Saturday, March 14, 2009

माय (कविता) -मनीष झा "बौआभाई"

माय (कविता)

मनीष झा "बौआभाई"

एक-एक क्षण जे बेटा के खातिर
कर जोड़ि विनती करैइयै माय
बिनु अन्न-जल ग्रहण केने बेटा लै
जितियाक व्रत राखैइयै माय
आ एहि तरहें माय हेबाक
कर्त्तव्य पूरा करैइयै माय


जिन्दगीक रौदा में तपि क'
बेटा के छाहड़ि दैइयै माय
बरखा-बिहाड़ि सन विषम समय में
आँचर स' झाँपि राखैइयै माय
आ एहि तरहें माय हेबाक
कर्त्तव्य पूरा करैइयै माय


घर में छोट-छिन बात पर में
बाप स' लड़ि लैइयै माय
बाप स' लड़ि बेटा के पक्ष में
फैसला करैइयै माय
आ एहि तरहें माय हेबाक
कर्त्तव्य पूरा करैइयै माय


बेटा नै जा धरि घर आबय
बाट टुकटुक ताकैइयै माय
ओठंगि के चौकठि लागि बैसल
राति भरि जागैइयै माय
आ एहि तरहें माय हेबाक
कर्त्तव्य पूरा करैइयै माय


वयस कियैक नै हुऐ पचासक
तहियो बौआ कहैइयै माय
अहू वयस में नज़रि ने लागय
तैं अपने स' निहुछैइयै माय
आ एहि तरहें माय हेबाक
कर्त्तव्य पूरा करैइयै माय


होय जानकी वा अम्बे के प्रतिमा
सभ रूप में झलकैइयै माय
तीर्थ-बर्थ सब मन के भ्रम छी
घर में जे' कुहरैइयै माय
कर्त्तव्य हमरो ई कहैइयै
घर में नै कलपय ई माय
आ एहि तरहें जन्म देल त'
माय के पद पाबय ई माय

9 comments:

  1. bhav vihval bhay gelahu

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  2. mayak barabari ke kay sakai ye

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  3. बेटा नै जा धरि घर आबय
    बाट टुकटुक ताकैइयै माय
    ओठंगि के चौकठि लागि बैसल
    राति भरि जागैइयै माय
    आ एहि तरहें माय हेबाक
    कर्त्तव्य पूरा करैइयै माय

    bah

    ReplyDelete
  4. एक-एक क्षण जे बेटा के खातिर
    कर जोड़ि विनती करैइयै माय
    बिनु अन्न-जल ग्रहण केने बेटा लै
    जितियाक व्रत राखैइयै माय
    आ एहि तरहें माय हेबाक
    कर्त्तव्य पूरा करैइयै माय


    जिन्दगीक रौदा में तपि क'
    बेटा के छाहड़ि दैइयै माय
    बरखा-बिहाड़ि सन विषम समय में
    आँचर स' झाँपि राखैइयै माय
    आ एहि तरहें माय हेबाक
    कर्त्तव्य पूरा करैइयै माय


    घर में छोट-छिन बात पर में
    बाप स' लड़ि लैइयै माय
    बाप स' लड़ि बेटा के पक्ष में
    फैसला करैइयै माय
    आ एहि तरहें माय हेबाक
    कर्त्तव्य पूरा करैइयै माय


    बेटा नै जा धरि घर आबय
    बाट टुकटुक ताकैइयै माय
    ओठंगि के चौकठि लागि बैसल
    राति भरि जागैइयै माय
    आ एहि तरहें माय हेबाक
    कर्त्तव्य पूरा करैइयै माय


    वयस कियैक नै हुऐ पचासक
    तहियो बौआ कहैइयै माय
    अहू वयस में नज़रि ने लागय
    तैं अपने स' निहुछैइयै माय
    आ एहि तरहें माय हेबाक
    कर्त्तव्य पूरा करैइयै माय


    होय जानकी वा अम्बे के प्रतिमा
    सभ रूप में झलकैइयै माय
    तीर्थ-बर्थ सब मन के भ्रम छी
    घर में जे' कुहरैइयै माय
    कर्त्तव्य हमरो ई कहैइयै
    घर में नै कलपय ई माय
    आ एहि तरहें जन्म देल त'
    माय के पद पाबय ई माय

    bah

    ReplyDelete
  5. mayak roop mamtamayi, okar upkark kono mol nahi.
    nik

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  6. bad kavita lagal bhai

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  7. bah bhai, ahank saph charitrak parichayak achhi mayak prati ahank ee sneh

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  8. बहुत नीक प्रस्तुति।

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  9. जिन्दगीक रौदा में तपि क'
    बेटा के छाहड़ि दैइयै माय
    बरखा-बिहाड़ि सन विषम समय में
    आँचर स' झाँपि राखैइयै माय
    आ एहि तरहें माय हेबाक
    कर्त्तव्य पूरा करैइयै माय

    ई वास्तविकता जकरा बुझबा में आबि गेल ओएह असल मायक भक्त अछि I ई रचना के लेल बेर बेर हार्दिक धन्यवाद I

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'विदेह' २३२ म अंक १५ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३२)

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