Monday, April 13, 2009

कविता- हे हमर प्रेयसी- आशीष अनचिन्हार

कविता

हे हमर प्रेयसी

जहिना
फूल झहरि-झहरि खसैत अछि
माटि पर
ओकरा सजबए लेल


मेघ हहरि-हहरि
बुन्नी बनि जाइत छैक
फसिलक लेल


सुगंध उड़ि-उड़ि
बसात मे मीलि जाइत छैक
ओकर सौन्दर्यक लेल


तहिना
हे हमर प्रेयसी, हे हमर सोन
आउ
हम दूनू मीलि जाइ
एक दोसरा मे
नव जिनगी , नव चेतनाक
लेल

7 comments:

  1. AABA KAVITO GAZLE JEKA SUNDAR AA UTKRISHTA

    हे हमर प्रेयसी

    जहिना
    फूल झहरि-झहरि खसैत अछि
    माटि पर
    ओकरा सजबए लेल

    मेघ हहरि-हहरि
    बुन्नी बनि जाइत छैक
    फसिलक लेल

    सुगंध उड़ि-उड़ि
    बसात मे मीलि जाइत छैक
    ओकर सौन्दर्यक लेल

    तहिना
    हे हमर प्रेयसी, हे हमर सोन
    आउ
    हम दूनू मीलि जाइ
    एक दोसरा मे
    नव जिनगी , नव चेतनाक
    लेल

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  2. SABH SHABD CHUNI CHUNI, BEECHI BEECHI, BIKCHHIYA BIKCHHIYA LEL GEL ACHHI.

    AA EKAR PARINAM ACHHI ETEK NIK KAVITA

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  3. KAMAL KARAI CHHI BHAI
    हे हमर प्रेयसी, हे हमर सोन

    HE HAMAR SON LIKHI BAHUT KICCHU AANI DELAHU EHI KAVITA ME

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  4. EK BER PHER EKTA NIK RACHNA AHANK KALAM SE PADHLAHU

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  5. aab te kavito jhurjhar aabay laagal; ahank

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  6. bah bhai, sabhta udaharanak explanation optimistic,
    nik lagal,
    muda jingi me...

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  7. बहुत नीक प्रस्तुति

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'विदेह' २३२ म अंक १५ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३२)

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