Wednesday, March 18, 2009

दिल्लीमे बिहारक संस्कृतिक झलक

दिल्लीमे पिछला दिन लागल जेना बिहारमे आबि गेल छी. होली आओर महिला दिवसक अवसर पर बिहार उत्सवक आयोजन कएल गेल. लोक बिहारक लोकगीत आओर लोकनाटकक संग कत्थक नृत्यक आनंद उठएलन्हि. नृत्यांगना पुनीता शर्मा अपन बेहतरीन नृत्यसँ लोककेँ झूमय लेल मजबूर क' देलखिन्ह. कत्थक नृत्य यात्रा थीम पर छल. एहिमे जीवन यात्राक मर्मकेँ खूबसूरतीसँ पेश कएल गेल. कत्थक नृत्यक फ्यूजनमे बचपन...युवा आओर प्रौढावस्थाक संग सुख-दुख...राग-द्वेष...प्रेम-नफरत जैसन विविध रंगसँ जीवनक मर्म समझाबय के कोशिश कएल गेल.
ई कार्यक्रम दिल्लीक सामाजिक संस्था राग विराग एजुकेशनल एंड कल्चरल सोसाइटी क ओर सँ कएल गेल. कार्यक्रमक शुरूआत संतोष नागर जीक वायलिन वादनसँ भेल. एहि के बाद भेल छल यात्रा. पुनीता जीक कोरियोग्राफीमे भेल एहि नृत्य नाटिका राग भटियार... बागेश्वरी... दरबारीसँ होइत राज जोगसँ खत्म भेल. एहिमे सविता अधिकारी... साक्षी कुमार आओर सुलगना राय अपन नृत्यसँ मन मोहि लेलखिन्ह. एहि नृत्य नाटिका यात्राकेँ संगीत देलन्हि कासिफ खान.
उत्सवक आखिरमे युवा कलाकार अंशुमाला बिहारमे पावनि... त्योहार...खुशीक मौका पर गाबय जाए वाला गीत पेश कएलन्हि। एहिमे कजरी... जट-जटिन... शादी-विवाह आओर होली पर गाबय जाय वाला गीत छल. लोक नाटक वाला हिस्सामे जयशंकरजी खुशबू आओर वंदनाक संग 'जट-जटिन' प्रस्तुत कएलन्हि.

8 comments:

  1. विनीत जी "अंशुमाला" की छथि- स्त्री वा पुरुष। जँ स्त्री त "कएलीह" अथवा जँ पुरुष छथि तखन त ठीके अछि "कएलाह"। आशा अछि जे भविष्य मे एहि पर ध्यान राखल जेतैक।

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  2. prastuti nik lagal, usa , dilli sabh tham maithilik lel utsah dekhi mon gadgad bhay jait achhi

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  3. punita sharmak nrityak theme sabh ber kanek hati kay aa vishisht hoit achhi, anshumala ji mithila sangeet ke ekta nav pahchan deba me jutali chhathi

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  4. jat jatin te aab gamo ghar me khelenai band bhay gel achhi, dilli me ekar prastuti bhel se padhi chakit aa harshit dunu bhelahu

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  5. dhanyavad vinit ji update lel, ehina aagan seho ahan se update bhetait rahat se aasha achhi

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  6. आशीषजी, गलती बताबैक लेल धन्यवाद. मुदा, लेख हेलो मिथिला से साभार लेल गेल रहित. तहि स हमर ध्यान नहि गेल.

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  7. आशीषजी. अहांक धन्यवाद. आगां सं कृपया एक नजर हेलो मिथिला पर सेहो ध्यान देबाक कष्ट करबै. जे किछ ठीक करय के होएत से बताएब. शुरू मे गजेन्द्र जी जे कहैत छलखिन्ह ओकरा सुधारि दैत छलहुं मुदा आई काल्हि हुनकर संदेश नहिं आबि रहल अछि. जेहि सं किछ गलती रहि जाएत अछि. विनीत जी सं सेहो दुख भेल जे ओ अहांक बतएलाह के बाद हमरा सुधारय लेल नहिं कहलाह.

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  8. बहुत नीक प्रस्तुति।

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'विदेह' २३२ म अंक १५ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३२)

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