Tuesday, March 03, 2009

शब्द- सतीश चन्द्र झा

चिकड़ि रहल अछि शब्द आबि क’
निन्न पड़ल निश्बद्द राति मे।
अछि उदंड, उत्श्रृखल सबटा
नहि बूझत किछु बात राति मे।
केना करु हम बंद कान के
उतरि जाइत अछि हृदय वेदना।
बैसि जाइत छी तैं किछु लिखय
छीटल शब्द हमर अछि सेना।
कखनो कोरा मे घुसिया क’
बना लैत अछि कविता अपने
जुड़ल जाइत अछि क्लांत हृदय मे
शब्द शब्द के हाथ पकड़ने।
कविता मे किछु हमर शब्द के
नहि व्याकरणक ज्ञान बोध छै।
सबटा नग्न, उघार रौद मे
नेन्ना सन बैसल अबोध छै।
कखनो शब्द आबि क’ अपने
जड़ा दैत अछि प्रखर अग्नि मे।
कखनो स्नेह,सुरभि,शीतलता
जगा दैत अछि व्यग्र मोन मे।
क्षमा करब जौ कष्ट हुए त’
पढ़ि क’ कविता शब्दक वाणी।
शब्द ब्रह्म अछि नहि अछि दोषी
छी हमही किछु कवि अज्ञानी।

20 comments:

  1. अहाँक आगमन मोन झुमा देलक,

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  2. कखनो कोरा मे घुसिया क’
    बना लैत अछि कविता अपने
    जुड़ल जाइत अछि क्लांत हृदय मे
    शब्द शब्द के हाथ पकड़ने।
    कविता मे किछु हमर शब्द के
    नहि व्याकरणक ज्ञान बोध छै

    aha ha

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  3. चिकड़ि रहल अछि शब्द आबि क’
    निन्न पड़ल निश्बद्द राति मे।
    अछि उदंड, उत्श्रृखल सबटा
    नहि बूझत किछु बात राति मे।
    केना करु हम बंद कान के
    उतरि जाइत अछि हृदय वेदना।

    ahank aagman ehi blog ke sundar bana delak

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  4. shabdak chhi saudagar ahan rahi katay nukayal,
    bajoo baajoo kavi ji ahan,
    dosar kavita l;ay kahiya aayab

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  5. bad nik lagal ee padya

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  6. gambhir chintan se upjal kavita

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  7. gambhir kavita, bad nik lagal

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  8. चिकड़ा-भोकड़िक शब्द जाल में, सभ साहित्य समाहित अछि
    उत्कृष्ट शब्द आ एक एक अक्षर, सुंदर आ अनुशासित अछि

    नव नव रचना पढ़ितहुँ मैथिलि के, से नेना में रहय उमंग
    इन्टरनेट के एहि विकसित युग में, छी गौरवान्वित पाबि अपने सबहक संग

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  9. Dayakant9:35 PM

    सतीश चन्द्र झा जी अपनेक कविता के बखान करवाक लेल सब्द नहीं अच्छी

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  10. Amit Kumar Jha7:39 PM

    शब्द ब्रह्म अछि नहि अछि दोषी
    छी हमही किछु कवि अज्ञानी।........Hamar favourite line.

    Bahut neek kavita ai'chh.Humara bad neek lagal.Ahaan ke kavita sab kavita ke gangotri laig rahal ai'chh. Ahan शब्द se shuruat aur शब्द se aant ka deliyei kavita ke...theek baat kahliyei.. शब्द brahma ai'chh.

    Keep it up. We are yearning for few more lines to flow from your pen.

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  11. आइ हमरा अपना पर गर्व भय रहल अछि की हम आहॉ के भगिनी छी। बच्चे सॅ आहॉ के कविता अौर गीत सुनि कय और गाबि कय पैघ भेलौ॑। आइ महसूस भेल कि आहॉ के इ शब्दक सेना असाधारण अछि। ओहि मे विश्व विजय के छमता छै। हमर सब गोटा के आहॉ सॅ येह अनुरोध अछि कि आहॉ अपन सेना के लय आगू बढू और एक नव युगक के निर्माण करू।

    रजनी पल्लवी (पम्मी)

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  12. Anonymous9:03 AM

    bahu t nik lagal ...kavita aa sabd rachana.

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  13. Ashish Kumar Jha (Vibhujee)12:00 PM

    Ahan apan rachna san shabd ke jivit kay deliyaik. Jena jena kavita hum aga padhait gelaun.... anubhav bhel, kavi ta matra eakta madhyam chhaith sabta karya tay sabd kay rahal achhi.Sabdak sunder, sajiv chitran achhi Eak eak shabd santulit aa sundar achhi.

    Hum ki khaoo ahaan ke...
    padhait padhait gala bhari ayal

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  14. shabdak shakti manav lel sabh se paigh uplabdhi

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  15. Tutal bikhral, shabdak joral,
    chi senani shbdak kavivar ,
    Trishna Mithya Ke Tori chalu,
    Likhu ahina mithila Dinkar..

    Shabdak Atikraman aa bilupt hoit mithili kavita ke ek ta nav roop devak lel dhanyabad. Pushpak mala jenka ek ek shabd guthal.Shshakt abhivyakti aa hridaysparshi muda kathor prahar ohi samuday par je shabdak marm hriday hot karait chaith.
    ..Ehina Nav nav tarksangat rachna likhu , hamra taraph say rating achi ***********....

    ReplyDelete
  16. Shabdak Atikraman aa bilupt hoit mithili kavita ke ek ta nav roop devak lel dhanyabad. Pushpak mala jenka ek ek shabd guthal.Shshakt abhivyakti aa hridaysparshi muda kathor prahar ohi samuday par je shabdak marm hriday hot karait chaith.
    ..Ehina Nav nav tarksangat rachna likhu , hamra taraph say rating achi ***********....
    Hats off
    Alok from Dubai

    ReplyDelete
  17. pragyan kr jha7:47 AM

    your two poem in maithili touched the very core of my heart.Specially "nav aa jeevan" through which you have drawn a vivid picture of life and death ,appled me more. Hoping you shall be serving maithili in future also and waiting for your another poem.

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  18. बहुत नीक प्रस्तुति।

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'विदेह' २३२ म अंक १५ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३२)

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