Wednesday, April 01, 2009

बाल कविता-३ माटिक बासन- जीवकान्त

माटिक बासन

लाल-लाल अछि
गोल-गोल अछि कटगर

माटिक छाँछी दही जमओलनि

उज्जर, कठगर, सोन्हगर


छथि कुम्हार ओ धन्य-धन्य

जे भारी चाक घुमाबथि

माटि-पानिसँ चाकक ऊपर

नाना रूप बनाबथि


आंगुर छुआ, इशारा देलनि

माटि धयल नव रूप

लाल सुराहीमे जल झाँपल

घरमे छोटकी कूप

माटिक मुरुत बनइ सल्हेसक
कहबइ गामक देब

बड़ पवित्र अछि

माटिक बासन
सुन्दर आर सुरेब

6 comments:

  1. बड्ड नीक।

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  2. माटिक बासन

    लाल-लाल अछि
    गोल-गोल अछि कटगर

    माटिक छाँछी दही जमओलनि

    उज्जर, कठगर, सोन्हगर


    छथि कुम्हार ओ धन्य-धन्य

    जे भारी चाक घुमाबथि

    माटि-पानिसँ चाकक ऊपर

    नाना रूप बनाबथि


    आंगुर छुआ, इशारा देलनि

    माटि धयल नव रूप

    लाल सुराहीमे जल झाँपल

    घरमे छोटकी कूप

    माटिक मुरुत बनइ सल्हेसक
    कहबइ गामक देब

    बड़ पवित्र अछि

    माटिक बासन
    सुन्दर आर सुरेब

    जीवकांतक कविता नीक लागल।

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  3. nik prastuti, jeevkant ker atirikt aar dosar kavi nena bhutka ke kate kene chhathi.

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  4. माटिक बासन

    लाल-लाल अछि
    गोल-गोल अछि कटगर

    माटिक छाँछी दही जमओलनि

    उज्जर, कठगर, सोन्हगर


    छथि कुम्हार ओ धन्य-धन्य

    जे भारी चाक घुमाबथि

    माटि-पानिसँ चाकक ऊपर

    नाना रूप बनाबथि


    आंगुर छुआ, इशारा देलनि

    माटि धयल नव रूप

    लाल सुराहीमे जल झाँपल

    घरमे छोटकी कूप

    माटिक मुरुत बनइ सल्हेसक
    कहबइ गामक देब

    बड़ पवित्र अछि

    माटिक बासन
    सुन्दर आर सुरेब


    This is a beatiful poem for Children but we can assume that---Ishwar kumhaar jakan chhaithi jinkar rachna ham sab chhi. i rachna sundar, ekar sundarta akshun rakhik jimmewari hamra lokin par aichh...

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  5. नीक प्रस्तुति।

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'विदेह' २३२ म अंक १५ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३२)

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