Monday, October 13, 2008

‘वि दे ह’ प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका २० म अंक

मानुषिमिह संस्कृताम्
अहाँकेँ सूचित करैत हर्ष भऽ रहल अछि, जे ‘विदेह’ प्रथम मैथिली पाक्षिक ई पत्रिका केर २० टा अंक http://www.videha.co.in/
पर ई-प्रकाशित भऽ चुकल अछि। "वि दे ह" प्रथम मैथिली पाक्षिक ई-पत्रिका मासक १ आऽ १५ तिथिकेँ http://www.videha.co.in/ पर ई-प्रकाशित होइत अछि। एकरा एखन धरि (१ जनवरी २००८ सँ) ५९ देशसँ ८५,२०१ बेर देखल गेल अछि (गूगल एनेलेटिक्स डाटा)। विदेहक सालाना अंक प्रिंट फॉर्ममे सेहो आएत। इंटरनेट पर ई-प्रकाशित करबाक उद्देश्य छल एकटा एहन फॉरम केर स्थापना जाहिमे लेखक आऽ पाठकक बीच एकटा एहन माध्यम होए जे कतहुसँ चौबीसो घंटा आऽ सातो दिन उपलब्ध होए। जाहिमे प्रकाशनक नियमितता होए आऽ जाहिसँ वितरण केर समस्या आऽ भौगोलिक दूरीक अंत भऽ जाय। फेर सूचना-प्रौद्योगिकीक क्षेत्रमे क्रांतिक फलस्वरूप एकटा नव पाठक आऽ लेखक वर्गक हेतु, पुरान पाठक आऽ लेखकक संग, फॉरम प्रदान कएनाइ सेहो एकर उद्देश्य छ्ल। एहि हेतु दू टा काज भेल। नव अंकक संग पुरान अंक सेहो देल जा रहल अछि। पुरान अंक pdf स्वरूपमे डाउनलोड कएल जा सकैत अछि आऽ जतए इंटरनेटक स्पीड कम छैक वा इंटरनेट महग छैक ओतहु ग्राहक बड्ड कम समयमे ‘विदेह’ केर पुरान अंकक फाइल डाउनलोड कए अपन कंप्युटरमे सुरक्षित राखि सकैत छथि आऽ अपना सुविधानुसारे एकरा पढ़ि सकैत छथि।
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“विदेह” पढबाक लेल देखू-

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टिप्पणी: विदेहक लोगोक संग देल " मानुषिमिह संस्कृताम् " केर सम्बन्धमे। मैथिली भाषा जगज्जननी सीतायाः भाषा आसीत् - हनुमन्तः उक्तवान- मानुषीमिह संस्कृताम्। जखन हनुमान रामक संदेश लऽ सीता लग लंकाक अशोक वाटिका गेलाह तँ सोचलन्हि जे रावण संस्कृत बजैत अछि। यदि हम रामक संदेश संस्कृतमे सीताकेँ देबन्हि तँ ओऽ हमरा रावणक छद्म रूप बुझि संदेह करतीह। हमरा मानुषी आऽ संस्कृत (मानुषीमिह संस्कृताम्) दुनू अबैत अछि, से ओऽ सीताक भाषा मानुषीमे रामक संदेश देलन्हि। वाल्मीकि रामायणक सुन्दर काण्डक ई मानुषी भाषा आजुक मैथिलीक प्राचीनतम लिखित प्रमाण अछि।
विदेह ई-पत्रिकाक सभटा पुरान अंक ( ब्रेल, तिरहुता आ देवनागरी मे ) पी.डी.एफ. डाउनलोडक लेल विदेह आर्काइवमे उपलब्ध अछि। All the old issues of Videha e journal ( in Braille, Tirhuta and Devanagari versions ) are available for pdf download in Videha Archive.

'विदेह' २३२ म अंक १५ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३२)

ऐ  अंकमे अछि :- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१. जगदीश प्रसाद मण्‍डलक  दूटा लघु कथा   कोढ़िया सरधुआ  आ  त्रिकालदर ्शी २.२. नन...