Thursday, April 16, 2009

गजल- आशीष अनचिन्हार

गजल

मछगिद्ध जँ माछ छोड़ि दिअए त डर मानबाक चाही
लोक जँ नेता भए जाए त डर मानबाक चाही


रंडी खाली देहे टा बेचैत छैक अभिमान नहि
मनुख अस्वभिमानी हुअए त डर मानबाक चाही


अछि विदित शेर नहि खाएत घास भुखलों उत्तर
वीर अहिंसक बनए त डर मानबाक चाही


माएक रक्षा करैत जे मरथि सएह विजेता
माए बेचि जँ रण जितए त डर मानबाक चाही


सम्मानक रक्षा करब उद्येश्य अछि गजल केर
जँ उद्येश्य बिझाए त डर मानबाक चाही

11 comments:

  1. बमबम झा10:09 PM

    bah bhai, gazal me ahank javab nahi,

    jahi prakare dvandaka madhyama se, viparitata ke pakari kae gazal likhlahu se adbhut.

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  2. प्रमेन्द्र झा10:34 PM

    गजलमछगिद्ध जँ माछ छोड़ि दिअए त डर मानबाक चाही
    लोक जँ नेता भए जाए त डर मानबाक चाही


    नेते किये बन्धु, लोके सँ तँ नेता बनैत छथि

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  3. सम्मानक रक्षा करब उद्येश्य अछि गजल केर
    जँ उद्येश्य बिझाए त डर मानबाक चाही

    सहि कह्लहि, अपना ल' कए चल्बाके चाही।

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  4. manish gautam8:48 AM

    अछि विदित शेर नहि खाएत घास भुखलों उत्तर
    वीर अहिंसक बनए त डर मानबाक चाही

    alankarik gazal

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  5. sudhanshu8:58 AM

    padhba me nik lagal,
    gazal ehne hoi chhaik

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  6. Anonymous5:38 PM

    "Ahak Jatha enni tatha onni" bad nik lagal . tahi k lel bahut dhanyabad.
    muda e gajal me kebal shabde ta bhetal pranak kami achhi muda ahak kalam tej achhi ruka nai debai chalabait rahu.
    jai maithili.

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  7. neeka laagal, kanek halluk aa mongar kavita seho chahi vyast jivnak bad

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  8. bhai ji ekta aar jhamkauwa diyauk

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  9. gazal vidha maithili me otek pratishthit nahi rahal karan phooharpan beshi chhal, aab lagaiye ahank aagman ekra door kay rahal achhi.

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  10. नीक गजल।

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'विदेह' २३१ म अंक ०१ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३१)

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