Friday, May 08, 2009

शीतल झा

शीतल झा

जनकपुर, नेपाल

विधानसभा, संघीय संरचना आ मिथिला राज्‍यक औचित्‍य


हिमालय पर्वत श्रृडखला करिब मध्य भागमे चीनक तिब्बतसँ दक्षिण, भारतक बिहार उत्तर प्रदेशसँ उत्तर पूर्व तथा पश्चिम बंगालसँ पश्चिम एकटा आयताकार देश नेपाल अछि२४० वर्षपूर्व गोराखक एकटा लडाकू राजा पृथ्वीनारायण शाह हिंसक बलसँ दक्षिणपूर्व पश्चिमक देशसभपर आक्रमण करैत गेल सुन्दर उपत्यका काठमाण्डूसहित एकटा नमहर देश बनौलकएकर सीमा दक्षिणमे कतऽ धरि रहैक, तकर आधिकारिक रुपसँ कतहु उल्ल्ेख नहि अछिखस शासकद्वारा शासित गोरखा राज्यक दमनपूर्ण विस्ताकरक वाद एकर नाम कहिया नेपाल रहल से निर्णायक प्रमाण नहि भेटैछ। दक्षिणमे मिथिला आ अवधसन ऐतिहासिक गणराज्यपर सेहो ई हिंसापूर्ण ढंगसँ षडयन्त्रपूर्वक आक्रमण कएलक। एहि क्रममे व्रिटिशकालीन भारतकद्वारा प्रतिरोध आ युद्ध कएल गेलाक वाद १८१६ क सुगौली सन्धिसँ ई वर्तमान सीमाङ्कित देश, बनल जाहिमे १८६० क सन्धिसँ दानस्वरुप प्राप्त पश्चिमक ४ जिलासँ एकर वर्तमान स्वरुप निर्धारित भेल।

ड्ड देशक राजनीतिक शासन व्यवस्था राजतन्त्रात्मक छैक आ एकर राज्यसंरचना एकात्मक। एकर शासकीय प्रवृति निरंकुशात्मक छैक आ सामाजिक आर्थिक व्यवस्था सामन्ती छैक।

ड्ड एकर सामाजिक मानवशास्त्रीय संरचना ९क्यअष्य(बलतजचयउययिनष्अब िक्तचगअतगचभ० मंगोलाइड केकेशियन प्रजातिसँ बनल अछि, जाहिमे निग्रोवाइड आ एस्टोल्वाइड प्रजाति सेहो अल्प संख्यामे बसल अछि। कैकेरियनक आर्य शाखा तँ मुख्य रहैत अछि।

ड्ड हिमालय क्षेत्र आ पहाड क्षेत्रमे लिम्बु, राई, तामाङ, नेवार, मगर, गुरुङ, शेर्पा जाति तथा जनजातिक वास छैक तँ दक्षिणक समतल मैदानी भूभाग तराइृमे आर्यमूलक जाति जनजातिसभक वास छैक। दुनू क्षेत्रमे पिछड़ल जनजाति, आदिवासीसभक वास सेहो छैक, जाहिमे मिश्रित मूलक संख्या उल्लेखनीय छैक।

मूख्यतः कर्णाली प्रदेशक आर्य मूलक खस जातिक गोरखा राज्य वर्तमान सम्पूर्ण नेपालपर शासन करैत अछि। तँ ई राजनीतिक, प्रशासनिक, न्यायिक प्रभाव विस्तारक क्रमे प्रत्येक जातीय क्षेत्रमे प्रवेश कऽ सामाजिक, भाषिक, जातीय संरचनाकँ तोडमडोर कऽ देने छैक आ नेपालकँ कथित रुपँ राष्ट्र कहि प्रस्तुत करैत छैक। वस्तुतः सामाजिक विकासक अध्ययनमे देखल जाए तँ नेपाल एकटा नहि, विभिन्न राष्ट्रसँ बनल एक देश अछि, जतऽ एक्कहिटा खस जातिक एकल राज्यशासन छैक।

२. मिथिला

नेपालक दक्षिणी समतल भूभागकेँ तराई अथवा मधेश कहल जाइत छैक। एतऽ अवध आ मिथिलासन पौराणिक महिमामण्डित ऐतिहासिक समृद्धताप्राप्त गणराज्य छल, जकरा मुगल व्रिटिश शासन दमन करैत गेल आ अन्ततः शाहवंशीय राजाक सङ्ग वाँटि लेलक। १८१६ क सन्धि मिथिलाकेँ खण्डित कएलक। जाहि मिथिलाक सीमा कोशीसँ पश्चिम, गण्डकसँ पूर्व, गंगासँ उत्तर आ हिमालसँ दक्षिण छलैक, तकर आइ इतिहास छैक, भूगोल नहि छैक। जेँ कि एकर भाषा, संस्कृति, जीवित छैक तेँ बाटलबाँटल शरीरक आधारपर कहि सकैत छीसिमरौनगढ़सँ पूर्व, झापासँ पश्चिम आ महाभारत महाड़सँ उत्तर मिथिला जीवित अछिअहिल्याजकाँ जीर्णोद्धारक प्रतीक्षामे अछि, उद्धारक बाट जोहि रहल अछि।

३. संविधान

देशमे शासन व्यवस्था कायम करबाक लेल बनाओल गेल मूल कानूनकँ संविधान कहल जाइत छैक। सभ कानून, ऐन, नियम एकरे सीमाक भीतर रहि बनाओल जाइत छैक। लोकतन्त्रक मुख्य आधार आ एकटा प्रमाण संविधान होइत छैक।

नेपालमे २००४ सालमे पहिलबेर कोनो संविधान नामक चीज प्रस्तुत भेल रहैक। ओना ताहिसँ पूर्व १९१० मे एकटा ऐन सेहो बनल रहैक। तत्पश्चात २००७ सालमे अन्तरिम शासन विधान आ २०१५ सालमे नेपाल अधिराज्यक संविधान आएल। २०१५ सालक संविधान एकदलीय पञ्चायती व्यवस्था देलक आ तकर अन्त्य २०४६ सालक आन्दोलन कएलक। २०४७ सालमे एकटा अन्तरिम सरकार बनाकऽ तकराद्वारा नेपाल अधिराज्यक संविधान २०४७ लागू कएल गेल। ई सभ संविधान राजतन्त्रात्मक एकात्मक, एकात्मक अछि आ राज्य सत्तापर, राज्यपर, प्रशासनपर एक धर्म, एक भाषा, एक जातिकेँ प्रमुखता आ अधिकारक मान्यता देने छल। राजाद्वारा प्रदत्त ओ संविधानसभ राजाक अधिकारकेँ सर्वोपरि मानैत आएल छल। मुदा ०६२÷०६३ मे भेल जनआन्दोलन भाग२ सँ ई मान्यता ढहैत गेल आ एखन देश संविधानसभाद्वारा अर्थात जनताक प्रतिनिधिद्वारा निर्मित संविधानक निर्माण करत।


४. संविधानसभा

संविधान बनएबाक लेल जनताद्वारा चुनल प्रतिनिधिसभक समूह एवं सभाकेँ संविधानसभा कहल जाइत छैक। सार्वभौमसत्ता सम्पन्न जनता अपनाकेँ अनुशासित आ शासित रहबाक लेल जाहि तरहक शासनव्यवस्थाकेँ चलएबाक लेल अपने पठाओल प्रतिनिधि द्वारा कानूनक ग्रन्थ तैयार करबाबैक आ घोषणा करबबैक, ताहि जनप्रतिनिधिमूलक सभाकेँ संविधानसभा कहैत छैक।

५. संविधानसभाक अनुभव

(क) उत्तर अमेरिका ः ब्रिटेनद्वारा शासित अमेरिकाक १३ राज्य स्वतन्त्र भेलापर ५५ सदस्यीय संविधानसभा निर्माण कऽ तकर अनुमोदन अमेरिकी जनतासँ करबाकऽ अप्रिल ३०, १९८९ मे घोषणा कएलक।

(ख) फ्रान्स ः अपनहि देशक सामन्ती नायक सम्राट सोलहम लुइक विरुद्ध संविधानसभा वना १७९१ मे लागू कएलक।

(ग) रुस ः १९१८ मे संविधानसभा तँ बनल मुदा संविधान लागू नहि भऽ सकल।

(घ) भारत ः ब्रिटिस शासनसँ मुक्तिक लेल ३८९ सदस्यीय संविधानसभा बनल मुदा पाकिस्तानक विभाजनक बाद रहल २९९ सदस्यीय सभाद्वारा आ डा.राजेन्द्र प्रसादद्वारा ई घोषित भेल।

(ङ) दक्षिण अफ्रिका ः गोर आ कारीक बीच भेल संघर्ष संविधानसभाक मार्फत अन्त्य भेल। सर्वपक्षीय सम्मेलनमार्फत ४९० सदस्यीय संविधानसभाक निर्माण भेल आ संविधान बना जनअनुमोदन कराओल गेल आ घोषणा कएल गेल।

विभिन्न देशक अनुभवक आधारपर नेपालमे बननिहार संविधानसभामे निम्न तरहक विशेषता होएब वाञ्छनीय रहितैक

(क) जनसंख्याक अनुपातमे निर्वाचन क्षेत्र निर्धारण कएल जाइक आ प्रत्येक जाति, जनजाति, अल्पसंख्यक, दलित, महिला, मधेशीक ओहि अनुपातमे क्षेत्र आरक्षित कऽ प्रत्‍यक्ष निर्वाचनसँ जनप्रतिनिधिक पठा संविधानसभाक निर्माण कएल जइतैक।

(ख) अन्तरिम संसदसँ संविधान मसौदा तैयार कऽकऽ ओकरा जनमतसंग्रहद्वारा निर्माण कएल जइतैक, मुदा प्रत्यक्ष मतादान वा समानुपातिक प्रणाली दुनू कायम कएल गेलैक। एहिसँ अल्‍पविकसित देशक जनतामे भ्रम आ अनावश्यक गड़बड़ी उत्पन्न मऽ सकैत छैक।

आब पूर्ण समानुपातिक प्रणाली बहुतो राष्ट्रिय दलक संगहि प्रत्येक जातीय, जनजातीय, क्षेत्रीय समूहकसभक सेहो मांग रहलाक कारण ओकरे लागू कएनाइ सार्थक संविधानसभाक आधार तैयार कऽ सकैत अछि।

६. समावेशीकरण तथा समानुपातिक समावेशीकरण

सत्ताक स्वरुप, शासन, प्रशासनमे देशक प्रत्येंक जाति, जनजाति, अःल्पसंखयक जाति, विभिन्न भाषिक समूह, सांस्कृतिक समूह, आदिवासी, महिला, क्षेत्र आदि सभक प्रवेश नहि भेल तँ शासन पद्धति जनासँ दूर रहि जाइत अछि आ ताहूमे लोकतन्त्र तें मात्र कथित सभ्रान्त वर्गक खास जातिक हाथक दमनक माध्यम बनि जाइत अछि। तेँ जातीय, भाषिक संख्याक समानुपातिक समावेशीकरणसँ मात्र लोकतान्त्रिक शासन पद्धति मजबूत आ दीर्घजीवी भऽ सकैत अछि।

(क) जनसंख्याक समानुपातिक निर्वाचन क्षेत्र निर्धारण कऽ ओहि क्षेत्रसँ ओहि ठामक मूल जाति, भाषाभाषीक मात्र प्रतिनिधित्व कराओल जाए।

(ख) जनसंख्याक समानुपातिक रुपमे सरकारक प्रत्येक अंगमे अथवा न्यूनाधिक रुपमें सभ क्षेत्र, वर्ग, जाति, लिगंक उपस्थित कराओल जाए।

(ग) सुरक्षा, प्रहरी, प्रशासन, राजनीति, राजनीतिक संस्था प्रत्येकमे समानुुपातिक रूपमे प्रवेश कराओल जाए वा न्यूनाधिक रुपमे प्रारम्भ कराओल जाए आ किछु जातिक लेल प्रारम्भमे आरक्षित कएल जाए।

एहि तरहेँ देखलापर आगामी शासन पद्धति समानुपातिक होएबाक लेल संविधानसभा समानुपातिक भेनाइ आवश्यक अछि आ तकरा लेल अन्तरिम संसद आ अन्तरिम सरकार, निर्वाचन आयोगकँ सेहो समानुपातिक भेनाई आवश्यक अछि आ एहि तरहक सुरक्षाक व्यवस्था कएनाइ सेहो आवश्यक अछि।

७. एहि तरहँ वनल संविधानसभा नेपालक नव राज्य संरचना कऽ सकैत अछि आ संघीय संरचनादिस लऽ जा सकैत अछि

(क) राज्य (प्रान्त, प्रदेश) ः भाषा, संस्कृति, जाति, धर्म आदिक आधारपर बनल अथवा बनाओल राजनीतिक, आर्थिक, प्रशासनिक अधिकारसम्पन्न राजनीतिक भूक्षेत्रकँ राज्य कहैत छैक।

(ख) संघ एहन, राज्य सभस वनल राजनीतिक शक्ति सम्पन्न केन्द्रीय सत्ता के संध कहै छ। आंशिक सार्वभौमिकता, स्वतन्त्रता, आत्म निर्णयक अधिकार प्राप्त सभ मिल क सार्वभौम सत्ता केन्द्रके प्रदान करैछ आ एहि राज्य संरचना के संघीय संरचना कहल जाइत अछि।

८. नेपाल संघीय होएबाक आवश्यक अछि कारण ः

(क) नेपाल विभिन्न प्रजाति, जाति, जनजाति, धर्म, भाषा, संस्कृति के देश छै। एहि सभ के देशक मूलधारमे लएवाक लेल।

(ख) लोकतान्त्रिक व्यवस्थाके समानुपातिक समावेशीकृत करबाक लेल।

(ग) संघीय सरकार आ राज्य सरकार भेला स प्रत्येक नागरिक अपन योग्यता व्यवस्था अनुकूल उपयोग करबाक लेल।

(घ) राज्य भीतर अनेक प्रशासनिक न्यायिक निकाय विकेन्द्रित विकाश राज्य क्षेत्रक कार्य सम्पादन ओहि राज्यक जनताके निर्णय अनुसार हौइछै।

(ङ) ओहि राज्यक भीतरक प्राकृतिक सम्पदा जल, जमीन, जंगल खनिज पदार्थ पर ओहि राज्यक जनताक अधिकार होइछ, ओकर अधिकतम प्रयोग ओतहिक जनता करैछ।

(च) उदयोग आदि विकास कार्य पर राज्यक नियन्त्रण रहैछ आ ताहि के लेल अन्य राज्य स, विदेश स सम्बन्ध स्थापित क सकैअ।

(छ) ओहि राज्यक प्रमुख भाषा प्रशासन, न्यायिक क्षेत्र आदि मे निर्वाध रुपमेँ प्रयोग क सकैत अछि जहि स राज्यक जनता सामाजिक न्याय, मानवीय विकास स वंचित नहि भ सकैत अछि।

(ज) अपन मातृभाषा, स्वत ः कायम भेल सम्पर्क भाषा, ग्रहित शिक्षाक भाषाक सुविधा भेला सँ प्रशासनिक, शैक्षिक वैदशिक सुरक्षा सेवा आदि मे नीक संख्या मे राज्यक युवा, शिक्षित वर्ग प्रवेश होएत।

(झ) कोनो खास प्रजातिक, राष्ट्रक, जातिक, जनजातिक, भाषाभाषिक, धार्मिक, सांस्कृतिक समुदायक इतिहास, संस्कृति, भाषा, भेष, कला , साहित्य, परम्परा केँ सरक्षण आ सम्बर्धन कए पहिचान के सुनिश्चत आ सुरक्षित करबाक लेल।

(ञ) कोनो प्रजातीय, जातीय, धार्मिक, भाषिक समुदाय के दोसर वर्ग स शोषण दमन स मुक्ति के लेल।

(ट) पृथकवादी आन्दोलन के रोकवाक लेल।

(ठ) एकात्मक राज्य व्यवस्था परुर्ण रुप स असफल भगेल अछि। तै संघीय संरचना आवश्यक अछि।

९. संघीय संरचनाक आधार ः

संघक भीतर राज्यक संरचना क आधार निम्न होइछ

(क) ऐतिहासिक रुप स निर्मित राष्ट्र (.....जाति ) के आधारपर

(ख) प्रकृतिक रुपसँ निर्मित भूखण्डकेँ आधार पर।

(ग) जातीय वाहुल्यता के आधारपर

(घ) धर्म अथवा धार्मिक सम्प्रदायक आधार पर

(ङ) संस्कृतिके आधार पर अथवा सांस्कृतिक सामीप्‍यताक के आधार पर।

(च) भाषा क आधार पर

(छ) प्रकृतिक सम्पदाक आवण्टनके आधार पर।

(ज) विकसित नया अवस्था, सोचक, आधारपर।

१०. एहि आधारसभ के देखैत आ नेपालमेँ चलैत जातीय आन्दोलन सभ केँदेखैत आ ओकर मांग सभ केँ देखैत नेपालकेँ निम्न संघीय राज्यमे विभाजित कएनाई आवश्यक छै ः

(क) लिम्बुवान किरांत राज्य

(ख) खुम्बुवान

(ग) नेवा राज्य नेवार राज्य

(घ) तामाङ साम्बलिंग

(ङ) तमुवान गुरुङ राज्य

(च) मगरात मगर राज्य

(छ) खसान खस राज्य

(ज) थरुहट थारु राज्य

(झ) अवध अवधी राज्य

(ञ) भोजपुरी भोजपुरी

(ट) मिथिला मिथिला (विदेह)

संघीय विधाजनक लेल नया, तथ्यपूर्ण जनगणना आवश्यक अछि, आ ऐतिहासिक रुप स वसल जाति के सामूहिक निर्णय के आधारपर राज्यक नामकरण कएनाई आवश्यक अछि।

सम्पूर्ण नेपाल मे खस जातिक मिश्रित अवस्था भेलो स कोनो जातीय क्षेत्रक इतिहास आ ओकर भावना नहिं मेटाएल अछि।

११. मिथिला संघीय संरचनामे मिथिला राज्य किएक चाही ः

(क) मिथिला प्राग्ऐतिहासिक भूमि अछि आ पुराणवर्णित देश अछि।

(ख) मिथिला आर्यजातिक आधार क्षेत्र आ आर्य संस्कृतिक निर्माण भूमि अछि।

(ग) कोशी गण्डक, गंगा, हिमालय के विचमेँ स्थित ई भूमि निश्चित भूखण्ड प्राप्त कएने अछि।

(घ) ऐतिहासिक कालखण्डमे एकरापर अनेक आक्रमण होइतोमे ई आर्य जातिक वाहुल्यताक क्षेत्र छै।

(ङ) एकर अपन वहुत समृद्ध संस्कृति छै।

(च) एकर भाषा हजारौं वर्ष पूर्वक इतिहास देखवैत अछि आ वहुत समृद्ध अछि।

(छ) मिथिला गणराज्यक इतिहासक साक्ष्य अछि।

(ज) एकर खास आर्थिक जीवन प्रणाली छैक।

(झ) सामुहिक, देवी देवता स ल पारिवारिक देवता प्रति आस्थाक संस्कार छै।

(ञ) मिथिलामे अखनो लोक निर्मित, नियम कानून छै समग्रमेँ मिथिला के एकटा सझिया मनोभावना छैक जाहिस ई एकटा राष्ट्र छै आ एकरा संघीय संरचनामे राज्य होएबाक पूर्ण नैसर्गिक अधिकार छै।

(क) मिथिलाक सम जातीके, राजनीतिमे, प्रशासनमे समानुपातिक उपस्थिति के लेल।

(ख) उद्योग, कृषि, पर्यटन, जंगल, जल सभ स अधिकतम् लाभ, लेबाक लेल।

(ग) नदी नियन्त्रण, सिंचाई सडक वाँध, विद्युत आदि के लेल संघीय सरकार स आ विदेश स सम्बन्ध स्थापित कए मिथिला वासी के उत्थान लेल।

(घ) मिथिला स उठाओल कर ... के उचित व्यवस्थापन कए राज्यक द्रुत विकाश लेल।

(ङ) मिथिलामे प्रयोग होइत सभ भाषा मे सरकारी तथा गैर सरकारी कार्यालय सभमे कामकाज करवाक लेल।

(च) सरकारी सेवामे कामकाज करबाक अवसर के लेल। अर्थात वेरोजगारी समस्या समाधानमे सहयोग करवाक लेल।

(छ) मिथिलाक पावनि तिहार मे छुट्टी पएवाक लेल।

(ज) मिथिलाक दलित, उत्पीडित, पिछडल वर्ग, जनजाति आदिवासी, महिला, अल्प संख्यक कँ लेल विशेष अवसर के लेल।

(झ) मिथिलाक लोकगाथा (सहलेश, लोरिक) लोकनृत्य लोकधुन लोककला, लोकगीत, लोकनाट्य आदि के रक्षा आ प्रचार प्रसारक लेल।

(ञ) पौराणिक मिथिलाक राजधानी जनकपुर सहित मिथिलाक एक खण्ड, एकर लिपि, साहित्य भाषा, संस्कृति जीवन शैली सभ जीवित अछि तै रक्षाक लेल आ विश्वस्तर मे एकर सभ्यताके, विशेषताके फैलावक लेल।

(ट) नेपाल मे भेल कोनो लोकतान्त्रिक आन्दोलन, जातीय मुक्ति के आन्दोलनमे मिथिलाके अग्र, उग्र भूमिका रहलैक, सपूत वलिदान देल कै तै संघीयता के लेल अधिक रक्त श्राव रोकवाक लेल।

१२. मिथिला राज्यक सीमा ः

(क) प्राचीन, मिथिलाक सीमा छलैक उत्तरमे हिमालय, दक्षिणमे गंगा, पूर्वमे कोशी, पश्चिम मे गंडक। ई मिथिला १८१६ क सुगौली सन्धि पश्चात् खंडित भेल। अखन एकर जीवित भूगोल पर जीवित इतिहास छै, जीवित लिपि भाषा, जीवित संस्कृति जीवन्त जिवन शैली, जीवन्त मनोभावनाक अधिकार अनुसार सीम्रौन गढ स पूर्व, झापा स पश्चिम महाभारत पर्वत श्रृंखला स दक्षिण आ नेपाल भारत वीचक सीमा स उत्तर मिथिला छैक, आ मिथिला राज्य होएबाक चाहि।

(ख) झापा मधेश मे रहितो मे एत सतार, राजवंशी जनजातिक बसोवास छैक, आ ओकर अपन इतिहास, संस्कृति, मांग आ संघर्ष छै तै ओतए, नव आगन्तुक खस भाषी के छोडि ओकर सभके आत्म निर्णयके अधिकार अनुसार मिथिलामेँ समाहित कएल जाए अथवा स्वायत्तता देल जाए।

(ग) वारा, पर्सा भोजपुरी भाषाक क्षेत्र छै। मैथिली भाषा स फरक छै परन्तु एकर संस्कृति, आर्थिक जीवन मिथिला के समान छै। खसवादी सत्ताके दृष्टिकोण व्यवहार एकरो प्रति ओहने छै तै एकरो आत्मनिर्णय के आधारपर मिथिला मे समाहित कएल जाए अथवा स्वायत्तता देल जाए।

१३. मधेश आ मिथिला ः

(क) मेची स महाकाली तकके सम्पूर्ण समतल मूमि मधेश एकहि सत्तास दमित अछि, दलित अछि, उत्पीडित अछि, प्रताडित अछि, उपेक्षित अछि। सम्पूर्ण मधेशी एकहि मनोविज्ञान एकहि मनोदशा लक जीवित अछि। एकरा प्रतिक शोषणक स्वरुप समान छैक तै तकर संघर्षक निशाना एकहिटा भाषीक वर्ग छै।

(ख) खस प्रभुत्ववादी सत्ता, मैथिली , भोजपुरी अविधि कहिक उपेक्षा, अवहेलना नहि करे छै समष्टिमे मात्र मधेशी कहै छै।

(ग) थारु जातिके खस शासक पहाडी नहि बुझै छै आ थारु अपना के मधेशी बुझ स भय महसुस करै छै। तथापी ओ संघीयता के संघर्षमे प्रमुख शक्ति भए सकैतधै छै। आ इएह सोच स मधेशमे वसल प्रत्येक जनजाति, द्रोणवार, सतार राजवंशी, झागड सभके देखनाइ आवश्यक छै आ ओकरा सबके एहि संघर्षमे स्थापित कएनाई आवश्यक छै।

(घ) मधेशक आन्दोलन खस सत्ता के विरुद्ध राजनीतिक आन्दोलन छै आ मिथिलाक आन्दोलन माथिक, सांस्कृतिक, जातीय आन्दोलन निहित राजनीतिक आन्‍दोलन छै तै संघीयता के आन्दोलन के अन्तरवस्तु लेने छै।

(ङ) मधेश आन्दोलन केन्द्र स्थल मिथिला क्षेत्र रहैत अछि आ मानव अधिकार राजनीतिक अधिकार प्राप्तिके आन्दोलन के केन्द्र सेहो मिथिला क्षेत्र रहैत अछि। तै मधेश आन्दोलन के मिथिला आन्दोलन स जोडनाई आ मिथिला आन्दोलन के मधेश आन्दोलन के रुपमेँ विकसित कएनाई रणनीतिक सोच राखव आवश्यक छै।

१४. मिथिला आ गणतन्त्र ः

मिथिला राज्यक लेल अथवा मिथिलाक मुक्तिके लेल नेपालमे संघीय शासन आवश्यक शर्त छै। संघीय शासन के लेल गणतन्त्र आ लोकतन्त्र आवश्यक शर्त छै आ अन्ततः लोकतन्त्र के स्थापनाके लेल, एकर सशक्तता के लेल, एकर दीर्घायु के लेल गणतन्त्र आवश्यक छै।

१. गणतन्त्र जन्मक आधारपर विशेषाधिकार सहित शासक विना के शासन पद्धति सत्ताक स्वरुप के गणतन्त्र कहैत छै। सार्वभौमिक जनता जनप्रतिनिधि द्वारा राष्ट्र प्रमुख निर्माणक पद्धति के गणतन्त्र कहैत छैक अर्थात् राजा विना के शासन पद्धति।

२. नेपाल गणतन्त्रात्मक देश होएबाक चाही कारण ?

(क) कथित एकिकरण वलातु सैनिक वल स हिंसा द्वारा भेल छै।

(ख) राजतन्त्रक मूल चरित्र निरंकुश, निर्मम, अत्याचारी होइत आएल छै।

(ग) सत्तामे ,सेनामे, प्रशासनमे, न्‍यायालय दमनकारी नीति स पकड वना क आम वर्ग केँ निर्मम शोषण दमन करैत छै।

(घ) कोनो प्रकारक, नया सोच, वैज्ञानिक चिन्तन जनअधिकार आ प्रगति विरोधि भेनाई राजतन्त्रक मूल ऐतिहासिक चिन्तन आ चरित्र छै।

(ङ) एक देशएक राज्य, एक राज्य एक राष्ट्र, एक राष्ट्र एक जाति, एक जाति एक धर्म, एक धर्म एक संस्कृति, एक संस्कृतिएक भाषा, एक भाषा एक भेष आदि प्रकारक निरंकुश एकात्मक नीति लैत आएक छै।

(च) लोकतन्त्रके स्‍थायीत्‍व, मानवअधिकारक वहाली, कानूनी राज्यक स्थापना स्वतन्त्र, न्यायपालिका के लेले राजतन्त्र उच्छेदन आवश्यक छै।

(छ) जनताके बलीदानी संघर्ष स आएल लोकतन्त्र के साथ सदा घोर षडयन्त्र करैत आएल छै।

(ज) निम्न जाति आ वर्ग के सत्तासँ दुर राखि दानवीय व्यवहार कएनाई के दैविक अधिकार बुझै छै।

(झ) कोनो प्रजाति जाति , जनजाति, भाषाभाषी के पहिचान के दमन करैत आएल छै आ दमन मे सेना, प्रशासन, अदालत, मातृहन्त केँ प्रयोग करैत आएल छै।

(ञ) मधेशी के सदा विदेशी सावित करै मे व्यस्थ रहै त आएल छै।

(ट) मिथिला के साथ वहुत वडका धोखा, षडयन्त्र, गद्दारी करैत आएल छै, जहन मिथिलाक सेना स सहयोग ल क भंग कए देने छै।

(ठ) जातीय अधिकार के सुनिश्चित, सुरक्षित रखवाक लेल आवश्यक संघीय संरचनाके स्थापनाक लेल गणतन्त्र आवश्यक छै।

१५. सघीयता आ वर्गीय आन्दोलन ः

किछु राजनीतिक आ बौधिक वर्गमे भ्रम रहैंछ आ भ्रम श्रृजना करैछ जे संघीय आन्दोलन वर्गीय आन्दोलनकेँ कमजोर करैत छै आ संघीय आन्दोलन जातीय सम्प्रदायिक सद्भाव के दूषित छै। मुदा ई भ्रम मात्र अछि। शोषण के स्वरुप आ गति जतेक स्पष्ट आ तीब्र होइछ आ वर्गीय आन्दोलन के गुण लैत जाइत अछि आ सम्पन्न वर्ग आ सभ्य जाति के भितर निर्मित शोषण आ शोषितक चरित्र लबैत अछि त ओ मात्र अधिकार आन्दोलन नहिं, जाति, क्षेत्र हितक आन्दोलन मात्र नहिं मानव विकाशके क्रम मे भेल वर्गीय आन्दोलन अछि। (आ कोनो वर्गीय आन्दोलनकारी के संघीय आन्दोलनके समर्थन करबाक चाही) मिथिला आन्दोलन सेहो वर्गीय आन्दोलन अछि जतए एकटा राष्ट्र, समृद्ध संस्कृति, भाषा, साहित्य, शोषण आ दमनके शिकार अछि।

१६. मिथिला आ जातीय आन्दोलन ः

जाति स्वरुप, चरित्र, इतिहास, आ ओहि जातिपर होइत शोषण दमके मात्रा, जातीय आन्दोलनके दिशा र स्वरुप निर्धारण करैछ। (सामाजिक संरचनाके भित्ररके विभिन्न जातिकै तह, हिन्दु धर्माबलम्बीके विभिन्न जातपर होइत भेदभाव, आ शोषण सेहो आन्दोलन के समय आ स्वरुप निर्धारण करैछ। तथापि छोट आ सामयिक अन्तर विरोध एकर मुख्य आन्दोलन के असर नहिं क सकैछ आ प्रधान अन्तर विरोध के समाधान मात्र ओहि अन्तर विरोध के समाधान क सकैछ। मिथिलाके भित्तरकेँ विभिन्न द्वन्द्व मुख्य द्वन्द्व के समाधान कर में आएल वाधा राजनीतिक वैचारिक आन्दोलन के मार्फत मात्र अन्त्य कएल जाए सकैछ।

१७. मिथिला आ जनजातीय आन्दोलनः

जनजाति स्वतः शोषित दमित आ अविकसित होइत अछि। ओकरा पर सदियौं स शोषण भ रहल अछि। मुदा आब ओहो अपना अधिकार के लेल अनवरत संघर्ष क रहल अछि। नेपालमेँ जनजाति कोनो विकसित आ कोनो अविकसित अछि। दुनु के स्वायत्तता चाही। किछु जनजाति सैनिक प्रहरी सेना स जुडल अछि। मुदा अधिकारस वंचित। ओ पहाड मे आ मे आ मधेश मे सेहो अछि। मधेशक आन्दोलन दुनु के अधिकारके लेल कएल संघर्ष मे सहयोग कएलक अछि। मिथिला क्षेत्र मे जे जनजाति अछि तकरा मिथिला राज्य समानुपाति अधिकारस वंचित नहिं करत से ओकरा विश्वास नहिं भैरहल छै आ पहाडके जनजाति स मिथिला तथा मधेश आन्दोलन के निक जकाँ नहिं जोडल जा रहल अछि। दुनु ठामक जनजाति के विश्वास मे लेनाई आवश्यक अछि।

१८. मधेश, मिथिला आ थारु आन्दोलनः

जनजाति में थारु क संख्या वेसी छै आ मात्र मधेश में लगभग पूर्व स पश्चिम तक अधिकांश जिल्लामें। ई जाति अलग पहिचानक जाति छै क एकर अपन भाषा आ किछु संस्कृति अलग छै। जाहि क्षेत्र में स्थित छै ताहि ठामक भाषा स जुडल छै। शारिरिक बनौट मंगलाइड सन छै मुदा सांस्कृतिक सम्बन्ध मधेश के साथ जुडल छै। ई स्वतन्त्र आन्दोलन नहिं क सकैअ आ मधेशी आन्दोलन स जुड स डराइछै। मधेशी आन्दोलन के अंगा खस सत्ता एकरा प्रयोग करै छै। कहिओ आ कोनो आन्दोलन के विरुद्ध में उतारि दैत छै। वहुत सज्जन जनजाति भेला के कारण ई आसानी स ओहि षडयन्त्र में फंसि जायत छै आ मधेश आ मधेशी कें विरुद्धमे ठाढ भ जाइत छै। एकरा जनजाति आन्दोलन स नीक जकाँ जोडनाई वहुत जरुरी छै, तहन एकरा मिथिला आन्दोलन में समानुपाति अधिकार आ समानुपाति अधिकार क्षेत्र के लेल विश्वास में ल एकर विश्वास प्राप्त केनाई आवश्यक छै।

१९. नेपालक मिथिला आ भारतक मिथिला ः

सुगौली सन्धि मिथिला के दु खण्डमें त वांटि देलक, मुदा राजनीतिक सीमा स मिथिलाक भाषा, संस्कृति साहित्यक सम्बन्ध नहि तोडि सकल। आई दुनु देशमें मिथिला राज्यक मांग उठि रहन छै। अइस हुनु देशक शासक वर्ग के किछु भय भरहल छै। दुनु देशक मिथिला आन्दोलन के भावनात्मक सम्बन्ध छै आ दुनु के नैतिक समर्थन छै जे नैसर्गिक छै। दुनु राजनीतिक स्वतन्त्रता कायम राखए चाहैछै, दुनु अखण्डता के सम्मान करै छै। ई वात दुनु देशक सत्ता के वुझक चाही आ हमरा सभ के कर्तव्य जे दुनु सत्ताके बुझा देवक चाही। संघीय संरचनामें दुनु मिथिला अलग अलग राज्याधिकार चाहेछै, जेना वंगाल, पंजाव इत्यादि वंगला देशकें आ पाकिस्तान में सेहो छै।

२०. आत्म निर्णय के अधिकार आ मिथिला ः

व्यक्तिगत, जातिगत क्षेत्रगत, राष्ट्रगत रुपमें स्वतन्त्र पहिचानकें साथ राजनीतिक प्रशासनिक निर्णय के अधिकार आत्मनिर्णय के अधिकार अछि। आर्थिक जीवन अपने शैली में संचालन केनाई आत्मनिर्णय के अधिकार क्षेत्र छै, अनुशासित स्वतन्त्रता के अधिकार आत्मनिर्णय के अधिकारके मूल मर्म छै। कोनो व्यक्ति दोसर व्यक्ति पर, कोनो जाति दोसर जाति पर कोनो राष्ट्र दोसर राष्ट्र पर अनाधिकार के प्रयोग कएनाई के पूर्ण नियन्त्रण आत्मनिर्णयक अधिकार कै। क्षेत्रीय, जातीय, राष्ट्रिय दमन, शोषण, शासन, प्रशासन स मुक्ति के अधिकार मात्र आत्म निर्णय के आत्म निर्णायक अधिकार छै।

मिथिला एकटा स्वतन्त्र ऐतिहासिक राष्ट्र छलै तै एकरा आत्मनिर्णय के अधिकार छै, जे राजनीतिक सीमा मे प्रशासनिक शासकीय दमन स मुक्त होएक।

२१. मिथिला आ जातीय स्वायत्तता ः

सीमित राजनीतिक आर्थिक अधिकार सहित के खास क्षेत्र में खास जाति अर्थात राष्ट्र के प्रादेशिक शासन के जातीय स्वायत्तता कहल जाइछै। ई आत्म निर्णय के अधिकार के अर्ध तथा नियन्त्रित प्रयोग छै। आत्म निर्णय के अधिकार के स्वायत्तता में घेर देनाई आ स्वायत्ततताके जातिगत रुपमें प्रयोग केनाई अव्यवहारिक छै खासक मिश्रित सामाजिक संरचनाके देशमें आ क्षेत्रमें। मिथिला संघीय संरचनामे पूर्ण राज्यधिकार प्रयोग करए चाहैत अछि कोनो केन्द्रीय सत्ता स निर्धारण कएल सीमित अधिकार सहित कें कथित स्वायत्तता नहिं।

२२. मिथिला आ दलित आन्दोलन ः

ई हरेक दमन आ उत्पीडन स मूक्ति के युग छै। राजनीतिक आर्थिक शोषण मात्र नहिं, सामाजिक उत्पीडन स मुक्ति के लेल प्रत्येक देश में, प्रत्येक राष्ट्र मे, प्रत्येक समाज में आन्दोलन तीव्र भगेल छै। एकरा समयमे स्वीकार कएनाई प्रत्येक लोकतन्त्रवादीके कर्तव्य छै। सामाजिक न्याय उपलब्ध करबैत राजनीतिक रुपमे प्रत्येक अंग में सम्मानपूर्वक उपस्थित कएनाई राज्य के कर्तव्य छै। मिथिला स्वयं उपेक्षित उत्पीडित अछि। तैं एकरा कतहु के दलित आन्दोलनके हार्दिक समर्थन सहयोग करैत मिथिलाक दलित मुक्तिके आन्दोलन में सामेल होइत, ओकर अगुवाई करैत मिथिला राज्य के स्थापना में गति स आगॉं बढत।

२३. मिथिला आ राजनीतिक दल ः

देशमें वर्तमान में सक्रिय राजनीतिक दल सभ मे संघीय संरचना के विषयमे स्पष्ट धारणा वाहर नदि आएल अछि। संविधानत ः स्वीकार कएले पर एहि विषय मे पार्टीक संघ विरोधी धारणा बाहर अवैत अछि। संघीय संरचना बनाएब, ताहिमे कपटपूर्ण अभिव्यक्ति अबैत अछि। किछु दल के नीति इ रहि आएल अछि जे सम्पूर्ण मधेश के एकटा राज्यके रुपमे आवक चाही। ई संघीय मान्यता नेपाल मे कतेक व्यवहारिक हेतै? पौराणिक मिथिला के संशोधनसहित के एकटा राज्य बना कए मधेश में अन्य राज्य सेहो उपयुक्त होएत। हरेक क्षेत्र के आन्दोलित कए समग्र मे मधेश के खसवादी प्रभुत्व स मुक्त कएल जा प्रत्येक दल आ कथित वुद्धिजिवी संघीय संरचना के स्वीकार करैत, मुक्त मधेश के मान्यता दैत मिथिला राज्यके स्थापना मे सहयोग करैक, ईहए संघीय मान्यता अनुकुल हेतै।

२४. मिथिला आ महिला आन्दोलन ः

मिथिला सदा नारी के सम्मान करैत आएल अछि। तै नारी अधिकार के कुण्डित नहिं कए सकैअ। महिला अधिकार, महिला सशक्तिकरण द्वारा महिला आन्दोलन के मिथिला आन्दोलन स जोडिक ल जेनाई जरुरी छै। किछ दशक स मिथिलाके महिला के अनावश्यक अन्तरमुखी वनावल गेल छै आ एहि मे नेपालक जडिआएल सामन्ती सामाजिक राजनीतिक व्यवस्थाक खास भूमिका छै। तैं मिथिला के लोकतान्त्रिक राज्य निर्माण मे अधिकार सम्पन्न महिलाके भूमिका अति आवश्यक छै।

२५. मिथिला आ कथित पिछडल आ आगा बढल वर्ग ९ द्यबअपधबचम ायच धबचम ः

मिथिलाक डोम सेहो सम्पत्तिशाली छल। एकरा साथ अछुत क व्यवहार नहिं छलै। गणराज्यक नायक जनकक कालमे समतामूलक समाजक प्रमाण भेटछ। तथापि मिथिला एकटा देश छल जतए सब जाति जातक बसोबास स्वभाविक छल आ अछि। अखन लोकतान्त्रिक व्यवस्था मे सभ जाति जातके समानुपातिक समावेशीकृत उपस्थिति मिथिला राज्यके प्रत्येक अंग आ निकाय में रहत से घोषित नीति अछि। मिथिला कोनो एकटा जाति के नहिं, कथित उच्च जाति के कथमपि नहिं। योग्यता क्षमता अनुसार समानुपातिक रुपमें सहभागी केनाई आवश्यक अछि। इएह मिथिला निर्माण के आधार रहत।

२६. मिथिला आ मानक मैथिली ः

मानव शास्त्री आ भाषा शास्त्रीक अनुसार केव भाषा नहिं बजैअ, सब बोली ९मष्बभिअतक० बजैअ। समरुप बोली के समग्र रुप भाषा होइछ। मुदा जाहि बोलीक बेसी संचार होइछ जाहि बोली मे विशेष रचना प्रकाशित होइछ, जाहि बोली के बेसी पाठक होइछ जाहि बोलीक व्यक्ति सत्ता पर नियन्त्रण करैछ जाहि बोली द्वारा प्रकाशन, न्याय सम्पादन होइछ, जाहि बोलीके विद्धान व्याकरणक रचना करैछ, ओहए बोली भाषा बनिक समाजपर प्रभाव पारैत अछि। तै कोनो बोली कथित उच्च वर्गके भए सकैछ, तै ओकरा मानक भाषा बुझनाई ओतेक उचित नहिं आ अइस कोनो जाति के राज्ययन्त्रपर नियन्त्रण के शंका केनाई उचित नहि। तै मिथिला में वर्तमान में वाजए जाए बाला प्रत्येक बोली के सम्मान करत, सभ भाषाके सम्मानकरत आ वहु भाषिक नीति राखि राज्य संचालन करत।

२७. मिथिला राज्य स्थापना के लेल नीतिगत कार्यक्रम ः

(क) जनता, लोकतन्त्र, मानवअधिकार के विरोधी, जाति, भाषाक अधिकार के प्रधान शत्रु राजतन्त्र अछि। तै जनताके मित्र शक्ति लोकतन्त्रवादी, मानव अधिकारवादी, कानूनी राज्यक पक्षधर आदि शक्ति आ संगठन स मिलक गणतन्त्र लएवाक लेल अथक संघर्ष आवश्यक छै।

(ख) प्रत्येक जाति, जनजाति, आदिवासी, दलित उत्पीडित वर्ग पिछडल वर्ग, अल्प संख्यक जाति, मानव अधिकरावादी सबस मिलक, संघीय संरचना केल कठोर संघर्ष आवश्यक अछि।

(ग) मधेशक प्रत्येक जाति, जनजाति, भाषा भाषीक समुह, महिला मुस्लिम सभके साथ कार्यगत एकता करैत खस सत्ता स सम्पूर्ण मधेश के मुक्त कएनाई बेसी आवश्यक छै।

(घ) संघीय संरचनाक मर्म, भावना अनुसार मधेशमे आत्म निर्णायक आधार पर मिथिला क्षेत्रक प्रत्येक वर्ग के आन्दोलित कए मिथिला राज्यके लेल सहमति जुटएनाय आवश्यक अछि।

२८. कार्यदिशा ः

१. संघीय संरचना विना मुक्त मधेशक कल्पना तथा मुक्त मधेश विना मिथिला राज्यक कल्पना असम्भव होएत से बुझि चेतना मूलक कार्यक्रम सम्पूर्ण मधेशमे आवश्यक अछि।

२. खस सत्ता वर्गिय समुदाय के दिमाग स ई भय हटैनाई जरुरी छै आ चेतना देनाई जरुरी छै जे कोनो जाति, भाषा के संरक्षण, सम्मान संघीय संरचनामे मात्र संभव छै। जन अधिकार सम्पन्न लोकतन्त्र संघीय संरचनामे मात्र संभव छै।

३. कोनो सत्ता, दलीय सरकारक निरंकुशता के न्यून करवाक लेल संघीय संरचना मात्र आधार छै।

४. संघीय शासन प्रणाली सं देश खण्डित नहिं होइछ। अर्थात संघीय शासन देश के विखण्डन स बचवैत अछि। अर्थात् संघीय संरचना विखण्डनवाद के स्थायी समाधान
अछि।

२९. मिथिला राज्य निर्माण वाधक चिन्तन ः

अन्तरिक

१(क) मिथिला के लेल कोनो राजनीतिक संगठन नहि अछि। आ एहके लेल कोनो संघर्ष नहिं अछि।

(ख) भाषा संस्कृति करे लेल कोनो एकिकृत संगठन नहि अछि।

(ग) कोनो स्थापित नेतृत्व नहिं अछि।

(घ) भाषा, संस्कृति के आन्दोलन के लोकतान्त्रिक आन्दोलन, मानव अधिकार वादी आन्दोलन स जोडक, लएजवाक चिन्तन या प्रयास नहिं अछि।

(ङ) एहिके लेल किछ भ रहल आन्दोलन, वौद्धिक व्यक्तित्व सभक मात्र अछि, जिनकामे स्वाभिमान कम, अहंकार वेसी, संयोजन करवाक क्षमता कम फुट करवाक क्षमता वेसी छन्हि।

वाह्य

(क) खस जाति समग्र संघ के विरोधी चिन्तन रखैत अछि अपना के सदा केन्द्रीय सत्ताके भागी बुझैछथि आ नेपाल के अपन पुर्खा के अर्जन सम्पत्ति बुझै छथि।

(ख) समग्र मधेश एकराज्यक नारामे सत्ताधारी वर्ग विखण्डन के गंध देखैत अछि मिथिला तथा संघीय संरचना के विरुद्ध सोचेत अछि।

(ग) संघीय आन्दोलन के नेतृत्व कएनिहार, दल या व्यक्ति के हिन्दी भाषा प्रति आसक्ति स मातृभाषा प्रेमी विचकैत छथि आ खसवादी सेहो एहिमे किछु रहस्‍मय दुर्गन्ध सुंधवाक प्रयास करैत अछि।

निश्कर्ष ः

नेपाल के सत्ताधारी, वर्ग संकट के घड़ी सँ गुजरि रहल अछि। देश अखन अधिकार प्राप्तिकँ नयाँ मोडपर ठाढ अछि। अधिकार सँ वंचित उत्पीडित वर्ग, जाति आन्दोलनमे कुदि पडल अछि। संघीय लोकतान्त्रिक गणतन्त्र माग एकर अचूक औषधि छेक। प्रत्येक प्रभुसत्तावादी सामन्ती चिन्तन एहि आन्दोलन के पाछा धकेल चाहैत अछि आ आन्दोलन ओकरा किनार पर खसवैत आगा बढि रहल अछि। आउ, समाजक स भ वर्ग, आन्दोलन मे भाग लिअ आ नैसर्गिक अधिकार स्थापित करु।

सन्दर्भ सामाग्री ः

(क) संविधानसभा, संघीय संरचना, मिथिला राज अवधारण १शीतल झा

ख) संघीय स्वशासन तिर ...............वृषेश चन्द्र लाल

(ग) संघीय शासन व्यवस्थाको आधारमा राज्यको पुन ः संरचना अमरेश नारायण झा

(घ) मूल्यांकन मासिक।


No comments:

Post a Comment

"विदेह" प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका http://www.videha.co.in/:-
सम्पादक/ लेखककेँ अपन रचनात्मक सुझाव आ टीका-टिप्पणीसँ अवगत कराऊ, जेना:-
1. रचना/ प्रस्तुतिमे की तथ्यगत कमी अछि:- (स्पष्ट करैत लिखू)|
2. रचना/ प्रस्तुतिमे की कोनो सम्पादकीय परिमार्जन आवश्यक अछि: (सङ्केत दिअ)|
3. रचना/ प्रस्तुतिमे की कोनो भाषागत, तकनीकी वा टंकन सम्बन्धी अस्पष्टता अछि: (निर्दिष्ट करू कतए-कतए आ कोन पाँतीमे वा कोन ठाम)|
4. रचना/ प्रस्तुतिमे की कोनो आर त्रुटि भेटल ।
5. रचना/ प्रस्तुतिपर अहाँक कोनो आर सुझाव ।
6. रचना/ प्रस्तुतिक उज्जवल पक्ष/ विशेषता|
7. रचना प्रस्तुतिक शास्त्रीय समीक्षा।

अपन टीका-टिप्पणीमे रचना आ रचनाकार/ प्रस्तुतकर्ताक नाम अवश्य लिखी, से आग्रह, जाहिसँ हुनका लोकनिकेँ त्वरित संदेश प्रेषण कएल जा सकय। अहाँ अपन सुझाव ई-पत्र द्वारा ggajendra@videha.com पर सेहो पठा सकैत छी।

"विदेह" मानुषिमिह संस्कृताम् :- मैथिली साहित्य आन्दोलनकेँ आगाँ बढ़ाऊ।- सम्पादक। http://www.videha.co.in/
पूर्वपीठिका : इंटरनेटपर मैथिलीक प्रारम्भ हम कएने रही 2000 ई. मे अपन भेल एक्सीडेंट केर बाद, याहू जियोसिटीजपर 2000-2001 मे ढेर रास साइट मैथिलीमे बनेलहुँ, मुदा ओ सभ फ्री साइट छल से किछु दिनमे अपने डिलीट भऽ जाइत छल। ५ जुलाई २००४ केँ बनाओल “भालसरिक गाछ” जे http://www.videha.com/ पर एखनो उपलब्ध अछि, मैथिलीक इंटरनेटपर प्रथम उपस्थितिक रूपमे अखनो विद्यमान अछि। फेर आएल “विदेह” प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका http://www.videha.co.in/पर। “विदेह” देश-विदेशक मैथिलीभाषीक बीच विभिन्न कारणसँ लोकप्रिय भेल। “विदेह” मैथिलक लेल मैथिली साहित्यक नवीन आन्दोलनक प्रारम्भ कएने अछि। प्रिंट फॉर्ममे, ऑडियो-विजुअल आ सूचनाक सभटा नवीनतम तकनीक द्वारा साहित्यक आदान-प्रदानक लेखकसँ पाठक धरि करबामे हमरा सभ जुटल छी। नीक साहित्यकेँ सेहो सभ फॉरमपर प्रचार चाही, लोकसँ आ माटिसँ स्नेह चाही। “विदेह” एहि कुप्रचारकेँ तोड़ि देलक, जे मैथिलीमे लेखक आ पाठक एके छथि। कथा, महाकाव्य,नाटक, एकाङ्की आ उपन्यासक संग, कला-चित्रकला, संगीत, पाबनि-तिहार, मिथिलाक-तीर्थ,मिथिला-रत्न, मिथिलाक-खोज आ सामाजिक-आर्थिक-राजनैतिक समस्यापर सारगर्भित मनन। “विदेह” मे संस्कृत आ इंग्लिश कॉलम सेहो देल गेल, कारण ई ई-पत्रिका मैथिलक लेल अछि, मैथिली शिक्षाक प्रारम्भ कएल गेल संस्कृत शिक्षाक संग। रचना लेखन आ शोध-प्रबंधक संग पञ्जी आ मैथिली-इंग्लिश कोषक डेटाबेस देखिते-देखिते ठाढ़ भए गेल। इंटरनेट पर ई-प्रकाशित करबाक उद्देश्य छल एकटा एहन फॉरम केर स्थापना जाहिमे लेखक आ पाठकक बीच एकटा एहन माध्यम होए जे कतहुसँ चौबीसो घंटा आ सातो दिन उपलब्ध होअए। जाहिमे प्रकाशनक नियमितता होअए आ जाहिसँ वितरण केर समस्या आ भौगोलिक दूरीक अंत भऽ जाय। फेर सूचना-प्रौद्योगिकीक क्षेत्रमे क्रांतिक फलस्वरूप एकटा नव पाठक आ लेखक वर्गक हेतु, पुरान पाठक आ लेखकक संग, फॉरम प्रदान कएनाइ सेहो एकर उद्देश्य छ्ल। एहि हेतु दू टा काज भेल। नव अंकक संग पुरान अंक सेहो देल जा रहल अछि। विदेहक सभटा पुरान अंक pdf स्वरूपमे देवनागरी, मिथिलाक्षर आ ब्रेल, तीनू लिपिमे, डाउनलोड लेल उपलब्ध अछि आ जतए इंटरनेटक स्पीड कम छैक वा इंटरनेट महग छैक ओतहु ग्राहक बड्ड कम समयमे ‘विदेह’ केर पुरान अंकक फाइल डाउनलोड कए अपन कंप्युटरमे सुरक्षित राखि सकैत छथि आ अपना सुविधानुसारे एकरा पढ़ि सकैत छथि।
मुदा ई तँ मात्र प्रारम्भ अछि।
अपन टीका-टिप्पणी एतए पोस्ट करू वा अपन सुझाव ई-पत्र द्वारा ggajendra@videha.com पर पठाऊ।

'विदेह' २३१ म अंक ०१ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३१)

ऐ  अंकमे अछि :- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१. जगदीश प्रसाद मण्‍डलक चारिटा लघु कथ ा २.२. रबिन्‍द्र नारायण मिश्रक चारिटा आलेख ...