहो पुरान लयमे नीक।

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'विदेह' २३२ म अंक १५ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३२)

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