Friday, June 20, 2008

ककरा कहैत छै-- दहेज़

बउवा पुछलक ,
बाबूजी सं,
कहियौ, ककरा,
कहैत छै - दहेज़ ?

बउवा , अहाँ के ,
विवाह में,
जे टाका लैबे,
गाडी लैबे,
घर में रखैबै ,
सबटा समान सहेज,
ई त हक़,
बनैत ऐछ हमर,
लोक कहैत ऐछ - दहेज़॥

मुदा अहाँ के,
छोटकी बहिन के,
विवाह के,
जखन आयत बेर ,
अहि सड़ल,
प्रथा सं, हमरा ,
भ जायत परहेज,
हमहूँ ढोल पीट,क,
गरियायब, आ कहबई,
कतेक लालची ,
ऐछ ई समाज,
माँगैत ऐछ - दहेज़॥

बउवा अखनो,
चकित- अचंभित,
नहीं बूईझ सकल,
ई भेद,
सबके पूछैत,
रहैत छै,
सैद्खैन, ककरा,
कहैत छै _ दहेज़ ?

'विदेह' २२८ म अंक १५ जून २०१७ (वर्ष १० मास ११४ अंक २२८)

ऐ  अंकमे अछि :- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१. डॉ. कैलाश कुमार मिश्र -  गौरी चोरनी ,  गौरी डाईन आ गौरी छिनारि: मधुश्रावणी कथा केर ...