Saturday, January 17, 2009

सत्यानास केलक बिमारी - मदन कुमार ठाकुर

(हम आइ एक महिना सँ हॉस्पिटल मे बेड रेस्ट यानी बीमार आवस्था मे छी ! जाहि सँ कतेक फोन, कतेक ई-मेल, कतेको फरमाईस, कतेको मज़बूरी, कतेको तगेदा, कतेको उदासी, कतेको घबराहट, आ बहुतो आर्थिक स्थिति आय हमरा सामने आइब गेल अछि ! जकर उदाहरण हम मैथिल आर मिथिला (मैथिली ब्लॉग) पा लs के पाठक गनक समक्ष हाजिर छी !)


यमराजक याद आ संदेश .....

हमरा बीमार अवस्था मे यमराजक संदेश सेहो बुझै मे आबैत छल ! किएकी पुरा एक महिना बिमारी के भs गेल छल ! बिमारी छूटए के नाम नञि लैत छल लागैत छल जे कही अहि बिमारीक कारण हम हुनकर सिकार नञि भs जाय ! यदि एहेंन नौबत आयत तँ हमर घर संसार सभ चौपट भस जायत ! ई बात सोचि - सोचि के हम आर बेसी बिमार पड़ि जाइत छलहुँ !


कम्पनीक तरफ सँ फोन ....

हमरा बिमार अबस्था मे कम्पनीक तरफ से सबसे बेसी फोन आबैत छल जे ... आप को केवल १५ दिन का छुट्टी मिला था ! मगर अब पुरे एक महिना से भी ज्यादा हो गया हैं ! अगर आप इस सप्ताह ड्युटी ज्वाइन नहीं करेगे तो आपको कम्पनी के निष्कासित कर दिया जायेगा .... ई बात फोन से सुइन सुइन के हम आर बेसी बिमार पैर जायत छलो !


बौवा आ बुच्चीक स्कुल सँ नोटिक .....

हमरा बिमार अबस्था मे बौवा आ बुच्चीक स्कुल सँ सेहो नोटिक आइब गेल छल, लिखल छल जे ... आपके लड़के और लड़की की स्कुल फिस और बस फिस पिछले महिने से जमा नहीं हुवा हैं ! जिसके चलते आप के दोनों बच्चो को स्कुल से निकाल दिया जायेगा ! अन्यथा फिस जमा करने का यथा शीघ्र कस्ट करे ... हमर बौवा आ बुच्ची आब कोना स्कुल में पढ़त लागैत अछि जे आब धिया - पुताक जीवन ख़राब भs जायत ई नोटिस पैढ़ - पैढ़ के हम आर बेसी बिमार पैर जायत छलो !


दोकानदार लालाक तगेदा......

हम बिमार अबस्था में (हॉस्पिटल) में रही ताहि समय मे दोकानदार लालाक सेहो तगेदा आबिगेल छल, ओ हमर अर्धांग्नी के कही गेलैन जे ... आपका बहीखाता का हिसाब पिछले महिना से ही बांकी हैं ! आप जब दोनों महीने के रुपैया जमा करायेगे तभी हम आगे से रासन का सामान दे पायेगे अन्यथा दुसरे दूकान दार से संपर्क करे ! ई समाद हमरा कान मे पहुंचल, सोच्लो आब तs हमर घर के चूल्हा सेहो कोना कs जरत ! ई समाद सुनी सुनी के हम आर बेसी बिमार पैर जायत छलो !


गाम - घरक चिठ्ठी आ फोन ....

हम बिमार अबस्था मे (हॉस्पिटल) में रही तान्ही समय मे गाम से सेहो चिठ्ठी आबी गेल छल जाही में लिखल अछि .... जे बोआ अहाँ त देखते आ सूनैते हेब टी।वी यही समाचार मे हे हर साल गाम घर में बैढ़ आबई छैक तहि से धान पान ही हेतै सगे घर सेहो खैस परल अछि यानी गाम मे सभ तरहे बेसाहे चलैत अछि ! बाबु आर माय भैया सभ अहि के आस लगेना बैसल छैथ ! जे दिल्ली सs बौआ कहिया पाई पठेता ! गाम घरक ई चिंता सुनी सुनी आ पैढ़ पैढ़ के हम आर बेसी बिमार पैर जायत छलो !


बैंक से फोन आ ईमेल ....

एतबे नै हमर बीमारीक अबस्था में कतेक बैंक से सेहो फोन आ ईमेल स information के देल गेल छल ! जे अभी तक आप के किसी भी क्रेडिट कार्ड का पेमेंट पिछले दो महीने से नहीं हुवा हैं ! जिस के चलते आप के क्रेडिट कार्ड को स्थाई रूप से बंद कर दिया जायेगा अन्यथा पेमेंट जारी रखे ! बार बार हम ई सोचैत छलो जे आगूक पेमेंट हॉस्पिटलक हम कोना के करब ! ई information पैढ़ पैढ़ के हम आर बेसी बिमार पैर जायत छलो !


LIC कम्पनिक तरफ से नोटिक .......

हमरा बिमारी अबस्था मे LIC के एजेंटक नोटिस सेहो आबिगेल छल कहैत छल जे ठाकुरजी आपके तीनो LIC का किस्त दो दो महिना से पिछे चल रहा हैं ! अगर आप को इस बिच (समय) में कुछ हो गया तो इस का जिम्मेवार LIC कम्पनी नहीं होगा ! अन्यथा तीनो पॉलिसी का पेमेंट जारी रखे ! आप का आभारी LIC एजेंट.... ई LIC के नोटिस देख देख आ सुनी सुनी के हम आर बेसी बिमार पैर जायत छलो ! जे हमरा मरलाक बाद हमर परिवारक की गति हेत !


गाम से पाई आबैत छल से भेल चोरी ....

गाम मे जखन सभ के धीरे धीरे पता चललैन जे बौआ एक महिना से हॉस्पिटल मे भरती अछि ! ओकर आर्थिक स्थिति बड ख़राब छैक, त बाबु अपन दुई बिघा खेत कs भरना लगे देलैथ ई सोइच के जे बौआ जखन ठिक भs जेत ते भरना खेत छोरे लेब ! से पाई लs के बाबु आ भैया आबैत छलैथ ! रस्ते में कुनू चोर ट्रेन में हुनकर बेग चोरे लेल्कैन ! ओताही से ओ दुनु आदमी घर वापस चली गेला ! ई खबर जखन सुनलो हम आर बेसी बिमार पैर गेलो !


डॉक्टरक आदेश ....

डॉक्टरक आदेश सेहो भेट गेल छल जे इनका बिमारी का ईलाज हमारे हॉस्पिटल में नहीं हो सकता ! क्योकि हमारे समझ मे यह नहीं आता की इनको बिमारी कौन स हैं ! इसको किसी तांत्रिक जी के पास ले जाए वही इनका कुछ उपचार कर सकेगे ! अन्यथा इनका जान जा सकता हैं ! ई बात हम कान से सुनी सुनी के आर बेसी बिमार भs गेलो जे हमर परिवार, हमर खानदान, हमर समाजक लोक हमरा लेs केs कते कते दर दर भटकत !


गाम से भगतक आगमन .....

गामक लोक के जखन हमर बिमारीक कुन्नु चारा आस नै भेतलैन त तखने हमर बाबु भगत काका के कहलखिन जे दिल्ली मे हमर बौआ बहुत बिमार अछि से अहाँ ओतय चलू ! अहाँ भैरब बाबाक फूल आ बिभुत बौआ के देबैय तहि से हमर बौआ ठिक भs जायत ! भगत काका दिल्ली एलैथ हमरा फूल बिभुत देलैथ तखने से हमर सभ बिमारी धीरे धीरे दूर हुवे लागल ...



अहि दुवारे कहल गेल अछि जे ...


नै वैध डॉक्टरक, भेल भगता के काज !

शहरी रोगी के, भेल गामक इलाज !!



जय मैथिली, जय मिथिला,
मदन कुमार ठाकुर, कोठिया पट्टीटोल, झंझारपुर (मधुबनी) बिहार - ८४७४०४,
मोबाईल +919312460150 , ईमेल - madanjagdamba@rediffmail.com

5 comments:

  1. आब स्वास्थ्य केहन अछि। कथा नीक लागल।

    ReplyDelete
  2. Anonymous6:15 PM

    hamar company me seho yaih hal achhi
    कम्पनीक तरफ सँ फोन ....
    हमरा बिमार अबस्था मे कम्पनीक तरफ से सबसे बेसी फोन आबैत छल जे ... आप को केवल १५ दिन का छुट्टी मिला था ! मगर अब पुरे एक महिना से भी ज्यादा हो गया हैं ! अगर आप इस सप्ताह ड्युटी ज्वाइन नहीं करेगे तो आपको कम्पनी के निष्कासित कर दिया जायेगा .... ई बात फोन से सुइन सुइन के हम आर बेसी बिमार पैर जायत छलो !

    m k karna

    ReplyDelete
  3. बड्ड नीक लागल अहाँक प्रस्तुति मदन जी।

    ReplyDelete
  4. बड्ड नीक लागल अहाँक प्रस्तुति मदन जी।
    आप को केवल १५ दिन का छुट्टी मिला था ! मगर अब पुरे एक महिना से भी ज्यादा हो गया हैं ! अगर आप इस सप्ताह ड्युटी ज्वाइन नहीं करेगे तो आपको कम्पनी के निष्कासित कर दिया जायेगा .... ई बात फोन से सुइन सुइन के हम आर बेसी बिमार पैर जायत छलो !

    ReplyDelete
  5. Anonymous7:28 PM

    ई बात फोन से सुइन सुइन के हम आर बेसी बिमार पैर जायत छलो !

    Thike kahait Chhi madan ji

    ReplyDelete

"विदेह" प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका http://www.videha.co.in/:-
सम्पादक/ लेखककेँ अपन रचनात्मक सुझाव आ टीका-टिप्पणीसँ अवगत कराऊ, जेना:-
1. रचना/ प्रस्तुतिमे की तथ्यगत कमी अछि:- (स्पष्ट करैत लिखू)|
2. रचना/ प्रस्तुतिमे की कोनो सम्पादकीय परिमार्जन आवश्यक अछि: (सङ्केत दिअ)|
3. रचना/ प्रस्तुतिमे की कोनो भाषागत, तकनीकी वा टंकन सम्बन्धी अस्पष्टता अछि: (निर्दिष्ट करू कतए-कतए आ कोन पाँतीमे वा कोन ठाम)|
4. रचना/ प्रस्तुतिमे की कोनो आर त्रुटि भेटल ।
5. रचना/ प्रस्तुतिपर अहाँक कोनो आर सुझाव ।
6. रचना/ प्रस्तुतिक उज्जवल पक्ष/ विशेषता|
7. रचना प्रस्तुतिक शास्त्रीय समीक्षा।

अपन टीका-टिप्पणीमे रचना आ रचनाकार/ प्रस्तुतकर्ताक नाम अवश्य लिखी, से आग्रह, जाहिसँ हुनका लोकनिकेँ त्वरित संदेश प्रेषण कएल जा सकय। अहाँ अपन सुझाव ई-पत्र द्वारा ggajendra@videha.com पर सेहो पठा सकैत छी।

"विदेह" मानुषिमिह संस्कृताम् :- मैथिली साहित्य आन्दोलनकेँ आगाँ बढ़ाऊ।- सम्पादक। http://www.videha.co.in/
पूर्वपीठिका : इंटरनेटपर मैथिलीक प्रारम्भ हम कएने रही 2000 ई. मे अपन भेल एक्सीडेंट केर बाद, याहू जियोसिटीजपर 2000-2001 मे ढेर रास साइट मैथिलीमे बनेलहुँ, मुदा ओ सभ फ्री साइट छल से किछु दिनमे अपने डिलीट भऽ जाइत छल। ५ जुलाई २००४ केँ बनाओल “भालसरिक गाछ” जे http://www.videha.com/ पर एखनो उपलब्ध अछि, मैथिलीक इंटरनेटपर प्रथम उपस्थितिक रूपमे अखनो विद्यमान अछि। फेर आएल “विदेह” प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका http://www.videha.co.in/पर। “विदेह” देश-विदेशक मैथिलीभाषीक बीच विभिन्न कारणसँ लोकप्रिय भेल। “विदेह” मैथिलक लेल मैथिली साहित्यक नवीन आन्दोलनक प्रारम्भ कएने अछि। प्रिंट फॉर्ममे, ऑडियो-विजुअल आ सूचनाक सभटा नवीनतम तकनीक द्वारा साहित्यक आदान-प्रदानक लेखकसँ पाठक धरि करबामे हमरा सभ जुटल छी। नीक साहित्यकेँ सेहो सभ फॉरमपर प्रचार चाही, लोकसँ आ माटिसँ स्नेह चाही। “विदेह” एहि कुप्रचारकेँ तोड़ि देलक, जे मैथिलीमे लेखक आ पाठक एके छथि। कथा, महाकाव्य,नाटक, एकाङ्की आ उपन्यासक संग, कला-चित्रकला, संगीत, पाबनि-तिहार, मिथिलाक-तीर्थ,मिथिला-रत्न, मिथिलाक-खोज आ सामाजिक-आर्थिक-राजनैतिक समस्यापर सारगर्भित मनन। “विदेह” मे संस्कृत आ इंग्लिश कॉलम सेहो देल गेल, कारण ई ई-पत्रिका मैथिलक लेल अछि, मैथिली शिक्षाक प्रारम्भ कएल गेल संस्कृत शिक्षाक संग। रचना लेखन आ शोध-प्रबंधक संग पञ्जी आ मैथिली-इंग्लिश कोषक डेटाबेस देखिते-देखिते ठाढ़ भए गेल। इंटरनेट पर ई-प्रकाशित करबाक उद्देश्य छल एकटा एहन फॉरम केर स्थापना जाहिमे लेखक आ पाठकक बीच एकटा एहन माध्यम होए जे कतहुसँ चौबीसो घंटा आ सातो दिन उपलब्ध होअए। जाहिमे प्रकाशनक नियमितता होअए आ जाहिसँ वितरण केर समस्या आ भौगोलिक दूरीक अंत भऽ जाय। फेर सूचना-प्रौद्योगिकीक क्षेत्रमे क्रांतिक फलस्वरूप एकटा नव पाठक आ लेखक वर्गक हेतु, पुरान पाठक आ लेखकक संग, फॉरम प्रदान कएनाइ सेहो एकर उद्देश्य छ्ल। एहि हेतु दू टा काज भेल। नव अंकक संग पुरान अंक सेहो देल जा रहल अछि। विदेहक सभटा पुरान अंक pdf स्वरूपमे देवनागरी, मिथिलाक्षर आ ब्रेल, तीनू लिपिमे, डाउनलोड लेल उपलब्ध अछि आ जतए इंटरनेटक स्पीड कम छैक वा इंटरनेट महग छैक ओतहु ग्राहक बड्ड कम समयमे ‘विदेह’ केर पुरान अंकक फाइल डाउनलोड कए अपन कंप्युटरमे सुरक्षित राखि सकैत छथि आ अपना सुविधानुसारे एकरा पढ़ि सकैत छथि।
मुदा ई तँ मात्र प्रारम्भ अछि।
अपन टीका-टिप्पणी एतए पोस्ट करू वा अपन सुझाव ई-पत्र द्वारा ggajendra@videha.com पर पठाऊ।

'विदेह' २३२ म अंक १५ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३२)

ऐ  अंकमे अछि :- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१. जगदीश प्रसाद मण्‍डलक  दूटा लघु कथा   कोढ़िया सरधुआ  आ  त्रिकालदर ्शी २.२. नन...