Monday, February 16, 2009

बतहिया पुछै छै सवाल. दयाकान्त ‘‘दीपक‘‘

सगर नगर अछि मुह लटकौने
“शर्म सॅ सबकिया सिर झुकौने
कोन दोश हमर अछि अहिमे
पति के म़त्यु भेल अकाल
बतहिया पुछै छै सवाल
चैदह बितल चढिते पंद्रह
भ गेल हमर विवाह
सोलह बरख के मुॅह नहि देखलहु
भ गेल जीवन बदहाल
बतहिया पुछै छै सवाल
नाम अलच्छी सासु पुकारैथ
ससुर सदिखन कुलबोरनी
ननौद, दिअर मुॅह देख भागैथ
बितत कोना जीवन बेतरनी
बतहिया पुछै छै सवाल
सगर समाज मे चर्चा एकेर्टा
अबिते खेलकै “ाुषील बेटा
हमरा देखि रस्ता सब काटय
भ जाय किया यात्रा खराब
बतहिया पुछै छै सवाल
माय बाप नहि घुरी के ताकय
भौया-भौजी मुॅह नुकावय
नोर सुखायल नींद हरायल
एक-एक पल भेल पहाड
बतहिया पुछै छै सवाल
सास-ससुर सेट छिरकैया
ननद-दिअर परफ्रयुम लगबैया
कुकुरो साबुन रोज लगबैया
हमरा बेर में हैया बबाल
बतहिया पुछै छै सवाल
कनियॉ मरत बरत नहि दोश
वर मुर्हला पर कनियेक दोश
बर चाहे कतेको विवाह करताह
किया नहि होयत विधवा विवाह
बतहिया पुछै छै सवाल

दयाकान्त ‘‘दीपक‘‘

6 comments:

  1. सास-ससुर सेट छिरकैया
    ननद-दिअर परफ्रयुम लगबैया

    bah dayakant ji, apoorva anand aabi gel

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  2. dayanand ji svagat achhi, sochi vichari aakhir me ahan rachna post kaiye delahu aa seho jhamkauaa
    सगर नगर अछि मुह लटकौने
    “शर्म सॅ सबकिया सिर झुकौने
    कोन दोश हमर अछि अहिमे
    पति के म़त्यु भेल अकाल
    बतहिया पुछै छै सवाल
    चैदह बितल चढिते पंद्रह
    भ गेल हमर विवाह
    सोलह बरख के मुॅह नहि देखलहु
    भ गेल जीवन बदहाल
    बतहिया पुछै छै सवाल
    नाम अलच्छी सासु पुकारैथ
    ससुर सदिखन कुलबोरनी
    ननौद, दिअर मुॅह देख भागैथ
    बितत कोना जीवन बेतरनी
    बतहिया पुछै छै सवाल
    सगर समाज मे चर्चा एकेर्टा
    अबिते खेलकै “ाुषील बेटा
    हमरा देखि रस्ता सब काटय
    भ जाय किया यात्रा खराब
    बतहिया पुछै छै सवाल
    माय बाप नहि घुरी के ताकय
    भौया-भौजी मुॅह नुकावय
    नोर सुखायल नींद हरायल
    एक-एक पल भेल पहाड
    बतहिया पुछै छै सवाल
    सास-ससुर सेट छिरकैया
    ननद-दिअर परफ्रयुम लगबैया
    कुकुरो साबुन रोज लगबैया
    हमरा बेर में हैया बबाल
    बतहिया पुछै छै सवाल
    कनियॉ मरत बरत नहि दोश
    वर मुर्हला पर कनियेक दोश
    बर चाहे कतेको विवाह करताह
    किया नहि होयत विधवा विवाह
    बतहिया पुछै छै सवाल

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  3. ehi blogak rachnashilta lajavab achhi, ehi sabh prayas ke chalte maithili jivit achhi

    ReplyDelete
  4. bad nik kavita lagal, ehina nirantar post karait rahu.

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  5. dayakant deepakji,
    svagat achhi,
    hilkor macha delahu

    ReplyDelete
  6. दयाकांजी ब्लॉगमे अहाँक स्वागत अछि।
    पहिले रचनासँ अहाँ हृदय जीति लेलहुँ।

    ReplyDelete

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'विदेह' २३२ म अंक १५ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३२)

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