Tuesday, March 24, 2009

एक विलक्षण प्रतिभा जिनका हम सदिखन याद करैत छी (तेसर कड़ी)


गामक
समय हम कहियो नय बिसरि सकैत छी ओहि समयक गप्प थिक जखनि कि हमर बहिनक विवाह s गेल छलैन्ह सभ चलि गेल छलिहहमर बाबूजी छोटका काका हमारा लेल वर ताकय लेल गेल छलैथ आई कालिक हिसाब s s हम ओहि समय एकदम बच्चा रहि आ शहर में रहलाक कारणे हम गाम घरक बहुत किछु नहि बुझैत छलौं। सब s बेसी विवाह बैसाख, जेठ आषाढ़ में होयत छैक, अर्थात शुद्ध रहैत छैक ओहि ज़माना में, अर्थात १९७२ ईस्वी में गामक रौनक किछु और रहैत छलै प्रतिदिन कतो नय कतो विवाह होयत छलैक जाहि में दादी हमरा लय जयबाक आग्रह अवश्य करैत छलीह हमहूँ कहियो विवाह नय देखने छलौं, पहिल विवाह हम अपन दीदी (पितिऔत ) कs देखलियैन्ह।


ओही समय में बेसी विवाह सभा s ठीक भेलहा सब रहैत छलैक जाहि कारणे हरबरी वाला विवाह हमरा देखय s ओतेक इच्छा नय होयत छल, मुदा दादी केs मोन रखबाक लेल हुनका संग कतो कतो चलि जायत छलौंह ओहि समय हम परीक्षा फलक प्रतीक्षा में रही आर कोनो काजो तs हमरा नहि छलाह


एक दिन हम, माँ दादी आंगन में बैसल छलियै कि एकटा खबासनी आयल दादी के कहलकैन्ह " मलिकैन कनि एम्हर आयल जाओ " सुनतहि दादी ओकरा लग चलि गेलिह, पता नय हुनका कि कहलकैन्ह कनि कालक बाद दादी हमरा कहलैथ "चलs हम तोरा एकटा सोलकनि सबहक विवाह देखाबैत छियौक" हमरा आश्चर्य
भेल जे आई दादी केs की भेलछैन्ह जे हमरा सोलकनि s विवाह देखय लेल कहैत छथि हम आश्चर्य सs पुछलियैन्ह "अहाँ सोलकनि s विवाह देखय लेल जायब "? दादी मुसकैत हमरा कहलैथ "चलहि नय अहि ठाम, ब्रम्ह स्थान लग बरियाती छैक, दूरे s खाली बरियाती देखि चलि आयब दूनू गोटे"


हमारा मोन s नहि होइत छलय बरियाती देखबाकs, मुदा हम दादी s संग जएबाक जयबाक लेल तैयार भs गेलियैन्ह ब्रम्ह स्थान लगे छलय, हम दुनु गोटे जखन ओतहि पहुँचलौं तs देखलियय जे ओतहि बीच में पालकी राखल ढोल पिपही बाजैत छलैह, जों आगु बढ़लौं तs देखैत छी जे ओहि पालकी में वर मुंह पर रूमाल देने बैसल छैथ एकटा बच्चा हुनका आगू में बैसल छलैन्ह, बरियाती सब सेहो बैसल छलैक खैर हम सब आगू बढिकs बरियाती लग पहुँच गेलिये हमरा निक भलहि नय लागैत छल मुदा पहिल बेर अहि तरहक बरियाती देखैत रही हम आश्चर्य s बरियाती देखैत रही कि कनिये कालक बाद सब बरियाती ठाढ़ s गेलैथ पिपही ढोल जोर बाजय लगलय हम सब कनि पाछू s गेलौं, जहिना पालकी उठलय कि हमरा माथ पर कियो पानी ढ़ारि देने छलs हम हक्का बक्का s s एम्हर ओम्हर ताकय लगलौं, देखैत छी दादी s हाथ में गिलास छलैन्ह हम कानय लगलियय देखि s दादी हमरा तुंरत हँसैत कहलैथ गर्मी छलैक ताहि द्वारे ठंढा देलियौक हमरा
बड़
तामस भेल


हम सब जखैन घर पहुँचलौं, हम कानैत माँ s कहलियय हम कहियो दादी संग विवाह देखैक लेल नय जायब हमर एकटा पीसी ओहि ठाम बैसल रहैथ, कहि उठलीह, " नय कानि तोहरे निक लेल केलथुन" हमरा किछु नय बुझय में आयल बकलेल जकां हुनकर मुंह देखैत पुछलियैन्ह "कि निक भेल, सभटा कपड़ा भीजि गेल"? सुनि s कहलैथ "गय बरियाती s जेबा काल पानि माथ पर देला सs लोकक विवाह जल्दि होयत छैक ताहि लेल तोरा पानि देलथुन " हम आर जलि भुनि s ओतहि s चलि गेलौंह ओकर कनिये दिनक बाद हमर विवाह भs गेल



जहिया हमर विवाह भेल ओहि समय हमर घरवाला श्री लल्लन प्रसाद ठाकुर इंजीनियरिंग के अन्तिम बरख में पढैत छलाह हम मैट्रिक के परीक्षा देने रहि परीक्षा फल सेहो निकलि गेल छलs हमर विवाह आषाढ़ मास में, (दिनांक १३ जुलाई) भेल छलs विवाहक तुंरत बाद मधुश्रावणी छलैक ताहि द्वारे हम गाम पर रही गेलौं हमर काका मधु(हमर पितिऔत बहिन) के संग रांची चलि गेलाह काका हमरा कहैत गेलाह जे हमर परीक्षा फल आदि स्कूल s s कॉलेज में हमर नाम लिखवा देताह तैं हम निश्चिन्त रही हमर काका नाम लिखवेलाक बाद हमरा खबरि सेहो s देलाह हमर नाम "निर्मला कॉलेज रांची" में लिखायल छल


दादी के आग्रह पर हमरा गाम पर रहि मधुश्रावनी करवा के छलs, बहिनक विवाह सs अपन विवाह मधुश्रावनी धरि करिब दू मास सs बेसी रहय परल छलs हम पहिल बेर अपना होश में एतेक दिन गाम पर एक संग रहल रहि ओना तs हम सब, सब साल गाम जायत रही, मुदा एक संग एतेक दिन नय रहैत रहि पहिल अन्तिम बेर छलs जे हम गामक मजा निक जकां s सकलियैक

-कुसुम ठाकुर-

क्रमशः ........

20 comments:

  1. तेसर कड़ी सम्पूर्ण एके साँसमे पढ़ि गेलहुँ। एक बेर फेर अत्युत्तम प्रस्तुति,

    अगिला खेपक प्रतिक्षामे।

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  2. bahut nik ek ber pher

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  3. sadhal hath se likhal ek-ek ghatnak prastuti vilakshan, naisargik pratibhak dyotak

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  4. atyuttam prastuti, pathak ke banhi dait achhi ahank lekhani

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  5. ehi ber aar beshi nik prastuti doo karan se
    ek te kichhu paigh kathak ansh,
    dosar beshi gahiki drishti se likhal,

    agila kareek pratiksha me

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  6. ullasit chhi ahank rachna padhi kay, ee upanyasak roop let aa maithili upanyas sabh me ekar mahatvapoorna sthan rahat se aasha karait chhi,

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  7. ehi blog par aabi mon praphullit bhay jait achhi,

    ee dharavahik prastuti bahut nik aaga badhi rahal achhi, sabh karik ant nav prastutik pratiksha lel badhya kay dait achhi,

    ekta sujhav, flashback kay lekhika nenak-bhutka me katal apan ghatna sabh ke seho katha me jori ehi me nootanta aa vividhta aani sakait chhathi.

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  8. ई धारावाहिक प्रस्तुति बहुत नीकजकाँ आगाँ बढ़ि रहल अछि, धन्यवाद कुसुमजी। रचना सभ तरहेँ श्रेष्ठ।

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  9. ati sundar katha-upanyas

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  10. migration, gam sabhak chitran bad nik

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  11. bhasha pravah aa kathyak vaishishtya achhi ehi katha me.rochakta shuru se ant dhari rahai ye.

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  12. ee dharavahik prastuti maithil aar mithila blog ker ekta aar uplabdhi bani gel achhi.

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  13. ehi dharavahik upanyasak jaldi jaldi dharavahik prastuti hoyat aa nik prarambh jeka rochak ant hoyat tahi aasha sang

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  14. muh me vyakt karba lel shabd nahi achhi, bad nik lagal

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  15. vilakshan upanyas ker rooprekha taiyar bhel achhi, dhanyavad kusum ji.

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  16. bad nik upanyas aaga badhi rahal achhi, eeho bhag bad nik.

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  17. हम त आत्म विभोर भ गेलों अपन पाठकगणक प्रेम आ विश्वास देखि क, जे हमरा लिखैक लेल प्रेरणा बनी गेल अछि. हम अपन व्यस्तताक बावजुद अहाँ सभहक प्रेम देखि अहाँ सभ के निराश नहि करब. परंच, जओं कहियो देर भ जाय त अधलाह जुनि मानब.

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'विदेह' २३२ म अंक १५ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३२)

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