Thursday, May 15, 2008

आहा'क गुस्सा ....

आजुक भाग दौर के जिंदगी मs तनाव ग्रस्त रहब आम बात अछि ! जखन हम सब तनाव ग्रस्त रहैत छलो तs कखनो कखनो गुस्सा ऐब सेहो स्वाभाविक अछि ! लेकिन गुस्सा यदि आदत के रूप ल लीय, तs ओई पर विचार करबा'क चाही ! बार बार गुस्सा करला सs हमरा सब के सेहत पर ओकर बहुत ग़लत प्रभाव परैत अछि ! कनी अपन अरोस परोस मs नज़र दौराबू आहा देखब की जे महानुभाव गुस्सा नै करैत छैथ, ओ बीमार बहुत कम परैत छैथ ! गुस्सा एक प्रकार के भावना अछि ! लेकिन जखन भावना व्यवहार आर आदत मs बदैल जै'य त अपने के साथ - साथ दोसरो पर ओकर ग़लत असर परे लगे'य ! तही लेल जरुरी अछि की अपन गुस्सा के सही वजह कs पहचाने के प्रयाश करी आर ओई पर नियंत्रण राखी

गुस्सा पर नियंत्रण करै लेल जरुरी अछि, आहा अपन बारे मs ठीक स जानी की आहा'क अपन प्रति व्यवहार केहेन अछि !

गुस्सा नियंत्रण करै हेतु किछ टिप्स

*कुनू तरहक समस्या सs लरै के क्षमता राखी आर ओई बात के पता करी की उक्त बात अपने क वाकई मs गुस्सा करै योग्य अछि !

*ओई बात के पता करै के प्रयास करी जै सs अहा'क गुस्सा आबैत अछि

*गुस्सा के समय अपन शरीर खास के क हाव - भाव आर हाथ - पेर के गति विधि के ध्यान राखी

*गुस्सा ऐला पर अपन ध्यान क दोसर पर केंद्रित करै के प्रयाश करी


अई तरह'क छोट - मोट बात कय ध्यान मs राखैत अपने अपन गुस्सा स निजात पैब सके छलो ! गुस्सा के वक्त कुनू तरहक प्रतिक्रिया स बच्बाक चाही ! ओई सs लगभग सब समस्या खुदे समाप्त भो जेत

नोट : आदमी के भावना (सोच),विचार आर आदत मs अंतसर्वबंध होईत अछि ! विचार, सोच कs प्रभावित करैत अछि आर सोच सs आदत बदलैत छले ! दोसर पहलू पर विचार करल जे तय अहो के आदत विचार मs आर फेर विचार भावना मs परिवर्तन आने छले !

'विदेह' २२५ म अंक ०१ मई २०१७ (वर्ष १० मास ११३ अंक २२५)

ऐ  अंकमे अछि :- १. संपादकीय संदेश २. गद्य २.१. १. राजदेव मण्‍डल -  दूटा बीहैन क था २. रबीन्‍द्र नारायण मिश...