Saturday, February 21, 2009

प्रबोध सम्मान 2009 / फरबरी 22, 2009 केँ 4 बजे अपराह्नमे देल गेल / कंप्यूटर आ मैथिली


मैथिलीक सभसँ प्रतिष्ठित प्रबोध सम्मान 2009 क लेल श्री राजमोहन झाकेँ स्वास्ति फाउंडेशन द्वारा पटनाक विद्यापति भवनमे 22 फरबरी 2009 केँ 4 बजे अपराह्नसँ शुरु भेल कार्यक्रममे देल गेल। एहिमे स्मृति चिन्ह आ एक लाख टाका देल जाइत अछि। श्री भीमनाथ झा, उदय नारायण सिंह, विजय बहादुर सिंह, अभय नारायण सिंह आ ढेर रास गणमान्य लोक एहि अवसरपर उपस्थित छलाह।


मैथिलीक भारतीय ओपेन ऑफिस, मल्टी प्रोटोकोल मेसेंजर,कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम, स्क्राइबस, सनबर्ड कैलेंडर, ई-मेल क्लाइंट, की-बोर्ड ड्राइवर, फॉंट, वेब ब्राउसर, आ द्विभाषीय डिक्शनरी आब आबि गेल अछि। ई सम्भव भेल अछि टेक्नोलोजी डेवेलपमेंट फॉर इंडियन लैंगवेजेज प्रोग्राम, सेंटर फॉर डेवेलोपमेंट ऑफ एडवांस्ड कंप्युटिंग आ साहित्य अकादमीक सहयोगक परिणाम स्वरूप।
मैथिली साफ्टवेयर अओजार आ फान्ट नाम्ना एहि सी.डी.पर विद्यापतिक फोटो लागल अछि।
ई सोफ्टवेयर मैथिली साफ्टवेयर अओजार आ फान्ट लिंकपर उपलब्ध अछि।

मैथिली-अंग्रेजी/ अंग्रेजी-मैथिली शब्दकोशक ms-sql server आधारित सर्च डिक्शनरी, जाहिमे अंतर्राष्ट्रीय फोनेटिक अल्फाबेट आ मिथिलाक्षरक प्रयोग देवनागरी आ रोमनक संग भेल अछि विदेह कोश एहि लिंकपर उपलब्ध अछि। एहिमे कम्प्यूटर आ इंटरनेट शब्दावलीक सेहो अटाबेश भेल अछि।

5 comments:

  1. नीक जानकारी।

    ReplyDelete
  2. Anonymous8:34 PM

    cdac font me kono khas visheshta nahi achhi, c-dac dictionary seho samanya muda bahut kal se anubhav kael ja rahal kami poora bhel. videha kosh ker sambhavna bad beshi, scientific, kanek proof ke jaroorati,

    shyam manohar

    ReplyDelete
  3. mithilakshar par c-dac dvara kaj nahi hebak karan bujhba me nahi aayal

    ReplyDelete
  4. prabodh samman lel rajmohan ji ke badhai

    ReplyDelete
  5. rajmohan ji katha shilp ke nav disha me lay gelah, hunak aarambh patrika seho maithili patrakarita me sthan rakhait achhi

    ReplyDelete

"विदेह" प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका http://www.videha.co.in/:-
सम्पादक/ लेखककेँ अपन रचनात्मक सुझाव आ टीका-टिप्पणीसँ अवगत कराऊ, जेना:-
1. रचना/ प्रस्तुतिमे की तथ्यगत कमी अछि:- (स्पष्ट करैत लिखू)|
2. रचना/ प्रस्तुतिमे की कोनो सम्पादकीय परिमार्जन आवश्यक अछि: (सङ्केत दिअ)|
3. रचना/ प्रस्तुतिमे की कोनो भाषागत, तकनीकी वा टंकन सम्बन्धी अस्पष्टता अछि: (निर्दिष्ट करू कतए-कतए आ कोन पाँतीमे वा कोन ठाम)|
4. रचना/ प्रस्तुतिमे की कोनो आर त्रुटि भेटल ।
5. रचना/ प्रस्तुतिपर अहाँक कोनो आर सुझाव ।
6. रचना/ प्रस्तुतिक उज्जवल पक्ष/ विशेषता|
7. रचना प्रस्तुतिक शास्त्रीय समीक्षा।

अपन टीका-टिप्पणीमे रचना आ रचनाकार/ प्रस्तुतकर्ताक नाम अवश्य लिखी, से आग्रह, जाहिसँ हुनका लोकनिकेँ त्वरित संदेश प्रेषण कएल जा सकय। अहाँ अपन सुझाव ई-पत्र द्वारा ggajendra@videha.com पर सेहो पठा सकैत छी।

"विदेह" मानुषिमिह संस्कृताम् :- मैथिली साहित्य आन्दोलनकेँ आगाँ बढ़ाऊ।- सम्पादक। http://www.videha.co.in/
पूर्वपीठिका : इंटरनेटपर मैथिलीक प्रारम्भ हम कएने रही 2000 ई. मे अपन भेल एक्सीडेंट केर बाद, याहू जियोसिटीजपर 2000-2001 मे ढेर रास साइट मैथिलीमे बनेलहुँ, मुदा ओ सभ फ्री साइट छल से किछु दिनमे अपने डिलीट भऽ जाइत छल। ५ जुलाई २००४ केँ बनाओल “भालसरिक गाछ” जे http://www.videha.com/ पर एखनो उपलब्ध अछि, मैथिलीक इंटरनेटपर प्रथम उपस्थितिक रूपमे अखनो विद्यमान अछि। फेर आएल “विदेह” प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका http://www.videha.co.in/पर। “विदेह” देश-विदेशक मैथिलीभाषीक बीच विभिन्न कारणसँ लोकप्रिय भेल। “विदेह” मैथिलक लेल मैथिली साहित्यक नवीन आन्दोलनक प्रारम्भ कएने अछि। प्रिंट फॉर्ममे, ऑडियो-विजुअल आ सूचनाक सभटा नवीनतम तकनीक द्वारा साहित्यक आदान-प्रदानक लेखकसँ पाठक धरि करबामे हमरा सभ जुटल छी। नीक साहित्यकेँ सेहो सभ फॉरमपर प्रचार चाही, लोकसँ आ माटिसँ स्नेह चाही। “विदेह” एहि कुप्रचारकेँ तोड़ि देलक, जे मैथिलीमे लेखक आ पाठक एके छथि। कथा, महाकाव्य,नाटक, एकाङ्की आ उपन्यासक संग, कला-चित्रकला, संगीत, पाबनि-तिहार, मिथिलाक-तीर्थ,मिथिला-रत्न, मिथिलाक-खोज आ सामाजिक-आर्थिक-राजनैतिक समस्यापर सारगर्भित मनन। “विदेह” मे संस्कृत आ इंग्लिश कॉलम सेहो देल गेल, कारण ई ई-पत्रिका मैथिलक लेल अछि, मैथिली शिक्षाक प्रारम्भ कएल गेल संस्कृत शिक्षाक संग। रचना लेखन आ शोध-प्रबंधक संग पञ्जी आ मैथिली-इंग्लिश कोषक डेटाबेस देखिते-देखिते ठाढ़ भए गेल। इंटरनेट पर ई-प्रकाशित करबाक उद्देश्य छल एकटा एहन फॉरम केर स्थापना जाहिमे लेखक आ पाठकक बीच एकटा एहन माध्यम होए जे कतहुसँ चौबीसो घंटा आ सातो दिन उपलब्ध होअए। जाहिमे प्रकाशनक नियमितता होअए आ जाहिसँ वितरण केर समस्या आ भौगोलिक दूरीक अंत भऽ जाय। फेर सूचना-प्रौद्योगिकीक क्षेत्रमे क्रांतिक फलस्वरूप एकटा नव पाठक आ लेखक वर्गक हेतु, पुरान पाठक आ लेखकक संग, फॉरम प्रदान कएनाइ सेहो एकर उद्देश्य छ्ल। एहि हेतु दू टा काज भेल। नव अंकक संग पुरान अंक सेहो देल जा रहल अछि। विदेहक सभटा पुरान अंक pdf स्वरूपमे देवनागरी, मिथिलाक्षर आ ब्रेल, तीनू लिपिमे, डाउनलोड लेल उपलब्ध अछि आ जतए इंटरनेटक स्पीड कम छैक वा इंटरनेट महग छैक ओतहु ग्राहक बड्ड कम समयमे ‘विदेह’ केर पुरान अंकक फाइल डाउनलोड कए अपन कंप्युटरमे सुरक्षित राखि सकैत छथि आ अपना सुविधानुसारे एकरा पढ़ि सकैत छथि।
मुदा ई तँ मात्र प्रारम्भ अछि।
अपन टीका-टिप्पणी एतए पोस्ट करू वा अपन सुझाव ई-पत्र द्वारा ggajendra@videha.com पर पठाऊ।

'विदेह' २३१ म अंक ०१ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३१)

ऐ  अंकमे अछि :- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१. जगदीश प्रसाद मण्‍डलक चारिटा लघु कथ ा २.२. रबिन्‍द्र नारायण मिश्रक चारिटा आलेख ...