Wednesday, March 04, 2009

गजल- आशीष अनचिन्हार

गजल

यथा एन्नी तथा ओन्नी एन्नी-ओन्नी तथैव च
यथा माए तथा बाप मुन्ना-मुन्नी तथैव च

बलू हमर करेज जरैए अहाँ गीत लिखै छी
यथा भँइ तथा अच्छर पन्ना-पन्नी तथैव च

देखहक हो भाइ बोंगहक पोता कोना करै हइ
यथा मुल्ला तथा पंडित सुन्ना-सुन्नी तथैव च

देवतो जड़ि पकड़ै हइ मुहेँ देखि कए बचले रहू
यथा मौगी तथा भूत ओझा-गुन्नी तथैव च

बान्हि क भँइ दूरा पर मगबै ढ़ौआ पर ढ़ौआ
यथा समधी तथा समधीनी बन्ना-बन्नी तथैव च

की करबहक हो भगवान एमरी सभ के
यथा मरनाइ तथा जिनाइ रौदी-बुन्नी तथैव च

बचले रहिअह अनचिन्हार एहि गाम मे सदिखन
यथा साँप तथा मनुख जहर चिन्नी तथैव च

10 comments:

  1. आशीष जी, झुमा देलहुँ बलू।

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  2. यथा एन्नी तथा ओन्नी एन्नी-ओन्नी तथैव च
    यथा माए तथा बाप मुन्ना-मुन्नी तथैव च

    बलू हमर करेज जरैए अहाँ गीत लिखै छी
    यथा भँइ तथा अच्छर पन्ना-पन्नी तथैव च

    देखहक हो भाइ बोंगहक पोता कोना करै हइ
    यथा मुल्ला तथा पंडित सुन्ना-सुन्नी तथैव च

    देवतो जड़ि पकड़ै हइ मुहेँ देखि कए बचले रहू
    यथा मौगी तथा भूत ओझा-गुन्नी तथैव च

    बान्हि क भँइ दूरा पर मगबै ढ़ौआ पर ढ़ौआ
    यथा समधी तथा समधीनी बन्ना-बन्नी तथैव च

    की करबहक हो भगवान एमरी सभ के
    यथा मरनाइ तथा जिनाइ रौदी-बुन्नी तथैव च

    बचले रहिअह अनचिन्हार एहि गाम मे सदिखन
    यथा साँप तथा मनुख जहर चिन्नी तथैव च

    muda jaldi-jaldi post karu tathaiv cha

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  3. aashish ji pachhulke geet jeka atyttam

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  4. bah,
    बान्हि क भँइ दूरा पर मगबै ढ़ौआ पर ढ़ौआ
    यथा समधी तथा समधीनी बन्ना-बन्नी तथैव च

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  5. देखहक हो भाइ बोंगहक पोता कोना करै हइ
    यथा मुल्ला तथा पंडित सुन्ना-सुन्नी तथैव च

    hila delahu bhai

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  6. की करबहक हो भगवान एमरी सभ के
    यथा मरनाइ तथा जिनाइ रौदी-बुन्नी तथैव च

    बचले रहिअह अनचिन्हार एहि गाम मे सदिखन
    यथा साँप तथा मनुख जहर चिन्नी तथैव च

    he bhai katay rahi ahan

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  7. नाम अहांके बरु अनचिन्हार होय, मुदा ई रचना बड़ी देखार अछि
    शब्द छटा अछि ठेठ देहाती, मुदा एहि गजल में बड़ी निखार अछि

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  8. बहुत नीक प्रस्तुति।

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'विदेह' २३२ म अंक १५ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३२)

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