Wednesday, December 03, 2008

देश प्रेम मे आस्था-मदन कुमार ठाकुर

शरद ऋतु के महिना छल तिथि पुर्णमासिये के दिन छल़ आ तारिक सेहो ११ छल संग मंगल दिन सेहो छल। सब तरहे शुभ लग्न छल। हम बिमार अबस्थामे छलहुँ ताही द्वारे हम घरे पर रही। ठकन काका भोजन पर बैसले छलथि। हम दलान पर कुर्सी पर बैसल छलहुँ। बाबासँ रामायण आ महाभारतक संर्दभमे बात चित करैत छलो ! की ताबे में ऐगो जिपसी आबी के दलान के आगु में ठार भगेल हम दौर के देखय लेल गेलहुँ ओहीमे सँ चारि गो पुलिस हाथमे एगो पर्चि लके जिपसी के गेट से बाहर ऐला हमरा त बहुत डर भगेल जे हमरा पुलिस पकैर लेत ताही द्वुवरे हम ओतहि से धीरे धीरे ससरी के भागय लागलो की ताबे में ऐगो पुलिसबा हमरा पुछल्क ऐ लड़का ठकन ठाकुर का घर कौन हैं ? हम अपन मन में सोच्लो इ त हमरा काका के पकरैय लेल अयल हन हम पुलिस के दोसर के घर देखा देयत छियक आ ठकन काका के कहबैन जे ओ कतौ भैग जेता हम पुलिस के दोसर के घर देखा देलिय़ पुलिस ओहिठाम जेकs पुछ ताछ केलक आ १० मिनट के बाद फेर हमरे दलान पर आबिगेल आ बाबा से पुछलकैन जे ठकन ठाकुर को बुलाईये उसके नाम से वारन्ट आया हें! बाबा त अकचक्‍ति भगेला जे वारन्ट ककरा कहैत छै ! वारन्ट परचि जे छल से पुलिस हमरा बाबा के हाथ में पकरा देलकैन ! बाबा हमरा जोर से आबाज देलाइर्थि जे ऐमहर कनी आबह, इ वारन्ट पर्चि के पढ़ के सुनाबह , हम डराइर्ते डराइर्ते दलान पर ऐलो, वारन्ट पर्चि हम हाथ में लेलो देखलो इ अंग्रेजी में लिखल गेल अछि हम ओही के नही पैढ़ सकलो क्‍याकी हम ओही समय में दुसरी कक्षा में पढैते छलो ! ऐना त गाम घर में के ऐतेक अंग्रेजी पर ध्य्यान दैयत छैक ! ऐतबा में ठकन काका सेहो दलान पर आबी गेलाइर्थ आ पुलिस से कहलखिन जे हमही ठकन ठाकुर छी , सहाब हमरा कि कह चाहैत छी ? पुलिस हाथ में वारन्ट पर्चि के लsके सब के सामने पढैय लागल सब कियो धय्यान से सुनय लागल .......


To,

The Dear Public


With due respects it is submitted that according to 1991 census your family was having 19 members out of which 11 are sons and 6 are daughters. Now Bihar Military Control Board, Patna needs urgently 4 of your sons. For the sake of the country and dedication towards the home land, as a true patriot, you are requested to surrender 4 of your sons for the service to the country.


Jai Hind Jai Bharat

BMC (B) Patna

पुलिसबा अंग्रेजी में सबटा धुरघार पढ़ने चली गेल मुदा ओकर मतलब गाम में कियोक नही बुझलक ! डैरते - डैरते ठकन काका पुलिस से कहलखिन सहाब हमरा मैथिली में बता दिय जे ऐकर मतलब कि होइत अछि ? पुलिस के मैथिली बाजल नही होइत छलये तयो ओ कोसिस के कs हिन्दीये में ठकन काका से वर्तालाप केलकैन ! पुलिस - आप के शादी के कितने वर्ष हुवा है ? ठकन काका २८ वर्ष पुलिस - आपने अपने घर की जनसंख्याँ पे कंट्रोल क्यों नही किये ? ठकन काका – सहाब हम अपन जनानी से कहलये जे तु छः महिन एक साल के लेल नैहर चली जो लेकिन ओ नही गेल , कहैत रहीगेल जे हमर माय बाबु बहुत गरीब अछी ! ओही मे हम की करब ? पुलिस - ठाकुर जी घबराने कि कोई बात नही है , आपके घर परिवार आज मंगल दिन से सदा के लिये मंगल मय रहेगा ! ठकन काका – सहाब जी से अहा कोना बुझैत छियेक ! पुलिस – ठाकुर जी मैं बिहार बिहार मिलेट्री संचालक पटना से आया हूँ ! कंट्रोल बोड़ के तरफ से आपके चार पुत्रो का बुलाबा हैं ! इन चारो को सिपाही फैज में नौकरी मिलेगा और तीन हजार रूपैया प्रतिमाहा के हिसाब से तंखा मिलेगा ! जिस से आपके बांकी बच्चे अछे से अछे स्कुल कालेज में पढ़ सकेगा और देश प्रेम में आस्था बनाये रखेगा ! ई बात सुनी के ठकन काका झटसन अपन बरका बेटा राम के कहलखिन जे दौर के भैरव स्थान से ताबे हलवाई के दुकान से उधारी पॉँच किलो मोती चुर के लडू लेने आउ आ पहिने भगवती के भोग लगाउ आय मंगल दिन सेहो छी भगवती सदा मंगल करती ! तखने चारू भाई राम , श्याम, घनश्याम आ बलराम बी एम पी केम्प - ६ मुजफ्‍फरपुर चली गेला ट्रेनिंग पर ! ऐमहर गाम में सातो भाई आ छबो बहिन धीरे धीरे स्कुल आ कालेज जाय लागला पढ़ लिख के सब कियो निक निक पोस्ट पर पहुच गेला ! कियो सीए त कियो डाक्‍टर आ इनजिनीयर , सब तरहे ठकन काका के नाम रोशन करैय लगला ! ठकन काका के चारू तरफ्‍ से जान पहचान हुअ लगलैन , नेता मुखिया , पत्राकार , आ मिडिया बाला सब रोज कुन्नू नै कुन्न् बहाने हुन्का से पुछ ताछ करैय लेल आबैय लगलैन ! कियाकी ठकन काका के आय इन्कम लाखो , करोरो मेंs आबैय लगलेन ! ज्यो - ज्यो समय बितल गेल ताही अनुसार ठकन काका के सब बेटा आ बेटी के विवाहा दान होइत गेलैन ! कतेक में दहेज लके त कतेको मs बिना दहेज दके , सब तरहे सब काज धन्धा ठिक ठाक से चलैत छलैन ! ऐक दिन अचनक हुन्का घर पर ऐगे एमबुलेन्स आबिगेल सब लोक धीरे धीरे देखय लेल आब लागल , देख के सब चुपे चाप अपन घर दिस जाइर्ते रही जायत छल ! अही दृश्य के देखैक लेल ठकन काका सेहो गेला देखलखिन ओही में एगो लास जे हुन्कर माझिल बेटा श्याम के छलैन ! देख के ठकन काका बेहोश भगेला ! एमबुलेन्स के संग दुगो सिपाही और छल तकरा से सब कियो बात कारैय लागल , सिपाही कहलकैन जे हिनकर मौत कारगिलक लराई में भगेलाइन तै हम सब हिन्कर लास लके हिन्कर परिवार कए समरति करैय लेल आयल छी ! ठकन काका के समाज आ गाम घर में जतेक लोक सब छल सब कियो अंतिम संस्कार में भाग लेलैथ क्‍याकी ओ देश रक्षक शहीद पुत्र छला ! समय बितल गेल ठकन काका आब सेहो ७२ वर्ष के भगेल छला आ नैत आ नातीन के सेहो भरमार भगेल छलैऩ ! आइके समय मे हुनक परिवार के जनसंख्‍या ६८ सदश्य के भगेलेन तही उपलक्ष्य में आय १५ अगस्त के दिन , ठकन काका अपन सब परिवार के जतेक रिस्तेदारी नातेदारी सर समाज में जतेक भाइ बन्धु छल सब के ऐतबा नही सब नेता , मुखिया , शिक्षक गन आर जतेक आैफिसर सब छलैथ ! सब के आमंत्राण केने छलैथ , ठकन काका के मुख से ----- हम आई सब देश वासि के प्रति '' देश प्रेम में आस्थ '' बनाबैय या राखैय के लेल सब के प्राेतसाहन दैयत छी जे अपन देश अपन अधिकार अपन कर्त्‍वय अपन आत्‍म समान केवल देश प्रेम में आस्था रहला के बादे भेटैयत छैक ! जय हिन्द जय भारत , जय मैथिल जय मिथिला अहि अनुसारे सब नेता मुखिया, आर जतेक अभिवावक गन छलैथ सब कियो अपन अपन मुखारबिन्द से देश प्रेम में आस्था के लेल भाषन केलाइर्थ आ राष्ट्र् के मान बधेलाईथ आ देश भक्‍ति गीत से सेहा देश के सम्मान केलैथ ....


ला ला ----- ला ला


तिरंगा लहरे जो धीरे - धीरे


जय हिंद बोलू रे मैं धीरे - धीरे - २


सारे नेता जय हिंद बोले - २


हो हो ------ ला ला ------



तुम्ही मेरे देश का गौरव हो


तुम्ही मेरा देश का अभिमान हो


तुम्ही मेरा देश का भविष्य हो


तुम्ही मेरा देश का उज्जवल रूप हो


मेरे साथी हो तुम, मेरे सहारे हो तुम - २


बोले सारे बच्चे धीरे - धीरे


बोले सारे शिक्षक धीरे - धीरे हाँ - २


मेरा ये तिरंगा लहराता रहे


तिरंगा लहरे जो धीरे धीरे हिंद जय बोलू रे मैं धीरे - धीरे - २


सारे नेता जय हिंद बोले - २



हो हो ----- ला ला


१८५७ से आजादी का नारा था


१९४२ को भारत छोरो आन्दोलन था


१९४७ को देश मेरा आजाद हुआ


सारे देश वासी मिलके नारा दिया


मेरा ये तिरंगा लहराता रहे


तिरंगा लहरे जो धीरे - धीरे, जय हिंद बोलू रे मैं धीरे - धीरे - २


सारे नेता जय हिंद बोले - २



हो हो ----- ला ला


महात्मा गाँधी जैसे अहिंसा वादी थे


सुभाष - भगत जैसे क्रांति कारी थे


आम्बेडकर जैसे राईटर था


मोती और शास्त्री जैसे लीडर था


मेरा गौरव थे वो मेरा अभिमान थे वो - २


गाये गुणगान उनके धीरे - धीरे


गाये गुणगान वो भी धीरे - धीरे


मेरा ये तिरंगा लहराता रहे


तिरंगा लहरे जो धीरे - धीरे, जय हिंद बोलू रे मैं धीरे - धीरे - २


सारे नेता जय हिंद बोले - २



जय हिंद, जय भारत, जय मैथिली, जय मिथिला !!

मदन कुमार ठाकुर, कोठिया पट्टीटोल, झंझारपुर (मधुबनी) बिहार - ८४७४०४,

मोबाईल +919312460150 , ईमेल - madanjagdamba@rediffmail.com

13 comments:

  1. बहुत निक प्रस्तुति

    अहिना लिखैत रहू आ मिथिला के नाम रोशन करैत रहू !

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  2. तिरंगा लहरेया धीरे -धीरे , जय हिन्द बजैत छी हमहुँ धीरे २
    जय हिन्द , जय भारत - जय
    मैथिल ,जय मिथिला

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  3. मदनजी, मैथिल आर मिथिलामे अहाँ अपन रचनासँ एहि ब्लॉगकेँ सुवासित करैत रहैत छी । अहाँसँ आर ढेर रास रचनाक भविष्यमे सेहो आशा रहत।

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  4. bad nik likhait chhi madanji

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  5. ee blog te din par din chandrama jeka badhal ja rahal achi, kichu aan blog me chandramak ghatanti dekhal ja rahal achi, muda etay mithila aar maithil blog me poornima sada rahat se vishvas achhi,

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  6. ee blog nirantar rachnatmak aa navin rachna se poorna bujhi me abait achhi, matik sugandhik sang

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  7. utkriskt rachna sabhak bhadar achi ee site, parishramak parinam sarvada nik hoit achi, rang roop me seho utkrishta aayal acchi rachane jeka.

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  8. बहुत - बहुत धन्यवाद पाठक गन के जे ओ अपन किमती व्क्त हमर रचना में देलैन , हम अपनेक सबक के अभारी छी ------
    जय मैथिल जय मिथिला

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  9. बहुत निक प्रस्तुति अछि अहिना अपन निक निक रचना प्रस्तुत करैत रहब से आशा अछि !

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  10. Anonymous6:15 PM

    To,The Dear Public
    With due respects it is submitted that according to 1991 census your family was having 19 members out of which 11 are sons and 6 are daughters. Now Bihar Military Control Board, Patna needs urgently 4 of your sons. For the sake of the country and dedication towards the home land, as a true patriot, you are requested to surrender 4 of your sons for the service to the country.
    Jai Hind Jai BharatBMC (B) Patnaपुलिसबा अंग्रेजी में सबटा धुरघार पढ़ने चली गेल मुदा ओकर मतलब गाम में कियोक नही बुझलक
    bahut shundar rachna madan ji

    gopal ji jha

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  11. ARVIND KUMAR3:55 PM

    Ahank ke ee rastriy geet hamra bahut nik lagal ,Asha Achhi ahina likh ka pathak gan ke Aakrshit karait rahi ,

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'विदेह' २३२ म अंक १५ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३२)

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