Tuesday, April 07, 2009

गजल - आशीष अनचिन्हार



गजल

इहो अहाँक प्रेम छल पछाति जानल हम
खाली मूहँक छेम छल पछाति जानल हम


आगि लागल घर मे चिन्ताक गप्प नहि
कारण अपने टेम छल पछाति जानल हम


सड़ैत देखलिऐक किच्छो के कादो मे
अपने घरक हेम छल पछाति जानल हम


पिबैत रहलहुँ सदिखन विदेशी शीतल पानि
तैओ गरमी कम्म छल पछाति जानल हम


किछु तत्व कए दैत छैक अनचिन्हार सभ के
कथन मे दम्म छल पछाति जानल हम

8 comments:

  1. इहो अहाँक प्रेम छल पछाति जानल हम
    takhan ee kona je
    खाली मूहँक छेम छल पछाति जानल हम

    pher
    आगि लागल घर मे चिन्ताक गप्प नहि
    ee te sahiye apana galti par kam dhyan jait chhai
    कारण अपने टेम छल पछाति जानल हम

    tehne eeho
    सड़ैत देखलिऐक किच्छो के कादो मे
    अपने घरक हेम छल पछाति जानल हम

    nichulka me tartamya nahi banal
    aaki hamra bujhba me nahi aayal
    पिबैत रहलहुँ सदिखन विदेशी शीतल पानि
    तैओ गरमी कम्म छल पछाति जानल हम

    ant te jabardast achhi
    किछु तत्व कए दैत छैक अनचिन्हार सभ के
    कथन मे दम्म छल पछाति जानल हम

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  2. ahan te kama chhi bhai, katek phurai ye,

    ee gazal gazal nahi gap ahank monak,
    sabh gapak paachhok gap bhai janal ham

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  3. gazal vidhak maithili me ant roki del ahan,

    oopar se nik theek juaari mudaa aar aanal yau,

    gazal likhait rahoo nik kundaliya seho,
    kavita kamjor kiyeek, mudaa oho aanoo ahan

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  4. kaviray,
    अनचिन्हार
    पिबैत रहलहुँ सदिखन विदेशी शीतल पानि
    तैओ गरमी कम्म छल पछाति जानल हम

    hai re bhai, hila delaho

    ReplyDelete
  5. इहो अहाँक प्रेम छल पछाति जानल हम
    कथन मे दम्म छल पछाति जानल हम

    pher
    आगि लागल घर मे चिन्ताक गप्प नहि
    तैओ गरमी कम्म छल पछाति जानल हम

    ant me
    तैओ गरमी कम्म छल पछाति जानल हम
    कथन मे दम्म छल पछाति जानल हम

    remix keha lagal likhab,
    ona original ahan bala beshi nik

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  6. gazal chotgar hoi ye ahank bhai

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  7. Anonymous12:26 AM

    sabh chij jani gelahu ahan aa kahi seho delahu,
    mahesh jha

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  8. बहुत नीक प्रस्तुति

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'विदेह' २३२ म अंक १५ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३२)

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