Friday, December 12, 2008

जीवनक सार्थकता - कथा सागर - जितमोहन झा (जितू)

एक बेर महात्मा बुध्द अपन शिष्य आनंदक संग कतहु जाइत छलाह ! अचानक रस्ता मे हुनका बहुत जोर प्यास लगलैन ! आनंदसँ कहलखिन 'वत्स' कतहुसँ कनेक जल आनू हमरा बड जोरक प्यास लागल अछि ! आनंद नदीक किनार पहुँचला, एतबे मेs एक बैलगाड़ी नदीसँ गुजरलनि जाहिसँ नदीक जल दुषित भ' गेलनि ! आनंद वापस लौट गेलाह ! बुध्दसँ कहलखिन "गुरुदेव नदी सँs जा हम जल भरितहुँ ताबे s एक बैलगाड़ी ओहि से गुजरल जाहिसँ नदीक जल पूरा दुषित भ' गेल ! हम कतहु आर जगह सँ जल आनबा केs प्रयास करैत छी !" मुदा महात्मा बुद्ध हुनका फेर ओही नदीक तट पर जाय लेल कहलखिन ! नदीक जल एखनो धरी साफ नञि भेल छलनि, आनंद फेर लौट गेलाह ! गुरुदेव फेर हुनका ओही जगह भेजलखिन चारिम बेर आनंद जखन नदीक तट पर पहुँचलाह तँ नदीक जल शीशा के सामान चमकैत रहनि ! गंदगी के नामों निसान नञि रहनि ! जखन जल भरिकेँ लौटलाह तँ गुरुदेव (महात्मा बुद्ध) हुनका कहलखिन, "हमर सबहक जीवनक विचारकेँ बैलगाड़ी दिन - प्रतिदिन दुषित करैत अछि ! आर हम सब भागयs लागए छी ! यदि भागय के बजाय नदी केँ स्वच्छ होई केs प्रतीक्षा करी तँ जीवन सार्थक भ' जाएत .....

आदर्शवादी शिक्षक - कथा सागर - जितमोहन झा (जितू)

प्रसिद्ध क्रांतिकारी सूर्यसेन बंगालक एक स्कुल मे अध्यापक रहथिन ! ओहि समय स्कुल मे वार्षिक परीक्षा चलैत छल ! जै रूम मे सूर्यसेनक ड्यूटी लगलनि ओहि रूम मे प्रधानाध्यापकक बेटा सेहो परीक्षा दैत छल ! सूर्यसेन हुनका नक़ल करैत पकड़लखिन परीक्षा सँ बाहर केँ देलखिन ! जखन परीक्षाक परिणाम आयल तँ प्रधानाध्यापकक बेटा फेल छल ! स्कुलक सभ अध्यापक s लगलनि जे आब सूर्यसेनक नौकरी गेलनि ! एक दिन अचानक सूर्यसेनकेँ प्रधानाध्यापकक बुलाबा एलनि !

प्रधानाध्यापक सूर्यसेन s स्नेह पूर्वक कहलखिन "हमरा जैनकेँ ख़ुशी भेल जे हमर स्कुल में आहा जेहेंन कर्तव्यनिष्ठ आदर्शवादी अध्यापक छैथ ! जे हमर (प्रधानाध्यापकक) बेटोकेँ दंड दै मेंs संकोच नञि केलैथ ! यदि अपने ओकरा नक़ल केला के बादो पास s देतो तँ हम अपनेक बर्खास्त क's देतहु" तहि पर सूर्यसेन तपाकसँ कहलखिन "यदि अपने हुनका पास करै केs लेल मजबूर करतो s हम इस्तीफा द् देतो!" सूर्यसेन अपन जेब s त्यागपत्र निकैल केs हुनका (प्रधानाध्यापक) केँ देखबैत कहलखिन, आय हम एकरा अपन संग आनने छलो ! तहि दिन सेs प्रधानाध्यापक महोदय सूर्यसेनक प्रशंसक बैन गेलाह ......

'विदेह' २३१ म अंक ०१ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३१)

ऐ  अंकमे अछि :- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१. जगदीश प्रसाद मण्‍डलक चारिटा लघु कथ ा २.२. रबिन्‍द्र नारायण मिश्रक चारिटा आलेख ...