Wednesday, April 22, 2009

गजल- आशीष अनचिन्हार

गजल

गप्प जखन बिआहक चलल हेतैक
गरीबक बेटी बड्ड कानल हेतैक

गोली लागल देह दसो दिशा मे

कुशलक खोंइछ कत्तौ बान्हल हेतैक

डेग-डेग पर निद्रा देवीक प्रसार

केना कहू केओ जागल हेतैक

सड़ि गेलैक एहि पोखरिक पानि

जुग-जुगान्तर सँ नहि उराहल हेतैक

विश्वास करु समान कम नहि देत

बाटे मे बाट भजारल हेतैक

6 comments:

  1. Manoj Sada12:52 AM

    केलहुँ कमाल देलहुँ घाव भाइ, एहि बेर छातीपर चोट केलहुँ

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  2. gazal master chhi ahan,
    ehi ber pher ekta samvedanshil gazal ahank keyboard se niklal

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  3. गप्प जखन बिआहक चलल हेतैक
    गरीबक बेटी बड्ड कानल हेतैक

    खोंइछ कत्तौ बान्हल हेतैक
    bad nik bhai saheb

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  4. कलम सजाबी कोना सजाबी ई सजौनय कियो अहाँ स' सीखय I
    असली गजलकार ओहै अछि भाई जे ग़ज़ल सजा क' अहाँ सन लिखय II

    अपनेंक प्रशंसक
    हम छी-मनीष झा "बौआभाई"

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  5. bhai ji ahank jhamkaua gazal sabh me bad rahasya rahay ye

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'विदेह' २३१ म अंक ०१ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३१)

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