Sunday, November 23, 2008

हर आ’ बरद

मोन गेल भोथियायल,
जोति बरद सोचिमे पड़लहुँ,
एतय-ओतय केर बात,
हर जोतने भेल साँझ,
हरायल बरद ताकी चारू कात।
कहबय ककरा ई गप्प,
सुनि हँसत हमरा पर आइ,
मोने अछि भोथियायल,
अप्पन सप्पत कहय छी भाय।

10 comments:

  1. मोन गेल भोथियायल,
    जोति बरद सोचिमे पड़लहुँ,
    एतय-ओतय केर बात,
    हर जोतने भेल साँझ,
    हरायल बरद ताकी चारू कात।
    कहबय ककरा ई गप्प,
    सुनि हँसत हमरा पर आइ,
    मोने अछि भोथियायल,
    अप्पन सप्पत कहय छी भाय।

    badd nik lagal, har jotait jotait barad hara gel,

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  2. hamro mon bhothiyayal achhi, har jotait kal barad harebak varnan samichin

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  3. bah, gam mon pari gel, mansik sthitik nik varnan

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  4. nik blog achhi e, nirantar nik pratuti padhbak lel bhetait achhi,

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  5. बहुत निक प्रस्तुति

    अहिना लिखैत रहू आ मिथिला के नाम रोशन करैत रहू !

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  6. ee blog nirantar rachnatmak aa navin rachna se poorna bujhi me abait achhi, matik sugandhik sang

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  7. teekshana kavita, chotan muda ghav gambhir

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'विदेह' २३२ म अंक १५ अगस्त २०१७ (वर्ष १० मास ११६ अंक २३२)

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